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- राजनांदगांव । केन्द्र सरकार की रैंप योजना अंतर्गत बुनकर केन्द्र लखोली में हथकरघा क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों हेतु सेक्टर स्पेसिफिक तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय भारत सरकार तथा राज्य शासन की उद्यमिता प्रोत्साहन पहल के तहत सीएसआईडीसी रायपुर के मार्गदर्शन में चॉइस कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 32 महिला उद्यमी शामिल हुए। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना, स्वरोजगार के अवसर सृजित करना तथा प्रतिभागियों को व्यवहारिक एवं तकनीकी ज्ञान प्रदान करना था। प्रशिक्षण के पहले दिन प्रतिभागियों से प्रत्यक्ष संवाद कर उनकी वर्तमान गतिविधियों, कार्यप्रणाली एवं चुनौतियों की जानकारी ली गई। इसके पश्चात मास्टर ट्रेनर द्वारा वन-टू-वन मार्गदर्शन के माध्यम से संस्थागत ढांचे, अनुभवों एवं भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। दूसरे दिन केन्द्र सरकार की विभिन्न योजनाओं, सब्सिडी प्रावधानों, ईडीपी प्रशिक्षण, कौशल विकास, मार्केटिंग रणनीतियों तथा उद्यम पंजीयन की आवश्यकताओं पर विस्तार से जानकारी दी गई।प्रशिक्षण के अंतिम दिवस आयात-निर्यात की रणनीति, विभागीय समन्वय तथा भविष्य की मांगों के अनुरूप साड़ी, सूट, कुर्ता, सहित अन्य रेडीमेड वस्त्रों के निर्माण पर केंद्रित रहा। जिससे बुनकरों को अतिरिक्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सके। इस अवसर पर जिला उद्योग केन्द्र के प्रबंधक श्री प्रणय बघेल ने प्रशिक्षुओं को विभिन्न शासकीय योजनाओं के लाभ, ऋण प्रणाली, सब्सिडी, वर्किंग कैपिटल एवं प्रस्तुति संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। पूर्व संचालित ईडीपी लीप बैच के प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी, प्रेरणादायी एवं मार्गदर्शक बताया। कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर पारूल पाण्डेय, डिविजनल समन्वयक श्री लोकेश सिन्हा एवं श्री तुषार साहू की सक्रिय भूमिका रही। समापन अवसर पर चॉइस कंसलेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सभी प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
- - जनमन पत्रिका पढ़कर विद्यार्थियों ने जाहिर की खुशी- जनमन पत्रिका शासन की योजनाओं की अच्छा संकलनराजनांदगांव । जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रकाशित छत्तीसगढ़ जनमन पत्रिका और जी राम जी का डिजिटल लाईब्रेरी राजनांदगांव और शासकीय कमला देवी राठी महिला महाविद्यालय राजनांदगांव में नि:शुल्क वितरण किया गया। प्राचार्य शासकीय कमला देवी राठी महिला महाविद्यालय राजनांदगांव डॉ. ओमकार लाल श्रीवास्तव ने जनमन पत्रिका नि:शुल्क मिलने पर प्रसन्नता जाहिर की। उन्होंने कहा कि पत्रिका शासन की योजनाओं का अच्छा संकलन है एवं युवाओं व जनमानस के लिए उपयोगी है। प्राध्यापक डॉ. जय सिंह साहू एवं डॉ. कृष्ण कुमार द्विवेदी ने जनमन पत्रिका एवं ब्रोसर की प्रशंसा की। जनमन पत्रिका पढ़कर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं ने खुशी जाहिर की। श्री मुकेन्द्र कुमार ने बताया कि वे एसआई एवं छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए नियमित रूप से डिजिटल लाईब्रेरी में अध्ययन करने के लिए आते हैं। श्री मुकेन्द्र ने कहा कि जनमन पत्रिका प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए लाभदायक है। इसमें संकलित समाचार, संस्कृति, पर्यटन एवं करेंट अफेयर्स, शासन की लोककल्याणकारी योजनाओं की जानकारी उपयोगी है। राज्य शासन लोककल्याण और विकास के क्षेत्र में लिए गए निर्णयों के संबंध में अद्यतन जानकारी मिलती है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा यह पत्रिका नि:शुल्क वितरित की जा रही। इस किताब में प्रमाणिक तथ्यों का संकलन है।डिजिटल लाईब्रेरी में अध्ययन करने आए श्री सौरभ सम्राट ने कहा कि जनमन पत्रिका में नई शिक्षा नीति, खनिज संपदा, औद्योगिक नीति सहित विकसित छत्तीसगढ़ परिकल्पना की जानकारी का समावेश किया गया है। प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह किताब महत्वपूर्ण है। इसमें शासन की योजनाओं की अच्छी जानकारी दी गई है। इसी तरह शासकीय कमला देवी राठी महिला महाविद्यालय राजनांदगांव में अध्ययनरत विद्यार्थियों ने भी जनमन पत्रिका पढ़कर खुशी जाहिर की। उल्लेखनीय है कि जनमन पत्रिका में महिलाओं को रोजगार मूलक कार्यों के जरिए स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आहार-पोषण के लिए 70 लाख महिलाओं को मिलने वाली प्रति माह 1 हजार रूपए की जानकारी दी गई है। इसी तरह जनमन पत्रिका में छत्तीसगढ़ की संस्कृति, पर्यटन, खेल, औद्योगिक विकास, डिजिटल प्रशासन, कुटीर उद्योग, छत्तीसगढ़ के खनिज और धार्मिक स्थलों की जानकारी तथा शासन के विभिन्न योजनाओं की एकत्रित जानकारी दी गई है। जी राम जी ब्रोसर में 125 दिनों के रोजगार की नई गारंटी की जानकारी दी गई।
- राजनांदगांव । कृषि विभाग के माध्यम से मृदा की उर्वरता को बनाये रखते हुए टिकाऊ खेती के साथ कृषकों की आय में वृद्धि हेतु जिले में जैविक खेती, परम्परागत कृषि विकास योजना एवं राष्ट्रीय प्राकृतिक मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं संचालित की जा रही है। जिले में वर्ष 2023 की स्थिति में मात्र 500 हेक्टेयर प्रमाणित जैविक खेती का रकबा था, जो वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में बढ़कर 3260 हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। कृषकों के उत्पादों के प्रमाणीकरण हेतु 3 वर्ष की परिवर्तन अवधि में प्रमाणीकरण प्रक्रिया पूर्ण करने हेतु रिजनल काउंसिल द्वारा प्रमाण पत्र प्रदाय किया गया है।प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से जिले में सिंचाई क्षेत्र में वृद्धि एवं जल उपयोग दक्षता को बढ़ाने में कारगरप्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना अंतर्गत विगत वर्षों में ड्रीप एवं स्प्रिंकलर के माध्यम से 22405 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई किया जाता रहा है, जो वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में बढ़कर 24194 हेक्टेयर हुआ है। साथ ही किसान समृद्धि योजना के माध्यम से नलकूप खनन एवं प्रतिस्थापन, सौर सुजला योजना के माध्यम से सोलर पैनल स्थापना तथा शाकम्भरी योजना के माध्यम से सिंचाई पंप वितरण कर 16988 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई रकबा का विस्तार हुआ है। साथ ही जल संरक्षण एवं संवर्धन संरचना (मेसनरी पक्का चेकडेम) द्वारा वर्ष 2024-25 में 15 चेकडेम निर्माण द्वारा 330 हेक्टेयर तथा वर्ष 2025-26 में 12 चेकडेम निर्माण से 264 हेक्टेयर वर्षा आश्रित क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा का विस्तार किया गया है।राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा मिशन तथा राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के माध्यम से दलहन एवं तिलहन आत्मनिर्भरता का किया जा रहा प्रयासराजनांदगांव जिले में विगत वर्ष सोयाबीन सहित अन्य तिलहन फसलों का रकबा मात्र 2100 हेक्टेयर था। जिसे वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के माध्यम फसल प्रदर्शन एवं प्रमाणित बीज वितरण की सुदृढ़ व्यवस्था कर 3200 हेक्टेयर तक वृद्धि किया गया। इसी प्रकार रबी में चना, उड़द, मूंग एवं तिवड़ा फसलों का रकबा जहां विगत वर्ष तक 55000 था। जिसे वर्ष 2025-26 में बढ़ाकर 60000 हेक्टेयर किया गया।फसल चक्र परिवर्तन अभियान के माध्यम से ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर दलहन, तिलहन एवं मक्का फसल का बढ़ा रकबाजिला राजनांदगांव में जल संरक्षण एवं संवर्धन को दृष्टिगत रखते हुए मिशन जल रक्षा का संचालन किया जा रहा है। जिसके माध्यम से जिले में अधिक जल मांग वाली फसलों जैसे ग्रीष्मकालीन धान को हतोत्साहित कर कम जल मांग एवं अधिक मुनाफा देने वाली फसलें चना, उड़द, मूंग, तिवड़ा, मटर एवं मक्का को प्रोत्साहित किया गया। जिसका परिणाम यह रहा कि विगत वर्ष की स्थिति में 9336 हेक्टेयर ग्रीष्मकालीन धान का रकबा था। जिसे वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में अभियान के माध्यम से जनजागरूकता व मैदानी अधिकारियों के प्रयास से कम करते हुए अद्यतन 4000 हेक्टेयर तक सीमित किया जा चुका है।
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रायपुर । प्रयोगशाला तकनीशियन भर्ती-2023 के अंतर्गत चयन की प्रक्रिया पूरी करते हुए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 26 अभ्यर्थियों की अंतिम चयन सूची जारी कर दी गई है। यह सूची छत्तीसगढ़ व्यापम द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा एवं दस्तावेज सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में चयनित 251 अभ्यर्थियों में से कुछ अभ्यर्थियों द्वारा लिखित पद त्याग, काउंसलिंग में अनुपस्थिति अथवा नियुक्ति आदेश जारी होने के बाद कार्यभार ग्रहण नहीं करने के कारण 28 प्रयोगशाला तकनीशियन पद रिक्त हुए थे।इन्हीं रिक्त पदों के विरुद्ध प्रतीक्षा सूची से पात्र अभ्यर्थियों का चयन किया गया है।जारी सूची में सामान्य वर्ग के 21 अभ्यर्थियों एवं भूतपूर्व सैनिक कोटे से 5 अभ्यर्थियों को शामिल किया गया है। चयन सूची में महिला एवं पुरुष दोनों वर्गों के अभ्यर्थी सम्मिलित हैं। कुछ पद आरक्षित श्रेणी में पात्र अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होने के कारण रिक्त रखे गए हैं। चयनित अभ्यर्थियों को शासकीय महाविद्यालयों में पदस्थापना हेतु काउंसलिंग 12 फरवरी 2026 को कार्यालय आयुक्त, उच्च शिक्षा, संचालनालय, तृतीय तल, इन्द्रावती भवन, नवा रायपुर में प्रातः 10:30 बजे उपस्थित होना अनिवार्य होगा। काउंसलिंग के दौरान अभ्यर्थियों को आवश्यक दस्तावेजों सहित उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। - - श्रीमती मधु के जीवन में प्रधानमंत्री आवास योजना से जगी नई उम्मीदराजनांदगांव । राजनांदगांव नगर पालिक निगम के वार्ड क्रमांक-3 मोतीपुर में निवासरत श्रीमती मधु वर्मा ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का साहस दिखाया। पति के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। दो बेटियों के पालन-पोषण के लिए वे एक निजी स्कूल में रसोइये के रूप में कार्य करते हुए परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। किराए के मकान में रहने के दौरान आर्थिक तंगी उनके जीवन का हिस्सा रही। श्रीमती मधु बताती हैं कि स्कूल में छुट्टी के दिनों में आय कम हो जाती थी, जिससे किराया देने की चिंता बनी रहती थी। उन्हें हमेशा यह डर बना रहता था कि कहीं समय पर किराया न देने पर मकान मालिक घर खाली करने के लिए न कह दे। ऐसे हालात में वे अक्सर अपने सपनों के घर की कल्पना ही कर पाती थीं। इस बीच उनकी बड़ी बेटी सुजाता एक निजी कंपनी में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत हुई। मां-बेटी ने मिलकर थोड़े-थोड़े पैसे बचाए और एक छोटा सा भूखंड खरीदा। श्रीमती मधु वर्मा ने बताया कि जमीन लेने के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत आवेदन किया। कुछ ही दिनों में उनके आवास निर्माण की स्वीकृति मिल गई। स्वीकृति मिलने के बाद पूरे परिवार ने उत्साह के साथ अपने सपनों का घर बनाने की शुरूआत की। वास्तुविद के कुशल मार्गदर्शन में जल्द ही एक सुंदर, सर्वसुविधायुक्त और आकर्षक घर का निर्माण पूरा हो गया। आज श्रीमती मधु वर्मा ने बताया कि वे टाइल्स से सजे अपने पक्के घर में रहते हुए गर्व और संतोष का अनुभव करती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है। अपने सपनों का घर मिलने पर वे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया है।
- -आदिवासी महिलाएं बनी आत्मनिर्भररायपुर,। प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन के अंतर्गत जिला धमतरी के ग्राम दुगली में स्थापित वन- धन विकास केंद्र (VDVK) आज महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता का सफल उदाहरण बन गया है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के मार्गदर्शन में संचालित यह केंद्र वनोपज के मूल्य संवर्धन के माध्यम से आदिवासी महिलाओं को रोजगार और सम्मानजनक आय प्रदान कर रहा है।दुगली वन धन विकास केंद्र के स्व-सहायता समूहों के संघ के रूप में कार्य कर रहा है। एक प्रमुख समूह संचालन की जिम्मेदारी संभालता है, जबकि अन्य समूह आवश्यकता और ऑर्डर के अनुसार उत्पादन कार्य में सहयोग करते हैं। केंद्र में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर मिला है।केंद्र में वर्तमान में लगभग 25 विभिन्न प्रकार के औषधीय और खाद्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें हर्बल पाउडर, स्वास्थ्य पेय और अन्य हर्बल उत्पाद शामिल हैं। सभी उत्पाद गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए बनाए जाते हैं तथा आयुष और खाद्य सुरक्षा विभाग से आवश्यक लाइसेंस प्राप्त हैं।विशेष रूप से एलोवेरा से तैयार साबुन, क्रीम, बॉडी वॉश और हैंडवॉश जैसे पर्सनल केयर उत्पादों ने बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई है। इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे महिलाओं की आय में भी वृद्धि हुई है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा महिलाओं को प्रशिक्षण, मशीनरी सहायता, ब्रांडिंग और विपणन की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके परिणामस्वरूप उत्पाद राज्य स्तरीय मेलों, विभागीय नेटवर्क और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यापक बाजार तक पहुँच रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में केंद्र का वार्षिक कारोबार 74 लाख 62 हजार 156 रुपए दर्ज किया गया, जो इसकी सफलता को दर्शाता है।'छत्तीसगढ़ हर्बल' ब्रांड के अंतर्गत तैयार उत्पाद अब विभिन्न मार्ट, चयनित आउटलेट्स और ऑनलाइन माध्यमों पर उपलब्ध हैं तथा आयुष विभाग और पर्यटन मंडल को नियमित रूप से आपूर्ति की जा रही है।दुगली वन धन विकास केंद्र आज केवल एक उत्पादन इकाई नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता और सामाजिक बदलाव की प्रेरक कहानी बन चुका है, जो यह दर्शाता है कि शासकीय योजनाओं और सामूहिक प्रयास से ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता का सपना साकार किया जा सकता है।
- बीजापुर। युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आगामी 16 एवं 17 फरवरी 2026 को लाइवलीहुड कॉलेज आड़ावाल, जगदलपुर में संभाग स्तरीय रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है।रोजगार मेले में जिला बीजापुर के अंतर्गत संचालित शासकीय आईटीआई बीजापुर, भोपालपटनम, उसूर एवं भैरमगढ़ की संस्थाओं से उत्तीर्ण प्रशिक्षणार्थी भाग ले सकेंगे। जिन प्रशिक्षणार्थियों ने रोजगार मेले हेतु पूर्व में पंजीयन कराया है, वे अपने समस्त आवश्यक दस्तावेजों के साथ मेले में उपस्थित होकर सहभागिता कर सकते हैं। वहीं जिन प्रशिक्षणार्थियों का अब तक पंजीयन नहीं हुआ है वे अपने नजदीकी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान आईटीआई, से संपर्क कर पंजीयन कराकर संभाग स्तरीय रोजगार मेले में भाग ले सकते हैं।
- -छत्तीसगढ़ के विकास को रफ्तार दे रहा एनएचएआईरायपुर। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) अपने गठन के 31वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। छत्तीसगढ़ जैसे तेजी से विकसित होते राज्य के लिए सड़कें केवल आवागमन का साधन मात्र नहीं हैं, बल्कि ये आर्थिक प्रगति की धमनियां हैं। पिछले वर्षों में एनएचएआई ने राज्य के भौगोलिक नक्शे पर डामर और कांक्रीट से विकास की जो गाथा लिखी है, उसने छत्तीसगढ़ को देश के लॉजिस्टिक और औद्योगिक हब के रूप में मजबूती से स्थापित किया है। आज छत्तीसगढ़ की सड़कें केवल गंतव्य तक पहुँचने का रास्ता नहीं, बल्कि राज्य के सुनहरे भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं।वैश्विक व्यापार की लाइफलाइन - एनएच-53छत्तीसगढ़ से गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-53 जो एशियाई मार्ग-46 का एक अभिन्न हिस्सा है, वर्तमान में राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। महाराष्ट्र सीमा से शुरू होकर राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई, रायपुर, आरंग और सरायपाली होते हुए ओडिशा सीमा तक फैला यह शानदार फोरलेन खंड राज्य की औद्योगिक क्षमता को वैश्विक पहचान दिला रहा है। इसी मार्ग पर आरंग के पास साल 2019 में महानदी पर बना एक किलोमीटर लंबा छत्तीसगढ़ का पहला भव्य सिक्स-लेन ब्रिज इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट नमूना है। दुर्ग बायपास से लेकर सीमावर्ती क्षेत्रों तक फैला यह राजमार्ग व्यापारिक सुगमता को नई ऊंचाइयां दे रहा है।राजधानी और औद्योगिक केंद्रों का 'गोल्डन लिंक'एनएचएआई ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर, न्यायधानी बिलासपुर और ऊर्जाधानी कोरबा को आपस में जोड़ने के लिए अभूतपूर्व कार्य किया है। राष्ट्रीय राजमार्ग-130 के माध्यम से रायपुर- से बिलासपुर और वहां से पथरापाली-कटघोरा तक की फोरलेन सड़क ने सफर के समय को आधा कर दिया है। इसी क्रम में चांपा-कोरबा-कटघोरा खंड (NH-149B) ने कोयला और ऊर्जा क्षेत्र के परिवहन को नई गति प्रदान की है। उत्तर में अंबिकापुर और दक्षिण में धमतरी तक फैले सड़कों के इस जाल ने राज्य के सुदूर कोनों को मुख्य धारा से जोड़ दिया है।रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोरवर्तमान में निर्माणाधीन परियोजनाओं में सबसे महत्वाकांक्षी 'रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर' है। रायपुर से धमतरी और कांकेर होते हुए कोंडागांव के बीच तैयार हो रहा यह 125 किलोमीटर का सिक्स-लेन मार्ग छत्तीसगढ़ को सीधे बंदरगाह से जोड़ेगा। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता राज्य की पहली 3 किलोमीटर लंबी स्मार्ट टनल (सुरंग) है। यह कॉरिडोर बस्तर के घने वनों के बीच से गुजरते हुए पर्यावरण संरक्षण और आधुनिकता के अद्भुत संगम के रूप में उभर रहा है।फ्लाईओवर और आधुनिक इंटरचेंजराजधानी रायपुर का टाटीबंध चौक, जो कभी अपनी जटिल बनावट के कारण दुर्घटनाओं का केंद्र था, आज एनएचएआई के इंजीनियरिंग का गौरव है। साढ़े तीन किलोमीटर लंबे स्टैंड-अलोन फ्लाईओवर ने न केवल यातायात को सुगम बनाया है, बल्कि इसे जीरो एक्सीडेंट जोन बनाने की दिशा में भी बड़ी सफलता हासिल की है। इसी तरह बिलासपुर का पेंड्रीडीह इंटरचेंज आधुनिक कनेक्टिविटी का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो रायपुर, बिलासपुर और रायगढ़ की ओर जाने वाले भारी वाहनों को बिना किसी बाधा के अपनी मंजिल तक पहुँचाता है।औद्योगिक क्रांति का नया गलियारा - दुर्ग बायपासशहरी क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण और यातायात के दबाव को कम करने 92 किलोमीटर लंबा दुर्ग-रायपुर-आरंग बायपास निर्माणाधीन है। सिक्स-लेन का यह मार्ग मुंबई-कोलकाता कॉरिडोर का हिस्सा होगा, जो राज्य में औद्योगिक निवेश के नए द्वार खोलेगा।रायपुर-धनबाद कॉरिडोरछत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच की दूरियां अब बीते दौर की बात होने वाली हैं। 627 किलोमीटर लंबा रायपुर-धनबाद आर्थिक गलियारा इन दो राज्यों के रिश्तों को नई मजबूती देगा। इस कॉरिडोर का 384 किलोमीटर का बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ से होकर गुजरता है। इसके पूर्ण होने से रायपुर से धनबाद का 11 घंटे का सफर मात्र 7 घंटे में सिमट जाएगा, जिससे कोरबा और रायगढ़ के इस्पात एवं कोयला उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा।पर्यटन और आस्था की सुगम राहआधुनिक राजमार्गों ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और प्राकृतिक संपदा तक पहुँच को अत्यंत सहज बना दिया है। एनएच-53 आज डोंगरगढ़ की माँ बम्लेश्वरी देवी, ऐतिहासिक सिरपुर और बारनवापारा अभयारण्य जैसे प्रमुख स्थलों को जोड़कर पर्यटन को नई ऊंचाई दे रहा है। इसी प्रकार, एनएच-130 श्रद्धालुओं को रतनपुर स्थित माँ महामाया मंदिर से जोड़ने के साथ-साथ अंबिकापुर के रास्ते छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले मैनपाट के नैसर्गिक सौंदर्य तक पहुँचने का सुगम मार्ग प्रशस्त करता है। वहीं एनएच-30 छत्तीसगढ़ के प्रयाग राजिम और गंगरेल बांध को राजधानी से जोड़ता है। बस्तर के पर्यटन केंद्रों तक पहुँचना भी अब बेहद आसान हो गया है। वहीं, एनएच-149बी के माध्यम से कोरबा के सतरेंगा, कोसगाई, मडवारानी और चांपा के प्रसिद्ध कोसा केंद्र व स्थानीय मंदिरों तक पहुँचना अब सुगम हो गया है। अब पर्यटकों को राष्ट्रीय राजमार्ग के माध्यम से विश्वस्तरीय सड़कों की सुविधा मिल रही है, जिससे छत्तीसगढ़ में पर्यटन की नई संभावनाएं जागृत हुई हैं।सड़कों के साथ संरक्षण और सामाजिक सरोकारएनएचएआई का लक्ष्य केवल कांक्रीट का ढांचा खड़ा करना नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्वहन करना भी है। इसी कड़ी में बिलासपुर के भेलमुड़ी और रतनपुर में 'केटल शेल्टर' का निर्माण किया जा रहा है। राजमार्गों पर पशुओं की सुरक्षा और उनके संरक्षण की दिशा में यह एक अनूठी और संवेदनशील पहल है, जो सड़क सुरक्षा को भी सुनिश्चित करती है।“मजबूत सड़कें किसी भी राज्य की मजबूत अर्थव्यवस्था की बुनियाद होती हैं। एनएचएआई और केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों का तेजी से विस्तार हुआ है, जिससे उद्योग, कृषि, खनन और पर्यटन सभी क्षेत्रों को नई गति मिली है। बेहतर कनेक्टिविटी ने दूरस्थ अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है और रोजगार, निवेश व व्यापार के नए अवसर पैदा किए हैं। यही सड़कें आज छत्तीसगढ़ की प्रगति की पहचान बन रही हैं।” - मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय“छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्ग केवल रास्ते नहीं, बल्कि विकास के कॉरिडोर बन चुके हैं। एनएचएआई द्वारा निर्मित आधुनिक सड़कें, फ्लाईओवर और आर्थिक गलियारे शहरों का दबाव कम कर रहे हैं और औद्योगिक निवेश को आकर्षित कर रहे हैं। बेहतर परिवहन व्यवस्था से समय, ईंधन और लागत की बचत हो रही है, जिससे राज्य की आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं। यह सड़क नेटवर्क छत्तीसगढ़ के आत्मनिर्भर और समृद्ध भविष्य की मजबूत नींव है।” - उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव
- -125 दिन की रोजगार गारंटीरायपुर। शासन की महत्वाकांक्षी विकसित भारत जी राम जी (वीबी जी राम जी) योजना के अंतर्गत जिला दंतेवाड़ा की ग्राम पंचायतों में प्रत्येक माह की 07 तारीख को रोजगार दिवस, चावल उत्सव और आवास दिवस का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।अधिकारियों ने बताया कि पहले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जाता था, जिसे अब विकसित भारत जी राम जी योजना के अंतर्गत बढ़ाकर 125 दिनों तक किया गया है। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक जरूरतमंद परिवार तक रोजगार के अवसर पहुंचाना है।कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को क्यूआर कोड आधारित नई प्रणाली की जानकारी दी गई। अब जॉब कार्ड और मस्टर रोल का मिलान क्यूआर कोड स्कैन कर किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और गड़बड़ी की संभावना कम हुई है।प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वीकृत हितग्राहियों के नामों का वाचन किया गया तथा आवास निर्माण के लिए मिलने वाली किश्तों, मजदूरी भुगतान, निर्माण सामग्री और अन्य विभागों से मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने हितग्राहियों को समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण आवास निर्माण पूरा करने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया।रोजगार दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत मिलने वाली रोजगार गारंटी की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और रोजगार सुनिश्चित करने के लिए यह पहल की जा रही है।कार्यक्रम में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, मोबाइल आधारित निगरानी प्रणाली और नागरिक सहभागिता जैसे आधुनिक तकनीकी उपायों की जानकारी दी गई, जिससे कार्यों की निगरानी, उपस्थिति सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जा सके। इसके अलावा आजीविका डबरी निर्माण के बारे में भी ग्रामीणों को बताया गया। डबरी निर्माण से मत्स्य पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों के माध्यम से आय बढ़ाने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों से अपील की गई कि वे प्रत्येक माह की 07 तारीख को आयोजित रोजगार दिवस, चावल उत्सव और आवास दिवस में भाग लेकर शासकीय योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
- -साइंस कॉलेज में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में शामिल होंगे मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय-कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का भी होगा शुभारंभरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय कल 10 फरवरी को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत राज्य स्तरीय विवाह कार्यक्रम से प्रदेशभर के 6 हजार 412 से अधिक जोड़े विभिन्न धार्मिक परंपराओं एवं रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह में बंधने वाले नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देंगे।मुख्यमंत्री श्री साय स्थानीय साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में “कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान” का भी शुभारंभ करेंगे। अभियान के प्रथम चरण में 6 माह से 52 माह आयु वर्ग के 40 हजार कुपोषित बच्चों को कवर किया जाएगा। इस अभियान की शुरुआत बस्तर संभाग से होगी, जिसमें बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर एवं सुकमा जिले शामिल हैं।इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह करेंगे। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री द्वय श्री अरुण साव, श्री विजय शर्मा, केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े सहित मंत्रिमंडल के सदस्य, सांसद, विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधि विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।मुख्य कार्यक्रम राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में प्रातः 11 बजे से 1,316 जोड़ों का विभिन्न धार्मिक परंपराओं एवं रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह संपन्न होगा। इन विवाहित जोड़ों को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 35 हजार रूपए उनके बैंक खातें में सहायता राशि और 15 हजार रूपए की राशि के उपहार सामग्री तथा विवाह के आयोजन में खर्च की जाएगी। इस कार्यक्रम से बलौदा बाजार, धमतरी, दुर्ग, महासमुंद एवं राजनांदगांव जिलों के जोड़े ऑनलाइन माध्यम से राज्य स्तरीय कार्यक्रम से जुड़ेंगे। शेष जिलों में जिला मुख्यालयों पर सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें संबंधित प्रभारी मंत्री एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत राज्य के विभिन्न जिलों में हिंदू रीति से 6,281, मुस्लिम रीति से 3, ईसाई रीति से 113, बौद्ध रीति से 5 तथा बैगा समुदाय के 10 जोड़े विवाह सूत्र में बंधेंगे। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के माध्यम से राज्य शासन आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को सम्मानपूर्वक विवाह का अवसर प्रदान कर रहा है। यह वृहद आयोजन सामाजिक समानता, समरसता एवं जनकल्याणकारी शासन के प्रति राज्य सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से दर्शाता है।
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-24,752 किसानों को अलग-अलग योजनाओं के तहत कृषि यंत्रों से किया लाभान्वित
-अब खेती हुई आसान और मुनाफेदार-ड्रिप, रीपर और सीड ड्रिल से बदली किसानों की तकदीररायपुर। छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं से प्रदेश के किसान आधुनिक खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड के माध्यम से किसानों को शासकीय अनुदान पर आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे खेती की लागत कम हो रही है और उत्पादन बढ़ रहा है। इससे खेती आसान और मुनाफेदार हुई है। जिसके कारण प्रदेश के किसान आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रहे हैं।बीज निगम द्वारा किसानों को चैम्पस पोर्टल के माध्यम से जुताई, बुआई, रोपाई और कटाई के लिए आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें रोटावेटर, स्वचालित रीपर, पैडी ट्रांसप्लांटर, लेजर लैंड लेवलर, पावर वीडर, मल्चर, थ्रेशर, सीड ड्रिल तथा ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली शामिल हैं।कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में बीज निगम द्वारा यंत्रीकरण सबमिशन (कंपोनेंट-1) अंतर्गत 912 किसानों को, शाकंभरी योजना अंतर्गत 3375 किसानों को, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (ड्रिप) अंतर्गत 3821 किसानों को तथा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (स्प्रिंकलर) अंतर्गत 16,644 किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराकर लाभान्वित किया गया है। इन आधुनिक यंत्रों के उपयोग से किसानों की मेहनत कम हुई है और समय की बचत के साथ उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है। पारंपरिक खेती में जहां अधिक मजदूरी और लागत लगती थी, वहीं आधुनिक यंत्रों से खेती अब कम खर्च में अधिक लाभ देने लगी है।प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्रों, विशेषकर बस्तर संभाग में भी किसान आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर खेती में बेहतर परिणाम प्राप्त कर रहे हैं। पहले जहां किसान केवल धान की खेती पर निर्भर थे, वहीं अब सब्जी उत्पादन और उद्यानिकी फसलों की ओर भी तेजी से अग्रसर हो रहे हैं। ड्रिप सिंचाई प्रणाली के माध्यम से स्थानीय बाजारों के साथ-साथ बाहर के बाजारों में भी उत्पाद बेचकर किसान अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।बिलासपुर जिले के किसान नारायण दल्लू पटेल ने बताया कि स्वचालित रीपर से अब एक एकड़ फसल की कटाई 2 से 3 घंटे में हो जाती है, जबकि पहले 10 से 12 मजदूरों के साथ पूरा दिन लगता था। इससे कटाई लागत में 50 से 60 प्रतिशत तक कमी आई है।रायपुर जिले के किसान हीरालाल धनुराम साहू ने बताया कि रोटावेटर से खेत की तैयारी कुछ ही घंटों में हो जाती है। पहले जहां 3 से 4 दिन लगते थे, अब कम समय में खेत तैयार हो जाता है, जिससे उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के किसान लेखूराम कैलाश छेदइया ने बताया कि सीड ड्रिल से बोआई करने पर बीज की 15 से 25 प्रतिशत तक बचत हुई है तथा उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।बीज निगम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। निगम की इस पहल से प्रदेश के किसान तकनीकी रूप से सशक्त होने के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी मजबूत बन रहे हैं और विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में सहभागी बन रहे हैं। - रायपुर / जिले के समस्त शासकीय विभागों एवं जिला कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन एवं सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आज कलेक्टर परिसर स्थित रेड क्रॉस भवन में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन दो पालियों में किया गया। प्रथम पाली प्रातः 10.00 बजे से दोपहर 01.00 बजे तक तथा द्वितीय पाली दोपहर 02.00 बजे से सायं 05.00 बजे तक आयोजित की गई। प्रशिक्षण सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा नामांकित मास्टर ट्रेनरों के माध्यम से प्रदान किया गया।इस प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न कार्यालयों से लगभग 300 अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए, जिन्हें ई-ऑफिस प्रणाली के उपयोग, फाइल प्रबंधन, ऑनलाइन प्रक्रियाओं एवं डिजिटल कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई।प्रशिक्षण कार्यक्रम ई-ऑफिस के जिला स्तरीय नोडल अधिकारी श्रीमती तुलसी राठौर, डिप्टी कलेक्टर तथा ई-जिला प्रबंधक रायपुर सुश्री कीर्ति शर्मा की उपस्थिति में संपन्न हुआ। प्रशिक्षण का उद्देश्य शासकीय कार्यों में पारदर्शिता, त्वरित निपटान एवं कागज रहित कार्यालय प्रणाली को बढ़ावा देना है, जिससे प्रशासनिक कार्यों की दक्षता में और अधिक सुधार हो सके।
- -*मरीन ड्राइव एम्फीथिएटर में विद्यार्थियों ने बिखेरा हुनर, बच्चों से वरिष्ठों तक ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां*रायपुर / कला और संस्कृति को प्रोत्साहन देने की दिशा में रायपुर शहर में एक सराहनीय पहल देखने को मिल रही है। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में संचालित कला केंद्र रायपुर आज स्थानीय प्रतिभाओं के लिए एक सशक्त मंच बनकर उभर रहा है। इसी कड़ी में 8 फरवरी को तेलीबांधा स्थित मरीन ड्राइव के ओपन एम्फीथिएटर में आयोजित भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम ने शहरवासियों को कला के रंगों से सराबोर कर दिया।कलेक्टर डॉ गौरव सिंह की दूरदर्शी सोच से शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य शहर के युवाओं एवं नागरिकों को कला की विभिन्न विधाओं में प्रशिक्षण और मंच उपलब्ध कराना है। मात्र 500 रुपये के नाममात्र शुल्क पर संचालित यह केंद्र बिना किसी आयु सीमा के सभी के लिए खुला है, जिससे हर वर्ग के लोग अपनी प्रतिभा को निखार पा रहे हैं।कार्यक्रम का आयोजन कलेक्टर डॉ गौरव सिंह, नगर निगम आयुक्त श्री विश्वदीप एवं जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिश्वरंजन के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। इस अवसर पर नगर निगम रायपुर की संस्कृति उप आयुक्त डॉ अंजली शर्मा की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहरवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।मंच पर कला केंद्र के विद्यार्थियों ने वायलिन, तबला, हारमोनियम, सुगम संगीत, गायन, कथक एवं वेस्टर्न डांस जैसी विविध प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। खास बात यह रही कि बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक सभी आयु वर्ग के कलाकारों ने आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुति दी, जिससे यह संदेश मिला कि कला किसी उम्र की मोहताज नहीं होती।कार्यक्रम का संचालन निष्ठा जोशी, देवाशीष पटेल, राहुल ठाकुर, संदीप तथा कला केंद्र की पूरी टीम ने सफलतापूर्वक किया। कला केंद्र रायपुर अब शहर की उभरती प्रतिभाओं के लिए उम्मीद की किरण बन गया है। ऐसे आयोजनों से न केवल परफॉर्मिंग आर्ट्स को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि युवा पीढ़ी संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियों से भी जुड़ रही है। साथ ही यह पहल रायपुर की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
- रायपुर ।छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के ग्राम कासौली (विकासखंड दंतेवाड़ा) के प्रगतिशील किसान श्री सुरेश कुमार नाग को आईबीसी 24 द्वारा प्रदान किए जाने वाले प्रतिष्ठित ‘भुइयां के भगवान’ सम्मान से नवाजा गया है। 06 फरवरी 2026 को आयोजित कार्यक्रम में राज्य के उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने उन्हें प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान राशि प्रदान कर सम्मानित किया। यह उपलब्धि दंतेवाड़ा जिले के किसानों के लिए गर्व का विषय है।श्री सुरेश कुमार नाग लंबे समय से जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने रासायनिक खेती के दुष्परिणामों को समझते हुए अपने खेतों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग पूरी तरह बंद कर दिया और जीवामृत, घन-जीवामृत तथा नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे जैविक उपायों को अपनाया। इसके अच्छे परिणाम मिलने के बाद उन्होंने अपने अनुभव अन्य किसानों के साथ साझा किए, जिससे आसपास के कई किसान भी प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित हुए।श्री नाग 100 से अधिक परंपरागत धान की किस्मों के संरक्षण का कार्य भी कर रहे हैं। इसके साथ ही श्री विधि से रागी और कोसरा की खेती जैसे नवाचारों को अपनाकर जिले में प्राकृतिक खेती को नई दिशा दी है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे प्रयासों को श्री नाग जैसे किसानों ने जमीन पर सफल बनाया है। उनकी इस उपलब्धि पर किसानों, कृषि विशेषज्ञों और अधिकारियों ने प्रसन्नता व्यक्त की है।उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि सुरेश कुमार नाग जैसे किसान समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं, जो खेती के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता बचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। सम्मान प्राप्त करने के बाद श्री नाग ने कहा कि यह पुरस्कार उन सभी किसानों को समर्पित है, जो प्राकृतिक खेती अपनाकर धरती और आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित बनाने का प्रयास कर रहे हैं।सुरेश कुमार नाग को मिला यह सम्मान दंतेवाड़ा जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है और इससे युवाओं में खेती के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होने की उम्मीद है।
- बिलासपुर /महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मुख्यमंत्री कन्या विवाह कार्यक्रम का आयोजन 10 फरवरी को स्व. श्री बीआर यादव बहतराई स्टेडियम में किया जाएगा। विवाह कार्यक्रम में 175 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया जाएगा। कार्यक्रम में प्रत्येक हितग्राही जोड़े को उपहार स्वरूप 35 हजार की राशि प्रदान की जाएगी। साथ ही परिवहन हेतु 1 हजार एवं विवाह के लिए वस्त्र, मंगलसूत्र एवं श्रृंगार सामग्री भी दी जाएगी।
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-26 निजी कंपनियों द्वारा 4 हजार पदों पर होगी भर्ती
बिलासपुर /राज्य के युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए 12 एवं 13 फरवरी को सवेरे 10 बजे से शाम 4 बजे तक आईटीआई कोनी में संभाग स्तरीय रोजगार मेला का आयोजन किया जा रहा है। 26 निजी कंपनियों द्वारा फायनेंस, एग्रीकल्चर, मैनेजमेंट, मेडिकल व फार्मेसी, सोलर एनर्जी, टेक्सटाईल इंडस्ट्री, सर्विस टेक्निकल, मेनुफैक्चरिंग, सिक्यूरिटी सर्विस, इंश्योरेंस, आटोमोबाईल, ज्वेलेरी जैसे क्षेत्रों में लगभग 4 हजार पदों पर भर्ती की कार्यवाही की जाएगी। रोजगार मेले में शामिल होने के लिए रोजगार पंजीयन, ई रोजगार पोर्टल में आवेदक का ऑनलाईन मेला पंजीयन होना अनिवार्य है। इच्छुक आवेदक आधार कार्ड, फोटो, बायोडाटा एवं निर्धारित शैक्षणिक प्रमाण पत्र के साथ रोजगार मेले में शामिल हो सकते है। मेले में शामिल होने एवं रिक्त पदों की विस्तृत जानकारी www.erojgar.cg.gov.in एवं छत्तीसगढ़ रोजगार ऐप से प्राप्त कर सकते है। अधिक जानकारी के लिए जिला रोजगार कार्यालय कोनी से भी संपर्क किया जा सकता है। - -मुड़ापार हेलीपेड में नवनिर्मित सामुदायिक भवन का कैबिनेट मंत्री और महापौर ने फीता काटकर किया लोकार्पणरायपुर । कोरबा नगर विधायक और छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने रविवार को मुड़ापार, हेलीपेड में मथुरा माली मरार पटेल समाज को 10 लाख की लागत से बने सर्व सुविधायुक्त सामुदायिक भवन की सौगात दी।कार्यक्रम में मंत्री श्री लखन लाल देवांगन और महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत ने समाज के पदाधिकारियों के साथ मां शाकम्भरी देवी की पूजा अर्चना कर प्रदेश और शहर की खुशहाली की कामना की।नवनिर्मित सामुदायिक भवन का फीता काटकर लोकार्पण किया।इस अवसर पर मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि सभी समाज की आर्थिक उत्थान और प्रगति के लिए छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव सरकार सभी समाज के साथ खड़ी है और उनके उत्थान और विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। कोरबा विधानसभा में भी सभी समाज की मांग अनुरूप विकास कार्यों को तेजी से पूर्ण किया जा रहा है। मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि मथुरा माली मरार पटेल समाज का आशीर्वाद मुझे सदैव मिलता रहा है, समाज की सेवा करने का मुझे यह सौभाग्य मिला है। समाज की मांग पर प्रभारी मंत्री मद से 10 लाख की लागत से भवन का निर्माण कराया गया है, आज भवन समाज को समर्पित किया जा रहा है। इसी के साथ-साथ वार्ड क्रमांक 55 सुमेधा नागिन भाटा में समाज के लिए सामुदायिक भवन हेतु 10 लाख की स्वीकृति दी गई है, जल्द ही भवन पूर्ण हो जाएगा।मथुरा माली मरार पटेल समाज के समाज के सभी प्रमुख जनों को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने समाज की प्रशंसा करते हुए कहा कि पटेल समाज एक संगठित और सशक्त समाज है। समाज एक सशक्त और संगठित समाज की अवधारणा को पूरा करते हुए आगे बढ़ रहा है। पटेल समाज एक मेहनतकश समाज है। कड़ी मेहनत कर धरती को हरा भरा बनाने का कार्य मरार समाज करता है। उन्होंने कहा कि समाज आज खेती किसानी, सब्जी-भाजी के उत्पादन के साथ- साथ हर क्षेत्र में काफी आगे है।इस अवसर पर सभापति नूतन सिंह ठाकुर, एमआइसी सदस्य श्रीमती धन कुमारी गर्ग, पार्षद ईश्वर पटेल, पार्षद श्री नरेंद्र देवांगन, पार्षद श्री मुकुंद कंवर, कोरबा मंडल अध्यक्ष श्री योगेश मिश्रा, श्री रामकृष्ण साहू, श्रीमती स्मिता सिंह, श्रीमती पूर्णिमा पासवान, श्री नवनीत शुक्ला, श्री सुकेश दलाल, श्रीमती संगीता साहू, श्री अनुज यादव व समाज के प्रमुख, वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे।इस अवसर पर महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत ने कहा कि माननीय कैबिनेट मंत्री श्री लखन लाल देवांगन की नेतृत्व में कोरबा शहर विकास के नए आयाम गढ़ रहा है। शहर के वार्ड, बस्तियों के मूलभूत विकास कार्य की बात हो, या फिर बड़े निर्माण कार्यों की बात हो, और सबसे महत्वपूर्ण सभी समाज को उनके मांग अनुरूप विकास कार्यों की सौगात देने की बात हो। सभी कार्यों के लिए शासन से राशि की स्वीकृति भी ला रहे हैं, विकास कार्यों को शुरू कर पूर्ण कर सौगात भी दे रहे हैं।समाज ने किया मंत्री और महापौर का अभिनंदनइस सौगात पर समाज के अध्यक्ष श् श्री आर डी पटेल, श्री महादेव पटेल, श्री लक्ष्मण पटेल, उपाध्यक्ष श्रीमती राजकुमारी पटेल, श्रीमती संध्या पटेल, श्रीमती संगीता पटेल, श्री राम अवतार पटेल, श्री चंद्र लाल पटेल, श्री गोविंद पटेल, श्री संतोषी पटेल, श्री राजाराम पटेल के साथ-साथ अधिक संख्या में समाज के पदाधिकारियों ने मंत्री श्री लखन लाल देवांगन और महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत का आभार जताते हुए उनका अभिनंदन किया।
- रायपुर । छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा बिलासपुर जिले के अंतर्गत दो सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 7 करोड़ 50 लाख 19 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। स्वीकृत योजनाओं में हसदेव अरपा लिंक परियोजना के सर्वेक्षण कार्य के लिए 5 करोड 59 लाख 95 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। इसी तरह विकासखण्ड कोटा के अंतर्गत खोंगसरा व्यपवर्तन योजना की मुख्य नहर के लाईनिंग कार्य के लिए एक करोड़ 90 लाख 24 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। सिंचाई योजनाओं के कार्य पूर्ण कराने मुख्य अभियंता हसदेव कछार जल संसाधन विभाग को बिलासपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।
- -पंजीयन के लिए विभाग ने सभी निकायों को लिखा पत्र-सफाई कर्मियों का सम्मान, सुरक्षा और समग्र कल्याण हमारी प्रतिबद्धता – उप मुख्यमंत्री अरुण सावरायपुर। प्रदेशभर के नगरीय निकायों में कार्यरत सफाई कर्मकारों को भी श्रम विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव के निर्देश पर विभाग ने इसके लिए सभी नगरीय निकायों को परिपत्र जारी कर पात्र सफाई कर्मियों का श्रम विभाग में पंजीयन कराने को कहा है। विभाग ने नगरीय निकायों में काम कर रहे ऐसे सफाई कर्मकार जो ईएसआईसी एवं ईपीएफ की पात्रता नहीं रखते हैं, उनका श्रम विभाग के असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल में पंजीयन कराने के निर्देश दिए हैं।नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा संचालनालय से सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों को जारी परिपत्र में पात्र सफाई कर्मकारों को श्रम विभाग की योजनाओं से लाभान्वित करने पंजीयन के लिए निर्देशित किया गया है। पत्र में बताया गया है कि इसके लिए श्रम विभाग की वेबसाइटhttps://shramevjayate.cg.gov.in/या मोबाइल एप “श्रमेव जयते” पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। विभाग ने सफाई कर्मकारों के बीच असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल द्वारा संचालित योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के भी निर्देश दिए हैं।उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने विभाग की इस पहल पर कहा कि प्रदेश के सफाई कर्मकार हमारे शहरों की स्वच्छता की रीढ़ हैं। उनकी मेहनत और समर्पण को सम्मान देते हुए राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी पात्र सफाई कर्मी श्रम विभाग की कल्याणकारी योजनाओं से वंचित न रहे। नगरीय निकायों के माध्यम से पंजीयन कराकर उन्हें और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवनोपयोगी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। सफाई कर्मियों का सम्मान, सुरक्षा और समग्र कल्याण हमारी सरकार की प्रतिबद्धता है। हम उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए लगातार नई पहल कर रहे हैं।श्रम विभाग द्वारा प्रदेश के ऐसे सफाई कर्मकार जो ईएसआईसी एवं ईपीएफ की पात्रता नहीं रखते हैं, उनका असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के अंतर्गत पंजीयन कर उन्हें एवं उनके आश्रितों को 9 योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाता है। मंडल में अभी 59 हजार से अधिक सफाई कर्मकार पंजीकृत हैं।असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल द्वारा पंजीकृत सफाई कर्मकारों एवं उनके आश्रितों के लिए असंगठित कर्मकार महतारी जतन योजना, असंगठित कर्मकार मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना, सफाई कर्मकार के लिए आवश्यक उपकरण सहायता योजना, सफाई कर्मकार कौशल उन्नयन योजना, सफाई कर्मकार गंभीर बीमारी चिकित्सा सहायता योजना तथा शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना संचालित की जा रही हैं। इनके साथ ही सफाई कर्मकारों के बच्चों को सफाई कर्मकार के पुत्र/पुत्री के लिए विशेष कोचिंग योजना, सफाई कर्मकार पुत्र/पुत्री सायकल सहायता योजना एवं असंगठित कर्मकार छात्रवृत्ति योजना का भी लाभ प्रदान किया जाता है।
- - छत्तीसगढ़ से लाखों विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं पालकों की उत्साहजनक सहभागितारायपुर। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा आयोजित परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के प्रथम चरण का सीधा प्रसारण दिनांक 6 फरवरी 2026 को देशभर के विद्यालयों में किया गया। इस चरण में छत्तीसगढ़ राज्य से अत्यंत उत्साहजनक सहभागिता देखने को मिली।राज्य के विभिन्न जिलों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 36,903 विद्यालयों में इस कार्यक्रम का प्रसारण हुआ, जिसे 26.65 लाख विद्यार्थियों, 1.54 लाख शिक्षकों एवं 1.68 लाख पालकों सहित कुल 29.87 लाख दर्शकों ने देखा।इसके अतिरिक्त, समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु 478 सार्वजनिक स्थलों पर कार्यक्रम देखने की व्यवस्था की गई, जहाँ लगभग 42 हजार नागरिकों ने कार्यक्रम का लाभ उठाया।प्रथम चरण में महासमुंद जिले की कक्षा 12वीं की छात्रा कु. सृष्टि साहू को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से सीधे प्रश्न पूछने का अवसर प्राप्त हुआ, जो राज्य के लिए गर्व का विषय रहा।द्वितीय चरण में भी छत्तीसगढ़ की प्रभावशाली भागीदारीपरीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का द्वितीय चरण दिनांक 9 फरवरी 2026 को आयोजित किया गया, जिसमें भी छत्तीसगढ़ राज्य की व्यापक एवं सक्रिय सहभागिता रही।इस चरण में राज्य के 36,905 विद्यालयों से कार्यक्रम प्रसारित किया गया, जिसे 26.65 लाख विद्यार्थी, 1.54 लाख शिक्षक एवं 1.68 लाख पालकों सहित कुल 29.89 लाख दर्शकों ने देखा।साथ ही, पूर्ववत 478 सार्वजनिक स्थलों पर सामूहिक रूप से कार्यक्रम देखने की व्यवस्था की गई, जिससे 42 हजार लोगों ने लाभ प्राप्त किया।प्रधानमंत्री जी से प्रश्न पूछने का अवसरद्वितीय चरण में रायपुर जिले के माना कैम्प स्थित पीएम श्री नवोदय विद्यालय के कक्षा 11वीं के विद्यार्थी श्री तेजस चन्द्राकर को माननीय प्रधानमंत्री जी से प्रश्न पूछने का अवसर प्राप्त हुआ।श्री तेजस ने परीक्षा के बाद भ्रमण योग्य स्थलों के संबंध में जानकारी चाही।माननीय प्रधानमंत्री जी ने श्री तेजस को उसके निवास तहसील से प्रारंभ करते हुए, तहसील, जिला एवं राज्य स्तर पर देखने योग्य स्थलों की सूची तैयार करने, उनके भ्रमण की योजना बनाने तथा इन यात्राओं को सीखने के अवसर के रूप में अपनाने का प्रेरणादायक सुझाव दिया।
- - कच्चे घर से सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थायी जीवन की ओर बढ़ा कदमरायपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण देश के लाखों जरूरतमंद परिवारों को कच्चे और असुरक्षित आवासों से निकालकर पक्के, सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान कर रही है। इसी कड़ी में राजनांदगांव जिले के छुरिया विकासखंड अंतर्गत वनांचल ग्राम कल्लूटोला निवासी श्री उदेराम साहू का पक्के मकान का सपना साकार हुआ है।श्री उदेराम साहू ने बताया कि सीमित आय एवं कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण वे वर्षों तक कच्चे मकान में परिवार सहित रहने को विवश थे। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकना, दीवारों में दरारें और परिवार की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती थी। इन परिस्थितियों के कारण स्वास्थ्य एवं सामाजिक जीवन भी प्रभावित होता था।प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण अंतर्गत श्री उदेराम साहू को 1 लाख 20 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इस सहायता राशि से उन्होंने गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग करते हुए पक्का, सुरक्षित एवं टिकाऊ आवास का निर्माण सफलतापूर्वक पूर्ण किया।आवास निर्माण के दौरान मनरेगा योजना अंतर्गत 90 दिवस की मजदूरी भी उपलब्ध हुई, जिससे उन्हें निर्माण अवधि में रोजगार एवं आय का स्थायी स्रोत मिला। इससे अतिरिक्त ऋण लेने की आवश्यकता नहीं पड़ी और आर्थिक बोझ से राहत मिली।इसके अतिरिक्त स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालय निर्माण से परिवार को स्वच्छता, बेहतर स्वास्थ्य एवं गरिमापूर्ण जीवन का लाभ प्राप्त हो रहा है।श्री उदेराम साहू ने बताया कि पक्का आवास बनने के बाद परिवार की जीवन-शैली में उल्लेखनीय सुधार आया है। अब सुरक्षित आवास, स्वच्छ वातावरण, बेहतर स्वास्थ्य तथा बच्चों की शिक्षा के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ उपलब्ध हैं। इस योजना के माध्यम से न केवल आवास सुविधा सुनिश्चित हुई है, बल्कि परिवार का सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण भी हुआ है।ग्रामीण गरीबों के जीवन में स्थायी सुधार की दिशा में प्रभावी पहल प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब परिवारों के जीवन स्तर को स्थायी रूप से सुधारने की दिशा में एक प्रभावी, जनकल्याणकारी एवं सफल योजना के रूप में सिद्ध हो रही है।
- -जल संरक्षण की पहल से पांच एकड़ से अधिक भूमि में लहलहाई खेतीरायपुर । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी पहल मोर गांव मोर पानी अभियान आज गांवों में जल आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत एमसीबी जिले के मनेन्द्रगढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम मुख्तियारपारा में वर्षों से उपेक्षित एक अनुपयोगी स्टापडेम को नया जीवन मिला है। बहते पानी को सहेजने की इस सामूहिक कोशिश ने न सिर्फ जल संकट दूर किया बल्कि खेती, पशुपालन और ग्रामीण जीवन को नई दिशा दे दी।जब जर्जर स्टापडेम बना समस्याग्राम मुख्तियार पारा में कई वर्ष पूर्व एक स्थानीय नाले पर निर्मित स्टापडेम समय के साथ जर्जर हो चुका था। गाद जमाव के कारण इसकी जल धारण क्षमता लगभग समाप्त हो गई थी। सर्दियों के बाद नाले का प्रवाह कम होते ही ग्रामीणों को दैनिक उपयोग तक के लिए पानी नहीं मिल पाता था। खेतों की सिंचाई तो दूर, पशुओं के लिए भी जल का संकट बना रहता था।ग्राम सभा से निकली समाधान की राहगत वित्तीय वर्ष में आयोजित ग्राम सभा में मोर गांव मोर पानी अभियान पर चर्चा हुई। ग्रामीणों ने एकजुट होकर खराब पड़े स्टापडेम के पुनरुद्धार का प्रस्ताव रखा। सामुदायिक जलभराव क्षेत्र निर्माण एवं भूमि सुधार कार्य को सर्वसम्मति से स्वीकृति मिली। महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत लगभग 4.95 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई और ग्राम पंचायत मुख्तियार पारा को निर्माण एजेंसी बनाया गया। तकनीकी निगरानी में यह कार्य समय-सीमा के भीतर सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ।जल से समृद्ध हुआ गांव का भविष्यसिल्ट हटने और भूमि सुधार कार्य के बाद स्टापडेम में जल का ठहराव पहले की तुलना में कहीं अधिक हो गया है। इसका सीधा लाभ ग्राम सलका और सिरौली के लगभग 45 परिवारों को मिल रहा है। आज यहां घरेलू उपयोग, पशुपालन और निस्तार के लिए भरपूर जल उपलब्ध है। आसपास के जलस्तर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इस जलसंचय के कारण 8 से 10 परिवारों ने रबी फसल के साथ-साथ सब्जी उत्पादन भी शुरू कर दिया है और पांच एकड़ से अधिक कृषि भूमि सिंचित हो चुकी है। यह कहानी बताती है कि जब सरकार की योजना, ग्राम सभा की सहभागिता और श्रमशक्ति एक साथ आती है, तो अनुपयोगी संरचनाएं भी समृद्धि का आधार बन जाती हैं। मोर गांव मोर पानी अभियान के तहत किया गया यह कार्य ग्रामीण आत्मनिर्भरता, जल संरक्षण और टिकाऊ विकास की एक प्रेरणादायी सफलता की कहानी बनकर उभरा है।
- रायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद् (केबिनेट) की बैठक बुधवार, 11 फरवरी को सवेरे 11 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में होगी।
- -बस्तर पण्डुम समापन समारोह में बच्चों की कला को मिला केंद्रीय गृहमंत्री का सम्मान'-ऐसा जादू है मेरे बस्तर में’ गीत पर बच्चों की प्रस्तुति ने बांधा समा-बस्तर पण्डुम समापन समारोह में बच्चों की कला को मिला केंद्रीय गृहमंत्री का सम्मानरायपुर। संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 2026 के समापन समारोह में स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और ताली बजाकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया। समारोह में केंद्रीय गृहमंत्री के स्वागत में जगदलपुर के हजारों स्कूली बच्चों ने “ऐसा जादू है मेरे बस्तर में” गीत पर मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। बच्चों की भावपूर्ण और अनुशासित प्रस्तुति देखकर श्री अमित शाह भी भावविभोर हो उठे और उन्होंने बच्चों को ताली बजाकर प्रोत्साहित किया।बस्तर पण्डुम समापन समारोह में बच्चों की कला को मिला केंद्रीय गृहमंत्री का सम्मानकार्यक्रम में बालिकाओं द्वारा *मलखंभ प्रदर्शन* भी किया गया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने खूब सराहा। केंद्रीय गृहमंत्री श्री शाह ने बच्चों की कला, अनुशासन एवं आत्मविश्वास की प्रशंसा करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा सहित अन्य अतिथियों ने भी बच्चों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।उल्लेखनीय है कि “ऐसा जादू है मेरे बस्तर में” गीत को हिंदी एवं हल्बी बोली में रचा गया है। इसमें बस्तर की बादल अकादमी के कलाकारों ने अपनी आवाज और संगीत का योगदान दिया है। दायरा बैंड द्वारा इस गीत को आधुनिक संगीत के साथ नया स्वरूप प्रदान किया गया है, जिससे यह गीत युवाओं और बच्चों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय हो रहा है।
- -बस्तर पंडुम में दिखी आदिवासी जीवन की झलक, प्रदर्शनी देखकर मंत्रमुग्ध हुए केंद्रीय गृहमंत्री-जनजातीय संस्कृति की अनूठी पहचान बना बस्तर पंडुम, विजेताओं को मिला सम्मानरायपुर। संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम 2026 के समापन अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने लालबाग मैदान में आयोजित जनजातीय परंपराओं और संस्कृति पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर जनजातीय समाज के जीवन में उपयोग होने वाले उत्पादों, हस्तशिल्प और कलाओं की जानकारी ली।अमित शाह ने देखा बस्तर की जनजातीय विरासत का वैभव, विजेता दलों से मिलकर बढ़ाया उत्साहकेंद्रीय गृह मंत्री ने ढोकरा शिल्प, टेराकोटा, वुड कार्विंग, सीसल कला, बांस व लौह शिल्प, जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण, तुम्बा कला, जनजातीय चित्रकला, वन औषधि, स्थानीय व्यंजन तथा लोक चित्रों पर आधारित प्रदर्शनी की सराहना की। उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति भारत की आत्मा का जीवंत स्वरूप है।अमित शाह ने देखा बस्तर की जनजातीय विरासत का वैभव, विजेता दलों से मिलकर बढ़ाया उत्साहप्रदर्शनी में दंडामी माड़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा एवं हल्बा जनजातियों की पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों का प्रदर्शन किया गया। जनजातीय चित्रकला के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति और परंपराओं की सजीव झलक प्रस्तुत की गई। वहीं, वैद्यराज द्वारा वन औषधियों का जीवंत प्रदर्शन भी किया गया।स्थानीय व्यंजन स्टॉल में जोंधरी लाई के लड्डू, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, कुलथी दाल, पान बोबो, तीखुर जैसे पारंपरिक व्यंजन तथा लांदा और सल्फी पेय पदार्थ प्रदर्शित किए गए।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि “बस्तर पंडुम जनजातीय संस्कृति को सहेजने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। राज्य सरकार जनजातीय कला, शिल्प और परंपराओं के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।”इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री ने बस्तर पंडुम की बारह विधाओं की प्रतियोगिता में विजेता दलों से भेंट कर उन्हें बधाई दी। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक श्री किरण सिंह देव सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।“बस्तर पंडुम 2026” संभाग स्तरीय प्रतियोगिता के विजेता1. जनजातीय नृत्य – गौर माड़िया नृत्य (बुधराम सोढ़ी, दंतेवाड़ा)2. जनजातीय गीत – पालनार दल (मंगली एवं साथी, दंतेवाड़ा)3. जनजातीय नाट्य – लेखम लखा (सुकमा)4. जनजातीय वाद्ययंत्र – रजऊ मंडदी एवं साथी (कोण्डागांव)5. जनजातीय वेशभूषा – गुंजन नाग (सुकमा)6. जनजातीय आभूषण – सुदनी दुग्गा (नारायणपुर)7. जनजातीय शिल्प – ओमप्रकाश गावड़े (कोया आर्ट्स, कांकेर)8. जनजातीय चित्रकला – दीपक जुर्री (कांकेर)9. जनजातीय पेय पदार्थ – भैरम बाबा समूह (उर्मीला प्रधान, बीजापुर)10. जनजातीय व्यंजन – श्रीमती ताराबती (दंतेवाड़ा)11. आंचलिक साहित्य – उत्तम नाईक (कोण्डागांव)12. बस्तर वन औषधि – राजदेव बघेल (बस्तर)







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