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- कोल्लम (केरल),। वायनाड भूस्खलन हादसे के बाद व्यवसायी, मशहूर हस्तियां और संस्थाएं मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में लाखों-करोड़ों रुपये दान देने में जुटी हैं.। इसी के बीच पीड़ितों की मदद के लिए एक चाय की दुकान चलाने वाली बुजुर्ग महिला भी आगे आई है.। बुजुर्ग महिला ने अपनी सारी कमाई और पेंशन उन लोगों के लिए दान कर दी हैं जो इस हादसे में अपना सब कुछ खो चुके हैं । . वायनाड भूस्खलन में 190 लोगों की मौत हो चुकी है। . कोल्लम जिले के पल्लीथोट्टम निवासी सुबैदा अपना और अपने पति का पेट पालने के लिए एक छोटी सी चाय की दुकान चलाती हैं। . उन्होंने मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष (सीएमडीआरएफ) को 10 हजार रुपए दान किए हैं. । उन्होंने अपनी चाय की दुकान से होने वाली मामूली आय और दंपति को मिलने वाली कल्याणकारी पेंशन से धनराशि दान की है।उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कुछ दिन पहले ब्याज चुकाने के लिए बैंक से राशि निकाली थी., लेकिन फिर हमने टीवी पर देखा कि वायनाड भूस्खलन में अपना सब कुछ खो चुके लोगों की मदद के लिए सभी से योगदान मांगा जा रहा है.। ’’ उन्होंने एक टीवी चैनल पर कहा, ‘‘मेरे पति ने तुरंत मुझसे कहा कि मैं जाकर जिलाधिकारी को रुपये दे दूं.। उन्होंने कहा कि इस समय लोगों की मदद करना अधिक जरूरी है। , ब्याज तो बाद में भी चुकाया जा सकता है। . इसलिए मैंने जिलाधिकारी कार्यालय जाकर रुपये जमा करा दिए। मैं वायनाड जाकर मदद नहीं कर सकती.। ’’ सुबैदा ने आगे कहा कि अगर उसने रुपये जमा किए और उसके साथ कुछ हो जाता है, तो न ही ब्याज का भुगतान किया जा सकेगा और न ही उस राशि से किसी की मदद की जा सकेगी। उन्होंने कहा, ‘‘यह तरीका बेहतर है।उन्होंने बताया कि इससे पहले उन्होंने बाढ़ राहत प्रयासों के लिए धन दान करने को अपनी चार बकरियां बेच दी थीं. उन्होंने कहा कि हालांकि, कई लोगों ने उनके निस्वार्थ कार्य की आलोचना की है.। उन्होंने कहा, ‘‘जब से लोगों ने मेरे काम के बारे में सुना है। कई लोग यहां आए और कहने लगे कि तुमने अपनी कमाई बदमाशों को क्यों दी? उन्होंने कहा कि मैं यहां लोगों को रुपये दे सकती थी। क्या यहां लोगों को रुपये देना ज्यादा महत्वपूर्ण है या वायनाड में लोगों की मदद करना?’’ file photo
- रोहतक। हरियाणा के रोहतक में मोबाइल हॉटस्पॉट शेयर करने से मना करने पर आरोपी पति ने अपनी पत्नी की धारदार हथियार से हत्या कर दी.। इस घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है.। पुलिस ने आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है और कोर्ट में पेश करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया.। यह मामला 30 जुलाई का है.।बहुअकबरपुर थाने के एसआई जयभगवान ने बताया कि रोहतक के मदीना गांव में पति द्वारा पत्नी की हत्या का मामला सामने आया है.। जांच में पाया गया कि आरोपी पति ने गुस्से में आकर इस घटना को अंजाम दिया।.आरोपी अजय कुमार 30 जुलाई को घर पर मोबाइल चला रहा था।. उसके मोबाइल का डेटा खत्म होने के बाद उसने अपनी पत्नी रेखा से मोबाइल हॉटस्पॉट ऑन करने को कहा.। उस समय रेखा पशुओं का गोबर उठा रही थी और उसने कहा कि वह बाद में हॉटस्पॉट ऑन करेगी।. इस पर आरोपी अजय गुस्से में आ गया और उसने धारदार हथियार से रेखा पर हमला कर दिया.।हमले में रेखा की मौके पर ही मौत हो गई।. घटना के बाद आरोपी पति फरार हो गया, लेकिन रेखा के परिजनों की सूचना पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.। पुलिस ने आरोपी पति को मदीना गांव से ही गिरफ्तार किया.।
- हापुड़ (उप्र),। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हापुड़ में ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से दो कांवड़ियों की मौत हो गई और 10 अन्य घायल हो गए। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। ये कांवडिए गाजियाबाद से थे और गंगाजल लेने के लिए हापुड़ के ब्रजघाट जा रहे थे।.पुलिस ने बताया कि बृहस्पतिवार देर रात ट्रैक्टर-ट्रॉली के चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया और यह बाबू गढ़ इलाके में राजमार्ग पर पलट गई। दुर्घटना के समय ट्रॉली में 20 से अधिक कांवड़िये सवार थे। उन्होंने बताया कि दुर्घटना में घायल हुए लोगों को पुलिस वाहन से अस्पताल ले जाया गया.। उन्होंने बताया कि गंभीर रूप से घायल कुछ कांवड़ियों को इलाज के ?लिए मेरठ रेफर कर दिया गया है।बाबू गढ़ थाने के प्रभारी विजय गुप्ता ने बतायाा, ‘‘पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया। कुछ की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें उचित उपचार के लिए मेरठ रेफर कर दिया गया.।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ दो युवकों सौरभ और चिराग की इलाज के दौरान मौत हो गई.’।’ शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है तथा परिजनों को सूचित कर दिया गया है।
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नयी दिल्ली. जुलाई में मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद देश में बिजली की खपत पर असर पड़ा है और यह सालाना आधार पर सिर्फ 3.5 प्रतिशत बढ़कर 145.40 अरब यूनिट रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई, 2023 में देश की बिजली खपत 140.41 अरब यूनिट रही थी।
एक दिन में बिजली की सर्वाधिक मांग पिछले महीने बढ़कर 226.63 गीगावाट हो गई जबकि एक साल पहले समान महीने में यह 208.95 गीगावाट थी। एक दिन में बिजली की सर्वाधिक मांग ने इस साल मई में रिकॉर्ड बनाया था। भीषण गर्मी के दौर में एक दिन की सर्वाधिक बिजली मांग 250.20 गीगावाट रही थी। पिछला रिकॉर्ड सितंबर, 2023 में 243.27 गीगावाट का था। इस साल की शुरुआत में बिजली मंत्रालय ने मई में दिन के समय 235 गीगावाट और शाम के समय 225 गीगावाट की बिजली मांग रहने का अनुमान जताया था। वहीं जून, 2024 के लिए यह अनुमान दिन के समय 240 गीगावाट और शाम के समय 235 गीगावाट का था। इसके साथ ही मंत्रालय ने कहा था कि इस साल गर्मियों में अधिकतम बिजली की मांग 260 गीगावाट तक पहुंच सकती है। हालांकि, देश में मानसून की शुरुआत के साथ, उपभोक्ताओं को चिलचिलाती गर्मी और उमस से राहत मिली। इससे एयर कंडीशनर और बड़े कूलर जैसे उपकरणों के इस्तेमाल की कम जरूरत पड़ी। इससे देश में बिजली की खपत में कमी आई हालांकि, विशेषज्ञों का अनुमान है कि मानसून के समय अधिक नमी होने से एयर कंडीशनर का इस्तेमाल जरूरी हो जाता है लिहाजा आने वाले दिनों में बिजली की मांग और खपत स्थिर रहेगी। -
जयपुर. राजस्थान की राजधानी जयपुर के विश्वकर्मा थाना क्षेत्र में बृहस्पतिवार सुबह एक मकान के बेसमेंट में बारिश का पानी घुसने से एक नाबालिग समेत तीन लोगों की डूबने से मौत हो गयी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस घटना पर शोक व्यक्त करते हुए अधिकारियों को मृतकों के परिवार को आर्थिक सहायता के निर्देश दिये। अधिकारियों ने बताया कि कई घंटों तक चले बचाव अभियान के बाद शव बरामद किए गए। पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) अमित कुमार ने बताया कि घर के बेसमेंट में पानी घुसने के बाद परिवार के सदस्यों ने अपना सामान निकालना शुरू कर दिया। इस दौरान दो परिवारों के तीन लोग बेसमेंट में पानी भर जाने के कारण फंस गए। अधिकारी ने बताया कि बचाव अभियान शुरू किया गया और बारिश के पानी को बाहर निकालने के लिए मड पंप लगाए गए। उन्होंने बताया कि राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की एक टीम द्वारा कमल शाह (23), पूजा सैनी (19) और उसकी रिश्तेदार पूर्वी सैनी (6) के शव बरामद करने के बाद अभियान समाप्त हो गया। ये सभी बिहार के रहने वाले थे। पुलिस ने बताया कि घर के बेसमेंट तक जाने वाला रास्ता संकरा और गहरा था।
इस घटना पर शोक व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अधिकारियों को प्रत्येक मृतक के परिवार को पांच-पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं। राज्य आपदा राहत कोष से चार लाख रुपए तथा मुख्यमंत्री राहत कोष से एक लाख रुपए देने की स्वीकृति दी गई है। दूसरी ओर, क्षेत्र में ऐसे ही घरों के निवासियों को सलाह दी गई है कि वे बारिश के दौरान अपने बेसमेंट में न रहें। पुलिस ने बताया कि मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए कांवटिया सरकारी अस्पताल भेज दिया गया है। बुधवार रात से शुरू हुई भारी बारिश के कारण जयपुर शहर के अधिकांश इलाकों में जलभराव हो गया, जो सुबह तक जारी रहा। जयपुर मौसम केन्द्र के अनुसार, जयपुर, करौली, सवाईमाधोपुर, अलवर, चूरू, भरतपुर, टोंक, सीकर, हनुमानगढ़, धौलपुर, नागौर और झुंझुनू में बृहस्पतिवार सुबह 8.30 बजे तक पिछले 24 घंटों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई। मौसम विज्ञान केन्द्र के प्रवक्ता ने बताया कि इस अवधि में जयपुर में सबसे अधिक 173 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। राजधानी के कई हिस्सों में सड़कों और रिहायशी इलाकों में बारिश का पानी जमा हो गया, जिससे आवागमन में काफी दिक्कतें हुईं। जयपुर हवाईअड्डा टर्मिनल भवन के बाहर भी बारिश का पानी जमा हो गया। जयपुर के जिलाधिकारी प्रकाश राज पुरोहित ने विश्वकर्मा क्षेत्र, सीकर रोड और जयपुर हवाईअड्डा जैसे बारिश प्रभावित इलाकों का दौरा किया और अधिकारियों को स्थिति के अनुसार आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए। जयपुर में बुधवार रात से लगातार हो रही बारिश के कारण कई स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। -
नयी दिल्ली. भारत में अगस्त और सितंबर में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है, जबकि अगस्त के अंत तक अल-नीना की अनुकूल स्थितियां देखने को मिल सकती हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। भारत में कृषि के लिए मानसून बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि कुल खेती योग्य भूमि का 52 प्रतिशत हिस्सा बारिश पर निर्भर है। आईएमडी ने बताया कि भारत में अगस्त और सितंबर के दौरान 422.8 मिमी की दीर्घावधि औसत का 106 प्रतिशत वर्षा होगी। देश में एक जून से अब तक 453.8 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य बारिश 445.8 मिमी होती है। यह सामान्य बारिश से दो प्रतिशत अधिक है क्योंकि जून में सूखा रहने के बाद जुलाई में सामान्य से अधिक बारिश हुई। आईएमडी प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने ऑनलाइन आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान है। पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों, पूर्वी भारत से सटे हिस्से, लद्दाख, सौराष्ट्र और कच्छ तथा मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। आईएमडी प्रमुख ने अगस्त-सितंबर में पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में कम बारिश होने का अनुमान जताया है। उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।
महापात्र ने कहा, "गंगा के मैदानी इलाकों, मध्य भारत और भारत के दक्षिण-पूर्वी तट के कुछ इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से कम रहने का अनुमान है। भारत में जुलाई में सामान्य से नौ प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि मध्य क्षेत्र में 33 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। आईएमडी प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि मध्य भारत के हिस्सों में अच्छी बारिश हुई, जिससे कृषि को लाभ हो रहा है। मध्य भारत कृषि के लिए मानसून की वर्षा पर बहुत अधिक निर्भर है।
आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल में गंगा के मैदानी इलाकों और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में कम बारिश हुई है। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में 35 प्रतिशत से 45 प्रतिशत तक कम वर्षा हुई है। -
नयी दिल्ली.मॉनसून का मौसम करीब आधा बीत चुका है और भारत के मौसम संबंधी 36 उपखंडों में से 25 प्रतिशत में कम बारिश दर्ज की गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में देश में सामान्य यानी 280.5 मिमी से नौ प्रतिशत अधिक बारिश हुई जो 306.6 मिमी है। एक जून से 445.8 मिमी की सामान्य बारिश के मुकाबले 453.8 मिमी वर्षा हुई, जो दो प्रतिशत अधिक है। जुलाई में बारिश असमान रही। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में बारिश में काफी कमी दर्ज की गई। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में बारिश में कमी 35 प्रतिशत से 45 प्रतिशत तक रही। आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, 13 उपखंडों में औसत से अधिक बारिश, 14 में सामान्य और नौ में कम बारिश दर्ज की गई। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में वर्षा की कमी 30 जून को 13.3 प्रतिशत से बढ़कर 31 जुलाई को 19 प्रतिशत हो गई, तथा इस क्षेत्र में मानसून सीजन में अब तक 752.5 मिमी की सामान्य वर्षा के मुकाबले 610.2 मिमी वर्षा हुई। उत्तर-पश्चिम भारत में जुलाई में 182.4 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य तौर पर 209.7 मिमी बारिश होती है। इसमें 13 प्रतिशत की कमी आई। इस क्षेत्र में इस मानसून सीजन में अब तक 235 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य तौर पर 287.8 मिमी बारिश होती है, यानी 18 प्रतिशत की कमी आई है। आंकड़ों के अनुसार, मध्य भारत में जुलाई में सामान्य से 33 प्रतिशत अधिक यानी 427.2 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य तौर पर 321.3 मिमी बारिश होती है। इस क्षेत्र में इस मानसून सीजन में अब तक 574.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य तौर पर 491.6 मिमी बारिश होती है। दक्षिणी प्रायद्वीप में जुलाई में 36 प्रतिशत अधिक यानी 279.2 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य तौर पर 204.5 मिमी बारिश होती है। कुल मिलाकर, इस मानसून सीजन में अब तक 463.1 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य तौर पर 365.5 मिमी बारिश होती है। इस प्रकार 27 प्रतिशत अधिक बारिश हुई।
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वायनाड. केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने बृहस्पतिवार को कहा कि वायनाड में भूस्खलन से प्रभावित मुंडक्कई क्षेत्र में बचाव अभियान अभी कुछ और दिन तक जारी रहेगा। विजयन ने बचाव प्रयासों के समन्वय के लिए चार मंत्रियों वाली एक मंत्रिमंडीय उपसमिति भी गठित की। चारों मंत्री बचाव अभियान में समन्वय के लिए वायनाड में ही ठहरेंगे।
वायनाड में मूसलाधार बारिश के कारण भूस्खलन हुआ, जिसके परिणास्वरूप अब तक 173 लोगों की मौत हो चुकी है।
विजयन ने सर्वदलीय बैठक के बाद बचावकर्मियों, खासकर भारतीय सेना के प्रयासों की प्रशंसा की और संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने (बचावकर्मियों ने) सराहनीय काम किया है। मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं को बताया कि सेना के जवानों के मुताबिक मलबे से जिन लोगों को बचाया जा सकता था, उन्हें बचा लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा, “बहुत सारे लोग लापता हैं। हमने क्षेत्र के कई हिस्सों से बहुत सारे शव बरामद किए हैं। बचावकर्मियों ने चालियार नदी से कई शव बरामद किए हैं। कई शवों के अंग भी बरामद किए गए हैं।” उन्होंने कहा कि बचाव कार्य में अभी कुछ और दिन लगेंगे।
विजयन ने कहा, ‘‘यह बचाव प्रयास ऐसा नहीं है, जो चंद दिन में पूरा हो जाएगा। अब भी 12 मंत्री वायनाड में डेरा डाले हुए हैं। सर्वदलीय बैठक में अब फैसला लिया गया है कि बचाव अभियान में समन्वय के लिए चार मंत्री यहीं रहेंगे।” मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व मंत्री के. राजन, वन मंत्री ए के ससींद्रन, पीडब्ल्यूडी एवं पर्यटन मंत्री पीए मोहम्मद रियास और एससी/एसटी विभाग के मंत्री ओआर केलू वायनाड में रहेंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कई लोग अब भी लापता हैं और बड़ी मात्रा में मिट्टी जमा होने के कारण खोज अभियान शुरू करना शुरू में मुश्किल था। विजयन ने कहा, “शुरू में, बचाव अभियान के लिए बड़ी मशीनें ले जाना संभव नहीं था। लेकिन अब जब सेना बेली ब्रिज का निर्माण पूरा कर लेगी तो अभियान आसान हो जाएगा।” मुख्यमंत्री ने कहा कि संवाददाताओं सहित वे लोग जो परिवारों से मिलना चाहते हैं, वे शिविरों के बाहर ही रुकें ताकि दूसरों की निजता प्रभावित न हो। विजयन जल्द ही आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने वाले हैं। -
शिमला. हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में रामपुर उपमंडल के झाखारी इलाके में बृहस्पतिवार सुबह बादल फटने के बाद 30 से अधिक लोग लापता हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि सड़कें बह गयी हैं और इलाके में एक जल विद्युत परियोजना भी क्षतिग्रस्त हो गयी है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, पुलिस और होम गार्ड ने बचाव अभियान शुरू कर दिया है। कश्यप ने बताया कि लापता लोगों की तलाश के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
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लातेहार. झारखंड के लातेहार जिले में बृहस्पतिवार तड़के पांच कांवड़ियों की करंट लगने से मौत हो गई जबकि तीन अन्य झुलस गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार कांवड़ियों का वाहन तेज वोल्टेज वाले तार के संपर्क में आया जिससे यह हादसा हुआ।
उसने बताया कि यह हादसा बालूमथ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तम तम टोला में तड़के करीब तीन बजे हुआ। तीर्थयात्री देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर से लौट रहे थे तभी उनका वाहन बिजली के खंभे से टकरा गया। बालूमथ के उप-मंडल पुलिस अधिकारी आशुतोष कुमार सत्यम ने बताया,‘‘ तेज वोल्टेज वाला तार उनके वाहन पर गिर गया, जिससे पांच लोगों की मौत हो गई जबकि तीन अन्य झुलस गए।'' पुलिस ने बताया कि घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। -
एससी, एसटी और ओबीसी को सर्वाधिक लाभ हुआ
नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार किए हैं जिनका सबसे ज्यादा फायदा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्गों और महिलाओं को हुआ है। पार्टी सांसद तेजस्वी सूर्या ने वर्ष 2024-25 के लिए शिक्षा मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर लोकसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए यह आरोप भी लगाया कि अनुसूचित जातियों (एसी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) की सबसे बड़ी विरोधी कांग्रेस है जिसने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं होने दिया। उन्होंने कहा, ‘‘बहुआयामी सुधारो के कारण शिक्षा में व्यापक सुधार हुआ है...आजादी के बाद अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को छोड़कर हर सरकार में शिक्षा व्यवस्था को नजरअंदाज किया गया था, लेकिन मोदी सरकार में इसे प्रमुखता दी गई।'' सूर्या के अनुसार, पहले की सरकारों के समय ऐसे पाठ्यक्रम थे जिनके कारण मानव संसाधन की गुणवत्ता कम रही। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में शिक्षा के बजट में 78 प्रतिशत का इजाफा किया गया है।
भाजपा सांसद ने कहा कि शिक्षा के बुनियादी ढांचे में बढ़ोतरी हुई है तथा 390 नए विश्वविद्यालयों का निर्माण किया गया है। उनके मुताबिक, उच्च शिक्षा में दाखिला बढ़ने का सबसे ज्यादा फायदा दलित, आदिवासी, ओबीसी तथा महिलाओं को हुआ है। उनका कहना था कि अगर मंडल आयोग की सिफारिशें लागू नहीं होती और मोदी सरकार का प्रयास नहीं होता तो उच्च शिक्षा में दलित, ओबीसी और महिलाओं के दाखिले में इतनी बढ़ोतरी नहीं होती। सूर्या ने दावा किया कि कांग्रेस से जुड़े एक नेता, जो देश के प्रधानमंत्री भी रहे, उन्होंने 1990 के दशक में मंडल आयोग की सिफारिशों का विरोध किया था। भाजपा सांसद ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने मातृभाषा में पढ़ाई कराने की व्यवस्था की है, जो पहले की सरकारों में नहीं हुआ था।
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मुंबई. ओलंपिक कांस्य पदक विजेता स्वप्निल कुसाले के माता पिता ने बृहस्पतिवार को कहा कि उन्हें यकीन था कि उनका बेटा तिरंगे और देश के लिये पदक जीतेगा । स्वप्निल के पिता ने कोल्हापूर में पत्रकारों से कहा ,‘‘ हमने उसे उसके खेल पर फोकस करने दिया और कल फोन भी नहीं किय । उन्होंने कहा ,‘‘ पिछले दस बारह साल से वह घर से बाहर ही है और अपनी निशानेबाजी पर फोकस कर रहा है । उसके पदक जीतने के बाद से हमें लगातार फोन आ रहे हैं ।'' स्वप्निल की मां ने कहा ,‘‘ वह सांगली में पब्लिक स्कूल में था जब निशानेबाजी में उसकी रूचि जगी । बाद में वह ट्रेनिंग के लिये नासिक चला गया ।
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नयी दिल्ली. लेफ्टिनेंट जनरल साधना सक्सेना नायर ने बृहस्पतिवार को चिकित्सा सेवा (सेना) के महानिदेशक का पदभार संभाला। वह इस पद पर नियुक्त होने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किए गए एक बयान के मुताबिक, लेफ्टिनेंट जनरल नायर ने पुणे स्थित सशस्त्र बल चिकित्सा महाविद्यालय से एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक रिकॉर्ड के साथ स्नातक किया और दिसंबर 1985 में सेना चिकित्सा कोर में नियुक्त हुईं। नायर ने बृहस्पतिवार को चिकित्सा सेवा (सेना) के महानिदेशक का पदभार ग्रहण किया।
बयान में कहा गया, ''लेफ्टिनेंट जनरल साधना सक्सेना नायर एयर मार्शल के पद से पदोन्नत होकर चिकित्सा सेवा (सेना) के महानिदेशक का पदभार संभालने वाली पहली महिला हैं।'' बयान में कहा गया कि उन्होंने पारिवारिक चिकित्सा में स्नातकोत्तर की डिग्री और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा स्वास्थ्य देखभाल प्रबंधन में डिप्लोमा प्राप्त किया है। इसी के साथ उन्होंने नयी दिल्ली में स्थित एम्स अस्पताल में चिकित्सा सूचना विज्ञान में दो साल का प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा किया है। इसमें बताया गया कि उन्हें इजराइली रक्षा बलों के साथ रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल एवं परमाणु युद्ध में तथा स्पीज में स्विस सशस्त्र बलों के साथ सैन्य चिकित्सा नैतिकता में प्रशिक्षण दिया गया है। लेफ्टिनेंट जनरल नायर भारतीय वायु सेना (आईएएफ) की पश्चिमी वायु कमान और प्रशिक्षण कमान की पहली महिला प्रधान चिकित्सा अधिकारी भी हैं। बयान में बताया गया कि लेफ्टिनेंट जनरल नायर को राष्ट्रीय शिक्षा नीति में चिकित्सा शिक्षा का मसौदा तैयार करने के लिए डॉ. कस्तूरीरंगन समिति के विशेषज्ञ सदस्य के रूप में नामित किया गया था। लेफ्टिनेंट जनरल नायर को उनकी सराहनीय सेवाओं के लिए राष्ट्रपति द्वारा एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पश्चिमी वायु कमान और चीफ ऑफ एयर स्टाफ कमेंडेशन के साथ-साथ विशिष्ट सेवा पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है। -
नयी दिल्ली. लोकसभा सचिवालय ने संसद की लॉबी से पानी के रिसाव के विपक्षी सदस्यों के दावे पर बृहस्पतिवार को कहा कि यह मामूली रिसाव था जो अत्यधिक बारिश के कारण भवन के गुंबद के शीशे से हुआ था। सचिवालय ने कहा कि संसद परिसर में कहीं भी जल जमाव नहीं हुआ था और बारिश के तत्काल बाद पानी की निकासी हो गई थी। सचिवालय ने एक बयान में कहा, ‘‘भवन की लॉबी के ऊपर गुंबद के शीशे को फिक्स करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला ‘एडहेसिव' थोड़ा हट गया, जिससे लॉबी में पानी का मामूली रिसाव हुआ था।'' समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने वीडियो साझा करते हुए इस मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधा है।
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वायनाड .केरल के वायनाड जिले में भूस्खलन की घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 173 हो गई है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। बचावकर्मी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी तलाश एवं बचाव अभियान जारी रखे हैं। वे मलबे में दबे हुए पीड़ितों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन चारों ओर मलबा होने के कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बचावकर्मी मलबे को हटाने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसे में मृतक संख्या बढ़ने की आशंका है।
जिला प्रशासन ने बृहस्पतिवार को बताया कि भूस्खलन की घटनाओं में अब तक 173 लोगों की मौत हो गई है जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। जिला प्रशासन ने बताया कि भूस्खलन में मरने वालों में 23 बच्चे और 70 महिलाएं शामिल हैं।
उसने बताया कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों से निकाले गए 221 लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और उनमें से 91 का अब भी इलाज जारी है। बुधवार शाम तक के आधिकारिक अनुमान के अनुसार, भूस्खलन प्रभावित वायनाड में अब भी 191 लोग लापता हैं, जबकि सूत्रों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। राज्य के राजस्व मंत्री के. राजन ने बताया कि अधिकारियों को अब भी लापता लोगों की सटीक संख्या का पता नहीं चल सका है। राजन बचाव प्रयासों का समन्वय करने के लिए आपदा प्रभावित क्षेत्र में मौजूद हैं।
उन्होंने संवाददाताओं को बताया, “पहले हमने लापता लोगों की पहचान के लिए मतदाता सूची का इस्तेमाल किया था, लेकिन चूंकि इसमें बच्चों का विवरण नहीं है, इसलिए अब हम राशन कार्ड और अन्य जानकारियों के माध्यम से पता लगाएंगे। हम राशन कार्ड के विवरण की जांच करके और आशा कार्यकर्ताओं तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से लापता लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं।” वायनाड जिले के आपदाग्रस्त मुंडक्कई में जारी तलाश अभियान के बीच बचावकर्मियों का कहना है कि भूस्खलन में उखड़े विशाल पेड़ों को हटाने के लिए भारी मशीनरी की जरूरत है। इन पेड़ों के नीचे कई घर दब गए हैं। एक बचावकर्मी ने कहा, “हम एक इमारत की छत पर खड़े हैं और नीचे से बदबू आ रही है, जिससे यह पता चलता है कि वहां शव दबे हुए हैं। इमारत पूरी तरह से कीचड़ और उखड़े हुए पेड़ों से ढकी हुई है।” उन्होंने कहा कि अभियान के लिए खुदाई करने वाली मशीनें उपलब्ध हैं लेकिन वे इस काम के लिए अपर्याप्त हैं। बचावकर्मी ने कहा, “विशाल पेड़ों को हटाने और ढह गई इमारतों में तलाश अभियान चलाने के लिए भारी मशीनरी की जरूरत है। तभी हम तलाश अभियान में प्रगति कर सकते हैं।” मंत्री ने बताया, “मलप्पुरम जिले के पोथुकल में चलियार नदी से शव बरामद किए गए हैं, जिससे पता चलता है कि घटना का प्रभाव व्यापक है।” मुंडक्कई के सूत्रों ने बताया कि चाय बागान के जो क्वार्टर बह गए हैं, वहां प्रवासी श्रमिक रह रहे थे। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हमें यह नहीं पता कि वे किसी सुरक्षित स्थान पर चले गए थे या भूस्खलन की चपेट में आ गए।” निवासियों ने बताया कि प्रवासी श्रमिकों के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है, क्योंकि चाय बागान प्रबंधक भी लापता है। राजन के अनुसार, वर्तमान में सेना, नौसेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), पुलिस, अग्निशमन और अन्य बलों सहित 1,600 से अधिक बचावकर्मी भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में तलाश एवं बचाव अभियान चला रहे हैं। राजन ने कहा, “इतनी ही संख्या में स्थानीय लोग और अन्य बचावकर्मी भी भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में मौजूद हैं और वे भी मदद कर रहे हैं। लापता लोगों को तलाश करने के लिए कुल 3,000 से अधिक लोग हर संभव कोशिशें कर रहे हैं।” वायनाड में चिकित्सक, नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मी लगातार 24 घंटे कार्य कर रहे हैं। उन पर विनाशकारी घटना में गंभीर रूप से घायल लोगों के इलाज और शवों के पोस्टमार्टम का भारी बोझ है। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा, “सुबह सात बजे तक कुल 256 पोस्टमॉर्टम किए गए हैं जिनमें शवों के हिस्से भी शामिल हैं। इस प्रकार ये पूरे 256 शव नहीं हैं बल्कि कुछ शवों के अंग भी इसमें शामिल हैं। हमने 154 शव जिला प्रशासन को सौंप दिए हैं।” उन्होंने बताया कि मलप्पुरम जिले के पोथुकल क्षेत्र से नदी में बहकर आए शवों के पोस्टमॉर्टम किए गए हैं। स्वास्थ्य कर्मियों के समक्ष उत्पन्न दुखद परिस्थितियों के बारे में बोलते हुए मंत्री ने बताया कि बुधवार रात को 100 से अधिक शवों का परीक्षण किया गया है। बचाव दल द्वारा शवों का पता लगाने के लिए कुत्तों का उपयोग किया जा रहा है। भूस्खलन प्रभावित वायनाड में इस विनाशकारी स्थिति के बीच इडुक्की में दिल को झकझोर कर देने वाला दृश्य सामाने आया, जहां एक महिला जरूरतमंद शिशुओं को अपना स्तनपान करा रही है। -
नयी दिल्ली. सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि रूसी सशस्त्र बलों में काम करने वाले आठ भारतीयों की मौत हो गई है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा को एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि उपलब्ध जानकारी से संकेत मिलता है कि 12 भारतीय नागरिक पहले ही रूसी सशस्त्र बलों को छोड़ चुके हैं, जबकि अन्य 63 व्यक्ति जल्दी काम छोड़ना चाह रहे हैं। सिंह ने कहा, ‘‘आठ लोगों के मारे जाने की खबर है और मृतकों की नागरिकता भारतीय के रूप में सत्यापित की गई है।'' उन्होंने कहा कि सरकार को कुछ भारतीय नागरिकों की जल्दी नौकरी छोड़ने में सुगमता के लिए अनुरोध प्राप्त हुए हैं, जिन्हें कथित तौर पर अस्पष्ट परिस्थितियों में रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती किया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे भारतीय नागरिकों की सही संख्या ज्ञात नहीं है।'' सिंह ने कहा, ‘‘वर्तमान में उपलब्ध जानकारी से पता चलता है कि 12 भारतीय नागरिक पहले ही रूसी सशस्त्र बलों को छोड़ चुके हैं, जबकि अन्य 63 व्यक्ति जल्दी काम छोड़ना चाह रहे हैं।'' मंत्री ने कहा कि सरकार ने चार भारतीय नागरिकों के शव भारत लाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है।
उन्होंने कहा, ‘‘रूस की सरकार ने सूचित किया है कि मृतक व्यक्तियों के परिवारों को उनके द्वारा हस्ताक्षरित अनुबंधों के अनुसार मुआवजा प्रदान किया जाएगा।'' मंत्री ने कहा कि रूसी सशस्त्र बलों में कार्यरत भारतीय नागरिकों को शीघ्र दायित्वमुक्त करने, साथ ही उनकी सुरक्षा और कल्याण का मुद्दा सरकार ने विभिन्न स्तरों पर रूस के संबंधित अधिकारियों के साथ दृढ़ता से उठाया है। उन्होंने कहा, ‘‘जुलाई में रूस की अपनी यात्रा के दौरान, प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने रूसी सशस्त्र बलों से सभी भारतीय नागरिकों को शीघ्र दायित्वमुक्त किए जाने की तत्काल आवश्यकता को दृढ़ता से दोहराया।'' जून में, विदेश मंत्रालय ने कहा था कि रूसी सेना में सेवारत भारतीय नागरिकों का मुद्दा ‘‘अत्यंत चिंताजनक'' है और इस पर मास्को को कार्रवाई करना चाहिए। भारत ने 11 जून को कहा कि रूसी सेना द्वारा भर्ती किए गए दो भारतीय नागरिक इन दिनों चल रहे रूस-यूक्रेन संघर्ष में मारे गए थे। दो भारतीयों की मौत के बाद, विदेश मंत्रालय ने रूसी सेना द्वारा भारतीय नागरिकों की आगे की भर्ती पर रोक की मांग की। - -गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक भोजन मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता, भारत ब्रांड के तहत चावल, आटे की बिक्री जारी रहेगी: श्री जोशीनई दिल्ली। केंद्रीय उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने आज यहां घोषणा करते हुए कहा कि अनाज की कमी वाले राज्य 1 अगस्त, 2024 से ई-नीलामी में भाग लिए बिना खुला बाजार बिक्री योजना (घरेलू) (ओएमएसएस [डी]) के तहत भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से सीधे खरीद कर सकते हैं। नए खरीद सत्र के शुरू होने से पहले स्टॉक के विशाल अधिशेष को कम करने के लिए यह निर्णय लिया गया है।ओएमएसएस (डी) के तहत, भारत सरकार का खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग सीधे राज्यों को 2,800 रुपये प्रति क्विंटल (परिवहन लागत को छोड़कर) की दर से अनाज बेचेगा। श्री जोशी ने कहा कि यदि राज्य/केंद्र शासित प्रदेश प्रति व्यक्ति निर्धारित 5 किलोग्राम मुफ्त अनाज से अधिक खरीदना चाहते हैं, तो वे इसे पहले के 2,900 रुपये प्रति क्विंटल के बजाय 2,800 रुपये प्रति क्विंटल की समान कीमत पर खरीद सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ‘भारत’ ब्रांड के तहत आटा और चावल की बिक्री जो 30 जून, 2024 तक चलने वाली थी, जारी रहेगी।प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के बारे में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने 1 जनवरी, 2024 से पांच साल की अवधि के लिए पीएमजीकेएवाई के तहत लगभग 81.35 करोड़ लाभार्थियों (यानि अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) परिवारों और प्राथमिकता वाले परिवारों (पीएचएच) लाभार्थियों) को निःशुल्क खाद्यान्न प्रदान करने को जारी रखने का फैसला किया है, जिसका अनुमानित वित्तीय परिव्यय 11.80 लाख करोड़ रुपये है, जिसे पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। श्री जोशी ने कहा, "यह अब तक का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम है।" 2023-2024 में वितरित खाद्यान्न की मात्रा 497 एलएमटी है और जून 2024 तक केंद्र सरकार ने 125 एलएमटी खाद्यान्न वितरित किया है।देश में एनीमिया और पोषण की कमी को दूर करने के लिए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पीएमजीकेएवाई योजना के तहत सरकार ने तीनों चरणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है और सरकार की हर योजना में पारंपरिक रूप से तैयार (कस्टम-मिल्ड) चावल को पौष्टिक अवयवों से युक्त (फोर्टिफाइड) चावल से बदल दिया गया है और मार्च, 2024 तक पौष्टिक अवयवों से युक्त चावल के वितरण का 100% कवरेज हासिल कर लिया गया है। उन्होंने कहा, "गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक भोजन पीएम मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।“उच्च खाद्य मुद्रास्फीति पर, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि टमाटर और अन्य सब्जियां मौसमी हैं। उन्होंने कहा, "टमाटर की कीमत स्थिर हो रही है और पीएसएफ के उपयोग के बिना सब्सिडी वाले टमाटर 60 रुपये किलो उपलब्ध कराए गए हैं।“ दालों के बारे में, श्री जोशी ने कहा कि बुवाई का क्षेत्र बढ़ा है और दालों की 100% सरकारी खरीद की जायेगी।श्री जोशी ने यह भी बताया कि अब तक इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़कर 1589 करोड़ लीटर प्रति वर्ष हो गई है, जो देश की घरेलू इथेनॉल आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि लगभग 1.05 लाख करोड़ रुपये के भुगतान के साथ, चालू चीनी सीजन के लिए 94.8% से अधिक गन्ना बकाया का भुगतान किया जा चुका है, जिससे गन्ना बकाया न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों के हित में 2021-22 के चीनी सीजन का लगभग 99.9% गन्ना बकाया का भुगतान कर दिया गया है। पिछले चीनी सीजन 2022-23 के लिए देय गन्ना बकाया 1,14,494 करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग 1,14,235 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है और केवल 259 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान किया जाना शेष है। श्री जोशी ने कहा कि इस प्रकार, किसानों को लगभग 99.8% गन्ना बकाया का भुगतान किया जा चुका है।एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड के बारे में श्री जोशी ने कहा कि अब तक देशभर में 145 करोड़ रुपये के अंतर-संचालन (पोर्टेबिलिटी) लेनदेन किए गए हैं। एनएफएसए लाभार्थियों को अंतर-राज्यीय या राज्य के अन्दर कुल 293 एलएमटी खाद्यान्न वितरित किया गया है।
- नयी दिल्ली. देश की प्रमुख कूरियर सेवा कंपनी डीटीडीसी एक्सप्रेस लि. ने ड्रोन से कूरियर पहुंचाने की सेवा शुरू की है। कंपनी ने इसके लिए ड्रोन सेवा प्रदाता कंपनी स्काई एयर मोबिलिटी के साथ साझेदारी की है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि उसने अपने 35वें स्थापना वर्ष के मौके पर ड्रोन से पहली डिलिवरी गुरुग्राम में बिलासपुर से सेक्टर 92 में की। इसके तहत 7.5 किमीमीटर की दूरी को केवल तीन से चार मिनट में तय किया गया। आमतौर पर सड़क मार्ग से कूरियर पहुंचाने में 15 मिनट तक लगते हैं। कंपनी ने कहा कि उसका लक्ष्य सालाना लगभग 15.5 करोड़ पार्सल प्रबंधन को और अधिक प्रभावी व कुशल बनाना है। डीटीडीसी एक्सप्रेस के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अभिषेक चक्रवर्ती ने कहा, “हम डीटीडीसी के सफर के 35वें वर्ष की शुरुआत कर रहे हैं। स्काई एयर के साथ रणनीतिक साझेदारी के साथ यह एक नए सफर की शुरुआत है।” स्काई एयर के संस्थापक और सीईओ अंकित कुमार ने कहा कि यह एक बड़ी और व्यापक शुरुआत है, जिसमें भविष्य में अच्छे नतीजे प्राप्त होंगे।
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नई दिल्ली। देश में बढ़ते रेल हादसों को लेकर गुरुवार को लोकसभा में खूब हंगामा हुआ.। विपक्षी सांसदों के सवालों का जवाब देने के लिए जब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव खड़े हुए तो विपक्ष के नेता हंगामा करने लगे.। बार-बार रील मंत्री कहे जाने पर अश्विनी वैष्णव भड़क उठे.। जब अश्विनी वैष्णव सदन में बोलने के लिए खड़े हुए तो विपक्षी सांसद "अश्विनी वैष्णव हाय हाय" के नारे लगाने लगे.। इसके बाद उन्होंने अपना आपा खो दिया और संसद में विपक्षी सांसदों को कड़ी फटकार लगाई.।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, "लोग यहां चिल्ला रहे हैं, उनसे पूछा जाना चाहिए कि सत्ता में रहने के 58 वर्षों में वे 1 किमी दूर भी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) क्यों नहीं लगा पाए.। आज, वे सवाल उठाने का साहस करते हैं। . जब ममता बनर्जी रेल मंत्री थी, तो वह दुर्घटनाओं की संख्या बताती थी. 0.24 प्रतिशत से घटकर 0.19 प्रतिशत होने पर ये लोग सदन में ताली बजाते थे और आज जब यह 0.19 प्रतिशत से घटकर 0.03 प्रतिशत हो गई है, तो वे इस तरह का आरोप लगाते हैं। क्या यह देश इसी तरह चलेगा?" उन्होंने आगे कहा, "रेलवे के सुधार के लिए सबको साथ आना होगा. सपा और कांग्रेस ने एक रणनीति के तहत अयोध्या के पुराने रेलवे स्टेशन की दीवार की तस्वीर साझा करके नए रेलवे स्टेशन के डैमेज होने की बात कही थी, जो झूठ निकला. सोशल मीडिया की अपनी ट्रोल सेना की मदद से कांग्रेस झूठी बातें फैलाती है। . क्या वे उन 2 करोड़ लोगों के दिलों में डर पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं जो हर दिन रेलवे से यात्रा करते हैं.। हम वे लोग नहीं हैं जो रील बनाते हैं,। हम कड़ी मेहनत करते हैं, आप जैसे लोग केवल और केवल पब्लिसिटी के लिए, दिखावे के लिए रील बनाते हैं.। -
नई दिल्ली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने ऋतु के दूसरे भाग और अगस्त 2024 के लिए दक्षिण-पश्चिम मानसून वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया है.। आईएमडी के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन (अगस्त से सितंबर) 2024 के दूसरे भाग के दौरान पूरे देश में बारिश सामान्य से अधिक (LPA का 106% से अधिक) होने की संभावना है.। अगस्त 2024 के लिए पूरे देश में मासिक वर्षा सामान्य सीमा (LPA का 94 से 106%) के भीतर रहने के आसार हैं. । केवल पूवोत्तर, पूवी, मध्य व प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों जैसे- लद्दाख, सौराष्ट्र और कच्छ के कुछ इलाकों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है.।
अगस्त महीने के लिए मौसम पूर्वानुमान
- मुंबई. करीब 42 प्रतिशत महिलाओं को कार्यस्थल पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद कॉरपोरेट क्षेत्र में कार्यरत 90 प्रतिशत महिलाएं अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए ‘अतिरिक्त मेहनत' करने को तैयार हैं। एक सर्वेक्षण में यह निष्कर्ष सामने आया है। वैश्विक पेशेवर सेवा फर्म एऑन ने ‘2024 वॉयस ऑफ वुमेन स्टडी इंडिया' शीर्षक से जारी अध्ययन रिपोर्ट में कहा है कि कॉरपोरेट नौकरी कर रही 42 प्रतिशत महिलाओं ने कार्यस्थल पर पक्षपात या संभावित पक्षपात का सामना करने की बात कही है। वहीं 37 प्रतिशत महिला कर्मचारियों को असंवेदनशील व्यवहार का अनुभव भी करना पड़ा है। हालांकि, 90 प्रतिशत से अधिक महिलाओं ने कहा कि वे प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए अतिरिक्त समय देने, चुनौतीपूर्ण कामों के लिए खुद आगे आने और खुद को बेहतर बनाने के लिए तैयार हैं। सर्वेक्षण में शामिल करीब छह प्रतिशत महिलाओं ने कम-से-कम एक बार यौन उत्पीड़न का सामना करने की पीड़ा भी जताई है। हालांकि, इनमें से आधे से भी कम महिला कर्मचारियों ने आधिकारिक तौर पर अपने नियोक्ता को इस घटना की सूचना दी। एऑन का अध्ययन भारत में 560 से अधिक कंपनियों की लगभग 24,000 पेशेवर महिलाओं से मिले जवाबों पर आधारित है। अध्ययन के मुताबिक, तीन-चौथाई कामकाजी महिलाओं ने कहा कि मातृत्व अवकाश के बाद उन्हें एक-दो साल के लिए करियर में झटका झेलना पड़ा। वहीं करीब 40 प्रतिशत महिलाओं को मातृत्व अवकाश पर जाने से वेतन पर नकारात्मक असर देखने को मिला और उनकी भूमिका को भी बदल दिया गया। वरिष्ठ प्रबंधन और नेतृत्व की भूमिकाओं में मौजूद 34 प्रतिशत महिलाओं ने भी भेदभाव के संकेत दिए जबकि शुरुआती स्तर की नौकरियों में 17 प्रतिशत महिलाओं को पक्षपात झेलना पड़ा। इसका असर यह हुआ कि पक्षपात की शिकार लगभग 21 प्रतिशत महिलाओं ने एक वर्ष से भी कम समय में संगठन छोड़ने का संकेत दिया। एऑन के लिए भारत में मुख्य कार्यपालक अधिकारी (प्रतिभा समाधान) नितिन सेठी ने कहा, ‘‘कार्यस्थल पर पक्षपात व्यवसायों के कुशल और प्रतिबद्ध महिलाओं को कार्यबल में शामिल करने और बनाए रखने के प्रयासों में बाधा बन रहा है... समावेशी कार्य संस्कृति का निर्माण नेतृत्व की प्राथमिकता में होना चाहिए।''
- पणजी. गोवा के सरकारी और सहायता-प्राप्त स्कूल छात्रों को परंपरागत विषयों के साथ कोडिंग और रोबोटिक्स की भी शिक्षा दे रहे हैं। इससे नए दौर के लिए विद्यार्थियों के तैयार होने के साथ नए अवसरों की दुनिया भी खुल रही है। गोवा के इन स्कूलों में लगभग 65,000 छात्र सरकार के महत्वाकांक्षी कौशल विकास कार्यक्रम के तहत कम उम्र में ही कोडिंग और रोबोटिक्स के गुर सीख रहे हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूली छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करना है। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने हाल ही में विधानसभा को जानकारी दी थी कि राज्य सरकार स्कूली छात्रों को नए कौशल से लैस करने के लिए ‘स्कूलों में कोडिंग और रोबोटिक्स शिक्षा' (केयर्स) योजना लागू कर रही है ताकि वे उद्योग के लिए तैयार हों। सावंत ने कहा था कि इस योजना को सरकारी और सहायता-प्राप्त स्कूलों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है और अब विद्यार्थी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा पा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा था कि कोविड-19 महामारी के दौरान गोवा के सभी स्कूलों के कंप्यूटर शिक्षकों को ‘मास्टर ट्रेनर' बनने के लिए प्रशिक्षित किया गया था। इस योजना के तहत स्कूलों को कोडिंग एवं रोबोटिक्स उपकरण मुफ्त में दिए जा रहे हैं। गोवा सरकार की केयर्स परियोजना के निदेशक डॉ. विजय बोर्गेस ने कहा कि यह योजना पिछले चार वर्षों से सभी मिडिल स्कूलों में 65,000 छात्रों को लक्षित करके लागू की जा रही है। इसके लिए इंजीनियरिंग पेशेवरों को फेलो नियुक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य नवोन्मेषक, प्रौद्योगिकी के लिए तैयार और ‘आत्मनिर्भर भारत' के निर्माण में मददगार विद्यार्थियों को तैयार करना है। पणजी से 110 किलोमीटर दूर कैनकोना तालुका के गावडोंग्रिम गांव में सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक दामोदर गांवकर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र भी कोडिंग एवं रोबोटिक्स में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं और बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। स्कूल के छात्र भी इन विषयों को सीखने में बहुत उत्साहित हैं। छात्र समृद्ध देवीदास ने कहा, ‘‘मुझे कोडिंग और रोबोटिक्स सीखने में बहुत मजा आता है। मुझे कई नई चीजें पता चलती हैं। इससे मेरी रचनात्मक सोच भी बढ़ती है।
- नयी दिल्ली. सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि पिछले पांच साल में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई करने के दौरान कुल 377 लोगों की मौत हो गई, लेकिन हाथ से मैला ढोने की प्रथा की कोई रिपोर्ट नहीं है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को बताया कि 2019 से 2023 तक सीवर और सेप्टिक टैंक की जोखिमपूर्ण सफाई करते हुए कुल 377 लोगों की मौत हुई। उन्होंने कहा कि लेकिन देश में हाथ से मैला ढोने की प्रथा की कोई रिपोर्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि हाथ से मैला ढोने वाले कर्मियों के नियोजन का निषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए विभिन्न कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने का अनुरोध किया गया है।
- वायनाड. केरल में वायनाड के भूस्खलन प्रभावित चूरलमाला के निवासी जयन 29 जुलाई की रात अपने घर में गहरी नींद में सो रहे थे। उनके आवास में बाहर हो रही मूसलाधार बारिश की तेज आवाजें आ रही थीं। जयन मंगलवार रात डेढ़ बजे तेज आवाज सुनकर जगे। जब वह अपने घर के बाहर निकले तो उन्होंने देखा कि उनके घर के बाहर बाढ़ का पानी बह रहा है और लोग अपनी छतों पर भागते हुए मदद के लिए चिल्ला रहे हैं। जयन ने मंगलवार की सुबह के समय की भयावह घटनाओं को याद करते हुए कहा, ‘‘वहां बिजली या रोशनी नहीं थी। हमने बाढ़ के पानी के दूसरी तरफ लोगों को मदद के लिए चिल्लाते देखा, लेकिन कोई भी उनके पास नहीं पहुंच सका क्योंकि कीचड़ और पानी का तेज बहाव किसी को भी उनके पास जाने से रोक रहा था।'' जयन और उनके परिवार के सदस्य अस्थायी तौर पर मजदूरी का काम करते हैं। आमतौर पर वे रात का खाना खाने के बाद रात 9.30 बजे के आसपास सो जाते थे। सोमवार की रात को भी, इलाके के अन्य लोगों की तरह, यह परिवार भी रात 9.30 बजे के आसपास सोने चला गया, इस बात से अनजान कि उनके साथ इतनी बुरी घटना घटने वाली है। चूरलमाला में लोगों को लगा कि रात डेढ़ बजे हुआ भूस्खलन ही एकमात्र घटना होगा, और कई लोग यह उम्मीद करते हुए बिस्तर पर चले गए कि मदद के लिए चिल्लाने वाले अन्य लोग सुरक्षित होंगे। जयन ने कहा, ‘‘लेकिन, तड़के करीब 3.30 बजे तेज आवाज हुई और सबकुछ एक झटके में खत्म हो गया। बड़े-बड़े पत्थरों और कीचड़ ने उन सभी घरों को बहा दिया, जहां लोग पहले मदद के लिए चिल्ला रहे थे। हमें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें, क्योंकि हमारे सामने कीचड़, पानी और मलबा बह रहा था।'' इलाके के ज्यादातर घर कुछ ही समय में गायब हो गए और आसपास जीवन का कोई निशान नहीं बचा। कीचड़-पत्थरों से भरे पानी ने मकानों को तहस-नहस कर दिया, जिनमें लोग रहते थे। एक ऐसा इलाका जो कभी जीवन से भरा हुआ था, अचानक नदी में बदल गया और चारों तरफ कीचड़ एवं मलबा बिखरा हुआ था। जो लोग सुरक्षित बच गए, वे रोते हुए अपने प्रियजनों का नाम पुकार रहे थे। जयन की पत्नी के रिश्तेदार लापता हैं। यह परिवार सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र में रहता था। रुंधे गले से जयन ने कहा, ‘‘मेरी पत्नी के परिवार के 11 सदस्य लापता हैं। हमने मलप्पुरम जिले के नीलांबुर में चलियार नदी से बरामद एक बच्चे के शव की पहचान अपने एक रिश्तेदार के रूप में की है। हमें अब तक केवल तीन शव मिले हैं और बाकी अभी भी लापता हैं।'' जयन उस स्थान पर प्रतीक्षा कर रहे हैं, तथा घटनास्थल से बचाए गए प्रत्येक व्यक्ति को गौर से देखते हैं तथा यह सुनिश्चित करते हैं कि वह व्यक्ति उनकी पत्नी के परिवार का तो नहीं है। चिंतित और थके हुए नजर आ रहे जयन ने कहा, ‘‘मैं यहां इंतजार कर रहा हूं, उम्मीद है कि हमें अपने लापता परिवार के सदस्यों के बारे में कुछ जानकारी मिलेगी।'' उनका इंतजार कुछ और दिनों तक चल सकता है क्योंकि बचावकर्मी क्षेत्र में कीचड़ और मलबे के बीच मृतकों की तलाश कर रहे हैं तथा किसी को जीवित निकाले जाने की उम्मीद कर रहे हैं। जयन की तरह कई लोग इस क्षेत्र में भटक रहे हैं, बचाव दल के पास भाग रहे हैं, जो शवों को बाहर निकाल रहे हैं तथा अपने प्रियजनों के अंतिम दर्शन की उम्मीद कर रहे हैं, जो अचानक आई बाढ़ में बह गए।
- नयी दिल्ली. पश्चिमी दिल्ली के रोहिणी इलाके में 15 वर्षीय एक किशोरी की आटा गूंथने वाली मशीन में हाथ और सिर फंसने से मौत हो गई। इस मशीन का इस्तेमाल मोमोज और स्प्रिंग रोल बनाने में किया जाता था। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक घटना मंगलवार शाम बेगमपुर इलाके में हुई, जहां एक कमरे के अंदर मशीन चल रही थी। उसने बताया कि पीड़िता काम कर रही थी, तभी उसका हाथ मशीन में फंस गया और उसका सिर आटा गूंथने वाले टब में चला गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘‘मंगलवार शाम 7.18 बजे बेगमपुर थाने में एक पीसीआर कॉल आई, जिसमें बताया गया कि बेगमपुर इलाके के हनुमान चौक के पास आटा गूंथने वाली मशीन में एक लड़की फंसी हुई है।'' उन्होंने बताया, ‘‘हमारी टीम मौके पर पहुंची और पाया कि मशीन बड़ी नहीं थी, लेकिन प्रारंभिक जांच से पता चला है कि लड़की का हाथ टब के अंदर फंस गया था, जिसके कारण मशीन ने उसे अंदर खींच लिया।'' अधिकारी ने बताया कि जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो लड़की गंभीर रूप से घायल थी और उसका सिर मशीन में फंसा हुआ था। पुलिस ने बताया कि उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस के मुताबिक मामले में सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। उसने बताया कि वह पीड़िता के परिवार से बात कर उसकी वास्तविक उम्र का पता लगा रही है ताकि यह जानकारी मिल सके कि कहीं वह बाल मजदूर के तौर पर तो काम नहीं कर रही थी।

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