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- बेंगलुरु.पृथ्वी अवलोकन उपग्रह-8 (ईओएस-8) के 15 अगस्त को प्रक्षेपित किये जाने की संभावना है। इसरो के सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि ईओएस-8 को लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी)-डी3 से प्रक्षेपित किया जाएगा।उन्होंने बताया, “इसे संभवतः 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया जाएगा।” इसरो ने एक बयान में बताया कि ईओएस-8 अभियान के प्राथमिक उद्देश्यों में सूक्ष्म उपग्रह का डिजाइन तैयार करना और पेलोड उपकरण बनाना तथा भविष्य के उपग्रहों के लिए आवश्यक नयी प्रौद्योगिकियों को शामिल करना है।
- नयी दिल्ली. सरकार ने ‘नमामि गंगे' कार्यक्रम 2.0 के तहत चार प्रमुख परियोजनाएं पूरी कर ली हैं और उनका संचालन शुरू कर दिया है। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है। बिहार और उत्तर प्रदेश में गंगा नदी के आसपास शुरू की गई यह पहल प्रदूषण रोकने और नदी की पारिस्थितिक स्थिति में सुधार करने के लिए चल रहे प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है। कुल 920 करोड़ रुपये के निवेश से तैयार इन परियोजनाओं के जरिये 145 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) मलजल शोधन क्षमता बढ़ेगी, सीवर नेटवर्क में वृद्धि होगी तथा अनेक नालों को बीच में ही रोक दिया जाएगा। जल शक्ति मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा निर्धारित कड़े उत्सर्जन मानकों को पूरा करने के लिए तैयार किए गए इन प्रयासों से गंगा और उसकी सहायक नदियों के जल की गुणवत्ता में पर्याप्त सुधार होने की उम्मीद है। बिहार के मुंगेर में 366 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य सीवर नेटवर्क में सुधार करना और 30 एमएलडी क्षमता वाला मलजल शोधन संयंत्र (एसटीपी) स्थापित करना है। इस व्यापक पहल में 175 किलोमीटर सीवर नेटवर्क का विकास शामिल है।उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में 129 करोड़ रुपये की लागत वाली एक परियोजना गंगा में प्रदूषण कम करने के लिए मलजल को रोकने, उसकी दिशा को मोड़ने और उसका शोधन करने पर केंद्रित है। अब चालू हो चुकी इस पहल के तहत नौ नालों को रोका गया है। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में अब 153 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत से मलजल को रोकने, उसकी दिशा को मोड़ने और उसका शोधन करने की परियोजना शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश के बरेली में 271 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से मलजल को रोकने, उसकी दिशा मोड़ने और मलजल शोधन कार्यों के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना स्थापित की गई .
- श्रीनगर. निर्वाचन आयोग केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने के संबंध में चर्चा के लिए बृहस्पतिवार को राजनीतिक दलों से मुलाकात करेगा। जम्मू-कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने मंगलवार को विभिन्न राजनीतिक दलों को पत्र जारी कर उन्हें निर्वाचन आयोग के साथ बैठक के लिए आमंत्रित किया। राजनीतिक दलों को आयोग के साथ बैठक के लिए अलग-अलग समय दिया गया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार के नेतृत्व में आयोग विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के लिए 8-10 अगस्त तक जम्मू-कश्मीर का दौरा करेगा। केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव कराने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई 30 सितंबर की समय सीमा के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है। कुमार के साथ चुनाव आयुक्त- ज्ञानेश कुमार और एस एस संधू भी होंगे।राजनीतिक दलों से मिलने के अलावा आयोग मुख्य निर्वाचन अधिकारी और केंद्रीय बलों के समन्वयक के साथ भी स्थिति की समीक्षा करेगा। आयोग सभी जिलों के निर्वाचन अधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ-साथ मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के साथ तैयारियों की समीक्षा भी करेगा। दस अगस्त को आयोग प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समीक्षा बैठक के लिए जम्मू का दौरा करेगा।संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने और 2019 में तत्कालीन राज्य जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद से जम्मू-कश्मीर में पहले विधानसभा चुनाव होंगे।
- नयी दिल्ली. भारत के 84 प्रतिशत से अधिक जिलों के भीषण उष्ण लहर से प्रभावित होने की संभावना है और 70 फीसदी जिलों में अत्यधिक वर्षा की घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है। एक नये विश्लेषण में यह कहा गया है। स्वतंत्र विकास संगठन आईपीई ग्लोबल लिमिटेड और एस्री इंडिया टेक्नोलॉजिस द्वारा तैयार की गई ‘गर्म होते जलवायु में मानसून का प्रबंधन' रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में मानसून (जून-सितंबर) के दौरान गर्मियों जैसी स्थिति बनी हुई है। आईपीई ग्लोबल लिमिटेड में जलवायु परिवर्तन और ‘सस्टैनबिलिटी प्रैक्टिस' के प्रमुख और अध्ययन के लेखक अविनाश मोहंती ने कहा कि उनका विश्लेषण संकेत देता है कि 2036 तक 10 में आठ भारतीय प्रतिकूल मौसमी घटनाओं से प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि, उद्योग और व्यापक अवसंरचना परियोजनाओं को जलवायु परिवर्तन की अनिश्चितताओं से बचाने के लिए अति-विस्तृत जोखिम आकलन को अपनाना और जलवायु-जोखिम वेधशालाओं की स्थापना करना शीर्ष राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए। रिपोर्ट कहती है कि 2012-22 के दशक में उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात और त्रिपुरा उष्ण लहर से सर्वाधिक प्रभावित पांच राज्य थे। इसमें कहा गया है कि तटीय क्षेत्रों के 74 प्रतिशत जिले, मैदानी क्षेत्रों के 71 फीसदी जिले तथा पहाड़ी क्षेत्रों के 65 प्रतिशत जिले भीषण उष्ण लहर से प्रभावित रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, मैदानी और पहाड़ी जिलों में 2013-22 के दशक के दौरान उष्ण लहर दिनों की संख्या में 36 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि तटीय जिलों में 30 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस दशक (2013-22) में पिछले दो दशकों की तुलना में कम उष्ण लहर दिवस दर्ज किए गए। इस अवधि में 2015 में सबसे ज्यादा भीषण गर्मी पड़ी थी जो 1998 के बाद दूसरी सबसे घातक वर्ष था।विश्लेषण से पता चला कि मार्च-मई के बीच की अवधि और उसके बाद जून-सितंबर के बीच की अवधि के दौरान, मैदानी इलाकों के जिलों में अधिकतम उष्ण लहर दिवस दर्ज किए गए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2013 से 10 वर्षों में भारत में भीषण और तापघात के कारण 10,635 लोगों की जान गई। इस अवधि में सबसे ज्यादा 2203 मौतें आंध्र प्रदेश में हुई। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 1,485, तेलंगाना में 1,172, पंजाब में 1,030, बिहार में 938, महाराष्ट्र में 867, ओडिशा में 609, झारखंड में 517, हरियाणा में 461, पश्चिम बंगाल में 357, राजस्थान में 345, गुजरात में 263 और मध्य प्रदेश में 213 लोगों की मौत हुई। दिल्ली में इस दौरान भीषण गर्मी से 13 लोगों की मौत हुई। इस 2013-22 के बीच की अवधि में सबसे ज्यादा मौतें 2015 में दर्ज की गईं जब 1908 लोगों की मौत हुई थी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, इस साल गर्मी में भारत में 536 उष्ण लहर दिवस दर्ज किए गए जो 14 वर्षों में सबसे अधिक है। उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में 1901 के बाद सबसे गर्म जून दर्ज किया गया। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 2024 में तापघात के 41,789 संदिग्ध मामले सामने आए और गर्मी के चलते 143 लोगों की मौतें दर्ज की गईं।
- मुंबई. सरकार ने चालू वित्त वर्ष के दौरान किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से लिए गए कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए तीन लाख रुपये तक के अल्पकालिक कर्ज के लिए ब्याज सहायता योजना जारी रखने को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत किसानों को सात प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर ऋण मिलता है। समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को तीन प्रतिशत वार्षिक की अतिरिक्त ब्याज सहायता प्रदान की जाती है। भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा, ‘‘इसका यह भी अर्थ है कि उपरोक्त अनुसार समय पर ऋण चुकाने वाले किसानों को वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान चार प्रतिशत सालाना की दर से अल्पकालिक फसल ऋण और या पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन आदि सहित संबद्ध गतिविधियों के लिए अल्पकालिक ऋण मिलेगा।'' एक परिपत्र में, केंद्रीय बैंक ने कहा कि ऋण देने वाली संस्थाओं को ब्याज सहायता की दर 2024-25 के लिए 1.5 प्रतिशत होगी। रिजर्व बैंक ने कहा कि किसानों की घबराहटपूर्ण बिक्री को हतोत्साहित करने और उन्हें अपने उत्पादों को गोदामों में संग्रहीत करने को प्रोत्साहित करने के लिए केसीसी के तहत ब्याज छूट का लाभ फसल की कटाई के बाद छह महीने तक की अवधि के लिए छोटे और सीमांत किसानों को उपलब्ध होगा। रिजर्व बैंक परिपत्र में कहा गया है कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत प्रदान करने के लिए, उस वर्ष के लिए लागू ब्याज छूट दर पुनर्गठित ऋण राशि पर पहले वर्ष के लिए बैंकों को उपलब्ध कराई जाएगी। ऐसे पुनर्गठित कर्ज पर दूसरे वर्ष से सामान्य ब्याज दर लागू होगी।
- नयी दिल्ली.उत्तराखंड के बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जाने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या को सीमित करने के लिये कोई व्यवस्था नहीं होने को रेखांकित करते हुये राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने राज्य के पर्यावरण विभाग के सचिव से पूछा है कि दुर्घटना की स्थिति में किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा। एनजीटी केदारनाथ, हेमकुंड साहिब, यमुनोत्री और गोमुख के तीर्थमार्गों पर घोड़ों का मल और उनके शवों सहित कचरे को फेंकने के बारे में एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि 10 मई 2022 के राज्य सरकार के परिपत्र के अनुसार बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के लिए तीर्थयात्रियों की संख्या क्रमशः 16,000, 13,000, 8,000 और 5,000 निर्धारित की गई थी। पीठ ने कहा कि 21 अप्रैल 2023 के परिपत्र द्वारा तीर्थयात्रियों की संख्या तय करने वाले पहले के परिपत्र को वापस ले लिया गया था। पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल भी शामिल हैं। अधिकरण ने 31 जुलाई के अपने आदेश में कहा, “ अधिकरण के समक्ष यह निर्विवाद है कि आज की स्थिति में श्री बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के मार्गों पर तीर्थयात्रियों के लिए अस्थायी आधार पर भी कोई वहन क्षमता निर्धारित नहीं है तथा उन मार्गों पर तीर्थयात्रियों की संख्या के संबंध में कोई प्रतिबंध नहीं है।” फैसले में कहा गया है कि राज्य सरकार के वकील के अनुसार, चारों तीर्थस्थलों की वहन क्षमता के बारे में रिपोर्ट प्राप्त करने में एक वर्ष का समय लगेगा और इस पृष्ठभूमि में याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि तीर्थयात्रियों की अनियंत्रित संख्या के कारण दुर्घटना हो सकती है और किसी को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी। एनजीटी ने कहा, “ इन परिस्थितियों में, हम (राज्य के) पर्यावरण विभाग के सचिव को सुनवाई की अगली तारीख (12 सितंबर) पर ऑनलाइन माध्यम से उपस्थित होने और तीर्थयात्रियों की सिमित संख्या के अभाव में किसी भी असामयिक दुर्घटना के बारे में आवेदक के अधिवक्ता की दलीलों के संबंध में अपना रुख बताने का निर्देश देते हैं।” पीठ ने कहा कि पर्यावरण सचिव यह भी बताएं कि ऐसे मामले में नुकसान की भरपाई कैसे की जाएगी और इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
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रायपुर। मंदिर हसौद मशीनरी डिवीज़न में जिंदल संस्थापक चेयरमैन श्री ओपी जिंदल की जयंती मनाई गई। श्री ओ पी जिंदल जिन्हें प्यार और सम्मान से बाउजी पुकारा जाता हैं, वह एक दूरदृष्टा थे। श्री ओपी जिंदल की जीवनी उनकी दूरदर्शिता और राष्ट्र के लिए देखे गए सपनो की याद ताज़ा कराता हैं, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में अभूतपूर्व योगदान दिया। बाउजी ने अपने कर्मयोग से अनगिनत व्यक्तियों को राष्ट्र निर्माण में सामूहिक योगदान करने के लिए प्रेरित किया उनकी दूरदर्शिता का केंद्र बिंदु एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत था जो पुरे गर्व और स्वाभिमान के साथ विकसित औद्योंगिक राष्ट्र की कतार में खड़ा हो। बाउजी के दूरदर्शी आदर्श और सिद्धांत जेएसपी के लिए निरंतर प्रेणा के स्त्रोत हैं जो हमे न सिर्फ राष्ट्र के निर्माण बल्कि समुदायों के सशक्तिकरण का हौसला भी देते हैं।
बाउजी एक जन्मजात इंजीनियर थे उन्होंने स्वदेशी तकनीक पर आधारित जिंदल इंडिया नामक एक पाइप मिल की स्थापना की जिसे आज जिंदल इंडस्ट्रीज के नाम से जाता हैं 1970 में उन्होंने जिंदल स्ट्रिप्स लिमिटेड की स्थपना की और शुरू से ही अनुसन्धान पर ध्यान दिया बाउजी की मौलिक सोच, बदलाव लाने का उनका जूनून और इन सबसे बढ़कर भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किये गए उनके प्रयास ने उन्हें मशीनों से बात करने वाले शख्सियत के रूप में विश्व विख्यात कर दिया। उनका जन्म भले ही हरियाणा में हुआ हो लेकिन पूरा भारत उनकी कर्मभूमि था।
ओपी जिंदल ग्रुप जैसे विशाल औद्योगिक समूह के संस्थापक और अग्रणी राजनेता होने के बावजूद बाउजी ने कभी भी अपने कार्यालय का दरवाजा बंद नहीं रखा आम हो या खास सभी के लिए उनके दरवाजे २४ घंटे खुले रहे। बाउजी ने राजनीति में आकर जनसेवा की एक नई परिभाषा प्रस्तुत की शिक्षा स्वास्थ और लोगो की सम्पन्नता के लिए उन्होंने आजीवन संघर्ष किया ।
वे तीन बार हिसार के विधायक रहे उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिबद्धता से ओपी जिंदल ग्रुप जैसे विशाल औद्योगिक समूह की स्थापना कर राष्ट्र के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। उन्ही के सिद्धांतो और विचारो को जिवंत कर मंदिर हसौद स्तिथ मशीनरी डिवीज़न में उनकी 94 वी जयंती मनाई गयी जहा सुबह भजन कीर्तन के साथ कार्यक्रम की शरुआत की गयी बाउजी को याद कर मशीनरी डिवीज़न स्तिथ हेरिटेज पार्क में कारखाने के कर्मचारियों द्वारा बाउजी की मूर्ति पर पुष्पांजलि अर्पित किये गए साथ ही इस अवसर पर कैंसर जागरूकता एवं स्वास्थ्य शिविर व वृक्षारोपण का आयोजन किया गया तथा माना स्तिथ वृद्धाश्रम में भोजन फल एवं वस्त्रो का वितरण किया गया इस उपलक्ष्य में मशीनरी डिवीज़न के अधिकारी सहित कर्मचारी मौजूद रहे सभी ने बाउजी को श्रद्धासुमन अर्पित किया। -
सुवा. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को मंगलवार को फिजी के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘कम्पैनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी' से सम्मानित किया गया। मुर्मू ने दोनों देशों के संबंधों की प्रशंसा की और कहा कि भारत एक मजबूत, लचीला और अधिक समृद्ध राष्ट्र बनाने के लिए फिजी के साथ साझेदारी करने को तैयार है। राष्ट्रपति कार्यालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘फिजी के राष्ट्रपति रातू विलियम मैवालिली कटोनिवेरे ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ‘कम्पैनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी' पुरस्कार प्रदान किया। यह फिजी का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।'' फिजी की दो दिवसीय यात्रा पर आयीं मुर्मू ने इस सम्मान को भारत और फिजी के बीच ‘‘दोस्ती के गहरे संबंधों का प्रतिबिंब'' बताया। यह किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की इस द्वीपसमूह राष्ट्र की पहली यात्रा है। राष्ट्रपति मुर्मू ने फिजी की संसद को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा, ‘‘जैसे-जैसे भारत वैश्विक मंच पर मजबूती से उभर रहा है, हम एक मजबूत, लचीला और अधिक समृद्ध राष्ट्र बनाने के लिए आपकी प्राथमिकताओं के अनुसार फिजी के साथ साझेदारी करने के लिए तैयार हैं। आइए, हम अपने दोनों प्रिय देशों के लोगों के पारस्परिक लाभ के लिए अपनी साझेदारी की पूरी क्षमता का उपयोग करने के लिए एक साथ आएं।'' उन्होंने कहा कि आकार में बहुत अंतर होने के बावजूद भारत और फिजी में जीवंत लोकतंत्र समेत काफी कुछ एक समान है। उन्होंने याद किया कि करीब 10 वर्ष पहले इसी हॉल में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कुछ मूल मूल्यों का जिक्र किया था जो भारत और फिजी को जोड़ते हैं। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, ‘‘इनमें हमारा लोकतंत्र, हमारे समाज की विविधता, हमारी नस्ल कि सभी मनुष्य समान हैं, तथा प्रत्येक व्यक्ति की स्वतंत्रता, सम्मान और अधिकारों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता शामिल हैं। ये साझा मूल्य शाश्वत हैं तथा आगे भी हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे।'' उन्होंने कहा, ‘‘यहां बिताए अपने थोड़े से समय में, मैं देख सकती हूं कि बाकी दुनिया को फिजी से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। फिजी की सौम्य जीवनशैली, परंपराओं तथा रीति-रिवाजों के प्रति गहरा सम्मान, खुला और बहुसांस्कृतिक वातावरण, फिजी को तेजी से संघर्षों में घिर रही इस दुनिया में इतना खास बनाता है। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि फिजी वह जगह है जहां बाकी दुनिया अपनी खुशियां ढूंढने आती है।'' उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि सुवा में स्थापित होने वाले ‘सुपर स्पेशलिटी कार्डियोलॉजी हॉस्पिटल' सहित नयी परियोजनाएं फिजी और व्यापक प्रशांत क्षेत्र के लोगों की प्राथमिकता वाली जरूरतों को पूरा करने में मदद करेंगी। इससे पहले, राष्ट्रपति मुर्मू का ‘स्टेट हाउस' में राष्ट्रपति कटोनिवेरे ने स्वागत किया जहां दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने के तरीकों पर चर्चा की। उनके कार्यालय ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘स्टेट हाउस में राष्ट्रपति मुर्मू ने ‘राष्ट्र प्रमुखों के आवासों का सौरीकरण' परियोजना (सोलेराइजेशन ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट रेजीडेन्सेज़) की प्रगति की समीक्षा की। यह एक भारतीय पहल है जिसकी शुरुआत पिछले साल फरवरी में की गयी थी।'' नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय के अनुसार, फिजी की अपनी यात्रा के बाद, मुर्मू न्यूजीलैंड और तिमोर-लेस्ते की यात्रा करेंगी। मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति की छह दिवसीय तीन देशों की यात्रा का उद्देश्य भारत की ‘एक्ट ईस्ट' नीति को आगे बढ़ाना है।
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नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को मंगलवार को दिल्ली के एक प्रमुख निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि आडवाणी की हालत स्थिर है। अस्पताल के एक सूत्र ने एक न्यूज़ एजेंसी को बताया कि आडवाणी (96) को आज यहां अपोलो अस्पताल में भर्ती किया गया। अपोलो अस्पताल ने बाद में जारी एक संक्षिप्त बयान में कहा, ‘‘भारत के पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी जी डॉ. विनीत सूरी की देखरेख में इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें नियमित परीक्षण और जांच के लिए भर्ती कराया गया है।" बयान में कहा गया कि उन्हें जल्द ही छुट्टी मिल जाएगी
जुलाई के पहले हफ्ते में भी, आडवाणी को इसी अस्पताल में भर्ती किया गया था और दो दिन चिकित्सकीय देखरेख में रखने के बाद उन्हें (अस्पताल से) छुट्टी दे दी गई थी। उन्हें न्यूरोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विनीत सूरी की देखरेख में रखा गया था। इससे पहले, आडवाणी को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती किया गया था और वहां रातभर रखने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। - नयी दिल्ली। वरिष्ठ पत्रकार विश्वनाथ सचदेव को पत्रकारिता में उनके योगदान के लिए भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) ने राजा राम मोहन राय पुरस्कार से सम्मानित किया है। असमिया अखबार ‘नियोमिया बार्ता' के संवाददाता जीतू कालिता और मलयालम दैनिक ‘मातृभूमि' के संवाददाता ए के श्रीजीत को 'ग्रामीण पत्रकारिता' की श्रेणी में पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। भारतीय प्रेस परिषद की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश जोशी की मौजूदगी में वरिष्ठ पत्रकार अशोक टंडन और रामबहादुर राय ने सोमवार को ये पुरस्कार प्रदान किए। ‘राष्ट्र दीपिका' के विशेष संवाददाता रेजी जोसेफ और ‘द हिंदू' की प्रमुख संवाददाता नवमी सुधीश को 'विकास रिपोर्टिंग' की श्रेणी में सम्मानित किया गया है। ‘मलयाला मनोरमा' दैनिक के फोटोग्राफर गिबी सैम वी पी और ‘माध्यमम' दैनिक के फोटो पत्रकार विश्वजीत के को 'फोटो पत्रकारिता - एकल समाचार चित्र' की श्रेणी में संयुक्त रूप से सम्मानित किया गया है। ‘अमर उजाला' के वरिष्ठ फोटोग्राफर विवेक निगम और स्वतंत्र फोटो पत्रकार शुभमॉय भट्टाचार्य को 'फोटो पत्रकारिता - फोटो फीचर' श्रेणी में पुरस्कार प्रदान किए गए। ‘डेक्कन क्रॉनिकल' के कार्टून संपादक शेख सुभानी और ‘टाइम्स ऑफ इंडिया' के वरिष्ठ इन्फोग्राफिक्स डिजाइनर अशोक अडेपाल को 'बेस्ट न्यूजपेपर आर्ट: कवरिंग कार्टून, कैरिकेचर और इलस्ट्रेशन' श्रेणी में सम्मानित किया गया। ‘हिंदुस्तान' (रांची) के वरिष्ठ संवाददाता प्रवीण मिश्रा और ‘टाइम्स ऑफ इंडिया' के खेल संपादक एंथनी मार्कस मेरगुलहाओ को संयुक्त रूप से खेल रिपोर्टिंग/खेल फोटो फीचर की श्रेणी में सम्मानित किया गया। ‘देशाभिमानी' की वरिष्ठ रिपोर्टर जशीना एम और ‘मातृभूमि' की सहायक सामग्री प्रबंधक रेम्या के एच को 'जेंडर इश्यू रिपोर्टिंग' श्रेणी में सम्मानित किया गया।देसाई ने कहा, ‘‘हम उन लोगों को सम्मानित कर रहे हैं जिन्होंने अपने लेखन और अपनी बेहतरीन तस्वीरों के माध्यम से लोगों की सोच को समृद्ध किया है। उनकी आकर्षक और सुबोध शैली हमारे द्वारा दिए गए पुरस्कार की पूरी तरह हकदार है।'' सभा को संबोधित करते हुए, टंडन ने देश में मीडिया के कामकाज के पूरे दायरे को देखने के लिए मीडिया आयोग की स्थापना की पुरजोर वकालत की। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को भारतीय प्रेस परिषद की जगह भारतीय मीडिया परिषद की स्थापना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रेस परिषद का दायरा केवल प्रिंट मीडिया तक ही सीमित है। राय ने कहा कि प्रिंट, डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक ... सभी प्रकार के मीडिया को प्रस्तावित भारतीय मीडिया परिषद के तहत लाने के लिए जनमत तैयार करने के वास्ते नए सिरे से प्रयास करने का समय आ गया है। राय ने कहा कि भारतीय मीडिया परिषद की स्थापना के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपील करने की जरूरत है। प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के कार्यकारी संपादक जी सुधाकर नायर इन पुरस्कारों के चयन के लिए निर्णायक मंडल के संयोजक थे। उन्होंने विजेताओं से एक-दूसरे के काम को देखने का आग्रह किया ताकि उन्हें यह पता चल सके कि वे किस तरह से इस क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ लोगों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
- नयी दिल्ली। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की राज्यसभा सदस्य फौजिया खान ने बच्चों में ऑनलाइन वीडियो गेम के बढ़ते चलन और उसकी सामग्री से उनके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को लेकर मंगलवार को चिंता जताई और सरकार से उसके नियमन की मांग उठाई। राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए राकांपा सदस्य ने कहा कि डिजिटल युग में बच्चे तेजी से ऑनलाइन वीडियो गेम के संपर्क में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से कई खेलों के विषय ऐसे हैं जो छोटे बच्चों के लिए अनुपयुक्त हैं। इस क्रम में उन्होंने हिंसा, अभद्र भाषा, मादक द्रव्यों के सेवन, यौन सामग्री, लिंग रूढ़िवादिता और कानून की अवहेलना जैसे विषयों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘‘पबजी, कॉल ऑफ ड्यूटी, जीटीए और ब्लू व्हेल चैलेंज जैसे ऑनलाइन गेम बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गए हैं। इससे बड़े होने पर उनमें आक्रामक व्यवहार का विकास होता है। इस प्रकार के गेम ज्यादा खेलने से बच्चे मानसिक बीमारी के शिकार हो रहे हैं।'' राकांपा सदस्य खान ने पुणे की एक घटना का भी जिक्र किया जिसमें वीडियो गेम से प्रभावित 15 वर्षीय लड़के ने 14वीं मंजिल की इमारत से कूदकर आत्महत्या कर ली। उन्होंने कहा कि शोध से पता चलता है कि हिंसक विषयों के संपर्क में आने से बच्चों का संज्ञानात्मक विकास कम हो सकता है और भावनाओं पर नियंत्रण कम हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह लत अकादमिक प्रदर्शन, सामाजिक कौशल और मानसिक स्वास्थ्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। खान ने कहा कि भारत में वर्तमान में वीडियो गेम को विनियमित करने के लिए विशिष्ट कानून का अभाव है और इस विषय पर न्यायिक ध्यान सीमित है। उन्होंने यह भी कहा कि ऑनलाइन मीडिया तक बच्चों की पहुंच को विनियमित करने में माता-पिता की भूमिका निर्विवाद है, लिहाजा सरकार को बच्चों के लिए सामग्री, विशेष रूप से वीडियो गेम को सीधे विनियमित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस सामग्री की देखरेख और वर्गीकरण के लिए एक समर्पित विभाग स्थापित किया जाना चाहिए, जिसमें संबंधित हितधारकों को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे खेलों से प्रभावित किशोरों को परामर्श और सहायता प्रदान की जानी चाहिए। शून्यकाल में ही तृणमूल कांग्रेस की सुष्मिता देव ने उच्चतम न्यायालय की संवैधानिक पीठों और उच्च न्यायालयों की क्षेत्रीय पीठों की संख्या बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा, ‘‘न्याय में देरी का मतलब न्याय नहीं मिलना है।''उन्होंने कहा कि इस देश में न्याय में देरी का प्राथमिक कारण यह है कि बड़ी संख्या में मामले उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में लंबित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘और दूसरा कारण यह है कि संसाधनों की कमी के कारण न्याय तक हमारी पहुंच नहीं है, क्योंकि मुकदमेबाजी बहुत महंगी हो गई है। और दूसरा, हमें उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। file photo
- नयी दिल्ली । केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 32,440 करोड़ रुपये के प्रीमियम के मुकाबले किसानों को 1.64 लाख करोड़ रुपये के बीमा दावे का भुगतान किया गया है। प्रश्नकाल के दौरान योजना पर एक पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पिछली योजना की विसंगतियों को दूर करके इसे किसान हितैषी बनाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) देश में खरीफ 2016 सीज़न में शुरू की गई थी और यह राज्यों के लिए स्वैच्छिक है। मंत्री ने कहा, ‘‘अब तक किसानों द्वारा दिए गए 32,440 करोड़ रुपये के प्रीमियम के मुकाबले 1.64 लाख करोड़ रुपये के दावों का भुगतान किया गया है।'' चौहान का कहना है कि किसानों द्वारा दिए गए प्रीमियम की तुलना में 5 गुना अधिक दावों का भुगतान किया गया है। दावों के निपटान में देरी के संबंध में द्रमुक सदस्य कनिमोई के पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार ने इस विषय पर ‘रिमोट सेंसिंग' जैसे कई उपाय किए हैं।
- जम्मू,। वार्षिक अमरनाथ यात्रा एक दिन के लिए स्थगित रहने के बाद मंगलवार को फिर से शुरू हो गई और 1,800 से अधिक तीर्थयात्री जम्मू आधार शिविर से दक्षिण कश्मीर हिमालय स्थित गुफा मंदिर में बाबा बर्फानी के दर्शन करने के लिए रवाना हुए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इस वर्ष अब तक 4.90 लाख से अधिक तीर्थयात्री 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुफा मंदिर में बर्फ से बने शिवलिंग के दर्शन कर चुके हैं, जबकि वर्ष 2023 में यह संख्या 4.50 लाख थी। अधिकारियों ने बताया कि 1,873 तीर्थयात्रियों का 39वां जत्था केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और पुलिस की सुरक्षा में आधार शिविर से रवाना हुआ। उन्होंने बताया कि ये तीर्थयात्री 69 वाहनों के काफिले में तड़के 3:25 बजे जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से रवाना हुए। वार्षिक अमरनाथ यात्रा 29 जून को शुरू हुई थी और 19 अगस्त को समाप्त होगी। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने की पांचवीं वर्षगांठ के मद्देनजर सोमवार को यात्रा एहतियात के तौर पर स्थगित कर दी गई थी।
- नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी की सांसद कंगना रनौत ने सोमवार को कहा कि यह बहुत सम्मान की बात है कि बांग्लादेश की नेता शेख हसीना भारत में खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं। बांग्लादेश में अशांति के बीच प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद हसीना के एक सैन्य विमान से दिल्ली के निकट उतरने के उपरांत कंगना ने यह टिप्प्णी की। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री और हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा सांसद रनौत ने ‘हिंदू राष्ट्र' पर सवाल उठाने वालों की भी आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम देश ‘मुसलमानों के लिए भी' सुरक्षित नहीं हैं। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर कंगना ने एक पोस्ट में लिखा, ‘‘भारत हमारे आस-पास के सभी इस्लामी गणराज्यों की मूल जन्मभूमि है। हम सम्मानित और खुश हैं कि बांग्लादेश की माननीय (पूर्व) प्रधानमंत्री भारत में सुरक्षित महसूस करती हैं, लेकिन वे सभी जो भारत में रहते हैं और पूछते रहते हैं कि हिंदू राष्ट्र क्यों? राम राज्य क्यों? खैर, यह स्पष्ट है कि क्यों!!!'' उन्होंने आगे लिखा, ‘‘मुस्लिम देशों में कोई भी सुरक्षित नहीं है, यहां तक कि खुद मुसलमान भी नहीं। अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश और ब्रिटेन में जो कुछ भी हो रहा है वह दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन हम भाग्यशाली हैं कि हम राम राज्य में रह रहे हैं।''
- नयी दिल्ली. राज्यसभा में सोमवार को बीजू जनता दल (बीजद) के एक सदस्य ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र का मुद्दा उठाया और सरकार से ऐसे प्रमाणपत्रों को रद्द कर जांच कराने की मांग की। बीजद सदस्य निरंजन बिशी ने विशेष उल्लेख के जरिये यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि फर्जी जाति प्रमाण पत्र एक गंभीर विषय है और यह अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्गों के हितों को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्गों के सदस्य संविधान के तहत रोजगार, शिक्षा, प्रोन्नति और निर्वाचित पदों पर आरक्षण के हकदार हैं। बीजद सदस्य ने कहा कि फर्जी जाति प्रमाण पत्र का उपयोग करने वाले लोग न सिर्फ दूसरों का अधिकार छीनते हैं, बल्कि वे सामाजिक अन्याय और सामाजिक असमानता को भी बढ़ावा देते हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नरेश बंसल ने पिछले दिनों माइक्रोसॉफ़्ट कंपनी के सर्वर में आई गड़बड़ी के कारण कई देशों में कामकाज के प्रभावित होने का मुद्दा उठाया और कहा कि इससे कंपनी की विश्वसनीयता भी प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि अगर अपने देश में ही सर्वर और ‘क्लाउड' प्रणाली विकसित कर ली जाए तो विदेशों पर निर्भरता खत्म हो जाएगी। विशेष उल्लेख के जरिये ही बीजद सदस्य सुलता देव ने पशुओं के साथ क्रूरता का मुद्दा उठाया और कहा कि वे अपनी पीड़ा मानवीय भाषा में नहीं व्यक्त कर सकते। उन्होंने कहा कि उनकी सुरक्षा हमारा कर्तव्य है और इसके लिए एक सख्त कानून बनाए जाने की जरूरत है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ग्रामीण दस्तकारों से जुड़ा मुद्दा उठाया और उन्हें मदद किए जाने की जरूरत पर बल दिया। अन्नाद्रमुक सदस्य एम थंबीदुरै ने मादक पदार्थों से जुड़ी समस्या का जिक्र किया और कहा कि कई बार लोगों की मौत भी हो जाती है। कांग्रेस के अनिल यादव मंदादी ने भी मादक पदार्थों से जुड़ा मुद्दा उठाया और कहा कि सरकार को मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक के लिए कदम उठाना चाहिए। आम आदमी पार्टी (आप) के संजीव अरोड़ा ने विदेशों के कारण कपड़ा उद्योग को होने वाले नुकसान का मुद्दा उठाया। वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सदस्य एडी सिंह ने एकल उपयोग प्लास्टिक पर लगी रोक को सख्ती से लागू कराने की मांग की। बीजद के सुजीत कुमार, माकपा के जॉन ब्रिटास और वी शिवदासन, द्रमुक के पी विल्सन, भाकपा के संतोष कुमार पी, भाजपा के धनंजय महादिक और एस सेल्वागणबेथी, कांग्रेस के इमरान प्रतापगढ़ी सहित अन्य सदस्यों ने भी विशेष उल्लेख के जरिये लोक महत्व के विभिन्न मुद्दे उठाए।
- किशनगंज/पटना .बिहार के किशनगंज जिले के हाजी बस्ती गांव के तालाब में नहाने के दौरान डूबने से दो लड़कियों समेत तीन बच्चों की मौत हो गयी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तालाब में डूबने से हुयी तीन मौतों पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा सोमवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, नीतीश ने कहा कि यह दुर्घटना काफी दुःखद है। उन्होंने मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि अविलम्ब उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। किशनगंज से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, कुर्लीकोर्ट थाना क्षेत्र के हाजीबस्ती में एक तालाब में रविवार शाम नहाने के दौरान डूबे इन बच्चों के शवों को करीब 16 घंटे के बाद सोमवार को एसडीआरएफ की टीम ने बरामद किया । घटनास्थल पर सोमवार को मौजूद अंचल अधिकारी सुचिता कुमारी ने बताया कि शवों को बरामद कर लिया गया है । मृतकों में दो लड़कियां और एक लड़का शामिल हैं जिनकी उम्र सात से 10 साल के बीच है ।
- नयी दिल्ली. कृषि राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी ने सोमवार को कृषि वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा देने और आयात में कमी करने की जरूरत पर जोर दिया। फिक्की एग्री स्टार्टअप सम्मेलन के छठे संस्करण को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार देश में एग्रीटेक स्टार्टअप को बढ़ावा देने और खेती को लाभदायक गतिविधि बनाने के लिए कदम उठा रही है। चौधरी ने मिट्टी की खराब होती सेहत पर भी चिंता जताई और कहा कि सरकार बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है और रासायनिक खादों के साथ-साथ कीटनाशकों के इस्तेमाल को हतोत्साहित कर रही है। उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी की सेहत प्रभावित हुई है।मंत्री ने कहा कि भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर है और सरकार दालों और खाद्य तेलों के आयात को कम करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें आयात पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।" उन्होंने कहा कि किसानों की आय में सुधार के लिए निर्यात को बढ़ावा देने की भी जरूरत है।'' चौधरी ने जल के विवेकपूर्ण उपयोग और जल पुनर्चक्रण पर भी जोर दिया।
- थिम्पू. लोकप्रिय उपन्यासकार शोभा डे का मानना है कि औपनिवेशिक मानसिकता ही वह कारण है जिसके कारण कुछ लोग भारत में अब भी ब्रिटेन की महारानी की ''पुरानी और पुरातन'' अंग्रेजी का उपयोग करते हैं। शोभा डे का कहना है कि भारत में 'हिंग्लिश' (हिंदी और अंग्रेजी का मिश्रित स्वरूप) के प्रचलन का वह समर्थन करती हैं और उनका मानना है कि यह देश में संचार का अधिक प्रभावी तरीका है। शोभा डे ने यहां चल रहे ''भूटान इकोज़: ड्रुक्युल्स लिटरेचर फेस्टिवल'' के 13वें संस्करण में रविवार को कहा, ‘‘ किसी भी भाषा की सम्पूर्ण सुन्दरता उसकी प्रवाहमयता में ही निहित है और उन्होंने हिन्दी तथा अन्य भाषाओं - जिनमें मराठी, बंगाली, गुजराती और तमिल भी शामिल हैं - को अंग्रेजी के साथ प्रयोग करना शुरू कर दिया, क्योंकि भारत में लोग इसी तरह बोलते हैं। '' डे को 'हिंग्लिश' (हिंदी और अंग्रेजी का मिश्रित स्वरूप) के प्रचलन को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। उपन्यासकार ने कहा, ‘‘हम चार्ल्स डिकेंस नहीं हैं और मैं जेन ऑस्टेन नहीं हूं, मैं जिस तरह से बोलती हूं, उसी तरह से लिखती भी हूं और मैंने इन शब्दों का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करना शुरू किया क्योंकि मुझे लगा कि यह ज़्यादा प्रभावी ढंग से संवाद करने का बेहतर तरीका है। यह एक सड़क पर बोली जाने वाली भाषा है, यहां हमारे आस-पास के लोग इसी तरह बोलते हैं।'' उन्होंने यहां एक सत्र में चर्चा के दौरान कहा, ‘‘मुझे बहुत खुशी होती है जब मेरे द्वारा इस्तेमाल किया गया शब्द किसी बातचीत में आता है। हिंग्लिश अब मुख्यधारा में आ गई है। हमारे ज़्यादातर बड़े प्रकाशन और अखबार हेडलाइन में हिंग्लिश का इस्तेमाल करते हैं, जो पहले अकल्पनीय था। '' हिंग्लिश हिंदी और अंग्रेजी से बनी एक मिश्रित भाषा है।लेखिका (76) ने याद किया कि कैसे उनकी पुस्तकों और स्तंभों में हिंग्लिश के प्रयोग को लेकर उनकी आलोचना की गई थी और कैसे आज भी भारत में कुछ लोग ब्रिटेन की महारानी की ''पुरानी और पुरातन'' अंग्रेजी को छोड़ने से इनकार करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ महारानी की अंग्रेजी अभिव्यक्ति का इतना पुराना, अप्रचलित और पुरातन तरीका है कि अब अंग्रेज भी उसे नहीं लिखेंगे। लेकिन भारत में ब्रिटेन से प्रभावित कुछ लोग इस तरह से लिखना जारी रखते हैं और वे अपनी पूरी औपनिवेशिक मानसिकता को छोड़ने से इनकार करते हैं।'' काल्पनिक और गैर-काल्पनिक समेत 20 से अधिक पुस्तकों की लेखिका ने अपने गृह नगर मुंबई की भी प्रशंसा की, जो जाति, प्रभाव या वंश के किसी भी बोझ के बिना, व्यक्तियों को उनके वास्तविक रूप में स्वीकार करता है। अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए उन्होंने मुंबई की तुलना दिल्ली और कोलकाता जैसे अन्य प्रमुख मेट्रो शहरों से की, जिनके बारे में उन्होंने कहा कि ये शहर क्रमशः सत्ता और वंशवाद से ग्रस्त हैं। शोभा डे ने कहा, ‘‘दक्षिण भारत के लोग, जो जाति से ग्रस्त हैं। मुंबई में कोई भी इसकी परवाह नहीं करता। यह बहुत जातिविहीन है... मुंबई में हर किसी को मौका मिलता है। आप जो प्रतिनिधित्व करते हैं, एक व्यक्ति के रूप में आप जिसके लिए खड़े होते हैं, उसका सम्मान किया जाएगा। इसलिए मुंबई इस मामले में बहुत बढ़िया है, यह बिल्कुल समान है।
- नयी दिल्ली. ग्रामीण क्षेत्रों में 25 साल की उम्र के आधे युवाओं को रोजगार मिला है जबकि इस आयु वर्ग की सिर्फ एक-चौथाई महिलाएं ही कामकाजी हैं। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह आकलन पेश किया गया। देश के विभिन्न इलाकों के 5,169 ग्रामीण युवाओं के बीच कराए गए सर्वेक्षण के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट कहती है कि 70-85 प्रतिशत युवा अपने मौजूदा काम से खुश नहीं हैं और वे अपनी नौकरी बदलना चाहते हैं। ग्लोबल डेवलपमेंट इनक्यूबेटर (जीडीआई), ग्लोबल ऑपर्च्युनिटी यूथ नेटवर्क (जीओवाईएन), डेवलपमेंट इंटेलिजेंस यूनिट (डीआईयू) और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन (टीआरआई) ने ‘ग्रामीण युवा रोजगार की स्थिति 2024' रिपोर्ट जारी की है। सर्वेक्षण के नतीजे बताते हैं कि 18-25 वर्ष की आयु के आधे से अधिक युवा किसी-न-किसी रोजगार में लगे हुए हैं लेकिन इस आयु वर्ग की केवल एक चौथाई महिलाएं ही कार्यरत हैं। वहीं, 26-35 वर्ष की आयु के लोगों में लगभग 85 प्रतिशत पुरुष कार्यरत हैं, और लगभग 10 प्रतिशत पहले काम करने के बाद वर्तमान में बेरोजगार हैं। इसके विपरीत, इस आयु वर्ग की 40 प्रतिशत महिलाएं कार्यरत हैं जबकि एक चौथाई कार्यबल से बाहर हो चुकी हैं, और एक तिहाई कभी भी कार्यरत नहीं रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल काम कर रहे 70 से 85 प्रतिशत युवाओं ने नए अवसरों की तलाश में अपनी नौकरी बदलने की इच्छा जताई। करियर बदलने का लक्ष्य रखने वालों में दोनों आयु समूहों और महिला-पुरुष दोनों वर्गों के अधिकतर लोगों ने छोटे विनिर्माण, खुदरा या व्यापारिक उद्यम शुरू करने में रुचि दिखाई। हालांकि, युवा महिलाएं सरकारी भूमिकाओं में वेतनभोगी पदों को हासिल करने के लिए प्राथमिकता के साथ आगे रहीं। वेतनभोगी पदों की तलाश करने वाली महिलाओं ने शिक्षक बनने, अकाउंटेंट और फ्रंट डेस्क पर ग्राहकों से संपर्क वाली नौकरियों को प्राथमिकता दी।
- मथुरा (उप्र). मथुरा जिले के सुरीर थाना कोतवाली इलाके में सोमवार को गोपेश्वर महादेव मंदिर में जल चढ़ाकर वापस लौट रहे तीन कांवड़ियों की सड़क हादसे में मौत हो गयी। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार हादसे से गुस्साए ग्रामीण भारी संख्या में मौके पर जुट गए और हंगामा करने लगे। जानकारी पाकर वरिष्ठ अधिकारियों ने पुलिस बल भेजकर उन्हें जैसे-तैसे काबू में किया और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) त्रिगुण बिसेन ने बताया कि नौहझील थाना क्षेत्र के रामनगर निवासी मानव (19), वेदप्रकाश (28) और नरेश (22) वृंदावन के गोपेश्वर महादेव मंदिर में जल चढ़ाने के बाद बाइक से अपने गांव लौट रहे थे। बिसेन के अनुसार सुरीर कोतवाली क्षेत्र के कस्बे के समीप पहुंचने पर उनकी बाइक आगे चल रही ट्रैक्टर-ट्रॉली में जा घुसी, जिससे तीनों की मौके पर ही मौत हो गयी। उन्होंने बताया कि इस हादसे के बाद आसपास के ग्रामीण मौके पर जमा होने लगे। वे वहां हंगामा कर जाम लगाने का प्रयास कर रहे थे, तभी मौके पर कई थानों का पुलिस बल भेज दिया गया। बिसेन ने बताया कि पुलिस बल ने स्थिति को काबू कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।वहीं आगरा में ताजगंज के बरौली अहीर क्षेत्र में इनर रिंग रोड पर दो कावड़ियों को एक तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी जिससे दोनों जख्मी हो गए। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि दोनों को इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।उन्होंने बताया कि कांवड़ खंडित होने पर गुस्साए कांवड़ियों ने कार में तोडफ़ोड़ की, जिससे कार सवार दो युवक भी घायल हो गए। इस संबंध में थाना ताजगंज प्रभारी जसवीर सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामले को शांत कराया। उन्होंने बताया कि एक कांवड़िये की हालत ठीक है जबकि दूसरे कावड़िये की हालत नाजुक है।
- नयी दिल्ली/कोलकाता। भारत और बांग्लादेश के बीच सभी रेल सेवाएं अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई हैं। रेलवे अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। बांग्लादेश में उथल-पुथल के बीच यह निर्णय लिया गया है।रेल मंत्रालय के अनुसार, मैत्री एक्सप्रेस, बंधन एक्सप्रेस और मिताली एक्सप्रेस ने इस साल जुलाई के मध्य में आखिरी फेरे लगाए थे और बांग्लादेश में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के कारण तब से उन्हें रद्द कर दिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि मैत्री एक्सप्रेस और बंधन एक्सप्रेस दोनों को शुरू में 19 जुलाई, 2024 से छह अगस्त, 2024 तक के लिए रद्द किया गया था। हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि बांग्लादेश में मौजूदा स्थिति के कारण रद्दीकरण को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया गया है। उन्होंने कहा कि मिताली एक्सप्रेस की सेवा भी अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई है। उन्होंने बताया कि यात्री ट्रेन सेवाओं के अलावा सभी माल ढुलाई सेवाएं भी स्थगित कर दी गई हैं। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पद से इस्तीफा दे दिया है और अब अंतरिम सरकार कार्यभार संभालेगी। कटिहार के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) ने बताया, ‘‘न्यू जलपाईगुड़ी-ढाका के बीच चलने वाली मिताली एक्सप्रेस 17 जुलाई 2024 को ढाका गई थी, लेकिन उसके बाद वापस नहीं लौटी।'' उन्होंने कहा, ‘‘ट्रेन में भारतीय रेलवे के स्वामित्व वाले 10 डिब्बे हैं, लेकिन चूंकि इन डिब्बों का इस्तेमाल केवल उसी विशेष ट्रेन में किया गया था, इसलिए हमें किसी भी तरह की असुविधा नहीं हुई। ट्रेन का इंजन सीमा पर बदला जाता था, इसलिए जब यह बांग्लादेश में प्रवेश करती है, तो वे हमारे इंजन की जगह अपना इंजन लगा देते हैं।'' मैत्री एक्सप्रेस ढाका और कोलकाता के बीच चलती है, जबकि बंधन एक्सप्रेस खुलना और कोलकाता के बीच चलती है।
- निजामाबाद । तेलंगाना के निजामाबाद के कोठापल्ली गांव के एक स्कूल ने छात्रों को मिड-डे मील में मिर्च पाउडर मिला हुआ चावल परोसकर विवाद खड़ा कर दिया है.। विपक्षी भारत राष्ट्र समिति (BRS) के नेताओं ने घटिया भोजन उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार की आलोचना की है और पूरे राज्य के स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता की समीक्षा करने का आह्वान किया है।. तेलंगाना के पूर्व मंत्री केटी रामा राव ने कांग्रेस सरकार की निंदा की और बेस्वाद दाल के कारण ऐसा भोजन परोसने की आवश्यकता पर सवाल उठाया।. बता दें कि शिक्षकों में से एक ने जांच अधिकारियों को बताया कि कई छात्रों ने चावल के साथ परोसी गई दाल को बेस्वाद पाकर भोजन फेंक दिया था.। उन्होंने इस बारे में अपने शिक्षकों और वहां मौजूद दो ग्रामीणों से शिकायत की.। बाद में, जब छात्र दोपहर का भोजन करने आए, तो उन्हें मध्याह्न भोजन एजेंसी द्वारा मिर्च पाउडर और तेल के साथ चावल परोसा गया.।
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नई दिल्ली। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कहा कि केंद्र सरकार कृषि के लिए 100 निर्यात क्लस्टर बनाने पर 18,000 करोड़ रुपये निवेश करेगी। उन्होंने कहा कि दलहन उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए सरकार ने 6,800 करोड़ रुपये निवेश से दलहन मिशन की योजना बनाई है।संसद में मंत्रालय के कामकाज पर हो रही चर्चा का जवाब देते हुए चौहान ने कहा कि जलवायु के अनुकूल कृषि व्यवस्था बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार तेजी से देश भर में 50,000 जलवायु अनुकूल गांव विकसित कर रही है। साथ ही बीज की 1,500 नई किस्में भी विकसित की जा रही हैं।उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी डिजिटल पहचान दी जाएगी, सरकार इस पर काम कर रही है। चौहान ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि वह किसानों को वोट बैंक के रूप में देख रही है।उन्होंने कहा, ‘कौन कहता है कि कृषि क्षेत्र में समस्या नहीं है, लेकिन इसका समाधान भी है। कृषि मंत्रालय जटिल मसलों का समाधान निकालने के लिए किसानों व कृषक संगठनों सहित हर किसी से बात करेगी।’इसके जवाब में विपक्षी दल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चौहान झूठ बोल रहे हैं और राज्य सभा को गुमराह कर रहे हैं। कांग्रेस ने कहा कि चौहान के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है।
कांग्रेस ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान झूठ बोलते रंगे हाथ पकड़े गए हैं। मोदी सरकार ने 6 फरवरी, 2015 को उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दाखिल करके कहा था कि लागत में 50 फीसदी मुनाफा जोड़कर भारत के किसानों को नहीं दिया जा सकता क्योंकि इससे बाजार खराब हो जाएगा।’कांग्रेस ने कहा कि कृषि मंत्री चौहान ने सदन में कहा है कि सरकार जरूरत पड़ने पर किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीदती है, इसका मतलब यह हुआ कि सरकार ने स्वीकार किया है कि अगर उसे जरूरी नहीं लगता है तो वह न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों की फसल नहीं खरीदेगी ।कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि देश और सदन को गुमराह करने को लेकर चौहान के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला भी उठाया जाएगा।आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि चौहान ने दावा किया है कि खाद की कीमत 10 रुपये कम की गई है, जो पूरी तरह झूठ है। - नई दिल्ली। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद-370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त करने से हाशिए पर पड़े वर्गों के लिए सशक्तिकरण का एक नया युग शुरू हुआ है और क्षेत्र में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र मजबूत हुआ है।शाह ने अनुच्छेद-370 के अधिकतर प्रावधान निरस्त किये जाने के पांच साल पूरे होने पर कहा कि क्षेत्र के युवाओं ने सामाजिक-आर्थिक विकास और सांस्कृतिक पुनरुत्थान को गति दी है, जिससे शांति और समग्र विकास को बढ़ावा देने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के प्रयास सफल हुए हैं।केन्द्रीय गृहमंत्री शाह ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में अनुच्छेद-370 और अनुच्छेद-35ए को ऐतिहासिक रूप से हटाए जाने के पांच साल पूरे हो गए हैं। इस परिवर्तनकारी निर्णय ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख में हाशिए पर पड़े वर्गों के सशक्तिकरण के एक नए युग की शुरुआत की है और जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत किया है।’’अमित शाह ने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया और क्षेत्र की आकांक्षाओं और परिवर्तनकारी प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए समर्पण की पुष्टि की।गृहमंत्री अमित शाह ने ही अनुच्छेद-370 और अनुच्छेद-35 ए को निरस्त करने के लिए पांच अगस्त, 2019 को संसद में विधेयक पेश किया था। केंद्र सरकार ने पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद-370 के अधिकतर प्रावधान निरस्त कर दिये थे, जो जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देता था। सरकार ने तत्कालीन जम्मू कश्मीर राज्य को ‘‘जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम’’ के जरिये दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया था।
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नई दिल्ली। केन्द्रीय संचार एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और केन्द्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने 33वें पेरिस ओलंपिक के उपलक्ष्य में आज स्मारक डाक टिकटों का एक सेट जारी किया। यह कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित आकाशवाणी के रंग भवन में आयोजित किया गया था, जिसमें प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों और प्रसिद्ध एथलीटों ने भाग लिया, जो ओलंपिक खेलों के प्रति भारत के समर्थन का एक महत्वपूर्ण क्षण था।
इस कार्यक्रम में प्रतिष्ठित खेल हस्तियों की उपस्थिति ने और चार चांद लगा दिए, जिनमें हाल ही में कांस्य पदक जीतने वाले सरबजोत सिंह भी शामिल थे, जिन्होंने पेरिस 2024 ओलंपिक में 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। अन्य उल्लेखनीय उपस्थिति लोगों में पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा और स्टीपलचेज एथलीट सुधा सिंह शामिल थीं।स्मारक डाक टिकट ओलंपिक की भावना दर्शाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो खेलों के माध्यम से राष्ट्रों के बीच एकता का प्रतीक है और भारत की समृद्ध खेल विरासत को दर्शाता है। यह विशेष टिकट अब ई-पोस्ट ऑफिस (https://www.epostoffice.gov.in/) पर ऑनलाइन खरीदने के लिए उपलब्ध है। संग्रहकर्ताओं और उत्साही लोगों से अनुरोध है कि वे इसकी एक प्रति प्राप्त करें और इतिहास का एक हिस्सा अपने पास रखें।श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और डॉ. मनसुख मांडविया ने आधिकारिक तौर पर स्मारक टिकट का अनावरण किया, जिसमें भारत की ओलंपिक विरासत और वैश्विक एकता को बढ़ावा देने में खेलों की भूमिका पर गर्व व्यक्त किया। मंत्रियों और एथलीटों ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मैत्री को बढ़ावा देने में खेलों के महत्व पर विचार साझा किए, और ओलंपिक को प्रतिभा एवं समर्पण दिखाने के लिए एक मंच के रूप में महत्व दिया।श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कहा, "ओलंपिक 2024 को सम्मानित करने वाला नया डाक टिकट हमारे उन खेल नायकों का कीर्तिगान है जिन्होंने वैश्विक मंच पर भारत को गौरवान्वित किया है। यह सम्मान युवा प्रतिभाओं को प्रेरित करेगा और हमारे देश के खेल इकोसिस्टम को मजबूत करेगा। मैं अपने डाक विभाग को बधाई देता हूं, जिसने कई पहलों के माध्यम से हमेशा खेल संस्कृति को बढ़ावा दिया है और इस डाक टिकट जारी करने के साथ ही डाक टिकटों के माध्यम से भारत की उपलब्धियों का उत्सव मनाने की अपनी विरासत को और मजबूत किया है। मैं पेरिस ओलंपिक 2024 में भारतीय दल को भी अपनी शुभकामनाएं देता हूं।"उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा, "खेल केवल प्रतिस्पर्धा नहीं है; यह जीवन जीने का एक तरीका है। डाक टिकटों का जारी होना खेलों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो राष्ट्रीय गौरव और एथलीटों के लिए प्रोत्साहन का प्रतीक है।" डॉ. मांडविया ने कहा कि खेल एक स्वस्थ राष्ट्र को बढ़ावा देते हैं, जो धन और समृद्धि के लिए आवश्यक है, और लोगों को एक साथ लाते हैं, जिससे व्यक्तिगत फिटनेस और राष्ट्रीय कल्याण दोनों में वृद्धि होती है। यह पहल खेलों को बढ़ावा देने और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपने एथलीटों को सम्मानित करने की भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।










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