- Home
- छत्तीसगढ़
- -जनता के विश्वास को और मजबूत बना रहा सुशासन तिहार : उप मुख्यमंत्री अरुण साव-जिला स्तरीय शहरी समाधान शिविर में 18 करोड़ रुपए से ज्यादा के विकास कार्यों का भूमिपूजन, हितग्राहियों को मिला योजनाओं का लाभबिलासपुर /केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू और उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री अरुण साव आज सुशासन तिहार के अंतर्गत पुत्रीबाई स्कूल सामुदायिक भवन में आयोजित जिला स्तरीय शहरी समाधान शिविर में शामिल हुए। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन और विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है तथा बिलासपुर के विकास के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। उप मुख्यमंत्री श्री श्री अरुण साव ने कहा कि जनता के प्रति जवाबदेही ही वास्तविक सुशासन है और सुशासन तिहार ने शासन के प्रति लोगों के विश्वास को और अधिक मजबूत किया है। न्यायधानी बिलासपुर को उसकी पहचान और गरिमा के अनुरूप विकसित करने के लिए लगातार बड़े पैमाने पर विकास कार्य किए जा रहे हैं।कार्यक्रम में अतिथियों ने मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत 12 करोड़ 95 लाख रुपए की लागत से अरपा राम सेतु से शनिचरी रपटा तक सड़क, नाला एवं पिचिंग कार्य तथा 5 करोड़ 55 लाख रुपए की लागत से कुंदन पैलेस से सहारे गली होते हुए बस स्टैंड तक आरसीसी बॉक्स निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। कुल 18 करोड़ 50 लाख रुपए से अधिक लागत के इन विकास कार्यों से शहर की अधोसंरचना को नई मजबूती मिलेगी तथा नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि सुशासन तिहार शासन और जनता के बीच विश्वास को और सशक्त बनाने का अभिनव अभियान है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटियों को तेजी से धरातल पर उतारा जा रहा है और प्रदेश विकास के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में संवेदनशीलता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि कोई भी पात्र हितग्राही शासन की योजनाओं से वंचित न रहे। श्री साहू ने कहा कि बिलासपुर आज तेजी से बदलती हुई न्यायधानी के रूप में उभर रहा है। फोरलेन सड़कों का निर्माण, एयरपोर्ट विस्तार की दिशा में हो रहे प्रयास तथा कोपरा जलाशय का रामसर साइट के रूप में चयन इस क्षेत्र के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों को गति देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कार्य कर रही हैं तथा बिलासपुर के समग्र विकास के लिए आवश्यक हर सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान और शासन के प्रति उसका बढ़ता विश्वास ही सुशासन तिहार की सबसे बड़ी उपलब्धि है। सुशासन तिहार ने शासन और आमजन के बीच संवाद का प्रभावी माध्यम तैयार किया है, जिससे लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्यों को प्राथमिकता मिल रही है। उन्होंने कहा कि न्यायधानी बिलासपुर को उसकी पहचान के अनुरूप विकसित करने के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। विगत दो वर्षों में जिले में 412 करोड़ 57 लाख रुपए से अधिक के विकास कार्य स्वीकृत और संचालित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि विकास की यह गति आगे भी जारी रहेगी और न्यायधानी को प्रदेश के सबसे विकसित शहरों में शामिल किया जाएगा। श्री साव ने पुत्रीबाई सामुदायिक भवन में बाउंड्री वॉल एवं शौचालय निर्माण के लिए 20 लाख रुपए की राशि प्रदान करने की घोषणा भी की, जिसका उपस्थित नागरिकों ने स्वागत किया।कार्यक्रम में अतिथियों ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत हितग्राहियों को लाभान्वित किया।इस अवसर पर नगर निगम सभापति श्री विनोद सोनी, कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह, नगर निगम आयुक्त श्री प्रकाश कुमार सर्वे, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संदीप अग्रवाल, श्री बंधुलाल मौर्य, श्री राजेश सिंह, श्रीमती सुनीता जगत, श्री विजय ताम्रकार, श्री लक्ष्मीनारायण कश्यप, श्री मोहित जायसवाल, पार्षदगण, अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
- -अधिकारियों को दिए त्वरित निराकरण के निर्देशबिलासपुर /कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने आज जिला कार्यालय में आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में लोगों की समस्याएं सुनी। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों ने उनसे मिलकर निजी एवं सामुदायिक शिकायत संबंधी आवेदन दिया। उन्होंने अधिकांश मामलों में मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान एडीएम श्री शिवकुमार बनर्जी एवं संयुक्त कलेक्टर श्री अभिषेक दीवान ने भी लोगों की समस्याएं सुनी।जनदर्शन में आज जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों ने अपनी समस्याओं एवं मांगों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए। ग्राम पंचायत कर्रा के सरंपच ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए शासकीय भूमि पर प्रस्तावित तालाब निर्माण के लिए चिन्हित स्थल पर बेजा कब्जा को हटाने एवं उचित कार्यवाही की मांग की है। उन्होंने बताया कि कर्रा के निवासी रामकिुशन द्वारा अवैध बेजा कब्जा कर तार फेंसिंग से तालाब निर्माण स्थल को घेरा गया है। इसी प्रकार सकरी तहसील क्षेत्र के साईं नगर निवासी 64 वर्षीय दिव्यांग शिव कुमार कुर्रे ने बैटरी चलित ट्राइसाइकिल दिलाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि ट्राइसाइकिल मिलने से आवागमन में सुविधा होगी और दैनिक कार्यों को करने में भी मदद मिलेगी। जनदर्शन में ग्राम पंचायत घुटकू के ग्रामीणों ने लोनिया पारा को वर्तमान निरतु फीडर से अलग कर घुटकू फीडर से जोड़ने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था के कारण क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति संबंधी समस्याएं बनी रहती हैं, जबकि घुटकू फीडर से जोड़ने पर बेहतर और सुचारू बिजली आपूर्ति मिल सकेगी। वहीं एक अन्य आवेदन में नगर निगम क्षेत्र के चिंगराजपारा निवासी सौरभ रजक ने अपने क्षेत्र के सब्जी मंडी में सब्जी विक्रय हेतु चबूतरा आबंटन के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। मस्तुरी ब्लॉक के ग्राम सरसेनी निवासी गोवर्धन सिंह जगत ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का आवास दिलाने की मांग की।शहर के तिलक राम जोशी ने बैंक ऑफ बड़ौदा से पुनः ऋण दिलाने की मांग करते हुए आवेदन सौंपा। उन्होंने बताया कि वे पिछले 10 वर्षों से बैंक के ऋण ग्राहक हैं और पूर्व का लगभग 1.30 लाख रुपये का ऋण ब्याज सहित चुका चुके हैं, इसके बावजूद नया ऋण स्वीकृत नहीं हो पा रहा है। वहीं बिल्हा क्षेत्र के ग्रामीणों ने स्कूल और आंगनबाड़ी के पास संचालित अंडा-मुर्गी दुकान को हटाने की मांग उठाई है। ग्रामीणों ने बताया कि दुकान से निकलने वाली गंदगी स्कूल परिसर तक पहुंच रही है, जिससे विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों ने मामले की जांच कर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। एक अन्य आवेदन में सकरी तहसील के ग्राम गोबंद निवासी बालमुकंुद गोड़ ने बिसाहू खान द्वारा उनकी भूमि के सामने मकान निर्माण कर मार्ग अवरोध करने की शिकायत की है। कलेक्टर ने जनदर्शन में प्राप्त सभी आवेदनों पर संबंधित विभागों को आवश्यक जांच एवं नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि उनकी समस्याओं का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।
- - राजनांदगांव में हुई प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ सहित पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश की नाट्य संस्थाओं में एकल और एकांकिका के 10 नाटकों का हुआ मंचनरायपुर। राजनांदगांव में हुए अंतरराज्यीय नाट्य स्पर्धा में महाराष्ट्र मंडल की सहयोगी नाट्य संस्था ‘रंगभूमि’ के कलाकारों ने नाटक ‘टीस’ में अपने बेहतरीन अभिनय का प्रदर्शन करते हुए द्वितीय स्थान प्राप्त किया। रंगभूमि के कलाकार आकाश वरठी और ट्विंकल परमार ने भी क्रमश: सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता और सह अभिनेत्री का पुरस्कार भी अपने नाम किया। स्पर्धा भारत रत्न स्व. अटल बिहारी बाजपेयी मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में हुई।‘टीस’ की परिकल्पना करने वाले आचार्य रंजन मोड़क ने बताया कि स्पर्धा में एकल और एकांकी नाटक सहित कुल 10 नाटकों का मंचन हुआ। इसमें पश्चिम बंगाल से कोलकाता, मध्य प्रदेश से इंदौर, छिंदवाड़ा छत्तीसगढ़ से रायपुर, धमतरी, राजनांदगांव के नाट्य समूह ने भाग लिया। समूह नाटक में प्रथम स्थान इंदौर के ‘गज फुट इंच’ को प्राप्त हुआ। स्पर्धा में उप विजेता रंगभूमि के नाटक ‘टीस’ को और तीसरे स्थान पर छिंदवाड़ा नाट्य दल का नाटक रहा। प्रतियोगिता में निर्णायक संतोष जैन रायपुर, राजकुमार सोनी दुर्ग, शक्ति चटर्जी भिलाई, मनोज गुप्ता डोंगरगढ़ और रंजन घोष कोलकाता थे।आचार्य मोड़क के मुताबिक नाटक के लेखक लोकेश रंजन है। निर्देशन युवा निर्देशक लोकेश साहू ने किया। नाटक में प्रांजल सिंह राजपूत (बाबूजी), आकाश वरठी (रजत), ट्विंकल परमार (मीना), प्रभात साहू (बलवंत), रंजना ध्रुव (लेखक की पत्नी), अक्षदा मातुरकर (कांता) मंच पर नजर आए। चंचल ध्रुव निर्देशक की भूमिका में रहीं। वहीं मंच व्यवस्था रिया परमार, ध्वनि और प्रकाश संयोजन नीतीश यादव ने संभाल रखी थी।बताते चलें कि हिंदी रंगमंच दिवस पर तीन अप्रैल को नाटक ‘टीस’ का पहली बार मंचन महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में किया गया था, जिसे काफी पसंद किया गया। रंगभूमि की इस सफलता पर महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले, उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल, सचिव चेतन दंडवते सहित कार्यकारिणी सदस्यों ने उन्हें बधाई देते हुए सभी कलाकारों को शुभकामनाएं दी और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
- -प्रदेश प्रवक्ता शिवनारायण पाण्डेय का शराब घोटाले को लेकर ईडी के पूरक आरोप पत्र में हुए चौंकाने वाले खुलासों के मद्देनजर कांग्रेस पर तीखा हमला-'केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाने के बजाय कांग्रेस नेतृत्व बताए कि इतने बड़े घोटाले और गंभीर आरोपों के बाद भी वह चुप क्यों है?'रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता शिवनारायण पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। श्री पाण्डेय ने मंगलवार को यहाँ एकात्म परिसर स्थित भाजपा कार्यालय में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पेश किए गए छठवें पूरक आरोप पत्र का हवाला देते हुए कहा कि इसमें कांग्रेस सरकार के समय हुए भ्रष्टाचार के नए और चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं।भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री पाण्डेय ने आरोप लगाया कि इस महाघोटाले के कारण आज छत्तीसगढ़ में नकदी और मुद्रा तरलता (लिक्विडिटी) का भारी अभाव दिख रहा है। छत्तीसगढ़ की जनता का हक मारकर यहाँ का पैसा दूसरे राज्यों में अवैध रूप से निवेश किया गया, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था काफी पीछे चली गई है। श्री पाण्डेय ने बताया कि शराब घोटाले की काली कमाई का लगभग 110 करोड़ रुपया कथित रूप से पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र के माध्यम से नॉर्थ गोवा के 'होटल वेस्टिन' को खरीदने में लगाया गया है। ईडी ने इसके पुख्ता प्रमाण चार्जशीट में जोड़े हैं। इस पूरे घोटाले में अब तक लगभग 89 आरोपियों को नामजद किया गया है, और अपराधियों से कुल 1,000 करोड़ रुपए की अवैध संपत्ति को ईडी द्वारा फ्रीज या सीज किया जा चुका है। ताजा चार्जशीट में ही 200 करोड़ रुपए की नई बेनामी और अवैध सम्पत्ति का पता चला है। श्री पाण्डेय ने मांग की है कि बेनामी ट्रांजेक्शन और मनी लॉन्ड्रिंग के इस भयावह खेल पर कांग्रेस पार्टी को जनता के सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री पाण्डेय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की यह लूट अकेले नहीं हुई। इसमें राजनेता, प्रशासनिक अधिकारी और बड़े व्यवसायियों की तिकड़ी का एक मजबूत सिंडिकेट सक्रिय था। इस सिंडिकेट के कई तत्कालीन मंत्री और अधिकारी आज भी जेलों में बंद हैं। श्री पाण्डेय ने सवाल उठाया कि इतने बड़े घोटाले और गंभीर आरोपों के बाद भी कांग्रेस पार्टी चुप क्यों है? कांग्रेस के पास केंद्रीय एजेंसियों पर दुरुपयोग का आरोप लगाने के अलावा कोई सीधा स्पष्टीकरण नहीं है। कांग्रेस के कोषाध्यक्ष के गायब होने पर भी श्री पाण्डेय ने जवाब मांगा और दो टूक कहा कि इस पूरे सिंडिकेट को चलाने वाला और इसका असली 'बॉस' वही है जो उस समय सत्ता का संचालन कर रहा था। पूरी जाँच से साफ है कि राजनेताओं के संरक्षण में ही यह लूट मची थी। कांग्रेस को इधर-उधर की बात करने के बजाय छत्तीसगढ़ की जनता को सीधे-सीधे जवाब देना चाहिए।
- -PESA और वनाधिकार कानून पर भ्रम फैलाकर आदिवासी समाज को गुमराह करने की कोशिश कर रही है कांग्रेसरायपुर। वन मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस को आदिवासी हितों पर सवाल उठाने से पहले अपना राजनीतिक इतिहास देखना चाहिए। जिन कानूनों और अधिकारों की आज कांग्रेस बात कर रही है, उनके प्रभावी क्रियान्वयन में सबसे बड़ी बाधा स्वयं कांग्रेस की नीयत और नीतियां रही हैं।वनमंत्री कश्यप ने कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक आदिवासी समाज को केवल वोट बैंक समझकर राजनीति की, लेकिन उन्हें उनके अधिकारों, संसाधनों और विकास से जोड़ने का ईमानदार प्रयास कभी नहीं किया। आज जब छत्तीसगढ़ में ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने, वनाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और आदिवासी समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, तब कांग्रेस इसे भी राजनीतिक चश्मे से देख रही है।उन्होंने कहा कि दीपक बैज और कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद PESA और वनाधिकार कानून का लाभ अंतिम व्यक्ति तक क्यों नहीं पहुंच सका। आदिवासी क्षेत्रों में विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और आजीविका के अवसरों का अभाव किसकी देन था, यह देश अच्छी तरह जानता है।वन मंत्री ने कहा कि कांग्रेस का वास्तविक दर्द आदिवासी अधिकार नहीं, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में उसका लगातार सिकुड़ता जनाधार है। आज वनवासी समाज जागरूक हो रहा है, अपने अधिकारों के प्रति सजग हो रहा है और विकास प्रक्रिया में भागीदार बन रहा है, यही बात कांग्रेस को परेशान कर रही है।मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आदिवासी गौरव, आदिवासी अधिकार और आदिवासी विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी भावना के साथ कार्य कर रही है। कांग्रेस के आरोप तथ्यहीन, राजनीतिक रूप से प्रेरित और आदिवासी समाज को भ्रमित करने का असफल प्रयास हैं।
- - एक साल में बढ़े 1.61 लाख नए बिजली उपभोक्ता, 17 हजार कृषि पंपों को नया कनेक्शनरायपुर । छत्तीसगढ़ में वर्ष 2025–26 के दौरान बिजली क्षेत्र में व्यापक सुधार और विस्तार दर्ज किया गया है, जहां छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत 1502.86 करोड़ रुपए से अधिक के कार्य कर बिजली व्यवस्था को मजबूत किया गया है। इन प्रयासों का सीधा लाभ प्रदेश के लाखों घरेलू, कृषि और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को मिल रहा है, जिससे बिजली सेवाओं की पहुंच का दायरा बढ़ा है।छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज के उपमहाप्रबंधक (जनसंपर्क) कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने बीते एक वर्ष में 17,184 कृषि पंपों का ऊर्जीकरण किया है, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए बेहतर और नियमित बिजली उपलब्ध हो रही है। इससे खेती की लागत कम होने के साथ उत्पादन बढ़ाने में भी सहायता मिल रही है। वहीं उपभोक्ता सेवाओं को तेज और सरल बनाते हुए 1.61 लाख से अधिक नए बिजली कनेक्शन जारी किए गए, जिससे नए घरों, दुकानों और छोटे उद्योगों को समय पर बिजली उपलब्ध हो सकी।शहरी क्षेत्रों में भी बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सैकड़ों कार्य किए गए, जिनमें लाइन अपग्रेडेशन, ट्रांसफॉर्मर स्थापना और नेटवर्क सुधार शामिल हैं। इससे शहरों में वोल्टेज संबंधी समस्याओं तथा बार-बार होने वाले फॉल्ट में कमी आई है, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक भरोसेमंद बिजली आपूर्ति मिल रही है।बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए राज्य में 33 केवी, 11 केवी एवं एलटी लाइनों का बड़े पैमाने पर विस्तार किया गया है तथा अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मर स्थापित किए गए हैं, जिससे बिजली आपूर्ति की क्षमता और स्थिरता दोनों में सुधार हुआ है।ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाते हुए 92 गांवों और 146 बस्तियों तक बिजली सुविधा का विस्तार किया गया। वहीं जनजातीय क्षेत्रों में 19,641 घरों तक बिजली पहुंचाई गई। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजातियों के 492 घरों का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण किया गया, जो दुर्गम क्षेत्रों में कार्य निष्पादन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इन प्रयासों से शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के अवसरों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार के लिए आरडीएसएस योजना के तहत 785.56 करोड़ रुपए की लागत से व्यापक तकनीकी कार्य किए गए, जिनमें फीडर पृथक्करण, ओवरलोड कम करना, नए ट्रांसफॉर्मर स्थापित करना तथा हजारों किलोमीटर एलटी लाइन एवं केबल का उन्नयन और प्रतिस्थापन शामिल है। इन सुधारों का लाभ उपभोक्ताओं को स्थिर वोल्टेज, कम ट्रिपिंग और कम बिजली कटौती के रूप में मिल रहा है, जिससे घरेलू एवं व्यावसायिक गतिविधियां अधिक सुचारू हुई हैं।
- -25 हजार मीट्रिक टन से अधिक रासायनिक उर्वरक उपलब्ध, प्रशासन की कड़ी निगरानी में वितरण व्यवस्थारायपुर // मुंगेली जिले में खरीफ सीजन 2026 की शुरुआत के साथ ही जिले के किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में खाद एवं बीज उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग पूरी सक्रियता के साथ कार्य कर रहे हैं। कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार के निर्देशानुसार जिले में रासायनिक उर्वरकों के भंडारण, वितरण और निगरानी की सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे किसानों को खेती-किसानी के कार्यों में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। जिले में वर्तमान में सहकारी, निजी एवं डबल लॉक केंद्रों सहित कुल 25 हजार मीट्रिक टन से अधिक रासायनिक उर्वरक उपलब्ध है। सहकारी क्षेत्र में अब तक 14 हजार 217 मीट्रिक टन से अधिक उर्वरकों का भंडारण किया गया है, जिसमें यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी एवं म्यूरेट ऑफ पोटॉश शामिल हैं। वहीं निजी क्षेत्र में 10 हजार 727 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया गया है। इसके अतिरिक्त डबल लॉक केंद्रों में 04 हजार 208 मीट्रिक टन तथा निजी थोक विक्रेताओं के पास 01 हजार 213 मीट्रिक टन उर्वरक सुरक्षित रूप से उपलब्ध है।किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से अब तक 05 हजार 668 मीट्रिक टन तथा निजी विक्रेताओं के माध्यम से 06 हजार 829 मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक का वितरण किया जा चुका है। इसके साथ ही जिले की 66 सहकारी समितियों में 12 हजार 412 क्विंटल बीज का भंडारण किया गया है, जिसमें मुख्य रूप से धान एवं अरहर के बीज शामिल हैं। निजी क्षेत्र के 200 से अधिक केंद्रों में भी लगभग 01 हजार 50 क्विंटल बीज उपलब्ध है। जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि जिले में रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है तथा लगातार नई खेप भी पहुंच रही है। ऐसे में किसी भी प्रकार की अफवाहों या भ्रामक प्रचार पर ध्यान न दें और आवश्यकता अनुसार ही खाद का क्रय करें। प्रशासन किसानों को निर्बाध रूप से खाद एवं बीज उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है ।
- -रायगढ़ जिले में 24 हजार टन से अधिक उर्वरक का भंडारण, सहकारी समितियों के माध्यम से प्राथमिकता के आधार पर वितरणरायपुर । जिला रायगढ़ में मानसून की दस्तक से पहले जिले के किसान आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों में जुट गए हैं। खेतों की जुताई, बुआई की तैयारी और कृषि आदानों की व्यवस्था के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी से जुड़ी गतिविधियां तेज हो गई हैं। किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई हैं। सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को उनकी मांग के अनुरूप खाद एवं बीज उपलब्ध कराया जा रहा है, वहीं पात्र किसानों को नगद ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया भी निरंतर जारी है। कलेक्टर द्वारा इसकी लगातार समीक्षा भी की जा रही है। उप संचालक कृषि ने बताया कि जिले में खाद की उपलब्धता, भंडारण एवं वितरण की स्थिति पर निरंतर नजर रखी जा रही है तथा किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए जिले में उर्वरकों के भंडारण और वितरण की व्यवस्था सुनियोजित ढंग से संचालित की जा रही है। खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर से लेकर विकासखंड स्तर तक लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि खेती के महत्वपूर्ण समय में किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।जिले में अब तक विभिन्न प्रकार के उर्वरकों का 24 हजार 138 टन से अधिक भंडारण किया जा चुका है। इनमें सहकारी संस्थाओं में 15 हजार 789 टन तथा निजी क्षेत्र में 8 हजार 348 टन उर्वरक उपलब्ध है। कृषि विभाग के अनुसार सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को प्राथमिकता के आधार पर खाद उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में उर्वरकों की पहुंच और वितरण व्यवस्था मजबूत बनी हुई है।विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध अब तक लगभग 48 प्रतिशत तथा गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में 52 प्रतिशत खाद का भंडारण किया जा चुका है। वहीं इस वर्ष उपलब्ध कराए गए भंडारण के विरुद्ध लगभग 46 प्रतिशत उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि शासन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप खाद की आपूर्ति एवं भंडारण की प्रक्रिया चरणबद्ध और समयबद्ध तरीके से संचालित की जा रही है।कृषि विभाग द्वारा जिले में गठित निगरानी दलों, उर्वरक निरीक्षकों तथा मैदानी अमले के माध्यम से सहकारी एवं निजी उर्वरक विक्रय केंद्रों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। किसानों को उनके कृषि रकबे एवं आवश्यकता के अनुरूप नियमानुसार उर्वरकों का वितरण सुनिश्चित कराया जा रहा है। साथ ही उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।विभाग द्वारा किसानों को डीएपी उर्वरक के विकल्प के रूप में एनपीके, एसएसपी तथा नैनो उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा हरी खाद उत्पादन को बढ़ावा देने तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के उद्देश्य से ग्रामीण क्षेत्रों में दीवार लेखन, प्रचार-प्रसार एवं कृषि विस्तार गतिविधियों के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।कृषि विभाग ने बताया कि आगामी खरीफ सीजन को देखते हुए खाद वितरण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया गया है। मानसून के दौरान उर्वरकों की मांग बढ़ने की स्थिति में भी पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रबंध किए गए हैं। विभाग का लक्ष्य किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराकर खरीफ फसलों की बेहतर उत्पादन व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
- -“Month of Solar” अभियान में बेहतर प्रदर्शन के लिए मिलेगा पीएम सूर्यघर एक्सीलेंस अवार्ड-मध्यम उपभोक्ता आधार वाले राज्यों की श्रेणी में सर्वाधिक वेंडर रजिस्ट्रेशन में देश में दूसरा स्थानरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर : मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत आयोजित “Month of Solar” अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना राज्य के लिए अत्यंत गौरव और प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य में स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और जनहितकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयासों का प्रमाण है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मध्यम उपभोक्ता आधार वाले राज्यों की श्रेणी में सर्वाधिक वेंडर रजिस्ट्रेशन के मामले में छत्तीसगढ़ ने देश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है, जिसके लिए राज्य का चयन पीएम सूर्यघर एक्सीलेंस अवार्ड हेतु किया गया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि ऊर्जा क्षेत्र में राज्य की सक्रियता, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनसहभागिता का सकारात्मक परिणाम है।मुख्यमंत्री श्री साय ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए ऊर्जा विभाग, क्रेडा, विद्युत वितरण कंपनियों, सभी अधिकारियों, कर्मचारियों तथा सहयोगी संस्थाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि टीमवर्क, प्रतिबद्धता और बेहतर समन्वय के कारण छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार ऊर्जा आत्मनिर्भर, पर्यावरण अनुकूल और हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाले ऐसे प्रयास प्रदेश के नागरिकों को आर्थिक राहत देने के साथ-साथ स्वच्छ एवं सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
- -टोल-फ्री कॉल, वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप के जरिए नागरिक दर्ज करा सकेंगे अपनी शिकायतेंरायपुर / सुशासन एवं अभिसरण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आज मंत्रालय (महानदी भवन) नवा रायपुर में सीएम हेल्पलाइन (1076) के विभागीय नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारियों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में शासन के सभी विभागों के अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव श्री राहुल भगत ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन आम नागरिकों तक सुशासन पहुँचाने का सबसे सशक्त और सुलभ माध्यम है। उन्होंने सभी नोडल अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि आम जनता की शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए। अधिकारियों को आधुनिक शिकायत प्रबंधन प्रणाली (Grievance Redressal System) के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी गई। शिकायतों का समय पर निराकरण न होने की स्थिति में उन्हें प्रक्रिया, एल-1 से एल-4 स्तर तक स्वचालित रूप से ट्रांसफर करने की तकनीकी प्रक्रिया समझाई गई। नागरिकों से उनकी संतुष्टि का फीडबैक लेने की पारदर्शी प्रक्रिया के बारे में बताया गया। सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संयुक्त सचिव श्री मयंक अग्रवाल ने बताया कि इस सिस्टम से शिकायत निवारण दर और नागरिक संतुष्टि दोनों में तेजी से सुधार आएगा। आगामी लॉन्चिंग के बाद नागरिक टोल-फ्री नंबर 1076 पर कॉल करके, वेब पोर्टल, समर्पित मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी शिकायतें सीधे दर्ज करा सकेंगे।
- -रासायनिक खाद छोड़ जैविक खेती की ओर बढ़े, अन्य किसानों से भी की जैविक खेती अपनाने की अपीलरायपुर / खेती में रासायनिक खादों के बेहिसाब प्रयोग से मिट्टी की कम होती उपजाऊ क्षमता के बीच सरगुजा जिले में अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत लब्जी, नावापारा के एक प्रगतिशील किसान श्री धनेश्वर प्रसाद ने एक नई और सकारात्मक राह चुनी है। 6 एकड़ कृषि भूमि के मालिक श्री धनेश्वर अब रासायनिक खादों का मोह छोड़कर पूरी तरह से जैविक खेती की ओर कदम बढ़ा चुके हैं और क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक बेहतरीन प्रेरणास्रोत बन रहे हैं। श्री धनेश्वर प्रसाद बताते हैं कि वे पहले अपनी खेती में केवल रासायनिक खादों का ही प्रयोग करते थे, जिससे हर साल खाद की मात्रा बढ़ानी पड़ती थी और जमीन की उपजाऊ शक्ति लगातार कम हो रही थी। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने कृषि विस्तार विभाग से संपर्क किया और अपने खेत की मिट्टी का परीक्षण कराया। परीक्षण रिपोर्ट में मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी पाई गई। विभागीय अधिकारियों ने उन्हें मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए ’नील हरित शैवाल’ (Blue-Green Algae) से खेती करने की तकनीकी सलाह दी।कृषि विभाग के मार्गदर्शन पर अमल करते हुए धनेश्वर जी ने नवाचार किया और अपने घर के बाड़ी में ही एक टैंक का निर्माण कर नील हरित शैवाल का उत्पादन शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस टैंक से लगभग 25 किलो नील हरित शैवाल का उत्पादन प्राप्त होगा। इसे खेतों में डालने से मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन की पूर्ति होगी और जमीन की सेहत में सुधार आएगा।जैविक खेती के दूरगामी फायदों का उल्लेख करते हुए श्री धनेश्वर प्रसाद ने बताया कि यह कदम केवल वर्तमान फसल को बचाने के लिए नहीं, बल्कि हमारे बच्चों के भविष्य और उनके स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए भी है। उन्होंने बताया कि जैविक खेती से जमीन उपजाऊ बनती है और पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। साथ ही मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरने से फसल उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि रासायनिक खादों के दुष्प्रभाव से फैलने वाली बीमारियों में कमी आएगी और शुद्ध व पौष्टिक आहार मिलेगा।पर्यावरण और खेत बचाओ अभियान की इस मुहिम में जुटे धनेश्वर प्रसाद का मानना है कि जैविक खेती को और अधिक बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र के अन्य कृषक बंधुओं से भी अपील की है कि वे भी रासायनिक खेती का त्याग कर जैविक खेती को अपनाएं और अपनी खेती, मिट्टी और आने वाली पीढ़ी को बचाएं।
- -मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति की बैठक में लिया गया निर्णयरायपुर / मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय (महानदी भवन) में वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम की सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में राज्य की महत्वाकांक्षी औद्योगिक, वाणिज्यिक और बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं को गति देने के लिए विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।रायपुर के कृषि उपज मंडी परिसर (मंडी रोड) में अत्याधुनिक रत्न एवं आभूषण पार्क (रायपुर जेम्स एवं ज्वेलरी पार्क) बनाने की योजना है। बिलासपुर शहर में बढ़ते भारी वाहनों के दबाव और ट्रैफिक की समस्या को दूर करने के लिए एक विशाल सर्व-सुविधायुक्त ट्रांसपोर्ट नगर का निर्माण किया जाएगा। यहाँ बड़े गोडाउन, लॉजिस्टिक्स हब, व्यापक पार्किंग स्पेस, वाहन रिपेयरिंग सेंटर और चालकों के लिए रेस्ट एरिया जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। नवा रायपुर में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के बड़े आयोजनों के लिए एक वर्ल्ड-क्लास कन्वेंशन सेंटर विकसित किया जाएगा। यह अत्याधुनिक बिजनेस हब कॉर्पाेरेट इवेंट्स, ग्लोबल बिजनेस मीट और प्रदर्शनियों के लिए उपयुक्त होगा, जिससे छत्तीसगढ़ में बिजनेस टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। इन सभी बड़ी परियोजनाओं को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत विकसित करने की रूपरेखा तैयार की गई है।इस उच्च स्तरीय बैठक में विधि एवं विधायी विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सुषमा सावंत, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, नीति आयोग के सदस्य सचिव श्री आशीष भट्ट, वित्त विभाग की विशेष सचिव श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा सहित छत्तीसगड राज्य औद्योगिक विकास निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
- -फसल उत्पादन में नैनो डीएपी एवं यूरिया के उपयोग से जमीन की बनी रहेगी उर्वरकतारायपुर // नारायणपुर के ग्राम केरलापाल के निवासी खानेंद्र कुमेटी एक मेहनती और प्रगतिशील किसान हैं। उनका जीवन संघर्ष, परिश्रम और नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है। कुछ वर्ष पहले तक वे पारंपरिक खेती करते थे, जिससे उन्हें बहुत कम लाभ मिलता था। खेती की लागत बढ़ रही थी और उत्पादन अपेक्षाकृत कम हो रहा था। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत नहीं हो पा रही थी।खानेंद्र कुमेटी ने हार मानने के बजाय नई तकनीकों को अपनाने का निर्णय लिया। उन्होंने कृषि विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लिया और आधुनिक खेती के तरीकों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने उन्नत बीजों का उपयोग शुरू किया, खेतों में जैविक खाद का प्रयोग बढ़ाया तथा सिंचाई के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाया। इससे उनकी फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।उन्होंने धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सब्जियों और फलदार पौधों की खेती भी शुरू की। फसल विविधीकरण के कारण उनकी आय के स्रोत बढ़ गए। उन्होंने अपने खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाई, जिससे पानी की बचत हुई और पौधों को आवश्यक मात्रा में पानी मिलता रहा। इसके अतिरिक्त वे समय-समय पर मिट्टी परीक्षण भी करवाते हैं, जिससे फसल के अनुसार उचित उर्वरकों का चयन कर पाते हैं।खानेंद्र कुमेटी की सफलता देखकर गांव के अन्य किसान भी प्रेरित हुए। वे अपने अनुभव और ज्ञान को अन्य किसानों के साथ साझा करते हैं तथा उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उनकी पहल से गांव में कृषि के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हुई है और कई किसानों की आय में वृद्धि हुई है।आज खानेंद्र कुमेटी न केवल एक सफल किसान हैं, बल्कि गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत भी हैं। उनका मानना है कि खेती को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से किया जाए तो यह अत्यंत लाभकारी व्यवसाय बन सकता है। उनके परिश्रम, दूरदर्शिता और नवाचार ने उन्हें ग्राम केरलापाल के एक सम्मानित प्रगतिशील किसान के रूप में पहचान दिलाई है।खानेंद्र कुमेटी की कहानी हमें यह संदेश देती है कि मेहनत, सीखने की इच्छा और नई तकनीकों को अपनाने का साहस किसी भी किसान को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। उन्होंने बताया कि फसल उत्पादन के लिए सबसे अच्छी नैनो डीएपी और नैनो यूरिया की उपयोग से जमीन की उर्वरकता नष्ट नहीं होती और फसल को उत्पादन में सहायक होती है, कृषि के साथ-साथ पशुपालन, मछली पालन और उद्यानिकी फसलों का भी उत्पादन करते हैं।
- -किसानों को 69 हेक्टेयर क्षेत्र में मिलेगी सिंचाई की सुविधारायपुर / छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा सुकमा जिले के विकासखण्ड सुकमा के अंतर्गत रामाराम जलाशय योजना के जीर्णाेद्धार कार्य के लिए 1 करोड़ 16 लाख 6 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। यह पहल सुकमा क्षेत्र में कृषि विकास को गति देने और स्थानीय किसानों की जल आवश्यकताओं को पूरा करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।इस योजना के प्रस्तावित कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण होने पर क्षेत्र के स्थानीय किसानों को 69 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलने लगेगी। जल संसाधन विभाग द्वारा इस योजना के कार्यों को समय पर और गुणवत्तापूर्वक संपन्न कराने के लिए मुख्य अभियंता, गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग (जगदलपुर) को आवश्यक दिशा-निर्देश और प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी गई है। योजना के पूर्ण होने के बाद, रूपांकित सिंचाई क्षमता में आ रही कमी पूरी होगी और पूरे क्षेत्र को पर्याप्त सिंचाई का लाभ मिलेगा।
- -मुख्यमंत्री के सुशासन में किसानों को समय पर मिल रही कृषि आदान सामग्रीरायपुर /नैनो यूरिया और नैनो डीएपी (तरल उर्वरक) कृषि क्षेत्र में एक क्रांतिकारी नवाचार हैं। ये पारम्परिक उर्वरकों (दानेदार यूरिया और डीएपी) की तुलना में बहुत कम मात्रा में उपयोग किए जाते हैं और पौधे के सीधे संपर्क में आकर तेजी से पोषक तत्व प्रदान करते हैं। नैनो तकनीक के कारण इनका आकार अत्यंत छोटा (20-50 नैनोमीटर) होता है। ये पौधों की कोशिकाओं के अंदर सीधे प्रवेश करके आवश्यक पोषक तत्व (नाइट्रोजन और फास्फोरस) प्रदान करते हैं, जिससे फसल का विकास अच्छा होता है और पैदावार बढ़ती है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन में आगामी खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियां सुनिश्चित की गई हैं। जिले की सहकारी समितियों के माध्यम से खाद एवं उन्नत बीजों का पर्याप्त भंडारण किया गया है, जिससे कृषकों को समय पर आवश्यक कृषि सामग्रियां मिल रही हैं। किसान अब बिना किसी कठिनाई के अपनी आवश्यकतानुसार खाद-बीज प्राप्त कर रहे हैं। पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियों की तुलना में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की बोतलें बहुत सस्ती और किफायती होती हैं पारंपरिक उर्वरकों से होने वाले गैसीय उत्सर्जन और लीचिंग (पानी के साथ बहकर जमीन में जाने) की समस्या नैनो उर्वरकों से न के बराबर होती है, इससे भूमि, जल और वायु प्रदूषण कम होता है। इसी कड़ी में कोरबा जिले के ग्राम ढेलवाडीह के निवासी कृषक श्री छेदीलाल उरांव ने विकासखंड सोनपुरी स्थित सहकारी समिति से आगामी खरीफ फसल के लिए खाद और बीज प्राप्त किया है। लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि पर खेती करने वाले श्री उरांव का 6 से 7 सदस्यों का परिवार पूरी तरह कृषि पर ही आश्रित है और वे मुख्य रूप से धान की खेती करते हैं। श्री उरांव ने बताया कि उन्होंने इस सीजन के लिए यूरिया एवं डीएपी उर्वरक ले लिया है। इसके साथ ही वे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए अपनी 1 एकड़ भूमि में हरित खाद के रूप में ढैंचा एवं मूंग की बुआई भी करेंगे।कृषक श्री उरांव ने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग के अपने बेहतरीन अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले वर्ष इसके प्रयोग से उन्हें काफी लाभ हुआ था। नैनो डीएपी पौधों तक पोषक तत्वों की त्वरित और प्रभावी उपलब्धता सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि यह मिट्टी की जैविक गुणवत्ता और उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में सहायक है। यह पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यह टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देता है और खेती की लागत को भी नियंत्रित करता है। श्री उरांव ने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों और नैनो उर्वरकों के समावेश से अब खेती अधिक मुनाफे का सौदा साबित हो रही है। उन्होंने संकटमुक्त होकर समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने तथा कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार की यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर, आधुनिक और समृद्ध बनाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।
- -पिलखा डैम की लहरों पर महिलाओं ने लिखी सफलता की नई इबारतरायपुर / कभी घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल बन रही हैं, जो पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गई है। सूरजपुर जिले के पहाड़गांव स्थित पिलखा डैम की शांत जलराशि पर दौड़ती नावें अब केवल पर्यटकों को सैर नहीं करातीं, बल्कि महिलाओं के संघर्ष, साहस और सफलता की कहानी भी सुनाती हैं।यह कहानी है मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की, जिसने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने हौसलों को पतवार बनाकर आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार की। समूह की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता सिंह और सचिव श्रीमती यशोदा दास के नेतृत्व में 10 महिलाओं ने पर्यटन क्षेत्र में कदम रखा और बोटिंग गतिविधि शुरू कर अपनी पहचान बना ली।शुरुआत आसान नहीं थी। संसाधनों की कमी, तकनीकी जानकारी का अभाव और संचालन से जुड़ी अनेक चुनौतियां सामने थीं। लेकिन इन महिलाओं ने हार मानने के बजाय चुनौतियों को अवसर में बदलने का संकल्प लिया। उन्होंने बोटिंग संचालन, सुरक्षा प्रबंधन और पर्यटकों की सुविधाओं की जिम्मेदारी स्वयं संभाली और धीरे-धीरे अपने प्रयासों को सफलता में बदल दिया।आज पिलखा डैम आने वाले पर्यटक उत्साह के साथ बोटिंग का आनंद लेते हैं। इस पहल से समूह ने अब तक 74 हजार रुपये की आय अर्जित की है। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।समूह की सदस्य बताती हैं कि पहले उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे पर्यटन गतिविधियों का संचालन करेंगी और स्वयं रोजगार सृजित करेंगी। आज वे अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की यह सफलता दर्शाती है कि अवसर और विश्वास मिलने पर ग्रामीण महिलाएं किसी भी क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं। पिलखा डैम की लहरों पर चल रही यह नाव अब केवल पर्यटन का साधन नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता और आत्मनिर्भर भारत की सशक्त पहचान बन चुकी है।
- -अभियान के दौरान उपलब्ध कराई जाएंगी ऋण स्वीकृति, वितरण, यूपीआई पंजीयन, क्यू-आर कोड सुविधा और डिजिटल भुगतान सेवाएं-प्रधानमंत्री जनधन योजना, आयुष्मान भारत, सामाजिक सुरक्षा बीमा, श्रमिक पंजीयन जैसी योजनाओं से जोड़े जाएंगे योजना के लाभार्थी-डिजिटल सशक्तीकरण के साथ ही साइबर सुरक्षा और सुरक्षित डिजिटल भुगतान के बारे में किया जाएगा जागरूक-स्ट्रीट वेंडर्स को केवल ऋण ही नहीं, सुरक्षा और सम्मान से भरा जीवन भी मिले - श्री अरुण सावरायपुर ।मेहनतकश स्ट्रीट वेंडर्स के जीवन में बदलाव लाने भारत सरकार द्वारा शुरू की गई महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) योजना के छह साल पूरे होने के मौके पर नगरीय निकायों में 30 जून तक लोक कल्याण मेलों के आयोजन किए जाएंगे। साथ ही जिला मुख्यालय वाले सभी नगरीय निकायों में जिला स्तरीय स्वनिधि महोत्सवों का भी आयोजन किया जाएगा। इन दोनों आयोजनों के माध्यम से सड़क किनारे रोजी-रोटी कमाने वालों को अपने व्यवसाय को मजबूत करने सुगमता से ऋण उपलब्ध कराने के साथ ही उनके परिवारों को सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से जोड़ा जाएगा।राज्य शासन ने स्वनिधि महोत्सव और लोक कल्याण मेलों के आयोजन के लिए सभी नगरीय निकायों को परिपत्र जारी कर विस्तृत दिशा-निर्देश दिए हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने मंत्रालय से जारी परिपत्र में नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को इस अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पथ विक्रेताओं (स्ट्रीट वेंडर्स), शहरी गरीबों एवं असंगठित श्रमिकों को वित्तीय समावेशन, डिजिटल सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा के लाभों से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव श्रीमती शंगीता आर. ने बताया कि प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में लोक कल्याण मेले लगाए जाएंगे, जबकि जिला मुख्यालयों में विशेष रूप से स्वनिधि महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों में बैंकों के प्रतिनिधि छोटे व्यापारियों को ऋण स्वीकृति, वितरण, यूपीआई (UPI) पंजीयन, क्यू-आर (QR) कोड सुविधा और डिजिटल भुगतान संबंधी सेवाएं तत्काल उपलब्ध कराएंगे। स्वनिधि महोत्सव और लोक कल्याण मेला छोटे व्यापारियों को आर्थिक मजबूती के साथ सामाजिक सम्मान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।छत्तीसगढ़ के शहरों में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जिनकी आजीविका फुटपाथ, ठेले और छोटी दुकानों पर निर्भर हैं। कोरोना काल के बाद आर्थिक संकट से जूझ रहे इन परिवारों के लिए पीएम स्वनिधि योजना संजीवनी साबित हुई है। अब सरकार इस अभियान के माध्यम से उन लाभार्थियों तक भी पहुंचना चाहती है जो अब तक इस योजना से नहीं जुड़ पाए हैं।उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि योजना का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचे। इसी उद्देश्य से बैंकों को लंबित ऋण प्रकरणों का त्वरित निराकरण करने और फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया के माध्यम से नए आवेदनों पर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जब एक रेहड़ी लगाने वाले व्यक्ति को समय पर पूंजी मिलती है, तो केवल उसका व्यवसाय ही नहीं बढ़ता, बल्कि उसके बच्चों की पढ़ाई, परिवार की सुरक्षा और जीवन की उम्मीद भी मजबूत होती है।इस विशेष अभियान में डिजिटल सशक्तीकरण पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। पेटीएम, फोनपे, भीम और भारतपे जैसी डिजिटल पेमेंट एजेंसियों के प्रतिनिधि मेले में मौजूद रहेंगे। व्यापारियों के यूपीआई और क्यू-आर कोड ऑन-बोर्डिंग का कार्य मौके पर ही किया जाएगा। साथ ही साइबर सुरक्षा और सुरक्षित डिजिटल भुगतान को लेकर जागरूकता सत्र भी आयोजित होंगे, ताकि छोटे कारोबारी डिजिटल लेन-देन को बिना डर और आत्मविश्वास के साथ अपना सकें।अभियान के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यापारियों को मेले में सम्मानित किया जाएगा। विशेष रूप से महिला स्ट्रीट वेंडर्स और दिव्यांग व्यापारियों को मंच पर सम्मान देकर उनकी मेहनत और संघर्ष को पहचान दी जाएगी। इतना ही नहीं, उनके बच्चों की शिक्षा, खेल और कला के क्षेत्र की उपलब्धियों को भी सम्मानित किया जाएगा।अभियान के दौरान पात्र हितग्राहियों को प्रधानमंत्री जनधन योजना, आयुष्मान भारत, सामाजिक सुरक्षा बीमा और श्रमिक पंजीयन जैसी योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सुगमता से ऋण उपलब्ध कराने के साथ ही सुरक्षा और सम्मान से भरा जीवन उपलब्ध कराना भी इन आयोजनों का मकसद है।माहव्यापी स्वनिधि महोत्सवों और लोक कल्याण मेलों का आयोजन केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि उन मेहनतकश लोगों के सपनों को नई उड़ान देने की पहल है, जो हर दिन संघर्ष करते हैं, लेकिन हार नहीं मानते। यह अभियान हजारों परिवारों के जीवन में बदलाव की नई रोशनी लेकर आएगा।नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा इस माह आयोजित स्वनिधि महोत्सव और लोक कल्याण मेला रेहड़ी-पटरी व्यावसायियों को आर्थिक सहायता, डिजिटल सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ेगा। मेले में ऋण वितरण, यूपीआई-क्यूआर सुविधा, जनधन, आयुष्मान और बीमा योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। सरकार छोटे व्यापारियों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन देने के लिए प्रतिबद्ध है। हर पात्र हितग्राही तक योजना का लाभ पहुंचाया जाएगा। प्रदेश का हर मेहनतकश नागरिक आत्मनिर्भर बने, यही सरकार की प्राथमिकता है। - श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री
- -मुख्यधारा में लौटे 113 युवाओं के जीवन में आया नया सवेरा, 5G कनेक्टिविटी और खेलों से संवर रहा भविष्यरायपुर / नक्सलवाद के दंश को पीछे छोड़ छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला अब बदलाव की एक नई और बेहद खूबसूरत इबारत लिख रहा है। जिला प्रशासन द्वारा संचालित जिला पुनर्वास केंद्र में रह रहे 113 आत्मसमर्पित युवाओं (42 महिलाएं और 71 पुरुष) के जीवन में वास्तव में नया सवेरा आ चुका है। कभी जंगलों में भटकने और हाथों में घातक हथियार थामने वाले ये युवा अब न सिर्फ समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं, बल्कि पुनर्वास केंद्र के परिसर में पहली बार इनके द्वारा लगाए गए भारत माता की जय के नारे सुकमा के बदलते और सुरक्षित होते भविष्य की गवाही दे रहे हैं। पुनर्वास केंद्र में इन युवाओं की दिनचर्या अब पूरी तरह अनुशासित, सुरक्षित और रचनात्मक हो चुकी है। सुबह उठकर बागवानी (गार्डनिंग) और साफ-सफाई करने के बाद सभी युवा मिल-जुलकर नाश्ता और भोजन तैयार करते हैं। प्रशासन ने इनके बौद्धिक विकास के लिए दो विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की है, जो इन्हें प्रतिदिन सुबह-शाम अक्षर ज्ञान, बुनियादी गणित और अंग्रेजी सिखाते हैं। समाज का वैध और सम्मानित हिस्सा बनाने के लिए प्रशासन कलेक्ट्रेट के सिंगल विंडो रूम के माध्यम से इन सभी के आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, श्रम कार्ड और वोटर आईडी जैसे महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेज प्राथमिकता से बनाया जा रहा है। इसके साथ ही इन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण (स्किल ट्रेनिंग) भी दी जा रही है। प्रशासन की इस मानवीय पहल का सबसे खूबसूरत रंग खेल और मनोरंजन के मैदान में देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा के अनुरूप, जब इन पूर्व नक्सलियों से उनके मनोरंजन और खेल की पसंद पूछी गई, तो सबसे ज्यादा रुझान वॉलीबॉल के प्रति दिखा। इसके बाद प्रशासन ने केंद्र में खेल प्रतियोगिता की शुरुआत की, जिसमें युवक-युवतियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कभी अत्याधुनिक हथियार संभालने वाले इन हाथों में जब वॉलीबॉल आई, तो मैदान पर उनकी खेल प्रतिभा और किक देखकर हर कोई हैरान रह गया। ओयाम जोगा, वेको हुंगा और सोड़ी सोमड़ी जैसे युवा अब खेल के मैदान में अपना जौहर दिखाकर बेहद खुश और उत्साहित हैं।दिनभर की रचनात्मक गतिविधियों और खेल के बाद शाम को सभी युवा संगीत कक्ष में सुर-ताल मिलाते हैं, जिससे उनका भरपूर मनोरंजन होता है। वर्तमान डिजिटल युग के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए जिला प्रशासन ने इन युवाओं को 5G स्मार्टफोन भी उपलब्ध कराए हैं। इस आधुनिक तकनीक के जरिए देश-दुनिया की खबरों से कटे रहने वाले ये युवा अब समकालीन समाज और नई जानकारियों से सीधे जुड़ पा रहे हैं।सुकमा जिला पुनर्वास केंद्र का यह मानवीय और विकासात्मक मॉडल साबित करता है कि यदि सही दिशा, उचित संसाधन और संवेदनशीलता मिले, तो मुख्यधारा से भटके हुए युवाओं को भी परिष्कृत कर देश की प्रगति का मजबूत स्तंभ बनाया जा सकता है।
- -कलेक्टर रोज कर रहे समीक्षा, 114 सहकारी समितियों सहित निजी दुकानों से हो रहा खाद का उठावरायपुर / खरीफ सीजन 2026 के मद्देनजर बिलासपुर जिले में किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। कलेक्टर संजय अग्रवाल द्वारा प्रतिदिन खाद-बीज की उपलब्धता, भंडारण एवं वितरण की समीक्षा की जा रही है। जिले की 114 सहकारी समितियों तथा निजी उर्वरक विक्रेताओं के माध्यम से किसानों को खाद उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में वर्तमान में खाद का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है और मांग के अनुरूप निरंतर वितरण किया जा रहा है।उप संचालक कृषि से प्राप्त जानकारी के अनुसार खरीफ 2026 के लिए जिले को 68,950 टन रासायनिक उर्वरकों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इसके विरुद्ध अब तक 46,780 टन से अधिक उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का लगभग 60.28 प्रतिशत है। वहीं किसानों को अब तक 19,912 टन से अधिक उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है।जिले में वर्तमान में कुल 41,560 टन उर्वरक का भंडार उपलब्ध है। इनमें यूरिया 22,996 टन, डीएपी 5,621 टन, एनपीके 6,808 टन, एसएसपी 4,981 टन तथा एमओपी 1,155 टन शामिल है। कृषि विभाग द्वारा लगातार उर्वरक कंपनियों से अतिरिक्त रैक प्राप्त कर भंडारण बढ़ाया जा रहा है ताकि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।कृषि विभाग के अधिकारियों को समितियों एवं निजी विक्रेताओं के यहां नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी एवं अनियमित वितरण पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। कलेक्टर श्री अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराया जाए तथा मांग और आपूर्ति की दैनिक मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे अधिकृत सहकारी समितियों एवं लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही उर्वरक खरीदें तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की जानकारी तत्काल कृषि विभाग को दें। जिले में खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता होने से खरीफ सीजन की तैयारियां सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं।
- -करूहानार के चुन्नूलाल साहू को बीज, खाद एवं कृषि कार्यों में मिल रही मददरायपुर // प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मंशानुरूप किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना मुंगेली जिले के किसानों के लिए सहारा बन रही है। जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से हजारों किसान लाभान्वित हो रहे हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। योजना के माध्यम से मिलने वाली आर्थिक सहायता किसानों को खेती-किसानी में बड़ी राहत प्रदान कर रही है। लोरमी विकासखंड के ग्राम करूहानार निवासी किसान चुन्नूलाल साहू ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की सराहना करते हुए कहा कि योजना के तहत प्रतिवर्ष मिलने वाली 06 हजार रुपये की सहायता राशि खेती-किसानी के कार्यों में काफी उपयोगी साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि इस राशि से बीज, खाद एवं कृषि कार्यों में जरूरी खर्च आसानी से पूरे हो जाते हैं, जिससे आर्थिक बोझ कम हुआ है।किसान श्री साहू ने बताया कि उन्हें अब तक योजना की 22 किश्तों का लाभ प्राप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किसानों के हित में चलाई जा रही यह योजना किसानों के लिए संबल बन गई है। समय पर मिलने वाली राशि से खेती की तैयारी में सुविधा होती है और कृषि कार्यों में आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की किसान हितैषी योजनाओं से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
- गौरेला पेंड्रा मरवाही। सुशासन तिहार के दौरान आयोजित हो रहे शिविरों के माध्यम से आम नागरिकों को त्वरित और सहज प्रशासनिक सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला। पेंड्रा स्थित असेम्बली हॉल में आयोजित सुशासन तिहार शिविर में मात्र 20 दिन के नवजात शिशु रुद्र कुमार गुप्ता को निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र एवं अस्थायी जाति प्रमाण पत्र जारी किए गए। रुद्र कुमार गुप्ता के पिता आश्रित कुमार गुप्ता ने अपने नवजात पुत्र के आवश्यक दस्तावेज बनवाने के लिए शिविर में आवेदन किया था। राजस्व विभाग ने संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय देते हुए सभी आवश्यक प्रक्रियाएं शीघ्र पूरी कर प्रमाण पत्र उपलब्ध कराए। इन दस्तावेजों को नवजात के माता-पिता को सौंपा गया। इन प्रमाण पत्रों के प्राप्त होने से भविष्य में रुद्र कुमार गुप्ता को विभिन्न शासकीय योजनाओं, छात्रवृत्तियों तथा अन्य आवश्यक सेवाओं का लाभ प्राप्त करने में सुविधा होगी। परिवार को अब अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ी और उन्हें एक ही स्थान पर सभी आवश्यक सेवाएं मिल गईं।रुद्र कुमार गुप्ता के माता-पिता ने राजस्व विभाग और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सुशासन तिहार के कारण उन्हें समय पर महत्वपूर्ण दस्तावेज प्राप्त हुए, जिससे उनकी चिंताएं दूर हो गईं। यह सफलता की कहानी दर्शाती है कि सुशासन तिहार केवल योजनाओं का प्रचार-प्रसार नहीं, बल्कि आम नागरिकों तक शासन की सेवाओं को सरल, सुलभ और प्रभावी ढंग से पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रहा है। राजस्व विभाग की इस विशेष पहल ने नवजात शिशु के परिवार को समय पर राहत और सुविधा प्रदान कर सुशासन की भावना को सार्थक किया है।
- -रायगढ़ के सेठ किरोड़ीमल गौशाला पहुंचे वित्त मंत्री, कहा-गौवंश की सुरक्षा हमारी सांस्कृतिक व सामाजिक जिम्मेदारीरायपुर / जन्मदिवस के विशेष अवसर पर छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने रायगढ़ स्थित ऐतिहासिक सेठ किरोड़ीमल गौशाला पहुंचकर गौ-माता की सेवा की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने गौशाला परिसर का भ्रमण कर वहां संचालित विभिन्न गतिविधियों का बारीकी से अवलोकन किया और गौ-संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों की भूरि-भूरि सराहना की। वित्त मंत्री श्री चौधरी ने उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए कहा कि गौ-माता की सेवा भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का अमूल्य प्रतीक है। अपने जन्मदिवस के अवसर पर गौ-माता की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त होना मेरे लिए अत्यंत सुखद, संतोषजनक और प्रेरणादायी अनुभव है। उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा कि गौ-संरक्षण और संवर्धन के लिए इस गौशाला द्वारा किया जा रहा कार्य पूरे समाज के लिए अनुकरणीय है। गौवंश की सुरक्षा और उनकी उचित देखभाल करना हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ हमारी सामाजिक जिम्मेदारी का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।श्री चौधरी ने निस्वार्थ भाव से जुटे गौशाला के संचालकों और सेवाभावी कार्यकर्ताओं की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इन कार्यकर्ताओं के समर्पण, कड़ी मेहनत और अटूट प्रयासों के कारण ही क्षेत्र में गौ-संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय और सकारात्मक कार्य हो रहे हैं। कार्यक्रम के समापन पर वित्त मंत्री ने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और कल्याण की कामना करते हुए सभी के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। इस गरिमामय अवसर पर गौशाला प्रबंधन समिति के सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
- -सरकारी, NGO और निजी संस्थानों की साझेदारी से 91% लक्ष्य हासिल, 15 जिले बने कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्रीरायपुर । छत्तीसगढ़ में आंखों की रोशनी बचाने और मोतियाबिंद से दृष्टिहिनता मुक्त समाज की दिशा में स्वास्थ्य विभाग की पहल लगातार प्रभावी साबित हो रही है। राष्ट्रीय दृष्टिहीनता एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य ने वर्ष 2025-26 में निर्धारित लक्ष्य की तुलना में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए 1 लाख 63 हजार 641 से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन पूरे किए गए हैं। यह कुल निर्धारित लक्ष्य का लगभग 91 प्रतिशत है, जिसने प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण और सुलभ नेत्र चिकित्सा सेवाओं की मजबूत तस्वीर प्रस्तुत की है।स्वास्थ्य विभाग द्वारा Vision 20-20 की अवधारणा के अनुरूप शासकीय संस्थानों, गैर-शासकीय संगठनों (NGO) और निजी अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है। इसका परिणाम यह है कि दूरस्थ क्षेत्रों तक भी नेत्र उपचार सेवाएं पहुँच रही हैं और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। शासन द्वारा अनुबंधित संस्थाओं को नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित किए जाने से सेवाओं की निरंतरता और प्रभावशीलता भी बनी हुई है। राज्य में कुल उपलब्धि में शासकीय एवं NGO अस्पतालों की भागीदारी 51 प्रतिशत रही, जबकि निजी क्षेत्र ने 49 प्रतिशत योगदान देकर इस स्वास्थ्य अभियान को गति दी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह साझेदारी मॉडल न केवल उपचार की पहुँच बढ़ा रहा है, बल्कि समयबद्ध और व्यवस्थित नेत्र चिकित्सा प्रबंधन का भी उदाहरण बन रहा है।कोविड काल में नेत्र ऑपरेशन प्रभावित होने के कारण मोतियाबिंद के लंबित मामलों में वृद्धि हुई थी, लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग ने विशेष अभियान चलाकर स्थिति को तेजी से सुधारा है। भारत सरकार की राष्ट्रीय नेत्र ज्योति योजना के तहत घर-घर सर्वे कर चिन्हित मरीजों का उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे जिलों को कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री स्टेटस (CBBFS) दिलाने की दिशा में ठोस प्रगति हो रही है। प्रदेश के 15 जिले अब तक यह स्टेटस प्राप्त कर चुके हैं, जबकि अन्य जिलों में भी अभियान तेज गति से जारी है। रायपुर स्थित माना का 150 बिस्तरीय नेत्र चिकित्सालय राज्य स्तरीय रेफरल सेंटर के रूप में कार्य करते हुए दूर-दराज के मरीजों को विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध करा रहा है। वहीं, बड़े शहरों में स्थित NGO बेस अस्पतालों के माध्यम से विभिन्न जिलों के मरीजों का प्रोटोकॉल आधारित सुरक्षित ऑपरेशन सुनिश्चित किया जा रहा है। समय पर जांच, पहचान और निःशुल्क उपचार की यह व्यवस्था हजारों लोगों के जीवन में नई रोशनी लेकर आई है और छत्तीसगढ़ को नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक मजबूत मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है।
- रायपुर /वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी अपने जन्मदिवस के अवसर पर रायगढ़ के महापल्ली में आयोजित रामचरितमानस सुंदरकांड पाठ में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि जन्मदिवस के इस विशेष अवसर पर प्रभु श्रीराम एवं संकटमोचन हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने प्रदेश के विकास, जनकल्याण और सभी नागरिकों के सुखमय जीवन की प्रार्थना की।श्री चौधरी ने जन्मदिवस पर उन्हें शुभकामनाएं देने वाले सभी नागरिकों, समर्थकों, शुभचिंतकों एवं क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप सभी का स्नेह, प्रेम और आशीर्वाद उन्हें जनसेवा के लिए निरंतर प्रेरित करता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
- -प्रगतिशील किसान शंकर लाल गुप्ता बने रोल मॉडल, कम लागत में बेहतर उत्पादन का दिया संदेशअम्बिकापुर। जिले में कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग से सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। खेती की लागत कम करने, मिट्टी के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने तथा उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से किसान अब वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपना रहे हैं। इसी क्रम में अंबिकापुर के देवीगंज रोड निवासी एवं ग्राम बरकेला के प्रगतिशील किसान श्री शंकर लाल गुप्ता ने पिछले वर्ष अपने कृषि रकबे में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का सफल प्रयोग कर क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।श्री गुप्ता ने बताया कि वे वर्षों से पारंपरिक दानेदार यूरिया एवं डीएपी का उपयोग करते रहे हैं, लेकिन पिछले वर्ष कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर उन्होंने नैनो उर्वरकों का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग से धान की फसल अधिक स्वस्थ, हरी-भरी तथा सुदृढ़ दिखाई दे रही है। फसल की वृद्धि बेहतर होने के साथ-साथ उत्पादन में भी सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है।उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से परिवहन एवं भंडारण संबंधी समस्याओं में कमी आई है। पहले 65 एकड़ क्षेत्र के लिए बड़ी मात्रा में खाद की बोरियों को ट्रैक्टरों से लाना पड़ता था, जिससे परिवहन, मजदूरी एवं भंडारण पर अतिरिक्त खर्च होता था। इसके विपरीत नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी की छोटी बोतलें आसानी से खेत तक पहुंचाई जा सकती हैं, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बचत होती है।श्री गुप्ता के अनुसार नैनो उर्वरकों के उपयोग से खेती की लागत में भी कमी आई है। पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी किफायती हैं, जिसके कारण उर्वरक पर होने वाला खर्च कम हुआ है तथा प्रति एकड़ शुद्ध लाभ बढ़ने की संभावना बढ़ी हुई है।उन्होंने बताया कि पारंपरिक उर्वरकों का एक बड़ा हिस्सा बहाव अथवा अन्य कारणों से नष्ट हो जाता है, जबकि नैनो उर्वरकों का फसलों पर सीधे छिड़काव किया जाता है। इससे पौधों की पत्तियां पोषक तत्वों को शीघ्र अवशोषित कर लेती हैं और उर्वरक का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होता है। परिणामस्वरूप फसल को सीधे लाभ मिलता है तथा पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता बढ़ती है।नैनो उर्वरकों के सकारात्मक परिणामों से उत्साहित श्री शंकर लाल गुप्ता ने क्षेत्र के किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का उपयोग न केवल किफायती है, बल्कि इसके परिवहन, भंडारण एवं उपयोग में भी सुविधा है। इससे खेती की लागत कम होती है और बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिलती है।नैनो उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता एवं पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। यह तकनीक उर्वरकों के अधिक दक्ष उपयोग को सुनिश्चित करती है तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में सहायक है। श्री शंकर लाल गुप्ता के सफल अनुभवों को अन्य किसानों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि जिले के अधिक से अधिक किसान आधुनिक एवं स्मार्ट कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।














.jpg)












