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- रायपुर / छत्तीसगढ़ ने ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के विस्तार को महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ते हुए एक अनूठी पहल की है। द्वीप्ति (DWEEPTI) योजना, अर्थात डिसेंट्रलाइज्ड वूमेन एम्पावरमेंट ऑन एनर्जी एंड पॉलिसी फॉर ट्रांसफॉर्मेटिव इन्क्लूजन (Decentralised Women Empowerment on Energy and Policy for Transformative Inclusion), के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा क्षेत्र में विक्रेता, तकनीशियन, उद्यमी और सेवा प्रदाता के रूप में स्थापित किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने तकनीकी सहयोगी संस्था ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया के साथ मिलकर ग्रीन इकोनॉमी ट्रांजिशन मिशन के तहत इस नीति को विकसित किया है।पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है जिसने महिला नेतृत्व वाली विकेंद्रीकृत अक्षय ऊर्जा नीति को अपनाया है। योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 5,000 महिला ऊर्जा उद्यम स्थापित करने, 50,000 हरित रोजगार सृजित करने तथा राज्य के पांच लाख परिवारों और 10,000 संस्थानों तक स्वच्छ ऊर्जा की पहुंच सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।योजना के तहत छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) और जिला प्रशासनों के सहयोग से 12 जिलों के 13 संकुल स्तरीय संघो (सीएलएफ) को प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अधिकृत विक्रेता के रूप में पंजीकृत किया गया है। महिलाओं को सौर संयंत्रों की स्थापना, संचालन, रखरखाव और जनजागरूकता का प्रशिक्षण देकर स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित 'सोलर दीदी' तैयार की जा रही हैं, जो अपने ही क्षेत्रों में तकनीकी सेवाएं उपलब्ध करा सकेंगी।सौर ऊर्जा प्रणाली को अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंचाने के लिए स्व-सहायता समूहों से जुड़े परिवारों को आसान किश्तों पर ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। यह वित्तीय मॉडल जहां स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देता है, वहीं महिला संचालित उद्यमों को टिकाऊ व्यवसाय विकसित करने का अवसर भी प्रदान करता है। यह पहल प्रधानमंत्री के 'लखपति दीदी' विजन के अनुरूप महिलाओं के लिए कौशल आधारित आजीविका के नए अवसर तैयार कर रही है।यह योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन से जोड़ने की राज्य सरकार की व्यापक सोच को भी प्रतिबिंबित करती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय लगातार स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित करने पर बल देते रहे हैं, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा सामुदायिक संस्थाओं की भूमिका को सतत ग्रामीण विकास का आधार मानते हैं। द्वीप्ति योजना इन दोनों प्राथमिकताओं को एक साथ जोड़ते हुए महिलाओं को अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की मुख्यधारा में ला रही है।पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह ने कहा कि अब तक अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका मुख्य रूप से लाभार्थी तक सीमित रही है। ड्वीप्टि योजना इस सोच को बदलते हुए महिलाओं को विक्रेता, तकनीशियन, प्रबंधक और उद्यमी के रूप में स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के लखपति दीदी विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो ग्रामीण महिलाओं को स्वच्छ ऊर्जा आधारित आत्मनिर्भर आजीविका से जोड़ती है।द्वीप्ति योजना का प्रभाव अब जमीन पर भी दिखाई देने लगा है। कबीरधाम इस पहल को सफलतापूर्वक लागू करने वाले शुरुआती जिलों में शामिल है। सीएसपीडीसीएल- आरएपीएम, रायपुर के सहयोग से जिला पंचायत कबीरधाम (बिहान) ने वंदे मातरम् क्लस्टर लेवल फेडरेशन, कवर्धा को अधिकृत सोलर वेंडर के रूप में पंजीकृत कराया। टाटा के तकनीकी सहयोग से बिहान के स्व-सहायता समूहों की लगभग 35 महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर जिले की पहली 'सोलर दीदी' टीम तैयार की गई।योजना के तहत पहला रूफटॉप सोलर संयंत्र कबीरधाम जिले के समनापुर गांव में स्थापित किया गया। प्रगति आजीविका ग्राम संगठन के अंतर्गत माता भवानी स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती अंजनी पटेल इस प्रशिक्षण से लाभान्वित होने वाली महिलाओं में शामिल हैं।श्रीमती अंजनी पटेल ने कहा, "इस कार्य ने हमारे लिए आजीविका का नया रास्ता खोला है। हमें गर्व है कि अब स्व-सहायता समूहों की महिलाएं स्वयं सोलर सिस्टम स्थापित कर रही हैं। इससे यह विश्वास बढ़ा है कि यह अनेक ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थायी आय का मजबूत माध्यम बन सकता है।"कबीरधाम कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने कहा कि यह पहल आजीविका संवर्धन और अक्षय ऊर्जा को एक साथ जोड़ने का सफल उदाहरण है। उन्होंने कहा कि रूफटॉप सोलर सिस्टम की बढ़ती मांग से प्रशिक्षित ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।जिला पंचायत कबीरधाम के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि यह मॉडल महिलाओं के लिए कौशल आधारित और टिकाऊ आजीविका विकसित करने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर सिस्टम की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शुरुआती परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। कबीरधाम जिले में अब तक स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और अन्य ग्रामीणों से रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लगभग 40 ऑर्डर प्राप्त हो चुके हैं तथा कई संयंत्र स्थापित भी किए जा चुके हैं।राज्य के अन्य जिलों में द्वीप्ति योजना के विस्तार के साथ महिला नेतृत्व वाले पंजीकृत महासंघों, प्रशिक्षित स्थानीय तकनीशियनों और आसान वित्तीय व्यवस्था पर आधारित यह मॉडल छत्तीसगढ़ में व्यापक स्तर पर लागू किए जाने योग्य एक प्रभावी उदाहरण के रूप में उभर रहा है।द्वीप्ति योजना एक नजर में• अगले पांच वर्षों में 5,000 महिला ऊर्जा उद्यम स्थापित किए जाएंगे।• 50,000 हरित रोजगार सृजित होंगे।• 5 लाख परिवारों तक स्वच्छ ऊर्जा की पहुंच सुनिश्चित की जाएगी।• 10,000 संस्थानों को योजना से जोड़ा जाएगा।• 12 जिलों के 13 क्लस्टर स्तरीय महासंघ अधिकृत सोलर वेंडर के रूप में पंजीकृत।• कबीरधाम में 35 महिलाओं को 'सोलर दीदी' के रूप में प्रशिक्षित किया गया।• कबीरधाम जिले में रूफटॉप सोलर सिस्टम के 40 से अधिक ऑर्डर प्राप्त हुए।
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*मरीजों के लिए अस्पताल में जल्द ही एसडीपी की सुविधा*
बिलासपुर/कुमार साहब स्व. श्री दिलीप सिंह जूदेव शासकीय सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल कोनी को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन से अत्याधुनिक ब्लड सेंटर के संचालन के लिए आधिकारिक लाइसेंस प्राप्त हो गया है। यह महत्पपूर्ण उपलब्धि जिला प्रशासन, औषधि एवं खाद्य नियंत्रक विभाग के सतत सहयोग एवं मागदर्शन से प्राप्त हुई है।अस्पताल में स्थापित यह अत्याधुनिक ब्लड सेंटर एनटीपीसी सीपत द्वारा सीएसआर मद के अंतर्गत निर्मित किया गया है। आधुनिक उपकरणों और राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार यह रक्त केंद्र प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में सबसे उन्नत ब्लड सेंटर के रूप में स्थापित हुआ है। इसकी स्थापना एवं विकास में संचालक प्राध्यापक सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. भानु प्रताप सिंह के मार्गदर्शन तथा ब्लड बैंक के क्षेत्र में उनके 25 वर्षों के अनुभव का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस ब्लड सेंटर की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि यह छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में पहला ऐसा केंद्र बनेगा, जहां सिंगल डोनर प्लेटलेट तैयार करने और मरीजों को उपलब्ध कराने की सुविधा मिलेगी। यह सुविधा डेंगू, कैंसर, बोन मैरो प्रत्यारोपण, थैलेसीमिया और गंभीर रक्त विकारों से पीड़ित मरीजों के उपचार में अत्यंत उपयोगी साबित होगी। इससे मरीजों को समय पर उच्च गुणवत्ता वाली प्लेटलेट्स उपलब्ध हो सकेंगी और निजी संस्थानों पर उनकी निर्भरता कम होगी।अधीक्षक डॉ. भानु प्रताप सिंह ने बताया कि इस ब्लड सेंटर का उद्देश्य केवल सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण रक्त और रक्त अवयव उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि प्रदेश के मरीजों को विश्वस्तरीय ट्रांसफ्यूजन सेवाएं प्रदान करना भी है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में एसडीपी सुविधा की शुरुआत शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। अस्पताल प्रशासन ने इस उपलब्धि के लिए जिला प्रशासन बिलासपुर, औषधि एवं खाद्य नियंत्रक विभाग, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन तथा एनटीपीसी सीपत का आभार व्यक्त किया है। अस्पताल का मानना है कि यह अत्याधुनिक ब्लड सेंटर न केवल बिलासपुर संभाग बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के गंभीर मरीजों के लिए जीवनरक्षक सुविधा सिद्ध होगा और राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा प्रदान करेगा। - -वन अधिकारियों और मैदानी अमले को ऑनलाइन पीओआर एवं वन अपराध जांच प्रक्रिया का प्रशिक्षणरायपुर ।वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण, जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और विभागीय कार्यों में तेजी लाने के लिए वन विभाग द्वारा ऑनलाइन प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है। इसी क्रम में वनमंडल दंतेवाड़ा में वन अधिकारियों एवं मैदानी अमले के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।प्रशिक्षण में ऑनलाइन पीओआर यानी प्रारंभिक अपराध रिपोर्ट दर्ज करने की प्रक्रिया की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। साथ ही जांच अधिकारी की नियुक्ति, जप्त वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने की स्थिति में की जाने वाली कार्रवाई, न्यायालय में चालान प्रस्तुत करने तथा आवश्यक प्रपत्र तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में भी बताया गया।अधिकारियों ने प्रतिभागियों को वन अपराध प्रकरणों की जांच के दौरान उप वनमंडलाधिकारी, वनमंडलाधिकारी और मुख्य वन संरक्षक स्तर तक प्रकरण प्रस्तुत करने एवं अग्रेषित करने की प्रक्रिया समझाई। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान करते हुए वन अपराध प्रकरणों के त्वरित और विधिसम्मत निराकरण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।प्रशिक्षण में बताया गया कि ऑनलाइन प्रणाली के प्रभावी उपयोग से वन अपराध प्रकरणों की निगरानी और निराकरण में तेजी आएगी। इससे विभागीय कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता भी बढ़ेगी। अधिकारियों ने सभी मैदानी अमले से प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी का क्षेत्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का आह्वान किया।प्रशिक्षण कार्यक्रम में वनमंडलाधिकारी श्री रंगनाथ रामाकृष्णा वाय., उप वनमंडलाधिकारी दंतेवाड़ा, उप वनमंडलाधिकारी गीदम सहित वनमंडल दंतेवाड़ा के सभी परिक्षेत्र अधिकारी और मैदानी अमले के अधिकारी- कर्मचारी उपस्थित रहे।
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दुर्ग/ कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता सर्वेक्षण और विभिन्न विकास कार्यों की अद्यतन प्रगति की समीक्षा हेतु प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के स्वच्छता लक्ष्यों और पूर्व में दिए गए निर्देशों के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा की गई, जिसमें जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग दुबे ने कलेक्टर कॉन्फ्रेंस के दिशा-निर्देशों के पालन की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
बैठक के दौरान यह विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि जिले के समस्त 381 ग्रामों को ओडीएफ प्लस मॉडल घोषित किया जा चुका है और इनका भौतिक सत्यापन भी पूर्ण हो चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए ग्राम के सभी परिवारों द्वारा घर पर ही चार प्रकार का कचरा पृथक्करण किया जाना अनिवार्य किया गया है। साथ ही, बल्क वेस्ट जनरेटर की पहचान कर उनका पंजीयन करने के निर्देश दिए गए हैं। कचरा संग्रहण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सायकल रिक्शा में गीले एवं सूखे कचरे के अतिरिक्त दो अन्य खंड जोड़े जाने के निर्देश दिए गए हैं, जिनमें लाल खंड सेनेट्री पैड एवं डायपर के लिए तथा काला खंड अन्य ई-कचरे के लिए निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, ग्राम में निर्मित नाडेप और वर्मी कंपोस्ट के उपयोग हेतु साफ-सफाई करने के भी निर्देश प्रदान किए गए हैं।व्यक्तिगत शौचालयों और प्रोत्साहन राशि के वितरण की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया गया कि जनपद पंचायत धमधा से 219 एवं पाटन से 135 प्राप्त मांग पत्रों के अनुसार हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा चुकी है। इसके साथ ही, जनपद पंचायत दुर्ग से 278, धमधा से 02 एवं पाटन से 361 नवीन पात्र परिवारों को व्यक्तिगत शौचालय के लिए प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। ग्रामीण अंचल में घर-घर कचरा संग्रहण प्रणाली को प्रभावी बनाने और प्रत्येक घर से निर्धारित यूजर चार्ज की नियमित वसूली सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। स्वच्छताग्राहियों के मानदेय भुगतान की समीक्षा करते हुए यह कड़े निर्देश दिए गए कि जिन ग्राम पंचायतों में मानदेय लंबित है, उन्हें 15 दिवस के भीतर भुगतान कर प्रतिवेदन प्रेषित किया जाए तथा 15वें वित्त आयोग की राशि से इसका नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाए।तरल एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के मोर्चे पर जानकारी दी गई कि जिले में वर्तमान में 5 फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट और 3 प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट पूरी तरह से क्रियाशील हैं। ग्रामीण अंचल में डी-स्लज वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने और नवीन एफएसटीपी निर्माण तथा पूर्व में निर्मित प्लांट के एक्सटेंशन पर भी चर्चा की गई। महतारी सदन में निर्मित सामुदायिक शौचालयों में 15वें वित्त आयोग की राशि का भुगतान करने हेतु ग्राम पंचायतों को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत के माध्यम से आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, क्रेडा विभाग को गोवर्धन प्लांट को पुनः क्रियाशील करने के निर्देश दिए गए हैं तथा जिन हितग्राहियों एवं संस्थानों को गैस कनेक्शन प्रदाय किए गए हैं, उनसे निर्धारित शुल्क प्राप्त करने और पुनः उपयोग सुनिश्चित करने हेतु ग्राम स्तर पर बैठक आयोजित कर संचालन एवं संधारण की व्यवस्था पुख्ता करने को कहा गया है। - -प्रार्थना सभा में राष्ट्रगीत, ओवायएमएस पंजीयन, वृक्षारोपण एवं आपदा प्रबंधन पर विशेष जोररायपुर। भारत स्काउट्स एवं गाइड्स छत्तीसगढ़ के राज्य मुख्य आयुक्त श्री इंदरजीत सिंग खालसा की अध्यक्षता में जिला संगठन आयुक्तों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में संगठन की गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। राज्य मुख्य आयुक्त ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी विद्यालयों में प्रार्थना सभा के दौरान राष्ट्रगीत का गायन अनिवार्य रूप से कराया जाए तथा संगठन के अंशदान की राशि 31 अगस्त तक अनिवार्य रूप से जमा कराई जाए।भारत स्काउट्स एवं गाइड्स छत्तीसगढ़ के राज्य मुख्य आयुक्त ने कहा कि प्रत्येक विद्यालय में स्काउट-गाइड दलों के प्रभावी संचालन के लिए कम से कम एक प्रशिक्षित बेसिक स्काउट मास्टर एवं एक गाइड कैप्टन का होना आवश्यक है। साथ ही राज्य स्तर से प्रत्येक जिले का नियमित दौरा कर स्काउट-गाइड गतिविधियों की समीक्षा किए जाने की जानकारी भी दी।बैठक में ओवायएमएस (OYMS) पंजीयन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक जिले में कार्यशालाओं के आयोजन तथा प्रत्येक विकासखंड में एक-एक समन्वयक (कोऑर्डिनेटर) नियुक्त करने के निर्देश दिए गए, ताकि पंजीयन की प्रक्रिया समयबद्ध एवं सुचारु रूप से पूर्ण की जा सके। इसके साथ ही प्रत्येक जिला एवं विकासखंड स्तर पर व्यापक वृक्षारोपण अभियान आयोजित करने के निर्देश देते हुए इसमें समाज एवं जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।संभावित बाढ़ की स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्य मुख्य आयुक्त ने सभी जिला संगठन आयुक्तों को राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) एवं राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के साथ समन्वय बनाए रखने तथा जिला प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूर्णतः पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर स्काउट-गाइड स्वयंसेवक राहत एवं बचाव कार्यों में जिला प्रशासन का सहयोग करने के लिए सदैव तैयार रहें। बैठक के दौरान राज्य मुख्य आयुक्त श्री इंदरजीत सिंग खालसा को राष्ट्रीय वयस्क स्काउटिंग समिति का सदस्य मनोनीत किए जाने पर पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका सम्मान किया गया। बैठक के अंत में उन्होंने सभी जिला संगठन आयुक्तों से संगठन की गतिविधियों को अधिक प्रभावी, अनुशासित एवं सेवा-भावना के साथ संचालित करने का आह्वान किया। बैठक में राज्य प्रशिक्षण आयुक्त श्री पूनम सिंह साहू, राज्य संगठन आयुक्त श्री अमित कुमार, राज्य संगठन आयुक्त (गाइड) श्रीमती जलवती साहू, राज्य प्रशिक्षण आयुक्त (गाइड) श्रीमती सरिता पाण्डेय, राज्य संयुक्त सचिव श्रीमती बीना यादव सहित राज्य कार्यालय के पदाधिकारी उपस्थित थे।
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-करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की दी सौगात
-छत्तीसगढ़ सरकार गांवों के समग्र विकास के लिए लगातार कार्य कर रही-उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा-ग्राम बोटेसुर से नवागांव तक सड़क निर्माण, ग्राम पीरचाटोला में सड़क निर्माण की घोषणारायपुर । उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने आज कबीरधाम जिले के अपने विधानसभा क्षेत्र के सहसपुर लोहारा विकासखंड अंतर्गत ग्राम भेंड्रा नवागांव और पीरचाटोला में आयोजित जनसंपर्क कार्यक्रमों में शामिल होकर ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में ग्रामीणों के बीच जमीन में बैठकर उनकी समस्याएं और मांगें सुनीं तथा कई मांगों पर मौके पर ही स्वीकृति और घोषणाएं करते हुए विकास कार्यों की सौगात दी। उप मुख्यमंत्री ने ग्राम भेंड्रा नवागांव में आयोजित कार्यक्रम से ग्राम बोटेसुर से नवागांव तक एक करोड़ रुपए से अधिक की लागत से सड़क निर्माण कराने की घोषणा की। वहीं ग्राम पीरचाटोला में 5.20 लाख रुपए की लागत से सड़क निर्माण तथा वीबीजीरामजी योजना के तहत पुलिया निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृत कराने की घोषणा की।ग्रामीणों को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार गांवों के समग्र विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है और विकास कार्यों के लिए निरंतर स्वीकृति दी जा रही है। उन्होंने बताया कि भेंड्रा नवागांव, बोटेसुर के गांवों में सामुदायिक भवन, सीसी रोड, बोर खनन, रंगमंच, आहता निर्माण तथा आंतरिक विद्युतीकरण जैसे अनेक कार्य पूरे किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि सूरजपुरा पंचायत में 51 लाख रुपये की लागत से मिनी स्टेडियम का निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक स्टेडियम में नियमित खेल प्रतियोगिताएं आयोजित हों तथा आसपास के 15 से 20 गांवों के युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि युवाओं को सकारात्मक दिशा मिल सके।उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सूरजपुरा और धनौरा सहित क्षेत्र में कई सड़कों का निर्माण कराया गया है। उन्होंने अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को निर्देश देते हुए कहा कि सभी विकास कार्य गुणवत्तापूर्ण मानको के अनुरूप होना चाहिए। प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि पीरचाटोला में 40, सूरजपुरा में 57, पेण्ड्रातराई में 61, बैगापारा में 65 तथा बोटेसुर में 75 आवास स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के गठन के बाद पहली ही कैबिनेट बैठक में 18 लाख आवासों की स्वीकृति दी गई थी और बीते ढाई वर्षों में 11 लाख आवासों का निर्माण पूरा किया जा चुका है।उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिला स्व-सहायता समूह डेयरी, दुग्ध उत्पादन और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। यदि समूह कार्ययोजना बनाकर आगे आते हैं तो शासन हर संभव सहयोग करेगा। उन्होंने क्षेत्र में जैविक खेती की व्यापक संभावनाओं का उल्लेख करते हुए किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि केवल भवन और सड़क निर्माण ही विकास नहीं है, बल्कि गांव की आर्थिक गतिविधियों, कृषि, व्यापार और रोजगार को बढ़ावा देना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने बस्तर, कोंडागांव और नारायणपुर के वनांचल क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां किसान बिना रासायनिक खाद के सफलतापूर्वक जैविक खेती कर रहे हैं और बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। विद्युत व्यवस्था पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बेहतर व्यवस्था के लिए गांव और खेतों के फीडर अलग करने का कार्य कराया गया है। साथ ही पुराने बकाया बिजली बिलों का भी शासन की योजनाओं के माध्यम से समाधान किया जा रहा है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सरिता संतोष मिश्रा, जनपद अध्यक्ष श्रीमती दुर्गा पटेल, जनपद उपाध्यक्ष श्री अशोक पटेल सहित अन्य जनप्रतिनिधि और ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। - -अमलीडीह से कामनबोड़ तक बनेगी 1.40 किमी लंबी सड़क, मार्ग में 5 पुलियों का भी होगा निर्माण-शीतला मंदिर में भवन के लिए 6.50 लाख रुपये की घोषणा कीरायपुर।उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने आज कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा विकासखंड के ग्राम अमलीडीह से कामनबोड़ तक 2 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 1.40 किलोमीटर सड़क एवं पुल-पुलिया निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। उन्होंने कहा कि इस सड़क का निर्माण क्षेत्रवासियों की प्रमुख मांग रही है, जिसके पूरा होने से ग्रामीणों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलेगी। इस अवसर पर उन्होंने शीतला माता मंदिर में भवन निर्माण के लिए 6.50 लाख रुपये की घोषणा कर ग्रामीणों को एक और सौगात दी।भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने निर्माण एजेंसी एवं ठेकेदार को स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क, पुल-पुलिया सहित सभी स्वीकृत कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं, जिससे क्षेत्रवासियों को लंबे समय तक इसका लाभ मिले। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं आम जनता की सुविधा के लिए बनाई जा रही हैं, निर्माण कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए सड़क, आवास, बिजली, सिंचाई और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के कार्य को प्राथमिकता से आगे बढ़ा रही है। सरकार बनने के बाद प्रदेशभर में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों को स्वीकृति प्रदान कर निर्माण कार्य में तेजी लाई गई है, जिससे हजारों गरीब परिवारों का पक्के घर का सपना साकार हो रहा है।उप मुख्यमंत्री ने बताया कि अमलीडीह सहित कुरुवा पंचायत के अन्य आश्रित गांवों में पिछले दो वर्षों के दौरान 255 प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी गई है। इससे जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने कहा कि आवास के साथ-साथ गांवों में आधारभूत सुविधाओं का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है ताकि ग्रामीणों को बेहतर जीवन स्तर मिल सके।उन्होंने बिजली व्यवस्था में किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए फीडर सेपरेशन का व्यापक अभियान चलाया गया है। पहले एक फीडर से 8 से 9 गांव जुड़े रहते थे, जिसके कारण किसी एक गांव में तकनीकी खराबी आने पर कई गांवों की बिजली प्रभावित होती थी। अब इसे घटाकर 4 गांव प्रति फीडर कर दिया गया है, जिससे खराबी का त्वरित निराकरण और शीघ्र बिजली बहाली संभव हो सकेगी।उन्होंने बताया कि अमलीडीह में 52 लाख रुपए की लागत से फीडर सेपरेशन का कार्य कराया गया है। साथ ही कृषि पंपों के लिए अलग फीडर की व्यवस्था की गई है, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए नियमित और बेहतर विद्युत आपूर्ति मिलेगी। अमलीडीह बस्ती क्षेत्र में 7 लाख रूपए की लागत से 1.20 किलोमीटर एलटी केबलिंग तथा 25 केवीए क्षमता का नया ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं को भी बेहतर बिजली सुविधा मिलेगी।उप मुख्यमंत्री ने बताया कि अमलीडीह में सड़क और बिजली के अलावा सीसी रोड, चेक डैम सहित अनेक विकास कार्यों को भी स्वीकृति दी गई है। इन कार्यों के पूरा होने से गांव में आधारभूत अधोसंरचना मजबूत होगी, कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा ग्रामीणों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और प्रत्येक गांव बुनियादी सुविधाओं से सुसज्जित होकर आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बने। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सरिता संतोष मिश्रा, जनपद अध्यक्ष श्रीमती दुर्गा पटेल, जनपद उपाध्यक्ष श्री अशोक पटेल सहित अन्य जनप्रतिनिधि और ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
- -स्वयं ट्रैक्टर चलाकर धान रोपाई की तैयारियों का किया शुभारंभरायपुर। प्रदेश में मानसून की अच्छी वर्षा के साथ खेती-किसानी का कार्य गति पकड़ चुका है। इसी क्रम में दुर्ग शहर विधायक एवं प्रदेश के शिक्षा, ग्रामोद्योग तथा विधि-विधायी मंत्री श्री गजेन्द्र यादव शुक्रवार को अपने गृहग्राम अहिवारा के समीप स्थित माटरा गांव पहुंचे, जहां उन्होंने किसानों के साथ खेत में उतरकर कृषि कार्यों में सहभागिता निभाई। मंत्री श्री यादव ने स्वयं ट्रैक्टर चलाकर धान रोपाई से पूर्व खेत की मताई की तथा लगभग दो एकड़ भूमि को रोपाई के लिए तैयार कराया। इस दौरान उन्होंने खेत का निरीक्षण कर खाद की उपलब्धता एवं खेती की तैयारियों की जानकारी ली तथा किसानों को समय पर निंदाई-गुड़ाई सहित आवश्यक कृषि कार्य करने की सलाह दी। इसके पश्चात उन्होंने धान रोपाई कार्य का शुभारंभ कराया।मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि व्यक्ति चाहे किसी भी पद पर पहुंच जाए, उसे अपनी माटी, संस्कृति और मूल कार्य से जुड़ाव कभी नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा, "मैं किसान परिवार से हूं। खेती-किसानी हमारे जीवन का आधार है। समय मिलने पर आज भी खेत में जाकर खेती के कार्यों में भाग लेता हूं।" उन्होंने कहा कि खेती केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।मंत्री बनने के बाद भी श्री यादव अपनी खेती की स्वयं देखरेख करते हैं तथा प्रतिवर्ष कृषि कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। उनका मानना है कि किसानों की मेहनत, चुनौतियों और आवश्यकताओं को समझने के लिए खेत से निरंतर जुड़े रहना आवश्यक है। किसान परिवार से होने के कारण वे किसानों की समस्याओं एवं जरूरतों को बेहतर ढंग से समझते हैं। खेत में किसानों के साथ उनकी सक्रिय सहभागिता छत्तीसगढ़ की माटी, कृषि परंपरा और ग्रामीण संस्कृति के प्रति उनके आत्मीय जुड़ाव का सशक्त उदाहरण है।
- -पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की अपील की-बैगाकापा से हरित अभियान की शुरुआत, ‘वृक्ष मित्र वाहन’ को दिखाई हरी झंडीरायपुर। पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जनआंदोलन बनाने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान 3.0 का शुभारंभ लोरमी विकासखण्ड के ग्राम बैगाकापा में किया गया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कल्पवृक्ष का पौधा लगाकर पर्यावरण के संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश दिया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता फैलाने ‘वृक्ष मित्र वाहन’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह वाहन गॉवों-शहरों में जाकर नीबू, मुनगा, बिही, जामुन आदि के पौधे वितरित कर नागरिकों को पौधारोपण के लिए प्रोत्साहित करेगी।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्यक्रम में कहा कि जलवायु परिवर्तन आज वैश्विक चुनौती है और इससे निपटने के लिए वृक्षारोपण के साथ वर्षा जल का संरक्षण भी अत्यंत आवश्यक है। प्रकृति के संतुलन के लिए पेड़, पानी और पर्यावरण का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन की चुनौती का उल्लेख करते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण तथा वर्षा जल के संरक्षण के लिए प्रेरित किया, ताकि ग्रीष्मकाल में जल संकट से बचा जा सके। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, ग्रामीणों एवं बड़ी संख्या में नागरिकों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम में परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार, वनमंडलाधिकारी श्री अभिनव कुमार, जिला पंचायत के अध्यक्ष श्री श्रीकांत पाण्डेय और जिला पंचायत के सीईओ श्री गोकुल रावटे के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, ग्रामीणजन और स्कूली बच्चे बड़ी संख्या में कार्यक्रम में मौजूद थे।
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*स्वच्छता नियमों के पालन से बनेगा हर गांव स्वच्छ और कचरा मुक्त*
बिलासपुर/स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की राज्य सलाहकार एवं बिलासपुर संभाग प्रभारी श्रीमती मोनिका सिंह ने आज विकासखंड तखतपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत चितावर का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्राम पंचायत में संचालित ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के कार्यों तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन का अवलोकन भी किया। स्वच्छग्राही समूह के सदस्यों को नियमित डोर-टू-डोर कलेक्शन, स्रोत पर कचरा पृथक्करण सुनिश्चित कराने तथा स्वच्छता शुल्क के नियमित संग्रह एवं उसके महत्व के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन दिया।राज्य सलाहकार श्रीमती मोनिका सिंह ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन तभी सफल होगा, जब प्रत्येक नागरिक स्वच्छता को अपनी दैनिक आदत और सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाएगा। घर से निकलने वाले कचरे का चार प्रकार से पृथक्करण, नियमित डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण में सहयोग, स्वच्छता शुल्क का समय पर भुगतान तथा सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ बनाए रखने में जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक है। ग्राम पंचायत, स्वच्छग्राही एवं ग्रामीण यदि सामूहिक रूप से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें, तो प्रत्येक गांव को स्वच्छ, स्वस्थ, सुंदर और कचरा मुक्त बनाया जा सकता है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 का प्रभावी क्रियान्वयन केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।निरीक्षण के दौरान स्वच्छग्राहियों एवं ग्रामीणों को कचरे को चार प्रकार से जैसे कि सूखा कचरा, गीला कचरा, सेनेटरी कचरा एवं विशेष देखभाल या इलेक्ट्रॉनिक कचरा को एकत्रित करने की जानकारी दी गई। साथ ही स्वच्छ एवं कचरा मुक्त ग्राम के निर्माण हेतु विस्तार से चर्चा करते हुए स्रोत पर कचरा पृथक्करण एवं वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर ग्राम के सरपंच एवं सचिव को निर्देशित किया गया कि वे ग्रामीणों को स्वच्छता के प्रति निरंतर जागरूक करें, निर्धारित स्थान पर ही कचरे का निस्तारण सुनिश्चित कराएं तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का पालन नहीं करने वाले व्यक्तियों को पहले समझाइश दें एवं आवश्यक होने पर नियमानुसार जुर्माना लगाने की कार्रवाई करें। ग्रामीणों को चार प्रकार से कचरा अलग-अलग रखने, नियमित रूप से स्वच्छता शुल्क का भुगतान करने तथा ग्राम में निर्मित सामुदायिक शौचालय का नियमित उपयोग करने के लिए भी प्रेरित किया गया।निरीक्षण के दौरान जनपद सदस्य, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत तखतपुर, जिला समन्वयक, जिला सलाहकार, ब्लॉक समन्वयक, बीपीएम (एनआरएलएम), प्रधानमंत्री आवास योजना के तकनीकी सहायक, जनपद पंचायत की टीम, सरपंच, पंचगण, सचिव, रोजगार सहायक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, बिहान समूह की महिलाएँ, स्वच्छग्राही तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। -
भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई की आयुक्त सुश्री सुरूचि सिंह के निर्देशानुसार निगम क्षेत्र में नागरिकों की मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों को गति दी जा रही है। निगम द्वारा शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में सड़क निर्माण, रोड सीमेंटीकरण एवं नाली निर्माण सहित आवश्यक विकास कार्य कराए जा रहे हैं।
इसी क्रम में 15वें वित्त आयोग मद से एसबीआई कॉलोनी में विकास कार्य एवं नगरोत्थान मद से मार्ग चैड़ीकरण का कार्य कराया जा रहा है। वहीं विकास शुल्क मद से अनुष्ठा रेसिडेंसी में रोड एवं नाली निर्माण का कार्य प्रगति पर है। कैलाश नगर स्थित महावीर मार्ग के सीमेंटीकरण का कार्य भी कराया जा रहा है, जिससे क्षेत्रवासियों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही कुरूद स्थित सुंदर विहार कॉलोनी में सामुदायिक भवन निर्माण तथा जामुल ट्रेचिंग ग्राउंड स्थित निर्माणाधीन डॉग हाउस में जल निकासी की समुचित व्यवस्था के लिए नाली निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। निगम प्रशासन द्वारा क्षेत्र की आवश्यकताओं एवं नागरिकों की सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न विकास कार्यों को निर्धारित मापदंडों के अनुरूप गुणवत्तापूर्वक पूर्ण कराने का प्रयास किया जा रहा है। इन कार्यों के पूर्ण होने से संबंधित क्षेत्रों के नागरिकों को सुगम आवागमन के साथ-साथ बेहतर जल निकासी एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिलेगा। - - राजधानी की बिजली व्यवस्था होगी और मजबूतरायपुर । राजधानी रायपुर की बिजली व्यवस्था को फुलप्रूफ बनाने के लिए दलदल सिवनी से रायता तक 220 केवी मल्टी सर्किट लाइन का कार्य हॉट-लाइन तकनीक से सफलतापूर्वक पूरा किया गया। यह कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण था क्योंकि लगभग 60 मीटर ऊंचे दो टावरों के बीच मुंबई-हावड़ा का अत्यंत व्यस्त रेलवे ट्रैक है, जहां औसतन हर 10 मिनट में एक ट्रेन गुजरती है। वहीं टावर के पास लगभग 12 फीट गहरा नाला भी है। ट्रांसमिशन कंपनी के अभियंताओं ने हॉट-लाइन तकनीक का उपयोग करते हुए रेलवे ट्रैफिक को बिना बाधित किए इस कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़ के अध्यक्ष श्री सुबोध कुमार सिंह ने इस महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि पर ट्रांसमिशन कंपनी के अभियंताओं एवं पूरी टीम को बधाई दी।ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री राजेश कुमार शुक्ला ने बताया कि दलदल सिवनी से रायता तक 220 केवी मल्टी सर्किट लाइन का कार्य तकनीकी दृष्टि से अत्यंत जटिल था। रेलवे ट्रैक को बिना बाधित किए तथा कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच हॉट-लाइन तकनीक से इस कार्य को पूरा करना ट्रांसमिशन कंपनी के अभियंताओं की तकनीकी दक्षता और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि दलदल सिवनी में निर्माणाधीन 220/132 केवी सब स्टेशन एवं इस लाइन सहित दोनों कार्यों पर लगभग 89 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। इसके पूर्ण होने पर रायता स्थित 400 केवी सब स्टेशन से दलदल सिवनी 220/132 केवी सब स्टेशन तक सीधे बिजली पहुंच सकेगी तथा रायपुर में बिजली आपूर्ति के लिए पहले उपलब्ध 220 केवी की चार सर्किट लाइनें बढ़कर छह सर्किट लाइनें हो जाएंगी।लगभग 200 मीटर लंबे, मोटे एवं वजनी कंडक्टर को दूसरी ओर पहुंचाने के लिए पहले पायलट रोप तैयार किया गया। दोनों ओर पांच-पांच टन क्षमता की विंचिंग मशीनों का उपयोग किया गया। लगभग 90 डिग्री के कोण पर छह कंडक्टर (तार) खींचने में तीन दिन का समय लगा। 200 मीटर लंबे हिस्से को धीरे-धीरे खींचकर सफलतापूर्वक स्थापित किया गया।इस प्रकार रेलवे ट्रैफिक को बाधित किए बिना 220 केवी मल्टी सर्किट लाइन का कार्य पूर्ण किया गया। इस कार्य में डीआरएम कार्यालय के अधिकारी भी समन्वय बनाये रहे एवं ट्रैक पर सुरक्षा के इंतजाम के साथ निगरानी के लिये कर्मचारी तैनात किये गए थे। इस कार्य में कार्यपालक निदेशक श्री संजय पटेल, मुख्य अभियंता (परियोजना) श्री प्रसन्ना गोसावी, अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री ईश्वर कंवर, अधीक्षण अभियंता श्री वीए देशमुख, कार्यपालन अभियंता श्री यूके यादव, सहायक अभियंता श्री सुरेश वर्मा, श्री पीके तिवारी, श्री प्रबोल मिश्रा, श्री राम ठाकुर, श्री प्रतीक मित्रा तथा एजेंसी लक्ष्मी सिद्धार्थ ट्रांसमिशन के श्री वेणुगोपाल रेड्डी का विशेष योगदान रहा।
- -31 जुलाई तक करें आवेदन, विश्व दिव्यांग दिवस पर मिलेगा राष्ट्रीय पुरस्काररायपुर। दिव्यांगजनों के अधिकारों, सशक्तिकरण और समावेशी विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं, संगठनों, नियोक्ताओं एवं कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त करने का सुनहरा अवसर है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विश्व दिव्यांग दिवस (3 दिसंबर 2026) के अवसर पर प्रदान किए जाने वाले राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। समाज कल्याण विभाग ने राज्य के सभी पात्र व्यक्तियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, नियोक्ताओं एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्यरत संगठनों से 31 जुलाई 2026 तक आवेदन करने की अपील की है। इच्छुक आवेदक राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।इन प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों का उद्देश्य दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले नवाचारों, उत्कृष्ट सेवाओं और प्रेरणादायी प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देना तथा समावेशी समाज के निर्माण में योगदान देने वालों को सम्मानित करना है।पुरस्कारों के अंतर्गत दिव्यांगजन सशक्तिकरण, पुनर्वास सेवाएं, कौशल एवं दक्षता विकास, रोजगार सृजन, सुगम्यता (Accessibility) को बढ़ावा, अनुसंधान एवं नवाचार, खेल, कला, साहित्य, शिक्षा, सामाजिक सेवा तथा अन्य संबंधित क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियों और उल्लेखनीय योगदान को सम्मानित किया जाएगा।समाज कल्याण विभाग ने कहा है कि यह पुरस्कार केवल सम्मान का माध्यम नहीं, बल्कि दिव्यांगजन अधिकारों, समान अवसरों और समावेशी विकास के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने की महत्वपूर्ण पहल भी है। इससे उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी और उनके प्रेरणादायी प्रयासों को देशभर में प्रोत्साहन प्राप्त होगा। विभाग ने सभी पात्र आवेदकों से निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन करने की अपील करते हुए कहा है कि अधिक से अधिक योग्य व्यक्ति एवं संस्थाएं इस अवसर का लाभ उठाकर छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करें।
- -डीएवी स्कूल में सीडबॉल निर्माण और वन महोत्सव में बच्चों ने लिया पर्यावरण संरक्षण का संकल्परायपुर। छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण को बढ़ावा देने के लिए मोबाइल ट्री एटीएम की अनूठी पहल शुरू की गई है। इसके मुख्य उद्देश्य है सुकमा, बस्तर और जशपुर जिलों में शुरुआत, घर-घर जाकर निःशुल्क फलदार व औषधीय पौधे वितरण, और श्एक पेड़ मां के नामश् अभियान को जनआंदोलन बनाना है .वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप की पहल और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग के प्रयासों के तहत बीजापुर जिले में अभिनव पहल की गई है। जिले में पहली बार ‘ट्री एटीएम’ शुरू किया गया है। इसके साथ ही डीएवी स्कूल में सीडबॉल निर्माण प्रशिक्षण और वन महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्कूली बच्चों, जनप्रतिनिधियों, वन विभाग के अधिकारियों और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।वनमंडल बीजापुर के बीजापुर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत एनएच-63 मुख्य मार्ग पर जिला अस्पताल चौक, एसपी बंगले के पास जिले का पहला ‘ट्री एटीएम’ स्थापित किया गया है। इसका शुभारंभ जिला पंचायत के श्री मैथ्यूज कुजूर ने किया। इस पहल का उद्देश्य आम नागरिकों और ग्रामीणों को एक ही स्थान पर आसानी से निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराना है।अब लोगों को पौधों के लिए अलग-अलग स्थानों पर भटकना नहीं पड़ेगा। ट्री एटीएम के माध्यम से बच्चों और ग्रामीणों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराने की शुरुआत भी कर दी गई है।सीडबॉल से दुर्गम क्षेत्रों में बढ़ेगी हरियालीवन महोत्सव के तहत डीएवी स्कूल में वन विभाग के कर्मचारियों ने विद्यार्थियों को सीडबॉल बनाने का प्रशिक्षण दिया। सीडबॉल मिट्टी, वर्मी कम्पोस्ट, कोकोपीट और रेत के मिश्रण से तैयार की जाती है। इसके अंदर विभिन्न प्रजातियों के बीज रखे जाते हैं। बारिश के दौरान इन्हें दुर्गम, बंजर और पहाड़ी क्षेत्रों में डालकर प्राकृतिक रूप से पौधों का विकास किया जा सकता है प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने जामुन, नीम, साजा, इमली, आम और अमलतास के बीजों से बड़ी संख्या में सीडबॉल तैयार किए। इस पहल से बच्चों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति रुचि और जागरूकता बढ़ी।डीएवी स्कूल परिसर में वन महोत्सव के अंतर्गत पौधरोपण भी किया गया। विद्यार्थियों और अतिथियों ने करोंदा, इमली, जामुन, सीताफल और मुनगा जैसे फलदार एवं छायादार पौधे रोपे।कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण विषय पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण, पौधों की देखभाल और हरियाली बढ़ाने का संकल्प लिया।ट्री एटीएम और सीडबॉल जैसी पहल से बीजापुर में पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। वन विभाग की यह पहल जिले में हरियाली बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।इस अवसर पर जनप्रतिनिधि श्री जिलाराम राणा, जिला अनुसूचित जनजाति मोर्चा अध्यक्ष श्री संदीप तेलम सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।वन विभाग की ओर से उप वनमंडलाधिकारी बीजापुर श्री देवेंद्र गोंड, इंद्रावती टाइगर रिजर्व के अधीक्षक श्री मनोज बघेल, बीजापुर एवं गंगालूर वन परिक्षेत्र के अधिकारी- कर्मचारी, डीएवी स्कूल के प्राचार्य, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
- -जल संरक्षण, सिंचाई, मत्स्य पालन और रोजगार को मिला नया आधाररायपुर । बिलासपुर के कोटा विकासखंड के ग्राम पंचायत नवागांव कर्रा के मजौलीपारा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत सामुदायिक डबरी का निर्माण किया गया है। इस कार्य का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का संरक्षण, भू-जल स्तर में वृद्धि, सिंचाई सुविधा का विस्तार, मत्स्य पालन को बढ़ावा देना तथा ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना था। इस कार्य के लिए कुल 5.11 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई। गांव के समीप स्थित मुक्तिधाम क्षेत्र में वर्षा जल के उचित संग्रहण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।बरसात का अधिकांश पानी बहकर व्यर्थ चला जाता था, जिससे गर्मी के मौसम में जल संकट, भू-जल स्तर में गिरावट तथा सिंचाई की समस्या बनी रहती थी। इन परिस्थितियों को देखते हुए सामुदायिक डबरी का निर्माण कराया गया, जिससे वर्षा जल का प्रभावी संचयन संभव हुआ। डबरी निर्माण के बाद आसपास के क्षेत्रों में भू-जल पुनर्भरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। खेतों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होने लगा, जिससे कृषि गतिविधियों को नई गति मिली। साथ ही जल उपलब्धता बढ़ने से स्थानीय स्तर पर मत्स्य पालन की शुरुआत हुई, जिसने ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय और रोजगार का नया स्रोत तैयार किया।इस कार्य ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। डबरी में संचित पानी के कारण आसपास के पेड़-पौधों एवं हरियाली के संरक्षण में सहायता मिली। वर्षा के पानी के अनियंत्रित बहाव में कमी आने से मिट्टी कटाव पर भी नियंत्रण हुआ तथा क्षेत्र में पर्यावरणीय संतुलन मजबूत हुआ। इससे ग्रामीणों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ी। डबरी का निर्माण मुक्तिधाम के समीप होने के कारण सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ। पहले यहां अंतिम संस्कार जैसी आवश्यक गतिविधियों के दौरान जल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, जबकि अब इस डबरी से आवश्यक जल उपलब्ध होने लगा है। इसके साथ ही यह सामुदायिक परिसंपत्ति गांव के अन्य सामाजिक कार्यों में भी उपयोगी साबित हो रही है।आज यह सामुदायिक डबरी ग्राम नवागांव कर्रा के लिए जल संरक्षण और ग्रामीण विकास का एक सफल मॉडल बन चुकी है। इस पहल से जहां एक ओर कृषि उत्पादन, मत्स्य पालन और भू-जल संरक्षण को मजबूती मिली है, वहीं दूसरी ओर मनरेगा के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध हुआ है। यह कार्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर क्षेत्र के अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणास्रोत है।
- -ग्राम नमना के कृषक भरोस राम पोर्ते ने 0.80 हेक्टेयर में किया कोदो उत्पादनअम्बिकापुर । राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के माध्यम से सरगुजा जिले में किसानों को परंपरागत खेती के साथ फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना के सकारात्मक परिणाम अब किसानों की आर्थिक स्थिति में भी दिखाई देने लगे हैं। उदयपुर विकासखंड के ग्राम नमना निवासी कृषक भरोस राम पोर्ते ने योजना के तहत कोदो की खेती कर बेहतर उत्पादन एवं अतिरिक्त आय अर्जित की है।कृषक भरोस राम पोर्ते के पास कुल 2 हेक्टेयर कृषि भूमि है। योजना से पूर्व वे खरीफ मौसम में धान, मक्का एवं सब्जियों की खेती तथा रबी मौसम में गेहूं एवं सब्जियों का उत्पादन करते थे। सीमित संसाधनों के कारण उनकी अधिकांश भूमि खाली रह जाती थी, जिससे खेती से अपेक्षित आय प्राप्त नहीं हो पाती थी और आर्थिक स्थिति सामान्य बनी हुई थी।राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई ) के अंतर्गत कृषि विभाग द्वारा उन्हें 0.80 हेक्टेयर क्षेत्र में कोदो फसल का प्रदर्शन कराया गया। इसके लिए विभाग द्वारा 8 किलोग्राम (दो पैकेट) उन्नत कोदो बीज उपलब्ध कराया गया तथा वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने का प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया गया। विभागीय सलाह के अनुरूप खेती करने से उन्हें उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त हुए।फसल कटाई के उपरांत कृषक को 0.80 हेक्टेयर क्षेत्र से लगभग 10 क्विंटल कोदो का उत्पादन प्राप्त हुआ। उत्पाद के विक्रय से उन्होंने लगभग 30 हजार रुपये की आय अर्जित की। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है तथा खेती के प्रति उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।कृषक भरोस राम पोर्ते ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत प्राप्त उन्नत बीज एवं तकनीकी मार्गदर्शन से उन्हें कोदो की खेती में अच्छा उत्पादन मिला। उन्होंने कहा कि इस फसल से बेहतर लाभ मिलने के बाद वे इस वर्ष में भी कोदो की खेती जारी रखेंगे तथा इसके रकबे में वृद्धि करेंगे।कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई ) का उद्देश्य किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़ना, मोटे अनाज (श्रीअन्न) के उत्पादन को बढ़ावा देना तथा उनकी आय में वृद्धि करना है। योजना के अंतर्गत गुणवत्तायुक्त बीज, तकनीकी मार्गदर्शन एवं प्रदर्शन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। ग्राम नमना के कृषक भरोस राम पोर्ते ने वैज्ञानिक खेती, गुणवत्तायुक्त बीज एवं विभागीय सहयोग के माध्यम से कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर अपनी आय बढ़ाई हैं। उनकी सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायी बन रही है।
- -वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर वन्यजीव संरक्षण और संवर्धन को मिला नया आयामरायपुर । दुर्लभ श्वेतवर्णी करैत का संरक्षण दुर्लभ श्वेतवर्णी करैत सर्प एक अत्यंत दुर्लभ आनुवंशिक अवस्था वाला जहरीला सांप है, जो हाल ही में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में देखा गया है। शरीर में रंगद्रव्य (मेलानिन) की कमी के कारण इसका शरीर सफेद या हल्के रंग का नजर आता है। वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन की दिशा में छत्तीसगढ़ को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। दुर्ग वनमंडल के चरौदा क्षेत्र के पंचशील नगर में एक घर से मिले अत्यंत दुर्लभ श्वेतवर्णी (Leucistic) करैत सर्प का सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।यह कार्रवाई वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन्यजीव संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा है। वन विभाग द्वारा दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण और उनके सुरक्षित प्राकृतिक आवास में पुनर्वास को प्राथमिकता दी जा रही है।उल्लेखनीय है कि वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार और वन बल प्रमुख श्री अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन के अनुरूप राज्य में वन्यजीव संरक्षण एवं संवर्धन के प्रयासों को लगातार मजबूत किया जा रहा है।विगत 21 जुलाई को पंचशील नगर में सफेद रंग का सांप होने की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम और सर्प रेस्क्यूअर श्री विजय शर्मा मौके पर पहुंचे। सांप का सुरक्षित रेस्क्यू करने के बाद इसकी पहचान श्वेतवर्णी (Leucistic) करैत (Bungarus fasciatus) के रूप में हुई। श्वेतवर्णता एक दुर्लभ आनुवंशिक अवस्था है, जिसमें शरीर में रंगद्रव्य (मेलानिन) की कमी के कारण जीव का रंग सामान्य से अलग दिखाई देता है। इसी कारण यह करैत सामान्य करैत की तुलना में सफेद रंग का दिखाई देता है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार के दुर्लभ करैत का पाया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण और दुर्लभ घटना है।श्वेतवर्णी करैत के मिलने की घटनाएं दक्षिण एशिया में बहुत कम दर्ज की गई हैं। भारत में महाराष्ट्र और ओडिशा सहित कुछ चुनिंदा स्थानों से ही इसके मिलने के अभिलेख उपलब्ध हैं। ऐसे में दुर्ग जिले में इस दुर्लभ करैत का मिलना क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीव संपदा की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।सर्प विशेषज्ञों से जांच के बाद करैत के श्वेतवर्णी होने की पुष्टि की गई। इसके बाद दुर्ग वनमंडलाधिकारी श्री दिपेश कपिल के निर्देश पर 23 जुलाई 2026 को दुर्ग आर.ए. के श्री प्रमोद यादव, सर्प मित्र श्री विजय शर्मा और सर्प विशेषज्ञ श्री अविनाश मौर्य ने इसे राजनांदगांव वनमंडल के अंतर्गत कक्ष क्रमांक आर.एफ. 549 स्थित प्राकृतिक पर्यावास में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया।वन विभाग का यह कदम वन्यजीवों के संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और जैव विविधता को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
- -31 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन, 5 से 18 वर्ष आयु वर्ग के प्रतिभाशाली बच्चे कर सकते हैं आवेदनरायपुर । बच्चों की असाधारण प्रतिभा, नवाचार, साहस और सामाजिक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार-2026 के लिए नामांकन आमंत्रित किए गए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग ने प्रदेश के प्रतिभाशाली बच्चों, अभिभावकों, शिक्षण संस्थानों तथा सामाजिक संगठनों से अधिक से अधिक संख्या में आवेदन करने की अपील की है।प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार देश का सर्वाेच्च बाल सम्मान माना जाता है, जो उन बच्चों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने वीरता, सामाजिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण, खेल, कला एवं संस्कृति तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हों। यह प्रतिष्ठित सम्मान भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाता है।विभागीय जानकारी के अनुसार 5 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे इस पुरस्कार के लिए पात्र हैं। नामांकन की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक बच्चे स्वयं भी आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा अभिभावक, स्कूल, सामाजिक संस्थाएं और अन्य व्यक्ति भी योग्य बच्चों का नामांकन कर सकते हैं।सभी आवेदन राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। राज्य शासन ने प्रदेश के नवाचारी, प्रतिभाशाली और प्रेरणादायी बच्चों से इस अवसर का लाभ उठाते हुए अपनी उपलब्धियों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन करने का आग्रह किया है।आवेदन एवं विस्तृत जानकारी के लिएawards.gov.in पर विजिट किया जा सकता है।
- -स्व-सहायता समूह से मिला आर्थिक संबल, खेती-किसानी और आजीविका गतिविधियों से बनीं ‘लखपति दीदी’रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन की राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बनकर उभर रही है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से प्रदेशभर की महिलाएं कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, लघु उद्यम और अन्य आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से हजारों महिलाएं आज अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ समाज में नई पहचान स्थापित कर रही हैं।सरगुजा जिले के ग्राम बरकेलाला (पोस्ट सखौली) की श्रीमती मीरा बाई इस परिवर्तन की प्रेरक मिसाल हैं। तारा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने खेती और मत्स्य पालन के माध्यम से आर्थिक समृद्धि हासिल की और आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं।मीरा बाई बताती हैं कि उनके स्वयं सहायता समूह में 10 महिलाएं शामिल हैं, जो नियमित बचत, बैंकिंग गतिविधियों और सामूहिक आजीविका कार्यों से जुड़ी हैं। समूह के माध्यम से प्राप्त एक लाख रुपये के ऋण का उपयोग कृषि और मत्स्य पालन जैसी आयवर्धक गतिविधियों के विस्तार में किया गया, जिससे सभी सदस्यों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।समूह की महिलाओं ने ऋण राशि से धान, मक्का और अरहर की खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन का कार्य भी शुरू किया। आधुनिक कृषि पद्धतियों और सिंचाई सुविधाओं का लाभ मिलने से उत्पादन बढ़ा और बेहतर आय प्राप्त हुई। प्राप्त आय से समूह ने समय पर ऋण का भुगतान भी किया तथा आवश्यकता अनुसार पुनः ऋण लेकर आजीविका गतिविधियों का विस्तार किया।मीरा बाई वर्तमान में ‘लखपति दीदी’ अभियान से जुड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई पहचान बना चुकी हैं। वे अन्य ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने, स्वरोजगार अपनाने और आयवर्धक गतिविधियों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका मानना है कि सामूहिक प्रयास और योजनाओं का सही उपयोग महिलाओं के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।मीरा बाई ने अपनी सफलता का श्रेय शासन की योजनाओं और स्वयं सहायता समूहों को देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने, सम्मानजनक आजीविका अर्जित करने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का अवसर प्रदान किया है। प्रदेश में ‘बिहान’ योजना के माध्यम से हजारों महिलाएं कृषि, मत्स्य पालन, पशुपालन, लघु उद्यम और अन्य आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
- रायपुर ।छत्तीसगढ़ राज्य हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत ने गुरुवार को कोंडागांव स्थित शिल्पनगरी का दौरा कर शिल्पकारों से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान उन्होंने जिले के 40 शिल्पियों को आधुनिक टूल किट वितरित किए। इसमें 20 बेलमेटल एवं 20 लौहशिल्प के शिल्पकार शामिल हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रीमती राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य शासन स्थानीय कला, संस्कृति और पारंपरिक शिल्प के संरक्षण, संवर्धन तथा शिल्पकारों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कोंडागांव की शिल्पकला जिले की विशिष्ट पहचान है, जिसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि शिल्पकार अपनी कलाकृतियों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए शबरी एम्पोरियम एक माध्यम है। साथ ही आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण लेकर बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करें, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके। उन्होंने कहा कि शिल्पकारों को केवल प्रोत्साहन देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें आधुनिक बाजार से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना भी आवश्यक है।बोर्ड की अध्यक्ष ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य हस्तशिल्प विकास बोर्ड शिल्पकारों द्वारा निर्मित उत्पादों की बेहतर ब्रांडिंग, आकर्षक पैकेजिंग और प्रभावी विपणन के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से आधुनिक तकनीकों का समावेश करते हुए शिल्पकारों की आवश्यकताओं के अनुरूप हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराएं। नगरपालिका अध्यक्ष श्री नरपति पटेल ने कहा कि कोंडागांव अपनी समृद्ध पारंपरिक शिल्पकला के कारण शिल्पनगरी के नाम से प्रसिद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि आधुनिक टूल किट शिल्पकारों के कार्य को अधिक सुगम, गुणवत्तापूर्ण और प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस अवसर पर श्रीमती लक्ष्मी ध्रुव, सुश्री सोनामणि पोयाम, श्रीमती सुषमा खोब्रागड़े, श्री कुलवंत चहल, श्री जितेन्द्र सुराना, श्री दयाराम पटेल, श्री नागेश देवांगन एवं हस्त शिल्प कोण्डागांव के सहायक प्रबंधक श्री आर. डी. खूंटे सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में शिल्पकार उपस्थित रहे।
- -साइबर सुरक्षा, महिला अधिकार, आत्मरक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं की दी गई जानकारीरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में संचालित बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत बालिकाओं के सशक्तिकरण, सुरक्षा एवं जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए लगातार विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा सूरजपुर जिले के विकासखंड प्रतापपुर स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पंछीडांड़ (केरता) में जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में छात्र-छात्राओं को साइबर अपराधों से बचाव, महिला एवं बाल अधिकार, लैंगिक समानता, वित्तीय साक्षरता तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें सुरक्षित एवं जागरूक नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया गया।कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, घरेलू हिंसा से संरक्षण, महिला उत्पीड़न की रोकथाम, मासिक धर्म स्वच्छता, बाल विवाह के दुष्परिणाम तथा बाल विवाह निषेध कानून की जानकारी दी। विद्यार्थियों को आवश्यकता पड़ने पर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 181 तथा आपातकालीन सेवा 112 का उपयोग करने के बारे में भी बताया गया। साथ ही यातायात नियमों एवं सुरक्षित डिजिटल व्यवहार पर भी जागरूक किया गया।शिविर के दौरान नोनी सुरक्षा योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना तथा महतारी वंदन योजना सहित राज्य एवं केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। इसके अलावा सखी वन स्टॉप सेंटर द्वारा महिलाओं को उपलब्ध कराई जाने वाली सहायता सेवाओं से भी छात्राओं एवं उपस्थित महिलाओं को अवगत कराया गया।कार्यक्रम में छात्राओं को आत्मविश्वास और सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से आत्मरक्षा का प्रशिक्षण भी दिया गया तथा जागरूकता संबंधी ब्रोशर वितरित किए गए। विद्यालय परिवार, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों तथा विशेषज्ञों के सहयोग से आयोजित यह शिविर बालिकाओं में जागरूकता, आत्मविश्वास और सुरक्षा के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
- -अब चक्कर काटने से मिली मुक्ति, 24 घंटे में मिला आय प्रमाण पत्ररायपुर । डिजिटल क्रांति और त्वरित नागरिक सेवाओं के बल पर नारायणपुर का ‘सेवा सेतु केंद्र’ आमजनों के लिए भरोसे का सबसे मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की जनहितैषी सोच और कलेक्टर के कुशल निर्देशन में संचालित इस केंद्र ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को इतना सरल और पारदर्शी बना दिया है कि ग्रामीणों को अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से पूर्णतः मुक्ति मिल गई है।नारायणपुर जिले के दूरस्थ ग्राम साकड़ीबेड़ा के निवासी तेजराम भोयर को अपने पुत्र मनोज भोयर की आगे की पढ़ाई के लिए आय प्रमाण पत्र की अत्यंत आवश्यकता थी। पूर्व के अनुभवों को याद करते हुए तेजराम आशंकित थे कि प्रमाण पत्र बनवाने में हफ्तों का समय और बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने में पैसे बर्बाद होंगे। लेकिन जैसे ही उन्होंने अपनी अर्जी सेवा सेतु केंद्र में जमा की, उनका यह संशय दूर हो गया। मात्र एक दिन (24 घंटे) के भीतर उनके पुत्र का आय प्रमाण पत्र तैयार होकर उनके हाथ में था। समय पर प्रमाण पत्र मिलने से मनोज की उच्च शिक्षा की राह में आने वाली बाधा दूर हो गई और उनका प्रवेश बिना किसी रुकावट के सुनिश्चित हो सका। श्री तेजराम भोयर ने कहा कि पहले एक छोटे से कागज़ के लिए कई बार दफ्तरों का रुख करना पड़ता था, जिससे समय और पैसा दोनों नष्ट होते थे। लेकिन सेवा सेतु केंद्र की बदौलत मेरा काम सिर्फ एक दिन में हो गया। यह व्यवस्था हम ग्रामीणों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।सेवा सेतु केंद्र की इस त्वरित एवं पारदर्शी कार्यप्रणाली से अभिभूत होकर तेजराम भोयर ने जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का सहृदय आभार व्यक्त किया।मुख्यमंत्री जी की दूरगामी सोच से शुरू की गई यह पहल ग्रामीण अंचलों में सुशासन की नई परिभाषा गढ़ रही है। घर के पास ही डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध शासकीय सेवाएं मिलने से न केवल आम नागरिकों का विश्वास शासन-प्रशासन पर बढ़ा है, बल्कि यह कदम छत्तीसगढ़ में 'लास्ट माइल डिलीवरी' (अंतिम व्यक्ति तक सेवा) का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है।
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-आंगनबाड़ी सहायिकाओं को दिया जा रहा प्रशिक्षक प्रशिक्षण, पोषण बाड़ी विकसित करने पर जोर
-बच्चों के पूरक पोषण आहार में स्थानीय एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करने की पहलरायपुर। महिला एवं बाल विकास विभाग के पोषण संवर्धन प्रयासों को मजबूत करने की दिशा में राज्य के विभिन्न जिलों में स्थानीय खाद्य संसाधनों पर आधारित पोषण शिक्षा और पोषण बाड़ी की अवधारणा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में दंतेवाड़ा जिले में 'निरमान' संस्था द्वारा डब्ल्यूएचएच परियोजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी सहायिकाओं के लिए प्रशिक्षक प्रशिक्षण (टीओटी) कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से पोषण शिक्षा को व्यवहारिक स्वरूप दिया जा रहा है।इस पहल के तहत दंतेवाड़ा जिले की आठ परियोजनाओं में आंगनबाड़ी सहायिकाओं को स्थानीय, विविध एवं मौसमी खाद्य पदार्थों के महत्व के साथ-साथ मिलेट्स आधारित पौष्टिक एवं स्वादिष्ट व्यंजन तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य बच्चों के पूरक पोषण आहार को अधिक पौष्टिक, संतुलित और स्थानीय संसाधनों पर आधारित बनाना है।प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में पोषण बाड़ी (न्यूट्री गार्डन) विकसित करने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है, ताकि केंद्रों में फल एवं हरी सब्जियों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके और बच्चों को ताजा एवं पौष्टिक आहार मिल सके।इसी कड़ी में प्रशिक्षण के बाद 'निरमान' टीम ने परियोजना अधिकारियों के सहयोग से दंतेवाड़ा जिले के बारसूर क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों में पपीता, कटहल, अमरूद, सहजन (मोरिंगा), भिंडी, लौकी, बरबटी, मक्का एवं कद्दू सहित विभिन्न फलदार एवं सब्जी फसलों के पौधे और बीज रोपे। आगामी चरण में बारसूर परियोजना के 30 से 40 आंगनबाड़ी केंद्रों में भी पोषण बाड़ी विकसित की जाएगी। -
*जल संरक्षण, सिंचाई, मत्स्य पालन और रोजगार को मिला नया आधार*
बिलासपुर/जिले के विकासखंड कोटा अंतर्गत ग्राम पंचायत नवागांव कर्रा के मजौलीपारा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत सामुदायिक डबरी का निर्माण किया गया। इस कार्य का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का संरक्षण, भू-जल स्तर में वृद्धि, सिंचाई सुविधा का विस्तार, मत्स्य पालन को बढ़ावा देना तथा ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना था। इस कार्य के लिए कुल 5.11 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई। निर्माण कार्य ग्राम पंचायत द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन एवं नियमानुसार मनरेगा के पात्र श्रमिकों के माध्यम से पूर्ण कराया गया। ग्राम के समीप स्थित मुक्तिधाम क्षेत्र में वर्षा जल के उचित संग्रहण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।बरसात का अधिकांश पानी बहकर व्यर्थ चला जाता था, जिससे गर्मी के मौसम में जल संकट, भू-जल स्तर में गिरावट तथा सिंचाई की समस्या बनी रहती थी। इन परिस्थितियों को देखते हुए सामुदायिक डबरी का निर्माण कराया गया, जिससे वर्षा जल का प्रभावी संचयन संभव हुआ। डबरी निर्माण के बाद आसपास के क्षेत्रों में भू-जल पुनर्भरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। खेतों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होने लगा, जिससे कृषि गतिविधियों को नई गति मिली। साथ ही जल उपलब्धता बढ़ने से स्थानीय स्तर पर मत्स्य पालन की शुरुआत हुई, जिसने ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय और रोजगार का नया स्रोत तैयार किया। इस कार्य ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। डबरी में संचित पानी के कारण आसपास के पेड़-पौधों एवं हरियाली के संरक्षण में सहायता मिली। वर्षा के पानी के अनियंत्रित बहाव में कमी आने से मिट्टी कटाव पर भी नियंत्रण हुआ तथा क्षेत्र में पर्यावरणीय संतुलन मजबूत हुआ। इससे ग्रामीणों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ी। डबरी का निर्माण मुक्तिधाम के समीप होने के कारण सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ। पहले यहां अंतिम संस्कार जैसी आवश्यक गतिविधियों के दौरान जल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, जबकि अब इस डबरी से आवश्यक जल उपलब्ध होने लगा है। इसके साथ ही यह सामुदायिक परिसंपत्ति गांव के अन्य सामाजिक कार्यों में भी उपयोगी साबित हो रही है।आज यह सामुदायिक डबरी ग्राम नवागांव कर्रा के लिए जल संरक्षण और ग्रामीण विकास का एक सफल मॉडल बन चुकी है। इस पहल से जहां एक ओर कृषि उत्पादन, मत्स्य पालन और भू-जल संरक्षण को मजबूती मिली है, वहीं दूसरी ओर मनरेगा के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध हुआ है। यह कार्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर क्षेत्र के अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। - -कलाकारों, शिक्षाविदों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का किया सम्मानरायपुर । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सेवा, सुशासन और जनकल्याण के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष जनसंपर्क अभियान के अंतर्गत वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने रायगढ़ शहर के विभिन्न क्षेत्रों में प्रबुद्ध एवं सम्मानित नागरिकों से उनके निवास पर पहुंचकर आत्मीय मुलाकात की तथा संवाद किया।इस दौरान वित्त मंत्री श्री चौधरी ने चाँदनी चौक स्थित संगीत एवं नृत्य गुरु श्री शरद वैष्णव से भेंट कर उनके कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में योगदान की सराहना की। उन्होंने फ्रेंड्स कॉलोनी, कोतरा रोड बायपास में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार के सदस्य डॉ. राजू अग्रवाल से मुलाकात कर उनका सम्मान किया। साथ ही सुभाष नगर, कोतरा रोड में भारतीय मजदूर संघ के वरिष्ठ नेता श्री एल.पी. कटकवार से भेंट कर विभिन्न सामाजिक विषयों पर चर्चा की।इसी क्रम में उन्होंने पूर्व प्राचार्य एवं सरस्वती शिशु मंदिर से जुड़े वरिष्ठ शिक्षाविद् श्री बाबूलाल चंद्रा से भी मुलाकात की। वित्त मंत्री ने प्रतिष्ठित शिक्षाविद एवं पेंटिंग आर्टिस्ट श्री पी.एस. खोडियार, सेवानिवृत्त प्राध्यापक श्री प्रताप खुरियार तथा श्रीमती कल्याणी मुखर्जी से भी उनके निवास पर पहुंचकर आत्मीय संवाद किया।सभी स्थानों पर वित्त मंत्री श्री चौधरी ने शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया तथा रामचरितमानस की प्रति भेंट की। उन्होंने कहा कि समाज के वरिष्ठ एवं प्रबुद्ध नागरिकों का अनुभव, ज्ञान और मार्गदर्शन राष्ट्र निर्माण की अमूल्य पूंजी है। उनके विचार और जीवनानुभव नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में देश ने सेवा, सुशासन, विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। विशेष जनसंपर्क अभियान के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचकर संवाद स्थापित किया जा रहा है तथा केंद्र सरकार की जनहितकारी योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी साझा की जा रही है।इस अवसर पर सभी सम्मानित नागरिकों ने वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी का आभार व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के विकास एवं जनकल्याण के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की।




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