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नयी दिल्ली. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के चीन, कनाडा और मेक्सिको सहित अन्य देशों पर उच्च शुल्क लगाए जाने के बाद, अमेरिका को भारतीय निर्यात और अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। नीति आयोग ने सोमवार को एक रिपोर्ट में यह कहा है। आयोग ने व्यापार पर अपनी तिमाही रिपोर्ट के तीसरे संस्करण में कहा कि उत्पादों की संख्या और अमेरिकी बाजार के आकार, दोनों के संदर्भ में, अमेरिकी बाजारों में भारत के लिए महत्वपूर्ण अवसर होंगे। आयोग ने कहा, ‘‘भारत को शीर्ष 30 श्रेणियों (एचएस यानी हार्मोनाइज्ड प्रणाली दो स्तर) में से 22 में प्रतिस्पर्धी लाभ मिलने की उम्मीद है। इन वस्तुओं का बाजार 2,285.2 अरब डॉलर का है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन, कनाडा और मेक्सिको इन श्रेणियों में अमेरिका के प्रमुख निर्यातक हैं, इसलिए इन देशों पर क्रमशः 30 प्रतिशत, 35 प्रतिशत और 25 प्रतिशत का उच्च शुल्क भारत की प्रतिस्पर्धी क्षमता को बढ़ाएगा। आयोग ने कहा कि भारत की प्रतिस्पर्धी क्षमता 30 में से छह श्रेणियों में अपरिवर्तित रहेगी। यह अमेरिका को किए जाने वाले निर्यात का 32.8 प्रतिशत और अमेरिका के कुल आयात का 26 प्रतिशत है। मूल्य के हिसाब से यह 26.5 अरब डॉलर है। आयोग ने कहा कि एचएस-दो स्तर पर छह उत्पाद श्रेणियों के लिए, भारत को उच्च औसत शुल्क (एक से तीन प्रतिशत के बीच) का सामना करना पड़ रहा है, जिसपर अमेरिका के साथ बातचीत की जा सकती है। रिपोर्ट कहती है, ‘‘78 उत्पादों में भारत को प्रतिस्पर्धी लाभ मिलने की उम्मीद है। ये भारत के निर्यात में 52 प्रतिशत और कुल अमेरिकी आयात में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं।'' एचएस-4 स्तर पर शीर्ष 100 उत्पादों में से 17 उत्पादों (जो अमेरिका को भारत के निर्यात का 28 प्रतिशत हिस्सा हैं) के लिए, आयोग ने कहा कि शुल्क अंतर में कोई बदलाव नहीं होने के कारण भारत का प्रतिस्पर्धी लाभ अपरिवर्तित बना हुआ है। आयोग ने यह भी कहा कि भारत को 1,265 अरब अमेरिकी डॉलर के बाजार में चीन, कनाडा और मेक्सिको की तुलना में उच्च शुल्क अंतर वाले क्षेत्रों... खनिज और ईंधन, परिधान, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक, फर्नीचर और समुद्री खाद्य पदार्थों... में लाभ होगा।'' इस बीच, प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर एक और दौर की वार्ता के लिए भारतीय वाणिज्य मंत्रालय का एक दल अमेरिका पहुंच गया है। यह बातचीत सोमवार से शुरू हो रही है। भारत के मुख्य वार्ताकार और वाणिज्य विभाग में विशेष सचिव राजेश अग्रवाल बुधवार को दल में शामिल होंगे। चार दिवसीय वार्ता बृहस्पतिवार को संपन्न होगी। यह यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों पक्षों को कृषि और वाहन जैसे क्षेत्रों में मुद्दों का समाधान करना है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका ने भारत सहित कई देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की समयसीमा एक अगस्त तक के लिए बढ़ा दी है। इस महीने की शुरुआत में, भारतीय दल वार्ता के लिए वाशिंगटन में था। दोनों पक्षों के बीच 26 जून से दो जुलाई तक वार्ता हुई थी। दल एक बार फिर वार्ता के लिए अमेरिका पहुंच गया है। भारत ने कृषि और डेयरी उत्पादों पर शुल्क में रियायत की अमेरिकी मांग को लेकर अपना रुख कड़ा कर लिया है। भारत ने अबतक डेयरी क्षेत्र में मुक्त व्यापार समझौते में अपने किसी भी व्यापारिक साझेदार को कोई शुल्क रियायत नहीं दी है। भारत इस अतिरिक्त शुल्क (26 प्रतिशत) को हटाने की मांग कर रहा है। वह इस्पात और एल्युमीनियम (50 प्रतिशत) और वाहन (25 प्रतिशत) क्षेत्रों पर शुल्क में ढील की भी मांग कर रहा है।
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चंडीगढ़. जाने-माने मैराथन धावक फौजा सिंह की सोमवार को पंजाब में जालंधर जिले के अपने पैतृक गांव में एक सड़क हादसे में मौत हो गई। वह 114 वर्ष के थे। सिंह टहल रहे थे तभी एक अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। लेखक खुशवंत सिंह ने फौजा सिंह के परिवार के सदस्यों से बात की और उनके निधन की पुष्टि की।
पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि उन्हें फौजा सिंह की मौत की खबर से ‘‘गहरा दुख'' हुआ है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर लिखा, ‘‘मैं महान मैराथन धावक और दृढ़ता के प्रतीक सरदार फौजा सिंह जी के निधन से बहुत दुखी हूं। उन्होंने 114 वर्ष की आयु में बेजोड़ उत्साह के साथ ‘नशा मुक्त, रंगला पंजाब' मार्च में मेरे साथ भाग लिया था।'' उन्होंने कहा, ‘‘उनकी विरासत पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए प्रेरणा देती रहेगी। ओम शांति ओम। पंजाब के पूर्व राज्य सूचना आयुक्त खुशवंत सिंह ने फौजा सिंह की जीवनी ‘द टर्बन्ड टॉरनेडो' लिखी है।खुशवंत ने ‘एक्स' पर लिखा, ‘‘मेरा ‘टर्बन्ड टॉरनेडो' अब नहीं रहा। मुझे परम श्रद्धेय फौजा सिंह के निधन की खबर देते हुए बहुत दुख हो रहा है। अज्ञात वाहन ने आज अपराह्न लगभग साढ़े तीन बजे उन्हें उस समय टक्कर मार दी जब वह उनके गांव बियास में सड़क पार कर रहे थे। मेरे प्यारे फौजा, आपकी आत्मा को शांति मिले।'' संपर्क किये जाने पर खुशवंत सिंह ने बताया कि उन्होंने फौजा सिंह के परिवार के सदस्यों से बात की है और उन्होंने उनकी मौत की खबर की पुष्टि की है। सड़क दुर्घटना के बाद फौजा सिंह को जालंधर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां गंभीर रूप से घायल होने के कारण उनकी मौत हो गई। - नयी दिल्ली. तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने कहा कि युद्धों के कारण होने वाला दुख उन्हें व्यथित करता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने "कथित दुश्मनों" को भी इंसान के रूप में देखें, क्योंकि ऐसी करुणा सबसे जटिल संघर्षों को भी शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा सकती है। चौदहवें दलाई लामा का छह जुलाई को 90वां जन्मदिन था। उन्होंने यह बात एक लिखित संदेश में कही, जिसे धर्मशाला से आए एक आदरणीय भिक्षु ने रविवार को यहां आयोजित एक स्मृति समारोह में पढ़कर सुनाया। भारत और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आए विद्वान, शोधकर्ता और प्रतिष्ठित आध्यात्मिक नेता यहां एक दिवसीय सम्मेलन में एकत्र हुए, जो 14वें दलाई लामा के 90वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। इस दौरान बुद्ध धर्म की प्रासंगिकता और पारंपरिक आचार-प्रथाओं व वैज्ञानिक प्रमाणों के बीच संबंध जैसे विषयों पर चर्चा की गई। चौदहवें दलाई लामा की विरासत को समर्पित एक फिल्म का प्रदर्शन किया गया, वहीं आयोजन स्थल पर एक विशेष अस्थायी प्रदर्शनी भी लगाई गई। इस प्रदर्शनी में उनके बचपन की दुर्लभ श्वेत-श्याम तस्वीरें, 1950 के दशक में पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद से उनकी मुलाकात की तस्वीरें और उनके जीवन की अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी तस्वीरें प्रदर्शित की गईं। आयोजन स्थल पर बुद्ध के जीवन और उनसे जुड़े विभिन्न स्थलों पर आधारित एक प्रदर्शनी भी लगाई गई।अंतरराष्ट्रीय बौद्ध महासंघ (आईबीसी) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में इस आयोजन के लिए भेजा गया आठ जुलाई की तिथि वाला एक लिखित संदेश समदोंग रिंपोछे द्वारा पढ़कर सुनाया गया। दलाई लामा ने कहा, “एक साधारण बौद्ध भिक्षु होने के नाते, मैं आम तौर पर जन्मदिन समारोहों पर अधिक ध्यान नहीं देता। हालांकि, चूंकि आप इस अवसर का उपयोग करके दुनिया में करुणा, सौहार्द और परोपकार के महत्व को उजागर करने के लिए कर रहे हैं, इसलिए मैं अपनी सराहना व्यक्त करना चाहता हूं।” उन्होंने अपने संदेश में कहा कि अब 66 से अधिक वर्ष हो चुके हैं, जब वे स्वयं और बड़ी संख्या में तिब्बती लोग “चीनी कम्युनिस्ट द्वारा तिब्बत पर आक्रमण” के बाद भारत आने में सफल हुए थे। तिब्बती आध्यात्मिक नेता ने कहा कि तब से उन्हें प्राचीन भारतीय ज्ञान का अध्ययन जारी रखने की “स्वतंत्रता और अवसर” मिला है। दलाई लामा ने कहा, “मैं इस देश के साथ एक विशेष निकटता महसूस करता हूं।” दलाई लामा ने कहा कि यदि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा- जिसमें बुद्ध की शिक्षाएं भी शामिल हैं- को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ा जाए, तो यह दुनिया में “बड़े पैमाने पर शांति और सुख” में सहायक हो सकती है। उन्होंने कहा, “मैं प्रार्थना करता हूं कि दुनिया में अधिक शांति और समझ बढ़े। युद्ध के कारण इतनी बड़ी संख्या में लोगों को कष्ट में देखकर मुझे बहुत दुःख होता है।” उनकी यह टिप्पणी विश्व के विभिन्न हिस्सों में जारी युद्धों और संघर्षों की पृष्ठभूमि में आयी है।उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम अपनी साझी मानवता को स्वीकार करें, यह समझें कि जिन्हें हम 'कथित दुश्मन' मानते हैं, वे भी इंसान हैं, तो मैं वास्तव में मानता हूं कि हम सबसे कठिन संघर्षों का भी शांतिपूर्ण समाधान खोज सकते हैं। लेकिन इसके लिए संवाद और बातचीत की इच्छा जरूरी है।” उन्होंने कहा, “इसलिए, मैं प्रार्थना करता हूं कि एक शांतिपूर्ण, अधिक करुणामयी और हिंसा रहित दुनिया बनाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएं।” उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में मुख्य भूमि चीन सहित चीनी जनता के बीच बौद्ध धर्म के प्रति रुचि बढ़ रही है। दलाई लामा ने कहा कि वैज्ञानिक भी बौद्ध दर्शन और मन तथा भावनाओं के कार्य-प्रणाली पर बौद्ध दृष्टिकोण को जानने में रुचि रखते हैं। उन्होंने भारत और भारतीयों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “तिब्बती लोग भारत सरकार और जनता के प्रति 1959 से अब तक दिखाई गई गर्मजोशी और आतिथ्य के लिए अत्यंत आभारी हैं।” उन्होंने कहा, ‘‘अंत में, मुझे लगता है कि मेरा जीवन दुनिया भर के लोगों के लिए कुछ लाभकारी रहा है और मैं अपना शेष जीवन दूसरों की सेवा में समर्पित करता हूं।” अशोक होटल में आयोजित इस सम्मेलन में थाईलैंड, मलेशिया और अन्य बौद्ध देशों के बौद्ध भिक्षुओं सहित अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय बौद्ध भिक्षुओं ने भी भाग लिया। अमेरिका, इंडोनेशिया और ब्रिटेन के बौद्ध विद्वानों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया।
- मुंबई .राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राज्यसभा के लिए नामित चार सदस्यों में शामिल जाने-माने वकील उज्ज्वल निकम ने रविवार को बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें यह खबर देने के लिए फोन किया और उनसे मराठी में बात की। निकम ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मोदी जी बहुत अच्छी मराठी बोलते हैं। वह महाराष्ट्र में अपने कुछ भाषणों की शुरुआत मराठी से करते हैं और फिर हिंदी में बोलते हैं।'' निकम ने कहा, ‘‘जब मुझे रात आठ बजकर 44 मिनट पर उनका फोन आया और ऑपरेटर ने मुझे उनसे जोड़ा, तो प्रधानमंत्री ने मराठी में पूछा, ‘‘उज्ज्वल जी मी मराठित बोलू का हिंदी बोलू (मैं मराठी में बात करुं या हिंदी में)।'' उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उनसे कहा कि उनकी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ है। उन्होंने मुझे बताया कि राष्ट्रपति मुझे कुछ जिम्मेदारी सौंपना चाहती हैं और पूछा कि क्या मैं इसे स्वीकार करने के लिए तैयार हूं। फिर उन्होंने मराठी में अपनी बात जारी रखी।'' उन्होंने कहा कि राज्यसभा के लिए उनका नामांकन कानून के क्षेत्र में उनके दशकों के किए काम का परिणाम है। उन्होंने कहा, ‘‘लोकसभा चुनावों के दौरान भी भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) ने मुझ पर भरोसा दिखाया था। अब राज्यसभा के मनोनीत सदस्य के रूप में मुझे और बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।'' निकम ने 2024 में भाजपा उम्मीदवार के रूप में अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ा था लेकिन वह जीत नहीं सके थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शनिवार देर रात जारी एक अधिसूचना में बताया कि राष्ट्रपति ने पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला, 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों के मामले में विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम, केरल के भाजपा नेता सी सदानंदन मास्टर और इतिहासकार मीनाक्षी जैन को राज्यसभा के लिए नामित किया है।
- नयी दिल्ली. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यात्री सुरक्षा बढ़ाने के मकसद से रेलवे के सभी 74 हजार डिब्बों और 15 हजार इंजन में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया है। रेल मंत्रालय द्वारा रविवार को जारी एक बयान के अनुसार, वैष्णव और केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने शनिवार को उत्तर रेलवे में परीक्षण के आधार पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों के लाभों की समीक्षा की, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। यात्रियों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए दरवाजों के पास सामान्य आवागमन क्षेत्र में कैमरे लगाए जाएंगे। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘केंद्रीय रेल मंत्री ने सभी 74 हजार डिब्बों और 15 हजार इंजनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने को मंजूरी दे दी है। प्रत्येक रेलवे कोच में चार सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिनमें से प्रत्येक प्रवेश मार्ग पर दो कैमरे होंगे।'' बयान में कहा गया, “प्रत्येक इंजन में छह सीसीटीवी कैमरे होंगे। इसमें इंजन के आगे, पीछे और दोनों तरफ एक-एक कैमरा शामिल होगा।
- नयी दिल्ली. भारतीय बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल और उनके पति पारुपल्ली कश्यप ने आपसी सहमति से अलग होने के फैसले की घोषणा की है। रविवार को इंस्टाग्राम पर साइना ने एक निजी अपडेट साझा किया जिसने खेल जगत को हैरान कर दिया है।राष्ट्रमंडल खेलों में दो बार की चैंपियन साइना ने लिखा, ‘‘जिंदगी हमें कभी-कभी अलग दिशाओं में ले जाती है। बहुत सोच-विचार के बाद कश्यप पारुपल्ली और मैंने अलग होने का फैसला किया है। हम अपने और एक-दूसरे के लिए शांति, विकास और उपचार का विकल्प चुन रहे हैं। '' उन्होंने लिखा, ‘‘मैं उन यादों के लिए आभारी हूं और आगे के लिए शुभकामनाएं देती हूं। इस दौरान हमारी निजता को समझने और उसका सम्मान करने के लिए धन्यवाद। '' साइना और पूर्व शटलर कश्यप ने दिसंबर 2018 में शादी की थी।
- आइजोल. मिजोरम की राजधानी आइजोल के लिए किसी जमाने में सपना रही बैराबी-सैरंग रेलवे लाइन आखिरकार हकीकत में तब्दील हो गयी है। बैराबी-सैरंग रेलवे लाइन की परिकल्पना सितंबर 1999 में की गयी थी और 26 वर्ष के अंतराल के बाद संरेखण, छोटे-छोटे अंतराल पर कार्य होने और लगातार भूस्खलन जैसी अभूतपूर्व चुनौतियों को पार करते हुए आइजोल देश के रेलवे मानचित्र पर आ गया है। अधिकारियों ने बताया कि रेलवे ने 1999 में जो सपना देखा था, वह इस वर्ष जून में हकीकत में बदल गया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जल्द ही इस 51.38 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन का उद्घाटन करेंगे। दस्तावेजों के मुताबिक, इंजीनियरों को जब 1999 में पता चला कि घने जंगल, कम दृश्यता और अन्य स्थानीय समस्याओं के कारण प्रारंभिक सर्वेक्षण संभव नहीं है, तो एक सर्वे कराने पर सहमति बनी, जिसमें मोटे तौर पर मार्ग का आकलन करना शामिल था। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “प्रारंभिक इंजीनियरिंग-सह-यातायात सर्वेक्षण (पीईटी) के तहत मार्ग की विस्तृत जांच की जाती है। पीईटी सर्वेक्षण को व्यवहार्य न पाए जाने पर बोर्ड से इसे सर्वेक्षण इंजीनियरिंग-सह-यातायात (आरईटी) सर्वे में बदलने का अनुरोध किया गया, जिस पर रेलवे बोर्ड ने 15 जुलाई, 2003 को सहमति व्यक्त की।” उन्होंने बताया, “पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने बैराबी-सैरंग रेल संपर्क के लिए आरईटी सर्वेक्षण मार्च 2006 में किया था। इसके आधार पर, रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस लिमिटेड (राइट्स) को 2008 में बैराबी-सैरंग तक एक नई ‘ब्रॉड गेज' रेलवे लाइन के लिए निर्माण-पूर्व सर्वेक्षण और भू-तकनीकी जांच करने के लिए कहा गया था। राइट्स ने अगस्त 2011 में अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की।” तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने इस परियोजना को मिजोरम और देश के बाकी हिस्सों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी करार देते हुए 2008-09 में इसे ‘राष्ट्रीय परियोजना' घोषित किया था। इसके बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने 29 नवंबर, 2014 को परियोजना की आधारशिला रखी।पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने 2014-2015 तक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली और एक वर्ष बाद 2015-16 में रेलवे ने निर्माण कार्य पूरे जोर-शोर से शुरू कर दिया। परियोजना के मुख्य अभियंता विनोद कुमार ने बताया, “इस क्षेत्र में कार्य अवधि बहुत कम होती है और वर्ष में केवल चार-पांच महीने (नवंबर से मार्च तक) ही काम होता है। भारी बारिश के साथ मानसून की लंबी अवधि के कारण अप्रैल से अक्टूबर तक कोई कार्य संभव नहीं होता।” उन्होंने बताया, “यह मार्ग पहाड़ी इलाकों, गहरी घाटियों से होकर गुजरता है, जिसके लिए सुरंगों और ऊंचे पुलों के निर्माण की आवश्यकता है। इसके अलावा, गुवाहाटी से सिलचर के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात में बार-बार रुकावट के कारण निर्माण सामग्री को लाना ले जाना आज भी एक बड़ी चुनौती है।” परियोजना स्थल पर काम कर रहे इंजीनियरों ने बताया कि यहां तक पहुंचने वाली सड़कें अक्सर भूस्खलन की चपेट में आ जाती हैं और एक ही बारिश में फिसलन भरी हो जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप परियोजना स्थल पर सामग्री की आवाजाही रुक जाती है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के एक अधिकारी ने बताया, “परियोजना स्थल की ओर जाने वाली सड़कें संकरी और ढलानदार हैं, जिन पर बड़े ट्रकों-ट्रेलरों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसलिए, बाहर से बड़े ट्रकों-ट्रेलरों में लाई गई सामग्री को छोटे-छोटे वाहनों में लादकर राजमार्ग से परियोजना स्थल तक पहुंचाया गया।” उन्होंने बताया, “पुल के गर्डरों के निर्माण के लिए बड़ी क्रेनों का परिवहन बहुत मुश्किल था। इन्हें मुख्य पुर्जों को अलग कर स्थल पर पुनः जोड़ने के बाद ही इस्तेमाल में लाया गया।” परियोजना स्थल पर काम कर रहे इंजीनियरों ने बताया कि मिजोरम में स्थानीय मजदूर भी उपलब्ध नहीं थे और सभी मजदूर दूसरे राज्यों से लाए गए थे। कुमार ने बताया, “मिजोरम पूर्वोत्तर का सबसे दूरस्थ राज्य है और यह परियोजना पूरी तरह से पहाड़ी इलाकों में स्थित है, जहां ज्यादातर जगहों पर मोबाइल नेटवर्क नहीं हैं। इसलिए मजदूर काम के लिए मिजोरम आने से हिचकिचाते हैं और परियोजना में हमेशा मजदूरों की कमी रही।” उन्होंने बताया कि मिजोरम में उपयुक्त निर्माण सामग्री (जैसे रेत, पत्थर के टुकड़े आदि) भी उपलब्ध नहीं थी और इन्हें आस-पास के राज्यों जैसे असम, पश्चिम बंगाल, मेघालय आदि से लाया जाता था। रेलवे के अनुसार, इस लाइन में 12.853 किलोमीटर लंबी 48 सुरंगें, 55 बड़े व 87 छोटे पुल, पांच ओवरब्रिज और नौ अंडरब्रिज हैं। रेलवे ने बताया कि 196 संख्या वाला एक पुल 104 मीटर ऊंचा है और यह कुतुब मीनार से 42 मीटर ऊंचा है।
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नयी दिल्ली. अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर 18 दिन के गहन वैज्ञानिक प्रयोगों के बाद शुभांशु शुक्ला और ‘एक्सिओम-4' मिशन के तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के लिए विदाई और दावत का समय आ गया है, जो सोमवार को पृथ्वी के लिए अपनी वापसी यात्रा शुरू करने को तैयार हैं। ‘एक्सिओम-4' (एक्स-4) चालक दल के विभिन्न अनुसंधान पूरे होने के करीब हैं और इसमें शामिल अंतरिक्ष यात्री सोमवार को स्थानीय समयानुसार सुबह 7:05 बजे (भारतीय समयानुसार शाम 4:35 बजे) से आईएसएस से धरती के लिए बाहर निकलने की तैयारी कर रहे हैं। चालक दल में कमांडर पैगी व्हिटसन, पायलट शुभांशु ‘शुक्स' शुक्ला और मिशन विशेषज्ञ स्लावोज़ ‘सुवे' उज़्नान्स्की-विस्नीव्स्की तथा टिबोर कापू शामिल हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘पृथ्वी पर वापसी.... भारतीय समयानुसार 15 जुलाई को अपराह्न 3:00 बजे निर्धारित है।'' ‘एक्सिओम-4' चालक दल के लिए औपचारिक विदाई समारोह भारतीय समयानुसार रविवार शाम के लिए निर्धारित है।
मिशन के पूर्ण होने की घड़ी नजदीक आते ही आईएसएस पर अंतरिक्ष यात्री अपने छह देशों के विविध व्यंजनों के साथ भोज के लिए एकत्र हुए। वर्तमान में, आईएसएस पर 11 अंतरिक्ष यात्री हैं, जिनमें से ‘एक्सपीडिशन 73' के सात और ‘एक्सिओम-4' वाणिज्यिक मिशन के चार अंतरिक्ष यात्री हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री जॉनी किम ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘इस मिशन पर मेरी सबसे अविस्मरणीय शामों में से एक, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर नए दोस्तों, एक्स-4 के साथ भोजन करना है।'' उन्होंने कहा, ‘‘हमने कहानियां साझा कीं और इस बात से प्रसन्न हुए कि किस प्रकार विविध पृष्ठभूमियों एवं देशों के लोग अंतरिक्ष में मानवता का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक साथ आए।'' किम ने बताया कि अंतरिक्ष यात्रियों ने मीठी ब्रेड, दूध और अखरोट से बने स्वादिष्ट केक के साथ रात्रि का समापन किया। शुक्ला अपने साथ आम रस और गाजर का हलवा लेकर गए थे जबकि पोलैंड के अंतरिक्ष यात्री स्लावोज़ अपना स्थानीय व्यंजन, गोभी और मशरूम के साथ पिएरोगी लेकर गए थे। यह शुक्ला के लिए एक ऐतिहासिक यात्रा रही है, जो आईएसएस की यात्रा करने वाले पहले भारतीय बन गए हैं तथा 1984 में तत्कालीन सोवियत रूस के ‘सैल्यूट-7' अंतरिक्ष स्टेशन मिशन के एक भाग के रूप में राकेश शर्मा की अंतरिक्ष उड़ान के बाद अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय हैं। -
नयी दिल्ली. भारतीयों द्वारा अत्यधिक नमक का सेवन भारत में एक मूक महामारी का रूप ले रहा है, जिससे लोगों में उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक, हृदय रोग और गुर्दे की बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने यह जानकारी दी है। वैज्ञानिकों ने इस समस्या के समाधान के लिए समुदाय-आधारित नमक कटौती अध्ययन शुरू किया है तथा कम सोडियम वाले नमक के विकल्पों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने प्रति व्यक्ति प्रति दिन पांच ग्राम से कम नमक का सेवन की सिफारिश की है, जबकि अध्ययनों में खुलासा हुआ है कि शहरों में रहने वाले भारतीय लगभग 9.2 ग्राम/दिन का उपभोग करते हैं,जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह लगभग 5.6 ग्राम/दिन है। इस प्रकार पूरे देश में नमक का सेवन अनुशंसित मात्रा से अधिक है। राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (एनआईई) के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अध्ययन के प्रमुख अन्वेषक डॉ. शरण मुरली ने कहा कि इस स्थिति को बदलने की एक उम्मीद कम सोडियम वाले नमक हैं। यह नमक का वह स्वरूप होता है, जिसमें सोडियम क्लोराइड के एक भाग को पोटेशियम या मैग्नीशियम लवण से प्रतिस्थापित किया जाता है। डॉ. मुरली ने कहा,‘‘सोडियम का कम सेवन रक्तचाप को कम करने में मदद करता है और समग्र हृदय स्वास्थ्य में सुधार करता है। इस प्रकार कम सोडियम वाले विकल्प एक सार्थक विकल्प बन जाते हैं, विशेष रूप से उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए।'' उन्होंने कहा, ‘‘केवल कम सोडियम वाले नमक पर स्विच करने से रक्तचाप औसतन 7/4 मिलीमीटर ऑफ मरक्यूरी तक कम हो सकता है। यह एक छोटा सा बदलाव है, जिसका प्रभाव बड़ा होता है।'' उच्च नमक उपभोग की समस्या से निपटने के लिए, एनआईई ने पंजाब और तेलंगाना में तीन वर्षीय हस्तक्षेप परियोजना शुरू की है। इसे भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) का समर्थन प्राप्त है। अध्ययन में शामिल एनआईई के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि इसका लक्ष्य स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों (एचडब्ल्यूसी) में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा दिए जाने वाले नमक कटौती परामर्श की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना है, जो उच्च रक्तचाप से ग्रस्त व्यक्तियों में रक्तचाप और सोडियम सेवन को कम करने में सहायक है। डॉ. कुमार ने कहा, ‘‘हम वर्तमान में परियोजना के प्रथम वर्ष में हैं, जिसमें आधारभूत आकलन और क्षेत्रीय तैयारियों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।'' डॉ. मुरली ने कहा, ‘‘परामर्श सामग्री को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। हमारा लक्ष्य सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर हस्तक्षेप पैकेज तैयार करना है, उनके अनुभवों का उपयोग करना है और उनके सुझावों को शामिल करना है। यह सिर्फ स्वास्थ्य शिक्षा देने के बारे में नहीं है - यह सुनने, समझने और साथ मिलकर निर्माण करने के बारे में है।'' यह सुनिश्चित करने के लिए कि हस्तक्षेप वास्तविकता पर आधारित हैं, एनआईई ने कम सोडियम वाले नमक (एलएसएस) की उपलब्धता और मूल्य निर्धारण का आकलन करने के लिए चेन्नई में 300 खुदरा दुकानों पर एक बाजार सर्वेक्षण किया। उन्होंने पाया कि एलएसएस केवल 28 प्रतिशत खुदरा दुकानों में उपलब्ध था। यह 52 प्रतिशत सुपरमार्केट में देखा गया, लेकिन केवल चार प्रतिशत छोटी किराना दुकानों में इसकी उपलब्धता थी। एलएसएस की कीमत औसतन 5.6 रुपये प्रति 100 ग्राम थी, जो सामान्य आयोडीन युक्त नमक (2.7 रुपये प्रति 100 ग्राम) की कीमत से दोगुनी से भी अधिक थी। डॉ. मुरली ने कहा कि ये निष्कर्ष आपूर्ति-मांग के बीच गंभीर अंतर को उजागर करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कम सोडियम वाले नमक की कम मांग के कारण इसकी उपलब्धता कम हो सकती है - यह जागरूकता और पहुंच का एक अप्रत्यक्ष सूचक है।'' नमक का उपभोग कम करने के बारे में सार्वजनिक चर्चा को बढ़ावा देने के लिए, एनआईई ने हाल ही में आईसीएमआर-एनआईई के माध्यम से ट्विटर और लिंक्डइन पर ‘बदलाव के लिए एक चुटकी' अभियान भी शुरू किया है। अभियान में इन्फोग्राफिक्स, तथ्यों और सरल संदेशों का उपयोग किया गया है और इसका उद्देश्य छिपे हुए नमक स्रोतों के बारे में जागरूकता बढ़ाना, कम सोडियम वाले विकल्पों को बढ़ावा देना और व्यक्तियों को हृदय-स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए सशक्त बनाना है।
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नयी दिल्ली. आयकर रिफंड पिछले 11 वर्षों में 474 प्रतिशत बढ़कर 2024-25 में 4.77 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो सकल कर संग्रह में 274 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी। साथ ही, आयकर रिफंड जारी करने में लगने वाले दिनों की संख्या में भी 81 प्रतिशत की कमी आई है। यह 2013 में 93 दिनों से घटकर 2024 में केवल 17 दिन रह गई है। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) शासन के अंतिम वर्ष 2013-14 तक, आयकर विभाग द्वारा जारी रिफंड 83,008 करोड़ रुपये था। जबकि, वर्तमान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासन के 11वें वर्ष 2024-25 के अंत तक, आयकर रिफंड 4.77 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो इस अवधि के दौरान 474 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 2013-14 के 7.22 लाख करोड़ रुपये से 274 प्रतिशत बढ़कर 2024-25 तक 27.03 लाख करोड़ रुपये हो गया। साल 2013 से दाखिल किए गए आयकर रिटर्न में 133 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2013 में कुल 3.8 करोड़ आयकर रिटर्न दाखिल किए गए थे, जो 2024 में बढ़कर 8.89 करोड़ हो गए हैं। सूत्रों ने कहा कि कर रिफंड में यह भारी वृद्धि और रिफंड जारी करने में लगने वाले दिनों में कमी कर प्रशासन में सुधार, विशेष रूप से डिजिटल बुनियादी ढांचे को अपनाने के कारण है।
- प्रयागराज. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक मामले में कहा है कि बिना वैध कारण के पति से अलग रह रही पत्नी गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं है। विपुल अग्रवाल की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति सुभाष चंद्र शर्मा ने मेरठ की परिवार अदालत के 17 फरवरी के आदेश को रद्द कर दिया। उच्च न्यायालय ने कहा, “निचली अदालत ने यह तथ्य रिकॉर्ड में लिया है कि पत्नी यह साबित करने में विफल रही कि वह पर्याप्त कारण से पति से अलग रह रही है और पति उसका खर्च उठाने में उपेक्षा कर रहा है। फिर भी पत्नी के पक्ष में 5,000 रुपये महीने का गुजारा भत्ता तय कर दिया गया है।” उच्च न्यायालय ने कहा, “सीआरपीसी की धारा 125(4) के तहत यदि पत्नी बिना उचित कारण के पति से अलग रह रही है तो वह गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं है।” सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि इस मामले में यह तथ्य जानने के बावजूद कि पत्नी बिना उचित कारण के पति से अलग रह रही है, गुजारा भत्ता की राशि तय कर दी गयी। उन्होंने कहा कि अधीनस्थ अदालत ने याचिकाकर्ता की उपार्जन क्षमता पर विचार नहीं किया और पत्नी एवं नाबालिग बच्चे के पक्ष में क्रमशः 5,000 रुपये और 3,000 रुपये प्रति माह का गुजारा भत्ता तय कर दिया। हालांकि, पत्नी की और से पेश वकील ने दलील दी कि पत्नी अपने पति द्वारा उपेक्षा किए जाने की वजह से अलग रह रही है और यही कारण है कि निचली अदालत ने याचिका स्वीकार कर गुजारा भत्ता तय किया। उच्च न्यायालय ने कहा, “अधीनस्थ अदालत द्वारा उक्त तथ्य को रिकॉर्ड में लेना और पत्नी के पक्ष में प्रति माह 5,000 रुपये गुजारा भत्ता तय करना दोनों ही आपस में विरोधाभासी है और धारा 125(4) में दिए गए प्रावधान का उल्लंघन है। इसलिए, 17 फरवरी, 2025 के त्रुटिपूर्ण आदेश में हस्तक्षेप आवश्यक है।” उच्च न्यायालय ने आठ जुलाई को दिए अपने निर्णय में इस मामले को फिर से परिवार अदालत के पास भेजकर दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के बाद कानून के मुताबिक नए सिरे से निर्णय करने को कहा। हालांकि, उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि इस बीच, याचिकाकर्ता मामले के लंबित रहने के दौरान अपनी पत्नी को 3,000 रुपये प्रति माह और बच्चे को 2,000 रुपये प्रति माह का अंतरिम गुजारा भत्ता देते रहे।
- नयी दिल्ली. वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सोनाली मिश्रा रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की पहली महिला महानिदेशक नियुक्त की गयी हैं। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। मिश्रा मध्यप्रदेश संवर्ग की 1993 बैच की भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी हैं।कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने 31 अक्टूबर 2026 को उनकी सेवानिवृत्ति तक मिश्रा की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। वह 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होने वाले वर्तमान महानिदेशक मनोज यादव से पदभार ग्रहण करेंगी।अधिकारियों ने बताया कि मिश्रा आरपीएफ का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी होंगी। अन्य कर्तव्यों के अलावा रेलवे संपत्ति और यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आरपीएफ की है। मिश्रा फिलहाल मध्यप्रदेश पुलिस में अतिरिक्त महानिदेशक (चयन) हैं।
- उज्जैन. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शनिवार को कहा कि राज्य में लाडली बहना योजना की लाभार्थी करीब 1.27 करोड़ महिलाओं को राखी उपहार के रूप में 250 रुपये मिलेंगे और अक्टूबर से उनकी मासिक सहायता राशि बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दी जाएगी। फिलहाल इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को 1250 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं।यादव ने घोषणा की, ‘‘रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के बीच अटूट प्रेम का प्रतीक है...नौ अगस्त को राखी है और भाइयों के लिए अपनी बहनों को उपहार देना उचित ही है। हमारी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि स्नेह के प्रतीक के रूप में हर लाडली बहना (नौ अगस्त से पहले) तक 250 रुपये पहुंच जाएं।'' वह उज्जैन जिले के नलवा गांव में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बोल रहे थे, जहां विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को वित्तीय सहायता वितरित की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लाडली बहना योजना के तहत मासिक सहायता को धीरे-धीरे बढ़ाकर 3,000 रुपये करने के लिए प्रतिबद्ध है। एक सरकारी बयान के मुताबिक यादव ने कहा , ‘‘दिवाली के बाद भाई दूज (23 अक्टूबर) तक मासिक सहायता 1,250 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दी जाएगी।
- शिवमोगा (कर्नाटक). सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों ने एक कैदी के पेट से उस मोबाइल फोन को निकाला लिया है जिसे उसने निगल लिया था। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। हाल ही में फोन निकाले जाने के बाद अधिकारियों ने इस बात की जांच के आदेश दिए हैं कि यह प्रतिबंधित वस्तु उच्च सुरक्षा वाले जेल में कैसे पहुंची। कैदी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत आपराधिक मामला भी दर्ज किया गया है।दोषी ठहराया गया 30 वर्षीय दौलत उर्फ गुंडा 10 साल की सजा काट रहा है। उसने 24 जून को पेट दर्द की शिकायत की और जेल के चिकित्साकर्मियों को बताया कि उसने कुछ निगल लिया है। जेल कर्मचारियों ने उसे आगे के इलाज के लिए तुरंत शिवमोगा के सरकारी अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया। चिकित्सकों ने एक्स-रे किया तो पता चला कि उसके पेट में फोन है। कैदी की सहमति प्राप्त करने के बाद शल्य चिकित्सा की गई और लगभग एक इंच चौड़ाई तथा तीन इंच लंबाई वाले फोन को सफलतापूर्वक निकाल लिया गया। फोन को आठ जुलाई को एक सीलबंद लिफाफे में जेल अधिकारियों को सौंप दिया गया।जेल अधिकारी रंगनाथ पी द्वारा तुंगानगर पुलिस थाने में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें इस बात की विस्तृत जांच की मांग की गई है ताकि पता चल सके कि कैदी ने कड़ी निगरानी के बावजूद जेल के अंदर फोन कैसे मंगा लिया। यह भी आरोप सामने आए हैं कि कुछ जेल कर्मचारियों ने इसमें सहायता की होगी। अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं।
- जम्मू. जम्मू के अखनूर सेक्टर में सेना के जवानों ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास एक पैंगोलिन को बचाया, जबकि राजौरी जिले के एक गांव में घुस आए एक तेंदुए को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समझा जा रहा है कि पैंगोलिन नियंत्रण रेखा पार कर भारतीय सीमा में घुस आया था जिसे शनिवार सुबह अखनूर सेक्टर के एक अग्रिम गांव में सेना के गश्ती दल ने देखा। उन्होंने बताया कि इस जानवर को सैनिकों ने बचा लिया और वन्यजीव विभाग को सौंप दिया, जिसने उसे जांच एवं निरीक्षण के लिए मांडा बचाव केंद्र पहुंचा दिया। पैंगोलिन ज्यादातर निशाचर और शर्मीले होते हैं तथा नदी किनारे के नमी वाले क्षेत्रों में पाये जाते हैं। वे बिल खोदकर चींटियों और दीमकों को खाने के लिए जाने जाते हैं।जम्मू-कश्मीर में, इन्हें आमतौर पर राजौरी और पुंछ के सीमावर्ती इलाकों में देखा जाता है। अधिकारियों ने कहा कि एक अलग घटना में राजौरी के कालाकोट उप-मंडल में काकुगाला गांव के दूरदराज के सिम्बल गली से एक मादा तेंदुए को बचाया गया। उन्होंने बताया कि संभवत: बीमार तेंदुआ गांव में घूमता हुआ पाया गया, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। उन्होंने बताया कि वन्यजीव संरक्षण विभाग की एक टीम घटनास्थल पर पहुंची और जानवर को बेहोश कर इलाज के लिए पशु चिकित्सालय ले गई।
- नयी दिल्ली. दिल्ली की सड़कों पर एक अक्टूबर से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से चलने वाले 3,500 से अधिक कैमरे, ‘गनशॉट सेंसर' और ‘अलर्ट सिस्टम' लगाए जाएंगे। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने कहा कि 'सेफ सिटी' परियोजना के पहले चरण के तहत ये उपकरण लगाए जाएंगे, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी में पुलिस की कार्यप्रणाली में बदलाव लाना है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वीडियो एनालिटिक्स (एआईवीए) से लैस यह प्रणाली गोलीबारी, महिलाओं के खिलाफ अपराध, वाहन चोरी और लावारिस वस्तुएं मिलने जैसी घटनाओं को लेकर अलर्ट जारी करेगी। यह कदम 31 दिसंबर, 2022 की रात को कंझावला में हुई भयावह घटना के लगभग दो साल से अधिक समय बाद उठाया गया है। इस घटना में 20 वर्षीय युवती को एक कार ने 12 किलोमीटर से ज्यादा दूर तक घसीटा था, जिसके कारण उसकी मौत हो गई थी।इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और शहर में निगरानी की खामियों की व्यापक समीक्षा की गई थी। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "कंझावाला मामले के बाद, गृह मंत्रालय ने हमें संवेदनशील इलाकों का ऑडिट करने का निर्देश दिया था। हमने पाया कि लगभग 10,000 अतिरिक्त कैमरों की ज़रूरत है। यह परियोजना विभिन्न चरण में लागू की जा रही है और सबसे पहले उच्च जोखिम एवं घनी आबादी वाले इलाकों में कम किया जाएगा।" अधिकारी ने बताया कि पहले चरण में कुल 3,500 कैमरे लगाए जाएंगे, जिनमें 6,121 बुलेट कैमरे, 1,622 स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) कैमरे, 370 फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (एफआरएस) कैमरे और 1,876 पैन-टिल्ट-जूम (पीटीजेड) कैमरे शामिल होंगे।उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त, इस परियोजना में 200 ‘गनशॉट डिटेक्शन सिस्टम' और 300 पब्लिक एड्रेस सिस्टम (स्पीकर) शामिल हैं। अधिकारी ने कहा कि इन्हें आपातकालीन स्थितियों के दौरान अलर्ट प्रदान करने और सार्वजनिक संचार के लिए रणनीतिक रूप से स्थापित किया जाएगा। अधिकारी ने कहा, "ये साधारण सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं। ये एआई-आधारित वीडियो एनालिटिक्स वाली प्रणाली पर आधारित हैं। यह प्रणाली किसी भी असामान्य गतिविधि का पता चलने पर पुलिस मुख्यालय में स्थित हमारे एकीकृत कमांड, नियंत्रण, संचार और कंप्यूटर केंद्र (सी4आई) को तुरंत अलर्ट कर देगी।"
- जम्मू. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए देशभर में आयोजित ‘रोजगार मेले' के तहत जम्मू में एक समारोह के दौरान 237 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने विभिन्न सरकारी विभागों और संगठनों में नवनियुक्त युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे तथा जम्मू-कश्मीर के लोगों को आश्वस्त किया कि प्रधानमंत्री मोदी की इस क्षेत्र के लिए विशेष प्राथमिकता है। प्रसाद ने उत्तर रेलवे के जम्मू संभाग द्वारा आयोजित रोजगार मेले के बाद संवाददाताओं से कहा, “मैं प्रधानमंत्री के ‘रोजगार मेले' में शामिल होने आया हूं।मैं मोदी सरकार का जम्मू-कश्मीर पर अधिक ध्यान केंद्रित होते देख रहा हूं और यह उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”मंत्री ने कहा कि उन्होंने रोजगार सृजन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए उद्योगों व आईटी विभागों के कामकाज की समीक्षा की है। प्रसाद ने कहा, “हम स्थानीय स्तर पर निर्मित वस्तुओं के निर्यात को सुगम बनाने के लिए अलग से क्रेता-विक्रेता बैठकें आयोजित करने, स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए ‘सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क' पर ध्यान केंद्रित करने और बेरोजगार युवाओं को पर्याप्त अवसर प्रदान करने की योजना बना रहे हैं।” प्रधानमंत्री ने 16वें रोजगार मेले के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से देश भर के 47 स्थानों पर 51,000 से अधिक नियुक्ति पत्र वितरित किए। रेल मंत्रालय, गृह मंत्रालय, डाक विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय सहित अन्य विभागों और मंत्रालयों में नई नियुक्तियां की गयी हैं।यह उत्तर रेलवे के जम्मू संभाग में आयोजित पहला रोजगार मेला था और इसकी घोषणा इस वर्ष की शुरुआत में की गई थी। जम्मू के संभागीय रेल प्रबंधक विवेक कुमार ने बताया कि यह रोजगार मेला प्रधानमंत्री की ‘सभी के लिए रोजगार' की प्रतिबद्धता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य युवाओं को सशक्त बनाना और उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना है। कुमार ने बताया कि नवनियुक्त कर्मियों को ‘कर्मयोगी प्रारम्भ' के माध्यम से ऑनलाइन प्रबोधन प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे सरकारी सेवा में दक्षता प्राप्त कर सकें।
- नयी टिहरी. उत्तराखंड के टिहरी जिले में शनिवार को एक ट्रक ने एक मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी जिससे उस पर सवार पंजाब के रहने वाले दो श्रद्धालुओं की मौत हो गयी। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने यहां बताया कि घटना ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कीर्तिनगर के पास बागवान में हुई जब ऋषिकेश से श्रीनगर की ओर जा रहे एक टाटा-407 ट्रक ने विपरीत दिशा से आ रही एक मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी जिससे मोटरसाइकिल पर सवार दोनों व्यक्ति ट्रक की चपेट में आकर उसके नीचे फंस गए।पुलिस ने बताया कि दोनों की मौके पर ही मौत हो गयी। मृतकों के शवों को एम्बुलेंस से श्रीनगर बेस चिकित्सालय भिजवाया गया। मृतकों की पहचान पंजाब के पटियाला जिले के मनप्रीत सिंह (28) तथा गुरदीप सिंह (22) के रूप में हुई है जो हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे से ऋषिकेश लौट रहे थे। कीर्तिनगर पुलिस थाने के प्रभारी ने बताया कि टाटा-407 ट्रक को उत्तराखंड के पौड़ी जिले के यमकेश्वर का रहने वाले रामकिशोर चला रहा था। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में दुर्घटना का कारण चालक की लापरवाही और वाहन को गलत दिशा में चलाना पाया गया है और इस मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
- कोलकाता। पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मेदिनीपुर जिले का एक सुदूरवर्ती गांव ‘नाया' किसी जीवंत कला दीर्घा से कम नहीं है, जहां दीवारें, कपड़े और दैनिक उपयोग की विविध वस्तुएं 'पट्टचित्र' की पारंपरिक कला का प्रदर्शन करती हैं, जिसे इसके 'चित्रकार' निवासियों द्वारा बनाया गया है। वर्ष 2018 में भौगोलिक पहचान (जीआई) टैग प्राप्त और फलों, फूलों और खनिजों से प्राप्त गहरे प्राकृतिक रंगों का उपयोग करने को लेकर विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त, पट्टचित्र 136 परिवारों वाले छोटे से गांव नाया में वित्त पोषण, प्रौद्योगिकी और समर्थन की चुनौतियों का सामना करने के बावजूद फल-फूल रहा है। पट्टचित्र अपनी मौखिक-दृश्य वर्णन शैली में अद्वितीय है, जिसे 'पटुआ' कहे जाने वाले कलाकार बनाते हैं। ये चित्र कभी पत्तों पर बनाये जाते थे और अब कपड़ों, वस्त्रों, मग, दीवार पर लटकाने वाले ‘पेंडेंट' और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर भी चित्रित किये जाते हैं, जिससे यह कला प्रासंगिक और जीवंत बनी रहती है। .सोनिया चित्रकार ने बताया, ‘‘मैं कार्यशालाओं के लिए जर्मनी गई थी।'' इस कला को संरक्षित करने के लिए उन्होंने और उनके परिवार ने जो प्रयास किए हैं, उसे लेकर उन्हें गर्व है। सोनिया के माता-पिता और पति ही अकेले चित्रकार नहीं हैं, बल्कि उनकी 10 वर्षीय बेटी प्रियंका चित्रकार भी इसमें बराबर की हिस्सेदार हैं। रूस की यात्रा कर चुके पटुआ कलाकार बहादुर चित्रकार के लिए, पट्टचित्र संचार का एक माध्यम है, जिसे वह और उनके साथी ग्रामीण बनाए रखने और पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं। इस कलाकार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली में 2022 के गणतंत्र दिवस परेड के दौरान अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए आमंत्रित किया था। इससे पहले, उक्त कलाकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्म से लेकर देश की स्वतंत्रता तक के सफर को दर्शाने के लिए 120 फुट का एक पट्टचित्र बनाया था।पट्टचित्र का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए तेजी से बढ़ रहा है, जिनमें दुर्गा पूजा पंडालों, चुनाव प्रचार, राज्य सरकार की योजनाओं के प्रचार और सामाजिक जागरूकता अभियान शामिल हैं। पहले, पट्टचित्र से संबंधित गीत - एक पटुआ गान - हिंदू पौराणिक कथाओं और लोककथाओं के बारे में होता था। अब, कोरोना वायरस, डेंगू और ग्लोबल वार्मिंग के बारे में जागरूकता पैदा करने वाले विमर्श इस परंपरा का हिस्सा बन गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा हाल ही में क्रोएशिया के राष्ट्रपति जोरान मिलनोविच को हस्तनिर्मित पट्टचित्र पेंटिंग उपहार स्वरूप देने से यह कला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गई है। भारत में अपनी वैश्विक पहुंच और लोकप्रियता के बावजूद, कलाकार नयी तकनीक और आर्थिक मदद से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। सोनिया और उनकी मां जोबा चित्रकार ने इंटरनेट के इस्तेमाल के बुनियादी प्रशिक्षण की कमी पर चिंता जताई।सोनिया ने कहा, ‘‘हमें इंटरनेट का इस्तेमाल ठीक से करना नहीं आता, जिसकी वजह से कई लोग हमारी कृतियां कम दामों पर खरीदते हैं और बाद में उन्हें ई-कॉमर्स मंच पर ऊंची कीमतों पर बेचकर भारी मुनाफा कमाते हैं।'' कलाकारों ने यह भी कहा कि अपने उत्पादों को बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर रहने से एक सफल व्यवसाय चलाने की संभावना भी प्रभावित होती है। सोनिया ने कहा, ‘‘गैर-सरकारी संगठन और स्वयं सहायता समूह हमें यात्रा करने, ठहरने, प्रदर्शन करने और व्यापार मेलों या उत्सवों में अपने उत्पाद बेचने का अवसर प्रदान करते हैं। लेकिन दिल्ली जैसे शहरों में दुकानें खोलना बहुत महंगा है। इसलिए ग्राहकों को सीधे अपनी कलाकृतियां बेचना अब भी एक चुनौती है।''
- नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत द्वारा पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रयोग को एक ऐतिहासिक और अग्रणी कदम बताते हुए जमकर तारीफ की है। WHO ने अपनी पहली तकनीकी रिपोर्ट “पारंपरिक चिकित्सा में AI के अनुप्रयोग का मानचित्रण” में भारत के प्रयासों को वैश्विक मानक के रूप में मान्यता दी है। यह रिपोर्ट भारत के प्रस्ताव पर तैयार की गई और इसमें आयुष (आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा रिग्पा और होम्योपैथी) में तकनीक के प्रभावी उपयोग को विस्तार से समझाया गया है।रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत किस प्रकार AI, मशीन लर्निंग और डीप न्यूरल नेटवर्क जैसी उन्नत तकनीकों के माध्यम से पारंपरिक निदान विधियों जैसे- नाड़ी परीक्षण, प्रकृति मूल्यांकन और जीभ परीक्षण को और अधिक वैज्ञानिक और व्यक्तिगत बना रहा है। ये तकनीकें न केवल रोगों की सटीक पहचान में मदद कर रही हैं बल्कि व्यक्ति विशेष की प्रकृति के अनुसार चिकित्सा समाधान भी प्रदान कर रही हैं। केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने WHO की इस सराहना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन का परिणाम बताया, जिसमें वे आधुनिक तकनीक को भारतीय पारंपरिक ज्ञान से जोड़कर वैश्विक स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करना चाहते हैं।जाधव ने कहा कि SAHI पोर्टल, NAMASTE पोर्टल और आयुष रिसर्च पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भारत को उस दिशा में ले जा रहे हैं, जहां व्यक्तिगत, साक्ष्य-आधारित और वैश्विक रूप से सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने बताया कि 2018 में शुरू किया गया आयुष ग्रिड प्लेटफॉर्म इन सभी पहलों की नींव है, जिसके जरिए भारत पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को संरक्षित करने और उसे वैश्विक डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे में एकीकृत करने की दिशा में काम कर रहा है।WHO रिपोर्ट में भारत की एक और प्रमुख पहल “आयुर्जेनोमिक्स” (Ayurgenomics) पर भी प्रकाश डाला गया है। यह परियोजना आयुर्वेद और जीनोमिक्स का संगम है, जिसमें AI की सहायता से रोगों के जीन-आधारित संकेतों की पहचान की जाती है और व्यक्ति विशेष के स्वास्थ्य के लिए अनुकूल सलाह दी जाती है। यह पहल हर्बल औषधियों के आणविक और जीन स्तर पर प्रभाव को भी स्पष्ट करने में मदद कर रही है। इसके अतिरिक्त, पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL) को भी WHO ने वैश्विक मॉडल करार दिया है, जो भारतीय चिकित्सा ग्रंथों और ज्ञान को AI टूल्स की मदद से संरक्षित, विश्लेषण और डिजिटाइज कर रही है।WHO ने भारत के इन प्रयासों की भी प्रशंसा की कि वह ऑनलाइन परामर्श के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है, आयुष चिकित्सकों को डिजिटल साक्षरता सिखा रहा है और पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों से जोड़ने के लिए इंटरऑपरेबल सिस्टम तैयार कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में आयुष क्षेत्र का बाजार आकार अब 43.4 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है, जो न केवल स्वास्थ्य सेवा में बल्कि भारत की आर्थिक वृद्धि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। WHO की यह मान्यता इस बात का प्रमाण है कि भारत पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक को जोड़कर विश्व स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई दिशा दे रहा है।
- नई दिल्ली। ग्रामीण भारत में आय को मजबूती देने और देशभर में उपभोग को बढ़ाने में खेती का अच्छा उत्पादन, घटती महंगाई, कम ब्याज दरें और आयकर में राहत जैसे हालिया कारक बड़ी भूमिका निभाएंगे।CareEdge Ratings की एक नई रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में निजी अंतिम उपभोग व्यय की हिस्सेदारी करीब 60% है, इसलिए उपभोग में सुधार भारत की समग्र आर्थिक वृद्धि के लिए बेहद जरूरी है।इसके अलावा, निजी क्षेत्र की पूंजीगत व्यय में स्थायी बढ़ोतरी के लिए उपभोग की स्थिर रिकवरी भी अनिवार्य है। CareEdge ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में निजी उपभोग की वृद्धि दर 6.2% रहने की उम्मीद है, जो पिछले तीन वर्षों के औसत 6.7% से थोड़ी कम है। रिपोर्ट में कहा गया कि लंबी अवधि में घरेलू आय को प्रभावित करने वाले कारकों पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा ताकि निजी उपभोग में स्वस्थ वृद्धि बनी रहे।पिछले कुछ वर्षों में कुल उपभोग वृद्धि सामान्य रूप से मजबूत रही है, लेकिन हाल के संकेतकों से यह स्पष्ट होता है कि शहरी मांग पर कुछ दबाव देखा जा रहा है। वहीं, ग्रामीण मांग अब भी मजबूत बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, FY26 में खेती का अनुकूल उत्पादन और महंगाई में राहत ग्रामीण उपभोग को मजबूत बनाए रखेंगे। वहीं शहरी क्षेत्रों के लिए भी रिपोर्ट में कुछ राहत की बात की गई है। आरबीआई की नीतिगत दरों में कटौती, आयकर में छूट और महंगाई में नरमी जैसे हालिया नीतिगत उपायों से शहरी उपभोग को भी निकट भविष्य में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, अगर इस साल मानसून अच्छा रहता है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोग को और अधिक बढ़ावा मिल सकता है।हालांकि रिपोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि देश में आय की वृद्धि दर अभी कमजोर बनी हुई है और इसी दौरान घरेलू कर्ज में बढ़ोतरी देखी गई है। FY24 के अंत तक घरेलू कर्ज जीडीपी के 41% और निवल घरेलू उपलब्ध आय (Net Household Disposable Income) के 55% तक पहुंच चुका है।भारत में घरेलू कर्ज का स्तर अन्य कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम है-जैसे कि थाईलैंड (87% जीडीपी), मलेशिया (67%) और चीन (62%) फिर भी रिपोर्ट में असुरक्षित ऋण के तेजी से बढ़ने पर चिंता जताई गई है। यह ट्रेंड कोविड-19 महामारी के बाद ज्यादा देखने को मिला है और मौजूदा समय में जब आय की वृद्धि सुस्त है, तब इस क्षेत्र में चूक के मामलों में इजाफा हो रहा है। इसलिए, रिपोर्ट ने सुझाव दिया कि असुरक्षित ऋण क्षेत्र पर निगरानी बनाए रखना बेहद जरूरी होगा ताकि भविष्य में किसी वित्तीय अस्थिरता से बचा जा सके।-
- नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 4 जुलाई को समाप्त हफ्ते में भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 699.736 अरब डॉलर रहा। इसी अवधि में देश का स्वर्ण भंडार 34.2 करोड़ डॉलर बढ़कर 84.846 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब घरेलू और वैश्विक स्तर पर सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत के विशेष आहरण अधिकार (SDR) 3.9 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.868 अरब डॉलर हो गए, जबकि आईएमएफ में भारत का आरक्षित भंडार 10.7 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.735 अरब डॉलर पहुंच गया।पिछले सप्ताह भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 4.849 अरब डॉलर बढ़कर 702.784 अरब डॉलर हुआ था, जो सितंबर 2024 के अंत में रिकॉर्ड 704.885 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच गया था। विदेशी मुद्रा भंडार में यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य मुद्राओं के डॉलर के मुकाबले उतार-चढ़ाव का असर भी शामिल होता है। वहीं सोने और चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल भी दर्ज किया गया। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के अनुसार, शुक्रवार को 24 कैरेट सोने की कीमत 465 रुपए बढ़कर 97,511 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई, जो एक दिन पहले 97,046 रुपए थी। इसी तरह, 22 कैरेट सोने की कीमत 89,320 रुपए और 18 कैरेट सोने की कीमत 73,133 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई।चांदी ने तो नया रिकॉर्ड बना दिया। पिछले 24 घंटों में चांदी की कीमत 2,356 रुपए बढ़कर 1,10,290 रुपए प्रति किलोग्राम पहुंच गई, जो कि 18 जून को दर्ज 1,09,550 रुपए प्रति किलो के पुराने रिकॉर्ड से भी अधिक है। वैश्विक स्तर पर, सोने की कीमत 1.01% बढ़कर 3,358 डॉलर प्रति औंस और चांदी की कीमत 2.92% बढ़कर 38.40 डॉलर प्रति औंस हो गई। विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और व्यापार शुल्कों को लेकर चिंताओं के चलते निवेशकों का रुझान सुरक्षित संपत्तियों जैसे कि सोने और चांदी की ओर बढ़ रहा है।-
- भुवनेश्वर। ओडिशा के वरिष्ठ आदिवासी नेता और केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल उरांव ने शनिवार को कहा कि वह युवा पीढ़ी को मौका देने के लिए चुनावी राजनीति से ब्रेक लेना चाहते हैं। नरेन्द्र मोदी कैबिनेट के सदस्य उरांव ने संबलपुर में ‘ शनिवार को नियुक्ति मेला’ समारोह में भाग लेते हुए यह बात कही।मंत्री ने कहा कि वह भविष्य में सांसद या विधायक पद के लिए चुनाव नहीं लड़ेंगे। उरांव ने समारोह के बाद पत्रकारों से कहा, ‘मैंने पिछले चुनाव के दौरान ही स्पष्ट कर दिया था कि मैं फिर कभी लोकसभा या विधानसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ूंगा। अब समय आ गया है कि युवा पीढ़ी के लिए सीट खाली कर दी जाए। मैं पहले ही 10 बार प्रत्यक्ष चुनाव लड़ चुका हूं।”उरांव ने हालांकि कहा कि वह पार्टी की सेवा करते रहेंगे और राज्यसभा सांसद या किसी भी राज्य का राज्यपाल बनने में संकोच नहीं करेंगे, लेकिन प्रत्यक्ष चुनाव में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है। वह छह बार सांसद और दो बार विधायक रह चुके हैं।उन्होंने कहा, ‘मैं भाजपा के लिए काम करता रहूंगा और पार्टी मुझे जो भी जिम्मेदारी देगी, उसे निभाऊंगा।’यह पूछे जाने पर कि क्या पार्टी के कहने पर वह चुनाव लड़ेंगे तो उरांव ने कहा, ‘मेरे पास कोई विकल्प नहीं होगा। मैं पार्टी के निर्देशों का पालन करूंगा।’ उरांव पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में भी मंत्री रह चुके हैं। वह वाजपेयी द्वारा बनाए गए जनजातीय मामलों के मंत्रालय के पहले मंत्री थे।
- कोल्लम । दक्षिण केरल के कोल्लम जिले के वालकोम में रामविलासोम वोकेशनल हायर सेकेंडरी स्कूल (आरवीएचएसएस) मलयाली फिल्म से प्रेरणा लेकर शिक्षा नवाचार के लिए एक आदर्श के रूप में उभरा है और इसकी वजह कक्षाओं में छात्रों को बैठने की अनूठी व्यवस्था है जिसने अब ‘बैकबेंचर्स’ के विचार को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। प्राथमिक कक्षा में पढ़ने वाले प्रत्येक छात्र को समान ध्यान मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए बैठने की व्यवस्था को पुनः व्यवस्थित करके, आरवीएचएसएस ने प्रशंसा और अनुकरण दोनों प्राप्त किया है।हाल ही में प्रदर्शित मलयालम फिल्म ‘स्थानार्थी श्रीकुट्टन’ से प्रभावित होकर विद्यालय ने बच्चों के बैठने की एक अभिनव व्यवस्था लागू की है, जिसमें एक पंक्ति की सीटें कक्षा की चार दीवारों के साथ संरेखित की गई हैं, ताकि सभी लोग आगे की बेंचों पर बैठ सकें। केरल के आठ विद्यालयों ने पहले ही इस बैठने की व्यवस्था को अपना लिया है, तथा पंजाब के एक स्कूल ने भी इस व्यवस्था को लागू किया है।फिल्म ‘स्थानार्थी श्रीकुट्टन’ के निर्देशक विनेश विश्वनाथन ने बताया, ‘‘मुझे खबर मिली कि पंजाब के एक स्कूल ने भी इसे अपना लिया है। प्रधानाचार्य ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्म देखी। उन्होंने छात्रों को फिल्म दिखाई भी। मुझे खुशी है कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान मिला।’’उन्होंने कहा कि फिल्म में केवल एक दृश्य में इस व्यवस्था को दिखाया गया है, जिसे फिल्म में 7वीं कक्षा के एक छात्र द्वारा क्रियान्वित किया गया विचार बताया गया है।विनेश ने कहा, ‘‘पीछे बेंच पर बैठकर अपमानित होने के अनुभव से ही उन्हें यह विचार आया। मैंने कभी नहीं सोचा था कि इसकी इतनी चर्चा होगी।’’उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारा विचार नहीं है, लेकिन जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम (डीपीईपी) के तहत कक्षाओं में बैठने की ऐसी व्यवस्था पहले से ही थी, लेकिन बीच में हम इसे भूल गए थे।’’आरवीएचएसएस का प्रबंधन केरल सरकार के मंत्री गणेश कुमार का परिवार करता है। गणेश ने ‘स्थानार्थी श्रीकुट्टन’ का पूर्वावलोकन इसके रिलीज होने से एक वर्ष पहले देखा था और आरएमवीएचएसएस में प्राथमिक कक्षाओं में इसे शुरू करने की संभावना पर शिक्षकों के साथ चर्चा की थी। आरएमवीएचएसएस के प्रधानाध्यापक सुनील पी शेखर ने ‘ बताया, ‘‘गणेश कुमार ने हमसे और अपनी पत्नी (जो स्कूल का प्रबंधन करती हैं) से इस बारे में चर्चा की। हम भी एक कक्षा में इसे शुरू करने पर सहमत हो गए। हमें जो परिणाम मिले, वे बहुत सकारात्मक थे और हमने इसे सभी निम्न प्राथमिक कक्षाओं में शुरू किया।’
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कारवार (कर्नाटक). उत्तर कन्नड़ जिले के कुमटा तालुक की शांत लेकिन दुर्गम रामतीर्थ पहाड़ियों में स्थित एक सुदूर गुफा से रूस की एक महिला एवं उसके दो छोटे बच्चों को बचाया गया है। पुलिस के एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी और कहा कि रूसी महिला आध्यात्मिक शांति की तलाश में वहां रह रही थी। उन्होंने बताया कि महिला की पहचान 40 वर्षीय नीना कुटीना उर्फ मोही के रूप में हुई है। वह ‘बिजनेस वीजा' पर रूस से भारत आई थी। वह हिंदू धर्म तथा भारत की आध्यात्मिक परंपराओं से बहुत ज्यादा प्रभावित हुई, इसलिए वह गोवा के रास्ते पवित्र तटीय शहर गोकर्ण पहुंची थी। अधिकारी ने बताया कि मोही के दो बच्चे भी हैं, जिनका नाम प्रेया (6) और अमा (4) है। ये सभी लगभग दो सप्ताह से जंगल के बीचोंबीच और पूरी तरह से एकांत में रह रहे थे। उन्होंने बताया कि इस छोटे से परिवार ने घने जंगल और खड़ी ढलानों से घिरी एक प्राकृतिक गुफा के अंदर एक साधारण सा घर बना लिया था। अधिकारी ने बताया कि मोही ने वहां रुद्र की प्रतिमा स्थापित की हुई थी। उन्होंने कहा कि वह प्रकृति के बीच आध्यात्मिक शांति की तलाश में पूजा और ध्यान में अपना दिन बिताया करती थी। उसके साथ केवल उसके दो छोटे बच्चे रहे। उन्होंने बताया कि हाल ही में हुए भूस्खलन के बाद शुक्रवार को नियमित गश्त के दौरान पुलिस निरीक्षक श्रीधर और उनकी टीम ने गुफा के बाहर कपड़े लटके हुए देखे थे। उत्तर कन्नड़ के पुलिस अधीक्षक एम नारायण ने शनिवार को कहा, ‘‘हमारी गश्त टीम ने रामतीर्थ पहाड़ी में गुफा के बाहर सूखने के लिए साड़ी और अन्य कपड़े लटके हुए देखे थे। जब वे वहां गए तो उन्होंने मोही को उसके बच्चों प्रेया और अमा के साथ देखा।'' उन्होंने कहा, ‘‘यह बहुत ही हैरानी की बात है कि वह और उसके बच्चे जंगल में कैसे जीवित रहे और क्या खाते-पीते रहे। शुक्र है कि जंगल में रहने के दौरान उनके या उनके बच्चों के साथ कोई अनहोनी नहीं हुई।'' उनके अनुसार, महिला संभवतः गोवा से यहां पहुंची है।
अधिकारी ने बताया कि यह भी पता चला कि महिला का वीजा 2017 में ही समाप्त हो गया था। वह कितने समय से भारत में रह रही है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। नारायण ने कहा, ‘‘हमने एक साध्वी द्वारा संचालित आश्रम में उसके रहने की व्यवस्था की है। हमने उसे गोकर्ण से बेंगलुरु ले जाने और निर्वासन की प्रक्रिया शुरू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।'' एक स्थानीय एनजीओ की मदद से रूसी दूतावास से संपर्क किया गया और उसे निर्वासित करने की औपचारिकताएं शुरू की गईं।


























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