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- बालोद/संयुक्त जिला कार्यालय में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में आज उस समय मानवीय संवेदना और सुशासन की सुखद तस्वीर देखने को मिली, जब कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने जिले के तीन दिव्यांगजनों को मौके पर ही ट्राईसिकल प्रदान कर उनकी राह आसान कर दी। शासन की इस त्वरित सहायता से लाभान्वितों के चेहरे खिल उठे और उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा ’धन्यवाद विष्णु भैया’। जनदर्शन में पहुंचे दिव्यांगजनों की स्थिति का परीक्षण कर उनकी दिव्यांगता के प्रतिशत के आधार पर आज डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के ग्राम मनकी सा की सुश्री टुमेश्वरी और ग्राम कोबा की शशिकला को 80 प्रतिशत दिव्यांगता होने पर पर आधुनिक बैटरी चालित ट्राईसिकल प्रदान की गई। इसी प्रकार 50 प्रतिशत दिव्यांगता होने पर बालोद विकासखण्ड के ग्राम तमोरा के श्री राजेश कुमार को सामान्य ट्राईसिकल प्रदान किया गया।डौंडीलोहारा विकासखंड के ग्राम पंचायत मनकी सा निवासी टुमेश्वरी ने बताया कि दिव्यांगता के चलते उन्हें कहीं भी आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। वे अपने पिता या भाई पर निर्भर रहती थीं, जिससे उनका परिवार का समय भी काफी प्रभावित होता था। उसने बताया कि वह स्व-सहायता समूह से जुड़कर काम कर रही हैं। बैटरी चलित ट्राईसिकल मिलने से अब वे बैंक आने-जाने और समूह के कार्यों को बिना किसी सहारे के खुद संभाल सकेंगी। उन्होंने अपनी राह आसान होने पर खुशी जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें धन्यवाद विष्णु भैया कहा है।ग्राम कोबा निवासी दिव्यांग शशिकला गांव में ही किराने की एक छोटी दुकान चलाती हैं। दुकान जाने-आने और सामग्री खरीदने के लिए दूसरे गांव जाने में उन्हें बेहद कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। शशिकला ने बताया कि बैटरी चालित ट्राईसिकल मिलने से अब उनका व्यवसाय और दैनिक जीवन दोनों सुगम हो जाएंगे। उन्होंने प्रशासन की त्वरित संवेदनशीलता की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा - धन्यवाद विष्णु भैया। शशिकला ने कहा कि इतने कम समय में मिली इस मदद से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। जनदर्शन में मिली इस सहायता ने न केवल इन दिव्यांगजनों के सफर की बाधाओं को दूर किया है, बल्कि उन्हें समाज में स्वावलंबन और गरिमा के साथ आगे बढ़ने का एक नया हौसला भी दिया है।
- आवेदकों के मांगों एवं समस्याओं के निराकरण हेतु त्वरित कार्रवाई करने के दिए निर्देशबालोद/संयुक्त जिला कार्यालय सभाकक्ष में आयोजित कलेक्टर जनदर्शन कार्यक्रम में जिले के विभिन्न स्थानों से अपने मांगों एवं समस्याओं के निराकरण हेतु पहुँचे आम नागरिकों के लिए राहत भरा साबित हुआ। इस दौरान कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने जिले के विभिन्न स्थानों से पहुँचे लोगों से मधुर एवं आत्मीय बातचीत कर उनकी मांगों एवं समस्याओं की जानकारी ली। इस अवसर पर उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों को तलब कर आवेदकों के मांगों एवं समस्याओं के निराकरण हेतु त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। जनदर्शन में आज डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के ग्राम संबलपुर के लक्ष्मी बाई ने आर्थिक सहायता राशि दिलाने, गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम साजा के सरपंच ने ग्राम पंचायत भवन निर्माण, सीसी सड़क निर्माण एवं नाली निर्माण करने हेतु आवेदन प्रस्तुत किए। इसी तरह ग्राम चिटौद के सरपंच ने उचित मूल्य की दुकान खोलने, ग्राम सरेखा के ग्रामीणों ने अतिक्रमण हटाने, ग्राम किल्लेकोड़ा के ग्रामीणों ने नवीन शाला भवन बनाने एवं ग्राम झलमला के के श्री हीरासिंह ने राजस्व अभिलेख दुरूस्त करने हेतु आवेदन प्रस्तुत किए।जनदर्शन में आज जिले के विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या मंे लोग कलेक्टर से मुलाकात करने पहुँचे थे। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने जनदर्शन में पहुँचे लोगों से बारी-बारी से मुलाकात कर पूरी आत्मीयता से उनके मांगों एवं समस्याओं को सुना। श्रीमती मिश्रा ने मौके पर उपस्थित अधिकारियों से जनदर्शन में पहुँचे लोगों के मांगों एवं समस्याओं के समुचित निराकरण हेतु त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
- समय-सीमा की बैठक में अधिकारियों को दिए निर्देशबालोद/ कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने जिले के सभी अधिकारियों को सीएम हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से प्राप्त अपने-अपने विभागों से संबंधित आवेदनों का विशेष प्राथमिकता के साथ निर्धारित समयावधि में निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा आज संयुक्त जिला कार्यालय सभाकक्ष में आयोजित साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक को संबोधित कर रही थीं। बैठक में उन्होंने सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से विभागवार प्राप्त आवेदनों और उनके निराकरण के लिए की जा रही कार्रवाई की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आवेदनों के निराकरण के पश्चात संबंधित आवेदकों से दूरभाष पर संपर्क कर संतुष्टि का फीडबैक अवश्य लिया जाए। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर श्री चंद्रकांत कौशिक, श्री अजय किशोर लकरा एवं श्री नूतन कंवर सहित विभिन्न राजस्व अनुविभागीय अधिकारी और अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।बैठक में कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन 1076 छत्तीसगढ़ शासन की एक अत्यंत महत्वपूर्ण नागरिक-केंद्रित शिकायत निवारण प्रणाली है, जो नागरिकों को सरल और पारदर्शी तरीके से अपनी शिकायतें दर्ज कराने और उनका समयबद्ध समाधान प्राप्त करने का अवसर देती है। उन्होंने सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि एल-1 स्तर पर ही प्राप्त शिकायतों का संतुष्टिपूर्ण निराकरण करते हुए उचित फीडबैक दर्ज किया जाए। बैठक में श्रीमती मिश्रा ने शासन के निर्देशानुसार राजस्व विभाग के सभी अधिकारी-कर्मचारियों का आई-गोट कर्मयोगी पोर्टल में प्रत्येक माह प्रशिक्षण के कार्य की समीक्षा की। उन्होंने सभी अधिकारियों को शासन के निर्देशानुसार स्वयं तथा अपने अधीनस्थ सभी अधिकारी-कर्मचारियों का प्रतिमाह न्यूनतम 01 घण्टे आई-गोट कर्मयोगी प्रशिक्षण सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। इसके अलावा श्रीमती मिश्रा ने अधिकारियों को युवा आयोग के वेबपोर्टल में ’युवा उड़ान 2026’ में शामिल होने के लिए स्कूल एवं कालेज के छात्र-छात्राओं को अधिक से अधिक पंजीयन कराने के निर्देश दिए।
- *सभी जेडएचओ फुंडहर जाकर निरीक्षण करें और गोवंश को सुरक्षित रखने के लिए यथासंभव प्रयास करें.**गोवंश हमारी आस्था भी और ज़िम्मेदारी भी.शासन प्रशासन के साथ मिलकर गोवंश के लिए यथाशीघ्र व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे.*रायपुर- नगर पालिक निगम रायपुर के गोठानों में गौवंश की व्यवस्थाओं एवं रखरखाव को लेकर महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने आज सभी जोनों के जोन हेल्थ ऑफिसरों (जेडएचओ ) एवं काउकैचर टीम के कर्मचारियों की बैठक लेकर विस्तृत समीक्षा की। बैठक में सड़क से पकड़े जाने वाले गौवंश, गोठानों की क्षमता, चारा-पानी, शेड, स्वास्थ्य व्यवस्था तथा पकड़े गए गौवंश की आगे की व्यवस्था की जानकारी ली गई।बैठक में यह जानकारी सामने आई कि नगर निगम के सभी गोठानों की क्षमता लगभग पूरी हो चुकी है और इसके कारण सड़क से पकड़े जाने वाले कुछ गौवंश को आउटर क्षेत्र में छोड़े जाने की जानकारी दी गई। इस पर महापौर ने स्पष्ट कहा कि गोठानों की क्षमता पूरी होना गौवंश को असुरक्षित खुले स्थान पर छोड़ने का कारण नहीं बन सकता। गौवंश को पकड़ने के बाद उसकी सुरक्षित व्यवस्था और उसे कहां रखा गया, इसकी पूरी जानकारी संबंधित अधिकारियों के पास होना आवश्यक है।महापौर ने निर्देश दिए कि किसी भी गोठान में निर्धारित क्षमता से अधिक गौवंश न रखा जाए। वहां उपलब्ध स्थान, चारा-पानी, शेड एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का आकलन करने के बाद ही गौवंश को रखने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि केवल गौवंश पकड़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी सुरक्षित देखभाल सुनिश्चित करना नगर निगम की जिम्मेदारी है।महापौर ने सभी जोन हेल्थ ऑफिसरों को निर्देशित किया कि आज ही सभी गोठानों एवं कांजी हाउस का मौके पर जाकर निरीक्षण करें। वहां मौजूद गौवंश की संख्या, क्षमता, स्वास्थ्य, चारा-पानी, शेड, साफ-सफाई एवं जल निकासी की स्थिति का जायजा लेकर तत्काल क्या बेहतर व्यवस्था की जा सकती है, इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।उन्होंने कहा कि अधिकारी केवल कागजी रिपोर्ट पर निर्भर न रहें, बल्कि स्वयं मौके पर जाकर गौवंश की वास्तविक स्थिति देखें और आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल सुनिश्चित करें।लगातार बारिश को देखते हुए महापौर ने फुंडर क्षेत्र में गौवंश को बारिश से बचाने के लिए तत्काल सुरक्षित एवं मजबूत तिरपाल/अस्थायी शेड की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। साथ ही कीचड़ एवं जलभराव की समस्या को देखते हुए आवश्यक सफाई और जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।महापौर ने कहा कि स्थायी शेड बनने में समय लग सकता है, लेकिन तब तक गौमाता को बारिश में खुले में नहीं रखा जा सकता। तत्काल ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे गौवंश को बारिश, पानी और कीचड़ से राहत मिल सके।यदि गोठानों की क्षमता पूरी हो चुकी है तो सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था तत्काल तैयार की जाए।बैठक में विभिन्न जोनों में काउकैचर व्यवस्था एवं टेंडर की स्थिति की भी जानकारी ली गई। महापौर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक जोन में गौवंश व्यवस्थापन से संबंधित व्यवस्था, उपलब्ध संसाधनों एवं लंबित प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी संबंधित अधिकारियों के पास होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि गौवंश जैसे संवेदनशील विषय में किसी भी स्तर पर लापरवाही, समन्वय की कमी अथवा गैर-जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की जाएगी।महापौर ने कहा कि मेरी प्राथमिकता किसी कर्मचारी अथवा एजेंसी को परेशान करना नहीं, बल्कि गौवंश को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना है। बारिश के इस दौर में गौवंश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। गोठानों में क्षमता से अधिक गौवंश न रखा जाए, उन्हें असुरक्षित खुले में न छोड़ा जाए तथा चारा, पानी, शेड, सफाई एवं स्वास्थ्य व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो।गोकुल नगर गोठान में प्रत्येक गौवंश के रखरखाव के लिए ₹23 तथा फुंडहर, अटारी एवं जरवई गोठानों में ₹27 प्रति गौवंश के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। वहीं काउकैचर टीमों द्वारा प्रतिदिन औसतन 4 से 5 गौवंश पकड़े जाने की जानकारी काउकैचर टीम के द्वारा दी गयी.यदि गौवंश को पकड़ने और उनके रखरखाव पर नगर निगम द्वारा राशि खर्च की जा रही है तो प्रत्येक गौवंश की सुरक्षित व्यवस्था और उसके गंतव्य की पूरी जानकारी अधिकारियों के पास होनी चाहिए।*काउकैचर टेंडर की जानकारी नहीं होने पर अधिकारियों पर जताई नाराजगी*बैठक के दौरान जानकारी सामने आई कि जोन-8 एवं जोन-10 में काउकैचर का टेंडर अब तक नहीं हुआ है। इस पर महापौर ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं संबंधित उपायुक्त के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि गौवंश पकड़ने जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में किस जोन में टेंडर हुआ है, कहां टीम कार्यरत है और कहां व्यवस्था लंबित है—इसकी पूरी जानकारी संबंधित अधिकारियों को होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में चल रही व्यवस्था की जानकारी होना आवश्यक है।
- रायपुर/ प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर रायपुर जिला कलेक्टर डॉ गौरव कुमार सिंह के मार्गदर्शन में रायपुर जिला प्रशासन, नगर पालिक निगम रायपुर, कला केंद्र रायपुर एवं स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित **“तिरंगा शक्ति फेस्ट 2026 – गुरु वंदन उत्सव”** के दूसरे दिन भी प्रतिभागियों एवं अभिभावकों का उत्साह देखने को मिला।शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित इस विशेष आयोजन के दूसरे दिन भी गायन एवं नृत्य विधाओं के लिए ऑडिशन आयोजित किए गए, जिसमें बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लिया।आयोजन समिति के अनुसार दो दिनों में अब तक **150 से अधिक प्रतिभागियों का पंजीयन** दर्ज किया जा चुका है। प्रतिभागियों ने देशभक्ति, भक्ति एवं बॉलीवुड थीम पर आधारित शानदार प्रस्तुतियां देकर अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास एवं रचनात्मकता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। मंच पर उभरती प्रतिभाओं की ऊर्जा और समर्पण ने पूरे आयोजन को उत्सवमय बना दिया।ऑडिशन के दौरान अभिभावकों एवं दर्शकों ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया, जिससे आयोजन स्थल पर लगातार सकारात्मक और प्रेरणादायक वातावरण बना रहा। प्रतिभागियों की प्रस्तुति शैली, अभिव्यक्ति, मंच संचालन क्षमता एवं कलात्मक कौशल ने निर्णायक मंडल को प्रभावित किया।कार्यक्रम में निर्णायक के रूप में **पद्मश्री भारती बंधु**, **राजू शर्मा**, **राहुल ठाकुर** एवं **संतोष चंद्राकर** ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निर्णायकों ने प्रतिभागियों का निष्पक्ष मूल्यांकन करते हुए उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन भी प्रदान किया।आयोजन समिति ने बताया कि ऑडिशन के माध्यम से चयनित प्रतिभागियों को आगामी **3 सितंबर 2026** को **शहीद स्मारक भवन, रायपुर** में आयोजित होने वाले भव्य **गुरु वंदन उत्सव ग्रैंड फिनाले** में प्रस्तुति देने का अवसर मिलेगा। यह कार्यक्रम **शाम 4:00 बजे से** प्रारंभ होगा, जिसमें चयनित प्रतिभागी अपनी सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि ग्रैंड फिनाले में प्रदेश की उत्कृष्ट प्रतिभाएं अपनी शानदार प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को और अधिक भव्य एवं यादगार बनाएंगी। साथ ही आयोजन समिति ने सभी प्रतिभागियों, अभिभावकों, शिक्षकों, निर्णायकों एवं दर्शकों का आभार व्यक्त करते हुए ग्रैंड फिनाले में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर प्रतिभाओं का उत्साहवर्धन करने की अपील की।
- *हाथ में पीपीओ लिए रिटायर्ड अधिकारियों-कर्मचारियों के चेहरे में दिखी मुस्कुराहट, दिया मुख्यमंत्री को धन्यवाद*रायपुर/ आप सभी सदैव स्वस्थ्य रहें, दीर्घायु हों, अपने जीवन के द्वितीय पाली का आनंद लें। आपने जीवन भर शासकीय सेवा करते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया है। इसके लिए आप सभी बधाई के पात्र हैं। कलेक्टर डॉ गौरव सिंह ने यह कहते हुए जिले के विभिन्न विभागों से 49 सेवानिवृत्त हुए अधिकारियों एवं कर्मचारियों का “प्रोजेक्ट वंदन” के तहत सम्मान किया। साथ ही अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अपने हाथों में पेंशन पेमेन्ट ऑर्डर (पीपीओ), जीपीओ सहित सभी सत्वों की राशि लेकर विदा हुए, उनके चेहरे में मुस्कुराहट थी और संतुष्टि का भाव भी था। वे सभी मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार प्रकट करते हुए कह रहे थे कि उन्हें बड़ी आसानी सेे बिना किसी दफ्तर के चक्कर काटे रिटायरमेंट के अंतिम दिन पेंशन का आर्डर हाथों में ही मिल गया और सभी सत्वों की राशि भी मिल गई। अब वे बड़े उत्साह के साथ जीवन का आनंद लेेंगे।कलेक्टर डॉ गौरव सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि प्रोजेक्ट वंदन के तहत जिला प्रशासन द्वारा रिटारमेंट होने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सभी सत्वों का निराकरण रिटायरमेंट के दिन ही किया जाता है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा “प्रोजेक्ट सेकेण्ड इनिंग” चल रहा है। इसके तहत रिटारमेंट होने वाले अधिकारी एवं कर्मचारी से आग्रह किया जाता हैै कि वे अपना कुछ समय स्कूलों में व्यतीत करें। इससे वे स्वस्थ्य रहेंगे और उनके अनुभव का लाभ बच्चों को भी मिलता है। कलेक्टर डॉ सिंह ने कहा कि वर्तमान में 29 सेवानिवृत्त अधिकारी एवं कर्मचारी शासकीय स्कूलों में निःशुल्क सेवाएं दे रहे हैं। यह सारे लोग समय पर स्कूलों में पहुंचते हैं और बच्चों को पूरी रूचि से पढ़ा रहे हैं।इस अवसर पर नगर निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा, जिला कोषालय अधिकारी श्री गजानंद पटेल एवं सीएमएचओ डॉ. मिथलेश चौधरी सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।
- *आयुक्त ने गोधामो में दाना, चारा, पानी की व्यवस्था, स्वच्छता, गौवंश की सुरक्षा, गौवंश की चिकित्सकीय जांच टीकाकरण की शासकीय पशु चिकित्सको के मार्गदर्शन में आवश्यक व्यवस्था देने के दिये निर्देश**आयुक्त ने गोधामो में सतत मॉनिटरिंग कर सुचारू व्यवस्था बनाये रखने के दिये निर्देश*रायपुर/रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त श्री संबित मिश्रा ने रायपुर नगर निगम क्षेत्र जोन 9 अंतर्गत फुण्डहर गोधाम और जोन 6 अंतर्गत गोकूलनगर गोधाम की व्यवस्थाओ का वहां पहुंचकर प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। आयुक्त ने रायपुर नगर निगम क्षेत्र में संचालित गोधामो की व्यवस्था सतत नियमित मॉनिटरिंग कर सुचारू बनाये रखने के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिये।आयुक्त ने गोधामो के निरीक्षण के दौरान मवेशियों के चारा, पानी, दाना आदि की सुचारू व्यवस्था करने गौवंश की सुरक्षा की दृष्टि से स्वच्छता, गौवंश एवं गौमाता की शासकीय पशु चिकित्सा विभाग के पशु चिकित्सको के मार्गदर्शन में समय समय पर टीकाकरण सहित चिकित्सकीय जांच की व्यवस्था एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं शासन के निर्देशानुसार सुनिश्चित करवाने के निर्देश संबंधित जोन अधिकारियों को दिये।आयुक्त श्री संबित मिश्रा द्वारा गौधामो के निरीक्षण के दौरान नगर निगम अपर आयुक्त श्री विनोद पाण्डेय, उपायुक्त श्री जसदेव सिंह बाबरा, जोन 6 जोन कमिश्नर श्री हितेन्द्र यादव, कार्यपालन अभियंता श्री शरद ध्रुव, श्री दिनेश सिन्हा सहित नगर निगम के अन्य संबंधित अधिकारी व कर्मचारीगण की उपस्थिति रही।
- *आयुक्त ने अधिकारियों को प्रोजेक्ट पुनर्जीवन के कार्य को शीघ्रता से पूर्ण करने के दिये निर्देश*रायपुर/प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर रायपुर जिला प्रशासन द्वारा रायपुर जिला कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह के मार्गदर्शन में संचालित प्रोजेक्ट पुनर्जीवन के अंतर्गत रायपुर नगर निगम क्षेत्र में पेडो के चारो ओर के कांक्रीट घेरे एवं ट्री गार्ड को हटाने का अभियान सभी 10 जोनो में नगर निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा के निर्देश पर निरंतर प्रगति पर है।आज रायपुर जिला कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह के निर्देश पर नगर निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा ने रायपुर नगर निगम क्षेत्र के जोन 1 अतर्गत बसंत विहार कालोनी गोगाँव जोन 4 अंतर्गत जीई रोड में गौरवपथ, जोन 8 क्षेत्र अंतर्गत एम्स हॉस्पिटल टाटीबंध के सामने, रायपुर जिला प्रशासन के अभिनव प्रोजेक्ट पुनर्जीवन अंतर्गत जोन के माध्यम से पेडो के चारो ओर के काँक्रीट घेरे एवं ट्री गार्ड को हटाने चलाये जा रहे अभियान का वहा पहुंचकर प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। आयुक्त ने जोन अधिकारियों को रायपुर जिला प्रशासन के प्रोजेक्ट पुनर्जीवन अंतर्गत पेड़ो के चारो ओर से कांक्रीट घेरे और ट्री गार्ड को हटाकर पेडो को समाज हित में पर्यावरण संरक्षण हेतु स्वतः विकसित होने पर्यावरण अनुकुल वातावरण प्रदान करने कार्य शीघ्रता से करके पूर्ण करवाने के निर्देश दिये है।आयुक्त श्री संबित मिश्रा द्वारा किये गये प्रत्यक्ष निरीक्षण के दौरान नगर निगम अपर आयुक्त श्री विनोद पाण्डेय, संबंधित जोन कमिश्नर श्री अंशुल शर्मा सीनियर, डॉ दिव्या चंद्रवंशी, श्रीमती राजेश्वरी पटेल, उपायुक्त उद्यान श्रीमती जागृत्ति साहू एवं सीएसईबी एवं वन विभाग के संबंधित क्षेत्र अधिकारीगण की उपस्थिति रही।
- 2861 ट्री गार्ड एवं लगभग 1400 स्थानों पर कांक्रीट के घेरों पेवर को हटाने का कार्य करवाया गया-इससे इन सभी पौधों को स्वतः विकसित होने पर्यावरण हितैषी वातावरण सहजता से प्राप्त हुआ*रायपुर/ प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर रायपुर जिला प्रशासन के जनप्रिय पर्यावरण हितकारी प्रोजेक्ट पुनर्जीवन की अभिनव योजना के अंतर्गत महाभियान अंतर्गत रायपुर जिला कलेक्टर डॉ गौरव कुमार सिह के मार्गनिर्देशन में पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका द्वारा पर्यावरण संरक्षण कार्य को लेकर व्यक्त की गई गहन चिंता के तत्काल पश्चात से रायपुर जिला क्षेत्र अतर्गत रायपुर नगर पालिक निगम क्षेत्र में आयुक्त श्री संबित मिश्रा के मार्गनिर्देशन में सभी 10 जोन कमिश्नरों द्वारा सतत मॉनिटरिंग कर प्रतिदिन नियमित अपने अपने जोन क्षेत्र के सभी वार्डो में ऐसे सभी पौधों को चिन्हित करने का कार्य किया गया, जो पूर्व में चारों ओर से ट्री गार्ड एवं कांक्रीट के घेरों पेवर में घिरे हुए होने के कारण प्राकृतिक रूप से विकसित नहीं हो पा रहे थे।ऐसे समस्त पौधों को चिन्हित करके प्राकृतिक रूप से स्वतः विकसित होने एवं स्वयं मिट्टी, पानी प्राप्त करने पर्यावरण हितैषी वातावरण देने इन सभी पौधों को चारों ओर से घेरकर लगाये गये ट्री गार्ड और कांक्रीट के घेरों पेवर को हटाने का कार्य रायपुर नगर पालिक निगम क्षेत्र के अंतर्गत सभी 10 जोनों में तेज गति से निरन्तर समाजहित में पर्यावरण सुरक्षा की दृष्टि से करवाया गया।विभिन्न जोनों के भिन्न क्षेत्रों के स्थानों में इन सभी चिन्हित पौधों को समाज हित में पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से चारों ओर कॉक्रीट के घेरे पेवर लगाकर लगाए गए अब तक लगभग 2861 ट्री गार्ड और लगभग 1400 कांकीट के घेरों पेवर को समस्त जोन कमिश्नरों द्वारा वहां पहुंचकर हटवाये जाने का कार्य तेजी के साथ करवाया है और यह महाभियान रायपुर नगर निगम क्षेत्र में निरन्तर प्रगति पर है एवं सभी जोन कमिश्नरों की सतत निगरानी में सभी 10 जोन क्षेत्रों में ऐसे सभी पौधों को स्वतः विकसित होने पानी प्राप्त कर सकने आवश्यक पर्यावरण हितैषी वातावरण कायम करने का कार्य प्राथमिकता के साथ किया गया है। इसके साथ ही रायपुर जिला प्रशासन के प्रोजेक्ट पुनर्जीवन महाभियान अंतर्गत विभिन्न शासकीय विभागो सीएसपीडीसीएल, डब्ल्यूआरडी, पीएचई, केडा, आरईएस आदि की टीम द्वारा रायपुर जिला क्षेत्र अंतर्गत आज 31 अगस्त 2026 को 70 विभिन्न स्थानो से पेडो के चारो ओर से ट्री गार्ड एवं 147 विभिन्न स्थानो से पेडो के चारो ओर कांकीट के घेरे एवं पेवर हटाकर पेडो को पर्यावरण अनुकुल वातावरण देने स्वतः विकसित होने वातावरण देने की कार्रवाई रायपुर जिला कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह के निर्देश पर की गई अभियान निरंतर प्रगति पर है। वहीं नंगर निगम रायपुर द्वारा आज 31 अगस्त को प्रोजेक्ट पुनर्जीवन महाभियान अंतर्गत 194 स्थानो से ट्री गार्ड एवं 331 स्थानो से कांकीट घेरे एवं पेवर पेडो के चारो ओर से हटाने की कार्रवाई की गई।रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त श्री संबित मिश्रा ने उक्त कार्य को पहली प्राथमिकता में रखकर करवाने सभी जोन कमिश्नरो समाजहित में पर्यावरण संरक्षण कार्य हेतु स्पष्ट निर्देशित किया।रायपुर जिला कलेक्टर डॉ गौरव कुमार सिंह ने राजधानी रायपुर शहर क्षेत्र के समस्त रहवासी नागरिको से रायपुर जिला प्रशासन की ओर से विनम्र अपील की कि वे ऐसे सभी पौधों को आवश्यक पानी खाद आदि देकर विकसित करने में सहभागी बनकर अपनी सक्रिय सहभागिता को दर्ज करवाने का कष्ट करें। ऐसा करने वाले सभी पर्यावरण प्रेमी नगरवासियों को पर्यावरण मित्र के रूप में रायपुर जिला प्रशासन के तत्त्ववधान में पर्यावरण हितैषी प्रोजेक्ट पुनर्जीवन योजना के अंतर्गत समाज में उनके द्वारा पर्यावरण हितकारी योगदान देने हेतु सम्मानित किया जायेगा।'रायपुर नगर पालिक निगम के सभी 10 जोनों के 10 जोन कमिश्नरों द्वारा करवाये जा रहे उक्त पर्यावरण हितैषी कार्यों की रायपुर नगर पालिक निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा द्वारा प्रतिदिन स्वतः नियमित मॉनिटरिंग और कार्य की प्रगति की सतत निरंतर समीक्षा रायपुर जिला कलेक्टर डॉ गौरव कुमार सिंह के निर्देश पर की जा रही है।
- *सभी जोन स्वास्थ्य अधिकारियों ने फुण्डहर गोधाम में गौमाता और गौवंश की लगभग 200 किलो गुड खिलाकर सेवा की, जोन 9 द्वारा बारिश मे गोधाम भूमि समतल बनाने जेसीबी से समतलीकरण कार्य प्रगति पर*रायपुर/रायपुर नगर पालिक निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे के निर्देश पर नगर निगम रायपुर के सभी 10 जोनो के जोन स्वास्थ्य अधिकारियों ने नगर निगम जोन 9 अंतर्गत फुण्डहर गौधाम पहुंचकर वहा की प्रशासनिक व्यवस्था का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। सभी जोन स्वास्थ्य अधिकारियों सर्वश्री खेमलाल देवांगन, रवि लावनिया, पुरन कुमार ताडी, विरेन्द्र चंद्राकर, संदीप वर्मा, अदिव्य हजारी, आत्मानंद साहू, गोपीचंद देवांगन, उमेश नामदेव, अमित बेहरा ने फुण्डहर गौठान में गौवश और गौमाता की लगभग 200 किलो गुड खिलाकर सेवा की ।अधिकारियो ने बताया कि महापौर श्रीमती मीनल चौबे के निर्देश पर फुण्डहर गोधाम में गौवश और गौमाता को बारिश की ठंड से सुरक्षा हेतु गुड खिलाकर सेवा की गई। वहीं बारिश से सुरक्षा हेतु फुण्डहर गोधाम में जोन 9 के माध्यम से महापौर के निर्देश पर गोधाम भूमि क्षेत्र में जेसीबी मशीन की सहायता से भूमि को गौवश और गौमाता की सुविधा की दृष्टि से समतलीकरण करने की कार्रवाई तेजी से प्रगति पर है।
- -राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत 'उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम' का होगा व्यापक संचालन*रायपुर/ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत पूरे देश सहित छत्तीसगढ़ में 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर वयस्कों को शिक्षित और सशक्त बनाने के उद्देश्य से 'उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम' (ULLAS) संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस (8 सितम्बर) के उपलक्ष्य में छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 1 से 15 सितम्बर 2026 तक पूरे प्रदेश में 15 दिवसीय राज्यव्यापी 'साक्षरता पखवाड़ा' आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने इस संबंध में समस्त जिला कलेक्टरों एवं जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण के अध्यक्षों को विस्तृत कार्ययोजना भेजकर जिले में व्यापक जन-भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।साक्षरता पखवाड़े की शुरुआत 1 सितम्बर को समस्त शासकीय कार्यालयों, स्कूलों एवं कॉलेजों में उल्लास शपथ के साथ होगी। इस अभियान के दौरान घर-घर सघन सर्वेक्षण कर 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षरों और स्वयंसेवी शिक्षकों का उल्लास मोबाइल ऐप के माध्यम से शत-प्रतिशत डिजिटल पंजीयन किया जाएगा। अभियान को जन-आंदोलन बनाने के लिए कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों द्वारा 10 असाक्षरों को साक्षर बनाने पर स्थानीय एवं बोर्ड परीक्षा में 10 बोनस अंक देने का विशेष प्रावधान किया गया है, जिसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। पखवाड़े के शुरुआती दिनों में 'अंगूठे से कलम की ओर' अभियान चलाकर नव-साक्षरों को हस्ताक्षर सिखाया जाएगा तथा शिक्षक दिवस (5 सितम्बर) पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों व समाजसेवियों का सम्मान किया जाएगा।जन-जागरूकता फैलाने के लिए हाट-बाजारों में नुक्कड़ नाटक, साक्षरता चौपाल, प्रभात फेरी और मशाल रैलियों का आयोजन किया जाएगा। 7 सितम्बर को 'चिट्ठी कलेक्टर के नाम' प्रतियोगिता आयोजित होगी, जिसमें नव-साक्षर बुजुर्ग एवं महिलाएँ स्वयं हाथ से चिट्ठी लिखकर साक्षरता का संदेश देंगे। 8 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर जिला, जनपद एवं ग्राम पंचायत स्तर पर मुख्य समारोह होंगे और सायं 7:00 बजे पूरे राज्य में 'उल्लास साक्षरता दीप' जलाकर सामूहिक संकल्प का प्रदर्शन किया जाएगा। इसी दिन प्रातः 8:00 बजे विद्यार्थियों व नागरिकों द्वारा साक्षरता नारों के साथ विशाल मानव श्रृंखला बनाई जाएगी। इसके अगले दिन 9 सितंबर को नवाचारी शिक्षकों द्वारा उल्लास के शिक्षार्थियों को सीखने सिखाने के लिए मनोरंजन टीएलएम का प्रदर्शन किया जाएगा।पखवाड़े के अंतिम चरण में वाचन दिवस, महिला साक्षरता पर केंद्रित संगोष्ठी, और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वसहायता समूहों की महिलाओं के लिए विशेष साक्षरता गतिविधियाँ आयोजित होंगी। बैंकों के सहयोग से नागरिकों को स्मार्टफोन चलाने, डिजिटल भुगतान, व्हाट्सऐप उपयोग और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। गणेशोत्सव पंडालों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सोशल मीडिया पर 'सेल्फी विद नव-साक्षर' के माध्यम से प्रचार किया जाएगा। 15 सितम्बर को समापन समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ताओं व स्वयंसेवी शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा तथा सितम्बर के अंतिम सप्ताह में आयोजित होने वाली महापरीक्षा अभियान की अंतिम तैयारी सुनिश्चित की जाएगी।
- -संभाग आयुक्त श्री श्याम धावड़े ने मैदानी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन एवं नियमित मॉनिटरिंग पर दिया जोर*रायपुर/ कलेक्ट्रेट परिसर स्थित रेड क्रॉस सभा कक्ष में आज पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह ने रायपुर संभाग में संचालित विकसित भारत-जी राम जी एवं प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में रायपुर संभाग आयुक्त श्री श्याम धावड़े ने भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।समीक्षा के दौरान विकसित भारत-जी राम जी अंतर्गत जुलाई एवं अगस्त माह में सृजित मानव दिवस तथा गत वित्तीय वर्ष की तुलना, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण अंतर्गत 90 मानव दिवस रोजगार, सिक्योर पोर्टल के माध्यम से कार्यों की स्वीकृति, प्रत्येक ग्राम पंचायत में कार्य स्वीकृति, बालिका शौचालय, मुक्तिधाम , महात्मा गांधी नरेगा के अपूर्ण कार्यों की पूर्णता, एसएनए-स्पर्श के माध्यम से भुगतान, पौधरोपण, वर्षा उपरांत श्रममूलक कार्यों की स्वीकृति एवं मानव दिवस सृजन की कार्ययोजना, NMMS के माध्यम से उपस्थिति, लंबित ई-केवायसी, शून्य प्रविष्टि वाले मस्टर रोल तथा युक्तधारा में प्लान किए गए कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई।सचिव श्री भीम सिंह ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं का प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति में तेजी लाई जाए। उन्होंने प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप श्रममूलक कार्य स्वीकृत करने, अधिकाधिक मानव दिवस सृजन करने तथा महात्मा गांधी नरेगा के अपूर्ण कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, विशेष परियोजना एवं पीएम जनमन योजनांतर्गत लक्ष्य के विरूद्ध स्वीकृत एवं पूर्ण आवासों की स्थिति की समीक्षा करते हुए लंबित प्रथम किस्त के प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने तथा आवास निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही आवास सॉफ्ट से अपात्र किए गए हितग्राहियों, जॉब कार्ड, योजनाओं के अभिसरण तथा A, B एवं C कैटेगरी के प्रकरणों के चिन्हांकन एवं निराकरण की प्रगति की भी समीक्षा की गई।सचिव श्री सिंह ने R-SETI एवं RMT के माध्यम से हितग्राहियों के प्रशिक्षण तथा लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।संभाग आयुक्त श्री श्याम धावड़े ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी योजनाओं की नियमित रूप से मॉनिटरिंग करते हुए मैदानी स्तर पर योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना सुनिश्चित करें।उन्होंने मानव दिवस सृजन, आवास निर्माण, लंबित प्रकरणों के निराकरण एवं अपूर्ण कार्यों की पूर्णता में अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित करने के साथ ही जिला एवं जनपद स्तर पर सतत समीक्षा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए।बैठक में रायपुर संभाग के सभी जिलों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, समस्त जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं कार्यपालन अभियंता, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा सहित संबंधित अधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
- -आज 18 प्रसूता माताओं को 90 पौधे भेंट किए गएरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता के अनुरूप रायपुर जिला प्रशासन द्वारा "प्रोजेक्ट ग्रीन पालना" अभियान को प्रभावशाली ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है।इस अभिनव पहल के तहत शासकीय अस्पतालों में प्रसव उपरांत प्रसूता माताओं को फलदार पौधे भेंट स्वरूप दिए जा रहे हैं, ताकि एक नई जिंदगी के आगमन के साथ एक नया वृक्ष भी धरती पर जन्म ले।कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में आज दिनांक 31 अगस्त 2026 को इस अभियान के अंतर्गत कुल 18 प्रसूताओं को 90 पौधे भेंट किए गए। इसमें एम.सी.एच. कालीबाड़ी अस्पताल में 04, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 50 बिस्तर आयुर्वेदिक अस्पताल में 04, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आरंग में 04, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाभांडी में 01, गोगांव में 01, गुढ़ियारी में 01, बिरगांव में 01 और उरला में 02 प्रसूताओं को पौधे वितरित किए गए।अब तक कुल 8871 माताओं को 12886 पौधे भेंट किए जा चुके हैं। यह प्रयास मातृत्व के साथ प्रकृति से जुड़ाव को भी बढ़ावा देता है। प्रोजेक्ट ग्रीन पालना न सिर्फ नवजात के जीवन की शुरुआत को यादगार बनाता है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए हरियाली और शुद्ध वातावरण की नींव भी रखता है।
- *प्रोजेक्ट पुनर्जीवन महाभियान : रायपुर में 2861 ट्री गार्ड और 1400 कंक्रीट घेरे हटे, पेड़ों को मिली खुलकर सांस*रायपुर। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश एवं छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका द्वारा पर्यावरण संरक्षण को लेकर व्यक्त की गई चिंता के पश्चात रायपुर जिला प्रशासन के जनप्रिय एवं पर्यावरण हितकारी प्रोजेक्ट पुनर्जीवन महाभियान के अंतर्गत अभिनव पहल की जा रही है।कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन एवं नगर पालिक निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा के नेतृत्व में निगम के सभी 10 जोन कमिश्नरों द्वारा सतत मॉनिटरिंग कर ऐसे पौधों को चिन्हित किया गया, जो चारों ओर से ट्री गार्ड एवं कंक्रीट के घेरों/पेवर से घिरे होने के कारण प्राकृतिक रूप से विकसित नहीं हो पा रहे थे।निगम क्षेत्र में अब तक विभिन्न जोनों के विभिन्न स्थानों में लगभग 2861 ट्री गार्ड एवं लगभग 1400 स्थानों पर लगे कंक्रीट के घेरों/पेवर को हटाने का कार्य तेज गति से करवाया गया है। इससे इन सभी पौधों को स्वतः विकसित होने के लिए पर्यावरण हितैषी वातावरण सहजता से प्राप्त हुआ है।आज 31 अगस्त 2026 को रायपुर जिला प्रशासन के विभिन्न शासकीय विभागों सीएसपीडीसीएल, डब्ल्यूआरडी, पीएचई, केडा, आरईएस आदि की टीम द्वारा जिले के 70 विभिन्न स्थानों से पेड़ों के चारों ओर से ट्री गार्ड एवं 147 स्थानों से कंक्रीट के घेरे एवं पेवर हटाकर पेड़ों को पर्यावरण अनुकूल वातावरण प्रदान करने की कार्रवाई की गई। वहीं नगर निगम रायपुर द्वारा आज 31 अगस्त को इस महाभियान के अंतर्गत 194 स्थानों से ट्री गार्ड एवं 331 स्थानों से कंक्रीट घेरे एवं पेवर हटाने की कार्रवाई की गई।नगर पालिक निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा ने इस कार्य को पहली प्राथमिकता में रखकर करवाने हेतु सभी जोन कमिश्नरों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। सभी 10 जोनों में किए जा रहे कार्यों की प्रतिदिन नियमित मॉनिटरिंग एवं प्रगति की समीक्षा कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर की जा रही है। इस प्रोजेक्ट पुनर्जीवन के तहत जिले के सभी जिला स्तरीय अधिकारियों एवं उनकी टीम ने संयुक्त रूप से कार्य किया है।कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने राजधानी के समस्त नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे सभी पौधों को आवश्यक पानी, खाद आदि देकर विकसित करने में अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराएं। ऐसा करने वाले सभी पर्यावरण प्रेमी नगरवासियों को प्रोजेक्ट पुनर्जीवन योजना के अंतर्गत 'पर्यावरण मित्र' के रूप में सम्मानित किया जाएगा।
- - न्यायिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल*दुर्ग/ नागरिकों के निकट न्याय को पहुंचाने तथा न्यायिक सुविधाओं का विस्तार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में आज भिलाई-3 में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालय तथा परिवार न्यायालय (कैम्प कोर्ट-अतिरिक्त बैठक) का वर्चुअल उद्घाटन किया गया। माननीय श्री न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधिपति, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने माननीय श्री न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी, पोर्टफोलियो न्यायाधीश, जिला दुर्ग की गरिमामयी उपस्थिति में भिलाई-3 स्थित जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालय तथा परिवार न्यायालय (कैम्प कोर्ट-अतिरिक्त बैठक), जिला दुर्ग का वर्चुअल उद्घाटन किया। यह उद्घाटन भिलाई-3 क्षेत्र में न्यायिक सेवाओं की उपलब्धता को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालय तथा परिवार न्यायालय कैम्प कोर्ट-अतिरिक्त बैठक के प्रारंभ होने से क्षेत्र के नागरिकों को न्यायिक कार्यवाहियों के लिए अधिक सुविधाजनक एवं निकटस्थ न्यायिक मंच उपलब्ध होगा। उद्घाटन तत्पश्चात् माननीय श्री न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधिपति ने अपने उद्बोधन में न्यायिक सेवाओं के विस्तार से जोड़ते हुए अपने विचार व्यक्त किए। भिलाई-3 में न्यायिक सुविधाओं का यह विस्तार न्याय वितरण प्रणाली में सुगमता, पहुंच एवं नागरिक-केंद्रित न्याय की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक कदम है। विशेष रूप से, परिवार न्यायालय कैम्प कोर्टदृअतिरिक्त बैठक के प्रारंभ होने से पारिवारिक विवादों से संबंधित मामलों में संलग्न पक्षकारों को स्थानीय स्तर पर न्यायिक सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।कार्यक्रम का शुभारंभ निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार गणमान्य अतिथियों के आगमन के साथ हुआ। तत्पश्चात श्री के. विनोद कुजूर, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दुर्ग ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि भिलाई-तीन एक महत्वपूर्ण एवं तीव्र गति से विकसित हो रहा क्षेत्र है, जहां बढ़ती हुई जनसंख्या तथा विविध प्रकार की विधिक आवश्यकताएं हैं। समर्पित न्यायालयों की स्थापना के पीछे की परिकल्पना एवं मार्गदर्शक विचार माननीय मुख्य न्यायाधिपति के दूरदर्शी नेतृत्व एवं मार्गदर्शन से अत्यधिक प्रेरित रहे हैं। अतः भिलाई-तीन में न्यायालयों की स्थापना, अधिक सुगम, उत्तरदायी एवं नागरिक-केंद्रित न्याय वितरण प्रणाली के संबंध में माननीय मुख्य न्यायाधिपति महोदय की परिकल्पना का प्रतिबिंब है।वर्चुअल उद्घाटन के तत्काल पश्चात् भिलाई-3 में प्रारंभ किए जा रहे जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालय तथा परिवार न्यायालय (कैम्प कोर्ट-अतिरिक्त बैठक) से संबंधित एक संक्षिप्त वीडियो प्रदर्शित किया गया। वीडियो के माध्यम से प्रस्तावित न्यायिक सुविधा तथा उसकी प्रकृति की एक झलक उपस्थितजनों के समक्ष प्रस्तुत की गई। यह प्रस्तुति केवल एक नई न्यायिक सुविधा के संबंध में जानकारी मात्र नहीं थी, बल्कि यह न्याय वितरण प्रणाली को लोगों के और अधिक निकट लाने की दिशा में एक नई शुरुआत का दृश्यात्मक परिचय भी बनी।कार्यक्रम के अंत में, श्रीमती सुमन एक्का, प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, दुर्ग ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने माननीय मुख्य न्यायाधिपति, न्यायिक अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी संबंधित व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि भिलाई-3 में इस नवीन न्यायिक सुविधा का प्रारंभ “न्याय को लोगों के और निकट लाने” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल न केवल न्यायिक अधोसंरचना के विस्तार को प्रतिबिंबित करती है, बल्कि बदलते समय के अनुरूप एक सुचारु, सुगम एवं नागरिक-केंद्रित न्याय वितरण प्रणाली के प्रति प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है।
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दुर्ग/ कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह द्वारा एग्रीस्टेक एवं बकेट क्लेम पंजीयन को प्राथमिकता देते हुए इसकी नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। किसानों के पंजीयन एवं संबंधित प्रक्रियाओं को समयबद्ध रूप से पूरा करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप जिले में बकेट क्लेम के निराकरण की प्रक्रिया में लगातार प्रगति हो रही है।
27 अगस्त 2026 तक जिले में कुल 1,21,878 बकेट क्लेम पूर्ण किए जा चुके हैं। जिले में कुल 4,59,909 बकेट क्लेम दर्ज हैं। तहसील स्तर पर बोरी 57.19 प्रतिशत क्लेम पूर्ण कर जिले में प्रथम स्थान पर है। इसके बाद धमधा में 49.93 प्रतिशत, अहिवारा में 39.97 प्रतिशत और पाटन में 38.59 प्रतिशत क्लेम पूर्ण किए जा चुके हैं।
विगत चार दिवस में जिले में 931 बकेट क्लेम की प्रगति दर्ज की गई। इसमें पाटन में 426, धमधा में 141, दुर्ग में 137, बोरी में 96, अहिवारा में 86 तथा भिलाई-3 में 45 क्लेम शामिल हैं। बकेट क्लेम पंजीयन किसानों के लिए महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। कलेक्टर ने बकेट क्लेम से संबंधित लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता के आधाार पर निराकरण करते हुए पंजीयन की गति बढ़ाने के निर्देश दिए गए है, ताकि अधिक से अधिक पात्र किसानों को लाभ मिल सके। - दुर्ग/ ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार और बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने के उद्देश्य से जिला पंचायत दुर्ग द्वारा एक बड़ा कदम उठाया गया है। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के अनुमोदन पश्चात् जिला पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बीके दुबे ने विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (व्हीबी-जीरामजी) योजना के तहत जनपद पंचायत पाटन और जनपद पंचायत दुर्ग के अंतर्गत शासकीय शालाओं में निर्माण कार्यों के लिए कुल 25 लाख 57 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है। जारी आदेशों के अनुसार स्वीकृत समस्त निर्माण कार्य संबंधित ग्राम पंचायतों द्वारा संपादित कराए जाएंगे।जिला पंचायत सीईओ श्री बजरंग दुबे ने बताया कि जनपद पंचायत पाटन के अंतर्गत ग्राम पंचायत सेलूद में विद्यालय हेतु बहु-इकाई बालिका शौचालय निर्माण के लिए ₹4.30 लाख तथा अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए ₹7.09 लाख, इस प्रकार कुल ₹11.39 लाख के कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। वहीं दूसरी ओर, जनपद पंचायत दुर्ग के ग्राम पंचायत उमरपोटी में पूर्व माध्यमिक शाला के कक्ष क्रमांक 01 एवं कक्ष क्रमांक 02 में दो अतिरिक्त क्लासरूम के निर्माण हेतु कुल ₹14.18 लाख (प्रत्येक कक्ष हेतु ₹7.09 लाख) की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। जिला प्रशासन द्वारा इन स्वीकृत निर्माण कार्यों को पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण ढंग से समय सीमा के भीतर पूरा करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। योजना के नियमों के अनुसार निर्माण कार्यों में ठेकेदारी प्रथा एवं मशीनों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा तथा केवल पंजीकृत जॉब कार्डधारी श्रमिकों के माध्यम से ही कार्य संपादित कराया जाएगा। श्रमिकों को ₹300 प्रतिदिन की दर से मजदूरी का भुगतान सीधे उनके बैंक या डाकघर खातों में सप्ताह के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा। इन स्वीकृतियों से सेलूद और उमरपोटी के शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और मूलभूत सुविधाएँ प्राप्त होंगी।
- दुर्ग/ कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के निर्देशानुसार जिले में स्वाइन फ्लू के संबंध में डॉ. मनोज दानी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी दुर्ग, डॉ. सी.बी.एस. बंजारे, जिला सर्वेलेंस अधिकारी, आईडीएसपी दुर्ग एवं सुश्री भूमिका वर्मा, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, एन.एच.एम. दुर्ग के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। दुर्ग जिले में 05 से 29 अगस्त 2026 तक कुल 13 स्वाइन फ्लू धनात्मक प्रकरण मिले। वर्तमान में जिले में कुल 09 एक्टिव मरीज है, जिनका विभिन्न अस्पतालों में चिकित्सकीय उपचार चल रहा है जिनकी स्थिति अभी सामान्य है। जिले में नये धनात्मक प्रकरण मिलने पर कांटेक्ट ट्रेसिंग की जाती है, नियमित मरीज की मोनिटरिंग की जाती है।*स्वाइन फ्लू के संबंध में सामान्य जानकारी*स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र का संक्रमण है, जो इन्फ्लूएंजा ए वायरस के कारण होता है। इन्क्यूबेशन पीरियड सामान्यता 1-2 दिवस। संक्रमण का प्रसार संक्रमित व्यक्ति में लक्षण प्रारंभ होने के 3-5 दिवस तक अन्य व्यक्तियो में हो सकता है। संक्रमण का प्रसार सामान्यता संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से ड्राप्लेट इन्फेक्शन के माध्यम से होता है।*मुख्य लक्षण*सर्दी, खासी, बुखार एवं बदन दर्द*क्या करें-*खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को रूमाल/टिश्यू या कोहनी से ढकें। हाथों को बार-बार साबुन पानी से धोएं या सैनिटाइजर का उपयोग करें। आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचें। स्वाइन फ्लू से पीड़ित व्यक्ति से उचित दूरी बनाए रखें। पर्याप्त आराम करें, भरपूर नींद लें, पानी पिएं और पौष्टिक भोजन करें। लक्षण होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र से संपर्क करें। होम आइसोलेशन के दौरान स्वास्थ्य की निगरानी करें तथा स्थिति बिगड़ने पर तुरंत अस्पताल जाएं।*क्या न करें-*अभिवादन के लिए हाथ न मिलाएं और गले न मिलें। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाई न लें। बीमारी के लक्षण होने पर स्कूल, कार्यालय या भीड़भाड़ वाले स्थानों पर न जाएं। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढक लेवे।स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपील की गई है कि घबराने की आवश्यकता नहीं है, सतर्क रहें, स्वच्छता का पालन करें, लक्षण होने पर समय पर स्वास्थ्य संस्था से संपर्क करें तथा संक्रमण के प्रसार को रोकने में सहयोग करें।
- रायपुर/छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के 11 अधिकारी-कर्मचारियों को भावभीनी विदाई दी गई। ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री राजेश कुमार शुक्ला ने सेवानिवृत्त अधिकारी.कर्मचारी को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह भेट कर सम्मानित कर उनके सुखमय जीवन की कामना व्यक्त की। इस अवसर पर एमडी श्री शुक्ला ने कर्मियों की सेवाओं और योगदान को पाॅवर कंपनी के लिए बहुत महत्वपूर्ण बताया।पाॅवर कंपनी के मुख्यालय डंगनिया स्थित सेवा भवन में सहायक प्रबंधक (वित्त एवं लेखा) श्री रमेश चन्द्र अग्रवाल, मुख्य अभियंता (मानव संसाधन) विभाग में पदस्थ प्रशासनिक अधिकारी श्री शेष कुमार सोनी एवं श्री कमल कुमार भंवर, मुख्य अभियंता (उपकेंद्र) कार्यालय में पदस्थ प्रशासनिक अधिकारी श्री सी.आर.रामचंद्रन, कार्यपालन अभियंता (उपकेंद्र) में पदस्थ वरिष्ठ पर्यवेक्षक (परीक्षण) श्री सुशील कुमार शील व श्री रमेश कुमार वर्मा सहित भिलाई में कार्यरत वरिष्ठ पर्यवेक्षक (परीक्षण) श्री बसंत कुमार साहू, लाईन सहायक श्रेणी-दो श्री दुलारराम यादव एवं लैब टेक्नीशियन श्रीमती सावित्री राय को तथा जगदलपुर में कार्यरत लाईन सहायक श्रेणी-एक श्री आर.गुरवैया, सिविल परिचारक श्रेणी-एक, श्री कस्तुराम नाग को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया। सेवानिवृत्तजनों ने अपनी दीर्घ एवं उत्कृष्ट सेवाकाल की संक्षिप्त अनुभव साझा करते हुए कंपनी प्रबंधन से मिले सहयोग के लिए साधुवाद किया।इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक श्री एम.एस.चैहान, श्री संजय पटेल, श्री वी. के दीक्षित, मुख्य अभियंता श्रीमती शारदा सोनवानी, श्री अब्राहम वर्गीस, श्री प्रसन्न गोसावी, श्रीमती रश्मि वर्मा एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी श्री एच.एल.पंचारी उपस्थित थे।कार्यक्रम का संचालन उपमहाप्रबंधक (जनसंपर्क) श्री गोविंद पटेल एवं आभार प्रदर्शन अधीक्षण अभियंता श्री पंकज चैधरी ने किया।
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-कला मंदिर भिलाई में पूर्वाह्न 11 बजे से शुरू होगी वार्ड आरक्षण प्रक्रिया
दुर्ग/ जिले के नगरीय निकायों में निष्पक्ष एवं पारदर्शितापूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया सुनिश्चित करने की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां जारी है। इसी क्रम में कलेक्टर श्री अभिजित सिंह ने छत्तीसगढ़ नगर पालिका (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं महिलाओं के लिए वार्डों का आरक्षण) नियम, 1994 के तहत जिले के तीन प्रमुख नगर पालिक निगमों- भिलाई, रिसाली और भिलाई-चरोदा के वार्डों का आरक्षण तय करने हेतु औपचारिक आदेश जारी कर दिया है।
जारी समय-सारणी के अनुसार, तीनों नगर निगमों का वार्डवार आरक्षण कार्यक्रम 09 सितंबर 2026 को सेक्टर-6, भिलाई स्थित कला मंदिर (सिविक सेंटर) में आयोजित किया जाएगा। तय कार्यक्रम के तहत पूर्वाह्न 11.00 बजे से नगर पालिक निगम भिलाई, अपराह्न 03.00 बजे से नगर पालिक निगम रिसाली तथा सायंकाल 05.00 बजे से नगर पालिक निगम भिलाई-चरोदा के वार्डों के आरक्षण की कार्यवाही संपन्न की जाएगी।
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उप मुख्यमंत्री ने शहीद वीर नारायण सिंह की प्रतिमा का किया अनावरण, आदिवासी महासम्मेलन में भी हुए शामिल
गोंडवाना भवन के जीर्णोद्धार के लिए 10 लाख और विकास कार्यों के लिए 6 करोड़ देने की घोषणा की
रायपुर/उप मुख्यमंत्री तथा बेमेतरा जिले के प्रभारी मंत्री श्री अरुण साव ने बेमेतरा में शहीद वीर नारायण सिंह की भव्य प्रतिमा का अनावरण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। वे प्रतिमा अनावरण के बाद कृषि उपज मंडी प्रांगण में आयोजित जिला स्तरीय आदिवासी महासम्मेलन में शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम में गोंडवाना भवन के जीर्णोद्धार के लिए 10 लाख रुपए तथा बेमेतरा में विभिन्न विकास कार्यों के लिए 6 करोड़ रुपए देने की घोषणा की। विधायक श्री दीपेश साहू भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने आदिवासी महासम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ की माटी के ऐसे महान सपूत थे, जिन्होंने गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता के लिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ वीरतापूर्वक संघर्ष किया। उनका पूरा जीवन संघर्ष, सेवा और राष्ट्रप्रेम की भावना से भरा रहा। उनके मन में समाज के प्रति सेवा का भाव और मातृभूमि के प्रति गहरा प्रेम था। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में गरीब और शोषित लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। अंग्रेजों के अत्याचार के सामने वे कभी नहीं झुके और देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।
श्री साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती अनेक वीर योद्धाओं और जननायकों की गौरवशाली भूमि रही है। शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर जैसे महान योद्धाओं ने अपने साहस से समाज व मातृभूमि के प्रति समर्पण का उदाहरण प्रस्तुत किया। इन वीर सपूतों का त्याग और बलिदान हमारी आने वाली पीढ़ियों को सदैव याद रहेगा। उन्होंने कहा कि बेमेतरा में स्थापित शहीद वीर नारायण सिंह की यह प्रतिमा उनके त्याग और बलिदान की स्मृति को चिरस्थायी बनाएगी। यह प्रतिमा युवाओं को राष्ट्रसेवा और समाजसेवा के लिए आगे बढ़ने का संदेश देगी। उन्होंने कहा कि देश और समाज के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले महापुरुषों का सम्मान हमारी जिम्मेदारी है।
केन्द्रीय गोंड़ महासभा धमधागढ़ के अध्यक्ष श्री कमलेश सोरी, सर्व आदिवासी समाज जिला अध्यक्ष श्री मुरीत मंडावी, गोंड समाज जिला अध्यक्ष श्री दरबार सिंह नेताम, बेमेतरा नगर पालिका के अध्यक्ष श्री विजय सिन्हा, उपाध्यक्ष श्री अशोक शर्मा, पूर्व विधायक श्री अवधेश चंदेल और श्री अजय साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गोड़ समाज के पदाधिकारी और गणमान्य नागरिक भी आदिवासी महासम्मेलन में मौजूद थे। -
हिंसा और नक्सलवाद का महिमामंडन करने वाली मानसिकता भी समाज के लिए घातक : साय
रायपुर/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने एक निजी चैनल के साक्षात्कार के दौरान कहा कि नक्सलवाद के समर्थन में बात करने वाले और कुख्यात नक्सली हिड़मा , जिसने सैकड़ो निर्दोषों की हत्या की, उसे आदर्श मानने वाले ही दिमागी नक्सली हैं । उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ नक्सलवाद के लंबे और पीड़ादायक दौर से बाहर निकलकर शांति, विश्वास और विकास की नई राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारे सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, केंद्र और राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा बस्तर के लोगों के सहयोग से नक्सलवाद समाप्ति की ओर है। अब आवश्यकता इस बात की भी है कि हिंसा और नक्सलवाद को वैचारिक समर्थन देने तथा उसका महिमामंडन करने वाली मानसिकता को समाज स्पष्ट रूप से अस्वीकार करे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी कुछ लोग ऐसे कुख्यात नक्सलियों को अपना आदर्श मानते हैं, जिनके हाथ निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाबलों के खून से रंगे रहे हैं। हिड़मा जैसे नक्सलियों ने हिंसा और आतंक के माध्यम से बस्तर की अनेक पीढ़ियों को भय, अभाव और पिछड़ेपन में रखने का काम किया। ऐसे लोगों का महिमामंडन करना, उनके समर्थन में नारे लगाना या उन्हें नायक के रूप में प्रस्तुत करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बंदूक उठाकर निर्दोष लोगों की जान लेने वाला व्यक्ति किसी समाज का आदर्श नहीं हो सकता। नक्सली हिंसा में बस्तर ने अपने हजारों निर्दोष नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और बहादुर जवानों को खोया है। अनेक परिवारों ने अपनों को खोने का दर्द सहा, बच्चों से उनके माता-पिता छिने और विकास की संभावनाओं को दशकों तक बाधित किया गया। इस पीड़ा को नजरअंदाज कर हिंसा के जिम्मेदार लोगों का गुणगान करना बस्तर के पीड़ित परिवारों और शहीद जवानों के बलिदान का भी अपमान है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सलवाद केवल बंदूक और जंगलों तक सीमित चुनौती नहीं है। हिंसा को उचित ठहराने, लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करने और नक्सली हिंसा के जिम्मेदार लोगों को नायक के रूप में स्थापित करने वाली सोच भी उतनी ही चिंताजनक है। लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने और असहमति व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन हिंसा का समर्थन और निर्दोष लोगों की हत्या करने वालों का महिमामंडन किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि आज बस्तर की पहचान बदल रही है। जिस क्षेत्र को कभी नक्सली हिंसा, बारूदी सुरंगों और भय के कारण जाना जाता था, वहां अब स्कूलों की घंटियां सुनाई दे रही हैं, सड़कें बन रही हैं, स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं, युवाओं को शिक्षा और रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं तथा दूरस्थ गांव शासन की योजनाओं और विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर के युवा अब बंदूक नहीं, किताब, कलम, कौशल और रोजगार चाहते हैं। वे अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं और देश-प्रदेश की प्रगति में भागीदार बनना चाहते हैं। हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर के प्रत्येक युवा को आगे बढ़ने का अवसर मिले और प्रत्येक परिवार तक विकास तथा सुशासन का लाभ पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई केवल सुरक्षा की लड़ाई नहीं थी, बल्कि बस्तर के भविष्य को बचाने की लड़ाई थी। हमारे जवानों ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना इस लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया है। अब समाज की जिम्मेदारी है कि हिंसा की विचारधारा को किसी भी स्वरूप में महिमामंडित न होने दे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ शांति, लोकतंत्र और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ चुका है। नक्सलवाद और हिंसा के लिए नए छत्तीसगढ़ में कोई स्थान नहीं है। बस्तर की नई पीढ़ी के आदर्श वे लोग होने चाहिए जो शिक्षा, सेवा, परिश्रम, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के माध्यम से समाज को आगे बढ़ा रहे हैं, न कि वे जिन्होंने बंदूक और हिंसा के सहारे निर्दोष लोगों का जीवन छीना।
उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति की स्थापना केवल सरकार या सुरक्षाबलों की उपलब्धि नहीं, बल्कि वहां के नागरिकों के साहस और विश्वास की जीत है। अब इस शांति को स्थायी बनाते हुए बस्तर को विकास, पर्यटन, शिक्षा, रोजगार और समृद्धि की नई पहचान देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। -
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा विकसित छत्तीसगढ़
सुरक्षा के साथ विकास की रणनीति ने बदली बस्तर की तस्वीर, अंतिम छोर तक पहुंच रही शासन की योजनाएं
रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि दशकों तक नक्सलवाद की चुनौती का सामना करने वाला छत्तीसगढ़ आज शांति, विश्वास और विकास के एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। नक्सलवाद के अंधेरे से बाहर निकलकर प्रदेश अब विकास की नई इबारत लिख रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, अधोसंरचना, पर्यटन और आजीविका सहित सर्वांगीण विकास के प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखाई देने लगे हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर में टाइम्स नाउ नवभारत डॉट कॉम द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत-समृद्ध छत्तीसगढ़ : विकास का नया अध्याय’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प देश के सामने रखा है। इसी संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ ने भी विकसित राज्य बनने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। प्रदेश के विजन डॉक्यूमेंट के अंतर्गत 10 प्रमुख मिशन निर्धारित किए गए हैं और उन्हें धरातल पर उतारने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संभावनाओं से भरपूर राज्य है। प्रदेश का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है और यहां लोहा, बॉक्साइट, लिथियम, सोना सहित अनेक महत्वपूर्ण खनिज संसाधन उपलब्ध हैं। छत्तीसगढ़ देश का एकमात्र टिन उत्पादक राज्य भी है। प्राकृतिक संसाधनों की इस समृद्धि के साथ प्रदेश की मेहनतकश मानव शक्ति हमारी सबसे बड़ी ताकत है। इन क्षमताओं का समुचित उपयोग कर छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश के विकास में और बड़ी भूमिका निभाएगा।
सुरक्षा और विकास की समन्वित रणनीति से बदली बस्तर की तस्वीर
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद प्रदेश, विशेषकर बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा बना रहा। वर्ष 2023 में राज्य में सरकार बनने के बाद जनवरी 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार ने समन्वय के साथ नई रणनीति पर काम शुरू किया। पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर तालमेल और सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान को निर्णायक गति दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता मिली है। नई रणनीति की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि सुरक्षा बलों ने पूरी मजबूती से अभियान चलाते हुए पहले की तुलना में अपने जवानों की क्षति को कम रखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर की जनता ने लगभग चार दशकों तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। नक्सली स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और संचार सुविधाओं जैसे विकास कार्यों का विरोध करते थे, जिसके कारण अनेक दूरस्थ क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से कटे रहे। इसलिए सरकार ने नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई के साथ-साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दी।
‘नियद नेल्लानार’ ने दूरस्थ गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार शुरू से स्पष्ट थी कि केवल नक्सल समस्या को समाप्त करना पर्याप्त नहीं होगा। स्थायी शांति के लिए बस्तर के प्रत्येक गांव और प्रत्येक परिवार तक विकास का लाभ पहुंचाना आवश्यक है। इसी सोच के साथ ‘नियद नेल्लानार’ योजना शुरू की गई। गोंडी भाषा में इसका अर्थ है - ‘आपका अच्छा गांव’। उन्होंने बताया कि इस योजना के माध्यम से दूरस्थ और संवेदनशील गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूरसंचार जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं। क्षेत्र में 421 से अधिक स्कूल खोले गए हैं और दूरसंचार नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। विकास को और गति देने के लिए सरकार ने ‘नियद नेल्लानार 2.0’ भी प्रारंभ किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने बस्तर को देश का सबसे सुंदर आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प व्यक्त किया है और राज्य सरकार इसी लक्ष्य के अनुरूप बस्तर के समग्र विकास पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है और लगभग 40 हजार लोगों का उपचार किया गया है। ‘बस्तर मुन्ने’ कार्यक्रम के माध्यम से शासकीय अमला गांवों में पहुंचकर और वहां ठहरकर लोगों को योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ उपलब्ध करा रहा है।
शांति लौटने के साथ बस्तर में आजीविका और पर्यटन की नई संभावनाएं
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर में शांति स्थापित होने के साथ अब रोजगार, आजीविका और पर्यटन के नए अवसर भी तेजी से विकसित हो रहे हैं। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के साथ समझौता किया गया है। बकरी पालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और जीवनशैली पूरी दुनिया को आकर्षित कर रही है। बस्तर के धुड़मारास गांव को दुनिया के श्रेष्ठ पर्यटन गांवों में शामिल किया गया है। यहां आने वाले देश-विदेश के पर्यटक होम-स्टे में रहकर स्थानीय जनजातीय जीवन और संस्कृति को निकट से अनुभव कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में होम-स्टे को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ऋण एवं अनुदान की सुविधा दे रही है। पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से नई औद्योगिक नीति में पर्यटन को भी शामिल किया गया है। नक्सलवाद की समाप्ति के बाद खाली हो रहे लगभग 70 सुरक्षा कैंपों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों के लिए खोले पुनर्वास के द्वार
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार की रणनीति केवल सुरक्षा कार्रवाई तक सीमित नहीं रही। हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों के लिए बेहतर आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति तैयार की गई। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया कि हिंसा छोड़कर लौटने वालों के साथ न्याय होगा और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार ने हिंसा की जगह संवाद और पुनर्वास को प्राथमिकता दी, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए और बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का रास्ता चुना। मुख्यमंत्री ने कहा कि सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त होने के बाद भी वैचारिक स्तर पर भ्रम फैलाने की कोशिश करने वाले कुछ तत्व मौजूद हैं, लेकिन बस्तर में तेजी से पहुंचता विकास और लोगों के जीवन में आ रहा सकारात्मक परिवर्तन ऐसे भ्रम का सबसे प्रभावी उत्तर है।
युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा और रोजगार पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। प्रत्येक विकासखंड तक उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ी है और आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी जैसे राष्ट्रीय महत्व के प्रतिष्ठित संस्थान प्रदेश में संचालित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। दिल्ली में यूथ हॉस्टल के माध्यम से युवाओं को यूपीएससी की तैयारी में सहयोग दिया जा रहा है। प्रदेश में 34 नालंदा परिसरों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा और उनके बेहतर भविष्य के लिए भी सरकार अनेक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभाशाली बच्चे के सपनों की राह में बाधा न बनें।
नई औद्योगिक नीति से निवेश और रोजगार को मिल रही नई गति
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के माध्यम से छत्तीसगढ़ में उद्योग, निवेश और रोजगार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और इनका असर धरातल पर भी दिखाई देने लगा है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि उसके माध्यम से प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार करना है। इसी उद्देश्य से एक हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने वाले उद्यमों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।
“किसान परिवार से मिली मेहनत और जिम्मेदारी की सीख”
कार्यक्रम में अपनी जीवनयात्रा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वे किसान परिवार से आते हैं और खेती उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है। दस वर्ष की आयु में पिता के निधन के बाद परिवार के बड़े बेटे के रूप में कम उम्र में ही उन्हें जिम्मेदारियां संभालनी पड़ीं। बचपन से खेती करते हुए उन्होंने परिश्रम, धैर्य और जिम्मेदारी का महत्व सीखा।
उन्होंने कहा कि राजनीति में आने की उनकी कोई पूर्व योजना नहीं थी। गांव के लोगों के आग्रह पर पहली बार वार्ड पंच का चुनाव लड़ा और जनप्रतिनिधि के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई। पांच वर्ष तक पंच के रूप में किए गए कार्यों के आधार पर गांववासियों ने उन्हें निर्विरोध सरपंच चुना। इसके बाद वर्ष 1990 में तपकरा विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने। अविभाजित मध्यप्रदेश में दो बार विधायक और रायगढ़ से चार बार सांसद के रूप में जनता की सेवा का अवसर मिला।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला और आज छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा का महत्वपूर्ण दायित्व मिला है। सार्वजनिक जीवन में जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाने का प्रयास किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के सामने संभावनाओं का नया आकाश है। नक्सलवाद की बाधा दूर होने के साथ बस्तर सहित पूरा प्रदेश विकास की नई गति पकड़ रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध छत्तीसगढ़ मानव विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग और पर्यटन में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो तथा वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण में ‘विकसित छत्तीसगढ़’ अपनी सशक्त भूमिका निभाए।
कार्यक्रम में टाइम्स नाउ नवभारत डॉट कॉम के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। -
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किया TIN पोर्टल का शुभारंभ
TIN पोर्टल से टिन संग्राहक जनजातीय हितग्राहियों को मिलेगा पारदर्शी और उचित मूल्य
LME आधारित मूल्य निर्धारण से बाजार भाव के अनुरूप भुगतान, DBT से सीधे बैंक खाते में पहुंचेगी राशि
रायपुर/प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खनिज संसाधनों के सतत एवं समावेशी विकास के साथ जनजातीय समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा इंडियन ओवरसीज बैंक के सहयोग से विकसित TIN (ट्राइबल इंसेंटिव्स ऑन नेचुरल रिसोर्सेज़) पोर्टल का शुभारंभ किया। इस दौरान केंद्रीय कोयला और खान राज्यमंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे, केंद्रीय शहरी आवासन राज्य मंत्री श्री तोखन साहू और सीएमडीसी के चेयरमैन श्री सौरभ सिंह सहित अधिकारीगण मौजूद रहे।
यह पोर्टल बस्तर संभाग के जनजातीय समुदायों द्वारा संग्रहित टिन अयस्क के क्रय से लेकर परिवहन, बिक्री, मूल्य निर्धारण और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और समयबद्ध बनाने की महत्वपूर्ण पहल है। पोर्टल में लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) आधारित मूल्य निर्धारण की व्यवस्था की गई है, जिससे टिन संग्राहकों को बाजार की स्थिति के अनुरूप अधिक पारदर्शी मूल्य मिल सकेगा। वहीं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से विक्रय की राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में पहुंचेगी। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी, भुगतान में देरी की संभावना घटेगी और जनजातीय परिवारों को अपने प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले आर्थिक लाभ का अधिक प्रत्यक्ष एवं समयबद्ध लाभ मिलेगा।
टिन खरीदी की पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल, हर चरण की होगी निगरानी
TIN पोर्टल के माध्यम से टिन अयस्क के संग्रहण से लेकर भुगतान तक प्रत्येक चरण को डिजिटल वर्कफ्लो से जोड़ा गया है। इसमें डिजिटल हितग्राही पंजीयन एवं पहचान, बैंकिंग सेवाओं का एकीकरण, क्यूआर कोड आधारित स्मार्ट सत्यापन, स्मार्ट कार्ड/पहचान सुविधा, ऑनलाइन स्टॉक प्रबंधन, भुगतान राशि की स्वचालित गणना, ऑटोमेटेड रिपोर्टिंग और संपूर्ण ऑडिट ट्रेल जैसी सुविधाएं शामिल हैं। सीएमडीसी मुख्यालय से लेकर क्षेत्रीय कार्यालयों और क्रय केंद्रों तक रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी विकसित की गई है। पोर्टल के माध्यम से हितग्राहियों को डिजिटल संचार, एसएमएस अलर्ट और भुगतान एवं लेन-देन की स्थिति की जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। इससे न केवल संग्राहकों को अपने टिन की बिक्री और भुगतान की जानकारी समय पर मिलेगी, बल्कि सीएमडीसी के लिए स्टॉक, राजस्व, भुगतान और क्रय प्रक्रिया की निगरानी भी अधिक प्रभावी होगी।
06 टिन क्रय केंद्रों से खरीदी, 03 नए केंद्र प्रस्तावित
सीएमडीसी द्वारा वर्तमान में बस्तर संभाग में 06 टिन क्रय केंद्रों के माध्यम से जनजातीय हितग्राहियों से टिन अयस्क की खरीदी की जा रही है। इनमें दंतेवाड़ा जिले के बचेली, कटेकल्याण और चिकपाल तथा सुकमा जिले के तोंगपाल, नामा और चिंतलनार में संचालित क्रय केंद्र शामिल हैं। अधिक से अधिक जनजातीय संग्राहकों को स्थानीय स्तर पर टिन विक्रय की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा में 03 नए टिन संग्रहण एवं क्रय केंद्र स्थापित करने की योजना है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के संग्राहकों को अपने उत्पाद को बाजार तक ले जाने में होने वाली कठिनाइयों में कमी आएगी और अधिक हितग्राही औपचारिक एवं पारदर्शी क्रय व्यवस्था से जुड़ सकेंगे।
टिन क्रय व्यवस्था में लागू हुई नई SOP, प्रक्रिया होगी सरल और किफायती
TIN पोर्टल के साथ CMDC द्वारा टिन अयस्क की खरीदी से बिक्री तक की प्रक्रिया के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी तैयार कर लागू की गई है। इसके तहत प्रत्येक क्रय केंद्र के लिए अलग सैंपलिंग की व्यवस्था, सैंपल की संख्या को 12 से घटाकर 6 करना, प्रत्येक सैंपल का मानकीकरण 50 ग्राम करना तथा परीक्षण परिणामों को लेकर असहमति की स्थिति में री-एनालिसिस का प्रावधान किया गया है। इससे प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होने के साथ परीक्षण एवं विश्लेषण से जुड़ी लागत में भी कमी आएगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मासिक विश्लेषण शुल्क को 14,400 रुपए से घटाकर 7,200 रुपए किया गया है तथा इन सुधारों से CMDC को लगभग 10 लाख रुपए वार्षिक तक की संभावित बचत का अनुमान है। क्रय, बिक्री और परिवहन दरों के नियमित निर्धारण से पूरी प्रक्रिया में स्पष्टता भी बढ़ेगी।
LME आधारित मूल्य से उचित मूल्य, DBT से सीधे खाते में भुगतान
TIN पोर्टल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में LME आधारित मूल्य निर्धारण और DBT भुगतान व्यवस्था शामिल है। इससे टिन के अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य में होने वाले बदलावों को ध्यान में रखते हुए अधिक पारदर्शी मूल्य व्यवस्था विकसित होगी। विक्रय राशि सीधे बैंक खाते में पहुंचने से हितग्राहियों को भुगतान के लिए किसी मध्यस्थ पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। बैंकिंग प्रणाली से एकीकरण के कारण भुगतान अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय होगा। साथ ही डिजिटल भुगतान व्यवस्था जनजातीय समुदायों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ते हुए वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा देगी।
टिन संग्रहण को आजीविका से जोड़ने की दिशा में पहल
बस्तर के दक्षिणी क्षेत्रों में जनजातीय समुदाय लंबे समय से टिन अयस्क का संग्रहण करते रहे हैं। वर्ष 2013 में दंतेवाड़ा क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत पांच टिन अयस्क संग्रहण सहकारी समितियों का गठन किया गया था। अब TIN पोर्टल इसी सामुदायिक व्यवस्था को डिजिटल तकनीक से जोड़ते हुए टिन संग्रहण को अधिक व्यवस्थित एवं स्थायी आजीविका गतिविधि के रूप में विकसित करने का प्रयास है। इससे प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले आर्थिक लाभ को स्थानीय समुदायों तक सीधे पहुंचाने, उनकी आय बढ़ाने और आर्थिक आत्मनिर्भरता मजबूत करने में मदद मिलेगी।
टिन खरीदी से जनजातीय हितग्राहियों को लगातार मिला आर्थिक लाभ
CMDC द्वारा जनजातीय हितग्राहियों से टिन अयस्क की खरीदी के माध्यम से लगातार आर्थिक लाभ पहुंचाया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 8,707.2 किलोग्राम टिन अयस्क के लिए लगभग 90.82 लाख रुपए, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 20,895.335 किलोग्राम टिन अयस्क के लिए लगभग 3.81 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।
सरकार और CMDC के लिए भी बनेगा मजबूत डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म
TIN पोर्टल केवल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने वाला प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह टिन की पूरी मिनरल वैल्यू चेन के डिजिटल प्रबंधन की व्यवस्था है। इससे सरकार को रियल टाइम राजस्व एवं क्रय संबंधी जानकारी प्राप्त होगी, जबकि CMDC को कागजी कार्यवाही कम करने, स्टॉक ट्रैकिंग, ऑडिट अनुपालन, भुगतान और क्रय केंद्रों की निगरानी में सुविधा मिलेगी। प्राप्त आंकड़ों के आधार पर भविष्य की नीतियों और योजनाओं के लिए भी बेहतर निर्णय लिए जा सकेंगे। इस प्रकार TIN पोर्टल छत्तीसगढ़ के खनिज संसाधनों को जनजातीय आजीविका से जोड़ने वाली ‘मिनरल-टू-लाइवलीहुड’ पहल के रूप में सामने आया है। LME आधारित पारदर्शी मूल्य निर्धारण, DBT, डिजिटल पहचान, बैंकिंग एकीकरण, रियल टाइम मॉनिटरिंग और मानकीकृत SOP के माध्यम से इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि बस्तर के टिन संग्राहक जनजातीय हितग्राहियों को उनके संसाधनों का अधिकतम, पारदर्शी और समयबद्ध आर्थिक लाभ मिल सके।
सीएमडीसी और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच हुआ महत्वपूर्ण एमओयू, कौशल विकास और वित्तीय सहयोग को मिलेगी गति
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच एमओयू किया गया। इस समझौते से खनिज क्षेत्र में वित्तीय सहयोग, टिन संकलित करने वाले हितग्राहियों को पारदर्शी भुगतान और मूल्य संवर्धन का लाभ मिलेगा। -
कटिंग-पॉलिशिंग के आधुनिक प्रशिक्षण के लिए पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय बनेगा नॉलेज पार्टनर, ‘बस्तर ब्रांड’ को मिलेगा बढ़ावा
कोरंडम से बस्तर को मिलेगी नई पहचान, खनन से मूल्य संवर्धन तक विकसित होगी पूरी वैल्यू चेन
रायपुर। नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के अनुरूप छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधनों के दोहन के साथ-साथ उनके स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (CMDC) द्वारा बीजापुर जिले के कुचनूर क्षेत्र में लगभग 25 वर्षों के अंतराल के बाद कोरंडम खदान का पुनः संचालन किया गया है। कोरंडम के खनन से लेकर उसकी कटिंग, पॉलिशिंग, आभूषण निर्माण, ब्रांडिंग और विपणन तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने के उद्देश्य से CMDC और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के बीच मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में नया रायपुर स्थित मेफेयर रिज़ॉर्ट में यह महत्वपूर्ण एमओयू सम्पन्न हुआ। विश्वविद्यालय को नॉलेज पार्टनर के रूप में चयनित किया गया है, जिसके माध्यम से स्थानीय युवाओं और शिल्पकारों को आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा।
वैज्ञानिक पद्धति से हो रहा उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम का उत्खनन
प्रदेश में कोरंडम खनिज के दोहन एवं विपणन के लिए CMDC और संयुक्त उपक्रम साझेदार मेसर्स एन.सी. नाहर के मध्य गठित छत्तीसगढ़ कोरंडम माइन्स लिमिटेड के माध्यम से बीजापुर जिले के भोपालपट्टनम क्षेत्र के ग्राम कुचनूर में कोरंडम खदान संचालित की जा रही है। लगभग 25 वर्षों के अंतराल के बाद फरवरी 2025 से खदान का पुनः संचालन करते हुए उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम का वैज्ञानिक पद्धति से उत्खनन किया जा रहा है। वर्तमान में खदान से उत्खनित कोरंडम का लगभग 240 किलोग्राम भंडारण है, जिसमें से 157.643 किलोग्राम का परिवहन किया जा चुका है। परिवहन किए गए कोरंडम में 107.989 किलोग्राम बी-ग्रेड तथा 49.654 किलोग्राम औद्योगिक ग्रेड कोरंडम शामिल है।
खनन के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार
कुचनूर कोरंडम खदान के संचालन से बीजापुर जिले के 14 स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार और CMDC का प्रयास है कि खनिज आधारित गतिविधियों का लाभ केवल खनन तक सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय समुदायों, युवाओं, शिल्पकारों, स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों की भागीदारी से आय के नए अवसर सृजित हों।
कटिंग-पॉलिशिंग के प्रशिक्षण से बढ़ेगा मूल्य संवर्धन
कोरंडम से अधिकतम मूल्य प्राप्त करने के लिए स्थानीय स्तर पर जेम्स्टोन हैंडलिंग, कटिंग, पॉलिशिंग और अन्य वैल्यू एडिशन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय को नॉलेज पार्टनर बनाया गया है। आधुनिक तकनीक पर आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रत्नों की पहचान और कौशल गतिविधियों में दक्ष बनाया जाएगा। इससे उन्हें रोजगार के साथ स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के अवसर भी मिलेंगे।
‘बस्तर ब्रांड’ के तहत आभूषण और रत्न उत्पादों को मिलेगा बाजार
कुचनूर से प्राप्त उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम को ‘बस्तर ब्रांड’ के तहत स्थानीय डिजाइन, गुणवत्ता और प्रमाणिकता से जोड़ने की योजना है। कोरंडम से आभूषण एवं रत्न उत्पाद तैयार कर उनकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे बस्तर की स्थानीय कला, शिल्प और प्राकृतिक खनिज संपदा को एक साथ बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी। स्थानीय इकाइयों, स्टार्टअप्स, शिल्पकारों और निवेशकों की भागीदारी से कोरंडम आधारित नए उद्यम विकसित किए जा सकेंगे।
नए कोरंडम क्षेत्रों की पहचान और अन्वेषण जारी
बीजापुर जिले में कोरंडम से जुड़े नए संभावित क्षेत्रों की पहचान, अन्वेषण एवं पूर्वेक्षण का कार्य भी जारी है। भोपालपट्टनम क्षेत्र में ग्राम कुचनूर सहित अन्य संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर खनन गतिविधियों के विस्तार की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। धनगोल सहित विभिन्न इलाकों में क्षेत्र आरक्षित कर आवेदन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
पारदर्शी नीलामी से सरकार को राजस्व, बस्तर को मिलेगी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान
उत्खनित कोरंडम की पारदर्शी तरीके से नीलामी से राज्य सरकार के राजस्व में वृद्धि के साथ बस्तर क्षेत्र के कोरंडम को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की संभावनाएं बढ़ेंगी। खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक एवं सतत उपयोग के साथ स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन होने से खनिज की वास्तविक आर्थिक क्षमता का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। CMDC की यह पहल ‘खनन से मूल्य संवर्धन, मूल्य संवर्धन से रोजगार और रोजगार से आर्थिक सशक्तिकरण’ की अवधारणा को जमीन पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य केवल कोरंडम का उत्खनन करना नहीं, बल्कि स्थानीय युवाओं और समुदायों को पूरी वैल्यू चेन का भागीदार बनाकर बस्तर की खनिज संपदा को स्थानीय समृद्धि और आत्मनिर्भरता का आधार बनाना है।




























