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नई दिल्ली। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (एसीबी) भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाली तीन मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज की तारीखों में बदलाव करने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से बातचीत कर रहा है।तय कार्यक्रम के अनुसार, सीरीज के तीनों टी20 मुकाबले नई दिल्ली के अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम में क्रमशः 13, 15 और 17 सितंबर को खेले जाने हैं। हालांकि, एसीबी इन मैचों को क्रमशः 11, 13 और 14 सितंबर को कराने पर विचार कर रहा है। यह कदम स्टेडियम में दर्शकों की संख्या और टीवी पर मैच देखने वालों की संख्या बढ़ाने के मकसद से उठाया जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी है।
अफगानिस्तान पुरुषों की द्विपक्षीय टी20 इंटरनेशनल सीरीज में भारत की मेजबानी करेगा। हालांकि, इस बार मैच का स्थान भारत की राजधानी दिल्ली है। आईटीडब्ल्यू यूनिवर्स के सह-संस्थापक भैरव शांत ने बताया, “एसीबी ने यह प्रस्ताव रखा है और बीसीसीआई के साथ बातचीत कर रहा है। हमें सोमवार तक औपचारिक मंजूरी मिल जानी चाहिए। तीन मैचों में से एक मैच 14 तारीख को होने की पूरी संभावना है। बाकी शेड्यूल डीडीसीए, बीसीसीआई और एसीबी के बीच प्लानिंग और संचालन पर निर्भर करेगा। जब अंतिम संशोधित शेड्यूल आ जाएगा, तो हम आधिकारिक तौर पर जानकारी देंगे, क्योंकि बातचीत अभी भी चल रही है।”दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) के एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें प्रस्तावित बदलावों के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी, वहीं बीसीसीआई ने पुष्टि की कि शेड्यूल में बदलाव के बारे में कोई भी अंतिम निर्णय एसीबी को ही लेना है। बीसीसीआई के एक अधिकारी ने बताया, “यह फैसला अफगानिस्तान का है, हमारा नहीं। वे मैचों की मेजबानी कर रहे हैं क्योंकि उनके देश में अभी अंतरराष्ट्रीय मैच कराने के लिए कोई मैदान नहीं है। इसीलिए वे इस सीरीज की मेजबानी करने के लिए भारत आए हैं।” -
नई दिल्ली। एफआईएच मेंस हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के अपने आखिरी लीग मैच में भारत ने पाकिस्तान को 5-3 से मात देकर अगले दौर में प्रवेश कर लिया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस शानदार जीत पर खुशी जताते हुए कहा है कि टीम ने दशकों से चले आ रहे भारत के दबदबे को बनाए रखा।
इस जीत के साथ भारतीय टीम ने अगले राउंड में अपनी जगह बना ली है। वहीं, हार के साथ पाकिस्तान का विश्व कप में सफर समाप्त हो गया है। पिछले दशक में भारत का अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान पर दबदबा रहा है और 2016 से सीनियर और जूनियर स्तर पर खेले गए सभी मुकाबलों में भारत ने उन्हें हराया है।भारत की शानदार जीत पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने टीम को बधाई देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “आज हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के मैच में पाकिस्तान को हराने पर टीम इंडिया को बधाई। खेल पर शानदार पकड़ और बेहतरीन खेल कौशल के साथ, आपने दशकों से चले आ रहे भारत के दबदबे को बनाए रखा है। मेरी तरफ से आगामी मैचों के लिए शुभकामनाएं।”बुधवार को एमस्टेलवीन के वैगनर हॉकी स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में भारत के लिए कप्तान हरमनप्रीत सिंह और अभिषेक ने 2-2 गोल किए। हरमनप्रीत ने 5वें और 21वें मिनट में पेनाल्टी कॉर्नर से गोल किए, जबकि अभिषेक ने 11वें और 24वें मिनट में फील्ड गोल किए। पाकिस्तान के लिए हनान शाहिद ने दो और सुफियान खान ने एक गोल करके अंतर कम किया। हार्दिक सिंह ने भारत के लिए पांचवां गोल किया। भारत ने संयम के साथ मैच के आखिरी पल खेले और 5-3 से जीत हासिल की। इस नतीजे से भारत पूल-डी में दूसरे स्थान पर रहा और सेमीफाइनल में जगह बनाने की दौड़ में मजबूती से बना रहा, जबकि इंग्लैंड पूल विनर के तौर पर आगे बढ़ा और पाकिस्तान तथा वेल्स क्लासिफिकेशन चरण में पहुंच गए। -
मुंबई. भारतीय अंडर-11 बालिका टीम ने बुधवार को सिंगापुर में आयोजित आसियान शतरंज चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। टीम में आंध्र प्रदेश की वरेण्या लक्ष्मी वाका और अलिगिरी अमृथा हेमल के अलावा मुंबई की माया सिद्धार्थ नरूला शामिल थीं। भारतीय टीम ने कुल 14.5 अंक हासिल किए। इस चैंपियनशिप में 27 देशों के 700 से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया जिससे यह क्षेत्र की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय जूनियर शतरंज प्रतियोगिताओं में शामिल हो गई। वियतनाम ने 19.5 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि सिंगापुर ने 14.5 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया। भारत और सिंगापुर के अंक बराबर थे, लेकिन टूर्नामेंट के टाई-ब्रेक नियमों के आधार पर भारतीय टीम को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।
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नयी दिल्ली. भारत बुधवार को पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला जीतने में सफल रहा, लेकिन कप्तान हरमनप्रीत सिंह का मानना है कि एफआईएच विश्व कप के अहम दौर में पहुंचने से पहले टीम को डिफेंस की कमजोरियों को सुधारना होगा। भारत ने इस जीत के साथ पाकिस्तान के खिलाफ पिछले एक दशक से चले आ रहे अपने जीत के सिलसिले को जारी रखा। हालांकि हरमनप्रीत ने जीत के बावजूद शीर्ष टीम के खिलाफ होने वाले अगले दौर के मुकाबलों से पहले टीम की कुछ कमजोरियों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने मैच के बाद कहा, ''कुछ मौके गंवाना सामान्य है, लेकिन हम डिफेंस में कोई गलती नहीं कर सकते। '' भारतीय कप्तान विशेष रूप से इस बात से चिंतित दिखे कि टीम ने गेंद पर कब्जा बनाए रखने में गलतियां कीं। उन्होंने कहा, ''अगर आप 25 मीटर के पास गेंद हासिल करते हैं तो हमें इस पर कब्जा बनाए रखना चाहिए। हम कुछ छोटी-छोटी गलतियां कर रहे हैं, जिन्हें टाला जा सकता है। पिछले दो मैच में हमने तीसरे क्वार्टर में धीमी शुरुआत से बचने की बात की थी, लेकिन आज भी हमने वही गलती की। अगले मैच के लिए यह हमारे लिए अच्छी सीख है। '' हरमनप्रीत ने खुद आगे बढ़कर टीम की अगुवाई की और पेनल्टी कॉर्नर पर दो गोल किए।
हालांकि कप्तान ने टीम के प्रदर्शन में कई सकारात्मक पहलू भी देखे। उन्होंने खास तौर पर आक्रमण, गेंद पर नियंत्रण और पासिंग की तारीफ की। उन्होंने कहा, ''अगर आप हमारे सर्कल में प्रवेश, गेंद पर कब्जा, बनाए गए मौकों और पासिंग को देखें तो प्रदर्शन अच्छा था। मैं टीम के प्रदर्शन से बहुत खुश हूं। '' मुख्य कोच क्रेग फुल्टोन भी दबाव भरे मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन से संतुष्ट दिखे। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी पूरे मैच में टीम की रणनीति पर कायम रहे। फुल्टोन ने कहा, ''यह बड़ा मुकाबला था और बड़ा मौका भी। हर कोई अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश कर रहा था। मुझे खुशी है कि हम अपनी योजना पर कायम रहे। टीम के प्रदर्शन से मैं खुश हूं। '' दो गोल करने वाले अभिषेक ने कहा कि पाकिस्तान की वापसी के बावजूद भारतीय टीम में किसी तरह की घबराहट नहीं थी। उन्होंने कहा, ''कोई घबराहट नहीं थी। हम अपनी योजना के अनुसार खेले और सफल रहे। हमें पता था कि हम किसी भी समय ढिलाई नहीं बरत सकते। '' पाकिस्तान के सूफियान खान ने भी माना कि उनकी टीम की गलतियां भारत के खिलाफ भारी पड़ीं। उन्होंने कहा, ''हमने कई गलतियां कीं और हमें कड़ी मेहनत करनी होगी। भारत बहुत अच्छी टीम है। उम्मीद है कि हम इससे सीखेंगे और अगले महीने एशियाई खेलों में ज्यादा मजबूत होकर वापसी करेंगे। -
नयी दिल्ली/ अनुभवी कोच परवीर सिंह ने सीमा पूनिया को 2006 राष्ट्रमंडल खेलों में पहला पदक दिलाने से लेकर 2022 एशियाई खेलों में अपने शिष्य तेजिंदरपाल सिंह तूर और अन्नू रानी के स्वर्ण पदक तक पिछले 25 वर्षों में भारतीय एथलेटिक्स में हुई तरक्की को करीब से देखा है। प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए चुने गए सिंह एशियाई क्षेत्र में कोच प्रशिक्षक भी हैं और कोचिंग में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल कर चुके हैं। वह फिलहाल विश्व एथलेटिक्स लेवल-3 लेक्चरर हैं और फिलीपींस, इंडोनेशिया, थाईलैंड तथा भूटान सहित कई देशों के कोच को प्रशिक्षण देते हैं। उन्होंने 2021 में पटियाला स्थित पंजाबी विश्वविद्यालय के खेल कोचिंग विभाग से पीएचडी की उपाधि हासिल की। वह वर्तमान में एनआईएस पटियाला में भारतीय एथलेटिक्स के उप मुख्य कोच हैं।
सिंह ने कहा, ''मैं 2001 से भारतीय एथलेटिक्स टीम से जुड़ा हूं और देश के कुछ सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया है। सही मायने में मेरा द्रोणाचार्य पुरस्कार इतने वर्षों तक मेरे शिष्यों की प्रतिबद्धता का नतीजा है। सीमा पूनिया, हरवंत कौर, कृष्णा पूनिया और हाल में तेजिंदर तूर, अन्नू रानी के अलावा कई अन्य खिलाड़ियों ने इसमें योगदान दिया है। '' उन्होंने कहा, ''भारतीय खेल प्राधिकरण और भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने मुझे भारतीय एथलेटिक्स के विकास में योगदान देने का मंच दिया। मुझे खुशी है कि मेरे काम को पहचान मिली। मैं सभी का धन्यवाद करना चाहता हूं क्योंकि यह सामूहिक प्रयास है। यह सिर्फ मेरा प्रयास नहीं है। '' सिंह के मार्गदर्शन में चक्का फेंक खिलाड़ी सीमा पूनिया ने 2006 राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतकर अपने चार राष्ट्रमंडल खेल पदकों में से पहला पदक हासिल किया था। दिल्ली में 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में हरवंत कौर ने रजत पदक जीता था और उस समय वह सिंह के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही थीं।
कृष्णा पूनिया भी 2010 राष्ट्रमंडल खेलों से कुछ वर्ष पहले सिंह के साथ प्रशिक्षण ले चुकी थीं। उन्होंने दिल्ली में महिलाओं की चक्का फेंक स्पर्धा में भारत के पहले, दूसरे और तीसने स्थान के क्लीन स्वीप में स्वर्ण पदक जीता था। बाद में सिंह को चक्का फेंक से हटाकर गोला फेंक और भाला फेंक का कोच बनाया गया। उनके मार्गदर्शन में तेजिंदरपाल सिंह तूर और अन्नू रानी ने 2022 एशियाई खेलों में क्रमश: गोला फेंक और भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीते। सिंह ने कहा, ''हांगझोउ में तेजिंदर तूर और अन्नू का गोला फेंक और भाला फेंक में एक-एक स्वर्ण जीतना बहुत संतोषजनक पल था। यह कड़ी मेहनत, प्रतिबद्धता और समर्पण का नतीजा है। '' सिंह 2022 से 2025 तक तेजिंदर तूर के साथ रहे। अन्नू भी 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीतने के समय सिंह के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही थीं। भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने सिंह को 2025 का सर्वश्रेष्ठ कोच चुना था। वह फिलहाल एनआईएस पटियाला में भाला फेंक खिलाड़ियों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इनमें रोहित यादव भी शामिल हैं जिन्होंने जून में 87.05 मीटर के प्रयास के साथ इस सत्र का देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। -
एम्सटेलवीन (नीदरलैंड). भारतीय टीम ने बुधवार को यहां अपने पूल के अंतिम मैच में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 5-3 से हराकर एफआईएच विश्व कप के दूसरे दौर में प्रवेश कर लिया। भारत के लिए कप्तान हरमनप्रीत सिंह (चौथे और 21वें मिनट) और अभिषेक (11वें और 24वें मिनट) ने दो दो गोल जबकि हार्दिक सिंह ने 35वें मिनट में एक गोल किया। पाकिस्तान के लिए हन्नान शाहिद (22वें और 46वें मिनट) ने दो गोल और सूफयान खान ने 24वें मिनट में एक गोल किया।
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मुंबई. किसी भी तरह की आलोचना पर गुस्सा आना स्वाभाविक है, लेकिन रविचंद्रन अश्विन ने संजय मांजरेकर की उनकी गेंदबाजी को लेकर की गई कड़ी टिप्पणियों को सकारात्मक रूप से लिया और उनसे सीख लेकर अपने खेल में सुधार किया। क्रिकेट पर अपनी तीखी टिप्पणियों के लिए मशहूर पूर्व भारतीय बल्लेबाज मांजरेकर ने अपने एक कॉलम में अश्विन के प्रदर्शन की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने यह आलोचना तब की थी जब अश्विन ने ऑस्ट्रेलिया में 2011-12 में खेली गई श्रृंखला के तीन टेस्ट मैचों में बेहद खराब औसत (62 रन प्रति विकेट) से सिर्फ नौ विकेट लिए थे। भारत वह श्रृंखला 0-4 से हार गया था। अश्विन ने 'जियो हॉटस्टार' से कहा, ''ऑस्ट्रेलिया के मेरे पहले दौरे के बाद संजय मांजरेकर ने एक लंबा कॉलम लिखा। जब मैं स्वदेश लौट रहा था तो मैंने पूरा कॉलम पढ़ा और उसे पढ़कर मुझे बहुत गुस्सा आया। मुझे सच में बुरा लगा। गुस्सा तो बस स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी, लेकिन मुझे बहुत बुरा लगा। लेकिन उसके बाद मैं फ्लाइट में सो गया और उस बात को भुला दिया। तब मैं संजय से ज्यादा बात नहीं करता था।'' लेकिन बाद में उन्हें अहसास हुआ कि मांजरेकर के विश्लेषण को सही भावना से लेना चाहिए और वह अपनी गेंदबाजी और फिटनेस पर काम कर सकते हैं। अश्विन ने कहा, ''घर लौटने के बाद मैंने अगले चार साल तक बहुत मेहनत की। मैं कोई प्रतिभाशाली खिलाड़ी नहीं था। मैंने बहुत मेहनत की। संजय ने 2015 में एक और लेख लिखा जिसमें कहा गया कि मैं अब बहुत अच्छी गेंदबाजी कर रहा हूं और वह चाहते हैं कि मैं इसी तरह प्रदर्शन करता रहूं।'' उन्होंने कहा, ''फिर मैंने उनका नंबर मांगा और उन्हें मैसेज किया कि 'मुझे उस समय बुरा लगा था, लेकिन आपके कॉलम ने मेरे लिए गुरु का काम किया।' उसने मेरी जिंदगी बदल दी, क्योंकि उनकी बातों में दम था। इसलिए अगर कभी मेरी आलोचना होती है, तो मैं बस यही सोचता हूं कि क्या मुझे उससे कुछ सीखने को मिल सकता है। अगर मुझे लगता है कि उससे कुछ सीखा जा सकता है, तो मैं उसे आत्मसात कर लेता हूं।
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-वर्ष 2025 के लिए किसी भी खिलाड़ी को खेल रत्न नहीं
नयी दिल्ली. खेल मंत्रालय ने मंगलवार को वर्ष 2025 के लिए किसी भी खिलाड़ी को प्रतिष्ठित ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार नहीं देने का फैसला किया जबकि 17 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना। इन पुरस्कारों के लिए छह महीने पहले सिफारिश की गई थी जिनका खेल मंत्रालय ने मूल्यांकन किया और किसी भी खिलाड़ी को खेल रत्न पुरस्कार नहीं देने का फैसला लिया। उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अरुण कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने हॉकी स्टार हार्दिक सिंह को देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार के लिए नामित किया था लेकिन आखिर में वह दौड़ से बाहर हो गए। इससे पहले, 2014 में भी खेल रत्न पुरस्कार नहीं दिया गया था। विश्व कप विजेता शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख, डेकाथलॉन और ऊंची कूद के एथलीट तेजस्विन शंकर और बैडमिंटन खिलाड़ी गायत्री गोपीचंद उन 17 खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्हें मंगलवार को प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार के लिए नामित किया गया। अर्जुन पुरस्कार के लिए नामित खिलाड़ियों में ग्रैंडमास्टर विदित गुजराती, गायत्री गोपीचंद की महिला युगल जोड़ीदार त्रीसा जॉली, ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों के रजत पदक विजेता मुक्केबाज नरेंद्र और युवा बधिर राइफल निशानेबाज धनुष श्रीकांत भी शामिल हैं। एशियाई खेल 1962 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे फुटबॉलर आई अरुमैनायगम को आजीवन उपलब्धि के लिए अर्जुन पुरस्कार दिया गया है। इस वर्ष चयन समिति ने अर्जुन पुरस्कार के लिए 24 नामों की सिफारिश की थी, लेकिन मंत्रालय ने केवल 17 नामों को ही मंजूरी दी। पुरस्कारों की घोषणा करने में बहुत देरी हुई। खेल मंत्रालय ने योग के खिलाड़ियों को ही सम्मानित करने के उद्देश्य से पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया अपनाई। शतरंज खिलाड़ी 19 वर्षीय देशमुख विश्व कप जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं। विदित गुजराती 2024 शतरंज ओलंपियाड में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। एशियाई खेल 2023 में डेकाथलॉन में ऐतिहासिक रजत पदक और पिछले साल एशियाई चैंपियनशिप में दूसरा स्थान हासिल करने वाले तेजस्विन शंकर ने घुटने की समस्या से जूझने के बावजूद राष्ट्रमंडल खेलों में एक कांस्य पदक जीता। वह उन खिलाड़ियों में शामिल थे जिन्होंने पुरस्कारों की घोषणा में देरी की आलोचना करते हुए इसे खिलाड़ियों के प्रति अनादरपूर्ण बताया। वर्ष 2024 में रिकॉर्ड 32 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, जिनमें से 17 पैरा-स्पोर्ट्स से थे। इस बार पैरा-स्पोर्ट्स से केवल दो नाम ही अंतिम सूची में शामिल हो पाए। पैरा विश्व चैंपियनशिप 2024 में स्वर्ण पदक जीतने वाली पैरा क्लब की थ्रोअर एकता भ्याण और पैरा विश्व कप 2024 के स्वर्ण पदक विजेता निशानेबाज रुद्रंश खंडेलवाल को अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना गया है। हालांकि, इस सूची में किसी भी क्रिकेटर का नाम नहीं है। मोहम्मद शमी को 2023 में अर्जुन पुरस्कार दिए जाने के बाद कोई भी क्रिकेटर इस पुरस्कार के लिए नहीं चुना गया है। मंत्रालय ने तीन द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेताओं के नाम घोषित किए हैं।
देश का सर्वोच्च खेल सम्मान खेल रत्न में एक पदक, प्रशस्ति पत्र और 25 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है, जबकि अर्जुन पुरस्कार विजेता को 15 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाता है। पिछले साल खेल रत्न पुरस्कार चार खिलाड़ियों को दिया गया था। इनमें विश्व चैंपियन शतरंज खिलाड़ी डी गुकेश, पुरुष हॉकी कप्तान हरमनप्रीत सिंह, पैरा-एथलीट प्रवीण कुमार और निशानेबाज मनु भाकर शामिल थे। ये पुरस्कार परंपरागत रूप से हर साल 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के उपलक्ष्य में प्रदान किए जाते हैं, जो भारत के महानतम खिलाड़ियों में से एक हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती भी है। लेकिन अब इसकी कोई तिथि निश्चित नहीं है। इस वर्ष पुरस्कार चयनसमिति में भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के उपाध्यक्ष गगन नारंग, पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी अपर्णा पोपट और पूर्व हॉकी खिलाड़ी एम एम सोमैया भी शामिल थे। अर्जुन पुरस्कार: तेजस्विन शंकर (एथलेटिक्स), प्रियंका गोस्वामी (एथलेटिक्स), नरेंद्र (मुक्केबाजी), विदित गुजराती (शतरंज), दिव्या देशमुख (शतरंज), धनुष श्रीकांत (बधिर शूटिंग), राजकुमार पाल (हॉकी), सुरजीत (कबड्डी), रुद्रांश खंडेलवाल (पैरा-शूटिंग), एकता भ्याण (पैरा-एथलेटिक्स), अरविंद सिंह (रोइंग), अखिल श्योराण (शूटिंग), त्रीसा जॉली (बैडमिंटन), गायत्री गोपीचंद (बैडमिंटन), लालरेम्सियामी (हॉकी), मुहम्मद अजमल (एथलेटिक्स), पूजा (कबड्डी)। अर्जुन पुरस्कार (जीवनपर्यंत): श्री आई अरुमैनायगम (फुटबॉल)
द्रोणाचार्य पुरस्कार: परवीर सिंह, छोटे लाल यादव, नेहा चव्हाण
द्रोणाचार्य पुरस्कार (जीवनपर्यंत): धर्मेंद्र यादव, वीरेंद्र कुमार।
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एम्सटेलवीन . ओलंपिक रजत पदक विजेता और दुनिया की चौथे नंबर की टीम चीन को ड्रॉ पर रोकने के बाद आत्मविश्वास से ओतप्रोत भारतीय महिला हॉकी टीम अब मंगलवार को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बड़े अंतर से जीत दर्ज करके पूल में शीर्ष दो में रहने का दावा ठोकने के इरादे से उतरेगी । पूल डी में इस समय दक्षिण अफ्रीका पर 4-0 से मिली जीत के बाद इंग्लैंड शीर्ष पर है जबकि चीन और भारत दूसरे और दक्षिण अफ्रीका चौथे स्थान पर है ।पूल से शीर्ष दो टीमें दूसरे दौर में जायेंगी और विश्व रैंकिंग में नौवे स्थान पर काबिज भारत के लिये 18वीं रैंकिंग वाली दक्षिण अफ्रीका की चुनौती कठिन नहीं है लेकिन कोच शोर्ड मारिन की टीम का लक्ष्य अब बड़े अंतर से जीत दर्ज करने का होगा । विश्व कप के बदले प्रारूप में इस बार हर पूल से शीर्ष दो टीमें दूसरे दौर का पूल चरण खेलेंगी जिसमें आठ टीमें होंगी । इस चरण में चार चार टीमों के दो पूल होंगे लेकिन टीमें तीन नहीं बल्कि दो दो मैच खेलेंगी । यानी अगर भारत और चीन दोनों अगले दौर में जाते हैं तो उनका एक दूसरे से सामना नहीं होगा और पहले पूल चरण के एक एक अंक आगे जायेंगे और भारत की संभावनाओं के लिये चीन के खिलाफ ड्रॉ काफी महत्वपूर्ण था । कोच मारिन ने कहा ,'' यह मैच सबसे अहम था और इसे ड्रॅा कराने के बाद अब हमें अपने बाकी मैचों में अपने खेल पर फोकस रखने की सहूलियत मिल गई है । हमें दूसरी टीमों के समीकरणों के बारे में नहीं सोचना है लेकिन आत्ममुग्धता से बचते हुए आगे के मैचों में भी यह लय कायम रखनी है ।
विश्व कप क्वालीफायर में प्लेयर आफ द टूर्नामेंट रही नवनीत कौर ने उस लय को कायम रखा है जो भारत के लिये अच्छा संकेत हैं । वहीं स्टार ड्रैग फ्लिकर दीपिका ने पहले मैच में पेनल्टी कॉर्नर तब्दील करने के अलावा उसे हासिल भी किया । सुनेलिटा टोप्पो, इशिका, शिल्पी डबास समेत विश्व कप में पदार्पण करने वाली खिलाड़ियों ने भी बड़ी टीम से खेलने का दबाव लिये बिना अपना स्वाभाविक खेल दिखाया जो अच्छा संकेत है । कोच मारिन ने हालांकि कहा कि भारत को गेंद हासिल करने और अपने पास रखने पर काम करना होगा ।
पहले क्वार्टर में गेंद पर पूरी तरह से कब्जा करने वाली भारतीय टीम हाफटाइम तक 2-1 से बढत बनाने के बाद ढीली पड़ गई और तीसरे क्वार्टर में रक्षात्मक हॉकी खेलती नजर आई जिसका फायदा उठाकर चीन ने बराबरी का गोल दाग दिया । मारिन ने कहा ,'' हमने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल किया और फील्ड गोल भी दागा लेकिन तीसरे क्वार्टर के खेल से मैं खुश नहीं हूं । हमें गेंद को हासिल करने और उस पर कब्जा बनाये रखने पर काम करना होगा । पहले मैच के ड्रॉ के बाद टीम ने राहत महसूस की होगी और आगे प्रदर्शन मैच दर मैच बेहतर होता जायेगा ।'' विश्व कप में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1974 में पहले विश्व कप में रहा है जब अजिंदर कौर की कप्तानी में वह चौथे स्थान पर रही थी । तोक्यो ओलंपिक 2020 में मारिन के कोच रहते ही भारतीय महिला टीम ने चौथा स्थान हासिल किया था और अब विश्व कप में भी उस प्रदर्शन को दोहराने की उम्मीदें बढ गई है । -
मुंबई. भारत ने एशियाई जूनियर शतरंज चैंपियनशिप में शानदार शुरुआत करते हुए सोमवार को यहां ओपन और बालिका ब्लिट्ज वर्ग में क्रमश: विग्नेश वर्मुला और सारण्या देवी के खिताब के साथ दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। वर्मुला ने टूर्नामेंट में 23वीं वरीयता के साथ शुरुआत की थी लेकिन पूरी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया। वह शर्नार्थी वीरेश और नंदीश वी एस के साथ समान अंक पर रहे लेकिन बेहतर टाईब्रेक स्कोर के आधार पर खिताब अपने नाम किया। अक्षय बोरगांवकर और माधवेंद्र प्रताप शर्मा क्रमश: चौथे और पांचवें स्थान पर रहे।
नौवीं वरीयता प्राप्त सारण्या ने अपनी सटीक रणनीतिक चालों से प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए बालिका वर्ग का खिताब जीता। प्रिशिता गुप्ता और शनमति श्री क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहीं। शीर्ष वरीयता प्राप्त तुर्कमेनिस्तान की शोहरादोवा लाला चौथे स्थान पर रहीं। ओपन चैंपियनशिप में कजाखस्तान के अखिलबे इमांगली छठे स्थान के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले विदेशी खिलाड़ी रहे जबकि तुर्कमेनिस्तान के शागेल्दी कुर्बानदुर्दियेव नौवें स्थान पर रहे। भारत के अंतरराष्ट्रीय मास्टर मयंक चक्रवर्ती ने 13वां स्थान हासिल किया। - पोर्टलैंड (अमेरिका). भारत की मध्यम एवं लंबी दूरी की धाविका अंकिता ध्यानी ने अमेरिका में आयोजित 'स्टम्पटाउन ट्वाइलाइट' प्रतियोगिता में महिलाओं की 1500 मीटर दौड़ में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। चौबीस वर्षीय अंकिता ने शनिवार को विश्व एथलेटिक्स 'कॉन्टिनेंटल टूर' चैलेंजर स्तर (कैटेगरी-डी) की इस प्रतियोगिता में चार मिनट 06.75 सेकंड का समय निकाला। उन्होंने अपने पिछले व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में पांच सेकंड से अधिक का सुधार किया। उनका पिछला सर्वश्रेष्ठ समय चार मिनट 12.28 सेकंड था। अंकिता का यह प्रदर्शन इस सत्र में 1500 मीटर में किसी भारतीय का सबसे तेज समय है।यह एशिया में इस सत्र का तीसरा सबसे तेज समय है। भारतीय धाविकाओं में यह अब तक का चौथा सबसे तेज प्रदर्शन भी है। इस स्पर्धा का राष्ट्रीय रिकॉर्ड केएम दीक्षा के नाम है, जिन्होंने चार मिनट 04.78 सेकंड का समय दर्ज किया है। इक्वाडोर की कारमेन एल्डर कैसालिटिन ने चार मिनट 06.40 सेकंड के समय के साथ पहला स्थान हासिल किया, जबकि अमेरिका की एलेनोर फुल्टन 4:09.36 सेकंड के समय के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। अंकिता ने 2023 एशियाई चैंपियनशिप में 5000 मीटर में कांस्य पदक और 2024 एशियाई इंडोर चैंपियनशिप में 3000 मीटर में रजत पदक जीता था। वह 2022 एशियाई खेलों और 2024 पेरिस ओलंपिक में भी 5000 मीटर दौड़ में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
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एम्सटेलवीन. भारतीय महिला हॉकी टीम ने रविवार को यहां एफआईएच विश्व कप में पूल डी के अपने पहले मैच में पेरिस ओलंपिक की रजत पदक विजेता और दूसरी रैंकिंग पर काबिज चीन से 2-2 से ड्रॉ खेला। कोच शोर्ड मारिन की टीम के लिए नवनीत कौर ने आठवें मिनट में मैदानी गोल दागा और स्कोर 1-0 कर दिया।
चीन ने हालांकि पहले क्वार्टर के अंतिम सेकेंड में झांग यिंग के पेनल्टी स्ट्रोक पर किए गोल से स्कोर 1-1 से बराबरी पर ला दिया। नौवीं रैंकिंग पर काबिज भारतीय टीम के लिए दूसरा गोल 25वें मिनट में दीपका ने पेनल्टी कॉर्नर पर दागा और टीम को 2-1 से आगे कर दिया। पर चीन में तीसरे क्वार्टर में दबदबा बनाते हुए स्कोर 2-2 कर दिया जब मा निंग ने टीम के पहले पेनल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील किया। -
नई दिल्ली। श्रीलंका ने दुबई में होने वाले आगामी एशिया कप के लिए 15 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। मौजूदा चैंपियन श्रीलंका की नजरें इस बार भी खिताब बचाने पर होंगी।चमारी अटापट्टू टीम की कप्तान बनी रहेंगी, जबकि हर्षिता माधवी उपकप्तान की भूमिका निभाएंगी।दाएं हाथ की तेज गेंदबाज मिथाली अयोध्या की टीम में वापसी हुई है। 2026 महिला टी20 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें टीम में जगह मिली है। अप्रैल में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण करने वाली अयोध्या ने विश्व कप में चार विकेट लिए थे और वह श्रीलंका की दूसरी सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज रही थीं।
लेग स्पिनर और ऑलराउंडर देवमी विहंगा को पहली बार टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में शामिल किया गया है। वह इससे पहले श्रीलंका के लिए 12 वनडे मैच खेल चुकी हैं।गेंदबाजी को मजबूत करने के लिए चेथना विमुक्ति की भी टीम में वापसी हुई है।बल्लेबाजी में अटापट्टू और हर्षिता के साथ हसिनी परेरा, विश्मी गुणरत्ने और निलाक्षिका सिल्वा अहम भूमिका निभाएंगी।17 वर्षीय संजना कविंदी को भी टीम में जगह मिली है। उन्होंने हाल ही में पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज में टी20 अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया था। वहीं, इमेशा दुलानी ने भी टीम में अपना स्थान बरकरार रखा है। पाकिस्तान के खिलाफ उसी सीरीज में वह टी20 अंतरराष्ट्रीय में शतक लगाने वाली श्रीलंका की केवल दूसरी महिला बल्लेबाज बनी थीं।श्रीलंका को ग्रुप बी में बांग्लादेश, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात के साथ रखा गया है। मौजूदा चैंपियन श्रीलंका अपने अभियान की शुरुआत 29 अगस्त को यूएई के खिलाफ करेगी।एशिया कप के लिए श्रीलंका की टीम:चमारी अटापट्टू (कप्तान), मिथाली अयोध्या, कविशा दिलहारी, इमेशा दुलानी, विश्मी गुणरत्ने, काव्या कविंदी, संजना कविंदी, सुगंधिका कुमारी, कौशिनी नुथ्यांगना, हसिनी परेरा, चामुडी प्रबोधा, हर्षिता माधवी, निलाक्षिका सिल्वा, देवमी विहंगा और चेथना विमुक्ति। -
नई दिल्ली। बांग्लादेश के सलामी बल्लेबाज तंजिद हसन तमीम ने शुक्रवार को इतिहास रच दिया। वह ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट शतक लगाने वाले पहले बांग्लादेशी बल्लेबाज बन गए।तंजिद ने डार्विन के मरारा क्रिकेट ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज के पहले मुकाबले के दूसरे दिन यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने 188 गेंदों में अपना पहला टेस्ट शतक पूरा किया।
ऑस्ट्रेलिया को पहले दिन 198 रन पर समेटने के बाद बांग्लादेश ने अपनी पहली पारी में शानदार शुरुआत की। तंजिद के शतक ने विदेश में बांग्लादेशी बल्लेबाज के टेस्ट शतक के लंबे इंतजार को भी खत्म किया। इससे पहले 2022 में मह्मुदुल हसन जॉय ने दक्षिण अफ्रीका के डरबन में 137 रन बनाए थे।ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट में यह बांग्लादेशी बल्लेबाज का केवल दूसरा शतक है। इससे पहले शाह्रियार नफीस ने 2006 में फतुल्लाह में 138 रन बनाए थे।25 वर्षीय तंजिद 197 गेंदों पर 101 रन बनाकर आउट हुए। उनकी पारी में आठ चौके और एक छक्का शामिल रहा। उनकी शानदार पारी की बदौलत बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया पर बढ़त बना ली। रिपोर्ट लिखे जाने तक बांग्लादेश का स्कोर 67 ओवर में 238/3 था और उसे 40 रन की बढ़त हासिल थी।पहले दिन बांग्लादेश के तेज गेंदबाज हसन महमूद ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। उन्होंने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 55 रन देकर छह विकेट लिए और ऑस्ट्रेलिया को 53 ओवर में 198 रन पर समेटने में अहम भूमिका निभाई।हसन का यह प्रदर्शन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ किसी बांग्लादेशी गेंदबाज का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी बन गया। उन्होंने 2006 में फतुल्लाह में अब्दुर रफीक के 62 रन देकर पांच विकेट के प्रदर्शन को पीछे छोड़ा।15 टेस्ट मैचों में हसन के नाम अब तीन बार पांच या उससे अधिक विकेट लेने का कारनामा हो चुका है। बांग्लादेश के तेज गेंदबाजों में उनसे ज्यादा पांच विकेट लेने का कारनामा केवल शहादत हुसैन ने किया है।ऑस्ट्रेलिया की ओर से स्टीव स्मिथ ने 109 गेंदों पर 71 रन बनाए, जिसमें सात चौके और एक छक्का शामिल था, लेकिन वह टीम को बड़ी पारी तक नहीं ले जा सके।वहीं, बांग्लादेश के तस्कीन अहमद ने भी दो विकेट लिए और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने 300 विकेट पूरे कर लिए। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले बांग्लादेश के छठे गेंदबाज बन गए हैं। उनके नाम 204 मैचों में कुल 300 अंतरराष्ट्रीय विकेट हैं। -
मुंबई. भारत के पूर्व बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे श्रीलंका में होने वाली दो मैचों की श्रृंखला से टेस्ट कमेंट्री में पदार्पण करेंगे। उन्हें 15 अगस्त को गॉल में शुरू होने वाली श्रृंखला के लिए सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के कमेंट्री पैनल में शामिल किया गया है। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण करने के बाद लगभग 18 वर्षों तक चले अपने शानदार खेल करियर को हाल में अलविदा कहने वाले 37 वर्षीय रहाणे अब कमेंटेटर के रूप में नई भूमिका में नजर आएंगे। रहाणे ने भारत के लिए 85 टेस्ट मैच में 38.46 के औसत से 5,077 रन बनाए, जिनमें 12 शतक और 26 अर्धशतक शामिल हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने 2020-21 में ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट श्रृंखला जीती थी। रहाणे ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ''मैं सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क और सोनी लिव पर भारत के श्रीलंका दौरे के दौरान टेस्ट कमेंट्री की शुरुआत करने को लेकर उत्साहित हूं। टेस्ट क्रिकेट हमारे खेल का चरम बिंदु है और इतने वर्षों तक इस प्रारूप में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद अब खेल को एक अलग दृष्टिकोण से देखना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।'' उन्होंने कहा, ''मैं अपने अनुभव साझा करने, खेल की बारीकियों को समझाने और प्रशंसकों को उन फैसलों, रणनीति और क्षण के बारे में जानकारी देने के लिए उत्सुक हूं जो टेस्ट मैच का रुख बदल सकते हैं।
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नयी दिल्ली. भारतीय तलवारबाजी टीम ने नाइजीरिया के लागोस में चल रही राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में अपना अच्छा प्रदर्शन जारी रखते हुए सीनियर स्तर की विभिन्न व्यक्तिगत स्पर्धाओं में तीन स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीता। भारतीय खिलाड़ियों ने सीनियर महिला फॉइल, सीनियर पुरुष ईपी और सीनियर पुरुष साबरे स्पर्धाओं में दबदबा बनाए रखा। भारत ने इस तरह से इस प्रतियोगिता में 29 पदक जीत लिए हैं जिसमें आठ स्वर्ण, सात रजत और 14 कांस्य पदक शामिल हैं। भारत ने सीनियर महिला फॉइल वर्ग में स्वर्ण और रजत पदक हासिल किए।
कनागलक्ष्मी ने सटीक और नियंत्रित प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता, जबकि उनकी टीम की साथी जॉयस आशिता ने रजत पदक जीतकर पोडियम पर शीर्ष दो स्थान हासिल किए। इंग्लैंड की जॉर्जिया ग्रीन और एमिली गुडचाइल्ड ने कांस्य पदक जीते। सीनियर पुरुष ईपी स्पर्धा में राजेंद्रन शांतिमोल शेरजिन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए दिन का दूसरा स्वर्ण पदक हासिल किया। शेरजिन ने दक्षिण अफ्रीका के क्रूगर पीटर को हराया। वेल्स के बर्कहार्ट मार्क और दक्षिण अफ्रीका के लोसेव्स्की सर्गेई ने कांस्य पदक हासिल किए। सीनियर पुरुष साबरे में करण सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के शिम योन्गी को हराकर भारत के लिए दिन का तीसरा स्वर्ण पदक जीता। भारत के ही कुमारसन पद्मा गिशो निधि और नाइजीरिया के अकिन्योसोये ओलुवाफोलायेमी ने कांस्य पदक हासिल किए। - नयी दिल्ली. अगले सप्ताह यहां शुरू होने वाली बीडब्ल्यूएफ विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के दौरान बंदरों की दखलअंदाजी रोकने के लिए आयोजकों ने एक अनोखा उपाय अपनाया है, उन्होंने तीन पेशेवर विशेषज्ञों को बुलाया है, जो लंगूर की तरह आवाज निकाल सकते हैं ताकि बंदरों को स्टेडियम से दूर भगाया जा सके। भारतीय स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू ने माना कि यह उपाय सुनने में लोगों को मजाकिया लग सकता है, लेकिन उन्होंने कहा कि इससे यह भी पता चलता है कि भारत इस विश्वस्तरीय आयोजन को सफल बनाने के लिए कितनी गंभीरता से प्रयास कर रहा है। 17 वर्षों बाद भारत में लौट रही बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप के लिए भारतीय बैडमिंटन संघ (बीएआई) और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने मिलकर इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम का व्यापक कायाकल्प किया है। इसका उद्देश्य इस वर्ष जनवरी में हुए इंडिया ओपन के दौरान सामने आई अव्यवस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई आलोचना जैसी स्थिति से बचना है। आयोजकों ने तीन प्रशिक्षित 'मंकी व्हिस्परर्स' (बंदरों को नियंत्रित करने वाले विशेषज्ञ) को नियुक्त किया है जो लंगूर की आवाज निकालकर 'रीसस मकाक' प्रजाति के बंदरों को डराकर भगाएंगे। ये बंदर मध्य दिल्ली और इंदिरा गांधी स्टेडियम के आसपास बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। इंदिरा गाधी स्टेडियम में ही 17 से 23 अगस्त तक विश्व चैंपियनशिप आयोजित होगी।यह अनोखा कदम जनवरी में हुए इंडिया ओपन के बाद उठाया गया है। उस टूर्नामेंट के दौरान बंदर दर्शक दीर्घा तक पहुंच गए थे जिससे कुछ समय के लिए मुकाबलों में व्यवधान पड़ा और इसकी तस्वीरें अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियां बनी थीं। विशेषज्ञों के अनुसार, 'रीसस मकाक' बंदर लंगूर से डरते हैं क्योंकि लंगूर आकार में उनसे काफी बड़े होते हैं। इसी स्वाभाविक डर का फायदा उठाने के लिए लंगूर की आवाज की नकल का इस्तेमाल किया जा रहा है। गौरतलब है कि ऐसे कार्यों के लिए वास्तविक लंगूरों के इस्तेमाल पर वर्ष 2012 में प्रतिबंध लगा दिया गया था। दो बार की ओलंपिक पदक विजेता और पूर्व विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता सिंधू ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''इस उपाय पर लोग हंस सकते हैं, लेकिन इसके पीछे किए जा रहे प्रयास की सराहना जरूर करनी चाहिए। भारत दुनिया का स्वागत करने के लिए तैयार हो सके, इसके लिए पर्दे के पीछे बहुत से लोग मेहनत कर रहे हैं। हमारे समाधान भले ही पूरी तरह भारतीय हों, लेकिन हमारी गर्मजोशी, हमारा जज्बा और हमारी मेहमाननवाजी भी उतनी ही भारतीय है। '' इस वर्ष दिल्ली विधानसभा ने भी बंदरों को परिसर में आने से रोकने के लिए लंगूर की आवाज निकालने वाले विशेषज्ञों की सेवाएं लेने के लिए निविदा जारी की थी। आयोजकों द्वारा नियुक्त विशेषज्ञों में से एक जफर ने बताया, ''जब हम लंगूर जैसी आवाज निकालते हैं तो बंदर वहां से भाग जाते हैं। इसी तरह हम उन्हें दूर भगाते हैं ताकि सड़क पर वाहन खड़े करने या अन्य गतिविधियों में कोई परेशानी नहीं हो। '' उन्होंने कहा, ''यह हमारा पुश्तैनी पेशा है। हम पूरी जिंदगी यही काम करते आए हैं। ऐसी कोई जगह नहीं है जहां मैंने अपनी सेवाएं नहीं दी हों। नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक, राष्ट्रपति भवन, गुरुग्राम, चंडीगढ़, मथुरा, जहां से भी हमें काम मिलता है, हम वहां जाकर अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। ''
- लंदन. भारतीय मूल की 11 वर्षीय शतरंज प्रतिभा बोधना सिवानंदन और 17 वर्षीय श्रेयस रॉयल ने सप्ताहांत में 2026 ब्रिटिश शतरंज चैंपियनशिप जीतकर इतिहास रच दिया। कोवेंट्री में रविवार को संपन्न हुई प्रतियोगिता में बोधना ब्रिटेन की अब तक की सबसे कम उम्र की महिला शतरंज चैंपियन बन गईं। मुकाबले के दौरान दर्शक उन्हें प्यार से 'गोधना' कहकर उत्साहित कर रहे थे। उन्होंने आयरलैंड की 14 वर्षीय उभरती हुई खिलाड़ी त्रिशा कन्यमाराला को रोमांचक रैपिड शतरंज प्लेऑफ में हराकर खिताब अपने नाम किया। 'इंग्लिश चेस फेडरेशन' (ईसीएफ) के लिए कमेंट्री कर रहे ग्रैंडमास्टर डैनी गोर्माली ने कहा, ''अविश्वसनीय! बोधना जीत गई हैं। वह कमाल की खिलाड़ी हैं, एक ऐसी प्रतिभा जो पीढ़ी में एक बार ही देखने को मिलती है। '' बोधना ने कोविड-19 महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन में पहली बार शतरंज खेलना शुरू किया था जब उनके पिता के एक मित्र भारत लौट रहे थे और जाते समय कुछ बैग छोड़ गए थे जिनमें एक शतरंज का बोर्ड भी था। उस समय बोधना ने कहा था, ''मुझे शतरंज के मोहरे बहुत आकर्षक लगे, इसलिए मैंने खेलना शुरू कर दिया। ''इसके बाद से उत्तर-पश्चिम लंदन की इस स्कूली छात्रा ने लगातार कई रिकॉर्ड तोड़े हैं और सबसे कम उम्र की सफल खिलाड़ियों में अपनी पहचान बनाई है। शतरंज के तेज प्रारूपों में वह पहले ही 'यूके ओपन महिला ब्लिट्ज' चैंपियन और संयुक्त ब्रिटिश महिला रैपिड चैंपियन बन चुकी हैं। अब क्लासिकल प्रारूप की इस जीत के साथ 11 वर्षीय बोधना ने शानदार हैट्रिक पूरी कर ली है। इस चैंपियनशिप में उनकी एकमात्र हार छठे दौर में श्रेयस रॉयल के खिलाफ हुई। वहीं श्रेयस रॉयल ने नौ दौर के बाद तालिका में शीर्ष स्थान हासिल कर कुल अंक से ब्रिटिश खिताब अपने नाम किया। उन्होंने इंग्लैंड के अनुभवी ग्रैंडमास्टर्स को आधे अंक से पीछे छोड़ दिया। अपने पहले ब्रिटिश खिताब के साथ उन्होंने विश्व स्तरीय उभरती हुई शतरंज प्रतिभा के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर ली है। इंग्लैंड के सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर बनने के बाद श्रेयस ने कहा था,''चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, लगातार प्रयास करते रहिए। ''दक्षिण-पूर्व लंदन के इस किशोर खिलाड़ी ने आगे चलकर ब्रिटेन के प्रमुख युवा शतरंज खिलाड़ियों में अपना स्थान बनाया। इस वर्ष की चैंपियनशिप में उन्होंने शुरुआत से ही साबित कर दिया कि वह स्थापित दिग्गज खिलाड़ियों को कड़ी चुनौती देने में सक्षम हैं और टूर्नामेंट आगे बढ़ने के साथ खिताब की दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार बन गए। भारत में जन्में श्रेयस तीन वर्ष की उम्र में अपने माता-पिता जितेंद्र और अंजू सिंह के साथ बेंगलुरु से ब्रिटेन चले गए थे। लगभग आठ वर्ष पहले ईसीएफ ने गृह मंत्रालय (होम ऑफिस) से विशेष अनुरोध किया था कि इस असाधारण प्रतिभाशाली खिलाड़ी को ब्रिटेन में रहने और अपनी प्रतिभा को निखारने की अनुमति दी जाए। पूर्व मंत्री साजिद जाविद ने श्रेयस की इस जीत के बाद सोशल मीडिया पर लिखा, ''2018 में गृह सचिव के रूप में मैंने श्रेयस और उनके परिवार को ब्रिटेन में रहने की अनुमति देने का निर्णय लिया था। उनकी असाधारण प्रतिभा को खिलते हुए देखना बेहद सुखद है। श्रेयस, पूरे ब्रिटेन को आप पर गर्व है। '' ब्रिटिश शतरंज चैंपियनशिप के 122 वर्षों के इतिहास में 2026 में हुई इस प्रतियोगिता को सबसे बड़ा आयोजन बताया गया क्योंकि इसमें 1,750 से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया और ओपन चैंपियनशिप के लिए रिकॉर्ड 34,000 पाउंड की पुरस्कार राशि घोषित की गई।
- चंडीगढ़. हरफनमौला सनवीर सिंह आगामी शेर-ए-पंजाब टी20 लीग के लिए नीलामी के पहले चरण में सबसे महंगे खिलाड़ी रहे जिन्हें फाजिल्का फाल्कन्स ने 13.20 लाख रुपये में अपनी टीम में शामिल किया। सनवीर को अब भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान और टीम के मार्की खिलाड़ी शुभमन गिल के साथ फाजिल्का फाल्कन्स का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा। पंजाब क्रिकेट संघ (पीसीए) के अध्यक्ष अमरजीत सिंह मेहता ने कहा, ''हमने पंजाब के मुख्यमंत्री के साथ मिलकर इस सपने को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत की है और अब यह पूरा होने के करीब है।'' उन्होंने कहा, ''हर क्रिकेटर का सपना मोहाली के पीसीए स्टेडियम में खेलने का होता है। इस लीग के माध्यम से पंजाब भर के खिलाड़ियों को इस प्रतिष्ठित मैदान पर खेलने, बहुमूल्य अनुभव हासिल करने और बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।'' नीलामी में अन्य प्रमुख खिलाड़ियों में नमन धीर को अमृतसर सूरमाज ने 10.80 लाख रुपये में खरीदा, जबकि अमोलप्रीत सिंह को मोहाली किंग्स ने 8.20 लाख रुपये में अपने साथ जोड़ा। हरनूर सिंह और अश्वनी कुमार को बठिंडा रॉयल्स ने सात-सात लाख रुपये में खरीदा, जबकि सुखदीप बाजवा को जालंधर वॉरियर्स ने छह लाख रुपये में अपनी टीम में शामिल किया। हरप्रीत बराड़ को मोहाली किंग्स ने चार लाख रुपये, जबकि मयंक मार्कंडे को अमृतसर सूरमाज ने 1.50 लाख रुपये में खरीदा। पंजाब क्रिकेट संघ द्वारा आयोजित शेर-ए-पंजाब टी20 लीग राज्य स्तरीय टी20 प्रतियोगिता है। इसका उद्देश्य पंजाब के उभरते क्रिकेटरों को स्थापित खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेलने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देना है। लीग में पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली छह टीमें में फाजिल्का फाल्कन्स, अमृतसर सूरमाज, लुधियाना लायंस, जालंधर वॉरियर्स, मोहाली किंग्स और बठिंडा रॉयल्स शामिल है। आगामी सत्र में पंजाब के कई प्रमुख क्रिकेटर मार्की खिलाड़ियों के रूप में नजर आएंगे। इनमें शुभमन गिल, अभिषेक शर्मा, अर्शदीप सिंह, प्रभसिमरन सिंह, रमनदीप सिंह और गुरनूर बराड़ शामिल हैं। सभी मार्की खिलाड़ियों को 10-10 लाख रुपये में टीमों ने अपने साथ जोड़ा है। टूर्नामेंट का आयोजन 30 अगस्त से 13 सितंबर तक किया जाएगा।
- नयी दिल्ली. मुंबई के बल्लेबाज सरफराज खान को 15 अगस्त से श्रीलंका के खिलाफ शुरू होने वाली दो मैच की टेस्ट श्रृंखला के लिए चोटिल साई सुदर्शन की जगह भारतीय टीम में शामिल किया गया। बाएं हाथ के बल्लेबाज सुदर्शन को पिछले महीने भारत ए के दौरे के दौरान पैर के अंगूठे में चोट लगी थी। फिलहाल वह बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (सीओई) में चोट से उबर रहे हैं। बीसीसीआई ने बताया कि सुदर्शन की चोट में काफी सुधार हुआ है और मेडिकल टीम लगातार उनकी प्रगति पर निगरानी रखे है। बीसीसीआई ने बयान में कहा, ''पुरुष चयन समिति ने श्रीलंका के खिलाफ दो मैच की टेस्ट सीरीज के लिए साई सुदर्शन की जगह सरफराज खान को टीम में शामिल किया है। '' सरफराज 15 अगस्त से गॉल में शुरू होने वाले पहले टेस्ट से पहले कोलंबो में भारतीय टीम से जुड़ेंगे।अठाईस वर्षीय सरफराज ने भारत के लिए अब तक छह टेस्ट मैच खेले हैं। उनका आखिरी टेस्ट 2024 में मुंबई में न्यूजीलैंड के खिलाफ था। भारत की अपडेट हुई टीम :शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल (उपकप्तान), यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), रविंद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मानव सुथार, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बराड़, देवदत्त पडिक्कल, सारांश जैन, औकिब नबी और सरफराज खान।
- लंदन. भारतीय महिला गोल्फर दीक्षा डागर लंदन चैंपियनशिप के तीसरे दौर में एक ओवर 72 के कार्ड के साथ शीर्ष-20 में बनी हुई हैं जिससे उनकी 'लेडीज यूरोपीय टूर ऑर्डर ऑफ मेरिट' में आगे बढ़ने की उम्मीदें कायम हैं। दीक्षा ने पहले दो दौर में 75-70 का स्कोर किया था और वह संयुक्त 22वें स्थान पर थीं। तीसरे दौर में 72 के स्कोर के साथ संयुक्त 19वें स्थान पर पहुंच गईं। वहीं अदिति अशोक 71-73 के कार्ड खेलने के बाद संयुक्त 16वें स्थान पर थीं और 73 के कार्ड के साथ वह भी संयुक्त 19वें स्थान पर खिसक गईं। प्रणवी उर्स 71-72 के कार्ड से संयुक्त 12वें स्थान पर पहुंच गई थीं, लेकिन 20 लाख डॉलर इनामी राशि वाले इस टूर्नामेंट के तीसरे दिन 78 के कार्ड के कारण वह संयुक्त 38वें स्थान पर खिसक गईं।
- नयी दिल्ली . पुरूष हॉकी विश्व कप के पांच दशक से अधिक के सफर में भारत को एकमात्र सफलता 1975 में कुआलालम्पुर में मिली जब अजित पाल सिंह की कप्तानी वाली टीम ने पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता था लेकिन उसके बाद से आठ बार की ओलंपिक चैम्पियन भारत पोडियम पर जगह बनाने में नाकाम रही है । टूर्नामेंट की सबसे कामयाब टीम पाकिस्तान रही है जिसने चार बार खिताब जीते जबकि नीदरलैंड, आस्ट्रेलिया और जर्मनी तीन तीन बार चैम्पियन रहे । बेल्जियम ने एक बार ट्रॉफी अपने नाम की । विश्व कप के अब तक के सफर का आकलन : 1971 बार्सीलोना :भारत और पाकिस्तान ने मिलकर मार्च 1969 में एफआईएच परिषद की बैठक में फुटबॉल की तर्ज पर हॉकी विश्व कप कराने का प्रस्ताव रखा जिसे अगले साल ब्रसेल्स में हुई बैठक में मंजूरी मिली । पाकिस्तान को मेजबानी दी गई लेकिन 1971 में दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव के चलते पहला विश्व कप स्पेन के बार्सीलोना में हुआ । पांच उपमहाद्वीपों की दस टीमों ने एफआईएच के आमंत्रण पर इसमें भाग लिया ।ओलंपिक की सबसे कामयाब टीम भारत पूल ए में फ्रांस, अर्जेंटीना, कीनिया और पश्चिम जर्मनी को हराकर शीर्ष पर रहा । सेमीफाइनल में पाकिस्तान ने भारत को 2 . 1 से हराया और फिर स्पेन को हराकर पहला विश्व कप जीता । भारत ने कीनिया को 2. 1 से हराकर कांस्य पदक जीता । 1973 एम्सटर्डम :एम्सटेलवीन के वेगनेर स्टेडियम पर खेले गए इस विश्व कप में मेजबान नीदरलैंड ने पेनल्टी शूटआउट में भारत को 4 . 2 से हराकर खिताब जीता । भारत पूल ए में पांच जीत और तीन ड्रॉ के साथ पश्चिम जर्मनी के बाद दूसरे स्थान पर रहा ।सेमीफाइनल में बी पी गोविंदा के गोल के दम पर भारत ने पाकिस्तान को हराया । फाइनल में अतिरिक्त समय तक मैच 2 . 2 से बराबर था लेकिन पेनल्टी शूटआउट में नीदरलैंड ने भारत को हराया । 1975 कुआलालम्पुर :भारतीय हॉकी के विश्व कप इतिहास का सबसे सुनहरा अध्याय लिखा गया 15 मार्च 1975 को कुआलालम्पुर में जब फाइनल में अजित पाल सिंह की कप्तानी में भारत ने पाकिस्तान को 2 . 1 से हराया। फाइनल में पाकिस्तान ने बढत बना ली थी लेकिन सुरजीत सिंह ने 44वें और अशोक कुमार ने 51वें मिनट में गोल करके भारत को खिताब दिलाया । पूल चरण में शीर्ष पर रहे भारत ने सेमीफाइनल में मलेशिया को मात दी थी । तब तक सात ओलंपिक स्वर्ण जीत चुकी भारतीय टीम का यह पहला विश्व कप खिताब था । 1978 ब्यूनस आयर्स :गत चैम्पियन भारत बेहद निराशाजनक प्रदर्शन के बाद सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच सका और छठे स्थान पर रहा । पूल चरण में भारत ने छह में से तीन मैच जीते और दो गंवाये जिसमें पश्चिम जर्मनी से 7.0 से मिली हार शामिल थी । पाकिस्तान ने नीदरलैंड को 3 . 2 से हराकर खिताब जीता और आस्ट्रेलिया को कांस्य पदक मिला । 1982 मुंबई :अपने देश में पहली बार विश्व कप खेलते हुए भारत फिर अंतिम चार में नहीं पहुंच सका और पांचवें स्थान से ही संतोष करना पड़ा । पाकिस्तान ने अपराजेय रहकर वानखेड़े स्टेडियम पर फाइनल में पश्चिम जर्मनी को 3 . 1 से हराकर तीसरी बार खिताब जीता । भारत के राजिंदर सिंह सीनियर ने टूर्नामेंट में सर्वाधिक 12 गोल दागे थे । 1986 लंदन :इस विश्व कप में भारतीय टीम अब तक के सबसे खराब प्रदर्शन के बाद 12वें और आखिरी स्थान पर रही लेकिन इसी टीम के एक सितारे मोहम्मद शाहिद ने अपने जबर्दस्त खेल से दुनिया को चौंका दिया । ड्रिबलिंग के जादूगर शाहिद को टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया । आस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 2 . 1 से हराकर खिताब जीता जबकि पश्चिम जर्मनी तीसरे स्थान पर रहा । तीन बार का चैम्पियन पाकिस्तान 11वें स्थान पर रहा । 1990 लाहौर :राजनीतिक तनाव, मेजबान दर्शकों की आक्रामकता और सुरक्षा चिंताओं के बीच भारतीय टीम ने परगट सिंह की कप्तानी में लाहौर में विश्व कप खेला । भारत दसवें स्थान पर रहा लेकिन इतनी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी आपा नहीं खोने के कारण एफआईएच 'फेयरप्ले' पुरस्कार भारतीय टीम को मिला । नीदरलैंड ने पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा ।1994 सिडनी:जूड फेलिक्स की कप्तानी में भारतीय टीम ने कृत्रिम टर्फ पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए पांचवां स्थान हासिल किया था । पाकिस्तान ने नीदरलैंड को पेनल्टी शूटआउट में 4 . 3 से हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा ।1998 यूट्रेक्ट :इस विश्व कप में पूरी तरह से यूरोपीय टीमों का दबदबा रहा । मेजबान नीदरलैंड ने स्पेन को हराकर तीसरा खिताब जीता जबकि जर्मनी तीसरे स्थान पर रहा । धनराज पिल्लै की कप्तानी वाली भारतीय टीम नीदरलैंड में परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाने में नाकाम रही और निराशाजनक नौवें स्थान पर रही । 2002 कुआलालम्पुर :पहली बार 16 टीमों की भागीदारी में हुए विश्व कप में जर्मनी ने आस्ट्रेलिया को हराकर पहली बार खिताब जीता जबकि नीदरलैंड तीसरे स्थान पर रहा । भारत नौ मैचों में तीन जीत, एक ड्रॉ और पांच हार के साथ दसवें स्थान पर रहा । 2006 मोंशेंग्लाबाख , जर्मनी :दिलीप टिर्की की कप्तानी में भारतीय टीम पूल चरण में एक भी मैच नहीं जीत सकी और एकमात्र ड्रॉ दक्षिण अफ्रीका से खेलने के बाद आखिरी स्थान पर रही । क्लासीफिकेशन मैच में राजपाल सिंह के एक गोल से दक्षिण अफ्रीका को हराने के बाद 12 टीमों में 11वें स्थान पर रही । जर्मनी ने आस्ट्रेलिया को हराकर लगातार दूसरा खिताब जीता जबकि स्पेन तीसरे स्थान पर रहा ।2010 दिल्ली :दिल्ली में हुए इस विश्व कप में खचाखच भरे मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम पर पूल चरण में पाकिस्तान को 4 . 1 से हराना ही मेजबान भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि रही । पूल चरण में चौथे स्थान पर रही भारतीय टीम सेमीफाइनल में जगह नहीं बना सकी और आठवां स्थान हासिल किया । आस्ट्रेलिया ने जर्मनी को 2 . 1 से हराकर खिताब जीता जबकि नीदरलैंड तीसरे स्थान पर रहा ।2014 द हेग :पूल चरण में बेल्जियम, इंग्लैंड , आस्ट्रेलिया से करारी हार झेलने वाली भारतीय टीम नौवे स्थान पर रही । आकाशदीप सिंह ने टूर्नामेंट में पांच गोल किये । आस्ट्रेलिया ने नीदरलैंड को 6 . 1 से हराकर खिताब जीता और अर्जेंटीना तीसरे स्थान पर रहा ।2018 भुवनेश्वर :हॉकी के गढ ओडिशा में पहली बार हुए विश्व कप में भारत ने पूल चरण में बेल्जियम जैसे दिग्गज को ड्रॉ पर रोका और दक्षिण अफ्रीका तथा कनाडा को हराकर शीर्ष पर रहा । मनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली मेजबान टीम क्वार्टर फाइनल में नीदरलैंड से कड़े मुकाबले में 1 . 2 से हारकर छठे स्थान पर रही जो कई साल में उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था । बेल्जियम ने पेनल्टी शूटआउट में नीदरलैंड को हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा ।2023 भुवनेश्वर और राउरकेला :लगातार दूसरी बार अपनी मेजबानी में हुए विश्व कप में भारत पूल चरण में दूसरे स्थान पर रहा । क्रासओवर मैच में न्यूजीलैंड ने उसे पेनल्टी शूट आउट में हराया । हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में भारतीय टीम नौवे स्थान पर रही । जर्मनी ने बेल्जियम को शूटआउट में हराकर खिताब जीता जबकि नीदरलैंड तीसरे स्थान पर रहा ।
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यूजीन (अमेरिका) .बसंत कुमार मेघवाल विश्व एथलेटिक्स अंडर-20 चैंपियनशिप में ऊंची कूद में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं, जबकि शाहनवाज खान ने लंबी कूद में कांस्य पदक जीता, जिससे भारत के लिए यह दिन यादगार बन गया और प्रतियोगिता में उसके कुल पदकों की संख्या तीन पहुंच गई। राजस्थान के श्री गंगानगर जिले के सीमावर्ती शहर अनूपगढ़ के रहने वाले 19 वर्षीय मेघवाल ने शनिवार को चैंपियनशिप के चौथे दिन 2.21 मीटर की कूद लगाकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और रजत पदक जीता। अल्जीरिया के यूनेस अयाची ने स्वर्ण पदक, जबकि ग्रेट ब्रिटेन के ओटिस पूल ने कांस्य पदक हासिल किया। तीनों पदक विजेता केवल 2.21 मीटर की ऊंचाई तक कूद लगा सके और 2.24 मीटर की ऊंचाई पार करने में असफल रहे। ऐसी स्थिति में पिछली ऊंचाई को पार करने के प्रयासों की संख्या के आधार पर स्थानों का निर्धारण किया गया। अयाची ने अपने पहले प्रयास में ही 2.21 मीटर की ऊंचाई पार कर ली थी, जबकि मेघवाल और पूल ने क्रमशः अपने दूसरे और तीसरे प्रयास में यह ऊंचाई हासिल की थी। भारतीय नौसेना में कार्यरत मेघवाल के रजत पदक ने उन्हें विश्व अंडर-20 चैंपियनशिप में ऊंची कूद में पदक जीतने वाला पहला भारतीय भी बना दिया। भारतीय महिला ऊंची कूद की पूर्व राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक सहाना कुमारी से प्रशिक्षण लेने वाले मेघवाल ने इस सत्र में अपने प्रदर्शन में 10 सेंटीमीटर का सुधार किया है। इससे पहले उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2.11 मीटर था। इसके बाद शाहनवाज ने पुरुषों की लंबी कूद में 7.84 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ कांस्य पदक जीतकर चैंपियनशिप में भारत के पदकों की संख्या को तीन तक पहुंचा दिया। इस 18 वर्षीय खिलाड़ी ने अपने तीसरे प्रयास में सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाई। उन्होंने क्रमश: 7.67 मीटर, 7.72 मीटर, 7.84 मीटर, 7.52 मीटर, 7.83 मीटर और 5.37 मीटर छलांग लगाई। फाइनल में पहुंचने वाले दूसरे भारतीय आरसी जिथिन अर्जुनान ने अपने पहले और चौथे प्रयास में 7.59 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर आठवां स्थान हासिल किया। इटली के डेनियल इन्जोली ने 7.97 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता, जबकि ऑस्ट्रेलिया के मेसन मैकग्रोडर ने 7.96 मीटर के अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ रजत पदक हासिल किया। इससे पहले आशीष यादव ने प्रतियोगिता के तीसरे दिन पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में रजत पदक जीतकर भारत का खाता खोला था। यादव विश्व अंडर-20 चैंपियनशिप में भाला फेंक में रजत पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं। उनसे पहले नीरज चोपड़ा ने यह उपलब्धि हासिल की थी। चोपड़ा ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह अभी 'केवल शुरुआत' है।
- आसन (कोरिया)। भारत की अश्मिता चालिहा ने रविवार को यहां कोरिया मास्टर्स सुपर 300 बैडमिंटन टूर्नामेंट के महिला एकल फाइनल में चीन की चौथी वरीयता प्राप्त हान कियान शी को हराकर अपना पहला बीडब्ल्यूएफ विश्व टूर खिताब हासिल जीता। असम की रहने वाली इस 26 वर्षीय खिलाड़ी ने पहला गेम गंवाने के बाद शानदार वापसी करते हुए विश्व में 35वें नंबर की खिलाड़ी हान को 53 मिनट तक चले मैच में 14-21, 21-14, 21-14 से हराया। चालिहा ने कहा, ''मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। यह अविश्वसनीय है लेकिन मैं इसे समझने की कोशिश कर रही हूं। इसने मेरी आगे और भी कुछ हासिल करने की भूख बढ़ा दी है।'' इस तरह से भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार दूसरे सप्ताह बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर का खिताब जीता। तन्वी शर्मा ने पिछले रविवार को ताइपे ओपन का खिताब अपने नाम किया था।भारतीय खिलाड़ी ने अच्छी शुरुआत की तथा पहले 3-0 और फिर 9-5 से बढ़त हासिल कर ली। लेकिन हान ने शानदार वापसी की और उन्होंने स्कोर 11-11 से बराबर कर दिया। चीनी शटलर ने अपनी लय हासिल करने के बाद लगातार अंक बनाए और मैच पर नियंत्रण बना दिया। इसके बाद उन्हें पहला गेम जीतने में किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। विश्व रैंकिंग में 50वें स्थान पर काबिज चालिहा ने दूसरे गेम में अधिक आत्मविश्वास के साथ आक्रामक खेल दिखाया और अपने स्मैश का अच्छा इस्तेमाल करते हुए हान पर दबाव बनाया। एक समय दोनों खिलाड़ी 6-6 से बराबरी पर थी। लेकिन इंटरवल तक भारतीय खिलाड़ी 11-8 से आगे हो गई। उन्होंने इसके बाद भी अपना दबदबा बनाए रखा। हान अंतर को कम करने के लिए संघर्ष करती रही। चालिहा ने 17-10 से बढ़त हासिल करने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा और मैच को निर्णायक गेम तक पहुंचा दिया। तीसरे गेम के शुरू में दोनों खिलाड़ियों ने एक दूसरे के सामने कड़ी चुनौती पेश की। चालिहा ने शुरू में 5-2 की बढ़त हासिल कर ली, लेकिन इंटरवल तक हान 11-9 से आगे थी। चालिहा ने संघर्ष जारी रखा और धीरे-धीरे मैच का रुख अपने पक्ष में मोड़ लिया। उन्होंने लगातार छह अंक बनाकर 15-11 से बढ़त हासिल कर ली। भारतीय खिलाड़ी ने एक क्रॉस-कोर्ट विनर से स्कोर 19-14 कर दिया। इसके बाद हान ने अपना रिटर्न शॉट बाहर मार दिया, जिससे चालिहा को चैंपियनशिप प्वाइंट मिल गया और फिर उन्होंने अपना पहला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब जीतने में देर नहीं लगाई। चालिहा ने कहा, ''पहले गेम में ड्रिफ्ट की वजह से थोड़ी मुश्किल हुई, इसलिए मैं इस पर नियंत्रण नहीं बना सकी लेकिन दूसरे गेम में दूसरी तरफ स्थिति बेहतर थी और ड्रिफ्ट कम थी, इसलिए मैं इसे नियंत्रित कर पाई। तीसरे गेम में 11 प्वाइंट के बाद, मैंने फिर से रणनीति बदली, इसलिए मैं बेहतर स्थिति में थी। मुझे खुशी है कि मैं यह कर पाई।'' चालिहा 2024 में कोरिया ओपन के दौरान चोटिल हो गई थी। उनके दाहिने घुटने में चोट लगी थी जिसके लिए उन्हें सर्जरी करानी पड़ी। उन्होंने अगले साल फरवरी में वापसी की और 14 प्रतियोगिताओं में भाग लिया। इस साल उन्होंने बीडब्ल्यूएफ टूर पर शानदार वापसी करते हुए चाइना मास्टर्स और मलेशिया मास्टर्स के क्वार्टर फाइनल और फिर मकाऊ ओपन के सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। चालिहा गुवाहाटी स्थित राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में पार्क ताए-सांग के मार्गदर्शन में अभ्यास करती है।
- बेंगलुरु। भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) का पुरजोर तरीके से बचाव करते हुए इसके प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण ने रविवार को कहा कि खिलाड़ियों की चोट से उबरने की धीमी प्रक्रिया के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि क्रिकेटर कोई 'मशीन' नहीं हैं, जिनकी फिटनेस हर बार तय समयसीमा के भीतर लौट आए।लक्ष्मण ने यह भी स्पष्ट किया कि सीओई और टीम प्रबंधन के बीच बेहतरीन और निर्बाध समन्वय है।फिलहाल तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह, हरफनमौला हर्षित राणा, हार्दिक पांड्या, वॉशिंगटन सुंदर और शीर्ष क्रम के बल्लेबाज बी. साई सुदर्शन अपनी-अपनी चोटों से उबरने के लिए सीओई में हैं। लक्ष्मण ने सीओई में चुनिंदा मीडिया से बातचीत में कहा, ''सीओई सिर्फ चोट से उबरने और फिटनेस हासिल करने का केंद्र नहीं है। क्रिकेटरों को उत्कृष्टता हासिल करने में मदद करने के लिए इसकी भूमिका इससे कहीं बड़ी है। इसलिए हम चोटों के मामले में 'दोष' शब्द का इस्तेमाल करना पसंद नहीं करते। ऐसा करने पर किसी एक व्यक्ति को बलि का बकरा बनाया जाता है।" उन्होंने कहा, ''पुरुष और महिला, दोनों टीमों के सीओई, टीम प्रबंधन और 'एसएसएम स्टाफ' के बीच शानदार तालमेल है। इसलिए बिना रूकावट के संवाद लगातार होता रहता है।" लक्ष्मण ने कहा कि कड़े फिटनेस मानकों और मानव शरीर की प्रकृति को देखते हुए किसी खिलाड़ी का एक निश्चित समयसीमा में पूरी तरह फिट हो जाना हमेशा संभव नहीं होता। उन्होंने कहा, ''यह समझना बहुत जरूरी है कि दिशानिर्देश और समयसीमा हमारी अपेक्षाओं के आधार पर तय की जाती हैं। लेकिन यह मानव शरीर है, मशीन नहीं कि हर बार तय समयसीमा के भीतर ही रिकवरी हो जाए।'' उन्होंने बताया, '' खिलाड़ी की प्रगति की लगातार निगरानी की जाती है और उसके अनुसार प्रशिक्षण का भार बढ़ाया जाता है। चोट के उबरने से लेकर फिट घोषित होने और खिलाड़ी के सीओई छोड़ने तक यही प्रक्रिया जारी रहती है।''लक्ष्मण ने अपनी बात समझाने के लिए जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि चयनकर्ता सीओई से खिलाड़ियों की फिटनेस स्थिति की रिपोर्ट मांगते हैं। इसके बाद रिपोर्ट चयन समिति के अध्यक्ष और दोनों टीमों के मुख्य कोच और बीसीसीआई को भेजी जाती है। उन्होंने कहा, ''बुमराह और सुदर्शन के नाम के आगे हमेशा एक तारांकित निशान रहता है, जिसका अर्थ है 'फिटनेस के अधीन'। इसलिए श्रीलंका के खिलाफ टीम के लिए उनका चयन फिटनेस क्लीयरेंस मिलने की शर्त पर होना था।'' लक्ष्मण के मुताबिक, ''सीओई में खिलाड़ियों का आकलन कर उन्हें एक चरण से दूसरे चरण में आगे बढ़ाया जाता है। उनकी प्रगति धीमी होती है तो चयन समिति के अध्यक्ष और मुख्य कोच को इसकी जानकारी दी जाती है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और सभी संबंधित लोग समझते हैं कि खिलाड़ी अभी अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला में हिस्सा लेने के लिए तैयार नहीं है।'' जब लक्ष्मण से पूछा गया कि बड़ी संख्या में खिलाड़ियों के लगातार चोटिल होने को लेकर क्या यह चिंता का विषय है, तो पूर्व भारतीय क्रिकेटर ने इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी। उन्होंने कहा कि चोट खेल करियर का हिस्सा है। उन्होंने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि यह चिंता का कारण है। लेकिन जब कोई खिलाड़ी शीर्ष स्तर पर खेलता है तो उससे अपना सर्वश्रेष्ठ देने की उम्मीद होती है। चोट किसी भी खिलाड़ी के करियर का हिस्सा है। अगर आप चोट से बचने के बारे में सोचते रहेंगे तो अपनी पूरी क्षमता के साथ नहीं खेल पाएंगे।'' उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि खिलाड़ियों की चोट को देखने का नजरिया बदलना चाहिए। उनके अनुसार, चोट को हमेशा नकारात्मक चीज के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे खेल का स्वाभाविक हिस्सा समझना चाहिए। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने भी श्रृंखला से पहले टीम चयन की प्रक्रिया को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आम तौर पर टीम के रवाना होने से कम से कम तीन से चार सप्ताह पहले चयन बैठक होती है। सैकिया ने कहा, ''उस समय हमें खिलाड़ी की फिटनेस की वास्तविक स्थिति का पता नहीं होता। इसलिए उसके नाम के आगे 'फिटनेस के अधीन' का उल्लेख किया जाता है, क्योंकि वह खिलाड़ी उस समय चोट की उबरने की प्रक्रिया से जुड़े कार्यक्रम से गुजर रहा होता है।'' उन्होंने कहा कि अगर खिलाड़ी 21 या 28 दिनों की उस अवधि में फिट हो जाता है, तो उसे टीम में शामिल किया जा सकता है। इसीलिए ऐसे खिलाड़ी को सीधे तौर पर चयन से बाहर नहीं किया जाता है। सैकिया के अनुसार, ''टीम के यात्रा पर रवाना होने या मैच खेलने तक जरूरी फिटनेस हासिल करने के लिए खिलाड़ी के पास पर्याप्त समय रहता है। इस तरह अंतिम फैसला खिलाड़ी की वास्तविक फिटनेस स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाता है।''
























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