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- नई दिल्ली। लावारिस कुत्तों की देखभाल और उनसे जुड़ी सुरक्षा चिंताओं पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही अहम सुनवाई फिलहाल टाल दी गई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी 2026 को होगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सभी आपत्तियों और दलीलों पर उसी दिन विस्तार से विचार किया जाएगा। यह मामला गुरुवार को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष आया। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि जिस तीन-न्यायाधीशों की विशेष पीठ को इस मामले की सुनवाई करनी थी, वह अब नहीं बैठ रही है, इसलिए सुनवाई को आगे के लिए सूचीबद्ध किया गया है।सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि दिल्ली नगर निगम ने लावारिस कुत्तों के प्रबंधन को लेकर ऐसे नियम बना दिए हैं, जो मौजूदा कानूनों और वैधानिक प्रावधानों के खिलाफ हैं।उन्होंने आशंका जताई कि दिसंबर में ही इन नियमों को लागू कर दिया जाएगा और कुत्तों को हटाया जाएगा, जबकि उनके लिए पर्याप्त शेल्टर होम की व्यवस्था नहीं है। सिब्बल ने इसे बेहद अमानवीय करार दिया।हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि यदि नियम लागू होते हैं, तो अदालत बाद में इस पर विचार करेगी। वहीं, न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अगली सुनवाई में एक वीडियो दिखाया जाएगा और यह सवाल उठाया जाएगा कि आखिर मानवता क्या होती है। इस पर कपिल सिब्बल ने भी कहा कि याचिकाकर्ता पक्ष जमीनी हालात दिखाने के लिए वीडियो प्रस्तुत करेगा। अदालत ने साफ किया कि लावारिस कुत्तों के प्रबंधन से जुड़े सभी विवादों और आपत्तियों पर 7 जनवरी 2026 को ही विस्तार से सुनवाई होगी।दरअसल, यह मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान में ली गई उस कार्यवाही का हिस्सा है, जो 28 जुलाई को दिल्ली में लावारिस कुत्तों के काटने की घटनाओं, खासकर बच्चों में रेबीज के मामलों से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के बाद शुरू हुई थी। इससे पहले 7 नवंबर को अदालत ने स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और खेल परिसरों जैसे संवेदनशील स्थानों पर कुत्तों के काटने की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि पर गहरी चिंता जताई थी।वहीं, अपने पिछले आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में स्कूलों, अस्पतालों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और स्टेडियमों को लावारिस कुत्तों से मुक्त करने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही अदालत ने हाईवे और सड़कों से गाय, बैल और अन्य पशुओं को हटाने का भी आदेश दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि हर हाईवे पर 24 घंटे निगरानी टीमें और हेल्पलाइन नंबर तैनात किए जाएं।
- दिल्ली. प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा को बताया कि दुनिया भर में कैंसर मामलों में चीन और अमेरिका के बाद भारत तीसरे स्थान पर है और 2040 तक देश में कैंसर के मामलों की संख्या लगभग 20 लाख हो सकती है। सिंह ने उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए बताया कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने महिलाओं में गर्भाशय (सर्वाइकल) कैंसर के उपचार के लिए पहली बार एचपीवी वैक्सीन विकसित की है और सरकार इसे किफायती दर पर या मुफ्त में अधिक बड़ी आबादी तक उपलब्ध कराने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा, “यह सच है कि पूरी दुनिया में कैंसर के मामले बढ़े हैं। अगर आप वैश्विक आंकड़े देखें तो हर साल दुनिया में दो करोड़ कैंसर रोगी होते हैं, यानी हर साल लगभग दो करोड़ कैंसर मरीज।भारत में ही हमारे पास लगभग 14 से 15 लाख, यानी करीब 15 लाख मामले हैं।'' सिंह ने कहा कि यह आंकड़ा 2040 तक बढ़कर लगभग 20 लाख होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि कैंसर की व्यापकता के लिहाज से भारत चीन और अमेरिका के बाद तीसरे स्थान पर हैं।” उन्होंने कहा कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जिसमें देश के भीतर बीमारियों के स्वरूप में बदलाव होना शामिल है। उन्होंने कहा कि 1980 के दशक तक भारत संक्रामक रोगों से ग्रस्त था, इसके बाद गैर-संक्रामक रोगों का दौर आया। उन्होंने कहा कि आज की स्थिति में भारत दोनों से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा, “विडंबना यह है कि इनमें से कैंसर सहित कई बीमारियां, जो जीवन के उतरार्द्ध के दशकों में होती थीं, अब प्रारंभिक दशकों में हो रही हैं। जो कैंसर पहले अधिक उम्र में होता था, वह अब कम उम्र में भी हो सकता है। यही स्थिति हार्ट अटैक की भी है, जो पहले जीवन के बाद के चरण में होते थे, अब कम उम्र में हो रहे हैं।” उन्होंने कहा कि भले ही समाज को इस बात पर गर्व है कि भारत की 70 प्रतिशत आबादी 40 वर्ष से कम उम्र की है, लेकिन सच्चाई का दूसरा पहलू यह भी है कि 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के नागरिकों की संख्या भी बढ़ी है, और इससे रोगों का बोझ भी बढ़ता है। उपचार के संबंध में मंत्री ने कहा कि सरकार ने देश के लगभग हर जिला अस्पताल में कैंसर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू किया है।उन्होंने कहा कि यह एक विविधताओं वाला देश है और कैंसर की प्रकृति भी अलग-अलग होती है। उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए, उत्तर-पूर्व में सिर और गर्दन के कैंसर के मामले पाए जाते हैं। उन्होंने कहा, “वैक्सीन के बारे में, जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने पहली बार एचपीवी वैक्सीन विकसित की है, जिसे सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में निवारक भूमिका निभाने वाला बताया जा रहा है, और कहा जाता है कि यह भारत में युवा महिलाओं में अधिक प्रचलित है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ इस बात पर बातचीत की जा रही है कि इसे अधिक व्यापक आबादी तक किफायती कीमत पर या मुफ्त में कैसे उपलब्ध कराया जाए। सिंह ने कांग्रेस सदस्य रजनी अशोकराव पाटिल के पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए यह बात कही। पाटिल ने पूछा था कि गरीब मरीजों के लिए आवश्यक कैंसर दवाओं की समय पर उपलब्धता और उनकी किफायती कीमत सुनिश्चित करने के लिए सरकार कौन से ठोस कदम उठा रही है?
- नयी दिल्ली. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में कहा कि ज्यादातर सड़क दुर्घटनाएं ऐसे लोगों के व्यवहार से जुड़ी होती हैं, जो अक्सर सुरक्षा मानदंडों की अनदेखी करते हैं। उन्होंने लोकसभा सदस्यों से अपने निर्वाचन क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा अभियान चलाने का आह्वान भी किया। गडकरी ने इस तथ्य का उल्लेख करते हुए दुख जताया कि हर साल लगभग पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं जिनमें औसतन 1.80 लाख लोगों की जान चली जाती है और मारे गए लोगों में ज्यादातर युवा होते हैं।निचले सदन में प्रश्नकाल के दौरान मंत्री ने कहा, ‘‘मुझे बड़े दुख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि सड़क दुर्घटनाएं मानव व्यवहार से जुड़ी हैं। सड़क सुरक्षा नियमों की कोई परवाह नहीं है। हर साल सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 1.80 लाख लोगों की जान चली जाती है, जो किसी भी युद्ध या कोविड महामारी में गई जानों से अधिक है। युवा लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।'' सड़क सुरक्षा पर भाजपा सांसद मुकेश दलाल के एक पूरक प्रश्न का जवाब देते हुए, गडकरी ने कहा कि सड़क दुर्घटना में मौत के मामलों में 66 प्रतिशत 18-34 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं के होते हैं। उन्होंने कहा कि भले ही मंत्रालय लोगों को सड़क सुरक्षा मानदंडों के बारे में जागरुक और संवेदनशील बनाने के लिए अभियान चला रहा है, लेकिन ज्यादा सुधार नहीं देखा जा रहा है।
- नयी दिल्ली. श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने हाल ही में लागू किए गए श्रम कानून के ‘मनमाने तरीके से नौकरी पर रखने व निकालने' और ‘इंस्पेक्टर राज' को बढ़ावा देने की चिंताओं को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया और कहा कि नए कानून रोजगार को संगठित रूप देंगे जबकि निरीक्षक चीजों को सुगम बनाने की भूमिका निभाएंगे। नए नियमों के तहत, 300 कर्मचारियों वाली इकाइयों में छंटनी, कर्मचारियों की कटौती एवं इकाइयों को बंद करने के लिए सरकारी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। पहले 100 कर्मचारियों वाली इकाइयों को ऐसी अनुमति की आवश्यकता नहीं थी।‘टाइम्स नेटवर्क इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव' को संबोधित करते हुए मांडविया ने कहा, ‘‘ हमने देश में रोजगार को संगठित रूप दिया है और प्रति इकाई श्रमिकों की संख्या बढ़ाकर 300 कर दी है, जो पहले 100 थी।'' उन्होंने कहा कि पहले नियोक्ता कानूनी झंझटों से बचने के लिए 100 श्रमिकों को औपचारिक रोजगार देते थे और बाकी को असंगठित रूप से नियोजित करते थे। मांडविया ने कहा कि नए नियमों ने इन बचे हुए श्रमिकों के रोजगार को संगठित रूप दे दिया है और उन्हें वे सभी लाभ मिलेंगे जो एक पंजीकृत कर्मचारी को मिलते हैं। अनुपालन का बोझ बढ़ाकर ‘इंस्पेक्टर राज' को बढ़ावा देने की चिंताओं पर उन्होंने स्पष्ट किया कि निरीक्षक किसी उद्योग के काम में बाधा डालने वाला नहीं बल्कि सुविधादाता होगा। मंत्री ने कहा कि वे (निरीक्षक) अग्नि सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा जैसे सभी सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करेंगे जो विशेष रूप से खनन क्षेत्र में महिलाओं को रात्रिकालीन पाली में काम करने की अनुमति देने के लिए आवश्यक शर्तें हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि नए कानूनों में सभी प्रावधान, बदलते समय और आधुनिक औद्योगिक गतिविधियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं। चार श्रम कानून वेतन संहिता, 2019; औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 ; सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थितियों संहिता, 2020 21 नवंबर 2025 को अधिसूचित किए गए। इन चार संहिताओं ने 29 मौजूदा श्रम कानूनों को सुव्यवस्थित किया। इन सुधारों में महिलाओं के लिए विस्तारित अधिकार और सुरक्षा शामिल हैं।
- नयी दिल्ली. केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार गुजरात में ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड' (गोडावण) पक्षियों के संरक्षण की दिशा में काम कर रही है। राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान अनुपूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए यादव ने कहा कि गुजरात सहित कई राज्यों में ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड' के संरक्षण के लिए एक कार्यक्रम चलाया जा रहा है। वह कांग्रेस सदस्य शक्तिसिंह गोहिल के प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। गुजरात से कांग्रेस सांसद गोहिल ने कहा कि गुजरात के कच्छ में ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड' के लिए एक अभयारण्य है, लेकिन वहां केवल तीन मादा पक्षी ही बचे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि ये तीनों मादा पक्षी मर जाती हैं, तो अभयारण्य की भूमि उद्योगपतियों को सौंप दी जाएगी। इस पर यादव ने कहा कि कांग्रेस सदस्य की यह आशंका “निराधार” है।उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार गुजरात में ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड' के संरक्षण के लिए कार्य कर रही है। मंत्री ने सदन को बताया कि गुजरात के कच्छ में ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड' की चार मादा पक्षी हैं, जबकि राजस्थान में इस पक्षी की आबादी 140 है। यादव ने यह भी जानकारी दी कि सरकार ‘इंडियन रोलर' (पालापिट्टा) पक्षियों के संरक्षण के लिए कोई ‘विशेष परियोजना' नहीं चला रही है। वह भाजपा नेता के. लक्ष्मण द्वारा इस पक्षी की घटती आबादी को लेकर पूछे गए प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यादव ने कहा, “वन्यजीवों और उनके आवासों का संरक्षण और प्रबंधन मुख्य रूप से राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन की जिम्मेदारी है।” उन्होंने बताया कि बाघ, हिम तेंदुआ और डॉल्फिन जैसी प्रमुख प्रजातियों की संख्या का आकलन राष्ट्रीय स्तर पर किया जाता है। अन्य वन्यजीवों और पक्षियों की संख्या का आकलन राज्य और केंद्र शासित प्रदेश करते हैं और इन आंकड़ों को मंत्रालय स्तर पर संकलित नहीं किया जाता। मंत्री ने कहा, “वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-एक और दो में सूचीबद्ध वन्यजीवों को शिकार से संरक्षण प्राप्त है।भारतीय रोलर (कोरासियस बेंघालेन्सिस) इस अधिनियम की अनुसूची-दो में सूचीबद्ध है।” पक्षियों सहित वन्यजीवों के संरक्षण के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए यादव ने कहा कि देश में संरक्षित क्षेत्रों (राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, संरक्षण रिजर्व और सामुदायिक रिजर्व) का एक नेटवर्क बनाया गया है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि ‘डेवलपमेंट ऑफ वाइल्डलाइफ हैबिटैट्स' और ‘प्रोजेक्ट टाइगर एवं एलीफेंट' जैसी केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनके वार्षिक कार्ययोजना (एपीओ) के अनुसार वन्यजीव प्रबंधन और आवास विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यादव ने कहा कि ‘प्रोजेक्ट टाइगर', ‘प्रोजेक्ट एलीफेंट', ‘प्रोजेक्ट लायन', ‘प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड', ‘प्रोजेक्ट डॉल्फिन', ‘प्रोजेक्ट चीता' और ‘प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड' जैसे विशेष कार्यक्रम उनके संरक्षण के लिए चलाए जा रहे हैं।--
- -संसद में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कैंसर देखभाल को चुनिंदा उत्कृष्टता से सार्वभौमिक पहुंच में बदला जा रहा है-टाटा मेमोरियल सेंटर में लगभग 60% कैंसर रोगियों का इलाज मुफ्त या मामूली कीमत पर किया जाता है: डॉ. जितेंद्र सिंह-कैंसर के बढ़ते मामले वैश्विक प्रवृत्ति है; शुरुआती पहचान से कई कैंसर ठीक हो सकते हैं: डॉ. जितेंद्र सिंहनई दिल्ली। देश में कैंसर के बढ़ते बोझ पर संसद में कई प्रश्नों के उत्तर में विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को कैंसर की रोकथाम, निदान, उपचार, अनुसंधान और विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए वहनीयता को मजबूत करने के लिए सरकार की बहुआयामी, भविष्य के लिए तैयार रणनीति की जानकारी दी।मंत्री ने अस्पताल में भर्ती, कैंसर के बढ़ते मामले, दवाओं की सामर्थ्य, टीके, वैश्विक सहयोग और उन्नत परमाणु उपचार तक पहुंच से संबंधित चिंताओं को दूर किया। उन्होंने कहा कि सरकार अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और सार्वजनिक स्वास्थ्य एकीकरण द्वारा संचालित कैंसर देखभाल को चुनिंदा उत्कृष्टता से सार्वभौमिक पहुंच में बदल रही है।डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्वीकार किया कि कैंसर रोगियों और उनके परिवारों को अक्सर अस्पताल में भर्ती के दौरान भावनात्मक और लॉजिस्टिकल तनाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रवेश प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने की दिशा में काम कर रही है, साथ ही तृतीयक अस्पतालों पर रेफरल दबाव को कम करने के लिए जिला स्तर पर कैंसर विज्ञान सुविधाओं का विस्तार कर रही है।मंत्री ने बताया कि 2014 से देश भर में 11 टाटा मेमोरियल सेंटर अस्पताल स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही 300 से ज़्यादा अस्पतालों को कवर करने वाला नेशनल कैंसर केयर ग्रिड भी बनाया गया है, जो मरीज़ों के घरों के पास स्टैंडर्ड और आसानी से मिलने वाली कैंसर सेवाएं सुनिश्चित करता है। नवी मुंबई में प्लेटिनम ब्लॉक सहित बड़े विस्तार कार्य भी चल रहे हैं।कैंसर के बढ़ते मामलों पर चिंताओं को दूर करते हुए, डॉ. सिंह ने कहा कि यह बढ़ोतरी ग्लोबल घटना है। इसके लंबी उम्र, पर्यावरणीय कारक, जीवनशैली में बदलाव और गैर-संक्रामक बीमारियों की जल्दी शुरुआत जैसे कारण हैं। मंत्री ने कहा, "आज कैंसर सिर्फ़ बुढ़ापे की बीमारी नहीं रही। शुरुआती जांच ने कई कैंसर को जानलेवा से ठीक होने लायक बना दिया है।"डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन को बताया कि बोर्ड ऑफ़ रेडिएशन एंड आइसोटोप टेक्नोलॉजी (बीआरआईटी), टाटा मेमोरियल सेंटर और टीचिंग अस्पतालों जैसे संस्थानों के ज़रिए बड़े पैमाने पर रिसर्च चल रही है। यह न सिर्फ़ कैंसर पर, बल्कि रेडियोप्रोटेक्टिव एजेंटों और सटीक-लक्षित टेक्नोलॉजी के ज़रिए कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के साइड इफ़ेक्ट को कम करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार की कैंसर देखभाल नीति में किफ़ायती इलाज सबसे अहम है। टाटा मेमोरियल सेंटर में, लगभग 60% मरीज़ों को आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के तहत मुफ़्त या बहुत कम कीमत पर इलाज मिलता है, जबकि सशुल्क सेवाएं भी कॉर्पोरेट अस्पतालों की तुलना में काफ़ी सस्ती हैं।मंत्री ने कहा कि सरकार सरकारी अस्पतालों और देश में दवाओं के निर्माण के ज़रिए ज़रूरी कैंसर दवाओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है, जिससे महंगे आयात पर निर्भरता कम हो रही है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि भारत ने अपनी पहली स्वदेशी एचपीवी वैक्सीन विकसित की है, जो जैव प्रौद्योगिकी विभाग की बड़ी उपलब्धि है। यह वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर से बचाव में मदद करती है, जो युवा भारतीय महिलाओं में सबसे आम कैंसर में से एक है।अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बारे में डॉ. जितेंद्र सिंह ने "रेज़ ऑफ़ होप" पहल के तहत टाटा मेमोरियल सेंटर की अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ साझेदारी पर बल दिया, जो कम और मध्यम आय वाले देशों के हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को प्रशिक्षण दे रही है। उन्होंने कहा कि टाटा मेमोरियल मरीज़ों की देखभाल, शिक्षण और अत्याधुनिक रिसर्च को अनोखे तरीके से जोड़ता है, डीम्ड यूनिवर्सिटी के रूप में काम करता है और असम सहित कई राज्यों में कैंसर विज्ञान, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी और न्यूक्लियर मेडिसिन में सुपर-स्पेशियलिटी प्रशिक्षण देता है।प्रोस्टेट कैंसर के लिए ल्यूटेटियम-177 पीएसएमए -617 जैसे एडवांस्ड थेरानोस्टिक्स पर प्रश्नों के उत्तर में, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत ने पिछले एक दशक में डायग्नोस्टिक और थेराप्यूटिक इस्तेमाल के लिए 24 स्वदेशी रेडियोआइसोटोप विकसित किए हैं। इनमें प्रोस्टेट कैंसर और बचपन के ब्लड कैंसर के लिए विश्व स्तरीय नवाचार शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि अत्याधुनिक न्यूक्लियर मेडिसिन लॉजिस्टिक्स की चुनौतियों वाले ग्रामीण इलाकों में भी किफायती और आसानी से उपलब्ध हो।
- नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के युवाओं को नए साल में बड़ी सौगात देने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों से विभागवार रिक्त पदों का विवरण मांगा था, ताकि इन खाली पदों पर शीघ्र नियुक्तियां की जा सकें।समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2026 में प्रदेश के युवाओं को लगभग डेढ़ लाख सरकारी नौकरियां देने की अनुमति दे दी है। ये भर्तियां पुलिस, शिक्षा, राजस्व, आवास विकास सहित राज्य के विभिन्न विभागों में की जाएंगी। इनमें सबसे अधिक भर्तियां पुलिस और शिक्षा विभाग में होंगी। इसके साथ ही वर्ष 2026 में योगी सरकार के नाम सबसे अधिक सरकारी नौकरियां देने का रिकॉर्ड भी दर्ज हो जाएगा।योगी सरकार प्रदेश की पहली ऐसी सरकार होगी, जिसने दस वर्षों में दस लाख सरकारी नौकरियां देने का लक्ष्य पूरा किया है। यूपी सरकार पिछले साढ़े आठ वर्षों में विभिन्न विभागों में युवाओं को साढ़े आठ लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दे चुकी है। ये सभी भर्तियां पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से की गई हैं, जिससे प्रदेश के युवाओं का सरकार पर भरोसा मजबूत हुआ है।पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं। इसके विपरीत, योगी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने पर विशेष जोर दिया है।हाल ही में हुई बैठक में योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के विभिन्न विभागों में रिक्त पदों की समीक्षा की। सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2026 में पुलिस और शिक्षा विभाग में लगभग 50-50 हजार पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किए जाएंगे। इसके अलावा राजस्व विभाग में 20 हजार पदों पर भर्ती होगी, जबकि कारागार, आवास विकास, बाल विकास पुष्टाहार और स्वास्थ्य विभाग में भी रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।विभिन्न विभागों में भर्ती प्रक्रिया के लिए विज्ञापन जारी करने का कार्य अंतिम चरण में है और कुछ विभागों में भर्ती प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है। प्रस्तावित भर्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद योगी सरकार दस वर्षों में रिकॉर्ड दस लाख सरकारी नौकरियां देने वाली पहली सरकार बन जाएगी।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप प्रदेश के अधिक से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरी देने के लिए अब तक पुलिस विभाग में 2.19 लाख पदों पर भर्ती की जा चुकी है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री के निर्देश पर वर्ष 2026 में पुलिस विभाग द्वारा करीब 50 हजार पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया जाएगा, जिसकी अंतिम तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।वर्ष 2026 में पुलिस विभाग में 30 हजार आरक्षी और 5 हजार उपनिरीक्षक (सब-इंस्पेक्टर) सहित कुल 50 हजार पदों पर भर्ती की जाएगी। इसके अलावा विभाग में 15 हजार अन्य पदों पर भी नियुक्तियां होंगी।वहीं, शिक्षा विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, शिक्षा विभाग में भी करीब 50 हजार पदों पर भर्ती की जाएगी। ये भर्तियां सहायक अध्यापक, प्रवक्ता, प्रधानाचार्य सहित विभिन्न पदों पर होंगी। इसी तरह राजस्व विभाग में 20 हजार पदों पर भर्ती होगी, जिनमें सबसे अधिक लेखपाल पद शामिल होंगे।इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य, आवास विकास, कारागार, बाल विकास पुष्टाहार समेत अन्य विभागों में लगभग 30 हजार पदों पर भर्तियां की जाएंगी। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कुल नई भर्तियों की संख्या डेढ़ लाख से अधिक होने की संभावना है।
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नई दिल्ली। भारत और ओमान के बीच हुआ कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (सीईपीए) एक ऐतिहासिक कदम है और इसका सकारात्मक प्रभाव आने वाले कई दशकों तक दिखाई देगा। यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दिया। भारत-ओमान सीईपीए पर हस्ताक्षर होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की सोशल मीडिया पोस्ट को उद्धृत करते हुए कहा, “भारत-ओमान संबंधों को आगे ले जाने के लिए आज हमने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (सीईपीए) 21वीं सदी में हमारे द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देगा।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस समझौते से व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी तथा विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर खुलेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इससे दोनों देशों के युवाओं को विशेष रूप से लाभ होगा।केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अपनी पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ओमान के सुल्तान महामहिम हैथम बिन तारिक के नेतृत्व में भारत और ओमान ने सीईपीए पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता खाड़ी क्षेत्र के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।पीयूष गोयल ने बताया कि इस समझौते के तहत ओमान की 98.08% टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क (जीरो ड्यूटी) की पेशकश की गई है, जो मूल्य के आधार पर भारत के 99.38% निर्यात को कवर करती है। इससे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा, रोजगार के अवसर सृजित होंगे और एमएसएमई, कारीगरों तथा महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को मजबूती मिलेगी।उन्होंने आगे कहा कि टेक्सटाइल, लेदर, फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद, प्लास्टिक, फर्नीचर, कृषि उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस और ऑटोमोबाइल जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्रों को पूर्ण टैरिफ समाप्ति से लाभ होगा। इससे भारत की विनिर्माण क्षमता और निर्यात प्रतिस्पर्धा को मजबूती मिलेगी। साथ ही, किसानों और छोटे व्यवसायों के हितों की रक्षा के लिए भारत के संवेदनशील क्षेत्रों को आवश्यक सुरक्षा प्रदान की गई है।यह समझौता सेवाओं के व्यापार के लिए भी एक व्यापक और भविष्योन्मुखी ढांचा प्रदान करता है। इसमें सूचना प्रौद्योगिकी, व्यावसायिक एवं पेशेवर सेवाएं, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी), शिक्षा, स्वास्थ्य और ऑडियो-विजुअल सेवाएं शामिल हैं। सीईपीए की एक प्रमुख विशेषता यह है कि अनुबंध पर काम करने वाले सेवा प्रदाताओं के लिए निवास अनुमति की अवधि को 90 दिन से बढ़ाकर दो वर्ष कर दिया गया है, जिसे आगे दो वर्ष तक और बढ़ाया जा सकता है। इससे दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है। - नई दिल्ली। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने गुरुवार को जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को पारंपरिक चिकित्सा पर आयोजित दूसरे डब्ल्यूएचओ ग्लोबल समिट के समापन समारोह को संबोधित करेंगे। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित यह तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक वैश्विक, विज्ञान-आधारित और लोगों पर केंद्रित एजेंडा को आकार देने में भारत के बढ़ते नेतृत्व और अग्रणी पहलों को प्रदर्शित करता है। पीएमओ ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने अनुसंधान, मानकीकरण और वैश्विक सहयोग के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा और भारतीय ज्ञान प्रणालियों को मुख्यधारा में लाने पर लगातार बल दिया है।”कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री आयुष क्षेत्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पहलों का शुभारंभ करेंगे। इनमें आयुष के लिए एक मास्टर डिजिटल प्लेटफॉर्म—‘माई आयुष इंटीग्रेटेड सर्विसेज पोर्टल’ (एमएआईएसपी) शामिल है। इसके अलावा प्रधानमंत्री ‘आयुष मार्क’ का भी अनावरण करेंगे, जिसे आयुष उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता के लिए एक वैश्विक मानक के रूप में देखा जा रहा है।प्रधानमंत्री मोदी से योग में प्रशिक्षण पर डब्ल्यूएचओ की तकनीकी रिपोर्ट और ‘फ्रॉम रूट्स टू ग्लोबल रीच: आयुष में 11 वर्षों का परिवर्तन’ शीर्षक पुस्तक का विमोचन किए जाने की भी संभावना है। भारत की समृद्ध पारंपरिक औषधीय विरासत की वैश्विक पहचान के प्रतीक के रूप में प्रधानमंत्री अश्वगंधा पर आधारित एक स्मारक डाक टिकट भी जारी करेंगे।इसके साथ ही प्रधानमंत्री वर्ष 2021-2025 के दौरान योग के प्रचार और विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘प्रधानमंत्री पुरस्कार’ के प्राप्तकर्ताओं को सम्मानित करेंगे। ये पुरस्कार योग को संतुलन, स्वास्थ्य और सद्भाव का एक कालातीत अभ्यास मानते हुए उसके वैश्विक प्रसार के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं, जो एक स्वस्थ और सशक्त नए भारत के निर्माण में योगदान देता है।प्रधानमंत्री ‘ट्रेडिशनल मेडिसिन डिस्कवरी स्पेस’ का भी दौरा करेंगे। यह प्रदर्शनी भारत और दुनिया भर की पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान प्रणालियों की विविधता, गहराई और समकालीन प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है।यह शिखर सम्मेलन 17 से 19 दिसंबर तक आयोजित किया जा रहा है और इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) तथा आयुष मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया है। शिखर सम्मेलन का विषय- ‘संतुलन बहाल करना: स्वास्थ्य और कल्याण का विज्ञान और अभ्यास’ है। इस दौरान वैश्विक नेताओं, नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, स्वदेशी ज्ञान धारकों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के बीच न्यायसंगत, टिकाऊ और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य प्रणालियों को आगे बढ़ाने पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
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नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन ने बृहस्पतिवार को यहां उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन से मुलाकात की। उपराष्ट्रपति कार्यालय ने राधाकृष्णन के सरकारी आवास पर हुई मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं। भाजपा ने रविवार को बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री नबीन (45) को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया था। नबीन बिहार के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और यह उनका पांचवा कार्यकाल है।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को गंभीर आरोपों में लगातार 30 दिन तक हिरासत में रहने की स्थिति में पद से हटाने के प्रावधान वाले तीन विधेयकों पर विचार करने वाली संसदीय समिति को रिपोर्ट देने के लिए आगामी बजट सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक का समय दिया गया है। समिति की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में ‘संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025', ‘संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025' और ‘जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025' के संबंध में यह प्रस्ताव रखा जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूर कर लिया।
गत 12 नवंबर को 31 सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन किया गया था तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद सारंगी को समिति का प्रमुख नियुक्त किया गया। लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार इस समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य हैं। विपक्ष के चार सांसद इस समिति में शामिल हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने मानसून सत्र के आखिर में विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच सदन में ‘संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025', ‘संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025' और ‘जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025' पेश किए थे। बाद में उनके प्रस्ताव पर सदन ने तीनों विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति को भेजने का निर्णय लिया था।
- नयी दिल्ली. भारत और अर्जेंटीना ने कृषि अनुसंधान, क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए तीन साल की कार्य योजना पर हस्ताक्षर किए हैं। एक सरकारी बयान में कहा गया है कि वर्ष 2025-27 की कार्य योजना पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और अर्जेंटीना के राष्ट्रीय कृषि प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनटीए) के बीच हस्ताक्षर किए गए। आईसीएआर के महानिदेशक एम एल जाट और अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो ऑगस्टिन कौसिनो ने बुधवार को कार्य योजना का आदान-प्रदान किया। इस योजना को संयुक्त अनुसंधान, जर्मप्लाज्म आदान-प्रदान, विशेषज्ञ जुड़ाव और सुव्यवस्थित प्रशिक्षण और अध्ययन यात्राओं के माध्यम से लागू किया जाएगा। जर्मप्लाज्म आदान-प्रदान में सोयाबीन, सूरजमुखी, मक्का, ब्लूबेरी, खट्टे फल, जंगली पपीते की प्रजातियां, अमरूद और चुनिंदा सब्जी फसलें शामिल होंगी। पौधों और पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में, इसमें क्षेत्र-विशिष्ट खुरपका एवं मुंहपका रोग (एफएमडी) उन्मूलन रणनीतियों और तकनीकी आदान-प्रदान और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के माध्यम से टिड्डी निगरानी और प्रबंधन पर सहयोग शामिल है। बयान में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने भारत-अर्जेंटीना वैज्ञानिक साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की और प्रभावी कार्यान्वयन और प्रगति सुनिश्चित करने के लिए वार्षिक निगरानी और समीक्षा पर सहमति व्यक्त की।
- नयी दिल्ली. सरकार ने बुधवार को लोकसभा को सूचित किया कि पिछले 10 वर्षों में सरकार की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत देश में 2,361 मेगावाट बायोमास ऊर्जा और 228 मेगावाट ‘कचरे से ऊर्जा' उत्पादन क्षमता जोड़ी गई है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, ‘‘इसके अलावा, देश भर में विभिन्न स्थानों पर 2.88 लाख बायोगैस संयंत्र स्थापित किए गए हैं।'' नवंबर 2022 में, सरकार ने जैव ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना को समर्थन देने के उद्देश्य से 2022-23 से 2025-26 की अवधि के लिए 998 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ राष्ट्रीय जैव ऊर्जा कार्यक्रम (एनबीपी) प्रथम चरण को अधिसूचित किया। मंत्री द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली आदि राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में बायोमास परियोजनाओं की स्थापित क्षमता शून्य है। ओडिशा, असम, जम्मू और कश्मीर और लद्दाख जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपशिष्ट-से-ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित नहीं हैं। इसके अलावा, दिल्ली, पुडुचेरी, लक्षद्वीप, लद्दाख, चंडीगढ़ और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में कोई बायोगैस संयंत्र नहीं हैं।
- नयी दिल्ली. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि सरकार का लक्ष्य देश में राजमार्ग निर्माण की गति को बढ़ाकर 60 किलोमीटर प्रतिदिन करना है। टाइम्स नेटवर्क के 'इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2025' में गडकरी ने कहा कि केंद्र की प्रमुख भारतमाला परियोजना के तहत फिलहाल कोई नई परियोजना शुरू नहीं होने के कारण देश में राजमार्ग निर्माण की रफ्तार धीमी हो गई है। उन्होंने कहा, ''हमारा लक्ष्य देश में राजमार्ग निर्माण की गति को 60 किलोमीटर प्रतिदिन तक तेज करना है।'' मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य अगले 8–10 वर्षों में भारत के वाहन उद्योग को दुनिया में शीर्ष स्थान पर लाना है। इस समय अमेरिका के वाहन उद्योग का आकार 78 लाख करोड़ रुपये है, इसके बाद चीन (47 लाख करोड़ रुपये) और भारत (22 लाख करोड़ रुपये) का स्थान है। मंत्री ने कहा कि भारत की जीडीपी वृद्धि को तेज करने के लिए कृषि पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।
- रोहतास/पटना. बिहार के रोहतास जिले के आयरकोठा थाना क्षेत्र में गोही मोड़ के पास बुधवार देर शाम दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर में चार युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, मृतकों की उम्र 20 से 22 वर्ष के बीच है। टक्कर के बाद एक बाइक में आग लग गई, जिससे दोनों बाइक जलकर खाक हो गईं। हादसे में डालमिया नगर थाना क्षेत्र के निवासी 20 वर्षीय विकास शर्मा और 22 वर्षीय विकास तिवारी, जबकि नासरीगंज थाना क्षेत्र के मांगितपुर गांव निवासी 21 वर्षीय अनमोल शर्मा तथा इसी थाना क्षेत्र के हेमराडीह निवासी 20 वर्षीय आलोक सिंह की मौत हो गई। बताया गया कि टक्कर के बाद एक बाइक में आग लगने से उस पर सवार दो युवकों की झुलसने से मौत हो गई, जबकि शेष दो युवकों की गंभीर चोटों के कारण मौके पर ही जान चली गई। आयरकोठा थाना प्रभारी शिवम कुमार ने बताया कि मृतकों के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल, सासाराम भेज दिया है। पुलिस के मुताबिक, एक बाइक पर अनमोल शर्मा और उनका एक साथी अपने गांव मांगितपुर-सोहगी जा रहे थे, जबकि दूसरी बाइक पर विकास शर्मा और विकास तिवारी नासरीगंज से डालमियानगर थाना क्षेत्र के प्रयाग बीघा स्थित अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान गोही गांव के पास दोनों बाइकों की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई, जिसके बाद देखते ही देखते एक बाइक में आग लग गई।
- नयी दिल्ली. देश में निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के औसत वेतन में अगले साल करीब नौ प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की संभावना है। इस दौरान कंपनियां बोनस, कौशल और प्रदर्शन को भी ज्यादा अहमियत देंगी। बुधवार को एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया। वैश्विक सलाहकार कंपनी 'मर्सर' की वेतन सर्वेक्षण रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, , कंपनियां अब वेतन और लाभ की ऐसी व्यवस्था बना रही हैं, जिसमें कर्मचारी को सिर्फ पैसा ही नहीं, बल्कि करियर में आगे बढ़ने और बेहतर कामकाजी अनुभव भी मिले। रिपोर्ट कहती है कि वेतन बढ़ोतरी के फैसले में कर्मचारी का व्यक्तिगत प्रदर्शन, महंगाई का असर और नौकरी बाजार में कंपनी की प्रतिस्पर्धी स्थिति जैसे प्रमुख कारक अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस सर्वेक्षण में 1,500 से ज्यादा कंपनियों और 8,000 से अधिक पदों का विश्लेषण किया गया।रिपोर्ट बताती है कि अब अल्पकालिक प्रोत्साहन यानी प्रदर्शन से जुड़े बोनस पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। साथ ही कंपनियां कौशल पर आधारित सांगठनिक ढांचे की तरफ कदम बढ़ा रही हैं, ताकि जरूरी और दुर्लभ कौशल वाले कर्मचारियों को बेहतर पहचान और भुगतान मिल सके। मर्सर की सलाहकार प्रमुख (भारत) मालती के.एस. ने कहा, "सर्वेक्षण से पता चलता है कि भारत में कंपनियां लागत दबाव और अच्छी प्रतिभाओं को बनाए रखने के बीच वेतन वृद्धि की योजना पर टिकी रहेंगी।" क्षेत्रवार देखें तो वर्ष 2026 में सर्वाधिक वेतन वृद्धि उच्च प्रौद्योगिकी वाले क्षेत्रों और वाहन उद्योग में होने की उम्मीद है। इस दौरान उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्र में वेतन 9.3 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है जबकि वाहन उद्योग का वेतन 9.5 प्रतिशत बढ़ सकता है। वहीं सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), आईटी से जुड़ी सेवाएं (आईटीईएस) और वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) के कर्मचारी सुविधाओं एवं खुशहाली के मामले में आगे बने हुए हैं। डिजिटल बदलाव, कृत्रिम मेधा (एआई) और उत्पादकता की बढ़ती जरूरतों के चलते कर्मचारियों के कौशल आधारित भुगतान का रुझान तेज हुआ है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नए श्रम कानूनों के लागू होने से सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं अधिक मजबूत होंगी।
- नयी दिल्ली. टोल नाकों पर विवाद और मारपीट की घटनाएं होने की बात स्वीकार करते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि अब यहां कैमरे लगने के कारण कोई व्यक्ति नहीं रहेगा, जिससे विवाद की आशंका समाप्त हो जाएगी। गडकरी ने राज्यसभा में पूरक प्रश्नों के जवाब में यह बात कही। उन्होंने कहा, ‘‘अभी कोई व्यक्ति नहीं खड़ा रहेगा टोल नाकों पर। कोई रोकेगा नहीं, कोई टोकेगा नहीं, कोई झगड़ेगा नहीं, कोई गुंडागर्दी नहीं।'' उन्होंने कहा कि वहां कैमरा काम करेगा और एक प्रकार से यह समस्या समाप्त हो जाएगी।भारतीय जनता पार्टी के लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने उनसे प्रश्न पूछा कि टोल नाकों पर होने वाली हिंसक घटनाओं और झगड़ों को रोकने के लिए क्या उपाय किए गए हैं? इसके जवाब में गडकरी ने स्वीकार किया कि टोल नाकों पर पहलवान और विशेष तरह के लोग रहते थे। उन्होंने स्वीकार किया कि ऐसे लोग, ‘‘गुंडागर्दी करते थे, जबरदस्ती करते थे, लाठियां मारते थे, अपमानजनक व्यवहार करते थे...यह सच है। अब इन सब की छुट्टी हो जाएगी। अब कोई दिखेगा नहीं, आप चिंता मत करिए।'' गडकरी ने टैग योजना के बारे में पूछे गये एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि देश में करीब एक हजार टोल नाके हैं जहां पहले नकदी से लेनदेन होता था और फिर फास्ट टैग व्यवस्था शुरू की गयी। उन्होंने कहा कि अब मल्टी लेयर व्यवस्था की शुरुआत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस नयी व्यवस्था के लिए दस अनुबंध दिये गये हैं और दस अभी प्रक्रियागत हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने तय किया है कि दिसंबर 2026 तक पूरे देश में यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। परिवहन मंत्री ने कहा कि फास्ट टैग से संबंधित धोखाधड़ी के 6,725 मामले सामने आये हैं। उन्होंने कहा कि अभी सरकार ने ‘एक वाहन, एक फास्ट टैग' की नीति शुरू की है, फिर इसमें नंबर प्लेट को भी जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस नयी नीति के कारण किसी वाहन के लिए फास्ट टैग लेना और उससे कोई अन्य वाहन टोल से निकल जाने की घटनाएं बहुत ही कम हो गयी हैं।
- नयी दिल्ली. दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि संचार की 5जी तकनीक के मामले में भारत की सफलता केवल देश की नहीं बल्कि पूरे विश्व की कहानी बन गई है और भारत 6जी में दुनिया का नेतृत्व करेगा। उन्होंने प्रश्नकाल में पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत में 5जी तकनीक देश की ही नहीं, विश्वव्यापी सफलता की कहानी बन गई है। भारत ने 4जी में दुनिया का अनुसरण किया, 5जी में दुनिया के साथ चला और हम 6जी में विश्व का नेतृत्व करेंगे।'' सिंधिया ने जनता दल (यू) के दिलेश्वर कामैत के पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए यह भी कहा कि 2023 में 5जी का क्रियान्वयन शुरू होने से लेकर आज तक करीब 5 लाख बीटीएस (बेस ट्रांसीवर स्टेशनत) लग चुके हैं। उन्होंने कहा कि देश के 778 जिलों में से 767 जिलों में 5जी की कनेक्टिविटी उपलब्ध है। सिंधिया के मुताबिक आज देश में कुल मिलाकर 36 करोड़ 5जी उपभोक्ता हैं जिनकी संख्या 2026 तक बढ़कर 42 करोड़ होने और 2030 तक 100 करोड़ होने का पूर्वानुमान है। मंत्री ने कहा, ‘‘5जी के आधार पर ही हम 6जी की दिशा में निरंतर चल रहे हैं।''ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की समस्या के संबंध में द्रमुक सदस्य कलानिधि मारन के पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए सिंधिया ने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में सेटेलाइट कनेक्टिविटी की जरूरत है, जहां सामान्य दूरसंचार संपर्क नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे नागरिकों को हम सेटकॉम के माध्यम से संपर्क प्रदान करते हैं। हम इस दिशा में काम कर रहे हैं। दूरसंचार मंत्री के रूप में मेरा लक्ष्य सभी उपभोक्ताओं को सारे विकल्प उपलब्ध कराने का है।'' सिंधिया ने कहा कि सेटकॉम के लिए स्पेक्ट्रम आवंटित होने वाले हैं और इसके लिए स्टारलिंक, वनवेब तथा रिलायंस को लाइसेंस दिए गए हैं। उन्होंने विमानों में दूरसंचार संपर्क नहीं रहने संबंधी मारन के पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘‘दूरसंचार विभाग की बात करें तो हम उड़ानों में दूरसंचार संपर्क को लेकर नियम बना रहे हैं। हमने इसके लिए रूपरेखा चिह्नित की है। दूरसंचार विभाग की ओर से सारी तैयारी है।'' सिंधिया ने कहा कि इसके लिए नागर विमानन मंत्रालय को नियम परिभाषित करने होंगे और विमानन कंपनियों को हर विमान पर ट्रांसपोंडर लगाने होंगे ताकि सिग्नल मिलें। उन्होंने कहा कि ट्रांसपोंडर लगाना विमानन कंपनियों पर निर्भर है।जब मारन ने विमान यात्राओं के दौरान मोबाइल नेटवर्क में व्यवधान का विषय उठाया तो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, ‘‘अच्छा है ढाई घंटे मोबाइल से बचोगे। जितनी कोशिश हो, मोबाइल से बचो। ढाई घंटे बच रहे हो, यही अच्छी बात है।'' उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्ष में भारत के दूरसंचार उपकरणों के निर्यात में वृद्धि हुई है और यह आंकड़ा 2020-21 में 10 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 18,406 करोड़ रुपये हो चुका है, यानी निर्यात में 72 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि वहीं, आयात का क्षेत्र थम गया है और जो आयात 2020-21 में 51 हजार करोड़ रुपये का था, वह आज भी उतना ही है।
- नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार को आयोजित ‘लोकमत पार्लियामेंट्री अवॉर्ड' 2025 समारोह में समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा चौधरी और द्रमुक के टी आर बालू समेत आठ सांसदों को सम्मानित किया गया। कैराना से लोकसभा सदस्य चौधरी को वर्ष की सर्वश्रेष्ठ नवोदित महिला सांसद का पुरस्कार मिला, जबकि बालू को वर्ष का ‘लाइफटाइम अचीवमेंट' पुरस्कार प्रदान किया गया। पुरस्कार समारोह में भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई, पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एस वाई कुरैशी, आध्यात्मिक गुरू आचार्य लोकेश मुनि, लोकमत मीडिया समूह के अध्यक्ष विजय दर्डा और लोकमत के प्रधान संपादक राजेंद्र दर्डा भी मौजूद थे।भाजपा नेताओं संगीता कुमारी सिंहदेव और जगदंबिका पाल को क्रमशः वर्ष की सर्वश्रेष्ठ महिला सांसद और सर्वश्रेष्ठ सांसद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राज्यसभा श्रेणी में, मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति को वर्ष की सर्वश्रेष्ठ नवोदित महिला सांसद के पुरस्कार से सम्मानित किया गया और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट' पुरस्कार से नवाजा गया। तृणमूल कांग्रेस की नेता डोला सेन को वर्ष की सर्वश्रेष्ठ महिला सांसद और आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह को वर्ष के सर्वश्रेष्ठ सांसद के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ‘लोकमत पार्लियामेंट्री अवॉर्ड' का यह छठा संस्करण था।
- नयी दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को यहां उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात की। उपराष्ट्रपति के सचिवालय ने बैठक की एक तस्वीर सोशल मीडिया पोस्ट में साझा की। सचिवालय ने पोस्ट किया, ‘‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात की।'' तमिलनाडु के रहने वाले राधाकृष्णन का आरएसएस से जुड़ाव रहा है।
- भोपाल. मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को कहा कि 21वीं सदी के मानवीय विकास के प्रबंधन की चुनौतियां निरंतर कठिन होती जा रही हैं क्योंकि यह युग प्रौद्योगिकी का है। उन्होंने कहा कि रोजमर्रा की जिंदगी में कृत्रिम मेधा (एआई) का हस्तक्षेप मानवीय प्रभुता और संवेदनाओं को चुनौती दे रहा है तथा रोबोट संस्कृति राजनैतिक और सामाजिक सरोकारों की दिशाओं में नई-नई जटिलताएं पैदा कर रही है। तोमर मध्यप्रदेश की प्रथम विधानसभा की बैठक के 70 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र की एकदिवसीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस विशेष बैठक में मध्यप्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाने पर चर्चा आरंभ होने से पहले सदन को संबोधित करते हुए कहा तोमर ने उपरोक्त मौजूदा चुनौतियों के आर्थिक, तकनीकी और वैज्ञानिक पहलुओं पर निरंतर समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, ‘‘यह समझना जरूरी है ताकि अगली पीढ़ी के समक्ष मौजूद चुनौतियों के मुताबिक विकास का एजेंडा तय किया जा सके। यह विशेष सत्र इसी तारतम्य में आहूत किया गया है।'' अध्यक्ष ने भरोसा जताया कि इस विशेष सत्र में ‘‘अपने नेक इरादे, साफ नीयत, जनहित और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर हम मध्यप्रदेश की जनता की भलाई के लिए एक नया इतिहास लिख सकेंगे।'' तोमर ने कहा कि एक नवंबर 1956 को गठित मध्यप्रदेश विधानसभा की पहली बैठक 17 दिसंबर को सम्पन्न हुई थी और उसके बाद 16वीं विधानसभा के वर्तमान कालखंड तक पिछले 69 वर्षों के दरम्यान मध्यप्रदेश में 191 बार सदन के सत्र आहूत हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि सदन की 192वीं बैठक के रूप में आहूत सोलहवीं विधान सभा का यह विशेष सत्र राज्य की आठ करोड़ जनता के समग्र विकास और उनके जीवन उन्नयन के लिये समर्पित है।साथ ही यह वक्त बीते 70 वर्षों के दरम्यान मध्यप्रदेश में निर्वाचित पक्ष और विपक्ष के सभी 4499 विधायकों को स्मरण करने और उन्हें सराहने का भी है। तोमर ने कहा, ‘‘संसद या विधानसभा को लोकतंत्र का मंदिर माना जाता है और लोकतंत्र में विधानसभा वही स्थान है, जो धर्म में ईश्वर का होता है। लोकतंत्र में आम जनता से जुड़े हर मसले पर विचार-विमर्श का केन्द्र बिन्दु विधायिका ही है।'' नीति आयोग के सतत विकास के लक्ष्यों के लिये निर्धारित ‘इंडिया इंडेक्स' वर्ष 2023-24 के आंकड़ों का हवाला देते हुए तोमर ने कहा कि मध्यप्रदेश इसमें अव्वल रहा है लेकिन इससे संतुष्ट नहीं रहा जा सकता। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की आठ करोड़ जनता के लिये अपेक्षित गतिशीलता पाना तभी संभव है, जब पक्ष-विपक्ष के सभी विधायक सदन के विशेष सत्र में ‘‘विकसित मध्यप्रदेश वर्ष 2047 के विज़न डॉक्यूमेंट'' के क्रियान्वयन के बारे में रचनात्मक चर्चा कर विकास का एक सर्वसम्मत दीर्घकालिक रोडमैप तैयार करें। उन्होंने कहा, ‘‘हमें इस रोडमैप पर यह अंकित करना होगा कि अगले 25 सालों में विकास के सफर में हम कब, कैसे और कहां पहुंचेंगे।'' विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि मध्यप्रदेश विधानसभा के इतिहास में इस विशेष सत्र से पहले भी तीन विशेष सत्र आयोजित किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व आजादी की 50वीं सालगिरह पर वर्ष 1997 में विशेष सत्र का आयोजन हुआ था जबकि सन् 2000 में मध्यप्रदेश विभाजन के वक्त विशेष सत्र बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि एक दशक पहले वर्ष 2015 में मध्यप्रदेश के विकास पर केंद्रित विशेष सत्र की बैठक हुई थी।
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नई दिल्ली। विकसित भारत@2047 की ओर भारत की वैज्ञानिक यात्रा आत्मविश्वास, क्षमता और उद्देश्य की स्पष्टता से आकार ले रही है। ये बात विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कही। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 2027 तक भारत बाहरी अंतरिक्ष और गहरे समुद्र में एक साथ मानव मिशन शुरू करके दुर्लभ वैश्विक उपलब्धि हासिल करेगा। यह देश के एकीकृत और दूरदर्शी वैज्ञानिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
दरअसल केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक मीडिया कॉन्क्लेव में कहा कि जैसे-जैसे भारत 2047 में अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी के करीब पहुंच रहा है, दुनिया न केवल यह देखेगी कि भारत ने क्या हासिल किया है, बल्कि उन मूल्यों, प्रणालियों और रास्तों को भी देखेगी जिनके माध्यम से राष्ट्र ने प्रगति की है।मंत्री ने कहा कि भारत का स्थायी लोकतंत्र, संवैधानिक ताकत और सभ्यता की निरंतरता उसकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से हैं और भविष्य के विकास की नींव बनाते हैं।भारत की बढ़ती खोज की सीमाओं की जानकारी देते हुए, मंत्री ने कहा कि देश अब पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर अंतरिक्ष और गहरे समुद्र में अनुसंधान जैसे पहले से कम खोजे गए क्षेत्रों में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि 2026 की शुरुआत में भारत 500 मीटर की गहराई तक पहुंचने वाले मानवयुक्त गहरे समुद्र मिशन को संपन्न करने की योजना बना रहा है, जो डीप ओशन मिशन के तहत महत्वपूर्ण कदम होगा। यह आने वाले वर्षों में और गहरी गोताखोरी का मार्ग प्रशस्त करेगा, जिससे अंततः भारत स्वदेशी सबमर्सिबल मत्स्य (MATSYA) का उपयोग करके 6,000 मीटर तक की गहराई का पता लगा सकेगा।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 2027 निर्णायक वर्ष होगा, जब भारत से भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने की उम्मीद है, साथ ही गहरे समुद्र में मानव अन्वेषण मिशन भी चलाया जाएगा, यह उपलब्धि दुनिया भर में केवल कुछ ही देशों ने हासिल की है। उन्होंने इस दोहरे मिशन को भारत की वैज्ञानिक परिपक्वता और एकीकृत तरीके से जटिल, समानांतर अन्वेषण करने की क्षमता का प्रतीक बताया।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में, पिछले एक दशक में शुरू किए गए सुधारों का परिवर्तनकारी प्रभाव पड़ा है, विशेष रूप से निजी भागीदारी के लिए अंतरिक्ष गतिविधियों को खोलना बहुत प्रभावी रहा। उन्होंने कहा कि भारत स्वयं-लगाए गए नियमों से बंधे होने से लेकर तेजी से बढ़ते इकोसिस्टम के साथ आत्मविश्वासी अंतरिक्ष-यात्री राष्ट्र बन गया है। आज भारत में सैकड़ों अंतरिक्ष स्टार्ट-अप और उद्यमी हैं। अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के आने वाले वर्षों में कई गुना बढ़ने का अनुमान है, जो राष्ट्रीय विकास और वैश्विक सहयोग में प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में उभरेगा।केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत की अनोखी प्राकृतिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संपत्तियों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि चाहे वह हिमालय हो, महासागर हों, पारंपरिक ज्ञान प्रणालियां हों, या जैव विविधता हो, देश का विकास मॉडल अपनी विरासत संसाधनों में मूल्य संवर्धन पर आधारित है। उन्होंने कहा कि विरासत को विकास के साथ जोड़ने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन भारत को ऐसा विकास करने में सक्षम बनाता है जो टिकाऊ, समावेशी और विश्व स्तर पर प्रासंगिक हो।डीप ओशन मिशन का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत की 11,000 किलोमीटर से ज्यादा लंबी तटरेखा और इसके समृद्ध समुद्री संसाधन – महत्वपूर्ण खनिजों और मत्स्य पालन से लेकर औषधीय और जैविक संपदा तक – दशकों से कम इस्तेमाल किए गए थे। उन्होंने कहा कि यह मिशन इस क्षमता को अनलॉक करने के साथ-साथ वैश्विक ब्लू इकोनॉमी में भारत की भूमिका को मजबूत करने के लिए रणनीतिक पहल है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के लगातार भाषणों में गहरे समुद्र की खोज के महत्व पर व्यक्तिगत रूप से जोर दिया है, जो इसकी राष्ट्रीय प्राथमिकता को दर्शाता है।उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब सिर्फ वैश्विक रुझानों का पालन नहीं कर रहा है, बल्कि दूसरों के लिए नए रास्ते बना रहा है। चाहे वह अंतरिक्ष विज्ञान हो, बायोटेक्नोलॉजी हो, गहरे समुद्र अनुसंधान हो या एकीकृत नवाचार हो, भारत खुद को ऐसे विकास के लिए रोल मॉडल के रूप में स्थापित कर रहा है जो तकनीकी प्रगति को नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ संतुलित करता है।मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि 2047 की ओर भारत की यात्रा सिर्फ आर्थिक मील के पत्थरों से ही नहीं, बल्कि अज्ञात को खोजने के आत्मविश्वास, सुधार करने के साहस और वैश्विक प्रगति में सार्थक योगदान देने की क्षमता से परिभाषित होगी। उन्होंने कहा, ” जमीन पर, समुद्र की गहराइयों में और अंतरिक्ष में, भारत के मिशन आखिरकार मानवता के लिए मिशन हैं।” -
नई दिल्ली। ब्रिटेन के शोधकर्ताओं की एक टीम ने एक नया और उन्नत ब्लड टेस्ट विकसित किया है, जिससे फेफड़ों के कैंसर (लंग कैंसर) की पहचान और उसकी निगरानी रियल टाइम में की जा सकेगी। इससे बीमारी की पहचान में होने वाली देरी कम होगी और मरीजों के इलाज के नतीजे बेहतर हो सकेंगे।
शोधकर्ताओं ने फूरियर ट्रांसफॉर्म इंफ्रारेड (FT-IR) माइक्रोस्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक का उपयोग करते हुए मरीज के खून में मौजूद लंग कैंसर की एक अकेली कोशिका तक की पहचान कर ली।यह तकनीक उन्नत इंफ्रारेड स्कैनिंग तकनीक और कंप्यूटर विश्लेषण को मिलाकर काम करती है। इसमें कैंसर कोशिकाओं की खास रासायनिक पहचान (केमिकल फिंगरप्रिंट) पर ध्यान दिया जाता है। यह जानकारी यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स ऑफ नॉर्थ मिडलैंड्स NHS ट्रस्ट (UHNM), कील यूनिवर्सिटी और लफबरो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने दी।अध्ययन के प्रमुख लेखक और UHNM में ऑन्कोलॉजी के एसोसिएट स्पेशलिस्ट प्रोफेसर जोसेप सुले-सुसो ने कहा कि यह तरीका मरीजों को जल्दी जांच, व्यक्तिगत इलाज और कम इनवेसिव प्रक्रियाओं में मदद कर सकता है। भविष्य में इसे लंग कैंसर के अलावा अन्य कई प्रकार के कैंसर में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।शोध के अनुसार, सर्कुलेटिंग ट्यूमर सेल्स (CTCs) वे कैंसर कोशिकाएं होती हैं, जो ट्यूमर से अलग होकर खून के जरिए शरीर में घूमती हैं। ये कोशिकाएं यह समझने में मदद करती हैं कि बीमारी किस तरह आगे बढ़ रही है और इलाज कितना असरदार है। यही कोशिकाएं कैंसर के फैलने (मेटास्टेसिस) का कारण भी बन सकती हैं।वर्तमान में CTCs की पहचान के तरीके जटिल, महंगे और समय लेने वाले होते हैं। कई बार ये तरीके कैंसर कोशिकाओं को पहचानने में असफल भी हो जाते हैं, क्योंकि खून में घूमते समय ये कोशिकाएं अपनी विशेषताएं बदल लेती हैं।नई तकनीक में खून के सैंपल पर इंफ्रारेड किरणें डाली जाती हैं, जो टीवी रिमोट की रोशनी जैसी होती हैं, लेकिन कहीं ज्यादा शक्तिशाली होती हैं। अलग-अलग रसायन इंफ्रारेड रोशनी को अलग तरीके से अवशोषित करते हैं और CTCs का एक खास अवशोषण पैटर्न होता है, जिसे उनका केमिकल फिंगरप्रिंट कहा जाता है।कंप्यूटर के जरिए इस डेटा का विश्लेषण कर यह जल्दी पता लगाया जा सकता है कि खून में कैंसर कोशिकाएं मौजूद हैं या नहीं।Applied Spectroscopy जर्नल में प्रकाशित यह तकनीक मौजूदा तरीकों की तुलना में सरल और कम खर्चीली है। इसमें पैथोलॉजी लैब में पहले से इस्तेमाल होने वाली साधारण कांच की स्लाइड्स का उपयोग किया जाता है, जिससे इसे रोजमर्रा की चिकित्सा प्रक्रिया में अपनाना आसान हो जाता है।शोधकर्ता अब इस तकनीक को बड़े मरीज समूहों पर आजमाने की योजना बना रहे हैं। उनका लक्ष्य एक ऐसा तेज और ऑटोमेटेड ब्लड टेस्ट विकसित करना है, जिसे कैंसर के इलाज की प्रक्रिया में आसानी से शामिल किया जा सके। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को जॉर्डन की यात्रा पूरी करने के बाद इथियोपिया पहुंचे, जहां उन्होंने अपने तीन देशों के दौरे के दूसरे चरण की शुरुआत की। यह उनकी इथियोपिया की पहली राजकीय यात्रा है। विशेष सम्मान स्वरूप इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली ने स्वयं एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया।
यह स्वागत कई मायनों में खास रहा। प्रधानमंत्री अबी अहमद अली स्वयं प्रधानमंत्री मोदी को गाड़ी चलाकर होटल तक ले गए। इस दौरान उन्होंने मार्ग में साइंस म्यूजियम और फ्रेंडशिप पार्क भी दिखाए। यह भ्रमण आधिकारिक यात्रा कार्यक्रम (इटिनरेरी) का हिस्सा नहीं था, बल्कि प्रधानमंत्री अबी अहमद की व्यक्तिगत पहल पर कराया गया।प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “कुछ समय पहले अदीस अबाबा पहुंचा। एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री अबी अहमद अली द्वारा किए गए आत्मीय स्वागत के लिए स्वयं को सम्मानित महसूस कर रहा हूं। इथियोपिया महान इतिहास और जीवंत संस्कृति वाला राष्ट्र है। भारत और इथियोपिया के बीच गहरे सभ्यतागत संबंध रहे हैं। मैं इथियोपियाई नेतृत्व के साथ विभिन्न क्षेत्रों में हमारी साझेदारी को और मजबूत करने के लिए संवाद को लेकर उत्सुक हूं।”यह यात्रा प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के निमंत्रण पर हो रही है और भारत-इथियोपिया संबंधों के बढ़ते रणनीतिक महत्व को दर्शाती है। दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के बीच द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर व्यापक चर्चा होगी। इनमें राजनीतिक सहयोग, विकासात्मक साझेदारी, व्यापार, निवेश और लोगों से लोगों के बीच संपर्क शामिल हैं। ग्लोबल साउथ के साझेदार होने के नाते, दोनों नेताओं से आपसी हितों के लिए मित्रता को और मजबूत करने तथा सहयोग के विस्तार की साझा प्रतिबद्धता दोहराने की उम्मीद है।मोदी इथियोपिया में भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे और इथियोपियाई संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे। उल्लेखनीय है कि यह वर्ष 2011 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इथियोपिया की पहली यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में अदीस अबाबा को स्वागत होर्डिंग्स, पोस्टरों और भारतीय झंडों से सजाया गया है।इथियोपिया को अफ्रीका और ग्लोबल साउथ में भारत का एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार माना जाता है। इस यात्रा से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की उम्मीद है।सोमवार को जारी अपने प्रस्थान वक्तव्य में प्रधानमंत्री मोदी ने अदीस अबाबा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह अफ्रीकी संघ का मुख्यालय है। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान वर्ष 2023 में अफ्रीकी संघ को G20 का स्थायी सदस्य बनाया गया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के साथ विस्तृत चर्चा, भारतीय समुदाय से मुलाकात और इथियोपियाई संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करने को लेकर उत्सुक हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मैं ‘मदर ऑफ डेमोक्रेसी’ के रूप में भारत की यात्रा और ग्लोबल साउथ के लिए भारत-इथियोपिया साझेदारी के महत्व पर अपने विचार साझा करने के लिए उत्सुक हूं।”प्रधानमंत्री अबी अहमद अली इससे पहले ‘वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट’ के विभिन्न संस्करणों में प्रमुख भागीदारी निभा चुके हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा दक्षिण-दक्षिण सहयोग को गहरा करने और अफ्रीका के साथ भारत की साझेदारी को मजबूत करने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।इथियोपिया पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने जॉर्डन का दो दिवसीय दौरा पूरा किया, जहां उन्होंने किंग अब्दुल्ला द्वितीय और क्राउन प्रिंस अल-हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय से मुलाकात की, इंडिया-जॉर्डन बिजनेस फोरम को संबोधित किया और जॉर्डन संग्रहालय का दौरा किया। अम्मान पहुंचने पर उनका स्वागत जॉर्डन के प्रधानमंत्री जाफर हसन ने किया था।प्रधानमंत्री मोदी ने जॉर्डन यात्रा को “अत्यंत फलदायी” बताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के लोगों के लिए प्रगति और समृद्धि के नए रास्ते खुलेंगे। -
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद नितिन नबीन ने बिहार सरकार में मंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया है। बताया जा रहा है कि पार्टी में ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत के तहत उन्होंने यह फैसला लिया। जानकारी के अनुसार, नितिन नबीन ने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सौंप दिया है।
नितिन नबीन संभाल रहे थे पथ निर्माण विभाग तथा नगर विकास एवं आवास विभाग की जिम्मेदारीनितिन नबीन बिहार की नीतीश सरकार में पथ निर्माण विभाग तथा नगर विकास एवं आवास विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन विभागों की जिम्मेदारी किसे सौंपते हैं। फिलहाल, 14 जनवरी से पहले बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार की कोई संभावना नहीं जताई जा रही है।दो दिन पहले नितिन नबीन को भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गयाउल्लेखनीय है कि दो दिन पहले नितिन नबीन को भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह ने इसकी आधिकारिक घोषणा की थी। नियुक्ति पत्र में कहा गया कि भाजपा के संसदीय बोर्ड ने नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने का निर्णय लिया है।सोमवार को भाजपा मुख्यालय पहुंचकर अपना कार्यभार संभालानियुक्ति पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया कि यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होगी। इस आदेश की जानकारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, सभी प्रदेश प्रभारियों, प्रदेश अध्यक्षों और संगठन महामंत्रियों को भेज दी गई है। नितिन नबीन ने सोमवार को भाजपा मुख्यालय पहुंचकर अपने पद का कार्यभार भी संभाल लिया।पार्टी का निर्णय संगठनात्मक दृष्टि से अहमपार्टी के इस निर्णय को संगठनात्मक दृष्टि से एक अहम कदम माना जा रहा है। नितिन नबीन की नियुक्ति से राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा संगठन को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।बिहार प्रदेश अध्यक्ष के पद में भी बदलाव, विधायक संजय सरावगी को नई जिम्मेदारीगौरतलब है कि भाजपा संगठन में लगातार बदलाव कर रही है। इसी क्रम में पार्टी ने बिहार प्रदेश अध्यक्ष के पद पर भी बदलाव करते हुए दिलीप जायसवाल के स्थान पर दरभंगा के विधायक संजय सरावगी को नई जिम्मेदारी सौंपी है।

























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