- Home
- देश
-
नयी दिल्ली. इस लोकसभा चुनाव में मतदाताओं ने कई नए तो कई पुराने सेलिब्रिटी चेहरों को अपने जनप्रतिनिधि के रूप में पसंद किया है, जिनमें पहली बार सांसद बनने वाले कंगना रनौत और अरुण गोविल से लेकर हेमा मालिनी और मनोज तिवारी तक हैं। देश की 543 लोकसभा सीट के लिए सात चरणों में 19 अप्रैल से एक जून तक हुए चुनाव में फिल्मी दुनिया के कई नामचीन लोग मैदान में थे। हिंदी फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लंबे समय से समर्थक रनौत ने गृह राज्य हिमाचल प्रदेश के मंडी संसदीय क्षेत्र से पहला चुनाव जीता है। उन्होंने छह बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह को हराया है। कई बार अपने बयानों से विवाद में रहीं कंगना ने कहा था कि चुनाव जीतने के बाद अपना जीवन जन सेवा को समर्पित कर देंगी। सांसद के रूप में वह किस तरह काम करती हैं, इसे लेकर लोगों में काफी उत्सुकता है। इसी तरह धारावाहिक ‘रामायण' में राम का किरदार निभाकर मशहूर हुए अरुण गोविल को भाजपा ने पहली बार चुनाव में उतारा था। मेरठ लोकसभा सीट से उन्होंने समाजवादी पार्टी की सुनीता वर्मा को 10,585 मतों के अंतर से हराया है। हिंदी सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री हेमा मालिनी लगातार तीसरी बार मथुरा संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित हुई हैं। उन्होंने कांग्रेस के मुकेश धनगर को हराया है। भोजपुरी अभिनेता और गायक मनोज तिवारी ने उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट से कांग्रेस के कन्हैया कुमार को पराजित किया है। वह भी इस सीट से लगातार तीसरी बार भाजपा सांसद के रूप लोकसभा पहुंचे हैं। दिल्ली में भाजपा ने उन्हें छोड़कर बाकी छह सीट पर उम्मीदवार बदल दिए थे। भोजपुरी सिनेमा जगत के एक और मशहूर कलाकार रवि किशन ने भी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से समाजवादी पार्टी की काजल निषाद को हराकर दूसरी बार लोकसभा में जाने का मौका प्राप्त किया है। केरल में अभिनय से राजनीति में आए भाजपा उम्मीदवार सुरेश गोपी ने त्रिशूर सीट पर पहली बार जीत हासिल की है। उन्होंने भाकपा के वी.एस. सुनीलकुमार को हराया है। पश्चिम बंगाल की आसनसोल संसदीय सीट से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार और दिग्गज अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के एस.एस. अहलूवालिया को शिकस्त दी है। वह इससे पहले भाजपा और कांग्रेस के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने 2022 में तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया और आसनसोल लोकसभा उपचुनाव में जीत हासिल की। पूर्व अदाकारा और भाजपा सांसद स्मृति ईरानी उत्तर प्रदेश के अमेठी से कांग्रेस प्रत्याशी किशोरी लाल शर्मा से इस चुनाव में हार गई हैं। सांसद और अभिनेता दिनेश लाल यादव निरहुआ भी इस बार समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव के सामने जीतने में विफल रहे। अभिनेता और जनसेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण ने आंध्र प्रदेश की पिथापुरम विधानसभा सीट पर वाईएसआर कांग्रेस की वी.गंगा को पराजित किया है। बांग्ला फिल्मों में अभिनय करते हुए राजनीति में आईं तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जून मलिया ने मेदिनीपुर निर्वाचन क्षेत्र में कड़े मुकाबले में भाजपा की अग्निमित्रा पॉल को हरा दिया। मलिया मेदिनीपुर से पश्चिम बंगाल विधानसभा की सदस्य चुनी गई थीं। बांग्ला फिल्म और टेलीविजन की अभिनेत्री सायनी घोष ने पश्चिम बंगाल की जादवपुर सीट से भाजपा के अनिर्बान गांगुली को हरा दिया है। सायनी को इस बार अभिनेत्री मिमी चक्रवर्ती की जगह टिकट दिया गया था जो 2019 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीती थीं। पश्चिम बंगाल के बीरभूम में, तृणमूल कांग्रेस की तीन बार की सांसद और अभिनेत्री शताब्दी रॉय ने भाजपा के देबतनु भट्टाचार्य के खिलाफ शानदार जीत हासिल की। राज्य के हुगली और घाटल निर्वाचन क्षेत्रों में लड़ाई तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के सेलिब्रिटी चेहरों के बीच थी। लेकिन दोनों में तृणमूल ने बाजी मारी। हुगली से अभिनेत्री रचना बनर्जी ने भाजपा की उम्मीदवार और अभिनेत्री लॉकेट चटर्जी के खिलाफ जीत हासिल की। सांसद के रूप में यह रचना बनर्जी का पहला कार्यकाल होगा। तृणमूल कांग्रेस के देव अधिकारी ने साथी अभिनेता और भाजपा के हिरन चटर्जी को हराकर अपने निर्वाचन क्षेत्र घाटल पर कब्जा किया। यह उनका तीसरा कार्यकाल होगा। दशकों से फिल्मी हस्तियों और भारतीय राजनीति का गहरा नाता रहा है। सिनेमा जगत के नरगिस, सुनील दत्त, राजेश खन्ना, विनोद खन्ना, अमिताभ बच्चन और मुनमुन सेन जैसे चेहरे भी एक समय राजनीति में उतर चुके हैं। ‘रामायण' में सीता का किरदार निभा चुकीं दीपिका चिखलिया, रावण का किरदार अदा करने वाले अरविंद त्रिवेदी और ‘महाभारत' में कृष्ण के रूप में लोकप्रिय हुए नीतीश भारद्वाज भी निचले सदन के सदस्य रह चुके हैं। दक्षिण भारत में भी एन.टी. रामा राव, एम.जी. रामचंद्रन और जे. जयललिता जैसे दिग्गज राजनेता अभिनय की दुनिया से ही सियासत में आए थे। इनके अलावा कमल हासन, विजय, प्रकाश राज, भगवंत मान, परेश रावल, उर्मिला मातोंडकर, गोविंदा और किरण खेर जैसे अभिनय से जुड़े लोग भी राजनीति में सक्रिय रहे हैं।
-
मुंबई. महाराष्ट्र में भाजपा की हार की जिम्मेदारी लेते हुए उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को कहा कि वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेतृत्व से उन्हें सरकार के कर्तव्यों से मुक्त करने का अनुरोध करेंगे। फडणवीस ने मुंबई में भाजपा मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, मैं महाराष्ट्र में भाजपा की हार की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं। हम कुछ जगहों पर पिछड़ गए और महाराष्ट्र में खराब प्रदर्शन मेरी गलती है।'' फडणवीस ने कहा, ‘‘अगले विधानसभा चुनाव पर ध्यान केंद्रित करने और गलतियों को सुधारने के लिए मैं पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुझे सरकार के कर्तव्यों से मुक्त करने का अनुरोध करता हूं। मैं अपने वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करूंगा और उन्हें अपनी अपेक्षाओं के बारे में बताऊंगा।'' उनका यह बयान राज्य में लोकसभा चुनाव में भाजपा की हार के एक दिन बाद आया है।
फडणवीस ने कहा कि वह अपने वरिष्ठ साथियों के साथ चर्चा करेंगे और उनके मार्गदर्शन के अनुसार काम करेंगे। उन्होंने यह माना कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और राकांपा नेता तथा उपमुख्यमंत्री अजित पवार के साथ समन्वय की कुछ समस्याएं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम जल्द ही इसपर चर्चा करेंगे। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर बुधवार को बुद्ध जयंती पार्क में पौधारोपण कर पौधारोपण अभियान की शुरुआत की। अधिकारियों के मुताबिक इस अभियान का नाम ‘एक पेड़ मां के नाम' रखा गया है और इसके तहत देशभर में लाखों पेड़ लगाए जाएंगे। कार्यक्रम में मोदी के साथ केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना भी शामिल हुए।
-
नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल की सलाह पर बुधवार को 17वीं लोकसभा को भंग कर दिया। राष्ट्रपति भवन ने यह जानकारी दी। राष्ट्रपति भवन के अनुसार बुधवार को हुई बैठक में मंत्रिमंडल ने राष्ट्रपति को वर्तमान लोकसभा को तत्काल प्रभाव से भंग करने की सलाह दी थी। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘राष्ट्रपति ने पांच जून, 2024 को मंत्रिमंडल की सलाह को स्वीकार कर लिया है और संविधान के अनुच्छेद 85 के खंड (2) के उप-खंड (बी) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 17वीं लोकसभा को भंग करने के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।'' मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल 16 जून को समाप्त होना था।
इससे पहले दिन में प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को अपना इस्तीफा राष्ट्रपति मुर्मू को सौंप दिया जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया और उनसे नयी सरकार के कार्यभार संभालने तक पद पर बने रहने को कहा। मंगलवार को हुई मतगणना में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने बहुमत हासिल कर लिया। राजग को 543 सदस्यीय लोकसभा में बहुमत के जादुई आंकड़े (272) से अधिक सीटें मिलीं। हालांकि 2014 के बाद पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला। भाजपा को सरकार बनाने के लिए अब अपने गठबंधन सहयोगियों पर निर्भर रहना होगा। -
मंडी. हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से जीत दर्ज करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीदवार अभिनेत्री कंगना रनौत ने मंगलवार को कहा कि यह जीत सबकी है और इसका श्रेय मंडी के लोगों तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति उनके विश्वास को जाता है। कंगना ने मंडी लोकसभा सीट पर कांग्रेस के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार विक्रमादित्य सिंह को 74,755 मतों के अंतर से हराकर जीत हासिल कर ली है। भाजपा के लिए पहली बार चुनाव लड़ रहीं रनौत को एक नेता के रूप में अपने पहले लोकसभा चुनाव में 5,37,022 वोट मिले। चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद कंगना (37) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्हें आधिकारिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते देखा जा सकता है। कंगना ने कहा, ‘‘इस प्यार और विश्वास के लिए मंडी की सभी जनता का हृदय से आभार... ये जीत आप सबकी है, ये प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा पर आपके विश्वास की जीत है, ये सनातन की जीत है, मंडी के सम्मान की जीत है।'' कंगना ने विधानसभा में विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर, विधायकों, भाजपा कार्यकर्ताओं और जनता को उन्हें चुनने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी जीत का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को जाता है। कंगना ने कहा कि लोगों ने पारिवारिक विरासत के खिलाफ और आम जनता के पक्ष में वोट दिया है। उन्होंने कहा कि वह मंडी के लोगों के लिए सच्चे दिल से काम करेंगी।
-
पटना. बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार बुधवार को दिल्ली में होने वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की बैठक में हिस्सा लेंगे। सूत्रों ने यहां यह जानकारी दी। जदयू ने राज्य की 40 लोकसभा सीट में से 12 पर जीत हासिल की है। कुमार बुधवार सुबह दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
कुमार ने सप्ताहांत में दिल्ली का दौरा किया था और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की थी। भाजपा के बहुमत से दूर रहने के कारण कुमार 'किंगमेकर' की भूमिका निभा सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया' द्वारा कुमार को अपने पाले में किए जाने की कोशिश की जा रही है। -
अमरावती . आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस अब्दुल नजीर ने मंगलवार को मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया और उनसे नयी सरकार के गठन तक पद पर बने रहने का अनुरोध किया। राज्यपाल के विशेष मुख्य सचिव अनिल कुमार सिंघल ने बताया कि नजीर ने मंगलवार को रेड्डी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। सिंघल ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।'' उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने इस्तीफा स्वीकार करते हुए रेड्डी से नयी सरकार के गठन तक पद पर बने रहने का अनुरोध किया है। आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआर कांग्रेस) की हार के बाद रेड्डी ने राज्यपाल नजीर को अपना इस्तीफा सौंपा। आंध्र प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष तम्मिनेनी सीताराम भी अम्डालावालसा विधानसभा क्षेत्र में तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) नेता एवं अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी के. रवि कुमार से चुनाव हार गए। निर्वाचन आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, तेदेपा ने 124 सीट पर जीत हासिल की और वह 10 सीट पर आगे है। जनसेना ने 20, भाजपा ने छह और वाईएसआर कांग्रेस ने आठ सीट पर जीत हासिल की है।
-
अमरावती (आंध्र प्रदेश). तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार को लोकसभा चुनाव और आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की शानदार जीत पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बधाई दी। आंध्र प्रदेश में तेदेपा ने इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनसेना के साथ मिलकर राजग गठबंधन के बैनर तले चुनाव लड़ा था। तीनों दलों ने मिलकर निवर्तमान मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को मात देकर जीत दर्ज की है। नायडू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर प्रधानमंत्री मोदी को प्रेषित संदेश में कहा, ‘‘आंध्र प्रदेश की जनता की ओर से मैं आपको लोकसभा और आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों में राजग की जीत पर बधाई देता हूं। आंध्र प्रदेश की जनता ने हमें शानदार जनादेश का आशीर्वाद दिया है।'' नायडू ने यह संदेश मोदी द्वारा पोस्ट किए गए एक संदेश के जवाब में लिखा। उन्होंने राजग को 'असाधारण जनादेश' देने के लिए आंध्र प्रदेश के लोगों को धन्यवाद दिया। इसके अलावा नायडू ने कहा कि यह जनादेश राजग और राज्य के लिए उसके दृष्टिकोण पर जताए गए विश्वास को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा, ‘‘हम अपने लोगों के साथ मिलकर आंध्र प्रदेश का पुनर्निर्माण करेंगे और दोबारा इसका गौरव स्थापित करेंगे।'' निर्वाचन आयोग के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, तेदेपा ने 122 विधानसभा सीट जीत ली है जबकि 12 सीट पर वह आगे चल रही है। वहीं सहयोगी दल जनसेना ने 20 सीट पर जीत दर्ज की है और एक पर बढ़त बनाए हुए है। राज्य में गठबंधन के तीसरे घटक भाजपा ने छह सीट पर जीत दर्ज की है और दो पर आगे चल रही है। इस तरह राजग आंध्र प्रदेश विधानसभा में अब तक 148 सीट पर जीत दर्ज कर चुका है। लोकसभा चुनाव में भी इस गठबंधन का प्रदर्शन शानदार रहा है। नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, तेदेपा आठ लोकसभा सीट जीत चुकी है और आठ पर बढ़त बनाए हुए है। भाजपा ने दो सीट जीती हैं और एक पर आगे चल रही है।वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने तीन सीट पर जीत दर्ज की है और एक पर आगे है।जनसेना दो सीटों पर आगे चल रही है। आंध्र प्रदेश में 13 मई को एक ही चरण में 175 सदस्यीय विधानसभा और लोकसभा की 25 सीटों के लिए मतदान हुआ था। -
अमरावती. तीन साल पहले, गुस्से में तमतमाए चंद्रबाबू नायडू राज्य विधानसभा से बाहर निकल आए थे और कसम खाई थी कि वह तभी लौटेंगे जब मुख्यमंत्री बन जाएंगे। आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) को प्रचंड बहुमत दिलाकर नायडू मंगलवार को अपनी इस शपथ को पूरा करते दिखे। 2021 में परिवार के सदस्य के खिलाफ टिप्पणी के विरोध में नायडू ने विधानसभा से बहिर्गमन किया था।
मतगणना के ताजा आंकड़ों के अनुसार तेदेपा 175 सदस्यीय विधानसभा में 122 सीट पर जीत हासिल कर चुकी है और 12 पर आगे है। वहीं, उसकी सहयोगी भाजपा छह सीट पर जीत दर्ज कर चुकी है जबकि एक पर आगे है और जनसेना पार्टी 20 सीट जीत चुकी है व एक सीट पर आगे चल रही है। निवर्तमान विधानसभा में तेदेपा के 23 सदस्य हैं। पिछले साल सितंबर में नायडू को स्किल डेवलेपमेंट घोटाले में राज्य की सीआईडी ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्होंने खुद को फिर से राजनीतिक रूप से साबित किया है। 9 सितंबर को तड़के गिरफ्तार किये गए नायडू ने लगभग दो महीने राजामहेंद्रवरम केंद्रीय जेल में बिताए। लोकसभा चुनाव में भी नायडू ने अच्छा प्रदर्शन किया है। वह 'किंगमेकर' के तौर पर उभरे हैं, क्योंकि सत्तारूढ़ राजग में भाजपा के बाद तेदेपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है और 543 सदस्यीय लोकसभा में भाजपा साधारण बहुमत से दूर दिखाई दे रही है। इसका अर्थ यह है कि सरकार के गठन के लिए भाजपा तेदेपा और जनता दल (यूनाइटेड) पर निर्भर है। निर्वाचन आयोग के रात दस बजे तक के आंकड़ों के अनुसार तेदेपा ने आंध्र प्रदेश की कुल 25 में से आठ सीट पर जीत दर्ज की है और आठ पर वह आगे चल रही है। वहीं उसकी सहयोगी भाजपा ने दो सीट जीत ली है और एक पर वह आगे है। जबकि जनसेना पार्टी दो सीट पर बढ़त बनाए हुए है। आंध्र प्रदेश में अलग अलग समय पर 13 वर्ष तक मुख्यमंत्री रहने के दौरान कई कीर्तिमान रच चुके नायडू को आईटी क्षेत्र में अपने राज्य को अग्रणी स्थान पर ले जाने का श्रेय दिया जाता है तथा वह राज्य ही नहीं केंद्र की राजनीति के भी कुशल रणनीतिकार रहे हैं। नायडू ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य के दर्जे को लेकर मार्च, 2018 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से नाता तोड़ लिया था, लेकिन वर्ष 2019 के विधानसभा व लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार ने उन्हें सियासी नेपथ्य में धकेल दिया। ठीक छह साल बाद मार्च, 2024 में नायडू ने राजग में वापसी की और आंध्र प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), जनसेना के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा। गठबंधन के तहत प्रदेश की कुल 175 विधानसभा सीट में से तेदेपा 144, जनसेना 21 और भाजपा 10 सीट पर चुनाव लड़ी। राज्य में भाजपा के साथ गठबंधन में होने के बावजूद मुस्लिम आरक्षण जैसे मुद्दे पर नायडू ने अपना अलग रुख रखा और मुस्लिम आरक्षण की पैरवी की। उन्होंने खुलकर कहा, ''हम शुरू से ही मुसलमानों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण का समर्थन कर रहे हैं और यह जारी रहेगा।'' हालांकि अपने घोषणापत्र में तेदेपा ने इस मुद्दे से दूरी बना ली।
राजग में लौटने के बाद भले ही नायडू प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हर मौके पर सराहना करते दिखे हों, लेकिन पूर्व में उनके साथ रिश्ते सहज नहीं रहे हैं। नायडू ने 2002 में गुजरात दंगे के बाद मोदी का विरोध किया था। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर नायडू के नाम पर कई कीर्तिमान भी हैं। वह आंध्र प्रदेश के सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहे हैं। उन्होंने कई कार्यकाल में 13 साल 247 दिन तक मुख्यमंत्री का पद संभाला है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश के वह ऐसे एकमात्र नेता हैं जिन्होंने अविभाजित और विभाजन (आंध्र से अलग कर तेलंगाना का गठन) के बाद राज्य की बागडोर संभाली। मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान नायडू की छवि एक आर्थिक सुधारक और सूचना प्रौद्योगिकी आधारित आर्थिक विकास को बढ़ावा देने वाले नेता की रही है। उन्होंने हैदराबाद को साइबर सिटी के तौर पर विकसित किया। उन्होंने राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास पर भी ध्यान केंद्रित किया, जिसमें नई राजधानी अमरावती का निर्माण भी शामिल है। राज्य ही नहीं राष्ट्रीय राजनीति में भी नायडू का खासा दबदबा रहा है। वर्ष 1996 और 1998 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने संयुक्त मोर्चा का नेतृत्व किया। 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को समर्थन देने से पहले वह संयुक्त मोर्चा के संयोजक थे। नायडू राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के संयोजक भी रहे। एन. चंद्रबाबू नायडू का जन्म 20 अप्रैल 1950 को आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव नारावरिपल्ले में हुआ था। उनके पिता एन खर्जुरा नायडू एक किसान थे और उनकी मां अम्मानम्मा एक गृहिणी थीं। नायडू ने शेषपुरम के स्कूल से प्राथमिक शिक्षा और चंद्रगिरि के सरकारी स्कूल से 10वीं की। इसके बाद तिरुपति से 1972 में श्री वेंकटेश्वर आर्ट्स कॉलेज से स्नातक और वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में परास्नातक किया। उन्होंने अर्थशास्त्र में पीएचडी भी की है। नायडू का सियासी सफर 1970 के दशक में शुरू हुआ और परास्नातक की पढ़ाई के दौरान वह श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय में छात्र संघ के नेता निर्वाचित हुए। इसके बाद वह युवा कांग्रेस में शामिल हो गए और फिर आंध्र प्रदेश की क्षेत्रीय पार्टी तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) में चले गए। उन्होंने फिल्म अभिनेता और पार्टी संस्थापक एनटी रामा राव की पुत्री भुवनेश्वरी से विवाह किया। नायडू पहली बार 1978 में आंध्र प्रदेश विधान सभा के लिए निर्वाचित हुए और मंत्री के रूप में कार्य किया। वर्ष 1995 में, वह अपने ससुर एन टी रामा राव के राजनीतिक तख्तापलट के बाद पहली बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। नायडू 1999 में फिर से मुख्यमंत्री चुने गए और 2004 तक पद पर रहे। आंध्र प्रदेश का विभाजन कर तेलंगाना का गठन किये जाने के बाद 2014 में वह तीसरी बार राज्य (आंध्र प्रदेश) के मुख्यमंत्री बने। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी से करारी हार के बाद तेदेपा सत्ता से बाहर हो गई थी। -
अमरावती. आंध्र प्रदेश में विपक्षी दलों की एकजुटता के साथ सत्ता विरोधी लहर ने सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस को परास्त कर दिया और राज्य में तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) विजयी रहा। आंध्र प्रदेश के मतदाताओं ने स्पष्ट रूप से यह शानदार संदेश दिया कि वे चुनावों में मौजूदा वाईएसआर कांग्रेस सरकार को खारिज करके क्षणिक कल्याण पहल की जगह सतत विकास को प्राथमिकता देते हैं। वाईएसआरसीपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जनता और पार्टी कैडर के बीच जुड़ाव नहीं था क्योंकि सरकार के कल्याण उपाय प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से किए जाते हैं। इस नेता ने कहा कि शराबबंदी और वार्षिक नौकरी कैलेंडर जारी करने जैसे वादों के पूरा न होने से भी संभवत: युवाओं का पार्टी से मोहभंग हुआ। जगन के कल्याण दावों को तेदेपा ने अपनी "सुपर सिक्स" घोषणाओं के साथ प्रभावी ढंग से खारिज किया जिसमें 19 से 59 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक पेंशन, युवाओं के लिए 20 लाख नौकरियां या 3,000 रुपये मासिक बेरोजगारी सहायता और महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा शामिल है। मौजूदा सरकार को बाहर का रास्ता दिखाने का मतदाताओं का निर्णय अल्पकालिक लाभों पर दीर्घकालिक विकास और प्रगति की प्राथमिकता को रेखांकित करता है, जो राज्य में सकारात्मक परिवर्तन को स्थायी करने के लिए सामूहिक आकांक्षा का संकेत देता है। एक-दो को छोड़कर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सभी निवर्तमान मंत्री सत्ता विरोधी लहर में बह गए। मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली पार्टी 2019 के विधानसभा चुनाव में 151 सीट जीतकर सत्ता में आई थी, लेकिन इस बार यह केवल 10 सीट पर आगे दिखी। इसने 2019 के लोकसभा चुनाव में 22 सीट जीती थीं, लेकिन इस बार यह केवल चार सीट तक सिमटती दिख रही है। -
भुवनेश्वर. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ओडिशा की 147-सदस्यीय विधानसभा में 74 सीट जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। भारत निर्वाचन आयोग ने इसकी जानकारी दी। आयोग के अनुसार, विधानसभा चुनाव में मतों की गिनती जारी है और भारतीय जनता पार्टी ने 74 सीट जीत ली हैं जबकि चार निर्वाचन क्षेत्रों में उनके उम्मीदवार बढ़त बनाये हुए हैं। ओडिशा में वर्ष 2000 से सत्तारूढ़ बीजद को विधानसभा में इस बार 50 सीट मिली हैं और एक सीट पर उसका उम्मदवार आगे है। कांग्रेस को इस चुनाव में 14 सीट से संतोष करना पड़ा है। ओडिशा में 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजद ने 113 सीट पर जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा और कांग्रेस के खाते में क्रमश: 23 एवं नौ सीट गयी थीं।
- नयी दिल्ली। क्रिकेट स्टार कीर्ति आजाद और यूसुफ पठान ने दिग्गजों को हराया जबकि महान फुटबॉलर प्रसून बनर्जी भी जीत दर्ज करने में सफल रहे लेकिन अन्य खिलाड़ियों को हार का सामना करना पड़ा जिससे लोकसभा चुनावों में भारत के खिलाड़ियों के लिए दिन मिला-जुला रहा। भाला फेंक में दो बार के पैरालंपिक चैंपियन देवेंद्र झझारिया और दिग्गज हॉकी खिलाड़ी तथा हॉकी इंडिया के मौजूदा अध्यक्ष दिलीप टिर्की को क्रमश: राजस्थान के चुरू और ओडिशा के सुंदरगढ़ में शिकस्त झेलनी पड़ी। तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए आजाद और पठान देनों ने दिग्गज राजनेताओं को हराकर जीत दर्ज की। तृणमूल के टिकट पर चुनाव लड़ रहे एक अन्य दिग्गज खिलाड़ी पूर्व फुटबॉल कप्तान बनर्जी पश्चिम बंगाल की हावड़ा सीट पर 1.69 लाख मतों से जीत दर्ज करते हुए लगातार तीसरी बार लोकसभा सदस्य बने। कपिल देव की अगुआई में 1983 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य रहे आजाद ने राजनीति में जोरदार वापसी करते हुए पश्चिम बंगाल की बर्धमान-दुर्गापुर सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिग्गज नेता दिलीप घोष को हराया। आजाद ने मेदिनीपुर के निवर्तमान सांसद और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष घोष को 1,37,981 मतों से हराया। गुजरात के पठान ने पांच बार के कांग्रेस सांसद और लोकसभा के निवर्तमान विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी पर पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट पर 85 हजार से अधिक मतों से जीत दर्ज की। यूसुफ जहां पहली बार राजनीति में भाग्य आजमा रहे हैं तो वहीं आजाद को राजनीति का अच्छा खासा अनुभव है और वह पहले भी सांसद रह चुके हैं। पहली बाद दावेदारी पेश कर रहे झझारिया को चुरू लोकसभा सीट पर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए कांग्रेस के राहुल कस्वान के खिलाफ 72,737 वोट से हार का सामना करना पड़ा। टिर्की भी बीजू जनता दल की ओर से सुंदरगढ़ सीट पर चुनाव लड़ते हुए भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम के खिलाफ हार गए।
- जयपुर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लोकसभा चुनाव में राजस्थान की 25 में से 14 लोकसभा सीट पर जीत हासिल की है जबकि विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' 11 सीट पर कब्जा जमाने में सफल रहा। कांग्रेस के खाते में आठ सीट आई हैं।कांग्रेस ने राज्य में दस साल में पहली बार खाता खोला है। इसे पिछले साल विधानसभा चुनाव में हार के बाद उसकी बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के घटक दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) व राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) एक-एक सीट जीतने में सफल रही। वहीं बांसवाड़ा सीट पर भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) का उम्मीदवार जीता। कांग्रेस ने इस सीट पर बीएपी का समर्थन किया था। राजस्थान की 25 सीट पर दो चरणों में हुए मतदान का परिणाम मंगलवार को घोषित हुआ। चुनाव जीतने वाले उम्मीदवारों में पांच मौजूदा विधायक (तीन कांग्रेस, एक बीएपी और एक आरएलपी) हैं। भाजपा के उम्मीदवार व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी बाड़मेर सीट से हार गए। भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के आम चुनाव में राज्य की सभी 25 संसदीय सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं 2019 में राजग ने सभी सीटें (24 भाजपा और एक आरएलपी) जीतीं थीं। इस बार भाजपा ने सभी 25 सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा। वहीं कांग्रेस ने सीकर में माकपा और नागौर में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के साथ गठबंधन किया और बांसवाड़ा सीट पर उसने भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) का समर्थन किया। राजस्थान की बागीदौरा विधानसभा सीट के उपचुनाव में भारत आदिवासी पार्टी ने बाजी मारी। पार्टी उम्मीदवार जयकृष्ण पटेल ने 51,308 मतों से जीत दर्ज की। चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा कि विपक्षी दलों ने चुनाव के दौरान अप्रासंगिक मुद्दे उठाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की और यह राजग ही था, जिसे सभी का समर्थन, स्नेह और आशीर्वाद मिला। राज्य में भाजपा को एक चुनावी झटका केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी की हार से भी लगा। बाड़मेर सीट पर कांग्रेस के उम्मेदाराम बेनीवाल जीते। चौधरी तीसरे स्थान पर रहे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कोटा सीट से चुनाव जीत गये। केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल लगातार चौथी बार बीकानेर से, गजेन्द्र सिंह शेखावत तीसरी बार जोधपुर से और भूपेन्द्र यादव पहली बार अलवर से चुनाव जीते हैं। राज्यसभा सदस्य यादव को अलवर से उतारा गया था। भाजपा ने भरतपुर सीट कांग्रेस के हाथों गंवा दी। गौरतलब है कि कांग्रेस मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृहनगर है। भाजपा के विजयी उम्मीदवारों में जयपुर ग्रामीण से राव राजेंद्र सिंह, जयपुर से मंजू शर्मा, अजमेर से भागीरथ चौधरी, पाली से पीपी चौधरी, जालोर से लुंबाराम, उदयपुर से मन्नालाल रावत, चित्तौड़गढ़ से चंद्रप्रकाश जोशी, राजसमंद से महिमा कुमारी मेवाड़, भीलवाड़ा से दामोदर अग्रवाल तथा झालावाड़ बारां से दुष्यंत सिंह हैं। वहीं कांग्रेस के विजयी उम्मीदवारों में गंगानगर से कुलदीप इंदौरा, चुरू से राहुल कस्वां, झुंझुनू से बृजेंद्र ओला, भरतपुर से संजना जाटव, करौली-धौलपुर से भजनलाल जाटव, दौसा से मुरारी लाल मीणा, टोंक सवाई माधोपुर से हरीश मीणा, बाड़मेर से उम्मेदाराम बेनीवाल हैं। विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया' के उम्मीदवार अमराराम (माकपा) ने सीकर सीट जीती है। वहीं हनुमान बेनीवाल (आरएलपी) नागौर सीट पर विजयी रहे। बांसवाड़ा सीट पर कांग्रेस समर्थित भारत आदिवासी पार्टी के उम्मीदवार राजकुमार रोत जीत गए हैं।
- शिमला। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को हिमाचल प्रदेश की सभी चार लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज कर ली। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने हमीरपुर लोकसभा सीट से लगातार पांचवीं बार जीत हासिल की जबकि अभिनेत्री कंगना रनौत और राजीव भारद्वाज ने क्रमश: मंडी और कांगड़ा सीट से अपना अपना पहला चुनाव जीता। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप ने अपनी शिमला सीट बरकरार रखी। कांग्रेस न केवल मंडी लोकसभा सीट बरकरार रखने में विफल रही, जिसे 2021 के उपचुनाव में प्रदेश कांग्रेस प्रमुख प्रतिभा ने छीना था, बल्कि शिमला (सुरक्षित) सीट के गढ़ को फिर से हासिल करने का उसका सपना भी टूट गया, क्योंकि भाजपा ने लगातार चौथी बार यह सीट जीत ली। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत का अंतर जो कांगड़ा में 4,77,623, मंडी में 4,05,559, हमीरपुर में 3,99,572 और शिमला (सुरक्षित) में 3,27,515 था, वह घटकर क्रमशः कांगड़ा में 2,51,895, मंडी में 7,4755, हमीरपुर में 1,82,357 और शिमला में 9,05,48 रह गया।
- लखनऊ,। रक्षा मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार राजनाथ सिंह अपनी परंपरागत लखनऊ संसदीय सीट से लगातार तीसरी बार चुनाव जीत गए। निर्वाचन आयोग द्वारा दी गयी जानकारी में यह जानकारी सामने आई। आयोग के अनुसार, राजनाथ सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी (सपा) के रविदास मेहरोत्रा को 1,35,159 मतों के अंतर से पराजित किया। हालांकि उनकी जीत का अंतर इस बार कम हो गया। सिंह ने 2019 लोकसभा चुनाव में 3.47 लाख से अधिक मतों के अंतर से सपा उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा को पराजित किया था। आयोग के मुताबिक, राजनाथ सिंह को इस बार 6,12,709 मत मिले जबकि मेहरोत्रा को 4,77,550 को वोट प्राप्त हुए। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के मोहम्मद सरवर मलिक को 30,192 मतों से संतोष करना पड़ा। दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 1991 से 2004 तक लगातार पांच बार चुनाव जीता था। राजनाथ सिंह ने इससे पहले 2009 में गाजियाबाद सीट से चुनाव जीता था।
- अहमदाबाद। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुजरात में अब तक 25 लोकसभा सीट में से 14 पर जीत हासिल की है। निर्वाचन आयोग द्वारा मंगलवार शाम घोषित परिणामों में यह जानकारी मिली। आयोग के अनुसार, भाजपा ने अहमदाबाद पूर्व, अहमदाबाद पश्चिम, बारडोली, भरूच, भावनगर, छोटा उदयपुर, गांधीनगर, जामनगर, जूनागढ़, खेड़ा, महेसाणा, नवसारी, राजकोट और साबरकांठा पर जीत हासिल की है। राज्य की 26 लोकसभा सीट में से 25 के लिए मतगणना सुबह आठ बजे शुरू हुई। शेष 11 सीट पर परिणाम का इंतजार है, जहां मतगणना प्रक्रिया जारी है। भाजपा सूरत सीट पर पहले ही निर्विरोध जीत हासिल कर चुकी है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह और परुषोत्तम रूपाला तथा गुजरात की भाजपा इकाई के अध्यक्ष सीआर पाटिल अब तक जीत हासिल करने वाले प्रमुख उम्मीदवारों में शामिल हैं। शाह ने गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में 7.44 लाख से अधिक मतों से जीत दर्ज की। भरूच सीट पर भाजपा के मौजूदा सांसद मनसुख वसावा ने आम आदमी पार्टी के चैतर वसावा को 85,696 मतों के अंतर से हराया। भाजपा के एच.एस. पटेल ने अहमदाबाद-पूर्व लोकसभा सीट से 4.61 लाख मतों के अंतर से जीत हासिल की जबकि दिनेश मकवाना अहमदाबाद-पश्चिम से 2.86 लाख वोटों से जीते। इसके अलावा हरिभाई पटेल महेसाणा से 3.28 लाख वोटों से जीते और राजेश चूडासमा जूनागढ़ से 1.35 लाख वोटों के अंतर से जीते। इन सभी ने अपने निकटतम कांग्रेस प्रतिद्वंद्वियों को हराया।
- नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की जीत को ‘विकसित भारत' के प्रण की जीत करार दिया और कहा कि इस चुनाव में देशवासियों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके नेतृत्व वाले गठबंधन पर ‘पूर्ण विश्वास' जताया है। चुनाव नतीजे स्पष्ट होने के बाद भाजपा मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘आज की ये विजय दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की जीत है। ये भारत के संविधान पर अटूट निष्ठा की जीत है। ये विकसित भारत के प्रण की जीत है। ये सबका साथ-सबका विकास के मंत्र की जीत है। ये 140 करोड़ भारतीयों की जीत है।''
- नयी दिल्ली। लोकसभा चुनाव में लगभग सभी एग्जिट पोल (चुनाव बाद सर्वेक्षण) के अनुमान गलत साबित हुए और असल नतीजे इनके आकलन के विपरीत रहे। लगभग सभी एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को प्रचंड बहुमत मिलने का अनुमान लगाया गया था। ‘रिपब्लिक टीवी-पी मार्क' के सर्वेक्षण में दावा किया गया था कि 543 सदस्यीय लोकसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन 359 सीट तक जीत हासिल करेगा और विपक्षी ‘इंडिया' गठबंधन को 154 सीट मिलेंगी। 'रिपब्लिक टीवी-मैट्रिज़' के एग्जिट पोल में राजग को 353-368 सीट और विपक्ष को 118-133 सीट मिलने का अनुमान जताया गया था। ‘जन की बात' के सर्वेक्षण में सत्तारूढ़ राजग को 362-392 सीट और विपक्षी गठबंधन को 141-161 सीट दी गई थी। ‘इंडिया टीवी-सीएनएक्स' ने अपने अनुमान में राजग को 371-401 और ‘इंडिया' गठबंधन को 109-139 सीटें दी थीं, जबकि ‘न्यूज नेशन' द्वारा अनुमान जताया गया था कि राजग को 342-378 और ‘इंडिया' गठबंधन को 153-169 सीट मिल सकती हैं। ‘एक्सिस माई इंडिया' और ‘टुडेज़ चाणक्य' सहित कई अन्य एग्जिट पोल ने रात 8.30 बजे तक पूर्ण अनुमानित परिणामों की भविष्यवाणी नहीं की थी।
- नयी दिल्ली। सड़कों पर अपनी पार्टी के पोस्टर और पर्चे चिपका कर अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने वाले अमित शाह को भारतीय जनता पार्टी की चुनावी रणनीति तैयार करने वाला ‘चाणक्य' कहा जाता है क्योंकि वह बूथ से लेकर चुनाव मैदान तक प्रबंधन और प्रचार की ऐसी सधी हुई बिसात बिछाते हैं कि मंझे से मंझे राजनीतिक खिलाड़ी भी अक्सर मात खा जाते हैं। शतरंज खेलने से लेकर क्रिकेट देखने एवं संगीत में में गहरी रुचि रखने वाले अमित शाह को राजनीति का माहिर रणनीतिकार माना जाता है । इस वर्ष अक्तूबर में अपने जीवन के छह दशक पूरे करने जा रहे शाह को राज्य दर राज्य भाजपा की सफलता गाथा लिखने का सूत्रधार माना जाता है।मंगलवार को घोषित आम चुनाव के परिणामों में शाह ने गांधीनगर संसदीय सीट को अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को सात लाख 44 हजार से अधिक मतों के अंतर से पराजित किया। वर्तमान लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और दक्षिण भारत में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन के लिए उनकी सफल रणनीति को श्रेय दिया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शाह ने विचारधारा की दृढ़ता, असीमित राजनीतिक कल्पनाशीलता और वास्तविक राजनीतिक लचीलेपन का शानदार मिश्रण करके चुनावी समर में भाजपा की शानदार जीत का मार्ग प्रशस्त किया । उन्होंने बिहार और महाराष्ट्र में न केवल राजग के घटक दलों के साथ गठबंधन को लेकर लचीला रुख अपनाया बल्कि स्थानीय स्तर पर प्रतिद्वन्द्वी दलों के वोट बैंक को अपनी पार्टी के पाले में लाने की रणनीति को अंजाम दिया । चुनाव प्रबंधन के खिलाड़ी शाह ने पहली बार 1991 के लोकसभा चुनाव में गांधीनगर में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का चुनाव प्रबंधन संभाला था। लेकिन, उनके बूथ प्रबंधन का करिश्मा 1995 के उपचुनाव में तब नजर आया, जब साबरमती विधानसभा सीट पर तत्कालीन उप मुख्यमंत्री नरहरि अमीन के खिलाफ चुनाव लड़ रहे अधिवक्ता यतिन ओझा का चुनाव प्रबंधन उन्हें सौंपा गया। खुद यतिन कहते हैं कि शाह को राजनीति के सिवा और कुछ नहीं दिखता। उनके करीबी बताते हैं कि पारिवारिक और सामाजिक मेल-मिलाप में वह बहुत कम वक्त जाया करते हैं। शाह को कार्यकर्ताओं की अच्छी परख है और वह संगठन व प्रबंधन के माहिर खिलाड़ी हैं। शाह ने पहली बार सरखेज से 1997 के विधानसभा उपचुनाव में किस्मत आजमायी और तब से 2012 तक लगातार पांच बार वहां से विधायक चुने गये। सरखेज की जीत ने उन्हें गुजरात में युवा और तेजतर्रार नेता के रूप में स्थापित किया। उस जीत के बाद वह भाजपा में लगातार सीढ़ियां चढ़ते गए। मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद शाह और अधिक मजबूती से उभरे। 2003 से 2010 तक गुजरात सरकार की कैबिनेट में उन्होंने गृह मंत्रालय का जिम्मा संभाला। हालांकि उन्हें इस बीच कई सियासी उतार-चढ़ावों का सामना करना पड़ा, लेकिन जब नरेंद्र मोदी को राष्ट्रीय राजनीतिक पटल पर लाया गया तो उनके सबसे करीबी माने जाने वाले अमित शाह को भी पूरे देश में भाजपा के प्रचार प्रसार में शामिल किया गया । शाह जुलाई 2014 से जनवरी 2020 तक भाजपा अध्यक्ष पद का दायित्व संभाला। इस दौरान भाजपा ने कई राज्यों में विजय प्राप्त की। अध्यक्ष पद से हटने के बाद भी शाह पार्टी संगठन में अपनी सक्रियता और रुचि निरंतर बनो रखे हुए हैं। उत्तर प्रदेश में उन्होंने लोकसभा चुनाव 2014 में पार्टी को 80 में से 71 सीटों पर जीत दिलवा कर अपनी राजनीतिक क्षमता भी साबित की। त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भी भाजपा की कामयाबी के पीछे शाह की रणनीति को महत्वपूर्ण माना जाता है । शाह ने अगस्त 2019 में गृह मंत्री के तौर पर संसद में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के प्रस्ताव के समय जिस तैयारी के साथ विपक्षी पार्टियों की अलोचनाओं की धार को कुंद किया और जिस प्रकार जम्मू कश्मीर में बिना किसी खून-खराबे के इसे लागू करवाया, उससे इनके कुशल प्रशासक होने की छवि काफी मजबूत हुई। शाह ने गृह मंत्री के तौर पर संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को संसद से पारित करवाने के समय भी काफी दृढ़ता का परिचय दिया।
- कोलकाता।' भारत के पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान ने पश्चिम बंगाल की बहरामपुर सीट से चुनाव जीत लिया है.। उन्होंने 5 बार के सांसद रहे अधीर रंजन चौधरी को 64,084 वोटों के अंतर से हराया है.। उन्होंने अपनी जीत पक्की होते ही पश्चिम बंगाल के लोगों से वादा कर दिया है कि वो सबसे पहला काम एक स्पोर्ट्स अकादमी बनाने का करेंगे। आंकड़ों के अनुसार यूसुफ पठान ने 4,23,451 वोट हासिल किए। वहीं दूसरे स्थान पर रहे अधीर रंजन चौधरी को 3,59,367 वोट मिले हैं.। उन्होंने अधीर रंजन का सम्मान करने की बात कही और खेल अकादमी खोलने का वादा भी किया.।यूसुफ पठान ने कहा, "मैं अधीर रंजन जी का बहुत सम्मान करता हूं. । वे बहुत सीनियर लीडर हैं और भविष्य के लिए उन्हें शुभकामनाएं देता हूं.। वे हारे हैं, लेकिन मेरे मन में उनके लिए सम्मान हमेशा बना रहेगा. ।मैं केवल क्रिकेट ही नहीं बल्कि यहां स्पोर्ट्स अकादमी बनाने वाला हूं. केवल क्रिकेट ही नहीं बल्कि अन्य खेलों पर भी ध्यान दिया जाएगा. । यहां बच्चे और भी खेल खेलते हैं और मैं चाहता हूं कि उनका टैलेंट बाहर निकल कर आए.। मेरी इच्छा है कि यहां के बच्चे अपने राज्य और देश के लिए मेडल जीतें.। मैं कोशिश करूंगा कि मैंने जो भी वादे किए हैं, उन सबको पूरा करूं।."यूसुफ ने राजनीति में आने के टीएमसी के प्रस्ताव को स्वीकार करने के बाद कहा था, ‘‘ऊपरवाले का रहम, करम बोलें (इसे भगवान की दया, आशीर्वाद कहें), मुझे हमेशा लगता है कि मैं बड़े मैचों, क्षणों का गवाह बनते रहा हूं।'' उन्होंने कहा था, ‘‘मुझे बस उनके लिए बल्लेबाजी करनी है। मैं राजनेता नहीं बनना चाहता। मैं एक खिलाड़ी की अपनी छवि बरकरार रखना चाहता हूं। लेकिन जीतने के बाद, मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र के लिए काम करूंगा और सुनिश्चित करूंगा कि मैं कम से कम महीने में आठ दिन यहां रहूं।'' क्रिकेट के मैदान में अपने बड़े शॉट के लिए जाने जाने वाले यूसुफ के लिए राजनीति में जाना एक आश्चर्यजनक निर्णय था। इस 41 साल के खिलाड़ी ने हालांकि काफी सोच विचार के बाद टीएमसी सुप्रीमो और बंगला की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का प्रस्ताव स्वीकार किया। ममता के लिए यह रणनीति एक मास्टर स्ट्रोक साबित हुआ। जब यूसुफ की आईपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स ने 2012 और 2014 में जीत हासिल की थी, तब दोनों ने टीम के मालिक शाहरुख खान के साथ ईडन गार्डन्स में एक साथ जश्न मनाया था। इस निर्वाचन क्षेत्र में मुसलमानों की आबादी 66 प्रतिशत है और ऐसे में ममता ने पिछले कई वर्षों से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले अधीर रंजन चौधरी को पटखनी देने के लिए यूसुफ को यहां से उम्मीदवार बनाने का फैसला किया। चौधरी ने अपनी हार स्वीकार करते हुए कहा, ‘‘मैं पठान साहब को अपनी ओर से शुभकामनाएं देता हूं।''टीएमसी द्वारा अपने उम्मीदवारों की सूची जारी करने से ठीक एक हफ्ते पहले, ममता ने यूसुफ से संपर्क किया जिन्होंने थोड़ा समय लेने के बाद इसके लिए हामी भर दी। पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने इस राजनीतिक लड़ाई को ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज ब्रेट ली का सामना करने के समान बताया। चौधरी के अलावा यूसुफ को भाजपा के निर्मल चंद्र साहा से भी मुकाबला करना था जो इस क्षेत्र के जाने-माने डॉक्टर हैं। इस पूर्व ऑलराउंडर ने इसे अपनी लड़ाई के तौर पर लिया और प्रचार के दौरान अक्सर टीएमसी के मंत्र ‘खेला होबे (संघर्ष के लिए तैयार रहना)' को दोहराते रहे। यह उनके क्रिकेट करियर से स्पष्ट था कि उनका जज्बा कभी हार नहीं मानने वाला रहा है। अपने छोटे भाई की तुलना में, युसूफ ने देर से सफलता हासिल की, लेकिन जब उन्होंने टीम में अपनी जगह बनाई, तो वह हमेशा एक प्रभावशाली खिलाड़ी रहे। ऐसा खिलाड़ी जो अपने दम पर मैच का रुख पलट सकते हो। टी20 विश्व कप जीत के चार साल बाद यूसुफ उस भारतीय टीम का भी हिस्सा थे जिसने 2011 में एकदिवसीय विश्व कप जीता था। इस जीत के बाद यूसुफ का महान सचिन तेंदुलकर को अपने कंधों पर उठाकर मैदान का चक्कर काटना क्रिकेट प्रशंसकों की स्मृतियों में हमेशा रहेगा। यह हरफनमौला खिलाड़ी उन चुनिंदा क्रिकेटरों में से एक है जिसने टी20 और वनडे दोनों विश्व कप जीते हैं। इसके साथ ही उन्होंने दो अलग-अलग फ्रेंचाइजी के लिए तीन आईपीएल खिताब भी हासिल किया है। यूसुफ का जन्म 17 नवंबर 1982 को वडोदरा में हुआ था। उनकी क्रिकेट स्टारडम की यात्रा दृढ़ता और समर्पण की कहानी है। शहर की प्रसिद्ध जामा मस्जिद के आसपास हलचल भरे इलाके में पले-बढ़े यूसुफ और उनके छोटे भाई इरफान को कम उम्र से ही जीवन की चुनौतियों और संघर्षों का सामना करना पड़ा। उनके पिता, महमूद खान पठान मस्जिद में मुअज्जिन के रूप में अथक रूप से काम करते थे। मामूली आय के बावजूद महमूद खान ने अपने बच्चों में अनुशासन और विश्वास की मजबूत भावना पैदा की।क्रिकेट के प्रति पठान बंधुओं का प्रेम जामा मस्जिद के आसपास की तंग गलियों और छोटे मैदानों में पनपा। स्थानीय कोच मेहंदी शेख की नजर जब यूसुफ की आक्रामक बल्लेबाजी पर पड़ी तो उनका करियर क्रिकेट की ओर आगे बढ़ने लगा। यूसुफ की क्षमता से प्रभावित शेख ने उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन के साथ भावनात्मक समर्थन और प्रोत्साहन भी दिया। उनके मार्गदर्शन में यूसुफ ने अपने कौशल, विशेष रूप से अपनी बड़े शॉट खेलने की क्षमता को निखारा, जो बाद में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनकी पहचान बन गया। वीरेंद्र सहवाग की कमर में चोट के कारण बड़ौदा के इस खिलाड़ी को पाकिस्तान के खिलाफ टी20 विश्व कप फाइनल (24 सितंबर, 2007) में पदार्पण का मौका मिला। मध्यक्रम में खेलने वाले इस बल्लेबाज ने पारी का आगाज करते हुए आठ गेंद में एक छक्का और एक चौके की मदद से 15 रन बनाये और अपने बेखौफ खेल का नजारा पेश किया। उन्होंने आईपीएल 2010 में मुंबई इंडियंस के खिलाफ 37 गेंद में शतक ठोका, जो इस लीग के सबसे तेज शतकीय पारियों में से एक है। आईपीएल के 2008 में पहले सत्र के दौरान ही उन्होंने अपने हरफनमौला खेल से अपनी टीम को चैंपियन बनाने में अहम योगदान दिया। उन्होंने 179 की स्ट्राइरेट से 435 रन बनाने के अलावा आठ विकेट भी चटकाये थे। वह 2011 में केकेआर से जुड़े और सात साल तक इस टीम के अहम सदस्य रहे।
- नयी दिल्ली। भौतिकी के प्रोफेसर से देश के रक्षा मंत्री तक का लंबा सफर तय करने वाले राजनाथ सिंह भारतीय जनता पार्टी के ऐसे मजबूत स्तंभ हैं जिनकी पहचान कुशल प्रशासक और राजनीतिक शुचिता का सम्मान करने वाले परिपक्व नेता के रूप में होती है। मधुरभाषी और नपा तुला बोलने वाले सिंह प्रतिद्वंद्वियों पर कमोबेश निजी हमले करने से परहेज करते हैं। पार्टी में उनके कद का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लाल कृष्ण आडवाणी के बाद वह ऐसे नेता हैं जिन्होंने दो अलग अलग कार्यकाल के लिए पार्टी की कमान संभाली है। राजनाथ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की राजनीतिक विरासत को इस लिहाज से आगे बढ़ा रहे है कि उन्होंने वाजपेयी के संसदीय क्षेत्र लखनऊ से लगातार तीन बार विजय प्राप्त की और 2024 के आम चुनाव में वह अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से एक लाख 31 हजार मतों के अंतर से आगे चल रहे हैं।। राजनाथ वाजपेयी सरकार में कृषि मंत्री का प्रभार संभाल चुके थे।आडवाणी तीन बार (1986 से 1990 , 1993 से 1998 और 2004 से 2005) पार्टी अध्यक्ष रहे जबकि सिंह 2005 से 2009 तक अध्यक्ष रहने के बाद 2013 - 14 में भी भाजपा अध्यक्ष रहे । उन्हीं के अध्यक्ष रहते पहली बार प्रधानमंत्री पद के लिये नरेंद्र मोदी के नाम पर मुहर लगी थी । संघ के साथ उनके बेहतर रिश्ते का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि आडवाणी के जिन्ना प्रकरण के बाद संघ ने सिंह को ही पार्टी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके बाद उन्होंने दूसरी बार पार्टी की कमान तब संभाली थी जब ‘पूर्ती मामले' में नितिन गडकरी का नाम सामने आया था। साधारण किसान परिवार में जन्मे सिंह ने मामूली कार्यकर्ता से लेकर पार्टी के अध्यक्ष और देश के गृह मंत्री जैसे अहम पद का जिम्मा संभाला है। बनारस के पास चंदौली जिले में जन्मे सिंह एक कुशल प्रशासक के रूप में जाने जाते हैं। वह सियासत में कदम रखने से पहले मिर्जापुर के कॉलेज में व्याख्याता हुआ करते थे। भाजपा में सफलता की सीढ़ी संघ है और सिंह का राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से गहरा नाता है। 1964 में 13 वर्ष की अवस्था में ही वह संघ से जुड़ गए। व्याख्याता बनने के बाद भी संघ से उनका जुड़ाव बना रहा। 10 जुलाई 1951 को जन्मे सिंह ने गोरखपुर विश्वविद्यालय से भौतिकी विषय में परास्नातक की डिग्री हासिल की। उन्हें 1974 में भारतीय जनसंघ का मिर्जापुर का सचिव बनाया गया। देश में 1975 में आपातकाल लगा तो वह जेल भी गए। 1977 में जब देश में चुनाव हुए तो वह उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से पहली बार विधायक बने थे। इसके बाद उन्हें तीन बार इसी सीट से जीत मिली। राजनाथ ने हाल में एक टीवी साक्षात्कार में आपातकाल के दौरान जेल में रहने के दौरान उनकी मां के निधन का उल्लेख किया था। वह यह बताते समय भावुक हो गये थे कि तत्कालीन जेल प्रशासन ने उन्हें उनकी मां के अंतिम संस्कार में भाग लेने की अनुमति नहीं दी थी। सिंह को 1986 में भारतीय जनता युवा मोर्चा का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। बाद में वह 1988 में इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। इसी साल सिंह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य निर्वाचित हुए। साल 1991 में जब उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो राजनाथ को शिक्षा मंत्री बनाया गया। 1994 में वह राज्यसभा गए और 1997 में उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष बनाए गए। उत्तर प्रदेश के शिक्षा मंत्री रहते उन्होंने नकल रोधी कानून लागू करवाया था। इसमें नकलची विद्यार्थियों को परीक्षा हॉल से गिरफ्तार किया जाता था और जमानत अदालत से मिलती थी। साथ ही वैदिक गणित को पाठ्यक्रम में भी शामिल करवाने का श्रेय उन्हें ही जाता है। सिंह 20 अक्टूबर 2000 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। हालांकि उनका कार्यकाल दो साल से भी कम समय का रहा। इसके बाद केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी नीत राजग सरकार में सिंह को भूतल परिवहन और कृषि मंत्री बनाया गया था। उनको पहली बार पार्टी की कमान 2005 से 2009 तक मिली तो दूसरी बार वह इस पद पर 2013 से 2014 तक रहे।सिंह 2009 में गाजियाबाद और 2014 तथा 2019 में लखनऊ से सांसद निर्वाचित हुए। 2014 में जब भाजपा की सरकार बनी तो उन्हें देश का गृहमंत्री बनाया गया। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में उन्होंने रक्षा मंत्रालय का दायित्व संभाला था। रक्षा मंत्री के तौर पर वह राफेल विमान की पहली खेप लेने के लिए 2020 में जब फ्रांस गये थे और उन्होंने जब इस विमान की पूजा की थी तो वह काफी चर्चा में रहे थे।
-
नई दिल्ली। राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लोकसभा की 14 व कांग्रेस ने आठ सीट जीत ली हैं। निर्वाचन आयोग ने राज्य की सभी 25 लोकसभा सीट के परिणाम मंगलवार शाम को घोषित कर दिए। आयोग के अनुसार, विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ के घटक दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने सीकर और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने नागौर सीट जीत ली है। इसी तरह बांसवाड़ा सीट पर भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) विजयी रही है।
भाजपा के विजयी उम्मीदवारों में बीकानेर से अर्जुन राम मेघवाल, जयपुर ग्रामीण से राव राजेंद्र सिंह, जयपुर से मंजू शर्मा,अलवर से भूपेंद्र यादव, अजमेर से भागीरथ चौधरी, पाली से पीपी चौधरी,जोधपुर से गजेंद्र सिंह शेखावत, जालोर से लुंबाराम, उदयपुर से मन्नालाल रावत, चित्तौड़गढ़ से चंद्रप्रकाश जोशी, राजसमंद से महिमा कुमारी मेवाड़, भीलवाड़ा से दामोदर अग्रवाल, कोटा से ओम बिरला तथा झालावाड़-बारां से दुष्यंत सिंह शामिल हैं।वहीं, कांग्रेस के विजयी उम्मीदवारों में गंगानगर से कुलदीप इंदौरा, चुरू से राहुल कस्वां, झुंझुनू से बृजेंद्र ओला, भरतपुर से संजना जाटव, करौली-धौलपुर से भजनलाल जाटव, दौसा से मुरारी लाल मीणा, टोंक सवाई माधोपुर से हरीश मीणा व बाड़मेर से उम्मेदाराम बेनीवाल हैं।इंडिया’ गठबंधन के उम्मीदवार अमराराम (माकपा) ने सीकर सीट जीती है। वहीं हनुमान बेनीवाल (आरएलपी) नागौर सीट पर विजयी रहे। बांसवाड़ा सीट पर कांग्रेस समर्थित भारत आदिवासी पार्टी के उम्मीदवार राजकुमार रोत जीत गए हैं।निर्वाचन आयोग के अनुसार जोधपुर सीट पर भाजपा उम्मीदवार गजेंद्र सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी करण सिंह उचियारड़ा को 1,15,677 मतों के अंतर से हराया। कांग्रेस के उचियारड़ा को 6,14,379 मत मिले जबकि शेखावत को 7,30,056 मत मिले। भाजपा उम्मीदवार और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष चंद्रप्रकाश जोशी ने चित्तौड़गढ़ लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की है।जोशी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के उदयलाल आंजना को 3,89,877 मतों के अंतर से हराया। आंजना को 4,98,325 मत मिले। जोशी को 8,88,202 मत हासिल हुए। भाजपा उम्मीदवार और केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने अलवर लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की है।निर्वाचन आयोग के अनुसार, भूपेन्द्र यादव ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के ललित यादव को 48,282 मतों के अंतर से हराया। ललित यादव को 5,83,710 मत तथा भूपेंद्र यादव को 6,31,992 वोट मिले। भाजपा उम्मीदवार पीपी चौधरी ने पाली लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की है। चौधरी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस की संगीता बेनीवाल को 2,45,351 मतों के अंतर से हराया।बेनीवाल को 5,12,038 मत मिले जबकि चौधरी को 7,57,389 मत मिले। जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार राव राजेन्द्र सिंह ने जीत दर्ज की है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के अनिल चोपड़ा को 1615 मतों के अंतर से हराया। चोपड़ा को 6,16,262 मत व सिंह को 6,17,877 मत मिले।बाड़मेर सीट पर कांग्रेस के उम्मेदाराम बेनीवाल ने निर्दलीय रविंद्र भाटी को 1,18,176 मत से हराया। इस सीट से भाजपा के प्रत्याशी व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी तीसरे स्थान पर है। बेनीवाल को 7,04,676, भाटी को 5,86,500 व कैलाश चौधरी को 2,86,733 मत मिले।विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ गठबंधन की घटक राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के उम्मीदवार हनुमान बेनीवाल ने नागौर लोकसभा सीट 42,225 मतों के अंतर से जीती। उन्होंने भाजपा की ज्योति मिर्धा को हराया जिन्हें 5,54,730 मत मिले। बेनीवाल को 5,96,955 मत मिले। -
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर लोकसभा सीट में मंगलवार को दोपहर 1 बजे की काउंटिंग ट्रेंड के मुताबिक सबसे ज्यादा नोटा वोट पड़ने का रिकॉर्ड बन गया है। चुनाव आयोग की वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार अब तक 1 लाख 94 हजार 466 वोटों के साथ सबसे अधिक नोटा वोटों का नया रिकॉर्ड बन गया है।
नोटा या ‘इनमें से कोई नहीं’ वोटिंग मशीन पर उपलब्ध एक ऑप्शन है, जो बताता है कि मतदाताओं को उस निर्वाचन क्षेत्र में कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं है। इसे 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान पहली बार पेश किया गया था।एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच (NEW) की एक रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा चुनाव में नोटा वोटों की सबसे अधिक संख्या बिहार के गोपालगंज (SC) निर्वाचन क्षेत्र में दोपहर 12 बजे तक 51,660 थी। राज्य विधानसभा चुनावों की बात करें तो NOTA को सबसे ज्यादा वोट प्रतिशत 2020 में बिहार (7,06,252 वोट) और NCT दिल्ली (43,108 वोट) दो राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिला, जो कुल 1.46% रहा।अगस्त 2022 में पब्लिश की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले पांच सालों में राज्य और आम चुनावों में नोटा के लिए कुल 12.9 करोड़ वोट डाले गए हैं।एडीआर ने सुझाव दिया है कि ऐसे मामलों में जब नोटा के लिए डाले गए वोट सभी चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से अधिक हों तो किसी भी उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित नहीं किया जाना चाहिए और एक नया चुनाव कराया जाना चाहिए, जिसमें पहले के किसी भी उम्मीदवार को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। -
नई दिल्ली। अमेठी लोकसभा सीट से केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी चुनाव हार गई हैं। कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा ने उन्हें एक लाख 66 हजार 22 मतों से पराजित किया। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष को अमेठी से हराने वाली ईरानी की यह पराजय भाजपा के लिये एक बड़ा झटका है।
ईरानी ने जनादेश को स्वीकार करते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं को धन्यवाद दिया और कहा कि वह अमेठी की जनता से आगे भी जुड़ी रहेंगी। चुनाव आयोग द्वारा घोषित परिणाम के मुताबिक कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा को पांच लाख 36 हजार 492 वोट मिले, जबकि ईरानी को तीन लाख 70 हजार 470 मत प्राप्त हुए।बहुजन समाज पार्टी (बसपा) उम्मीदवार नन्हे सिंह चौहान 34 हजार 418 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे। अमेठी लोकसभा सीट नेहरू-गांधी परिवार का सियासी गढ़ मानी जाती रही है। शर्मा मतगणना की शुरुआत से ही आगे चल रहे थे और चक्र दर चक्र उनकी बढ़त मजबूत होती गयी।जीत के बाद शर्मा ने संवाददाताओं से बातचीत में अमेठी की जनता का आभार प्रकट करते हुए कहा कि यह विजय अमेठी की जनता की जीत है और सांसद के रूप में वह जनता के प्रति हमेशा समर्पित होकर कार्य करेंगे। उधर, स्मृति ईरानी ने चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद प्रेस कांफ्रेंस में अपने सभी समर्थकों और कार्यकर्ताओं के प्रति आभार प्रकट किया और विजयी उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा को बधाई दी।ईरानी ने कहा कि वह संगठन को और सशक्त करेंगी और संगठन चुनाव परिणामों का विश्लेषण करेगा। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को 55,120 वोट से हराकर बड़ा उलटफेर करने वालीं स्मृति इस सीट से लगातार दूसरी बार मैदान में थीं। शुरू में कांग्रेस की तरफ से इस बार भी अमेठी से राहुल के ही मैदान में उतरने की अटकलें लगायी जा रही थीं, मगर ऐन वक्त पर पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के करीबी सहयोगी रहे किशोरी लाल शर्मा को मैदान में उतारकर सबको चौंका दिया था। -
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को रायबरेली संसदीय सीट पर 3 लाख 90,हजार 30 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। निर्वाचन आयोग के अनुसार कांग्रेस उम्मीदवार गांधी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी राज्य सरकार के मंत्री, भाजपा उम्मीदवार दिनेश प्रताप सिंह को 3 लाख 90,हजार 30 मतों के अंतर से पराजित किया। गांधी को 6 लाख 87,649 हजार मत तथा दिनेश प्रताप को 2,लाख 97,हजार 619 मत मिले।यहां बसपा उम्मीदवार ठाकुर प्रसाद यादव को 21,624 मत मिले। रायबरेली संसदीय सीट पर कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी 2004 से 2019 तक लगातार चुनाव जीतती रहीं लेकिन 2024 में वह चुनावी लड़ाई से बाहर हो गयीं। उनकी जगह कांग्रेस से राहुल गांधी चुनाव मैदान में उतरे और यहां जीत दर्ज की। पिछली बार सोनिया गांधी ने 1,67,178 मतों के अंतर से रायबरेली में दिनेश प्रताप को पराजित किया था।
राहुल गांधी 2019 में अमेठी संसदीय क्षेत्र से केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से पराजित हो गये थे। वह केरल के वायनाड से चुनाव जीत गये थे और इस बार भी वहां से चुनाव में उम्मीदवार थे। चुनाव में सोनिया गांधी ने इस बार रायबरेली की सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि ”मैं आपको अपना बेटा सौंप रही हूं और मुझे भरोसा है कि वह आपके विश्वास पर खरा उतरेंगे।”रायबरेली संसदीय सीट का राहुल गांधी के दादा फिरोज गांधी और दादी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी प्रतिनिधित्व किया था।लाख हजार














.jpg)
.jpg)
.jpg)

.jpg)
.jpg)

.jpg)

.jpg)
.jpg)
.jpg)

.jpg)