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नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में नितिन नबीन ने आज मंगलवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाला। वह इस पद को संभालने वाले सबसे कम उम्र के नेता बन गए। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी समेत कई नेताओं ने उन्हें बधाई दी।
कुमारस्वामी ने एक्स पोस्ट में लिखा, “नितिन नबीन को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभालने पर हार्दिक बधाई। उनकी संगठनात्मक क्षमता, राजनीतिक अनुभव और सार्वजनिक जीवन के प्रति प्रतिबद्धता एनडीए गठबंधन को मजबूत करेगी और राष्ट्रीय राजनीति में सकारात्मक योगदान देगी।”उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दमदार नेतृत्व में एनडीए एक मजबूत और स्थिर गठबंधन के तौर पर उभरा है, जो विकास, सुशासन और लोगों की आकांक्षाओं के लिए समर्पित है। नितिन नबीन एनडीए गठबंधन को और मजबूत करने, सहयोगियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने और विकसित भारत के लिए हमारे सामूहिक विजन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।”भाजपा सांसद रवि किशन ने लिखा, “भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित होने पर नितिन नबीन को हार्दिक बधाई एवं सफल कार्यकाल हेतु अनंत शुभकामनाएं। यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में आपका यह कार्यकाल पार्टी को नई गति प्रदान करते हुए राष्ट्रसेवा के संकल्प को और अधिक मजबूत करेगा। आपका कार्यकाल सफल, प्रेरक और स्मरणीय रहे, यही मंगलकामना है।”यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने लिखा, “भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित होने पर नितिन नबीन को हार्दिक बधाई एवं सफल कार्यकाल हेतु अनंत शुभकामनाएं। मुझे पूरा भरोसा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में आपका यह कार्यकाल पार्टी को नई गति प्रदान करते हुए राष्ट्रसेवा के संकल्प को और अधिक मजबूत करेगा। आपका कार्यकाल सफल, प्रेरक और स्मरणीय रहे- यही मंगलकामना है।”भाजपा बिहार के प्रदेश मंत्री संतोष रंजन राय ने लिखा, “एक निष्ठावान कार्यकर्ता का राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचना संगठन की आंतरिक लोकतंत्र की जीत है। नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर हार्दिक बधाई। आपके साथ का अनुभव और आपका संघर्ष हमें सदैव आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा। उज्ज्वल कार्यकाल हेतु अनंत शुभकामनाएं। - नयी दिल्ली. नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने सोमवार को 'विकसित भारत' के निर्माण में देश के युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि इस यात्रा में वे इसके "अभिनेता, निर्माता, निर्देशक और कई बार दर्शक भी" होंगे। यहां राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) कैडेट की एक सभा को संबोधित करते हुए, त्रिपाठी ने कड़ी मेहनत और लगन के महत्व पर जोर देने के लिए टेनिस के महान खिलाड़ी रोजर फेडरर का उदाहरण दिया और साहस के महत्व को समझाने के लिए 1971 के युद्ध में सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के शौर्य और बलिदान को याद किया। नौसेना प्रमुख ने इससे पहले दिन में दिल्ली छावनी में एनसीसी के गणतंत्र दिवस शिविर का दौरा किया। अपने संबोधन में उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान नागरिक सुरक्षा प्रयासों में लगभग एनसीसी के 72,000 कैडेटों द्वारा किए गए अनुकरणीय योगदान पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कोर द्वारा अपनाए गए नए और अभिनव प्रशिक्षण उपायों की सराहना की, जिनमें ड्रोन संचालन और साइबर जागरूकता से संबंधित पहल शामिल हैं। एडमिरल ने युवाओं में देशभक्ति, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी के मूल्यों को विकसित करने में एनसीसी की अहम भूमिका को भी रेखांकित किया। नौसेना प्रमुख ने युवाओं से आत्म-अनुशासन और टीम वर्क के मूल्यों को आत्मसात करने का आग्रह किया और जोर देकर कहा कि केवल "व्यक्तिगत उत्कृष्टता" से कोई संगठन या राष्ट्र विकसित नहीं हो सकता। एडमिरल ने कहा, "यदि आप इस टीम भावना और युवा ऊर्जा को एकता और उद्देश्य के साथ जोड़ सकते हैं, तो यह 2047 तक विकसित भारत बनने के हमारे राष्ट्र के लक्ष्य में एक प्रेरक शक्ति बन जाएगी।" उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी युवा वर्ग की है, इसलिए 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में उन्हें आगे आना होगा। उस समय तक उनमें से अधिकांश की उम्र 37-40 साल होगी। नौसेना प्रमुख ने कहा, "इसलिए, अगर मैं 'विकसित भारत' के निर्माण को एक फिल्म के निर्माण के समान देखूं तो आप इस यात्रा में इसके अभिनेता, अभिनेत्री, निर्माता, निर्देशक और कई बार इसके दर्शक भी होंगे।" उन्होंने कहा कि आपको व्यक्तिगत लाभों से ऊपर उठना होगा। उन्होंने यह भी कहा, "इसमें मेरा क्या फायदा है?" वाली मानसिकता को अपने शब्दकोश से बाहर कर देना चाहिए। अपने संबोधन के दौरान एडमिरल त्रिपाठी ने एनसीसी कैडेट के रूप में अपने दिनों को याद किया और प्रतिष्ठित गणतंत्र दिवस शिविर के लिए चैयनित होने पर कैडेटों को बधाई दी। उन्होंने कैडेटों के शानदार टर्नआउट सटीक ड्रिल, बैंड प्रदर्शन और सांस्कृतिक प्रस्तुति की सराहना की । उन्होंने पुनीत सागर अभियान जैसी पहलों, अखिल भारतीय नौसैनिक शिविर जैसे विशेष प्रशिक्षण शिविरों, सीमैनशिप, नौकायन और याचिंग के व्यावहारिक अनुभव, जहाजों से जुड़ाव, विदेशी तैनाती और भारतीय नौसेना के जहाजों, पनडुब्बियों एवं तटों के शैक्षिक दौरों के माध्यम से एनसीसी कैडेटों के प्रशिक्षण को समर्थन देने की भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता दोहराई। त्रिपाठी ने कैडेटों से एकता, अनुशासन और ईमानदारी के एनसीसी लोकाचार को बनाए रखने तथा राष्ट्र को समर्पित जीवन जीने का आग्रह किया।
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नयी दिल्ली । नितिन नवीन सोमवार को निर्विरोध भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए। वह इस पद पर आसीन होने वाले अब तक के सबसे युवा नेता हैं। बिहार के पांच बार के विधायक नवीन, पार्टी के शीर्ष पद के लिए एकमात्र उम्मीदवार थे, जिनके समर्थन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अन्य वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने नामांकन पत्र दाखिल किए। मंगलवार को नवीन को औपचारिक रूप से भाजपा अध्यक्ष घोषित किया जाएगा। वह जेपी नड्डा का स्थान लेंगे, जो 2020 से लंबे समय से अध्यक्ष पद पर हैं। अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए निर्वाचन अधिकारी के. लक्ष्मण ने एक बयान में कहा, “मैं यह घोषणा करता हूं कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए केवल एक नाम, श्री नितिन नवीन का नाम, प्रस्तावित किया गया है।” एक बयान में उन्होंने कहा कि नवीन को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के पक्ष में नामांकन पत्रों के 37 सेट दाखिल किए गए और सभी नामांकन पत्र वैध पाए गए। प्रधानमंत्री मोदी के अलावा पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी सहित कई वरिष्ठ नेता भी प्रस्ताव रखने वालों में शामिल हैं। नामांकन पत्रों के 37 सेटों में से 36 पार्टी की राज्य इकाइयों द्वारा दाखिल किए गए थे और एक सेट भाजपा संसदीय दल द्वारा प्रस्तुत किया गया था। इस अवसर पर निवर्तमान अध्यक्ष नड्डा, वरिष्ठ मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण, किरेन रीजीजू, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नायब सैनी, प्रमोद सावंत, पेमा खांडू और पुष्कर सिंह धामी उपस्थित थे। लक्ष्मण ने कहा कि कार्यक्रम के अनुसार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के नामांकन की प्रक्रिया सोमवार को अपराह्न दो बजे से चार बजे के बीच पूरी हो गई। उन्होंने एक बयान में कहा, “राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नितिन नवीन के पक्ष में कुल 37 नामांकन पत्र प्राप्त हुए। जांच करने पर सभी नामांकन पत्र निर्धारित प्रारूप में विधिवत भरे हुए और वैध पाए गए।” उन्होंने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की चुनाव प्रक्रिया 36 राज्यों में से 30 राज्यों के अध्यक्षों के चुनाव के बाद शुरू की गई, जो कि न्यूनतम 50 प्रतिशत राज्यों का चुनाव पूरा करने के लिए आवश्यक संख्या से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रमों की अधिसूचना जारी कर 16 जनवरी को मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई थी।
भारतीय जनता पार्टी की स्थापना 1980 में हुई थी और उसी वर्ष नवीन का जन्म भी हुआ था। नवीन ने 2006 में अपने पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के निधन के बाद राजनीति में कदम रखा, जो भाजपा विधायक थे। बिहार सरकार में कानून एवं न्याय, शहरी विकास एवं आवास मंत्री रह चुके नवीन को दिसंबर में भाजपा का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। - नयी दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान को अपने गृह राज्य गुजरात से संबंधित एक नक्काशीदार लकड़ी का झूला और एक पश्मीना शॉल भेंट किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। मोदी ने यहां लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास पर अल नाह्यान और उनकी माता शेख फातिमा बिन्त मुबारक अल कतबी का स्वागत किया। मोदी और अल नाह्यान प्रधानमंत्री आवास में गेंदे के फूलों से सजी दीवार के सामने रखे गए पारंपरिक और हाथ से नक्काशी किए गए लकड़ी के झूले पर बैठे। नक्काशीदार लकड़ी का झूला अधिकतर गुजराती परिवारों के घरों का एक अभिन्न अंग है।अधिकारियों ने कहा, ‘‘गुजराती संस्कृति में, झूला एकजुटता, संवाद और पीढ़ियों के बीच बंधन का प्रतीक है। यह उपहार यूएई द्वारा 2026 को ‘परिवार वर्ष' घोषित करने के साथ भी गहराई से मेल खाता है।'' मोदी ने अल नाह्यान को तेलंगाना में बने एक अलंकृत चांदी के डिब्बे में कश्मीर की पश्मीना शॉल भेंट की, जो भारत की समृद्ध हथकरघा और हस्तशिल्प परंपरा का प्रतीक है। मोदी ने अल नाह्यान की मां को भी चांदी के डिब्बे में एक पश्मीना शॉल भेंट की। अधिकारियों ने बताया, ‘‘अल नाह्यान की मां को चांदी के डिब्बे में कश्मीरी केसर भी भेंट किया गया। कश्मीर घाटी में उगाया जाने वाला केसर अपने गहरे लाल रंग और सुगंध के लिए प्रसिद्ध है।''
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नयी दिल्ली. अंतरिक्ष क्षेत्र का स्टार्टअप गैलेक्सीआई अपनी तरह के पहले उपग्रह को प्रक्षेपित करने की तैयारी में है जो ‘ऑप्टिकल' और ‘रडार सेंसर' से प्राप्त आंकड़ों को एकीकृत कर पृथ्वी की तस्वीरें तैयार करेगा। इन तस्वीरों का उपयोग रक्षा से लेकर कृषि तक कई क्षेत्रों में किया जा सकेगा।
स्टार्टअप की इस वर्ष की पहली तिमाही में ‘मिशन दृष्टि' नामक बहु-संवेदी पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को प्रक्षेपित करने और 2030 तक इसे 10 उपग्रहों के एक समूह में विस्तारित करने की योजना है। गैलेक्सीआई के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सुयश सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा' से कहा, ‘‘मिशन दृष्टि वैश्विक स्तर पर पहला ऐसा उपग्रह है, जिसमें एक ही प्लेटफॉर्म पर रडार सेंसिंग और ऑप्टिकल इमेजिंग को एकीकृत किया गया है। इसके साथ ही यह भारत का निजी तौर पर विकसित सबसे बड़ा उपग्रह भी है।'' सिंह ने बताया कि गैलेक्सीआई अगले कुछ वर्षों में दो और उपग्रह तैनात करने की योजना बना रहा है और दशक के अंत तक छह-सात अतिरिक्त उपग्रह जोड़कर कुल संख्या 2030 तक 10 करने का लक्ष्य है। इससे बड़े पैमाने पर लगभग तुरंत डेटा उपलब्ध कराया जा सकेगा। जहां मल्टी-स्पेक्ट्रल ऑप्टिकल कैमरा पृथ्वी की तस्वीरें लेता है, वहीं कृत्रिम अपर्चर रडार बादलों के बीच भी अवलोकन संभव बनाता है, जिससे हर मौसम में पृथ्वी की निगरानी हो सकती है। गैलेक्सीआई ने अपनी ‘सिंकफ्यूस्ड ऑप्टोएसएआर' प्रौद्योगिकी को पेटेंट कराया हुआ है जो दोनों सेंसर के डेटा को एकीकृत कर हर मौसम में पृथ्वी की उपयोगी तस्वीरें तैयारी करती है जिनका कई क्षेत्रों में उपयोग किया जाता है। सिंह ने कहा, ‘‘आज स्पष्ट रूप से निरंतर, भरोसेमंद और बहु-खुफिया सूचना की मांग है, जो पर्यावरणीय बाधाओं के बावजूद लगातार काम करती रहे।'' - नागपुर. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को नागपुर में कहा कि युद्ध बहुत जटिल हो गए हैं और अब ये केवल सीमाओं तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि ऊर्जा, व्यापार, शुल्क, आपूर्ति शृंखला, प्रौद्योगिकी और सूचना भी इनके नए आयामों का हिस्सा हैं। यहां सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड में मध्यम क्षमता वाले गोला-बारूद संयंत्र के उद्घाटन समारोह में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब रक्षा उत्पादन केवल सार्वजनिक क्षेत्र तक सीमित था और निजी क्षेत्र की भागीदारी के बारे में किसी ने कभी सोचा भी नहीं था। इस अवसर पर, सिंह ने सोलर समूह द्वारा निर्मित ‘गाइडेड पिनाका रॉकेट' की पहली खेप को आर्मेनिया के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के पास क्षमता और संभावना तो थी, लेकिन उसकी भागीदारी उस स्तर पर नहीं थी जितनी होनी चाहिए थी। सिंह ने कहा कि जब देश ‘आत्मनिर्भरता' की दिशा में कदम बढ़ा रहा था तब निजी क्षेत्र के रक्षा उत्पादन को लेकर चुनौतियां और संदेह थे, लेकिन वर्तमान सरकार ने नीतियों में बदलाव लाकर और प्रक्रियाओं को सरल बनाकर इस क्षेत्र के लिए द्वार खोल दिए, क्योंकि सरकार को निजी क्षेत्र की क्षमता पर पूरा भरोसा था। उन्होंने कहा, ‘‘इससे गुणवत्ता में सुधार, समयबद्ध कार्य निष्पादन में वृद्धि और उत्पादकता एवं वितरण में भी तेजी आई है। हमारे रक्षा तंत्र में काफी सुधार हुआ है। निजी रक्षा क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच और प्रौद्योगिकी आधारित दृष्टिकोण का विकास जिस प्रकार हुआ है वह अत्यंत सराहनीय है।'' केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अनुसंधान एवं विकास के मामले में निजी क्षेत्र अब सार्वजनिक क्षेत्र से आगे निकल चुका है। सिंह ने कहा कि भारत एक प्रमुख हथियार निर्यातक बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि गोला-बारूद की आपूर्ति में कमी महसूस की गई, लेकिन सरकार इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता लेकर आई है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल की गई पिनाका मिसाइलों और नागास्त्र ड्रोन जैसी विभिन्न रक्षा उत्पादन क्षमताओं के लिए सोलर समूह की सराहना की। सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि भारत गोला-बारूद उत्पादन का वैश्विक केंद्र बने। उन्होंने कहा, ‘‘युद्ध बहुत जटिल होते जा रहे हैं और उनकी तीव्रता भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में युद्ध की तैयारी युद्धस्तर पर होनी चाहिए। युद्ध का स्वरूप बहुत तेजी से बदल रहा है। नए तरीके सामने आ रहे हैं जो पारंपरिक युद्ध में कभी नहीं थे।'' रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘युद्ध अब सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। ऊर्जा, व्यापार, शुल्क, आपूर्ति श्रृंखला, प्रौद्योगिकी और सूचना अब संघर्ष के नए आयाम बन गए हैं।'' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन बदलावों के मद्देनजर, देश की सीमा सुरक्षा, हथियारों, हार्डवेयर और रक्षा औद्योगिक विनिर्माण को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। सिंह ने कहा, “युद्ध का स्वरूप चाहे जो भी हो, इस समय की सबसे बड़ी आवश्यकता एक मजबूत रक्षा औद्योगिक आधार निजी क्षेत्र द्वारा अनुसंधान और विकास तथा उत्पादन है। सरकार चाहती है कि रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में निजी क्षेत्र का योगदान उत्पादन का कम से कम 50 प्रतिशत हो।” सिंह ने बताया कि घरेलू रक्षा उत्पादन 2014 के 46,000 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का हो गया है, जिसमें निजी क्षेत्र का योगदान 30,000 करोड़ रुपये है। सिंह ने कहा कि रक्षा निर्यात 10 साल पहले मात्र 1000 करोड़ रुपये का था, लेकिन अब यह बढ़कर 25,000 करोड़ रुपये का हो गया है और सरकार का लक्ष्य 2029 से 2030 तक इसे 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। उन्होंने सोलर ग्रुप द्वारा विकसित की जा रही भार्गवास्त्र ड्रोन-रोधी प्रणाली की भी प्रशंसा की जो सूक्ष्म मिसाइलों पर आधारित एक शक्तिशाली प्रणाली है और जिसका सफल परीक्षण हो चुका है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि मध्यम क्षमता वाला गोला-बारूद (23 मिलीमीटर से 40 मिलीमीटर) पैदल सेना, बख्तरबंद वाहनों, नौसैनिक तोप प्रणालियों और विमानों में लगाई जाने वाली युद्ध सामग्री की रीढ़ है तथा वर्तमान में इस महत्वपूर्ण गोला-बारूद का एक बड़ा हिस्सा आयात किया जाता है। नागपुर दौरे के दौरान सिंह ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से उनके आवास पर मुलाकात की।
- नौ लोगों की मौत, 80 घायललातेहार/गुमला. झारखंड के लातेहार जिले में रविवार को बारात ले जा रही एक बस के पलट जाने से उसमें सवार कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई और 80 अन्य घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि यह हादसा महुआडांड़ पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत ओरसा बंगलाधारा घाटी में हुआ।पुलिस अधीक्षक (एसपी) कुमार गौरव ने कहा, छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से बारात लेकर बस लातेहार के महुआडांड़ आ रही थी। बस पलट गई और पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मरने वालों में से चार महिलाएं शामिल हैं। घायलों को अस्पताल ले जाया गया है।'' वहीं, एक अन्य अधिकारी ने बताया कि लातेहार के अस्पताल में इलाज के दौरान दो और लोगों की मौत हो गई जबकि गुमला सदर अस्पताल में भी दो लोगों की मौत हुई। गुमला के सिविल सर्जन शंभूनाथ चौधरी ने कहा कि नौ घायलों को यहां के सदर अस्पताल में रेफर किया गया था जिनमें से दो को मृत घोषित कर दिया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर एक पोस्ट में लातेहार के उपायुक्त को घायलों को उचित चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने का निर्देश दिया। उपमंडल अधिकारी (एसडीएम) विपिन कुमार दुबे ने बताया कि 60 घायलों को महुआडांड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में और 20 से अधिक को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘गंभीर हालत वाले 32 लोगों को बेहतर इलाज के लिए रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) भेजा जा रहा है।'' दुबे ने बताया कि मृतकों की पहचान रेशांति देवी (35), प्रेमा देवी (37), सीता देवी (45), सोनमती देवी (55), सुखना भुइयां (40) और विजय भुइयां के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि लातेहार अस्पताल में जिस महिला की मौत हुई, उसकी पहचान की जा रही है। बस चालक विकास पाठक ने बताया कि बस में करीब 90 यात्री सवार थे।उसने संवाददाताओं से कहा, ‘‘बस के ब्रेक फेल हो गए। हैंडब्रेक का इस्तेमाल करके और इंजन बंद करके गाड़ी रोकने की कोशिश करने के बावजूद, मैं उस पर नियंत्रण नहीं पा सका और अंततः बस पलट गई।''
- मालदा/सिंगूर/ पश्चिम बंगाल में होने वाले अहम विधानसभा चुनाव से पहले जैसे-जैसे चुनावी विमर्श जोर पकड़ रहा है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी दो रैलियों में तृणमूल कांग्रेस सरकार को निशाना बनाकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की रणनीति को और धार देने का काम किया है। प्रधानमंत्री ने अपनी इन रैलियों में घुसपैठ तथा कानून व्यवस्था को भाजपा के मुख्य चुनावी मुद्दों के रूप में सामने रखा। पश्चिम बंगाल में 294 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव को तृणमूल कांग्रेस के ‘‘महाजंगल राज'' और भाजपा के शासन मॉडल के बीच की लड़ाई के रूप में पेश करते हुए मोदी ने सत्तारूढ़ पार्टी पर चुनावी लाभ के लिए घुसपैठियों को संरक्षण देकर ‘‘राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़'' करने का आरोप लगाया और कहा कि केवल भाजपा ही व्यवस्था बहाल कर सकती है, विकास को पुनर्जीवित कर सकती है तथा राज्य की सीमाओं को सुरक्षित कर सकती है। शनिवार को मालदा जिले में और रविवार को हुगली जिले के सिंगूर में हुई दोनों रैलियों में, मोदी ने बार-बार घुसपैठ का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान अवैध प्रवासन फला-फूला है। भाजपा ने राज्य में चुनाव से पहले अपनी रणनीति को और धार देने का काम किया है जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस उसकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी है। मोदी का बंगाल दौरा शनिवार को सरकारी कार्यक्रमों और राजनीतिक संदेशों के मिले-जुले रूप के साथ शुरू हुआ। मालदा रैली को संबोधित करने से पहले उन्होंने लगभग 3,250 करोड़ रुपये की रेल और सड़क अवसंरचना परियोजनाओं की शुरुआत की और हावड़ा एवं गुवाहाटी के बीच पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर केंद्र सरकार के विकास के वादे को रेखांकित किया। हालांकि, रैली में सारा ध्यान निर्णायक रूप से घुसपैठ पर केंद्रित हो गया।उत्तर बंगाल के मुस्लिम बहुल जिले में रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने आरोप लगाया कि अवैध प्रवासन ने बंगाल की जनसांख्यिकी को बदल दिया है, दंगों को बढ़ावा दिया है और यह तृणमूल कांग्रेस के ‘‘संरक्षण एवं गिरोह राज'' के तहत फल-फूल रहा है। मोदी ने कहा, ‘‘बंगाल के लिए घुसपैठ एक बहुत बड़ी चुनौती है''। उन्होंने दावा किया कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘लोग मुझे बताते हैं कि कई जगहों पर भाषा और बोलने के लहजे में अंतर उभरने लगा है। घुसपैठियों की बढ़ती आबादी के कारण मालदा और मुर्शिदाबाद समेत कई इलाकों में दंगे होने लगे हैं।'' घुसपैठियों और सत्तारूढ़ पार्टी के बीच गठबंधन का आरोप लगाते हुए मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार घुसपैठ के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर ‘‘गुंडागर्दी'' और ‘‘गरीबों को धमकाने तथा डराने'' की राजनीति का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री ने घुसपैठियों और सताए गए शरणार्थियों, विशेष रूप से मतुआ और नामशूद्र समुदायों के बीच एक राजनीतिक अंतर करने की भी कोशिश की, जो 2019 से भाजपा का एक प्रमुख समर्थक आधार रहे हैं। मतदाता सूचियों को लेकर जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की पृष्ठभूमि में उन्होंने शरणार्थी बहुल क्षेत्रों के लोगों को पुन: आश्वस्त किया, जिनके बीच एसआईआर के कारण चिंता पैदा हो गई है। उन्होंने कहा, ‘‘यह मोदी की गारंटी है कि पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न से भागकर आए मतुआ और नामशूद्र परिवारों सहित वास्तविक शरणार्थियों को डरने की जरूरत नहीं है। संविधान उन्हें यहां रहने का अधिकार देता है और सीएए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करता है।''
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प्रयागराज/ प्रयागराज में जारी माघ मेले में रविवार को मौनी अमावस्या पर शाम चार बजे तक 3.82 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई। इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर स्नान कर रहे श्रद्धालुओं और साधु संतों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई। मेला प्रशासन के एक अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि कल रात 12 बजे से ही स्नान करने के लिए लोगों का गंगा और संगम क्षेत्र में आना जारी है। इससे पूर्व, मकर संक्रांति के अवसर पर 1.03 करोड़ जबकि एकादशी पर लगभग 85 लाख लोगों ने गंगा और संगम में स्नान किया था। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने बताया कि श्रद्धालुओं को सही रास्ता दिखाने के लिए मेला प्रशासन ने खंभों पर ‘रिफ्लेक्टिव टेप' लगाए हैं और नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक भी श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने बतया कि माघ मेला 800 हेक्टेयर क्षेत्र में सात सेक्टरों में लगाया गया है। मेला क्षेत्र में 25,000 से अधिक शौचालय बनाए गए हैं और 3500 से अधिक सफाईकर्मी तैनात हैं।
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श्री विजय पुरम. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में देश की पहली समुद्र मत्स्य पालन परियोजना की शुरुआत की। सिंह यहां से नाव से लगभग एक घंटे की यात्रा करके ‘नॉर्थ बे' पहुंचे और वहां उन्होंने पूर्वाह्न करीब साढ़े 10 बजे परियोजना का उद्घाटन किया। राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खुले समुद्र में पिंजरों में ‘सीबास' और ‘कोबिया' मछलियों का पालन किया जा रहा है तथा प्रयोग के तौर पर समुद्री शैवाल की खेती भी की जा रही है। ‘सीबास' और ‘कोबिया' दोनों ही अपने स्वाद के लिए जानी जाती हैं।
मंत्री ने इस परियोजना को भारत की नीली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में उठाए गए पहले बड़े कदमों में से एक बताया। यह परियोजना पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, एनआईओटी तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह प्रशासन के बीच सहयोग के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही है। इस अवसर पर सिंह ने कहा कि हिमालयी और मुख्य भूमि संसाधनों की तरह ही देश के महासागरों की अपार और विविध आर्थिक क्षमता है, जिन पर दशकों से उचित ध्यान नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि लेकिन 2014 के बाद राष्ट्रीय सोच में एक मौलिक बदलाव आया है, जिसमें यह स्वीकार किया गया है कि भारत का समुद्री क्षेत्र आर्थिक विकास के लिए समान रूप से समृद्ध और अवसर प्रदान करता है। -
पिथौरागढ़. उत्तराखंड सरकार ने आवारा पशुओं को सड़कों और खेतों से हटाने के लिए दो योजनाएं शुरू की हैं जिनके तहत इन मवेशियों को आश्रय देने वाले लोग हर माह 12 हजार रुपये तक कमा सकते हैं। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, पशुपालन विभाग की ये योजनाएं केवल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए हैं।
पिथौरागढ़ के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) डॉ. योगेश शर्मा ने बताया कि इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य निराश्रित घूम रहे मवेशियों को आश्रय, भोजन और स्वास्थ्य देखभाल उपलब्ध कराने के साथ ही उनसे फसलों को बचाना भी है। उन्होंने बताया कि ग्राम गौर सेवक योजना के अंतर्गत अधिकतम पांच नर आवारा पशुओं को पालने वाले को 80 रु प्रति पशु के हिसाब से पैसे दिए जाएंगे जबकि उन पशुओं को निशुल्क स्वास्थ्य देखभाल भी उपलब्ध करायी जाएगी। इस प्रकार, पांच नर आवारा पशुओं को रखने वालों को पशुपालन विभाग 12 हजार रुपये प्रतिमाह देगा। उन्होंने बताया कि जिले में अभी इस योजना का लाभ छह व्यक्ति उठा रहे हैं। शर्मा ने बताया कि दूसरी योजना 'गौशाला योजना' के नाम से शुरू की गयी है जिसमें कोई व्यक्ति अपने गौसदन में किसी भी संख्या में निराश्रित पशुओं को रख सकता है जिसके लिए उसे 80 रु प्रति पशु के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। उन्होंने बताया, “जिले के मुनस्यारी और बारावे में दो गौशालाएं चल रही हैं जिनमें कुल 225 निराश्रित पशुओं को आश्रय और भोजन मिल रहा है।” -
मुंबई. राष्ट्रवादी स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि जब तक धर्म भारत का मार्गदर्शन करता रहेगा, देश ‘विश्वगुरु' बना रहेगा। उन्होंने कहा कि ऐसा आध्यात्मिक ज्ञान दुनिया के दूसरे हिस्सों में नहीं पाया जाता। भागवत ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि धर्म ही पूरे ब्रह्मांड को चलाता है और सब कुछ उसी सिद्धांत पर चलता है। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत को अपने पूर्वजों से एक समृद्ध आध्यात्मिक धरोहर विरासत में मिली है और साधु-संतों से मार्गदर्शन मिलता रहा है। उन्होंने कहा, "जब तक ऐसा धर्म भारत का मार्गदर्शन करता रहेगा, तब तक भारत 'विश्वगुरु' बना रहेगा। दुनिया के पास इस तरह का ज्ञान नहीं है क्योंकि उसमें आध्यात्मिकता की कमी है। यह हमारे पूर्वजों की विरासत है, जो हमें मिली है।” भागवत ने कहा, ‘‘चाहे वह नरेन्द्र भाई हों, मैं हूं, आप हों या कोई और, हम सभी को एक ही शक्ति चला रही है। यदि वाहन उस शक्ति से चले, तो कभी कोई दुर्घटना नहीं होगी। वह चालक धर्म है।'' उन्होंने कहा, “धर्म पूरे ब्रह्मांड का चालक है। जब सृष्टि की उत्पत्ति हुई, तो वह नियम जो उसकी कार्यप्रणाली को नियंत्रित करते थे, वही धर्म बने। सब कुछ उसी सिद्धांत पर चलता है।” भागवत ने कहा कि धर्म केवल धार्मिकता तक सीमित नहीं है और प्रकृति में हर किसी का अपना नैतिक कर्तव्य व अनुशासन होता है। उन्होंने कहा कि राज्य धर्मनिरपेक्ष हो सकता है, लेकिन कोई भी मानव या कोई भी सृष्टि धर्म रहित नहीं हो सकती। भागवत ने कहा, “पानी का धर्म है बहना, आग का धर्म है जलाना। पुत्र का कर्तव्य है, शासक का कर्तव्य है और आचार-व्यवहार के नियम होते हैं। हमारे पूर्वजों ने इन नियमों को आध्यात्मिक शोध और महान प्रयासों के माध्यम से समझा।”
- नई दिल्ली। भारत में हाई-स्पीड रेलवे ट्रैक की लंबाई बीते 11 वर्षों में दोगुनी से अधिक बढ़कर 84,244 किलोमीटर हो गई है, जो कि 2014 में 31,445 किलोमीटर थी। यह बयान रेल मंत्रालय की ओर से रविवार को दिया गया।मंत्रालय ने बताया कि समीक्षा अवधि में देश में कुल रेलवे ट्रैक नेटवर्क में हाई-स्पीड ट्रैक की हिस्सेदारी बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई है, जो कि पहले 40 प्रतिशत पर थी। इससे ट्रेन ऑपरेशन पहले के मुकाबले अधिक तेज हो गए हैं।मंत्रालय ने बयान में कहा कि भारतीय रेलवे ने बीते 11 वर्षों में ट्रैक इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा को बढ़ाने पर तेजी से ध्यान केंद्रित किया है, जिससे ट्रैक इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा मानकों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। इन प्रयासों से देश भर में सुरक्षित, तेज और अधिक विश्वसनीय रेल संचालन में योगदान मिला है।बयान में आगे बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान, भारतीय रेलवे ने 6,851 किलोमीटर से अधिक पटरियों का नवीनीकरण किया। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 7,500 किलोमीटर से अधिक पटरियों के नवीनीकरण का कार्य चल रहा है। इसके अतिरिक्त, 2026-27 के लिए 7,900 किलोमीटर पटरियों के नवीनीकरण की योजना बनाई गई है, जो परिसंपत्ति की विश्वसनीयता और सुरक्षा पर निरंतर फोकस को दर्शाता है।रेलवे ने 110 किमी/घंटा से अधिक गति वाले ट्रैक पर मवेशियों और अतिक्रमण रोकने हेतु 15,000 किलोमीटर सुरक्षा बाड़ लगाईमंत्रालय ने कहा कि रेलवे ट्रैक के किनारे सुरक्षा बाड़ लगाने का काम भी प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया गया है ताकि मवेशियों के कुचले जाने और अतिक्रमण की घटनाओं को कम किया जा सके और समग्र सुरक्षा को बढ़ाया जा सके। अब तक लगभग 15,000 किलोमीटर की बाड़ लगाई जा चुकी है, जिससे उन खंडों पर सुरक्षा में सुधार हुआ है जहां ट्रेनें 110 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से चलती हैं।रेलगाड़ियों की सुचारू आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण टर्नआउट रिन्यूएबल में भी मजबूत प्रगति हुई है। 2024-25 में 7,161 थिक वेब स्विच और 1,704 वेल्डेबल सीएमएस (कास्ट मैंगनीज स्टील) क्रॉसिंग स्थापित किए गए। 2025-26 में 8,000 से अधिक थिक वेब स्विच और 3,000 से अधिक वेल्डेबल सीएमएस क्रॉसिंग स्थापित किए जा रहे हैं।रेलवे ने 2024-26 में ट्रैक स्थिरता और राइड गुणवत्ता सुधार हेतु 7,442-7,500 किलोमीटर ट्रैक की मशीनीकृत गहन स्क्रीनिंग कीबयान में बताया गया है कि ट्रैक की स्थिरता बनाए रखने और राइड की गुणवत्ता में सुधार के लिए आवश्यक गिट्टी की मशीनीकृत गहन स्क्रीनिंग लगातार की जा रही है। 2024-25 के दौरान 7,442 किलोमीटर ट्रैक की गहन स्क्रीनिंग पूरी की गई, जबकि 2025-26 में 7,500 किलोमीटर से अधिक ट्रैक की गहन स्क्रीनिंग का काम जारी है।
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मालदा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधने के लिए घुसपैठ को मुख्य मुद्दा बनाया और आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासन ने राज्य की जनसांख्यिकी को बदल दिया है एवं इसके कारण दंगे हुए हैं। मोदी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के ‘‘संरक्षण और सिंडिकेट राज'' के चलते घुसपैठ में वृद्धि हुई है। मोदी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कवायद को लेकर जारी विवाद के बीच मतुआ समुदाय जैसे शरणार्थियों को भी आश्वस्त किया, जो पड़ोसी बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण पलायन कर भारत आए हैं। मोदी ने मुस्लिम बहुल जिले मालदा में एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए कहा कि घुसपैठ पश्चिम बंगाल के सामने "एक बहुत बड़ी चुनौती" है। उन्होंने कहा कि विकसित और समृद्ध देश भी अवैध प्रवासियों की पहचान करने और उन्हें बाहर करने के लिए ठोस कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में आने पर पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों पर नकेल कसने और अवैध प्रवासन को रोकने के लिए "बड़े कदम" उठाएगी। उन्होंने कहा, दुनिया में ऐसे विकसित और समृद्ध देश हैं जिनके पास धन की कोई कमी नहीं है, फिर भी वे घुसपैठियों को बाहर निकाल रहे हैं। पश्चिम बंगाल से घुसपैठियों को निकालना भी उतना ही आवश्यक है।'' प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया कि घुसपैठ का असर जमीन पर दिखायी दे रहा है और राज्य के कई हिस्सों में जनसांख्यिकीय संतुलन बदल गया है। उन्होंने कहा, ‘‘लोग मुझे बताते हैं कि कई जगहों पर तो बोली जाने वाली भाषा भी बदलने लगी है। भाषा और बोली में अंतर उभरने लगे हैं। घुसपैठियों की बढ़ती आबादी के कारण पश्चिम बंगाल के मालदा और मुर्शिदाबाद सहित कई इलाकों में दंगे होने लगे हैं।'' प्रधानमंत्री मोदी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस की ‘सिंडिकेट' व्यवस्था राज्य में घुसपैठियों को बसाने का काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि घुसपैठियों और सत्तारूढ़ दल के बीच ‘‘सांठगांठ'' है। उन्होंने कहा, ‘‘आपको इस सांठगांठ को तोड़ना होगा। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि जैसे ही भाजपा की सरकार बनेगी, घुसपैठ और घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।'' प्रधानमंत्री ने शरणार्थियों, खासकर राजनीतिक रूप से अहम मतुआ समुदाय को आश्वस्त किया।
संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के तहत नागरिकता के वादे के बीच मतुआ समुदाय 2019 से भाजपा का प्रमुख वोट बैंक रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘धार्मिक आधार पर उत्पीड़न के कारण भारत में शरण लेने वाले मतुआ समुदाय जैसे शरणार्थियों को मैं आश्वस्त करना चाहता हूं: आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है।'' प्रधानमंत्री मोदी ने निशाना साधते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस की ‘‘गुंडागर्दी'' और ‘‘गरीबों को धमकाने व डराने की राजनीति'' का जल्द ही अंत होगा। उन्होंने दावा किया कि भाजपा शासित राज्यों से घिरा पश्चिम बंगाल अब बदलाव के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, ‘‘पश्विम बंगाल चारों ओर से भाजपा सरकारों से घिरा हुआ है, जिन्होंने सुशासन सुनिश्चित किया है। अब पश्चिम बंगाल में भी सुशासन का समय आ गया है।'' बिहार में भाजपा की चुनावी जीत को याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तब उन्होंने टिप्पणी की थी कि अब बंगाल की बारी है।'' उन्होंने भरोसा जताया कि राज्य आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को प्रचंड जनादेश मिलेगा। राज्य में विधानसभा चुनाव तीन महीने बाद होने की संभावना है।
प्रधानमंत्री ने राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर गरीबों की कल्याणकारी योजनाओं को रोकने और केंद्रीय योजनाओं का लाभ जनता तक नहीं पहुंचने देने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल को मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए या नहीं? पश्चिम बंगाल के लोगों का वास्तविक कल्याण तभी होगा जब यहां कोई बाधक सरकार नहीं हो, बल्कि जनता के पक्ष में काम करने वाली भाजपा सरकार हो।'' बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘‘निर्दयी और क्रूर'' तृणमूल कांग्रेस सरकार जनता का पैसा लूट रही है और गरीबों के लिए केंद्र द्वारा भेजा गया कोष हड़प रही है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं चाहता हूं कि पश्चिम बंगाल के हर गरीब परिवार को अपना स्थायी घर मिले। जिन लोगों का हक है, उन्हें मुफ्त राशन मिले। मैं चाहता हूं कि केंद्र सरकार द्वारा गरीबों के लिए शुरू की गई कल्याण योजनाओं का पूरा लाभ आप तक पहुंचे, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा क्योंकि केंद्र से भेजे गए पैसे को तृणमूल कांग्रेस नेता हड़प रहे हैं।'' मोदी ने राज्य में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के लागू नहीं होने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘‘आज पश्चिम बंगाल एकमात्र ऐसा राज्य है जहां आयुष्मान भारत लागू नहीं हुआ है। तृणमूल कांग्रेस सरकार बंगाल में मेरे भाइयों और बहनों को इसके लाभ से वंचित कर रही है। ऐसी निर्दयी सरकार को बंगाल से विदाई देना जरूरी है।'' क्षेत्र के विकास का वादा करते हुए मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार मालदा और पश्चिम बंगाल का "पुराना गौरव और वैभव" बहाल करेगी और किसानों व युवाओं के लिए नये अवसर लाएगी। उन्होंने जिले के प्रसिद्ध आम का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘जब भाजपा सत्ता में आएगी, हम मालदा की आम अर्थव्यवस्था को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे'' हालिया चुनावी सफलताओं का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि भाजपा को अब उन क्षेत्रों में भी अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है, जहां इसे पहले कमजोर माना जाता था। उन्होंने महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों क परिणाम और केरल में पार्टी की बढ़त का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी का विकास मॉडल मतदाताओं, खासकर युवाओं का विश्वास जीत रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘आज आपका उत्साह देखकर मैं पूरे आत्मविश्वास के साथ कह रहा हूं कि इस बार पश्चिम बंगाल के लोग भी भाजपा को विजयी बनाएंगे।'' -
मालदा (पश्चिम बंगाल) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को हावड़ा एवं गुवाहाटी के बीच देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा पश्चिम बंगाल में 3,250 करोड़ रुपये से अधिक की रेल एवं सड़क परियोजनाओं की शुरुआत की। मोदी ने यहां एक कार्यक्रम में चार अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन को डिजिटल माध्यम से हरी झंडी दिखाई, जो न्यू जलपाईगुड़ी को नागरकोइल और तिरुचिरापल्ली तथा अलीपुरद्वार को एसएमवीटी बेंगलुरु और मुंबई (पनवेल) से जोड़ेंगी। प्रधानमंत्री ने मालदा टाउन रेलवे स्टेशन से हावड़ा और गुवाहाटी (कामाख्या) के बीच देश की सबसे उन्नत और पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की पहली जोड़ी का उद्घाटन किया। उन्होंने गुवाहाटी-हावड़ा वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को भी यहीं से डिजिटल तरीके से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पूरी तरह वातानुकूलित स्लीपर ट्रेन से हावड़ा-गुवाहाटी मार्ग पर यात्रा समय लगभग 2.5 घंटे कम होने की उम्मीद है। फिलहाल ट्रेन से हावड़ा से गुवाहाटी जाने में 18 घंटे लगते हैं। मोदी ने उद्घाटन समारोह में कहा कि नयी परियोजनाएं, विशेष रूप से नयी ट्रेन क्षेत्र के युवाओं को सशक्त बनाएंगी। मोदी ने कहा, “एक समय था जब हम दूसरे देशों में विकास देखते थे और हमारा सपना होता था कि काश हमारे देश में भी ऐसी आधुनिक ट्रेन चलें। आज वह सपना साकार हो गया।” उन्होंने कहा, “नयी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने मां काली की पावन भूमि को और मां कामाख्या की पवित्र धरती से जोड़ दिया है।” मोदी ने कहा कि भारत ने अपनी परिवहन सुविधाओं को आधुनिक बनाया है तथा भारत को आत्मनिर्भर भी बनाया है। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि आज भारत अमेरिका और यूरोप से अधिक डिब्बों का निर्माण कर रहा है।
मोदी ने कहा, ‘‘आधुनिक भारत की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने आज से अपनी यात्रा शुरू की है। यह नई ट्रेन देश के लोगों के लिए लंबी दूरी की यात्रा को आसान और सुगम बनाएगी।'' मालदा टाउन स्टेशन पर कुछ यात्रियों से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने नई वंदे भारत ट्रेन को लेकर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, ‘‘अब मैं देख रहा हूं कि विदेशी लोग भारत में मेट्रो और अन्य ट्रेन के वीडियो बना रहे हैं ताकि वे दुनिया को बता सकें कि भारत में ट्रेन यात्रा में किस तरह क्रांति आ रही है।'' मोदी ने कहा कि आधुनिक वंदे भारत स्लीपर ट्रेन निकट भविष्य में पूरे देश में चलेंगी और भारतीय रेलवे का पुनरुद्धार हो रहा है, जिसमें रेल लाइनों का विद्युतीकरण एवं स्टेशनों का आधुनिकीकरण शामिल है। उन्होंने कहा, ‘‘इस समय देशभर में 150 से अधिक वंदे भारत ट्रेन चल रही हैं। इनके साथ ही आधुनिक और तेज गति वाली ट्रेन का एक नेटवर्क भी तैयार किया जा रहा है।'' उन्होंने कहा कि शनिवार को पश्चिम बंगाल को अमृत भारत एक्सप्रेस की चार और ट्रेन मिल गईं, जिससे राज्य, विशेष रूप से उत्तरी बंगाल, पश्चिमी और दक्षिणी भारत से बेहतर ढंग से जुड़ जाएगा। उन्होंने कहा, “देश के अन्य हिस्सों से बंगाल और पूर्वी भारत आने वाले, गंगासागर, दक्षिणेश्वर और कालीघाट घूमने आने वाले तथा तमिलनाडु और महाराष्ट्र जाने वाले लोगों को इन अमृत भारत ट्रेन से यात्रा में आसानी होगी।” आधुनिकीकरण के साथ-साथ भारतीय रेलवे के आत्मनिर्भर बनने पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि भारत में बने इंजन, डिब्बे और मेट्रो ट्रेन देश की पहचान बन रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत विश्व भर के कई देशों को यात्री और मेट्रो ट्रेनों के लिए डिब्बे निर्यात करता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को लाभ होता है। उन्होंने कहा, ‘‘देश को जोड़ना हमारा प्राथमिक उद्देश्य है और दूरियों को कम करना हमारा मिशन है।''
इस अवसर पर मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत जल्द ही वंदे भारत ट्रेन का निर्यात करेगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “क्षेत्र के व्यंजनों के स्वाद को ध्यान में रखते हुए कोलकाता से चलने वाली वंदे भारत ट्रेन में बंगाली भोजन और गुवाहाटी से चलने वाली ट्रेन में असमिया भोजन परोसा जाएगा।” प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि नयी परियोजनाएं लंबी दूरी की सस्ती और विश्वसनीय रेल ‘कनेक्टिविटी' को बढ़ावा देंगी। समारोह में मोदी ने राज्य में चार प्रमुख रेलवे परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी, जिनमें बालुरघाट से हिली तक नयी रेल लाइन, न्यू जलपाईगुड़ी में माल ढुलाई संबंधी आधुनिक केंद्र, सिलीगुड़ी लोको शेड का उन्नयन और जलपाईगुड़ी जिले में वंदे भारत ट्रेन रखरखाव इकाई के आधुनिकीकरण से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। बयान में कहा गया है, “ये परियोजनाएं यात्री और माल ढुलाई सेवाओं को सशक्त बनाएंगी, उत्तर बंगाल में लॉजिस्टिक दक्षता को सुधारेंगी, और क्षेत्र में रोजगार के अवसर उत्पन्न करेंगी।” बयान में कहा गया है, “ये परियोजनाएं आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण और बेहतर कनेक्टिविटी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी, जिनसे पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों को देश के प्रमुख विकास इंजन के रूप में मजबूत किया जाएगा।” प्रधानमंत्री मोदी इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पूर्वी भारत की दो दिवसीय यात्रा के दौरान इन परियोजनाओं की शुरुआत कर रहे हैं। मोदी मालदा के बाद असम जाएंगे और फिर रविवार को पश्चिम बंगाल लौटेंगे। वह गुवाहाटी में रात्रि विश्राम करेंगे और अगली सुबह कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। -
जयपुर. जयपुर लिटरेचर फेस्विटल (जेएलएफ) में आए लेखक अमीश त्रिपाठी ने कहा कि देश की युवा पीढ़ी आध्यात्म से जुड़ रही है। त्रिपाठी ने कहा कि आजकल लोग करुणा का प्रदर्शन करने में लगे हैं और इसकी सोशल मीडिया पर तस्वीर पोस्ट कर रहे हैं। त्रिपाठी ने कहा कि उनके हिसाब से करुणा प्रदर्शन नहीं होना चाहिए बल्कि कर्म का प्रदर्शन होना चाहिए। वह जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शनिवार को पत्रकारों से बात कर रहे थे। अमीश ने कहा, ‘‘हमारी युवा पीढ़ी का कहीं न कहीं पश्चिमीकरण हो रहा है। मोबाइल में पता नहीं क्या-क्या देखते रहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि सारे युवा ऐसे हैं। मेरी किताबें अधिकतर युवा ही पढ़ते हैं। हमारी युवा पीढ़ी हमारी संस्कृति से अपने ही अंदाज में जुड़ रही है। अब युवा आध्यात्म से भी जुड़ रहे हैं।' शिव मंत्र 108 बार पढ़ने के महत्व का जिक्र करते हुए अमीष त्रिपाठी ने कहा, ‘‘हमारे पूर्वज आध्यात्म को विज्ञान से जोड़ते थे। हमारी संस्कृति में विज्ञान और वेद में भेद नहीं है। हमारे पूर्वज चाहते थे कि हमारी संस्कृति ऋतु से जुड़ी रहे। हमारी परंपरा रही है कि विज्ञान का सहारा लेकर प्रकृति के अनुकूल चला जाए।'' उन्होंने कहा,‘‘हमारे देवी-देवताओं की कहानियां सुनने से हम उबते नहीं हैं। यही कारण है कि हमारी संस्कृति जिंदा है।'' अमीश ने कहा, ‘‘यदि मुझे शिवलिंग की पूजा करनी है और मुझे ऐसा करना अच्छा लगता है, तौ मैं कर रहा हूं। लेकिन अंधविश्वास अच्छी बात नहीं हैं। मैं अभिव्यक्ति की आजादी में विश्वास रखता हूं। हमें यह हक नहीं है कि किसी की अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगा दें।
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जयपुर. कवि, संपादक और संगीत अध्येता यतींद्र मिश्र को यहां 19वें जयपुर साहित्य उत्सव (जेएलएफ) में 11वें महाकवि कन्हैया लाल सेठिया पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जेएलएफ के आयोजक एवं ‘टीमवर्क आर्ट्स' के संजय के. रॉय ने यहां एक सत्र में यतींद्र मिश्र को सर्वसम्मति से इस पुरस्कार के लिए चुने जाने की घोषणा की। इसके बाद इस्कॉन से जुड़े गौर गोपाल दास ने उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया। यतींद्र मिश्र को उनके काव्य संग्रह 'बिना कलिंग विजय' के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
मिश्र के अब तक तीन कविता-संग्रह प्रकाशित हुए हैं— ‘अयोध्या तथा अन्य कविताएं', ‘यदा-कदा', और ‘ड्योढ़ी पर आलाप'। इसके अलावा उन्होंने शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी के जीवन और संगीत साधना पर एक ‘गिरिजा' नामक पुस्तक भी लिखी है। उन्होंने रीतिकाल के अंतिम प्रतिनिधि कवि द्विजदेव की ग्रंथावली का वर्ष 2000 में सह-संपादन किया था। उन्होंने कुंवर नारायण पर आधारित दो पुस्तकों और 'स्पिक मैके' के लिए विरासत 2001 के कार्यक्रम के लिए भी संपादन किया है। लता मंगेशकर पर ‘लता सुर गाथा' पुस्तक उनकी एक और चर्चित कृति है, जिसके लिए उन्हें 64वां राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। पुरस्कार चयन समिति में नमिता गोखले, संजय के. रॉय, सुकृत पाल कुमार, रंजीत होसकोटे सिद्धार्थ सेठिया और जयप्रकाश सेठिया शामिल रहे। इससे पहले अरुंधती सुब्रमण्यम, के. सच्चिदानंदन और रंजीत होसकोटे को कन्हैया लाल सेठिया पुरस्कार मिल चुका है। कन्हैयालाल सेठिया का जन्म राजस्थान के चूरु जिले के सुजानगढ़ शहर में हुआ था। प्रसिद्ध राजस्थानी गीत ‘आ तो सुरगा नै सरमावै, ई पै देव रमण नै आवे' इन्हीं की रचना है। उनका 11 नवम्बर 2008 को निधन हो गया था। वह राजस्थानी भाषा के प्रसिद्ध कवि थे। उन्हें 2004 में पद्मश्री, साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा 1988 में ज्ञानपीठ के मूर्तिदेवी साहित्य पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। -
नई दिल्ली। भारत के रेल इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शनिवार को देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अत्याधुनिक ट्रेन हावड़ा और गुवाहाटी के बीच चलेगी और पूर्वोत्तर तथा पूर्वी भारत के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत बनाएगी।
रेल मंत्रालय के अनुसार, इस सेवा से न केवल यात्रियों को तेज और आरामदायक सफर मिलेगा, बल्कि पर्यटन और व्यापार को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।पूरी तरह वातानुकूलित इस ट्रेन में कुल 16 कोच लगाए गए हैं, जिनमें 823 यात्रियों के एक साथ यात्रा करने की क्षमता है। ट्रेन की सबसे खास बात यह है कि यह लगभग 958 से 968 किलोमीटर की दूरी सिर्फ 14 घंटे में तय करेगी, जो मौजूदा ट्रेनों के मुकाबले करीब 2.5 से 3 घंटे कम समय है। इसकी अधिकतम स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है, जिससे भविष्य में इसे और तेज बनाया जा सकेगा।यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ट्रेन में आधुनिक सस्पेंशन सिस्टम, ऑटोमैटिक दरवाजे और बेहतर बर्थ की व्यवस्था की गई है। खास बात यह भी है कि सफर के दौरान यात्रियों को क्षेत्रीय व्यंजनों का स्वाद मिलेगा, जिसमें बंगाली और असमिया खान-पान शामिल होगा। यह ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलाई जाएगी।कोचों की बात करें तो इस स्लीपर वंदे भारत में 11 एसी थ्री टियर, 4 एसी टू टियर और 1 एसी फर्स्ट क्लास कोच शामिल है। रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इस ट्रेन में आरएसी यानी वेटिंग सीट का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है, ताकि यात्रियों को पूरी तरह आरामदायक यात्रा का अनुभव मिल सके।किराए को लेकर भी सरकार ने मिडिल क्लास को ध्यान में रखा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, हावड़ा-गुवाहाटी के बीच हवाई यात्रा का किराया जहां लगभग 6 से 8 हजार रुपए तक होता है, वहीं वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में थर्ड एसी का किराया भोजन सहित करीब 2,300 रुपए, सेकंड एसी का लगभग 3,000 रुपए और फर्स्ट एसी का करीब 3,600 रुपए तय किया गया है। - अहमदाबाद। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि आदि शंकराचार्य ने भारतीय पहचान को स्थापित किया और यह सुनिश्चित किया कि सनातन धर्म का ध्वज चारों दिशाओं में खूब ऊंचा फहराता रहे। शाह ने आदि शंकराचार्य की ‘ग्रंथावली' के गुजराती संस्करण का विमोचन करने के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वास जताया कि अद्वैत वेदांत के आठवीं शताब्दी के विद्वान के संपूर्ण ग्रंथ, जिन्हें 15 खंडों में प्रकाशित किया गया है, गुजरात के युवाओं को इन्हें समझने में मदद करेंगे और उनके जीवन तथा कार्यों पर प्रभाव छोड़ेंगे। शाह ने कहा, “इन ग्रंथों में आपको उस समय के समाज में मौजूद सभी प्रश्नों के समाधान मिलेंगे।”शंकरचार्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इतने कम जीवनकाल में इतना कुछ हासिल कर पाने वाले लोग बहुत कम हैं। शाह ने कहा कि शंकराचार्य ने पैदल ही पूरे देश की यात्रा की और एक तरह से उन्होंने चलते-फिरते विश्वविद्यालय की भूमिका अदा की। गृह मंत्री ने कहा, “उन्होंने केवल पैदल यात्रा ही नहीं की, बल्कि भारत की पहचान स्थापित की, चारों दिशाओं में चार मठों की स्थापना की, ज्ञान के केंद्र बनाए और यह सुनिश्चित किया कि सनातन धर्म का ध्वज चारों दिशाओं में ऊंचा फहराता रहे।” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अपने जीवनकाल में आदि शंकराचार्य ने बौद्ध, जैन, कपालिक और तांत्रिक परंपराओं सहित विभिन्न दार्शनिक धाराओं के उदय के बीच सनातन धर्म को लेकर उत्पन्न संदेहों का समाधान किया। शाह ने कहा कि शंकराचार्य ने सभी प्रश्नों और शंकाओं के तार्किक उत्तर दिए। उन्होंने कहा, “आदि शंकराचार्य ने केवल विचार ही नहीं दिए, बल्कि भारत को विचारों का समन्वय भी दिया। उन्होंने केवल ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि उसे एक रूप भी दिया, उन्होंने केवल मुक्ति का विचार ही प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि उसका मार्ग भी प्रशस्त किया।”
- नयी दिल्ली। दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनी गूगल ने बृहस्पतिवार को भारतीय स्टार्टअप फर्मों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद देने के लिए ‘बाजार पहुंच कार्यक्रम' की शुरुआत की। इसके साथ ही कंपनी ने अपने मुक्त-स्रोत मॉडल के समूह 'जेम्मा' में नए एआई मॉडल जोड़ने की भी घोषणा की। गूगल ने कहा कि यह पहल भारत में कृत्रिम मेधा (एआई) संबंधी ढांचे से जुड़े उसके निवेश को आगे बढ़ाती है। कंपनी पहले ही आंध्र प्रदेश में एआई बुनियादी ढांचा केंद्र के लिए 15 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा कर चुकी है। विशाखापत्तनम में स्थापित वैश्विक एआई केंद्र को हरित ऊर्जा से संचालित किया जा रहा है और इसमें गूगल के उन्नत एआई चिप का इस्तेमाल होगा, जिससे भारतीय स्टार्टअप फर्मों को उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधाएं मिल सकेंगी। गूगल ने एक विज्ञप्ति में कहा कि 'बाजार पहुंच कार्यक्रम' का उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप फर्मों को स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयोगों से सीधे वैश्विक स्तर पर विस्तार करने में मदद करना है। यह कार्यक्रम उन एआई-आधारित स्टार्टअप फर्मों के लिए है जो शुरुआती चरण से आगे बढ़ चुके हैं और अब बड़े स्तर पर काम करना चाहते हैं। गूगल ने जेम्मा एआई मॉडल परिवार के तहत मेडजेम्मा 1.5 और फंक्शनजेम्मा जैसे नए मॉडल भी पेश किए।मेडजेम्मा 1.5 मॉडल स्वास्थ्य क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली उन्नत एआई जरूरतों को पूरा करेगा जबकि फंक्शनजेम्मा हल्का मॉडल है जो मोबाइल या उपकरणों पर सुरक्षित तरीके से एआई आधारित काम करने में मदद करेगा। इस मौके पर गूगल की क्षेत्रीय प्रबंधक (भारत) प्रीति लोबाना ने कहा, "एआई अब सिर्फ अनुसंधान प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और उद्योग तक पहुंच चुका है।" उन्होंने कहा कि भारतीय स्टार्टअप अब एआई का सिर्फ प्रयोग नहीं कर रहे बल्कि वे अब अपनी क्षमता को भरोसेमंद उत्पादों और कारोबार में भी बदल रहे हैं।
- कोलकाता। गंगा नदी में गत 11सालों में मछलियों की प्रजातियों में विविधता में करीब 61 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह खुलासा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के केंद्रीय अंतरस्थलीय मत्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सीआईएफआरआई) के अध्ययन में हुआ है। अध्ययन में कहा गया है कि यह सरकार के नेतृत्व में किए गए प्रयासों के तहत निरंतर पारिस्थितिक सुधार को दर्शाती है। अनुसंधान के मुताबिक नदी में लगभग पांच दशकों में मछलियों की सबसे अधिक विविधता दर्ज की गई है। वैज्ञानिकों ने इसके विभिन्न हिस्सों में 230 मछली प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया है। सीआईएफआरआई के निदेशक बीके दास ने कहा,‘‘यह कई वर्षों से चल रही नमामि गंगा सहित कई पुनरुद्धार योजनाओं का परिणाम है।'' उन्होंने बताया कि मछली की प्रजातियों की संख्या 2012 में 143 से बढ़कर 2023 में 230 हो गई, जो 60.83 प्रतिशत की वृद्धि है। इसके अलावा, 2023 में किए गए नवीनतम सर्वेक्षण में प्रजातियों की संख्या 230 दर्ज की गई, जो आधी सदी से भी अधिक समय में सबसे अधिक विविधता है। ऐतिहासिक अभिलेखों के मुताबिक 1822 में नदी में मछली की 271 प्रजातियां पाई जाती थीं, लेकिन प्रदूषण, पर्यावास के क्षरण और अत्यधिक दोहन के कारण समय के साथ यह विविधता लगातार कम होती गई।
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नयी दिल्ली. यूरोपीय संघ (ईयू) की शीर्ष नेता उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। अमेरिका की व्यापार और टैरिफ (शुल्क) नीतियों को लेकर बढ़ती चिंता के बीच, दोनों पक्ष 27 जनवरी को बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता पर हस्ताक्षर करने वाले हैं। वैश्विक व्यवस्था के अस्थिर प्रतीत होने के बीच, 25 जनवरी से कोस्टा और वॉन डेर लेयेन की नयी दिल्ली की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान ईयू और भारत द्वारा एक व्यापक वैश्विक एजेंडा तैयार करने पर विचार किए जाने की उम्मीद है। यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और वित्त वर्ष 2023-24 में दोनों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 135 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) से व्यापारिक संबंधों के काफी मजबूत होने की उम्मीद है। विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आमंत्रण पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा 25 से 27 जनवरी तक भारत की राजकीय यात्रा करेंगे और 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, वे 27 जनवरी को होने वाले 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भी करेंगे। हर साल गणतंत्र दिवस समारोह में विश्व के नेताओं को आमंत्रित किया जाता है।
यूरोपीय संघ ने एक वक्तव्य में कहा कि शिखर सम्मेलन का उद्देश्य यूरोपीय संघ-भारत रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाना तथा प्रमुख नीतिगत क्षेत्रों में सहयोग को और प्रगाढ़ करना है। इसमें कहा गया है कि व्यापार, सुरक्षा और रक्षा, स्वच्छ परिवर्तन और जन सहयोग जैसे मुद्दे चर्चा के शीर्ष एजेंडे में शामिल रहेंगे। कोस्टा ने कहा, ‘‘भारत यूरोपीय संघ का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। हम मिलकर नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा करने की जिम्मेदारी साझा करते हैं। यह बैठक हमारी साझेदारी को मजबूत करने और हमारे सहयोग में प्रगति लाने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा।'' शीर्ष सूत्रों के अनुसार, शिखर सम्मेलन में दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किये जाने की उम्मीद है। ऐसे समय में जब दुनिया वाशिंगटन की टैरिफ नीति के मद्देनजर व्यापार में व्यवधान का सामना कर रही है, प्रस्तावित समझौते से कई क्षेत्रों में समग्र द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करने में गुणात्मक बदलाव आने की उम्मीद है। मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के अलावा, दोनों पक्ष शिखर सम्मेलन में रक्षा समझौता और रणनीतिक एजेंडा तय कर सकते हैं। भारत और यूरोपीय संघ 2004 से रणनीतिक साझेदार हैं। पंद्रहवां भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन जुलाई 2020 में वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया गया था। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘विशेष रूप से फरवरी 2025 में यूरोपीय संघ के आयुक्तों की ऐतिहासिक भारत यात्रा के बाद, द्विपक्षीय संबंध कई क्षेत्रों में विस्तारित और प्रगाढ़ हुए हैं।'' शिखर सम्मेलन में अपनाई जाने वाली नयी रणनीतिक कार्ययोजना में साझा हितों के पांच क्षेत्रों की पहचान की गई है, जिनमें सुरक्षा और रक्षा, संपर्क और वैश्विक मुद्दे, समृद्धि, स्थिरता, प्रौद्योगिकी और नवाचार शामिल हैं। -
नयी दिल्ली. एक भारतीय रक्षा कंपनी ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने स्वदेशी रूप से विकसित ड्रोन रोधी प्रणाली के लिए थल सेना और भारतीय नौसेना से “ऑर्डर हासिल किए हैं”। यह प्रणाली दुश्मन ड्रोन को बाधित और निष्क्रिय करने के साथ-साथ उभरते हवाई खतरों से निपटने की सेना की क्षमताओं को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि ‘आईजी टी-शुल पल्स एंटी-ड्रोन सिस्टम' हल्का और तेजी से तैनात किये जाने योग्य है और इसका उद्देश्य अग्रिम पंक्ति के सैनिकों, परिधि सुरक्षा, सैन्य ठिकानों और “महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्तियों” की सुरक्षा करना है। नोएडा स्थित कंपनी ‘आईजी डिफेंस' ने कहा, “यह सीधी दृष्टि रेखा और हस्तक्षेप-मुक्त परिस्थितियों में दो किलोमीटर तक की प्रभावी जैमिंग रेंज प्रदान करता है, जिससे सामरिक इकाइयों को उभरते हवाई खतरों के खिलाफ तत्काल प्रतिक्रिया का विकल्प मिलता है।” यह रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी उन्नत मानवरहित हवाई प्रणालियों (यूएएस), लघु दूरी की मिसाइल प्रणालियों और मानव-रोधी समाधानों के डिजाइन, विकास और तैनाती में विशेषज्ञता रखती है। बयान में कहा गया है कि आईजी डिफेंस को भारत में निर्मित ‘आईजी टी-शुल पल्स एंटी-ड्रोन सिस्टम' के लिए सेना और नौसेना दोनों से ऑर्डर मिल चुके हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि इसकी आपूर्ति और तैनाती लगभग एक महीने में होने की उम्मीद है।
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नयी दिल्ली. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की एक समिति ने बड़े संस्थानों में प्रति 500 विद्यार्थियों और छोटे संस्थानों में प्रति 100 विद्यार्थियों पर एक परामर्शदाता के प्रस्ताव समेत बच्चों के लिए सहायता प्रणाली को मजबूत करने, तनाव और चिंता पर समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। ये सिफारिशें यूजीसी समिति के उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) के लिए मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण पर एकसमान नीति संबंधी मसौदा दिशानिर्देशों में शामिल हैं। सिफारिशों के अनुसार, “उच्च शिक्षा संस्थानों को सभी आवश्यक भौतिक बुनियादी ढांचे से युक्त एक समर्पित मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र स्थापित करना होगा। तनाव और चिंता पर समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का भी सुझाव दिया गया है।” भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक समान मानसिक स्वास्थ्य नीति तैयार करने के संबंध में उच्चतम न्यायालय के 25 जुलाई 2025 के निर्देशों के बाद यूजीसी ने दिल्ली स्थित मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (आईएचबीएएस) के निदेशक राजिंदर के. धामिजा की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। मसौदा मानदंडों के तहत, यूजीसी को सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में एक समान मानसिक स्वास्थ्य नीति के कार्यान्वयन की निगरानी और समर्थन करने की केंद्रीय भूमिका सौंपी गई है।
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जयपुर. गीतकार एवं लेखक जावेद अख्तर ने बृहस्पतिवार को यहां 19वें जयपुर साहित्योत्सव (जेएलएफ) के उद्घाटन के अवसर पर कहा कि धर्मनिरपेक्षता का पाठ क्रैश कोर्स के जरिये नहीं पढ़ाया जा सकता, यह ‘जीवन जीने की शैली' है, जो स्वाभाविक रूप से आती है। जावेद अख्तर ने यहां कहा कि हालिया समय में धर्मनिरपेक्षता ‘चार अक्षरों वाला शब्द' बनकर रह गयी है, लेकिन धर्मनिरपेक्ष मूल्य औपचारिक दिशानिर्देशों या सैद्धांतिक पाठों के जरिये जड़ें नहीं जमा सकते। उन्होंने कहा, ‘‘धर्मनिरपेक्षता जीवन जीने का एक तरीका होना चाहिए, क्योंकि आपके आसपास सभी इस तरीके से जी रहे हैं और उसी से यह अपने आप आपके भीतर समाहित हो जाती है। यदि एक दिन आपको भाषण दिया जाए और आप उसे सुनने के बाद उसके क, ख, ग, घ बिंदुओं को रट लें तो यह फर्जी है, यह कृत्रिम है। यह ज्यादा लंबा नहीं चलेगा।'' अख्तर ने कहा, ‘‘लेकिन यदि यह आपके जीवन जीने का तरीका है- वैसा तरीका जो आपने अपने बुजुर्गों को जीते हुए देखा है, उन लोगों को देखा है, जिनका आप सम्मान करते हैं- तो यह स्वाभाविक रूप से आपके भीतर आ जाता है।'' उन्होंने ‘जावेद अख्तर : प्वाइंट्स आफ व्यू' सत्र में दर्शकों की भारी भीड़ के बीच ये बातें कही।
स्वभाव से नास्तिक अख्तर ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहा कि उनका पालन-पोषण ऐसे घर में हुआ जहां धर्म बिरले ही रोजमर्रा के जीवन में प्रवेश करता था। उन्होंने अपने घर में केवल अपने नाना नानी को पूजा करते देखा था। उन्होंने अपनी नानी का एक किस्सा सुनाया जो अशिक्षित महिला थीं, लेकिन उनमें गजब की संवेदनशीलता थी। जावेद अख्तर ने कहा कि काश! ‘आजकल के नेताओं में उसका दसवां हिस्सा भी संवेदनशीलता होती। बचपन में एक बार उनके नाना ने उनपर दबाव डाला कि यदि वह मजहबी आयतों को याद कर लेंगे तो वह उन्हें पचास पैसे देंगे जो कि उस जमाने में किसी खजाने से कम नहीं था। इस पर उनकी नानी ने गुस्से से मामले में दखल देते हुए कहा कि किसी को भी किसी दूसरे पर धर्म को जबरन थोपने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘वह दिन मेरी मजहबी तालीम का आखिरी दिन था। हां, उस समय तो मैं नानी के रवैये से खुश नहीं हुआ, क्योंकि पचास पैसे हाथ से जाते रहे। लेकिन आज पलटकर देखता हूं तो उस औरत के बारे में सोचता हूं, जिसे अपना नाम तक लिखना नहीं आता था, लेकिन उसकी संवेदनशीलता गजब की थी। काश! हमारे आज के नेताओं में इसका दसवां हिस्सा ही होता।'' जावेद अख्तर ने इस सोच पर भी चुटकी ली कि आज की युवा पीढ़ी में खासतौर पर कमियां हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी शिकायतें बहुत पुराने समय से चली आ रही हैं: “वर्तमान कभी भी स्वर्ण युग नहीं होता।” उन्होंने कहा, ‘‘आप बेशक गूगल खंगाल लें। यहां तक कि अरस्तु भी युवा पीढ़ी से खुश नहीं थे। ईसा के 360 या 350 साल पहले ये लिखा गया था कि युवा पीढ़ी में कोई एकाग्रता नहीं है। उन्हें कोई तमीज नहीं है। वे पूरी तरह से बर्बाद हैं। ये शिकायत हमेशा से रही है।'' जावेद अख्तर ने बीते समय और वर्तमान के बीच तुलना के संबंध में कहा, ‘‘आज फिल्म इंडस्ट्री में चीजें पहले से कहीं ज़्यादा आसान हो गई हैं... मुझे याद है जब मैं असिस्टेंट डायरेक्टर था और पहली बार फिल्म इंडस्ट्री में आया था, तो असिस्टेंट डायरेक्टर का पद बहुत बेइज़्ज़ती वाला होता था। हमारा काम क्या था? मैडम के जूते जल्दी से लाओ। हीरो का कोट कहां है? जैकेट कहां है? हम ये सब करते थे। हम कहते थे, 'मैं असिस्टेंट डायरेक्टर हूं।'' उन्होंने कहा, ‘‘‘लेकिन, आजकल के ‘असिस्टेंट', फिल्मी सितारों को उनके नाम से बुलाते हैं। जब मैं उन्हें देखता हूं तो डर जाता हूं। असिस्टेंट डायरेक्टर हीरो को उसके नाम से बुला रहा है, हमने कभी सोचा भी नहीं था।'' पांच दिन के इस साहित्योत्सव में 350 से ज़्यादा मशहूर लेखक और विद्वान शामिल हो रहे हैं, जिनमें बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक, शतरंज के महान खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद, ब्रिटिश एक्टर और लेखक स्टीफन फ्राई और पूर्व नौकरशाह एवं लेखक गोपाल कृष्ण गांधी, साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता अनुराधा रॉय, जानी-मानी फिल्म आलोचक भावना सोमाया और मशहूर लेखक मनु जोसेफ, रुचिर जोशी, और के.आर. मीरा शामिल हैं। साहित्योत्सव 19 जनवरी को खत्म होगा।





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