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दांतों में कई कारणों से सड़न हो सकती है. इस सड़न को आम भाषा में कीड़े लगना भी कहते हैं. ज्यादातर पीछे वाले दांतों में यह सड़न होती है जो अंदर ही अंदर दांतों को खोखला कर देती है. दांतों की सतह पर काले रंग के तिल के आकार की कैविटी नजर आती है. इस कैविटी से दांत खोखले होने से उनके टूटकर गिरने की नौबत आ जाती है. वहीं, दांतों में दर्द, मुंह से खून होना और दांतों का पीलापन जैसे लक्षण भी नजर आने लगते हैं. इस कैविटी को दूर करने या कहें इससे छुटकारा पाने के लिए कुछ घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं.
लौंग का तेल
दिन में 2 से 3 बार लौंग का तेल (Clove Oil) इस्तेमाल करने पर कैविटी ठीक होने में मदद मिल सकती है. इस तेल के एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण दांतों की सड़न को दूर करने में कारगर हैं. रूई में लौंग का तेल डालकर कैविटी वाले दांत पर सीधे लगाया जा सकता है.
अमरूद के पत्ते
एंटीमाक्रोबियल गुणों से भरपूर अमरूद के पत्तों को कैविटी (Tooth Cavity) दूर करने में अच्छा माना जाता है. इन पत्तों को आप माउथवॉश की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं. माउथवॉश बनाने के लिए अमरूद के पत्तों को छोटे टुकड़ों में तोड़कर पानी में उबाल लें. इस पानी को आप कुल्ला करने के काम में ले सकते हैं.
लहसुन
मुंह की सेहत बनाए रखने और कैविटी से छुटकारा पाने के लिए लहसुन का इस्तेमाल किया जा सकता है. लहसुन को आप अपनी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं. इसे रोजाना खाली पेट खाने पर फायदा मिलता है. इसके अलावा लहसुन (Garlic) को छोटे टुकड़ों में कूटकर कैविटी वाले दांत पर रखा भी जा सकता है.
अंडे का छिलका
अगर आप अंडा खाते हैं तो दांतों की कैविटी को दूर करने के लिए अंडे से तैयार इस नुस्खे का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले अंडे का छिलका धोकर सुखा लें. इस छिलके को पीसकर पाउडर बनाएं और इसमें बेकिंग सोडा (Baking Soda) डालें. इस तैयार मिश्रण को कुछ देर दांतों पर घिसकर धो लें. -
तरह-तरह के खाद्य पदार्थ, वातावरण और लाइफस्टाइल के कारण शरीर में जमा हुए टॉक्सिंस को डिटॉक्स करना बहुत जरूरी है। अन्यथा यह बाद में सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। वहीं सही समय से बॉडी को डिटॉक्सिफाई कर लेने से आप लंबे समय तक स्वस्थ रह सकती हैं। साथ ही यह इंफेक्शन एलर्जी और विभिन्न प्रकार की बीमारियों की संभावना को कम कर देता है और वेट लॉस में भी आपकी मदद करता है। फ्रूट्स, वेजिटेबल, हर्ब्स, मसाले इत्यादि से तैयार ऐसी ही 5 तरह की चाय के बारे में जानते हैं, जो शरीर को डिटॉक्स करने में करेंगी आपकी मदद ।
दालचीनी की चाय
दालचीनी सेहत के लिए कई रूपों में फायदेमंद होती है। यह हार्ट डिजीज की संभावना को कम कर देती है और शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल को भी नियंत्रित रखती है। इसी के साथ ब्लड प्रेशर को सामान्य रहने में मदद करती है। यह डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के लिए काफी फायदेमंद हो सकती है। इसकी एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबॉयल प्रॉपर्टीज बॉडी को डिटॉक्स करके विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं की संभावना को कम कर देती हैं। इसे बनाने के लिए आपको एक कप पानी में 3 से 4 दालचीनी के छोटे टुकड़ों को डालकर पानी मे 7 से 8 मिनट तक उबाल आने देना है। उसके बाद इसे छानकर निकाल लें और इसमें नींबू का रस निचोड़ कर पिएं।
हल्दी और अदरक की चाय
एंटी इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट के गुणों से भरपूर हल्दी और अदरक की चाय आपकी इम्युनिटी को बूस्ट करने के साथ ही पाचन क्रिया को संतुलित रखने में मदद करतीहैं। वहीं यह इंफेक्शन से लड़ने की क्षमता को बढ़ा देती हैं और आंतों की सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होती हैं। यदि आप किसी प्रकार के दर्द से जूझ रही हैं तो यह दर्द और इन्फ्लेमेशन को कम करने में फायदेमंद होती है। इसे बनाने के लिए आपको एक कप पानी मे आधी उंगली के बराबर कसे हुए अदरक और चार चुटकी हल्दी डालनी है। फिर पानी में 10 मिनट तक उबाल आने दें। अब इसे छानकर निकाल लें और नींबू निचोड़ कर पिएं।
धनिया की पत्तियों की चाय
धनिया की पत्ती में पर्याप्त मात्रा में पानी होता है। यह आपके शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेटेड रखता है। यदि शरीर हाइड्रेटेड हो तो इसे डिटॉक्सिफाई करना आसान हो जाता है। शरीर में पर्याप्त मात्रा में हो तो यह किडनी से हानिकारक सब्सटेंसस को बाहर निकाल कर इसे हेल्दी रहने मे मदद करता है। वहीं किडनी के साथ यह कई अन्य ऑर्गन को भी डिटॉक्स करता है। इसे बनाने के लिए एक कप पानी में ताजा धनिया की पत्तियों को डालकर पानी को 10 मिनट तक उबलने दें। अब इसमें ऊपर से नींबू का रस निचोड़ें और आधा चम्मच शहद मिलाकर पिएं।
सौंफ की चाय
सौंफ की चाय शरीर को डिटॉक्सिफाई करने का एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यह खून को साफ करता है और आवश्यक पोषक तत्वों को शरीर में पूरी तरह लगने में मदद करता है। इसकेसाथ ही इसकी ड्यूरेटिक प्रॉपर्टी शरीर से एक्सेस फ्लूइड के साथ टॉक्सिंस को बाहर निकाल देती है और यूरिनरी ट्रैक्ट से संबंधित सभी प्रकार की समस्याओं को दूर रखती हैं। वहीं यह पाचन क्रिया के लिए भी काफी ज्यादा फायदेमंद होता है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक कप पानी को उबालने के लिए गैस पर चढ़ा दें। अब इसमें हल्का क्रश किया हुआ 1 चमच्च सौंफ डालें, साथ ही इसमे अदरक के छोटे-छोटे 2 टुकड़े डाल दें। अब पानी को 10 मिनट तक उबलने दें। फिर यदि आप चाहें तो इसमें आधा चम्मच शहद मिला सकती हैं। -
एक शोध में दावा किया गया है कि बालों को सीधा करने वाले केमिकल महिलाओं में गर्भाशय से जुड़े कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। यह जानकारी अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ द्वारा की गई एक नई रिसर्च में सामने आई है। रिसर्च से पता चला है कि जिन महिलाओं ने हेयर स्ट्रेटनिंग उत्पादों का इस्तेमाल किया था उनमें दूसरी महिलाओं की तुलना में गर्भाशय के कैंसर का खतरा कहीं अधिक पाया गया था।
हालांकि रिसर्च में बालों से जुड़े अन्य उत्पादों जैसे हेयर डाई, ब्लीच, हाइलाइट्स या पर्म और गर्भाशय के कैंसर के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया था। अपने इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 35 से 74 आयु वर्ग की 33,497 अमेरिकी महिलाएं को शामिल किया था, जो सिस्टर स्टडी का ही हिस्सा थी।
यह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायर्नमेंटल हेल्थ साइंसेज (एनआईईएचएस) के नेतृत्व में किया गया एक अध्ययन है, जो स्तन कैंसर और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के जोखिम और कारकों की पहचान के लिए किया गया था। इसमें करीब 11 वर्षों तक महिलाओं का अध्ययन किया गया। पता चला है कि इस दौरान गर्भाशय कैंसर के 378 मामले सामने आए थे।
शोधकर्ताओं को पता चला है कि जिन महिलाओं ने बालों को सीधा करने वाले उत्पादों के लगातार उपयोग की सूचना दी थी। मतलब की पिछले वर्ष में चार या उससे ज्यादा बार इनका उपयोग किया था, उनमें अन्य महिलाओं जिन्होंने उत्पादों का उपयोग नहीं किया था, उनकी तुलना में गर्भाशय कैंसर का शिकार बनने की संभावना दोगुनी से ज्यादा थी। इस बारे में अध्ययन से जुड़े प्रमुख शोधकर्ता एलेक्जेंड्रा व्हाइट ने जानकारी दी है कि वो महिलाएं जिन्होंने कभी हेयर स्ट्रेटनर का इस्तेमाल नहीं किया उनमें से 1.64 फीसदी में 70 वर्ष की आयु तक गर्भाशय से जुड़े कैंसर के होने का खतरा है। वहीं दूसरी तरफ हेयर स्ट्रेटनर इस्तेमाल करने वाली 4.05 फीसदी महिलाओं में इस कैंसर के होने का खतरा है। - आहार की पौष्टिकता, सेवन का समय और इसके तरीके का सीधा असर हमारी सेहत को प्रभावित करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शरीर को स्वस्थ और पाचन क्रिया को बेहतर रखने के लिए भोजन का एक समय निर्धारित करें और रोजाना उसी समय पर ही भोजन करें। हाल ही में किए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि रात में देर से भोजन करने वाले लोगों में मोटापा बढऩे का जोखिम अधिक पाया गया है। मोटापे को अध्ययनों में हृदय रोग और डायबिटीज का कारक माना जाता है। ये दोनों स्थितियां वैश्विक स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक हैं।अध्ययनकर्ताओं की टीम ने पाया कि रात में देर से भोजन करने की आदत कैलोरी की मात्रा, मेटाबॉलिज्म और पाचन तंत्र को प्रभावित करती है जिसके कारण वजन बढऩे का खतरा हो सकता है। अध्ययन में शोधकर्ताओं में प्रयोगात्मक तथ्यों के आधार पर बताया है कि रात में देर से खाने की आदत ऊर्जा व्यय में कमी, भूख में वृद्धि और वसा ऊतकों में परिवर्तन को बढ़ा देती है। ये स्थितियां संयुक्त रूप से मोटापे के खतरे को बढ़ा देती हैं।अध्ययन में पाया गया कि निर्धारित समय से चार घंटे के बाद भोजन करने के कारण हमारे भूख के स्तर पर महत्वपूर्ण अंतर पड़ता है, जिससे कैलोरी बर्न और वसा का संचय भी प्रभावित होता है, जो मोटापे का कारण बनती है। अध्ययन के परिणामों से पता चला कि देर से भोजन करने वाले लोगों में लेप्टिन और ग्रेलिन जैसे भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन्स पर असर देखा गया। लेप्टिन हार्मोन जो पेट भरा होने का संकेत देता है, इसकी देर से भोजन करने वाले लोगों में विशेष कमी देखी गई। ऐसे लोगों में दूसरे समूह वालों की तुलना में कैलोरी बर्न की गति भी कम देखी गई जिसके कारण वजन बढऩे का खतरा भी अधिक देखा गया।निष्कर्ष में टीम ने पाया कि देर से खाने वाले लोगों में शारीरिक और आणविक तंत्र प्रभावित होते हैं जो समय के साथ मोटापे के खतरे को बढ़ा सकते हैं। वैश्विक स्तर पर इस समस्या को बढ़ा हुआ देखा गया है।अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने मोटापे की स्थिति को कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारक माना है, इसमें से कुछ को वैश्विक स्तर पर बढ़ते मृत्यु के प्रमुख कारकों के तौर पर भी देखा जाता रहा है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के विशेषज्ञों ने बताया कि मोटापा सीधे तौर पर हृदय संबंधी जोखिम वाले कारकों को बढ़ाता है जिसमें डिस्लिपिडेमिया, टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और नींद संबंधी विकार शामिल हैं।कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के बढ़ते खतरे के लिए भी मोटापे को जोखिम कारक के तौर पर देखा जा रहा, ऐसे में सभी उम्र के लोगों को अपने स्तर पर मोटापे से बचाव के उपाय करते रहना चाहिए। रात के समय में जल्दी भोजन करने और भोजन के बाद वॉक की आदत बनाकर इसके जोखिम को कम किया जा सकता है।
- मिठाइयों में मुख्य सामग्री होती है खोया। लेकिन नकली मावा या खोया का सेवन करने से सेहत को कई नुकसान हो सकते हैं। मिठाइयों को बनाने के लिए दुकानों में मिलावटी मावे का इस्तेमाल खुले आम किया जाता है। नकली मावे का सेवन सेहत के लिए हानिकारक होता है। इस लेख में नकली मावा खाने के नुकसान जानेंगे। साथ ही बताएंगे कि घर पर आप किस तरह से खोवा बना सकते हैं।1. उल्टी और दस्तनकली खोए को सिंंंथेटिक दूध से बनाया जाता है। इसका सेवन करने से उल्टी, दस्त, फूड पॉइजनिंग आदि की समस्या हो सकती है। सिंंंथेटिक मावा बनाने के लिए यूरिया का इस्तेमाल किया जाता है इसलिए आपको असली और खोया के बीच का अंतर भी पता होना चा्हिए।2. किडनी के लिए नुकसानदायकनकली खोया खाने से किडनी पर बुरा असर पड़ता है। नकली खोया का सेवन करने से लिवर को भी नुकसान पहुंचता है। नकली खोया बनाने के लिए डिटर्जेंट का इस्तेमाल किया जाता है इसलिए इसके सेवन से बचें।3. पेट दर्द होनानकली या मिलावट खोया खाने से पेट में दर्द की समस्या हो सकती है। अगर आपके घर में बच्चे हैं, तो ज्यादा मिठाइयों के सेवन से उनकी सेहत बिगड़ सकती है। गर्भवती महिलाओं को खोया का सेवन करने से बचना चाहिए। इससे कब्ज की समस्या हो सकती है।4. वजन बढऩामावे में स्टार्च, आलू, आयोडीन आदि भी मिलाया जाता है। इससे वजन बढ़ता है। नकली मावा को केमिकल्स डालकर बनाया जाता है। कई दुकानों पर मिल्क पाउडर में वनस्पति घी मिलाकर मावा तैयार किया जाता है। वेट लॉस करना चाहते हैं, तो नकली मावे से बचें।5. अपच की समस्यानकली मावा में टेलकम पाउडर, चूना, चॉक, सफेद केमिकल्स मौजूद होता है। बेकार क्वालिटी के मावे में सॉलिड मिल्क भी मिलाया जाता है। मिलावटी मावे का सेवन करने से इंडाइजेशन, पेट में मरोड़ की समस्या हो सकती है।नकली मावा कैसा होता है?-नकली मावा दानेदार होता है।-नकली मावा मुंह में चिपकता है।-मिलावटी मावा पानी में डालने से टूटकर अलग हो जाएगा।-नकली मावे में देसी घी की खुशबू नहीं आएगी।-नकली मावे में चीनी डालकर गरम करें। अगर वो पानी छोड़ेगा, तो मतलब वो मिलावटी है।घर पर मावा कैसे बनाएं?-घर पर खोया बनाने के लिए बर्तन में दूध डालकर उबालें। जब दूध गरम हो जाए, तो उसे 4 से 5 मिनट तक चलाते रहिए। जब दूध गाढ़ा होने लगे, तो करछी चलाते रहें। दूध को हलवे की तरह गाढ़ा होने पर चलाकर पकाते रहें। जब दूध गाढ़ा हो जाए, तो गैस बंद कर दें। मावा तैयार हो जाए, तो बर्तन में निकालकर रख दें। दीवाली पर सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए नकली मावे के सेवन से बचें। घर के बने ताजे पकवानों का सेवन करें।
- सरसों के तेल का उपयोग कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने के लिए घरेलू उपाय के तौर पर भी किया जाता है। कुछ लोग बालों की मालिश करने के लिए भी सरसों के तेल का उपयोग करते हैं। त्वचा से एजिंग के लक्षणों को कम करने, त्वचा में नमी बनाए रखने के लिए सरसों के तेल को नहाने से लगाना फायदेमंद हो सकता है। तो चलिए, जानते हैं सरसों का तेल लगाने से क्या होता है? या फिर सरसों का तेल लगाकर नहाने से क्या होता है?सरसों का तेल लगाकर नहाने से क्या होता है?जोड़ों के दर्द से आराम मिलेअगर आप नहाने से पहले अपने शरीर की सरसों के तेल से मालिश करेंगे, तो इससे आपको जोड़ों में होने वाले दर्द से आराम मिल सकता है। साथ ही सरसों का तेल मांसपेशियों के दर्द को कम कर सकता है और हड्डियों को मजबूत बना सकता है। इसलिए अगर आपको मांसपेशियों में अकसर ही दर्द रहता है, तो आप नहाने से पहले सरसों के तेल से नियमित रूप से मालिश कर सकते हैं।एजिंग के लक्षणों को कम करेसरसों के तेल में एंटी एजिंग गुण पाए जाते हैं। नहाने से पहले शरीर पर सरसों का तेल लगाने से आपको एजिंग से लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है। अगर आप रोजाना नहाने से पहले शरीर की सरसों के तेल से मालिश करेंगे, तो इससे आपको झुर्रियां, फाइन लाइंस आदि से छुटकारा मिल सकता है। यह त्वचा में कसाव लाता है और स्किन इलास्टिसिटी को भी बढ़ाता है।मुहांसों की समस्या से बचाएसरसों के तेल में एंटीबायोटिक, एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। ऐसे में अगर आप नहाने से पहले अपनी पूरी बॉडी पर सरसों के तेल से मालिश करेंगे, तो इससे मुहांसों और फोड़े-फुंसियों से बचाव हो सकता है। यह एंटी फंगल का भी काम करता है, ऐसे में फंगल का विकास नहीं होता है और स्किन इंफेक्शन से बचाव होता है।त्वचा को मुलायम बनाएअगर आपकी त्वचा रूखी और बेजान रहती है, आप नहाने से पहले अपने शरीर की सरसों के तेल से मालिश कर सकते हैं। सरसों का तेल त्वचा को मॉइश्चराइज करने में सहायक हो सकता है। रोजाना नहाने से 1-2 घंटे पहले सरसों का तेल लगाने से त्वचा को नमी मिलेगी और स्किन हाइड्रेट बनी रहेगी।नहाने से पहले शरीर में सरसों का तेल कैसे लगाएं?-नहाने से पहले शरीर पर सरसों का तेल लगाने के लिए सरसों का तेल लें और इसे अपनी पूरी बॉडी पर लगाएं। अब हल्के हाथों से मालिश करें। फिर एक से दो घंटे तक स्किन को ऐसे ही छोड़ दें और फिर नहा लें। लेकिन इस दौरान ध्यान रखें कि आपको साबुन का इस्तेमाल नहीं करता है। इससे स्किन से सरसों का तेल सारा निकल जाएगा।सरसों के तेल की तासीर बेहद गर्म होती है। इसलिए अगर आपकी त्वचा पर सरसों का तेल सूट नहीं करता है, तो इसका इस्तेमाल करने से बचें। इसके लिए आप पहले सरसों के तेल का त्वचा पर पैच टेस्ट कर सकते हैं। अगर आपको सरसों का तेल अप्लाई करने के बाद जलन, रेडनेस या खुजली जैसा महसूस होता है, तो इसका यूज न करें। अगर 24 घंटे के पैच टेस्ट में त्वचा सामान्य रहती है, तो आप नहाने से पहले सरसों का तेल लगा सकते हैं और इसके फायदे ले सकते हैं।
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बॉडी को डिटॉक्स करने की जरूरत तब पड़ती है जब अनहेल्दी फूड हैबिट्स से हमारे शरीर में टॉक्सिक जमा हो जाते हैं। इन टॉक्सिन्स को निकालने के लिए हमें किसी भी प्रकार के ट्रीटमेंट की नहीं बल्कि घरेलू उपचार करके टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकालना होता है। खासकर दिवाली या फेस्टिव सीजन में स्वीट डिश और फ्राइड फूड हेल्थ के लिए बहुत ज्यादा खतरनाक होते हैं। बैड फैट हमारे शरीर को सुस्त बनाने के अलावा कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है।
ऐसे में बहुत जरूरी है कि आप दिवाली पर डिटॉक्स ड्रिंक्स भी जरूर पिएं।
कोकोनट वॉटर
कोकोनट वॉटर भी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। कोकोनट वॉटर से न सिर्फ बॉडी डिटॉक्स होती है बल्कि यह सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है। कोकोनट वॉटर में बहुत से पोषक तत्व होते हैं, जो आपके एक्टिव रहने के लिए भी बहुत जरूरी है।
डिटॉक्स टी
डिटॉक्स टी भी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। आपको बाहर से डिटॉक्स टी खरीदने की जरूरत नहीं है। आप घर पर ही डिटॉक्स टी बना सकते हैं। इसके लिए आपको एक पैन में दो कप पानी लें और इसे उबलने दें। इसके बाद इसमें दाल चीनी, अदरक, गुड़, सूखा ओरिगैनो, तुलसी के पत्ते, काली मिर्च, इलायची, सौंफ, अजवाइन मिला दें। इसके बाद इसे उबलने दें। याद रखें कि आपको यह धीमी आंच पर पकाना है। करीब 10-12 मिनट के लिए इन चीजों को पकने दें और फिर छान लें। इसे आप खाली पेट पी सकते हैं।
मिंट वॉटर
पुदीना भी शरीर से टॉक्सिक निकालने में बहुत कारगर है। आप मिंट वॉटर बनाने के लिए एक पैन में दो गिलास पानी लें। इसे हल्की आंच पर उबलने दें। इसके बाद 10-12 पुदीने के पत्ते डाल दें। इन्हें अच्छी तरह उबलने दें। अब इसमें काली मिर्च डाल दें। 7-8 मिनट उबलने के बाद इसे छान लें। आप इसे खाली पेट पिएं। इससे न सिर्फ बॉडी डिटॉक्स होगी बल्कि इससे आपका डाइजेशन भी सही रहेगा। -
हम सभी ने पाचन तंत्र के बारे में ज़रूर बात की होगी कि खाना पचाने और शरीर को स्वस्थ रखने में इसका कितना बड़ा योगदान हो सकता है। मगर, हम इसी के केंद्र बिंदु नाभि के बारे में कितना जानते हैं? शायद कुछ भी नहीं! असल में नाभि (Navel) मानव शरीर का मुख्य हिस्सा है, जो शरीर को अच्छी सेहत प्रदान करता है। आयुर्वेदाचार्यों के मुताबिक यदि नाभि चक्र को उसके केंद्र बिंदु से हटा दिया जाए, तो शरीर कई जानलेवा रोगों से घिर सकता है। इसलिए शरीर के पूरी तरह स्वस्थ रहने के लिए नाभि का अपने स्थान पर रहना बहुत जरूरी है। पर कई बार कूदने, गलत तरीके से उठने-बैठने या कुछ भारी सामान उठा लेने से नेवल डिसप्लेसमेंट हो जाती है। जिसे हिंदी में नाभि खिसकना कहा जाता है। यहां हम उन योगासनों के बारे में बात करने वाले हैं, जो आपको नेवल डिस्प्लेसमेंट की समस्या में राहत दे सकते हैं।
जानिए नेवल डिस्प्लेसमेंट के क्या कारण हो सकते हैं?
अचानक किसी भारी वस्तु को उठाना, चलते, कूदते, दौड़ते, समय टांगों में लचक आ जाना, सोते समय अचानक झटका लगना, एक हाथ से अधिक भार उठाना, मल-मूत्र की गति को रोकना आदि की वजह से आपकी नाभि अपनी जगह से हिल सकती है। इसकी वजह से आपको कोई भी गंभीर बीमारी, भूख-प्यास न लगना, सोने और उठने में अनिश्चितता, मानसिक विकार जैसे डर, एग्जाइटी, क्रोध की वजह से भी नेवल डिसप्लेसमेंट हो सकता है।
नेवल डिसप्लेसमेंट की वजह से होने वाली समस्याएं और लक्षण
कब्ज होना, मल निकल जाता है या बहुत कम मल त्याग होना, बार-बार मल का कम मात्रा में निकलना या आंतों में चिपके रहना।
नेत्र विकार, बालों का झड़ना या व्हाइट डिसचार्ज, पतलापन, बीमारी, मुंह से दुर्गंध आना, रक्त विकार, हृदय विकार आदि।
तो यदि आपको लग रहा है कि आपकी नाभि अपनी जगह से हिल गई है या आप अपने नेवल चक्रा को सही करना चाहते हैं तो ये आसान आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।
जानिए नेवल डिसप्लेसमेंट को ठीक करने के लिए योगासन--
1 नौकासन
अपनी पीठ पर लेट जाएं। हाथों को भी समान दूरी पर रखें। सांस लें। धीरे-धीरे दोनों हाथों, धड़ और सिर को जमीन से एक साथ उठाएं। ध्यान रखें कि सिर और पैर लगभग एक ही ऊंचाई पर रहें। जब तक आप इस अवस्था में रह सकते हैं तब तक रहें। इस आसन को पूर्ण नौकासन कहा जाता है। यही क्रम 5-6 बार करें।
2 पश्चिमोत्तानासन
जमीन पर बैठें, पैर आगे रखें। सांस छोड़ते हुए अब दोनों हाथों की अंगुलियों को सामने की ओर रखते हुए दोनों पंजों के अंगूठों को पकड़ने का प्रयास करें। अपने पैरों को फैलाकर रखें। अब धीरे-धीरे सिर को घुटने से स्पर्श कराएं। पीठ सपाट होनी चाहिए। इसे करते समय जल्दबाजी न करें। पिछली स्थिति में आते समय सांस लें।
3 उत्तानपादासन
अपनी पीठ के बल लेट जाएं। दोनों हाथों को अपनी जांघों के किनारों पर रखें। हथेलियों को नीचे की ओर रखें। सांस भरते हुए पैरों को 30 डिग्री तक ऊपर उठाएं। दोनों पैर आपस में जुड़े हुए होने चाहिए। पंजे सामने की ओर रखें। अपनी क्षमता के अनुसार इस पोजीशन को होल्ड करें और पैरों पर हल्का सा दबाव बनाए रखें। इसके बार 5 – 6 बार इसे दोहराएं।
4 सुप्तवज्रासन
सबसे पहले वज्रासन में आ जाएं। फिर कोहनियों के सहारे धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकें और जमीन पर लेट जाएं। अब पिछले हिस्से को थोड़ा ऊपर उठाएं और गर्दन को झुकाते हुए सिर को वजन दें। हाथों को छाती पर या जांघों पर रखें। जितना हो सके इस आसन को करें।
5 भुजंगासन
सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं। अब दोनों हथेलियों को अपने कंधे के नीचे रखें। इस दौरान अपनी कोहनियों को पेट के दोनों ओर रखें। अब दोनों हथेलियों को जमीन की ओर दबाते हुए पहले माथा, फिर छाती और अंत में नाभि क्षेत्र को ऊपर उठाएं। इसके बाद धीरे-धीरे गर्दन को पीछे की ओर मोड़ते हुए आसमान की ओर देखने की कोशिश करें। जब तक आप सहज महसूस करें तब तक इस मुद्रा में रहें। -
दिवाली पर मार्केट में कई सारी मिठाइयां मिलती हैं लेकिन कई लोग ऐसे भी होते हैं, जो घर पर मिठाई बनाना चाहते हैं। बर्फी, लड्डू, गुलाब जामुन या रसगुल्ले जैसी मिठाइयां तो हर कोई खाता है लेकिन इस दिवाली अगर आप कुछ हटकर रेसिपी ट्राई करना चाहते हैं, तो आप गुलकंद के लड्डू बना सकते हैं। यह लड्डू ना सिर्फ बच्चों को बहुत पसंद आएंगे बल्कि आप मेहमानों का स्वागत भी इन लड्डू से कर सकते हैं। इस रेसिपी की सबसे खास बात यह है कि आप इसे चीनी के बिना बना सकते हैं क्योंकि गुलकंद का इस्तेमाल करने से इसमें मिठास रहती ही है। आप अगर ज्यादा मीठा खाते हैं, तो इसमें चीनी की बजाय गुड़ मिला सकते हैं।
आइए, जानते हैं कैसे बनाएं-
गुलकंद के लड्डू बनाने की सामग्री-
गुलकंद
आटा
चीनी
आटा
काजू
खजूर
पिस्ता
बादाम
इलायची पाउडर
गोंद कतीरा
खजूर
गुलकंद के लड्डू बनाने की विधि
इस डिश को बनाने के लिए गोंद, आटा, घी, बादाम, पिस्ता, काजू, खजूर, गुलकंद और इलायची पाउडर की जरूरत पड़ेगी। आप सबसे पहले एक कड़ाही लें। अब इसमें देसी घी डालें और सारे ड्राय फ्रूट्स को रोस्ट कर लें। अब इन्हें ठंडा करके पीस लें। अब इसी कड़ाही में घी डालें और गोंद डालें। गोंद फूल जाए, तो इसे ठंडा करके इसमें आटा डालें। अब इसे गोल्डन ब्राउन करें। इसमें गुड़ डालें। अब इसमें रोस्ट किए हुए ड्राय फ्रूट्स डाल दें। अब इलायची पाउडर डालें। इसे अच्छी तरह मिक्स कर दें। अब बीच में गुलकंद-खजूर का मिक्सचर भरकर छोटे-छोटे लड्डू बना लें। -
रूमेटॉइड अर्थराइटिस एक ऐसी ऑटोइम्यून डिसीज है जो अब बहुत कॉमन हो गई है। हालांकि, एक्टिव लाइफस्टाइल और हेल्दी डायट गठिया में दर्द को कम करने में मदद मिल सकती है। एक्सरसाइज गठिया मैनेज करने का एक पार्ट है, हालांकि इसे रोजाना करना चाहिए। इसी के साथ लाइफस्टाइल में दूसरे बदलाव भी हैं जो गठिया के साथ बेहतर तरीके से जीने में मदद कर सकते हैं। ऑर्थोपेडिक के कंसल्टेंट डॉ सिद्धार्थ यादव ने लाइफस्टाइल में 5 बदलाव के बारे में बताया हैं जो गठिया के लक्षणों को दूर करने में मदद कर सकते हैं।
गठिया के लिए कैसे करें लाइफस्टाइल में बदलाव
1) वजन कम करें- ज्यादा वजन वाला शरीर पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस के लिए सबसे आम जोखिम का कारण बनता है। इस दौरान शरीर के वजन का लगभग तीन गुना दबावघुटनों पर आता है। वजन घटाने से शुरुआती गठिया को रोका जा सकता है, इसी के साथ उन लोगों में दर्द से राहत भी मिल सकती है जो पहले से ही इससे पीड़ित हैं।
2) शारीरिक एक्टिविटी में करें चेंज- जिन लोगों को घुटने में दर्द होता है, उन्हें जॉगिंग, स्क्वाटिंग, स्किपिंग, फर्श पर बैठने जैसी इम्पैक्ट लोडिंग एक्टिविटी से बचना चाहिए। केवल वेस्टर्न कमोड का इस्तेमाल करना चाहिए। यह जोड़ों के डैमेज को आगे बढ़ाने और दर्द को कम करने में मदद करेगा।
3) रोजाना एक्सरसाइज- मजबूत मांसपेशियां जोड़ों और जोड़ों की मूवमेंट को स्थिर करती हैं और जोड़ों की सतह के पोषण के लिए भी अच्छी होती हैं, इसलिए रोजाना एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी है।
4) विटामिन की खुराक- विटामिन डी हड्डियों को मजबूत बनाता है और विटामिन बी12 मांसपेशियों और नसों के लिए जरूरी है। लंबे समय तक विटामिन की कमी से कार्टिलेज को जल्दी नुकसान हो सकता है जिससे गठिया हो सकता है।
5) योग- योग तनाव को नियंत्रित करने और मेटाबॉलिज्म में सुधार करने में मदद करता है। रोजाना योग करने से दर्द कम हो जाता है जिससे पेन किलर की जरूरत कम हो जाती है। - कॉर्न से बनी चीजों को अक्सर लोग खाना पसंद करते हैं। खास कर जब इसे चीज के साथ मिला दिया जाए तो इसका स्वाद और भी ज्यादा बढ़ जाता है। अगर आप रोजाना एक जैसी चीजें खाकर बोर हो गए हैं तो कुछ चटपटा ट्राई कर सकते हैं। यहां हम बता रहे हैं चीज कॉर्न टोस्ट बनाने का तरीका। इस रेसिपी से आप भई चीज कॉर्न टोस्ट बनाने का ट्राई कर सकते हैं।चीज कॉर्न टोस्ट बनाने के लिए आपको चाहिएब्रेड स्लाइस, मेयोनीज, शेजवान सॉस, प्याज , टमाटर, शिमला मिर्च, स्वीट कॉर्न , चीज, नमक , काली मिर्च पाउडर, चिली फ्लैक्स, ऑरिगेनो, बटर।कैसे बनाएं------------ इसे बनाने के लिए आपक सबसे पहले सब्जियों को अच्छे से धोएं।- फिर सब्जियों को सूखने के बाद बारीक-बारीक काट लें।- अब स्वीट कॉर्न को भी बॉइल करें।- जब सभी तैयारी हो जाए तो एक कटोरी में सभी सब्जियों, स्वीट कॉर्न, मेयोनीज, शेजवान सॉस, नमक, काली मिर्च पाउडर को डालें।- सभी चीजों को अच्छे से मिक्स करें और फिर से इसमें कद्दूकस की हुई चीज डालें। अच्छे से मिलाएं ।- अब ब्रेड स्लाइस को लें और इस स्टफिंग को ब्रेस स्लाइस पर लगाएं। अच्छे से स्प्रेड करने के बाद इस पर खूब सारा कद्दूकस किया हुआ चीज स्प्रेड करें।- अब एक तवा गर्म करें और फिर इस पर बटर लगाएं। अब इस पर ब्रेड रखें और इसे ढक दें। मीडियम टू लो फ्लेम पर इसे 3 से 4 मिनट के लिए सेकें। चीजी कॉर्न टोस्ट तैयार है इसे सर्व करें।
- बालों में तेल लगाने से अक्सर लड़कियां कतराती हैं। हालांकि, दादी और माताओं ने सदियों से तेल मालिश के फायदों की सराहना की है। क्या आप जानते हैं कि अपने बालों में तेल लगाने से आपके रोम छिद्रों को कठोर और प्रदूषित वातावरण से बचा सकते हैं? यहां हम बताएंगे कि अपने बालों को सही तरीके से तेल लगाने पर क्या फायदे मिल सकते हैं।1) बाल होते हैं प्रोटेक्टजिस तरह स्किन को हर तरह के मौसम और धूप से सुरक्षा की जरूरत होती है, उसी तरह बालों को भी अच्छी सुरक्षा की जरूरत होती है। तेल मालिश बालों की किस्में के लिए एक सुरक्षात्मक परत बनाने में मदद कर सकती है ताकि बाल प्रतिरोध विकसित करें और डैमेज न हों।2) बालों के झडऩे और स्पलिटएंड्स होने से बचावबालों का झडऩा अनहेल्दी बालों और स्कैल्प का सीधा रिजल्ट है। तेल मालिश स्कैल्प और बालों के हेल्थ में काफी सुधार कर सकती है, जिससे बालों का झडऩा कम हो जाता है। इसके अलावा स्प्लिट एंड्स भी बालों की ग्रोथ रोकने के मुख्य कारण में से एक हैं और इनका इलाज गर्म तेल की मालिश से भी किया जा सकता है।3) स्कैल्प संक्रमण से बचावस्कैल्प पर बंद रोमछिद्रों से जलन, बैक्टीरिया और फंगल संक्रमण जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं। ये संक्रमण आगे चलकर डैंड्रफ का कारण बन सकते हैं और बालों में जूं भी हो सकती हैं। एक गर्म तेल मालिश आपके स्कैल्प को पोषण दे सकती है और किसी भी संक्रमण को रोकने में मदद कर सकती है।4) बालों को मिलता है पोषणतेल से जब स्कैल्प पर मालिश की जाती है, तो ये हमारे स्कैल्प की स्किन में गहराई से जाता है जो कोई शैम्पू या हेयर प्रोडक्ट नहीं कर सकता है। इसलिए, जब तेल स्कैल्प में गहराई से अवशोषित हो जाता है, तो यह आपके बालों के ऊतकों और रोम को अंदर से पोषण देता है। इसी के साथ तेलों में फैटी एसिड होते हैं जो लिपिड और प्राकृतिक बालों की चमक को फिर से भरने में मदद करते हैं।5) बालों को मजबूत बनाता हैकुछ कारक जो कमजोर जड़ों का कारण बन सकते हैं, वे हैं खराब डायट, हीट टूल्स, ठंडा तापमान, बाल प्रोडक्ट्स और बहुत कुछ। तेल मालिश आपके बालों को मजबूत बनाने में मदद कर सकती है। ये आपके स्कैल्प में ब्लड फ्लो को बढ़ाती है, जिससे बाल मजबूत होते हैं।
- सर्दियों का मौसम आते ही बाजारों में हरी-हरी मटर मिलना शुरू हो जाती हैं। मीठे स्वाद वाली इन मटर को खाने में मिलाने पर खाने का स्वाद भी लाजवाब हो जाता है। मटर से कई तरह की डिशेज बनाई जा सकती हैं, जैसे मटर के पराठे, मटर की सब्जी, मटर पुलाव वगैराह। हालांकि, कुछ लोगों को ये इतनी पसंद होती है कि वह इसे छिलते-छिलते ही खाने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि खाने का स्वाद बढ़ाने वाली मटर हेल्थ के लिए कितनी ज्यादा फायदेमंद हो सकती हैं?ब्लड शुगर के लेवल को करता है स्थिर-मटर में कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) होता है, जो इस बात का माप है कि खाना खाने के बाद आपका ब्लड शुगर कितनी तेजी से बढ़ता है। इतना ही नहीं, हरी मटर फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होती है, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए फायदेमंद होती है।स्किन हेल्थ-मटर में स्किन के मुताबिक पोषक तत्व होते हैं जिनमें विटामिन बी 6, विटामिन सी और फोलेट (फोलिक एसिड) शामिल हैं। ये पोषक तत्व सूजन को कम करने और फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद कर सकते हैं।प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत-हरी मटर प्रोटीन के सबसे अच्छे स्रोतों में से एक है, जो एक प्रमुख कारण है कि वे फाइबर की हाई मात्रा के साथ होते हैं। जो लोग पशु-आधारित प्रोटीन का सेवन नहीं करते हैं, उनके लिए मटर प्रोटीन की जरुरतों को पूरा करने के लिए एक अच्छा ऑप्शन है।कोलेस्ट्रॉल के लेवल को नियंत्रित करने में मदद-हरी मटर में नियासिन की प्रचुर मात्रा होती है जो ट्राइग्लिसराइड्स और वीएलडीएल के उत्पादन को कम करने में मदद करता है।
- बालों में नारियल तेल का प्रयोग सभी करते हैं। बालों में नारियल तेल लगाने से बाल स्वस्थ रहते हैं और बालों की कई समस्याएं भी दूर होती हैं। वहीं आंवला भी एक बेहतरीन फल है, जिसका न सिर्फ सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है, बल्कि इसका प्रयोग बालों में करने से भी बहुत फायदे मिलते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं, जब आप नारियल तेल में आंवला मिलाकर बालों में अप्लाई करते हैं, तो यह बालों की कई समस्याओं के लिए एक रामबाण उपाय साबित हो सकता है?आइए पहले जानते हैं बालों के लिए आंवला और नारियल तेल के फायदे-नारियल तेल को बालों की कई समस्याओं का काल माना जाता है, क्योंकि इसमें हेल्दी फैट्स, एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन ई, एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। वहीं आंवला की बात करते हैं तो यह भी विटामिन सी और एंटिऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। जब आप नारियल तेल और आंवला को साथ में मिलाकर बालों में अप्लाई करते हैं, तो इससे कई समस्याएं दूर करने में मदद मिलती है जैसे:-ड्राई और फ्रिजी हेयर की समस्या दूर होती है और बालों में नेचुरली चमक आती है।-यह बालों के विकास में तेजी लाने और नए बाल उगाने में मदद करता है, जिससे गंजेपन री समस्या को रोकने में भी मदद मिलती है।-स्कैल्प में एलर्जी, खुजली और डैंड्रफ आदि से छुटकारा दिलाने में यह कॉम्बिनेशन बहुत लाभकारी है।-यह बालों का झडऩा रोकने और उन्हें जड़ से मजबूत बनाने में मदद करता है।-यह बालों को पर्याप्त पोषण प्रदान करता है, जिससे आपको घने, लंबे, शाइनी और मजबूत बाल पाने में मदद मिलती है।आंवला पाउडर और नारियल तेल से बाल काले कैसे करें-सफेद बालों की समस्या दूर करने और उन्हें नैचुरली काला बनाने के लिए आपको एक पैन या कढ़ाई में नारियल तेल डालना है। उसके बाद इसमें 2-3 चम्मच आंवला पाउडर डालना है और अच्छी तरह पकाना है। आप चाहें तो इसमें मेहंदी पाउडर भी डाल सकते हैं। इससे बालों को जल्द काला करने में मदद मिलेगी। जब मिश्रण काला हो जाए, तो गैस को बंद कर दें। इसे ठंडा होने दें। इस मिश्रण को बाल धोने से कम से कम 3-4 घंटे पहले बालों में लगाकर छोड़ दें। उसके बाद शैंपू से धो लें। हफ्ते में 2-3 बार लगाएं, इससे आपको जल्द परिणाम देखने को मिलेंगे।
- बाल झडऩे की समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो रोजमेरी ऑयल का इस्तेमाल कर सकते हैं। रोजमेरी ऑयल में एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं। स्कैल्प इंफेक्शन के कारण भी बाल झडऩे की समस्या हो सकती है। इससे छुटकारा पाने के लिए रोजमेरी ऑयल का इस्तेमाल फायदेमंद होता है। रोजमेरी ऑयल में एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं। रोजमेरी ऑयल में विटामीन सी मौजूद होता है। जानते हैं रोजमेरी ऑयल का इस्तेमाल करने के तरीके।बालों के लिए रोजमेरी ऑयल के फायदे-बाल झडऩे की समस्या दूर होती है।-बैक्टिीरियल इंफेक्शन से छुटकारा मिलता है।-डैंड्रफ की समस्या दूर होती है।-खुजली से राहत मिलती है।-बालों की ग्रोथ अच्छी होती है।-बाल झडऩे की समस्या दूर करने के लिए रोजमेरी ऑयल से चंपी करें।रोजमेरी तेल को नारियल के तेल के साथ मिलाकर हल्का गरम करें।-बालों पर तेल लगाकर अच्छी तरह से मालिश करें।-15 मिनट बाद सिर धो लें। इससे हेयर फॉल की समस्या दूर होगी।-2 से 3 चम्मच मेहंदी पाउडर लें। उसमें रोजमेरी ऑयल की 4 से 5 बूंदें मिलाएं। इस मिश्रण को स्कैल्प और बालों पर लगा लें। 30 मिनट बाद शैंपू से सिर धो लें।रोजमेरी से धोएं बालरोजमेरी ऑयल से बालों को धोकर भी हेयर फॉल की समस्या को दूर कर सकते हैं। कोई भी माइल्ड शैंपू लें उसमें रोजमेरी ऑयल मिला लें।इस मिश्रण से बालों को धो लें। हफ्ते में 2 से 3 बार इस प्रक्रिया को दोहरा सकते हैं।रोजमेरी ऑयल और त्रिफला पाउडरबाल झडऩे का इलाज करने के लिए 3 से 4 चम्मच त्रिफला पाउडर लें। त्रिफला पाउडर में रोजमेरी ऑयल की 4 से 5 बूंदें मिलाएं। इस मिश्रण को जड़ों में लगाकर छोड़ दें। 30 मिनट बाद सिर धो लें। हफ्ते में 1 से 2 बार इस मिश्रण का इस्तेमाल कर सकते हैं।रोजमेरी ऑयल और एलोवेराबाल झडऩे की समस्या दूर करने के लिए एक बाउल में एलोवेरा लें। एलोवेरा में रोजमेरी ऑयल की 3 से 4 बूंदें मिलाएं। इस मिश्रण को स्कैल्प पर लगा लें। 30 से 40 मिनट बाद सिर धो लें।
- अलसी के बीज और गोंद, दोनों ही औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। इन दोनों का उपयोग वैसे तो अलग-अलग समस्याओं का इलाज करने के लिए किया जाता है। लेकिन आप अलसी के बीज और गोंद का उपयोग एक साथ मिलाकर भी कर सकते हैं। इसके लिए आप अलसी और गोंद के लड्डू बनाकर खा सकते हैं।अलसी और गोंद के लड्डू खाने के फायदे1. पाचन में सुधार करेअलसी और गोंद के लड्डू खाने से पाचन तंत्र मजबूत बन सकता है। अगर आपका पाचन तंत्र खराब है, तो आप अपनी डाइट में अलसी और गोंद के लड्डू शामिल कर सकते हैं। अलसी और गोंद के लड्डू पाचन को स्वस्थ रखते हैं। दरअसल, अलसी और गोंद में फाइबर की मात्रा काफी अधिक मात्रा में होता है। फाइबर भोजन को पचाने में मदद करता है, साथ ही गैस और कब्ज की समस्या से भी छुटकारा दिलाता है।2. वजन घटाने में सहायकअगर आप वजन घटाना चाहते हैं, तो आपके लिए अलसी और गोंद के लड्डू खाना भी फायदेमंद साबित हो सकता है। अलसी और गोंद में मौजूद फाइबर आपके पेट को लंबे समय तक भरा हुआ रखता है, जिससे भूख कम लगती और ओवरइटिंग से बचाव होता है। इससे आपको वेट लॉस में मदद मिल सकती है।3. इम्यूनिटी बूस्ट करेअलसी और गोंद के लड्डू जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनमें वे सभी विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो इम्यूनिटी को बूस्ट कर सकते हैं। दरअसल, जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, वे अकसर ही बीमार रहते हैं और तरह-तरह की बीमारियों से जूझते रहते हैं।4. हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंदअपने हार्ट हेल्थ को हेल्दी रखने के लिए भी आप अलसी और गोंद के लड्डू का सेवन कर सकते हैं। अलसी के लड्डू में अल्फा-लिनोलेनिक एसिड होता है, जो एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकता है। इसके साथ ही यह वजन को घटाकर हृदय रोगों के जोखिम को भी कम कर सकता है। अलसी और गोंद के लड्डू ब्लड शुगर लेवल को भी घटाने में सहायक हो सकता है और हार्ट को हेल्दी बनाए रखने में मदद कर सकता है।5. हड्डियां मजबूत बनाएअलसी और गोंद के लड्डू खाने से आपकी हड्डियां मजबूत और स्ट्रॉन्ग बनेंगी। अलसी और गोंद के लड्डू खाने से आपको हड्डियों में होने वाले दर्द से भी राहत मिल सकती है। इसलिए बढ़ती उम्र में अलसी और गोंद के लड्डू को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।अलसी और गोंद के लड्डू कैसे बनाएं?-अलसी और गोंद के लड्डू हेल्थ के लिए काफी लाभकारी होते हैं, ये तो हम सभी जान ही चुके हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि अलसी और गोंद के लड्डू की रेसिपी क्या है? या फिर अलसी और गोंद के लड्डू कैसे बनाएं? तो आपको बता दें कि अलसी और गोंद के लड्डू बनाना काफी आसानी है, आप इसे घर पर थोड़े से समय में ही बना सकते हैं।-अलसी और गोंद के लड्डू बनाने के लिए सबसे पहले अलसी के बीजों को रोस्ट कर लें। इसके बाद अलसी के बीजों को दरदरा पीस लें। अब एक पैन लें, इसमें घी डालें और गर्म कर लें। फिर इसमें गेहूं का आटा डालें और सुनहरा होने तक भून लें। जब आटे की खुशबू आने लगे, तो आप इसे अलग प्लेट या ट्रे में निकाल लें। इसके बाद देसी घी डालकर गोंद को तलें। गोंद को हल्का ब्राउन होने दें और फूलने के बाद एक प्लेट में निकाल दें। इसके बाद आप गोंद को बेलन आदि की मदद से पीस सकते हैं। अब गोंद को फ्राई करें, इसमें पिसी हुई अलसी डालें औऱ पकाएं। जब ये दोनों अच्छी तरह से पक जाए, तो प्लेट में निकाल दें और ड्राय फ्रूट्स मिलाएं। अब इन्हें लड्डू की शेप दें। अब आप इन लड्डू को गुड़ से बनी चाशनी में डाल दें। तैयार लड्डू को आप रोजाना खा सकते हैं।
- आज के दौर में हम हर छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दवा का सहारा लेते हैं। जबकि हमारे घर की रसोई में ऐसे बहुत से मसाले हैं, जो हमें छोटी-मोटी बीमारियों जैसे सर्दी, जुकाम और खांसी से राहत देते हैं। इनके अलावा कुछ खतरनाक रोगों से भी हमारा बचाव करते हैं। ये खास मसाले रसोई के स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन में स्वाद का तड़का भी लगाते हैं। इसलिए ये मसाले हमारी रसोई को सेहत का खजाना बनाते हैं। ें यहां हम उन सात मसालों के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जो हमारे सेहत के लिए फायदेमंद हैं। आयुर्वेद के अनुसार इनका उपयोग करने से हम कई प्रकार के संक्रमण से बचे रहते हैं।Óहल्दीहल्दी भारतीय रसोई में पाया जाने वाला एक आम मसाला है। यह वात और कफ दोषों को दूर करने में मदद करती है। इसमें पाया जाने वाला करक्यूमिन नामक तत्व एलर्जी, गठिया, हृदय रोग, अल्जाइमर और मधुमेह से पीडि़त व्यक्तियों के लिए लाभदायक होता है। इसमे कैंसररोधी गुण होते हैं, जो कैंसर से बचाव करते हैं।अदरकयह भी एक सुलभ और गुणकारी मसाला है। इसका उपयोग हम भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए करते हैं। अदरक वाली चाय वैसे भी भारतीय जीवन का एक अहम हिस्सा है। इसका सेवन स्वाद के साथ-साथ हमारी सेहत को भी बढ़ाता है। ये शरीर को डिटॉक्सीफाई करने का भी काम करती है।कैसे करें प्रयोगइन्फ्लुएंजा से पीडि़त लोग 6 मिली अदरक के रस में 6 ग्राम शहद मिलाकर दिन में 3-4 बार सेवन करें, तो इन्फ्लुएंजा से राहत मिलती है। निमोनिया में भी ये राहत देती है।निमोनिया में अदरक के 5 मिली रस में 1 या 2 वर्ष पुराना घी और कपूर मिलाकर गर्म करके छाती पर हल्की मालिश करने से राहत मिलती है।मेथीमेथी प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट है। प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने वाली मेथी साग और मसाले के रूप में इस्तेमाल की जाती है। इसमें हिपेटो-प्रोटेक्टिव गुण होते हैं। यह लीवर के लिए फायदेमंद होता है।कैसे करें प्रयोग1-2 ग्राम मेथी दाना (बीज) के चूर्ण का सेवन न्यूरो (तंत्रिका-तंत्र) से जुड़ी समस्याओं में लाभकारी होता है। इससे शरीर में होने वाले दर्द से भी राहत मिलती है।दालचीनीदालचीनी में बहुत सारे औषधीय गुण हैं। यह जीवाणुरोधी, एंटीवायरल और एंटीफंगल है, जो हमें बहुत से संक्रमण से बचाता है। यह एक प्राकृतिक इम्युनिटी बूस्टर है। इसमें पॉलीफेनोल्स और प्रोएंथोसायनिडिन पाये जाते हैं। इसका सेवन दांत व चर्म रोग, सिर दर्द, पाचनतंत्र से जुड़े विकारों से राहत दिलाता है।कैसे करें प्रयोगइसका उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह पर ही करना चाहिए।लौंगइसे अच्छा प्रतिरोधक माना जाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं। जो प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण करते हैं। लौंग खांसी और गले की तकलीफ को कम करती है।कैसे करें प्रयोगइसका सेवन गर्म पानी के साथ या चाय में डालकर कर सकते हैं। खांसी से राहत के लिए 3-4 नग लौंग को आग पर भूनकर पीस लें । इसमें शहद मिलाकर चाटने से खांसी से जल्द आराम मिलता है।काली मिर्चइसमें एंटीऑक्सीडेंट, रोगाणुरोधी और गैस्ट्रो से सुरक्षा देने वाले गुण होते हैं। इसका आयुर्वेद के अनुसार सेवन करना श्वसन संक्रमण से तुरंत राहत देता है। यह सर्दी और खांसी को ठीक कर गले को भी सुरक्षा प्रदान करती है। दैनिक आहार में शामिल करने से भी शरीर को आंतरिक मजबूती मिलती है।कैसे करें प्रयोगदमा और खांसी से आराम के लिए 2 ग्राम काली मिर्च के चूर्ण को 200 मिली गाय के दूध में पकाकर पीने से फायदा होता है। काली मिर्च पेट के कीड़े का कारगर उपचार करने में सहायक है। इसके लिए 2-3 ग्राम काली मिर्च चूर्ण को 1 कप छाछ के साथ सुबह खाली पेट लेने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं।जीरायह एक प्रमुख लोकप्रिय मसाला है। इसका उपयोग भारतीय पकवान व व्यंजनों में अक्सर किया जाता है। इसमें 'एपिजेनिनÓ और 'ल्यूटोलिनÓ नामक तत्व होते हैं, जो एंटीऑक्सीडेंट का कार्य करते हैं। यह हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक तत्वों से सुरक्षा प्रदान करते हैं।कैसे करें प्रयोगएसिडिटी होने पर धनिया और जीरा के 120 ग्राम पेस्ट को 750 ग्राम घी में पका लें। रोज 10-15 ग्राम की मात्रा में इसके सेवन से एसिडिटी ठीक होती है।
- रात की रोटी को अगर सुबह दूध के साथ खाया जाता है तो इससे सेहत को कई लाभ मिल सकते हैं। तो चलिए, जानते हैं सुबह खाली पेट दूध रोटी खाने से क्या होता है? सुबह खाली पेट दूध और बासी रोटी के फायदे क्या हैंवजन बढ़ाने में सहायकअगर आप अंडरवेट हैं और वजन बढ़ाना चाहते हैं, तो आप रात की बची हुई रोटियों को सुबह खा सकते हैं। रात की बची हुई रोटियों को सुबह दूध के साथ मिलाकर खाने से आपको पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व मिल सकते हैं। इससे आपको हेल्दी फैट, कैलोरी और काब्र्स मिलेंगे, जो आपका वजन बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। इसलिए दुबले-पतले लोग अपना वजन बढ़ाने के लिए सुबह खाली पेट बासी रोटी को दूध के साथ मिलाकर ले सकते हैं। इससे आपको काफी लाभ मिल सकता है।पेट के लिए लाभकारीसुबह खाली पेट बासी रोटी और दूध को एक साथ मिलाकर लेने से पेट को काफी लाभ पहुंच सकता है। अगर आप रोजाना सुबह-सुबह गर्म दूध में रात की बची हुई रोटियों को खाते हैं, तो इससे पाचन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद मिल सकती है। रोटी को दूध में मिलाकर खाने से अपच और कब्ज को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। दरअसल, रोटी में फाइबर होता है जो भोजन को पचाने में आंतों की मदद करता है और गंदगी को बाहर निकालता है।शरीर के तापमान को कंट्रोल करेसुबह खाली पेट बची हुई रोटी को दूध में मिलाकर लेने से आपको अपने शरीर के तापमान को भी नियंत्रण में रखने में मदद मिल सकती है। अगर आप सुबह-सुबह रोटी और दूध को एक साथ लेते हैं, तो इससे गर्मी से बचा जा सकता है। रोटी और दूध का कॉम्बिनेशन आपको ठंडा या सामान्य रखने में मदद कर सकता है। लेकिन शरीर के तापमान को नियंत्रण में रखने के लिए रोटी को ताजे दूध में खाना अधिक लाभकारी होता है।पूरे दिन एनर्जेटिक रखेरात की बची हुई रोटी को सुबह दूध के साथ खाने से आपको पर्याप्त ऊर्जा मिल सकती है। दूध और रोटी एक पौष्टिक आहार होता है, जो शरीर में होने वाले पोषक तत्वों की कमी को दूर कर सकता है। सुबह खाली पेट या नाश्ते में रात की बची रोटी और दूध खाने से आपको ऊर्जा मिल सकती है। इससे आप पूरे दिन एनर्जेटिक और ऊर्जावान महसूस कर सकते हैं।कमजोरी दूर करेदूध पोषक तत्वों का भंडार होता है। अगर आप रात की बची हुई रोटी और दूध को एक साथ खाते हैं, तो इससे आपको पोषक तत्व की प्राप्ति होती है। साथ ही आपको काब्र्स मिलते हैं, जिससे ऊर्जा मिलती है और थकान दूर होती है। रोजाना नाश्ते में बासी रोटी और दूध खाने से आपकी कमजोरी दूर हो सकती है।दूध के साथ बासी रोटी कैसे खाएं?--आप बासी रोटी के छोटे-छोटे टुकड़ों को गर्म दूध में मिलाकर खा सकते हैं।-इसके अलावा आप चाहें तो बासी रोटी या रात की बची हुई रोटी को ठंडे दूध के साथ भी ले सकते हैं।-अगर आप इसे अधिक पौष्टिक बनाना चाहते हैं, तो एक पैन में दूध गर्म करें। अब इसमें रोटी को छोटे-छोटे टुकड़ों में डालकर पका लें। आप चाहें तो इसमें बादाम, काजू या किशमिश आदि भी मिला सकते हैं।
- केला एक ऐसा फल है, जो आमतौर पर हर किसी को पसंद होता है। केला ना सिर्फ खाने में अच्छा लगता है, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। आपने पका हुआ केला तो जरूर खाया होगा और इसके फायदों के बारे में भी सुना होगा। लेकिन आज हम आपको कच्चे केले के फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं। आमतौर पर लोग कच्चे केले की सब्जी या कोफ्ते बनाकर खाते हैं। आप कच्चे केले को उबालकर भी खा सकते हैं। इसमें विटामिन-ए, विटामिन-बी6, , विटामिन-सी, फाइबर, पोटैशियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, जिंक और एंटी-ऑक्सीडेंट जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। कच्चे केले का सेवन करने से कई स्वास्थ्य समस्याओं में लाभ होता है।कच्चा केला कुछ बीमारियों में बहुत फायदेमंद होता है। आइए जानते हैं -पाचन संबंधी समस्याएं दूर करता हैकच्चे केले का सेवन करने से पाचन संबंधी समस्याएं भी दूर होती हैं। इसमें फाइबर और प्रतिरोधी स्टार्च की अधिक मात्रा पाई जाती है, जिससे पेट से जुड़ी बीमारियां दूर होती हैं। कब्ज की समस्या में भी कच्चा केला खाना बहुत फायदेमंद होता है। इसमें मौजूद फाइबर आँतों की सफाई करने में मदद करता है, जिससे मल त्यागने में आसानी होती है।वजन को कंट्रोल करने में मदद करता हैआजकल मोटापे की समस्या काफी आम हो गई है। अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो कच्चे केले का सेवन आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर मौजूद होता है, जिससे इसे पचाने में समय लगता है। इससे आपको लंबे समय तक पेट भरे होने का एहसास होता है और जल्दी भूख नहीं लगती है। रोजाना कच्चा केला से शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी को कम करने में मदद मिलती है और मोटापा कम होता है।इम्युनिटी को बूस्ट करता हैजो लोग बार-बार बीमार पड़ते हैं या जल्दी संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं, उन्हें भी कच्चे केले का सेवन जरूर करना चाहिए। कच्चे केले में भरपूर मात्रा में पोटैशियम, विटामिन बी-6, विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो इम्युनिटी को बूस्ट करते हैं। रोजाना कच्चे केले का सेवन करने से इम्युनिटी मजबूत होती है और आप जल्दी बीमार नहीं पड़ते हैं।डायबिटीज में फायदेमंदडायबिटीज के मरीजों के लिए भी कच्चा केला बहुत फायदेमंद होता है। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं, जो ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। शुगर के मरीजों को अपनी डाइट में कच्चा केला जरूर शामिल करना चाहिए।दिल की बीमारियों से बचाव करता हैकच्चे केले का सेवन करने से दिल की सेहत दुरुस्त रहती है। इसमें मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है। रोजाना कच्चे केले का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल कम करने और किडनी फंक्शन में भी मदद मिलती है। अगर आप दिल की बीमारियों से बचना चाहते हैं तो अपनी डाइट में कच्चा केला जरूर शामिल करें।
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धनिया का पानी पीने के फायदे ---
इम्यूनिटी होगी बूस्ट- धनिया आपके इम्युनिटी लेवल को बढ़ाने के लिए जाना जाता है, इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर में फ्री रेडिकल्स को कम करने में मदद करता हैं।
बालों के लिए बेहतरीन- विटामिन के, सी और ए जैसे विटामिनों से भरपूर होने की वजह से ये बालों को मजबूत बनाने और ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी हैं। सुबह धनिए का पानी पीने से आपके बालों का झड़ना और टूटना कम होता है।
थायराइड में फायदेमंद- रिपोर्टस कि मानें तो थायराइड के पेशेंट के लिए धनिया का पानी अमृत है। धनिया के पानी से दोनों तरह के थायरॉइड असंतुलन का इलाज किया जा सकता है।
डीटॉक्स होती है बॉडी- धनिया एक मूत्रवर्धक है, और इसलिए आपके शरीर से टॉक्सिन को बाहर निकालने में आपको मदद मिलती है। सुबह धनिए का पानी पीने से आप अपने सिस्टम को डिटॉक्स कर सकते हैं।
वेट लॉस में मिलती है मदद- धनिया में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट फ्री रेडिकल्स को कम करने में मदद करते हैं और आपके वजन को कम करने में भी मदद करता है।
कैसे बनाएं धनिया का पानी--
इसे बनाने के लिए एक चम्मच धनिया के बीज को 5 मिनट के लिए पानी में उबाल लें। इसे तब तक उबालें जब तक पानी आधा न हो जाए। फिर इसे छानें और पीएं। यह भी पढ़ें: दिन स्टार्ट करने के लिए बेहतरीन है तेज पत्ते का पानी, जानिए फायदे और बनाने का तरीका
धनिए के बीज के पानी से किसे बचना चाहिए?
धनिया के बीज का आमतौर पर कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है, लेकिन इसके बीज से एलर्जी पैदा हो सकती है। इससे रेडनेस और खुजली हो सकती है। हालांकि, गर्भवती महिलाओं को धनिए के बीज का ज्यादा मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए।
वेट लॉस के लिए कैसे बनाएं धनिया का पानी
धनिए का पानी बनाना बहुत ही आसान है। आपको बस एक चम्मच धनिया का बीज लेना है और उन्हें एक गिलास पानी में रात भर भिगोना है। सुबह पानी को छानकर पी लें। भीगे हुए बीजों को फेंके नहीं क्योंकि आप उन्हें खाना पकाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। -
क्या आपको भंडारे वाली पूड़ी अच्छी लगती है? अगर आपका जवाब हां है, तो हम आपको बता रहे हैं कुछ आसान टिप्स और ट्रिक्स, जिनका इस्तेमाल करके आप अपनी फेवरेट डिशेज का स्वाद बढ़ा सकते हैं। इन टिप्स को फॉलो करने से न सिर्फ आपका खाना जल्दी बन जाता है बल्कि इससे खाने का स्वाद भी बढ़ जाता है। आइए, जानते हैं कुछ आसान टिप्स-
क्रिस्पी पूडी बनाने की ट्रिक
भंडारे वाली पूड़ी किसे पसंद नहीं होती? क्रिस्पी पूड़ी बनाने के लिए आप गूंदे हुए आटे में थोड़ी-सी सूजी मिला दें। इससे आपकी पूड़ी और भी ज्यादा स्वादिष्ट बनेगी।
गरम मसाला कैसे बनाएं
घर के बने गरम मसाले का स्वाद बहुत ही अच्छा होता है। इसके लिए आपको जीरा, धनिया, इलायची, काली मिर्च, दालचीनी, लौंग और जायफल को एक कटोरे में मिलाना है और एक कंटेनर में स्टोर करना है।
आलू की टेस्टी सब्जी
आलू की टेस्टी सब्जी बनाने के लिए आपको आलू को छोटे या मीडियम आकार में काटना है, इससे आलू ज्यादा स्वादिष्ट बनते हैं। उबले आलू के मुकाबले कटे हुए आलू की सब्जी ज्यादा स्वादिष्ट लगती है।
सॉफ्ट रोटियां कैसे बनाएं
आप अगर चाहते हैं कि सॉफ्ट रोटियां कैसे बनाएं, तो इसके लिए गरम पानी के साथ आटा गूंदें। ऐसा करने से आपकी रोटियां पहले से ज्यादा नरम और स्वादिष्ट बनेंगी।
दाल का स्वाद कैसे बढ़ाएं
दाल का स्वाद बढ़ाने के लिए आपको दाल उबालने से पहले इसे घी के साथ भूनना है और फिर उबलने के लिए रखना है। ऐसा करने से आपकी दाल का स्वाद और भी बढ़ जाएगा।
हर सब्जी की ग्रेवी बनाने की ट्रिक
आपको टमाटर, अदरक, लहसुन और प्याज को घी में भूनने के बाद इसे मिक्सी में पीसकर रख लेना है। इससे इसका स्वाद लाजवाब हो जाएगा। इस तरीके से आपकी ग्रेवी भी क्रीमी बनेगी। - आंवला औषधीय गुणों से भरपूर एक बेहतरीन फल है, जिसका सेवन करने से सेहत को अद्भुत फायदे मिलते हैं। इम्यूनिटी मजबूत बनाने से लेकर कई गंभीर रोगों के जोखिम को कम करने के लिए आंवला रामबाण उपाय है। यह विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स का बेहतरीन स्रोत है। साथ ही आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फास्फोरस जैसे जरूरी पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं सिर्फ आंवला ही नहीं, आंवला के जूस या रस का सेवन करने से भी सेहत को अनेक लाभ मिलते हैं?आंवला जूस के फायदे-1. पाचन होता है मजबूतआंवला का जूस पीने से पेट संबंधी समस्याएं दूर होती हैं और पाचन दुरुस्त होता है। यह इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम की समस्या को दूर करने में भी लाभकारी है। साथ ही पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाता है।2. मानसिक स्वास्थ्यएंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होने के कारण यह फ्री रेडिकल्स से लडऩे में बहुत लाभकारी है। यह ब्रेन सेल्स को डैमेज या नुकसान से सुरक्षित रखने में मददगार है। साथ ही दिमाग को तेज और याददाश्त को तेज करने में भी मदद करता है। चिंता, तनाव और डिमेंशिया जैसी समस्याओं में भी इसका सेवन लाभकारी है।3. त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद हैआंवला जूस एक नैचुरल ब्लड प्यूरीफायर है। शरीर में जमा गंदगी, टॉक्सिन्स और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में भी मदद करता है। जिससे यह त्वचा पर कील-मुंहासे, दाग-धब्बों आदि की समस्या दूर करने में मददगार है और त्वचा की रंगत में भी सुधार करता है। त्वचा संबंधी एलर्जी दूर करने में भी यह बहुत लाभकारी है। यह बालों की कई समस्याओं जैसे बालों का झडऩा रोकने, डैंड्रफ से छुटकारा दिलाने, स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद करता है। साथ ही यह बालों को घना, शाइनी और मजबूत भी बनाता है।4. ब्लड शुगर कंट्रोल रहता हैडायबिटीज के रोगियों के लिए आंवला का जूस बहुत लाभकारी है, क्योंकि यह रक्त में शुगर के स्पाइक को रोकता है, और ब्लड शुगर को कंट्रोल रखता है। एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होने के कारण यह फ्री रेडिकल्स से लडऩे और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में भी मददगार है।5. वेट लॉस में मदद करता हैआंवला जूस पीने से मेटाबॉलिज्म रेट को बढ़ाने में मदद मिलती है, जिससे आप अधिक कैलोरी बर्न करते हैं। यह टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है और शरीर में जमा चर्बी को कम करने में मदद करता है।6. ब्लड प्रेशर कंट्रोल में मददगार हैएंटीऑक्सीडेंट्स और पोटेशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण यह हाई बीपी को कम करने और ब्लड प्रेशर लेवल को सामान्य बनाए रखने में लाभकारी है। इस तरह यह हार्ट और स्ट्रोक के जोखिम को भी कम करता है, जिससे दिल भी स्वस्थ रहता है।7. आंखों के लिए फायदेमंद हैविटामिन ए, सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होने की वजन से यह आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करता है। यह आंखों को मैक्यूलर डिजनेरेशन से भी बचाता है। आंखों को हेल्दी रखने में आंवला जूस बहुत लाभकारी है।आंवला जूस कब पीना चाहिए-आंवला जूस से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए आपको सुबह खाली पेट इसका सेवन करना चाहिए। जिससे कि शरीर में जमा गंदगी को बाहर निकाल सके। हालांकि रात में इसका सेवन करने से बचना चाहिए।
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फूल गोभी लगभग हर भारतीय घर में बनता है। इसे कई तरह से खाया जाता है। सूखी सब्जी, ग्रेवी वाली सब्जी, मंचूरियन, पराठा, भाप में पकाकर, पकौड़े के रूप में, तहरी में डालकर, साउथ इंडियन स्टाइल हर तरह से इसका टेस्ट लोगों को भाता है। लोग इसे सिर्फ एक साधारण सब्जी के रूप में जानते हैं लेकिन इसमें असाधरण औषधीय गुण होते हैं। यह क्रूसिफर सब्जियों में आती है। जो कि ओमेगा 3 का बेहतरीन सोर्स है। माना जाता है कि ये सब्जियां कई तरह के कैंसर से बचाव करती हैं और इन्हें बढ़ने से रोकती हैं। इनमें फाइबर्स भी होते हैं और कैलोरी में कम होती है तो वजन कम करने वालों के लिए भी बेस्ट है। सबसे अहम बात यह है कि गोभी को काटने और पकाने तरीके से इसकी न्यूट्रीशनल वैल्यू बदल सकती है। यहां कुछ टिप्स हैं जिनसे आप गोभी से ज्यादा से ज्यादा पोषक तत्वों का फायदा ले सकते हैं।
कच्चा या स्टीम किया गोभी है फायदेमंदफूल गोभी में विटामिन बी, सी और बीटा-कैरोटीन और फ्लेवोनॉइड्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। इन्हें ज्यादा देर तक पकाने से इनके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। गोभी को कच्चा खाना या स्टीम करना सबसे फायदेमंद है। उबालने, तलने या माइक्रोवेव से इसके एंटी-कैंसर कंपाउंड सल्फोराफेन नहीं बन पाता। यह कंपाउंड सिर्फ कैंसर से ही नहीं बचाता बल्कि आंखों के लिए अच्छा होता है, एंटी एजिंग होता है, दिमाग के लिए भी अच्छा होता है। अब सब्जी को हर कोई हर समय स्टीम करके नहीं खा सकता तो एक तरीका है जिससे यह कंपाउंड सब्जी में सुरक्षित रह सकता है।पकाने से पहले इतनी देर काटकर रखें गोभीऐसा माना जाता है कि जब गोभी को काटते हैं, कद्दूकस करते या कच्चा चबाते हैं तो मायरोनेज और ग्लूकोसिनोलेट नाम के दो कंपाउंड बनते हैं। ये दोनों मिलकर ऐंटी-कैंसर सल्फोराफेन बनाते हैं। इसके लिए आपको गोभी पकाने से करीब 45 मिनट पहले काटकर रख देना चाहिए। अच्छी बात यह है कि काटकर 45 मिनट तक रख देने के बाद पकाने से यह नष्ट नहीं होता। अगर काटकर तुरंत पका देंगे तो यह कंपाउंड नहीं बन पाता है। आप पत्ता गोभी से लेकर ब्रोकली तक हर क्रूसीफेरी सब्जी पकाने से 45 मिनट पहले काटकर रख लें। दूसरा तरीका यह भी है कि सब्जी बन जाए तो आप इसमें सरसों के दानें कूट या पीसकर डाल दें। सरसों भी क्रूसिफर फैमिली की है। इनसे भी सल्फोराफेन बन जाता है। -
अखरोट एक सुपरफूड है, जो हेल्थ के साथ ही ब्यूटी के लिए भी काफी ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। इस दिमाग की शेप वाले नट को खाने से दिमाग तेज होता है। विटामिन, फाइबर, आयरन, कार्बोहाइड्रेट से भरपूर ये मेवा काफी ज्यादा हेल्दी होती है। अपने दिन को अच्छे से शुरू करने के लिए आप रोजाना सुबह इसे अपनी डायट में शामिल कर सकते हैं। अगर आप अखरोट को रात भर के लिए भिगो कर अगले दिन खाते हैं तो भी आपको कई बेनिफिट मिलते हैं। यहां जानिए भिगे अखरोट के फायदे और किन लोगों को हो सकता है इससे खतरा-
1) हेल्दी स्किन और बाल
अखरोट हेल्दी स्किन के लिए एक सुपरफूड है क्योंकि ये एंटीऑक्सिडेंट और विटामिन ई से भरपूर होते हैं, जो मुलायम और चमकती त्वचा पाने में आपकी मदद कर सकते हैं। इसी के साथ अपनी रोजाना की डायट में अखरोट को शामिल करने से बालों को भी फायदा मिलता है। ये बालों की ग्रोथ में मदद करते हैं और स्कैल्प को पोषण देने और बालों के रोम को मजबूत करते हैं।
2) बूस्ट होता है मेटाबॉलिज्म
अखरोट आयरन, पोटैशियम, जिंक और कैल्शियम से भरपूर होता है जो मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में मदद करता है और वजन कम करने में भी मदद करता है। इसी के साथ फाइबर की मात्रा शरीर को भरा रखती है जिससे आपको बार-बार स्नैकिंग से बचने में मदद मिल सकती है। ऐसे में आपना वजन भी कम होता है।
3) बेहतर होगी ब्रेन फंक्शनिंग
अखरोट मस्तिष्क के आकार का होता है, जो मानसिक फ्लैक्सिबिलिटी, मेमोरी को बूस्ट करता है और सुधार भी करता है। यह चीजों को संसाधित करने की आपकी गति को भी बढ़ाता है। छोटा अखरोट कई पोषक तत्वों से भरा होता है जो आपके ओवरऑल ब्रेन फंक्शनिंग के लिए बेहतर है और आपके कॉन्सनट्रेशन लेवल को बढ़ाता है। यह भी पढ़ें: जिन चीजों को देख लपलपाती है जीभ उनसे कमजोर होता है दिमाग, ये हैं ब्रेन बूस्ट करने के सुपर फूड
4) हड्डियां होती है मजबूत
कैल्शियम और मैग्नीशियम से भरपूर अखरोट हमारे शरीर में हड्डियों को मजबूत करते हैं और हड्डियों के निर्माण में मदद करते हैं। नियमित रूप से इनको खाने से आपकी हड्डियों के ओवरऑल हेल्थ स्ट्रक्चर में भी सुधार होता है।
5) स्ट्रेस होता है कम
रिपोर्ट्स की मानें तो भीगे हुए अखरोट खाने से तनाव कम करने में मदद मिलती है। ये तनाव के समय ब्लडप्रेशर को कम करने में भी मदद करते हैं।
किन लोगों को होता है खतरा
अखरोट मल और सूजन को नरम कर सकता है ऐसे में ये उन लोगों के लिए खराब है जो पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। साथ ही मोटारे से परेशान लोगों को इसकी मात्रा पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि ये वजन भी बढ़ा सकता है। यह उन लोगों में एलर्जी का कारण हो सकता है जो इसके प्रति सेंसिटिव हैं। -
विटामिन और मिनरल्स से भरपूर मूंगफली के कई स्वास्थ्य लाभ हैं। ये नट्स बीटा सिटोस्टेरॉल से भरपूर होते हैं, जो आपको कैंसर से सुरक्षित रख सकते हैं। इसमें आयरन, फोलेट, कैल्शियम और जिंक की भी अच्छी मात्रा होती है, जो आपके शरीर के लिए जरूरी है। आइए, जानते हैं रोजाना भीगी हुई मूंगफली खाने के कुछ और कारण।
1) यूएसडीए द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक 100 ग्राम मूंगफली में 567 किलो कैलोरी,16 ग्राम कार्बोहाइड्रेट ,9 ग्राम आहार फाइबर, 4 ग्राम चीनी, 26 ग्राम प्रोटीन, 49 ग्राम कुल फैट होता है।
2) मूंगफली में कार्डियोप्रोटेक्टिव गुण होते हैं, जो आपको विभिन्न दिल संबंधी समस्याओं से सुरक्षित रखते हैं। मूंगफली का यह कार्डियोप्रोटेक्टिव गुण लंबे समय में दिल रोग के जोखिम को कम करने में मदद करता है और शरीर में खून परिसंचरण में भी सुधार करता है।
3) अगर आप कमर दर्द से परेशान हैं, तो मूंगफली को गुड़ के साथ भिगोकर खा सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक मूंगफली खाने से कमर दर्द से राहत मिल सकती है।
4) मूंगफली बीटा-सिटोस्टेरॉल से भरपूर होती है, जो कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम करता है। यह ट्यूमर, विशेष रूप से स्तन कैंसर के विकास को भी रोकता है। शोध के मुताबिक हफ्ते में तीन बार किसी भी रूप में मूंगफली खाने से कैंसर का खतरा 58 फिसदी तक कम हो जाता है।
5) मूंगफली प्रोटीन, वसा और फाइबर का एक अच्छा मिश्रण है। इन पोषक तत्वों के कारण, मूंगफली मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देती है और लंबे समय तक पेट को भरा रखती है। मूंगफली खाने से आपको भूख कम लगती है और आप खाना कम खाते हैं जिसकी वजह से वजन कम करने में मदद मिलती है। इन्ंहें सही मात्रा में खाने से आप फिट और स्वस्थ रहेंगे।












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