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- ठाणे. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पांच अक्टूबर को महाराष्ट्र के ठाणे में राज्य सरकार की मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना और महिला सशक्तिकरण मिशन से जुड़े एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। जिले के एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। जिला प्रशासन ने एक विज्ञप्ति में बताया कि अधिकारियों ने दिन में कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की, जिसमें बारिश होने पर व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और पार्किंग व्यवस्था शामिल है। लाडकी बहन योजना एकनाथ शिंदे सरकार की प्रमुख योजना है, जिसके तहत 2.5 लाख रुपये से कम वार्षिक पारिवारिक आय वाली महिलाओं को सहायता के रूप में 1500 रुपये प्रति माह दिये जाते हैं। पिछले वर्ष अक्टूबर में शिंदे सरकार द्वारा शुरू किए गए महिला सशक्तिकरण मिशन का उद्देश्य महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास से संबंधित राज्य और केंद्र सरकार की सभी योजनाओं को एक मंच पर लाना है।
- नयी दिल्ली. भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के नवनिर्वाचित अध्यक्ष कलिकेश सिंह देव ने सोमवार को कहा कि संघ एक ‘न्यूनतम साझा कार्यक्रम' तैयार करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि व्यक्तिगत और राष्ट्रीय कोच के बीच कोई विवाद नहीं हो। पेरिस ओलंपिक से पहले व्यक्तिगत बनाम राष्ट्रीय कोच बड़ा मुद्दा बन गया था जिसमें एनआरएआई ने व्यक्तिगत कोच के लिए क्या करें और क्या ना करें की एक लंबी सूची बना दी थी जिससे कुछ कटुता पैदा हुई थी लेकिन संघ ने अंततः इस मुद्दे को सुलझा लिया। कलिकेश ने कहा, ‘‘विचार यह सुनिश्चित करना है कि व्यक्तिगत कोच और राष्ट्रीय कार्यक्रम... राष्ट्रीय कोच साथ-साथ काम करें क्योंकि 70 प्रतिशत समय खिलाड़ी व्यक्तिगत कोच के साथ रहेगा। वे टीम में आते-जाते रहेंगे।'' उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए व्यक्तिगत कोच पर निर्भरता है। और मुझे नहीं लगता कि हम इसे पूरी तरह से खत्म कर सकते हैं। यह सुनिश्चित करना हमारा काम है कि हम अपने सभी खिलाड़ियों के लिए न्यूनतम साझा कार्य योजना लेकर आएं।'' उन्होंने कहा कि पेरिस खेलों की तैयारियों के दौरान उन्होंने व्यक्तिगत और राष्ट्रीय कोच के बीच कोई अनबन नहीं हो यह सुनिश्चित करने की कोशिश की। कलिकेश ने कहा, ‘‘ओलंपिक की तैयारियों के प्रयासों का एक बड़ा हिस्सा यह सुनिश्चित करना था कि व्यक्तिगत कोच और राष्ट्रीय कोच के बीच पारिस्थितिकी तंत्र सुचारू हो। यह पहले की तुलना में बेहतर था।'' उन्होंने कहा, ‘‘मुख्य रूप से जब मैं कार्यवाहक अध्यक्ष बना (मई 2023 में) तो मैंने जो पहली कुछ चीजें कीं उनमें से एक एनआरएआई प्रणाली में व्यक्तिगत कोच के लिए एक जगह बनाना था जहां खिलाड़ी वास्तव में अपने व्यक्तिगत कोच के लिए मान्यता मांग सकते हैं।'' ओलंपिक खेलों के लिए चयन नीति में लगातार होने वाले बदलाव निशानेबाजों और महासंघ के बीच विवाद का कारण रहा और कलिकेश ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश करेंगे कि अगले ओलंपिक चक्र में संशोधनों के जरिए भारी बदलाव नहीं किए जाएं। उन्होंने कहा, ‘‘ओलंपिक नीति अकेले मेरे द्वारा तय नहीं की जाती है। यह चयन समिति और तकनीकी समिति द्वारा तय की जाती है। इस नीति को खेल के मौजूदा हालात के अनुसार तैयार करने की जरूरत है। लेकिन कुल मिलाकर हम नीति में कोई भी भारी बदलाव करने से परहेज करते हैं।'' एनआरएआई प्रमुख ने कहा कि यह समय विदेशी कोच को पूरी तरह से हटाने और देश के ओलंपिक पदक विजेताओं से उनकी भूमिका संभालने के लिए कहने का नहीं है लेकिन महासंघ धीरे-धीरे इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हम पहले से ही कुछ विदेशी कोच से (अगले ओलंपिक चक्र के लिए) बात कर रहे हैं। इस समय मुझे नहीं लगता कि आप विदेशी कोच को पूरी तरह से हटा सकते हैं। इस समय हम सर्वश्रेष्ठ कोच को जोड़ना चाहते हैं, चाहे वे भारतीय हों या विदेशी।'' कलिकेश ने कहा, ‘‘इसलिए यह कोच की राष्ट्रीयता नहीं है बल्कि उनकी योग्यता और टीम के साथ काम करने की उनकी क्षमता है। लेकिन लंबे समय में, हां। हमें विदेशी कोच को खोजने की कोशिश करने की अपनी निर्भरता से बाहर निकलने की जरूरत है।'' उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास कुछ बहुत अच्छे निशानेबाज हैं जो अच्छे कोच हैं, जो अच्छे कोच बन रहे हैं और जो पहले से ही पारिस्थितिकी तंत्र में अच्छे कोच हैं।'' एनआरएआई प्रमुख ने कहा, ‘‘ हम केवल सर्वश्रेष्ठ का चयन करेंगे, चाहे वे किसी भी देश से हों।''कलिकेश ने कहा कि एनआरएआई अगले महीने यहां कर्णी सिंह रेंज में होने वाले एलीट आईएसएसएफ विश्व कप फाइनल का पूरा खर्च वहन करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘एनआरएआई यहां निशानेबाजों के लिए डेढ़ करोड़ रुपये के नकद पुरस्कार सहित पूरी प्रतियोगिता का खर्च वहन करने जा रहा है।''
- अहमदाबाद. गुजरात में करीब 18 से 20 लाख पक्षी निवास करते हैं और अकेले देवभूमि द्वारका जिले में 400 से अधिक प्रजातियां मौजूद हैं। राज्य वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई। सोमवार को जारी ‘पक्षी विविधता रिपोर्ट 2023-24' के अनुसार, कच्छ जिले में 161 प्रजातियों के 4.56 लाख पक्षियां रहती हैं, जो राज्य में सबसे अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक, विविधता के मामले में देवभूमि द्वारका जिले में सबसे अधिक 456 प्रजातियां निवास करती हैं। यह रिपोर्ट, वन विभाग द्वारा ‘ईबर्ड' एप्लीकेशन का उपयोग कर किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है।सर्वेक्षण के दौरान, विभाग ने पक्षियों की 300 प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया, जिनमें 13 संकट के कगार पर, चार संवेदनशील, सात लुप्तप्राय और एक गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति शामिल हैं। राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री मुलुभाई बेरा ने कहा कि गुजरात देश में पक्षियों के लिए ‘स्वर्ग' के रूप में उभरा है, जिनकी आबादी लगभग 18 से 20 लाख है। कच्छ के बाद जामनगर में 221 प्रजातियों के 4.11 लाख से अधिक पक्षी निवास करते हैं जबकि अहमदाबाद में 256 प्रजातियों के 3.65 लाख से अधिक पक्षी अपना घर बनाए हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बनासकांठा और मेहसाणा में भी एक-एक लाख से अधिक पक्षी निवास करते हैं।रिपोर्ट में बताया गया कि नर्मदा क्षेत्र में 44 प्रजातियों के केवल 556 पक्षी रहते हैं जबकि आनंद, बोटाद और सूरत जिलों में 2,000 से भी कम पक्षी पाए गए।
- नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) से पूर्वोत्तर क्षेत्र में सरकार की विभिन्न प्रमुख योजनाओं के तहत ऋण वितरण बढ़ाने को कहा। उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समर्थन देने में आरआरबी की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए यह बात कही। वित्त मंत्री ने कहा कि कृषि, बागवानी, सूअर पालन, बकरी पालन, रेशम पालन, मत्स्य पालन जैसी संबद्ध गतिविधियों के लिए ऋण देने पर ध्यान देना चाहिए। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सीतारमण ने राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) को पूर्वोत्तर क्षेत्र में एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) को बढ़ावा देने का भी निर्देश दिया।
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नयी दिल्ली. पृथ्वी पर 2020 में हुआ कोविड-19 लॉकडाउन का असर चंद्रमा तक पहुंच सकता है, क्योंकि अप्रैल-मई 2020 के दौरान चंद्रमा के तापमान में असामान्य रूप से गिरावट पाई गई है। एक अध्ययन में यह बात कही गई है। इस अवधि में पृथ्वी के प्राकृतिक उपग्रह पर अधिकतम तापमान में गिरावट आई, जबकि रातें लगभग 8-10 डिग्री सेल्सियस तक ठंडी होने का पता चला। अहमदाबाद में स्थित फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी के शोधकर्ता के. दुर्गा प्रसाद और जी. एम्बिली ने 'मंथली नोटिसेज ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी: लेटर्स' नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा है कि पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तन का अध्ययन करने के लिए चंद्रमा संभवतः एक 'आधार' के रूप में काम कर सकता है। कोविड-19 रोग के प्रसार को रोकने के लिए, सबसे पहले मार्च 2020 में चीन और इटली में लॉकडाउन लागू किया गया था। अन्य देशों ने भी इन उपायों को तुरंत अपना लिया गया और इसके अगले महीने तक, दुनिया की लगभग आधी आबादी को किसी न किसी रूप में लॉकडाउन के तहत रहना पड़ा। लॉकडाउन के कारण औद्योगिक प्रदूषण, परिवहन और जीवाश्म ईंधन के उपयोग जैसी मानवीय गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा है। अध्ययनकर्ताओं ने कहा कि मानवीय गतिविधियों में कमी के कारण ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन एवं प्रदूषक स्तर कम हुआ है, और इसलिए रात के समय पृथ्वी की सतह से कम ताप उत्सर्जित हुआ। इस गर्मी का एक हिस्सा रात के समय चंद्रमा के पृथ्वी की ओर वाले हिस्से तक पहुंचता है और चंद्र सतह को गर्म करता है। इसलिए, लॉकडाउन से जुड़े प्रभावों को देखने के लिए, शोधकर्ताओं ने 2017-2023 तक चंद्रमा के पृथ्वी की ओर वाले हिस्से पर छह स्थानों पर दर्ज रात के समय के सतही तापमान का विश्लेषण किया। अप्रैल-मई 2020 के दौरान, चंद्रमा तक पहुंचने वाली गर्मी काफी कम हो गई थी, और इसलिए, इसका कारण कोविड-19 लॉकडाउन को माना गया। लेखकों ने लिखा, “अप्रैल 2020 से मई 2020 की वैश्विक लॉकडाउन अवधि के दौरान सभी स्थानों पर अधिकतम तापमान में कमी देखी गई । हमने रात के समय तापमान में लगभग 8-10 केल्विन का परिवर्तन देखा है।” उन्होंने कहा कि चंद्रमा के अवलोकन, जैसे कि रात के समय का तापमान, जलवायु परिवर्तन के अध्ययन के लिए चल रहे प्रयासों में संभवतः सहायता कर सकते हैं।
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चंडीगढ़. पंजाब के बटाला इलाके में सोमवार को एक निजी बस के सड़क किनारे बने प्रतीक्षालय से टकराने की घटना में तीन लोगों की मौत हो गयी जबकि 15 से अधिक यात्री घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि यह दुर्घटना बटाला-कादियां रोड पर शाहबाद गांव के पास उस समय हुयी, जब बस चालक ने एक दोपहिया वाहन को बचाने के लिए बस को अचानक मोड़ दिया। पुलिस ने बताया कि इस घटना में तीन लोगों की मौत हो गई है और छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें अमृतसर के एक अस्पताल में स्थानातंरित किया गया है। उन्होंने बताया कि दस से बारह अन्य यात्रियों को मामूली चोटें आईं हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उन्हें बस दुर्घटना की खबर मिली है। मान ने एक पोस्ट में कहा, “मैंने प्रशासन से बात की है और अधिकारी मौके पर पहुंच गये हैं।
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मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली महायुति सरकार ने बड़ा फैसला किया है। राज्य सरकार ने देसी गायों को औपचारिक रुप से से राज्य माता का दर्जा दिया है। गाय को राज्य माता का दर्जा देने वाला महाराष्ट्र पहला राज्य है। मंत्रिमंडल की बैठक में सोमवार को सरकार ने यह फैसला लिया और इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई।गाय को राज्य माता का दर्जा देने की हिन्दू संगठन लम्बे समय से मांग कर रहे थे। दरअसल महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव का ऐलान जल्द होने वाला है। ऐसे में महायुति सरकार जनता को लुभाने की कोई कसर नहीं छोड़ रही है। सरकार ने इस फैसले से हिन्दू संगठनों को खुश करने की कोशिश की है।सरकार का तर्क है कि यह फैसला किसानों को देसी गायों को पालने के लिए प्रोत्साहित करेगा, जिनका उपयोग पंचगव्य, पारंपरिक कृषि और आयुर्वेद में किया जाता है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि स्वदेशी गायें हमारे किसानों के लिए वरदान हैं। इसलिए हमने इन्हें राज्य माता का दर्जा देने का फैसला लिया है। इसके साथ ही हम गोशालाओं में स्वदेशी गायों के पालन-पोषण के 50 रुपए प्रतिदिन की सब्सिडी योजना लागू करने जा रहे हैं।गोशालाएं अपनी कम आय के चलते यह खर्च नहीं उठा सकती थीं, इसलिए यह फैसला लिया गया है। सरकार के फैसले पर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि देसी गायें हमारे किसानों के लिए वरदान हैं । इसलिए हमने इन गायों को राज्य मात’ दर्जा देने का फैसला किया है। हमने गोशालाओं में देसी गायों के पालन-पोषण के लिए भी आर्थिक मदद देने का फैसला किया है ।सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन में कहा गया कि वैदिक काल से भारतीय संस्कृति में देशी गाय के महत्व, मानव आहार में देशी गाय के दूध की उपयोगिता, आयुर्वेद चिकित्सा, पंचगव्य उपचार पद्धति और जैविक कृषि प्रणालियों में देशी गाय के गोबर और गोमूत्र के अहम स्थान को देखते हुए देशी गाय को राज्य माता घोषित करने की मंजूरी दी गई है।सरकार का मानना है कि इससे गोकशी और तस्करी पर लगाम लगेगी। देसी गाय का दूध मानव आहार के लिए बहुत पौष्टिक होता है। आयुर्वेद में भी गाय के दूध और गोमूत्र से कई तरह की दवाइयां बनाई जाती हैं। इस फैसले से राज्य में गाय की सुरक्षा और सम्मान बढ़ेगा, ऐसा सरकार का मानना है। - नयी दिल्ली। रेल मंत्रालय कुंभ मेले के लिए व्यापक व्यवस्था करने पर काम कर रहा है और जनवरी में प्रयागराज में आयोजित होने वाले इस विशाल धार्मिक समागम के लिए 992 विशेष रेलगाड़ियां चलाने की योजना बना रहा है। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, विशेष रेलगाड़ियां चलाने के अलावा मंत्रालय ने यात्रियों के लिए विभिन्न बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के निर्माण और उन्नयन के लिए 933 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं। इसके अलावा प्रयागराज मंडल और आसपास के क्षेत्रों में ट्रेनों की सुचारू आवाजाही के लिए 3,700 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे पटरियों का दोहरीकरण तेजी से किया जा रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और दो रेल राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और वी सोमन्ना ने 12 जनवरी से शुरू होने वाले कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को संभालने के लिए व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए शनिवार को बैठकें कीं। अधिकारी ने कहा, “वे तैयारी गतिविधियों का जायजा लेने के लिए उत्तर रेलवे, उत्तर मध्य रेलवे और उत्तर पूर्वी रेलवे जैसे संबंधित जोन के महाप्रबंधकों सहित वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों के साथ नियमित रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंस भी करते हैं।” अधिकारी के अनुसार, प्रयागराज, वाराणसी, दीन दयाल उपाध्याय और लखनऊ जैसे संबंधित रेलवे मंडलों के मंडल प्रबंधक भी विभिन्न विकास कार्यों पर नियमित अपडेट प्रदान करने के लिए इन बैठकों में भाग लेते हैं। इस आयोजन में 30 से 50 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, इसलिए रेल मंत्रालय ने प्रयागराज के लिए विभिन्न शहरों से 6,580 नियमित ट्रेनों के अलावा 992 विशेष ट्रेनें चलाने की योजना बनाई है।
- नयी दिल्ली। भारत का ‘चंद्रयान-3' संभवतः चंद्रमा के सबसे पुराने ‘क्रेटर' में से एक पर उतरा था। मिशन और उपग्रहों से प्राप्त चित्रों का विश्लेषण करने वाले वैज्ञानिकों ने यह संभावना जताई है। किसी भी ग्रह, उपग्रह या अन्य खगोलीय वस्तु पर गड्ढे को ‘क्रेटर' कहा जाता है। ये ‘क्रेटर' ज्वालामुखी विस्फोट से बनते हैं। इसके अलावा किसी उल्का पिंड के किसी अन्य पिंड से टकराने से भी ‘क्रेटर' बनते हैं। भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के शोधकर्ताओं ने बताया कि चंद्रमा जिस ‘क्रेटर' पर उतरा है वह ‘नेक्टरियन काल' के दौरान बना था। ‘नेक्टरियन काल' 3.85 अरब वर्ष पहले का समय है और यह चंद्रमा की सबसे पुरानी समयावधियों में से एक है।भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के ग्रह विज्ञान प्रभाग में ‘एसोसिएट प्रोफेसर' एस. विजयन ने कहा, ‘‘चंद्रयान-3 जिस स्थल पर उतरा है वह एक अद्वितीय भूगर्भीय स्थान है, जहां कोई अन्य मिशन नहीं पहुंचा है। मिशन के रोवर से प्राप्त चित्र चंद्रमा की ऐसी पहली तस्वीर हैं जो इस अक्षांश पर मौजूद रोवर ने ली हैं। इनसे पता चलता है कि समय के साथ चंद्रमा कैसे विकसित हुआ।'' जब कोई तारा किसी ग्रह या चंद्रमा जैसे बड़े पिंड की सतह से टकराता है तो गड्ढा बनता है तथा इससे विस्थापित पदार्थ को ‘इजेक्टा' कहा जाता है। ‘ इकारस' पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के लेखक विजयन ने बताया कि ‘‘जब आप रेत पर गेंद फेंकते हैं तो रेत का कुछ हिस्सा विस्थापित हो जाता है या बाहर की ओर उछलकर एक छोटे ढेर में तब्दील हो जाता है'', ‘इजेक्टा' भी इसी तरह बनता है। चंद्रयान-3 एक ऐसे ‘क्रेटर' पर उतरा था - जिसका व्यास लगभग 160 किलोमीटर है और तस्वीरों से इसके लगभग अर्ध-वृत्ताकार संरचना होने का पता चलता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि यह संभवतः क्रेटर का आधा भाग है और दूसरा आधा भाग दक्षिणी ध्रुव-‘ऐटकेन बेसिन' से निकले ‘इजेक्टा' के नीचे दब गया होगा। प्रज्ञान को चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम ने चंद्रमा की सतह पर उतारा था।इसरो द्वारा प्रक्षेपित इस चंद्रयान ने 23 अगस्त, 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास ‘सॉफ्ट लैंडिंग' की थी। चंद्रयान जिस स्थल पर उतरा था उसका 26 अगस्त 2023 को ‘शिव शक्ति पॉइंट' नाम रखा गया था।
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चंद्रपुर (महाराष्ट्र)। महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के चिचपल्ली वन क्षेत्र में पिछले तीन साल में 11 लोगों की जान लेने वाली बाघिन को पिंजरे में सफलतापूर्वक कैद कर लिया गया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। वन अधिकारी ने बताया कि मुल तहसील के ‘बफर' और संरक्षित क्षेत्र में विचरण करने वाली बाघिन टी-83 को शनिवार सुबह जनाला क्षेत्र की ‘कम्पार्टमेंट' संख्या 717 में बेहोश किया गया। इस अभियान में पशु चिकित्सक और अन्य लोग शामिल थे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वन विभाग द्वारा पिछले दिनों पिंजरे लगाए जाने के बावजूद बाघिन को पकड़ने में सफलता नहीं मिली थी। उन्होंने कहा, ‘‘यह (बाघिन को पिंजरे में बंद किया जाना) एक बड़ी राहत है। बाघिन को तीन साल बाद पिंजरे में रखा गया है।''
- मैहर (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के मैहर जिले में एक बस और ट्रक के बीच टक्कर में छह लोगों की मौत हो गई और कम से कम 20 व्यक्ति घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि बस उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से नागपुर की ओर जा रही थी तभी जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर नादन देहात पुलिस थाने के पास शनिवार रात करीब 11 बजे यह पत्थर से लदे एक ट्रक से टकरा गई। मैहर के पुलिस अधीक्षक सुधीर अग्रवाल ने बताया कि इस हादसे में घायल हुए लोगों में से छह की हालत गंभीर है और उन्हें सतना रेफर किया गया गया है। उन्होंने बताया कि अन्य का मैहर और अमरपाटन के अस्पतालों में इलाज किया जा रहा है। अग्रवाल ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव अभियान शुरू किया।
- नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्रोताओं को ‘मन की बात' कार्यक्रम का असली 'सूत्रधार' करार देते हुए रविवार को कहा कि इस रेडियो कार्यक्रम ने साबित किया है कि देश के लोगों में सकारात्मक जानकारी की कितनी भूख है और सकारात्मक बातें एवं प्रेरणादायी उदाहरण उन्हें बहुत पसंद आते हैं। आकाशवाणी के इस मासिक रेडियो कार्यक्रम की 114वीं कड़ी को संबोधित करते हुए मोदी ने जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता अभियान के महत्व को भी रेखांकित किया और लोगों से इसमें भाग लेने का आह्वान किया। ‘मन की बात' की इस कड़ी के साथ ही इसके 10 वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि इस कार्यक्रम की लंबी यात्रा में ऐसे कई पड़ाव आए जिन्हें वह कभी भूल नहीं सकते। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी इस यात्रा के कई ऐसे साथी हैं जिनका हमें निरंतर सहयोग मिलता रहा है। देश के कोने-कोने से उन्होंने जानकारियां उपलब्ध कराईं। ‘मन की बात' के श्रोता ही इस कार्यक्रम के असली सूत्रधार हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि आमतौर पर एक धारणा ऐसी गढ़ी गई है कि जब तक किसी कार्यक्रम में चटपटी और नकारात्मक बातें ना हों तब तक उसे ज्यादा तवज्जो नहीं मिल पाती। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मन की बात ने साबित किया है कि देश के लोगों में सकारात्मक जानकारी की कितनी भूख है। सकारात्मक बातें एवं प्रेरणादायी उदाहरण लोगों को बहुत पसंद आते हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि जब वह कार्यक्रम से जुड़ी चिट्ठियों को पढ़ते हैं और पाते हैं कि देश में कितने प्रतिभावान लोग हैं और उनमें देश एवं समाज की सेवा करने का कितना जज्बा है तो उन्हें गर्व होता है। उन्होंने कहा, ‘‘ ‘मन की बात' की यह पूरी प्रक्रिया मेरे लिए ऐसी है जैसे मंदिर जाकर ईश्वर के दर्शन करना।'' उन्होंने इस कार्यक्रम से जुड़े सभी लोगों के अलावा इसके प्रचार प्रसार में योगदान देने वाले मीडिया समूहों का आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के दौरान जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, ‘एक पेड़ मां के नाम' और स्वच्छता अभियान के महत्व को भी रेखांकित किया। मोदी ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के 10 साल पूरे हो रहे हैं और हर क्षेत्र में निर्यात बढ़ रहा है तथा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में बढ़ोतरी इसकी सफलता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय निर्माताओं को काफी मदद मिली है।प्रधानमंत्री ने लोगों से त्योहारों के आगामी मौसम में स्वदेशी उत्पाद खरीदने का आग्रह किया।अमेरिका की अपनी हाल की यात्रा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में करीब 300 प्राचीन वस्तुओं को वापस भेजने की व्यापक चर्चा हो रही है। मोदी ने कहा कि जब लोग अपनी विरासत पर गर्व करना शुरू करते हैं तो दुनिया भी उनकी भावनाओं का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में विभिन्न देशों ने भारत की कई प्राचीन कलाकृतियां उसे लौटाई हैं।कार्यक्रम में, उन्होंने ‘स्वच्छ भारत अभियान' की सफलता पर प्रकाश डाला और इसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को एक उचित श्रद्धांजलि बताया। उन्होंने दोहराया कि गांधी जी ने अपने पूरे जीवन में स्वच्छता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘दो अक्टूबर को ‘स्वच्छ भारत मिशन' के 10 साल पूरे हो रहे हैं। यह उन लोगों की सराहना करने का अवसर है जिन्होंने इसे जन आंदोलन में बदल दिया। यह महात्मा गांधी के लिए भी एक उचित श्रद्धांजलि है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन इस उद्देश्य के लिए समर्पित कर दिया।'' गांधी की जयंती दो अक्टूबर को है।मानसून के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में हो रही बारिश का जिक्र करते हुए मोदी ने जल संरक्षण की दिशा में देश के अलग-अलग क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों के बारे में बताया। इस क्रम में उन्होंने मध्य प्रदेश के झांसी में किए जा रहे सामूहिक प्रयासों के बारे में श्रोताओं को विस्तृत जानकारी दी और लोगों से भी इस दिशा में काम करने का अनुरोध किया।
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तिरुपति (आंध्र प्रदेश)। प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने रविवार को यहां तिरुमला में भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना की। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने अपने दल के साथ वैकुंठ कतार परिसर से मंदिर में प्रवेश किया और गर्भगृह में पूजा की। एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, ‘‘प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ रविवार को तिरुमला श्रीवारी मंदिर गए और पूजा-अर्चना की।'' मंदिर में दर्शन करने के बाद न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ और उनके परिवार के सदस्यों को ‘रंगनायकुला मंडपम' में मंदिर के पुजारियों ने आशीर्वाद दिया। बाद में, तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के कार्यकारी अधिकारी जे श्यामला राव ने सीजेआई को देवता की एक तस्वीर और तीर्थ प्रसादम भेंट किया।
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नयी दिल्ली. विशेषज्ञों ने दावा किया है कि भारत में 50 साल से कम उम्र के पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि इस बीमारी की पहचान जल्दी हो जाए तो इसका प्रभावी ढंग से इलाज किया जा सकता है, क्योंकि यह अक्सर धीमी गति से बढ़ती है। दुनिया भर में पुरुषों को सबसे अधिक प्रभावित करने वाले प्रोस्टेट कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए सितंबर को प्रोस्टेट कैंसर जागरूकता माह के रूप में मान्यता दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रोस्टेट ग्रंथि में विकसित होने वाले प्रोस्टेट कैंसर प्रमुख रूप से वृद्ध पुरुषों को प्रभावित करता है, लेकिन भारत में युवा पुरुषों में भी यह आक्रामक रूप से बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि 50 वर्ष से कम उम्र वर्ग में प्रोस्टेट कैंसर के मामलों में काफी वृद्धि हुई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में प्रोस्टेट कैंसर से 37,948 भारतीय पुरुष प्रभावित हुए - जो इस वर्ष देश में दर्ज किए गए कैंसर के 14 लाख नए मामलों का लगभग तीन प्रतिशत है। डॉ. आशीष गुप्ता ने भारतीय पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर के बढ़ते मामलों को लेकर कहा, ‘‘प्रारंभिक अवस्था में पता लगने से जीवित रहने की दर में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, क्योंकि प्रोस्टेट कैंसर अक्सर धीमी गति से बढ़ता है और यदि प्रारंभिक अवस्था में इसकी पहचान हो जाए तो इसका प्रभावी ढंग से इलाज किया जा सकता है। भारत में सबसे बड़ी समस्या है देर से इसका पता लगना।'' डॉ. आशीष गुप्ता अमेरिकी बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त कैंसर विशेषज्ञ हैं जो दिल्ली के यूनिक हॉस्पिटल कैंसर सेंटर में ‘मेडिकल ऑन्कोलॉजी' विभाग के प्रमुख हैं। डॉ. गुप्ता ने कहा कि अमेरिका में प्रोस्टेट कैंसर के 80 प्रतिशत रोगियों में बीमारी का पता शीघ्र चल जाता है, तथा 20 प्रतिशत रोगियों में देरी से इसका पता चलता है। उन्होंने कहा कि भारत में आंकड़े इसके उलट हैं। वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा कि नियमित पीएसए टेस्ट और जांच के माध्यम से पुरुष अपने स्वास्थ्य पर नियंत्रण रख सकते हैं और बीमारी के बढ़ने की संभावना को कम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि प्रारंभिक अवस्था में लक्षण प्रायः अनुपस्थित होते हैं, फिर भी पुरुषों को संभावित चेतावनी संकेतों के प्रति सचेत रहना चाहिए। प्रोस्टेट कैंसर के लक्षणों में पेशाब करने में कठिनाई, बार-बार पेशाब आना (विशेष रूप से रात में), पेशाब या वीर्य में रक्त आना तथा कूल्हों, पीठ या श्रोणि में दर्द शामिल हैं। विशेषज्ञों ने प्रोस्टेट कैंसर के बारे में पता चलने और इसके उपचार में देरी के प्रति चेताया क्योंकि यह जानलेवा साबित हो सकता है। -
नयी दिल्ली. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की मानक संचालन प्रक्रियाओं के अनुसार ‘प्री-हार्मोनल' थेरेपी या लिंग निर्धारण सर्जरी करवाने के इच्छुक ‘ट्रांसजेंडरों' का मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों द्वारा मूल्यांकन व प्रमाणन किया जाना आवश्यक है। 'ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के चिकित्सा उपचार के लिए एसओपी' में कहा गया है कि जहां तक स्त्री रोग विशेषज्ञों का सवाल है, तो उन्हें यह पूछना चाहिए कि रोगी को नाम और सर्वनाम के संदर्भ में किस तरह से संबोधित किया जाना चाहिए, और यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि वे जिन शब्दों का उपयोग करें वे सुरक्षा, गरिमा व सम्मान के सिद्धांतों के अनुरूप हों। एसओपी दस्तावेज में मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की जिम्मेदारियों को रेखांकित करते हुए कहा गया है कि उन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन की वर्तमान प्रणाली के मुताबिक लैंगिक असंगति का मूल्यांकन और प्रमाणन करना होगा। लैंगिक असंगति का मतलब किसी व्यक्ति के अनुभव किए गए लिंग और निर्धारित लिंग के बीच फर्क होना होता है। लैंगिक असंगति वाले लोग हार्मोनल उपचार, सर्जरी या अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से लिंग परिवर्तन की इच्छा जताते हैं, ताकि वे खुद को जिस लिंग (जेंडर) से जुड़ा महसूस करते हैं, उसी से जुड़े व्यक्ति के तौर पर स्वीकार किए जाएं और जीवन जी सकें। एसओपी के अनुसार, "एंडोक्राइनोलॉजी उपचार से पहले, एक मनोचिकित्सक से प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है। लिंग निर्धारण सर्जरी से पहले मनोचिकित्सक और नैदानिक मनोवैज्ञानिक/मनोचिकित्सक से दो प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है।” दस्तावेज में कहा गया है कि इसके अलावा, एक मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से विभिन्न प्रकार के विकारों का आकलन कराकर उनका इलाज कराना होता है। वहीं, आवश्यकता पड़ने पर उन्हें लिंग असंगति से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए सहायता या चिकित्सा भी प्रदान करनी होती है। दस्तावेज में कहा गया है, "यदि आवश्यकता हुई, तो यह सहायता हार्मोनल थेरेपी/लिंग निर्धारण सर्जरी से पहले, सर्जरी के दौरान तथा सर्जरी के बाद भी प्रदान की जानी चाहिए।'' दस्तावेज़ के अनुसार, कोई भी व्यक्ति 18 वर्ष की आयु से पहले लिंग निर्धारण सर्जरी नहीं करवा सकता।
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रामगढ़. झारखंड के रामगढ़ जिले में रविवार को आठ से 15 वर्ष की आयु की तीन लड़कियों की नदी में नहाते समय डूबने से मौत हो गयी। पुलिस ने यह जानकारी दी। यह घटना रामगढ़ टाउन थाना क्षेत्र में दामोदर नदी में घटी। काहुबेरा गांव की रहने वाली तीनों लड़कियां नदी में नहाने गई थीं। उप-विभागीय पुलिस अधिकारी परमेश्वर प्रसाद ने बताया, "उनमें से एक नदी में गहराई में चली गयी और डूब गयी। दो अन्य ने उसे बचाने का प्रयास किया और वे भी डूब गयीं।" मृतकों की पहचान सिमरन कुमारी, छाया कुमारी और संध्या कुमारी के रूप में हुई है। स्थानीय ग्रामीणों की मदद से तीनों लड़कियों के शव दामोदर नदी से बाहर निकाले गए।
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नयी दिल्ली. सरकार ने विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल करने के लिए 10 भूवैज्ञानिक स्थलों के नाम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को भेजे हैं। सरकार ने बताया कि इन स्थलों की समीक्षा की जा रही है। देश में लगभग 100 भू-विरासत स्थल हैं, जिनमें से 32 को राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक के रूप में मान्यता दी गई है। पुरातात्विक स्थलों के विपरीत, भू-विरासत स्थलों की सुरक्षा के लिए कोई कानून नहीं है। खान सचिव वी एल कांता राव ने कहा कि भू-विरासत स्थल और भू-अवशेष विधेयक, 2022 पर काम चल रहा है। इस विधेयक का मकसद भारत की भूवैज्ञानिक विरासत की रक्षा करना है। राव ने यहां कार्यक्रम में कहा कि दुनिया में लगभग 1,200 विश्व धरोहर स्थल हैं, जिनमें से 42 भारत में हैं और इनमें कोई भी भूवैज्ञानिक स्थल नहीं है। इस संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘‘हमें मिलकर काम करने की जरूरत है।'' भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने एक बयान में कहा कि सचिव ने आने वाले वर्षों में भारत में कम से कम दो जियोपार्कों को मान्यता देने पर जोर दिया। राव ने कहा कि महाराष्ट्र में लूनर क्रेटर, मध्य प्रदेश में भेड़ाघाट, आंध्र प्रदेश में गंडिकोटा गॉर्ज जैसे बेहतरीन भू-विरासत स्थल हैं। इनकी पर्यटन स्थलों के रूप में अच्छी पहचान है, लेकिन लोगों को इनके भूवैज्ञानिक महत्व के बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि सिक्किम में कुछ स्थलों को अंतरराष्ट्रीय भूवैज्ञानिक विज्ञान संघ (आईयूजीएस) साइट के रूप में मान्यता दी गई है। इन सभी मान्यताओं से आम लोगों को लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने यूनेस्को से अनुरोध किया कि वह कुछ भारतीय स्थलों को ‘यूनेस्को वैश्विक जियोपार्क' के रूप में मान्यता दिलाने में सहायता प्रदान करे।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि भारत आज दुनिया में विनिर्माण का ‘पावरहाउस' बन गया है और सभी देशों की नजरें ‘‘हम पर टिकी हैं'' क्योंकि सरकार वैश्विक गुणवत्ता वाली चीजों के निर्माण के साथ ही स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। आकाशवाणी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात' की 114वीं कड़ी में मोदी ने देशवासियों से त्योहारों के मौसम में उपहार स्वरूप ‘मेड इन इंडिया' उत्पादों को एक-दूसरे को देने का आह्वान किया। ‘मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के 10 वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि इस अभियान की सफलता में, देश के बड़े उद्योगों से लेकर छोटे दुकानदारों तक का योगदान शामिल है। उन्होंने कहा कि उन्हें यह देखकर बहुत खुशी मिलती है कि गरीब, मध्यम वर्ग और सूक्ष्म व मध्यम उद्योग को इस अभियान से बहुत फायदा मिल रहा है और इस अभियान ने हर वर्ग के लोगों को अपनी प्रतिभा सामने लाने का अवसर दिया है। मोदी ने कहा, ‘‘आज, भारत विनिर्माण का पावरहाउस बन गया है और देश की युवा-शक्ति की वजह से दुनिया-भर की नजरें हम पर हैं। ऑटोमोबाइल्स हो, टेक्सटाइल्स हो या फिर उ्ड्डयन का क्षेत्र या फिर इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा का क्षेत्र हो। हर क्षेत्र में देश का निर्यात लगातार बढ़ रहा है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का लगातार बढ़ना भी ‘मेक इन इंडिया' की सफलता की गाथा कह रहा है। उन्होंने कहा कि देश अब वैश्विक गुणवत्ता वाली चीजों के निर्माण के साथ ही स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। महाराष्ट्र के भंडारा जिले में 50 से भी अधिक स्वसहायता समूहों की ओर से टसर सिल्क को संरक्षित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह स्थानीय समुदायों को सशक्त बना रही है और साथ ही ‘मेक इन इंडिया' की भावना को भी दर्शा रही है। उन्होंने त्योहारों के इस मौसम में ‘मेड इन इंडिया' उत्पाद को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए कहा, ‘‘आप कुछ भी उपहार देंगे, वह ‘मेड इन इंडिया' ही होना चाहिए।'' मोदी ने एक बार फिर दोहराया कि सिर्फ मिट्टी के दीये खरीदना ही ‘वोकल फॉर लोकल' नहीं है बल्कि इसके साथ ही अपने क्षेत्र के स्थानीय उत्पादों को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा दिया जाना जरूरी है।
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पटना. केंद्रीय मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने शनिवार को कहा कि उनकी पार्टी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार में युवा मामले और खेल मंत्रालय के लिए बजटीय आवंटन में तीन गुना इजाफा किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार खेलों की बेहतरी और खिलाड़ियों को सुविधाएं देने पर जोर देते रहे हैं। पटना में भाजपा के प्रदेश कार्यालय में आयोजित सेवा पखवाड़ा के तहत 'पैरालंपिक खिलाड़ी सम्मान एवं सदस्यता' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा, ‘‘माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र की भाजपा-नीत राजग सरकार ने देश में खेलों को बढ़ावा दिया है और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया है।'' उन्होंने कहा, ‘‘ एक समय था जब भारत को केवल एक या दो पदकों पर संतोष करना पड़ता था लेकिन ये मोदी जी के प्रयासों का परिणाम है कि आज भारत ओलंपिक और पैरालंपिक में तेजी से आगे बढ़ रहा है।'' उन्होंने कहा, ‘‘मोदी जी ने खेलों को हमेशा ही महत्व दिया है। एक समय था जब देश में खेलों को प्राथमिकता नहीं दी जाती थी और ओलंपिक में भागीदारी को एक सामान्य प्रक्रिया माना जाता था। आदरणीय मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के उपरांत खेलों पर विशेष ध्यान दिया गया है।'' नड्डा ने कहा, ‘‘मोदी सरकार ने ओलंपिक में भारत की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष योजनाएं शुरू कीं और पैरालंपिक्स को भी मुख्यधारा में लाने को प्राथमिकता दी। जब खिलाड़ी प्रतियोगिताओं के लिए जाते हैं, तो मोदी जी उनसे मिलते हैं। चाहे स्पर्धाओं में खिलाड़ी जीतें या न जीतें, मोदी जी खिलाड़ियों के वापस आने के बाद उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलते हैं और उनकी हौसला अफजाई करते हैं।'' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री हमेशा ओलंपिक और पैरालंपिक दोनों के खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हैं।
नड्डा ने कहा कि ओलंपिक और पैरालंपिक में भारत की प्रगति के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने एक बड़ी और महत्वपूर्ण रणनीति तैयार की, जिसके बाद खेलों के बजट को 1,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3, 342 करोड़ किया गया। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि ‘टॉप्स' के माध्यम से खिलाड़ियों का चयन किया जाता हैं, उन्हें विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, साथ ही विशेष कोच और खेल उपकरण जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। आज 34 खेलों में 17,000 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण मिल रहा है। ‘खेलो इंडिया कार्यक्रम' के तहत 1,000 केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 715 में पहले से ही प्रशिक्षण चल रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि किसी ने नहीं सोचा था कि भारत सरकार खेलों में इस हद तक निवेश करेगी, लेकिन जब से मोदी जी सत्ता में आए हैं, तब से टॉप्स और खेलो इंडिया दोनों को महत्वपूर्ण बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में ओलंपिक और पैरालंपिक दोनों खिलाड़ियों के पास रुकने या थमने का कोई कारण नहीं है। आज जो खिलाड़ी पदक जीतते हैं, उन्हें बधाई दी जाती है और जो चूक जाते हैं, वे अगली बार नए संकल्प के साथ पदक लाएंगे। भाजपा सभी खिलाड़ियों के साथ मजबूती से खड़ी है, उन्हें शक्ति और प्रोत्साहन प्रदान कर रही है और देश के 140 करोड़ लोग खिलाड़ियों के पीछे एकजुट होकर खड़े हैं। नड्डा ने पार्टी प्रदेश कार्यालय में आयोजित पैरालंपिक खिलाड़ी सम्मान और सदस्यता अभियान समारोह में पेरिस पैरा ओलंपिक के पदक विजेत खिलाड़ी शैलेश कुमार और शरद कुमार को तथा अंतरराष्ट्रीय मेडल प्राप्त खिलाड़ी गजेंद्र कुमार, अमिसा प्रकाश, सिंटू कुमार, मोहम्मद शमीम, मानसी, ऑब्जर्वर शिवाजी कुमार सहित 108 खिलाड़ियों को सम्मानित किया। इस मौके पर नड्डा और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल ने 20 चर्चित खिलाड़ियों को पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस अवसर पर जायसवाल, केंद्रीय मंत्री नित्यानन्द राय, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं विजय कुमार सिन्हा, पार्टी के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े सहित अन्य प्रमुख नेता भी उपस्थित थे। इससे पहले सुबह नड्डा के पटना हवाई अड्डा पहुंचने पर जायसवाल, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा सहित पार्टी के कई नेताओं ने उनका स्वागत किया। अपनी एक दिवसीय इस यात्रा पटना पहुंचे नड्डा हवाई अड्डा से सीधे सचिवालय स्थित सप्तमूर्ति पहुंचे। वहां उन्होंने शहीद स्मारक परिसर में सप्तमूर्ति पर पुष्पांजलि अर्पित कर सात अमर बलिदानियों को नमन किया। बाद में दिन में, नड्डा प्रदेश भाजपा कार्यालय में सांसदों, विधायकों, एमएलसी और पार्टी के अन्य नेताओं के साथ बैठक कर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में जारी पार्टी सदस्यता अभियान की समीक्षा की। -
शिवपुरी . मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में बारिश के पानी से भरे गड्ढे में खेलते समय चार से आठ साल के तीन चचेरे भाइयों की शनिवार को डूबने से मौत हो गई। अधिकारी ने बताया कि घटना दोपहर में जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर कोलारस थाना क्षेत्र के पडोरा गांव के बाहरी इलाके में हुई। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीओपी) विजय यादव ने बताया कि चचेरे भाई नीरज (8), संजय (6) और वीर (4) दोस्तों के साथ पानी से भरे गड्ढे में खेल रहे थे, तभी वे डूबने लगे। उन्होंने बताया कि अन्य बच्चों द्वारा सतर्क किए जाने के बाद, ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तीनों लड़कों को बाहर निकाला। हालांकि, तब तक चचेरे भाइयों की मौत हो चुकी थी।
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मुंबई. नगर निगम द्वारा संचालित सायन अस्पताल को पिछले पांच वर्षों में 43,000 से अधिक माताओं ने अपना दूध दान किया है। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने यह जानकारी दी। सायन अस्पताल में एशिया का पहला ‘ब्रेस्ट मिल्क' बैंक बनाया गया है।
अगस्त में राष्ट्रीय स्तनपान माह के दौरान नगर निगम द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, स्तनपान कराने वाली 43,412 माताओं के दान से 10,523 नवजात शिशुओं को मदद मिली है। दान किया गया मां का दूध समय पूर्व जन्मे कम वजनी और जोखिम वाले शिशुओं में मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सायन अस्पताल के डीन डॉ. मोहन जोशी ने बताया, “इस बैंक की शुरुआत 1989 में आर्मिडा फर्नांडिस ने की थी और इसे टाटा समूह की इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड से एक लाख रुपये का दान मिला था। उस समय अजीत केरकर इस कंपनी के अध्यक्ष थे। यह एशिया का पहला मां के दूध का बैंक है।” उन्होंने बताया कि मां का दूध खास होता है क्योंकि इसमें हीमोग्लोबिन और नवजात शिशु के विकास के लिए जरूरी विटामिन होते हैं। मां के दूध बैंक में दान किये जाने वाले दूध से कम वजन वाले व अपर्याप्त विकास वाले शिशुओं और प्रसवोत्तर जटिलताओं के कारण स्तनपान न करा पाने वाली महिलाओं के शिशुओं को मदद मिली है। यह अस्पताल अब पश्चिमी भारत के चिकित्सा प्रतिष्ठानों को इसी तरह के दूध बैंक स्थापित करने में मदद कर रहा है। 'नियोनेटोलॉजी' विभाग की प्रमुख डॉ. स्वाति मानेरकर ने बताया, इस दूध बैंक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मां के दूध की कमी के कारण कोई भी शिशु अपनी जान न गंवाए। हम दाताओं से दूध लेते समय सभी सुरक्षा सावधानियां बरतते हैं। हम स्तनपान कराने वाली माताओं से संपर्क करते हैं, जो अपने बच्चों को दूध पिलाने के बाद अस्पताल को अपना दूध दे सकती हैं।” डॉ. मानेरकर ने बताया कि दूध चिकित्सकों की सलाह पर ही दिया जाता है। उन्होंने कहा, ''यह दूध बैंक हर साल लगभग 2,000 से 2,500 नवजात शिशुओं की मदद करता है। -
नयी दिल्ली. पूर्व महान खिलाड़ी जफर इकबाल का मानना है कि लगातार दूसरे ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद यह आम धारणा बदल गई है कि भारतीय हॉकी टीम आखिरी क्षणों में गोल खा जाती है और हरमनप्रीत सिंह की अगुआई वाली टीम सभी पहलुओं में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों में से एक है। मॉस्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य और 1982 एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने वाली भारतीय टीम के कप्तान रहे इकबाल को तोक्यो और पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक के बाद देश में इस खेल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इकबाल ने हॉकी इंडिया की विज्ञप्ति में कहा, ‘‘पहले आम धारणा यह थी कि भारत एक ऐसी टीम है जो खेल आखिरी चरण में गोल खाती है लेकिन अब यह बदल गया है। हम सभी पहलुओं में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों में से एक हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘हमारे समय में हॉकी के बहुत सारे प्रशंसक थे। नेहरू गोल्ड कप, एशियाई खेल और अन्य अंतरराष्ट्रीय मैच जैसी प्रतियोगिताओं ने बहुत सारे समर्थकों को आकर्षित किया और हम जिन विशाल स्टेडियमों में खेलते थे, उनमें हमेशा उत्साह देखने को मिलता था।'' मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में 23 और 24 अक्टूबर को भारत और जर्मनी के बीच खेले जाने वाले दो मैचों के बारे में इकबाल ने कहा, ‘‘जर्मनी एक कड़ी टीम है। हमने तोक्यो ओलंपिक में उन्हें हराकर कांस्य पदक जीता था और हाल ही में पेरिस में सेमीफाइनल में उनसे हार गए थे इसलिए मुझे यकीन है कि भारतीय टीम हमें उन पर जीत दिलाने के लिए उत्साहित होगी।'' उन्हेंने कहा, ‘‘सुविधाएं शीर्ष स्तर की हैं और मुझे यकीन है कि मैच रोमांच से भरपूर होंगे।''
हॉकी के एक अन्य दिग्गज हरबिंदर सिंह भी राष्ट्रीय राजधानी में बड़े मैचों की वापसी को लेकर उत्साहित हैं। हरबिंदर ने कहा, ‘‘1972 में मैंने आखिरी बार राष्ट्रीय टीम के लिए दिल्ली में हॉकी खेली थी। मुझे याद है कि शिवाजी स्टेडियम खचाखच भरा हुआ था और प्रशंसक हमारी हौसलाअफजाई कर रहे थे।'' तोक्यो ओलंपिक 1964 में स्वर्ण और 1968 में मैक्सिको तथा 1972 में म्यूनिख खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली टीम के सदस्य रहे हरबिंदर ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि भारत और जर्मनी के बीच मुकाबले के लिए भी बहुत सारे प्रशंसक टीमों का उत्साह बढ़ाने के लिए मैदान में पहुंचेंगे। आखिरकार वे एक दशक के बाद उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय मुकाबले देखेंगे।'' ओलंपिक रजत विजेता जर्मनी के खिलाफ मैचों के साथ अंतरराष्ट्रीय हॉकी एक दशक के बाद नयी दिल्ली में लौट रही है। भारत ने पिछली बार मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में जनवरी 2014 में हॉकी विश्व लीग फाइनल पुरुष का चौथे दौर का मुकाबला खेला था। -
छत्रपति संभाजीनगर . महाराष्ट्र के बीड जिले में राज्य परिवहन निगम की एक बस के चालक और कंडक्टर ने यात्रा को मनोरंजक और सूचनाप्रद बनाने का बीड़ा उठाया, जिसके बाद यह बस शिक्षा आधारित अपनी आंतरिक साज-सज्जा के कारण छात्रों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गयी है। महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) की यह बस बाहर से देखने से हजारों आम यात्री बसों की तरह ही सफेद-नारंगी रंग की दिखती है लेकिन बस के अंदर उसकी छत तथा दोनों ओर चिपकी तस्वीरों और संदेशों के कारण यह एक तरह से चलती-फिरती कक्षा की तरह लगती है। कंडक्टर वैशाली मुले ने कहा, ‘‘हमने बस में जो आंतरिक साज-सज्जा की है, वह छात्रों को पसंद आ रही है। अब हमारी बस में और छात्र यात्रा कर रहे हैं।'' यह बस रोजाना दोनों तरफ से 200 किलोमीटर की दूरी तय करती है। छात्र अपने-अपने गांवों से इस बस में सवार होकर बीड-नलवंडी मार्ग पर स्थित अपने-अपने स्कूल आते-जाते हैं। मुले ने बताया कि उन्होंने तथा चालक सिराज पठान ने बस को शैक्षणिक सामग्री, छत्रपति साहू महाराज, स्वामी विवेकानंद और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसी हस्तियों से जुड़े चित्रों तथा शिक्षाप्रद संदेशों से सजाने के लिए अपनी जेब से 35,000 रुपये खर्च किए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी बस का इस्तेमाल करने वाले ज्यादातर छात्र गन्ने की खेती में शामिल श्रमिकों के बच्चे हैं। ये परिवार अपने बच्चों को स्कूल भेजने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाते हैं। हमें लगता है कि हमारी पहल से बदलाव आया है क्योंकि लड़कियों समेत और छात्र अब स्कूल जा रहे हैं।'' उन्होंने बताया कि जहां बस की छत पर सौर मंडल के ग्रहों की चमकदार तस्वीरें लगाई गई हैं, वहीं बस में एक आवर्त सारणी (पीरियॉडिक टेबल) और योग आसन की तस्वीरें और जानकारी भी है। यह बस छात्रों के बीच लोकप्रिय हो गयी है। मुले ने बताया, ‘‘वांगी में विश्वनाथ स्कूल और नलवंडी में संगमेश्वर विद्यालय के छात्र हमारी बस में यात्रा करते हैं। हमारे वरिष्ठ सहयोगी अजय मोरे, शिवराज कराड, निलेश पवार ने इस परियोजना में हमारी मदद की।'' बीड के मंडलीय परिवहन अधीक्षक शिवराज कराड ने बताया कि इस परियोजना का इकलौता उद्देश्य परिवारों को अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा, ‘‘बस के चालक और कंडक्टर ने यह बीड़ा उठाया और हमने उनका सहयोग किया। इस बस में यात्रा करने वाले छात्रों की संख्या एक साल में ही 200 से बढ़कर 290 हो गयी है। खासतौर से छात्राओं की संख्या बढ़ी है।
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नयी दिल्ली. दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में 46 वर्षीय एक व्यक्ति और उसकी चार बेटियों के शव किराये के उनके घर से बरामद किए गए हैं और शवों की हालत से ऐसा लगता है कि उनकी मौत कई दिन पहले हो चुकी है। पुलिस ने शनिवार को बताया कि शव शुक्रवार दोपहर को मिले और उन पर चोट के कोई निशान नहीं है लेकिन पुलिस को घर में सल्फास जहर के तीन पैकेट, पांच गिलास और एक संदिग्ध तरल पदार्थ के साथ एक चम्मच मिली है। मृतक व्यक्ति की दो बेटियां दिव्यांग थीं। पुलिस ने बताया कि व्यक्ति की दो छोटी बेटियां दिव्यांग थीं जबकि पड़ोसियों ने बताया कि चारों दिव्यांग थीं। पुलिस उपायुक्त (दक्षिणपश्चिम) रोहित मीणा ने कहा कि पुलिस इस दावे का सत्यापन कर रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, उसकी बेटियां कभी-कभार ही अपने कमरे से बाहर आती थीं। पड़ोसियों ने दावा किया उन्होंने आखिरी बार व्यक्ति और उसकी बेटियों को 24 सितंबर को देखा था। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पड़ोसियों ने रंगपुरी गांव में एक आवासीय परिसर की पहली मंजिल में किराये के घर से दुर्गंध आने की शिकायत की, जिसके बाद शव बरामद किए। डीसीपी मीणा ने बताया कि आवासीय परिसर की देखभाल करने वाले एक व्यक्ति ने इमारत के मालिक नितिन चौहान को फ्लैट सी-4 से दुर्गंध आने की जानकारी दी जिसके बाद उसने दरवाजा खटखटाया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने बताया कि दमकल कर्मियों की मदद से पुलिस ने दरवाजा तोड़ा और एक कमरे में एक व्यक्ति को मृत पाया जबकि उसकी चार बेटियों के शव दूसरे कमरे में मिले। मृतकों की पहचान पिछले 28 साल से वसंत कुंज में ‘इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर' में बढ़ई के तौर पर काम करने वाले हीरालाल शर्मा और उसकी चार बेटियों नीतू (26), निक्की (24), नीरू (23) और निधि (20) के रूप में की गयी है। डीसीपी ने बताया कि पड़ोसियों और करीबी रिश्तेदारों से पूछताछ में पता चला है कि हीरालाल की पत्नी की एक साल पहले कैंसर के कारण मौत हो गयी थी। वह हर महीने करीब 25,000 रुपये कमाता था लेकिन जनवरी 2024 से काम पर नहीं गया था। इस बीच, हीरालाल के भाई मोहन शर्मा और भाभी गुड़िया शर्मा घटना की सूचना मिलने के बाद उनके घर पहुंचे। उन्होंने बताया कि हीरालाल ने अपनी पत्नी की मौत के बाद परिवार के मामलों में दिलचस्पी लेना बंद कर दिया था और वह ज्यादातर अपनी बेटियों के इलाज में व्यस्त रहता था। पुलिस ने बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 194 के तहत मामले की जांच शुरू कर दी गयी है और पोस्टमार्टम के लिए एक चिकित्सा बोर्ड का गठन किया गया है। -
इंदौर .मशहूर गायिका लता मंगेशकर की जन्मस्थली इंदौर के कलाकार मिलिंद ढवले ने उनका अनूठा ‘पोर्ट्रेट' बनाया है। इस श्वेत-श्याम पोर्ट्रेट की रेखाओं के रूप में मंगेशकर के 90 हिट गानों के मुखड़े बड़े करीने से लिखे गए हैं। 31 इंच लंबे और 23 इंच चौड़े इस पोर्ट्रेट की अनूठी बात यह भी है कि इसमें गानों के मुखड़ों को खास स्थान पर लिखा गया है। मसलन ‘‘बिंदिया चमकेगी, चूड़ी खनकेगी'' गीत के मुखड़े को मंगेशकर के चेहरे की बिंदी की जगह पर ही लिखा गया है, तो उनके होंठों की जगह ‘‘धीरे-धीरे बोल, कोई सुन ना ले'' गाने का मुखड़ा उकेरा गया है। ढवले (55) ने इस पोर्ट्रेट में "ऐ मेरे वतन के लोगों" गीत को मंगेशकर के कपाल पर लिखा है, क्योंकि उनका मानना है कि मातृभूमि के लिए शहीद सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को याद दिलाकर देशभक्ति की भावना जगाने वाला यह नगमा भारतीय नागरिकों के जेहन पर आज भी छाया हुआ है। पोर्ट्रेट में मंगेशकर के 90 हिट गीतों के मुखड़े इतनी सफाई से लिखे गए हैं कि इनकी इबारत पास से देखने पर ही समझ आती है। दूर से देखने पर ये मुखड़े पोर्ट्रेट की रेखाओं के रूप में ही नजर आते हैं। धवले ने शनिवार को बताया कि यह पोर्ट्रेट उन्होंने मंगेशकर के 90वें जन्मदिन पर बनाया था और वह कोशिश करते रहे कि किसी तरह उन्हें यह कलाकृति भेंट करें, लेकिन उनकी ख्वाहिश पूरी न हो सकी। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे हमेशा मलाल रहेगा कि मैं मंगेशकर से मिलकर उन्हें यह पोर्ट्रेट भेंट नहीं कर सका।'' मंगेशकर का जन्म इंदौर में 28 सितंबर 1929 को हुआ था। उन्होंने मुंबई में छह फरवरी 2022 को 92 साल की उम्र में आखिरी सांस ली थी।
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