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   सुंदरता एवं वास्तुकला का अनूठा संगम  नौलखा मंदिर
  -जानिये अपने मंदिरों को
नौलखा मंदिर' भारत में कई स्थानों पर हैं, जिनमें मुख्य रूप से बेगूसराय (बिहार) और देवघर (झारखंड) के मंदिर प्रसिद्ध हैं, जो अपनी अद्भुत वास्तुकला और धार्मिक महत्व के लिए जाने जाते हैं। बाबा वैद्यनाथ की नगरी  में अपनी सुंदरता एवं वास्तुकला का अनूठा संगम नौलखा मंदिर  देवघर शहर के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों में से एक है।
सभी ने नौलखा हार के बारे में सुना होगा, परंतु मंदिर का यह नाम कैसे पड़ा इसके पीछे एक रोचक इतिहास है। भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप को समर्पित यह मंदिर नौ-लाख रुपये की लागत से बना अतः यह  जनमानस के बीच नौलखा मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। दक्षिण भारतीय मंदिरों जैसी शैली, ग्रेनाइट और संगमरमर से निर्मित इस मंदिर में विग्रह स्वरूप भगवान श्री कृष्ण बाल रूप में विराजमान हैं, साथ ही साथ संत बालानंद ब्रह्मचारी जी की एक मूर्ति भी स्थापित है। अतः मंदिर का वास्तविक नाम गुरु और गोविंद के स्वरूप को समर्पित जुगल मंदिर है।
 नौलखा मंदिर की ऊंचाई 146 फीट है। मंदिर झारखंड के देवघर शहर से सिर्फ 2 किमी दूर स्थित है तथा अपनी स्थापत्य कला की सुंदरता के लिए भक्तों एवं पर्यटकों दोनों के ही बीच अत्यधिक प्रसिद्ध है। मंदिर की वास्तुकला कोलकाता में बेलूर मठ अर्थात रामकृष्ण मिशन के मुख्यालय से प्रेरित जान पड़ती है।
प्रचलित नाम: जुगल मंदिर, नौलखा मंदिर देवघर, नौलक्खा मंदिर
 दर्शन समय
7.00 AM - 12.00 PM, 2.00 PM - 7:30 PM
 नौलखा मंदिर देवघर का इतिहास
पथूरिया घाट की रानी श्रीमती चरुशिला ने अपने पति अक्षय घोष और बेटे जतिंद्र घोष को कम उम्र में ही खो दिया था। मौत की इन घटनाओं ने रानी को अत्यधिक दुखी कर दिया। शांति की तलाश में रानी ने अपना घर छोड़ दिया और संत श्री बालानंद ब्रह्मचारी से मुलाकात के लिए देवघर पहुँची और बालानंद ब्रह्मचारी के आश्रम में रहीं। उनकी शिक्षा और उपदेशों से प्रभावित होकर चरुशिला जी महाराज जी की शिष्या बन गईं। श्री बालानंद ब्रह्मचारी जी ने उन्हें भगवान श्री कृष्ण का एक मंदिर बनाने की प्रेरणा दी। मंदिर के निर्माण के लिए रानी चरुशिला ने 9 लाख रुपये का अभूतपूर्व दान दिया। 1941 के लगभग 9 लाख रुपये अपने में ही एक बहुत बड़ी राशि हुआ करती थी।
 1. बेगूसराय का नौलखा मंदिर (बिहार)
स्थान: बिशनपुर, बेगूसराय.
निर्माण: 1953 में संत महावीर दास द्वारा.
खासियत: राजस्थानी वास्तुकला का प्रभाव, सफेद संगमरमर की मूर्तियां, सुंदर नक्काशी, और शहर का विहंगम दृश्य. 
2.  अन्य नौलखा मंदिर
बक्सर (बिहार): दक्षिण भारतीय शैली और सुंदर मूर्तियों वाला एक और धार्मिक स्थल.
गुजरात (घुमली): 12वीं सदी का सूर्य मंदिर. 

 

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