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- नयी दिल्ली/ समुद्री जीवविज्ञानी और पद्मश्री से सम्मानित डा. अजय कुमार सोनकर का कहना है कि मानव द्वारा विकसित सर्वोत्तम प्रौद्योगिकियां भी प्रकृति की बराबरी नहीं कर सकतीं। उनके प्रयोगों से पता चलता है कि वैज्ञानिक रूप से उन्नत, लेकिन नियंत्रित वातावरण में उगाए गए सीपों को, प्राकृतिक वातावरण में उगाए गए सीपों की तुलना में जीवित रहने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।डॉ. सोनकर ने इस शोध के दौरान दो समूहों में समुद्री मोती उत्पादक सीपों को प्रयोगशाला में दो प्रकार के वातावरण में पाल कर यह सिद्ध कर दिखाया कि जब एक समूह को अत्याधुनिक मानव निर्मित तकनीकों से सुसज्जित किया गया और दूसरे को केवल समुद्र की प्राकृतिक गोद का वातावरण दिया गया-तो इसमें जीत प्रकृति की हुई। उन्होंने बताया कि सीपों की दो प्रजातियों: ‘पिंकटाडा मार्गेरिटीफेरा' और ‘टीरिया पेंग्विन' को अंडमान द्वीपों से लिया गया था। समुद्री जीवविज्ञानी ने मत्स्य पालन पत्रिका 'इन्फोफिश इंटरनेशनल' के मई अंक में प्रकाशित एक लेख में बताया कि एक समूह को नियंत्रित, कृत्रिम वातावरण में - वैज्ञानिक प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके विकसित किया गया - तथा दूसरे समूह को प्राकृतिक समुद्री वातावरण में पाला गया। पहले समूह का वातावरण पूरी तरह से नियंत्रित वातावरण था जिसमें सटीक बायोफिल्ट्रेशन, यांत्रिक जल प्रवाह, वालन माध्यम में उगाई गई माइक्रोएल्गी (सीप का भोजन), नियंत्रित क्षारीय तत्वों की उपलब्धता और नियंत्रित तापमान तथा सीमित सूक्ष्मजीव संपर्क जैसे वातावरण को सृजित किया गया। दूसरे समूह को एक प्रारंभिक सर्जरी के उपरांत देखभाल के बाद, पूरी तरह से प्राकृतिक समुद्री लय के हवाले कर दिया गया। इस टैंक में गहराई से लिया गया अपरिष्कृत समुद्री जल निरंतर प्रवाहित किया गया। न कोई कृत्रिम फ़िल्टर, न कोई रासायनिक पोषण था। यहां केवल प्रकृति थी, जैसी वह है। पद्मश्री पुरस्कार विजेता डा. सोनकर ने बताया कि नतीजे चौंकाने वाले थे। उन्होंने पाया कि जहाँ सर्वोत्तम वैज्ञानिक देखरेख दी गई, उसमें केवल 55 प्रतिशत जीवित रहने की दर दर्ज की गई, और तैयार मोतियों में से अधिकतर विकृत, धब्बेदार और कमजोर संरचना वाले थे। वहीं प्राकृतिक समुद्र की जटिल पारिस्थितिकी में विकसित हुए सीपों का दूसरा समूह उस वातावरण में मोतियों की संरचना कर रहा था, जहाँ मूल निवासी सूक्ष्मजीव और लाभकारी फेज़ (बैक्टेरियोफेज)विद्यमान थे, उसमें 98 प्रतिशत जीवन प्रत्याशा और 119 मोती प्राप्त हुए। इनमें से लगभग 60 प्रतिशत मोती उच्चतम गुणवत्ता के थे। डॉ. सोनकर ने स्पष्ट किया कि यह मात्र परिणामों का अंतर नहीं था, यह एक विचारशील उद्घाटन था। उन्होंने इसके बारे में एक ही टिप्पणी की, “कोई प्रयोगशाला, कोई कृत्रिम वातावरण, चाहे वह कितना भी उन्नत क्यों न हो, प्रकृति की समग्र बुद्धिमत्ता की बराबरी नहीं कर सकता।” सूक्ष्मजीवों और कोशकीय जीवविज्ञान के प्रसिद्ध वैज्ञानिक डा. अजय कुमार सोनकर ने कहा कि प्राकृतिक समुद्र ने एक स्व-संतुलित, रोग-प्रतिरोधक और जैविक रूप से बुद्धिमान पारिस्थितिकी प्रदान की जिसमें सूक्ष्मजीव विविधता, जीवंत शैवाल और सूक्ष्म भौतिक-रासायनिक संतुलन शामिल था। उन्होंने कहा, “जहाँ हमने फ़िल्टर किया, वहाँ प्रकृति ने विविधता जोड़ी। जहाँ हमने नियंत्रित किया, वहाँ प्रकृति ने अनुकूलित व्यवहार किया। जहाँ हमने सब कुछ साफ किया, वहाँ प्रकृति ने प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाई।” 58 वर्षीय वैज्ञानिक सोनकर ने बताया कि प्राकृतिक समुद्री जल ने एक स्व-नियमन, प्रतिरक्षा-वर्धक और जैविक रूप से बुद्धिमान पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान किया, जिसमें सूक्ष्मजीव विविधता, अदृश्य फेज, जीवित फाइटोप्लांकटन और सूक्ष्म जैव-रासायनिक संतुलन शामिल है। सोनकर ने कहा कि प्रयोगों से मिली सीख सिर्फ़ मोती उत्पादन तक ही सीमित नहीं है - ये वैश्विक वैज्ञानिक दृष्टिकोण को ही चुनौती देती है। जीवविज्ञानी ने कहा, "(यह खोज) हमें इस बात पर पुनर्विचार करने पर मजबूर करती है कि हम प्रकृति से कितनी दूर चले गए हैं, चाहे वह मिट्टी रहित कृषि हो, प्राकृतिक संकेतों से कटे शहर हों, या स्वच्छ डिजिटल बुलबुले में पले-बढ़े बच्चे हों।" सोनकर ने 1990-91 में वारंगल स्थित काकतीय विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने अमेरिका के राइस विश्वविद्यालय और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के अलावा जापान और नीदरलैंड के अन्य संस्थानों से आनुवंशिकी, पोषण और कैंसर सहित वैज्ञानिक क्षेत्रों में ऑनलाइन ज्ञान प्राप्त किया। वह आशा करते हैं कि इस अध्ययन को केवल एक तकनीकी सफलता के रूप में नहीं बल्कि एक "दार्शनिक जागृति" के रूप में देखा जाएगा - जो हमें प्रकृति के अद्वितीय ज्ञान का सम्मान करने की याद दिलाती है, जो आज की सबसे ज़रूरी वैज्ञानिक ज़रूरत है। सोनकर ने कहा, "क्योंकि जब प्रकृति पर कोई बंधन नहीं होता, तो वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करती है - और हम सभी से आगे निकल जाती है।
- नयी दिल्ली. भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक आकर्षक स्थल है और पिछले तीन साल से सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का भारत की अर्थव्यवस्था को ‘मृत' बताना ‘बिल्कुल गलत' है। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और मद्रास स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स के निदेशक एन आर भानुमूर्ति ने रविवार को यह कहा। उन्होंने बताया कि दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के उलट, भारतीय अर्थव्यवस्था काफी हद तक घरेलू कारकों पर आधारित है। विशाल घरेलू बाजार और बढ़ते डिजिटल बाजार के साथ, अनिश्चित वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के कारण वृद्धि के मोर्चे पर जोखिम सीमित है। उल्लेखनीय है कि भारत पर 25 प्रतिशत शुल्क और रूस के साथ व्यापार करने को लेकर ‘जुर्माना' लगाने की घोषणा के बाद ट्रंप ने पिछले सप्ताह एक सोशल मीडिया मंच पर लिखा, ‘‘मुझे परवाह नहीं है कि भारत, रूस के साथ क्या करता है। मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे अपनी ‘मृत अर्थव्यवस्थाओं' को एक साथ कैसे नीचे ले जा सकते हैं।'' भानुमूर्ति ने कहा, ‘‘अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान बिल्कुल गलत है। अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था को देखें, तो भारत निश्चित रूप से संकटग्रस्त वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक 'आकर्षक स्थल' है। पिछले तीन वर्षों से भारत सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसकी मुद्रास्फीति दर तीन प्रतिशत से भी कम है। अन्य सभी मानदंड जैसे चालू खाता घाटा (कैड), सार्वजनिक ऋण, विदेशी मुद्रा भंडार, सभी एक मजबूत अर्थव्यवस्था का संकेत दे रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘अत्यधिक गरीबी लगभग समाप्त हो जाने के साथ, हम जल्द ही चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे। इसी तरह, आप जिस भी आर्थिक मानदंड पर नजर डालें, भारत कमजोर स्थिति में नहीं नजर आता है।'' आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जून में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर छह साल के निचले स्तर 2.10 प्रतिशत रही। यह भारतीय रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर (चार प्रतिशत) से कम है। वहीं चालू खाते का घाटा बीते वित्त वर्ष 2024-25 में जीडीपी का 0.6 प्रतिशत रहा। इसी प्रकार, 25 जुलाई को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 2.70 अरब डॉलर बढ़कर 698.19 अरब डॉलर पहुंच गया। प्रख्यात अर्थशास्त्री ने कहा, ‘‘अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के उलट, भारतीय अर्थव्यवस्था काफी हद तक घरेलू कारकों पर आधारित है। विशाल घरेलू बाजार और बढ़ते डिजिटल बाजार के साथ, अनिश्चित वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के कारण वृद्धि के मोर्चे पर जोखिम सीमित है। इसके अलावा, चूंकि निवेश का एक बड़ा हिस्सा घरेलू बचत (चालू खाता घाटा एक प्रतिशत से भी कम) से समर्थित है, इसलिए वैश्विक जोखिम का प्रभाव सीमित है।'' उन्होंने कहा, ‘‘हालाकि, हमें अपने बढ़ते युवाओं के लिए अधिक रोजगार सृजित करने के लिए विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।'' यह पूछे जाने पर कि क्या हमारी अर्थव्यवस्था शुल्क संबंधित चुनौतियों का सामना करने के लिए पर्याप्त रूप से मजबूत है, भानुमूर्ति ने कहा, ‘‘वैश्वीकृत दुनिया में, किसी अर्थव्यवस्था की मजबूती केवल घरेलू कारकों पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि हमारे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ वैश्विक संबंध कितने मजबूत हैं। कोई भी देश अलग होने का जोखिम नहीं उठा सकता। अब तक, भारत का प्रदर्शन इस मामले में शानदार रहा है।'' उन्होंने कहा, ‘‘ज्यादा महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्था की स्थिरता है और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक स्थिरता के मामले में भारत को शीर्ष पर होना चाहिए। भारत ने कई देशों के साथ व्यापारिक संबंध बढ़ाए हैं और वैश्विक दक्षिण की एक मजबूत आवाज भी बना है। लेकिन अगर उसे सालाना छह से सात प्रतिशत की दर से बढ़ना है, तो उसे अभी भी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर निर्भर रहना होगा। वैश्विक वृद्धि के अभाव में, हम शायद केवल पांच से छह प्रतिशत की दर से ही वृद्धि कर पाएंगे।'' अमेरिकी शुल्क के भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर भानुमूर्ति ने कहा, ‘‘चूंकि अमेरिका के साथ व्यापार में भारत अधिशेष की स्थिति में है, इसलिए 25 प्रतिशत शुल्क का निर्यात पर प्रभाव पड़ेगा। हालांकि, यह विशिष्ट वस्तुओं पर निर्भर करता है और इससे निपटने के लिए एक विशिष्ट रणनीति की आवश्यकता है।'' उन्होंने कहा, ‘‘पेट्रोलियम और सेवाएं जैसे क्षेत्र शुल्क के दायरे में नहीं आते हैं और इन क्षेत्रों में भारत मजबूत और प्रतिस्पर्धी है। रूस से कच्चे तेल के आयात पर लगने वाले जुर्माने (वास्तव में जुर्माने की राशि के बारे में अस्पष्टता) को लेकर चिंता अधिक है और भारत इससे कैसे निपटेगा, यह एक बड़ी चुनौती है। अन्य देशों के साथ व्यापार समझौते रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकते हैं। साथ ही भारत और रूस को अन्य व्यापार समूहों के साथ रणनीतिक गठजोड़ के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। भारत पहले ही ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौता कर चुका है और यूरोपीय संघ के साथ भी घनिष्ठ संबंध रखता है। ऐसे व्यापार समझौते भारत को घरेलू हितों को बनाए रखते हुए अपने व्यापार में विविधता लाने में मदद कर सकते हैं।
- कन्नूर (केरल) . केरल के कन्नूर में पिछले पांच दशक से अपने क्लिनिक में मात्र दो रुपये में हजारों गरीब मरीजों का इलाज करने वाले चिकित्सक ए. के. रायरू गोपाल का उम्र संबंधी बीमारियों के कारण रविवार को निधन हो गया। गोपाल के परिवार से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी। गोपाल 80 वर्ष के थे और उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी है।वह अपने निवास ‘लक्ष्मी' में ही बने क्लिनिक में प्रतिदिन तड़के चार बजे से शाम चार बजे तक मरीजों का इलाज करते थे। उनके क्लिनिक में रोजाना सैकड़ों मरीज आते थे। उन्हें ‘जनता का डॉक्टर' और ‘दो रुपये वाले डॉक्टर' के नाम से जाना जाता था। गिरती सेहत के कारण उन्होंने क्लिनिक का समय सुबह छह बजे से शाम चार बजे तक कर दिया था। चिकित्सक गोपाल उन मरीजों को दवाइयां भी देते थे, जिनके पास इसे खरीदने के पैसे नहीं होते थे। उम्र संबंधी समस्याओं के कारण मई 2024 में उन्हें अपना क्लिनिक बंद करना पड़ा था, जिससे इस क्षेत्र के गरीब मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। सूत्रों ने बताया कि चिकित्सक का अंतिम संस्कार दोपहर में पय्यम्बलम में किया जाएगा।केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने ‘जनता का डॉक्टर' के नाम से मशहूर चिकित्सक रायरू गोपाल के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने अपने संदेश में कहा, ‘‘आधी सदी से वह अपनी परामर्श सेवा के लिए केवल दो रुपये ही लेते रहे। लोगों की सेवा करने की उनकी इच्छा गरीब मरीजों के लिए एक बड़ी राहत थी।'
- नई दिल्ली/ झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का सोमवार को निधन हो गया। वे 81 साल के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में अंतिम सांसद ली। उनके बेटे और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, 'आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं। आज मैं शून्य हो गया हूं...' इसके साथ ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम लोगों ने शिबू सोरेन के निधन पर दुख जताया।शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ के नेमरा गांव में हुआ था। बचपन से ही उन्होंने आदिवासी समुदाय की समस्याओं, शोषण और अन्याय को करीब से देखा। 1960 के दशक में उन्होंने आदिवासी अधिकारों और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष शुरू किया। 1970 के दशक में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना की। उनका मुख्य उद्देश्य अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलन चलाना था। इस आंदोलन में उन्होंने आदिवासियों के जमीन छीनने, शोषण और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई।
- नयी दिल्ली. उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग इलाके में रविवार को चार से पांच हथियारबंद बदमाशों ने एक आभूषण की दुकान पर दुकान मालिक और ग्राहकों को बंधक बनाकर कथित तौर पर नकदी और आभूषण लूट लिए। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह घटना दयालपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत चांद बाग की गली नंबर चार में आभूषण की एक दुकान में हुई। पुलिस ने बताया कि लूट की सूचना मिलने पर एक टीम तुरंत मौके पर भेजी गई।एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, ‘‘शिकायतकर्ता सादिक (27) ने पुलिस को बताया कि जब वह एक ग्राहक से बात कर रहा था, तभी चार-पांच लोगों का एक समूह उसकी दुकान में घुस आया और अंदर से शटर गिरा दिया।'' आरोपियों ने बंदूक के बल पर उन्हें बंधक बना लिया और दुकान से तथा वहां मौजूद ग्राहकों से आभूषण और नकदी लूटकर फरार हो गए। अपराध एवं फोरेंसिक टीम के अधिकारियों सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मौका-ए-वारदात का निरीक्षण किया और साक्ष्य एकत्र किए। अधिकारी ने बताया कि इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की भी जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि दयालपुर थाने में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए कई टीम तैनात की गई हैं।
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मुंबई. दुनिया के सबसे व्यस्त उपनगरीय रेल नेटवर्क में से एक पर यात्रियों की सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए पश्चिम रेलवे अगले साल के अंत तक मुंबई में अपनी सभी लोकल ट्रेन को स्वदेशी टक्कर-रोधी प्रणाली ‘कवच' से लैस करने के लिए तैयार है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। कवच ‘मेक इन इंडिया' पहल के तहत विकसित एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली है जिसे वर्तमान में दिल्ली-मुंबई के साथ-साथ कुछ अन्य प्रमुख मार्गों पर स्थापित किया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि स्वदेशी रूप से डिजाइन की गई स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली स्वचालित रूप से ट्रेन की गति को नियंत्रित करेगी, टकराव को रोकेगी और मानवीय त्रुटि के खतरे के बावजूद सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि एटीपी प्रणाली फिलहाल पश्चिम रेलवे द्वारा ऑनबोर्ड सुरक्षा उपकरण के रूप में उपयोग की जाने वाली सहायक चेतावनी प्रणाली (एडब्ल्यूएस) की जगह लेगी। पश्चिम रेलवे चर्चगेट-विरार-दहानू खंड पर प्रतिदिन 1400 से अधिक उपनगरीय ट्रेन सेवाएं संचालित करता है और इसके पास 110 इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट्स (ईएमयू) का बेड़ा है। इस खंड पर दैनिक सवारियों की संख्या 30 लाख से अधिक है। एक अधिकारी ने बताया कि इन सभी उपनगरीय लोकल ट्रेन में कार्यरत एडब्ल्यूएस में एक श्रव्य चेतावनी प्रणाली है जो चालक को आने वाले सिग्नल के बारे में सचेत करती है, साथ ही गति निगरानी और ब्रेक लगाने में सहायता जैसी अतिरिक्त सुविधाएं भी प्रदान करती है। उन्होंने कहा, ‘‘मोटरमैन के केबिन में एब्ल्यूएस पैनल में एक अलार्म, एक सतर्कता बटन और लाल, पीली या नीली बत्तियां होती हैं। अगर अलार्म बजता है, तो मोटरमैन को चार सेकंड के भीतर बटन दबाना होगा अन्यथा ब्रेक सक्रिय हो जाएंगे और ट्रेन के पूरी तरह से रुकने तक लॉक रहेंगे।'' हालांकि रेलवे अधिकारियों के अनुसार, एडब्ल्यूएस अक्सर ‘सिग्नल पास एट डेंजर' (एसपीएडी) और सिग्नल जंपिंग जैसी गंभीर सुरक्षा घटनाओं को रोकने में विफल रहता है। उन्होंने आगे कहा कि इसकी सीमित स्वचालन और मैन्युअल प्रतिक्रिया पर निर्भरता संभावित दुर्घटनाओं को रोकने में इसकी प्रभावशीलता को कम करती है। इन अधिकारियों ने कहा कि कवच मौजूदा एडबल्यूएस से बेहतर है क्योंकि इसमें टकरावों को रोकने, ट्रेन की आवाजाही का प्रबंधन करने और सिग्नल प्रणालियों का पालन सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन की गई उन्नत सुविधाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इसकी प्रमुख विशेषताओं में लाल सिग्नल के उल्लंघन की स्थिति में स्वचालित ब्रेक लगाना, मौजूदा सिग्नलिंग बुनियादी ढांचे के साथ इसकी सुसंगतता और कम दृश्यता की स्थिति में सुरक्षित संचालन के लिए ‘इन-कैब सिग्नलिंग' शामिल है। अधिकारियों ने कहा कि कवच पीछे से और आमने-सामने की टक्करों को रोकता है, गति की निरंतर निगरानी करता है और आपात स्थिति में तेज प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाता है। अधिकारियों ने कहा कि पश्चिम रेलवे ने 2025 तक 2358 किलोमीटर से अधिक मार्ग पर कवच को तैनात करने की योजना बनाई है और चालू वित्त वर्ष के अंत तक मुंबई-अहमदाबाद मार्ग पर इसके काम करने की उम्मीद है। पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक ने ‘ कहा, ‘‘कवच रेलवे सिग्नलिंग प्रणाली में उल्लेखनीय सुधार लाएगा और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाएगा। कवच की तैनाती से न केवल ट्रेन सेवा में सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि दक्षता में भी सुधार होगा।
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भुवनेश्वर। ओडिशा में पुरी जिले के बायाबरा गांव में रविवार को सन्नाटा पसरा रहा, जहां की निवासी 15 साल की लड़की ने दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। पुरी जिले में भार्गवी नदी के तट पर 19 जुलाई की सुबह तीन अज्ञात लोगों ने उक्त लड़की का कथित तौर पर अपहरण कर लिया था और उसे आग लगा दी थी। इस घटना में वह 70 प्रतिशत से अधिक झुलस गई थी। लड़की की मौत के बाद उसके गांव में सन्नाटा पसरा नजर आया और लोग अपने घरों के अंदर ही रहे।
बलांगा थाने की सीमा के अंतर्गत बायाबरा गांव में लड़की के घर के पास पुलिसकर्मी पहरा दे रहे हैं क्योंकि उसके परिवार के अधिकतर सदस्य संभवतः दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं, जहां शव का पोस्टमॉर्टम किया जाएगा। वहीं, एक पड़ोसी ने बताया कि लड़की की मां और उसकी चाची भी शनिवार से लापता हैं जबकि वे अभी तक नुआगोपालपुर बस्ती स्थित घर पर मौजूद थीं। पड़ोसी ने कहा कि लड़की की मौत हो जाने से क्षेत्र का हर व्यक्ति स्तब्ध है और किसी के पास बोलने के लिए शब्द नहीं है। समुदाय के कुछ लोग गांव के पास एक गड्ढा खोदते हुए नजर आए। वे उम्मीद जता रहे हैं कि पारंपरिक प्रक्रिया के तहत लड़की के शव को यहीं दफनाया जाएगा। पुलिस के एक कर्मी ने स्थानीय समाचार चैनल से कहा, “हम गांव और लोगों की आवाजाही पर नज़र रख रहे हैं। सब कुछ शांत है। लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं।” ग्रामीण दुखीश्याम सेनापति ने भी अपने घर के दरवाजे बंद रखे तथा वह मीडियाकर्मियों सहित किसी से भी बात नहीं कर रहे। उन्होंने ही सबसे पहले लड़की के शरीर से आग बुझाने का प्रयास किया था। जब 19 जुलाई की सुबह लड़की मदद की गुहार लगा रही थी तो सबसे पहले दुखीश्याम सेनापति ही उसकी मदद के लिए आगे आए थे। इस बीच, लड़की के पिता ने एक वीडियो में कहा, “मैं यह कहना चाहता हूं कि सरकार ने मेरी बेटी के लिए जो भी संभव था, वह किया है। मेरी बेटी अब नहीं रही। मेरी बेटी ने मानसिक दबाव के कारण अपनी जान ले ली। इसलिए, मैं सभी से अनुरोध करता हूं कि इस मामले का राजनीतिकरण न करें और उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।” शनिवार को लड़की की मौत होने के कुछ घंटे बाद ओडिशा पुलिस ने दावा किया था कि घटना में कोई अन्य व्यक्ति शामिल नहीं था। हालांकि, लड़की की मां ने अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया था कि तीन अज्ञात बदमाशों ने उनकी बेटी को आग के हवाले कर दिया था। हालांकि, पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि लड़की को आग कैसे लगी।
पुलिस ने पिछले 15 दिन में तीन बार लड़की का बयान दर्ज किया। पुलिस ने दावा किया कि उसने पूरी ईमानदारी से जांच की है तथा यह अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। इसने कहा कि अब तक की गई जांच के अनुसार यह स्पष्ट है कि इसमें कोई अन्य व्यक्ति शामिल नहीं है।
पुलिस ने सभी से अनुरोध किया कि इस दुखद क्षण में इस मामले पर कोई भी संवेदनशील टिप्पणी न करें।
बलांगा क्षेत्र में लड़की के अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं।
इस बीच, पुलिस ने राज्य की राजधानी भुवनेश्वर में भी सुरक्षा कड़ी कर दी है और मुख्यमंत्री मोहन माझी के आवास के पास की सड़कों को बंद कर दिया गया है तथा सभी मंत्रियों के आवास के पास भी अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। -
हरिद्वार। देश के अलग-अलग स्थानों से हरिद्वार में एकत्र हुए मुल्तान समाज के लोगों ने रविवार को धूमधाम से 'मुल्तान जोत महोत्सव' कार्यक्रम मनाया तथा हर की पौड़ी पर गंगा नदी के साथ दूध की होली खेलकर उसे स्वच्छ रखने का संदेश दिया। मुल्तान समाज के हजारों लोगों ने 'मुल्तान जोत' के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली और हर की पौड़ी पर उसे गंगा को अर्पित किया। लोगों ने प्रमुख जोत के अलावा छोटी-छोटी जोतें भी प्रवाहित की जिससे हर की पौड़ी का नजारा भव्य दिखाई दे रहा था। इस कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने जोत महोत्सव को मानव कल्याण के लिए 115 साल पहले शुरू की गई एक शानदार परंपरा बताते हुए कहा कि गंगा की स्वच्छता का संदेश देने के साथ ही सभी के कल्याण की कामना के लिए यह अनोखा कार्यक्रम प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है। मुल्तान जोत महोत्सव समिति के अध्यक्ष और दिल्ली भाजपा के पूर्व विधायक महेंद्र नागपाल ने बताया कि जोत महोत्सव मनाने और हरिद्वार में जोत लाने की परंपरा 1911 में शुरू हुई थी जब मुल्तान (अब पकिस्तान में) के रहने वाले लाला रूपचंद भाई-चारे और शांति का संदेश लेकर पैदल चलते हुए मुल्तान से हरिद्वार पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि तभी से मुल्तान समाज लालाजी की उस परंपरा को आगे बढ़ाता चला आ रहा है। दिन में दूध की होली के खेलने के बाद मुल्तान समाज के लोगों ने रात में हर की पौड़ी पर दीवाली मनाई।
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नई दिल्ली। सेमीकंडक्टर आधुनिक तकनीक के केंद्र में हैं और चिप्स की वैश्विक मांग आसमान छू रही है, लेकिन कुछ सीमित भौगोलिक क्षेत्रों में उद्योग की एकाग्रता के कारण सप्लाई चेन बहुत नाजुक बनी हुई है। इसी के साथ मैन्युफैक्चरिंग के वैश्विक विविधीकरण की स्पष्ट आवश्यकता है। भारत इस संबंध में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है।
मेक इन इंडिया के तहत प्रमुख क्षेत्रों में से एक के रूप में इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग (ईएसडीएम), इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम जैसी पहलों ने उद्योग का समर्थन करने के लिए एक इकोसिस्टम बनाने में मदद की है। ग्लोबल सेमीकंडक्टर मार्केट 2030 तक 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें भारत का बाजार एक बड़ा हिस्सा है।
ई 2025 में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नोएडा और बेंगलुरु में दो अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर डिजाइन सुविधाओं का उद्घाटन किया। ये केंद्र एडवांस 3-नैनोमीटर चिप डिज़ाइन पर केंद्रित भारत के पहले केंद्र हैं, जो देश की सेमीकंडक्टर इनोवेशन जर्नी में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होंगे।
मंत्रालय की डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) योजना और इसके चिप्स टू स्टार्टअप (सीटूएस) कार्यक्रम के तहत सहायता प्राप्त स्टार्टअप महत्वपूर्ण रूप से तेजी के साथ आगे बढ़ रहे हैं। पिछले दिनों इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय के अनुसार, स्मार्ट विजन, सीसीटीवी कैमरा और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) जैसे एप्लीकेशन के लिए चिप्स बनाने वाली कंपनी नेत्रसेमी स्टार्टअप को सरकार की चिप डिजाइन योजना के तहत मिले सहयोग से 107 करोड़ रुपए का उद्यम पूंजीगत (वीसी) निवेश प्राप्त हुआ।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा भी इस सफलता का स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि भारत में महत्वपूर्ण डिजाइन क्षमताएं निहित हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर मिशन द्वारा देश में डिजाइन को सहायता दिए जाने के साथ नेत्रसेमी की सफलता दूसरे भारतीय स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करेगी।
मंत्रालय के अनुसार, 2022 में डीएलआई योजना शुरू होने के बाद से सरकार ने 22 कंपनियों की चिप डिजाइन परियोजनाओं के लिए 690 करोड़ की लागत पर 234 करोड़ रुपये देने की प्रतिबद्धता जताई
मंत्रालय के अनुसार, 2022 में डीएलआई योजना के शुभारंभ के बाद से सरकार ने 22 कंपनियों से चिप डिजाइन परियोजनाओं के लिए 234 करोड़ रुपए की सहायता राशि देने की प्रतिबद्धता जताई थी, जिसकी कुल परियोजना लागत 690 करोड़ रुपए थी। इन स्टार्टअप्स ने मिलकर उद्यम पूंजीगत निवेशकों से 380 करोड़ रुपए से अधिक धन जुटाया है। इसके अलावा, पांच स्टार्टअप पहले ही ग्लोबल चिप मैन्युफैक्चरर्स के साथ अपने चिप डिजाइन का निर्माण और परीक्षण कर चुके हैं। केंद्र सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 72 से अधिक कंपनियों को चिप्स डिजाइन करने में सहायता के लिए एडवांस सॉफ्टवेयर टूल्स तक पहुंच प्रदान की गई है।
पिछले दिनों आईआईटी-हैदराबाद के 14वें दीक्षांत समारोह में केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि जिस तरह से हम सेमीकंडक्टर बनाने के लिए आवश्यक पूंजीगत उपकरण और सामग्री का निर्माण कर रहे हैं, उससे आने वाले वर्षों में भारत सेमीकंडक्टर का उत्पादन करने वाले शीर्ष 5 देशों में शामिल हो जाएगा। भारत सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य एक मजबूत सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले इकोसिस्टम का निर्माण करना है, जिससे भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और डिजाइन के लिए एक ग्लोबल हब के रूप में स्थापित किया जा सके। - भावनगर, । रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को कहा कि भारत की पहली बुलेट ट्रेन सेवा बहुत जल्द शुरू होगी और इससे मुंबई व अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय दो घंटे सात मिनट रह जाएगा। केंद्रीय मंत्री भावनगर टर्मिनस पर थे, जहां से उन्होंने अयोध्या एक्सप्रेस, रीवा-पुणे एक्सप्रेस और जबलपुर-रायपुर एक्सप्रेस को डिजिटल माध्यम से हरी झंडी दिखाई। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर ट्रेन सेवाओं का उद्घाटन किया। वैष्णव ने कहा, “मुंबई से अहमदाबाद के लिए पहली बुलेट ट्रेन बहुत जल्द शुरू होगी और इस परियोजना पर काम तेज गति से जारी है। इसके शुरू होने से मुंबई से अहमदाबाद तक की यात्रा में केवल दो घंटे सात मिनट लगेंगे।” मुंबई और अहमदाबाद के बीच भारत की पहली बुलेट ट्रेन 508 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। यह मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) क्षेत्र से शुरू होगी और 320 किलोमीटर प्रति घंटे की उच्च गति से गुजरात के वापी, सूरत, आणंद, वडोदरा और अहमदाबाद को जोड़ेगी।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। इस शिष्टाचार भेंट के दौरान दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई। हालांकि, इस चर्चा के बारे में अधिक जानकारी साझा नहीं की गई है। राष्ट्रपति के सोशल मीडिया हैंडल एक्स से रविवार को पीएम मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के बीच हुई मुलाकात की तस्वीर भी शेयर की गई, जिसमें वे दोनों चर्चा करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
चुनाव आयोग ने 1 अगस्त को उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी हैराष्ट्रपति के आधिकारिक एक्स हैंडल से तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।” पीएम मोदी और राष्ट्रपति के बीच यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है, जब भारत के अगले उपराष्ट्रपति के चुनाव को लेकर प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। चुनाव आयोग ने 1 अगस्त को उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। चुनाव आयोग के अनुसार, उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान आगामी 9 सितंबर को कराया जाएगा। चुनाव आयोग की ओर से जारी शेड्यूल के अनुसार, 7 अगस्त को चुनाव के लिए आधिकारिक अधिसूचना (नोटिफिकेशन) जारी की जाएगी। इसके बाद इच्छुक उम्मीदवार 21 अगस्त तक अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 22 अगस्त को की जाएगी।राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक पोस्ट शेयर कर बैठक की तस्वीरें साझा की गई हैइससे पहले, 16 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की थी। यह मुलाकात संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले हुई थी। राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक पोस्ट शेयर कर बैठक की तस्वीरें साझा की गई थीं।इसके अलावा, 7 मई को पीएम मोदी ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की थी और उन्हें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में जानकारी दी थी। इस अभियान में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में कई आतंकी ठिकानों को बर्बाद किया था। राष्ट्रपति कार्यालय ने एक्स पोस्ट में बताया था, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की और उन्हें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में जानकारी दी।”( - नई दिल्ली। वार्षिक अमरनाथ यात्रा रविवार से स्थगित कर दी गई है। यह यात्रा 9 अगस्त को संपन्न होने वाली थी, लेकिन अब यह यात्रा लगभग एक सप्ताह पहले ही स्थगित कर दी गई है। अधिकारियों ने यात्रा को समय से पहले बंद करने के पीछे खराब मौसम और यात्रा मार्गों की बिगड़ती स्थिति को मुख्य कारण बताया।तीन दिन पहले भारी बारिश के कारण यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया गया थातीन दिन पहले भारी बारिश के कारण यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। इसी बीच, शनिवार को अधिकारियों ने घोषणा की कि बालटाल और पहलगाम, दोनों पारंपरिक मार्गों से यात्रा फिर से शुरू नहीं होगी, क्योंकि मार्ग असुरक्षित हैं और तत्काल मरम्मत की जरूरत है।कश्मीर के डिविजनल कमिश्नर विजय कुमार बिधूड़ी ने बताया कि भारी बारिश से मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण तीर्थयात्रा असुरक्षित हो गई हैकश्मीर के डिविजनल कमिश्नर विजय कुमार बिधूड़ी के अनुसार, हाल की भारी बारिश ने इलाके की राह को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे तीर्थयात्रियों के लिए मार्ग असुरक्षित हो गया है। उन्होंने बताया कि दोनों मार्गों की तत्काल मरम्मत और रखरखाव की जरूरत है, और मरम्मत के लिए मशीनरी और कर्मचारियों को तैनात करते हुए यात्रा को जारी रखना संभव नहीं है।श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अनुसार, इस वर्ष करीब चार लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा के दर्शन किएश्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष लगभग चार लाख तीर्थयात्री पवित्र गुफा के दर्शन करने में सफल रहे। हालांकि, अधिकारियों ने इस बात को भी स्वीकार किया कि पिछले सप्ताह तीर्थयात्रियों की संख्या में भारी गिरावट आई है, शायद मौसम की खराबी मुख्य वजह हो। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए एक बड़े आतंकी हमले के बाद इस साल की यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था काफी बढ़ा दी गई थी। सरकार ने मौजूदा सुरक्षा बलों के अलावा 600 से ज्यादा अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त कंपनियां तैनात कीं, जिससे यह देश की सबसे कड़ी सुरक्षा वाली तीर्थयात्राओं में से एक बन गई।पहलगाम मार्ग से श्रद्धालु चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी होते हुए 46 किमी पैदल चलकर गुफा मंदिर पहुंचते हैंतीर्थयात्रियों को जम्मू से दोनों बेस कैंपों तक कड़ी निगरानी वाले काफिलों में ले जाया जाता था और श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर काफिले के दौरान नागरिकों की आवाजाही रोक दी जाती थी। पहलगाम मार्ग का उपयोग करने वाले लोग चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी से होकर गुफा मंदिर तक पहुंचते हैं और 46 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करते हैं।सुरक्षा कारणों से इस वर्ष यात्रियों के लिए कोई हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं हैतीर्थयात्रियों को गुफा मंदिर तक पहुंचने में चार दिन लगते हैं। वहीं, छोटे बालटाल मार्ग का उपयोग करने वालों को गुफा मंदिर तक पहुंचने के लिए 14 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है और यात्रा पूरी करने के बाद उसी दिन आधार शिविर लौटना पड़ता है। सुरक्षा कारणों से इस वर्ष यात्रियों के लिए कोई हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं है। श्री अमरनाथ जी यात्रा भक्तों के लिए सबसे पवित्र धार्मिक तीर्थयात्राओं में से एक है, क्योंकि किंवदंती है कि भगवान शिव ने इस गुफा के अंदर माता पार्वती को शाश्वत जीवन और अमरता के रहस्य बताए थे।
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नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत गरीबों के बैंक खातों की संख्या 55 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है, जिनमें से अधिकतर ऐसे लोगों के हैं, जो कभी बैंक के दरवाजे तक भी नहीं गए।
जन धन खाताधारकों से आगे आकर शिविरों में केवाईसी अपडेट कराने का आग्रहसोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में, वित्त मंत्री ने कहा, “इस योजना के 10 साल पूरे होने और इन खातों के लिए केवाईसी अनिवार्य होने के साथ, मैंने बैंकों से आग्रह किया है कि वे सक्रिय रूप से लोगों तक पहुंच बढ़ाएं और इस प्रक्रिया को सरल बनाएं। इस संबंध में, 1 जुलाई, 2025 से शुरू होकर, बैंकों ने यह अभियान शुरू किया है, जिसके तहत अब तक लगभग 1 लाख ग्राम पंचायतों को कवर किया जा चुका है।” उन्होंने सभी जन धन खाताधारकों से इन शिविरों में भाग लेने और अपनी केवाईसी प्रक्रिया पूरी करने के लिए आगे आने का आग्रह किया। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 56 प्रतिशत जन धन खाते महिलाओं के हैं और 21 मई तक इन खातों में जमा कुल राशि 2.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गई है।जन धन योजना ने सभी वयस्कों तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच में बड़ी बढ़ोतरी की हैहाल ही में वित्तीय समावेशन पर एक सेमिनार में आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एम. राजेश्वर राव ने कहा कि प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) का शुभारंभ भारत में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। जन धन योजना ने सभी वयस्कों के लिए बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के देश के प्रयास में एक बड़ी छलांग लगाई है, जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा वित्तीय समावेशन कार्यक्रम बन गया है।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पीएमजेडीवाई को दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहलों में से एक बतायावित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, पीएमजेडीवाई दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहलों में से एक है और चालू वर्ष के लिए ऐसे तीन करोड़ और खाते खोलने का लक्ष्य रखा गया है। मार्च 2015 में प्रति खाता औसत बैंक बैलेंस 1,065 रुपए था, जो अब बढ़कर 4,352 रुपए हो गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत खाते सक्रिय हैं। 66.6 प्रतिशत जन धन खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खोले गए हैं, और 29.56 करोड़ महिला खाताधारकों के हैं। वित्त मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, मनरेगा वेतन से लेकर उज्ज्वला योजना की सब्सिडी और कोविड के दौरान आम लोगों को पैसा उपलब्ध कराने तक, इस योजना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।पीएम जन धन योजना का उद्देश्य कमजोर और कम आय वर्ग को मूल बचत खाते समेत विभिन्न वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराना हैबयान में कहा गया है कि आज, सभी बसे हुए गांवों में से 99.95 प्रतिशत लोगों को बैंकिंग टचपॉइंट्स (बैंक शाखाओं, एटीएम, बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) और भारतीय डाक भुगतान बैंकों सहित) के माध्यम से 5 किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंच प्राप्त है। पीएम जन-धन योजना का उद्देश्य वंचित वर्गों जैसे कमजोर वर्गों और कम आय वर्गो को विभिन्न वित्तीय सेवाएं जैसे मूल बचत बैंक खाते की उपलब्धता, आवश्यकता आधारित ऋण की उपलब्धता, बीमा तथा पेंशन उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना है। ( - नयी दिल्ली. दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के 19 वर्षीय छात्र ने मोबाइल फोन खरीदने की कोशिश करते समय ऑनलाइन धोखाधड़ी में 94,000 रुपये गंवाने के बाद यहां रोहिणी इलाके में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। महेश राणा 14 जुलाई को उत्तरी दिल्ली स्थित अपने घर से लापता हो गया था। उसका शव 16 जुलाई को बेगमपुर जल शोधन संयंत्र के पास मिला। पुलिस के मुताबिक, राणा ने अपनी मां को संदेश भेजकर बताया था कि उसके साथ साइबर धोखाधड़ी हुई है और वह घर छोड़कर जा रहा है। इसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क किया। राणा डीयू के ‘स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग' में बी.कॉम (ऑनर्स) द्वितीय वर्ष का छात्र था। उसने ठगों को कई बार में राशि अंतरित की थी लेकिन उसे मोबाइल फोन नहीं मिला। पुलिस को 16 जुलाई को उसका शव मिला और उसने फोटो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद 19 जुलाई को उसकी पहचान हो सकी। पुलिस ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच की जा रही है।
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नागपुर. मोहन बाबू विश्वविद्यालय (एमबीयू) ने शनिवार को दीक्षांत समारोह के दौरान वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, सांसद और लोकमत मीडिया समूह के संपादकीय बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. विजय दर्डा को डॉक्टर ऑफ लेटर्स (डी.लिट) की मानद उपाधि से सम्मानित किया। यह मानद उपाधि डॉ. दर्डा को पत्रकारिता, प्रेस की स्वतंत्रता, शिक्षा और लोकतांत्रिक सुधार के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के सम्मान में तिरुपति स्थित एक संस्थान द्वारा प्रदान की गई। विश्वविद्यालय ने निर्भीक पत्रकारिता के प्रति दर्डा की अटूट प्रतिबद्धता, मीडिया उद्योग के विकास के लिए उनके ईमानदार प्रयासों और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति उनके सतत समर्पण की सराहना की। दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व नागर विमानन मंत्री और राज्यसभा सदस्य प्रफुल्ल पटेल, मोहन बाबू विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और श्री विद्यानिकेतन शैक्षिक ट्रस्ट (एसवीईटी) के अध्यक्ष डॉ. मोहन बाबू की उपस्थिति में उन्होंने यह सम्मान प्राप्त किया। अपने संबोधन में डॉ. दर्डा ने मोहन बाबू विश्वविद्यालय के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की और कहा कि उन्हें दिया गया यह सम्मान पत्रकारिता और मीडिया उद्योग में उनकी पांच दशकों से अधिक की सेवा को मान्यता है। उन्होंने यह सम्मान लोकमत मीडिया समूह और इसके संस्थापक जवाहरलाल दर्डा द्वारा कायम रखी गई निडर पत्रकारिता की विरासत को समर्पित किया। डॉ. दर्डा ने शिक्षा और पत्रकारिता की परिवर्तनकारी शक्ति को रेखांकित करते हुए, उन्हें सामाजिक प्रगति और राष्ट्रीय सशक्तिकरण के स्तंभ बताया। हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अध्ययन सहित अपनी शैक्षणिक यात्रा का उल्लेख करते हुए, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि शिक्षा कैसे अज्ञानता का मुकाबला करती है और शांति को बढ़ावा देती है।
- नयी दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने शनिवार को कहा कि भारत ने 2024 में 18,900 से अधिक अंग प्रत्यारोपण करने की उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर ली है, जो किसी एक वर्ष में अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है। उन्होंने कहा कि यह 2013 में 5,000 से भी कम प्रत्यारोपण की तुलना में एक महत्वपूर्ण छलांग है। उन्होंने कहा कि अंग प्रत्यारोपण की कुल संख्या के मामले में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है, तथा केवल अमेरिका और चीन से पीछे है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भारत हाथ के प्रत्यारोपण में विश्व में अग्रणी है, जो हमारी अत्याधुनिक शल्य चिकित्सा क्षमताओं और हमारे चिकित्सा पेशेवरों के अटूट समर्पण को दर्शाता है। राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (एनओटीटीओ) द्वारा 15वें भारतीय अंगदान दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में नड्डा ने कहा कि प्रत्यारोपण की आवश्यकता वाले रोगियों और अंगदान करने वालों की संख्या के बीच काफी अंतर है। उन्होंने कहा, ‘‘अंग खराब होने के मामलों में चिंताजनक वृद्धि हो रही है, जिससे जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा हो रहा है और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर दबाव बढ़ रहा है। हर साल, हजारों लोग अंग प्रत्यारोपण का इंतजार करते हैं। तत्काल आवश्यकता के बावजूद, प्रत्यारोपण के लिए प्रतीक्षारत रोगियों की संख्या और उपलब्ध दाताओं की संख्या के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर बना हुआ है।'' नड्डा ने कहा, ‘‘हमारे प्रत्यारोपण पेशेवरों के अटूट समर्पण के कारण भारत ने 2024 में 18,900 से अधिक अंग प्रत्यारोपण करने की उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है, जो किसी एक वर्ष में अब तक का सबसे अधिक रिकॉर्ड है। अंग प्रत्यारोपण की कुल संख्या के मामले में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है, जो केवल अमेरिका और चीन से पीछे है।'' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अस्वास्थ्यकर जीवनशैली और खान-पान की आदतें अंग खराब होने के प्रमुख कारणों में से एक हैं, इसलिए निवारक उपाय और जीवनशैली में सुधार करना आवश्यक है। उन्होंने लोगों से समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए योग अपनाने का आग्रह किया। नड्डा ने कहा, ‘‘आयुर्वेद और योग हमारे अंगों को मजबूत बनाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार हैं। हमें समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए योग को अपनाना चाहिए।'' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समय-समय पर सभी को बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में सक्रिय कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित किया है।
- कोच्चि. प्रख्यात मलयालम साहित्यकार, समीक्षक, शिक्षाविद, लेखक और पूर्व विधायक एम के सानू का शनिवार को यहां एक निजी अस्पताल में संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 98 वर्ष के थे। परिवार के सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि सानू की तबीयत बिगड़ने के बाद पिछले कुछ दिनों से उनका गहन चिकित्सा इकाई में इलाज जारी था। केरल के सांस्कृतिक हलकों में सानू को कई पीढ़ियों के छात्रों के लिए एक सम्मानित शिक्षक और मार्गदर्शक के तौर पर देखा जाता था। तटीय अलप्पुझा जिले के थम्पोली में जन्मे सानू ने मलयालम में स्नातकोत्तर की पढ़ाई में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। उन्होंने अपना कैरियर एक स्कूल शिक्षक के रूप में शुरू किया और बाद में राज्य के कई प्रतिष्ठित कॉलेज में संकाय सदस्य के रूप में कार्य किया। सानू की साहित्यिक यात्रा 1958 में उनकी पहली पुस्तक ‘अंचु शास्त्र नायकनमार' के प्रकाशन के साथ शुरू हुई। अपने दशकों लंबे लेखन करियर में उन्होंने 40 से अधिक पुस्तकें लिखीं, जो अपनी काव्यात्मक भाषा और बौद्धिक गहराई के लिए विख्यात हैं। केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन, विपक्ष के नेता वी डी सतीशन और सामान्य शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी सहित विभिन्न नेताओं ने सानू के निधन पर शोक जताया।
- श्रीनगर. वार्षिक अमरनाथ यात्रा के अंतिम दिन 6,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने दक्षिण कश्मीर हिमालय स्थित पवित्र गुफा मंदिर में हिम शिवलिंग के दर्शन किए, जिससे कुल यात्रियों की संख्या 4.14 लाख हो गई। यह जानकारी अधिकारियों ने दी। पिछले वर्ष 5.10 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने इस गुफा मंदिर में दर्शन किए थे।अमरनाथ यात्रा का समापन आम तौर पर रक्षा बंधन के दिन होता है। इस साल यह यात्रा 9 अगस्त को समाप्त होने वाला था। अधिकारियों ने भारी बारिश के मद्देनजर "महत्वपूर्ण मरम्मत और रखरखाव कार्यों" का हवाला देते हुए यात्रा को एक सप्ताह छोटा करने का निर्णय किया। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को कुल 6,497 तीर्थयात्रियों ने 3,800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने बताया कि यात्रियों में 4,586 पुरुष, 1,299 महिलाएं, 62 बच्चे, 51 साधु, पांच साध्वी और 494 सुरक्षा बल के जवान शामिल थे। अधिकारियों ने बताया कि तीन जुलाई को यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक 4,14,311 यात्री पवित्र गुफा मंदिर में दर्शन कर चुके हैं। हाल ही में हुई भारी बारिश से क्षतिग्रस्त हुए मार्गों के रखरखाव की आवश्यकता के कारण, अधिकारियों ने इस वर्ष की वार्षिक अमरनाथ यात्रा उसके निर्धारित समापन से ठीक एक सप्ताह पहले शनिवार को स्थगित कर दी।
- भुवनेश्वर. ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शनिवार को बताया कि पुरी जिले में एक पखवाड़े पहले तीन अज्ञात बदमाशों द्वारा कथित तौर पर आग के हवाले कर दी गई 15 वर्षीय लड़की की दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज के दौरान मौत हो गई। पुरी जिले में भार्गवी नदी के तट पर 19 जुलाई की सुबह तीन अज्ञात लोगों ने लड़की का कथित तौर पर अपहरण कर लिया और उसे आग लगा दी थी। उसकी मां ने बलंगा थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में बताया कि घटना उस समय हुई जब नाबालिग एक दोस्त से मिलने के बाद अपने घर जा रही थी। तीन लोगों ने उसे रोककर अगवा कर लिया और उस पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी। वह 70 प्रतिशत से अधिक झुलस चुकी थी। उसे 19 जुलाई को सबसे पहले पिपिली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। बाद में उसे उसी दिन एम्स, भुवनेश्वर ले जाया गया और अगले दिन हवाई मार्ग से दिल्ली के एम्स ले जाया गया, जहां उसकी कम से कम दो 'सर्जरी' और 'स्किन ग्राफ्टिंग' की गई। ओडिशा पुलिस ने शुक्रवार को दिल्ली एम्स में मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पीड़िता का बयान दर्ज किया था।माझी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "बलंगा इलाके की लड़की की मौत की खबर सुनकर मुझे गहरा सदमा लगा है। सरकार के तमाम प्रयासों और दिल्ली स्थित एम्स की विशेषज्ञ चिकित्सा टीम के चौबीसों घंटे प्रयास के बावजूद, उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। मैं लड़की की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं और ईश्वर से उसके परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना करता हूं।" ओडिशा के उपमुख्यमंत्री के.वी. सिंह देव और पी. परिदा ने भी लड़की की मौत पर शोक व्यक्त किया है।बीजू जनता दल (बीजद) अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने नाबालिग लड़की की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया और मृतक लड़की के परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। राज्यसभा सदस्य सस्मित पात्रा के नेतृत्व में बीजद सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वे दिल्ली स्थित एम्स जा रहे हैं। ओडिशा पुलिस ने भी घटना पर दुख व्यक्त किया और दावा किया कि लड़की को जलाने की घटना की जांच अंतिम चरण में पहुंच गई है। पुलिस ने दावा किया कि इस घटना में कोई अन्य व्यक्ति शामिल नहीं था और सभी से इस मामले पर कोई सनसनीखेज बयान नहीं देने का आग्रह किया। ओडिशा पुलिस ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘बलंगा घटना में पीड़ित लड़की की मौत की खबर सुनकर हमें गहरा दुख हुआ है। पुलिस ने पूरी ईमानदारी से जांच की है। जांच अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। अब तक की गई जांच के अनुसार, यह स्पष्ट है कि इसमें कोई अन्य व्यक्ति शामिल नहीं है। इसलिए, हम सभी से अनुरोध करते हैं कि इस दुखद क्षण के दौरान इस मामले के बारे में कोई भी संवेदनशील टिप्पणी न करें।'' ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने भी अपनी संवेदना व्यक्त की और लड़की को आग के हवाले करने में शामिल तीन दोषियों को सात दिनों के भीतर गिरफ्तार करने की मांग की। दास ने कहा, "अगर दोषियों को सात दिनों के भीतर नहीं पकड़ा गया तो हम डीजीपी कार्यालय का घेराव करेंगे।" उन्होंने कहा कि लड़की को आग के हवाले करने की घटना को 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस इस मामले में शामिल किसी भी अपराधी को पकड़ नहीं पाई है। इस बीच, सूत्रों ने बताया कि पुरी पुलिस ने बलंगा में मृतक लड़की के घर के पास कुछ पुलिसकर्मियों को तैनात किया है।
- नयी दिल्ली. राष्ट्रपति भवन स्थित प्रसिद्ध अमृत उद्यान 16 अगस्त से 14 सितंबर तक जनता के लिए खुला रहेगा। राष्ट्रपति कार्यालय ने शनिवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी। इस अवधि के दौरान, उद्यान प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक खुला रहेगा और अंतिम प्रवेश शाम सवा पांच बजे होगा। रखरखाव के कारण यह सभी सोमवार को बंद रहेगा। इस साल, आगंतुक 'बैबलिंग ब्रुक' का भी अनुभव कर सकेंगे।इस उद्यान पथ में बाल वाटिका, हर्बल गार्डन, बोनसाई गार्डन, सेंट्रल लॉन, लॉन्ग गार्डन और सर्कुलर गार्डन शामिल होंगे। पूरे पथ में लगाए गए क्यूआर कोड विभिन्न पौधों की प्रजातियों और डिज़ाइन तत्वों के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे। आगंतुक नॉर्थ एवेन्यू रोड के पास स्थित गेट संख्या 35 से प्रवेश और निकास कर सकते हैं। अमृत उद्यान में प्रवेश निःशुल्क है। बयान में कहा गया कि आगंतुकों को मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक चाबियां, पर्स, हैंडबैग, पानी की बोतलें, बच्चों के दूध की बोतलें और छाते ले जाने की अनुमति है, इनके अलावा, किसी अन्य वस्तु की अनुमति नहीं होगी।
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नागपुर. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को यहां फिडे महिला शतरंज विश्व कप चैंपियन दिव्या देशमुख को सम्मानित किया और उन्हें तीन करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया। उन्नीस साल की दिव्या 28 जुलाई को महिला विश्व कप का खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बनीं। उन्होंने फाइनल के टाई ब्रेकर में हमवतन कोनेरू हम्पी को हराया जिससे वह खिताब जीतने के साथ ग्रैंडमास्टर भी बन गईं। दिव्या नागपुर की मूल निवासी हैं जहां से मुख्यमंत्री फडणवीस भी आते हैं।
दिव्या ने शहर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्हें सम्मानित करने के लिए मुख्यमंत्री फडणवीस और नागपुर के लोगों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि जीवन में ऐसे पल बहुत कम ही मिलते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह मेरे लिए बहुत खास पल है। मुझे बहुत खुशी है कि मैं बच्चों के लिए प्रोत्साहन और प्रेरणा का एक छोटा सा हिस्सा बन सकी। मुझे बहुत खुशी हो रही है। '' उन्होंने महाराष्ट्र सरकार और महाराष्ट्र शतरंज संघ को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
इसके बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने दिव्या को नकद पुरस्कार के रूप में तीन करोड़ रुपये का चेक सौंपा और उनके भविष्य के प्रयासों में सहयोग का आश्वासन दिया। -
नयी दिल्ली. निर्वाचन आयोग ने शनिवार को कहा कि उसने मतदाता सूची तैयार करने में मदद करने वाले बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) का वार्षिक पारिश्रमिक दोगुना कर दिया है। बूथ स्तर पर मतदाता सूची तैयार करने और उसे अद्यतन करने में निर्वाचन आयोग की मदद करने वाले बीएलओ को 2015 से उनके काम के लिए 6,000 रुपये सालाना मिल रहे थे। अब यह राशि 12,000 रुपये सालाना की गई है। बीएलओ ज्यादातर शिक्षक या राज्य सरकार के अन्य कर्मचारी होते हैं जो अपने संबंधित बूथ में मतदाताओं के नाम जोड़ने या हटाने का काम करते हैं। निर्वाचन आयोग के नए नियमों के अनुसार, एक बूथ पर 1,200 से ज़्यादा मतदाता नहीं होंगे। इसके अलावा, आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए बीएलओ को 6,000 रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि देने को भी मंज़ूरी दी है। इसकी शुरुआत बिहार से होगी, जहां यह कवायद जारी है। निर्वाचन आयोग ने कहा कि उसने बीएलओ पर्यवेक्षकों का पारिश्रमिक भी वर्तमान 12,000 रुपये प्रति वर्ष से बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रति वर्ष कर दिया है। अब निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) और सहायक ईआरओ (एईआरओ) को भी क्रमशः 30,000 रुपये और 25,000 रुपये प्रति वर्ष मानदेय दिया जाएगा।
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नरसिंहपुर. मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले में स्थित एक जलप्रपात में डूब जाने से 12वीं कक्षा के तीन छात्रों की मौत हो गई। पुलिस के एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह हादसा जिले के सुआतला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बिल्धा जलप्रपात में शुक्रवार शाम को हुआ। सुआतला थाना प्रभारी बी एल त्यागी ने बताया कि हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों की पहचान संस्कार सिटी के रहने वाले तरुण शर्मा के पुत्र तन्मय शर्मा, धुवघट निवासी भगवत जाट के पुत्र अश्विन जाट और गोकुलनगर के अखिलेश सोनी के पुत्र अक्षत सोनी के रूप में हुई है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि तीनों 12वीं कक्षा के छात्र थे और घर पर बिना बताए ही जलप्रपात देखने निकल गए थे। उन्होंने कहा कि शुक्रवार शाम तीनों बच्चों की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज हुई थी और खोजबीन करने से पता चला कि हाथी नाला के पास एक बाइक और कुछ कपड़े पड़े हुए हैं। थाना प्रभारी त्यागी ने बताया कि देर रात्रि इसकी सूचना राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीम को दी गई और बचाव अभियान शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि देर रात तीनों विद्यार्थियों के शव निकाले गए और सुबह पोस्टमार्टम के उपरांत उन्हें परिजनों को सौंप दिए गए।
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नागपुर. भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) भूषण गवई ने शनिवार को यहां दिव्या देशमुख के घर जाकर फिडे शतरंज विश्व कप चैंपियन और ग्रैंडमास्टर बनने पर उन्हें बधाई दी। उन्नीस साल की दिव्या ने 28 जुलाई को जॉर्जिया के बातुमी में आयोजित महिला विश्व कप के फाइनल के टाईब्रेकर में हमवतन कोनेरू हंपी को हराकर सबसे कम उम्र की खिलाड़ी के तौर पर यह खिताब जीता था। इस जीत ने उन्हें ग्रैंडमास्टर भी बना दिया। मुख्य न्यायाधीश अमरावती से हैं और दिव्या के दादा स्वर्गीय डॉ. केजी देशमुख कभी संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय के कुलपति थे। मुख्य न्यायाधीश ने यहां पत्रकारों से कहा कि उनके पिता और स्वर्गीय केजी देशमुख बहुत करीबी दोस्त थे।
उन्होंने कहा, हम एक परिवार की तरह पले-बढ़े हैं। यहां आना मेरे लिए पुरानी यादों को ताजा करने जैसा था। मैं 50-55 साल पीछे चला गया और मैंने फिर से सभी पुरानी यादों को ताजा किया। यह मेरे लिए लंबे समय के बाद सब से मिलने का यह शानदार मौका था। मैं यहां दिव्या को अपनी शुभकामनाएं देने आया हूं। उसने हम सभी को बहुत गौरवान्वित किया है। -
रुद्रप्रयाग. कुछ दिनों तक बंद रहने के बाद केदारनाथ की तीर्थयात्रा पैदल मार्ग से शनिवार को पुन: शुरू हो गई। रुद्रप्रयाग के पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रह्लाद कोंडे ने बताया कि पैदल श्रद्धालुओं के लिए बनी सड़क को शनिवार को काफी हद तक चलने लायक कर दिया गया जिसके बाद तीर्थयात्रियों के एक समूह को सोनप्रयाग से गौरीकुंड के रास्ते केदारनाथ भेजा गया। उन्होंने बताया कि हालांकि मंदिर जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच अब भी बंद है और लोक निर्माण विभाग इसे खोलने के प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि जब तक राजमार्ग बहाल नहीं हो जाता, तीर्थयात्रियों को केदारनाथ पहुंचने के लिए 22 किलोमीटर पैदल चलना पड़ेगा। सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच मनकुटिया में भूस्खलन के कारण राजमार्ग अवरुद्ध होने के बाद 30 जुलाई को पैदल मार्ग से केदारनाथ की तीर्थयात्रा अस्थायी रूप से रोक दी गई थी। केवल वापस आने वाले तीर्थयात्रियों को सुरक्षा बलों की मदद से वैकल्पिक पैदल मार्ग से लाया जा रहा है।
कोंडे ने बताया कि अगर बारिश होती है तो सुरक्षा मद्देनजर श्रद्धालुओं की आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी जाएगी। उन्होंने तीर्थयात्रियों से मौसम की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करने की अपील की।










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