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श्री विजयपुरम. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को जोर देकर कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह अगले 10 वर्षों में देश के राजस्व में एक प्रमुख योगदानकर्ता बन जाएगा। उन्होंने यह आशा भी व्यक्त की कि दो वर्षों में भारत वर्तमान में चौथे स्थान से आगे बढ़कर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। शाह अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में 373 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास समारोह में बोल रहे थे। केंद्रीय गृह मंत्री ने द्वीपसमूह में अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई परियोजना, तेल अन्वेषण परीक्षण और अन्य विकासात्मक परियोजनाओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि द्वीपों के इस समूह को कभी देश के राजस्व पर बोझ माना जाता था। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन आज, (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी जी की दूरदृष्टि के तहत, मुझे विश्वास है कि अगले 10 वर्षों के बाद, यह द्वीपसमूह देश के राजस्व में एक प्रमुख योगदानकर्ता होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत अब विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है, और मुझे विश्वास है कि दो वर्षों में यह विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।'' शाह ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 30 दिसंबर 1943 को राष्ट्रीय ध्वज फहराकर अंडमान को मुक्त कराया था और उनकी इच्छा के अनुरूप प्रधानमंत्री मोदी ने उनके सम्मान में अंडमान एवं निकोबार के दो द्वीपों का नाम क्रमशः ‘शहीद' और ‘स्वराज' रखा है। उन्होंने कहा, ‘‘स्वतंत्र भारत में रहने वाले प्रत्येक भारतीय के लिए यह भूमि एक तीर्थस्थल है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, सेनानियों पर हुए अत्याचार और उनकी आवाज दुनिया तक नहीं पहुंच सकी।'' केंद्रीय गृह मंत्री ने यहां नेताजी स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि अब वीर सावरकर का स्मारक और सेलुलर जेल में जलती मशाल दुनिया को बता रही है कि कई शहीदों ने यहां अपने प्राणों की आहुति दी थी। उन्होंने 2023 में प्रधानमंत्री द्वारा अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के 21 द्वीपों का नामकरण परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर किए जाने का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘मोदी जी ने द्वीपों का नामकरण वीर योद्धाओं के नाम पर करने का कार्य अपने हाथ में लिया है।'' शाह ने नए आपराधिक कानूनों पर आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली में हो रहे परिवर्तनों को समझने के वास्ते लोगों को ब्रिटिश कानूनों को समाप्त करने के लिए लागू की गईं न्याय संहिताओं पर आधारित प्रदर्शनी अवश्य देखनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘आज के समय में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह हमारी स्वतंत्रता, संप्रभुता, समुद्री शक्ति और आर्थिक गतिविधियों का केंद्रबिंदु बन गया है।'' शाह ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थिति के कारण, इन द्वीपों में समुद्री अर्थव्यवस्था के लिए अपार संभावनाएं और पर्यटन के लिए व्यापक क्षमता है, तथा केंद्र इसकी विरासत को संरक्षित करते हुए पूरे द्वीपसमूह को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने ‘विकसित भारत' अभियान के बारे में कहा, ‘‘2047 में, भारत की स्वतंत्रता के शताब्दी समारोह के दौरान, जब हमारा देश हर क्षेत्र में नंबर एक होगा, तब आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी पर जोर देना बहुत महत्वपूर्ण होगा।'' शाह ने ग्रेट निकोबार ब्लॉक में ‘जीरो पॉइंट' से ‘ईस्ट वेस्ट रोड' तक एक सड़क परियोजना, उपभोक्ता आयोग भवन, 155 बिस्तरों वाले अस्पताल के पहले चरण, 50 बिस्तरों वाली गहन चिकित्सा इकाई, एकीकृत नियंत्रण और कमान सेंटर केंद्र, तथा डीएनए और साइबर फॉरेंसिक प्रयोगशाला का उद्घाटन किया।
- नई दिल्ली। नारी सशक्तिकरण की प्रतीक और देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की शनिवार को जयंती मनाई जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई बड़े नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने समाज में शिक्षा, समानता व महिला अधिकारों के लिए सावित्रीबाई फुले के योगदान को याद किया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर हम उस अग्रणी समाज सुधारक को स्मरण करते हैं जिन्होंने सेवा और शिक्षा के जरिए सामाजिक बदलाव के लिए अपना जीवन समर्पित किया। वे समानता, न्याय और करुणा के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध थीं। उनका मानना था कि शिक्षा सामाजिक बदलाव का सबसे शक्तिशाली साधन है। उन्होंने ज्ञान और अध्ययन के जरिए जिंदगी में परिवर्तन लाने पर जोर दिया। जरूरतमंदों के लिए उनका काम भी सराहनीय है।”केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए कहा, “सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं को शिक्षा के मूल अधिकार से जोड़कर नारी सशक्तिकरण को नई दिशा दी। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए देश के पहले बालिका विद्यालय की स्थापना की और समाज सुधार की अलख जगाई। उनका प्रेरणादायी जीवन राष्ट्र निर्माण में सदैव मार्गदर्शक बना रहेगा।”केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, “नारी शिक्षा व सशक्तिकरण के लिए जीवनपर्यंत संघर्ष करने वाली महान समाज सुधारिका, भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, श्रद्धेय माता सावित्रीबाई फुले जी की जयंती पर उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन करता हूं। शोषितों-वंचितों और नारी उत्थान के लिए आपने जो अभूतपूर्व कार्य किए हैं, वे सदैव समाज के नवनिर्माण के लिए हम सबको प्रेरित करते रहेंगे।”उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “‘क्रांतिज्योति’ सावित्रीबाई फुले ने अपने साहस, संघर्ष और दूरदर्शिता से समाज में शिक्षा, समानता व महिला अधिकारों की अलख जगाई। उनका जीवन सामाजिक परिवर्तन और मानवीय गरिमा का प्रतीक है। नारी सशक्तिकरण के लिए आजीवन संघर्षरत रहीं सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
- वाराणसी । पवित्र माघ महीने की शुरुआत शनिवार से हो गई है। पौष पूर्णिमा और माघ मेले की शुरुआत के साथ ही श्रद्धालु भारी संख्या में पवित्र नदियों में स्नान करने पहुंच रहे हैं। कड़कड़ाती सर्दी में भी सुबह से ही वाराणसी और हरिद्वार में श्रद्धालु अपने पितृ पक्ष की शांति के लिए घाटों पर पूजा-पाठ भी कर रहे हैं।वाराणसी में आज सुबह से मौसम कई रंग दिखा रहा है। सर्द हवा के साथ कोहरे और हल्की बूंदों की वजह से सर्दी का सितम बढ़ गया है, लेकिन इससे श्रद्धालुओं की आस्था पर कमी देखने को नहीं मिल रही है। 11 डिग्री के तापमान और हल्की बारिश में भी घाटों पर भक्त स्नान कर रहे हैं और अपने पितरों की शांति के लिए विशेष अनुष्ठान भी करा रहे हैं।एक श्रद्धालु ने बताया कि मौसम सुबह से ही खराब है, लेकिन फिर भी भक्तों की संख्या में कमी नहीं है। प्रशासन की तरफ से भी कैम्प लगाए गए हैं और कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम और जगह-जगह अलाव की व्यवस्था भी की गई है।एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि आज पौष पूर्णिमा का पवित्र स्नान है। मान्यता के अनुसार, यह पवित्र स्नान कई वर्षों में एक बार होता है। गंगा में स्नान करने से माता गंगा की कृपा प्राप्त होती है और भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद हमारे साथ बना रहता है। स्नान के लिए घाटों पर लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है।वहीं हरिद्वार में भी आस्था का सैलाब देखा जा रहा है। सुबह से ही भक्त देश के अलग-अलग राज्यों से गंगा नदी में स्नान करने पहुंच रहे हैं। घाटों पर विशेष पूजा-पाठ और दान-दक्षिणा भी की जा रही है। हरिद्वार का मौसम भी श्रद्धालुओं की आस्था पर भारी नहीं पड़ा है, बल्कि श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ ठंडे पानी में हर-हर महादेव का नाम लेकर डुबकी लगा रहे हैं। पौष पूर्णिमा को आध्यात्म की दृष्टि से शुभ दिन माना जाता है। माना जाता है कि आज के दिन किया गया दान सौ गुना होकर वापस मिलता है।
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नई दिल्ली। सरकार ने शुक्रवार को अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क के स्वामित्व वाले सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' को कड़ा नोटिस जारी करते हुए मंच से सभी एआई-जनित अश्लील एवं गैरकानूनी सामग्रियों को तत्काल हटाने का निर्देश दिया। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कहा कि खासकर 'एक्स' के कृत्रिम मेधा (एआई) ऐप ‘ग्रोक' के जरिए तैयार की गई सामग्री को तत्काल हटाना होगा। ऐसा नहीं करने पर सोशल मीडिया कंपनी के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
मंत्रालय ने भारत में एक्स के मुख्य अनुपालन अधिकारी को भेजे नोटिस में कहा है कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत निर्धारित वैधानिक ‘जांच-पड़ताल' दायित्वों का पालन न करने का आरोप है। आदेश के मुताबिक, “एक्स को निर्देश दिया जाता है कि वह लागू कानूनों का उल्लंघन कर पहले से तैयार या प्रसारित की गई सभी सामग्री को बिना किसी देरी के हटाए या उसकी पहुंच को निष्क्रिय करे। यह कार्रवाई आईटी नियम, 2021 में निर्धारित समयसीमा के भीतर सख्ती से सुनिश्चित की जाए, ताकि साक्ष्यों के साथ किसी भी तरह से छेड़छाड़ न हो।मंत्रालय ने एक्स से तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देने के लिए भी कहा है। नोटिस में खासकर ‘ग्रोक' के दुरुपयोग से तैयार अश्लील, नग्न, आपत्तिजनक एवं यौन गतिविधियों को स्पष्ट रूप से दर्शाने वाली सामग्री के होस्टिंग, निर्माण, प्रकाशन, प्रसारण, साझा करने या अपलोड करने पर लगाम लगाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा गया है।मंत्रालय ने चेतावनी देते हुए कहा है कि निर्धारित वैधानिक प्रावधानों का पालन न करने को गंभीरता से लिया जाएगा और ऐसा होने पर मंच, उसके जिम्मेदार अधिकारियों तथा कानून का उल्लंघन करने वाले उपयोगकर्ताओं के खिलाफ बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। ऐसी स्थिति में कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, आईटी नियमों, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और अन्य लागू कानूनों के तहत की जाएगी। - नई दिल्ली। भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया और अहम अध्याय जुड़ने वाला है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि देश को 15 अगस्त 2027 तक पहली बुलेट ट्रेन मिलने जा रही है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस प्रोजेक्ट ने अब एक बड़ा मील का पत्थर भी हासिल कर लिया है। रेल मंत्री ने बताया कि यह बुलेट ट्रेन न सिर्फ आधुनिक तकनीक का उदाहरण होगी, बल्कि आम मध्यम वर्ग के लिए भी उपयोगी और व्यावहारिक साधन बनेगी।नई दिल्ली के रेल भवन में रेल मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में कुल 12 स्टेशन होंगे, जिसमें महाराष्ट्र में मुंबई (बीकेसी), ठाणे, विरार और बोईसर स्टेशन बनाए जाएंगे, जबकि गुजरात में वापी, बिलीमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती स्टेशन शामिल हैं। साबरमती और मुंबई के बीकेसी को टर्मिनल स्टेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है। पूरे 508 किलोमीटर लंबे रूट पर 3 डिपो बनाए जा रहे हैं, जबकि आमतौर पर इतनी दूरी के लिए दो डिपो ही पर्याप्त होते हैं।अश्विनी वैष्णव ने बताया कि महाराष्ट्र में पूर्ववर्ती उद्धव ठाकरे सरकार के कार्यकाल के दौरान लंबे समय तक जरूरी अनुमतियां और स्वीकृतियां अटकी रहीं। इसी वजह से परियोजना में देरी हुई और अतिरिक्त व्यवस्थाओं के तहत तीसरे डिपो की योजना बनानी पड़ी। इस देरी के बावजूद अब प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है।बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में हाल ही में एक अहम तकनीकी उपलब्धि हासिल की गई है। परियोजना के तहत बनने वाली सात पहाड़ी सुरंगों में से माउंटेन टनल-5 का सफल ब्रेकथ्रू पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा एक अंडर-सी टनल भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा है। महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थित 1.5 किलोमीटर लंबी यह सुरंग इलाके की सबसे लंबी सुरंगों में से एक है और विरार व बोईसर स्टेशनों के बीच बनाई गई है। इससे पहले ठाणे और बीकेसी के बीच 5 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग सितंबर 2025 में पूरी हो चुकी है।मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली बुलेट ट्रेन के लिए डिजाइन किया गया है। यह ट्रेन 508 किलोमीटर की पूरी दूरी महज 2 घंटे 17 मिनट में तय करेगी। ट्रैक की अधिकतम क्षमता 350 किमी प्रति घंटे तक रखी गई है। पूरे कॉरिडोर पर नॉइज बैरियर लगाए जाएंगे और सड़क परिवहन की तुलना में लगभग 95 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी।रेल मंत्री ने साफ कहा कि भारत में बुलेट ट्रेन को मिडिल क्लास को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य इसे केवल लग्जरी नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए उपयोगी बनाना है। फिलहाल पश्चिम भारत में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है और आने वाले समय में पूर्व, उत्तर और दक्षिण भारत में भी ऐसे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। बुलेट ट्रेन के शुरू होने से औद्योगिक विकास, आईटी हब और नए आर्थिक केंद्रों को बढ़ावा मिलेगा।बुलेट ट्रेन परियोजना के निर्माण कार्य में अब तक करीब 90 हजार से 1 लाख लोगों को रोजगार मिल चुका है। ट्रेन के संचालन के बाद भी बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह प्रोजेक्ट न केवल तेज और सुरक्षित यात्रा का विकल्प देगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी नई रफ्तार देगा।रेल मंत्री ने यह भी बताया कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की पूरी टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसका पहला रूट गुवाहाटी-कोलकाता प्रस्तावित है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही इसे हरी झंडी दिखाएंगे। उन्होंने कहा कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन लंबी दूरी की रात की यात्राओं के लिए यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं, बेहतर सुरक्षा और आधुनिक यात्रा अनुभव देगी।पिछले साल नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने गुजरात दौरे के दौरान मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की प्रगति का निरीक्षण किया था। इस दौरान वे सूरत बुलेट ट्रेन स्टेशन पहुंचे थे और वहां काम कर रहे इंजीनियरों व कर्मचारियों से बातचीत भी की थी। सरकार का दावा है कि तय समयसीमा के भीतर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा करने के लिए पूरी गंभीरता से काम किया जा रहा है।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने बृहस्पतिवार को ‘कौशल मंथन' कार्यक्रम के समापन सत्र की अध्यक्षता की जिसमें औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के लिए परिणाम-आधारित ग्रेडिंग व्यवस्था लाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार संभाल रहे राज्य मंत्री चौधरी की अध्यक्षता में हुई इन चर्चाओं का केंद्र राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप सुधारों और पहलों की पहचान पर रहा। एक सप्ताह चले ‘कौशल मंथन' कार्यक्रम में क्षेत्रीय कौशल परिषदों (एसएससी) को सशक्त करने और प्रशिक्षण गुणवत्ता को बेहतर बनाने जैसे सुधारों पर भी चर्चा हुई। समापन सत्र के दौरान ‘कौशल संकल्प 2026' को अंतिम रूप दिया गया जो आने वाले साल में नीतिगत कार्रवाई और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन का मार्गदर्शन करेगा। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, चर्चाओं में अगले चरण के सुधारों पर जोर दिया गया। इनमें परिणामों पर आधारित दृष्टिकोण, राज्य सरकारों और उद्योग के साथ बेहतर समन्वय तथा प्रशिक्षण गुणवत्ता, मूल्यांकन और प्रमाणन की निगरानी को मजबूत करना शामिल है। इन चर्चाओं का एक प्रमुख विषय संस्थागत ढांचे को मजबूत करते हुए प्रक्रियाओं को सरल बनाना रहा। प्रस्तावित दिशा-निर्देशों में आईटीआई के लिए परिणाम-आधारित ग्रेडिंग व्यवस्था लागू कर गुणवत्ता सुधार को बढ़ावा देना और क्षेत्रीय एवं संस्थागत स्तर पर शक्तियों का विकेंद्रीकरण शामिल है। बैठक में एसएससी के पुनर्गठन एवं सुदृढ़ीकरण के साथ ही उनकी नियमित समीक्षा की जरूरत पर भी चर्चा की गई। इसके अलावा प्रौद्योगिकी बदलाव और उद्योग की मांग के अनुरूप पाठ्यक्रमों में लगातार सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
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ब्रह्मपुर. वैज्ञानिकों के एक समूह ने भारतीय जलक्षेत्र में पहली बार गोबी मछली (बैथीगोबियस मेगेटी) होने का पता लगाया है। यह गोबी मछली ओडिशा के गंजम जिले में गोपालपुर के पास आर्यपल्ली में देखी गयी है। गोपालपुर स्थित भारतीय प्राणि सर्वेक्षण (जेडएसआई) के मुहाना जीवविज्ञान क्षेत्रीय केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अनिल महापात्रा ने बताया कि हालांकि मछली की यह प्रजाति जापान, ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी अफ्रीका और फारस की खाड़ी सहित भारत-पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में पाई जाती है, लेकिन इससे पहले भारत में इसके पाए जाने की कोई सूचना नहीं थी। पिछले वर्ष दिसंबर में आर्यपल्ली के कृत्रिम चट्टानी ज्वारीय क्षेत्र से तीन जीवित नमूने एकत्र किए गए थे। आर्यपल्ली मछली पालन पर आधारित एक प्रमुख गांव है। विस्तृत अध्ययन के बाद, वैज्ञानिकों ने इस प्रजाति की पहचान गोबी मछली के रूप में की और कहा कि यह भारत में पहली बार पाई गई है। उन्होंने कहा, ‘‘ बंगाल की खाड़ी के तटीय क्षेत्र में पाई जाने वाली बैथीगोबियस मेगेटी पर एक रिपोर्ट सोमवार को अंतरराष्ट्रीय पत्रिका नेशनल एकेडमी साइंस लेटर्स में प्रकाशित हुई।''
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नयी दिल्ली. केंद्रीय उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बृहस्पतिवार को एकीकृत ई-बिल प्रणाली शुरू की। इससे सरकार लगभग दो लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी प्रदान कर सकेगी। एक सरकारी बयान में कहा गया है कि यह प्रणाली मानव संचालित, कागज आधारित लेनदेन से पूरी तरह डिजिटल कामकाज की ओर बदलाव को दिखाता है, जिससे बिलों के आदान प्रदान को खत्म किया जा सकेगा। नड्डा ने पेशकश के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कहा, "यह ऑनलाइन प्रणाली पारदर्शी, प्रभावी और प्रौद्योगिकी संचालित प्रशासन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।" उर्वरक सचिव, रजत कुमार मिश्रा ने इस पेशकश को विभाग के वित्तीय परिचालन को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। यह पहल उर्वरक विभाग के एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (आईएफएमएस) और वित्त मंत्रालय के महालेखा नियंत्रक (सीजीए) के सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के बीच एक प्रौद्योगिकीय साझेदारी का नतीजा है। यह प्रणाली खर्चों पर वास्तविक समय पर निगरानी और मजबूत वित्तीय नियंत्रण देता है, जिसमें सभी भुगतानों को केन्द्रीय स्तर पर देखा और रिपोर्ट किया जा सकता है। ई-बिल मंच उर्वरक कंपनियों को ऑनलाइन दावा पेश करने और वास्तविक समय में भुगतान स्थिति का पता लगाने की सुविधा देता है। इससे भौतिक रुप से उसका पता लगाने और उसके लिए कहीं आने जाने की जरुरत खत्म हो जाती है।
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नयी दिल्ली. रक्षा मंत्रालय ने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए चालू वित्तवर्ष 2025-26 में दिसंबर के अंत तक 1.82 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। सरकार ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। सरकार के मुताबिक रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने जनवरी 2025 से देश की रक्षा तैयारियों को बढ़ाने के लिए 3.84 लाख करोड़ रुपये से अधिक के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिसमें स्वदेशीकरण के माध्यम से आधुनिकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 की समीक्षा और संशोधन, रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को प्रोत्साहन, मित्र देशों के साथ बेहतर जुड़ाव, भारत मैत्री शक्ति सहित रक्षा ऋण और रक्षा प्रतिष्ठानों के निकट प्रतिबंधित दूरी मानदंडों का युक्तिकरण प्रगति पर हैं।'' बयान में कहा गया कि इसके अलावा, निर्यात प्रोत्साहन निकाय का गठन, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) में गुणवत्ता आश्वासन 4.0 और उद्योग 4.0 का कार्यान्वयन और रक्षा उपकरणों के लिए एक राष्ट्रीय एकीकृत परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना ‘‘प्रगति पर है''। रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2025 को ‘‘सुधारों का वर्ष'' घोषित किया था।
बयान में कहा गया कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में,मंत्रालय ने तीन सेनाओं के समन्वय को मजबूत करने, रक्षा तैयारियों को बढ़ाने, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और कल्याणकारी वितरण तंत्र में सुधार लाने के उद्देश्य से व्यापक सुधारों को लागू करने में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। बयान के मुताबिक मंत्रालय में किए गए ये सुधार, एक आधुनिक, एकीकृत और भविष्य के लिए तैयार रक्षा प्रणाली के निर्माण की दिशा में ‘‘संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण'' को दर्शाते हैं। इसमें कहा गया, ‘‘रक्षा अधिग्रहण परिषद ने जनवरी 2025 से देश की रक्षा तैयारियों को बढ़ाने के लिए कुल 3.84 लाख करोड़ रुपये से अधिक के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिसमें स्वदेशीकरण के माध्यम से आधुनिकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है।'' बयान के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 में, दिसंबर 2025 के अंत तक, मंत्रालय ने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए 1.82 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। मंत्रालय ने बताया कि उसने दिसंबर 2025 के अंत तक पूंजी अधिग्रहण बजट के तहत 80 प्रतिशत (लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये) व्यय कर लिया है। इस आवंटन का उपयोग सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण पर किया जा रहा है। बयान के मुताबिक, ‘‘रक्षा मंत्रालय का कुल पूंजीगत व्यय भी 76 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिसमें पूंजी अधिग्रहण के अलावा बुनियादी ढांचे, भूमि, अनुसंधान और विकास आदि पर किया गया व्यय शामिल है।'' सरकार ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने और आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई गई है। इसमें रक्षा विनिर्माण लाइसेंसों को सुव्यवस्थित करना, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की क्षमताओं का आकलन करना और रक्षा खरीद में मांग-आपूर्ति विश्लेषण को बढ़ाने के लिए बाजार खुफिया रिपोर्ट तैयार करना शामिल है। मंत्रालय ने कहा कि संयुक्त संचालन नियंत्रण केंद्र की स्थापना, सशस्त्र बलों के लिए दृष्टिकोण 2047 का प्रकाशन, भविष्य संचालन विश्लेषण समूह का गठन, संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और एकीकृत क्षमता विकास योजना को अंतिम रूप देना ‘‘कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं''। इसमें कहा गया है कि इस दिशा में उठाए गए कदम ऑपरेशन सिंदूर की योजना और क्रियान्वयन के दौरान फलदायी साबित हुए। मंत्रालय ने कहा कि युद्ध और नेतृत्व पदों में महिलाओं की भूमिकाओं का विस्तार, सैन्य पर्यटन को बढ़ावा देना और परिचालन बुनियादी ढांचे और आवास के लिए एक दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने का काम पूरा हो चुका है। -
शिमला. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में बृहस्पतिवार को एक खड़े ट्रक से एक गाड़ी के टकरा जाने के कारण तीन महिलाओं समेत चार लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, बृहस्पतिवार तड़के तीन बजे चारों दोस्त कुल्लू लौट रहे थे, तभी उनकी गाड़ी सड़क किनारे एक चबूतरे से टकराकर एक खड़े ट्रक से जा भिड़ी। पुलिस ने कहा कि वे नव वर्ष की पूर्व संध्या और स्थानीय टैटू कलाकार सतपाल का जन्मदिन मनाने के लिए कसोल आए थे। अधिकारियों ने बताया कि टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन पूरी तरह से क्षत-विक्षत हो गया, जिससे कुल्लू जिले के सतपाल (25) , कशीश तथा लाहौल एवं स्पीति की अंकिता की मौके पर ही मौत हो गई। अधिकारियों के अनुसार चौथी रतिंजलि को मंडी के मेडिकल कॉलेज नेरचौक रेफर किया गया था, लेकिन इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। रतिंजलि भी कुल्लू की रहने वाली थी। पुलिस के मुताबिक, इस दुर्घटना के सिलसिले में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच चल रही है। उसने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव मृतक के परिजनों को सौंप दिये जाएंगे।
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राजकोट. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 11 जनवरी को राजकोट शहर में वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन (वीजीआरसी) का उद्घाटन करेंगे। एक मंत्री ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। राज्य के कृषि मंत्री एवं सरकार के प्रवक्ता जीतू वाघाणी ने बताया कि कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र पर केंद्रित यह दो दिवसीय सम्मेलन 11 और 12 जनवरी को राजकोट स्थित मारवाड़ी विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य क्षेत्र में उभरते आर्थिक, औद्योगिक और सांस्कृतिक अवसरों को प्रदर्शित करना और उन पर प्रकाश डालना है। वाघाणी ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी 11 जनवरी को राजकोट में कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र के लिए दूसरे वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इस आयोजन के लिए 6,000 से अधिक लोगों ने पंजीकरण करा लिया है और 21 देशों के प्रतिनिधियों एवं व्यापारिक हस्तियों के भाग लेने की उम्मीद है।''
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नयी दिल्ली. इस साल जनवरी से मार्च तक की अवधि में दक्षिण और मध्य भारत में अच्छी बारिश होने की संभावना है, जबकि पंजाब और हरियाणा सहित उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने बृहस्पतिवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी। महापात्रा ने हालांकि बताया कि देश के कुछ हिस्सों में औसत से कम बारिश के पूर्वानुमान का रबी की फसल पर असर पड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में सिंचाई की अच्छी व्यवस्था है और मानसून की अच्छी बारिश के कारण जलाशय भरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर, बिहार और विदर्भ के कुछ हिस्सों में एक से तीन दिन अतिरिक्त ठंड पड़ने की संभावना है, जबकि राजस्थान में कम ठंड पड़ने का अनुमान है। महापात्रा ने कहा कि देश के अधिकांश क्षेत्रों में जनवरी में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम रहने का अनुमान है। हालांकि, उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों के साथ-साथ प्रायद्वीपीय भारत में भी सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने दिसंबर महीने में लगभग सूखे मौसम का कारण पश्चिमी विक्षोभों की अनुपस्थिति को बताया, जो आमतौर पर देश के उत्तर-पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में बारिश और गरज के साथ बौछारें लाते हैं। महापात्रा ने कहा, ‘‘पश्चिमी विक्षोभ या तो उत्तर की ओर बढ़ रहे हैं या बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसका कारण जलवायु परिवर्तन है।'' उन्होंने कहा कि दिसंबर से मार्च के दौरान कम बर्फबारी दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम में अच्छी बारिश के संकेतकों में से एक है। महापात्रा ने कहा कि वर्तमान में ला नीना की स्थिति बनी हुई है - यानी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह ठंडी हो रही है - और वैश्विक पूर्वानुमान ने मार्च तक ईएनएसओ तटस्थ स्थितियों का अनुमान जताया है। उन्होंने कहा, ‘‘ जून-जुलाई तक ईएनएसओ की तटस्थ परिस्थितियां हावी रहने की संभावना है। इससे यह संकेत मिलता है कि यह अच्छी मानसूनी बारिश का सूचक है।'' महापात्रा ने कहा कि 2025, 1901 के बाद से आठवां सबसे गर्म वर्ष था, जिसमें अखिल भारतीय वार्षिक औसत भूमि सतह वायु तापमान 1991-2020 के दीर्घकालिक औसत से 0.28 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। अब तक का सबसे गर्म वर्ष 2024 था, जब पूरे भारत में तापमान दीर्घकालिक औसत से 0.65 डिग्री सेल्सियस अधिक था। आईएमडी के महानिदेशक ने कहा कि शीतकालीन (जनवरी-फरवरी) और मानसून-पूर्व (मार्च-मई) ऋतुओं के दौरान अखिल भारतीय मौसमी औसत तापमान दीर्घकालिक औसत से अधिक रहा, जिसमें क्रमशः 1.17 डिग्री सेल्सियस और 0.29 डिग्री सेल्सियस की विसंगति देखी गई।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 70 वर्ष की आयु में बेंगलुरु से कन्याकुमारी तक 702 किलोमीटर की दूरी साइकिल से तय करने वाले कर्नाटक के विधायक एस. सुरेश कुमार से फोन पर बातचीत की और उनके साहस व जज्बे की जमकर तारीफ की।
पीएम मोदी ने कहा कि बेंगलुरु से कन्याकुमारी तक साइकिल से यात्रा करना न केवल तारीफ के काबिल है, बल्कि यह समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा भी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से उबरने के बाद यह उपलब्धि हासिल करना उनकी हिम्मत और कभी हार न मानने वाले जज्बे को दर्शाता है। साथ ही, यह फिटनेस को लेकर एक मजबूत संदेश भी देता है।प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने स्वयं सुरेश कुमार से फोन पर बात कर उनके इस प्रयास के लिए बधाई दी। वहीं, एस. सुरेश कुमार ने ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन आना मेरे लिए बेहद खुशी की बात है। उन्होंने कन्याकुमारी तक 702 किलोमीटर साइकिल चलाने के लिए मुझे बधाई दी। उन्हें यह जानकर भी खुशी हुई कि 51 वर्षों बाद यह मेरी कन्याकुमारी तक दूसरी साइकिल यात्रा थी, वह भी एक गंभीर बीमारी से उबरने के बाद।”बेंगलुरु के राजाजीनगर से विधायक सुरेश कुमार एक दुर्लभ बीमारी चिकनगुनिया एन्सेफेलोपैथी (सीई) से पीड़ित हो गए थे। बीमारी के कारण वह महीनों तक बिस्तर पर रहने को मजबूर थे और अपनी उंगलियां तक हिलाने में असमर्थ थे। स्वस्थ होने के बाद उन्होंने 12 लोगों के एक समूह के साथ ‘राजाजीनगर पेडल पावर’ के बैनर तले बेंगलुरु से कन्याकुमारी तक 702 किलोमीटर की साइकिल यात्रा शुरू की, जिसे उन्होंने पांच दिनों में सफलतापूर्वक पूरा किया। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से महाभारत के एक श्लोक से प्रेरणा लेते हुए दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कामना की है कि हर प्रयास में सफलता मिले। नए साल में संकल्प की सिद्धि हो।पीएम मोदी ने कहा- ‘दृढ़संकल्प और इच्छाशक्ति से नए साल में आपके संकल्प की सिद्धि हो’
उन्होंने ने आज शुक्रवार सुबह एक्स पर लिखा, ”मेरी कामना है कि आने वाले समय में आपको अपने हर प्रयास में सफलता मिले। दृढ़संकल्प और इच्छाशक्ति से नए साल में आपके संकल्प की सिद्धि हो।”प्रधानमंत्री मोदी ने यह श्लोक को भी किया उद्धृतप्रधानमंत्री मोदी ने इस पोस्ट के साथ ”उत्थातव्यं जागृतव्यं योक्तव्यं भूतिकर्मसु। भविष्यतीत्येव मनः कृत्वा सततमव्यथैः।।” श्लोक को भी उद्धृत किया है।यह श्लोक महाभारत के उद्योगपर्व (135/29) कायह श्लोक महाभारत के उद्योगपर्व (135/29) का है। इसका अर्थ है, “उठना चाहिए, जागते रहना चाहिए, और ऐश्वर्य (कल्याणकारी) कार्यों में लग जाना चाहिए। ‘मेरा कार्य अवश्य सिद्ध होगा’ ऐसा मन में दृढ़ निश्चय करके, लगातार विषाद (चिंता) रहित होकर कर्म करते रहना चाहिए।” (इनपुट-एजेंसी) - नई दिल्ली। सार्वजनिक सुविधा बढ़ाने और राजमार्गों का उपयोग करने वाले लोगों को सक्रिय किए जाने के बाद होने वाली परेशानियों से बचाने हेतु, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने 1 फरवरी 2026 से सभी नए जारी किए गए फास्टैग वाली कारों (कार/जीप/वैन श्रेणी फास्टैग) के लिए ‘नो योर व्हीकल (Know Your Vehicle (KYV) की प्रक्रिया को बंद करने का फैसला किया है।आधिकारिक बयान के अनुसार, यह सुधार सड़क का उपयोग करने वाले उन लाखों आम लोगों को बड़ी राहत देगा, जिन्हें वाहनों के मान्य दस्तावेज होने के बावजूद फास्टैग के सक्रिय होने के बाद जारी होने के उपरांत केवाईवी संबंधी जरूरतों के कारण असुविधा और देरी का सामना करना पड़ रहा था।कारों के लिए पहले से जारी मौजूदा फास्टैग के लिए, अब केवाईवी रूटीन जरूरत के तौर पर अनिवार्य नहीं होगा। केवाईवी केवल वैसे खास मामलों में जरूरी होगा जहां ढीले फास्टैग, गलत जारी होने, या गलत इस्तेमाल से जुड़ी समस्याएं जैसी शिकायतें मिलती हैं। किसी भी शिकायत के न होने पर, मौजूदा कार फास्टैग के लिए किसी केवाईवी की जरूरत नहीं होगी।वहीं, सटीकता, अनुपालन और प्रणाली की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के साथ-साथ उपयोग करने वाले लोगों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाने हेतु, एनएचएआई ने साथ ही जारीकर्ता बैंकों के लिए सक्रिय होने से पहले सत्यापन के नियमों को भी मजबूत किया है:-• अनिवार्य वाहन-आधारित सत्यापन: फास्टैग को सक्रिय करने की अनुमति केवल वाहन डेटाबेस से वाहन के विवरण के सत्यापन के बाद ही दी जाएगी।• सक्रिय होने के बाद कोई सत्यापन नहीं: सक्रिय होने के बाद सत्यापन की अनुमति देने वाला पहले का प्रावधान बंद कर दिया गया है।• केवल असाधारण मामलों में आरसी-आधारित सत्यापन: जहां वाहन का विवरण वाहन पर उपलब्ध नहीं है, वहां जारीकर्ता बैंकों को पूरी जवाबदेही के साथ सक्रिय किए जाने से पहले पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) का उपयोग करके विवरण को सत्यापित करना होगा।• ऑनलाइन फास्टैग शामिल: ऑनलाइन चैनलों के माध्यम से बेचे जाने वाले फास्टैग भी बैंकों द्वारा पूर्ण सत्यापन के बाद ही सक्रिय किए जायेंगे।इन उपायों से सभी गाड़ियों का सत्यापन पहले ही पूरा हो जाना सुनिश्चित होगा, जिससे फास्टैग के सक्रिय होने के बाद ग्राहकों से बार-बार फॉलो-अप करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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भोपाल. देश में वर्ष 2025 के दौरान विभिन्न कारणों से कुल 166 बाघों की मौत हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 40 अधिक है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के ताजा आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई। आंकड़ों के अनुसार, देश का ‘टाइगर स्टेट' कहा जाने वाला मध्यप्रदेश बाघों की मौत के मामलों में शीर्ष पर रहा, जहां वर्ष 2025 में 55 बाघ मृत पाए गए। इसके बाद महाराष्ट्र में 38, केरल में 13 और असम में 12 बाघों की मौत दर्ज की गई।
इन 166 मृत बाघों में 31 शावक शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों के बीच क्षेत्रीय संघर्ष मौत का प्रमुख कारण रहा है, जिसका मुख्य कारण जंगलों में स्थान की कमी है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में देश में 126 बाघों की मौत हुई थी जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 166 हो गई। महाराष्ट्र के ब्रह्मपुरी वन मंडल में वर्ष 2025 में बाघ की पहली मौत दो जनवरी को दर्ज की गई, जहां एक वयस्क नर बाघ मृत पाया गया। इसके तीन दिन बाद मध्यप्रदेश के पेंच बाघ अभयारण्य में एक मादा बाघ की मौत हुई। हालिया मामला 28 दिसंबर को मध्यप्रदेश के सागर के उत्तर क्षेत्र से सामने आया, जहां एक वयस्क नर बाघ मृत पाया गया। बाघों पर लंबे समय से शोध कर रहे वन्यजीव विशेषज्ञ जयराम शुक्ला ने कहा कि देश में बाघों की आबादी संतृप्ति स्तर पर पहुंच रही है। उन्होंने कहा, “बाघों के लिए क्षेत्र तय करने की जगह सीमित होती जा रही है। इसी वजह से वे आपस में संघर्ष कर रहे हैं और इसकी कीमत जान देकर चुका रहे हैं।” मध्यप्रदेश के संदर्भ में शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2014 के बाद से राज्य में बाघों की संख्या में लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया, “यह वृद्धि अभूतपूर्व है। सवाल यह है कि इतने बाघों के लिए क्षेत्र कहां है? मध्यप्रदेश में आबादी तेजी से बढ़ने के कारण संघर्ष और मौतें भी बढ़ी हैं।” अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस 2023 पर जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में बाघों की संख्या 2018 में 2,967 थी, जो 2022 में बढ़कर 3,682 हो गई। इसमें सालाना करीब छह प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
अधिकारियों के अनुसार, दुनिया की लगभग 75 प्रतिशत बाघ आबादी भारत में पाई जाती है।
इस संबंध में मध्यप्रदेश के प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सुभारंजन सेन ने बताया कि राज्य में बाघों की संख्या सबसे अधिक होने के कारण यहां मौतों की संख्या भी अपेक्षाकृत ज्यादा है। उन्होंने बताया, “हम मरने वाले हर बाघ की निगरानी करते हैं और प्रत्येक मामले की गहन जांच की जाती है। शिकार से जुड़े मामलों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाती।” सेन ने बताया कि विभाग के पास मजबूत ‘फील्ड पेट्रोलिंग सिस्टम' है और एनटीसीए द्वारा निर्धारित सभी मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। उन्होंने बताया, “हर बाघ की मौत को तब तक शिकार का मामला माना जाता है, जब तक इसके विपरीत ठोस साक्ष्य न मिल जाएं।” अधिकारी ने बताया कि राज्य में प्रभावी ‘स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स' (एसटीएसएफ) भी कार्यरत है, जो इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस से जुड़े मामलों सहित संगठित वन्यजीव अपराध के खिलाफ सफलतापूर्वक काम कर रही है। सेन के अनुसार, मध्यप्रदेश में वर्ष 2014 में बाघों की संख्या 308 थी, जो 2018 में बढ़कर 526 और 2022 में 785 हो गई। उन्होंने बताया कि हर चार वर्ष में होने वाली देशव्यापी बाघ गणना इस वर्ष शुरू हो चुकी है और मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है। सेन ने बताया कि अब तक शिकार के 10 मामलों में 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और कानूनी कार्रवाई जारी है।-file photo
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नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को सकारात्मक बदलाव लाने का एक ‘‘बड़ा अवसर'' बताते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इसके लाभ समाज के सभी वर्गों, विशेष रूप से वंचितों तक पहुंचें। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि एआई भारत की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका के रूप में उभर रहा है और आने वाले दशकों में इसका देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), रोजगार और उत्पादकता में महत्वपूर्ण योगदान होगा। उन्होंने कहा कि सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी बाधाओं को कम करने के लिए एआई का उपयोग किया जाना चाहिए।
मुर्मू ने कहा, ‘‘एआई भारत की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका के रूप में उभर रहा है। भारत तेजी से विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।'' उन्होंने कहा कि सरकार उद्योग जगत के साझेदारों और शिक्षाविदों के सहयोग से यह सुनिश्चित कर रही है कि भारत न केवल प्रौद्योगिकी को अपनाए बल्कि इसके माध्यम से एक जिम्मेदार भविष्य का निर्माण भी करे। राष्ट्रपति ने नागरिकों से नयी शिक्षा नीति के माध्यम से विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में काम करने और भारत को ज्ञान की महाशक्ति तथा प्रौद्योगिकी-आधारित समावेशी और समृद्ध राष्ट्र में बदलने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार स्कूलों में एआई के उपयोग को बढ़ावा दे रही है और बच्चों को तकनीकी नेतृत्व के लिए तैयार कर रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि ‘एआई लैब्स' और ‘एआई मॉडल' के माध्यम से बच्चों में नवोन्मेषी सोच और भविष्य को ध्यान में रखते हुए कौशल विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शुरू की गई ‘स्किल द नेशन चैलेंज' का उद्देश्य बड़े पैमाने पर एआई सीखने और नवाचार को बढ़ावा देना है। -
नयी दिल्ली. तीन दशक से अधिक समय से जारी सिलसिले को बरकरार रखते हुए भारत और पाकिस्तान ने एक द्विपक्षीय समझौते के तहत अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का बृहस्पतिवार को आदान-प्रदान किया। सूची का आदान-प्रदान ऐसे समय किया गया है जब पिछले साल मई में चार दिनों तक चले सैन्य संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि सूची का आदान-प्रदान परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले को रोकने वाले एक समझौते के प्रावधानों के तहत हुआ। इसने कहा कि नयी दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच राजनयिक माध्यम से सूची का आदान-प्रदान एक साथ किया गया।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत और पाकिस्तान ने आज राजनयिक माध्यम से नयी दिल्ली और इस्लामाबाद में एक साथ परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का आदान-प्रदान किया।'' समझौते पर 31 दिसंबर, 1988 को हस्ताक्षर किए गए थे और 27 जनवरी, 1991 को यह लागू हुआ। समझौते के तहत दोनों देशों के बीच, हर वर्ष की पहली जनवरी को अपने-अपने परमाणु प्रतिष्ठानों के बारे में एक-दूसरे को सूचित करने का प्रावधान है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘यह दोनों देशों के बीच ऐसी सूचियों का लगातार 35वां आदान-प्रदान है। इस सूची का पहला आदान-प्रदान एक जनवरी, 1992 को हुआ था।''भारत और पाकिस्तान ने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का आदान-प्रदान किया
नयी दिल्ली. तीन दशक से अधिक समय से जारी सिलसिले को बरकरार रखते हुए भारत और पाकिस्तान ने एक द्विपक्षीय समझौते के तहत अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का बृहस्पतिवार को आदान-प्रदान किया। सूची का आदान-प्रदान ऐसे समय किया गया है जब पिछले साल मई में चार दिनों तक चले सैन्य संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि सूची का आदान-प्रदान परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले को रोकने वाले एक समझौते के प्रावधानों के तहत हुआ। इसने कहा कि नयी दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच राजनयिक माध्यम से सूची का आदान-प्रदान एक साथ किया गया।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत और पाकिस्तान ने आज राजनयिक माध्यम से नयी दिल्ली और इस्लामाबाद में एक साथ परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का आदान-प्रदान किया।'' समझौते पर 31 दिसंबर, 1988 को हस्ताक्षर किए गए थे और 27 जनवरी, 1991 को यह लागू हुआ। समझौते के तहत दोनों देशों के बीच, हर वर्ष की पहली जनवरी को अपने-अपने परमाणु प्रतिष्ठानों के बारे में एक-दूसरे को सूचित करने का प्रावधान है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘यह दोनों देशों के बीच ऐसी सूचियों का लगातार 35वां आदान-प्रदान है। इस सूची का पहला आदान-प्रदान एक जनवरी, 1992 को हुआ था।'' -
नयी दिल्ली. एयर मार्शल नागेश कपूर ने बृहस्पतिवार को भारतीय वायु सेना के उप प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला। इस नियुक्ति से पहले, उन्होंने दक्षिण पश्चिमी वायु कमान (एसडब्ल्यूएसी) के वायु अधिकारी कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्य किया था। वह एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी का स्थान लेंगे, जो चार दशकों तक राष्ट्र की सेवा करने के बाद बुधवार को सेवानिवृत्त हुए। भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, एयर मार्शल नागेश कपूर ने एक जनवरी 2026 को भारतीय वायु सेना के उप प्रमुख का पदभार ग्रहण किया। दिसंबर 1986 में भारतीय वायु सेना की फ्लाइंग ब्रांच में कमीशन प्राप्त करने वाले एयर मार्शल कपूर के पास भारतीय वायु सेना के विभिन्न लड़ाकू और प्रशिक्षण विमानों को उड़ाने का व्यापक अनुभव है।'' एयर मार्शल कपूर ने वायु भवन में वायु सेना के उप प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला। उन्होंने सलामी गारद का निरीक्षण किया। वायुसेना अधिकारी ने यहां राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
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चेन्नई/बेंगलुरु/अमरावती/ देश भर में नव वर्ष की धूम है और अनेक राज्यों में लोग बुधवार शाम से ही गीत संगीत के बीच अपने प्रियजनों के साथ मिलकर जश्न मनाते नजर आए। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में जहां लोगों ने पार्टियों और पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ नव वर्ष का स्वागत किया, वहीं तमिलनाडु में भारी बारिश और घने बादलों के बीच उत्सव मनाया गया। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में 31 दिसंबर की रात से ही संगीत और रोशनी के बीच भारी संख्या में लोगों ने जश्न मनाकर 2026 का स्वागत किया। शाम से ही शहर के व्यावसायिक क्षेत्रों, आईटी गलियारों और आवासीय इलाकों में उत्सव का माहौल रहा। एमजी रोड, चर्च स्ट्रीट, इंदिरानगर और ब्रिगेड रोड जैसे प्रमुख केंद्र सजावटी रोशनी और लाइव संगीत से गुलजार रहे, जहां रेस्तरां और पब में विशेष आयोजन हुए। रात 12 बजते ही आतिशबाजी के बीच लोगों ने केक काटकर और मिठाइयां बांटकर एक दूसरे को शुभकामनाएं दीं।
सुरक्षा के लिए बेंगलुरु पुलिस ने संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बल तैनात किया था और मार्गों में परिवर्तन किया गया था। सीसीटीवी और रात्रि गश्त के जरिए भीड़ को नियंत्रित किया गया और लोगों से जिम्मेदारी से जश्न मनाने की अपील की गई। बेंगलुरु की आधुनिक पार्टी संस्कृति और पारंपरिक अनुष्ठानों ने शहर की मिली-जुली संस्कृति को प्रदर्शित किया। बृहस्पतिवार सुबह होते ही श्रद्धालु आशीर्वाद लेने मंदिरों में उमड़े। लोग नारियल, अगरबत्ती और फूलों के साथ लंबी कतारों में खड़े दिखे। बेंगलुरु के 'दोड्डा गणपति', 'दोड्डा बसवन्ना', वसंत वल्लभराय और बनशंकरी देवी मंदिर में भारी भीड़ रही, जहां पुजारियों ने 'होम' सहित विभिन्न अनुष्ठान किए। मैसूरु, मंगलुरु, श्रृंगेरी और उडुपी के प्रमुख मंदिरों में भी सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। तमिलनाडु में 1.10 लाख पुलिसकर्मियों की कड़ी सुरक्षा के बीच समुद्र तटों और सार्वजनिक स्थानों पर 2026 का स्वागत किया गया। साल के पहले दिन राज्य के कई हिस्सों में जोरदार बारिश हुई, जिसे मौसम विशेषज्ञों ने लंबे समय बाद हुई सबसे भारी वर्षा बताया। राज्यपाल आर एन रवि और मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने लोगों को नव वर्ष की बधाई दी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि राज्य पिछले संघर्षों से मिली सीख और साहस के साथ 2026 में सफलता की नयी ऊंचाइयों की ओर बढ़ेगा। ग्रेटर चेन्नई पुलिस ने 19,000 कर्मियों और 1,500 होम गार्ड को तैनात कर 425 स्थानों पर जांच की। पुलिस ने गिंडी, अडयार और थोराईपक्कम पर ‘बाइक रेसिंग' रोकने के लिए 30 विशेष टीम तैनात कीं। मरीना बीच और अन्य तटों पर समुद्र में नहाने और आतिशबाजी पर प्रतिबंध के साथ जश्न केवल रात एक बजे तक ही मान्य था। अधिकारियों के अनुसार, ईस्ट कोस्ट रोड पर पनैयूर से कोवलम तक ड्रोन और समुद्र तटों पर घुड़सवार पुलिस से निगरानी की गई। हजारों लोगों ने मरीना बीच, एलियट बीच और बेसेंट नगर जैसे चेन्नई के प्रमुख समुद्र तटों पर आतिशबाजी और संगीत का आनंद लिया। बारिश के बावजूद प्रशंसक सुपरस्टार रजनीकांत के घर के बाहर सुबह से ही जमा होने लगे, जहां पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित किया। राज्यभर के प्रसिद्ध मंदिरों जैसे कपलेश्वर, मदुरै मीनाक्षी और रामेश्वरम में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगीं। कन्याकुमारी में बादल छाए रहने के कारण हजारों लोग साल का पहला सूर्योदय नहीं देख पाए, जिससे उनमें निराशा रही, लोग साल का अंतिम सूर्यास्त भी नहीं देख सके थे। आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम, तिरुपति और अन्य शहरों में लोगों ने जोश के साथ नये साल का स्वागत किया। विशाखापत्तनम के बीच रोड पर पुलिस की निगरानी में होटलों और क्लब में लाइव संगीत और डीजे पार्टियों का आयोजन हुआ। पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने तट पर रंगीन रोशनी और जीवंत माहौल का आनंद लिया। तिरुपति में नये साल के साथ 'वैकुंठ एकादशी' का संयोग होने से आध्यात्मिक उत्साह दिखा और मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया। महिलाओं ने घरों में सफाई कर प्रवेश द्वारों पर 'मुग्गू' (रंगोली) बनाई और आम के पत्तों के तोरण लगाए। सुबह तेल के दीये जलाकर सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं ने परिवारों के साथ मंदिरों में पूजा-अर्चना कर अच्छे स्वास्थ्य और सफलता की कामना की। इसके बाद पारंपरिक भोजन का आनंद लिया गया, जिसमें पुलिहोरा, बोब्बातलु और पायसम जैसे व्यंजन शामिल हैं। राज्यपाल एस अब्दुल नजीर, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने राज्यवासियों को शुभकामनाएं दीं।
- - नयी दिल्ली. दिल्ली और बिहार के विधानसभा चुनाव में जबरदस्त जीत के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वर्ष 2025 में अपने चुनावी दबदबे और मजबूत किया। इस दौरान पार्टी ने सहयोगी दलों को साथ लेकर चलने और राजनीतिक विमर्श को नियंत्रित करने की अपनी क्षमता का भी प्रदर्शन किया। हालांकि, वर्ष 2026 में प्रवेश करते समय भाजपा के सामने कई चुनौतियां होंगी, क्योंकि पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। फरवरी में हुए विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी (आप) को करारी शिकस्त देकर भाजपा ने 26 वर्षों से अधिक के अंतराल के बाद दिल्ली में सत्ता में वापसी की। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों से जुड़े कथित शराब घोटाले समेत भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर भाजपा का जोरदार प्रचार अभियान, विकास के वादों और उसकी सूक्ष्म चुनावी रणनीति ने पार्टी को दिल्ली में दोबारा सत्ता दिलाने में अहम भूमिका निभाई। वर्ष 2025 में भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने जाति गणना कराने की घोषणा कर विपक्ष के इस आरोप को भी धराशायी कर दिया कि पार्टी ओबीसी और दलित विरोधी है। साल 2027 में होने वाली जनगणना में जाति जगणना को शामिल करने के कुछ महीनों बाद ही भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल (यूनाइटेड) समेत उसके सहयोगी दलों ने बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेतृत्व वाले महागठबंधन को करारी शिकस्त दी। बिहार में जातीय समीकरण चुनावी नतीजों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राजग ने 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में 202 सीट जीतकर भारी बहुमत हासिल किया, जबकि भाजपा 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। विपक्षी महागठबंधन को कुल मिलाकर केवल 34 सीट पर जीत मिली, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को 25, कांग्रेस को छह, भाकपा (माले) लिबरेशन को दो और माकपा को एक सीट पर विजयी रही। बिहार चुनाव नतीजों ने विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों और निर्वाचन आयोग द्वारा किए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर लगाए गए आरोपों को भी कमजोर कर दिया, क्योंकि न तो कांग्रेस और न ही उसके सहयोगियों ने परिणामों को चुनौती देते हुए कोई चुनावी याचिका दायर की। इन नतीजों से यह संकेत भी मिला कि वक्फ संशोधन अधिनियम को लेकर राजग सरकार के खिलाफ महागठबंधन के आक्रामक प्रचार के दम पर उसे अल्पसंख्यक समुदाय का पर्याप्त समर्थन नहीं मिला, जबकि राज्य में मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी आबादी है। राजग का चुनाव प्रचार राजद शासन के दौरान कथित “जंगल राज” की याद दिलाने, ‘घुसपैठियों' से उत्पन्न जनसांख्यिकीय बदलाव के खतरे और विकास के मुद्दों पर केंद्रित था, जो मतदाताओं को प्रभावित करता दिखा। हालांकि विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले एक योजना के तहत लाखों महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये डाले जाने से सत्तारूढ़ गठबंधन के पक्ष में माहौल बना। महाराष्ट्र में हाल ही में हुए नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में भी भाजपा सबसे प्रभावशाली शक्ति बनकर उभरी। पार्टी ने राज्य के छह प्रशासनिक मंडलों में से पांच में सबसे अधिक सीटें जीतीं और अधिकांश क्षेत्रों में 30 से 50 प्रतिशत सीटों पर कब्जा किया। वर्ष 2026 में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जीतने की होगी। 30 दिसंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि भाजपा आगामी चुनावों में दो-तिहाई बहुमत हाासिल कर ममता बनर्जी की सरकार को हटा देगी। चुनावी माहौल बनाते हुए भाजपा के प्रमुख रणनीतिकारों ने भ्रष्टाचार, कुप्रशासन और घुसपैठ के मुद्दों को उठाकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर निशाना साधा। शाह ने टीएमसी सरकार पर चुनावी लाभ के लिए बांग्लादेशी घुसपैठ को बढ़ावा देकर राज्य की जनसांख्यिकी को “खतरनाक रूप से बदलने” का आरोप लगाया और वादा किया कि यदि भाजपा सत्ता में आई तो वह एक मजबूत “राष्ट्रीय सुरक्षा ग्रिड” बनाएगी, जिससे पश्चिम बंगाल के रास्ते होने वाली घुसपैठ पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी। हालांकि पिछली विधानसभा चुनाव में भाजपा पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी थी और उसने वाम दलों तथा कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया था, लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि सत्तारूढ़ टीएमसी अब भी राज्य की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक ताकत बनी हुई है। केरल में नगर निकाय चुनावों में सफलता के साथ भाजपा ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है और पार्टी को उम्मीद है कि वह आगामी विधानसभा चुनावों में इसे और मजबूत कर पाएगी। वहीं, तमिलनाडु में भाजपा पैठ बनाने के लिए किसी उपयुक्त सहयोगी की तलाश में है। राज्य में फिलहाल द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) की सरकार है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु और केरल दोनों राज्य भाजपा के लिए अब भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं। वर्ष 2025 के अंत में बिहार के विधायक नितिन नवीन को भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया जाना पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत माना जा रहा है। माना जा रहा है कि वह शीघ्र ही भाजपा अध्यक्ष जे. पी. नड्डा का स्थान ले सकते हैं।
- मुजफ्फरनगर (उप्र). मुजफ्फरनगर जिले में 1997 से लापता और अरसे पहले मृत मान लिये गये 79 वर्षीय शरीफ अहमद लगभग 29 साल बाद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के कारण दस्तावेज ढूंढने के वास्ते अपने पैतृक शहर खतौली लौट आये। शरीफ अहमद के भतीजे वसीम अहमद ने बुधवार को बताया कि उनके चाचा अपनी पहली पत्नी की मौत के बाद पश्चिम बंगाल की रहने वाली एक महिला से शादी करने के बाद 1997 में वहीं चले गए थे और वह 29 दिसंबर को खतौली पहुंचे। वसीम ने कहा, "इन सालों में, हमने उन्हें ढूंढने की बहुत कोशिश की। यहां तक कि पश्चिम बंगाल भी गए और उनकी दूसरी पत्नी द्वारा बताए गए पते पर भी उनके बारे में जानकारी ली, लेकिन उनका कुछ भी पता नहीं चला। दशकों तक कोई संपर्क न होने के कारण उनकी चार बेटियों और परिवार ने मान लिया था कि वह अब जीवित नहीं रहे।" शरीफ अहमद ने कहा कि वह एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज इकट्ठा करने की कवायद में खतौली लौटे। उनके अचानक घर पहुंचने पर परिजन बेहद खुश हुए। यहां लौटने पर उन्हें पता चला कि उनके पिता, एक भाई और कई अन्य रिश्तेदारों की मृत्यु चुकी है।वसीम ने कहा कि इस पुनर्मिलन से परिवार में खुशी का माहौल है। उन्होंने कहा, "इतने सालों बाद उन्हें देखना हम सभी के लिए एक भावुक पल था।" बहरहाल, कुछ दिन रुकने के बाद शरीफ अहमद जिला-स्तरीय कार्यालय में औपचारिकताएं पूरी करने के लिए पश्चिम बंगाल लौट गए। वहां वह अपने परिवार के साथ मेदिनीपुर जिले में बस गए हैं।
- बोकारो. झारखंड के बोकारो में किराए के मकान में एक ही परिवार के तीन सदस्य मृत पाए गए, जिनमें एक दो साल का बच्चा भी शामिल है। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह मामला हरला पुलिस थाना क्षेत्र के सेक्टर-9 (ए) का है और घटना बुधवार सुबह प्रकाश में आई। बोकारो नगर के पुलिस उपाधीक्षक आलोक रंजन ने बताया, ‘‘बच्चे का शव बिस्तर पर पड़ा मिला जबकि दंपति एस्बेस्टस शीट की छत को सहारा देने के लिए लगाई गई पाइप से लटके मिले।'' उन्होंने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।रंजन ने बताया, ‘‘शुरुआती जांच में सामने आया है कि दंपति ने बेटे की सोते समय तकिया से मुंह दबाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उन्होंने खुद फांसी लगा ली।'' उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण का पता चल सकेगा।अधिकारी ने बताया कि मृतकों की पहचान कुंदन कुमार तिवारी (36), रेखा कुमारी (32) और बेटे श्रेयांश कुमार के रूप में हुई है। उन्होंने बताया, ‘‘मकान मालिक और स्थानीय लोगों ने बताया कि कुंदन ने कई लोगों से रुपये उधार लिए थे। मकान मालिक का दावा है कि कुंदन ने करीब दो लाख रुपये कर्ज लिये थे और चुकाने में असमर्थ था।
- नयी दिल्ली. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा एवं सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियों पर जारी चार नई श्रम संहिताओं के लिए बुधवार को मसौदा नियम जारी कर दिए। इन पर आम लोगों और हितधारकों से राय मांगी गई है। इन नियमों के लागू होने के बाद ही नए श्रम कानून पूरी तरह से प्रभावी हो पाएंगे।चार श्रम कानून- वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, और सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियों की संहिता 2020 की अधिसूचना 21 नवंबर को ही जारी हो चुकी है। सरकार का लक्ष्य है कि एक अप्रैल 2026 से ये सभी संहिताएं पूरे देश में एक साथ पूरी तरह लागू हो जाएं। श्रम मामलों के संविधान की समवर्ती सूची में शामिल होने से यह जरूरी है कि राज्यों के स्तर पर भी इनके लिए नियम बनाए जाएं। इसलिए राज्य सरकारें भी इन नियमों को आधिकारिक रूप से प्रकाशित करने की प्रक्रिया में हैं। केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने औद्योगिक संबंध संहिता पर 30 दिन और बाकी तीन श्रम संहिताओं पर 45 दिन का समय हितधारकों को सुझाव देने के लिए दिया है। इससे उद्योग और अन्य पक्ष स्पष्ट एवं व्यावहारिक मार्गदर्शन प्राप्त कर सकेंगे। मसौदा नियमों के लागू होने के बाद श्रमिकों के लिए अनिवार्य नियुक्ति पत्र, 40 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के श्रमिकों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य जांच, समान कार्य के लिए समान वेतन और महिलाओं के लिए विभिन्न पालियों में समान अवसर जैसी सुविधाएं सुनिश्चित होंगी। सरकार का उद्देश्य इन चार संहिताओं के लागू होने के साथ श्रम संरक्षण का दायरा बढ़ाना, व्यापार संचालन को सुगम बनाना और श्रमिक-केंद्रित श्रम परिवेश को बढ़ावा देना है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, “चार श्रम संहिताओं के लिए मसौदा नियमों का प्रकाशन श्रम सुधारों को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ये नियम उद्योग को भरोसे के साथ तैयार होने, नियमों का पालन सरल बनाने और टिकाऊ वृद्धि के साथ श्रमिकों के हितों की रक्षा करने में मदद करेंगे।” केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने इस महीने कहा था कि नई श्रम संहिताओं के लिए मसौदा नियम जल्द ही प्रकाशित किए जाएंगे। उन्होंने कहा था कि केंद्र और राज्यों ने पहले मसौदा नियम प्रकाशित किए थे लेकिन अब इन्हें वर्तमान समय एवं जरूरतों के हिसाब से अद्यतन करने की जरूरत है। मांडविया ने कहा था कि सरकार मार्च, 2026 तक 100 करोड़ श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने का लक्ष्य हासिल करना चाहती है जो संख्या फिलहाल 94 करोड़ है। सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़कर 2025 में 64 प्रतिशत से अधिक हो गया है जबकि वर्ष 2015 में यह 19 प्रतिशत था।
- नयी दिल्ली. लोकसभा और राज्यसभा ने वर्ष 2025 में अपने निर्धारित समय का 30 प्रतिशत से भी कम हिस्सा विधायी कार्यों में लगाया, जिसमें विधेयकों पर चर्चा और उन्हें पारित करना शामिल है। विधायी थिंक टैंक ‘पीआरएस लेजिस्लेटिव' के विश्लेषण के अनुसार, प्रश्नकाल निर्धारित समय से कम अवधि तक चला। लोकसभा में प्रश्नकाल सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक होता है, जबकि उच्च सदन यानी राज्यसभा में यह दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक आयोजित किया जाता है। विश्लेषण में कहा गया है, ‘‘कुल समय का 30 प्रतिशत से भी कम हिस्सा विधायी कार्यों पर खर्च किया गया। इसमें विधेयकों पर चर्चा और उन्हें पारित करने में लगा समय शामिल है।” वर्ष 2025 में संसद द्वारा 31 विधेयक पारित किए गए। इनमें भारत में वक्फ संपत्तियों से संबंधित नियमों में संशोधन करने वाला एक विधेयक और आयकर कानूनों को सरल बनाने वाला एक विधेयक शामिल है। ऑनलाइन मनी गेम और उनसे संबंधित सेवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया। परमाणु ऊर्जा और बीमा क्षेत्रों को खोलने वाला विधेयक पारित हुआ। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), 2005 में संशोधन किया गया। इस अधिनियम के स्थान पर ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक' पारित किया गया जो अब कानून का रूप ले चुका है। जी राम जी अधिनियम के तहत रोजगार की गारंटी बढ़ाकर सालाना 125 दिन कर दी गई है। इस 18वीं लोकसभा के कार्यकाल के दौरान संसद में कुल 42 विधेयक पेश किए गए। इनमें से 26 प्रतिशत यानी 11 विधेयकों को विस्तृत विचार-विमर्श के लिए संसदीय समितियों के पास भेजा गया। केवल एक विधेयक को विभाग संबंधित स्थायी समिति को भेजा गया। इनमें एक साथ चुनाव से संबंधित दो विधेयक शामिल हैं। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों तथा मंत्रियों की गिरफ्तारी के बाद लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहने पर उन्हें पद से हटाने के प्रावधान वाले तीन विधेयक भी संयुक्त समिति के पास भेजे गए।






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