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कोलंबो. श्रीलंका में एक वृद्धाश्रम में आग लगने से कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और सात अन्य बुजुर्ग झुलस गए। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि बुधवार शाम करीब साढ़े पांच बजे कलुतारा जिले के अंगुरुवाटोटा स्थित मावपिया सेवाना वृद्धाश्रम में आग लग गई। यह स्थान कोलंबो से लगभग 65 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में है।
पुलिस ने बताया कि परिसर में 10 लोग मृत पाए गए जबकि दो अन्य बुजुर्गों ने होराना बेस अस्पताल में भर्ती होने के बाद दम तोड़ दिया। पुलिस के मुताबिक, घटना की जांच के तहत निजी वृद्धाश्रम के मालिक को बृहस्पतिवार को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने बताया कि जब आग लगी तब वृद्धाश्रम में 70 से अधिक बुजुर्ग मौजूद थे। पुलिस के अनुसार, द्वीप पर हाल के समय में आग लगने से हुई मौतों की यह सबसे 'भयानक' घटना थी।
पुलिस ने बताया कि कुल 51 निवासियों को सुरक्षित निकालकर पास के एक स्कूल में अस्थायी आवास प्रदान किया गया है। पुलिस के मुताबिक, सात घायल अब भी अस्पताल में भर्ती हैं और निवासियों व पुलिस की सहायता से आग पर काबू पा लिया गया। होराना की मजिस्ट्रेट लकमिनि विदानागामेज ने घटना की जांच की। पुलिस ने बताया कि उनकी (मजिस्ट्रेट) उपस्थिति में मलबे से झुलसे हुए शव बरामद किए गए। शुरुआती खबरों में सामने आया कि घटना के दौरान एक गैस सिलेंडर फट गया जिससे आग तेजी से फैल गई।
अधिकारियों ने बताया कि आग लगने का सटीक कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है। -
वाशिंगटन/नयी दिल्ली। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ने बंधुआ मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लागू न करने के आरोप में भारत सहित 54 देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव उन जांच के बाद सामने आया है, जो अमेरिका ने 60 देशों के खिलाफ इस आधार पर शुरू की थी कि वे बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रहे हैं। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के अधिकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण को अंतिम रूप देने के लिए नयी दिल्ली में तीन दिन की वार्ता कर रहे हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत मार्च में शुरू की गई जांच के बाद यह प्रस्ताव रखा है। यह जांच बंधुआ मजदूरी से जुड़े मुद्दों को लेकर 60 अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ शुरू की गई थी। हालांकि, यूएसटीआर ने स्पष्ट किया है कि यह अभी केवल एक प्रस्ताव है और इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इच्छुक पक्ष 22 जून तक सुनवाई में शामिल होने का अनुरोध और अपने पक्ष का सार प्रस्तुत कर सकते हैं। सुनवाई सात जुलाई को होगी। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, '' भारत धारा-301 कार्यवाही के मामले में अमेरिका के साथ संपर्क में है। साथ ही भारत दो फरवरी, 2026 को घोषित समझौते के ढांचे और सात फरवरी, 2026 को जारी संयुक्त बयान के अनुरूप अमेरिका के साथ समझौते को अंतिम रूप देने के लिए भी बातचीत कर रहा है।'' यूएसटीआर ने अधिकांश वस्तुओं पर यह अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव किया है। हालांकि, वस्त्र और परिधान उत्पादों के लिए एक विशेष व्यवस्था का भी प्रस्ताव है, जिसके तहत कुछ देशों से सीमित मात्रा में आयात को कम शुल्क पर अनुमति दी जा सकती है। जिन 54 देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क प्रस्तावित है, उनमें भारत, चीन, जापान, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, इजराइल, मलेशिया, न्यूजीलैंड, ओमान, कतर, रूस, सऊदी अरब, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, थाइलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और वियतनाम सहित अन्य देश शामिल हैं। यूएसटीआर ने कनाडा, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान और इक्वाडोर पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का भी प्रस्ताव किया है। यूएसटीआर ने कहा कि इन देशों द्वारा बंधुआ मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध नहीं लगाने से अमेरिकी व्यापार प्रभावित हो रहा है और इसलिए यह कार्रवाई धारा 301 के तहत की जा रही है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर ने एक बयान में कहा, ''हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों द्वारा बंधुआ मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात पर रोक लगाने में विफल रहना अस्वीकार्य है। इससे ऐसी स्थिति पैदा होती है, जिसमें अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक स्तर पर असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।'' भारत ने बंधुआ मजदूरी संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए अमेरिका से इन जांच को समाप्त करने की मांग की है। भारत का कहना है कि ऐसे मुद्दों का समाधान दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के ढांचे के भीतर किया जाना चाहिए। यूएसटीआर का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने के लिए नयी दिल्ली में तीन दिवसीय वार्ता हो रही है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उसके मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच कर रहे हैं, जबकि भारतीय पक्ष का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन कर रहे हैं। दोनों देशों ने सात फरवरी को अंतरिम व्यापार समझौते या बीटीए के पहले चरण की रूपरेखा को अंतिम रूप देने संबंधी संयुक्त बयान जारी किया था। आर्थिक शोध संस्थान 'ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव' (जीटीआरआई) ने कहा कि अमेरिका द्वारा धारा-301 जांच के तहत भारत पर प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत शुल्क प्रावधान के दायरे से बाहर है और भारत को इसे चुनौती देनी चाहिए। जीटीआरआई के अनुसार, 12.5 प्रतिशत का यह शुल्क अमेरिका की विश्व व्यापार संगठन प्रतिबद्धताओं से अधिक है। जीटीआरआई ने कहा, '' वर्तमान जांच धारा-301 के दायरे से बाहर है, जो जांच के दायरे में आ रहे देश के आयात व उनके स्रोत से नहीं बल्कि अमेरिकी कंपनियों के सामने आने वाली बाजार पहुंच बाधाओं से संबंधित है।'' आर्थिक शोध संस्थान के अनुसार, यह जांच इस आरोप पर आधारित नहीं है कि निर्यात किए जाने वाले भारतीय उत्पाद बंधुआ मजदूरी से तैयार किए जाते हैं, बल्कि यूएसटीआर की कार्रवाई इस बात पर केंद्रित है कि क्या देश तीसरे देशों में बंधुआ मजदूरी से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाते हैं। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत को यह तर्क देना चाहिए कि अमेरिका एकतरफा व्यापार उपायों के जरिये अपने पसंदीदा आयात-नियंत्रण ढांचे को अन्य देशों पर थोपने की कोशिश कर रहा है, जो धारा-301 के दायरे से बाहर है।
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नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है, लेकिन इसी बीच अमेरिका ने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है जिससे भारत की चिंता बढ़ सकती है। अमेरिका ने भारत समेत 60 देशों से आने वाले सामान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की बात कही है।
अमेरिका का कहना है कि इन देशों ने ऐसे सामान के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं, जो जबरन मजदूरी से बनाए गए हो। इसी वजह से इन देशों से आने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त टैक्स लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने कहा है कि भारत उन 54 देशों में शामिल है जिन्होंने ऐसे उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक नहीं लगाई है। इस सूची में चीन, बांग्लादेश, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, वियतनाम और ऑस्ट्रेलिया जैसे कई बड़े देश भी शामिल हैं।यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश चल रही है। अमेरिका के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच इन दिनों नई दिल्ली में भारतीय अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहे हैं। ऐसे में अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत और मुश्किल हो सकती है। अब सिर्फ आयात शुल्क और बाजार पहुंच ही नहीं, बल्कि श्रम कानूनों और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा बन सकते हैं।अमेरिका ने कहा है कि जिन देशों में जबरन मजदूरी से बने सामान पर कोई प्रभावी रोक नहीं है, वहां से आने वाले उत्पादों पर 12.5 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। वहीं जिन देशों ने इस दिशा में कुछ नियम बनाए हैं या अमेरिका के साथ कोई समझौता किया है, उनके लिए 10 फीसदी अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव है।अमेरिका का कहना है कि अगर कुछ देशों में जबरन मजदूरी से बने सामान आसानी से बाजार में पहुंच जाते हैं, तो वहां की कंपनियों की लागत कम हो जाती है। इससे उन कंपनियों को नुकसान होता है जो श्रम नियमों का पालन करती हैं। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीयर ने कहा कि दुनिया के बड़े व्यापारिक साझेदारों का इस मुद्दे पर कार्रवाई नहीं करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। इससे अमेरिकी कंपनियों और कामगारों को नुकसान होता है।क्या है सेक्शन 301?अमेरिका ने यह प्रस्ताव अपने व्यापार कानून की धारा 301 के तहत रखा है। यह कानून अमेरिका को उन देशों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार देता है, जिनकी नीतियां उसे अमेरिकी व्यापार के लिए नुकसानदायक या अनुचित लगती हैं। इस कानून के तहत अमेरिका अतिरिक्त शुल्क लगा सकता है या दूसरे व्यापारिक प्रतिबंध भी लगा सकता है। फिलहाल यह सिर्फ एक प्रस्ताव है और इस पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। लेकिन अगर इसे लागू किया जाता है तो भारत समेत कई देशों के निर्यातकों पर असर पड़ सकता है। खासकर ऐसे समय में, जब भारत और अमेरिका दोनों व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। -
वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेबनान के खिलाफ हमले को रोकने के लिए राजी कर लिया है, जिसके बाद उन्होंने अपने सैनिकों को वापस बुला लिया। ट्रंप ने सोमवार शाम को 'ट्रुथ सोशल' पर यह घोषणा की। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों नेताओं के बीच ''तीखी'' बातचीत की खबरें सामने आ रही थीं। खबरों के अनुसार ट्रंप ने नेतन्याहू से यह भी कहा कि अगर उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो इजराइल के प्रधानमंत्री आज जेल में होते । उन्होंने इजराइल के प्रधानमंत्री को उनके लोकप्रिय उपनाम से संबोधित करते हुए कहा, ''आज (सोमवार) मेरी बीबी नेतन्याहू से बातचीत हुई। मैंने उनसे लेबनान के बेरूत में कोई बड़ा हमला न करने का अनुरोध किया। उन्होंने अपनी सेना को वापस बुला लिया। धन्यवाद बीबी।'' ईरान द्वारा लेबनान पर इजराइल के हमलों को लेकर अमेरिका के साथ जारी बातचीत को खत्म करने की धमकी के बाद ट्रंप और नेतन्याहू के बीच फोन पर बातचीत हुई। नेतन्याहू ने कहा था कि अगर हिजबुल्ला इजराइल पर हमले बंद नहीं करता है तो इजराइल बेरूत में ''आतंकी ठिकानों'' पर हमला करेगा। ट्रंप ने कहा कि उनकी हिजबुल्ला के नेताओं के प्रतिनिधियों से भी बातचीत हुई, जो ''इजराइल और उसके सैनिकों पर गोलीबारी बंद करने'' पर सहमत हुए। उन्होंने कहा, ''मेरी हिजबुल्ला के नेताओं के प्रतिनिधियों से भी बातचीत हुई और वे इजराइल तथा उसके सैनिकों पर गोलीबारी बंद करने पर सहमत हुए। इसी तरह, इजराइल भी उन पर गोलीबारी बंद करने पर सहमत हो गया। देखते हैं यह कब तक चलता है - उम्मीद है कि यह हमेशा के लिए चलेगा।'' अमेरिकी मीडिया आउटलेट 'एक्सियोस' ने बताया कि ट्रंप और नेतन्याहू की फोन कॉल के दौरान तीखी बहस हुई।
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न्यूयॉर्क. अमेरिका की योग टीम चार से आठ जून तक अहमदाबाद में होने वाली पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप में भाग लेगी। अमेरिकी योग संघ (यूएसवाईए) की विज्ञप्ति के अनुसार अमेरिकी योगासन खेल महासंघ (यूएसआईएसएफ) ने यूएसवाईए और विश्व योगासन के सहयोग से यह टीम तैयार की है। विज्ञप्ति में बताया गया है कि अमेरिकी योग संघ और यूएसवाईएसएफ के संस्थापक एवं अध्यक्ष बलविंदर सिंह 11 सदस्यीय अमेरिकी टीम का नेतृत्व करेंगे। भारत में होने वाली चैंपियनशिप के लिए टीम का चयन अप्रैल में कनेक्टिकट में क्वार्टरफाइनल ट्रायल के आधार पर किया गया था। टीम में शामिल खिलाड़ियों की उम्र 10 से 55 वर्ष के बीच है और वह विभिन्न आयु वर्ग की स्पर्धाओं चुनौती पेश करेंगे। अमेरिकी योगासन टीम के सदस्यों ने भारत के अपने दौरे से पहले पिछले सप्ताह न्यूयॉर्क में भारतीय वाणिज्य दूतावास का दौरा किया और उप वाणिज्य दूतावास विशाल हर्ष से मुलाकात की। वाणिज्य दूतावास ने खिलाड़ियों को चैंपियनशिप में सफलता की शुभकामनाएं दीं। इस प्रतियोगिता में 60 से अधिक देशों के खिलाड़ियों के भाग लेने की संभावना है।
विज्ञप्ति में कहा गया है, ''यह चैंपियनशिप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकता, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने और योगासन को विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।'' इस चैंपियनशिप में प्रतियोगी सात आधिकारिक योगासन श्रेणियों में भाग लेंगे, जिनमें कलात्मक और लयबद्ध योग वर्ग शामिल हैं। इसमें खिलाड़ियों का मूल्यांकन वैश्विक मानकीकृत निर्णायक मानदंडों के तहत शक्ति, लचीलापन, संतुलन, सहनशक्ति और सटीकता के आधार पर किया जाएगा। -
बेरूत. इजराइल सरकार ने सोमवार को बेरूत के दक्षिणी उपनगर पर हमलों का आदेश दिया जबकि दूसरी ओर हिज्बुल्ला ने हाइफा शहर समेत उत्तरी इजराइल के विभिन्न क्षेत्रों पर रॉकेट दागे। इससे पहले रविवार को इजराइली थलसेना 26 साल में पहली बार लेबनान में काफी अंदर तक घुस गयी थी।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने एक संयुक्त बयान में कहा कि हिज्बुल्ला की ओर से लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन किए जाने के और इजराइली शहरों व नागरिकों पर हुए हमलों के मद्देनजर उन्होंने इजराइली सेना को बेरूत के दक्षिणी उपनगर दहिये में हमले करने का आदेश दिया है। अप्रैल के मध्य में संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान हिज्बुल्ला ने इजराइल पर हमले रोकने पर सहमति जताई थी, लेकिन लेबनान पर इजराइली हमलों के बाद हिज्बुल्ला ने फिर से हमले शुरू कर दिए। इजराइल सरकार की चेतावनी के बाद बड़ी संख्या में लोग दहिये से दूसरी जगह जाते हुए दिखे। इस दौरान जगह-जगह जाम लगा नजर आया। -
संयुक्त राष्ट्र. बांग्लादेश और साइप्रस संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए मंगलवार को आमने-सामने होंगे। इस चुनाव पर दुनिया की करीबी नजर बनी हुई है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान और साइप्रस के बहुपक्षीय मामलों के विशेष दूत एंड्रियास काकौरिस 193 सदस्यीय महासभा के 81वें सत्र की अध्यक्षता करने की दौड़ में शामिल हैं। यह सत्र सितंबर से आरंभ होगा। संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख विचार-विमर्श, नीति-निर्माण और प्रतिनिधि संस्था, महासभा दो जून को एक वर्ष के कार्यकाल के लिए अपने अगले अध्यक्ष का चुनाव करने के लिए मतदान करेगी। बारी बारी से अध्यक्ष पद के चुनाव की स्थापित प्रणाली के अनुसार, 81वें सत्र के अध्यक्ष का चुनाव एशिया-प्रशांत समूह से होगा। यह चुनाव 193 सदस्यीय महासभा द्वारा 2027-28 कार्यकाल के लिए 15 देशों की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पांच नए अस्थायी सदस्यों के चुनाव से एक दिन पहले होगा। सफल उम्मीदवार वर्तमान महासभा अध्यक्ष और जर्मनी की पूर्व विदेश मंत्री एनालेना बेरबॉक का स्थान लेगा। बेरबॉक संयुक्त राष्ट्र के 80 वर्षों के इतिहास में इस पद को संभालने वाली केवल पांचवीं महिला हैं। रहमान ने इसी वर्ष फरवरी में बांग्लादेश के विदेश मंत्री के रूप में शपथ ली। इससे पहले उन्होंने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और रोहिंग्या मुद्दे के उच्च प्रतिनिधि के रूप में कार्य किया था। काकौरिस के पास बहुपक्षीय और द्विपक्षीय कूटनीति में चार दशकों से अधिक का राजनयिक और प्रशासनिक अनुभव है। उन्होंने साइप्रस के राजदूत और अमेरिका में उच्चायुक्त सहित कई वरिष्ठ राजनयिक पदों पर कार्य किया है। वह वर्तमान में विदेश मंत्रालय में बहुपक्षीय मामलों के विशेष दूत हैं और हाल में उन्होंने मंत्रालय के स्थायी सचिव के रूप में कार्य किया है।
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वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान एक ''बहुत अच्छे समझौते'' के करीब हैं लेकिन अगर वाशिंगटन को वह नहीं मिलता जो वह चाहता है तो वह ''मामले को किसी और तरीके से खत्म करेगा। ट्रंप ने ये टिप्पणियां अपनी बहू लारा ट्रंप के साथ एक साक्षात्कार के दौरान कीं जिसका प्रसारण शनिवार रात 'फॉक्स न्यूज' पर किया गया। ट्रंप ने कहा, ''हम एक बहुत अच्छे समझौते के करीब हैं। अगर आप जल्दबाजी करेंगे तो आपको बेहतर समझौता नहीं मिल पाएगा और धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से हमें वह मिल रहा है जो हम चाहते हैं। अगर हमें वह नहीं मिला जो हम चाहते हैं, तो हम इसे किसी और तरीके से खत्म करेंग। ट्रंप ने कहा कि ईरानी ''अच्छे वार्ताकार'' हैं लेकिन ''सारे पत्ते'' अब अमेरिका के हाथ में हैं क्योंकि ईरान ''सैन्य रूप से पराजित हो चुका है''। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, ''लेकिन हम एक बहुत अच्छे समझौते के करीब हैं। अगर हम इसे कर लेते हैं, तो अच्छा है। अन्यथा, हम सीधे युद्ध विभाग से संपर्क करेंगे।'' ट्रंप ने बताया कि ईरानियों ने कहा है कि वे परमाणु हथियार विकसित नहीं कर रहे हैं। ट्रंप ने सवाल किया कि अगर ईरान परमाणु हथियार खरीद ले तो क्या होगा? उन्होंने कहा, ''मैंने कहा, अगर आप परमाणु हथियार खरीद लें तो क्या होगा? तो अब ईरान कहता है कि हम न तो कोई सैन्य हथियार विकसित करेंगे और न ही खरीदेंगे। यह एक बड़ा अंतर है।'' अमेरिकी नेता ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान पर अमेरिका का ''काफी दबदबा'' है क्योंकि उनकी नौसेना और वायुसेना ''पूरी तरह से तबाह'' हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान की सेना को पूरी तरह से नष्ट नहीं कर पाया है क्योंकि कुछ नेता अधिक उदारवादी हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के अधिक चरमपंथी तत्वों और प्रमुख नेतृत्व को निशाना बनाया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुक्रवार को अपने शीर्ष कैबिनेट सहयोगियों और सशस्त्र बलों के अधिकारियों के साथ बैठक की लेकिन यह बैठक भविष्य की कार्रवाई पर बिना किसी स्पष्टता के खत्म हो गई। अमेरिकी मीडिया संस्थान 'एक्सियोस' ने बताया कि ट्रंप ने उस समझौते में कई संशोधन करने का अनुरोध किया है जो उनके दूतों द्वारा ईरानी समकक्षों के साथ किया गया है। 'एक्सियोस' ने दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप चाहते हैं कि समझौता हो और इसे जल्द अंतिम रूप देने की उम्मीद करते हैं लेकिन वह समझौते में कुछ ऐसे बिंदुओं विशेष रूप से ईरान की परमाणु सामग्री से संबंधित बिंदुओं को सुदृढ़ करना चाहते हैं जो उनके लिए महत्वपूर्ण हैं। ट्रंप के इस अनुरोध से दोनों पक्षों के बीच एक बार फिर से बातचीत का दौर शुरू हो गया है जो कई दिनों तक जारी रहने की संभावना है। -
अंतरराष्ट्रीय शांतिरक्षक दिवस
संयुक्त राष्ट्र. भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा के प्रति अपनी ''अटूट प्रतिबद्धता'' पर जोर देते हुए यहां संयुक्त राष्ट्र में आयोजित एक कार्यक्रम में उन शांतिरक्षकों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने कर्तव्य का पालन करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। अंतरराष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षक दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र में भारत और ऑस्ट्रिया के स्थायी मिशन ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें शहीद शांति रक्षकों के सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि ''ये शांतिरक्षक दुनिया के विभिन्न हिस्सों में संकटग्रस्त क्षेत्रों में संयुक्त राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं।'' पर्वतनेनी ने कहा, ''संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों को सलाम, जिनके अथक प्रयासों से सबसे खतरनाक परिस्थितियों में भी दुनिया भर में शांति और स्थिरता बनी रहती है। भारत संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता रखता है और इस महान लक्ष्य की दिशा में अपने प्रयास जारी रखेगा।'' भारतीय मिशन ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि श्रद्धांजलि कार्यक्रम में 4,000 से अधिक उन बहादुर पुरुषों और महिलाओं, शांतिरक्षक वर्दीधारियों और आम नागरिकों को श्रद्धांजलि दी गई जिन्होंने शांति के लिए अपना जीवन कुर्बान कर दिया। मिशन ने कहा कि भारत शांति अभियानों में सबसे अधिक सैन्य योगदान देने वाले देशों में से एक है। भारत ने 1948 से अब तक 50 से अधिक संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में लगभग तीन लाख सैनिक तैनात किए हैं। भारतीय मिशन ने बताया कि लगभग 184 भारतीय शांति रक्षकों ने अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया है। अंतरराष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षक दिवस हर वर्ष 29 मई को मनाया जाता है। इस तिथि का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि 1948 में इसी दिन सुरक्षा परिषद ने पश्चिम एशिया में संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियान- संयुक्त राष्ट्र युद्धविराम पर्यवेक्षण संगठन की स्थापना की थी। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पांच जून को यह दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर महासचिव एंतोनियो गुतारेस संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा में सेवारत उन पुरुषों और महिलाओं को श्रद्धांजलि देंगे जिन्होंने शांति के लिए अपना जीवन बलिदान किया। इसके बाद वह उन 68 सैन्य, पुलिस और असैन्य शांतिरक्षकों को मरणोपरांत 'डैग हैमरस्कजोल्ड पदक' प्रदान करेंगे जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपनी जान गंवाई। इनमें से 59 की मृत्यु पिछले वर्ष हुई थी। -
वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आधिकारिक आवास एवं कार्यालय'व्हाइट हाउस' में शुक्रवार को अपने सलाहकारों के साथ बैठक की लेकिन ईरान के साथ युद्धविराम की अवधि बढ़ाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने संबंधी प्रस्तावित समझौते पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं किया है। इस बीच ईरान ने भी कहा है कि यह समझौता अभी अंतिम रूप नहीं ले पाया है।
बैठक से पहले ट्रंप ने कहा था कि वह इस मुद्दे पर ''अंतिम निर्णय'' लेने वाले हैं। हालांकि, बाद में प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ लगभग दो घंटे चली बैठक बिना किसी निर्णय के समाप्त हो गई। अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि ट्रंप केवल उसी समझौते को मंजूरी देंगे जो उनकी ''तय शर्तों'' को पूरा करे और ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर अंकुश लगाए। ट्रंप ने यह उच्चस्तरीय बैठक ऐसे समय में की जब एक दिन पहले कई मीडिया संस्थानों ने खबर दी थी कि अमेरिकी और ईरानी वार्ताकार एक प्रारंभिक समझौते पर सहमत हो गए हैं जिसके तहत मौजूदा नाजुक युद्धविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ाया जाएगा और ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर फिर से वार्ताएं शुरू होंगी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''ईरान को यह मानना होगा कि वह कभी परमाणु हथियार या बम नहीं बनाएगा।'' उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए खोला जाना चाहिए और वहां बिछाई गई सभी समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाया जाना चाहिए। वहीं, ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बघेर कालिबाफ ने शुक्रवार को कहा कि ईरान को ''गारंटी या शब्दों पर नहीं'', बल्कि केवल ठोस कार्रवाई पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में अमेरिका और इजराइल द्वारा दो बार हमले किए जाने के बाद अविश्वास बना हुआ है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''दूसरा पक्ष कार्रवाई नहीं करेगा तो ईरान भी कोई कदम नहीं उठाएगा। हम बातचीत से नहीं, बल्कि मिसाइलों से रियायतें हासिल करते हैं।'' ट्रंप की बैठक समाप्त होने से पहले ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी प्रसारक से कहा कि समझौता ''अभी अंतिम रूप नहीं ले पाया है।'' अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बृहस्पतिवार को संकेत दिया था कि वार्ताकार ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि विस्तृत शर्तों पर आगे की वार्ताओं में चर्चा होगी। हालांकि, बघाई ने कहा कि ईरानी अधिकारी फिलहाल ''युद्ध समाप्त करने पर ध्यान लगा रहे हैं और इस समय परमाणु योजना के विवरण पर चर्चा नहीं कर रहे हैं।'' ईरान चाहता है कि किसी भी समझौते में इजराइल और लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्ला के बीच युद्धविराम भी शामिल हो। साथ ही, वह विदेशों में फ्रीज अरबों डॉलर के अपने फंड जारी कराने की मांग भी कर रहा है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''ईरान शर्तें तय करेगा : नकद के बदले नकद, लाभ के बदले लाभ, मुफ्त में कुछ नहीं।'' -
जोहानिसबर्ग. भारत के लोकप्रिय गायक अनूप जलोटा को दक्षिण अफ्रीका में भारतीय प्रवासियों द्वारा भारत की संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए स्थापित उत्तर प्रदेश देवभूमि संगठन (यूपीडेस) की मानद सदस्यता सोमवार को प्रदान की गई। जलोटा ने सप्ताहांत में डर्बन और जोहानिसबर्ग में दो संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किए। उन्होंने वहां के भारतीय मूल के लोगों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पांच पीढ़ियों से अपनी संस्कृति को जीवित रखा है। अमेरिका में संगीत कार्यक्रम की यात्रा पर रवाना होने से पहले 'पीटीआई-भाषा' को दिए साक्षात्कार में जलोटा ने याद किया कि वह और भारत के कई अन्य प्रमुख कलाकार दशकों तक दक्षिण अफ्रीका में अपने प्रशंसकों के लिए कार्यक्रम करना चाहते थे, लेकिन संयुक्त राष्ट्र में 1948 से रंगभेद के खिलाफ वैश्विक मुहिम का नेतृत्व कर रही भारत सरकार के कड़े रुख के कारण उन्हें वहां कार्यक्रम प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं मिल सकी। उन्होंने कहा, ''हम दक्षिण अफ्रीका जाकर कार्यक्रम करने के लिए बेहद उत्सुक थे, लेकिन हमें अनुमति नहीं मिली। हम बस दक्षिण अफ्रीका को छोड़कर पूरी दुनिया की यात्रा करते थे। हमने भारत सरकार से कई बार अनुरोध किया, लेकिन हर बार जवाब यही मिला कि संबंध ठीक नहीं हैं, इसलिए वहां मत जाओ।'' जलोटा ने बिना नाम लिए दावा किया कि कुछ भारतीय कलाकारों ने नियमों की अनदेखी कर दक्षिण अफ्रीका की यात्रा की थी। नेल्सन मंडेला की 27 साल की राजनीतिक कैद के बाद रिहाई होने पर भारत ने अपना रुख बदला और जलोटा उन पहले भारतीय कलाकारों में शामिल थे, जिन्होंने मंडेला के राष्ट्रपति बनने से ठीक पहले दक्षिण अफ्रीका की यात्रा की। जलोटा ने कहा कि तब से वह दक्षिण अफ्रीका में कई बार कार्यक्रम कर चुके हैं और हर बार दर्शकों ने उनके भजनों और गजलों को बड़े उत्साह से सराहा है। उन्होंने कहा, ''दक्षिण अफ्रीका हमारा छोटा भारत है। पांच पीढ़ियां बीत जाने के बाद भी यहां के लोगों ने अपनी संस्कृति को जीवित रखा है। वे अब भी रामायण का पाठ करते हैं, हनुमान चालीसा के कार्यक्रम आयोजित करते हैं और हिंदू विष्णु परिषद भी सक्रिय है। यह देखना बेहद प्रभावशाली है कि इन्होंने अपनी संस्कृति और कला को कैसे जीवित रखा है।'' हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भाषा के क्षेत्र में अभी और काम किए जाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ''मेरा मानना है कि हिंदी सिखाने के लिए विद्यालय पहले से खुल रहे हैं। अगर ये लोग हिंदी में बात कर सकें, तो संस्कृति का प्रसार और तेजी से होगा। मुझे उम्मीद है कि ऐसा जरूर होगा।'' जलोटा ने संगठन के संस्थापक एवं अध्यक्ष आशीष शर्मा की भी प्रशंसा की, जिन्होंने उनकी मेजबानी की और उन्हें मानद सदस्यता प्रदान की। उन्होंने कहा, ''मैं स्वयं उत्तर प्रदेश से हूं और इस संगठन का हिस्सा बनकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं।'' शर्मा ने कहा कि 'यूपीडेस' अविभाजित उत्तर प्रदेश के उन क्षेत्रों की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने का काम करता है, जो अब उत्तराखंड के नाम से जाने जाते हैं। उन्होंने कहा, ''उत्तराखंड की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने के लिए अनूप जी से बेहतर कोई नहीं हो सकता, क्योंकि वह भजन सम्राट हैं। वे हमें हमारी संस्कृति से जोड़े रखते हैं और हमारे उद्देश्यों को पूरा करने में सच्चे सहायक हैं।'' जलोटा ने सोमवार को अपने सम्मान में आयोजित एक स्वागत समारोह में भारतीय मूल के कुछ युवा दक्षिण अफ्रीकी गायकों की भी सराहना की, जिन्होंने उनके चर्चित गीत प्रस्तुत किए। -
कराची. पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में रविवार को एक 'शटल' ट्रेन में एक शक्तिशाली विस्फोट में कम से कम 20 लोगों के मारे जाने और कई लोगों के घायल होने की आशंका है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। प्रतिबंधित बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने विस्फोट की जिम्मेदारी ली है।
सरकारी समाचार एजेंसी 'एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान' की खबर के अनुसार, 'शटल' ट्रेन क्वेटा छावनी से शहर के रेलवे स्टेशन की ओर जा रही थी कि तभी चमन फाटक के पास इसे निशाना बनाया गया। बीएलए के एक प्रवक्ता ने बताया कि यह हमला तब किया गया जब ट्रेन छावनी क्षेत्र से सैन्य कर्मियों को ले जा रही थी। सरकार ने हालांकि अब तक आधिकारिक तौर पर 14 लोगों की मौत की पुष्टि की, जिनमें फ्रंटियर कोर के तीन जवान शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 20 लोगों के मारे जाने की आशंका है जबकि मीडिया में प्रकाशित खबरों में मरने वालों की संख्या इससे अधिक बताई गई है। पाकिस्तान के रेल मंत्री हनीफ अब्बासी ने कहा कि 'शटल' ट्रेन में असैन्य यात्री भी थे और विस्फोट से इंजन व तीन डिब्बे प्रभावित हुए। विस्फोट इतना जोरदार था कि आसपास के वाहनों के शीशे और आस-पास की इमारतों के शीशे चकनाचूर हो गए।
अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन में सवार अधिकांश यात्री आगामी ईद के त्यौहार के लिए अपने घर जाने वाली संपर्क ट्रेनों को पकड़ने की प्रतीक्षा कर रहे थे। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा, "आतंकवाद के ऐसे कायरतापूर्ण कृत्य पाकिस्तान की जनता के संकल्प को कमजोर नहीं कर सकते।" उन्होंने कहा, "हम आतंकवाद के हर रूप को खत्म करने के अपने संकल्प पर अडिग हैं।"
जियो न्यूज की एक खबर के अनुसार, रेलवे अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर विस्फोट के बाद पेशावर जाने वाली जाफर एक्सप्रेस को क्वेटा रेलवे स्टेशन पर रोक दिया। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता बाबर यूसुफजई ने कहा कि विस्फोट के बाद सभी संबंधित संस्थानों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। उन्होंने जनता से विस्फोट स्थल के पास इकट्ठा न होने का आग्रह किया ताकि सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और आपातकालीन टीमों को बिना किसी बाधा के बचाव कार्य करने में मदद मिल सके। -
संयुक्त राष्ट्र. लेबनान में संयुक्त राष्ट्र मिशन में सेवारत भारतीय शांतिरक्षक, मेजर अभिलाषा बराक को विश्व संस्था द्वारा प्रतिष्ठित ''यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड'' के लिए नामित किया गया है। पश्चिम एशियाई देश में तैनाती के दौरान महिलाओं और लड़कियों के साथ किए गए संपर्क प्रयासों के लिए बराक को 2025 का ''यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड'' प्रदान किया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि मेजर अभिलाषा बराक को 2025 का 'यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड' प्रदान किया जाएगा। उन्हें महिलाओं और किशोरियों के साथ संपर्क कायम करने और सामुदायिक गतिविधियों तथा शांतिरक्षकों को लैंगिक संवेदनशीलता प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए सम्मानित किया जा रहा है।'' बराक संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल लेबनान (यूएनआईएफआईएल) में महिला सहभागिता दल (एफईटी) की कमांडर के रूप में भारतीय बटालियन में कार्यरत हैं। वह भारतीय सेना की पहली महिला लड़ाकू हेलीकॉप्टर पायलट भी हैं। उन्हें संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 29 मई को सम्मानित किया जाएगा। विश्व संस्था 29 मई को हर वर्ष संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों के अंतरराष्ट्रीय दिवस का आयोजन करती है। भारत के लिए यह गर्व का क्षण है, क्योंकि बराक देश की तीसरी महिला हैं जिन्हें लैंगिक समानता के संबंध में उनके कार्यों के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है। बराक से पहले मेजर सुमन गवानी और मेजर राधिका सेन को संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में उनके सराहनीय कार्य के लिए सम्मानित किया गया था। गवानी ने दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (यूएनएमआईएसएस) में अपनी सेवाएं दी थीं और उन्हें वर्ष 2019 का 'यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड' प्रदान किया गया था। उन्हें यह सम्मान मध्य अफ्रीकी गणराज्य में संयुक्त राष्ट्र बहुआयामी एकीकृत स्थिरीकरण मिशन (एमआईएनयूएससीए) में कार्यरत ब्राजील की नौसेना अधिकारी कमांडर कार्ला मोंटेइरो डी कास्त्रो अरौजो के साथ संयुक्त रूप से दिया गया था। कांगो गणराज्य में संयुक्त राष्ट्र संगठन स्थिरीकरण मिशन (एमओएनयूएससीओ) में सेवा दे चुकीं मेजर राधिका सेन को प्रतिष्ठित 2023 'यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया। शांति अभियान विभाग (डीपीओ) के अंतर्गत सैन्य मामलों के कार्यालय द्वारा 2016 में स्थापित यह पुरस्कार, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प 1325 (महिला, शांति एवं सुरक्षा) के सिद्धांतों को बढ़ावा देने में एक सैन्य शांतिरक्षक के समर्पण और प्रयासों को मान्यता देता है। यह पुरस्कार उस सैन्य शांतिरक्षक के योगदान को रेखांकित करता है, जिसने शांति स्थापना गतिविधियों में लैंगिक दृष्टिकोण को सबसे प्रभावी ढंग से शामिल किया हो।
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वाशिंगटन. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बृहस्पतिवार को नयी दिल्ली की अपनी पहली यात्रा से पहले कहा कि अमेरिका भारत को उतनी ही ऊर्जा बेचने के लिए तैयार है जितनी भारत खरीदने को तैयार होगा। स्वीडन और भारत की यात्रा पर रवाना होते समय मियामी में पत्रकारों के साथ बातचीत में रूबियो ने नयी दिल्ली को एक ''महान साझेदार'' बताया और कहा कि उनकी यह यात्रा महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उन्हें क्वाड देशों के मंत्रियों से मिलने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा, ''हम उन्हें उतनी ऊर्जा बेचना चाहते हैं जितनी वे खरीद सकें। और जाहिर है, आपने देखा होगा कि मुझे लगता है कि हम अमेरिकी उत्पादन और निर्यात के ऐतिहासिक स्तर पर हैं।'' रूबियो 23 से 26 मई तक भारत में रहेंगे और कोलकाता, आगरा, जयपुर तथा नयी दिल्ली का दौरा करेंगे।
रूबियो ने कहा, "हम और अधिक करना चाहते हैं। हम पहले से ही उनसे और अधिक करने के लिए बातचीत कर रहे थे। हम चाहते हैं कि वे अपने पोर्टफोलियो में उनका बड़ा हिस्सा शामिल करें। हमें वेनेजुएला के तेल में भी अवसर दिखाई देते हैं।" वह होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण भारत पर ऊर्जा की ऊंची कीमतों के प्रभाव से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। रूबियो ने कहा, "वे हमारे महान सहयोगी और महान साझेदार हैं। हम उनके साथ मिलकर बहुत अच्छा काम करते हैं। इसलिए यह एक महत्वपूर्ण यात्रा है। मुझे खुशी है कि हम यह यात्रा कर पा रहे हैं क्योंकि मुझे लगता है कि हमें इस दौरान कई विषयों पर चर्चा करने का मौका मिलेगा।'' उन्होंने कहा, "हम वहां क्वाड के साथ भी बैठक करेंगे, जो महत्वपूर्ण है। मुझे लगता है कि विदेश मंत्री के रूप में मेरी पहली बैठक क्वाड के साथ ही हुई थी। मुझे खुशी है कि हम अब भारत में ऐसा कर पा रहे हैं और हम इस साल के अंत में भी एक बैठक करेंगे।'' रूबियो ने कहा कि वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज भी अगले सप्ताह भारत पहुंचने वाली हैं और नयी दिल्ली के साथ काम करने के कई अवसर मिलेंगे। क्वाड की बैठक 26 मई को होगी, जिसमें रूबियो, ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापानी विदेश मंत्री मोटेगी तोशिमित्सु के शामिल होने की उम्मीद है, जबकि भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर इसकी अध्यक्षता करेंगे। रूबियो की कोलकाता यात्रा लगभग चौदह वर्षों में किसी अमेरिकी विदेश मंत्री की पहली यात्रा होगी। अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने 2012 में कोलकाता की यात्रा की थी। - रोम. भारत और इटली ने बुधवार को अपने संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति जताई, रक्षा औद्योगिक रूपरेखा को अंतिम रूप दिया और 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक बढ़ाने के साझा लक्ष्य की पुष्टि की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी इतालवी समकक्ष जॉर्जिया मेलोनी ने बढ़ती भू-राजनीतिक उथल-पुथल के मद्देनजर द्विपक्षीय संबंधों को विस्तार देने के लिए व्यापक वार्ता की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में उत्पन्न स्थिति और क्षेत्र के साथ-साथ दुनिया के बाकी हिस्सों पर पड़ने वाले इसके प्रभावों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए संवाद और कूटनीति के जरिये संघर्ष का समाधान निकालने पर जोर दिया। मोदी और मेलोनी ने नौवहन की स्वतंत्रता और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन को पुनः शुरू करने का भी आह्वान किया। मोदी-मेलोनी वार्ता के बाद भारत और इटली ने एक रक्षा औद्योगिक रूपरेखा जारी की, जिसका उद्देश्य हेलीकॉप्टर और समुद्री हथियारों सहित अन्य सैन्य उपकरणों के साझा विकास एवं उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करना है। इसके अलावा, दोनों देशों ने इटली में भारतीय नर्सों के आवागमन और उच्च शिक्षा के लिए नयी रूपरेखा को भी अंतिम रूप दिया। दोनों पक्षों ने 10 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, जिनमें महत्वपूर्ण खनिज, कृषि, समुद्री परिवहन और समुद्री उत्पादों के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने से जुड़े करार शामिल हैं। मोदी अपनी पांच देशों की यात्रा के अंतिम चरण में मंगलवार रात रोम पहुंचे थे। उनकी इस यात्रा का मकसद रक्षा एवं सुरक्षा, व्यापार एवं निवेश, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना था। मोदी और मेलोनी ने जनवरी में अंतिम रूप दिए गए भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने पर सहमति जताई और इसके शीघ्र कार्यान्वयन का आह्वान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ''मुझे खुशी है कि हम अपने संबंधों को एक विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ा रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ''भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-29 हमारी साझेदारी के लिए एक व्यावहारिक और भविष्योन्मुखी ढांचा प्रदान करती है। हम इस पर समयबद्ध तरीके से प्रगति कर रहे हैं। हमारे संयुक्त प्रयासों के जरिये द्विपक्षीय व्यापार तेजी से 20 अरब यूरो के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।'' इस बीच, मेलोनी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहां चीन अपनी सैन्य मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है। इतालवी प्रधानमंत्री ने भारत-इटली संबंधों को मौजूदा रणनीतिक साझेदारी से विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाए जाने का भी जिक्र किया। एक महत्वपूर्ण कदम के तहत, दोनों पक्षों ने भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-29 की समीक्षा करने और विशेष रणनीतिक साझेदारी को मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए विदेश मंत्रियों के नेतृत्व में एक तंत्र स्थापित करने पर भी सहमति जताई। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मोदी और मेलोनी व्यापार एवं निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं नवाचार, अंतरिक्ष, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, शिक्षा और सांस्कृतिक जुड़ाव में सहयोग और बढ़ाने पर सहमत हुए। मोदी ने कहा, ''प्रौद्योगिकी और नवाचार हमारी साझेदारी के आधार हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष और असैन्य परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में हमारे बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''हम भारत-इटली नवाचार केंद्र पर काम कर रहे हैं, ताकि दोनों देशों के स्टार्टअप, अनुसंधान केंद्रों और उद्योगों को जोड़ा जा सके।'' उन्होंने कहा कि रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग ''गहरे आपसी विश्वास'' का प्रतीक है। मोदी ने कहा, ''दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के साथ-साथ हमारी सेनाओं के बीच भी सहयोग बढ़ रहा है।''दोनों प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त आशय घोषणा और रक्षा औद्योगिक रूपरेखा को अपनाने का स्वागत किया, जो हेलीकॉप्टर, नौसैनिक प्लेटफॉर्म, समुद्री हथियार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध कौशल सहित तकनीकी सहयोग, सह-उत्पादन और सह-विकास परियोजनाओं के लिए साझेदारी को बढ़ावा देगा। मोदी ने कहा कि दोनों पक्ष जहाजरानी, बंदरगाह आधुनिकीकरण, रसद और समुद्री अर्थव्यवस्था पर मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा, ''हमने तीसरे देशों में भी अपनी लाभकारी साझेदारी का विस्तार करने पर चर्चा की। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए, हम अफ्रीका में ठोस परियोजनाओं पर काम करने के लिए सहमत हुए।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इटली इस बात पर एकमत हैं कि आतंकवाद मानवता के लिए गंभीर चुनौती है और इसके वित्तपोषण के खिलाफ दोनों पक्षों की संयुक्त पहल ने पूरी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा, ''भारत और इटली ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि जिम्मेदार लोकतंत्र न केवल आतंकवाद की निंदा करते हैं, बल्कि इसके वित्तीय नेटवर्क को बाधित करने के लिए ठोस कदम भी उठाते हैं।'' मोदी ने कहा, ''हम यूक्रेन, पश्चिम एशिया और अन्य क्षेत्रों में संघर्षों के संबंध में लगातार संपर्क में हैं। भारत का स्पष्ट मत है कि सभी समस्याओं का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए।'' दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) पर सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की तथा वैश्विक व्यापार, संपर्क और समृद्धि को नया रूप देने में इसकी परिवर्तनकारी क्षमता को मान्यता दी। मोदी और मेलोनी ने परियोजना को लेकर हुई प्रारंभिक चर्चाओं की सराहना करते हुए 2026 में होने वाली पहली आईएमईसी मंत्रिस्तरीय बैठक में इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया। मोदी और मेलोनी ने छात्रों, शोधकर्ताओं और कुशल श्रमिकों की आवाजाही बढ़ाने पर सहमति जताई। इसमें विशेष रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) क्षेत्रों में जोर दिया गया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इतालवी अंतरिक्ष एजेंसी और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बीच सहयोग और वाणिज्यिक अंतरिक्ष सहयोग को मजबूत करने के प्रयासों का भी स्वागत किया। एक संयुक्त घोषणा के अनुसार, मोदी और मेलोनी ने आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की।इसमें कहा गया है कि दोनों नेताओं ने आतंकवादियों और आतंकवादी समूहों तथा उनके सहयोगियों के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया, जिनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की 1267 प्रतिबंध प्रणाली में सूचिबद्ध लोग भी शामिल हैं। संयुक्त घोषणा के अनुसार, ''दोनों नेताओं ने सभी देशों से वित्तीय कार्रवाई कार्य बल के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों एवं बुनियादी ढांचे को नष्ट करने, आतंकवादी नेटवर्क का सफाया करने और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने की दिशा में काम जारी रखने का आह्वान किया।'
- रोम. खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि और ग्रामीण विकास में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें बुधवार को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने प्रतिष्ठित 'एफएओ एग्रीकोला' पदक से सम्मानित किया। पांच देशों की अपनी यात्रा के अंतिम चरण के तहत मंगलवार रात इटली पहुंचे मोदी ने रोम में संयुक्त राष्ट्र के एफएओ मुख्यालय में एफएओ महानिदेशक डॉ. क्वू डोंग्यू से यह पुरस्कार ग्रहण किया। मोदी ने कहा कि यह सम्मान खाद्य सुरक्षा, सतत विकास और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों के अथक परिश्रम के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "यह भारत के लाखों किसानों, पशुपालकों, मछली पालकों, कृषि वैज्ञानिकों और श्रमिकों का सम्मान है। यह भारत की उस अटूट प्रतिबद्धता का भी सम्मान है, जिसके केंद्र में मानव कल्याण, खाद्य सुरक्षा और सतत विकास निहित हैं।" 'एफएओ एग्रीकोला' पदक एफएओ द्वारा उन विशिष्ट व्यक्तियों को दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मानों में से एक है, जिन्होंने वैश्विक खाद्य सुरक्षा, बेहतर पोषण और कृषि विकास की दिशा में प्रयासों को आगे बढ़ाने में असाधारण भूमिका निभाई है। भारत में कृषि प्रधान जीवन के महत्व को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि कृषि, धरती माता और भारतीय जनता के बीच एक पवित्र बंधन है। अपने संबोधन में मोदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी भारतीय कृषि की नई शक्ति बन रही है।उन्होंने कहा, ''हमारा मानना है कि कृषि का भविष्य केवल 'अधिक उत्पादन' करना नहीं है, बल्कि 'बेहतर उत्पादन' है। इसी सोच से प्रेरित होकर हम जैव विविधता को बढ़ाने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।'' उन्होंने कहा,''हमारे लिए खाद्य सुरक्षा केवल एक नीतिगत मामला नहीं है बल्कि यह मानवता के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।'' इससे पहले, मोदी का डॉ. डोंग्यू ने गर्मजोशी से स्वागत किया। एफएओ मुख्यालय की उनकी यात्रा पिछले 30 वर्षों में किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की पहली यात्रा थी। महानिदेशक के साथ अपनी मुलाकात के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की कृषि और खाद्य सुरक्षा में एफएओ के महत्वपूर्ण योगदान को याद किया।
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जोहानिसबर्ग. दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के दो वैज्ञानिक उन 38 लोगों में शामिल हैं जिन्हें जन स्वास्थ्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया है। प्रोफेसर सलीम अब्दुल करीम और प्रोफेसर कीर्तन धेड़ा को मंगलवार को प्रिटोरिया में राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा द्वारा 'ऑर्डर ऑफ मापुंगुब्वे' से सम्मानित किया गया। यह विशेष सम्मान दक्षिण अफ्रीका के उन नागरिकों को दिया जाता है जिन्होंने दक्षिण अफ्रीका और वैश्विक समुदाय को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने के लिए असाधारण उपलब्धियां हासिल की हैं। करीम को 'गोल्ड ऑर्डर ऑफ मापुंगुब्वे' से सम्मानित किया गया। उनके प्रशस्ति पत्र में चिकित्सा विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य में उनके महत्वपूर्ण योगदान, विशेष रूप से एचआईवी/एड्स और तपेदिक (टीबी) महामारी विज्ञान में उनके अभूतपूर्व शोध और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति विकास में उनके असाधारण नेतृत्व को रेखांकित किया गया है। हालांकि, करीम व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने राजकीय सम्मान के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह सम्मान टीम के सदस्यों और यहां तक कि अध्ययन में शामिल किये गए मरीजों को संयुक्त रूप से दिया जाना चाहिए। 'सिल्वर ऑर्डर ऑफ मापुंगुब्वे' से सम्मानित किये गए धेड़ा के प्रशस्ति पत्र में फेफड़ा विज्ञान में उनके वैज्ञानिक अनुसंधान को सराहा गया है, जिसने तपेदिक और दवा प्रतिरोधी श्वसन संक्रमण के नैदानिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन में क्रांति लाई है। राष्ट्रपति रामफोसा ने कहा, ''इस वर्ष सम्मानित किये गए सभी लोगों की उपलब्धियां वैज्ञानिक और चिकित्सा क्षेत्र में सर्वोत्तम कार्यों के वैश्विक केंद्र के रूप में हमारे देश की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को दर्शाती हैं।
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रोम. इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने 'मेलोडी' टॉफी भेंट किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया है। इस हल्के-फुल्के पल ने सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं से जुड़े चर्चित 'मेलोडी' शब्द को फिर से चर्चा में ला दिया। मेलोनी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह कहती सुनाई दे रही हैं, "प्रधानमंत्री मोदी मेरे लिए एक बहुत ही अच्छी टॉफी लेकर आए हैं—मेलोडी।" उन्होंने वीडियो के साथ लिखा, "उपहार के लिए धन्यवाद।"
बुधवार को अपलोड किए गए इस वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी भी नजर आते हैं और मेलोनी के 'मेलोडी' टॉफी के जिक्र पर हंसते दिखाई देते हैं। मोदी और मेलोनी के नामों के संयोजन के तौर पर 'मेलोडी' हैशटैग पहली बार इटली की प्रधानमंत्री ने 2023 में दुबई में आयोजित कॉप-28 सम्मेलन के दौरान गढ़ा था। इसके बाद दोनों नेताओं की वैश्विक मंचों पर हुई गर्मजोशी भरी मुलाकातों के बीच यह सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मेलोनी ने उस समय भी सोशल मीडिया पर मोदी के साथ तस्वीर साझा करते हुए 'मेलोडी' हैशटैग के साथ लिखा था, "कॉप-28 में अच्छे दोस्त।" प्रधानमंत्री मोदी 15 से 20 मई तक संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की पांच देशों की अपनी यात्रा के अंतिम चरण में मंगलवार को रोम पहुंचे। वह इटली की प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर यहां आए हैं, जहां दोनों नेता व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। -
बीजिंग. चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उनके रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को यहां द्विपक्षीय संबंधों और ईरान, यूक्रेन युद्ध तथा व्यापार सहित प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर व्यापक वार्ता की। दोनों नेताओं की यह बातचीत इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले 14-15 मई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीजिंग की यात्रा पर आए थे और उन्होंने भी शी चिनफिंग के साथ ईरान और यूक्रेन युद्ध से लेकर द्विपक्षीय व्यापारिक तनाव और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर व्यापक चर्चा की थी। 'ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल' में वार्ता से पहले, शी चिनफिंग ने पुतिन का औपचारिक स्वागत किया। औपचारिक स्वागत के बाद द्विपक्षीय वार्ता हुई। मंगलवार रात यहां पहुंचे पुतिन का स्वागत चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने किया।
अपनी यात्रा से पहले मंगलवार को दिए गए एक वीडियो संबोधन में पुतिन ने कहा कि रूस-चीन संबंध "वास्तव में अभूतपूर्व स्तर" पर पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच नियमित उच्च स्तरीय सहयोग द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने और उनकी "असीमित क्षमता" को उजागर करने के प्रयासों का एक अभिन्न अंग हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि शी और पुतिन द्विपक्षीय संबंधों, विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग और आपसी हित के अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार करेंगे। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने सोमवार को एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ''यह पुतिन की चीन की 25वीं यात्रा है'' और उन्होंने बीजिंग और मॉस्को के बीच घनिष्ठ रणनीतिक संबंधों को रेखांकित किया। पुतिन की यह यात्रा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर वैश्विक चिंताओं के बीच हो रही है। ये तनाव ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी के बाद पैदा हुआ है। ईरान रूस और चीन दोनों का करीबी रणनीतिक साझेदार है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चीन ईरान से 90 प्रतिशत तेल आयात करता है। -
ओस्लो/ भारत और नॉर्डिक देशों ने मंगलवार को अपने संबंधों को हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ ऊर्जा, स्थिरता, नवाचार, उभरती प्रौद्योगिकियों और अन्य प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए नॉर्डिक देशों के समकक्षों के साथ वार्ता की। ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के बाद एक संयुक्त प्रेस बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक तनाव और संघर्ष के इस दौर में भारत और नॉर्डिक देश नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, ''चाहे वह यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, हम संघर्षों के शीघ्र समाधान और शांति प्रयासों का समर्थन करना जारी रखेंगे।''
अन्य नॉर्डिक नेताओं ने भी नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने के मोदी के आह्वान का समर्थन किया। नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ने कहा, ''हमने अंतरराष्ट्रीय कानून के समर्थन पर ध्यान केंद्रित किया, एक नियम-आधारित व्यवस्था और यूक्रेन में न्यायपूर्ण एवं स्थायी शांति की आवश्यकता पर जोर दिया और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का कूटनीतिक समाधान खोजने का प्रयास किया।'' फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो ने कहा कि नॉर्डिक देशों के भारत के साथ कई साझा उद्देश्य हैं, जिनमें नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करना शामिल है। मोदी ने आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रन फ्रॉस्टडॉटिर, फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन, नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन की मौजदूगी में कहा, ''लोकतंत्र, कानून के शासन और बहुपक्षवाद के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता हमें स्वाभाविक साझेदार बनाती है।' मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्डिक देशों का ''आतंकवाद को लेकर एक स्पष्ट और एकजुट रुख है : कोई समझौता नहीं, कोई दोहरा मापदंड नहीं।'' उन्होंने कहा, ''आज हमने भारत-नॉर्डिक देशों के संबंधों को हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का निर्णय लिया है।
इस हरित प्रौद्योगिकी साझेदारी के जरिये हम पूरी दुनिया के लिए एक बेहतर भविष्य सुनिश्चित करेंगे।'' मोदी ने कहा, ''इससे नवाचार, व्यापकता और प्रतिभा का संयोजन होगा, साथ ही स्थिरता, विश्वसनीय प्रौद्योगिकियों और मानवता के बेहतर भविष्य के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाया जाएगा।'' प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि शिखर सम्मेलन ने नॉर्डिक क्षेत्र के साथ भारत की साझेदारी के बढ़ते दायरे और मजबूती को दर्शाया। नेताओं ने स्थिरता, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, उभरती प्रौद्योगिकियों और अन्य क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की। मोदी ने कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार ''आवश्यक और बहुत महत्वपूर्ण'' है। उन्होंने कहा कि आज की चर्चा में स्थिरता, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, उभरती प्रौद्योगिकियों और शांतिपूर्ण एवं समृद्ध भविष्य के लिए सहयोग को मजबूत करने समेत कई पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा, ''भारत और नॉर्डिक देश साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, विश्वास और मानव-केंद्रित विकास को लेकर एकजुट हैं।'' मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्डिक देशों ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि व्यापारिक संबंध मजबूत हुए हैं और निवेश संबंधी संबंध काफी प्रगाढ़ हुए हैं। मोदी ने कहा कि नॉर्डिक देशों के निवेश कोष भी भारत के तीव्र विकास में महत्वपूर्ण भागीदार बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में नॉर्डिक देशों से भारत में निवेश में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मोदी ने कहा, ''तेजी से बढ़ते व्यापार और निवेश ने न केवल भारत की विकास गाथा में योगदान दिया है, बल्कि नॉर्डिक अर्थव्यवस्थाओं में भी बहुत सकारात्मक भूमिका निभाई है, जिससे हजारों नये रोजगार सृजित हुए हैं।'' मोदी ने कहा कि दोनों पक्षों ने संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण पहल की हैं, जिनमें नॉर्वे, आइसलैंड और अन्य ईएफटीए देशों के साथ व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता, भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता शामिल हैं और इसमें डेनमार्क, फिनलैंड और स्वीडन भी भागीदार हैं। उन्होंने कहा, ''इन महत्वाकांक्षी व्यापार समझौतों के साथ हम भारत और नॉर्डिक देशों के बीच संबंधों में एक नये स्वर्णिम युग की शुरुआत कर रहे हैं।'' मोदी ने कहा कि भारत-नॉर्डिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ व्यापक अनुसंधान और नवाचार संबंध है। उन्होंने कहा कि इस बात को ध्यान में रखते हुए दोनों पक्ष इसे मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालयों, प्रयोगशालाओं और स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र के बीच संबंधों को संयुक्त रूप से बढ़ाएंगे। प्रधानमंत्री ने कहा, ''भले ही हम सब अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं, लेकिन कभी-कभी एक शब्द भी हमारी स्वाभाविक साझेदारी को दर्शाने के लिए काफी होता है। आज मैंने 'संबंध' शब्द का कई बार इस्तेमाल किया। कई नॉर्डिक भाषाओं में 'संबंध' शब्द का अर्थ जुड़ाव, रिश्ते या बंधन होता है। हिंदी में भी 'संबंध' का यही अर्थ है। यह केवल शब्दों की समानता नहीं है, बल्कि यह हमारे विचारों और सोच की समानता को भी दर्शाता है।'' दोनों पक्षों ने बहुपक्षीय मंचों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। नॉर्डिक नेताओं ने एक विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लिए भारत की स्थायी सदस्यता के प्रति अपने समर्थन को दोहराया। नेताओं ने अगला भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन हेलसिंकी में आयोजित करने का निर्णय लिया।
विदेश मंत्रालय ने शिखर सम्मेलन के आठ परिणामों की एक सूची साझा की, जिनमें जलवायु परिवर्तन पर भारत-नॉर्डिक देशों की पहल, समुद्री अर्थव्यवस्था में सहयोग बढ़ाना, प्रतिभाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और नॉर्डिक देशों के साथ रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करना आदि शामिल है। -
गोथनबर्ग. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत की ''सुधार एक्सप्रेस'' पूरी गति से आगे बढ़ रही है। साथ ही स्वीडन की कंपनियों से विनिर्माण, हरित हाइड्रोजन मिशन, स्वच्छ ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का आग्रह किया। यूरोपीय कंपनियों को आकर्षित करते हुए उन्होंने दूरसंचार एवं डिजिटल अवसंरचना सहित पांच व्यापक क्षेत्रों में संभावनाओं को रेखांकित किया और कहा कि वे भारत को वैश्विक अनुसंधान एवं विकास केंद्र बनाने में मदद कर सकती हैं। प्रधानमंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक्स, डीप टेक विनिर्माण, कृत्रिम मेधा (एआई) हरित ऊर्जा, अवसंरचना, परिवहन, शहरी बदलाव, स्वास्थ्य सेवा और जीवन विज्ञान क्षेत्रों में भी सहयोग की अपील की। स्वीडन की आधिकारिक यात्रा पर गए मोदी ने यूरोपीय उद्योग गोलमेज (ईआरटी) को संबोधित करते हुए कहा कि सभी कंपनियों के लिए अवसर मौजूद हैं और उन्हें आने वाले वर्षों में भारत की प्रमुख परियोजनाओं का हिस्सा बनाने के लिए संस्थागत व्यवस्था की जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी नवाचार की अगली लहर का सह-निर्माण भारत में होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा, ''पिछले 12 वर्षों में भारत ''सुधार, प्रदर्शन एवं परिवर्तन'' के मूल मंत्र पर काम कर रहा है। सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ यह 'सुधार एक्सप्रेस' पूरी गति से आगे बढ़ रही है।'' उन्होंने देश की युवा आबादी, बढ़ते मध्यम वर्ग और अवसंरचना विकास का भी उल्लेख किया।
भारत और स्वीडन के लोकतंत्र, पारदर्शिता, नवाचार एवं स्थिरता जैसे साझा मूल्यों पर जोर देते हुए मोदी ने स्वीडन की नवाचार एवं स्थिरता की ताकत को भारत की व्यापकता, प्रतिभा और विकास गति के साथ जोड़ने का आह्वान किया। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, यूरोपीय उद्योग के वरिष्ठ नेता एवं प्रमुख यूरोपीय तथा भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधि भी वोल्वो समूह द्वारा आयोजित इस गोलमेज बैठक में शामिल हुए। अपने संबोधन में मोदी ने भारत-यूरोप संबंधों में बढ़ती गति का स्वागत किया जिसमें भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर वार्ता का सफल समापन भी शामिल है। उन्होंने इस समझौते को व्यापार, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, सेवाओं और मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं में नए अवसर उत्पन्न करने वाली परिवर्तनकारी आर्थिक साझेदारी करार दिया। मोदी ने कहा, ''सरकारों के स्तर पर हमने एक महत्वाकांक्षी एवं रणनीतिक एजेंडा तय किया है… जैसा कि उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा था, यह सभी समझौतों में सबसे बड़ा है। हम इसे जल्द से जल्द लागू करने का प्रयास कर रहे हैं।'' भारत और यूरोपीय संघ ने जनवरी में एफटीए को अंतिम रूप दिया था।
उन्होंने साथ ही कहा कि भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) जैसी संपर्क परियोजनाएं भारत-यूरोप व्यापार साझेदारी में नया मूल्य जोड़ती हैं। मोदी ने कहा कि आज भारत निवेश, नवाचार एवं विनिर्माण के लिए दुनिया के सबसे आकर्षक गंतव्यों में से एक है। उन्होंने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, अगली पीढ़ी के आर्थिक सुधार, कारोबार सुगमता, सुशासन पर जोर, विस्तारित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, सशक्त विनिर्माण परिवेश तंत्र और तेजी से बदलते अवसंरचना क्षेत्र को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने ''डिजाइन फॉर इंडिया, मेक इन इंडिया और एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया'' के दृष्टिकोण को दोहराया और यूरोपीय कंपनियों को भारत के साथ भरोसेमंद एवं विश्वसनीय आर्थिक भागीदार के रूप में अपनी भागीदारी बढ़ाने का निमंत्रण दिया। उन्होंने प्रतिभा गतिशीलता, शिक्षा और कौशल साझेदारी के महत्व को भी रेखांकित किया और भारत की युवा एवं कुशल कार्यबल को भविष्य की वैश्विक आर्थिक वृद्धि के लिए प्रमुख ताकत बताया। प्रधानमंत्री ने भारत-यूरोप मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) की गोलमेज बैठक को वार्षिक रूप से आयोजित करने और ईआरटी में एक 'इंडिया डेस्क' बनाने का सुझाव दिया। इस संवाद ने भारत-यूरोप आर्थिक एवं औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने पर विचार-विमर्श के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया और सतत विकास, प्रौद्योगिकी सहयोग तथा मजबूत वैश्विक साझेदारी के प्रति दोनों पक्षों की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। मोदी ने स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया, प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन और स्वीडन के चुनिंदा सीईओ से भी बातचीत की। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, मोदी ने कहा कि भारत और स्वीडन के बीच संबंध केवल आर्थिक नहीं बल्कि विचारों, प्रौद्योगिकी, नवाचार एवं सह-निर्माण की साझेदारी है। उन्होंने भारत की वृद्धि में स्वीडन की कंपनियों के दीर्घकालिक योगदान का स्वागत किया और अनुसंधान, नवाचार, हरित परिवर्तन तथा विनिर्माण में गहन सहयोग का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने स्वीडन की कंपनियों को 'मेक इन इंडिया', राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन जैसी पहलों के तहत भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का निमंत्रण दिया। उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा, सेमीकंडक्टर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में अवसरों के विस्तार की भी चर्चा की। आपूर्ति शृंखलाओं, हरित परिवर्तन, सतत गतिशीलता, जीवन विज्ञान और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चाओं में विशेष ध्यान दिया गया। भारत-स्वीडन संबंधों पर उन्होंने कहा कि दोनों देश खरीदार-विक्रेता संबंध से आगे बढ़कर दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारी विकसित करने पर काम कर रहे हैं।
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वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा पर अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस ने एक तथ्य पत्र (फैक्ट शीट) जारी किया है जिसमें कहा गया है कि अमेरिका और चीन व्यापार और निवेश पर बोर्ड स्थापित करने तथा निष्पक्ष और परस्पर सहयोग पर आधारित रणनीतिक स्थिरता वाले संबंध बनाने पर सहमत हुए हैं। रविवार को जारी किए गए तथ्य पत्र में कहा गया है कि चीन दुर्लभ पृथ्वी धातुओं और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों, जिनमें यट्रियम, स्कैंडियम, नियोडिमियम और इंडियम शामिल हैं, से संबंधित आपूर्ति श्रृंखला की कमी के बारे में अमेरिका की चिंताओं का समाधान करेगा। इसमें यह भी कहा गया कि ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग इस बात पर सहमत हुए कि ईरान परमाणु हथियार नहीं रख सकता, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का आह्वान किया गया और इस बात पर सहमति बनी कि किसी भी देश या संगठन को टोल वसूलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस तथ्य पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि ट्रंप इस वर्ष शी चिनफिंग का वाशिंगटन में स्वागत करेंगे, और दोनों देश इस वर्ष के अंत में जी20 और एपेक शिखर सम्मेलनों की मेजबानी में एक-दूसरे का समर्थन करेंगे। तथ्य पत्र में ताइवान का कोई उल्लेख किए बिना कहा गया कि "राष्ट्रपति ट्रंप और राष्ट्रपति शी ने उत्तर कोरिया को परमाणु मुक्त करने के अपने साझा लक्ष्य की पुष्टि की। शी के साथ वार्ता के बाद मीडिया साक्षात्कारों में ट्रंप ने ताइवान को अरबों डॉलर के संभावित हथियार विक्रय को चीन के साथ "समझौते का केंद्र" बताया, जिससे ताइवान में चिंताएं बढ़ गईं। इस ऐतिहासिक समझौते की आधारशिला के रूप में, ट्रंप और शी ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को बेहतर बनाने के लिए दो नए संस्थानों की स्थापना पर सहमति जताई। ये संस्थान 'यूएस-चाइना बोर्ड ऑफ ट्रेड' और 'यूएस-चाइना बोर्ड ऑफ इन्वेस्टमेंट' हैं। इस तथ्य पत्र में यह भी बताया गया है कि चीन दुर्लभ धातुओं के उत्पादन और प्रसंस्करण उपकरण एवं प्रौद्योगिकी की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों या सीमाओं के संबंध में अमेरिका की चिंताओं का समाधान करेगा। इस तथ्य पत्र में कहा गया है, ''चीन ने चीनी एयरलाइंस के लिए अमेरिका निर्मित 200 बोइंग विमानों की प्रारंभिक खरीद को मंजूरी दे दी है।'' इसमें यह भी कहा गया है कि चीन की यह प्रतिबद्धता अमेरिका में उच्च वेतन और उच्च कौशल वाले विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करेगी।
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गोथेनबर्ग (स्वीडन) . प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार को स्वीडन पहुंचे, जहां वह व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों पर बातचीत करेंगे। गोथेनबर्ग हवाई अड्डे पर उतरने से पहले प्रधानमंत्री मोदी के विमान को स्वीडिश वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने सुरक्षा प्रदान की । हवाई अड्डे पर उनके स्वीडिश समकक्ष उल्फ क्रिस्टर्सन ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया, जो इस यात्रा के महत्व को दर्शाता है। मोदी स्वीडन की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों पर केंद्रित बातचीत करेंगे और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए सहयोग के नए अवसर तलाशेंगे, जो 2025 में 7.75 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। दोनों पक्ष हरित ऊर्जा की ओर बढ़ने, एआई, उभरती प्रौद्योगिकियों, स्टार्टअप, लचीली आपूर्ति शृंखलाओं, रक्षा, अंतरिक्ष, जलवायु कार्रवाई और दोनों देशों की जनता के स्तर पर संबंध जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करने पर चर्चा करेंगे। इससे पहले मोदी ने 2018 में पहले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए स्वीडन का दौरा किया था।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ''दोनों देशों के प्रधानमंत्री यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लायन के साथ यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री को भी संबोधित करेंगे, जो एक प्रमुख अखिल यूरोपीय व्यापारिक नेताओं का मंच है।'' यह मोदी की चार देशों की यूरोपीय यात्रा का दूसरा चरण है। वह नीदरलैंड की यात्रा कर चुके हैं और उनकी उपस्थिति में भारत और नीदरलैंड ने रक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इस सप्ताह के अंत में, वह नॉर्वे और इटली की भी यात्रा करेंगे। -
काठमांडू. नेपाल के पर्वतारोही कामी रीता शेरपा ने रविवार को दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी 'माउंट एवरेस्ट' को 32वीं बार फतह करके इतिहास रच दिया। शेरपा ने एवरेस्ट पर सबसे अधिक बार सफलता पूर्वक चढ़ाई करने का अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया।
पर्यटन विभाग के अनुसार, 56 वर्षीय अनुभवी पर्वतारोही रविवार पूर्वाह्न 10 बजकर 12 मिनट पर 8,849 मीटर ऊंचे शिखर पर पहुंचे। विभाग ने बताया कि शेरपा '14 पीक्स एक्सपेडिशन' द्वारा संचालित एक अभियान का नेतृत्व कर रहे थे।
काठमांडू पोस्ट की खबर के अनुसार, एवरेस्ट आधार शिविर स्थित पर्यटन विभाग के फील्ड कार्यालय ने सफलतापूर्वक चढ़ाई करने की पुष्टि की। पर्यटन विभाग ने शेरपा को बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि नेपाल के पर्वतारोहण क्षेत्र और देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा में महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाती है। जनवरी 1970 में कोशी प्रांत के सोलुखुम्बु जिले के एक गांव में जन्मे कामी रीता ने 1992 में एक पेशेवर पर्वतारोही के रूप में अपना करियर शुरू किया। शेरपा ने पहली बार 1994 में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी। उन्होंने 27 मई, 2025 को एवरेस्ट पर 31वीं बार सफलतापूर्वक चढ़ाई की। रविवार को 'पर्वत रानी' नाम से मशहूर और माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वालीं नेपाल की प्रथम महिला ल्हाकपा शेरपा ने शिखर पर11वीं बार सफल चढ़ाई पूरी करके अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया। पर्यटन विभाग ने बताया कि ल्हाकपा रविवार सुबह साढ़े नौ बजे शिखर पर पहुंचीं। -
जल प्रबंधन में सहयोग की उम्मीद जताई
हेग. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ रविवार को प्रतिष्ठित अफस्लुइटडिज्क बांध का दौरा किया। भारत और नीदरलैंड के बीच जल प्रबंधन और जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे में गहन सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने के मद्देनजर ये दौरा हुआ है। मोदी ने दौरे के बाद सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ''जल प्रबंधन एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें नीदरलैंड ने अभूतपूर्व कार्य किया है। इससे पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय बहुत कुछ सीख सकता है।'' उन्होंने कहा, ''हम भारत में आधुनिक प्रौद्योगिकी लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसका उद्देश्य सिंचाई, बाढ़ सुरक्षा और अंतर्देशीय जलमार्ग नेटवर्क के विस्तार में सहायता करना है।'' विदेश मंत्रालय ने अफस्लुइटडिज्क बांध को ''उत्कृष्टता और नवाचार का प्रतीक'' बताते हुए जल प्रबंधन, बाढ़ सुरक्षा और मीठे पानी के भंडारण में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ''इस दौरे ने गुजरात में कल्पसर परियोजना के लिए डच विशेषज्ञता के महत्व को रेखांकित किया, जिसका उद्देश्य खंभात की खाड़ी के पास एक मीठे पानी का जलाशय और बांध बनाना है।'' मंत्रालय ने कहा, ''इस यात्रा ने जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता, जल प्रौद्योगिकी और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भारत-नीदरलैंड सहयोग को और गहरा करने के अवसरों पर जोर दिया।''











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