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नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को पंजाब के अमृतसर में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शिरकत की और संबोधित किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि औपचारिक शिक्षा पूरी करने के बाद छात्र अलग-अलग दिशाओं में अपनी यात्रा शुरू करेंगे।
उन्होंने कहा कि कुछ सरकारी या निजी क्षेत्र में सेवा करेंगे, कुछ उच्च शिक्षा या अनुसंधान करेंगे, जबकि कई अपना खुद का व्यवसाय स्थापित करेंगे या शिक्षण में अपना भविष्य बनाएंगे। हालांकि प्रत्येक क्षेत्र में अलग-अलग योग्यताओं और कौशलों की आवश्यकता होती है, लेकिन कुछ गुण हर क्षेत्र में प्रगति के लिए समान रूप से आवश्यक और सहायक होते हैं। ये गुण हैं सीखने की निरंतर इच्छा और लगन, विपरित और कठिन परिस्थितियों में भी नैतिक मूल्यों, सत्यनिष्ठा और ईमानदारी का दृढ़ पालन, परिवर्तन को अपनाने का साहस, असफलताओं से सीखने और आगे बढ़ने का संकल्प, टीम वर्क और सहयोग की भावना, समय और संसाधनों का अनुशासित उपयोग और ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के व्यापक हित के लिए करना है।राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि ये गुण न केवल उन्हें एक अच्छा पेशेवर बनाएंगे, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक भी बनाएंगे। उन्होंने छात्रों को याद दिलाया कि शिक्षा केवल जीविका का साधन नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का भी साधन है। उन्होंने कहा कि जिस समाज ने उन्हें शिक्षा प्रदान की है, उसके प्रति वे ऋणी हैं। विकास की राह में पिछड़ चुके लोगों के उत्थान के प्रयास करना इस ऋण को चुकाने का एक तरीका हो सकता है। पिछले दशक में भारत ने प्रौद्योगिकी विकास और आंत्रप्रेन्योर संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज कृषि से लेकर एआई और रक्षा से लेकर अंतरिक्ष तक, युवाओं के लिए अनेक उद्यमशीलता के अवसर उपलब्ध हैं। हमारे उच्च शिक्षा संस्थान अनुसंधान को बढ़ावा देकर, उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करके और सामाजिक रूप से प्रासंगिक नवाचारों को प्रोत्साहित करके इस प्रगति को और गति प्रदान कर सकते हैं।राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि हाल के वर्षों में पंजाब में मादक द्रव्यों के सेवन की समस्या एक गंभीर चुनौती बनकर उभरी है, जिससे सबसे अधिक प्रभावित युवा हैं। यह समस्या न केवल स्वास्थ्य, बल्कि समाज के सामाजिक, आर्थिक और नैतिक ताने-बाने को भी प्रभावित कर रही है। एक स्वस्थ समाज के लिए इस समस्या का स्थायी समाधान आवश्यक है। इस संदर्भ में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय जैसे शिक्षण संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इस विश्वविद्यालय के सभी हितधारकों को युवाओं को सही दिशा में मार्गदर्शन करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।उन्होंने आगे कहा कि ‘विकसित भारत’ के निर्माण में अगले दो दशक अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत का भविष्य उन युवाओं पर निर्भर करता है, जो वैज्ञानिक सोच रखते हैं, जिम्मेदारी से कार्य करते हैं और निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों से अपने छात्रों में इन मूल्यों को विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने युवा छात्रों से यह भी सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि वे जो भी पेशा चुनें, उनका योगदान राष्ट्र को मजबूत करने और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने में सहायक हो। - नयी दिल्ली. दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के जैतपुर पुश्ता इलाके में आवारा कुत्तों के झुंड द्वारा पीछा किए जाने के दौरान बचने की कोशिश में 20 वर्षीय युवक की उस वक्त मौत हो गयी जब उसकी मोटरसाइकिल एक गड्ढे में गिर गई। बाइक की हेडलाइट खराब थी। पुलिस ने बताया कि घटना 10 जनवरी की है जिसमें फार्मेसी में कंपाउंडर के रूप में काम करने वाले तुषार कुमार (20) की मौत हो गई जबकि बाइक पर पीछे बैठे उनके दोस्त फार्मासिस्ट सुधाकर सिंह (29) घायल हो गए। वे बाइक पर नशे में धुत एक रिश्तेदार की तलाश में निकले थे। सिंह ने बताया, "रात के करीब 10 बजे थे, जब हमने अपने मामा के बेटे उद्धम की तलाश शुरू की, जो एक विवाद के बाद नशे की हालत में घर से निकल गया था।" उन्होंने बताया कि चूंकि उद्धम अक्सर मदनपुर इलाके में जाता था, इसलिए हमने वहीं से अपनी खोज शुरू की। उन्होंने बताया कि एक कॉलोनी से लौटते समय बाइक की हेडलाइट काम नहीं कर रही थी और दृश्यता कम थी, तभी आवारा कुत्तों के एक झुंड ने हमारे वाहन को घेर लिया। बेहतर दृश्यता के लिए, सिंह ने अपने मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट चालू कर दी, और तुषार ने कुत्तों से बचने के लिए गाड़ी की गति बढ़ा दी, लेकिन वह सड़क के पास लगभग 1.5 फुट गहरे गड्ढे को नहीं देख सका। सिंह के अनुसार, तुषार ने मोटरसाइकिल पर से नियंत्रण खो दिया और वह गड्ढे में गिर गया। वाहन के अगले हिस्से से टकराने के बाद तुषार के सिर में गंभीर चोट आई और बहुत अधिक खून बहने लगा। सिंह ने बताया कि उसे तत्काल पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।सिंह ने बताया कि उन्हे भी चोटें आईं और बाद में उसे मोती नगर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनके हाथ में लिगामेंट फटने का पता लगाया। यह घटना तब और भी भयावह हो गई जब मृतक के परिवार के सदस्यों ने सिंह पर कथित तौर पर हमला किया और तुषार की मौत के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि तुषार के भाई ने कथित तौर पर उनपर हमला किया और बाद में उनके मामा ने उन्हें बचाया, जो उनके फोन करने के बाद मौके पर पहुंचे थे। पुलिस के अनुसार, उन्हें घटना के बारे में पीसीआर कॉल मिली और तुरंत एक टीम को घटनास्थल पर भेजा गया।पुलिस अधिकारी ने कहा, "हमने पीड़ित का बयान दर्ज कर लिया है। उनके अनुसार, वे अपने एक रिश्तेदार की तलाश कर रहे थे, तभी कुत्तों ने उनका पीछा किया।" उन्होंने कहा कि वे पूरी घटना के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रहे हैं ताकि घटना का पुनर्निर्माण किया जा सके और बेहतर ढंग से समझा जा सके कि वास्तव में क्या हुआ था। पुलिस ने सिंह के बयान के आधार पर 11 जनवरी को मामला दर्ज किया और कहा कि विस्तृत जांच चल रही है।
- जयपुर. राजस्थान के जयपुर-बीकानेर राजमार्ग पर फतेहपुर के हरसावा गांव के निकट बुधवार को एक अनियंत्रित कार की सामने से आ रहे एक ट्रक से टक्कर में एक ही परिवार की छह महिलाओं की मौत हो गई जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गईं। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, मृतकों की पहचान रघुनाथपुरा निवासी मोहिनी देवी (80), उनकी बेटी इंद्रा (60) बहू तुलसी (45) व चंदा देवी (55), संतोष (45) और आशा (60) के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि मोहिनी की पोती सोनू, बहू बरखा और कार चालक मांडेला निवासी वसीम को गंभीर घायल होने पर सीकर स्थानांतरित कर दिया गया। पुलिस के अनुसार, हादसा इतना भीषण था कि कार के परखच्चे उड़ गए और मृतकों के शव भी बड़ी मुश्किल से निकाले जा सके। पुलिस ने बताया कि शवों का पोस्टमार्टम बृहस्पतिवार को कराया जाएगा। पुलिस के अनुसार, कार में सवार लोग लक्ष्मणगढ़ में एक संबंधी की मौत होने पर दाह संस्कार में शामिल होने गये थे और वापस लौटते समय यह हादसा हो गया। पुलिस ने बताया कि दाह संस्कार में करीब दो दर्जन लोग चार गाड़ियों में गए थे और वापसी में एक गाड़ी में परिवार की आठ महिलाएं बैठी थीं।
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सागर द्वीप .पश्चिम बंगाल. मकर संक्रांति के अवसर पर पश्चिम बंगाल में हुगली नदी और सागर द्वीप में बंगाल की खाड़ी के संगम पर लगने वाले वार्षिक गंगासागर मेले में बुधवार को लाखों श्रद्धालुओं ने स्नान किया। तड़के ही श्रद्धालुओं की भीड़ सागर द्वीप के ठंडे पानी में स्नान करती,भजन और प्रार्थनाएं करती हुई दिखाई दी। मान्यता है कि इस शुभ दिन यहां स्नान करने से पाप धुल जाते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। कपिल मुनि आश्रम की ओर जाने वाले रास्ते पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं, जहां हजारों लोग धैर्यपूर्वक पूजा करने के लिए इंतजार कर रहे थे। भीड़ इतनी थी कि खड़े होने के लिए स्थान कम पड़ रहा था। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को अपराह्न 1.19 बजे सबसे शुभ ‘महा मुहूर्त', जिसे महेंद्रक्षण के नाम से जाना जाता है, शुरू हुआ और 24 घंटे तक चलेगा। उन्होंने बताया कि पवित्र मुहूर्त शुरू होने के कारण तीर्थयात्रियों की और भी अधिक भीड़ आने की उम्मीद है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि देशभर से तीर्थयात्री आए हैं, जिनमें से कई लोगों ने ठंड से बचने के लिए कंबल ओढ़कर खुले आसमान के नीचे भजन गाते हुए रात बिताई। राज्य सरकार ने कोलकाता से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित इस द्वीप पर व्यापक व्यवस्था की है, जहां हजारों पुलिसकर्मियों और स्वयंसेवकों को भारी भीड़ को संभालने के लिए तैनात किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था न केवल मेले के मैदानों पर बल्कि कोलकाता और आसपास के जिलों के रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर भी कड़ी कर दी गई है। पहली बार, उन्नत ‘वाटर ड्रोन' जिन्हें ‘बचाव ड्रोन' भी कहा जाता है, को तटरेखा के साथ निरंतर निगरानी के लिए तैनात किया गया है। एक अधिकारी ने बताया, ‘‘ये ड्रोन कपिल मुनि आश्रम और मुख्य स्नान घाटों के पास तैनात हैं। प्रत्येक ड्रोन 100 किलोग्राम तक का भार ले जा सकता है और संकट में फंसे तीर्थयात्रियों को शीघ्रता से निकालने में सक्षम है।'' उन्होंने बताया कि नागरिक सुरक्षा दल, आपदा राहत इकाइयां और नौसेना कर्मी भी स्नान घाटों पर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए चौबीसों घंटे गश्त कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल के ऊर्जा मंत्री अरूप बिस्वास ने बताया कि मंगलवार तक अनुमानित 60 लाख तीर्थयात्री गंगासागर पहुंच चुके थे और दिनभर में इनकी संख्या में और वृद्धि होने की उम्मीद है। गंगासागर तीर्थयात्रा हिंदू पौराणिक कथाओं में गहराई से निहित है। इस धार्मिक आयोजन में कई तीर्थयात्रियों ने भीड़भाड़ वाले मेला क्षेत्र में जेब कटने और चोरी की शिकायतें की हैं। पुलिस ने बताया कि अब तक जेब कटने के 25 मामले दर्ज किए गए हैं और विभिन्न अपराधों के लिए 112 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। भीड़भाड़ के दौरान लापता हुए 889 तीर्थयात्रियों में से 835 को पुलिस और स्वयंसेवकों की मदद से ढूंढकर उनके परिवारों से मिला दिया गया है। हालांकि, अधिकतर भक्तों के लिए, असुविधा और जोखिम आस्था के आगे फीके पड़ गए।
मध्य प्रदेश से आए एक बुजुर्ग तीर्थयात्री ने डुबकी लगाने के बाद कांपते हुए लेकिन मुस्कुराते हुए कहा, ‘‘आज ठंड कोई मायने नहीं रखती। अगर किसी दिन सब कुछ सहने की क्षमता है, तो वह संक्रांति पर गंगासागर का दिन है।'' -
नयी दिल्ली. सहायक प्रोफेसर डॉ चंदन तिवारी को उनके शोध प्रबंध के लिए प्रथम ‘आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी शोध' सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। ‘आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट' ने यहां जारी एक बयान में बताया कि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ विश्वनाथ त्रिपाठी की अध्यक्षता वाले छह सदस्यीय निर्णायक मंडल ने डॉ तिवारी के शोध प्रबंध ‘आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का भाषा चिंतन' को शोध सम्मान के लिए चयनित किया है। बयान के मुताबिक, ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉ अपर्णा द्विवेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में गाजीपुर के रहने वाले तिवारी ने ‘आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी भाषा चिंतन' विषय पर दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय से वर्ष 2022 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी और वह राजस्थान के सलूंबर जिले के राजकीय महाविद्यालय में सहायक प्रोफेसर (अतिथि संकाय) के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि मार्च में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में उन्हें पुरस्कार स्वरूप एक पदक और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा तथा राजकमल प्रकाशन चयनित शोध प्रबंध को एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित करेगा।
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अहमदाबाद. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि भारत के सनातन धर्म, संस्कृति और लोगों की आस्था को मिटाना आसान नहीं है, क्योंकि ये सूर्य और चंद्रमा की तरह शाश्वत और अमर हैं। सदियों से सोमनाथ मंदिर को नष्ट करने के बार-बार प्रयासों के बावजूद इसके पुनर्निर्माण का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मंदिर पर हमला करने वाले लोग अंततः मिट गए, लेकिन मंदिर आज भी शान से खड़ा है। गांधीनगर जिले के मानसा में 267 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद शाह एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 जनवरी को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का उद्घाटन किया था। महमूद गजनी ने 1,000 वर्ष पहले सोमनाथ मंदिर पर पहला हमला किया था।
शाह ने कहा कि 1000 साल बाद और कई बार नष्ट होने के बावजूद, सोमनाथ मंदिर अब भी शान से खड़ा है और उसका ध्वज आसमान में लहरा रहा है। उन्होंने कहा कि वहां एक भव्य सोमनाथ कॉरिडोर का निर्माण भी किया जा रहा है। शाह ने कहा, ‘‘यह पूरी दुनिया को संदेश है कि भारत के सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और भारतीय लोगों की आस्था को मिटाना इतना आसान नहीं है। यह सूर्य और चंद्रमा की तरह शाश्वत और अमर है। यह सोमनाथ मंदिर भारत की आस्था, विश्वास और गौरव का प्रतीक है।'' शाह ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पूरे एक वर्ष तक मनाया जाएगा। इस दौरान देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य भारत की आत्मा को झकझोरना, उसकी चेतना को जागृत करना और सनातन धर्म की जड़ों को समाज के सबसे गहरे स्तर तक मजबूत करना है। उन्होंने कहा, ‘‘लगभग एक हजार वर्ष पहले हमारे भव्य सोमनाथ मंदिर को महमूद गजनी ने ध्वस्त किया था। इसके बाद अलाउद्दीन खिलजी, अहमद शाह, महमूद बेगड़ा और औरंगजेब जैसे अन्य आक्रमणकारियों ने भी इस पर बार-बार हमले किए। लेकिन हर बार इस मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया।'' भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘विनाश करने वालों की सोच विनाश में विश्वास रखने वाली थी, जबकि निर्माण करने वालों की आस्था सृजन में थी। आज एक हजार वर्ष बाद वे विनाशक इतिहास में विलुप्त हो चुके हैं, लेकिन सोमनाथ मंदिर आज भी समुद्र के सामने गर्व से खड़ा है।'' शाह ने कहा कि आज़ादी के बाद इस मंदिर का पुनर्निर्माण सरदार वल्लभभाई पटेल, के एम मुंशी, जामनगर के महाराज और देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रयासों से किया गया। उन्होंने कहा कि इन सभी ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्स्थापन का संकल्प लिया था। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘उस संकल्प के पीछे भावना यह थी कि सोमनाथ पर हुआ हमला केवल मंदिर पर हमला नहीं था, बल्कि वह हमारी आस्था, हमारे धर्म और हमारे आत्मसम्मान पर प्रहार था। इसका उत्तर किसी और हमले में नहीं, बल्कि अपने आत्मसम्मान की रक्षा करने में निहित है।'' अन्य परियोजनाओं के तहत शाह ने अपने गृह नगर मानसा में एक खेल परिसर का उद्घाटन किया। गांधीनगर से सांसद शाह ने कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं और वैश्विक मानकों को ध्यान में रखते हुए इस खेल परिसर में कुछ और सुविधाएं जोड़े जाने की आवश्यकता है। शाह ने कहा, ‘‘इसलिए मैंने इस परिसर में सभी आवश्यक सुविधाएं जोड़ने के लिए सीएसआर (कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व) कोष के माध्यम से 15 करोड़ रुपये एकत्र करने का निर्णय लिया है। इस क्षेत्र के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की यह जिम्मेदारी होगी कि आसपास के इलाकों के बच्चे इन सुविधाओं का उपयोग करें।'' शाह ने कहा कि गुजरात सरकार अहमदाबाद को ‘स्पोर्ट्स हब सिटी' के रूप में विकसित कर रही है, जो पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित करेगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 में राष्ट्रमंडल खेल में भाग लेने के लिए कई देशों के खिलाड़ी अहमदाबाद आएंगे और 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी के अधिकार हासिल करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। -
नयी दिल्ली। मकर संक्रांति, बिहू और पोंगल का त्योहार बुधवार को देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर लोगों ने नदियों और जलाशयों में डुबकी लगाई तथा सामुदायिक भोज में भाग लिया, वहीं रंग-बिरंगी पतंगों से आसमान छाया रहा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मकर संक्रांति पर लोगों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह उत्सव देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है और नागरिकों को एकजुटता की भावना की याद दिलाता है जो सभी को एक सूत्र में पिरोता है। मोदी ने असम के लोगों को माघ बिहू की भी शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह आनंद, स्नेह और भाईचारे का अवसर है जो असमिया संस्कृति की सर्वोत्तम विशेषताओं को दर्शाता है।
दिल्ली में मोदी ने पोंगल समारोह में भाग लिया और इसे दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक का प्रतिनिधित्व करने वाला एक वैश्विक त्योहार बताया। मोदी केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के आवास पर आयोजित समारोह में तमिल समाज की प्रमुख हस्तियों के साथ मौजूद थे, जिनमें हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘पराशक्ति' के कलाकार भी शामिल थे। ‘पोंगल' उत्सव से पहले मनाया जाने वाला भोगी त्योहार पूरे तमिलनाडु में मनाया गया। केरल और पुडुचेरी में भी पोंगल उत्सव की शुरुआत हुई। असम में माघ बिहू उत्सव मंगलवार रात को उरुका (सामुदायिक भोज) के साथ शुरू हुआ, जहां लोग फसल की कटाई का त्योहार मनाने के लिए एक साथ खाना पकाते और खाते हैं। उत्सव का एक मुख्य आकर्षण ‘भेलाघर' है, जो फूस का बना होता है। इन्हीं संरचनाओं के अंदर और आसपास अधिकांश सामुदायिक भोज आयोजित किए गए। उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति उत्सव के तहत नौ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने सुबह प्रयागराज में गंगा और संगम में डुबकी लगाई। उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा, जबकि देश के कई हिस्सों में बुधवार को यह त्योहार मनाया गया। वर्तमान माघ मेले का दूसरा प्रमुख स्नान उत्सव मकर संक्रांति बृहस्पतिवार को है।
राजस्थान में मकर संक्रांति का पर्व बुधवार को पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। लोग मंदिरों में दर्शन करने पहुंचे और दान किया। राजस्थान में, तड़के से लोग अजमेर के पुष्कर सरोवर और जयपुर के गलता धाम में स्नान करने के लिए उमड़ पड़े। एकादशी के साथ यह दिन पड़ने के कारण इस वर्ष यह त्योहार विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। गोविन्द देवजी मंदिर, ताड़केश्वरजी मंदिर और राज्य के अन्य तीर्थ स्थलों को फूलों और पतंगों से सजाया गया था। कड़ाके की ठंड के बावजूद लाखों तीर्थयात्रियों ने सागर द्वीप में वार्षिक गंगासागर मेले में हुगली नदी और बंगाल की खाड़ी के संगम पर स्नान किया। सूर्योदय से काफी पहले ही श्रद्धालुओं की भीड़ सागर द्वीप के ठंडे पानी में उतर गई और भजन-कीर्तन करने लगी। मकर संक्रांति के अवसर पर ओडिशा में लोगों ने विभिन्न जलाशयों में स्नान किया। इस अवसर पर सैकड़ों लोग पुरी के जगन्नाथ मंदिर में पहुंचे, जहां सुबह से ही विशेष अनुष्ठान किए जा रहे थे। भगवान बलभद्र, भगवान जगन्नाथ और देवी सुभद्रा को मकर चौरासी वेश में सजाया गया था।
रंग-बिरंगे फूलों और तुलसी की मालाएं त्रिमूर्ति के इस दिन के वस्त्र का हिस्सा रहीं। देवताओं को विशेष मिठाई ‘मकर चौला' अर्पित की जाती है जो ताजे चावल, गुड़, नारियल और केले से तैयार की जाती है। सूर्योदय का दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग चंद्रभागा तट और कोणार्क के सदियों पुराने सूर्य मंदिर भी गए। ओडिशा में बुधवार तड़के रायगड़ा जिले में पटाखों में हुए विस्फोट में चार लोग झुलस गए। यह घटना रायगा कस्बे के येदुसाही में हुई, जो तेलुगु भाषी लोगों की बस्ती है और जहां मकर संक्रांति से पहले ‘भोगी पोड़ी' मनाई जा रही थी। गुजरात में मकर संक्रांति (जिसे उत्तरायण के नाम से जाना जाता है) पर आसमान हजारों रंग-बिरंगी पतंगों से पट गया और ‘काई पो चे' के नारे गूंज रहे थे। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में तीन दिवसीय फसल उत्सव भोगी के साथ शुरू हुआ। इस उत्सव के उपलक्ष्य में राज्य भर में सुबह-सुबह अलाव जलाए गए। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यह तीन दिवसीय उत्सव भोगी, मकर संक्रांति और कनुमा के रूप में मनाया जाता है। पंजाब और हरियाणा में मंगलवार को लोहड़ी मनाई गई। - गुवाहाटी/ दिग्गज गायक भूपेन हजारिका के सबसे छोटे भाई और प्रख्यात असमिया संगीतकार समर हजारिका का मंगलवार को निधन हो गया। वह कुछ समय से बीमार थे। परिवार के सूत्रों ने यह जानकारी दी। समर हजारिका कुछ समय से बीमार थे और हाल में उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी। वह 75 वर्ष के थे और उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं। वह 10 भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। उन्होंने रेडियो, एल्बम और फिल्मों के लिए गीत गाए थे और संगीत दिया था। उन्होंने परिवार की समृद्ध संगीत विरासत को आगे बढ़ाने में, विशेष रूप से भारत रत्न से सम्मानित अपने बड़े भाई की विरासत को, मानवता और सार्वभौमिक भाईचारे के गीतों के माध्यम से आगे बढ़ाने में एक प्रमुख भूमिका निभाई। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने समर हजारिका के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया।उन्होंने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, “उनकी भावपूर्ण आवाज हर अवसर को रोशन कर देती थी और उन्होंने असम के सांस्कृतिक परिदृश्य में अमिट योगदान दिया। उन्होंने सुधाकांत डॉ. भूपेन हजारिका की समृद्ध विरासत को भी आगे बढ़ाया और उनकी जन्म शताब्दी मनाने के हमारे प्रयासों में व्यापक योगदान दिया।” मुख्यमंत्री ने कहा, “उनके निधन से असम ने एक और स्वर्णिम आवाज खो दी है। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं।” केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “ उरुका (माघ बिहू पर्व का दिन) के दिन प्रख्यात गायक के निधन की खबर बेहद दुखद है। उन्होंने अपनी मधुर आवाज से लोगों के दिलों और आत्माओं को मोह लिया थ।” मंत्री ने कहा कि असमिया संगीत में उनका योगदान अमर रहेगा और हमेशा याद रखा जाएगा।
- नयी दिल्ली/ फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के राजनयिक सलाहकार इमैनुएल बोन ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। मैक्रों के जल्द ही भारत आने की संभावना है।मोदी ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में बोन के साथ मुलाकात पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा, भारत–फ्रांस के बीच मजबूत और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारी की फिर से पुष्टि की गई, जो विभिन्न क्षेत्रों में करीबी सहयोग से परिलक्षित होती है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच सहयोग का नवाचार, प्रौद्योगिकी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में विस्तार होना उत्साहजनक है, विशेषकर ऐसे समय में जब दोनों देश ‘नवाचार वर्ष' मना रहे हैं। उन्होंने कहा, प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। निकट भविष्य में राष्ट्रपति मैक्रों का भारत में स्वागत करने को लेकर उत्सुक हूं।'
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नई दिल्ली। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि छोटे कारोबारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का फायदा उठाना चाहिए और उत्पादकता बढ़ाने के लिए दैनिक कार्य में एआई का इस्तेमाल करना चाहिए।
साथ ही केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मौजूदा दौर में खासकर युवाओं को एआई की बेसिक समझ होनी चाहिए और पता होना चाहिए यह कैसे काम करता है, कहां इसका इस्तेमाल हो सकता है और पूरी जिम्मेदारी के साथ इसका इस्तेमाल करना चाहिए। आईटी मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी बयान के अनुसार, उन्होंने राष्ट्रीय युवा दिवस मनाते हुए कहा, “इसी मकसद से नेशनल एआई लिटरेसी प्रोग्राम लॉन्च किया गया है और उम्मीद है कि यह प्रोग्राम अगले एक साल में 10 लाख स्टूडेंट्स को जोड़ेगा।”सरकार ने नए लॉन्च किए गए नेशनल एआई लिटरेसी प्रोग्राम और इसके फ्लैगशिप ‘युवा एआई फॉर ऑल’ कोर्स पर जोर देकर युवा सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से मजबूत किया है, जो स्वामी विवेकानंद के युवाओं को आगे बढ़ाने के विजन को एआई-संचालित भविष्य के लिए जरूरी टूल्स से जोड़ता है। इस इवेंट में, ‘युवा एआई फॉर ऑल’ फाउंडेशन कोर्स पर जोर दिया गया, ताकि एआई साक्षरता को एक जरूरी लाइफ स्किल बनाया जा सके, जो नेशनल यूथ डे के युवा शक्ति पर फोकस के साथ मेल खाता है।यह कोर्स चार घंटे से थोड़ा अधिक समय का है, युवा एआई फॉर ऑल को एआई सीखने के लिए एक आसान एंट्री पॉइंट के तौर पर डिजाइन किया गया है, जिसके लिए किसी पिछले टेक्निकल बैकग्राउंड की जरूरत नहीं है। यह ‘युवा एआई फॉर ऑल’ कोर्स 11 भाषाओं (असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, तमिल और तेलुगु) में उपलब्ध होगा। यह कोर्स बिल्कुल मुफ्त है और फ्यूचरस्किल्स प्राइम, आईजीओटीकर्मयोगी, दीक्षा और दूसरे पॉपुलर एड-टेक पोर्टल्स जैसे लीडिंग लर्निंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।कोर्स पूरा होने पर, हर सीखने वाले को भारत सरकार की तरफ से एक ऑफिशियल सर्टिफिकेट मिलेगा। आईटी मंत्रालय ने कहा, “युवा एआई फॉर ऑल,नेशनल एआई लिटरेसी प्रोग्राम एआई तक पहुंच को आसान बनाने और भारत के नागरिकों, खासकर युवाओं को एआई-आधारित भविष्य के अवसरों और जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।” -
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में एक अहम संगठनात्मक बदलाव होने वाला है, क्योंकि इसके राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन 19 जनवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन फाइल करने वाले हैं। नामांकन प्रक्रिया के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक के तौर पर मौजूद रहने की उम्मीद है, जो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच नबीन के नेतृत्व में मजबूत समर्थन और विश्वास को दिखाता है।
प्रधानमंत्री की मौजूदगी को भाजपा की संगठनात्मक और वैचारिक दिशा में निरंतरता और स्थिरता पर जोर देने के तौर पर देखा जा रहा है। नामांकन प्रक्रिया भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को चुनने के लिए उसके स्थापित आंतरिक संगठनात्मक ढांचे का हिस्सा है। कई वरिष्ठ नेता, केंद्रीय नेतृत्व के सदस्य और प्रमुख पदाधिकारी इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं, जिससे यह पार्टी के संगठनात्मक कैलेंडर में एक हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम बन जाएगा।नामांकन प्रोसेस पूरा होने के बाद, नए भाजपा अध्यक्ष की औपचारिक घोषणा 20 जनवरी को होने वाली है। उम्मीद है कि इस घोषणा से आने वाली चुनावी चुनौतियों से पहले पार्टी के नेतृत्व संरचना के बारे में स्पष्टता मिलेगी और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की संगठनात्मक रणनीति को आकार मिलेगा।राजनीतिक जानकार इन घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहे हैं, क्योंकि यह नियुक्ति ऐसे अहम समय पर हो रही है जब भाजपा अपनी संगठनात्मक ताकत को मजबूत करने और अपनी नेतृत्व को लंबे समय के शासन और चुनावी लक्ष्यों के साथ जोड़ने पर ध्यान दे रही है। 20 जनवरी को आधिकारिक घोषणा के बाद और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।बिहार के पांच बार के विधायक नितिन नबीन को 14 दिसंबर को भाजपा का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, लेकिन खरमास (अशुभ समय) के कारण पार्टी अध्यक्ष के तौर पर उनका औपचारिक पदभार ग्रहण रुका हुआ था, जो 14 जनवरी को खत्म हो रहा है।कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद से, नबीन अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहे हैं और पार्टी के साथियों से मिल रहे हैं। नवीन पहले पार्टी में कई अहम संगठनात्मक पदों पर रह चुके हैं, जिसमें भारतीय जनता युवा मोर्चा के बिहार अध्यक्ष का पद भी शामिल है।( -
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के केरल प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य का आधिकारिक नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ‘केरलम’ नाम मलयालम भाषा और राज्य की सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है।
राजीव चंद्रशेखर ने पत्र में यह भी बताया कि जून 2024 में केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें राज्य के नाम को आधिकारिक दस्तावेजों में ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने की मांग की गई है। चंद्रशेखर ने यह भी बताया कि उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को भी पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा से इस महान राज्य को, जो अपनी समृद्ध परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है, ‘केरलम’ के रूप में ही देखती आई है। पार्टी की विचारधारा पारंपरिक, भाषाई और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सम्मान पर आधारित है।प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में राजीव चंद्रशेखर ने उम्मीद जताई कि राज्य का नाम बदलने के बाद सभी राजनीतिक दल मिलकर केरलम की हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक विरासत को संजोने और पुनर्जीवित करने के लिए काम करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस पहल से एक विकसित और सुरक्षित केरलम का निर्माण संभव होगा, जहां सभी मलयाली (चाहे वे किसी भी धर्म से हों) अपनी आस्था और परंपराओं को लेकर सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर सकें। राजीव चंद्रशेखर ने यह भी कहा कि राज्य का नाम ‘केरलम’ रखने से उन कट्टरपंथी तत्वों के प्रयासों को कमजोर किया जा सकेगा, जो धर्म के आधार पर राज्य को बांटने और अलग-अलग जिले बनाने की मांग करते रहते हैं।उनके अनुसार, अपनी ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा केरलम, समाज को जोड़ने का काम करेगा।पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि मलयालम भाषा में निहित और विशिष्ट नाम ‘केरलम’ को ही राज्य का आधिकारिक नाम सुनिश्चित किया जाए।राजीव चंद्रशेखर ने विश्वास जताया कि अपनी गौरवशाली विरासत से जुड़ा ‘केरलम’ भविष्य में सभी मलयालियों के लिए एक उज्ज्वल, समृद्ध और सुरक्षित राज्य के रूप में आगे बढ़ेगा। -
नई दिल्ली। मकर संक्रांति और माघ मेला 2026 के अवसर पर प्रयागराज के संगम तट पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त टेंट सिटी विकसित की गई है, जो आध्यात्मिक पर्यटन का नया मानक स्थापित कर रही है। देश-दुनिया से संगम स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और यादगार अनुभव देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) द्वारा संगम क्षेत्र की रेत पर अत्याधुनिक टेंट कॉलोनी बसाई गई है। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की परिकल्पना के अनुरूप विकसित यह टेंट सिटी माघ मेला को केवल आस्था का आयोजन नहीं, बल्कि पर्यटन, संस्कृति और रोजगार से जोड़ने का सशक्त माध्यम बना रही है।
उन्होंने बताया कि प्रयागराज के अरैल सेक्टर-7 में त्रिवेणी पुष्प से पूर्व विकसित टेंट कॉलोनी में कुल 50 आधुनिक कॉटेज तैयार किए गए हैं। श्रद्धालु इन कॉटेज की ऑनलाइन बुकिंग यूपीएसटीडीसी की वेबसाइट के माध्यम से कर सकते हैं। टेंट सिटी को तीन श्रेणियों- प्रीमियम, लग्जरी और डीलक्स में विभाजित किया गया है।प्रीमियम कॉटेज का किराया 15 हजार रुपये, लग्जरी का 11 हजार 500 रुपये और डीलक्स कॉटेज का किराया 7 हजार 500 रुपये निर्धारित किया गया है। इनमें क्रमशः 12 प्रीमियम, 8 लग्जरी और 30 डीलक्स टेंट शामिल हैं। पर्यटन मंत्री ने बताया कि टेंट सिटी में ठहरने वाले श्रद्धालुओं को उसी शुल्क में सात्विक भोजन की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है।परिसर में यज्ञशालाओं का निर्माण किया गया है, जहां नियमित रूप से भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं। साथ ही, सांस्कृतिक वातावरण को सजीव बनाने के लिए कलाग्राम भी विकसित किया गया है, जहां स्थानीय लोककला और शिल्प को बढ़ावा दिया जा रहा है।जयवीर सिंह ने बताया कि माघ मेला 2026 में रोजगार और नवाचार को विशेष बढ़ावा मिला है। संगम टेंट कॉलोनी परिसर में एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत प्रदर्शनी लगाई गई है, जहां प्रयागराज की पारंपरिक मूंज कला के स्टॉल लगाए गए हैं। इससे स्थानीय कारीगरों को प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि माघ मेला अब केवल आध्यात्मिक पहचान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह उद्यमियों और हस्तशिल्पियों के लिए एक बड़े व्यावसायिक मंच के रूप में उभर रहा है।देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु मूंज से बने डलिया, पेन स्टैंड, रोटी रखने के बर्तन, गमले और सजावटी उत्पादों को विशेष रूप से पसंद कर रहे हैं। नैनी क्षेत्र के महेवा इलाके की यह पारंपरिक कला, जिसे वर्षों से स्थानीय कारीगर आगे बढ़ा रहे हैं, अब आधुनिक स्वरूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही है।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन है कि प्रदेश का हर बड़ा आयोजन आस्था के साथ-साथ रोजगार, पर्यटन और स्थानीय कला को सशक्त करे। संगम टेंट सिटी इस सोच का सजीव उदाहरण है, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक वातावरण का अनूठा अनुभव श्रद्धालुओं को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि माघ मेला 2026 प्रदेश के सांस्कृतिक वैभव और आर्थिक संभावनाओं को एक साथ आगे बढ़ाता हुआ दिखाई दे रहा है। -
नई दिल्ली। कुत्तों के काटने पर मौत या चोट के लिए मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा, डॉग लवर्स की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणियां की। अदालत ने कहा कि वह कुत्तों के काटने पर मौत या चोट के लिए राज्य सरकारों पर मुआवजा तय करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मामले में सुनवाई के दौरान आवारा कुत्तों को खुले में खाना खिलाने वालों के रवैये पर सवाल खड़ा किए। कोर्ट ने कहा कि क्या उनके जज्बात सिर्फ कुतों के लिए है , इंसान के लिए नहीं है। कोर्ट ने पूछा कि अगर किसी आवारा कुत्ते के हमले में नौ साल के बच्चे की मौत हो जाती है, तो इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए?सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों में पाए जाने वाले वायरस का जिक्र किया और कहा, “जब बाघ आवारा कुत्तों पर हमला करके खाते हैं, उन्हें डिस्टेंपर की बीमारी हो जाती है और आखिरकार वे मर जाते हैं।” सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने दलील दी कि इस मामले को कुत्ते बनाम इंसान के मुद्दे के तौर पर नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे जानवर बनाम इंसान का मुद्दा देखना चाहिए। पिछले साल सांप के काटने से 50 हजार लोगों की मौत हुई थी। बंदरों के काटने के मामले भी होते हैं। चूहे कंट्रोल करने के लिए भी कुत्ते जरूरी हैं। इसलिए इकोसिस्टम को बैलेंस करना होगा।मेनका गुरुस्वामी ने तर्क दिया कि आवारा कुत्तों को मारने से उनकी आबादी कम नहीं होगी, और नसबंदी ही एकमात्र प्रभावी समाधान है। उन्होंने कहा कि अगर रेगुलेटर ने अपना काम ठीक से किया होता, तो आज हम इस स्थिति का सामना नहीं कर रहे होते। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह कोर्ट की कार्यवाही के बजाय एक पब्लिक प्लेटफॉर्म बन गया है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हर कुत्ते के काटने और हर मौत पर हम राज्यों पर जरूरी इंतजाम न करने के लिए भारी मुआवजा तय करेंगे। कुत्तों को खाना खिलाने वालों पर भी जिम्मेदारी तय करेंगे। आप उन्हें अपने घर ले जाएं और वहां रखें। उन्हें घूमने, काटने, पीछा करने की इजाजत क्यों दी जानी चाहिए? कुत्ते के काटने का असर जिंदगी भर रहता है।” -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का व्यक्तित्व और विचार विकसित भारत के संकल्प को लगातार नई ऊर्जा देते हैं। राष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री ने युवाओं से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि यह दिन देशवासियों, खासकर युवाओं के लिए नई शक्ति और आत्मविश्वास लेकर आए।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा –“भारतीय युवाशक्ति के सशक्त प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद को उनकी जयंती पर मेरी आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व विकसित भारत के संकल्प में निरंतर नई ऊर्जा का संचार करता है। मेरी कामना है कि राष्ट्रीय युवा दिवस का यह दिव्य अवसर सभी देशवासियों, विशेषकर हमारे युवा साथियों के लिए नई शक्ति और नया आत्मविश्वास लेकर आए।” -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि कोयला विकसित भारत 2047 की यात्रा में अहम भूमिका निभाना जारी रखेगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पीएम मोदी ने केंद्रीय कोयला और खनन मंत्री जी.कृष्ण रेड्डी का एक लेख साझा किया, जिसमें कहा गया था कि कैसे पिछले 11 वर्षों में भारत का कोयल क्षेत्र स्वयं को अगली पीढ़ी के ईंधन के रूप में ढाल रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कोयला विकसित भारत 2047 की दिशा में भारत की यात्रा में योगदान देता रहेगा, और ग्रीन टेक्नोलॉजी के साथ आसानी से एकीकृत होगा।” सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, देश में साल 2024-25 में अब तक का सबसे अधिक कोयले का उत्पादन हुआ है।साल 2024-25 में पूरे भारत में कोयला उत्पादन 1,047.523 मिलियन टन रहा, जबकि साल 2023-24 में यह 997.826 मिलियन टन था, जिसमें लगभग 4.98 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कोयले की आपूर्ति भी वित्त वर्ष 2023-24 में 973.01 मिलियन टन से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 1025.33 मिलियन टन हो गई है, जिसमें लगभग 5.38 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।देश में कुल कोयला उत्पादन में एक बड़ी छलांग देखी गई है और यह वित्त वर्ष 2013-14 में 565.77 मिलियन टन से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 1047.52 मिलियन टन हो गया है। इसके अलावा, 2025 (जनवरी-दिसंबर) के दौरान, देश ने लगभग 1,042.90 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया है, पिछले साल की इसी अवधि में लगभग 1,039.62 मिलियन टन कोयले के उत्पादन की तुलना में इसमें लगभग 0.23 प्रतिशत की वृद्धि हुई।मौजूदा समय में कोयला एनर्जी का मुख्य सोर्स है, जो भारत की प्राथमिक वाणिज्य ऊर्जा में 55 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है। कुल पावर जेनरेशन में, कोयले से चलने वाले पावर प्लांट्स का हिस्सा लगभग 72 प्रतिशत है, और कोयला भारत की एनर्जी सिक्योरिटी का एक जरूरी हिस्सा बना रहेगा।खास बात यह है कि इस दौरान उपभोक्ताओं को उनकी जरूरत के हिसाब से कोयले की भरपूर और बिना रुकावट आपूर्ति हुई है और देश में कोयले की कमी की कोई रिपोर्ट नहीं आई है। -
नई दिल्ली। असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी (एडीबीयू) नॉर्थईस्ट भारत के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है। यूनिवर्सिटी अपने पहले सैटेलाइट मिशन के लॉन्च की तैयारी कर रही है, जिसे क्षेत्र में अंतरिक्ष अनुसंधान और इनोवेशन की दिशा में एक बड़ी छलांग के रूप में देखा जा रहा है।
इस सैटेलाइट का नाम ‘लाचित-1’ रखा गया है और इसे फैकल्टी मेंबर्स के मार्गदर्शन में पूरी तरह से यूनिवर्सिटी के छात्र विकसित कर रहे हैं। इसके साथ ही एडीबीयू नॉर्थईस्ट भारत की पहली ऐसी यूनिवर्सिटी बन जाएगी, जो इतना महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन शुरू करने जा रही है।इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2022 में प्रोफेसर बिक्रमजीत काकती के नेतृत्व में की गई थी। मिशन को आगे बढ़ाने के लिए पांच छात्रों की एक कोर टीम गठित की गई है, जो पूरे प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रही है। इसके अलावा लगभग 20 छात्रों के अलग-अलग समूह सैटेलाइट डिजाइन, इंजीनियरिंग, डेटा सिस्टम, कम्युनिकेशन और मिशन प्लानिंग जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। यह प्रोजेक्ट छात्रों के लिए अकादमिक ज्ञान को वास्तविक तकनीकी अनुप्रयोग से जोड़ने का एक अनूठा अवसर साबित हो रहा है।प्रोजेक्ट से जुड़े छात्रों का कहना है कि यह पहल वर्षों की टीम वर्क, तकनीकी सीख और इनोवेशन का परिणाम है। उनके अनुसार, इस मिशन के जरिए उन्हें रियल-वर्ल्ड सैटेलाइट टेक्नोलॉजी का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा, जो भविष्य में अंतरिक्ष विज्ञान और उन्नत तकनीक के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए बेहद उपयोगी होगा।असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी में इंडिजिनस नॉलेज के डायरेक्टर दिनेश बैश्य ने आईएएनएस से बातचीत में इस मिशन को नॉर्थईस्ट भारत के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह इस क्षेत्र में अपनी तरह का पहला मिशन होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नॉर्थईस्ट भारत के इतिहास में यह पहली बार होगा जब किसी यूनिवर्सिटी के छात्र और शिक्षक मिलकर एक सैटेलाइट लॉन्च करेंगे, जो क्षेत्र की शैक्षणिक और तकनीकी क्षमताओं को नई पहचान देगा।सैटेलाइट ‘लाचित-1’ का नाम महान अहोम सेनापति लाचित बोरफुकन के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने मुगल सेना के खिलाफ असम की रक्षा की थी। लाचित बोरफुकन साहस, नेतृत्व और स्वदेशी गौरव के प्रतीक माने जाते हैं। यूनिवर्सिटी का उद्देश्य इन्हीं मूल्यों को युवा इनोवेटर्स में विकसित करना है, ताकि वे तकनीक के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़े रहें।लाचित-1 सैटेलाइट को भूस्खलन, बाढ़, मौसम के पैटर्न और पर्यावरणीय बदलावों की निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है। यह सैटेलाइट नॉर्थईस्ट भारत में आपदा प्रबंधन, जलवायु अनुसंधान और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयासों को मजबूती देने के लिए महत्वपूर्ण डेटा उपलब्ध कराएगा, जिससे समय रहते प्रभावी कदम उठाए जा सकेंगे।यूनिवर्सिटी प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस मिशन का मुख्य उद्देश्य अनुभवात्मक शिक्षा के माध्यम से छात्रों को सशक्त बनाना है। इस पहल के जरिए युवा दिमागों को अंतरिक्ष विज्ञान और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक प्रयास के साथ असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी नॉर्थईस्ट भारत को राष्ट्रीय अंतरिक्ष इनोवेशन के मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है और नई पीढ़ी को आसमान से आगे, सितारों तक पहुंचने का सपना देखने के लिए प्रेरित कर रही है। - सोमनाथ (गुजरात). सोमनाथ मंदिर के लिये रविवार को निकाली गई शौर्य यात्रा में डमरू बजाते हुए पुजारियों का एक समूह और गुजरात के विभिन्न हिस्सों से लाए गए 108 अश्व शामिल थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक खुली छत वाली गाड़ी से इस भव्य यात्रा का अवलोकन किया। यात्रा शंख सर्कल से शुरू हुई और प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर परिसर के सामने स्थित वीर हमीरजी गोहिल सर्कल की ओर लगभग एक किलोमीटर का सफर तय किया। डमरू बजाते हुए पुजारियों का एक समूह शौर्य यात्रा का हिस्सा था और प्रधानमंत्री के वाहन के आगे क्रम से चल रहा था। मोदी के हाथ में एक ढोल था, जिसे उन्होंने यात्रा की शुरुआत में थोड़ी देर बजाया और फिर सुरक्षाकर्मियों को सौंप दिया। यात्रा के आगे बढ़ने पर दोनों ओर सड़कों पर जमा भीड़ ने जयकारे लगाए और कई लोगों ने फूलों की पंखुड़ियां बरसाईं, जबकि कलाकारों ने यात्रा मार्ग पर नियमित अंतराल पर बने विभिन्न मंचों पर भारत के विभिन्न नृत्य रूपों का प्रदर्शन किया। यात्रा में 108 घोड़ों का दल सबसे अलग दिख रहा था, जिनके सवारों ने सफेद कमीज के साथ खाकी पतलून और केसरिया रंग की टोपी पहन रखी थी। पाटन जिले में पुलिस कांस्टेबल भरत कुमार जटाभाई ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया, "ये घोड़े और इनके सवार गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों से लाए गए हैं। हम गुजरात पुलिस से हैं और हमने पिछले दस दिनों में इसका अभ्यास किया है। इस शौर्य यात्रा का हिस्सा बनकर मुझे गर्व महसूस हो रहा है।" उन्होंने कहा, "पाटन जिले से लगभग दस घोड़े लाए गए हैं।"प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की शौर्य यात्रा में शामिल होकर अत्यंत गौरवान्वित हूं। इस अवसर पर मंदिर की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाली मां भारती की अनगिनत वीर संतानों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उनका अदम्य साहस और पराक्रम देशवासियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।” उन्होंने ऐतिहासिक मंदिर में प्रार्थना की और फिर राजकोट जाने से पहले मंदिर के पास एक मैदान में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान सभा को संबोधित किया। शौर्य यात्रा के मार्ग पर विभिन्न नृत्य मंडलियों ने भरतनाट्यम, कथक, कच्छी, गिद्धा, मणिपुरी नृत्य जैसी नृत्य प्रस्तुतियों का प्रदर्शन किया। कृपा ढाल उन कलाकारों में शामिल थीं, जिन्होंने कच्छी नृत्य का प्रतिनिधित्व किया, जबकि उनकी बेटी वाणी ढाल भरतनाट्यम टीम का हिस्सा थीं। उन्होंने बताया, "प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आयोजित शौर्य यात्रा में प्रस्तुति देना अत्यंत आनंदमय अनुभव था। विभिन्न नृत्य शैलियों ने इस आयोजन में भारत के रंग बिखेर दिए।"
- सोमनाथ (गुजरात). सोमनाथ मंदिर परिसर में शनिवार को हजारों श्रद्धालु पहुंच गये, आधी रात को सिहरन होने के बावजूद डटे रहे और शानदार आतिशबाजी, सजावट, ड्रोन शो और धार्मिक उत्साह के गवाह बने। ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी प्राचीन तीर्थस्थल पहुंचे। उनके परिसर में पहुंचने के समय बाद ही भीड़ चरम पर पहुंच गई जिनमें स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज के श्रद्धालु भी शामिल थे। अरब सागर के किनारे इस मंदिर में रविवार की सुबह से ही तीर्थयात्रियों का ही रेला लगा रहा।मुंबई में रहने वाले गुजरात के दंपती रमेश रावजी वडाडोरिया और जया रमेश रविवार सुबह भगवान शिव के दर्शन करने पहुंचे। कपड़े का कारोबार करने वाले वडाडोरिया ने दर्शन करने के बाद कहा, ‘‘हम बाबा (भगवान शिव) के दर्शन करने और उनका आशीर्वाद लेने आए हैं। ठंड तो है, लेकिन उनकी दिव्य कृपा हमें मुंबई से यहां ले आई है।'' प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को ‘शौर्य यात्रा' का नेतृत्व किया। शंख गोल चक्कर से शुरू हुई यात्रा वीर हमीरजी गोहिल गोल चक्कर पर समाप्त हुई और इसमें 108 घोड़े भी शामिल थे। प्रधानमंत्री ने शनिवार शाम को सोमनाथ मंदिर में ‘ओंकार मंत्र' के जाप में हिस्सा लिया था और भगवान शिव के दर्शन किये थे। उन्होंने 3,000 ड्रोन के एक समूह द्वारा प्रस्तुत एक भव्य शो भी देखा। मुंबई से 24 अन्य महिलाओं के साथ आईं प्रीति करेलिया ने बताया कि वह केवल इस समारोह के लिए सोमनाथ आई हैं। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा' से कहा, ‘‘हम आज सोमनाथ मंदिर दर्शन करने और अपने प्रधानमंत्री से मिलने आए हैं। इस उत्सव को देखना एक अद्भुत अनुभव है। आतिशबाजी, मंदिर की ओर जाने वाली सड़कों की सजावट और शानदार ड्रोन शो ने दिव्यता को और भव्य बना दिया है जिसके कारण इतने सारे लोग मात्र एक दिन में इस मंदिर में आए हैं।'' महिलाओं के इस समूह ने खुद को मुंबई की ‘भजन मंडली' बताया।शंख गोल चक्कर से वीर हमीरजी गोहिल गोल चक्कर तक मंदिर की ओर जाने वाली मुख्य सड़क को फूलों और विषयगत सजावट से सजाया गया है। त्रिशूल, ओम और डमरू के आकार में रोशनी की सजावट की गई है। साथ ही सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के पोस्टर और फूलों से बने शिवलिंग भी लगे हुए थे। पूरे शहर में बड़े-बड़े बैनरों पर पर्व का नाम और ‘अखंड सोमनाथ, अखंड भारत' जैसे नारे और ‘प्रहार से पुनरुत्थान का साक्षी, मैं स्वयंभू सोमनाथ हूं' जैसी प्रेरक पंक्तियां लिखी हुई थीं। शंख गोल चक्कर के पास स्थित अलंकृत प्रवेश द्वार को फूलों से सजाया गया था। शाम को, कर्नाटक के लोक नृत्य कलाकारों का एक समूह पारंपरिक पोशाक में वहां से गुजरा। उनके साथ लोग तस्वीरें खिंचवाने के लिए उत्सुक नजर आए। जैसे-जैसे शाम ढलती गई और अंधेरा छाता गया, भीड़ और भी बढ़ती गई।प्रधानमंत्री के आगमन के साथ ही मंदिर परिसर के मुख्य द्वारों के पास लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा, जबकि सुरक्षाकर्मी व्यवस्था बनाए रखने के लिए मश्क्कत करते रहे। शनिवार रात को आने वाले आगंतुकों में भावनगर से आए भारद्वाज गिरि जैसे धार्मिक नेता और पड़ोसी जिले जूनागढ़ से आए दिग्गज नेता गिरीश एम कोटेचा शामिल थे। वीर हमीरजी गोहिल गोल चक्कर के पास ‘पीटीआई-भाषा' से बातचीत करते हुए गिरि ने कहा कि वीर हमीरजी जैसे लोगों ने ‘‘हमारे हिंदू तीर्थस्थलों के गौरव की रक्षा'' के लिए लड़ाई लड़ी। इस गोल चक्कर पर 16वीं शताब्दी के राजपूत योद्धा की घुड़सवार प्रतिमा है, जिन्हें आक्रमणकारियों के खिलाफ सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए याद किया जाता है। मंदिर परिसर के सामने स्थित इस गोलचक्कर को रंगबिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया था, जो एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। कोटेचा ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया, ‘‘यह सोमनाथ की भावना का उत्सव है, और इस अवसर पर लोगों के बीच खुशी देखी जा सकती है।'' दर्शन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और ड्रोन शो के बाद वहां मौजूद भीड़ छटी लेकिन कुछ पल में ही श्रद्धालुओं की अगली टोली उमड़ती नजर आई जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। परिवार के साथ शनिवार आधी रात मंदिर परिसर पहुंचे हर्ष शाह ने बताया, ‘‘सोमनाथ बाबा लोगों को आकर्षित कर रहे हैं, और हम सजावट और रोशनी देखने आए थे।'' लगभग 15 मिनट के ड्रोन शो में भगवान शिव और शिवलिंग की विशाल छवियों सहित कई विषयगत आकृतियां और सोमनाथ मंदिर का 3डी चित्रण दिखाया गया, जिसके बाद आतिशबाजी का एक शानदार प्रदर्शन हुआ। प्रधानमंत्री मोदी दो दिवसीय दौरे पर शनिवार शाम को मंदिर नगरी सोमनाथ पहुंचे। उन्होंने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत आयोजित इस कार्यक्रम को देखा। ड्रोन शो के दौरान सदियों से ऐतिहासिक मंदिर द्वारा झेली गई तबाही के साथ-साथ इसके उत्थान और लचीलेपन को भी दिखाया गया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने शुक्रवार को बताया कि यह पर्व महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए आक्रमण के 1,000 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है। स्वाभिमान पर्व के उपलक्ष्य में 8 से 11 जनवरी तक कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।रविवार सुबह प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आयोजित ‘शौर्य यात्रा' में भाग लिया। राजकोट रवाना होने से पहले उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना की और सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भी शामिल हुए।
- मुंबई. दक्षिण मुंबई में एक मंत्री के बंगले के पास रविवार को एक लावारिस बैग मिलने से दहशत फैल गई और बाद में पुलिस ने पता लगाया कि एक अमेरिकी नागरिक ने इसे छोड़ दिया था। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह घटना सुबह करीब 9:30 बजे तब सामने आई, जब मरीन ड्राइव इलाके में मंत्री नितेश राणे के बंगले पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने पुलिस को पास पड़े एक लावारिस बैग के बारे में सूचना दी। एक अधिकारी ने बताया कि मरीन ड्राइव थाने के कर्मियों के साथ बम निरोधक बल की एक टीम तुरंत मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। अधिकारी ने बताया कि तलाशी के दौरान पुलिस को बैग के अंदर एक जोड़ी जूते, कपड़े, आदि मिले। उन्होंने बताया कि इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद पुलिस ने बैग के मालिक का पता लगाया जो करीब 40 वर्ष का एक अमेरिकी नागरिक था। उस समय तक वह गोवा पहुंच चुका था। अधिकारी ने बताया कि उस व्यक्ति ने पुलिस को बताया कि वह मरीन ड्राइव इलाके के एक होटल में रुका था। रविवार तड़के गोवा जाने से पहले उसने मंत्री के बंगले के पास बैग रख दिया और उसमें एक नोट छोड़ा जिस पर लिखा था, "जूते और कपड़े मुफ्त हैं। कोई भी ले जा सकता है।"
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अहमदाबाद. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को 'वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन' (वीजीआरसी) से पहले राजकोट के मारवाड़ी विश्वविद्यालय में एक व्यापार प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उनके साथ गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी मौजूद थे। अधिकारियों ने बताया कि इस कार्यक्रम में अमेरिका और यूरोप सहित 16 देशों के 110 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदार हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान 1,500 से अधिक सहमति पत्रों (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। सम्मेलन में आयोजित 'विपरीत क्रेता-विक्रेता बैठक' (आरबीएसएम) के दौरान 1,800 से अधिक व्यावसायिक बैठकें निर्धारित की गई हैं। आमतौर पर विक्रेता अपनी दुकान या स्टॉल लगाकर बैठते हैं और ग्राहक उसके पास सामान देखने आते हैं। आरबीएसएम में खरीदार एक जगह बैठते हैं और विक्रेता उनके पास जाकर अपने उत्पाद दिखाते हैं। उन्होंने बताया कि 26,000 वर्ग मीटर में फैली इस प्रदर्शनी में टॉरेंट पावर लिमिटेड, कोसोल, अदाणी ग्रीन, एस्सार ग्रुप, नायरा एनर्जी और ज्योति सीएनसी जैसी कंपनियां भाग ले रही हैं। अधिकारियों ने कहा कि व्यापार प्रदर्शनी में कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, मत्स्य पालन, रक्षा, ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल, इंजीनियरिंग, बंदरगाह तथा लॉजिस्टिक जैसे विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले 400 से अधिक प्रदर्शकों ने अपने स्टॉल लगाए हैं।
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नयी दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच सोमवार को होने वाली वार्ता में व्यापार, निवेश, अहम प्रौद्योगिकियों तथा रक्षा जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाना मुख्य एजेंडा रहेगा। मर्ज की यह भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए सैन्य ताकत के खुले इस्तेमाल जैसी घटना के कारण वैश्विक भू-राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण है। ऐसे में दोनों नेता मौजूदा वैश्विक चुनौतियों पर भी चर्चा कर सकते हैं। आगामी 12–13 जनवरी को होने वाली यह यात्रा जर्मन चांसलर के रूप में मर्ज की पहली एशिया यात्रा होगी। मोदी–मर्ज वार्ता में यूक्रेन में शांति स्थापित करने पर भी चर्चा हो सकती है। अहमदाबाद में कार्यक्रमों के बाद मर्ज बेंगलुरु जाएंगे।
अधिकारियों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत के अलावा मर्ज साबरमती आश्रम जाएंगे, पतंगोत्सव में हिस्सा लेंगे और अहमदाबाद में एक कौशल विकास कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। जानकारों के अनुसार बातचीत में व्यापार और निवेश संबंधों पर विशेष जोर रहेगा। भारत अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने की पृष्ठभूमि में यूरोप के साथ आर्थिक सहयोग को और प्रगाढ़ बनाना चाहता है। जर्मनी यूरोप में भारत के सबसे अहम साझेदारों में से एक है। वह यूरोपीय संघ में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। 2024–25 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार 51.23 अरब डॉलर तक पहुंच गया। ईयू के साथ भारत के कुल व्यापार का लगभग एक-चौथाई जर्मनी के साथ होता है। 2024–25 में सेवाओं के व्यापार में 12.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह 16.65 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। जर्मनी भारत में नौवां सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है। अप्रैल 2000 से जून 2025 के बीच भारत में जर्मनी से कुल 15.40 अरब डॉलर का एफडीआई आया है। फिलहाल भारत में 2,000 से अधिक जर्मन कंपनियां काम कर रही हैं। -
श्री विजय पुरम. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 23 जनवरी को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले समारोह में भाग लेने के लिए यहां आ सकते हैं। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस द्वीपसमूह के अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा नेताजी स्टेडियम में राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने और सार्वजनिक संबोधन किए जाने की उम्मीद है, जहां सुभाष चंद्र बोस ने 30 दिसंबर, 1943 को तिरंगा फहराया था। उस समय नेताजी स्टेडियम को जिमखाना ग्राउंड के नाम से जाना जाता था।
केंद्र सरकार नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाती आ रही है ताकि राष्ट्र के प्रति उनकी नि:स्वार्थ सेवा के प्रति सम्मान प्रदर्शित किया जा सके। इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री के 23 जनवरी को नेताजी की 129वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में भाग लेने के लिए श्री विजय पुरम जाने की संभावना है। उनके राष्ट्रीय ध्वज फहराने और सार्वजनिक भाषण देने की उम्मीद है।'' उन्होंने कहा कि मोदी यहां मरीना पार्क में नेताजी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर सकते हैं।
अधिकारी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री के श्री विजय पुरम स्थित शहीद स्तंभ पर पुष्पांजलि अर्पित करने और वीर सावरकर को श्रद्धांजलि देने के लिए सेलुलर जेल जाने की संभावना है।'' उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री क्षेत्र में जारी विकास परियोजनाओं का निरीक्षण करने के लिए कैंपबेल बे का भी दौरा कर सकते हैं। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री के श्री विजय पुरम के संभावित दौरे की तैयारियां अभी प्रारंभिक चरण में हैं।'' अधिकारियों के अनुसार, स्टेडियम में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्थानीय प्रशासन ‘पराक्रम दिवस' के अवसर पर स्टेडियम में प्रस्तुति देने के लिए प्रसिद्ध गायकों को आमंत्रित करने की योजना बना रहा है। प्रधानमंत्री ने नेताजी की राष्ट्र के प्रति सेवाओं को सम्मान देने के लिए दो द्वीपों- नील द्वीप का ‘शहीद' और हैवलॉक द्वीप का ‘स्वराज' के रूप में नामकरण किया था। उन्होंने 2023 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप पर बनाए जाने वाले नेताजी को समर्पित राष्ट्रीय स्मारक के मॉडल का भी अनावरण किया था। मोदी ने अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के 21 द्वीपों का नामकरण भी 21 परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर किया था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप (रॉस आइलैंड) पर प्रस्तावित स्मारक में संग्रहालय-सह-व्याख्या केंद्र, रोपवे, लेज़र एवं साउंड शो, थीम आधारित बच्चों का मनोरंजन पार्क और भोजन व विश्राम के लिए रेस्तरां-लाउंज शामिल होंगे। -
सोमनाथ (गुजरात). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को ‘शौर्य यात्रा' का नेतृत्व किया। इसका आयोजन गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए प्राणों की आहुति देने वालों के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने के लिए किया गया। उन्होंने ऐतिहासिक मंदिर में पूजा-अर्चना भी की और सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि दी जिनकी प्रतिमा मंदिर परिसर के पास स्थापित है। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत आयोजित इस यात्रा में 108 अश्वों की झांकी निकाली गई जो वीरता और बलिदान का प्रतीक है। प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए शंख सर्कल से वीर हमीरजी गोहिल सर्कल तक यात्रा मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग और श्रद्धालु एकत्र हुए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के साथ विशेष रूप से डिजाइन किए गए वाहन पर खड़े होकर एक किलोमीटर लंबी यात्रा के दौरान जनता का हाथ हिलाकर अभिवादन किया। युवा पुजारियों का एक समूह, जिन्हें ‘ऋषि कुमार' भी कहा जाता है, मोदी के वाहन के साथ-साथ चलते हुए भगवान शिव का वाद्ययंत्र ‘डमरू' बजा रहा था। एक समय ऐसा भी आया जब मोदी ने स्वयं एक पुजारी से दो डमरू लिए और अपने वाहन पर खड़े होकर उन्हें बजाया। जम्मू कश्मीर सहित देश भर से आए कलाकारों ने मार्ग में नियमित दूरी पर बने मंचों पर अपने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए। यात्रा ‘वीर हमीरजी गोहिल सर्कल' पर समाप्त हुई, जहां से प्रसिद्ध मंदिर का मार्ग शुरू होता है।
मोदी ने चौक पर स्थित हमीरजी गोहिल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की, जिन्होंने 1299 ईस्वी में दिल्ली सल्तनत की सेना के आक्रमण के खिलाफ सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। बाद में, मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि अर्पित की, जिनकी प्रतिमा मंदिर परिसर के प्रवेश द्वार के पास स्थापित है। पटेल के प्रयासों के फलस्वरूप ही स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ और इसे औपचारिक रूप से 1951 में श्रद्धालुओं के लिए खोला गया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना भी की। उन्होंने मुख्य पुजारी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर में पूजा कार्यक्रम में भाग लिया। ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' भारत के उन अनगिनत नागरिकों को याद करने के लिए मनाया जा रहा है, जिन्होंने मंदिर की रक्षा के लिए बलिदान दिया, जो आने वाली पीढ़ियों की सांस्कृतिक चेतना को प्रेरित करता रहेगा। महमूद गजनी ने करीब एक हजार साल पहले 1026 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था और इस दौरान अपना जीवन कुर्बान करने वालों की याद में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) के एक बयान के अनुसार, सदियों पहले इस मंदिर को नष्ट करने के कई बार प्रयास किए जाने के बावजूद सोमनाथ मंदिर आज विश्वास, साहस और राष्ट्रीय गर्व के एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में खड़ा है। यह सब इसे इसकी प्राचीन महिमा में बहाल करने के सामूहिक संकल्प और प्रयासों के कारण संभव हुआ है। -
नयी दिल्ली/ डिजिटल अरेस्ट' की वजह से 14.85 करोड़ रुपये गंवा चुके दिल्ली के रहने वाले बुजुर्ग दपंति ओम तनेजा और उनकी पत्नी को यही मलाल है कि उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना नहीं दी। ओम तनेजा (81) और पेशे से डॉक्टर उनकी पत्नी इंदिरा (77) को साइबर ठगों ने दूरसंचार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी बनकर कॉल किया और करीब 15 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट' रखा। दक्षिण दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में रहने वाले बुजुर्ग दंपति ने रविवार को कहा कि पुलिस को अपनी आपबीती न बताना एक गंभीर गलती थी।
ओम तनेजा ने बताया, साइबर ठगों ने हमें बार-बार गिरफ्तारी और गंभीर परिणामों की धमकी दी।'' पुलिस ने बताया कि यह धोखाधड़ी 24 दिसंबर से 9 जनवरी के बीच की गई और इस दौरान दंपति को लगातार ऑडियो और वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया गया और सत्यापन के नाम पर कई बैंक खातों में बड़ी रकम अंतरण करने के लिए दबाव डाला गया। इस मामले में ई-प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और दिल्ली पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने बताया कि यह दंपति दशकों तक अमेरिका में काम करने के बाद भारत लौट आए थे और 2016 से ग्रेटर कैलाश में रह रहे थे। उनके बच्चे विदेश में बसे हुए हैं। आरोपियों ने दंपति के एकांतवास, उम्र और चिकित्सा मुद्दों जैसी परिस्थितियों का फायदा उठाकर उन्हें डराया-धमकाया।
इंदिरा तनेजा ने बताया कि 24 दिसंबर को दोपहर के आसपास उन्हें एक ऑडियो कॉल आया, जिसमें एक व्यक्ति ने खुद को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राइ) का अधिकारी बताया। उन्होंने बताया, ‘‘कॉल करने वाले ने मुझे बताया कि मेरा टेलीफोन नंबर बंद किया जा रहा है क्योंकि उससे अश्लील कॉल आ रहे थे और 26 लोगों ने शिकायत दर्ज कराई है।'' इंदिरा के मुताबिक साइबर अपराधियों ने हम पर धनशोधन में शामिल होने का भी आरोप लगाया। इंदिरा के मुताबिक उन्होंने फोन करने वाले को बताया कि जिस नंबर का जिक्र किया जा रहा है वह उनका नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘इसके बावजूद, उसने कहा कि मेरे खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं और महाराष्ट्र में प्राथमिकी दर्ज की गई है।'' फोन करने वाले ने यह भी दावा किया कि मामला मुंबई के कोलाबा पुलिस थाने को स्थानांतरित किया जा रहा है एवं इसके तुरंत बाद कॉल को वीडियो कॉल में तब्दील कर दिया। बुजुर्ग महिला ने बताया, ‘‘स्क्रीन पर विक्रांत सिंह राजपूत नाम का एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी पहने हुए दिखाई दिया। मुझे उसके पीछे पुलिस का चिह्न भी दिखाई दिया। उसने मुझसे कहा कि मैं धनशोधन में संलिप्त हूं।'' इंदिरा ने बताया कि उस व्यक्ति ने दावा किया कि मुंबई में केनेरा बैंक की एक शाखा में उनके नाम से एक बैंक खाता खोला गया था और उस खाते से भारी मात्रा में धनराशि का लेन-देन हुआ है। उन्होंने बताया कि उसने मुझे नरेश गोयल नाम के एक व्यक्ति की तस्वीर दिखाई और पूछा कि क्या मैं उसे जानती हूं। मैंने उससे कहा कि मैंने इस व्यक्ति को अपने जीवन में कभी नहीं देखा। इंदिरा ने कहा कि जालसाजों ने बार-बार दावा किया कि कथित बैंक खाता खोलते समय उसके उंगलियों के निशान और अंगूठे के निशान लिए गए थे और इस बात पर जोर दिया कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। महिला ने बताया, उन्होंने कहा कि 500 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है और चूंकि मैं देश की सेवा करने के लिए अमेरिका से लौटी हूं, इसलिए यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन गया है।'' आरोपी ने उन्हें तुरंत मुंबई आने के लिए कहा और चेतावनी दी कि गिरफ्तारी अपरिहार्य है। इसके बाद तनेजा दंपति को सत्यापन के लिए अपने बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया।
महिला ने बताया, वे लगातार पैसे की मांग करते रहे - 2 करोड़ रुपये, 2.1 करोड़ रुपये, 2.5 करोड़ रुपये। फोन या वीडियो कॉल लगभग पूरे दिन चालू रहे। 24 दिसंबर की दोपहर से लेकर 9 जनवरी की सुबह तक मुझे डिजिटल रूप से गिरफ्तार कर लिया गया था।'' पुलिस के मुताबिक ठगों ने दंपति को यह भी सिखाया कि संदेह से बचने के लिए बैंक अधिकारियों को क्या बताना है। उन्होंने दंपति को निर्देश दिया कि वे बताएं कि राशि निवेश की जा रही है या किसी संस्था के न्यासी बन रहे हैं। कभी उन्होंने चेक जमा करने का विवरण भेजा, तो कभी चेक की तस्वीरें। कुल मिलाकर, दंपति ने आठ बार धन हस्तांतरण किया। दिल्ली के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के पूर्व छात्र ओम तनेजा ने संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका की संघीय सरकार के साथ काम करने सहित 48 वर्षों तक अमेरिका में काम किया।


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