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मुंबई. महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने दो लाख रुपये तक के कृषि ऋण को माफ करने की योजना को मंगलवार को मंजूरी दे दी। इस फैसले से राज्य के करीब 56 लाख किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानसून के मौसम से पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। कृषि ऋण माफी 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत 'महायुति' गठबंधन के प्रमुख वादों में से एक थी। हालांकि, सूत्रों ने बताया कि विधान परिषद चुनावों के चलते आचार संहिता लागू होने के कारण फिलहाल इसकी आधिकारिक घोषणा किए जाने की संभावना नहीं है। सूत्रों के अनुसार, इस योजना के दायरे में 65 लाख से अधिक ऋण खाते आएंगे और करीब 56 लाख किसानों के 36,585 करोड़ रुपये के कृषि ऋण माफ किए जाने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल ने नियमित रूप से कृषि ऋण चुकाने वाले किसानों को 50,000 रुपये तक का प्रोत्साहन देने का भी निर्णय लिया है।
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नयी दिल्ली/ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विदेशी मुद्रा संबंधी कथित ''उल्लंघन'' को लेकर अरबपति कारोबारी अनिल अग्रवाल के वेदांता समूह के खिलाफ जांच के तहत उसके आधिकारिक परिसरों में छापेमारी की। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि वैश्विक खनन समूह के खिलाफ छापेमारी सोमवार को शुरू की गई और दिल्ली, मुंबई एवं राजस्थान के उदयपुर स्थित परिसरों सहित वेदांता लिमिटेड के चार परिसरों की तलाशी ली गई। जांच विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के दीवानी प्रावधानों के तहत की जा रही है।
अधिकारियों ने बताया कि भारतीय कंपनी वेदांता लिमिटेड की लंदन स्थित मूल कंपनी वेदांता रिसोर्सेज द्वारा 2023 में वेदांता लिमिटेड को ब्रांड शुल्क का एक हिस्सा लौटाए जाने का एक मामला संघीय जांच एजेंसी की जांच के दायरे में है। उन्होंने बताया कि जारी जांच में समूह की कुछ अन्य व्यवस्थाओं की भी पड़ताल की जा रही है।
वेदांता के एक प्रवक्ता ने ईडी की कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि कंपनी ''प्राधिकारियों को पूरा सहयोग दे रही है और मांगी गई सभी जानकारी उपलब्ध करा रही है।'' प्रवक्ता ने कहा, ''कंपनी सभी कानूनों और नियमों के अनुपालन के लिए प्रतिबद्ध है।''
उन्होंने कहा, ''चूंकि मामला फिलहाल नियामकीय प्रक्रिया के तहत है इसलिए हम इस स्तर पर आगे कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।'' वेदांता लिमिटेड धातुओं, महत्वपूर्ण खनिजों और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रमुख वैश्विक उत्पादक है। कंपनी का कारोबार भारत, अफ्रीका, पश्चिम एशिया और पूर्वी एशिया में फैला है। -
नयी दिल्ली. केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून चार जून के आसपास दस्तक दे सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मंगलवार को यह पूर्वानुमान जताया। केरल में मानसून आम तौर पर एक जून के आसपास पहुंच जाता है, जिसे दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम (जून-सितंबर) की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। आईएमडी ने अपने दैनिक पूर्वानुमान में कहा, ''दक्षिण-पश्चिम एवं दक्षिण-पूर्व अरब सागर के कुछ और हिस्सों, लक्षद्वीप तथा केरल और तमिलनाडु के कुछ भागों में चार जून के आसपास दक्षिण-पश्चिम मानसून के और आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।'' पूर्वानुमान के मुताबिक, मानसून दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम-मध्य, पूर्व-मध्य और उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों तथा दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के बाकी भागों में भी इसी तारीख के आसपास आगे बढ़ेगा। आईएमडी ने पहले अनुमान जताया था कि केरल में मानसून की दस्तक 26 मई के आसपास होगी। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ। बाद में विभाग ने 29 मई को कहा कि मानसून अगले हफ्ते पहुंच सकता है। पिछले हफ्ते विभाग ने अपने संशोधित पूर्वानुमान में कहा कि इस बार मानसूनी बारिश सामान्य से कम रहेगी।
आईएमडी ने कहा कि भारत में इस साल दीर्घकालिक औसत (एलपीए) की 90 फीसदी बारिश होने की संभावना है।
एलपीए से आशय किसी विशेष क्षेत्र में एक निश्चित अवधि (जैसे कि एक महीने या एक मौसम) के दौरान दर्ज की गई बारिश से है, जिसका औसत आमतौर पर 30 से 50 वर्षों की लंबी अवधि के आधार पर निकाला जाता है। देशभर में मौसमी बारिश का औसत एलपीए 87 सेंटीमीटर है, जो 1971 से 2020 तक के आंकड़ों पर आधारित है।
अगर मानसून के मौसम में एलपीए के 90 प्रतिशत से कम बारिश होती है, तो आईएमडी इसे "अपर्याप्त" के रूप में वर्गीकृत करता है। सामान्य से कम बारिश का एक कारण अल-नीनो की स्थिति का उभरना हो सकता है, जिसके चलते देश में मानसून के मौसम में कम पानी बरसता है। मौजूदा समय में भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में तटस्थ अल नीनो-दक्षिणी दोलन की स्थितियां अल नीनो की स्थितियों में तब्दील हो रही हैं। तटस्थ अल नीनो-दक्षिणी दोलन उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में एक मध्यवर्ती जलवायु अवस्था है, जिसमें समुद्र की सतह का तापमान और वायुमंडलीय दबाव न तो अल नीनो (गर्म) स्थिति में होते हैं और न ही ला नीना (ठंडी) स्थिति में। आईएमडी ने कहा कि जून में अल-नीनो की स्थिति कमजोर रहने की संभावना है, जबकि सितंबर में यह मौसम प्रणाली मध्यम से मजबूत स्थिति में हो सकती है। - नयी दिल्ली. जल शक्ति मंत्रालय और अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने देश में जल संसाधन प्रबंधन के लिए उपग्रह प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोगों के उपयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से सोमवार को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा यहां डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित जल क्षेत्र में अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते के तहत जल संसाधन विभाग और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) जलाशय निगरानी, जल-प्रसार आकलन, नदी-प्रवाह विश्लेषण, उपग्रह-आधारित जल गुणवत्ता आकलन और जल निकायों में प्लास्टिक के कचरे के अत्यधिक मात्रा में फैलने पर अध्ययन सहित 24 प्रमुख अनुसंधान क्षेत्रों में संयुक्त रूप से काम करेंगे। कार्यशाला को संबोधित करते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने कहा कि 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जल सुरक्षा महत्वपूर्ण है और जल संबंधी चुनौतियों का समाधान प्रौद्योगिकी, नवाचार, पारंपरिक ज्ञान और जनभागीदारी के माध्यम से किया जाना चाहिए। पाटिल ने जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) अभियान के तीसरे चरण की भी शुरुआत की और जून 2026 से मई 2027 के बीच दो करोड़ जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य घोषित किया। उन्होंने कहा कि पिछले चरण में 1.5 करोड़ संरचनाओं के निर्माण का आंकड़ा पार हो चुका है। इस कार्यशाला में जल शक्ति मंत्रालय और अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) की संयुक्त पहल जल के लिए उच्च-प्रभाव वाले क्षेत्रों में प्रगति का मिशन (एमएएचए)-जल कार्यक्रम का आरंभ भी हुआ। साथ ही, भारत जल नवाचार नेटवर्क (भारत विन) मंच के तहत स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्य उद्यम (एमएसएमई) के लिए एक खुला आमंत्रण भी जारी किया गया। इसरो के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी. नारायणन ने कहा कि यह समझौता दोनों संगठनों के बीच सहयोग को और गहरा करेगा और जल प्रबंधन के लिए उपग्रह-आधारित अनुप्रयोगों के उपयोग को मजबूत करेगा। नारायणन ने कहा, ''आज अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जल संसाधनों के अवलोकन, मूल्यांकन, पूर्वानुमान और प्रबंधन के लिए अभूतपूर्व क्षमता प्रदान करती है।''
- नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय में सोमवार को पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई और इसी के साथ शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो जाएगी। यह संख्या बढ़ाई गई स्वीकृत संख्या 38 से एक कम है। केंद्रीय विधि मंत्रालय के न्याय विभाग द्वारा सोमवार सुबह जारी अलग-अलग अधिसूचनाओं के अनुसार, उच्चतम न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकिता सुब्रमणि मोहना, बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली को शीर्ष अदालत का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। उनके शपथ लेने और पदभार ग्रहण करने के बाद उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या औपचारिक रूप से 37 हो जाएगी। सरकार ने पिछले महीने एक कानून में संशोधन के लिए अध्यादेश जारी किया था जिसके तहत भारत के प्रधान न्यायाधीश सहित शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी गई। न्यायालय में पहले से ही दो पद खाली थे। स्वीकृत संख्या बढ़ाए जाने के बाद शीर्ष अदालत में कुल पद रिक्त छह हो गए थे। उच्चतम न्यायालय में सोमवार को पांच नियुक्तियों के बाद एक पद रिक्त रहेगा।उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम ने 27 मई को इन पांच नामों की सिफारिश की थी और चार दिन के भीतर नियुक्तियां कर दी गईं।
- कोटा। सोशल मीडिया से पूरी तरह किनारा, नकारात्मक खबरों से दूरी और लक्ष्य पर अटूट ध्यान- बिहार के गया निवासी शुभम कुमार ने इसी मंत्र के दम पर संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) में शीर्ष स्थान हासिल किया। सोमवार सुबह घोषित परिणामों के अनुसार, शुभम ने जेईई एडवांस्ड 2026 में 360 में से 330 अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया। वहीं, गुरुग्राम निवासी कबीर छिल्लर महज एक अंक से पिछड़कर 329 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। दोनों ने ही कोटा के कोचिंग संस्थान से तैयारी की थी। शुभम ने 'पीटीआई-भाषा' से बातचीत में अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, कोटा के शिक्षकों और अपनी कड़ी मेहनत को दिया। उन्होंने कहा, ''मैं दो साल से इस परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत कर रहा था, इसलिए अच्छे अंकों की उम्मीद स्वाभाविक थी।'' वह दो साल पहले कोटा आए थे जब वह कक्षा 11वीं में थे। शुभम के पिता शिव कुमार बिहार के गया में हार्डवेयर व्यवसायी हैं, जबकि मां कंचन देवी गृहिणी हैं।कोटा अक्सर छात्रों की आत्महत्या की खबरों के कारण सुर्खियों में रहता है, लेकिन शुभम ने इन नकारात्मक खबरों और मीडिया कवरेज से खुद को दूर रखा। उन्होंने कोटा की उस विशेष पारिस्थितिकी पर भरोसा जताया, जहां हर साल हजारों छात्र विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। शुभम ने कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली थी और फोन का उपयोग केवल माता-पिता और शिक्षकों से संपर्क के लिए करते थे। उन्होंने कहा कि वह रोज 8 से 10 घंटे पढ़ाई करते थे और अपने शौक के लिए क्रिकेट व बैडमिंटन केवल रविवार को ही खेलते थे। उन्होंने कहा, ''तनाव होने पर मैं पांच से 10 मिनट ध्यान करता था। मुझे लगता है कि तनाव के क्षणों में परिवार, रिश्तेदार और दोस्त बहुत काम आते हैं।'' शुभम ने कहा, ''कोटा शहर का योगदान उनकी सफलता में कम नहीं है।''उन्होंने कहा कि विशेष अध्ययन सामग्री, अनुभवी शिक्षक और प्रतिस्पर्धी माहौल केवल कोटा जैसे शहर में ही मिल सकता है, कहीं और नहीं। उन्होंने कहा, ''मन में जनून होना चाहिए कि हमें कुछ करना है, तभी लक्ष्य हासिल होता है। मैंने हर चुनौती को प्रेरणा में बदला। मेरा पूरा ध्यान अपने लक्ष्य पर था। अब मैं आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) बॉम्बे से कंप्यूटर विज्ञान में बीटेक करूंगा।'' पिता शिव कुमार ने कहा कि उन्हें बेटे की सफलता का पूरा भरोसा था।उन्होंने कहा, ''वह यहां इतने समय से तैयारी कर रहा था, मुझे पता था वह अपना सर्वश्रेष्ठ देगा।'' मां कंचन देवी ने बेटे की उपलब्धि पर गर्व जताया। दूसरी तरफ, एक अंक से शीर्ष स्थान चूकने वाले कबीर ने कहा कि वह पढ़ाई या परीक्षा को लेकर कभी तनाव नहीं लेते। उन्होंने खुद को ''मानसिक रूप से बहुत मजबूत'' बताया और कहा कि किसी भी विषय को एक बार पढ़ना ही उनके लिए काफी होता है व जरूरत पड़ने पर वे उसे आसानी से याद कर लेते हैं। दोनों टॉपर्स में एक बात समान थी-सोशल मीडिया से पूरी दूरी।कबीर ने कहा, ''मैं सोशल मीडिया बिल्कुल नहीं इस्तेमाल करता। व्हॉट्सएप और इंस्टाग्राम केवल शिक्षकों और दोस्तों से विषय चर्चा के लिए हैं।'' कबीर भी आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर विज्ञान करना चाहते हैं।कबीर के पिता मोहित छिल्लर खुद आईआईटी से पढ़ाई कर चुके हैं और सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जबकि मां प्रियंका छिल्लर एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं। प्रियंका ने कहा, ''जिस तरह उसने मेहनत की, यह उम्मीद थी कि वह कुछ असाधारण करेगा।
- जम्मू। अगले महीने शुरू होने जा रही वार्षिक अमरनाथ यात्रा के मद्देनजर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। इस साल 57 दिनों की अमरनाथ तीर्थयात्रा 3 जुलाई को दो मार्गों, अनंतनाग जिले में पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम मार्ग और गांदरबल जिले में 14 किलोमीटर लंबा छोटा लेकिन अधिक खड़ी चढ़ाई वाले बाल्टल मार्ग से शुरू होगी। यह तीर्थयात्रा श्रावण मास की पूर्णिमा यानी रक्षा बंधन पर 28 अगस्त को समाप्त होगी। अधिकारियों ने बताया कि जम्मू के संभागीय आयुक्त रमेश कुमार और पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) भीम सेन टूटी ने भगवती नगर आधार शिविर का दौरा किया और पंजीकरण काउंटर, आरएफआईडी केंद्र, आवास, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवा और सुरक्षा सहित तैयारियों की समीक्षा की। कुमार ने कहा कि भगवती नगर में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं, जो वार्षिक यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों के लिए मुख्य आधार शिविर के रूप में कार्य करता है। उन्होंने कहा, ''इस निरीक्षण का उद्देश्य जमीनी स्तर पर तैयारियों की समीक्षा करना और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना था। पंजीकरण सुविधाओं, आरएफआईडी सेवाओं, स्वास्थ्य अवसंरचना और स्वच्छता व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण किया गया।'' संभागीय आयुक्त ने कहा कि सभी कार्यों को समय पर पूरा करने और तीर्थयात्रा का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों के साथ चर्चा की गई। आईजीपी ने सुरक्षा बलों की तैनाती योजना की समीक्षा की और सभी ठहरने के केंद्रों पर उचित रोशनी की व्यवस्था और यात्रा के निर्धारित समय का सख्ती से पालन करने पर जोर दिया। टूटी ने कठुआ और सांबा जिलों में सुरक्षा संबंधित तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों को यात्रा मार्ग पर अधिकतम सतर्कता बनाए रखने तथा निगरानी उपायों को मजबूत करने का निर्देश दिया। पुलिस महानिरीक्षक ने लखनपुर में आधार शिविर, यात्री निवास केंद्र और आगंतुक स्वागत सुविधाओं का निरीक्षण किया, साथ ही सुरक्षा तैनाती, सीसीटीवी निगरानी, पहुंच नियंत्रण प्रणाली, तलाशी व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और तीर्थयात्रियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा की। इसके बाद कठुआ के जिला पुलिस लाइन में एक सुरक्षा समीक्षा बैठक आयोजित की गई जहां कठुआ की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मोहिता शर्मा ने अधिकारियों को निगरानी उपायों, काफिले के प्रबंधन, त्वरित प्रतिक्रिया टीमों (क्यूआरटी) की तैनाती और आपातकालीन प्रतिक्रिया योजनाओं के बारे में जानकारी दी। आईजीपी ने तीर्थयात्रियों के साथ सुरक्षा प्रोटोकॉल और पेशेवर व्यवहार का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया। वहीं जम्मू-सांबा-कठुआ रेंज के डीआईजी श्रीधर पाटिल ने अधिकारियों को लंगर और निवास केंद्रों का नियमित रूप से निरीक्षण करने और संदिग्ध तत्वों पर कड़ी निगरानी रखने का निर्देश दिया।
- नयी दिल्ली. विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक यहां आठ जून को होने की संभावना है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार को घेरने और विपक्षी एकजुटता को फिर से प्रदर्शित करने की संयुक्त रणनीति पर चर्चा की जाएगी। सूत्रों ने यह जानकारी दी। बैठक में करीब 15 विपक्षी दलों के प्रतिनिधि भाग ले सकते हैं।यह बैठक हाल में संपन्न राज्य विधानसभा चुनावों में 'इंडिया' गठबंधन के दो प्रमुख घटक दलों तृणमूल कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की क्रमश: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हार की पृष्ठभूमि में आई है। सूत्रों ने बताया कि बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, शिवसेना (उबाठा) नेता उद्धव ठाकरे और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव आदि के भाग लेने की उम्मीद है।
- नयी दिल्ली. म्यांमा के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आश्वासन दिया कि भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ उनके देश की धरती का इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक वार्ता की। आंग ह्लाइंग पांच दिवसीय भारत यात्रा पर हैं। म्यांमा में संसदीय चुनावों के बाद राष्ट्रपति बनने के दो महीने से भी कम समय में वह भारत यात्रा पर आए हैं। सत्ताधारी सैन्य जुंटा के खिलाफ वर्षों से जारी प्रदर्शनों के बाद ये चुनाव दिसंबर और जनवरी में कराए गए। सैन्य जुंटा ने एक फरवरी, 2021 को तख्तापलट कर आंग सान सू ची की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को बेदखल कर दिया था। दोनों पक्षों ने कालादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना और भारत-म्यांमा-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग को पूरा करने के लिए मिलकर काम करने के महत्व पर भी जोर दिया। सू ची के बारे में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने यात्रा पर आए राष्ट्रपति के साथ इस मुद्दे को उठाया और चर्चा मुख्य रूप से म्यांमा में जारी शांति प्रक्रिया के संदर्भ में हुई थी। इस मुद्दे पर भारत के निरंतर रुख को स्पष्ट करते हुए विदेश सचिव ने कहा कि भारत स्थायी शांति, समावेशिता और सभी हितधारकों को बातचीत की मेज पर लाने की आवश्यकता का समर्थन करता रहा है। उन्होंने कहा, ''यह एक खुली और अनौपचारिक चर्चा थी। मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि म्यांमा के साथ हमारा जुड़ाव उस देश की आंतरिक राजनीतिक व्यवस्था पर टिप्पणी करने के उद्देश्य से नहीं है।'' मिसरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमा की ओर से गतिविधियां संचालित कर रहे सशस्त्र समूहों का मुद्दा भी उठाया। मिसरी ने बताया, ''प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ये उग्रवादी समूह हमारी सीमाओं के निकटवर्ती क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए हैं। इसके जवाब में, म्यांमा सेना द्वारा इन समूहों के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियान भी अक्सर सीमा के बहुत करीब होते हैं।" मिसरी ने कहा, "इसके परिणामस्वरूप, सीमा के भारतीय हिस्से में रहने वाले लोगों पर असर पड़ता है। कई बार उन क्षेत्रों में नुकसान या व्यवधान हो सकता है। जैसा कि आपने भी उल्लेख किया है, बड़ी संख्या में शरणार्थी कभी-कभी सीमा के दूसरी ओर से भारत में प्रवेश करते हैं।" मिसरी ने कहा कि सीमा पर बाड़बंदी का काम जारी है और कई स्थानों पर निर्धारित प्रवेश द्वार तथा जांच चौकी स्थापित की जाएंगी। मिसरी ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत में व्यापार और आर्थिक संबंधों, रक्षा और सुरक्षा संबंधी मुद्दों, सीमा प्रबंधन, विकास सहायता और क्षेत्रीय हालात सहित द्विपक्षीय मुद्दों की पूरी श्रृंखला पर ध्यान केंद्रित किया गया। दोनों पक्षों ने व्यापार और निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने में रुचि व्यक्त की। विदेश सचिव ने कहा, ''प्रधानमंत्री ने म्यांमा की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए भारत के समर्थन की पुष्टि की और दोनों पक्षों ने संप्रभु क्षेत्र के दुरुपयोग को रोकने के महत्व पर बल दिया, ताकि ऐसी गतिविधियों को रोका जा सके जो उनके सुरक्षा हितों के लिए हानिकारक हों।'' उन्होंने कहा, ''म्यांमा के राष्ट्रपति ने विशेष रूप से इस बात को दोहराया कि म्यांमा के क्षेत्र का उपयोग भारत के सुरक्षा हितों के विरुद्ध नहीं होने दिया जाएगा।'' म्यांमा भारत के रणनीतिक पड़ोसियों में से एक है और यह उग्रवाद प्रभावित नगालैंड और मणिपुर सहित कई पूर्वोत्तर राज्यों के साथ 1,640 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। मिसरी ने कहा, ''कुल मिलाकर म्यांमा के राष्ट्रपति की इस यात्रा ने एक बार फिर दोनों पक्षों की दीर्घकालिक साझेदारी को गहरा करने और क्षेत्र में पारस्परिक लाभ, विकास और समृद्धि के लिए मिलकर काम करने की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की है।'' राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने रविवार को आंग ह्लाइंग से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की। म्यांमा के नेता के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है जिसमें कई कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और उद्योगपति शामिल हैं। राष्ट्रपति ह्लाइंग दो जून को मुंबई जाएंगे।
- नयी दिल्ली. भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले सोमवार को पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और नेताओं के साथ बैठक की, जिसमें देशभर में पार्टी के और विस्तार की रणनीति पर चर्चा की गई। नयी दिल्ली में स्थित भाजपा कार्यालय में पांच घंटे से अधिक समय तक चली इस बैठक में युवाओं को पार्टी से जोड़ने पर विशेष चर्चा हुई। साथ ही महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और समाज के अन्य वर्गों तक पार्टी की पहुंच बढ़ाने की योजनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। पत्रकारों से बातचीत करते हुए भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, "आज पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की एक लंबी बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने की।" उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत लगातार प्रगति कर रहा है और उनके नेतृत्व में भाजपा भी अधिक मजबूत हुई है तथा देशभर में अपना विस्तार कर चुकी है। पात्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा-राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को 22 राज्यों में सरकार के माध्यम से जनता की सेवा करने का अवसर मिला है। उन्होंने बताया कि पार्टी का और विस्तार करना इस बैठक का मुख्य एजेंडा था।भाजपा कार्यालय में आयोजित यह मंथन बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पार्टी ने अगले वर्ष होने वाले सात राज्यों के विधानसभा चुनावों की तैयारियां शुरू कर दी हैं। साल 2027 में गोवा, गुजरात, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें पंजाब और हिमाचल प्रदेश को छोड़कर बाकी पांच राज्यों में भाजपा सत्ता में है।
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने सोमवार को सभी मार्गों पर सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की शुरुआत की, जिससे महिला यात्रियों में खुशी देखी गई। सुबह के व्यस्त समय में काम पर जाने वाली महिलाओं ने सरकारी बसों के फेरे बढ़ाने की मांग की।
भाजपा के एक पदाधिकारी ने बताया कि विधानसभा चुनाव घोषणापत्र में किए गए वादे के मुताबिक शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की शुरुआत की है। बालीगंज स्टेशन से मध्य कोलकाता के पार्क स्ट्रीट स्थित अपने कार्यस्थल के लिए बस में चढ़ने के दौरान माला बिस्वास नामक महिला यात्री ने कहा ''मैं खुश हूं, लेकिन सरकारी बसों के फेरे बढ़ाने की जरूरत है।'' उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद से सरकारी बसों की संख्या में भारी कमी आई है।
दक्षिण कोलकाता के गरियाहाट से आईटी हब सॉल्ट लेक सेक्टर पांच जा रही सरकारी वातानुकूलित बस में सफर कर रही सुमाना सिंह ने कहा, ''पिछले कुछ वर्षों में कई सरकारी बस रूट बंद हो गए हैं जिससे यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है।'' अपनी दो बेटियों के साथ सिलीगुड़ी से कूच बिहार के लिए उत्तर बंगाल राज्य परिवहन कंपनी की बस से यात्रा कर रहीं मनीषा बर्मन ने कहा कि इस योजना के कारण उनके पैतृक गांव तक की लगभग 170 किलोमीटर की यात्रा आसान हो जाएगी। सरकार ने एक जून से पश्चिम बंगाल परिवहन निगम, दक्षिण बंगाल राज्य परिवहन निगम और उत्तर बंगाल राज्य परिवहन निगम की सभी बसों में महिलाओं के लिए यात्रा निःशुल्क कर दी है। इस कदम का उद्देश्य महिलाओं का सशक्तिकरण करना और परिवहन सुविधाओं तक उनकी पहुंच में सुधार करना है।
राज्य सरकार ने कहा है कि योजना के दुरुपयोग को रोकने के लिए लाभार्थियों की तस्वीरों और नामों के साथ डिजिटल स्मार्ट कार्ड जारी किए जाएंगे।
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नयी दिल्ली. नव नियुक्त प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल एन एस राजा सुब्रमणि ने सोमवार को यहां राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। राष्ट्रपति कार्यालय ने 'एक्स' पर पोस्ट में मुलाकात की एक तस्वीर साझा की। पोस्ट में कहा गया, ''प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल एन एस राजा सुब्रमणि ने अपनी पत्नी महालक्ष्मी सुब्रमणि के साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की।'' पाकिस्तान और चीन संबंधी सैन्य मामलों के विशेषज्ञ माने जाने वाले जनरल सुब्रमणि ने रविवार को भारत के नए सीडीएस के रूप में कार्यभार संभाला।
- लखनऊ. उत्तर प्रदेश के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) की सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता के बीच 'कॉकरोच' का वेश धारण कर यमुना नदी की बदहाली की ओर अधिकारियों और आम लोगों का ध्यान आकर्षित करने की अनोखी पहल की। मथुरा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एवं कथावाचक दीपक शर्मा 22 मई को 'कॉकरोच' का वेश धारण यमुना के तट पर पहुंचकर त्रिवेणी की बदहाली की ओर ध्यान खींचा। शर्मा ने कहा कि यमुना नदी की खराब स्थिति की ओर ध्यान खींचने के लिए उन्होंने यह तरीका अपनाया और इस दौरान उन्हें इस छोटे जीव की प्रतीकात्मक ताकत का एहसास हुआ। उन्होंने बताया कि इस पहल के बाद उन्हें मथुरा नगर आयुक्त कार्यालय से अधिकारियों से मिलने के लिए फोन आया था लेकिन उन्होंने अधिकारियों को स्वयं घाट पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करने का आग्रह किया। शर्मा ने अपनी संस्था 'कॉमन जस्टिस प्लेटफॉर्म' (सीजेपी) की शुरुआत की है।उनका कहना है कि इसका उद्देश्य प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करना और युवाओं को सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक करना है। सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि वह 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दिपके के साथ भी सहयोग की योजना बना रहे हैं। दिपके ने 16 मई को 'एक्स' पर ''क्या हो अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं?'' शीर्षक से एक पोस्ट किया था, जिसके बाद 'कॉकरोच जनता पार्टी' चर्चा में आई। यह मंच खुद को युवाओं की आवाज बताता है।शर्मा ने कहा कि लोगों में 'कॉकरोच' को लेकर पैदा हुई अचानक दिलचस्पी का उपयोग यमुना प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दों को सामने लाने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एक मथुरा निवासी होने के नाते उन्हें हिंदुओं की आस्था से जुड़ी यमुना नदी की स्थिति देखकर निराशा होती है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के फरवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, मथुरा के केशी घाट, विश्राम घाट और गोकुल बैराज सहित कई स्थानों पर यमुना का प्रदूषण स्तर चिंताजनक पाया गया है। 'बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी' के अधिकारी के.पी. सिंह के अनुसार, तापमान व पीएच स्तर स्वीकार्य सीमा में होने के बावजूद कई अन्य प्रदूषण संकेतक सुरक्षित मानकों से काफी अधिक हैं। रिपोर्ट में 'टोटल कोलीफॉर्म' और 'फीकल कोलीफॉर्म' बैक्टीरिया की अत्यधिक मात्रा दर्ज की गई है, जो गंभीर सीवेज प्रदूषण का संकेत है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में नदी का पानी पीने योग्य नहीं रह जाता और बिना शोधन के उसमें स्नान करना भी स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है, जिससे जलीय जीव-जंतुओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। शर्मा ने बताया कि उनकी मुहिम को अच्छा समर्थन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि संगठन से जुड़ने वालों को 'कॉकरोच' की तस्वीर वाला पहचान पत्र जारी किया जा रहा है।समाजसेवी के अनुसार अब तक लगभग 800 लोग इस अभियान से जुड़ चुके हैं। हालांकि, इस पहल को लेकर मतभेद भी सामने आए हैं। लखनऊ के अधिवक्ता अंकुर सक्सेना ने इसे सोशल मीडिया आधारित राजनीतिक अभियान करार देते हुए इसकी आलोचना की। वहीं, राष्ट्रीय किसान मोर्चा के अध्यक्ष शेखर दीक्षित ने कहा कि किसान भी उपेक्षा का सामना कर रहे हैं और इस प्रतीकात्मक आंदोलन से स्वयं को जोड़ सकते हैं। शर्मा ने स्पष्ट किया कि सीजेपी एक गैर-राजनीतिक आंदोलन है और उसका उद्देश्य चुनाव लड़ना नहीं बल्कि व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और स्वच्छ बनाना है।
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नयी दिल्ली. जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने रविवार को भारत के नए प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) का पदभार संभाल लिया। उनके सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी महत्वाकांक्षी थिएटराइजेशन योजना को लागू करना और तीनों सेनाओं के बीच समन्वय को और मजबूत करना होगी। जनरल सुब्रमणि ने जनरल अनिल चौहान का स्थान लिया है, जिन्होंने शनिवार को देश के वरिष्ठतम सैन्य कमांडर के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया। पाकिस्तान और चीन मामलों के विशेषज्ञ माने जाने वाले जनरल सुब्रमणि इससे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससीएस) में सैन्य सलाहकार के रूप में कार्यरत थे। वह पिछले वर्ष 31 जुलाई को सेना के उप प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। प्रमुख रक्षा अध्यक्ष के रूप में जनरल सुब्रमणि का प्रमुख दायित्व थिएटराइजेशन मॉडल को लागू करना होगा, जिसके तहत एकीकृत सैन्य कमान स्थापित की जाएगी। चार दशक से अधिक लंबे सैन्य करियर में जनरल सुब्रमणि ने विभिन्न प्रकार के संघर्ष क्षेत्रों और भौगोलिक परिस्थितियों में सेवाएं दी हैं। उन्होंने सेना में अनेक कमान, स्टाफ और प्रशिक्षण संबंधी महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। उन्होंने एक जुलाई 2024 से 31 जुलाई 2025 तक सेना के उप प्रमुख के रूप में कार्य किया। इससे पहले वह मार्च 2023 से जून 2024 तक मध्य कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रहे थे।
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ईटानगर. भारतीय सेना के जवानों ने रविवार को अरुणाचल प्रदेश के शि-योमी जिले में समुद्र तल से लगभग नौ हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित पसांग सोनम झील तट पर योग सत्र में भाग लिया। यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले चल रहे महीनेभर के कार्यक्रमों के तहत किया गया।
एक विज्ञप्ति के अनुसार, अग्रिम क्षेत्रों में तैनात सैनिकों ने उत्साहपूर्वक योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया। इस अवसर पर सैनिकों के लिए योग के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया गया कि इससे शारीरिक तंदुरुस्ती, मानसिक दृढ़ता और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों के लिए योग लचीलापन, एकाग्रता और तनाव प्रबंधन में भी सहायक है। कार्यक्रम का उद्देश्य सैनिकों के बीच टीम भावना और सामूहिक प्रेरणा को मजबूत करना भी था। -
जयपुर। ओटीटी के दौर में सिनेमाघरों की चमक भले ही फीकी पड़ गई हो, लेकिन जयपुर का प्रतिष्ठित राजमंदिर अपनी शाही शैली और अनोखे माहौल के साथ आज भी सिने प्रेमियों का दिल जीत रहा है। एक जून को राजमंदिर के 50 साल पूरे होने पर सिने प्रेमियों को पांच फिल्में मुफ्त दिखाई जाएंगी। राजमंदिर सिनेमा के संचालकों ने बताया कि गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन के तहत राजमंदिर में उन फिल्मों को दिखाया जाएगा, जिन्होंने सिनेमा प्रेमियों के दिलों में खास जगह बनाई है। इन फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे', 'राम तेरी गंगा मैली', 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' और 'चुपके-चुपके' शामिल हैं। फिल्मों का चयन परिवारों को ध्यान में रखकर किया गया है। दर्शकों को टिकट 'बुकमायशो' और राजमंदिर के बॉक्स ऑफिस विंडो से बुक करनी होगी। राजमंदिर के वित्त प्रबंधक किशोर काला ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि राजमंदिर सिनेमाघर ने मनोरंजन उद्योग के हर उतार चढ़ाव को देखा और झेला है। हर दौर से गुजरा राजमंदिर अपनी खास पहचान की बदौलत आज गुलाबी नगर के आकर्षणों में शुमार है।" अभिनेता राजकपूर, जितेन्द्र, अमिताभ बच्चन हो या धर्मेंद्र से लेकर सनी देओल, रणबीर कपूर, राजकुमार राव, विद्या बालन, विक्की कौशल, जाह्नवी कपूर तक, सभी ने राजमंदिर को भरपूर प्यार दिया है। जो आगंतुक डायरी में लिखी उनकी टिप्पणी से झलकता है। पूर्व राजमाता गायत्री देवी से लेकर वर्तमान में उपमुख्यंत्री दिया कुमारी भी राजमंदिर की मुरीद रही हैं। जयपुर की व्यस्ततम और विख्यात मिर्जा इस्माइल रोड (एमआईरोड) के पांच बत्ती चौराहे के पास स्थित राजमंदिर में पहली फिल्म 'चरस' लगी, जो 101 दिन तक चली। वित्त प्रबंधक किशोर ने बताया कि राजमंदिर में "हम आपके हैं कौन" फिल्म 525 दिन तक चली थी। उन्होंने कहा, राजमंदिर एक पैलेस सिनेमा है। राजमंदिर में प्रवेश करते ही महल जैसा महसूस होता है। इसको चारों तरफ चाप की लकड़ी से सजाया गया है। इसमें जगह-जगह कांच का काम हुआ है। उन्होंने बताया कि खास बात यह है कि यह दो तरह की रोशनी से सुसज्जित है। जब दर्शक फिल्म देखने के लिए अंदर आते हैं तो उन्हें सफेद रंग देखने को मिलता है। मध्यांतर में जब दर्शक बाहर आते हैं तो नीली रोशनी से उनका स्वागत होता है। वित्त प्रबंधक ने कहा, "राजमंदिर को काफी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक देखने आते हैं। जो भी जयपुर में घूमने आता है वह इस सिनेमाघर को जरूर देखने आता है। अब तो यह उनके टूर पैकेज में शामिल हो गया है।" किशोर का दावा है कि इसके परदे का आकार 73 गुणा 35 है, जोकि देश में सबसे बड़ा है और विश्व का तीसरा सबसे बड़ा सिनेमाघर है। इसमें एक समय में 1,186 लोग बैठकर फिल्म का आनंद ले सकते थे। अब इसे नए स्वरूप में लाने पर सीटों की संख्या 862 कर दी। राजमंदिर के कार्यालय प्रभारी अंकुर खंडेलवाल ने बताया कि इसके मालिकों ने कभी इसे कमाई का जरिया नहीं समझा। इस सिनेमाघर से जयपुरवासियों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं और यह अपने आप में सबसे अलग है इसलिए इसका विशेष रखरखाव किया जा रहा है ताकि यह पर्यटनस्थल हमेशा बना रहे। संचालकों ने बताया कि शहर के पर्यटनस्थल के रूप में भी प्रसिद्ध राजमंदिर का उद्घाटन एक जून 1976 को हुआ था। यह सिनेमाघर जयपुर के प्रतिष्ठित जौहरी राजमल सुराणा के पुत्र कुशलचंद सुराणा, विमलचंद सुराणा और कमलचंद सुराणा का है जिन्होंने अपने जवाहरात के व्यवसाय के अनुरुप ही इस सिनेमाघर की श्रेणियों का नाम डायमंड, एमरल्ड, रूबी, सफायर और पर्ल रखा। सीनियर प्रोजेक्शन हैड 84 वर्षीय कैलाश चंद शर्मा की भी राजमंदिर के साथ गोल्डन जुबली होगी। वे 50 साल से भी अधिक समय से यहां काम कर रहे हैं। कैलाश ने बताया कि जब वे 35 वर्ष के थे, तब यहां आए थे, लेकिन अब तक थिएटर में बैठकर पूरी फिल्म नहीं देखी। कैलाश ने कहा कि उन्होंने 50 साल में सैकड़ों फिल्में चलाई। एक भी फिल्म का प्रिंट खराब नहीं होने दिया। एक बार अभिनेता राज कपूर साहब यहां अपनी फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' देखने आए थे। देखने के बाद उन्होंने चीफ टेक्निशियन को बुलाया। मैं डरते हुए गया कि कोई गड़बड़ तो नहीं हो गई। तब उन्होंने पूछा कि इस फिल्म का प्रिंट अब तक कितनी बार बदला। मैंने कहा कि सर अभी तक एक बार भी नहीं बदला दो हफ्ते से चला रहा हूं। राजकपूर साहब हो यह सुनकर ताज्जुब हुआ तब उन्होंने कहा मैं मुंबई जाउंगा तो तुम्हारे लिए इनाम भेजूंगा। हालांकि इसके बाद उनकी मृत्यु हो गई थी। फिल्म वितरक राज बंसल का कहना है कि देश में सिंगल स्क्रीन में राजमंदिर पहले स्थान पर है। निश्चित रूप से राजमंदिर राजस्थान की शान है। हमारी यहां 50 से ज्यादा फिल्में चली हैं। फिल्म वितरक संजय छेतर ने कहा, " राजमंदिर देश का नंबर एक सिनेमाघर है, जो कि अपनी स्थापत्य कला को बनाए हुए हैं। हर फिल्म वितरक चाहता है कि उसकी यहां पर फिल्म लगे। मैं पिछले बीस साल से राजमंदिर से जुड़ा हुआ हूं।
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नयी दिल्ली. एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने तेजी से बदलते क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा परिदृश्य के बीच रविवार को भारत के नए नौसेना प्रमुख का पदभार संभाला। एडमिरल स्वामीनाथन ने एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी का स्थान लिया, जो सेवानिवृत्त हो गए हैं। एडमिरल स्वामीनाथन इससे पहले पश्चिमी नौसैन्य कमान के 'फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ' के रूप में कार्यरत थे। नए नौसेना प्रमुख ने पत्रकारों के साथ बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण को ''चुनौतीपूर्ण, जटिल और अप्रत्याशित'' बताया तथा कहा कि उच्चतम अभियानगत तत्परता बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगा। उन्होंने पत्रकारों से कहा, ''भारतीय नौसेना देश के हितों की रक्षा के लिए हर समय सतर्क है और वह ऐसे क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण में सक्रिय रूप से तैनात है, जो लगातार चुनौतीपूर्ण, जटिल, अप्रत्याशित एवं अनिश्चित बना हुआ है।'' एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा, ''मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करने की होगी कि भारतीय नौसेना उच्चतम स्तर की अभियानगत तत्परता और युद्धक क्षमता बनाए रखे, ताकि वह देश के सुरक्षा और आर्थिक हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा कर सके।'' उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना क्षमता-वृद्धि और आधुनिकीकरण की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रही है।
नौसेना प्रमुख ने कहा, ''मेरा प्रयास होगा कि नौसेना की प्रगति की गति को बनाए रखा जाए, जारी सभी परियोजनाओं को सुदृढ़ किया जाए, जहां आवश्यकता हो वहां उन्हें और विस्तार दिया जाए तथा अत्याधुनिक व उभरती प्रौद्योगिकियों को शामिल करके हमारी अभियानगत क्षमताओं को और अधिक मजबूत बनाया जाए।'' उन्होंने कहा, ''मैं अपने जीवन का हर एक दिन नौसेना को और अधिक बेहतर, मजबूत, सक्षम तथा प्रभावशाली बनाने के लिए समर्पित करूंगा, ताकि वह राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रीय विकास और देश की आर्थिक समृद्धि के हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा कर सके।'' एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि भारतीय नौसेना एकीकृत सैन्य कमान, आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी की भी सराहना करते हुए उन्हें दुनिया के सबसे ''उत्कृष्ट'' सैन्य पेशेवरों में से एक बताया। स्वामीनाथन एक जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे और वह संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के विशेषज्ञ हैं। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला, ज्वाइंट सर्विसेस कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, श्रीवेनहम, ब्रिटेन, कॉलेज ऑफ नेवल वारफेयर, करांजा और यूएस वॉर कॉलेज, न्यूपोर्ट के पूर्व छात्र हैं। परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित एडमिरल स्वामीनाथन ने अपने नौसैनिक करियर में अभियानों, स्टाफ और प्रशिक्षण संबंधी कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। उन्होंने मिसाइल पोत आईएनएस विद्युत और आईएनएस विनाश, मिसाइल कार्वेट आईएनएस कुलिश, दिशा निर्देशित मिसाइल विध्वंसक आईएनएस मैसूरु तथा विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य की कमान संभाली। रियर एडमिरल के पद पर पदोन्नत होने के बाद उन्होंने कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसैन्य कमान मुख्यालय में 'चीफ स्टाफ ऑफिसर' (प्रशिक्षण) के रूप में सेवा दी। वाइस एडमिरल स्वामीनाथन भारतीय नौसेना सुरक्षा दल की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अधिकारियों में शामिल रहे। यह दल नौसेना की सभी शाखाओं में अभियान सुरक्षा की निगरानी करता है। पश्चिमी नौसैन्य कमान का नेतृत्व संभालने से पहले वह उप नौसेना प्रमुख के पद पर भी रहे।
उनकी शैक्षणिक योग्यताओं में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से बीएससी, कोचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से दूरसंचार में एमएससी, तथा किंग्स कॉलेज, लंदन से रक्षा अध्ययन में एमए शामिल हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से सामरिक अध्ययन में एमफिल और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पीएचडी की उपाधि भी प्राप्त की है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में 11वीं सदी के ‘चोल ताम्र-पत्रों’ के बारे में बात की, जिन्हें उनकी हाल की नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारत वापस लाया गया था। इन ‘चोल ताम्र-पत्रों’ 21 बड़ी और 3 छोटी पट्टियां हैं, जो मुख्य रूप से तमिल भाषा में लिखी हुई हैं। पीएम मोदी ने कहा कि हर भारतीय के लिए यह एक खुशी का पल है।
‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “बीते दिनों मुझे यूरोप के नीदरलैंड जाने का अवसर मिला। वहां मैं कई बैठकों में शामिल हुआ। इसी दौरान एक ऐसा क्षण आया, जिसने हर भारतीय को गर्व से भर दिया। नीदरलैंड में आयोजित एक विशेष समारोह में चोला काल की प्राचीन ताम्र पट्टिकाएं भारत को वापस सौंपी गईं। उस कार्यक्रम में नीदरलैंड के प्रधानमंत्री भी मौजूद थे। इन ताम्र पट्टिकाओं को लेकर मुझे देश-विदेश से लगातार संदेश मिल रहे हैं। लोग खुशी जता रहे हैं, गर्व व्यक्त कर रहे हैं। दुनियाभर के तमिल समुदाय में भी इसे लेकर विशेष उत्साह है।”‘चोल ताम्र-पत्रों’ के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “इन ताम्र पट्टिकाओं को लेकर लोगों में काफी जिज्ञासा भी है। इसलिए आज मैं इससे जुड़ी कुछ बातें आपसे साझा करना चाहता हूं। इनमें 21 बड़ी और तीन छोटी ताम्र पट्टिकाएं हैं। ये मुख्य रूप से राजा राजेंद्र चोला-प्रथम की ओर से अपने पिता राजा राजराजा चोला के एक वचन को पूरा करने से जुड़ी हैं। इनमें आनइमंगलम् गांव को एक बौद्ध विहार को दान देने का उल्लेख है। इन ताम्र पट्टिकाओं में चोला वंश की उपलब्धियों का भी वर्णन मिलता है। इनसे पता चलता है कि चोला साम्राज्य की समुद्री शक्ति कितनी मजबूत थी दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ उनके संबंधों की जानकारी भी इनमें मिलती है।” उन्होंने कहा कि चोला साम्राज्य के समृद्ध इतिहास और संस्कृति पर हम सभी को बहुत गर्व है। हमारी सरकार भारत की ऐसी अमूल्य धरोहरों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “‘ज्ञान भारतम् अभियान’ के तहत छत्तीसगढ़ के मल्हार में भी एक महत्वपूर्ण खोज हुई है। यहां तीन दुर्लभ ताम्र पट्टिकाएं मिली हैं। ये पांडुवंशी राजवंश के महर्षि बालार्जुन के शासनकाल से जुड़ी मानी जा रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ये शिलालेख छठी-सातवीं सदी के हैं, यानि चौदह-सौ, पंद्रह-सौ साल पुराने ये ताम्र पट्टिकाएं प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखी गई हैं। इनसे उस समय की शासन-व्यवस्था, धर्म और संस्कृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।” -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए तमिलनाडु के नागरकोइल की एक शिक्षिका गिरिजा अम्मा से हुई अपनी मुलाकात का अनुभव शेयर किया। पीएम मोदी ने गिरिजा अम्मा की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी देशभक्ति की भावना हर भारतवासी को प्रेरित करने वाली है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “पिछले महीने मुझे एक बहुत अच्छा अनुभव हुआ। इसका संबंध ‘मन की बात’ से भी जुड़ा है। इसलिए आज मैं इसकी चर्चा आपसे करना चाहता हूं। तमिलनाडु के नागरकोइल में मेरी मुलाकात एक टीचर से हुई। करीब तीन दशक पहले भी मैं उनसे मिला था। मैं बात कर रहा हूं, गिरिजा अम्मा की। इस मुलाकात के दौरान कुछ युवा छात्र भी उनके साथ थे।”कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि गिरिजा अम्मा करीब 15 स्कूल चलाती हैं। इनमें चेन्नई का जयगोपाल गरोडिया हिंदू विद्यालय बहुत प्रमुख है। उनकी देशभक्ति की भावना हर भारतवासी को प्रेरित करने वाली है। उन्होंने ‘मन की बात’ से प्रेरणा लेकर देश के अनेक सैनिकों के लिए योगदान का संकल्प लिया। इसके लिए उन्होंने अपने सभी स्कूलों के छात्रों को प्रेरित किया।पीएम मोदी ने बताया, “गिरिजा अम्मा ने बच्चों से कहा कि वे वीर जवानों के लिए हर दिन एक रुपया योगदान दें। यानी एक साल में हर छात्र की ओर से 365 रुपए जमा हुए। इस छोटे-छोटे योगदान से करीब 40 लाख रुपए इकट्ठा हुए। गिरिजा अम्मा ने इस पूरी राशि का चेक मुझे सौंपा। उनसे बातचीत के दौरान मैंने महसूस किया कि मां भारती के प्रति उनका समर्पण कितना गहरा है।” प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि पिछले वर्ष ही चेन्नई के पहले हिंदू विद्यालय ने अपने 50 वर्ष पूरे किए हैं। देश की शिक्षा और सांस्कृतिक गौरव को आगे बढ़ाने में इस स्कूल नेटवर्क की भूमिका बहुत प्रशंसनीय है। मैं इससे जुड़े सभी लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं और उन छात्रों की भी विशेष सराहना करता हूं, जिन्होंने अपने वीर सैनिकों के लिए योगदान दिया। - नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से भीषण गर्मी के मौजूदा मौसम के दौरान अत्यधिक सावधानी बरतने और सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करने की अपील की है। आकाशवाणी से ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उन्होंने लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और धूप से बचाव के उपाय करके ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि गर्मी से राहत के लिए आम पन्ना, छाछ, लस्सी, सत्तू, शरबत, बेल पन्ना, पनाकम, नीर मोर, सांभरम, कोकम शरबत और सोल कढ़ी का सेवन करना उपयोगी है। उन्होंने कहा कि ये पेय पदार्थ ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को दर्शाते हैं और इनमें पीढ़ियों का अनुभव समाहित है।प्रधानमंत्री ने काशी के लंगड़ा, महाराष्ट्र के अल्फाज़ो, गुजरात के केसर और पश्चिम बंगाल के हिमसागर आम की चर्चा करते हुए कहा कि हर क्षेत्र के आम का स्वाद अनूठा और उसकी महक सोंधी होती है। श्री मोदी ने कहा कि आम ने वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाई है और आम हमारी कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड्स की अपनी हाल की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि नीदरलैंड्स सरकार ने चोलकालीन ताम्र-पट्टिकाएं भारत को लौटाई हैं। इससे दुनिया भर के तमिल समुदाय विशेष उत्साह है। उन्होंने कहा कि ये पट्टिकाएं चोल साम्राज्य की समुद्री ताक़त और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ उनके संबंधों को दर्शाती हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार देश की अमूल्य धरोहरों के संरक्षण के लिए प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि ज्ञान भारतम अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के मल्हार में छठी-सातवीं शताब्दी के पांडु वंश के महर्षि बलार्जुन से जुड़ी दुर्लभ तांबे की तीन प्लेटें भी मिली हैं।प्रधानमंत्री ने झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित राष्ट्रीय वरिष्ठ एथलेटिक्स महासंघ प्रतियोगिता की चर्चा की। इसमें लगभग 800 एथलीटों ने भाग लिया था। श्री मोदी ने गुरिंदर वीर सिंह, विशाल टी.के., तेजस्विन शंकर, देव मीना और कुलदीप कुमार को चार राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने पर बधाई दी। उन्होंने 100 मीटर दौड़ में रिकॉर्ड तोड़ने वाले गुरिंदर वीर सिंह और अनिमेष कुजूर से बात भी की।प्रधानमंत्री ने कहा कि खगोल विज्ञान ने देश की हर पीढ़ी में जिज्ञासा जगाई है। उन्होंने कहा कि खगोल विज्ञान देश में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। श्री मोदी ने युवाओं से खगोल विज्ञान क्लब में शामिल होने और छुट्टियों के दौरान तारामंडल देखने की अपील की।प्रधानमंत्री ने उत्तरप्रदेश में एक नहर में गंगा डॉल्फिन को बचाने वाले वीडियो का हवाला भी दिया। उन्होंने बताया कि नमामि गंगे अभियान के तहत बनाई गई भारत की पहली गंगा डॉल्फिन बचाव एम्बुलेंस ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्री मोदी ने कहा कि गंगा डॉल्फिन संरक्षण से नदी की जैव विविधता और अमूल्य प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण भी होता है।प्रधानमंत्री मोदी ने केरल में अलुवा के साजी वलाशेरिल के प्रयासों की सराहना की, जो निःशुल्क तैराकी क्लब चलाते हैं। वे 15 हजार से अधिक लोगों को तैराकी सिखा चुके हैं।प्रधानमंत्री ने उत्तरप्रदेश के बस्ती के आकाश गुप्ता का जिक्र किया जिन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर गाँव की मनोरमा नदी को साफ किया। श्री मोदी ने गोवा के सेवानिवृत्त शिक्षक बालकृष्ण अय्या की कहानी भी साझा की जिन्होंने मद्दी-टोलाप क्षेत्र में जल-संकट के समाधान के लिए काम करना शुरू किया है।प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु के नागरकोइल में 15 स्कूल चलाने वाली शिक्षिका गिरिजा अम्मा की भी बात की जिन्होंने ‘मन की बात’ से प्रेरित होकर देश के सैनिकों के लिए योगदान देने का संकल्प लिया है। गिरिजा अम्मा ने बहादुर सैनिकों के लिए रोज़ एक रुपया दान करने की अपील बच्चों से की और इससे मिले लगभग 40 लाख रुपये प्रधानमंत्री को सौंपे।प्रधानमंत्री मोदी ने चेन्नई के पहले हिंदू विद्यालय का उल्लेख किया जिसने पिछले वर्ष अपनी 50 वर्ष पूरे किए थे। उन्होंने कहा कि इस विद्यालय नेटवर्क ने देश की शिक्षा और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देने में सराहनीय भूमिका निभाई है। श्री मोदी ने देशवासियों से अपील की कि वे अपने आसपास समाज की बेहतरी के लिए लगातार काम कर रहे लोगों को पहचानें और स्वयं भी अच्छे कार्यों से जुड़ें।
- नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को घोषणा की है कि 1 जून से 30 जून तक पूरे देश में ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी संरक्षण, मौसम आधारित कृषि सलाह और सरकारी योजनाओं के लाभ से जोड़ना है। अभियान को केवल जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि खेत, किसान और गांव को जोड़ने वाले राष्ट्रीय जनअभियान के रूप में विकसित करने की तैयारी की गई है।नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान का मुख्य फोकस खेतों की सेहत बचाने, कृषि लागत को नियंत्रित करने और किसानों को सही समय पर सही सलाह उपलब्ध कराने पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह अभियान केंद्र, राज्य और पंचायतों की साझी भागीदारी के मॉडल पर संचालित होगा। बैठक में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग को कम करना अभियान का प्रमुख लक्ष्य होगा। किसानों को मृदा परीक्षण आधारित खेती, संतुलित खाद उपयोग, हरी खाद, जैविक उत्पादों और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बदलते मौसम और जलवायु चुनौतियों को देखते हुए किसानों को क्षेत्र-विशेष सलाह दी जाएगी। उन्हें बताया जाएगा कि किस परिस्थिति में कौन-सी फसल उपयुक्त होगी, कहां फसल विविधीकरण अपनाया जा सकता है और कम पानी या जोखिम वाली परिस्थितियों में कौन-से विकल्प बेहतर रहेंगे। अभियान को गांव स्तर तक प्रभावी बनाने के लिए पंचायतों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पंचायत स्तर पर कृषि मशीनरी वितरण, विभिन्न योजनाओं के लाभ और कृषि संबंधी कार्यक्रमों को अभियान से जोड़ा जाएगा, ताकि किसानों को एक ही मंच पर अधिकतम सुविधाएं मिल सकें। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अभियान को विभागीय कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाएगा। राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों से इसमें भागीदारी का आग्रह किया जाएगा, ताकि इसे राष्ट्रीय जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सके। अभियान के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) को प्रमुख समन्वयक बनाया गया है। देशभर में 1600 से अधिक टीमें गठित की गई हैं। अधिक उर्वरक उपयोग वाले 100 जिलों के लिए 500 विशेष टीमें बनाई गई हैं, जिनमें कृषि विज्ञान केंद्रों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया है। इसके अलावा आईसीएआर और केवीके की 1150 से अधिक बहुविषयक टीमें भी समानांतर रूप से कार्य करेंगी। अभियान के दौरान किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम-किसान योजना से वंचित किसानों को जोड़ने, दलहन-तिलहन मिशन, ऑयल पाम मिशन, कॉटन मिशन, जल संरक्षण, मिट्टी स्वास्थ्य और संतुलित पोषण जैसी योजनाओं को भी किसानों तक पहुंचाया जाएगा। सरकार का प्रयास है कि कृषि विकास से जुड़ी सभी प्रमुख पहलों को एकीकृत रूप से गांवों तक पहुंचाया जाए।शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संदेश व्यवहारिक हो और उसका असर जमीन पर दिखाई दे। उन्होंने कहा कि संतुलित उर्वरक उपयोग, मौसम आधारित कृषि सलाह, पंचायतों की सक्रियता, योजनाओं का लाभ और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी अभियान के प्रमुख आधार होंगे। अभियान का लक्ष्य है कि खेत सुरक्षित रहें, मिट्टी की गुणवत्ता सुधरे, लागत नियंत्रित हो और किसानों में वैज्ञानिक कृषि प्रबंधन की नई संस्कृति विकसित हो।
- नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात के भुज में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े सुरक्षा मुद्दों की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में गुजरात के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी सहित राज्य सरकार और सीमावर्ती जिलों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान सीमा सुरक्षा, घुसपैठ, तस्करी, आर्थिक अपराध और तटीय सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। अमित शाह ने कहा कि बॉर्डर फेंसिंग, समुद्री सीमा सुरक्षा और राज्य सरकार की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण गुजरात के सुरक्षा परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि राज्य में घुसपैठ और सीमा पार तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है। गृह मंत्री ने निर्देश दिया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से 0 से 15 किलोमीटर के दायरे में किसी भी अनधिकृत अतिक्रमण को जीरो टॉलरेंस नीति के तहत समाप्त किया जाए। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में कट्टरपंथी गतिविधियों के संभावित केंद्रों पर भी लगातार निगरानी रखने की आवश्यकता बताई।अमित शाह ने कहा कि सीमावर्ती जिलों में जिला मजिस्ट्रेट नियमित रूप से जनसांख्यिकी परिवर्तनों की निगरानी करें और इसकी रिपोर्टिंग सुनिश्चित करें। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयों के कारण हो रहे रिवर्स माइग्रेशन को सकारात्मक संकेत बताया। बैठक में गृह मंत्री ने कहा कि पहले से बसे अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने के लिए प्रशासन के सभी स्तरों को मिलकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि हर सीमावर्ती जिला अपनी स्थानीय चुनौतियों के अनुसार मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करे, जिसमें ड्रोन गतिविधियों, नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध घुसपैठ की पहचान शामिल हो।अमित शाह ने कहा कि प्रत्येक सीमावर्ती जिले में सुरक्षा समन्वय समूह गठित किया जाए। इसमें सीमा सुरक्षा बल, भारतीय तटरक्षक बल, आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और लीड बैंक प्रबंधकों को शामिल किया जाएगा, ताकि विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। गृह मंत्री ने सीमावर्ती जिलों में हवाला लेनदेन, म्यूल अकाउंट, शेल कंपनियों, संदिग्ध वाहनों और जीएसटी संग्रह की गहन निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आयकर विभाग और भारतीय रिजर्व बैंक के साथ मिलकर व्यापक सर्वे अभियान चलाया जाए, ताकि आर्थिक अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित हो सके।अमित शाह ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा के निकट स्थित क्षेत्रों में तटीय सुरक्षा को और मजबूत करने तथा भारतीय तटरक्षक बल के साथ बेहतर समन्वय पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांवों में केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं का 100% संतृप्ति स्तर तक क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि आयकर, मनी लॉन्ड्रिंग और कस्टम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक और बॉर्डर रेंज के आईजी स्तर के अधिकारियों की होगी। केंद्र सरकार का उद्देश्य सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा, विकास और प्रशासनिक समन्वय को और मजबूत बनाना है।
- सोलन। हिमाचल प्रदेश के कसौली क्षेत्र में लगी भीषण जंगल की आग को नियंत्रित करने के लिए भारतीय वायु सेना ने दिन-रात लगातार हवाई अग्निशमन अभियान चलाया। वायुसेना ने एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों की मदद से प्रभावित क्षेत्र में 93,000 लीटर से अधिक पानी का छिड़काव कर आग को व्यापक विनाश का रूप लेने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।वायुसेना को 26 मई को कसौली के निकट जंगल में आग लगने की सूचना मिली थी। स्थिति का आकलन करने के लिए तत्काल एक चीता हेलीकॉप्टर भेजा गया। हालात की गंभीरता को देखते हुए नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए एमआई-17 वी5 मीडियम लिफ्ट हेलीकॉप्टर तैनात किए गए। कसौली के सोलन जिले स्थित कसौली बीट क्षेत्र में लगी आग ने लगभग 10 हेक्टेयर वन क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया था। आग से आवासीय इलाकों, महत्वपूर्ण नागरिक ढांचों और सैन्य प्रतिष्ठानों को भी खतरा पैदा हो गया था।राज्य प्रशासन, वन विभाग, भारतीय सेना और स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए वायुसेना ने बम्बी बकेट अभियान संचालित किया। इस दौरान हेलीकॉप्टर सुखना झील से पानी भरकर प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचाते रहे। प्रत्येक उड़ान में लगभग 2,000 से 2,500 लीटर पानी ले जाकर आग बुझाने का प्रयास किया गया। भारतीय वायुसेना के इतिहास में पहली बार नाइट विजन गॉगल्स (एनवीजी) की सहायता से रात्रिकालीन बम्बी बकेट अग्निशमन अभियान सफलतापूर्वक संचालित किया गया। पहाड़ी इलाकों में सीमित दृश्यता और कठिन भूभाग के बीच इस अभियान को अंजाम देना बेहद चुनौतीपूर्ण था।वायुसेना के विमान चालक दल ने रात्रिकालीन अभियानों से जुड़े जोखिमों के बावजूद उच्च स्तर की सटीकता, परिचालन दक्षता और साहस का परिचय देते हुए मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस अभियान ने आपदा प्रबंधन और नागरिक सहायता में वायुसेना की क्षमता को एक बार फिर साबित किया।हवाई अभियानों के साथ-साथ वायुसेना के तकनीकी और स्थलीय कर्मियों ने भी खराब मौसम और कठिन परिस्थितियों में लगातार काम किया। उन्होंने हेलीकॉप्टरों की त्वरित सर्विसिंग, मरम्मत और पुनः तैनाती सुनिश्चित की, जिससे चौबीसों घंटे बिना रुकावट अभियान जारी रखा जा सका। राज्य प्रशासन, वन विभाग, सेना और वायुसेना के संयुक्त प्रयासों के कारण आग पर प्रभावी नियंत्रण पाया गया और संभावित बड़े नुकसान को टालने में सफलता मिली। यह अभियान आपदा की स्थिति में विभिन्न एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय का भी उदाहरण बनकर सामने आया।
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नयी दिल्ली. सेवानिवृत्त हो रहे प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने अपने कार्यकाल को शनिवार को ''बेहद संतोषजनक'' करार दिया। जनरल चौहान ने शीर्ष सैन्य पद पर तीन साल एवं आठ महीने का कार्यकाल पूरा किया और इस दौरान उन्होंने तीनों सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया। लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि (सेवानिवृत्त) भारत के अगले प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) के रूप में रविवार को पदभार संभालेंगे। निवर्तमान सीडीएस ने तीनों सेनाओं की ओर से औपचारिक 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिए जाने के बाद संवाददाताओं से कहा, ''मेरा कार्यकाल बेहद संतोषजनक और उत्कृष्ट रहा।'' सेना की पूर्वी कमान के कमांडर रह चुके जनरल चौहान ने सितंबर 2022 में देश के सबसे वरिष्ठ सैन्य कमांडर के रूप में पदभार संभाला था। इससे करीब नौ महीने पहले देश के प्रथम सीडीएस जनरल बिपिन रावत की तमिलनाडु में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। प्रमुख रक्षा अध्यक्ष के रूप में जनरल चौहान ने तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ मिलकर 'ऑपरेशन सिंदूर' की योजना बनाने और इसे क्रियान्वित करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए भारत की सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए तीनों सेनाओं के बीच समन्वय सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया। प्रमुख रक्षा अध्यक्ष ने एकीकृत सैन्य कमान बनाने की भारत की योजना, यानी 'थिएटराइजेशन' मॉडल को लागू करने की दिशा में भी कई कदम उठाए। जनरल चौहान ने कहा, ''तीनों सेनाओं की ओर से 'गार्ड ऑफ ऑनर' के साथ सेवानिवृत्त होना मेरे लिए बड़े सम्मान की बात है। इसके लिए मैं तीनों सेनाओं और मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ (आईडीएस) को धन्यवाद देता हूं। मैं 'गार्ड ऑफ ऑनर' के समापन के साथ अपने वर्दीधारी सहयोगियों और साथियों से विदाई लेता हूं।'' उन्होंने कहा, ''मैंने अभी युद्ध स्मारक पर वर्दी पहनकर आखिरी बार पुष्पचक्र अर्पित किया, यह उन लोगों को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि है जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राण न्योछावर किए। पुष्पचक्र अर्पित करने के बाद मित्रों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों ने मेरा स्वागत किया। यह मेरे सैन्य से असैन्य जीवन में प्रवेश करने का प्रतीक है।'' जनरल चौहान का कार्यकाल पिछले साल 30 सितंबर को समाप्त होना था लेकिन उन्हें सेवा विस्तार दिया गया था।
वह मई 2021 में लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे, लेकिन भारत के दूसरे प्रमुख रक्षा अध्यक्ष के रूप में पदभार संभालने के बाद उन्होंने चार सितारा जनरल का पद ग्रहण किया। फरवरी 2019 में जब भारतीय लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर पर हमला किया था, तब जनरल चौहान सैन्य अभियान महानिदेशक (डीजीएमओ) थे। माना जाता है कि उन्होंने इस अभियान के लिए अहम जानकारी उपलब्ध कराई थी। 18 मई, 1961 को जन्मे जनरल चौहान को 1981 में भारतीय सेना की 11 गोरखा राइफल्स में शामिल किया गया था।
अपने विशिष्ट करियर में जनरल चौहान ने कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं तथा उन्हें जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत में आतंकवाद-रोधी अभियानों का व्यापक अनुभव है। वह खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी के पूर्व छात्र हैं।
मेजर जनरल के पद पर रहते हुए उन्होंने उत्तरी कमान के संवेदनशील बारामूला सेक्टर में एक पैदल सेना डिवीजन की कमान संभाली थी। बाद में उन्होंने पूर्वोत्तर में एक कोर की कमान संभाली और इसके बाद पूर्वी कमान के 'जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ' बने। भारतीय सेना में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए जनरल चौहान को परम विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया। -
आगरा (उप्र. ) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी टिफनी ट्रंप ने शनिवार को यहां अपने पति माइकल बोलस के साथ विश्व धरोहर ताजमहल का दीदार किया। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि टिफ़नी पूर्वाह्न लगभग 11 बजे माइकल बोलस और कुछ करीबी दोस्तों के साथ ताजमहल पहुंचीं। उन्होंने बताया कि करीब एक घंटे के इस दौरे के दौरान उन्होंने स्मारक परिसर के भीतर विभिन्न स्थानों पर तस्वीरें लीं। पर्यटक गाइड रमेश दीवान ने बताया कि टिफनी ने स्मारक के इतिहास और वास्तुकला में गहरी दिलचस्पी दिखाई एवं इसके निर्माण के बारे में कई सवाल पूछे। उन्होंने बताया कि टिफनी ने यह भी पूछा कि ताजमहल के निर्माण में इस्तेमाल किए गए पत्थर कहां से लाये गये थे। दीवान ने बताया कि टिफनी ने ताजमहल की खूबसूरती की तारीफ की और इस अनुभव को 'अविश्वसनीय' बताया।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि टिफनी दिल्ली से एक 'चार्टर्ड' विमान से आगरा हवाई अड्डे पर उतरने के बाद सड़क मार्ग से एक होटल गईं और फिर गोल्फ कोर्स मार्ग से होते हुए ताजमहल पहुंचीं एवं पूर्वी द्वार से ताजमहल परिसर में प्रवेश किया। उन्होंने बताया कि इस हाई-प्रोफ़ाइल दौर के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गये थे और अधिकारियों ने हवाई अड्डे से ताजमहल तक एक 'हाई-सिक्योरिटी कॉरिडोर' बनाया था। सूत्रों ने बताया कि मार्ग पर और स्मारक के आसपास अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किये गये थे। सूत्रों ने बताया कि ताजमहल का दौरा करने के बाद टिफनी अपने पति के साथ अपने होटल लौट गईं.













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