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- महासमुन्द / सत्र 2026-27 में तकनीकी शिक्षा संस्थाओं में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए तकनीकी शिक्षा संचालनालय द्वारा ऑनलाइन काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके तहत डिप्लोमा इंजीनियरिंग के नियमित एवं लेटरल एंट्री पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन पंजीयन 3 सितंबर 2026 से प्रारंभ होगा।शासकीय पॉलीटेक्निक महासमुन्द, बरोंडा बाजार में संचालित डिप्लोमा इंजीनियरिंग के सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग एवं कंप्यूटर साइंस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थी 3 से 6 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन पंजीयन करा सकते हैं। प्रवेश के लिए मेरिट सूची 7 सितंबर 2026 को जारी की जाएगी। मेरिट सूची में शामिल अभ्यर्थियों को 8 सितंबर 2026 को प्रातः 10 बजे आवश्यक दस्तावेजों के साथ संस्था में उपस्थित होना अनिवार्य होगा। सीटें रिक्त रहने की स्थिति में मेरिट सूची के अनुसार इच्छुक अभ्यर्थी 9 सितंबर 2026 को दोपहर 1.30 बजे संस्था में उपस्थित होकर प्रवेश प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं।प्रवेश संबंधी विस्तृत जानकारी, पात्रता, ऑनलाइन आवेदन एवं काउंसलिंग प्रक्रिया तथा रिक्त सीटों की जानकारी के लिए अभ्यर्थी तकनीकी शिक्षा संचालनालय की वेबसाइट www.cgdte.admissions.nic.in एवं www.dte.cg.gov.in का अवलोकन कर सकते हैं।
- महासमुंद / जिले के विकासखंड बागबाहरा के ग्राम खेमड़ा में भारी वर्षा के कारण लगभग 20 वर्ष पुरानी सड़क की पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई थी। पुलिया के टूटने से ग्रामीणों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों द्वारा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई गई।मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया। कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह के निर्देश पर पीएमजीएसवाई विभाग द्वारा तत्काल स्थल का निरीक्षण कराया गया तथा अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त पुलिया का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ की।कलेक्टर के निर्देशानुसार कार्यपालन अभियंता पीएमजीएसवाई श्री आशीष कुलदीप एवं संबंधित तकनीकी अमले की निगरानी में पुलिया के संधारण एवं मरम्मत का कार्य कराया गया। आवश्यक रखरखाव कार्य पूर्ण होने के बाद सड़क पर आवागमन पुनः सुचारु हो गया है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से दर्ज शिकायत पर त्वरित कार्रवाई किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की है।
- -पश्चिम बंगाल के कौस्तुव कुंडू बने विजेता, छत्तीसगढ़ के यशद बम्बेश्वर द्वितीय और महाराष्ट्र के केदार ओंकार तृतीय स्थान पर-12 राज्यों के 164 खिलाडि़यों ने लिया हिस्सा, विभिन्न आयु एवं श्रेणियों में खिलाडि़यों ने दिखाया दमखम-शतरंज संयम, एकाग्रता और अनुशासन की सीख देता है: विधायक श्रीमती रायमुनी भगतरायपुर। जशपुर में पहली बार आयोजित ‘चेकमेट एट जशपुरदृअखिल भारतीय ओपन फिडे रेटेड शतरंज प्रतियोगिता 2026’ का सफलतापूर्वक समापन हुआ। प्रतियोगिता में पश्चिम बंगाल के कौस्तुव कुंडू ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ओवरऑल विजेता का खिताब अपने नाम किया। छत्तीसगढ़ के यशद बम्बेश्वर ने दूसरा तथा महाराष्ट्र के केदार ओंकार ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।पुरानी टोली स्थित कम्युनिटी हॉल में 29 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित इस चार दिवसीय प्रतियोगिता में देश के 12 राज्यों से 164 खिलाडि़यों ने हिस्सा लिया। खिलाडि़यों ने अपनी रणनीतिक क्षमता, एकाग्रता और उत्कृष्ट खेल कौशल का प्रदर्शन करते हुए प्रतियोगिता को रोमांचक बनाया।समापन समारोह में मुख्य अतिथि विधायक श्रीमती रायमुनी भगत सहित अन्य अतिथियों ने विभिन्न आयु वर्ग एवं श्रेणियों के विजेता और उपविजेता खिलाडि़यों को ट्रॉफी एवं पुरस्कार राशि के चेक प्रदान कर सम्मानित किया। प्रतियोगिता का आयोजन जिला प्रशासन, खेल विभाग एवं जशपुर जिला शतरंज संघ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।विधायक श्रीमती रायमुनी भगत ने प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन, खेल विभाग एवं शतरंज संघ को बधाई दी। उन्होंने सभी खिलाडि़यों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि शतरंज केवल मनोरंजन का खेल नहीं है, बल्कि यह संयम, एकाग्रता, अनुशासन और बुद्धिकौशल विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों का सामना बुद्धिकौशल, अनुशासन और संयम के साथ करते हुए समय की कद्र करने वाला व्यक्ति सफलता की ओर आगे बढ़ता है। शतरंज का खेल भी हमें यही महत्वपूर्ण सीख देता है।प्रतियोगिता के विभिन्न वर्गों में खिलाडि़यों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। सीनियर सिटीजन वर्ग में जवाहरलाल गुप्ता विजेता और सेनगुप्ता दीपांकर उपविजेता रहे।सरगुजा डिवीजन महिला वर्ग में सिन्हा कशिश ने प्रथम और श्वेता रानी ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। सरगुजा डिवीजन पुरुष वर्ग में रुद्राक्ष सिंह विजेता और यशवंत सिंह उपविजेता रहे।जशपुर महिला वर्ग में हेमलता प्रजापति ने प्रथम तथा प्रेमलता साहू ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। जशपुर पुरुष वर्ग में एलान लकड़ा प्रथम और श्याम सिंह द्वितीय रहे।30 वर्ष से अधिक महिला वर्ग में आरती पावले प्रथम तथा लक्ष्मी शुक्ला द्वितीय रहीं। अंडर-15 वर्ग में ईशान सैनी प्रथम और गर्व केरकेट्टा द्वितीय रहे। अंडर-13 वर्ग में शिल्प कुमार घोड़ेश्वर ने प्रथम तथा विराट यादव ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।अंडर-11 वर्ग में वी. विराट अय्यर प्रथम और कुशाग्र दीक्षित द्वितीय रहे। अंडर-09 वर्ग में आद्विक भूषण प्रथम तथा हृदान मावलंकर द्वितीय रहे।महिला खिलाडि़यों की विभिन्न श्रेणियों में एफ-15$ वर्ग में प्राची यादव प्रथम और भगत कोमल द्वितीय रहीं। एफ-15 वर्ग में अभिश्री वत्स ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। एफ-13 वर्ग में नैना भगत प्रथम रहीं। एफ-11 वर्ग में सावी गौरी प्रथम तथा अनिका रेड्डी गोलुगुरी द्वितीय रहीं। एफ-09 वर्ग में परीक्षिता दुबे प्रथम तथा श्रीनिका रेड्डी गोलुगुरी द्वितीय रहीं।अखिल भारतीय स्तर की इस प्रतियोगिता के सफल आयोजन से जशपुर में शतरंज खेल को नई पहचान मिली है। प्रतियोगिता ने स्थानीय खिलाडि़यों को देशभर से आए प्रतिभाशाली खिलाडि़यों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का अवसर देने के साथ जिले में खेल संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री गंगाराम भगत, कलेक्टर श्री रोहित व्यास सहित खिलाड़ी, शतरंज प्रेमी एवं बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
- -योजना की सहायता राशि से पोषण संबंधी जरूरतें हुईं पूरी, मां और शिशु दोनों स्वस्थरायपुर / प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को मातृत्व के दौरान आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य और पोषण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से मिलने वाली सहायता राशि से महिलाओं को गर्भावस्था एवं प्रसव के बाद पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत मिल रही है। अम्बिकापुर निवासी श्रीमती अन्नू तिवारी भी योजना से लाभान्वित होकर अपने मातृत्व काल को सुरक्षित और बेहतर तरीके से पूरा कर रही हैं।अन्नू तिवारी ने बताया कि पहली बार गर्भवती होने पर उन्हें आंगनवाड़ी केंद्र के माध्यम से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की जानकारी मिली। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के मार्गदर्शन में उन्होंने आवश्यक प्रपत्र भरकर योजना का लाभ लिया। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें चरणबद्ध रूप से आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। उन्होंने बताया कि योजना के तहत सबसे पहले उन्हें एक हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई। इसके बाद दो हजार रुपये की सहायता मिली। प्रसव के बाद शिशु को निर्धारित तीन टीके लगने के पश्चात उन्हें पुनः दो हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई। इस प्रकार योजना के अंतर्गत प्राप्त आर्थिक सहायता का उपयोग उन्होंने गर्भावस्था और प्रसव के बाद अपने खान-पान तथा पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में किया।अन्नू तिवारी ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होता है। योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उन्हें अपने खान-पान और स्वास्थ्य का बेहतर ध्यान रखने में मदद की। प्रसव के बाद भी इस राशि से शिशु के पोषण और देखभाल से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत मिली। उन्होंने कहा कि योजना से प्राप्त सहायता उनके परिवार के लिए उपयोगी साबित हुई। आर्थिक सहयोग मिलने से मातृत्व के दौरान जरूरी पोषण और देखभाल पर ध्यान केंद्रित करना आसान हुआ। वर्तमान में वे और उनका शिशु दोनों स्वस्थ हैं।अन्नू तिवारी ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के लिए उपयोगी पहल है। मातृत्व के महत्वपूर्ण दौर में मिलने वाली आर्थिक सहायता से परिवार को अतिरिक्त संबल मिलता है और महिलाओं को अपने स्वास्थ्य तथा बच्चे के पोषण पर बेहतर ध्यान देने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि योजना के माध्यम से मिलने वाली सहायता राशि ने उनके मातृत्व अनुभव को और सुरक्षित बनाने में सहयोग दिया। अन्नू तिवारी ने अन्य पात्र महिलाओं से भी योजना का लाभ लेने और गर्भावस्था के दौरान अपने स्वास्थ्य एवं पोषण का विशेष ध्यान रखने की अपील की।
- -उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने ली समीक्षा बैठकरायपुर / राज्य में उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में गति लाने के उद्देश्य से आज उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने विभागीय अधिकारियों की मंत्रालय में समीक्षा बैठक ली। बैठक में 1 जुलाई 2026 को लिए गए निर्णयों पर अब तक हुई कार्यवाही का बिंदुवार क्रियान्वयन की समीक्षा की गया। मंत्री श्री वर्मा ने समयबद्ध कार्यों में देरी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए प्रशासनिक ढिलाई को तुरंत दूर करने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के सख्त निर्देश दिए। इस बैठक में सचिव श्री अविनाश चंपावत, आयुक्त श्रीमती रीता यादव सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।बैठक के दौरान राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में सत्र 2026-27 के तहत जारी प्रवेश प्रक्रिया का जायजा लिया गया। मंत्री श्री वर्मा ने सहायक प्राध्यापक के 700 पदों पर जारी भर्ती प्रक्रिया की रुकावटों को तत्काल दूर करने तथा प्राध्यापकों के 595 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा। स्नातक प्राचार्य के पदों पर पदोन्नति की पेंडेंसी पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने 15 सितंबर 2026 तक समस्त कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही अपात्र होने के बावजूद पदोन्नति पाने वाले प्राध्यापकों की जांच कर उन पर की गई कार्यवाही की भी समीक्षा की गई।वरिष्ठ और प्रवर श्रेणी वेतनमान के प्रकरणों में हो रही देरी के कारण सहायक प्राध्यापकों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, जिस पर मंत्री ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने विभाग में लंबित न्यायालयीन प्रकरणों और याचिकाओं का ब्योरा मांगते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 1 अक्टूबर 2026 तक सभी विचाराधीन प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण कर आदेश जारी किए जाएं। इसके अतिरिक्त, शिक्षकों की पीएच.डी. अनुमोदन की प्रगति और मंत्री कार्यालय द्वारा भेजी गई शिकायतों पर की गई कार्यवाही का विस्तृत विवरण तलब किया गया।मंत्री श्री वर्मा ने समीक्षा के दौरान पिछली बैठक में मांगी गई बजट संबंधी अधूरी जानकारी पर असंतोष जताया गया। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रत्येक शासकीय महाविद्यालय को आवंटित बजट की महाविद्यालयवार पूर्ण सूची तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। वहीं उच्च शिक्षा में गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से महाविद्यालयों में पदस्थ अतिथि व्याख्याताओं के शिक्षकीय कार्यों का नियमित आकस्मिक निरीक्षण करने का निर्णय लिया गया। छात्र-छात्राओं के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उच्च शिक्षा मंत्री ने महाविद्यालयों में सीट वृद्धि की प्रक्रिया को सुचारू बनाने हेतु नया कैलेंडर लागू करने का सुझाव दिया। इसके तहत शासकीय व निजी महाविद्यालयों से सीट वृद्धि के प्रस्ताव दिसंबर तक मंगाकर जनवरी तक स्वीकृतियां जारी की जाएंगी, ताकि आदेशों में होने वाली त्रुटियों से महाविद्यालयों को मुक्ति मिल सके। लॉ और बी. एड. जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए 31 दिसंबर तक प्राप्त होने वाले ऑनलाइन आवेदनों का निराकरण समय सीमा के भीतर करने के निर्देश दिए गए।इसके साथ ही, 4-वर्षीय बी.एड. पाठ्यक्रम हेतु एन.सी.टी.ई. (NCTE) दिल्ली की नैक ग्रेडिंग शर्तों पर चर्चा के लिए एक विशेष टीम गठित कर दिल्ली भेजने और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमानुसार प्रति सेक्शन 60 विद्यार्थियों के अनुपात को समायोजित करने के लिए अभी से तैयारियां शुरू करने के निर्देश जारी किए गए।
- -एक लाख रुपये के बॉन्ड से बेटी की शिक्षा और भविष्य को मिला आर्थिक संबलरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा बेटियों के सुरक्षित भविष्य और उनकी शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित नोनी सुरक्षा योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। योजना के तहत पात्र बालिकाओं के भविष्य के लिए आर्थिक प्रावधान किया जा रहा है, जिससे परिवारों को बेटियों की शिक्षा और आगे की जरूरतों को लेकर भरोसा मिल रहा है। अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मेंड्राकला निवासी श्रीमती कौशिल्या रजवाड़े भी इस योजना से लाभान्वित होकर अपनी बेटी के भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं।कौशिल्या रजवाड़े ने बताया कि उनके पति श्री राजेश कुमार रजवाड़े कृषि कार्य करते हैं और उनके तीन बच्चे हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपनी बड़ी बेटी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नोनी सुरक्षा योजना का लाभ लेने का निर्णय लिया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के सहयोग से आवेदन प्रक्रिया पूरी की गई और आवेदन ऑनलाइन पंजीकृत किया गया।आवेदन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उनकी बड़ी बेटी का नोनी सुरक्षा योजना में पंजीयन हुआ और उन्हें एक लाख रुपये का बॉन्ड प्राप्त हुआ। कौशिल्या ने बताया कि यह बॉन्ड एलआईसी बीमा के माध्यम से प्रदान किया गया है। योजना की निर्धारित शर्तों के अनुसार बालिका के 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने तथा 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद निर्धारित राशि प्राप्त होगी। इससे बेटी की आगे की शिक्षा और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए आर्थिक आधार तैयार होगा।कौशिल्या के लिए नोनी सुरक्षा योजना केवल आर्थिक सुरक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि बेटी के उज्ज्वल भविष्य का भरोसा भी है। उन्होंने बताया कि कृषि कार्य से होने वाली आय के बीच बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरतों को पूरा करना कई बार चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में बेटी के नाम पर उपलब्ध आर्थिक सुरक्षा से भविष्य की चिंता कम हुई है। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत मिलने वाली राशि भविष्य में बेटी की उच्च शिक्षा तथा अन्य महत्वपूर्ण जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित होगी। 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने और 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद मिलने वाली राशि बेटी के आगे के जीवन की मजबूत शुरुआत में सहायक होगी और परिवार पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को भी कम करेगी।नोनी सुरक्षा योजना बेटियों के भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने के साथ परिवारों में बेटियों की शिक्षा को लेकर सकारात्मक सोच को बढ़ावा दे रही है। योजना के माध्यम से बालिकाओं के भविष्य के लिए पहले से आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होने से अभिभावकों को उनकी शिक्षा और भविष्य से जुड़े निर्णय लेने में संबल मिल रहा है।कौशिल्या ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूरी होने से उन्हें योजना की जानकारी समझने, आवश्यक दस्तावेज तैयार करने और ऑनलाइन पंजीयन कराने में सुविधा मिली। विभागीय स्तर पर मिले सहयोग से योजना का लाभ प्राप्त करना उनके लिए आसान हुआ।कौशिल्या रजवाड़े ने नोनी सुरक्षा योजना के लिए छत्तीसगढ़ शासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि योजना से उन्हें अपनी बेटी के भविष्य को लेकर एक मजबूत भरोसा मिला है। उन्होंने कहा कि परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित होने के बावजूद बेटी के भविष्य के लिए पहले से आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध होना बड़ी राहत है। उन्होंने कहा, “अब बेटी के भविष्य की चिंता पहले जैसी नहीं रही। उसके नाम पर आर्थिक सुरक्षा होने से हमें भरोसा है कि आगे उसकी पढ़ाई और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। शासन की यह पहल हम जैसे परिवारों के लिए बहुत उपयोगी है।” कौशिल्या रजवाड़े ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नोनी सुरक्षा योजना बेटियों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण पहल है। योजना से मिली आर्थिक सुरक्षा ने उनके परिवार को अपनी बेटी को बेहतर अवसर देने का विश्वास दिया है।
- -प्रति एकड़ कमाया 1.07 लाख रुपये का शुद्ध लाभरायुपर / पारंपरिक खेती से इतर आधुनिक तकनीकों और उद्यानिकी फसलों को अपनाने से किसानों की तकदीर बदल रही है। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के विकासखंड बागबाहरा अंतर्गत ग्राम टेंगराही के कृषक श्री नारायण प्रसाद वर्मा ने इसे सच कर दिखाया है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के सहयोग से करेले की व्यावसायिक खेती अपनाकर वे न केवल अपनी आय दोगुनी कर चुके हैं, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गए हैं।युवा किसान की करेले की खेती से किस्मत चमक गई हैए जिसके तहत उन्हें लागत के हिसाब से अच्छा मुनाफा मिल रहा हैं, जिसके लिए वह कई सालों से करेले की खेती कर लाखों रुपए मुनाफा कमा रहे हैं1.06 हेक्टेयर कृषि भूमि के मालिक श्री वर्मा पहले केवल धान की पारंपरिक खेती करते थे, जिससे सीमित आय प्राप्त होती थी। आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत सब्जी क्षेत्र विस्तार योजना का लाभ लिया। योजना के तहत शासन से उन्हें सब्जी क्षेत्र विस्तार हेतु 1 हेक्टेयर क्षेत्र में करेले की खेती के लिए 24,000 का अनुदान मिला। सपोर्ट सिस्टम स्थापना हेतु 0.50 हेक्टेयर क्षेत्र में सपोर्ट सिस्टम लगाने के लिए 5,000 की राशि सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से उनके खाते में हस्तांतरित की गई।श्री वर्मा ने खेती में नवाचार करते हुए ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई), प्लास्टिक मल्चिंग और आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग किया। इससे पानी की भारी बचत हुई और फसल की गुणवत्ता व उत्पादन में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि करेले की उन्नत और आधुनिक तकनीकों और मचान विधि से खेती करके किसान कम समय में लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। श्री वर्मा ने बताया कि खेत में नमी बनाए रखने और खरपतवार रोकने के लिए मल्चिंग शीट और पानी की बचत के लिए ड्रिप इरिगेशन, टपका सिंचाई का उपयोग किया जाता है।करेले की खेती कर रहे युवा किसान नारायण प्रसाद वर्मा ने बताया कि पहले हम पारंपरिक खेती करते थे, पर इसमें उन्हें अधिक मुनाफा नहीं हो पा रहा था। इसके बाद उन्होंने करेले की खेती की शुरुआत की, जिसमें उन्हें अच्छा मुनाफा हुआ। उन्होंने तकनीकी प्रबंधन और उचित देखरेख के कारण उन्हें प्रति एकड़ करेले की फसल से लगभग 12 टन उत्पादन हासिल हुआ। बाजार में फसल का सही मूल्य मिलने पर सभी लागत और खर्चों को निकालकर उन्हें एक लाख 7 हजार रूपए का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है। इस सफलता से न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है, बल्कि कृषि के प्रति उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
- -महतारी वंदन की राशि से सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश कर संवार रहीं बेटी का कलरायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की श्महतारी वंदन योजनाश् न केवल महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान कर रही है, बल्कि ग्रामीण अंचलों में सुदूर परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करने का सशक्त जरिया भी बन रही है। नारायणपुर जिले के कठिन भौगोलिक क्षेत्र अबूझमाड़ (विकासखंड ओरछा) के ग्राम कोहकामेटा की रहने वाली श्रीमती सुकनी नुरेटी ने इस योजना का रचनात्मक उपयोग कर महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल पेश की है। सुकनी नुरेटी को महतारी वंदन योजना के तहत हर माह मिलने वाली वित्तीय सहायता ने न केवल छोटी-मोटी जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि उनमें बचत की सोच भी विकसित की है। उन्होंने इस राशि का उपयोग केवल दैनिक खर्चों तक सीमित न रखकर, अपनी बेटी के सुनहरे और सुरक्षित भविष्य की नींव रखने में किया है। वे हर महीने मिलने वाली सहायता राशि में से बचत कर बेटी के नाम श्सुकन्या समृद्धि योजनाश् के खाते में नियमित रूप से पैसे जमा कर रही हैं। सुकनी नुरेटी का मानना है कि बेटी की उच्च शिक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए आज से ही योजनाबद्ध बचत बेहद जरूरी है। वे कहती हैं कि महतारी वंदन योजना ने मुझे अपने फैसले खुद लेने का आत्मविश्वास दिया है। आज की यह छोटी-छोटी बचत कल मेरी बेटी की पढ़ाई और उसके सपनों को पूरा करने में बहुत काम आएगी।अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली सुकनी की यह पहल इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि शासकीय योजनाओं का सही दिशा में किया गया उपयोग कैसे पूरे परिवार की आर्थिक सुरक्षा बदल सकता है। महतारी वंदन योजना से मिली वित्तीय स्वायत्तता को सुकन्या समृद्धि योजना के साथ जोड़कर सुकनी नुरेटी आज अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई हैं।
- -आकांक्षा स्व-सहायता समूह को मिला एक लाख रुपये का ऋण, किराना-सिंगार दुकान से बढ़ी आमदनी-स्वरोजगार से मजबूत हुई महिलाओं की आर्थिक स्थिति, बच्चों की शिक्षा और घरेलू जरूरतों में भी मिल रहा लाभरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और स्व-सहायता समूहों को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं। छत्तीसगढ़ महिला कोष से प्राप्त ऋण ने अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मेंड्राकला निवासी श्रीमती हरमनिया देवी राजवाड़े और उनके स्व-सहायता समूह को आजीविका का नया आधार दिया है।हरमनिया देवी आकांक्षा स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि समूह की महिलाओं के सामने नियमित आय का साधन विकसित करने की चुनौती थी। समूह की बैठकों में सदस्यों से चर्चा के बाद ऐसी गतिविधि शुरू करने का निर्णय लिया गया, जिससे महिलाओं को निरंतर आमदनी का अवसर मिल सके। इसी दौरान उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कोष से ऋण प्राप्त करने की जानकारी मिली।हरमनिया देवी ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कोष के माध्यम से मिलने वाले ऋण के बारे में जानकारी दी और आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद उन्होंने समूह की अन्य सदस्यों से चर्चा कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की और ऋण के लिए आवेदन किया।आवेदन स्वीकृत होने के बाद आकांक्षा स्व-सहायता समूह को एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। समूह की महिलाओं ने आपसी सहमति से इस राशि का उपयोग ऐसी आजीविका गतिविधि में करने का निर्णय लिया, जिससे नियमित आमदनी सुनिश्चित हो सके।समूह ने ऋण राशि से किराना एवं सिंगार सामग्री की दुकान शुरू की। ग्रामीण क्षेत्र में दैनिक उपयोग की वस्तुओं और सिंगार सामग्री की स्थानीय मांग को देखते हुए यह व्यवसाय समूह के लिए उपयोगी साबित हुआ। दुकान शुरू होने के बाद धीरे-धीरे ग्राहकों की संख्या बढ़ी और समूह की महिलाओं को नियमित आय का अवसर मिलने लगा।हरमनिया देवी ने बताया कि पहले समूह की महिलाओं के पास स्थायी आजीविका गतिविधि का अभाव था। ऋण मिलने के बाद उन्हें सामूहिक रूप से व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिला। अब महिलाएं दुकान के संचालन में अपनी भूमिका निभाने के साथ मेहनत से आय अर्जित कर रही हैं। मांग के अनुसार दुकान में नई सामग्री भी जोड़ी जा रही है, जिससे कारोबार को आगे बढ़ाने की संभावनाएं बढ़ी हैं।हरमनिया देवी ने बताया कि आजीविका गतिविधि से होने वाली अतिरिक्त आमदनी का सकारात्मक असर परिवारों पर पड़ा है। आय में सुधार होने से बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, शैक्षणिक सामग्री और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत हो रही है। पहले जिन छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, अब नियमित आमदनी के कारण उन्हें पूरा करना आसान हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार से समूह की महिलाओं में आत्मविश्वास भी बढ़ा है। महिलाएं अब परिवार की आर्थिक जरूरतों में पहले की तुलना में अधिक योगदान दे पा रही हैं। समूह के माध्यम से सामूहिक निर्णय लेकर आर्थिक गतिविधि संचालित करने से उनमें नेतृत्व क्षमता और आत्मनिर्भरता की भावना भी मजबूत हुई है।हरमनिया देवी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिले ऋण ने उनके समूह को केवल पूंजी ही नहीं दी, बल्कि अपने स्तर पर व्यवसाय शुरू करने और आगे बढ़ने का अवसर भी दिया। उन्होंने कहा, “एक लाख रुपये की ऋण सहायता से शुरू की गई किराना और सिंगार दुकान आज हमारे समूह की आजीविका का आधार बन रही है। इससे महिलाओं को नियमित आमदनी का अवसर मिला है और परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो रहा है।”उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्व-सहायता समूहों को ऋण और आजीविका गतिविधियों से जोड़ने की पहल ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाओं से महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने, परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।
- -हितग्राहियों तक समयबद्ध लाभ पहुंचाने और मैदानी कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के दिए निर्देशरायपुर । महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने आज सूरजपुर एवं भैयाथान में आयोजित विकासखंड स्तरीय समीक्षा बैठकों में विभागीय योजनाओं एवं विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से पहुंचाने के निर्देश दिए।मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने बैठक में योजनाओं की जमीनी स्थिति की जानकारी लेते हुए मैदानी स्तर पर कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग, गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विकास एवं जनकल्याण से जुड़े कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। आमजन से जुड़ी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करते हुए योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाए।श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि सुशासन का वास्तविक उद्देश्य शासन की योजनाओं और सुविधाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। विभागीय योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे और विकास कार्यों का सकारात्मक प्रभाव आमजन के जीवन में दिखाई दे, इसके लिए निरंतर समीक्षा और प्रभावी मॉनिटरिंग जरूरी है।उन्होंने अधिकारियों को मैदानी अमले के साथ बेहतर समन्वय बनाकर कार्य करने तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं का समय रहते समाधान करने के निर्देश भी दिए। मंत्री ने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल स्वीकृति और क्रियान्वयन तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका वास्तविक लाभ हितग्राही तक पहुंचना ही उसकी सार्थकता है। सूरजपुर एवं भैयाथान में आयोजित समीक्षा बैठकों में संबंधित विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं भाजपा कार्यकर्तागण उपस्थित रहे। सूरजपुर में विधायक श्री भुलन सिंह मरावी भी बैठक में उपस्थित रहे।
- रायपुर । बस्तर के सुदूर और दुर्गम अबुझमाड़ के जंगलों से अब बदलाव की एक नई बयार बह रही है। कभी नक्सल के साए और सिर्फ घरेलू चौखट तक सीमित रहने वाली नारायणपुर तथा ओरछा विकासखण्ड की ग्रामीण महिलाएं अब अपने हौसले और कड़ी मेहनत से आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। वन विभाग की एक दूरदर्शी पहल ने इन महिलाओं के सपनों को न सिर्फ पंख दिए हैं, बल्कि चक्रिय निधि के माध्यम से उन्हें वित्तीय संबल देकर सफल उद्यमी के रूप में उभारने का काम किया है।वर्ष 2026-27 में शासन की मंशानुरूप क्षेत्र के 10 महिला स्व-सहायता समूहों को 37 लाख रुपये की चक्रिय निधि से ऋण उपलब्ध कराया गया। इस आर्थिक मदद ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक नई जान फूंक दी। जय बिहान, जगदम्बा, मां लक्ष्मी, मां शीतला, मां दंतेश्वरी, मां दुर्गा, मां सरस्वती, मां अम्बे और जय वाला कारयो जैसे समूहों से जुड़ी दीदियां आज विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर अपने पैरों पर खड़ी हैं। कोई जंगलों से इमली और माहुल पत्ता चुनकर दोना-पत्तल बना रही है, तो कोई कच्चे फूलझाड़ू का प्रसंस्करण कर बाजार तक पहुंचा रही है। गृह उद्योग के तहत मसाला निर्माण, बेकरी, कैंटीन और किराना स्टोर के सफल संचालन से इन महिलाओं ने साबित कर दिया है कि अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में कमाल कर सकती हैं। इस बदलाव का सबसे खूबसूरत पहलू इन परिवारों के जीवन में आई खुशहाली है। स्वरोजगार से मिल रही नियमित आय ने महिलाओं के भीतर न केवल आत्मविश्वास जगाया है, बल्कि अब वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं देने में सक्षम हो पाई हैं। समाज की मुख्यधारा से जुड़कर आर्थिक रूप से मजबूत होतीं अबुझमाड़ की ये महिलाएं आज पूरे छत्तीसगढ़ के लिए महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं।
- रायपुर । उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन के छत्तीसगढ़ आगमन पर राज्यपाल श्री रमेन डेका, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वामी विवेकानंद विमानतल रायपुर में उनका आत्मीय स्वागत किया।उपराष्ट्रपति का स्वामी विवेकानंद विमानतल रायपुर में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मंत्री श्री दयालदास बघेल, वाणिज्य एवं उद्योग, सार्वजनिक उपक्रम, वाणिज्यिक कर (आबकारी) श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पुनर्वास, उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा, राज्य सभा सदस्य श्रीमती लक्ष्मी वर्मा ने आत्मीय स्वागत की। इसी प्रकार कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री गुरू खुशवंत साहेब, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, श्री अनुज शर्मा, श्री सुनील सोनी, श्री मोती लाल साहू और जनप्रतिनिधि श्री अशोक बजाज और मुख्य सचिव श्री विकासशील, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम, जनप्रतिनिधियों ने उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन का स्वामी विवेकानंद विमानतल रायपुर में आत्मीय स्वागत किया।
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0- मुंबई के मराठी नाटक ‘आता थांबावयचं कसं‘, भोपाल के हिंदी नाटक ‘गगन की ओर निशाना’ के अलावा महाराष्ट्र मंडल के नाटक ‘जस्टिस' का लुत्फ लेंगे रंगप्रेमी दर्शक
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के 90 वर्षों के गौरवशाली इतिहास वाले 10 दिवसीय गणेशोत्सव में इस बार हिंदी व मराठी के तीन नाटकों का धूम रहेगी। दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर की ओर से पहली बार मुंबई के सुप्रसिद्ध कलाकारों की टीम मराठी नाटक ‘आता थांबावयचं कसं’ (अब रोकें कैसे?) का मंचन करेगी। वहीं भोपाल की भूमिका नाट्य समिति हिंदी नाटक ‘गगन की ओर निशाना’ मंचित करेगी। महाराष्ट्र मंडल की नाट्य समिति हिंदी नाटक ‘जस्टिस’ का प्रयोग संत ज्ञानेश्वर सभागृह के स्व. कुमुदिनी वरवंडकर रंगमंच पर करेगी।मंडल के सचिव चेतन दंडवते ने बताया कि संदीप दंडवते द्वारा लिखित व निर्देशित ‘अब रोकें कैसे’ मराठी फिल्मों व टीवी सीरियल्स के जाने- माने कलाकारों से सजा और डिजिटल युग के गंभीर और ज्वलंत सामाजिक समस्या पर आधारित नाटक है। यह नाटक महाराष्ट्र मंडल गणेशोत्सव में 21 सितंबर को मंचित किया जाएगा। इस नाटक में साइबर क्राइम, सोशल मीडिया पर होने वाले लैंगिक शोषण और ब्लैकमेलिंग जैसी गंभीर समस्याओं पर रोशनी डाली गई है। नाटक में सुप्रसिद्ध फिल्म स्टार डॉ. गिरीश ओक मनोवैज्ञानिक और पिता की मुख्य भूमिका में होंगे। वहीं ख्याति प्राप्त वरिष्ठ अभिनेत्री सुकन्या कुलकर्णी मोने पीड़िता की मां की भूमिका को जीवंत करेंगी। ऐश्वर्या शेटे, जान्हवी पणशीकर, आकाश पाटील के भूमिकाएं भी कहानी को गति प्रदान करेंगी। इसमें संगीतकार समीर म्हात्रे सेट डिजाइनर संदेश बेंद्रे की भी अह्म योगदान है।परितोष डोनगांवकर के अनुसार भोपाल की नाट्य संस्था ‘भूमिका’ मंडल में 20 सितंबर को शाम 7:30 बजे ‘गगन की ओर निशाना’ मंचित करेगी। अहिल्या देवी होल्कर की जीवन गाथा पर आधारित नाटक के लेखक और निर्देशक गोपाल दुबे और संगीतकार संदीप शर्मा हैं। इस नाटक का यादगार अनुभव देने के लिए कलाकारों की वॉइस, स्पीच और डिक्शन मॉड्यूलेशन की विशेष थियेटर वर्कशॉप भी लगाया गया, जिसका प्रभाव महाराष्ट्र मंडल में नाटक के मंचन के दौरान दिखाई भी देगा।महाराष्ट्र मंडल की नाट्य समिति की ओर से पवन ओगले द्वारा लिखित और रंजन मोड़क निर्देशित हिंदी नाटक ‘जस्टिस’ मूलत: सस्पेंस- थ्रिलर नाटक है, जिसमें असली कातिल की पहचान करने की जद्दोजहद दिखाई गई है। चेतन दंडवते, पवन ओगले, रविंद्र ठेंगड़ी, भारती पलसोदकर, समीर टल्लू, विनोद राखुंडे और अक्षदा मातुरकर के अभिनय से सजे ‘जस्टिस’ में अजय पोतदार पुराने हवेली का सेट खड़ा करेंगे। प्रवीण क्षीरसागर की प्रकाश व्यवस्था व परितोष डोनगांवकर का पार्श्व संगीत होगा। रंजन मोड़क के मुताबिक जस्टिस का मंचन संत ज्ञानेश्वर सभागृह में 15 सितंबर को शाम की आरती के बाद 7:30 बजे होगा। -
-महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर स्कूल की कक्षाओं में अधिकतम उपस्थिति और पढ़ाई में गंभीरता लाने के लिए प्राचार्य की अनोखी पहल
रायपुर। बच्चों की अगस्त माह में स्कूल में शत- प्रतिशत उपस्थिति को प्रोत्साहित करने के लिए संत ज्ञानेश्वर विद्यालय के प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने बच्चों को पुरस्कृत किया। इस अवसर पर उन्होंने बच्चों से कहा कि आप अपनी उपस्थिति इसी तरह बनाए रखें और अन्य बच्चों को भी प्रेरित करें। बच्चों को प्रोत्साहित करने का यह सिलसिला हर माह जारी रहेगा। इस अवसर पर प्री प्राइमरी इंचार्ज अस्मिता कुसरे और प्राइमरी इंचार्ज अपर्णा आठले उपस्थित रहीं।अस्मिता ने बताया कि प्री प्राइमरी में कुछ बच्चों की उपस्थिति 100 प्रतिशत रही। इसमें नर्सरी से यक्ष राजवाड़े, पीपी-वन से चैतन्य साहू, लक्ष्मीता निषाद, पीपी-टू से रुद्रांश, विद्या रोहिदास, विहान शामिल हैं। इतने छोटे बच्चों की कई दिनों की बारिश के बावजूद 100 प्रतिशत उपस्थिति इस बात को दर्शाती है कि बच्चे स्कूल आने के लिए कितने आतुर रहते हैं। इस अवसर पर बच्चों को जंक फूड और हेल्दी फूड के बारे में भी बताया गया, ताकि वे घर के खाने को प्राथमिकता दें जो उनके सेहत के लिए भी अत्यावशक है।प्राइमरी इंचार्ज अपर्णा आठले ने बताया कि इसी तरह कक्षा पहली से निकिता सोनवानी, रेयांश वर्मा, कक्षा दूसरी से गौरांश ध्रुव, गौरव राउत, निशिता यादव, रुद्र कुमार साहू और श्रेया वर्मा, तीसरी से दिव्या साहू, दिव्यांशी साहू, पार्थ यादव, गीतांजलि राव, रुद्राक्षी राजवाड़े और चौथी से रोहन साहू, रौनक श्रीवास्तव, वेदांशी साईं की उपस्थिति प्रशंसनीय रही। इसी प्रकार पांचवीं से हर्षिता श्रीवास, लव पाठक, भावेश सोनवानी, सौरव राउत, नितेश बघेल ने अपनी शत- प्रतिशत उपस्थिति दी। इन सभी बच्चों को पुरस्कृत किया गया, ताकि इनसे प्रेरणा लेकर बाकी बच्चे भी नियमित शाला में आएं और अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करें। -
*- जिले में 1 लाख 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में हुआ फसल बीमा*
*- गत वर्ष की तुलना में लगभग 5 हजार हेक्टेयर की बढ़ोतरी*दुर्ग/ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अंतर्गत जिले में खरीफ 2026 में 1 लाख 5 हजार 181 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों का बीमा कराया गया है। इस वर्ष की मौसमी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग द्वारा बीमा कंपनी के सहयोग से जिले की ग्राम पंचायतों में सघन फसल बीमा अभियान चलाया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम मिले है। धान सिंचित क्षेत्र में 90 हजार 247 हेक्टेयर तथा धान असिंचित क्षेत्र में 13 हजार 862 हेक्टेयर क्षेत्र का बीमा हुआ है। इसके अलावा सोयाबीन में 1 हजार 45 हेक्टेयर तथा अरहर में 27 हेक्टेयर क्षेत्र बीमित हुआ है। सघन अभियान के परिणामस्वरूप खरीफ 2026 में धान सहित विभिन्न खरीफ फसलों के बीमा क्षेत्र में गत वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। गत वर्ष लगभग 1 लाख 186 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों का बीमा हुआ था, जबकि इस वर्ष 5 हजार हेक्टेयर अधिक अतिरिक्त क्षेत्र को फसल बीमा के दायरे में लाया गया है। खरीफ 2026 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अंतर्गत 3 लाख 44 हजार 682 ऋणी किसान के आवेदन एवं 5 हजार 600 अऋणी किसान के आवेदन प्राप्त हुए हैं। जिसके माध्यम से लगभग 89 हजार 316 किसानों ने अपनी फसलों का बीमा कराया है। इन किसानों की फसलों के बीमा के लिए कुल 13 करोड़ 40 लाख रूपए प्रीमियम राशि के रूप में बीमा कंपनी को प्राप्त हुई है।कृषि विभाग द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर किए गए व्यापक प्रचार-प्रसार, किसानों से सीधे संपर्क तथा बीमा कंपनी के मैदानी अमले के समन्वित प्रयासों से किसानों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रति जागरूकता बढ़ी है। विभाग का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों और उनके फसल क्षेत्र को बीमा सुरक्षा के दायरे में लाकर प्राकृतिक आपदाओं एवं प्रतिकूल मौसम से होने वाले संभावित फसल नुकसान के विरूद्ध किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। -
दुर्ग/ जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र दुर्ग एवं शासकीय महिला औद्यौगिक प्रशिक्षण संस्था दुर्ग के संयुक्त तत्वावधान में 11 सितम्बर 2026 को शासकीय महिला औद्यौगिक प्रशिक्षण संस्था दुर्ग में जिला स्तरीय रोजगार मेला का आयोजन किया जाएगा।
उप संचालक रोजगार जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन दुर्ग से प्राप्त जानकारी अनुसार इस मेले हेतु निजी क्षेत्र के नियोजक जो अपने संस्थान में रिक्त पदों को इस रोजगार मेला के माध्यम से भरना चाहते हैं, वे 09 सितम्बर 2026 तक रिक्त पदों की जानकारी छत्तीसगढ़ रोजगार विभाग के ई-रोजगार पोर्टल के माध्यम से जिला रोजगार कार्यालय दुर्ग को अधिसूचित करेंगे। छत्तीसगढ़ रोजगार विभाग के ई-रोजगार पोर्टल के माध्यम से रिक्तियाँ प्रेषित करने के लिए नियोजकों का पोर्टल पर रोजगार मेला हेतु नियोक्त पंजीयन कराना अनिवार्य होगा जिसके लिए नियोक्ता का जीएसटी क्रमांक एवं डॉक्यूमेंट अपलोड करना आवश्यक होगा। अधिक जानकारी के लिए जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र, दुर्ग में संपर्क कर सकतें है। -
दुर्ग/आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए संचालित सीएम हेल्पलाइन प्रभावी साबित होते जा रही है। इसी कड़ी में ग्राम पंचायत पहांदा (अ) की रहने वाली श्रीमती नेहा गेन्डरे का विवाह 19 अप्रैल 2026 को संपन्न हुआ था। शादी के बाद नई गृहस्थी की शुरुआत के साथ ही उन्हें कई सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना था और बैंक से जुड़े जरूरी काम निपटाने थे। इन सभी कामों के लिए सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज था, विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र। नेहा ने बिना किसी देरी के ग्राम पंचायत में विवाह पंजीयन के लिए अपना आवेदन जमा कर दिया। लेकिन अधिक समय बीत जाने के बाद भी उनका आवेदन प्रक्रिया में अटका रहा। विवाह प्रमाण पत्र न मिलने के कारण नेहा न तो बैंक के जरूरी काम पूरे कर पा रही थीं और न ही शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले पा रही थीं। बार-बार चक्कर काटने के बाद भी जब कोई रास्ता नहीं दिखा, तो उन्होंने हार मानने के बजाय एक प्रभावी कदम उठाने का फैसला किया।
नेहा ने अपनी समस्या के समाधान के लिए ’सीएम हेल्पलाइन’ पर शिकायत दर्ज करा दी। प्रकरण पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में विवाह पंजीयन संबंधी श्रेणी में दर्ज हुआ। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को समझा और तुरंत आवश्यक कार्यवाही शुरू कर दी। संबंधित स्तर पर प्रक्रिया को तेजी से पूरा कराया गया और नेहा का विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र तैयार कर दिया गया। प्रमाण पत्र हाथ में आते ही नेहा के चेहरे पर खुशी छा गई। सीएम हेल्पलाइन के इस त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निराकरण से न केवल उनकी समस्या का समाधान हुआ, बल्कि उन्हें बैंक और सरकारी योजनाओं से जुड़े कामों में भी बड़ी राहत मिली। इस पूरी कार्यवाही पर नेहा ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन से आम नागरिकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। -
दुर्ग/छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं, विशेष कर वीरता, शौर्य, साहस तथा महिलाओं में आत्मबल को सशक्त करने के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से “वीरांगना“ रानी अवंतिबाई लोधी स्मृति पुरस्कार वर्ष 2026 प्रदान किया जाना है। पुरस्कार के रूप में एक महिला को दो लाख रूपये की राशि तथा प्रशस्ति पट्टिका सम्मान के रूप में प्रदान किया जाएगा।
उक्त पुरस्कार हेतु आवेदन पत्र कार्यालय जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग को दिनांक 25 सितम्बर 2026 तक सीलबंद लिफाफे एवं लिफाफे के ऊपर “वीरांगना“ रानी अवंतिबाई लोधी स्मृति पुरस्कार वर्ष 2026 अंकित कर निर्धारित प्रपत्र में जमा करना होगा। निर्धारित तिथि के पश्चात प्राप्त प्रविष्टियों पर विचार नहीं किया जावेगा। पुरस्कार के संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए जिले की वेबसाईट www.durg.gov.in का अवलोकन किया जा सकता है। -
*- ग्रे-वाटर के सुरक्षित प्रबंधन की दिशा में दुर्ग जिले में जनभागीदारी का अनूठा उदाहरण, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने अपने घरों से की बदलाव की शुरुआत*
दुर्ग/कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग कुमार दुबे के नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रे-वाटर यानी घरेलू गंदे पानी के सुरक्षित प्रबंधन के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत स्व-सहायता समूहों की महिलाओं एवं स्वच्छताग्राहियों द्वारा श्रमदान से 3360 सोख्ता गड्ढों (सोक पिट) का निर्माण किया गया है। अभियान का उद्देश्य घरों से निकलने वाले निस्तारित एवं गंदे पानी को गलियों, रास्तों और सार्वजनिक स्थानों पर खुले में बहने से रोकना है। इससे गांवों में गंदगी और जलजनित बीमारियों की रोकथाम के साथ-साथ पानी के प्राकृतिक निस्तारण एवं भू-जल पुनर्भरण को भी बढ़ावा मिलेगा।जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रे-वाटर के सुरक्षित प्रबंधन को लेकर जनभागीदारी को प्राथमिकता दी जा रही है। महिलाओं द्वारा स्वयं आगे बढ़कर अपने घरों से इस अभियान की शुरुआत करना ग्रामीण समुदाय के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।*‘पहले खुद से शुरुआत’ बनी अभियान की पहचान*इस पहल की खास बात है कि स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने ‘नेतृत्व परिवर्तन और स्वयं से शुरुआत’ की प्रेरणादायक थीम के साथ अपने घरों से ही अभियान की शुरुआत की। 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शुरू किए गए इस अभियान को अपशिष्ट जल प्रबंधन सप्ताह के रूप में आगे बढ़ाया गया। महिलाओं ने संकल्प लिया कि यदि उनके घरों से निकलने वाला गंदा पानी खुले में बह रहा है, तो वे सबसे पहले अपने घर के आसपास सोख्ता गड्ढे का निर्माण करेंगी। इसके बाद अन्य ग्रामीण परिवारों को भी इसके लिए प्रेरित किया गया।*श्रमदान से तैयार हो रहे सोख्ता गड्ढे*अभियान पूरी तरह जनभागीदारी और श्रमदान पर आधारित है। स्वच्छताग्राहियों एवं स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने आपसी सहयोग से घरों के आसपास लगभग 2 से 3 फीट गहरे गड्ढे तैयार किए। इनमें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ईंट, पत्थर और कंकड़ आदि सामग्री का उपयोग किया गया, जिससे घरेलू पानी जमीन में सुरक्षित रूप से सोख सके और भू-जल पुनर्भरण में मदद मिले।*सेप्टिक टैंक के ओवरफ्लो पानी का भी सुरक्षित प्रबंधन*अभियान का दायरा केवल सामान्य घरेलू ग्रे-वाटर तक सीमित नहीं है। ऐसे ग्रामीण परिवार, जिनके घरों में सेप्टिक टैंक युक्त शौचालय हैं और टैंक के ओवरफ्लो होने से गंदा पानी खुले में बह रहा था, उन्हें भी अभियान से जोड़ा गया है। ऐसे स्थानों पर विशेष सोक पिट एवं सोख्ता गड्ढों के माध्यम से पानी के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था की जा रही है।सोख्ता गड्ढों का निर्माण तकनीकी रूप से सही तरीके से हो, इसके लिए जनपद पंचायत स्तर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी, करारोपण अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी, विकासखण्ड समन्वयक एवं तकनीकी सहायकों द्वारा स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन दिया गया। गांवों के संकुल बनाकर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जो अभियान की सतत मॉनिटरिंग और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित कर रहे हैं। जिले में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने के लिए पूर्व में भी ग्राम पंचायतों में वर्मी एवं नाडेप संरचनाओं की सफाई, कचरे का पृथक्करण तथा सार्वजनिक जलस्रोतों के आसपास स्वच्छता अभियान चलाए गए हैं। ग्रे-वाटर प्रबंधन की यह पहल इन प्रयासों को और मजबूती प्रदान कर रही है। जिला प्रशासन और स्व-सहायता समूहों की इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता एवं जल संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। वहीं, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं जनभागीदारी, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण की प्रभावी मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं। -
मंशाराम की पत्नी रामकली ने कहा - विष्णु भैया ने दिया पक्का आवास
बालोद/छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से सुदूर वनांचल के अंतिम छोर पर बसे जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। बालोद जिले के डौण्डी विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम कुमुड़कट्टा में पारंपरिक रूप से कुम्हार का कार्य करने वाले श्री मंशाराम और उनकी पत्नी श्रीमती रामकली का वर्षों पुराना पक्के घर का सपना अब हकीकत में बदल चुका है। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत मिले पक्के मकान ने न सिर्फ उनके परिवार को सुरक्षित छत दी है, बल्कि उनके पारंपरिक हुनर को भी नया संबल प्रदान किया है।कुम्हार श्री मंशाराम वर्षों से पारंपरिक कुम्हारी और कृषि मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते आ रहे थे। तीज-त्यौहारों के समय, जो कि मुख्य रूप से बारिश के मौसम में आते हैं, उन्हें मिट्टी की मूर्तियां, खिलौने और बर्तन तैयार करने होते थे। कच्चे घर में सीलन और टपकते पानी के कारण उनके बनाए उत्पाद खराब हो जाते थे, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। उम्र के इस पड़ाव में पक्का मकान बनाना उनके लिए एक सपना ही था, जिसे प्रधानमंत्री आवास योजना ने सच कर दिखाया। सहायता राशि और अपनी जमा पूंजी मिलाकर उन्होंने एक मजबूत पक्का मकान तैयार किया है। अब वे बिना किसी मौसमी रुकावट के सुरक्षित छत के नीचे मिट्टी के उत्पाद तैयार कर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं।मंशाराम के परिवार को शासन की कई प्रमुख योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण से उन्हें सुरक्षित छत और कुम्हारी का कार्य बेहतर ढंग से करने की सुविधा मिली है। भूमिहीन होने के कारण उन्हें पं. दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत् प्रतिवर्ष 10 हजार की आर्थिक सहायता सुनिश्चित हो रही है। मंशाराम की पत्नी श्रीमती रामकली को महतारी वंदन योजना के तहत् प्रतिमाह आर्थिक संबलता भी मिल रही है। रामकली ने बताया कि वर्षों से कच्चे मकान में मुश्किलों के बीच काम कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सरकार में पक्का आवास और महतारी वंदन योजना का लाभ मिलने से हमारी जिंदगी आसान हो गई है। योजनाओं का लाभ देने के लिए विष्णु भैया को बहुत-बहुत धन्यवाद। योजनाओं के इस त्रिवेणी संगम से मंशाराम का परिवार अब स्वाभिमान और आर्थिक स्थिरता के साथ अपनी आजीविका संवार रहा है। -
विकसित भारत-जी राम जी योजना, पीएम आवास एवं स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के कार्यों की समीक्षा की
पारदर्शिता, गुणवत्तापूर्ण एवं समय-सीमा में कार्य सुनिश्चित करने के दिए निर्देशबालोद/ जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील कुमार चंद्रवंशी ने जिला पंचायत सभाकक्ष में जनपदवार समीक्षा बैठक ली। बैठक में विकसित भारत-जी राम जी, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण तथा स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। जिसके अंतर्गत प्रत्येक जनपद पंचायत से प्राप्त प्रगति रिपोर्ट का विस्तारपूर्वक अवलोकन किया गया। इसके साथ ही योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, गुणवत्तापूर्ण कार्य और समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। सीईओ श्री चंद्रवंशी ने अधिकारियों को लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ शीघ्र पहुँचाने और किसी भी प्रकार की समस्या का त्वरित समाधान करने तथा पुराने वित्तीय वर्ष के प्रगतिरत कार्यों को प्राथमिकता देते हुए समय-सीमा में गुणवत्तापूर्वक पूर्ण करने संबंधी निर्देश दिए। उन्होंने प्रत्येक ग्राम पंचायतों में मांग अनुरूप कार्यों को प्रारंभ करते हुए श्रमिकों को नियोजित करने के निर्देश दिए। जिससे वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले को प्राप्त लक्ष्य के अनुरूप मानवदिवस सृजित किया जा सके। उन्होंने विशिष्ट कार्य अंतर्गत स्वीकृत बालिका शौचालय निर्माण, मुक्तिधाम शेड सह प्रतिक्षालय निर्माण एवं डिफंग बोरवेल रिचार्ज कार्यों को यथाशीघ्र प्रारंभ कराते हुए गुणवत्तापूर्ण निर्माण करने संबंधी निर्देश दिए। इसके साथ ही विकासखण्ड डौण्डी में पूर्व वर्ष के 13 आंगनबाड़ी भवनों के अपूर्ण होने के कारण जिला पंचायत सीईओ ने एक माह के भीतर पूर्ण कराने संबंधित ग्राम पंचायत को सौंपने हेतु निर्देशित किया गया। बैठक में पात्र परिवारों को आवास स्वीकृत किए जाने की स्थिति पर चर्चा की गई। निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। सीईओ ने कहा कि हर गरीब परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।बैठक में सामुदायिक शौचालयों, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन और जनजागरुकता गतिविधियों की समीक्षा की गई। महिलाओं और बच्चों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पिंक टॉयलेट जैसी पहल को आगे बढ़ाने पर बल दिया गया। सीईओ श्री चंद्रवंशी ने अधिकारियों से कहा कि स्वच्छता अभियान को जनभागीदारी से और अधिक प्रभावी बनाया जाए। जिला पंचायत सीईओ ने स्पष्ट किया कि योजनाओं का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य करना नहीं है, बल्कि नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता है कि सभी योजनाएं समय पर और गुणवतापूर्ण तरीके से पूर्ण हों। बैठक में सहायक परियोजना अधिकारी, जिला समन्वयक, जनपद पंचायत सीईओ, कार्यपालन अभियंता, एसडीओ (आरईएस), कार्यक्रम अधिकारी उपस्थित थे। -
*विभागाध्यक्ष और जिला कार्यालयों को भी किया गया सम्मानित*
रायपुर/ मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित मासिक सम्मान कार्यक्रम में ई-ऑफिस के माध्यम से नस्तियों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण तथा कार्यालयीन समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करने वाले मंत्रालयीन अधिकारी एवं कर्मचारियों को जुलाई माह के लिए प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इसी प्रकार से ई-ऑफिस में सर्वश्रेष्ठ कार्य के लिए लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को प्रथम, आदिम जाति विकास विभाग को दूसरा तथा ग्रामोद्योग विभाग को तीसरे स्थान पर सम्मानित किया गया।मुख्य सचिव ने सभी सम्मानित प्रशंसा पत्र प्राप्त करने वाले अधिकारी एवं कर्मचारियों को शुभकामनाएं एवं बधाई देते हुए कहा कि सभी अधिकारी-कर्मचारी ई-ऑफिस में लगातार अच्छा प्रदर्शन करें यही अपेक्षा है। उन्होंने आई-गाट पर प्रत्येक माह कम से कम 3 से 4 कोर्स प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी अपने विभाग की आवश्यकता के अनुसार अवश्य करें। मुख्य सचिव ने प्रदेश स्तर पर आई गाट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।संयुक्त सचिव से कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में ई-ऑफिस रैंकिंग के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर सचिव श्री सच्चिदानंद आलोक प्रथम, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की संयुक्त सचिव श्रीमती जयश्री जैन द्वितीय, आदिम जाति विकास विभाग के संयुक्त सचिव श्री भूपेन्द्र कुमार राजपूत तृतीय स्थान पर सम्मानित किया गया। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के उप सचिव श्री दूरदेशी राम सोन्टापर विभाग प्रथम स्थान, श्रम विभाग के उप सचिव श्री विपुल कुमार गुप्ता द्वितीय स्थान, सामान्य प्रशासन विभाग (कक्ष-8) के उप सचिव श्रीमती ऋतु वर्मा तृृतीय स्थान पर सम्मानित किया हुए। गृह विभाग के अवर सचिव श्री पूरन लाल साहू प्रथम स्थान, सामान्य प्रशासन विभाग (कक्ष-1) के अवर सचिव श्री कैलाश कुमार नेताम द्वितीय स्थान, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अवर सचिव श्रीमती दिव्या वैष्णव तृतीय स्थान पर सम्मानित किया। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अनुभाग अधिकारी श्री वीरेन्द्र कुमार प्रथम स्थान, अनुभाग अधिकारी श्री जीवन लाल नेताम द्वितीय स्थान, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के अनुभाग अधिकारी श्री योगेन्द्र कुमार साहू तृतीय स्थान पर सम्मानित किया हुए। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सहायक अनुभाग अधिकारी श्री मोहम्मद शाहिर अंसारी प्रथम स्थान, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के सहायक अनुभाग अधिकारी श्रीमती प्रिया बागड़े द्वितीय स्थान, सामान्य प्रशासन विभाग (कक्ष-4) के सहायक अनुभाग अधिकारी श्री जलेश राम तृतीय स्थान पर सम्मानित हुए।लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्री मुकेश राम प्रधान प्रथम स्थान, अनुसूचित जाति विकास विभाग के वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्री गौरव कुमार राय द्वितीय स्थान, वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्रीमती अंजू दत्ता तृतीय स्थान पर सम्मानित हुए। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्री प्रभु सिंह राठिया प्रथम स्थान, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्री संदीप कुमार तारम द्वितीय स्थान, नगरीय प्रशासन विभाग के कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्री उमेश यादव तृतीय स्थान पर सम्मानित हुए। आदिम जाति विकास विभाग के सहायक ग्रेड-2 श्री शेष नारायण साहू प्रथम स्थान, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की डाटा एन्ट्री ऑपरेटर श्रीमती माया देवांगन द्वितीय स्थान, विधि एवं विधायी कार्य विभाग के सहायक ग्रेड-श्री तरूण कुमार धृतलहरे तृतीय स्थान पर सम्मानित किया गया।अटेंडेंस रेंक में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले में अवर सचिव श्री अनिल तिर्की, निज सचिव सुश्री आराधना साहू, अनुभाग अधिकारी श्री आशिष कुमार शर्मा, सहायक अनुभाग अधिकारी श्री आशुतोष वर्मा, अनुभाग अधिकारी श्री अश्वनी कुमार भतपहरी, सहायक अनुभाग अधिकारी श्री भागेश कुमार ध्रुव, अवर सचिव श्री भूपेन्द्र सिंह राजपूत, अवर सचिव श्रीमती दिव्या वैष्णव, उप सचिव श्रीमती हेमिन बाघे, भृत्य श्री किशोर कुमार, सहायक अनुभाग अधिकारी श्री लोक नारायण शर्मा, अनुभाग अधिकारी श्रीमती मंजूषा राजपूत, वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्री मेलू राम ध्रुव, सहायक अनुभाग अधिकारी श्री मिर्जा मुस्कान बेग, अनुभाग अधिकारी श्री मुकेश कुमार शाकार, वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्री नरेश कुमार बाघमार, सहायक अनुभाग अधिकारी श्री पवन कुमार साहू, वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्रीमती पुष्पांजली गजभिये, भृत्य श्री राज कुमार सोरी, सचिव (भारसाधक) श्री राजेश सिंह राणा, स्टैनो टायपिस्ट सुश्री राखी सिदार, स्टैनो टायपिस्ट श्री रमाकांत, वरिष्ठ सचिवालय सहायक सुश्री रूपाली तिवारी, सहायक अनुभाग अधिकारी श्री शिवचरण राठौर, सहायक अनुभाग अधिकारी श्रीमती सुधा शेंडे, सहायक ग्रेड-01 श्री तरूण कुमार धृतलहरे, वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्री विवेक सोनी को रैंकिंग एक के लिए सम्मानित किया गया।तीन माह का ई-ऑफिस रैंकिंग में आदिम जाति विकास विभाग के संयुक्त सचिव, श्री भूपेन्द्र कुमार राजपूत प्रथम स्थान, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अपर सचिव श्री सच्चिदानंद आलोक द्वितीय स्थान, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के संयुक्त सचिव श्रीमती जयश्री जैन तृतीय स्थान सम्मानित किया गया।तीन माह के लिए अडेंटेंस रैकिंग में उच्च शिक्षा विभाग के सहायक अनुभाग अधिकारी श्री लोक नारायण शर्मा प्रथम स्थान, सामान्य प्रशासन विभाग के भृत्य श्री राज कुमार सोरी द्वितीय स्थान, सामान्य प्रशासन विभाग के वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्री मेलू राम ध्रुव तृतीय स्थान पर सम्मानित किया गया।तीन माह के लिए डिपार्टमेंट रैकिंग में प्रथम स्थान में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वितीय, गृह विभाग तृतीय स्थान वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को सम्मानित किया गया।ई-ऑफिस रैंकिंग विभागाध्यक्ष के अधिकारियों में उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त सुश्री रीता यादव प्रथम स्थान, आदिम जाति विकास विभाग के आयुक्त श्री डी. राहुल वेंकट द्वितीय स्थान, उच्च शिक्षा विभाग के अपर संचालक श्री जॉन तिग्गा तृतीय स्थान, चिकित्सा शिक्षा विभाग सहायक ग्रेड-3 श्री वेद प्रकाश देवांगन चतुर्थ स्थान, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग डाटा एन्ट्री ऑपरेटर श्री पीताम्बर प्रसाद पाचवें स्थान पर सम्मानित किया गया।ई-ऑफिस जिला कार्यालय में जिला रायपुर की सहायक परियोजना अधिकारी सुश्री अनिता जैन प्रथम स्थान, जिला सक्ती कार्यालय सहायक सह डाटा एन्ट्री ऑपरेटर सुश्री नंदनी सोनी द्वितीय स्थान, रायपुर जिले के नोडल अधिकारी श्री पंकज कुमार शर्मा तृतीय स्थान, सक्ती जिला के ई-जिला तकनीकी प्रबंधक श्री तुलसी देवांगन चौथा स्थान, कबीरधाम जिले के अधीक्षक श्री राजेन्द्र सिंह धु्रर्वे पांचवा स्थान पर सम्मानित किया गया।आई-गाट रैंकिंग में श्री गौतम कुमार देवांगन, चौकीदार, आयुक्त बिलासपुर को प्रथम स्थान, श्री प्रेम नारायण नायक, व्याख्याता, कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी बलौदाबाजार, द्वितीय स्थान और श्री दिनेश कुमार, पुलिस आरक्षक, पुलिस अधीक्षक बालोद, तृतीय स्थान सम्मानित किया गया। -
*समारोह में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल हुए शामिल*
*सैनिक स्कूल विद्यार्थियों में अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने में निभाते हैं महत्वपूर्ण भूमिका : मंत्री श्री अग्रवाल*रायपुर/ सैनिक स्कूल अंबिकापुर का 18वां स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास, उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में विद्यालय की 18 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, उपलब्धियों तथा कैडेटों की प्रतिभा को विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।समारोह के मुख्य अतिथि पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल रहे। इस अवसर पर सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक श्री दीपक कुमार झा, कलेक्टर श्री अजीत वसंत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री राजेश कुमार अग्रवाल सहित संभाग एवं जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों के आगमन पर गार्ड ऑफ ऑनर से हुआ। अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। इसके पश्चात दीप प्रज्ज्वलन के साथ समारोह का विधिवत शुभारंभ हुआ। विद्यालय की 18 वर्षों की गौरवशाली यात्रा के उपलक्ष्य में अतिथियों ने केक काटकर स्थापना दिवस मनाया।विद्यालय के प्राचार्य कर्नल राजेश बैंदा ने सत्र 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने विद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, खेलकूद गतिविधियों, सह-पाठ्यक्रम कार्यक्रमों तथा कैडेटों के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन की जानकारी दी।समारोह में सैनिक स्कूल के कैडेटों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। स्वागत गीत, छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति पर आधारित लोकनृत्य, प्रेरणादायक मूक अभिनय, देशभक्ति से ओतप्रोत समूहगान तथा भगवान श्रीराम के जीवन एवं आदर्शों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को भाव-विभोर किया।मुख्य अतिथि श्री राजेश अग्रवाल ने सैनिक स्कूल अंबिकापुर की सत्र 2025-26 की विद्यालय पत्रिका का विमोचन किया। इस अवसर पर संस्कृत शिक्षक श्री सौरभ कुमार जैन के मार्गदर्शन में कैडेटों द्वारा विकसित अभिनव ‘संस्कृत ऐप’ का भी अतिथियों ने अवलोकन किया। उन्होंने ऐप की उपयोगिता एवं विशेषताओं की सराहना की।*उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट एवं हाउस सम्मानित*समारोह में सत्र 2025-26 के दौरान शैक्षणिक, खेलकूद एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेटों को सम्मानित किया गया। विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले हाउस को ट्रॉफियां प्रदान की गईं।सर्वश्रेष्ठ सह-पाठ्यक्रम हाउस का सम्मान कटारी हाउस एवं अरिहंत हाउस को प्रदान किया गया। खेलकूद के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भी कटारी हाउस एवं अरिहंत हाउस को सम्मानित किया गया। वहीं शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अर्जुन सिंह हाउस एवं तेजस हाउस को सर्वश्रेष्ठ अकादमिक हाउस की ट्रॉफी प्रदान की गई।विद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों, स्टाफ एवं जनरल कर्मचारियों को उत्कृष्ट कार्य, कर्तव्यनिष्ठा, समर्पण तथा सैनिक स्कूल अंबिकापुर के विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए कमेंडेशन (प्रशस्ति/सराहना) प्रदान कर सम्मानित किया गया।*कैडेटों को अनुशासन, परिश्रम और राष्ट्रसेवा के लिए किया प्रेरित*मुख्य अतिथि पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने अपने संबोधन में सैनिक स्कूल अंबिकापुर की शैक्षणिक, खेलकूद एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में हासिल उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कैडेटों को अनुशासन को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने तथा निरंतर परिश्रम एवं समर्पण के साथ अपने लक्ष्यों की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि सैनिक स्कूल जैसे संस्थान विद्यार्थियों में अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कैडेटों से इन मूल्यों को आत्मसात करते हुए जीवन में आगे बढ़ने और देश के गौरवशाली एवं जिम्मेदार नागरिक बनने का आह्वान किया।कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के उप-प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. पी. श्रीनिवास ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों एवं उपस्थित गणमान्यजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का गरिमापूर्ण समापन हुआ। -
*सर्व आदिवासी समाज और महिला आयोग ने दिए अहम सुझाव*
रायपुर/ छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) का सर्वसमावेशी प्रारूप तैयार करने की दिशा में प्रक्रिया तेज हो गई है। राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में आज यूसीसी समिति के समक्ष बस्तर से लेकर सरगुजा तक के प्रतिनिधियों की आवाज गूंजी। इस परिचर्चा में सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष और प्रतिनिधियों, अध्यक्ष राज्य महिला आयोग और अध्यक्ष राज्य फिल्म विकास निगम ने विवाह, तलाक, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे संवेदनशील विषयों पर अपने महत्वपूर्ण सुझाव रखे। समिति के सदस्यों सेवानिवृत्त आईएएस श्री एम. के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार, सेवानिवृत्त श्रीमती ज्योति रानी सिंह और सदस्य सचिव श्याम धावड़े ने सभी सुझावों को ध्यानपूर्वक सुना और आश्वस्त किया कि राज्य की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक ताने-बाने का पूरा ध्यान रखा जाएगा। इस दौरान कंवर, गोंड, बैगा और उरांव जैसी प्रमुख जनजातियों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखते हुए आदिवासियों की सदियों पुरानी रूढ़िगत प्रथाओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विशिष्टता को नए कानून में पूर्ण संरक्षण देने की बात कही। इसके साथ ही विवाह पंजीयन, संपत्ति के अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर भी समिति के साथ गंभीर विचार-विमर्श हुआ।महिला अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा करते हुए राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने जनजातीय परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ सकारात्मक सामाजिक बदलावों का समर्थन किया। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के भरण-पोषण के अधिकार, राष्ट्रीय एकता को मजबूती देने और धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने के संदर्भ में यूसीसी की आवश्यकता को रेखांकित किया। वहीं, राज्य फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-कला और जनजातीय धरोहर को अक्षुण्ण रखने का सुझाव देते हुए कहा कि वैवाहिक और संपत्ति अधिकारों में समानता से समाज के अंतिम छोर पर खड़ी महिलाओं को नया आत्मविश्वास और कानूनी सुरक्षा मिलेगी।संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत समिति प्रदेशभर में व्यापक जन-संवाद चला रही है। प्रस्तावित संहिता का मूल उद्देश्य धर्म या समुदाय के भेदभाव से परे हटकर सभी नागरिकों के लिए एक समान विधिक ढांचा तैयार करना है। इसके तहत विवाह एवं तलाक,भरण - पोषण,उत्तराधिकार एवं विरासत तथा लिव इन संबंध में विचार और सुझावों पर समिति मंथन करेगी। वर्तमान में समिति जिला स्तरीय फील्ड स्टडी, ऑनलाइन पोर्टल और प्रत्यक्ष बैठकों के माध्यम से आम जनता, कानूनविदों और सामाजिक संगठनों की राय जुटा रही है, ताकि छत्तीसगढ़ में एक पारदर्शी, न्यायसंगत और जन-हितैषी समान नागरिक संहिता लागू की जा सके। -
*संत गोबिंदराम शदाणी शासकीय कला एवं वाणिज्य कन्या महाविद्यालय में नवप्रवेशित छात्राओं का दीक्षारंभ कार्यक्रम*
रायपुर/संत गोबिंदराम शदाणी शासकीय कला एवं वाणिज्य कन्या महाविद्यालय, रायपुर में वर्ष 2026-27 में नवप्रवेशित छात्राओं का दीक्षारंभ कार्यक्रम आज राज्यपाल श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्रतिभाशाली छात्राओं का राज्यपाल ने सम्मान भी किया।राज्यपाल श्री रमेन डेका ने नवप्रवेशित छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन उनके जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत है। यह अध्याय उन्हें केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि एक जागरूक, सशक्त और संवेदनशील नागरिक के रूप में तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि इस महाविद्यालय में कदम रखते ही छात्राएं उस गौरवशाली परंपरा की उत्तराधिकारी बन गई हैं, जिसने दशकों से बालिकाओं को ज्ञान और शिक्षा का प्रकाश प्रदान किया है।श्री डेका ने महिलाओं की तुलना पानी से करते हुए कहा कि जिस प्रकार पानी के बिना जीवन अधूरा है, उसी प्रकार महिलाओं के बिना समाज भी अधूरा है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि वे अपने पास जो कुछ है, उससे संतुष्ट रहें, लेकिन अपने भविष्य को लेकर निरंतर प्रयास करती रहें। जीवन में आगे बढ़ने के अनेक अवसर और क्षेत्र हैं। यदि किसी एक क्षेत्र में सफलता नहीं मिलती है तो निराश होने के बजाय अन्य अवसरों का लाभ उठाकर कर आगे बढ़ना चाहिए।राज्यपाल ने कहा कि जीवन सतत सीखने की प्रक्रिया है और हम जीवनभर विद्यार्थी बने रहते हैं। उन्होंने छात्राओं से कहा कि आप इंटरनेट युग के विद्यार्थी हैं , तकनीक ने ज्ञान के नए द्वार खोले हैं, लेकिन तकनीक पर पूर्ण निर्भरता उचित नहीं है। इंटरनेट से बहुत कुछ सीखा जा सकता है, लेकिन यह मानव बुद्धि और विवेक का स्थान नहीं ले सकता। जीवन को सरल, सार्थक और बेहतर बनाने के लिए ज्ञान प्राप्त करना तथा उसका विवेकपूर्ण उपयोग करना आवश्यक है।उन्होंने कहा कि हमें केवल यह नहीं सोचना चाहिए कि समाज ने हमें क्या दिया, बल्कि यह भी विचार करना चाहिए कि हम समाज, अपने पड़ोस और देश की बेहतरी के लिए क्या योगदान दे सकते हैं। जीवन अनमोल है, इसलिए इसे अनावश्यक चिंताओं में व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करते हुए कठोर परिश्रम करना चाहिए। निरंतर प्रयासों से भविष्य निश्चित रूप से बेहतर बनेगा।राज्यपाल ने विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षकों का योगदान अमूल्य है, जिसे पैसों में नहीं मापा जा सकता। शिक्षकों को भी अपने आचरण और व्यवहार से विद्यार्थियों के सामने ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए, जिससे वे उनसे प्रेरणा ले सकें।उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे अपने समाज के लिए छोटे-छोटे सकारात्मक योगदान करें। उनके ये छोटे प्रयास मिलकर समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।कार्यक्रम में महाविद्यालय की उन प्रतिभाशाली छात्राओं को राज्यपाल ने सम्मानित किया, जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और कुशाग्रता से महाविद्यालय का नाम रोशन किया।इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, संत श्री युधिष्ठिर लाल, महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती उषा किरण अग्रवाल, जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित थीं।















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