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- नई दिल्ली। भारतीय रेलवे की स्थापना के गुरुवार के 167 वर्ष हो गए लेकिन डेढ़ शताब्दी वर्ष से अधिक समय के दौरान पहली बार रेलगाडिय़ां अपने स्थापना दिवस पर यार्ड में खड़ी रहीं और देशव्यापी लॉकडाउन के चलते यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं ले गईं।167 वर्ष पहले 16 अप्रैल 1853 में देश में पहली यात्री रेलगाड़ी मुंबई में बोरी बंदर से ठाणे तक चली थी। 14 डिब्बों वाली रेलगाड़ी को 21 तोपों की सलामी दी गई थी और इसमें 400 यात्रियों ने यात्रा की थी। भारत में रेल सेवा शुरू होने के बाद पहली बार 1974 में रेलगाडिय़ों के पहिए थमे थे। मई 1974 में रेलवे की हड़ताल के दौरान चालक, स्टेशन मास्टर, गाड्र्स, ट्रैक कर्मचारी और कई अन्य ने तीन हफ्ते तक चक्का जाम किया था। ट्रेन चालकों के कामकाज का समय तय करने और वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर यह हड़ताल की गई थी। लेकिन इस बार ट्रेनों के पहिए लॉकडाउन के कारण थमे हुए हैं। अपने इतिहास में कभी भी रेल सेवाएं इतने लंबे समय तक बाधित नहीं रहीं। विश्व युद्धों के दौरान भी नहीं, न ही 1974 की रेल हड़तालों के दौरान या किसी राष्ट्रीय आपदा या प्राकृतिक आपदा के दौरान ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हुआ।--
- मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लॉकडाउन-दो को लेकर टीवी पर संबोधन को रिकॉर्ड 20.3 करोड़ लोगों ने देखा। प्रसारण दर्शक अनुसंधान परिषद (बार्क) ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री के संबोधन ने उनके ही पिछले रिकॉर्ड को तोड़ा है।अपने इस संबोधन में मोदी ने राष्ट्रव्यापी बंद को 19 दिन बढ़ाने की घोषणा की। बाजार अनुसंधान एजेंसी एसी नील्सन ने कहा कि रिकॉर्ड संख्या लोगों ने संपर्क का पता लगाने के आरोग्य सेतु एप को डाउनलोड किया है लेकिन इनमें से सिर्फ 10 प्रतिशत ही इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रधानमंत्री कोरोना वायरस महामारी पर देश की जनता को चार बार संबोधित कर चुके हैं। पहली बार उन्होंने'जनता कर्फ्यू का आह्वान किया। उसके बाद लॉकडाउन की घोषणा और तीसरी बार घरों में मोमबत्तियां और दीये जलाने का आह्वान किया। इससे पहले मोदी ने जब पहली बार 21 दिन के बंद की घोषणा की थी, तो उनके इस संबोधन को रिकॉर्ड 19.3 करोड़ लोगों ने देखा। बार्क के मुख्य कार्यकारी सुनील लुल्ला ने बताया कि प्रधानमंत्री ने मंगलवार को राष्ट्रव्यापी बंद को 19 दिन बढ़ाने की घोषणा की। उनके इस 25 मिनट के संबोधन का प्रसारण 199 प्रसारण कंपनियों ने किया। सभी दर्शकों की संख्या के आधार पर गणना की जाए तो इस प्रसारण को चार अरब मिनट देखा गया। यह भी एक रिकॉर्ड है।--167 वर्षों में रेलवे ने पहली बार अपने स्थापना दिवस पर यात्रियों की सेवा नहीं कीनई दिल्ली। भारतीय रेलवे की स्थापना के गुरुवार के 167 वर्ष हो गए लेकिन डेढ़ शताब्दी वर्ष से अधिक समय के दौरान पहली बार रेलगाडिय़ां अपने स्थापना दिवस पर यार्ड में खड़ी रहीं और देशव्यापी लॉकडाउन के चलते यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं ले गईं।167 वर्ष पहले 16 अप्रैल 1853 में देश में पहली यात्री रेलगाड़ी मुंबई में बोरी बंदर से ठाणे तक चली थी। 14 डिब्बों वाली रेलगाड़ी को 21 तोपों की सलामी दी गई थी और इसमें 400 यात्रियों ने यात्रा की थी। भारत में रेल सेवा शुरू होने के बाद पहली बार 1974 में रेलगाडिय़ों के पहिए थमे थे। मई 1974 में रेलवे की हड़ताल के दौरान चालक, स्टेशन मास्टर, गाड्र्स, ट्रैक कर्मचारी और कई अन्य ने तीन हफ्ते तक चक्का जाम किया था। ट्रेन चालकों के कामकाज का समय तय करने और वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर यह हड़ताल की गई थी। लेकिन इस बार ट्रेनों के पहिए लॉकडाउन के कारण थमे हुए हैं। अपने इतिहास में कभी भी रेल सेवाएं इतने लंबे समय तक बाधित नहीं रहीं। विश्व युद्धों के दौरान भी नहीं, न ही 1974 की रेल हड़तालों के दौरान या किसी राष्ट्रीय आपदा या प्राकृतिक आपदा के दौरान ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हुआ।--
- नई दिल्ली। पांच बार के विश्व शतरंज चैम्पियन रहे विश्वनाथन आनंद डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वल्र्ड वाइड फंड) इंडिया के पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम के दूत बने हैं।डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया ने भारत में पर्यावरण सरंक्षण के 50 वर्ष पूरे किये हैं और पर्यावरण के लिये संरक्षण और बचाव के लिये आनंद के जुडऩे से खुश है। आनंद ने इस बारे में कहा- हमारे बच्चे बेहतर और हरे भरे पेड़ों से भरी दुनिया के हकदार हैं और माता-पिता के तौर पर यह हमारी जिम्मेदारी है कि उन्हें रास्ता दिखाएंं। मैं डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया से जुड़कर खुश और रोमांचित हूं। उनके साथ ज्यादा से ज्यादा बच्चों और युवाओं को अपनी प्रकृति को बचाने की जरूरत बताऊंगा।गौरतलब है कि डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया ने 1976 में शुरूआत की थी।---
- देहरादून। लॉकडाउन के कारण चारधाम की यात्रा पर भी फिलहाल रोक लग गई है। उत्तराखंड कैबिनेट ने यह तय किया है कि चार धामों के कपाट खुलने के समय आम जनता को चारों धामों के दर्शन की अनुमति नहीं होगी।कैबिनेट ने यह भी तय किया है कि उत्तराखंड में 17 अप्रैल से सचिवालय और विधानसभा खुलेंगे। कैबिनेट के फैसले के अनुसार, 17 अप्रैल से ही मंत्री भी विधानसभा में बैठ सकेंगे। अनुसचिव से ऊपर के कर्मचारी सचिवालय और विधानसभा में उपस्थित होंगे। 20 अप्रैल के बाद राज्य में उद्योग चलाने को छूट दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए सरकार से अनुमति लेनी होगी। उद्योग शुरू करने के लिए सम्बन्धित जिलों के डीएम से अनुमति लेनी होगी।कैबिनेट ने यह भी तय किया है कि वैवाहिक कार्यक्रमों को छूट मिलेगी। साथ ही निधन होने पर अंत्येष्टि की छूट मिलेगी लेकिन इसके लिए प्रशासन की अनुमति जरूरी होगी। 5 लोगों की मौजूदगी में सोशल डिस्टेसिंग के साथ शादी करने को अनुमति होगी, जबकि अन्त्येष्टि में 20 व्यक्ति मौजूद रह सकते हैं।कैबिनेट ने यह भी फैसला लिया है कि लॉकडाउन में 5 आदमियों से ज्यादा किसी भी सार्वजनिक जगह पर पाबन्दी रहेगी। सार्वजनिक स्थलों पर मास्क पहनना जरूरी होगा। कैबिनेट ने यह भी तय किया है कि इस लॉकडाउन के दौरान राज्य में सड़क, रेल और हवाई सभी प्रकार के यातायात के साधन बंद रहेंगे।गौरतलब है कि 26 व 27 अप्रैल को गंगोत्री व यमुनोत्री धाम और 29 व 30 अप्रैल को केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे।---
- नई दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा के लिए कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी ) की एक विशेष बैठक आयोजित की गई।सोशल डिस्टैंसिंग सहित विद्यमान लाकडाउन को देखते हुए, फैसला किया गया कि सभी परीक्षाओं, जिसके लिए उम्मीदवारों को देश के सभी भागों की यात्रा करने की आवश्यकता पड़ती थी, की तिथि की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी। कंबाइंड हायर सेकेंडरी (10प्लस2) लेवल परीक्षा (टियर-1) 2019, जूनियर इंजीनियर (पेपर-1) परीक्षा 2019, स्टेनोग्राफर ग्रेड सी एवं डी परीक्षा, 2019 एवं कंबाइंड हायर सेकेंडरी लेवल परीक्षा 2018 के लिए कौशल परीक्षा लॉकडाउन के दूसरे चरण की पूर्णता का अनुसरण करते हुए 3 मई के बाद ली जाएंगी।इन परीक्षाओं की पुनर्निर्धारित तिथियां आयोग एवं इसके क्षेत्रीय/उप-क्षेत्रीय कार्यालयों की वेबसाइट पर अधिसूचित की जाएंगी। आयोग द्वारा अधिसूचित परीक्षाओं के वार्षिक कैलेंडर की समीक्षा भी अन्य परीक्षाओं के कार्यक्रमों के संबंध में की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, यह फैसला भी किया गया कि एसएससी के सभी अधिकारी और स्टाफ सदस्य प्रधानमंत्री के आपातकालीन स्थिति में नागरिक सहायता एवं राहत फंड (पीएम केयर्स फंड) में एक दिन के वेतन का योगदान देंगे।---
- नई दिल्ली। कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार द्वारा लॉकडाउन अवधि के दौरान किसानों और खेती की गतिविधियों को जमीनी स्तर पर सुविधाजनक बनाने के लिए कई उपायों को किया जा रहा है।भारत सरकार द्वारा कटाई और बुवाई के मौसम को ध्यान में रखते हुए कृषि कार्यों के लिए निम्न छूट प्रदान की गई है।- कृषि उत्पादों की खरीद और न्यूनतम समर्थन मूल्यों (एमएसपी) के संचालन में लगी एजेंसियां;-खेत में किसानों और खेतिहर श्रमिकों द्वारा खेती से संबंधित कार्य;- मंडियां, कृषि उपज बाजार समिति द्वारा संचालित या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित;-मंडियां , प्रत्यक्ष विपणन, राज्य सरकार/ केंद्र शासित प्रशासन द्वारा सुविधा प्राप्त, किसानों/ किसानों के समूहों द्वारा सीधे संचालित। एफपीओ, सहकारी समितियां आदि शामिल;-बीज, उर्वरक और कीटनाशक की दुकानें;-बीज, उर्वरक और कीटनाशक की विनिर्माण और पैकेजिंग इकाइयां;-फॉर्म मशीनरी से संबंधित कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी);-कटाई और बुवाई संबंधित मशीनों की राज्यांतरिक और अंतरराज्यीय गतिविधियां जैसे संयुक्त हार्वेस्टर और अन्य कृषि/ बागवानी उपकरण;-कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउसिंग सेवाएं;-खाद्य पदार्थों के लिए पैकेजिंग सामग्रियों की विनिर्माण इकाइयां;-आवश्यक वस्तुओं के लिए परिवहन;-कृषि मशीनरी की दुकानें, इसके कल-पुर्जे (आपूर्ति श्रृंखला सहित) और मरम्मत की दुकानें।-चाय उद्योग, पौधरोपण सहित, अधिकतम 50 प्रतिशत श्रमिकों की उपलब्धता के साथ।2. कृषि मंत्री ने राज्य मंत्री (कृषि) के साथ मिलकर आज अखिल भारतीय कृषि परिवहन कॉल सेंटर का औपचारिक शुरूआत की। इस कॉल की स्थापना राज्यों के बीच विकारी खाद्यों जैसे सब्जियों और फलों, कृषि आदानों जैसे बीजों, कीटनाशकों और उर्वरक आदि के अंतरराज्यीय गतिविधियों के लिए समन्वय स्थापित करने के लिए की गई है। इस कॉल सेंटर का नंबर 18001804200 और 14488 हैं। इस नंबर पर किसी भी मोबाइल या लैंडलाइन फोन से डायल किया जा सकता है।ट्रक चालक, व्यापारी, खुदरा विक्रेता, ट्रांसपोर्टर या कोई भी अन्य हितधारक जो उपरोक्त वस्तुओं के अंतरराज्यीय गतिविधियों में समस्याओं का सामना कर रहे हैं, कॉल सेंटर पर फोन करके मदद प्राप्त कर सकते हैं। कॉल सेंटर के कर्मचारी समस्या का समाधान करने के लिए राज्य सरकार के अधिकारियों को वाहन, माल और आवश्यक मदद की पूरी जानकारी भेजेंगे।3. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के अंतर्गत 24 मार्च से लॉकडाउन अवधि के दौरान, अब तक लगभग 8.46 करोड़ किसान लाभान्वित हो चुके हैं और 16 हजार 927 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है।4. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएम-जीकेवाई) के अंतर्गत, राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को भुगतान करने के लिए लगभग 5,516 मीट्रिक टन दालें भेजी गई हैं।5. रेलवे ने आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को तेज गति के साथ करने के लिए 236 पार्सल स्पेशल ट्रेनें (जिनमें से 171 टाइम टेबल पार्सल ट्रेनें शामिल हैं) चलाने के लिए 67 मार्गों की शुरूआत की है, जिसमें विकारी बागवानी उपजें, कृषि आदानें अर्थात् बीज, उर्वरक और कीटनाशक, दूध और डेयरी उत्पादें शामिल हैं, जो कि पूरे देश में किसानों/ एफपीओ/ व्यापारियों और कंपनियों को आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता वाली सुविधा प्रदान करेगी। रेलवे द्वारा देश के प्रमुख शहरों के बीच और राज्य मुख्यालयों से राज्य के सभी हिस्सों के बीच नियमित संपर्क स्थापित किया गया है।6. किसानों के लिए गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए, एनएचबी द्वारा मान्यता प्राप्त नर्सरी की स्टार रेटिंग प्रमाणीकरण की वैधता को 30 सितंबर, 2020 तक विस्तारित किया गया है।7. राज्यों से राज्यांतरिक और अंतरराज्यीय आवागमन की अनुमति देने का अनुरोध करके प्रवासी मधुमक्खी पालन की सुविधा प्रदान की गई है।8. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के अंतर्गत, देश के 12 राज्यों में लाभार्थी किसानों के बीच 2,424 करोड़ रुपये की बीमा राशि वितरित की गई है।---
- नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने केंद्र और राज्य सरकारों से लॉकडाउन के दौरान कृषि और किसानों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने आग्रह किया कि इस अवधि में कृषि संबंधित कार्यों तथा कृषि उत्पाद के आवागमन को निर्बाध और सुचारू रूप से जारी रखा जाए।अपने निवास उपराष्ट्रपति भवन में, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर से भेंट के दौरान उपराष्ट्रपति ने कृषि क्षेत्र के संरक्षण के लिए कृषि मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की। उनका विचार था कि कृषि उत्पादक और उपभोक्ता दोनों के हितों का संरक्षण किया जाना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहा, कृषि में उत्पादक संगठित नहीं है इसलिए प्राय: उनकी बात अनसुनी रह जाती है। अत: यह सरकार का दायित्व है कि वह उनके हितों का संरक्षण करे। उन्होंने कहा कि यद्यपि यह दायित्व मूलत: राज्य सरकारों का है फिर भी केंद्र को समय-समय पर उन्हें मार्गदर्शन और सहायता देनी चाहिए।फल और सब्जी जैसे जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनके भंडारण और बिक्री के लिए विशेष प्रबंध किए जाने चाहिए। उपराष्ट्रपति ने एपीएमसी कानून में आवश्यक बदलाव किए जाने की सलाह दी जिससे कृषि उत्पादों को बिना मंडी में गए, सीधे किसानों से खरीदा जा सके। श्री नायडू ने कहा इससे उपभोक्ताओं को फल, सब्ज़ी तथा अन्य कृषि उत्पादों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। कृषि उत्पादों के निर्बाध आवागमन की जरूरत पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने संबद्ध अधिकारियों से कहा कि वे सुचारू आवागमन सुनिश्चित करें। वर्तमान कटाई के समय की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कृषि उपकरणों और मशीनों का निर्बाध आवागमन और उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।कृषि मंत्री ने उपराष्ट्रपति को किसानों के हितों की रक्षा के लिए उठाए गए कदमों के बारे में विस्तार से अवगत कराया। कृषि मंत्री ने बताया कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ निकट सामंजस्य बना कर काम कर रहा है। उन्होंने उपराष्ट्रपति को आश्वस्त किया कि संकट के इस समय में सरकार किसानों के हितों का संरक्षण करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी।---
- नई दिल्ली। आयकर विभाग ने एक सप्ताह में ही 10.2 लाख करदाताओं को कुल मिलाकर 4,250 करोड़ रुपये का रिफंड जारी कर दिया। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने बुधवार को यह जानकारी दी।वित्त मंत्रालय ने पिछले सप्ताह कहा था कि वह पांच लाख रुपये तक के कर रिफंड को जल्द से जल्द जारी करेगा। इससे कोविड-19 संकट का सामना कर रहे करीब 14 लाख व्यक्तिगत और कारोबारी आयकरदाताओं को राहत पहुंचेगी। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि सीबीडीटी ने 14 अप्रैल, 2020 तक 10.2 लाख आयकरदाताओं को 4,250 करोड़ रुपये का रिफंड जारी कर दिया। इस सप्ताह करीब 1.75 लाख और करदाताओं को रिफंड भेजा जा रहा है। सीबीडीटी ने कहा कि यह रिफंड पांच से सात कार्यदिवसों में आयकरदाताओं के खातों में डाल दिया जाएगा। सीबीडीटी व्यक्तिगत आयकर और कंपनी कर के मामलों से जुड़ी प्रत्यक्ष कर क्षेत्र की शीर्ष सरकारी संस्था है। उसने पिछले वित्त वर्ष में कुल 1.84 लाख करोड़ रुपये के 2.50 करोड़ रिफंड जारी किये थे।विभाग ने कहा है कि करीब 1.74 लाख मामलों में करदाताओं को भेजे गये ई-मेल पर उनके जवाब का इंतजार है। उनसे उनके रिफंड का पुरानी बकाया कर मांग के साथ समाधान किये जाने के बारे में पूछा गया है। इसके लिये रिमांडर भी भेजा गया है जिसमें सात दिन के भीतर उनसे जवाब देने को कहा गया है ताकि रिफंड प्रक्रिया को जल्द से जल्द प्रसंस्कृत किया जा सके। करदाता इसके लिये अपने ई-फाइलिंग खाते में लॉग इन करके विभाग को जवाब दे सकते हैं।---
- नई दिल्ली। देश में लॉकडाउन की अवधि 3 मई तक कर दी गई है। विद्यार्थियों की सहूलियत को देखते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद- एनसीईआरटी ने कक्षा पहली से लेकर 12वीं तक की सभी किताबें ऑनलाइन अपलोड कर दी हैं।हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों के बच्चों के लिए दोनों भाषाओं में किताबें उपलब्ध हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के अलावा जिन बोड्र्स में एनसीईआरटी की किताबें चलती हैं, उनके स्टूडेंट्स भी इसका लाभ उठा सकते हैं।ये किताबें बिल्कुल नि:शुल्क हैं। एनसीईआरटी ने गूगल ड्राइव पर किताबें अपलोड की हैं। ये किताबें पीडीएफ फॉर्मेट में भी हैं और फ्लिपबुक्स फॉर्मेट में भी ऑनलाइन उपलब्ध हैं। कक्षा 11 और 12 के लिए आट्र्स, कॉमर्स और साइंस, तीनों स्ट्रीम्स के लिए सभी विषयों की किताबें उपलब्ध हैं।कैसे करें डाउनलोडसबसे पहले गूगल पर जाएं और फिर लिखें NCERT books, NCERT Exemplar and CBSE Books for Classes 1 to 12 या फिर CBSE Books for Class 1 to 12 All Subject - Download free ...... पर क्लीक करने पर फोल्डर खुल जाएगा। विद्यार्थियों को जिस कक्षा की किताबें चाहिए, उसके फोल्डर पर डबल क्लिक करें। विषयों की लिस्ट खुल जाएगी। जिस विषय की किताब चाहिए, उसके फोल्डर पर डबल क्लिक करें। नई फाइल खुलेगी, जिसे आप डाउनलोड कर सकते हैं।--
- नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को देश के सभी कृषि विश्वविद्यालयों को अपने छात्रों के लिये ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने को कहा। मंत्री ने भारत कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के किसानों और खेती-बाड़ी पर कोरोना वायरस के प्रभाव को कम करने को लेकर किये जा रहे कार्यों के आकलन के दौरान उक्त निर्देश दिया।आईसीएआर के शिक्षा प्रभाग द्वारा सभी कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को परामर्श जारी कर ऑनलाइन मोड में कक्षाएं लेने के लिए कहा गया है। अधिकांश विश्वविद्यालयों द्वारा पहले से ही विभिन्न ऑनलाइन मैकेनिज्म के माध्यम से कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं।एक आधिकारिक बयान के अनुसार आईसीएआर ने कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के जरिये करीब 2 करोड़ किसानों को कोरोना वायरस बीमारी से निपटने में मदद की है। श्री तोमर ने कहा कि सभी कृषि विश्वविद्यालयों में ऑनलाइन कक्षाएं होनी चाहिए। आईसीएआर के महानिदेशक त्रिलोचन महापात्र ने सूचित किया कि किसानों को बुवाई, कटाई, भंडारण और उपज के विपणन के दौरान मास्क पहनने और सामाजिक दूरी बनाये रखने की जरूरत के बारे में परामश दिये गये हैं। किसानों को कृषि क्षेत्र के लिये सरकार द्वारा दी जा रही छूट के बारे में भी लगातार जानकारी दी जा रही है। आईसीएआर ने अपने तीन शोध संस्थानों को कोरोना वायरस संक्रमित के परीक्षण के लिये अधिसूचित किया है।आईसीएआर ने अपने अनुसंधान संस्थानों, कृषि विज्ञान केन्द्रों व कृषि विश्वविद्यालयों के देशव्यापी नेटवर्क के माध्यम से समयबद्ध रूप से किए जाने वाले कृषि कार्यों यथा कटाई, फसलोत्तर प्रसंस्करण, अनाज, फलों, सब्जियों, अण्डों, मीट व मत्स्य का भण्डारण एवं मार्केटिंग जैसे कार्य करते समय किसानों एवं अन्य हितधारकों को सामाजिक दूरी बनाए रखने की जरूरत अपनाने, सावधानी बरतने और सुरक्षा उपायों को अपनाने पर सचेत किया है। आईसीएआर ने किसानों के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य-विशिष्ट परामर्श जारी किया, जिसे 15 क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद करके डिजीटल प्लेटफार्म के माध्यम से इसका व्?यापक प्रचार-प्रसार किया और किसानों को लॉकडाउन अवधि के दौरान खेती से जुड़े कार्यों के लिए मिली सरकारी छूट के बारे में जानकारी दी गई।श्री तोमर के निर्देश पर एम-किसान पोर्टल से कृषि विज्ञान केन्द्रों ने राज्यों में 1126 परामर्श जारी कर साढ़े पांच करोड़ किसानों तक पहुंच बनाई। आईसीएआर द्वारा अपने तीन अनुसंधान संस्थानों- भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर, उत्तर प्रदेश; राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान, भोपाल, मध्यप्रदेश; तथा राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र, हिसार, हरियाणा को कोविड-19 की जांच करने के लिए अधिसूचित किया गया है।
- नई दिल्ली। फिट इंडिया द्वारा शुरू किए गए फिट इंडिया एक्टिव डे कार्यक्रम के तहत आयोजित लाइव फिटनेस सत्रों को मिली व्यापक सफलता के बाद भारत सरकार का प्रमुख फिटनेस अभियान फिर से फिटनेस सत्रों की एक नई श्रृंखला शुरू करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस बार ये सत्र देश भर के स्कूली बच्चों के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की साझेदारी में आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम के दौरान आयुष मंत्रालय के स्वस्थ रहने संबंधी दिशा-निर्देशों को विद्यार्थियों के साथ साझा किया जाएगा।अपनी तरह की इस अनूठी पहल के बारे में चर्चा करते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा, सीबीएसई ने शुरुआत से ही फिट इंडिया अभियान का व्यापक समर्थन किया है। सीबीएसई के 13868 स्कूल अतीत में कई फिट इंडिया कार्यक्रमों में हिस्सा ले चुके हैं और सीबीएसई के 11682 स्कूल पहले ही फिट इंडिया फ्लैग प्राप्त कर चुके हैं। मुझे विश्वास है कि अब इस अनूठे प्रयास की बदौलत देश भर के विद्यार्थी न केवल लॉकडाउन के दौरान अपना समय सही जगह व्यतीत कर सकेंगे, बल्कि फिटनेस बनाए रखने और स्वस्थ जीवन जीने के लिए भी प्रेरित होंगे, जो हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विजन है।केंद्रीय युवा कार्य एवं खेल मंत्री किरेन रिजिजू का मानना है कि ऑनलाइन सत्र समय की मांग हैं। उन्होंने कहा, इस समय घर पर रह रहे बच्चों का शारीरिक व्यायाम अत्यंत सीमित हो गया है। फिटनेस विशेषज्ञों की सहभागिता वाले ये सत्र यह सुनिश्चित करेंगे कि बच्चे घर पर भी फिटनेस का अभ्यास करें। इस समय यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि सभी लोग, विशेषकर बच्चे स्वस्थ बने रहें और उनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी काफी मजबूत हो। इन सत्रों के दौरान फिटनेस से संबंधित विषयों के अलावा रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कुछ आसान उपायों पर अमल करने संबंधी आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के बारे में भी चर्चा की जाएगी। मुझे यकीन है कि इन अत्यंत उपयोगी सत्रों से बच्चे और उनके माता-पिता भी काफी लाभान्वित होंगे।कोविड-19 के कारण किए गए देशव्यापी लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाने और सभी नागरिकों से रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने एवं स्वस्थ रहने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा किए गए आह्वान को ध्यान में रखकर फिट इंडिया और सीबीएसई ने सभी स्कूली बच्चों की फिटनेस सुनिश्चित करने के लिए यह अनूठी पहल की है। फिटनेस से संबंधित विषयों पर सत्रों के आयोजन के अलावा इस अप्रत्याशित समय के दौरान रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और स्वस्थ रहने के तरीकों पर आयुष मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत किए गए दिशा-निर्देश भी विद्यार्थियों के साथ साझा किए जाएंगे।लाइव फिटनेस सत्र 15 अप्रैल से सुबह 9.30 बजे शुरू होंगे। विद्यार्थी बड़ी आसानी से फिट इंडिया अभियान और सीबीएसई के फेसबुक एवं इंस्टाग्राम हैंडल के जरिए इन लाइव सत्रों से लाभान्वित हो सकते हैं। सभी सत्र यूट्यूब पर भी उपलब्ध होंगे, ताकि छात्र अपनी सुविधा के अनुसार इन्हें देखकर लाभान्वित हो सकें। लाइव सत्र बच्चों की फिटनेस के सभी पहलुओं को कवर करेंगे जिनमें दैनिक व्यायाम से लेकर योग तक और पोषण से लेकर भावनात्मक दृढ़ता तक सभी शामिल हैं। प्रतिष्ठित फिटनेस विशेषज्ञ जैसे कि आलिया इमरान, पोषण विशेषज्ञ पूजा मखीजा, भावनात्मक वेलनेस विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र नागपाल, योग प्रोफेशनल हीना भीमानी और कई अन्य प्रोफेशनल भी इन सत्रों का अहम हिस्सा होंगे।लाइव स्ट्रीमिंग सीबीएसई के सोशल मीडिया हैंडल, गोकी एप और शिल्पा शेट्टी एप पर भी उपलब्ध होगी।
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नई दिल्ली। कोविड-19 की वजह से किए गए लॉकडाउन के मद्देनजर जारी उपायों के क्रम में भारतीय रेल की सभी यात्री रेल सेवाओं जिनमें प्रीमियम रेलगाडिय़ां, मेल / एक्सप्रेस रेलगाडिय़ां, यात्री रेलगाडिय़ां, उपनगरीय रेल सेवाएं, कोलकाता मेट्रो रेल, कोंकण रेलवे आदि शामिल हैं , को 3 मई 2020 तक रद्द रखने का निर्णय लिया गया है। हालांकि देश के विभिन्न हिस्सों में आवश्यक सामानों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए माल और पार्सल गाडिय़ों का परिचालन जारी रहेगा।
अगले आदेश तक किसी प्रकार के टिकटों की कोई बुकिंग नहीं की जाएगी। हालांकि, पहले बुक की जा चुकी टिकटों को रद्द करने की ऑनलाइन सुविधा जारी रहेगी।
यूटीएस और पीआरएस सहित सभी टिकट बुकिंग काउंटरों की सेवाएं अगले आदेश तक निलंबित रहेंगी। रद्द की गई रेलगाडिय़ों के लिए पहले से आरक्षित टिकटों का पूरा रिफंड मिलेगा।
जहां तक 3 मई 2020 तक रद्द की गई ट्रेनों का सवाल है, रेलवे द्वारा रिफंड अपने आप ग्राहकों को ऑनलाइन भेज दिए जाएंगे, जबकि जिन लोगों ने काउंटरों से बुकिंग की है वे अपना रिफंड 31 जुलाई, 2020 तक ले सकते हैं।
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- नई दिल्ली। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज सुबह एक वीडियो संदेश जारी कर देशवासियों की हौसला अफजाई की है। अपने संदेश में उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि वे कोरोना वायरस से निपटने में जुटे योद्धाओं का सहयोग करें क्योंकि इस लड़ाई में एकजुट खड़े रहने से बढ़कर कोई देशभक्ति नहीं है।सोनिया गांधी ने अपने संदेश में कहा कि मेरे प्यारे देशवासियों आप सभी को नमस्कार, मुझे उम्मीद है कि इस कोरोना महामारी संकट के दौरान आप सब अपने-अपने घरों में सुरक्षित होंगे। सबसे पहले मैं इस संकट के समय में भी शांति, धैर्य और संयम बनाए रखने के लिए सभी देशवासियों को दिल से धन्यवाद करती हूं।कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा कि अपने-अपने घरों में रहें। समय-समय पर अपने हाथ धोते रहें। बहुत ज्यादा जरूरी होने पर ही घर के बाहर कदम रखें और वो भी मास्क, चुन्नी या गमछा लगाकर। आप सभी इस लड़ाई में सहयोग करें।कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हम इस मुश्किल समय में आपके परिवारजनों पति, पत्नी, बच्चों, माता-पिता के त्याग और बलिदान को कभी भूल नहीं सकते। सोनिया ने कहा कि जोखिम होने के बावजूद भी आपके सहयोग और समर्पण से ही इस लड़ाई को लड़ पा रहे हैं। इनको धन्यवाद देने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है।उन्होंने आगे कहा कि हमारे स्वास्थ्य कर्मचारी और समाजसेवी संगठन व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों की कमी होने के बावजूद इलाज कर रहे हैं। पुलिस और जवान पहरा देकर नियमों का पालन करवा रहे हैं। सफाई कर्मचारी इस मुश्किल समय में भी संसाधनों की कमी के बाद भी संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए भी लगातार सफाई बनाए हुए हैं। सरकारी अफसर 24 घंटे इस वायरस पर नियंत्रण पाने और लोगों तक सुविधाएं पहुंचाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन आपके हमारे सहयोग के बिना इनकी लड़ाई कमजोर पड़ सकती है और हमें ऐसा नहीं होने देना है। हमें इन सभी को सम्मान देना है।उन्होंने कहा, कई जगहों पर चिकित्सकों के साथ गलत व्यवहार की खबरें आ रही है, ये बहुत गलत है क्योंकि हमारी सभ्यता और संस्कृति ऐसी नहीं है। हमें इन सबका सहयोग और समर्थन करना चाहिए। इस संकट में कोई लोगों को खाना खिला रहा है, कोई मास्क लगा रहा है, कोई सूखा राशन पहुंचा रहा है। हर हिन्दुस्तानी कोरोना की इस लड़ाई को जीतने में एकजुट होकर अपना जिम्मेदारी निभा रहा है। आप सभी लोग धन्यवाद के पात्र है। आज जब देश इतनी बड़ी लड़ाई लड़ा रहा है, तो कांग्रेस का हर एक कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आप सभी की मदद करने के लिए तैयार है। श्रीमती सोनिया गांधी ने लोगों से अपील की, आप किसी भी मदद या जरूरत के लिए राज्यों या हमारे केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से सम्पर्क कर सकते हैं। कांग्रेस का कार्यकर्ता आपकी हर संभव मदद करेगा। मैं आपको भरोसा दिलाती हूं कि कांग्रेस चाहे सरकार में हो या विपक्ष में हम हर जगह इस लड़ाई में आपके साथ खड़े हंै। मुझे विश्वास है कि हम मजबूत मनोबल से इस संकट से जल्दी ही बाहर निकल जाएंगे। आप सभी घरों में रहे, सुरक्षित रहें। धन्यवाद, जयहिन्द।
- नई दिल्ली। आज भारत सरकार द्वारा कोविड-19 से लडऩे के लिए देशभर में किये गए लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज प्रधानमंत्री द्वारा कोविड-19 को फैलने से रोकने व इसको समाप्त करने के लिए देशभर में किये गए लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाने का निर्णय भारत और भारतवासियों के जीवन और उनकी रक्षा के लिए लिया गया निर्णय है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।कोविड-19 को फैलने से रोकने व इसको समाप्त करने के लिए भारत सरकार द्वारा लिए गए सभी निर्णयों की प्रशंसा करते हुए श्री शाह ने कहा, आज जहां पूरा विश्व कोरोना वैश्विक महामारी से जूझ रहा है वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की जनता ने इससे लडऩे में एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। सरकार द्वारा समय पर लिए गए सभी निर्णय और जनता की उसमें सहभागिता इसकी परिचायक हैं।इस महामारी से निपटने और नागरिकों की हर ज़रूरत को पूरा करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण बताते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सभी प्रदेश सरकारें जिस प्रकार केंद्र सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहीं हैं, वह सचमुच प्रशंसनीय है। अब हमें इस समन्वय को और अधिक प्रगाढ़ करना है जिससे सभी नागरिक लॉकडाउन का अच्छे से पालन करें और किसी भी नागरिक को जरुरत की चीज़ों की समस्या भी ना हो।कोविड-19 से लड़ रहे प्रथम पंक्ति में खड़े स्वास्थ्य और सुरक्षाकर्मियों को नमन करते हुए श्री शाह ने कहा, इस लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हमारे डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी, सफाई कर्मचारी, पुलिसबल व सभी सुरक्षाकर्मियों का योगदान दिल को छू लेने वाला है। इस विषम परिस्थिति में आपका यह साहस और समझदारी हर भारतवासी को प्रेरित करती है। सभी लोग दिशानिर्देशों का पालन कर इनका सहयोग करें।इस संकट के समय में देश के नागरिकों को आश्वस्त करते हुए और एक दूसरे की सहायता करने के लिए प्रेरित करते हुए श्री शाह ने कहा कि देश के गृह मंत्री के नाते मैं जनता को पुन: आश्वस्त करता हूं कि देश में अन्न, दवाई व अन्य रोजमर्रा की चीज़ों का पर्याप्त भण्डार है, इसलिए किसी भी नागरिक को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। साथ ही संपन्न लोगों से निवेदन करता हूं कि आप आगे आकर आसपास रहने वाले गरीबों की सहायता करें।----
- नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने राज्यों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि लॉकडाउन के दौरान आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी और मूल्य वृद्धि न हो। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान ने आज राज्यों/ केंद्रशासित प्रदेशों के खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रियों के साथ एक वीडियो कांफ्रेंस के जरिये एक बैठक की। उन्होंने निर्देश दिया कि स्थानीय बाजारों में उचित मूल्य पर आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध हों और इसे सुनिश्चित करने के लिए सूक्ष्म स्तर पर योजना बनाने की पहल करनी चाहिए। श्री पासवान ने कहा कि राज्यों को इसका अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अधिकार दिए गए हैं।श्री पासवान ने यह भी निर्देश दिया कि रबी विपणन सत्र (आरएमएस) 2020-21 के लिए गेहूं की खरीद 15 अप्रैल, 2020 से शुरू करने के लिए सभी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दिशा-निर्देशों और उनके द्वारा निर्धारित उदाहरण के बाद श्री पासवान ने रेखांकित किया कि खरीद के दौरान सामाजिक दूर बनाए रखने के मानदंडों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। मंत्री ने कहा कि सभी खरीद केंद्रों, गोदामों, कार्यालयों आदि द्वारा कर्मचारियों, श्रमिकों और मजदूरों के लिए एक ड्यूटी रोस्टर तैयार किया जाना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि श्रमिकों की कमी न होने पाए।श्री पासवान ने कहा कि सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त खाद्यान्न स्टॉक उपलब्ध कराया गया है। श्री पासवान ने कहा कि सभी पीडीएस लाभार्थियों को प्रति कार्ड/ परिवार के साथ अगले तीन महीनों के लिए मुफ्त 1 किलो दाल उपलब्ध कराई जाएगी जिसके लिए नाफेड को नोडल एजेंसी के रूप में प्रत्यायोजित किया गया है। श्री पासवान ने राज्यों से खाद्यान्न और दालों के वितरण की गति में तेजी लाने का आग्रह किया। मंत्री ने याद दिलाया कि राज्य/ केंद्रशासित प्रदेश अपनी सुविधा के अनुसार अगले छह महीनों के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत राशन के आवंटन का विकल्प चुन सकते हैं। भारत सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को तीन महीने के उधारी पर राशन लेने की अनुमति दी है। श्री पासवान ने कहा कि यदि लाभार्थी परिवार का कोई व्यक्ति छूट जाता है तो उसे तत्काल जोड़ा जाना चाहिए ताकि कोई भी एनएफएसए योजना के तहत लाभ से वंचित न रहे।मंत्री ने कहा कि ओपन मार्केट सेल स्कीम (ओएमएसएस) के तहत चावल की खुदरा कीमत 22 रुपये और गेहूं 21 रुपये प्रति किलोग्राम तय की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने लॉकडाउन के दौरान समाज कल्याण में लगी स्वयंसेवी एजेंसियों और निजी संस्थानों को सीधे एफसीआई डिपो से खाद्यान्न उठाने की भी अनुमति दी है। श्री पासवान ने राज्य सरकारों से कहा कि वे अपने यहां गेहूं के आटे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मिलरों के साथ तालमेल बिठाएं। उन्होंने कहा कि उचित मूल्य की दुकानों और पीडीएस आउटलेट्स पर खाद्यान्न वितरण के दौरान सामाजिक दूरी के सभी मानदंडों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।
- नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने आज विश्वविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थाओं का आह्वान किया कि वे बंदी के दौरान शिक्षा सत्र को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए तकनीक का भरपूर उपयोग करें, विद्यार्थियों से संवाद करने के लिए, साझे अध्ययन अध्यापन तथा स्वाध्याय को बढ़ावा देने के लिए ऑनलाइन शिक्षण टेक्नोलॉजी की क्षमताओं का भरपूर लाभ उठाएं।उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के निदेशक तथा माखनलाल चतुर्वेदी विश्विद्यालय सहित दिल्ली, पॉन्डिचेरी, हैदराबाद व पंजाब विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए, बंदी के दौरान शिक्षा सत्र तथा ऑनलाइन अध्यापन के विषय पर चर्चा की। उपराष्ट्रपति भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के अध्यक्ष हैं तथा तीन केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति हैं।उपराष्ट्रपति ने कहा कि सामान्य स्थिति बहाल होने में समय लग सकता है। वे ऐसी स्थिति में शिक्षा सत्र को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए विश्वविद्यालयों द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में जानकारी ले रहे थे। उन्होंने अपेक्षा की कि बदलती हुई स्थिति के अनुसार, टेक्नोलॉजी के सम्यक प्रयोग से अध्ययन और अध्यापन कार्य को सुचारू रूप से निर्बाध रखा जाये और सभी विद्यार्थियों के साथ संवाद स्थापित किया जाय।उपराष्ट्रपति ने कहा कि वस्तुत: इस चुनौती ने भी भविष्य के लिए नए अवसर प्रदान किए हैं जब ऑनलाइन शिक्षा, पारंपरिक शिक्षा पद्धति की संपूरक बन जाएगी। ये चुनौती हमें नए समाधान खोजने के लिए प्रेरित कर रही है। उन्होंने कहा कि इस आपदा के बाद भी शिक्षण में टेक्नोलॉजी आधारित प्रणाली को सामान्य रूप से भी प्रयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालयों द्वारा अध्ययन और अध्यापन को निर्बाध रखने के लिए किए गए प्रयासों पर संतोष व्यक्त किया। उपराष्ट्रपति ने विश्वविद्यालयों तथा शिक्षण संस्थानों से कहा कि से छात्रावासों में रहने वाले छात्रों के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करें। वे सरकार एवम् स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा दिए गए सोशल डिस्टेंसिंग जैसे निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।श्री नायडू ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि बंदी के दौरान वे प्रकृति के साथ कुछ समय बिताएं, कुछ व्यायाम करते रहें, आरामतलब जीवन शैली को त्याग करें और स्वस्थ भोजन शैली अपनाएं। श्री नायडू ने विश्वविद्यालयों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों को समय का सदुपयोग करने और विश्विद्यालय द्वारा उपलब्ध कराई जा रही ई- पाठ्यक्रम सामग्री का अध्ययन करने की सलाह दें। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे मोबाइल फोन जैसे उपकरणों पर अधिक समय व्यर्थ न कर, बंदी की इस अवधि में कोई नई भाषा सीखने का प्रयास करें। उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपने क्षेत्र के किसी समाजसेवी संगठन से जुड़ कर समाज सेवा के कार्य भी कर सकते हैं। उन्होंने अपेक्षा की कि विद्यार्थी और सभी नागरिक सरकार द्वारा समय समय पर जारी किए जा रहे निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने सचिव डॉ आई वी सुब्बाराव भी उपस्थित रहे।---
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस महीने की 26 तारीख को आकाशवाणी से मन की बात कार्यक्रम में आम जनता से अपने विचार साझा करेंगे।यह इस कार्यक्रम की 64वीं कड़ी होगी। श्री मोदी ने ट्वीट कर, इस कड़ी के लिए लोगों से विषय सुझाने को कहा है। लोग 1800-11-7800 डायल कर इस कार्यक्रम के लिए अपने विचार रिकॉर्ड करा सकते हैं या नमो ऐप ओपन फोरम अथवा माई गॉव पर भी लिखकर भेज सकते हैं। लोग 1922 डायल कर एसएमएस में प्राप्त लिंक के माध्यम से भी अपने सुझाव दे सकते हैं। विषय के संबंध में विचार और सुझाव इस महीने की 25 तारीख तक दिये जा सकेंगे।---
- नई दिल्ली। वर्तमान में देश कोविड -19 महामारी से जूझ रहा है। यह स्पष्ट है कि अन्य एजेंसियों के साथ सरकार इस महामारी के प्रसार को नियंत्रित करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव को प्रबंधित करने और कम करने के लिए कई उपाय कर रही है। सरकार और सिविल सोसाइटी संगठनों द्वारा उठाए जा रहे विभिन्न कदमों के लिए अधिक संसाधनों की आवश्यकता है, जिसके लिए सभी स्रोतों से योगदान सहायक हो सकता है। इसमें राजकोष पर वेतन का बोझ कम करना भी शामिल है।इसे ध्यान में रखते हुए आयोग ने, मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा और चुनाव आयुक्तों अशोक लवासा और सुशील चंद्रा को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा दिए जाने वाले मूल वेतन में तीस प्रतिशत की स्वैच्छिक कटौती के रूप में योगदान करने का निर्णय लिया है। यह स्वैच्छिक कटौती 1 अप्रैल, 2020 से शुरू होने वाले वर्ष में एक साल की अवधि के लिए होगी।----
- नई दिल्ली। उद्योग एवं वाणिज्य संगठन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने सुझाव दिया है कि विभिन्न क्षेत्रों को उनके इलाके में कोरोना वायरस के संक्रमण की तीव्रता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से धीरे-धीरे खोला जाना चाहिये।संगठन ने कहा कि किसी इलाके में संक्रमण के मामलों की संख्या के आधार पर उसे लाल, पीले या हरे इलाके में वर्गीकृत किया जा सकता है। सीआईआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, ई-वाणिज्य, वाहन तथा रसायन के अलावा कपड़ा एवं परिधान, दवा, खाद्य प्रसंस्करण, खनिज एवं धातु आदि प्रमुख क्षेत्र हैं जिनमें धीरे-धीरे परिचालन शुरू करने की जरूरत है। संगठन ने एक बयान में कहा कि लॉकडाउन हटाने से पहले सभी को पर्याप्त सूचनाएं दी जानी चाहिये तथा एक आर्थिक पैकेज की भी घोषणा की जानी चाहिये।सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, पिछले कुछ दिन के दौरान देश में कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं तथा कई हॉटस्पॉट इलाके सामने आये हैं। ऐसे में उद्योगों को धीरे धीरे खोले जाने की जरूरत है। इसके लिये विभिन्न इलाकों को वहां संक्रमण के मामलों के आधार पर लाल, पीले व हरे तीन इलाकों में वर्गीकृत किया जा सकता है। उन्होंने कहा, इससे भी जटिल मुद्दा है क्या हरे इलाकों में सभी उद्योगों को खोला जा सकता है, पीले इलाकों में किन उद्योगों को खोला जा सकता है और लाल इलाकों में आवश्यक को छोड़ किसी को भी नहीं खोला जा सकता है। जिन्हें भी खोला जाये, यह सुनिश्चित किया जाये कि वहां कामगारों की सुरक्षा के लिये स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, साफ सफाई तथा जांच की उचित व्यवस्था हो। सीआईआई ने इसके लिये थर्मल जांच, आपस में सामाजिक दूरी तथा कारखानों के सेनिटाइजेशन समेत कई सुझाव दिये।--
- नई दिल्ली। लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) नेता चिराग पासवान ने रविवार को एक वीडियो ट्वीट किया जिसमें वे अपने पिता एवं केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की दाढ़ी को ट्रिम करते नजर आ रहे हैं।चिराग ने ट्वीट किया, मुश्किल वक्त, लेकिन लॉकडाउन का भी उजला पक्ष है। पता नहीं था कि यह कौशल भी है। आईये कोविड-19 से लड़ते हैं और सुंदर स्मृतियां भी बनाते हैं। घर पर रहें, सुरक्षित रहें। उनके ट्वीट को 12 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया और 950 से अधिक लोगों ने रिट्वीट किया।---
- नई दिल्ली। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने सफलतापूर्वक एक दोहरी परत वाले खादी मास्क का विकास कर लिया है और उसे बड़ी मात्रा में इन मास्क की आपूर्ति करने के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं।अपनी इस सफलता के साथ, केवीआईसी ने हाल ही में जम्मू और कश्मीर सरकार को 7.5 लाख खादी मास्क की आपूर्ति करने का आदेश प्राप्त किया है जिसमें 5 लाख मास्क जम्मू जिले को, एक लाख चालीस हजार पुलवामा जिले को, एक लाख उधमपुर जिले और 10 हजार कुपवाड़ा जिले को दिए जाएंगे। इन मास्क की आपूर्ति 20 अप्रैल तक इन जिलों के विकास आयुक्तों को की जाएगी। कॉटन के दोबारा इस्तेमाल में लाए जा सकने वाले ये मास्क 7 इंच लंबे और 9 इंच चौड़े होंगे, इनमें तीन सलवटें होंगी और बांधने के लिए कोनों में चार पट्टियां होंगी।केवीआईसी अध्यक्ष वी. के. सक्सेना ने कहा कि केवीआईसी इन मास्क के निर्माण के लिए दो परत वाले खादी कपड़े का खास तौर पर उपयोग कर रहा है क्योंकि ये अंदर की नमी को70 फीसदी बनाए रखने में मदद करता है, और हवा को गुजरने के लिए एक आसान मार्ग प्रदान करता है, जिस कारण से ये सबसे अच्छा, आसानी से उपलब्ध, जेब में आ सकने वाला वैकल्पिक फेस मास्क है।श्री सक्सेना ने कहा, ये मास्क ज्यादा विशेष इसलिए हैं क्योंकि ये हाथ से बुने हुए खादी के कपड़े से बने हैं जो कि सांस लेने योग्य होते हैं, आसानी से उपयोग किए जा सकते हैं और धोने योग्य व बायोडिग्रेडेबल होते हैं। वर्तमान में जम्मू के पास नगरोटा में खादी सिलाई केंद्र को एक मास्क सिलाई केंद्र में बदल दिया गया है, जो प्रति दिन 10 हजार मास्क का उत्पादन कर रहा है, वहीं शेष ऑर्डर श्रीनगर में या आसपास के विभिन्न स्वयं सहायता समूहों और खादी संस्थानों में बांटे जा रहे हैं।एक मीटर खादी के कपड़े में 10 डबल लेयर वाले मास्क बनाए जाएंगे। 7.5 लाख मास्क बनाने के लिए लगभग 75 हजार मीटर खादी कपड़े का उपयोग किया जाएगा। इससे खादी कारीगरों के लिए आजीविका के अवसरों में और वृद्धि होगी। चूंकि जम्मू-कश्मीर खादी संस्थान केवल ऊनी कपड़े का उत्पादन कर रहे हैं, इसलिए हरियाणा और यूपी के खादी संस्थानों से सूती कपड़े की खरीद की जा रही है और जिला अधिकारियों से विशेष अनुमति लेकर उन्हें भेजा जा रहा है।इस बीच देश भर में स्थानीय प्रशासन का समर्थन करने के लिए केवीआईसी अध्यक्ष द्वारा सभी खादी संस्थानों को अपील जारी की गई है कि वे कम से कम 500 मास्क अपने संबंधित जिलों के जिला कलेक्टरों को उपयोग और आगे वितरण के लिए मुफ्त में दें। केवीआईसी में 2400 सक्रिय खादी संस्थान हैं और इस कदम से देश भर में 12 लाख मास्क प्रदान किए जाएंगे। अपील के बाद कई खादी संस्थानों ने जिला कलेक्टरों को 500 मास्क प्रदान करने शुरू कर दिए हैं। श्री सक्सेना ने कहा, कोरोना महामारी से लडऩे के लिए फेस मास्क सबसे महत्वपूर्ण उपकरण हैं। डीटी फैब्रिक से तैयार ये मास्क भारत का एकमात्र ऐसा समाधान है जो चिकित्सा दिशानिर्देशों का सटीक मिलान करते हुए गुणवत्ता और मांग के पैमाने को पूरा कर सकता है।
- पटियाला। पटियाला में आज सुबह एक बड़ी घटना हुई। एक समाचार एजेंसी एएनआई ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि आज सुबह यहां की सब्जी मंडी में पुलिस पर कुछ लोगों ने हमला बोल दिया और तलवार से एक एएसआई हरजीत सिंह का हाथ काट दिया। हरजीत सिंह को चंडीगढ़ पीजीआई में दाखिल कराया गया है, जहां जाने-माने प्लास्टिक सर्जन उनकी सर्जरी कर रहे हैं।पंजाब के डीजीपी दिनकर गुप्ता ने बताया कि हमले में एएसआई हरजीत सिंह का हाथ कट गया। वहीं कई अन्य पुलिसकर्मी और मंडी बोर्ड के अधिकारी घायल हुए हैं। इन सभी सात आरोपियों को बेलबेरा से गिरफ्तार कर लिया गया है। इनमें से एक आरोपी पुलिस फायरिंग में घायल हो गया था, जिसे अस्पताल ले जाया गया है। पंजाब विशेष मुख्य सचिव के.बी.एस. सिद्धू ने बताया कि सभी आरोपियों को गांव बलबेरा से गिरफ्तार किया गया है। इनमें से एक आरोपी पुलिस फायरिंग में घायल हो गया था जिसे अस्पताल ले जाया गया। ये ऑपरेशन आईजी पटियाला जोन जतिंदर सिंह औलख की देख-रेख में हुआ।मिली जानकारी के अनुसार आज सुबह आरोपी गाड़ी से सब्जी मंडी पहुंचे। इन लोगों से जब कफ्र्यू पास के बारे में पूछा गया तो उन्होंने पुलिस पर हमला कर दिया।
- नई दिल्ली। डॉक्टरों एवं मेडिकल स्टाफ के उत्पीडऩ की घटनाओं को देखते हुए, केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों तथा संबंधित पुलिस अधिकारियों को कोविड-19 से लड़ रहे डॉक्टरों एवं मेडिकल स्टाफ को अस्पतालों एवं ऐसे स्थानों, जहां रोगियों को कोविड-19 पोजिटिव पाया गया है या जहां संदिग्ध मामलों को क्वरांटाइन किया गया है, में उन्हें आवश्यक पुलिस सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है।रोग के लक्षण का पता लगाने के लिए लोगों की स्क्रीनिंग करने के लिए विभिन्न स्थानों पर जाने वाले डॉक्टरों एवं मेडिकल स्टाफ को आवश्यक पुलिस सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश भी दिया गया है।----
- शाजापुर। मौजूदा वक्त में पूरा देश कोरोना संक्रमण की रोकथाम की जद्दोजहद में लगा है और इसके चलते देशभर में लॉकडाउन है। जबलपुर शहर के ओमती पुलिस थाना में पदस्थ आरक्षक आनंद पाण्डे ने ऐसी स्थिति में अपनी ड्यूटी निभाने एक राज्य से दूसरे राज्य की सीमा पैदल ही लांघ कर कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश की है।उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के भौती भैलामऊ गांव निवासी आनंद पाण्डे 20 फरवरी को अपनी पत्नी के इलाज के लिये अवकाश पर गांव गए थे। अवकाश समाप्त हुआ, तो लॉकडाउन उनके वापस लौटने की राह में बाधा बन गया। इसके बावजूद आरक्षक श्री पाण्डे ने हार नहीं मानते हुए ड्यूटी को तवज्जो दी और आखिरकार 30 मार्च को वो कानपुर से जबलपुर के बीच की करीब साढ़े चार सौ किलोमीटर की दूरी को पैदल ही पार करने निकल पड़े। रास्ते में जहां कहीं लिफ्ट मिलती, वे बैठ जाते और फिर उतरकर पैदल चल पड़ते।मौजूदा दौर में सुविधाभोगी हो चुका इंसान इतनी लम्बी दूरी पैदल तय करने की सोच मात्र से सिहर जाता है। ऐसे में आरक्षक आनंद की हिम्मत, हौसला और ड्यूटी के प्रति कर्तव्यनिष्ठा काबिले तारीफ है। लिफ्ट लेकर और पैदल चलकर कानपुर से जबलपुर पहुंचने में आनंद को तीन दिन लगे। वे एक अप्रैल की रात जबलपुर पहुंचे और 2 अप्रैल को ओमती पुलिस थाना पहुंचकर अपनी आमद दर्ज कराई। पुलिस निरीक्षक एस.पी.एस. बघेल सहित ओमती थाना के पूरे स्टाफ ने आरक्षक आनंद के जज्बे की सराहना करते हुए उनका स्वागत किया।आरक्षक आनंद पाण्डे अब लॉकडाउन और कफ्र्यू की स्थिति से उत्पन्न हालात में जबलपुर शहर के घंटाघर चौक के ड्यूटी प्वाइंट में पूरी ईमानदारी से ड्यूटी कर रहे हैं।---
- लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अपने निवास स्थान से शहरी क्षेत्रों में दैनिक रूप से काम कर अपना जीविकोपार्जन करने वाले विभिन्न श्रेणी के लाभार्थियों को सहायता राशि का अन्तरण किया। इस दौरान उन्होंने वाराणसी, लखनऊ, झांसी, कानपुर और गोरखपुर के लाभार्थियों से संवाद भी किया।कार्यक्रम के दौरान 2 लाख 19 हजार 318 लाभार्थियों के खाते में 1-1 हजार रुपए अन्तरित किए गए। योजना के तहत अब तक 4 लाख 81 हजार 755 लाभार्थियों के खाते में धनराशि डाली जा चुकी है। इस योजना से पटरी दुकानदार, दिहाड़ी मजदूर, रेलवे के कुली, रिक्शा, आटो रिक्शा, ई-रिक्शा चालक, मण्डी में कार्यरत पल्लेदार, कैन्टोनमेंट क्षेत्र के दिहाड़ी मजदूर लाभान्वित किए जा रहे हैं।---



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