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नई दिल्ली। देश के पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर आज रविवार को देशभर के प्रमुख नेताओं ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। शास्त्री जी का ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा राष्ट्र में एकता और स्वावलंबन की भावना जगाने वाला साबित हुआ था। उनकी पुण्यतिथि पर तमाम नेताओं ने उनकी सादगी, ईमानदारी, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रहित सर्वोपरि की नीति को याद किया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “पूर्व प्रधानमंत्री एवं ‘भारत रत्न’ लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। संकट के समय ‘जय जवान, जय किसान’ का उद्घोष कर शास्त्री जी ने देश के स्वावलंबन व सुरक्षा का सुंदर समन्वय बनाया। एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले गुदड़ी के लाल शास्त्री जी ने अपने दृढ़ संकल्प और मजबूत नेतृत्व से 1965 के युद्ध में भारत को विजय दिलाई। उनका सादगीपूर्ण जीवन हर एक समाजसेवी के लिए प्रेरणा है।”केंद्रीय मंत्री नीतीन गड़करी ने लिखा, “देश के पूर्व प्रधानमंत्री ‘जय जवान जय किसान’ के प्रणेता भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र अभिवादन।”केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लिखा, “जय जवान, जय किसान के उद्घोष से राष्ट्र में नव चेतना का संचार करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री, ‘भारत रत्न’ लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।”बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लिखा, “पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्यतिथि पर उन्हें सादर नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि।”उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लिखा, “जय जवान, जय किसान का उद्घोष करने वाले, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री ‘भारत रत्न’ श्रद्धेय लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्यतिथि पर कोटिशः नमन। आपके सादगी, दृढ़ संकल्प और देशभक्ति से परिपूर्ण नेतृत्व हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।”यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पोस्ट में लिखा, “सादगी, शुचिता, सत्यनिष्ठा और कर्तव्यपरायणता के अद्वितीय प्रतीक, पूर्व प्रधानमंत्री, ‘भारत रत्न’ लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। राष्ट्रहित सर्वोपरि के भाव से ओतप्रोत उनका संपूर्ण जीवन मर्यादा और अनुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण है।” -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को गुजरात के राजकोट में मारवाड़ी यूनिवर्सिटी में कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र के लिए वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘जब वाइब्रेंट गुजरात समिट का मंच सजता है, तो मुझे यह सिर्फ समिट नहीं दिखती। मुझे यह 21वीं सदी के आधुनिक भारत की वह यात्रा नजर आती है, जो एक सपने से शुरू हुई और आज एक अटूट भरोसे तक पहुंच चुकी है।’
पीएम मोदी ने कहा कि दो दशकों में वाइब्रेंट गुजरात की यह यात्रा ग्लोबल बेंचमार्क बन गई है। वाइब्रेंट गुजरात समिट के विजन के साथ मैं पहले दिन से जुड़ा रहा हूं। सोमनाथ दादा के चरणों में सिर झुकाकर यह सफर शुरू हुआ है। मुझे वाइब्रेंट समिट में कोई समिट नहीं दिख रहा है। अब वाइब्रेंट समिट आगे बढ़ गया है। इसके 10 एडिशन हो चुके हैं। ग्लोबल पार्टनर्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह समिट ग्लोबल ग्रोथ का एक बड़ा उदाहरण बन गया है।उन्होंने कहा कि ग्लोबल ग्रोथ पार्टनरशिप का एक प्लेटफॉर्म बन गया है। अब वाइब्रेंट समिट इन्वेस्टमेंट से आगे बढ़ गया है। गुजरात का मतलब डेवलपमेंट के साथ-साथ हेरिटेज भी है। पिछले दो दशकों में वाइब्रेंट समिट में बहुत कुछ नया हुआ है। यह समिट पोटेंशियल को रियलिटी में बदलता है।पीएम मोदी ने कहा कि हम संभावनाओं पर फोकस करके आगे बढ़ रहे हैं। गुजरात में कोऑपरेटिव सेक्टर भी एक्टिव है। हम हर सेक्टर की संभावनाओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रहे हैं। भारत दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी बनने की ओर बढ़ रहा है। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग देश है। आज भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम है। भारत ने पिछले कुछ सालों में बहुत तरक्की की है। आज ग्लोबल इंस्टीट्यूशन भारत को लेकर बुलिश हैं। आईएमएफ भारत को ग्लोबल ग्रोथ के इंजन के तौर पर दिखाता है।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत से दुनिया की उम्मीदें बढ़ रही हैं। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। इंफ्लेशन काबू में है। एग्रीकल्चर प्रोडक्शन में नए रिकॉर्ड बना रहा है। मिल्क प्रोडक्शन में नंबर वन है। जेनेरिक मेडिसिन प्रोडक्शन में नंबर वन है। दुनिया में जो सबसे ज्यादा वैक्सीन बनाता है, वो भारत है।पीएम मोदी ने आगे कहा कि सौराष्ट्र और कच्छ गुजरात के वो इलाके हैं जो हमें सिखाते हैं कि चुनौती कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अगर आप ईमानदारी और मेहनत से काम करते हैं, तो आपको सफलता जरूर मिलेगी। इसी कच्छ ने भूकंप देखे हैं। सौराष्ट्र में सूखा पड़ा था। लोगों को पानी के लिए किलोमीटरों दूर जाना पड़ता था। हर तरफ मुश्किलें थीं। आज युवाओं ने सिर्फ़ उस समय की कहानियां सुनी हैं। लोग कच्छ और सौराष्ट्र में ज्यादा समय तक रहने को तैयार नहीं थे। लेकिन, इतिहास गवाह है और समय बदलता है। सौराष्ट्र और कच्छ के लोग मेहनत से अपनी किस्मत बदलते हैं। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रविवार को गिर सोमनाथ में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के हिस्से के तौर पर आयोजित एक प्रतीकात्मक यात्रा ‘शौर्य यात्रा’ में हिस्सा लिया। इस मौक़े पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी भी मौजूद थे। पीएम मोदी ने सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। शौर्य यात्रा साहस, बलिदान और उस अदम्य भावना का प्रतीक है, जिसने सदियों की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सोमनाथ की आस्था और गौरव को संरक्षित रखा। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर कहा, “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर रोड शो के दौरान जगह-जगह शिवभक्तों का जोश और उल्लास आनंद से भर देने वाला था। इसमें नारीशक्ति ने जिस तरह से बढ़-चढ़कर भागादारी की, उसने पूरे वातावरण को और अधिक गरिमामयी बना दिया। भारतीय संस्कृति और स्वाभिमान के लिए उनका समर्पण भाव देखकर अभिभूत हूं।”प्रधानमंत्री मोदी के सोमनाथ मंदिर के द्वार पर पहुंचते ही 10,000 महिलाओं ने पारंपरिक नृत्य से उनका स्वागत किया। पीएम मोदी ने सोमनाथ मंदिर में पूजा की और उसके बाद वहां मौजूद कलाकारों से बातचीत की। उन्होंने एक्स पर कहा कि पावन और दिव्य सोमनाथ धाम में दर्शन-पूजन का सौभाग्य मिला। यह अनुभव मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देने वाला रहा। भगवान सोमनाथ की कृपा सभी देशवासियों पर सदा बनी रहे, यही कामना है। पवित्र मंदिर में प्रार्थना करने के बाद सद्भावना मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस बार का वातावरण और उत्सव अद्भुत है। एक ओर देवों के देव महादेव, दूसरी ओर समुद्र की विशाल लहरें, सूर्य की किरणें, मंत्रों की गूंज, आस्था का प्रवाह और इस दिव्य वातावरण में भगवान सोमनाथ के भक्तों की उपस्थिति इस अवसर को दिव्य और भव्य बना रही है। -
नयी दिल्ली. संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने वाले सभी अभ्यर्थियों का परीक्षा स्थलों पर चेहरा प्रमाणीकरण किया जाएगा। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने कहा कि इससे परीक्षा प्रक्रिया की शुचिता और अधिक मजबूत होगी।
आयोग की वेबसाइट पर जारी एक नोट में कहा गया, ‘‘यूपीएससी परीक्षा में शामिल होने वाले सभी अभ्यर्थियों के चेहरे का परीक्षा स्थल पर प्रमाणीकरण किया जाएगा।'' यूपीएससी सरकार की नौकरियों के लिए विभिन्न भर्ती परीक्षाएं आयोजित करता है, जिनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) परीक्षा भी शामिल हैं। यूपीएससी ने 14 सितंबर, 2025 को आयोजित एनडीए (राष्ट्रीय रक्षा अकादमी) और एनए (नौसेना अकादमी) द्वितीय परीक्षा, 2025 तथा सीडीएस (संयुक्त रक्षा सेवा) द्वितीय परीक्षा, 2025 के दौरान त्वरित और सुरक्षित अभ्यर्थी सत्यापन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सक्षम चेहरा प्रमाणीकरण प्रौद्योगिकी का परीक्षण करने के लिए एक प्रायोगिक कार्यक्रम सफलतापूर्वक संचालित किया था। यह कार्यक्रम गुरुग्राम के चयनित केंद्रों पर किया गया, जहां अभ्यर्थियों की चेहरों का उनके पंजीकरण प्रपत्रों में उपलब्ध कराई गई तस्वीरों से डिजिटल रूप से मिलान किया गया। -
मुंबई. संगीत कंपनी ‘टी-सीरीज' के मालिक गुलशन कुमार की हत्या मामले में महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर स्थित हरसुल जेल में बंद 60 वर्षीय दोषी की शनिवार को दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पड़ोसी ठाणे जिले के मुंब्रा के अमृत नगर निवासी मोहम्मद रऊफ दाऊद मर्चेंट सनसनीखेज मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद से 2002 से यहां से लगभग 350 किलोमीटर दूर हरसुल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। उन्होंने बताया, "आठ जनवरी की सुबह जेल की बैरक में नमाज पढ़ते समय मर्चेंट को सीने में तेज दर्द हुआ और वह बेहोश हो गया। उसे तुरंत सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण गंभीर दिल का दौरा बताया गया है। मुंब्रा में उसके परिजन उसी शाम उसका शव ले गए और अंतिम संस्कार किया।" अधिकारी ने बताया कि हरसुल थाने में आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज किया गया है।
मुंबई के पश्चिमी हिस्से में अंधेरी स्थित एक मंदिर के बाहर 12 अगस्त 1997 को तीन लोगों ने गुलशन कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी थी। 16 राउंड गोलियां चलाई गईं, जिनमें कुमार के चालक को भी गंभीर चोटें आईं। -
वेरावल (गुजरात). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए शनिवार को प्रसिद्ध शहर पहुंचे और सोमनाथ को "हमारी सभ्यतागत साहस" का प्रतीक बताया। गुजरात की अपनी तीन दिवसीय यात्रा की शुरुआत करते हुए उन्होंने एक ड्रोन शो देखा और श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में उसकी बैठक की अध्यक्षता की। प्रधानमंत्री ने यहां पहुंचने के बाद सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "सोमनाथ में आकर धन्य महसूस कर रहा हूं, जो हमारी सभ्यतागत साहस का गौरवशाली प्रतीक है। यह यात्रा सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान हो रही है, जब पूरा देश 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले हमले के 1000 वर्ष पूरे होने पर एकजुट हुआ है। लोगों के गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभारी हूं।" उन्होंने बैठक के बाद एक अन्य पोस्ट में लिखा, "आज शाम सोमनाथ में मैंने श्री सोमनाथ ट्रस्ट की बैठक की अध्यक्षता की। हमने मंदिर परिसर में बुनियादी ढांचे के उन्नयन से संबंधित विभिन्न पहलुओं और सोमनाथ की तीर्थयात्रा को और भी यादगार बनाने के तरीकों की समीक्षा की।" गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी भी न्यासियों और अधिकारियों के साथ बैठक में उपस्थित थे। प्रधानमंत्री शाम में गिर सोमनाथ जिले के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के पास स्थित हेलीपैड पर उतरे। सर्किट हाउस की ओर जाते समय उनके काफिले को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़क के किनारे खड़े थे। राज्य सरकार द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, सर्किट हाउस में एक बैठक के बाद मोदी मंदिर की ओर रवाना हुए, जहां उन्होंने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के हिस्से के रूप में 'ओंकार मंत्र' के जाप में भाग लिया। विज्ञप्ति में कहा गया है कि इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में ड्रोन शो देखा। लगभग 3,000 ड्रोन ने अरब सागर के ऊपर आकाश में मंदिर से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं को दर्शाने वाली विभिन्न छवियां बनाईं। स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत आठ से 11 जनवरी तक कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित की जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी तीन-दिवसीय गुजरात यात्रा के दौरान यहां 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' एवं राजकोट में ‘वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन' सहित कई कार्यक्रमों में भाग लेंगे। पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, रविवार को सुबह लगभग 9:45 बजे प्रधानमंत्री 'शौर्य यात्रा' में भाग लेंगे, जो सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए प्राणों की आहुति देने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आयोजित औपचारिक शोभा यात्रा है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि शौर्य यात्रा में 108 घोड़ों का प्रतीकात्मक जुलूस निकाला जाएगा, जो वीरता और बलिदान का प्रतीक होगा। इसके बाद, मोदी सुबह करीब 10:15 बजे सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे और फिर सुबह 11 बजे 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' पर आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेंगे। बयान के अनुसार ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' भारत के उन अनगिनत नागरिकों को याद करने के लिए मनाया जा रहा है, जिन्होंने मंदिर की रक्षा के लिए बलिदान दिया, जो आने वाली पीढ़ियों की सांस्कृतिक चेतना को प्रेरित करता रहेगा। महमूद गजनी ने 1026 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था, जिसके एक हजार वर्ष पूरे होने की पृष्ठभूमि में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। बयान के अनुसार सोमनाथ मंदिर नष्ट करने के कई प्रयासों के बावजूद आज आस्था और राष्ट्रीय गौरव के एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में खड़ा है, यह सब मंदिर की प्राचीन महिमा को बहाल करने के सामूहिक संकल्प और प्रयासों के कारण संभव हुआ है। स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने मंदिर के जीर्णोद्धार का प्रयास किया। इस पुनरुद्धार यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक 1951 में हासिल हुई, जब तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में जीर्णोद्धार किए गए सोमनाथ मंदिर को औपचारिक रूप से भक्तों के लिए खोल दिया गया। इस वर्ष ऐतिहासिक जीर्णोद्धार के 75 वर्ष पूरे होने से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है। इस समारोह में देश भर से सैकड़ों संत भाग लेंगे और मंदिर परिसर में 72 घंटे तक लगातार 'ओम्' का जाप किया जाएगा। इसमें कहा गया है कि ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' में प्रधानमंत्री की भागीदारी भारत की सभ्यता की चिरस्थायी भावना को रेखांकित करती है और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण और उत्सव के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है। मोदी रविवार को राजकोट भी जाएंगे और कच्छ एवं सौराष्ट्र क्षेत्र के लिए आयोजित ‘वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन' (वीजीआरसी) में भाग लेंगे। अपराह्न करीब 1:30 बजे वह सम्मेलन में ट्रेड शो और प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। राजकोट से मोदी अहमदाबाद के लिए रवाना होंगे। वह शाम करीब 5:15 बजे गांधीनगर के महात्मा मंदिर मेट्रो स्टेशन पर अहमदाबाद मेट्रो के दूसरे चरण के शेष हिस्से का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री सोमवार सुबह जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज से मुलाकात करेंगे। दोनों साबरमती आश्रम पहुंचेंगे और साबरमती नदी तट पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भाग लेंगे। इसके बाद गांधीनगर के महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर में पूर्वाह्न 11:15 बजे से द्विपक्षीय बैठकें होंगी, जहां दोनों नेता भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे। इस साझेदारी के हाल ही में 25 वर्ष पूरे हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि शाम को मोदी महात्मा मंदिर में दोनों देशों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में शामिल होंगे, जिसके बाद एक संयुक्त बयान जारी किया जाएगा। -
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में जारी ठंड शनिवार को और बढ़ गई है। कोलकाता समेत कई जिलों में तापमान और नीचे चला गया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक इसी तरह ठंड बनी रहने की संभावना है। कोलकाता के अलीपुर स्थित क्षेत्रीय मौसम केंद्र ने बताया कि उत्तर दिशा से ठंडी हवाएं लगातार राज्य में आ रही हैं। इसी वजह से कड़ाके की ठंड पड़ रही है। कई इलाकों में घना कोहरा भी देखने को मिल रहा है।
शुक्रवार को कोलकाता का न्यूनतम तापमान थोड़ा बढ़कर 12.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, लेकिन शनिवार को यह फिर गिरकर 11.5 डिग्री सेल्सियस हो गया। यह सामान्य से 2.5 डिग्री कम है। शुक्रवार को शहर का अधिकतम तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2.1 डिग्री कम था।राज्यभर में कोहरे को लेकर चेतावनी जारी की गई है। दक्षिण बंगाल के जिलों में सुबह के समय हल्के से मध्यम स्तर का कोहरा छाने की आशंका है, जिससे विज़िबिलिटी 999-200 मीटर तक कम हो जाएगी। कुछ जिलों में दोपहर तक कोहरा बना रह सकता है। उत्तर बंगाल के लिए घने कोहरे की चेतावनी दी गई है। कोहरे के कारण दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार और उत्तर दिनाजपुर जिले में विजिबिलिटी 199-50 मीटर तक कम हो सकती है। पूरे राज्य में मौसम शुष्क रहेगा।इस समय ठंड का असर ऐसा है कि दक्षिण बंगाल के कई जिलों में तापमान, उत्तर बंगाल के शहरों से भी नीचे चला गया है। दार्जिलिंग को छोड़ दें तो दक्षिण के इलाकों में ठंड उत्तर के सभी शहरों से ज्यादा महसूस की जा रही है। शनिवार को दार्जिलिंग का न्यूनतम तापमान 3.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जो पूरे राज्य में सबसे कम था।सके अलावा कई और जिलों में तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। कल्याणी में पारा 7.7 डिग्री, बांकुरा में 7.2 डिग्री, बर्दवान में 8.6 डिग्री, कलाईकुंडा में 8.6 डिग्री, आसनसोल में 8.8 डिग्री, बरहामपुर में 8.6 डिग्री, सूरी में 8.2 डिग्री, उलुबेरिया में 9 डिग्री, दीघा में 9 डिग्री, कोंटाई में 9 डिग्री, पानागढ़ में 9.4 डिग्री, 9.4 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है. पुरुलिया, बैरकपुर में 9.8 डिग्री, झाड़ग्राम में 9 डिग्री, कैनिंग में 10.4 डिग्री, कृष्णानगर में 10.2 डिग्री और डायमंड हार्बर में 10.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।उत्तर बंगाल की बात करें तो कालिम्पोंग में न्यूनतम तापमान 8.3 डिग्री सेल्सियस रहा। मालदा में 9.7 डिग्री, जलपाईगुड़ी और बालुरघाट में 9.4 डिग्री, अलीपुरद्वार और रायगंज में 9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। -
नई दिल्ली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने तमिलनाडु के चार जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में अगले दो दिनों में बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। आईएमडी के अनुसार, चेन्नई, चेंगलपट्टू, तिरुवल्लूर और कांचीपुरम में शनिवार और उसके अगले दिन भारी बारिश होने की उम्मीद है, जिससे जलभराव, ट्रैफिक जाम और खासकर निचले और शहरी इलाकों में स्थानीय बाढ़ की संभावना है।लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की आधिकारिक सलाह मानने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग ने बताया कि दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे भूमध्यरेखीय हिंद महासागर के ऊपर बना गहरा दबाव आज बाद में त्रिंकोमाली और जाफना के बीच श्रीलंका के तट को पार कर सकता है। इस सिस्टम से तमिलनाडु और पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश के वितरण पर काफी असर पड़ने की उम्मीद है।परिणामस्वरूप तिरुवरूर, नागपट्टिनम, मायिलादुथुराई और कुड्डालोर जिलों के साथ-साथ पुडुचेरी और कराईकल में भारी बारिश का अनुमान है। आईएमडी ने विल्लुपुरम, कल्लाकुरिची, अरियालुर, तंजावुर, पुदुकोट्टई और रामनाथपुरम जिलों में भारी बारिश का अनुमान लगाया है। इस बीच, चेन्नई, चेंगलपट्टू, तिरुवल्लूर और कांचीपुरम में शनिवार और उसके अगले दिन भी बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी वाली पूर्वी हवाओं के कारण भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि बारिश की तीव्रता जगह-जगह अलग-अलग हो सकती है, लेकिन इस महीने की 15 तारीख तक तमिलनाडु के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने की संभावना है। अधिकारियों ने जिला प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहने, आपदा राहत टीमों की तैयारी सुनिश्चित करने और नदी के किनारे, जलाशयों और शहरी ड्रेनेज सिस्टम सहित संवेदनशील जगहों पर कड़ी नजर रखने का निर्देश दिया है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे भारी बारिश के दौरान गैर-जरूरी यात्रा से बचें और आईएमडी के आधिकारिक बुलेटिन और स्थानीय सलाह के जरिए अपडेट रहें। - नई दिल्ली। श्रीनगर और जम्मू-कश्मीर की वादियों में शनिवार को तापमान फ्रीजिंग पॉइंट से कई डिग्री नीचे गिर गया। राजधानी श्रीनगर में न्यूनतम तापमान माइनस 5.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि पिछले दिन यह माइनस 6 डिग्री था।ठंड की वजह से यहां की मशहूर डल झील आंशिक रूप से जम गई है, जिससे नाविकों को अपनी नावें चलाने में काफी परेशानी हो रही है। इसके अलावा, पानी के नल, सड़क पर बने छोटे-छोटे गड्ढे और उथले जलाशय भी जम गए।श्रीनगर में अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच का अंतर भी कम हो गया है। शुक्रवार को अधिकतम तापमान सिर्फ 10.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए ठंडी और शुष्क हवाओं की भविष्यवाणी की है और बताया कि 20 जनवरी तक बारिश या बर्फबारी की संभावना बहुत कम है, सिर्फ ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी हो सकती है।इस लगातार शुष्क मौसम ने जम्मू और कश्मीर में चिंता बढ़ा दी है। यहां के सभी जल स्रोत भारी हिमपात पर निर्भर करते हैं। ये कृषि, बागवानी और पीने के पानी की जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह हिमपात 40 दिन लंबी कठोर सर्दी की अवधि ‘चिल्लई कलां’ के दौरान होता है। इस महत्वपूर्ण अवधि का आधा समय पहले ही गुजर चुका है, लेकिन वादी के मैदानों में अभी तक इस मौसम की पहली बर्फबारी नहीं हुई है। चिल्लई कलां की अवधि 30 जनवरी को समाप्त होगी। इसके बाद फरवरी और मार्च में होने वाली बर्फ जल्दी पिघल जाती है और यह स्थायी जलाशयों को भरने में ज्यादा मदद नहीं करती।श्रीनगर के अलावा, गुलमर्ग में न्यूनतम तापमान माइनस 6.8 डिग्री और पहलगाम में माइनस 7.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जम्मू शहर में रात का न्यूनतम तापमान 3.6 डिग्री, कटरा में 5.3 डिग्री, बाटोटे में 1.3 डिग्री, बानिहाल में माइनस 0.4 डिग्री और भद्रवाह में माइनस 2.8 डिग्री था।वहीं, कडाके की ठंड और शुष्क मौसम की वजह से फेफड़े और दिल संबंधी बीमारियों के मरीज अस्पताल और क्लीनिकों में भारी संख्या में पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को चेतावनी दी है कि अगर किसी को पहले से दिल या छाती की समस्या है तो उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे मौसम में गर्म कपड़े पहनना, शरीर को पूरी तरह से ढककर रखना और समय पर दवाओं का सेवन करना बेहद जरूरी है।(
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में हुए बस हादसे पर दुख व्यक्त किया और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। इसके साथ ही उन्होंने इस हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की।
पीएम मोदी के हवाले से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में बस हादसे में लोगों की मौत बहुत दुखद है। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति संवेदनाएं। घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपए दिए जाएंगे।”केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक्स पोस्ट में लिखा, “हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के हरिपुरधार में बस हादसे में कई लोगों के हताहत होने का समाचार अत्यंत दुखद है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर को राहत एवं बचाव कार्यों पर नजर बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। मौके पर सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ता घायलों की सहायता के लिए मौजूद हैं।”इसके साथ ही जेपी नड्डा ने कहा कि शोक-संतप्त परिजनों के प्रति मैं गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं और ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में आत्मबल प्रदान करें।वहीं, हिमाचल प्रदेश के पूर्व सीएम और राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”सिरमौर जिले के हरिपुरधार क्षेत्र में निजी बस के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना बहुत दुखद है। इस भीषण हादसे में कई लोगों के हताहत होने की सूचना अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है।”यह हादसा सिरमौर जिले के हरिपुरधार के पास हुआ है। बस कुपवी से शिमला जा रही थी। इस दौरान बस हरिपुरधार के पास खाई में गिर गई। - नाहन.। हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर से बड़ा बस हादसा हुआ है. सिरमौर जिले के रेणुकाजी के हरिपुरधार में एक प्राइवेट बस गहरी 100 मीटर खाई में गिर गई और छह महीने की बच्ची, बस ड्राइवर समेत अब तक 14 लोगों की मौत हो गई. हादसे में 52 लोग घायल हुए हैं, जिन्हें नाहन मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है. घटना के बाद मौके पर हाहाकार मच गया और लोगों की भीड़ मौके की तरफ दौड़ी और घायलों को निकाला.अहम बात है कि कुल 39 सीटर इस बस में 66 लोग सवार थे. इसमें जिन 14 लोगों की मौत हुई है, उनमें सात महिलाएं शामिल हैं. सीएम सुक्खू, परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने हादसे पर दुख जताया है. सिरमौर की डीसी प्रियंका सिंह ने मौतों की पुष्टि की है.जानकारी के अनुसार, बस में मालिक की बेटी और बेटा भी सवार थे, जो कि घायल हैं. इसके अलावा, कुछ घायलों को सोलन अस्पताल भी भेजा गया है. डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री भी नाहन मेडिकल कॉलेज पहुंचे हैं और घायलों का हाल जाना है. परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने 14 मौतों की पुष्टि की है.दरअसल, शिमला जिले के कुपवी के लिए यह बस जा रही थी. जैसे ही बस रेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र के हरिपुरधार के करीब पहुंची तो एक मोड़ से नीचे जा गिरी. “जीत कोच” नाम की बस करीब 100 मीटर नीचे गिरी और उसके परखच्चे उड़ गए. आनन फानन में घायलों को हरिपुरधार के स्थानीय अस्पताल से प्राथमिक उपचार दिया गया और फिर रेफर किया गया है. हालांकि, अस्पताल में जरूरी सुविधाएं ना होने पर लोगों ने नाराजगी भी जताई है. क्योंकि इस अस्पताल को ऊपरी अस्पताल का दर्जा दिया गया था, लेकिन सुक्खू सरकार ने इसे डिनोटिफाई कर दिया था.बताया जा रहा है कि हरिपुरधार बाजार से 100 मीटर पहले यह अनहोनी हुई. परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि निजी बस के गहरी खाई में गिरने से लोगों के दुःखद निधन एवं कई यात्रियों के घायल होने का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है. इस भीषण हादसे में दिवंगत आत्माओं को ईश्वर अपने श्रीचरणों में स्थान तथा शोकाकुल परिवारों को यह अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें. ईश्वर से घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करतें हैं.
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नई दिल्ली। परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में शामिल होने के इच्छुक व्यक्तियों की संख्या चार करोड़ के पार पहुंच गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार शुक्रवार 9 जनवरी तक 4 करोड़ 20 लाख 69,002 लोगों ने परीक्षा पे चर्चा का हिस्सा बनने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है।
देश-विदेश से करोड़ों की संख्या में छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ परीक्षा पे चर्चा करने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। न केवल छात्र बल्कि लाखों की संख्या में अभिभावक और शिक्षक भी प्रधानमंत्री के साथ चर्चा में शामिल होना चाहते हैं। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार देश के करोड़ों विद्यार्थियों के लिए ‘परीक्षा पे चर्चा’ एक बहुप्रतीक्षित संवाद कार्यक्रम है।इस विशेष कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विद्यार्थियों से सीधे संवाद करेंगे। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री के संवाद में छात्रों के साथ-साथ उनके माता-पिता और शिक्षक भी शामिल हो सकते हैं। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक यहां होने वाले संवाद के जरिए अभिभावक व शिक्षक छात्रों को उनके सपनों और लक्ष्यों को पूरा करने में बेहतर सहयोग दे सकते हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस संवाद कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ का उद्देश्य परीक्षाओं से जुड़े तनाव को कम करना, विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाना और पढ़ाई को एक सकारात्मक अनुभव बनाना है। यह कार्यक्रम परीक्षा को डर नहीं, बल्कि सीखने और आत्मविकास का अवसर मानने की सोच को प्रोत्साहित करता है। एक विशेष प्रक्रिया के जरिए आवेदन करने वाले व्यक्तियों का चयन होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों में परीक्षा का तनाव दूर करने और उनके आत्मविश्वास को मजबूत बनाने के लिए यह विशेष संवाद करते हैं।यही कारण है कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ के इस संवाद में देश भर के छात्र शामिल हो रहे हैं। अब तक चार करोड़ बीस लाख से अधिक छात्रों, शिक्षकों एवं अभिभावकों ने अपना पंजीकरण कराया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संवाद कार्यक्रम यानी परीक्षा पे चर्चा (पीपीसी) का यह 9वां संस्करण है। यह संवाद इसी महीने जनवरी में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान भारत समेत विश्व के कई देशों के छात्र, अभिभावक और शिक्षक इस संवाद कार्यक्रम से जुड़ेंगे।केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए बताया कि परीक्षा पे चर्चा 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अभी भी चल रही है। देश के किसी भी हिस्से से क्लास 6 से 12 तक के छात्र इसमें शामिल होने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। शुक्रवार तक 4 करोड़ से अधिक लोगों ने इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। इनमें से 3 करोड़, 91 लाख, 50,348 रजिस्ट्रेशन देश-दुनिया के विभिन्न इलाकों में पढ़ रहे छात्रों द्वारा करवाए गए हैं।वहीं, 23 लाख 62 हजार 202 शिक्षक भी अभी इस संवाद कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। इनके अलावा अभी तक 5 लाख 56 हजार 452 अभिभावकों ने भी अपना पंजीकरण कराया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इस राष्ट्रीय अभियान से जुड़ने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्रों द्वारा पंजीकरण करवाया जा रहा है। शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि यह विशेष संवाद छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को एक साथ लाकर परीक्षाओं को सीखने के उत्सव में बदलने का प्रयास करता है। -
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र का 28 जनवरी से आगाज, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी मंजूरीसंसद का बजट सत्र 28 जनवरी से 2 अप्रैल तक चलेगा। सत्र का पहला फेज 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा, जबकि दूसरा फेज 9 मार्च से 2 अप्रैल तक आयोजित किया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के बजट सत्र को बुलाने की मंजूरी दे दी है।संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार की सिफारिश पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों को 2026 के बजट सत्र के लिए बुलाने की मंजूरी दे दी है। यह सत्र 28 जनवरी 2026 से शुरू होकर 2 अप्रैल 2026 तक चलेगा।उन्होंने लिखा कि पहला चरण 13 फरवरी 2026 को समाप्त होगा और संसद 9 मार्च 2026 को पुनः एकत्रित होगी। यह सार्थक बहस और जन-केंद्रित शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आम बजट एक फरवरी को पेश किया जाएगा। इसके साथ ही टैक्सपेयर्स, नौकरीपेशा, किसान और उद्योग हर किसी की निगाहें अब बजट 2026 पर टिक गई हैं।केंद्र सरकार की ओर से 2017-18 से आम बजट को लगातार एक फरवरी को पेश किया जा रहा है। स्टॉक एक्सचेंज भी संकेत दे चुके हैं कि अगर बजट रविवार को पेश किया जाता है तो इस दिन एक स्पेशल ट्रेडिंग सेशन रखा जाएगा।यह केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला लगातार नौवां बजट होगा। उन्होंने लगातार सबसे अधिक बजट प्रस्तुत करने का रिकॉर्ड पहले ही बना लिया है। यदि वह एक और बजट भी प्रस्तुत करती हैं, तो वे दिवंगत मोरारजी देसाई के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेंगी, जिन्होंने दो कार्यकालों, 1959 से 1964 के बीच छह और 1967 से 1969 के बीच चार, में कुल 10 बजट प्रस्तुत किए थे।अन्य हालिया वित्त मंत्रियों में, पी. चिदंबरम ने नौ बजट प्रस्तुत किए थे, जबकि प्रणब मुखर्जी ने अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में आठ बजट प्रस्तुत किए थे।
- नई दिल्ली। हाइपरसोनिक मिसाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। यह उपलब्धि डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (डीआरडीएल) की सहायता से हासिल की गई है।दरअसल, डीआरडीएल ने सक्रिय शीतलन युक्त पूर्ण-स्तरीय स्क्रैमजेट इंजन (फुल स्केल कंबस्टर) का दीर्घ-अवधि ग्राउंड परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किया है। डीआरडीएल, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की हैदराबाद स्थित अग्रणी प्रयोगशाला है। इस सफल परीक्षण ने भारत को उन्नत एयरोस्पेस क्षमताओं की वैश्विक अग्रिम पंक्ति में स्थापित किया है। यह महत्वपूर्ण परीक्षण 09 जनवरी को डीआरडीएल की अत्याधुनिक स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट सुविधा में किया गया।रक्षा मंत्रालय के अनुसार इसने स्क्रैमजेट दहनकक्ष ने 12 मिनट से अधिक समय तक निरंतर और स्थिर संचालन प्रदर्शित किया। यह उपलब्धि भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकास कार्यक्रम के लिए एक निर्णायक और आधारभूत कदम मानी जा रही है।गौरतलब है कि हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल ध्वनि की गति से पांच गुना से अधिक, अर्थात 6,100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से लंबे समय तक उड़ान भरने में सक्षम होती है। यह असाधारण क्षमता अत्याधुनिक एयर-ब्रीदिंग स्क्रैमजेट इंजन के माध्यम से प्राप्त की जाती है।यह सुपरसोनिक दहन तकनीक का उपयोग कर दीर्घ-अवधि तक निरंतर प्रणोदन (मिसाइल को आगे बढ़ाने के लिए उत्पन्न की जाने वाली शक्ति) प्रदान करता है। स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट सुविधा में किए गए इन ग्राउंड परीक्षणों ने उन्नत स्क्रैमजेट दहनकक्ष के डिजाइन को सफलतापूर्वक प्रमाणित किया है।रक्षा मंत्रालय का कहना है कि शुक्रवार को मिली यह कामयाबी बीते साल 25 अप्रैल को किए गए दीर्घ-अवधि के सब-स्केल परीक्षण पर आधारित है। उस परीक्षण ने इस उन्नत प्रौद्योगिकी के क्रमिक और सुदृढ़ विकास को सुनिश्चित किया है। पूर्ण-स्तरीय स्क्रैमजेट दहनकक्ष और परीक्षण सुविधा का डिजाइन एवं विकास डीआरडीएल द्वारा किया गया।वहीं, इसके निर्माण और कार्यान्वयन में भारतीय उद्योग साझेदारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस उपलब्धि पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, उद्योग साझेदारों और शैक्षणिक संस्थानों को बधाई दी।राजनाथ सिंह ने कहा कि यह कामयाबी भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकास कार्यक्रम के लिए एक मजबूत और ठोस आधार प्रदान करती है।उन्होंने बताया कि यह देश की सामरिक क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। वहीं, डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस परीक्षण से जुड़े सभी वैज्ञानिकों, इंजीनियर्स और तकनीकी टीमों को उनके सराहनीय योगदान के लिए शुभकामनाएं दीं। इस सफल ग्राउंड परीक्षण के साथ भारत ने हाइपरसोनिक प्रणोदन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ कर लिया है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोमनाथ धाम के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत महत्व पर प्रकाश डाला और इसे पीढ़ियों से भारतीयों के लिए आस्था, साहस और स्वाभिमान का एक शाश्वत स्रोत बताया।
पीएम मोदी ने एक्स (X) पर एक संदेश किया साझाइस संबंध में प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक संदेश साझा किया, जिसमें इस पवित्र स्थल की स्थायी विरासत पर जोर दिया गया। अपने पोस्ट में, पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि सोमनाथ धाम ने सदियों से लोगों की सामूहिक चेतना को जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो अटूट आस्था और आंतरिक शक्ति का प्रतीक है।प्रधानमंत्री मोदी ने पोस्ट में लिखा…प्रधानमंत्री मोदी ने पोस्ट में लिखा “पावन-पुनीत सोमनाथ धाम की भव्य विरासत सदियों से जन-जन की चेतना को जागृत करती आ रही है। यहां से निकलने वाली दिव्य ऊर्जा युग-युगांतर तक आस्था, साहस और स्वाभिमान का दीप प्रज्वलित करती रहेगी।”पीएम मोदी ने सोमनाथ के आध्यात्मिक सार और भगवान शिव के साथ इसके जुड़ाव को दर्शाने वाला एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया। यह श्लोक सोमनाथ को एक पवित्र और अत्यंत शक्तिशाली क्षेत्र के रूप में उजागर करता है जहां आध्यात्मिक पूर्णता और मुक्ति प्राप्त होती है।आदिनाथेन शर्वेण सर्वप्राणिहिताय वै।आद्यतत्त्वान्यथानीयं क्षेत्रमेतन्महाप्रभम्।प्रभासितं महादेवि यत्र सिद्ध्यन्ति मानवाः॥श्लोक का अर्थइस श्लोक का अर्थ है “भगवान शिव ने, आदिनाथ के रूप में, सभी जीवों के कल्याण के लिए, अपने शाश्वत सिद्धांत के माध्यम से इस पवित्र और अत्यंत शक्तिशाली क्षेत्र (प्रभास खंड) को प्रकट किया। दिव्य आभा से नहाया हुआ, यह पवित्र स्थान वह है जहां मनुष्य आध्यात्मिक पूर्णता, सद्गुण और मुक्ति मोक्ष प्राप्त करते हैं।”इससे पहले गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर की अपनी पिछली यात्राओं की यादें साझा कीं, और मंदिर पर बार-बार हुए ऐतिहासिक हमलों के बावजूद आस्था की दृढ़ता पर रोशनी डाली।पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट में लिखा, जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले, जिसके बाद कई और हमले हुए, लोगों के आध्यात्मिक संकल्प को कमजोर करने में विफल रहे।”हज़ार साल पहले, जनवरी 1026 में, सोमनाथ मंदिर पर इतिहास का पहला हमला हुआ था। 1026 के हमले और उसके बाद हुए कई हमलों से भी हमारा अटूट विश्वास नहीं डिगा। इसके उलट, इसने भारत की सांस्कृतिक एकता की भावना को और मजबूत किया और सोमनाथ मंदिर को बार-बार फिर से बनाया गया। मैं सोमनाथ की अपनी पिछली यात्राओं की कुछ तस्वीरें शेयर कर रहा हूं। अगर आप भी सोमनाथ गए हैं, तो कृपया अपनी तस्वीरें #SomnathSwabhimanParv के साथ शेयर करें।”बताना चाहेंगे, सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले बड़े हमले के 1,000 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किया जा रहा है। -
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज शुक्रवार को राजधानी के सरोजनी नगर क्षेत्र में अशोक लेलैंड के अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) प्लांट का उद्घाटन किया। इस दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि भविष्य इलेक्ट्रिक वाहनों का है, इसी दिशा में भारत आगे बढ़ रहा है।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आने वाले वर्षों में पारंपरिक ईंधन से चलने वाले वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन प्रमुख होंगे। पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से ईवी को बढ़ावा देना आवश्यक है और सरकार भविष्य की तकनीकों पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिए नियमों को सरल किया गया है और उद्योगों को ऑनलाइन प्रक्रियाओं के माध्यम से सहूलियत दी जा रही है।उन्होंने कहा कि अशोक लेलैंड का यह संयंत्र केवल एक कंपनी की सफलता नहीं, बल्कि उद्योग जगत के सरकार की नीतियों पर बढ़ते विश्वास का प्रतीक है। डबल इंजन की सरकार के तहत उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, सड़कों और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण निवेश का माहौल सुदृढ़ हुआ है।राजनाथ सिंह ने बताया कि संयंत्र का निर्माण 24 महीनों में प्रस्तावित था, लेकिन रिकॉर्ड 18 महीनों में इसे पूरा किया गया। यहां परिचालन शुरू होने के बाद हर महीने लगभग 2,500 इलेक्ट्रिक वाहन तैयार किए जाएंगे। इससे स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा और अगले पांच वर्षों में हजारों करोड़ रुपये के निवेश तथा लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है।उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार निवेश को बढ़ावा देने के लिए ‘फॉर्च्यून ग्लोबल 500 एवं फॉर्च्यून इंडिया 500 कंपनी निवेश प्रोत्साहन नीति-2023’ लेकर आई है। साथ ही ‘उत्तर प्रदेश एयरोस्पेस एवं डिफेंस यूनिट और रोजगार प्रोत्साहन नीति’ के माध्यम से राज्य को रक्षा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाया जा रहा है।राजनाथ ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक, यानी 2047 में, उत्तर प्रदेश रोजगार, उद्योग, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में देश का नेतृत्व करेगा। उन्होंने कहा कि यही विकसित भारत का सपना और संकल्प है। राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए बताया कि वर्ष 2014 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन मात्र 46 हजार करोड़ रुपये था, जो आज रिकॉर्ड बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। इसी तरह, रक्षा निर्यात जो पहले 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, अब रिकॉर्ड 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के प्रयासों के चलते भारत का रक्षा क्षेत्र तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। कौशल विकास पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है, ताकि वे देश और प्रदेश के विकास में निर्णायक भूमिका निभा सकें।रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि प्रदेश में डिफेंस कॉरिडोर स्थापित किया गया है और लखनऊ में ब्रह्मोस एयरोस्पेस की फैक्ट्री में अब ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण हो रहा है। इससे स्पष्ट है कि भारत अब अपने हथियार खुद बना रहा है और उत्तर प्रदेश इसमें नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने कहा कि जो उत्तर प्रदेश कभी ‘बीमारू राज्य’ के रूप में जाना जाता था, आज वही राज्य औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन का मजबूत केंद्र बन रहा है। वर्ल्ड-क्लास ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड कमर्शियल व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की शुरुआत प्रदेश की औद्योगिक यात्रा में ऐतिहासिक उपलब्धि है। - -दोनों नेता भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे-पीएम मोदी और चांसलर मर्ज़ साबरमती आश्रम जाएंगे और अहमदाबाद में अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव में हिस्सा लेंगेनई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जर्मनी के फेडरल चांसलर, महामहिम श्री फ्रेडरिक मर्ज़ से 12 जनवरी को अहमदाबाद में मुलाकात करेंगे।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर जर्मनी के चांसलर, महामहिम श्री फ्रेडरिक मर्ज़ 12-13 जनवरी 2026 को भारत की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। जर्मन चांसलर मर्ज़ की भारत की यह पहली आधिकारिक यात्रा होगी।दोनों नेता 12 जनवरी को सुबह लगभग 9:30 बजे साबरमती आश्रम जाएंगे। उसके बाद लगभग 10 बजे वे साबरमती रिवरफ्रंट पर अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भाग लेंगे। इसके बाद सुबह 11:15 बजे से गांधीनगर के महात्मा मंदिर में द्विपक्षीय बैठकें होंगी।भारत-जर्मनी ने रणनीतिक साझेदारी के हाल ही में 25 साल पूरे किए हैं, दोनों नेता द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे। द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार और निवेश, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, कौशल विकास और गतिशीलता में सहयोग को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, साथ ही रक्षा और सुरक्षा, विज्ञान, नवाचार और अनुसंधान, हरित और सतत विकास सहित दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज़ क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे, और दोनों देशों के व्यापार और उद्योग जगत के नेताओं के साथ बातचीत करेंगे।
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नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस समारोह के हिस्से के रूप में रक्षा मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय की एक संयुक्त पहल, प्रोजेक्ट ‘वीर गाथा 5.0’ को भारी प्रतिक्रिया मिली है। इस वर्ष इस परियोजना में लगभग 1.90 लाख स्कूलों के लगभग 1.92 करोड़ छात्रों ने भाग लिया, जो 2021 में शुरू होने के बाद से अब तक की सबसे अधिक भागीदारी है।
वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर 100 विजेताओं का चयन किया गया है: प्रारंभिक चरण (कक्षा 3-5) से 25, मध्य चरण (कक्षा 6-8) से 25 और माध्यमिक चरण (कक्षा 9-10 और 11-12 से समान प्रतिनिधित्व) से 50 ।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 8 सितंबर, 2025 को प्रारंभ की गई वीर गाथा 5.0 में छात्रों की सहभागिता बढ़ाने हेतु नवाचारी विशेषताएं जोड़ी गईं। पहली बार इस पहल में वीडियोग्राफी, एंकरिंग, रिपोर्टिंग और कहानी सुनाने जैसे लघु वीडियो प्रारूपों को शामिल किया गया। इसके माध्यम से छात्रों को भारत की समृद्ध सैन्य परंपराओं, रणनीतियों, अभियानों और वीरतापूर्ण विरासत पर केंद्रित सामग्री तैयार के लिए प्रोत्साहित किया गया।छात्रों को कलिंग के राजा खारवेल, पृथ्वीराज चौहान, छत्रपति शिवाजी महाराज, 1857 के योद्धाओं और जनजातीय विद्रोहों के नेताओं सहित अन्य महान भारतीय योद्धाओं की अदम्य भावना और सैन्य रणनीतियों का अध्ययन करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। विषयों की इस विविधता ने न केवल प्रविष्टियों की गुणवत्ता को बढ़ाया, बल्कि प्रतिभागियों की भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की समझ को भी बढ़ाया।एक महत्वपूर्ण विस्तार के रूप में विदेशों में स्थित सीबीएसई- संबद्ध स्कूलों ने पहली बार इस पहल में भाग लिया। 18 देशों के 91 स्कूलों के 28,005 छात्रों ने अपनी प्रविष्टियां प्रस्तुत कीं, जो भारत की वीरता और राष्ट्रीय गौरव की कहानियों को वैश्विक दर्शकों तक ले जाने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुई और जिसने इस पहल की अंतर्राष्ट्रीय पहुंच को और मजबूत किया।आपको बता दें, इस परियोजना में स्थानीय स्तर पर विद्यालयों द्वारा गतिविधियां आयोजित करना, वीरता पुरस्कार विजेताओं द्वारा राष्ट्रव्यापी संवाद कार्यक्रम (ऑफ़लाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से) आयोजित करना तथा MyGov पोर्टल के माध्यम से सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टियों को जमा करना शामिल था। विद्यालय स्तर की गतिविधियां 10 नवंबर, 2025 को समाप्त हुईं।वहीं, राज्य और जिला स्तर पर मूल्यांकन के बाद राष्ट्रीय स्तर के मूल्यांकन के लिए लगभग 4,020 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं, जिनमें से शीर्ष 100 प्रविष्टियों को सुपर-100 विजेताओं के रूप में चुना गया। इन विजेताओं को नई दिल्ली में रक्षा मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से सम्मानित किया जाएगा। प्रत्येक विजेता को 10,000 रुपये का नकद पुरस्कार और विशेष अतिथि के रूप में कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड 2026 देखने का अवसर मिलेगा। राष्ट्रीय स्तर के 100 विजेताओं के अतिरिक्त राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर आठ विजेताओं (प्रत्येक श्रेणी से दो) और जिला स्तर पर चार विजेताओं (प्रत्येक श्रेणी से एक) का चयन किया जाएगा तथा राज्य/केंद्र शासित प्रदेश/जिला अधिकारियों द्वारा उन्हें सम्मानित किया जाएगा।गौरतलब हो, परियोजना वीर गाथा की शुरुआत 2021 में आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत भारत की स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में की गई थी। इस पहल का उद्देश्य वीरता पुरस्कार विजेताओं के साहस, उनके वीरतापूर्ण कार्यों और उनकी जीवन यात्राओं को उजागर करना तथा छात्रों में देशभक्ति और नागरिक कर्तव्यबोध की भावना का विकास करना है। पहले संस्करण से लेकर पांचवें संस्करण तक यह परियोजना एक प्रेरणादायक आंदोलन के रूप में विकसित हुई है, जिसकी पहुंच देशभर में ही नहीं, बल्कि विदेशों में स्थित भारतीय स्कूलों तक भी निरंतर बढ़ती गई है।अपनी शुरुआत के बाद से परियोजना वीर गाथा ने उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। पहले दो संस्करणों में से प्रत्येक में 25 राष्ट्रीय विजेताओं को सम्मानित किया गया, जिसमें पहले संस्करण में लगभग 8 लाख और दूसरे संस्करण में लगभग 19 लाख छात्रों ने भाग लिया। तीसरे संस्करण ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जिसमें 100 राष्ट्रीय विजेताओं का चयन किया गया और इसमें 1.36 करोड़ छात्रों की सहभागिता रही, जो वीर गाथा 4.0 में बढ़कर 1.76 करोड़ हो गई। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 और 11 जनवरी को सोमनाथ की यात्रा पर आने वाले हैं। पीएम मोदी की अध्यक्षता में और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में गुजरात सरकार द्वारा सोमनाथ में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026’ का आयोजन किया गया है, जिससे समग्र सोमनाथ भक्तिमय एवं शिवमय बना है।
इस भक्तिमय उत्सव में सोमनाथ को स्वच्छ तथा पवित्र बनाए रखने के लिए शहर का स्थानीय निकाय प्रशासन तथा अनेक सफाई कर्मचारी अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं। सोमनाथ महादेव के सानिध्य में जो भक्ति का माहौल बना है, उसे स्वच्छता के माध्यम से अधिक मनमोहक बनाने में शहरी निकाय प्रशासन और सफाई कर्मचारियों ने आधारभूत भूमिका निभाई है। विभिन्न नगर पालिकाओं के समन्वय द्वारा स्वच्छता का एक भगीरथ कार्य यहां साकार हो रहा है। सोमनाथ शहर को स्वच्छ बनाने के लिए मानव संसाधन का एक विशाल गठबंधन बनाया गया है। सफाई कार्य के लिए वेरावळ नगर पालिका से 300 से अधिक तथा अहमदाबाद, जूनागढ, भावनगर महानगर पालिका और अन्य नगर पालिका क्षेत्रों के 700 से अधिक सहित कुल 1000 से अधिक सफाई कर्मयोगी यहां तत्परता से सेवा दे रहे हैं। पिछले पांच दिनों से दिन-रात ये सफाई कर्मचारी सोमनाथ तथा वेरावळ को स्वच्छ बनाए रखने के लिए अथक परिश्रम कर रहे हैं। मार्गों की सफाई तथा कचरा उठाने के साथ मार्गों के आसपास अतिरिक्त घास और पेड़-पत्तों की छंटाई का कार्य भी युद्ध स्तर पर किया गया है। आधुनिक मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनों द्वारा मुख्य मार्गों की सघन सफाई की जा रही है। इसके अलावा बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बनाए गए आवासीय स्थलों तथा भंडारे के स्थलों पर विशेष सफाई टुकड़ियां तैनात की गई हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए विभिन्न स्थानों पर 40 से अधिक मोबाइल टॉयलेट की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।उल्लेखनीय है कि सोमनाथ में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ भक्ति का पावन पर्व है। इस पर्व में लाखों श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। ऐसे में शहरी निकाय प्रशासन एवं सफाई कर्मचारियों के परिश्रम की प्रशंसा हो रही है। इसके कारण ही सोमनाथ और वेरावळ का वातावरण स्वच्छ, सुंदर एवं पवित्र बना हुआ है। -
नई दिल्ली। डिजिटल दुनिया में जहां हर चीज मोबाइल, कंप्यूटर से लेकर आपकी मल्टी-फंक्शन टीवी स्क्रीन पर एक क्लिक में उपलब्ध हो जाती है। उस दौर में भी किताबों का अपना क्रेज है। आज भी किताबों के कद्रदान कम नहीं हैं। कहते हैं, ‘किताबें बोलती हैं, आप बीती और जग बीती भी।’ इस लिहाज से किताबों के शौकीनों, युवाओं, बच्चों-बूढ़ों से लेकर महिलाओं तक, सभी का इंतजार नई दिल्ली में ‘विश्व पुस्तक मेले’ में पूरा होने वाला है।
दरअसल, विश्व का सबसे बड़ा पुस्तक मेला अपने 53वें संस्करण के साथ राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में लौट रहा है। ‘विश्व पुस्तक मेला- 2026’ की शुरुआत शनिवार से हो रही है। यह 18 जनवरी तक चलेगा। विश्व पुस्तक मेले में साहित्य, संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान से लेकर हर विषय पर लाखों किताबें लोगों के लिए रहेंगी। इस बार पुस्तक मेले को भारतीय सीमाओं की सुरक्षा में तैनात हमारे वीर जवानों को समर्पित किया गया है। विश्व पुस्तक मेले में एंट्री फ्री रखी गई है।राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे के मुताबिक, “हमने स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे किए हैं और अपनी सशस्त्र सेनाओं को नमन करते हुए इस बार के विश्व पुस्तक मेले की थीम ‘भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य एवं प्रज्ञा 75’ रखी गई है।” नौ दिनों तक चलने वाले विश्व पुस्तक मेले का उद्घाटन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान करेंगे। इस खास अवसर पर कतर और स्पेन का प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहेगा।विश्व पुस्तक मेले में 35 से अधिक देशों के 1,000 से अधिक प्रकाशक आ रहे हैं। मेले में 3,000 से ज्यादा स्टॉल शामिल होंगे। यहां 600 से अधिक आयोजनों में 1,000 से ज्यादा वक्ता संवाद भी करेंगे। इस पुस्तक मेले में 20 लाख से अधिक लोगों के आने का अनुमान भी जताया गया है।आयोजकों ने बताया कि इस बार का विश्व पुस्तक मेला भारतीय सेनाओं के तीनों अंगों के साहस, बलिदान और राष्ट्र-निर्माण में उनकी सराहनीय भूमिका को समर्पित है। इसी को ध्यान में रखते हुए पहली बार पुस्तक मेले में सभी के लिए प्रवेश फ्री रखा गया है। मेले का आयोजन पुस्तकों और ज्ञान को सभी के लिए सुलभ बनाने के मकसद से किया गया है। जेन-जी को किताबों से जोड़ने के लिए भी यह पहल बेहद खास है। पुस्तक मेले के अंदर आयोजित होने वाली सभी गतिविधियां भी निशुल्क रहेंगी।वहीं, मेले में बच्चों के सपनों को नई उड़ान मिलने जा रही है। इस साहित्यिक महाकुंभ में नन्हे पाठकों को देश के गौरव, एस्ट्रोनॉट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से रूबरू होने और उनसे प्रेरणा लेने का विशेष अवसर मिलेगा। विज्ञान, अंतरिक्ष और ज्ञान की दुनिया से सीधे संवाद के साथ यह मुलाकात बच्चों के लिए एक यादगार अनुभव बनेगी, जहां किताबों के साथ-साथ सपनों को भी पंख मिलेंगे। -
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में भारतीय भाषाओं पर तीसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। यह सम्मेलन वैश्विक हिंदी परिवार, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और दिल्ली विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा विभाग द्वारा आयोजित किया गया था।
विद्वानों, भाषाविदों और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने भाषा को सभ्यता की अंतरात्मा बताया, जो पीढ़ियों तक सामूहिक स्मृति, ज्ञान प्रणालियों और मूल्यों को संजोए रखती है। उन्होंने कहा कि प्राचीन शिलालेखों और ताड़ के पत्तों पर लिखी पांडुलिपियों से लेकर आज की डिजिटल लिपियों तक, भाषाओं ने दर्शन, विज्ञान, कविता और नैतिक परंपराओं को संरक्षित किया है जो मानवता को परिभाषित करती हैं।चेन्नई में हाल ही में आयोजित सिद्ध दिवस समारोह में अपनी भागीदारी को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने बड़ी संख्या में ताड़ के पत्तों पर लिखी पांडुलिपियां देखीं, जो देश की विशाल और बहुभाषी ज्ञान परंपराओं की अमिट गवाही देती हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक भारतीय भाषा ने दर्शन, चिकित्सा, विज्ञान, शासन और आध्यात्मिकता में गहरा योगदान दिया है।उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश की अनेक भाषाओं ने कभी भी राष्ट्र को विभाजित नहीं किया; बल्कि, उन्होंने एक साझा सभ्यतागत लोकाचार और एक समान धर्म को संरक्षित और मजबूत किया है।राज्यसभा के अध्यक्ष के रूप में संसद के अपने पहले सत्र के अनुभव को साझा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि अब अधिकाधिक सांसद अपनी-अपनी मातृभाषा में बोल रहे हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भारत के संविधान का संथाली भाषा में अनुवाद हाल ही में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा जारी किया गया था, जिसे उन्होंने भाषाई समावेशन और सभी भाषा समुदायों के लिए लोकतांत्रिक सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत का संविधान और इसकी आठवीं अनुसूची भाषाई विविधता को मान्यता देकर और उसका सम्मान करके देश के प्राचीन ज्ञान को दर्शाती है, और यह पुष्टि करती है कि राष्ट्रीय एकता एकरूपता पर नहीं बल्कि आपसी सम्मान पर टिकी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है जब प्रत्येक नागरिक अपनी भाषा में खुद को व्यक्त कर सके।समकालीन चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि विश्व भर में कई स्वदेशी भाषाएं लुप्तप्राय हैं। उन्होंने कहा कि भाषा सम्मेलन अनुसंधान को मजबूत करने, अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देने और प्राचीन लिपियों और पांडुलिपियों, विशेष रूप से लुप्तप्राय भाषाओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में शुरू की गई पहलों का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने वाली राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर प्रकाश डाला और भारतीय भाषाओं की पांडुलिपियों के संरक्षण और प्रसार के लिए ज्ञान भारतम मिशन की सराहना करते हुए इस बात को दोहराया कि भारत का मानना है कि ज्ञान पवित्र है और इसे साझा किया जाना चाहिए।भाषा संरक्षण में प्रौद्योगिकी को सहयोगी बनाने का आह्वान करते हुए उपराष्ट्रपति ने डिजिटल अभिलेखागार, एआई-आधारित अनुवाद उपकरणों और बहुभाषी प्लेटफार्मों के उपयोग की वकालत की ताकि भारतीय भाषाएं वर्तमान में फले-फूले और भविष्य को आकार दें।उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन के समापन में कहा कि भाषाओं के संरक्षण में देश अपनी सभ्यताओं का संरक्षण करता है; भाषाई विविधता को बढ़ावा देकर लोकतंत्र को मजबूत करता है; और प्रत्येक भाषा का सम्मान करके मानवता की गरिमा को बनाए रखता है।इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक'; इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय; अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद के महासचिव श्री श्याम परांदे के साथ देश-विदेश से आए विद्वान, शिक्षाविद, भाषाविद, शोधकर्ता और प्रतिनिधि उपस्थित थे। -
नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज सुषमा स्वराज भवन, प्रवासी भारतीय केंद्र, नई दिल्ली में समग्र शिक्षा 3.0 पर हितधारकों के साथ 'नए सिरे से समग्र शिक्षा की परिकल्पना’ शीर्षक संबंधी एक दिवसीय परामर्श बैठक की अध्यक्षता की।इस बैठक का उद्देश्य राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों के साथ सहयोगात्मक विचार-विमर्श के माध्यम से समग्र शिक्षा 3.0 के लिए एक रणनीतिक, परामर्शपूर्ण और कार्यान्वयन योग्य रोडमैप विकसित करना था। चर्चा में उभरती चुनौतियों, सर्वोत्तम प्रथाओं और योजना के अगले चरण में शासन, बुनियादी ढांचे, शिक्षक प्रशिक्षण और छात्र अधिकारों को मजबूत करने के लिए आवश्यक प्राथमिकता वाले उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया।इस बैठक में कौशल विकास एवं उद्यमिता और शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी; विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता सचिव श्री संजय कुमार; उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी; मंत्रालय के अपर एवं संयुक्त सचिव; 11 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य शिक्षा सचिव और समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक (एसपीडी); विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधि तथा शिक्षा क्षेत्र के प्रख्यात विशेषज्ञ शामिल हुए।इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का विजन सामने रखा है, जो तभी साकार हो सकता है जब भारत के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो और देश में कक्षा बारहवीं तक शत-प्रतिशत नामांकन हो। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सीखने संबंधी खाइयों को पाटना, स्कूल छोड़ने वालों की संख्या को कम करना, अधिगम एवं पोषण परिणामों में सुधार करना, शिक्षकों की क्षमता को मजबूत करना, महत्वपूर्ण कौशलों को बढ़ावा देना और 'अमृत पीढ़ी' को मैकाले की मानसिकता से आगे ले जाना- ये सभी सशक्त मानव पूंजी के निर्माण की साझा जिम्मेदारियां हैं।केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि मंच पर साझा किए सहयोगात्मक विचार-विमर्श और नवोन्मेषी सुझाव विद्यालयी शिक्षा इकोसिस्टम को मजबूत करने तथा समग्र शिक्षा की नए सिरे से परिकल्पना कर उसे परिणामोन्मुख, वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी, भारतीयता में निहित और विद्यार्थियों की विविध आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने में सहायक होंगे। उन्होंने जोर दिया कि विद्यार्थियों के समग्र विकास को बढ़ावा देने और प्रौद्योगिकी के सार्थक एकीकरण के माध्यम से ज्ञान तक पहुंचने का विस्तार करने के लिए विद्यालयों को एक बार फिर समाज के भरोसे सौंपना आवश्यक है।
समग्र शिक्षा के अगले चरण का जिक्र करते हुए श्री प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय विकास नीति 2020 के लागू होने के पांच साल बाद हम राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप शैक्षिक सुधार के एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने सभी हितधारकों से शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए एक मजबूत और समग्र वार्षिक योजना तैयार करने और इसे एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने का आहवान किया, ये कहते हुए कि विचारों का समन्वय सामूहिक क्षमता को सुदृढ़ करेगा। श्री प्रधान ने शैक्षणिक विशेषज्ञों, क्षेत्रीय (सेक्टोरल) मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों और 11 भागीदार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी और बहुमूल्य सुझावों की भी सराहना की।अपने संबोधन में श्री जयंत चौधरी ने कहा कि योजनाएँ तभी सबसे अधिक सफल होती हैं, जब उन्हें विद्यालयों और राज्यों की वास्तविकताओं पर आधारित जमीनी स्तर के दृष्टिकोण से तैयार किया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि समग्र शिक्षा 3.0 इसी भावना को दर्शाती है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति की व्यापक और क्रियात्मक अभिव्यक्ति है, जहाँ विद्यालय बदलाव के कारक के रूप में कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि बहुविषयक शिक्षा ढांचे में कौशल विकास, व्यावसायिक मार्ग, डिजिटल अधिगम और समावेशन को समाहित कर समग्र शिक्षा सुधार से आगे बढ़ते हुए विद्यार्थियों को कार्य, जीवन और तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करती है।इस अवसर पर विद्यालयी शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अपर सचिव श्री धीरज साहू द्वारा एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई। इसमें समग्र शिक्षा और एनईपी नई नीति 2020 के अंतर्गत हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला गया, साथ ही आगामी वर्षों के लिए एक रूपरेखा और महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए गए। प्रमुख फोकस क्षेत्रों में पहुंच, समानता, गुणवत्ता, शिक्षक क्षमता निर्माण, डिजिटल शिक्षा और परिणाम-आधारित अधिगम आदि शामिल है।समग्र शिक्षा विद्यालयी शिक्षा के लिए एक एकीकृत, केंद्र प्रायोजित योजना है, जो विद्यालयी शिक्षा के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाकर एक आदर्श बदलाव को चिन्हित करती है और जिसमें प्री-प्राइमरी से लेकर सीनियर सेकेंडरी स्तर तक के पूरे शैक्षिक क्रम को बिना किसी खंडन के शामिल किया जाता है। -
नई दिल्ली। आनुवंशिक और दुर्लभ रोगों से निपटने में पहले रोगों की प्रारंभिक पहचान करने और किफायतीपन दो सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं। इस बात की चर्चा करते हुए, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान के लिए स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री तथा पीएमओ, अंतरिक्ष विभाग और परमाणु ऊर्जा विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि भारत अब जीनोमिक्स, जैव प्रौद्योगिकी और निवारक स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के लिए वैज्ञानिक और आर्थिक रूप से सक्षम है। श्री सिंह डीबीटी-ब्रिक डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एंड डायग्नोस्टिक्स सेंटर (सीडीएफडी), हैदराबाद के अपने दौरे के दौरान बोल रहे थे। यहाँ उन्होंने नेशनल स्किल डेवलपमेंट सेंटर, समर्थ का शिलान्यास किया और आईडिया-एनए ब्रिक-सीडीएफडी टेक्नोलॉजी इंक्यूबेटर का भी उद्घाटन किया।डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पूर्व के दशकों में भारत मुख्य रूप से संक्रामक रोगों से जूझ रहा था, परअब देश स्वास्थ्य रक्षा के भविष्योन्मुखी चरण में प्रवेश कर चुका है जहाँ आणविक निदान, जीनोम सीक्वेंसिंग और व्यक्तिगत चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा का केंद्र बन रही हैं। उन्होंने नोट किया कि सीडीएफडी जैसे संस्थान प्रयोगशाला अनुसंधान के वास्तविक जीवन की नैदानिक परिणामों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सरकार की नीतिगत दिशा को रेखांकित करते हुए, मंत्री ने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अभूतपूर्व प्राथमिकता मिली है, जिसका लाल किले की प्राचीरों से बार-बार जोर दिया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान बायो-ई3 नीति की घोषणा का स्मरण किया, जिसे उन्होंने देश भर के वैज्ञानिकों, स्टार्टअप्स और युवा नवोन्मेषकों में व्यापक रुचि जगाने वाले उत्प्रेरक के रूप में वर्णित किया।डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत जीनोमिक्स-नेतृत्व वाले प्रयासों में तेजी से प्रगति कर रहा है, जिसमें बड़े पैमाने पर जीनोम सीक्वेंसिंग, बाल चिकित्सा आनुवंशिक रोग कार्यक्रम और हेमोफीलिया जैसे क्षेत्रों में अग्रणी कार्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये प्रयास स्वास्थ्य प्रणाली को व्यक्तिगत उपचार के युग के लिए तैयार कर रहे हैं, जहाँ समान स्थितियों वाले रोगी अलग-अलग चिकित्सकीय दृष्टिकोणों की आवश्यकता रख सकते हैं।दुर्लभ रोगों के मुद्दे का उल्लेख करते हुए, मंत्री ने कहा कि 2021 में भारत की पहली राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति का परिचय सरकार के दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव था, जो दूरदृष्टि और वैज्ञानिक इनपुट्स के प्रति खुलापन दर्शाता है। उन्होंने जोर दिया कि पहचान केवल पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों के लिए निरंतर उपचार को भी किफायती बनाना चाहिए।मंत्री ने सरकार द्वारा प्रोत्साहित एकीकृत स्वास्थ्य मॉडल के बारे में भी बात की, जिसमें आयुष मंत्रालय के माध्यम से पारंपरिक प्रणालियों का संस्थाकरण और योग को निवारक स्वास्थ्य उपकरण के रूप में वैश्विक मान्यता शामिल है। उन्होंने कहा कि कल्याणकारी प्रथाओं का आधुनिक चिकित्सा के साथ साक्ष्य-आधारित एकीकरण जीवनशैली और चयापचय विकारों के प्रबंधन में सकारात्मक परिणाम दिखा चुका है।अपने दौरे के दौरान, डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीडीएफडी में चल रहे अनुसंधान और नवाचार गतिविधियों की समीक्षा की और जीनोम सीक्वेंसिंग कार्यक्रमों तथा जन जागरूकता के उद्देश्य से आउटरीच प्रयासों जैसे पहल की सराहना की। मंत्री ने कहा कि विज्ञान को नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं के लिए सुलभ भाषा में संप्रेषित करना जैव प्रौद्योगिकी में विश्वास और रुचि निर्माण के लिए आवश्यक है।भारत की बढ़ती जैव-आर्थिक स्थिति को रेखांकित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्षों में बायोटेक स्टार्टअप्स की संख्या कई गुना बढ़ गई है, जबकि इस क्षेत्र का अर्थव्यवस्था में योगदान भी तेजी से बढ़ा बढ़ा है। उन्होंने जोड़ा कि बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन काउंसिल (ब्रिक) के गठन ने संस्थानों के बीच समन्वय को मजबूत किया है, जिससे उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान और उद्योग सहयोग को बढ़ावा मिला है।मंत्री ने टीकों और निवारक स्वास्थ्य सेवा में भारत के नेतृत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी नवाचार अब राष्ट्रीय स्तर पर तैनात किए जा रहे हैं और वैश्विक रूप से साझा किए जा रहे हैं, जो देश की वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में भूमिका को मजबूत कर रहे हैं।अपने संबोधन के समापन पर, मंत्री ने कहा कि भारत की लगभग 70 प्रतिशत आबादी 40 वर्ष से कम आयु की होने के साथ, प्रारंभिक निदान और रोकथाम के माध्यम से स्वास्थ्य में निवेश एक राष्ट्रीय अनिवार्यता है। उन्होंने सीडीएफडी पर हो रहे कार्य पर संतुष्टि व्यक्त की और कहा कि ऐसे संस्थान एक स्वस्थ, मजबूत और भविष्य के लिए तैयार भारत का निर्माण करने में सार्थक योगदान दे रहे हैं। -
नई दिल्ली। नमामि गंगे मिशन के दूसरे चरण के अंतर्गत, वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में पांच सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का संचालन शुरू होना, विभिन्न राज्यों में प्रदूषण नियंत्रण और नदी पुनर्जीवन प्रयासों को सशक्त बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। इस वित्त वर्ष के दौरान अब तक 9 परियोजनाओं को चालू किया जा चुका है जिससे प्रमुख शहरी केंद्रों में सीवेज उपचार क्षमता में सुधार हुआ है। दूसरी तिमाही तक, उधम सिंह नगर (उत्तराखंड), मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश), महेशतला (पश्चिम बंगाल) और जंगीपुर (पश्चिम बंगाल) में परियोजनाएं चालू हो चुकी हैं।
इन पांच परियोजनाओं के चालू होने के साथ ही नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत चालू की गई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की कुल क्षमता 3,976 एमएलडी तक पहुंच गई है जबकि चालू किए गए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की कुल संख्या अब 173 हो गई है। ये उपलब्धियां नदियों में बिना शोधन के सीवेज के प्रवाह को रोकने और शहरी स्वच्छता सुविधा के ढांचे को बेहतर बनाने के मिशन के मुख्य उद्देश्य को मजबूती प्रदान करती हैं।उत्तर प्रदेश के शुक्लागंज में 65 करोड़ रुपये की लागत से विकसित 5 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन शुरू होने से प्रदूषण नियंत्रण प्रयासों को महत्वपूर्ण प्रोत्साहन मिला है। हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत लागू इस परियोजना में सीक्वेंशियल बैच रिएक्टर (एसबीआर) तकनीक का उपयोग किया गया है। इस परियोजना से लगभग तीन लाख लोगों को लाभ मिलेगा, सीवेज का प्रभावी रूप से अवरोधन और डायवर्जन सुनिश्चित हो सकेगा और गंगा नदी में प्रदूषक तत्वों के बहाव पर रोक लगाई जा सकेगी।उत्तर प्रदेश का आगरा, जो यमुना बेसिन का एक महत्वपूर्ण शहर है, वहां प्रदूषण नियंत्रण के अंतर्गत आगरा परियोजना के तहत तीसरी तिमाही में 31 एमएलडी और 35 एमएलडी क्षमता वाले दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) शुरू किए गए हैं। 842 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृत इस परियोजना में कुल 13 एसटीपी के जरिए 177.6 एमएलडी की संयुक्त क्षमता विकसित की गई है। यह परियोजना एसबीआर तकनीकी का उपयोग करते हुए एचएएम मॉडल पर आधारित है। इसके माध्यम से लगभग 25 लाख लोगों को लाभ मिलेगा, यमुना नदी में अनुपचारित सीवेज का प्रवाह काफी हद तक कम होगा और शहर की स्वच्छता में उल्लेखनीय सुधार होगा।पवित्र वाराणसी शहर में, अस्सी-बीएचयू क्षेत्र में 55 एमएलडी की क्षमता वाला एक एसटीपी संचालन में आया है। इस परियोजना को 308 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृति दी गई है। एसबीआर तकनीक पर आधारित और डीबीओटी मॉडल के तहत तैयार की गई यह परियोजना करीब 18 लाख लोगों की आबादी को सेवा प्रदान करेगी। इस संयंत्र के संचालन से गंगा नदी को सीवेज प्रदूषण से बचाने और शहर में अपशिष्ट जल प्रबंधन को अधिक सुदृढ़ बनाने में अहम भूमिका निभाने की संभावना है।पश्चिम बंगाल के उत्तर बैरकपुर में, तीसरी तिमाही के दौरान 154 करोड़ रुपए की स्वीकृत परियोजना के तहत 30 एमएलडी क्षमता वाला एक एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) शुरू किया गया है। यह परियोजना दो एसटीपी की कुल नियोजित क्षमता 38 एमएलडी में से एक है। एचएएम मॉडल पर आधारित इस परियोजना को एनजीटी के मानकों के अनुसार डिज़ाइन किया गया है। इसके माध्यम से लगभग 2.2 लाख लोगों को लाभ मिलेगा, क्षेत्र में स्वच्छता में सुधार होगा और गंगा नदी में अनुपचारित सीवेज का प्रवाह रोकने में मदद मिलेगी।इसके अलावा, बिहार में पटना के कंकरबाग स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, जिसे पहले 15 एमएलडी क्षमता के तहत आंशिक रूप से चालू किया गया था, अब वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही तक इसकी क्षमता बढ़ाकर 30 एमएलडी कर दी गई है। इससे शहर के सीवेज ट्रीटमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूती मिलेगी जिससे गंगा नदी के तटों पर प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को महत्वपूर्ण सहयोग मिलेगा।ये उपलब्धियां स्वच्छ नदियों और बेहतर शहरी स्वच्छता हासिल करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाती हैं। साथ ही सतत और समग्र नदी पुनर्जीवन के मिशन के मुख्य उद्देश्य को और अधिक सुदृढ़ बनाती हैं। - -प्रधानमंत्री शौर्य यात्रा में भाग लेंगे-इस यात्रा में 108 घोड़ों की प्रतीकात्मक शोभायात्रा निकाली जाएगी, यह वीरता और बलिदान का प्रतीक है-यह कार्यक्रम सोमनाथ मंदिर पर प्रथम आक्रमण के बाद से अटूट भावना और सभ्यतागत निरंतरता के 1000 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है-प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण और उत्सव के लिए उनकी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है-प्रधानमंत्री सोमनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा अर्चना करेंगे-प्रधानमंत्री मोदी सोमनाथ मंदिर में ओंकार मंत्र के जाप में भी भाग लेंगेनई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 10-11 जनवरी 2026 को गुजरात के सोमनाथ की यात्रा पर रहेंगे। श्री मोदी इस दौरान सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में भाग लेंगे। प्रधानमंत्री 10 जनवरी को शाम लगभग 8 बजे ओंकार मंत्र का जाप करेंगे और उसके बाद सोमनाथ मंदिर में ड्रोन शो का अवलोकन करेंगे।प्रधानमंत्री 11 जनवरी को सुबह लगभग 9:45 बजे शौर्य यात्रा में भाग लेंगे। यह एक औपचारिक शोभा यात्रा है जो सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए प्राणों की आहुति देने वाले अनगिनत योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आयोजित की जाती है। शौर्य यात्रा में 108 घोड़ों का प्रतीकात्मक जुलूस निकलेगा, जो वीरता और बलिदान का प्रतीक होगा। इसके बाद, लगभग 10:15 बजे प्रधानमंत्री सोमनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा अर्चना करेंगे। प्रधानमंत्री लगभग 11 बजे सोमनाथ में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेंगे और एक जनसभा को संबोधित भी करेंगे।सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, 8 जनवरी को शुरू हुआ। यह पर्व 11 जनवरी 2026 तक चलेगा। सोमनाथ में आयोजित किया जा रहा यह पर्व भारत के उन असंख्य नागरिकों की स्मृति में मनाया जा रहा है, जिन्होंने मंदिर की रक्षा के लिए बलिदान दिया और जो आने वाली पीढ़ियों की सांस्कृतिक चेतना को प्रेरित करते रहेंगे।यह कार्यक्रम 1026 ईस्वी में महमूद गजनी के सोमनाथ मंदिर पर किए गए आक्रमण की 1,000वीं वर्षगांठ की स्मृति में आयोजित किया गया है। सदियों से इसे नष्ट करने के कई बार प्रयास किए जाने के बावजूद, सोमनाथ मंदिर आज भी सुगमता, आस्था और राष्ट्रीय गौरव के एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में मौजूद है। इसका श्रेय इसे इसके प्राचीन वैभव में पुनर्स्थापित करने के सामूहिक संकल्प और प्रयासों को जाता है।सरदार वल्लभ भाई पटेल ने स्वतंत्रता के बाद, मंदिर के जीर्णोद्धार का प्रयास किया गया। इस पुनरुद्धार यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक 1951 का है, जब जीर्णोद्धार किए गए सोमनाथ मंदिर को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में श्रद्धालुओं के लिए औपचारिक रूप से खोला गया। वर्ष 2026 में इस ऐतिहासिक जीर्णोद्धार के 75 वर्ष पूरे होने पर सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का विशेष महत्व बढ़ गया है।इस समारोह में देश भर से सैकड़ों संत भाग लेंगे। इसके साथ ही मंदिर परिसर के भीतर 72 घंटे तक लगातार 'ओम' का जाप किया जाएगा।सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में प्रधानमंत्री की भागीदारी भारत की सभ्यता की चिरस्थायी भावना का प्रदर्शन करती है और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित और प्रोत्साहन देने की उनकी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है।



























