- Home
- छत्तीसगढ़
- -विकास कार्यों में गुणवत्ता और गति सुनिश्चित करें, अधिकारी मैदानी क्षेत्रों में जाकर करें योजनाओं की निगरानी : श्रीमती राजवाड़े-निर्माणाधीन स्कूल भवनों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश, हर घर मुनगा रोपण पर जोररायपुर / महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री तथा बलरामपुर जिले की प्रभारी मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने समीक्षा बैठक में कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और विकास कार्यों का प्रभाव मैदानी स्तर पर दिखाई देना चाहिए। अधिकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी के लिए मैदानी क्षेत्रों में जाएं तथा कार्यों में गुणवत्ता और गति सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय से ही क्षेत्र का समग्र विकास संभव है। सभी विभाग अपने दायित्वों का प्रभावी निर्वहन करते हुए निर्धारित समय-सीमा में अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित करें।बैठक में मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने न्यायालय में लंबित प्रकरणों, अविवादित एवं विवादित खाता विभाजन, सीमांकन तथा एग्रीस्टेक पंजीयन की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने किसानों का एग्रीस्टेक एवं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि कोई पात्र किसान शासन की योजनाओं से वंचित न रहे। खाद-बीज के भंडारण एवं वितरण की समीक्षा करते हुए उन्होंने किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने तथा वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए।मंत्री ने आंगनबाड़ी केन्द्रों में सुपोषण वृक्ष मुनगा के रोपण की जानकारी लेते हुए हर घर मुनगा वृक्ष लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुनगा पौष्टिकता का अच्छा स्रोत है, इसलिए इसे पोषण अभियान से जोड़कर अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंचाया जाए। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को जैविक खेती एवं सब्जी उत्पादन से जोड़ने पर भी उन्होंने विशेष जोर दिया, ताकि महिलाओं की आय बढ़ने के साथ परिवार के पोषण स्तर में भी सुधार हो।स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने निर्माणाधीन स्कूल भवनों में गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करने तथा मरम्मत योग्य भवनों की समय पर मरम्मत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने न्योता भोज के माध्यम से विद्यार्थियों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराने तथा आश्रम-छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने पर भी जोर दिया। स्कूलों में सामुदायिक शौचालयों में पर्याप्त पानी, साफ-सफाई एवं समुचित संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।मंत्री ने प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, महतारी वंदन योजना में ई-केवाइसी, निर्माणाधीन आंगनबाड़ी भवन तथा मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की समीक्षा की। उन्होंने पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का समय पर लाभ दिलाने के निर्देश दिए। जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने, खराब हैंडपंपों का तत्काल सुधार तथा जलस्रोतों के संरक्षण एवं जलसंचय कार्यों को प्राथमिकता देने को कहा।स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा करते हुए मंत्री ने जिला चिकित्सालय में साफ-सफाई एवं आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने और मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। पशुपालन विभाग की समीक्षा में उन्होंने कृत्रिम गर्भाधान, पशु टीकाकरण, गौधाम योजना सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली और अधिक से अधिक पशुपालकों को योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया।राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई एवं पीएम जनमन सड़क निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने सभी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने तथा नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने शासकीय भूमि पर अतिक्रमण का चिन्हांकन एवं सीमांकन कर नियमानुसार कार्रवाई करने को भी कहा।बैठक में कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने वर्षा एवं बोवाई की स्थिति, एग्रीस्टेक पंजीयन, वीबी-जी रामजी, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री आवास, पीएम जनमन आवास एवं सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति से मंत्री को अवगत कराया। पुलिस अधीक्षक श्री वैभव बैंकर ने अपराध, एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई, सड़क दुर्घटनाओं एवं हेलमेट जागरूकता अभियान की जानकारी दी।वनमण्डलाधिकारी श्री आलोक वाजपेयी ने विभागीय कार्यों की जानकारी दी। इस दौरान मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने हाथी प्रभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने, नियमित मुनादी कराने तथा ग्रामीणों को समय पर सचेत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हाथी प्रभावित क्षेत्रों में जनहानि रोकने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित की जाएं। बैठक में सामरी विधायक श्रीमती उद्धेश्वरी पैकरा, प्रतापपुर विधायक श्रीमती शकुंतला सिंह पोर्ते, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हीरामुनी निकुंज, विधायक प्रतिनिधि श्री बलवंत सिंह सहित जिले के अधिकारी उपस्थित रहे।
- -पालकों से संवाद, समझाइश और सहयोग से छात्रा का दोबारा विद्यालय में प्रवेशरायपुर । शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और किसी भी परिस्थिति में बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए शासन स्तर पर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी दिशा में सूरजपुर जिले में शिक्षक की पहल से शाला त्याग चुकी एक छात्रा को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की प्रेरणादायी मिसाल सामने आई है। शिक्षक के निरंतर प्रयास, पालकों से संवाद और समझाइश के बाद ग्राम दवना की छात्रा दुर्गावती ने दोबारा विद्यालय में प्रवेश लिया और अब वह पूरे उत्साह के साथ पढ़ाई जारी रखने के लिए तैयार है।विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री अवधेश कुमार साहू के मार्गदर्शन में छात्रा को विद्यालय में प्रवेश दिलाया गया। पतरापाली से लगे ग्राम दवना स्थित प्राथमिक शाला भरूहमूड़ा से वर्ष 2025 में कक्षा 5वीं उत्तीर्ण करने के बाद छात्रा दुर्गावती, पिता भंवर सिंह ने आगे की पढ़ाई के लिए विद्यालय में प्रवेश नहीं लिया था। इस दौरान माध्यमिक शाला पतरापाली के शिक्षक श्री योगेश साहू ने छात्रा और उसके पालकों से संपर्क कर पढ़ाई जारी नहीं रखने का कारण जाना। पालकों ने बताया कि छात्रा विद्यालय जाने के लिए तैयार नहीं थी और वह अपनी नानी के घर चली गई थी। इसके अलावा जन्म प्रमाण पत्र एवं आधार कार्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण भी आगे विद्यालय में प्रवेश कराने में परेशानी आ रही थी।शिक्षक श्री योगेश साहू ने छात्रा और उसके परिजनों से लगातार संवाद करते हुए उन्हें शिक्षा के महत्व तथा बच्चों की शिक्षा के अधिकार एवं अनिवार्य शिक्षा के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने पालकों को समझाया कि किसी भी परिस्थिति में बच्चे की पढ़ाई रुकनी नहीं चाहिए और आवश्यक दस्तावेजों की व्यवस्था कर बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजना चाहिए।शिक्षक की समझाइश और निरंतर संपर्क का सकारात्मक असर हुआ। दुर्गावती ने दोबारा पढ़ाई शुरू करने की इच्छा जताई और उसका विद्यालय में प्रवेश कराया गया। पुनः विद्यालय पहुंचने के बाद छात्रा में पढ़ाई को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। छात्रा के पुनः प्रवेश के अवसर पर प्रधान पाठक श्री के.के. यादव एवं शिक्षिका श्रीमती अनिता सिंह ने उसे निःशुल्क पुस्तक एवं गणवेश प्रदान किया। वहीं शिक्षक श्री योगेश साहू ने अपने स्तर पर छात्रा को कॉपी एवं पेन उपलब्ध कराकर उसका उत्साहवर्धन किया, ताकि शिक्षण सामग्री के अभाव में उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो।दुर्गावती की कहानी यह बताती है कि शाला त्यागने वाले बच्चों को केवल विद्यालय में प्रवेश दिलाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उनके परिवारों से निरंतर संपर्क और संवाद भी जरूरी है। शिक्षक की संवेदनशील पहल से न केवल छात्रा को दोबारा पढ़ाई का अवसर मिला, बल्कि उसके परिवार में भी शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है। विद्यालय परिवार ने दुर्गावती को नियमित रूप से विद्यालय आने और मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित किया। वहीं दुर्गावती भी लंबे अंतराल के बाद विद्यालय लौटकर नई ऊर्जा और उत्साह के साथ अपनी पढ़ाई शुरू करने को लेकर उत्साहित है। शिक्षक और विद्यालय परिवार का यह प्रयास शिक्षा से वंचित बच्चों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण है।
- -शिक्षा से आत्मनिर्भरता की ओर कदम-“भाई का स्नेह, बहनों का अधिकार—विष्णु भैया का मिला साथ, आत्मनिर्भर बना परिवार”रायपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के खड़कागांव की रहने वाली कांति दुग्गा (पिता श्री घसिया दुग्गा) के जीवन में समाज कल्याण विभाग की पहल से एक नया मोड़ आया है। श्रवण बाधित होने के कारण कांति को दैनिक जीवन में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। दूसरों पर निर्भरता और बातचीत में असमर्थता के चलते उन्हें 10वीं कक्षा के बाद अपनी पढ़ाई भी अधूरी छोड़नी पड़ी थी।कांति की इस समस्या को दूर करने के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित सहायक उपकरण प्रदाय योजना के तहत उन्हें श्रवण यंत्र (Hearing Aid) प्रदान किया गया। इस छोटी सी मदद ने कांति के जीवन को पूरी तरह बदलकर रख दिया। अब वे न केवल अपने परिवार और समाज के लोगों की बातें सहजता से सुन और समझ पा रही हैं, बल्कि अपने दैनिक काम भी पूरे आत्मविश्वास के साथ करने लगी हैं। श्रवण यंत्र मिलने से कांति का खोया हुआ आत्मविश्वास वापस लौट आया है। पढ़ाई छोड़ चुकी कांति अब एक बार फिर अपनी शिक्षा पूरी करने और आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रही हैं।अपने जीवन में आए इस सकारात्मक बदलाव और सशक्तिकरण के लिए कांति ने जिला प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विष्णु भैया के सुशासन में हर बहन को उसका अधिकार मिल रहा है। यह श्रवण यंत्र सिर्फ एक उपकरण नहीं, बल्कि एक बड़े भाई का स्नेह और संबल है, जिसने मुझे फिर से आगे बढ़ने का हौसला दिया है। 'भाई का स्नेह, बहनों का अधिकार—विष्णु भैया के साथ आत्मनिर्भर परिवार' की यह सोच आज मेरे जैसे कई परिवारों के सपनों को सच कर रही है।
- -मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल का असर: महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में लगभग 51 प्रतिशत की बढ़ोतरी-पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट से नागरिकों को मिला 76.95 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ-महिलाओं के पक्ष में पंजीकृत विक्रय विलेखों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़कर हुई 41 प्रतिशत-प्रदेश के लगभग 75 प्रतिशत जिलों में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धिरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और संपत्ति स्वामित्व में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए लिए गए निर्णय के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट दिए जाने से प्रदेश में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन का रुझान बढ़ा है। इससे महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व को बढ़ावा मिलने के साथ ही नागरिकों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ भी प्राप्त हुआ है।पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग द्वारा किए गए तुलनात्मक विश्लेषण के अनुसार, 06 मई से 27 जुलाई 2026 की अवधि में महिलाओं के नाम 30 हजार 720 दस्तावेज पंजीकृत किए गए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 20 हजार 319 थी। इस प्रकार महिलाओं के नाम पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या में लगभग 51 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।32 प्रतिशत से बढ़कर 41 प्रतिशत हुई महिलाओं की हिस्सेदारीविभागीय आंकड़ों के अनुसार, 06 मई से 27 जुलाई 2025 की अवधि में कुल 63 हजार 174 विक्रय विलेख पंजीकृत हुए थे, जिनमें 20 हजार 319 दस्तावेजों में महिलाएं खरीदार थीं। महिलाओं के पक्ष में पंजीकृत विक्रय विलेखों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत थी। इसी अवधि में वर्ष 2026 में कुल 74 हजार 424 विक्रय विलेख पंजीकृत हुए, जिनमें 30 हजार 720 दस्तावेजों में महिलाएं खरीदार थीं। इससे महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 41 प्रतिशत हो गई है। यानी एक वर्ष में महिलाओं की हिस्सेदारी में 9 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई है।यह वृद्धि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करने के लिए किए गए सुधार के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है। संपत्ति में महिलाओं का बढ़ता स्वामित्व उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ परिवार में उनकी निर्णयात्मक भूमिका को भी मजबूत करता है।प्रदेशभर में दिख रहा असर, लगभग 75 प्रतिशत जिलों में उल्लेखनीय वृद्धिपंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का प्रभाव प्रदेश के विभिन्न जिलों में दिखाई दे रहा है। विभागीय विश्लेषण के अनुसार प्रदेश के लगभग 75 प्रतिशत जिलों में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में 20 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। जांजगीर-चांपा, बालोद, कोरिया, रायपुर और कांकेर सहित अनेक जिलों में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।जिला-वार आंकड़ों में रायपुर में महिलाओं के नाम पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या 4,220 से बढ़कर 6,038, बिलासपुर में 1,894 से बढ़कर 2,958 तथा जांजगीर-चांपा में 1,239 से बढ़कर 2,302 हुई है। इससे प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व के प्रति बढ़ते रुझान का पता चलता है।76.95 करोड़ रुपये का मिला प्रत्यक्ष आर्थिक लाभमहिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा पंजीयन शुल्क में दी जा रही 50 प्रतिशत की छूट से नागरिकों को प्रत्यक्ष आर्थिक राहत मिली है। 06 मई से 27 जुलाई 2026 की अवधि में इस छूट के माध्यम से नागरिकों को 76 करोड़ 95 लाख 33 हजार 689 रुपये, यानी लगभग 76.95 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ है।महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और स्वावलंबन हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव सायमुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें परिवार तथा समाज में समान अवसर उपलब्ध कराना है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट देने का निर्णय लिया है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस निर्णय के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि यह पहल परिवारों को महिलाओं के नाम संपत्ति स्वामित्व के लिए प्रोत्साहित कर रही है। संपत्ति का स्वामित्व महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा और आत्मविश्वास प्रदान करता है तथा परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में उनकी भूमिका को और सशक्त बनाता है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, स्वावलंबन और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शासन की नीतियों के केंद्र में माताओं-बहनों की आर्थिक सुरक्षा और विकास में उनकी समान भागीदारी सुनिश्चित करना है।सामाजिक और आर्थिक सोच में सकारात्मक बदलाव : वित्त एवं वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री श्री ओ.पी. चौधरीवित्त एवं वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि राज्य में सामाजिक एवं आर्थिक सोच में आ रहे सकारात्मक परिवर्तन को दर्शाती है। पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट ने परिवारों को महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीकृत कराने के लिए प्रोत्साहित किया है।नारी सशक्तिकरण को आर्थिक आधार दे रही सरकार की पहलछत्तीसगढ़ सरकार महिला सशक्तिकरण को आर्थिक स्वावलंबन और संपत्ति स्वामित्व से जोड़कर आगे बढ़ा रही है। पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में दर्ज हुई वृद्धि और नागरिकों को मिले 76.95 करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ से इस पहल के सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं।महिलाओं के नाम संपत्ति का स्वामित्व उनके भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के साथ परिवार और समाज में उनकी भागीदारी को सशक्त बना रहा है। यह पहल सशक्त परिवार और सशक्त छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
- -लखपति दीदियों की आजीविका डबरियों से बढ़ेगी अतिरिक्त आयरायपुर । ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों तथा महिला स्व-सहायता समूहों की आय बढ़ाने की दिशा में कोरिया जिला प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन के प्रयासों से वीबी-ग्राम-जी योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) एवं मत्स्य पालन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में जिले के 174 किसानों को 1020 बैग उन्नत मत्स्य बीज वितरित किए गए।ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से बिहान महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्यों को ‘आजीविका डबरी योजना’ से जोड़ा गया है। योजना के तहत निर्मित डबरियों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव के निर्देश पर मत्स्य विभाग द्वारा हितग्राहियों को अनुदान आधारित मत्स्य बीज उपलब्ध कराया गया। कुल 174 हितग्राहियों में 68 आजीविका डबरी हितग्राही तथा 106 अन्य किसान शामिल हैं। अन्य हितग्राहियों के पास तालाब, अमृत सरोवर अथवा व्यक्तिगत डबरी उपलब्ध है। मत्स्य पालन से इन्हें कृषि के साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा।मत्स्य बीज वितरण कार्यक्रम विकासखंड बैकुंठपुर के गेज प्रक्षेत्र तथा विकासखंड सोनहत के अमहर प्रक्षेत्र में आयोजित किया गया। योजना के तहत हितग्राहियों द्वारा मात्र 140 रुपये प्रति बैग की दर से स्वैच्छिक अंशदान राशि जमा कराई गई। जिले में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इसके लिए क्लस्टर लेवल एप्रोच तैयार की जा रही है। इसके तहत मत्स्य उत्पादक किसानों एवं महिला समूहों के क्लस्टर बनाकर उन्हें बड़े व्यापारियों और बाजारों से सीधे जोड़ा जाएगा। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और उत्पादकों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। सामूहिक रूप से मत्स्य उत्पादन एवं विपणन को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित होंगे। जिला प्रशासन की इस पहल से कृषि, महिला स्व-सहायता समूहों और मत्स्य पालन को एक साथ जोड़कर ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती भी मिलेगी।
- -स्थानीय सामग्री से तैयार आकर्षक राखियों की बाजार में भारी मांगरायपुर। रक्षाबंधन पर्व बिहान से जुड़ी ग्रामीण दीदियों के लिए भाई-बहन के स्नेह के साथ स्वावलंबन और आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर भी लेकर आया है। गरियाबंद जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाएं स्थानीय एवं पारंपरिक सामग्री से आकर्षक राखियों का निर्माण कर रही हैं। राखियों के विक्रय से महिलाओं को अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है और वे स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। मैनपुर विकासखंड में स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा राखी निर्माण एवं विक्रय की गतिविधि संचालित कर रही है। समूह द्वारा 5 हजार 340 रुपये की लागत से राखियां तैयार कर अब तक 11 हजार 258 रुपये की बिक्री कर चुकी है।इसी प्रकार विकासखंड गरियाबंद में संजीवनी संकुल संगठन जोबा से संबद्ध गायत्री स्व-सहायता समूह सढ़ौली की चार महिला सदस्य विभिन्न प्रकार की आकर्षक राखियों का निर्माण कर रही हैं। समूह द्वारा धान चावल, मूंगा, मटर, झरगा, सेमी, अरहर सहित अन्य स्थानीय सामग्री से राखियों की विभिन्न वैरायटी तैयार की गई है। इन राखियों की कीमत 5 रुपये से 60 रुपये तक निर्धारित की गई है। विकासखंड छुरा के ग्राम जामली स्थित जय भवानी स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने भी बांस से निर्मित राखियों को बाजार तक पहुंचाने की पहल की है। समूह की महिलाओं द्वारा पूर्व वर्षों में भी राखियों का निर्माण किया गया था।वर्ष 2026 में इस गतिविधि को बढ़ाते हुए वर्तमान में लगभग 1 हजार राखियों का स्टॉक तैयार किया गया है, जिन्हें रक्षाबंधन पर्व पर विक्रय किया जाएगा। विकासखंड फिंगेश्वर के ग्राम पंचायत रोहिना अंतर्गत जय मां घटारानी स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती कोयल साहू, विजय विकास महिला संकुल संगठन कौंदकेरा से जुड़कर आकर्षक एवं गुणवत्तापूर्ण राखियों का निर्माण कर रही हैं। उन्होंने इस वर्ष लगभग 5 हजार राखियां तैयार की हैं। इनमें 5 रुपये से 40 रुपये तक की विभिन्न डिजाइनों वाली राखियां शामिल हैं। समूह द्वारा 10 हजार रुपये की लागत से राखियां तैयार कर अब तक 12 हजार रुपये की बिक्री दर्ज की गई है। वर्तमान में लगभग 4 हजार राखियां उपलब्ध हैं, जिनके विक्रय से अनुमानित रूप से 16 हजार रुपये तक लाभ अर्जित कर सकते है।जिले में स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा निर्मित राखियों को बाजार उपलब्ध कराने और उनके उत्पादों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सभी जनपद पंचायतों में केनोपी के माध्यम से राखी विक्रय स्टॉल लगाए जा रहे हैं। इन स्टॉलों के माध्यम से नागरिकों को आकर्षक एवं हस्तनिर्मित राखियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही महिला समूहों के उत्पादों को व्यापक बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है इसी क्रम में जिला प्रशासन गरियाबंद द्वारा आकांक्षा हाट के माध्यम से राखी विक्रय के लिए विशेष स्टॉल लगाया जा रहा है।
- -कम्प्रेस्ड बायोगैस, ग्रीन हाइड्रोजन और जैव ईंधन से खुलेंगे निवेश और हरित रोजगार के नए अवसर-छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026 से स्वच्छ ऊर्जा और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति-बायोमास को कृषि अवशेष नहीं, ऊर्जा और आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में विकसित करने पर जोर-क्लस्टर आधारित मॉडल से किसानों, स्व-सहायता समूहों और स्थानीय समुदायों की बढ़ेगी आय-फीडस्टॉक प्रबंधन, बायोमास वैल्यू चेन और निजी निवेश के लिए मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने पर विशेषज्ञों ने किया मंथनरायपुर / छत्तीसगढ़ में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध कृषि अवशेष, वन संसाधन, पशुधन अपशिष्ट और नगरीय जैव अपशिष्ट को स्वच्छ ऊर्जा में परिवर्तित कर प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार और आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। कम्प्रेस्ड बायोगैस, ग्रीन हाइड्रोजन, बायोएथेनॉल और अन्य जैव ईंधनों के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं का योजनाबद्ध उपयोग छत्तीसगढ़ को देश की उभरती जैव ऊर्जा अर्थव्यवस्था में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित कर सकता है।इन्हीं संभावनाओं और भावी कार्ययोजना पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र, इसके टेक्निकल पार्टनर सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) तथा छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में अरण्य भवन, नवा रायपुर अटल नगर के सभागार में ऊर्जा सुरक्षा एवं आर्थिक विकास में जैव ऊर्जा की भूमिका पर केंद्रित कार्यशाला आयोजित की गई।कार्यशाला में शासन के विभिन्न विभागों, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के उद्योगों, वित्तीय एवं तकनीकी संस्थानों, शिक्षाविदों और नागरिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने जैव ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाओं, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति पर मंथन किया। विशेषज्ञों ने कहा कि राज्य में उपलब्ध बायोमास संसाधनों की मजबूत वैल्यू चेन विकसित कर उन्हें स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने पर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होने के साथ उद्योगों के डीकार्बोनाइजेशन, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन को गति मिलेगी।कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026 से जैव ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशाकार्यशाला में बताया गया कि राज्य शासन ने जैव ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए दूरदर्शी पहल के रूप में छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026 लागू की है। यह नीति प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, हरित औद्योगिकीकरण, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।इसके साथ ही छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में बायोएनर्जी परियोजनाओं के लिए विभिन्न प्रोत्साहनों और सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। इन नीतिगत पहलों के माध्यम से प्रदेश में जैव ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अनुकूल निवेश वातावरण तैयार करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जैव ऊर्जा का विस्तार केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है। इससे कृषि अवशेषों और अपशिष्ट का आर्थिक उपयोग संभव होगा, किसानों को अतिरिक्त आय मिलेगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार होंगे और सर्कुलर इकोनॉमी को भी मजबूती मिलेगी।बायोमास को अपशिष्ट नहीं, आर्थिक संसाधन के रूप में देखने की जरूरत : श्री सुमित सरकारछत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमित सरकार ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि ऊर्जा सुरक्षा तथा सामाजिक और पर्यावरणीय विकास के लक्ष्यों को एक साथ हासिल किया जा सकता है। इसके लिए बायोमास को केवल कृषि अवशेष अथवा अपशिष्ट के रूप में देखने के बजाय ऊर्जा आधारित आर्थिक विकास और हरित रोजगार के महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में विकसित करना होगा।उन्होंने कहा कि कम्प्रेस्ड बायोगैस, बायोएथेनॉल और अन्य बायोफ्यूल जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इनके उपयोग से उद्योगों के कार्बन उत्सर्जन को कम करने के साथ संसाधनों के पुनः उपयोग पर आधारित सर्कुलर इकोनॉमी को भी मजबूत किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की कृषि और वन आधारित अर्थव्यवस्था जैव ऊर्जा के विकास के लिए अनुकूल आधार उपलब्ध कराती है। उपलब्ध संसाधनों को तकनीक, निवेश और प्रभावी बाजार व्यवस्था से जोड़कर प्रदेश में जैव ऊर्जा आधारित नए आर्थिक अवसर तैयार किए जा सकते हैं।क्लस्टर आधारित मॉडल से कम होगी लागत, स्थानीय समुदायों की बढ़ेगी आयवन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सीसीएफ, एचआरडी-आईटी श्री आलोक तिवारी (आईएफएस) ने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रमुख कृषि फसलों, वन एवं पशुधन संसाधनों तथा नगरीय निकायों से निकलने वाले अपशिष्ट की उपलब्धता को देखते हुए जैव ऊर्जा के लिए क्लस्टर आधारित मॉडल प्रभावी सिद्ध हो सकता है।उन्होंने कहा कि क्लस्टर आधारित व्यवस्था से बायोमास के परिवहन की लागत कम की जा सकती है और जैव ऊर्जा संयंत्रों के लिए फीडस्टॉक की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है। इस व्यवस्था से किसान उत्पादक संगठनों, स्व-सहायता समूहों और स्थानीय समुदायों को भी सीधे आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि की जा सकती है।विभागों और संस्थाओं के बीच बेहतर कन्वर्जेन्स आवश्यक : श्री रमापति कुमारसेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री रमापति कुमार ने कहा कि छत्तीसगढ़ की बायोएनर्जी क्षमता को वास्तविक धरातल पर उतारने के लिए कृषि, ग्रामीण विकास, ऊर्जा, उद्योग, पर्यावरण और वित्त विभाग के साथ छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर कन्वर्जेन्स आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उद्योगों, वित्तीय संस्थानों, किसानों और नागरिक संगठनों को भी इस प्रक्रिया से जोड़ना होगा। प्राकृतिक संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता और दीर्घकालिक नीतिगत पहलों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को बायोएनर्जी के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि सीड राज्य के प्रयासों में सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है और फीडस्टॉक प्रबंधन, बायोमास वैल्यू चेन तथा अभिनव समाधानों की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।कार्यक्रम में श्री अमिताभ वाजपेयी (आईएफएस), सदस्य-सचिव, छत्तीसगढ़ स्टेट बायोडायवर्सिटी बोर्ड ने भी भाग लिया।तकनीकी सत्र में बायोएनर्जी की वैल्यू चेन और व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चाकार्यशाला के तकनीकी सत्रों में जैव ऊर्जा उत्पादन के लिए कच्चे माल की उपलब्धता, फीडस्टॉक प्रबंधन, परिवहन, संग्रहण, तकनीक, बाजार, वित्तपोषण और उद्योगों में जैव ईंधन के उपयोग सहित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।तकनीकी सत्र में श्री संतोष वार्ष्णेय, जनरल मैनेजर-बायोफ्यूल, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड; डॉ. प्रवीण डी. चेंडगे, सीनियर मैनेजर-कृषि, बरगढ़, ओडिशा, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड; श्री योगेश कुमार काडू, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एवं नोडल ऑफिसर, स्वच्छ भारत मिशन, रायपुर नगर निगम; डॉ. अनिल श्रीवास्तव, प्रोजेक्ट साइंटिस्ट, छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र; श्री विशाल प्रसाद गुप्ता, डायरेक्टर, एनर्जी कोर इंडिया एंड पावर लिमिटेड; श्री चंद्रमौली सिंह, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड; श्री विशाल जाधव, जिंदल पावर लिमिटेड, तमनार; श्री पुलकित श्रोत्रय, सेक्टर एक्सपर्ट; श्री अश्वनी अशोक, डायरेक्टर-जस्ट ट्रांजिशन, सीड; डॉ. देवयानी शर्मा, एसोसिएट डायरेक्टर-क्लाइमेट, सीड तथा श्री तुषार शर्मा, सीड सहित विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।सरकार, उद्योग और अकादमिक जगत के प्रतिनिधियों ने किया मंथनकार्यशाला में कृषि, वन एवं जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, स्टेट अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी तथा रायपुर नगर निगम के अधिकारियों ने भाग लिया। इसके साथ ही महिन्द्रा पावर, जायसवाल नेको, नाकोडा इस्पात, गोदावरी तथा बायो-एनर्जी और सीएनजी आधारित विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधि भी चर्चा में शामिल हुए।आईआईएम रायपुर और कलिंगा यूनिवर्सिटी के शिक्षाविदों तथा विभिन्न सिविल सोसाइटी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी जैव ऊर्जा के विकास से जुड़े तकनीकी, आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक पहलुओं पर सुझाव दिए।बायोमास कॉरिडोर और मजबूत फीडस्टॉक नेटवर्क पर जोरकार्यशाला और तकनीकी सत्रों से जैव ऊर्जा क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। विशेषज्ञों ने राज्य में उपलब्ध बायोमास संसाधनों का मानकीकृत आकलन और विश्वसनीय डेटा बेस तैयार करने की आवश्यकता बताई। इसके साथ ही एकीकृत बायोमास कॉरिडोर विकसित करने, संग्रहण एवं एकत्रीकरण की मजबूत व्यवस्था बनाने और उत्पादों की बाजार तक सुगम पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।निजी निवेश आकर्षित करने के लिए अनुकूल वित्तीय और नियामकीय व्यवस्था विकसित करने तथा फीडस्टॉक के संग्रहण और प्रबंधन में किसान उत्पादक संगठनों, स्व-सहायता समूहों और सहकारी समितियों की भूमिका बढ़ाने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।कार्यशाला में इस बात पर सहमति रही कि नीति, तकनीक, निवेश और स्थानीय समुदायों को एक साझा मंच पर लाकर छत्तीसगढ़ में बायो-रिसोर्स आधारित अर्थव्यवस्था का मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया जा सकता है। इससे कृषि और वन आधारित संसाधनों का बेहतर मूल्य संवर्धन होने के साथ किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अतिरिक्त आय, स्थानीय स्तर पर हरित रोजगार और उद्योगों के लिए स्वच्छ ऊर्जा के नए विकल्प उपलब्ध होंगे।राज्य में उपलब्ध प्राकृतिक और जैव संसाधनों के वैज्ञानिक एवं सतत उपयोग के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास को एक साथ आगे बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी बायोएनर्जी राज्यों में स्थापित करने की दिशा में यह कार्यशाला एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।
- -स्थानीय और घरेलू संसाधनों से तैयार कर रहीं आकर्षक राखियां, सीजनल गतिविधियों से बढ़ा आजीविका का दायरारायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं अपनी पारंपरिक दक्षता और स्थानीय संसाधनों को आजीविका के अवसरों में बदल रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं कृषि एवं अन्य गतिविधियों के साथ-साथ मौसम और त्योहारों के अनुरूप सीजनल व्यवसाय अपनाकर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत किशुन नगर की जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल हैं।रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए समूह की 12 महिलाएं इन दिनों घरेलू एवं स्थानीय संसाधनों से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। कम लागत में तैयार इन राखियों को स्थानीय बाजार में स्टॉल लगाकर और घर से विक्रय किया जा रहा है। इससे महिलाओं को अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है और उनकी आजीविका को मजबूती मिल रही है।समूह की सदस्य सुश्री सोनाली सिंह ने बताया कि समूह की महिलाएं वर्षभर मौसम और त्योहार के अनुसार अलग-अलग आजीविका गतिविधियां अपनाती हैं। वर्तमान में राखी निर्माण का कार्य किया जा रहा है। राखियां तैयार करने में चावल, गेहूं, मक्का, कोहड़े के बीज सहित घर में उपलब्ध अन्य सामग्री का उपयोग किया जाता है। इन सामग्रियों को रंग एवं सजाकर आकर्षक डिजाइन तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा रेशमी धागे, ऊन और अन्य सजावटी सामग्री आवश्यकतानुसार बाजार से खरीदी जाती है।सुश्री दीप्ति चौधरी ने बताया कि घरेलू सामग्री के उपयोग से राखियों की उत्पादन लागत कम रहती है। समूह की महिलाएं अपने खाली समय में एक साथ बैठकर राखियां तैयार करती हैं। त्योहार के दौरान मांग बढ़ने पर उत्पादन भी बढ़ाया जाता है। तैयार उत्पादों की बिक्री स्टॉल और घर से की जाती है। उन्होंने बताया कि बिहान योजना से प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिलने के बाद महिलाओं को कम लागत में आजीविका गतिविधि संचालित करने का अवसर मिला है। इससे वे पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी आय भी अर्जित कर पा रही हैं।समूह की सदस्य सुश्री आशा रवि ने बताया कि महिलाएं पिछले लगभग तीन वर्षों से घरेलू सामग्री से राखियां तैयार कर रही हैं। समूह की सभी सदस्य मिलकर उत्पादन और बिक्री में भागीदारी करती हैं। सामूहिक रूप से कार्य करने से उन्हें एक-दूसरे का सहयोग मिलता है और नई गतिविधियां सीखने का अवसर भी प्राप्त होता है।जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं केवल राखी निर्माण तक सीमित नहीं हैं। वे वर्षभर मौसम और त्योहारों के अनुरूप अलग-अलग आजीविका गतिविधियों का चयन करती हैं। इससे उन्हें किसी एक व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय पूरे वर्ष आय के नए अवसर मिलते हैं। समूह के माध्यम से प्रशिक्षण, उत्पादन, बाजार और बिक्री के स्तर पर भी महिलाओं को आपसी सहयोग प्राप्त होता है।बिहान से जुड़ने के बाद ग्रामीण महिलाओं में आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा है। महिलाएं घर में उपलब्ध सामग्री और अपने हुनर का उपयोग कर उन्हें आय के साधन में परिवर्तित कर रही हैं। राखी निर्माण जैसी गतिविधियां कम निवेश में स्वरोजगार शुरू करने का अवसर प्रदान कर रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही हैं।जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने महिला सशक्तिकरण और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। महिलाओं ने कहा कि बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनने, नई गतिविधियां सीखने और समाज में अपनी अलग पहचान बनाने का अवसर मिला है।
- -16 वर्षीय बालिका को सुरक्षित रेस्क्यू कर रुकवाया विवाह, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल को मिल रहा जमीनी रूपरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और वन एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार बाल अधिकारों की सुरक्षा और बाल विवाह की रोकथाम के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। इसी क्रम में सुकमा जिले के तोंगपाल क्षेत्र में प्रशासन की तत्परता से एक 16 वर्षीय बालिका का बाल विवाह रुकवाकर उसे सुरक्षित संरक्षण प्रदान किया गया।सुकमा जिले के मासापारा कावराकोपा क्षेत्र में बाल विवाह की सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम तत्काल मौके पर पहुंची। टीम ने दोनों पक्षों को बाल विवाह से होने वाले नुकसान और बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों की जानकारी दी। समझाइश के बाद युवक पक्ष ने विवाह स्थगित करने पर सहमति जताई।जानकारी के अनुसार सुकमा जिले के महारापारा हमीरगढ़ निवासी 16 वर्षीय बालिका को विवाह के उद्देश्य से युवक अपने साथ लेकर आया था। प्रशासनिक टीम ने बालिका की सुरक्षा और सर्वाेत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए उसे उसके गृहग्राम पहुंचाया। वहां परिजन उपस्थित नहीं मिलने पर बालिका को सुरक्षित रूप से सुकमा लाया गया। बाल कल्याण समिति के समक्ष आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने तक उसे सखी सेंटर में सुरक्षित आश्रय दिया गया है। कार्रवाई के दौरान घोषणा-पत्र लिया गया और पंचनामा तैयार किया गया। संबंधित पक्षों को बाल विवाह करने पर होने वाली वैधानिक कार्रवाई से भी अवगत कराया गया।जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी सुकमा और जिला बाल संरक्षण अधिकारी के मार्गदर्शन में हुई इस कार्रवाई में संरक्षण अधिकारी, सेक्टर सुपरवाइजर, चाइल्ड लाइन परियोजना समन्वयक सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ग्राम सचिव और रोजगार सहायक शामिल रहे।प्रशासन की इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई ने न केवल एक नाबालिग बालिका को बाल विवाह से बचाया, बल्कि उसके सुरक्षित भविष्य की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार और वन एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में जिले में बाल अधिकारों की रक्षा, बाल विवाह की रोकथाम और सुरक्षित बचपन के लिए प्रशासन लगातार सक्रियता से कार्य कर रहा है।
- रायपुर। रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि स्नेह, सुरक्षा और आत्मीयता का पावन संकल्प है। छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए यह पर्व दोगुनी खुशियां लेकर आया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की ‘महतारी वंदन योजना’ प्रदेश की लाखों महिलाओं के जीवन में आर्थिक संबल, आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान का नया सवेरा लिख रही है।धमतरी जिले के मुजगहन गांव की रहने वाली मंजू यादव के लिए इस बार का रक्षाबंधन बेहद खास है। महतारी वंदन योजना की राशि खाते में पहुंचते ही उनके चेहरे पर एक सहज मुस्कान तैर उठी। मंजू खुशी व्यक्त करते हुए कहती हैं, कि इस बार रक्षाबंधन पर अपने लिए नई साड़ी खरीदूंगी। एक नई साड़ी की यह खरीदारी केवल कपड़ों का चयन भर नहीं है—यह मंजू के अपने स्वाभिमान, निर्णय लेने की आजादी और अपनी छोटी-छोटी खुशियों को खुद पूरा करने के सुखद एहसास का प्रतीक है। अब उन्हें अपने व्यक्तिगत खर्चों या पर्व-त्योहारों की तैयारियों के लिए किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली नियमित सहायता राशि ने महिलाओं को केवल व्यक्तिगत खुशियां ही नहीं दी हैं, बल्कि उन्हें परिवार की निर्णय प्रक्रिया में भी मजबूत भागीदार बनाया है। धमतरी जिले की महिलाएं इस राशि का उपयोग वह घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने, बच्चों की शिक्षा एवं जरूरतों का ध्यान रखने,स्वास्थ्य एवं व्यक्तिगत देखभाल की वस्तुएं खरीदने, और तीज-त्योहारों की तैयारियों को उत्साहपूर्वक मनाने में कर रही हैं। इससे न केवल महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि ग्रामीण व स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी एक नया सहारा मिला है।त्योहार के इस अवसर पर धमतरी की बहनों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का दिल से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विष्णु भैया की सरकार हर कदम पर बहनों के साथ खड़ी है। रक्षाबंधन पर जहां बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा का धागा बांधती हैं, वहीं राज्य सरकार की इस संवेदनशील पहल ने बहनों को सुरक्षा, सम्मान और संबल का वास्तविक एहसास कराया है। शासन और जनता के बीच बने इस अटूट विश्वास ने यह साबित कर दिया है कि जब योजनाएं सीधे और पारदर्शी तरीके से हितग्राहियों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं रहतीं, बल्कि जीवन को बदलने का माध्यम बन जाती हैं। धमतरी की बहनों की खिलखिलाती मुस्कान आज पूरे प्रदेश के लिए एक संदेश है। जब सरकार का साथ और संबल मिलता है, तो सपनों और खुशियों को सच में नई उड़ान मिलती है।
- रायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली प्रवास के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच विभिन्न समसामयिक विषयों पर आत्मीय चर्चा हुई।
- -प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त-पोस्ट-मैट्रिक एवं टॉप क्लास हायर एजुकेशन छात्रवृत्ति के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबरमहासमुंद / दिव्यांगजन केंद्रीय छात्रवृत्ति योजना के तहत शिक्षा सत्र 2026-27 में नियमित रूप से अध्ययनरत दिव्यांग छात्र-छात्राओं के ऑनलाइन पंजीयन के लिए पोर्टल शुरू हो गया है। योजना के अंतर्गत कक्षा 9वीं एवं 10वीं के विद्यार्थियों को प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति, कक्षा 11वीं एवं 12वीं सहित आईटीआई, पॉलिटेक्निक, स्नातक, तकनीकी एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रम, स्नातकोत्तर तथा पीएचडी में अध्ययनरत विद्यार्थियों को पोस्ट-मैट्रिक एवं टॉप क्लास हायर एजुकेशन छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी।उप संचालक समाज कल्याण श्रीमती संगीता सिंह ने बताया कि इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक की दिव्यांगता 40 प्रतिशत या उससे अधिक होना आवश्यक है तथा उसके पास सक्षम चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र होना चाहिए। आवेदक छत्तीसगढ़ का मूल निवासी और विगत वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए। विद्यार्थी किसी अन्य छात्रवृत्ति योजना का लाभ नहीं ले रहा हो। प्री-मैट्रिक एवं पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए पालक या अभिभावक की वार्षिक आय 2.50 लाख रुपए तथा टॉप क्लास हायर एजुकेशन के लिए 8 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए।पात्र विद्यार्थी राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल https://scholarships.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 और संस्था सत्यापन की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 निर्धारित है। वहीं पोस्ट-मैट्रिक एवं टॉप क्लास हायर एजुकेशन छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 तथा संस्था सत्यापन की अंतिम तिथि 15 नवंबर 2026 है।ऑनलाइन आवेदन के बाद विद्यार्थी आवेदन का प्रिंट निकालकर निर्धारित तिथि से पहले संबंधित संस्था के प्रधान पाठक या प्राचार्य की अनुशंसा सहित आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कराएं। पोर्टल पर पंजीयन, संस्था पंजीयन अथवा संस्था केवायसी से संबंधित किसी भी समस्या के लिए समाज कल्याण विभाग से संपर्क किया जा सकता है।
- -बारिश के बीच ग्रामीणों को मिली राहत-सीएम हेल्पलाइन से कार्रवाईमहासमुंद / महासमुंद विकासखंड के ग्राम पंचायत खट्टा अंतर्गत क्षतिग्रस्त पुल एवं सड़क की समस्या को लेकर ग्रामीणों और स्कूली बच्चों द्वारा की गई मांग पर प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत क्षतिग्रस्त सड़क एवं पुल की अस्थायी मरम्मत का कार्य कराया गया है, जिससे क्षेत्र में आवागमन सुगम हुआ है और ग्रामीणों तथा स्कूली बच्चों को राहत मिली है।लगातार बारिश के दौरान पुल के ऊपर से पानी बहने के कारण यहां आवागमन प्रभावित होता था। यह मार्ग पटेवा से महासमुंद आने-जाने के साथ-साथ कोकड़ी शासकीय स्कूल, खट्टा प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल तथा रामखेड़ा प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए भी महत्वपूर्ण है।ग्रामीणों द्वारा सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराते हुए सड़क एवं पुल की समस्या के निराकरण की मांग की गई थी। शिकायत पर संबंधित विभाग द्वारा मौके की स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत तत्काल अस्थायी मरम्मत कराई गई। स्थानीय ग्रामीणों ने त्वरित मरम्मत कार्य के लिए प्रशासन एवं संबंधित विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया है।
- -जिला प्रशासन की पहल रंग लाई, स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण जीवन का अनुभव लेने पर्यटकों का बढ़ रहा रुझानरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल में जशपुर जिले में पर्यटन विकास को ग्रामीण आजीविका से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय पहल की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों एवं प्रमुख पर्यटन स्थलों पर विकसित किए जा रहे होमस्टे अब स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय का नया माध्यम बनने के साथ ही जशपुर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और ग्रामीण जीवनशैली को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं।जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल देशदेखा के समीप स्थित केरे गांव में विकसित ग्रामीण होमस्टे ने विशेष पहचान बनाई है। यहां 4 फरवरी 2026 को अंतरिक्ष यात्री एवं अशोक चक्र से सम्मानित ग्रुप कैप्टन श्री शुभांशु शुक्ला तथा 4 अप्रैल 2026 को राज्यपाल श्री रमेन डेका ने होमस्टे का अवलोकन किया। दोनों विशिष्ट अतिथियों ने देशदेखा समूह की महिलाओं द्वारा पारंपरिक विधि से तैयार व्यंजनों का स्वाद लिया और स्थानीय आदिवासी संस्कृति, जनजीवन तथा आतिथ्य परंपरा का अनुभव किया। इससे ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को नई पहचान मिली है।जशपुर में ग्रामीण एवं सामुदायिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए Homestays of India टीम द्वारा जिला प्रशासन के साथ मिलकर निरंतर कार्य किया जा रहा है। 25 जनवरी 2026 को Homestays of India, छत्तीसगढ़ सरकार एवं जशपुर जिला प्रशासन के बीच हुए समझौते के तहत केरे गांव को मॉडल कम्युनिटी टूरिज्म विलेज के रूप में विकसित करने की पहल की गई है।इस पहल का उद्देश्य पर्यटकों को केवल पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराने तक सीमित न रखते हुए उन्हें स्थानीय ग्रामीण जीवन, खान-पान, परंपराओं, संस्कृति और प्रकृति से सीधे जोड़ना है। इससे पर्यटन का लाभ सीधे ग्रामीण समुदाय तक पहुंच रहा है।जिले में वर्तमान में केरे, छिछली र, दनगरी, मयाली और घोघरा (बलाझार) सहित विभिन्न पर्यटन स्थलों पर होमस्टे विकसित एवं सूचीबद्ध हैं। इन होमस्टे के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को आवास एवं आतिथ्य सेवाओं के साथ स्थानीय भोजन, गाइडिंग, प्रकृति भ्रमण और अन्य पर्यटन गतिविधियों से आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।पर्यटकों के बढ़ते रुझान से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार सृजन, सांस्कृतिक संरक्षण एवं ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन को कम करने में भी सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।जशपुर के होमस्टे पर्यटकों को प्रकृति के करीब रहने का अनूठा अवसर प्रदान कर रहे हैं। यहां ट्रेकिंग, नेचर वॉक, बर्ड वॉचिंग, कैंपिंग, रॉक क्लाइंबिंग, ग्राम भ्रमण, कृषि कार्यों में सहभागिता, पारंपरिक भोजन एवं जनजातीय संस्कृति का अनुभव जैसी गतिविधियां उपलब्ध हैं।इन गतिविधियों के माध्यम से पर्यटक जशपुर के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ यहां की लोक परंपराओं, खान-पान, रहन-सहन और सामुदायिक जीवन को करीब से जान पा रहे हैं।जशपुर अपनी हरी-भरी वादियों, पहाड़ों, जलप्रपातों, नदियों, जंगलों और समृद्ध जनजातीय संस्कृति के कारण छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। होमस्टे मॉडल ने इस पर्यटन विकास को स्थानीय आजीविका से जोड़कर इसे अधिक समावेशी और टिकाऊ स्वरूप प्रदान किया है। जिला प्रशासन की इन पहलों से जशपुर में पर्यटन केवल घूमने-फिरने तक सीमित न रहकर ग्रामीण रोजगार, महिला सशक्तिकरण, स्थानीय उद्यमिता और सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम बन रहा है। आने वाले समय में होमस्टे एवं सामुदायिक पर्यटन के विस्तार से जशपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के और अधिक अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
- -बलौदाबाजार में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना की जगी उम्मीद, जल्द लिया जाएगा निर्णय-उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा के प्रयास ला रहे रंग-नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से की महत्वपूर्ण मुलाकातरायपुर / बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाई देने के लिए राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा के प्रयास अब सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जिले में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना को लेकर मंत्री श्री वर्मा ने नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर इस विषय पर विस्तार से चर्चा की।मुलाकात के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री श्री वर्मा ने बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में केंद्रीय विद्यालय की महत्ता और स्थानीय विद्यार्थियों के हित से जुड़े विभिन्न पहलुओं से केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया। उन्होंने प्रक्रिया को गति देते हुए जल्द से जल्द स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया।इस पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आश्वस्त किया कि इस विषय पर जल्द ही आवश्यक निर्णय लिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री के इस आश्वासन से जिले में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं।मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विद्यालय की स्थापना को लेकर केंद्र सरकार के स्तर पर बेहद सकारात्मक चर्चा हुई है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी जी द्वारा जल्द निर्णय लेने का आश्वासन मिलना पूरे जिले के लिए सुखद और उत्साहजनक है।बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना लंबे समय से क्षेत्रवासियों की प्रमुख मांग रही है। वर्तमान में बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को बड़े शहरों या अन्य जिलों का रुख करना पड़ता है। जिले में विद्यालय खुलने से स्थानीय विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर का शैक्षणिक माहौल उपलब्ध हो सकेगा।राज्य सरकार द्वारा विद्यालय के संचालन के लिए शुरुआती दौर में अस्थायी भवन की व्यवस्था के साथ-साथ भविष्य में स्थायी भवन निर्माण हेतु भूमि चिह्नित एवं आरक्षित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा की पहल पर जिले में शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर और आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। केंद्रीय विद्यालय की स्थापना की दिशा में आगे बढ़ी यह पहल जिले के समग्र शैक्षणिक विकास को एक नई गति प्रदान करेगी।
-
बालोद/जिले के गुरूर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत अरमरीकला में ग्राम पंचायत से प्रस्ताव व ग्रामीणों की सहमति से माता तालाब में गहरीकरण एवं साफ-सफाई का कार्य किया जा रहा है। जिला खनिज अधिकारी ने बताया कि माता तालाब में विगत 50 वर्ष से पानी भरे रहने के कारण साफ-सफाई नहीं हुआ था तथा पिचिंग का कार्य भी किया गया था एवं गर्मी में रोजगार गारंटी का कार्य भी कराया गया है। कार्यालयीन अभिलेखों के आधार पर माता तालाब खसरा नंबर 1232 कुल रकबा 19.73 हेक्टर में से 0.80 हेक्टर क्षेत्र का परिवहन अनुमति श्री सेवा सिंह ओबेराय को 2400 घनमीटर हेतु 1 माह के लिए, जो 21 जुलाई 2026 को समाप्त हुआ है। 2400 घनमीटर के विरूद्ध 800 घनमीटर मात्रा अनुमति दिया गया है। 20 जुलाई 2026 को ठेकेदार द्वारा खुदाई वाले जगह को समतल किया जा रहा था। ग्रामीणों और सरपंचों ने बताया गया कि ठेकेदार द्वारा स्वीकृत अवधि समाप्ति पश्चात परिवहन व गहरीकरण का कार्य नहीं किया गया। मौके पर कुछ हिस्से पर मिट्टी इकटठा करके रखा गया, जिसे समतल करने के लिए कहा गया है, जिसे बारिश बंद होने के पश्चात ठेकेदार से कराने हेतु निर्णय लिया गया है। जिला खनिज अधिकारी ने बताया कि किसी भी प्रकार से राॅयल्टी की हानि नही हुई है।
-
-'आनंदी कुटुम्ब समृद्ध ग्राम' कार्यक्रम में साझा किए विकास के अनुभव
बालोद। आदर्श ग्राम हिवरे बाजार (महाराष्ट्र) में 18 से 23 अगस्त 2026 तक आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय 'आनंदी कुटुम्ब समृद्ध ग्राम' कार्यक्रम में बालोद जिले की दो महिला सरपंचों ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। ग्राम पंचायत गुजरा की सरपंच श्रीमती पार्वती मंडावी और ग्राम पंचायत दुधली की सरपंच श्रीमती पिलेश्वरी नेताम ने राष्ट्रीय मंच पर जिले के ग्रामीण विकास और महिला स्वावलंबन के अनुभवों को साझा कर क्षेत्र का नाम रोशन किया।राष्ट्रीय मंच पर साझा किए नवाचार के अनुभवकार्यक्रम के दौरान परिवार व समाज में महिलाओं की भूमिका, महिला सशक्तिकरण, आर्थिक समृद्धि और ग्रामीण महिलाओं के जीवन स्तर को सुरक्षित व बेहतर बनाने पर गहन मंथन हुआ। दोनों महिला जनप्रतिनिधियों ने पद्मश्री पोपटराव पवार तथा आत्मीयता यूनिवर्सिटी (राजकोट) के चेयरमैन स्वामी त्यागवल्लभ जी की गरिमामयी उपस्थिति में मंच साझा किया। उन्होंने न केवल अपने गांव के विकास मॉडल की प्रस्तुति दी, बल्कि देश भर से आए प्रतिभागियों के प्रश्नों के सटीक उत्तर भी दिए।श्रीमती पार्वती मंडावी (सरपंच, गुजरा): उन्होंने स्व-सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उनके समूह द्वारा व्यापक स्तर पर आम के वृक्षारोपण का कार्य किया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने अपनी समूह की अन्य बहनों को भी हिवरे बाजार के विकास मॉडल का अध्ययन भ्रमण कराने की इच्छा जताई।श्रीमती पिलेश्वरी नेताम (सरपंच, दुधली): उन्होंने शासन द्वारा संचालित कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सराहना करते हुए बताया कि इससे युवाओं और युवतियों को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के बेहतरीन अवसर मिल रहे हैं। यह पहल महिलाओं और युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित हो रही है।प्रशासनिक मार्गदर्शन से मिली नई पहचानकलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा एवं जिला पंचायत सीईओ श्री सुनील चंद्रवंशी के कुशल मार्गदर्शन और निरंतर प्रोत्साहन के चलते जिले के पंचायत प्रतिनिधि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहे हैं। हिवरे बाजार में दोनों महिला सरपंचों की इस सहभागिता को जिले में पंचायती राज और महिला नेतृत्व की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। -
भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई द्वारा स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर रोक लगाने लगातार कार्रवाई की जा रही है। निगम आयुक्त के निर्देशानुसार 20 अगस्त 2026 को जोन क्रमांक-01 अंतर्गत वार्ड 07 राधिका नगर क्षेत्र में निगम की टीम द्वारा विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठानों में गीले एवं सूखे कचरे को पृथक नहीं रखने तथा सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग करते पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ चालानी कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान कुल 6700 रुपये का जुर्माना वसूल किया गया। कार्रवाई के तहत इंडियन कॉफी हाउस पर गीला-सूखा कचरा पृथक नहीं रखने पर 3000 रुपये, उठक बैठक शॉप पर खुले टायर में पानी जमा पाए जाने पर 1000 रुपये तथा सिंगल यूज प्लास्टिक पाए जाने पर 1000 रुपये, ला पिनो पिज्जा पर सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर 1000 रुपये तथा अमृत तुल्य चाय सेंटर पर सिंगल यूज प्लास्टिक पाए जाने पर 700 रुपये का जुर्माना लगाया गया।नगर निगम द्वारा प्रतिष्ठान संचालकों एवं नागरिकों से अपील की गई है कि गीले एवं सूखे कचरे को अलग-अलग रखें, सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करें तथा अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने में निगम का सहयोग करें। निगम द्वारा स्वच्छता नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध आगे भी लगातार चालानी कार्रवाई जारी रखी जाएगी। - -वाहन सहित 8.16 लाख रुपये से अधिक की सामग्री जब्त-कच्ची महुआ शराब एवं 200 किलो महुआ लाहन बरामदरायपुर। कवर्धा जिले में अवैध मदिरा के निर्माण, परिवहन एवं विक्रय पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से आबकारी विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में आबकारी विभाग ने 17 अगस्त 2026 को अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करते हुए अन्य प्रांत हरियाणा की मदिरा का अवैध परिवहन करने तथा कच्ची महुआ शराब का विक्रय करने वाले कुल दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई में मदिरा, महुआ लाहन एवं परिवहन में प्रयुक्त वाहन सहित कुल 8 लाख 16 हजार 310 रुपये की सामग्री जब्त की गई है। आबकारी आयुक्त श्री पदुम सिंह एल्मा एवं कलेक्टर के निर्देश तथा प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी श्री मुकेश पाण्डेय के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई की गई।प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी श्री मुकेश पाण्डेय ने बताया कि 17 अगस्त 2026 को आबकारी चेक पोस्ट चिल्फी के प्रभारी आबकारी उपनिरीक्षक श्री रामानंद दीवान द्वारा वाहनों की जांच की जा रही थी। इसी दौरान चार पहिया वाहन क्रमांक एचआर 36 एबी 0487 की विधिवत तलाशी लेने पर वाहन से 5.25 बल्क लीटर विदेशी मदिरा, जिस पर सेल फॉर हरियाणा अंकित था, बरामद की गई। मदिरा को विधिवत जब्त करते हुए आरोपी विक्रम सिंह पिता आजाद सिंह, उम्र 41 वर्ष, निवासी ग्राम अमलीडीह, पोस्ट बरगड़ा, जिला बेमेतरा के विरुद्ध छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915 यथा संशोधित की धारा 34(1)(क), 34(2), 59(क) एवं 36 के तहत गैर-जमानती प्रकरण कायम कर विवेचना में लिया गया है। उन्होंने बताया कि जिले में अवैध मदिरा के निर्माण, संग्रहण, परिवहन एवं विक्रय के विरुद्ध अभियान लगातार जारी रहेगा। विभाग द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों, प्रमुख मार्गों एवं संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाते हुए संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। उक्त कार्रवाई में आबकारी मुख्य आरक्षक श्री विद्यासिंह परमार, श्री इम्तियाज खान तथा आबकारी आरक्षक श्री भूपेंद्र साहू, सुश्री कामिनी भुआर्य, मेघा ध्रुव एवं सीमा नेताम का विशेष योगदान रहा।
- रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में बीएससी द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी विषय की परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना को कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने गंभीरता से लिया है। मामले की जानकारी मिलते ही मंत्री श्री नेताम ने विश्वविद्यालय प्रशासन को तत्काल जांच समिति गठित करने तथा दोषियों के विरुद्ध FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए। मंत्री के निर्देशों के परिपालन में मामले में FIR दर्ज कर दी गई है।मंत्री श्री नेताम ने कहा कि परीक्षाओं की निष्पक्षता और विद्यार्थियों के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रश्नपत्र लीक जैसी घटना अत्यंत गंभीर है और इसमें जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध जांच के बाद कड़ी एवं नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।उल्लेखनीय है कि बीएससी द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी विषय की आज आयोजित होने वाली परीक्षा के प्रश्नपत्र के लीक होने की सूचना विश्वविद्यालय प्रशासन को परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले प्राप्त हुई थी। सुबह 8:50 बजे कवर्धा से प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 10:30 बजे परीक्षा निरस्त करने का निर्णय लिया।मामले की जांच के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा 5 सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। समिति पूरे घटनाक्रम की जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों की जिम्मेदारी तय कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।कृषि मंत्री श्री नेताम ने कहा कि विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निरस्त परीक्षा की आगामी तिथि जल्द निर्धारित की जाएगी और परीक्षार्थियों को इसकी सूचना समय पर दी जाएगी।उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय के प्रश्नपत्रों की सेटिंग एवं छपाई विश्वविद्यालय स्तर पर की जाती है तथा प्रश्नपत्र संबंधित महाविद्यालयों को भेजे जाते हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र लीक होने की घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
- रायपुर। भारत सरकार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण नई दिल्ली तथा छत्तीसगढ़ राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं जिला आपदा प्रबंधन के संयुक्त तत्वावधान में बाढ़ से निपटने हेतु जिला स्तर पर बाढ़ मॉक एक्सरसाइज का आयोजन ग्राम बम्हनी में किया गया।कोंडागांव कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना के नेतृत्व में बम्हनी के लिए नियुक्त प्रभारी अधिकारी इंसिडेंट कमांडर, अपर कलेक्टर श्री चित्रकांत चाली ठाकुर, पर्यवेक्षक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री कपिल चंद्रा व सीआरपीएफ 188 बटालियन के डिप्टी कमांडर श्री मुकेश, नोडल अधिकारी डिप्टी कलेक्टर श्री किशोर शर्मा, डिप्टी कलेक्टर श्री लखेश्वर यादव, डिप्टी कलेक्टर श्री राजेन्द्र कौशिक व तहसीलदार मनोज रावटे कोन्डागांव व नायब तहसीलदार श्री नरेंद्र सिंह एव समस्त अधिकारीगण के सहयोग मॉक एक्सरसाइज का आयोजन कर बाढ़ से निपटने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश व जनजागरूकता अभियान चलाया गया।इस अभियान में पुलिस विभाग, जिला सेनानी और स्वास्थ्य विभाग, जिला आपदा मोचन प्रबंधन बल, रेड क्रॉस सोसाइटी आदि शामिल थे। प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़ इत्यादि से निपटने हेतु आपातकालीन योजना बनाकर त्वरित राहत और बचाव कार्य एवं चिकित्सा सहायता प्रदान करते हुए एक माँक ड्रिल का आयोजन किया गया। ग्राम बम्हनी के जवाई मुंडा तालाब पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला कर जान बचाया गया एवं तत्काल उन्हें चिकित्सा सुविधा हेतु प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बम्हनी ले जाया गया। इस दौरान विद्यालय के बच्चों को स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा सीपीआर की ट्रेनिंग भी दी गई। इस दौरान नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष श्री नरपति पटेल, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष श्री टोमेंद्र ठाकुर, ग्राम सरपंच सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने मॉक ड्रिल का अवलोकन किया।
- -बाढ़ आपदा से निपटने की तैयारियों को परखा, रामगढ़ में हुआ मॉक एक्सरसाइज-स्वास्थ्य, पेयजल, संचार और राहत शिविर तक व्यवस्थाओं का किया गया अभ्यासरायपुर। भारत सरकार के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशानुसार बाढ़ आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारियों को परखने के उद्देश्य से मुंगेली जिले में मॉक एक्सरसाइज का आयोजन किया गया। मुंगेली जिले के ग्राम रामगढ़ स्थित अमृत सरोवर में आयोजित बाढ़ आपदा अभ्यास के दौरान जिला प्रशासन सहित विभिन्न विभागों ने बाढ़ की स्थिति के दौरान राहत, बचाव एवं पुनर्व्यवस्था संबंधी कार्यों का अभ्यास किया। मॉक एक्सरसाइज में संभावित बाढ़ आपदा के दौरान विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया, संसाधनों की उपलब्धता और राहत-बचाव कार्यों की प्रभावशीलता को परखा गया।इस दौरान बाढ़ में फंसे लोगों का सफल रेस्क्यू कर आपदा के समय सतर्क रहने और सुरक्षित रहने के उपाय बताए गए। मॉकड्रिल में बाढ़ के दौरान बीच नदी में एक नाव पलटने का दृश्य प्रस्तुत किया गया। रेस्क्यू टीम ने तत्काल नाव से कुछ ही मिनटों में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इसके बाद उन्हें सीपीआर देकर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया तथा एंबुलेंस से बाढ़ राहत शिविर भेजा गया। मॉकड्रिल के दौरान पशुपालन विभाग ने भी पशुपालकों को बाढ़ के समय पशुओं को बीमारियों से बचाने के उपाय बताए।मुंगेली एसडीएम श्री अजय शतरंज ने बताया कि अभ्यास के दौरान नगर सेना एवं बचाव दल द्वारा आवश्यक उपकरणों एवं मोटर बोट के साथ बचाव कार्य की तैयारी का प्रदर्शन किया गया। जल संसाधन विभाग द्वारा बाढ़ के दौरान प्राप्त सूचनाओं के संकलन एवं नियंत्रण कक्ष में संचार व्यवस्था का अभ्यास किया गया। वन विभाग को प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने तथा आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई। प्लास्टिक की पानी की बोतलों, केले के थंभों और अन्य तैरने योग्य वस्तुओं की मदद से सुरक्षित स्थान तक पहुंचा जा सकता है। सर्पदंश की स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने की सलाह दी गई।स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभ्यास स्थल पर चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, जीवन रक्षक दवाइयों एवं आवश्यक उपकरणों के साथ चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने का अभ्यास किया गया। लोक निर्माण विभाग द्वारा मार्गों से अवरोध हटाने एवं आवागमन सुचारू बनाए रखने तथा पुलिस विभाग द्वारा वायरलेस संचार, यातायात एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने की व्यवस्थाओं को परखा गया। पशु चिकित्सा विभाग द्वारा प्रभावित पशुओं के उपचार, विद्युत विभाग द्वारा विद्युत व्यवस्था, खाद्य विभाग द्वारा भोजन पैकेट, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा पेयजल एवं जल निकासी तथा दूरसंचार विभाग द्वारा संचार व्यवस्था से संबंधित तैयारियों का अभ्यास किया गया। परिवहन विभाग द्वारा राहत एवं बचाव कार्यों के लिए मिनी बस की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई।राजस्व विभाग द्वारा राहत शिविर के संचालन, प्राप्त सूचनाओं के संकलन एवं वरिष्ठ अधिकारियों तक जानकारी पहुंचाने तथा प्रभावित लोगों को सहायता उपलब्ध कराने की कार्यवाही का अभ्यास किया गया। पंचायत एवं नगरीय निकाय द्वारा प्रभावित लोगों के ठहरने एवं आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था को भी मॉक ड्रिल में शामिल किया गया। मॉक एक्सरसाइज के दौरान रिलीफ कैम्प, चिकित्सालय जैसे महत्वपूर्ण आपदा प्रबंधन बिंदुओं को भी अभ्यास में शामिल किया गया। जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न विभागों के नोडल एवं पर्यवेक्षण अधिकारियों को निर्धारित जिम्मेदारियों के अनुरूप आवश्यक अमले एवं उपकरणों के साथ अभ्यास में शामिल किया गया। इस दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नवनीत कौर छाबड़ा, डिप्टी कलेक्टर श्री मायानंद चंद्रा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और एसडीआरएफ टीम तथा नगर सैनिक मौजूद रहे।
- -बाढ़ जैसी आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों का किया गया अभ्यास, ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने का किया प्रदर्शनरायपुर। कवर्धा जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ एवं प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आज बोड़ला विकासखंड के क्षीरपानी जलाशय एवं ग्राम भोंदा पुल के समीप मॉकड्रिल आयोजित किया गया। मॉकड्रिल के दौरान अत्यधिक बारिश से बाढ़ जैसी स्थिति निर्मित होने, जलाशय के ओवरफ्लो होने तथा ग्रामीणों के गहरे पानी में फंसने की काल्पनिक स्थिति तैयार कर मॉकड्रील किया गया। इस दौरान राज्य से टीम भी वीड़ियों कांन्फ्रेस के माध्यम से जुड़ी रही।मॉकड्रिल के तहत मैकल पर्वतीय क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के कारण क्षीरपानी जलाशय के अधिकतम जलभराव क्षमता तक पहुंचने और ओवरफ्लो की स्थिति निर्मित होने की सूचना दी गई। इस दौरान चार ग्रामीणों के जलाशय के गहरे पानी में फंसने तथा तारेगांव जंगल मार्ग पर ग्राम भोंदा के समीप पुल बाढ़ के तेज बहाव से क्षतिग्रस्त होने की स्थिति का अभ्यास किया गया। पुल क्षतिग्रस्त होने से आसपास के कई गांवों का संपर्क बाधित होने की काल्पनिक स्थिति निर्मित की गई। स्थिति की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों द्वारा जिला बाढ़ कंट्रोल कक्ष को सूचना देने और तत्काल राहत-बचाव कार्य शुरू करने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया। अपर कलेक्टर श्री रामप्रसाद आँचला ने स्थिति का संज्ञान लेते हुए जिला बाढ़ आपदा एवं प्रबंधन टीम में शामिल नगर सेना एवं एनडीआरएफ की संयुक्त टीम को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया। सुबह 10 बजे संयुक्त दल क्षीरपानी जलाशय पहुंचा और राहत एवं बचाव अभियान प्रारंभ किया।मॉकड्रिल के दौरान नगर सेना, एनडीआरएफ के विशेषज्ञ जवानों, जिला प्रशासन के अधिकारियों तथा विभिन्न विभागों की रैपिड एक्शन टीमों ने आपसी समन्वय के साथ राहत-बचाव कार्यों का अभ्यास किया। जलाशय में फंसे चार ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने तथा ग्राम भोंदा में क्षतिग्रस्त पुल के दूसरी ओर अलग-थलग हुए ग्रामीणों तक वैकल्पिक पुल बनाकर बाहर निकालने, आवश्यक सहायता पहुंचाने की कार्रवाई का प्रदर्शन किया गया। इस दौरान आपदा की स्थिति में सूचना प्राप्त होने से लेकर राहत एवं बचाव दल की तैनाती, प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने तथा आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास किया गया। मॉकड्रिल के दौरान बोड़ला एडीएम श्री आशुतोष शर्मा, तहसीलदार श्री हुलेश्वर पटेल सहित अन्य विभाग के अधिकारी मौके पर उपस्थित रहे। विभिन्न विभागों द्वारा आपदा के दौरान अपने-अपने दायित्वों के अनुरूप की जाने वाली कार्रवाई का भी अभ्यास किया गया।
- -एसडीआरएफ, आपदा मित्रों और स्थानीय तैराकों ने संयुक्त रूप से चलाया बचाव अभियान, कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल और एसपी लक्ष्य विनोद शर्मा ने किया निरीक्षणरायपुर । खैरागढ़ जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच बाढ़ जैसी आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए जिला प्रशासन द्वारा छुईखदान क्षेत्र में बाढ़ आपदा प्रबंधन की मॉकड्रिल आयोजित की गई। मॉकड्रिल के दौरान जिला बाढ़ आपदा नियंत्रण कक्ष को सूचना दी गई कि बाढ़ के कारण प्रभावित लोगों को ले जा रही नाव पलट गई है और चार लोग पानी में फंस गए हैं। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राहत एवं बचाव दलों को घटनास्थल के लिए रवाना किया।भारतीय मौसम विज्ञान विभाग से विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए प्राप्त भारी वर्षा एवं बाढ़ की चेतावनी को देखते हुए जिला, अनुविभाग एवं तहसील स्तर पर संचालित बाढ़ आपदा राहत केन्द्रों को पहले से ही सतर्क किया गया था। इसी दौरान छुईखदान बाढ़ आपदा नियंत्रण कक्ष से जिला बाढ़ आपदा नियंत्रण कक्ष को सूचना दी गई कि बाढ़ के कारण नाव पलट गई है और प्रभावित लोगों को तत्काल बचाव की आवश्यकता है।सूचना प्राप्त होते ही जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के पदेन अधिकारियों ने बिना समय गंवाए बचाव कार्य शुरू कराया। स्थानीय आपदा मित्रों एवं स्थानीय तैराकों को तत्काल बचाव कार्य के लिए सक्रिय किया गया। अनुविभागीय अधिकारी ने तहसील स्तर के नोडल अधिकारी से संपर्क स्थापित कर आवश्यक निर्देश प्रसारित किए। साथ ही राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों को घटनास्थल पर तत्काल पहुंचने के निर्देश दिए गए।मॉकड्रिल के दौरान बाढ़ के तेज बहाव में फंसे चार लोगों के बचाव की कार्रवाई का प्रदर्शन किया गया। एसडीआरएफ, आपदा मित्रों एवं स्थानीय तैराकों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाते हुए चारों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। तेज बहाव और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच बचाव दल ने रेस्क्यू बोट, रस्सियों और सुरक्षा उपकरणों की मदद से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।रेस्क्यू के दौरान एक व्यक्ति की हालत गंभीर दर्शाई गई। पानी में फंसने के कारण उसके बेहोश होने पर मौके पर ही प्राथमिक उपचार और सीपीआर देने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। इसके बाद सभी प्रभावितों को राहत शिविर में स्थानांतरित किया गया तथा गंभीर रूप से प्रभावित व्यक्ति को बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए सिविल अस्पताल पहुंचाने की कार्रवाई की गई।मॉकड्रिल के माध्यम से आपदा की स्थिति में सूचना प्राप्त होने से लेकर रेस्क्यू, प्राथमिक उपचार, राहत शिविर में स्थानांतरण और अस्पताल तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को प्रदर्शित किया गया। इसका उद्देश्य राहत एवं बचाव दलों की तत्परता तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की वास्तविक स्थिति को परखना रहा।मॉकड्रिल के दौरान कलेक्टर श्री इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल और पुलिस अधीक्षक श्री लक्ष्य विनोद शर्मा ने घटनास्थल पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने रेस्क्यू टीम द्वारा अपनाई जा रही प्रक्रिया, बचाव उपकरणों के उपयोग, प्रभावितों को सुरक्षित निकालने तथा प्राथमिक उपचार की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।कलेक्टर श्री चंद्रवाल ने अधिकारियों और बचाव दल से पूरी कार्रवाई की जानकारी लेते हुए आपदा की वास्तविक स्थिति में सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ जैसी आपदा में प्रत्येक मिनट महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय, पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षित बचाव दल की उपलब्धता से जनहानि को रोका जा सकता है।पुलिस अधीक्षक श्री लक्ष्य विनोद शर्मा ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पुलिस की भूमिका, सुरक्षा व्यवस्था और बचाव दलों के साथ समन्वय का निरीक्षण किया। उन्होंने आपदा की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों तक सुरक्षित पहुंच, भीड़ नियंत्रण तथा राहत एवं बचाव दलों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया।मॉकड्रिल में जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, आपदा मित्र, स्थानीय तैराक, पुलिस, स्वास्थ्य, राजस्व एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच आपसी समन्वय की पूरी प्रक्रिया को प्रदर्शित किया गया। सूचना प्राप्त होने से लेकर रेस्क्यू टीम की तैनाती, प्रभावितों के बचाव, प्राथमिक उपचार, राहत शिविर में स्थानांतरण तथा गंभीर व्यक्ति को अस्पताल भेजने तक की कार्रवाई को क्रमबद्ध तरीके से परखा गया।इसके बाद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं की बहाली की प्रक्रिया का भी प्रदर्शन किया गया। सड़क, दूरसंचार और अन्य आवश्यक सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए संबंधित विभागों को निर्देश देने तथा उनके कार्यों की समीक्षा करने की प्रक्रिया भी मॉकड्रिल में शामिल रही। इससे वास्तविक आपदा के समय विभागवार जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने की तैयारियों का आकलन किया गया।मानसून के दौरान संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा रेस्क्यू बोट, लाइफ जैकेट, प्रशिक्षित तैराक, आपदा मित्र और बचाव दलों को तैयार रखा गया है। मॉकड्रिल के माध्यम से उपलब्ध संसाधनों की उपयोगिता, बचाव दलों की तत्परता और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की स्थिति को परखा गया, ताकि वास्तविक आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्य बिना किसी देरी के संचालित किए जा सकें।जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि भारी बारिश के दौरान नदी, नाले, बांध और जलभराव वाले क्षेत्रों के पास जाने से बचें। तेज बहाव वाले पानी को पार करने का प्रयास न करें और बच्चों को ऐसे स्थानों से दूर रखें। मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों को गंभीरता से लें और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल डायल 112 अथवा जिला बाढ़ आपदा नियंत्रण कक्ष को सूचना दें।मॉकड्रिल के दौरान अपर कलेक्टर श्री सुरेंद्र कुमार ठाकुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री रुपेश डांडे, अपर कलेक्टर श्रीमती सुमन राज, एसडीएम छुईखदान श्री अविनाश ठाकुर, डिप्टी कलेक्टर द्वय श्रीमती पूजा पींचा, सुश्री रेणुका रात्रे सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी, एसडीआरएफ की टीम, आपदा मित्र, स्थानीय तैराक एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
- -वैद्य फूड्स से लिया गया पनीर का नमूना असुरक्षितमहासमुंद / आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं कलेक्टर श्री विनय कुमार लगेह के निर्देशानुसार जिले में एनालॉग पनीर पर प्रभावी रोक लगाने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा लगातार सघन जांच एवं प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है। अभिहित अधिकारी श्री उमेश वर्मा के मार्गदर्शन में जिले के विभिन्न प्रतिष्ठानों से पनीर एवं अन्य दुग्ध उत्पादों के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच कराई जा रही है।विगत दिनों वैद्य फूड्स, महासमुंद से लिया गया पनीर का नमूना असुरक्षित पाया गया। वैद्य फूड्स से लिए गए पनीर के नमूने के असुरक्षित पाए जाने पर अधिगृहित खाद्य पदार्थों को नियमानुसार नष्ट कराया गया। साथ ही संबंधित फैक्ट्री को सील करने की कार्रवाई की गई।इस माह अब तक लिए गए नमूनों में क्षीरसागरम स्वीट्स, सरायपाली से पनीर एवं पेड़ा, यश फैमिली रेस्टोरेंट, बागबाहरा से पनीर तथा हर्षद मिष्ठान से पेड़ा की जांच रिपोर्ट प्राप्त होना लंबित है तथा कश्यप ऑर्गेनिक, बसना से लिए गए पनीर एवं दही के नमूने अवमानक पाए गए हैं।विभाग द्वारा जिले में दूध एवं दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता पर सतत निगरानी रखी जा रही है। प्राप्त फेल रिपोर्ट के आधार पर संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। लंबित नमूनों की जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा जिले में दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए आगे भी लगातार सघन जांच एवं प्रवर्तन कार्रवाई जारी रहेगी।
















.jpeg)











