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- छत्रपति संभाजीनगर. पिछले मानसून में कम बारिश होने के कारण महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में स्थित विश्व प्रसिद्ध एलोरा गुफाएं और अन्य स्मारक पानी की आपूर्ति के लिए 'टैंकर' पर निर्भर हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि छत्रपति संभाजीनगर में पिछले मानसून में 527.10 मिमी बारिश हुई थी जबकि इस अवधि के दौरान औसत वर्षा 637.50 मिमी होती है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि बारिश उम्मीद से कम हुई। परिणामस्वरूप एलोरा गुफाएं, बीबी का मकबरा और औरंगाबाद गुफाओं जैसे कुछ स्मारकों के परिसर में बने जलस्रोत सूख गए हैं। उन्होंने कहा कि ये स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और अब पानी की आपूर्ति के लिए टैंकरों पर निर्भर हैं। अधिकारी ने कहा, "एलोरा गुफा परिसर में पीने, बागवानी और साफ सफाई के लिए हर दिन पानी के दो टैंकर की आवश्यकता होती है।" उन्होंने कहा, "हम बीबी का मकबरा के लिए 5,000 लीटर के कम से कम दो टैंकर तथा औरंगाबाद गुफाओं के लिए हर दूसरे दिन एक टैंकर पानी ले रहे हैं।" अधिकारी ने बताया कि कभी-कभी बीबी का मकबरा में पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर पानी के तीसरे टैंकर की भी जरूरत पड़ती है।
- वाशिंगटन.भारतीय मूल के एक प्रभावशाली अमेरिकी लेखक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने 10 साल के शासन के दौरान विकास पर ध्यान केंद्रित किया है और तीसरे बार उनके निर्वाचन से भारत को अगले पांच साल तक स्थिरता मिलेगी साथ ही उन्हें देश के समक्ष मौजूद कुछ प्रमुख चुनौतियों से निपटने का अवसर मिलेगा। प्रिंसटन निवासी भारतीय-अमेरिकी लेखक राजीव मल्होत्रा ने कहा, ‘‘भारत इन सभी चुनौतियों (देश के बाहर से आने वाली चुनौतियों) का डटकर मुकाबला कर सकता है। भारत, मोदी सरकार के कारण इन सभी चुनौतियों का मुकाबला कर सकता है। लोगों के तमाम दावों, तर्कों और आलोचनाओं के बावजूद हकीकत यही है कि उन्होंने विकास किया है और अधिक विकास की आवश्यकता है लेकिन उन्होंने विकास किया है।'' मल्होत्रा ने पिछले कुछ दशक में भारतीय संस्कृति और समाज के संबंध में पश्चिमी अकादमिक अध्ययन के विरोध में कई किताबें लिखी हैं। ‘स्नेक इन द गंगा: ब्रेकिंग इंडिया 2.0' उनकी नवीनतम पुस्तक है। उन्होंने भारतीय मीडिया की खबरों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है कि मोदी तीसरी बार सत्ता में आ रहे हैं, अपने दो कार्यकाल के दौरान मोदी सरकार ने विकास किया है जिससे समाज के सभी वर्गों को लाभ मिला है। उन्होंने कहा, ‘‘आप आंकड़ों के आधार पर देख सकते हैं कि गरीबों से लेकर अल्पसंख्यकों तक समाज के हर वर्ग को लाभ मिला है। आप संख्यात्मक रूप से देखा सकते हैं कि अब उनके पास सड़कें, साफ पानी, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, भोजन और शिक्षा है। तो लोगों को कहना होगा कि इस सरकार ने काम किया है जबकि पिछली सरकार गरीबी से लड़ने आदि के नारे लगा रही थी लेकिन काम नहीं कर रही थी।'' मल्होत्रा अमेरिका में ‘इनफिनिटी फाउंडेशन' के प्रमुख है। उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के हालिया बयान से सहमति जताई कि बाहरी ताकतों ने भारतीय चुनाव के परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश की है। मल्होत्रा ने कहा, ‘‘सबसे पहले मैं यह कहना चाहता हूं कि मुझे जयशंकर की योग्यता, उनकी निर्भीकता और उनकी हाजिर जवाबी पसंद है। यह सब अच्छा है। लेकिन मैं यह कहूंगा कि मेरी एक आलोचना है कि वह पूर्वानुमान लगाने में सक्षम नहीं हैं। वह प्रतिक्रिया दे सकते हैं। वह यह पूर्वानुमान लगाने में असमर्थ हैं कि कमजोरियां कहां हैं, अगला हमला कहां से होने वाला है, बुरे लोग कौन हैं और इसे करने वाले कौन हैं।''
- गुवाहाटी. पारंपरिक 'मेखला चादर' और आभूषणों से सजी असम की पहली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) वाली शिक्षिका 'आइरिस' ने गुवाहाटी के एक निजी स्कूल के छात्रों के सभी सवालों के तुरंत जवाब दिए। स्कूल की एक शिक्षिका ने बताया कि मानव सदृश रोबोट से जब पूछा गया कि हीमोग्लोबिन क्या होता है तो उसने छात्रों को सभी विवरणों के साथ इसका जवाब दिया। रॉयल ग्लोबल स्कूल की प्रवक्ता ने बताया, "चाहे सवाल उनके पाठ्यक्रम से संबंधित थे या किसी और विषय पर, 'आइरिस' ने उदाहरणों और संदर्भों के साथ तुरंत उनके जवाब दिए।" उन्होंने कहा कि जिज्ञासु छात्र, रोबोट की विभिन्न गतिविधियों में उत्सुकता से शामिल थे।बच्चों ने रोबोट से हाथ भी मिलाया तथा सीखने की प्रक्रिया मजेदार और आकर्षक रही।स्कूल की शिक्षिका ने कहा, "बच्चे बहुत उत्साहित हैं क्योंकि एआई शिक्षक के पास उनके सवालों के जवाब हैं।" रोबोट को नीति आयोग द्वारा शुरू की गई अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) परियोजना के तहत मेकरलैब्स एडु-टेक के सहयोग से विकसित किया गया है। स्कूल की शिक्षिका ने कहा कि 'आइरिस' शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समाकलन में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है। प्रवक्ता ने कहा कि निजी स्कूल पूर्वोत्तर क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा को व्यक्तिपरक तथा अधिक आकर्षक बनाने के लिए रोबोट की क्षमताओं का लाभ उठाने को तत्पर है।
- देहरादून । उत्तराखंड में गर्म हो रही जलवायु के कारण पिछले सात सालों में प्रमुख फलों जैसे उच्च गुणवत्ता वाले सेबों, नाशपाती, आड़ू, आलूबुखारा और खूबानी के उत्पादन में जबरदस्त गिरावट आयी है। पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में शोध करने वाले संगठन 'क्लाइमेट ट्रेंडस' द्वारा किए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि प्रमुख फलों के उत्पादन और उन्हें उगाए जाने वाले क्षेत्र में काफी कमी आयी है। अध्ययन के अनुसार, शीतोष्ण फलों की पैदावार में उष्णकटिबंधीय फलों के मुकाबले ज्यादा कमी आयी है । राज्य में बदलता तापमान औद्योनिकी (फल) उत्पादन में बदलाव को कुछ हद तक स्पष्ट कर सकता है। अध्ययन में कहा गया है कि गर्म होती जलवायु के कारण कुछ फलों की किस्में कम उत्पादक हो रही हैं जिसके कारण किसान उष्णकटिबंधीय विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं जो बदलती जलवायु परिस्थितियों के लिए बेहतर रूप से अनुकूल हैं । उत्तराखंड में बागवानी उत्पादन का क्षेत्र बहुत सिकुड़ गया है जिसके कारण भी प्रमुख फलों की पैदावार में भी 2016—17 और 2022—23 के बीच काफी कमी आयी। हिमालय के उंचाई वाले क्षेत्रों में उगाए जाने वाले शीतोष्ण फल जैसे नाशपाती, खूबानी, आलूबुखारा और अखरोट की पैदावार में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है। अध्ययन के अनुसार, सेब उत्पादक क्षेत्र 2016—17 में 25,201.58 हेक्टेयर से घटकर 2022—23 में 11,327.33 हेक्टेयर रह गया और इसी के साथ सेब की पैदावार में करीब 30 फीसदी गिरावट आयी। नींबू की प्रजातियों के फलों की पैदावार 58 प्रतिशत तक सिकुड़ गयी। इसके मुकाबले उष्णकटिबंधीय फलों में जलवायु परिवर्तन का असर कम दिखा। उदाहरण के लिए, खेती के क्षेत्र में करीब 49 और 42 प्रतिशत कमी आने के बावजूद आम और लीची का उत्पादन अपेक्षाकृत स्थिर ही रहा और इनमें क्रमश: 20 और 24 फीसदी की कमी ही दर्ज की गयी। अध्ययन के अनुसार, अमरूद और करौंदा के उत्पादन में वृद्धि फलों के प्रकार में बदलाव की ओर संकेत करता है और किसानों को ऐसे फलों को उगाने में रूचि होती है जिनकी बाजार में मांग बेहतर हो या जो स्थानीय दशाओं के बेहतर अनुकूल हों। टिहरी में फलों के उत्पादन क्षेत्र में सर्वाधिक कमी आयी है जबकि दूसरा स्थान देहरादून का है ।दूसरी तरफ, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और हरिद्वार में फलों के उत्पादन क्षेत्र और उनकी पैदावार दोनों में गिरावट दर्ज की गयी । उत्तराखंड में बढ़ते तापमान के कारण बागवानी उत्पादन में इन गहन परिवर्तनों को आंशिक रूप से समझा जा सकता है। अध्ययन के अनुसार, उत्तरखंड में 1970 और 2022 के बीच 0.02 डिग्री सेल्सियस की वार्षिक दर से औसत तापमान बढ़ा है जबकि राज्य के उंचाई वाले क्षेत्रों में इसी अवधि के दौरान 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। शोध में खुलासा हुआ है कि उंचाई वाले क्षेत्रों में जाड़ों में अपेक्षाकृत ज्यादा तापमान होने से बर्फ के गलने की गति तेज हुई जिससे बर्फ से ढंके क्षेत्र तेजी से कम हुए । पिछले करीब 20 सालों में राज्य के उंचाई वाले क्षेत्रों में जाड़ों के तापमान 0.12 डिग्री सेल्सियस की दर से बढ़े हैं। उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़ और रूद्रप्रयाग जिलों में बर्फ से ढंके क्षेत्र 2000 के मुकाबले 2020 तक 90—100 किलोमीटर तक सिकुड़ गए हैं। जाड़ों में कड़कड़ाती ठंड और बर्फ उच्च हिमालयी क्षेत्र में उगने वाले सेब, आलूबुखारा, आड़ू, खुबानी और अखरोट में फूल आने और उनके बढ़ने के लिए जरूरी होते हैं । अपेक्षाकृत गर्म जाड़े, कम बर्फवारी, सिकुड़ता हिमाच्छादित क्षेत्र कलियों को खिलने में समस्या पैदा कर सकता है जिससे शीतोष्ण फलों में फूल खिलने और उसकी पैदावार पर प्रभाव पड़ सकता है । कृषि विज्ञान केंद्र आइसीएआर—सीएसएसआरआई के प्रमुख और वरिष्ठ वैज्ञानिक डा पंकज नौटियाल ने कहा, '“उच्च गुणवत्ता वाले सेब जैसी पारंपरिक शीतोष्ण फसलों को सुप्त अवधि (दिसंबर-मार्च) के दौरान 1200-1600 घंटों के लिए सात डिग्री सेल्सियस से कम तापमान की आवश्यकता होती है। पिछले 5-10 वर्षों में इस क्षेत्र में जितनी बर्फबारी हुई है उसकी तुलना में सेब को दो—तीन गुना अधिक बर्फबारी की आवश्यकता है जिससे फल की गुणवत्ता और उपज खराब हो गई है ।' रानीखेत के एक किसान मोहन चौबटिया ने कहा, ‘‘ बारिश और बर्फ कम होने से बहुत ही दिक्कत हो रही है ।' उन्होंने यह भी कहा कि पिछले दो दशकों में अल्मोड़ा में शीतोष्ण फलों का उत्पादन घटकर आधा रह गया है ।
- नयी दिल्ली। पंजाब के जिरकपुर में बीएमडब्ल्यू कार की टक्कर लगने के बाद 19 वर्षीय युवक की मौत हो गई। यह घटना तेज रफ्तार लग्जरी कारों से होने वाले हादसों की फेहरिस्त में नई है, जो लापरवाही से गाड़ी चलाने के भयावह परिणामों और इस बात को रेखांकित करती है कि कई बार रफ्तार का रोमांच तबाही का कारण बन जाता है। इस महीने देश में ऐसी चार घटनाएं हो चुकी हैं। मंगलवार रात को जिरकपुर शहर में तेज़ रफ्तार बीएमडब्ल्यू कार ने एक बाइक को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उसपर सवार तीन युवक हवा में उछल गए। इस घटना में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई तथा शेष गंभीर रूप से जख्मी हो गए। मोहाली निवासी कार चालक को गिरफ्तार कर लिया गया और फिर ज़मानत पर छोड़ दिया गया। इस घटना से 11 दिन पहले, महाराष्ट्र के पुणे में नशे की हालत में तेज गति से चलाई जा रही पोर्श कार ने कथित तौर पर दो आईटी पेशेवरों की जान ले ली थी। इस हादसे में अनीश अवधिया और अश्विनी कोस्टा की मौत हो गई। पोर्श कार को 17-वर्षीय एक किशोर नशे की हालत में चला रहा था। अंधाधुंध रफ्तार से भागती कार ने दोनों आईटी पेशेवरों की मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी। तेज़ गति से चलाई जा रही कारों से होने वाले हादसे वाहन सवारों के लिए भी घातक होते हैं।इस दुर्घटना से दो दिन पहले, नोएडा में तेज गति से जा रही एक बीएमडब्ल्यू कार ने 16 मई को सुबह छह बजे एक ई-रिक्शा को टक्कर मार दी थी, जिससे एक नर्स सहित दो लोगों की मौत हो गई और तीन घायल हो गए। इसके बाद 26 मई की सुबह उत्तर प्रदेश के इसी शहर में तेज गति से जा रही एक ऑडी कार ने 64 साल के बुजुर्ग को टक्कर मार दी थी। बुजुर्ग जनक देव शाह की मौके पर ही मौत हो गई। सेक्टर 53 के गिझोर गांव के रहने वाले शाह दूध लेने जा रहे थे। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में नोएडा और ग्रेटर नोएडा शामिल हैं। गौतमबुद्ध नगर में पिछले साल 1,176 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें 470 लोगों की मौत हो गई और 858 घायल हो गये। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2022 में जिले में सड़क दुर्घटना में 437 लोगों की मौत हुई और 856 लोग घायल हो गए। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2022 में देश भर में 4.61 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें 1.68 लाख लोग मारे गए और 4.43 लाख लोग घायल हुए। जान गंवाने वाले 1.68 लाख लोगों में से 1.19 लाख की जान तेज गति के कारण हुए हादसों में गई। पिछले साल अगस्त में हरियाणा के नूंह में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर एक पेट्रोल टैंकर से रोल्स रॉयस फैंटम की टक्कर हो गई, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। ट्रक गलत दिशा से आ रहा था और लिमोजिन की गति करीब 230 किमी प्रति घंटा थी। ट्रक में सवार दोनों लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कार में सवार लोग जख्मी हुए थे। लक्जरी कारों से सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या के बारे में गैर-सरकारी संगठन ‘सेव लाइफ फाउंडेशन' के संस्थापक पीयूष तिवारी ने कहा कि यह समस्या देश में त्रुटिपूर्ण लाइसेंसिंग प्रणाली के कारण उत्पन्न हो रही है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर आपके पास एलएमवी लाइसेंस है तो आप 800 सीसी के इंजन वाली कार से लेकर हाईपॉवर वाली सुपर कार तक कुछ भी चला सकते हैं। लाइसेंसिंग प्रणाली में सुधार जरूरी है। वाहन चलाने की क्षमता के आधार पर लाइसेंस दिया जाना चाहिए।'' नवंबर 2022 में टाटा संस के पूर्व अध्यक्ष साइरस मिस्त्री और उनके दोस्त जहांगीर पंडोल की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। दोनों एक मर्सिडीज-बेंज एसयूवी से जा रहे थे, जिसे जहांगीर की पत्नी अनाहिता पंडोले चला रही थीं। रिपोर्ट के अनुसार, कार की गति 100 किमी प्रति घंटे से अधिक थी और यह सड़क के डिवाइडर से टकरा गई। मोटर वाहन दुर्घटनाओं ने पैदल चलने वालों को भी नहीं बख्शा है। भारत में सड़क दुर्घटना 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्गों पर 20,513 दुर्घटनाओं में 10,160 पैदल यात्रियों की मौत हुई है। तिवारी ने कहा कि सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि पैदल चलने वालों के अनुकूल संरचनाएं बनाई जाएं।
- नयी दिल्ली। देश के विभिन्न हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी की वजह से बिजली की अधिकतम मांग गुरुवार को रिकॉर्ड 250 गीगावाट पर पहुंच गई है। बिजली मंत्रालय ने यह जानकारी दी। गर्मी से राहत के लिए घरों एवं दफ्तरों में एयर कंडीशनर और कूलर का इस्तेमाल बढ़ने से बिजली की खपत बढ़ रही है। बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, बिजली की अधिकतम मांग या दिन में सबसे अधिक आपूर्ति गुरुवार को 250 गीगावाट (एक गीगावाट बराबर 1,000 मेगावाट) रही, जो अभी तक का सर्वाधिक आंकड़ा है। इससे पहले बुधवार को बिजली की अधिकतम मांग इस सत्र में 246 गीगावाट के उच्चस्तर पर पहुंच गई थी।मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार देश भर में गैर-सौर ऊर्जा की मांग भी 29 मई को 234.3 गीगावाट के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। यह मांग भीषण गर्मी, बढ़ती औद्योगिक और आवासीय बिजली खपत के संयुक्त प्रभाव को दर्शाती है। गुरुवार को उत्तरी क्षेत्र ने भी 86.7 गीगावाट की मांग पूरी की, जो सर्वकालिक उच्च स्तर है। वहीं पश्चिमी क्षेत्र ने 74.8 गीगावाट की अपनी अधिकतम मांग को छुआ। अबतक की सर्वाधिक बिजली खपत रिकॉर्ड सितंबर, 2023 में 243.27 गीगावाट का था।बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 23 मई को अधिकतम मांग 236.59 गीगावाट थी, जबकि 22 मई को यह 235.06 गीगावाट थी। दिल्ली में गुरुवार को न्यूनतम तापमान 30.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने दिन में बाद में हल्की बारिश और धूल भरी आंधी का अनुमान जताया है। दिल्ली के प्राथमिक मौसम केंद्र सफदरजंग वेधशाला में बुधवार को अधिकतम तापमान 46.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो 79 वर्षों में सबसे अधिक है। इससे पहले, यह 17 जून, 1945 को 46.7 डिग्री सेल्सियस था।बिजली मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में मई के लिए दिन के समय 235 गीगावाट और शाम के समय 225 गीगावाट की बिजली मांग रहने का अनुमान जताया था। वहीं, जून के महीने में बिजली की खपत दिन में 240 गीगावाट और शाम के समय 235 गीगावाट रहने का अनुमान है। मंत्रालय ने इस साल गर्मी में बिजली की अधिकतम मांग 260 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान जताया है।भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इस साल मार्च में अनुमान जताया था कि भारत में इस साल अधिक गर्मी और अधिक लू वाले दिन देखने को मिलेंगे। इसके लिए जिम्मेदार अल नीनो की स्थिति मई तक जारी रहने का अनुमान जताया गया था।
- जम्मू। जम्मू जिले में गुरुवार को श्रद्धालुओं को लेकर जा रही एक बस के सड़क से फिसलकर खाई में गिर जाने से 22 यात्रियों की मौत हो गयी तथा 57 घायल हो गये। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि यह दुर्घटना जिले के चौकी चोरा क्षेत्र के टुंगी मोड़ पर हुई। उन्होंने बताया कि बस करीब 150 फुट गहरी खाई में गिर गई। जम्मू के जिला मजिस्ट्रेट ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर बताया कि घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना में 22 लोगों की मौत हो गई है और 57 लोग घायल हुए हैं। जम्मू एवं कश्मीर के उपराज्यपाल (एलजी) मनोज सिन्हा ने इस घटना में लोगों की मौत पर दुख प्रकट किया।इसके साथ ही एलजी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि जम्मू के अखनूर में हुई बस दुर्घटना में प्रत्येक मृतक के निकटतम परिजन को पांच-पांच लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि घटना अपराह्न 12 बजकर 35 मिनट की है। उन्होंने बताया कि पंजीकरण नंबर यूपी81सीटी-4058 वाली बस खाई में गिर गई। बस हरियाणा के कुरुक्षेत्र से श्रद्धालुओं को लेकर जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के पौनी इलाके में शिवखोड़ी जा रही थी। बस ने अपना सफर उत्तर प्रदेश से शुरू किया था। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि शवों को अखनूर में उप जिला अस्पताल में भिजवा दिया है। उन्होंने बताया कि घायलों को जम्मू में राजकीय मेडिकल कॉलेज-सह-अस्पताल (जीएमसी) में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में से एक महिला की पहचान उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के निवासी राधेश्याम की पत्नी धरमपति (42) के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि अधिकतर पीड़ित उत्तर प्रदेश के हैं। सेना, पुलिस और स्थानीय लोगों ने शवों और घायलों को रस्सियों के सहारे खाई से बाहर निकाला।अधिकारियों ने बताया कि सेना ने बस को खाई से बाहर निकालने के लिए क्रेन का इस्तेमाल किया और अभियान अभी भी जारी है। अधिकारियों ने बताया कि घायलों में से छह की हालत गंभीर है और उन्हें पहले अखनूर अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें एंबुलेंस से जम्मू के जीएमसी अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष गुप्ता ने कहा, ‘‘घायल हुए 36 से ज्यादा यात्रियों को जीएमसी अस्पताल लाया गया है। इनमें से छह की हालत गंभीर है। मरीजों का उपचार किया जा रहा है।'' अस्पताल में इलाज करा रहे घायलों में से एक अमर चंद ने कहा, ‘‘एक कार विपरीत दिशा से आ रही थी। चालक बस को एक तीखे मोड़ से निकाल रहा था, लेकिन वह विफल रहा, जिसके चलते वाहन खाई में गिर गया।'' घटना में घायल हुए लोगों ने बताया कि वे शिवखोड़ी की तीर्थयात्रा के लिए आए थे।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (यातायात) फैजल कुरैशी, परिवहन आयुक्त सहित अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और बचाव अभियान का निरीक्षण किया। एसएसपी और जम्मू के उपायुक्त घायलों का हालचाल जानने के लिए जीएमसी अस्पताल पहुंचे।उपराज्यपाल ने इस दुखद दुर्घटना में लोगों की मौत पर दुख व्यक्त किया है।सिन्हा ने अपने संदेश में कहा, ‘‘अखनूर में हुई बस दुर्घटना हृदय विदारक है। मैं इस दुर्घटना में हुई मौतों पर शोक व्यक्त करता हूं तथा ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वे शोकाकुल परिवारों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।'' उन्होंने यह भी लिखा, ‘‘प्रशासन शोक संतप्त परिवारों को हरसंभव सहायता प्रदान कर रहा है और घायलों को चिकित्सा सुविधाएं भी प्रदान कर रहा है।'' पिछले साल 15 नवंबर को डोडा में हुई इसी तरह की घटना के बाद यह इस क्षेत्र में सबसे बड़ी दुर्घटना है जिसमें त्रुंगल-अस्सार इलाके में यात्रियों से भरी एक बस सड़क से फिसलकर 300 फुट गहरी खाई में गिर गई थी, जिससे 39 लोगों की मौत हो गई थी और 19 घायल हो गए थे।
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इंफाल.मणिपुर की इंफाल घाटी में भारी बारिश के कारण आई बाढ़ से तीन लोगों की मौत हो गई और हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को सेनापति जिले के थोंगलांग रोड पर भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में 34 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। वहीं 83 वर्षीय एक महिला उफनती सेनापति नदी में डूब गई। उन्होंने बताया कि इंफाल में बुधवार को 75 वर्षीय एक व्यक्ति बारिश के दौरान बिजली के खंभे के संपर्क में आ गया और करंट लगने से उसकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि इंफाल नदी के उफान पर होने से कई इलाकों में पानी भर गया है और इंफाल घाटी में सैकड़ों घरों में पानी घुस गया है, जिसकी वजह से लोगों को पास के सामुदायिक भवनों में शरण लेनी पड़ी है। उन्होंने बताया कि नम्बुल नदी के उफान पर होने के कारण इंफाल पश्चिम जिले के कम से कम 86 इलाकों में बाढ़ आने की सूचना है, जिनमें खुमान लम्पक, नगरम, सागोलबंद, उरीपोक, केसामथोंग और पाओना इलाके शामिल हैं। एक अधिकारी ने बताया, "लगातार बारिश के कारण इंफाल पूर्वी जिले के केरांग, खाबम और लैरीयेंगबाम लेईकाई क्षेत्रों के पास इंफाल नदी का तट टूट गया है और पानी कई क्षेत्रों में घुस गया है, जिससे सैकड़ों घर जलमग्न हो गए हैं। एक अधिकारी ने कहा, "इंफाल पूर्वी जिले के हेंगांग और खुरई विधानसभा क्षेत्रों के कई इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।" मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा, "कई इलाकों में नदी के तटबंध टूटने के कारण अनेक लोग और पशु प्रभावित हुए हैं। राज्य सरकार के अधिकारी, सुरक्षा और एनडीआरएफ कर्मी और स्थानीय स्वयंसेवकों सहित सभी संबंधित अधिकारी प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। फंसे हुए लोगों को नावों से सुरक्षित क्षेत्रों में पहुंचाया जा रहा है।" -
नयी दिल्ली. चक्रवात रेमल के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसून ने बृहस्पतिवार को केरल तट और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में दस्तक दे दी। मौसम विभाग के पूर्वानुमान से एक दिन पहले ही दक्षिण-पश्चिम मानसून ने दस्तक दे दी है। मौसम वैज्ञानिकों ने कहा कि चक्रवात ने मानसून के प्रवाह को बंगाल की खाड़ी की ओर खींच लिया, जो पूर्वोत्तर में समय से पहले मानसून के दस्तक देने का एक कारण हो सकता है। चक्रवाती तूफान 'रेमल' रविवार को पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तट से टकराया था।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा, ''दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल में दस्तक दे चुका है और आज यानी 30 मई 2024 को पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों की ओर बढ़ गया है।'' इससे पहले 15 मई को मौसम विभाग ने मानसून के 31 मई को केरल में दस्तक देने की घोषणा की थी।
केरल में पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश हो रही है, जिसके परिणामस्वरूप मई में अतिरिक्त बारिश दर्ज की गयी है। केरल में मानसून के आगमन की सामान्य तिथि एक जून और अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, नगालैंड, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर व असम में मानसून के दस्तक देने की तिथि पांच जून है। -
मुंबई.भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 में भारतीय अर्थव्यवस्था के सात प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया है। आरबीआई ने बृहस्पतिवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने 2023-24 (अप्रैल 2023 से मार्च 2024 वित्त वर्ष) में मजबूत गति से विस्तार किया, जिससे वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर बढ़कर 7.6 प्रतिशत हो गई। यह 2022-23 में 7.0 प्रतिशत थी। यह लगातार तीसरे वर्ष सात प्रतिशत या उससे अधिक रही। आरबीआई ने कहा, ‘‘ 2024-25 के लिए वास्तविक (सकल घरेलू उत्पाद) जीडीपी वृद्धि 7.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसमें जोखिम दोनों तरफ समान रूप से संतुलित होंगे।'' इसमें कहा गया कि वित्त वर्ष 2023-24 में अर्थव्यवस्था ने लगातार चुनौतियों के बावजूद जुझारुपन दिखाया।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को दुनिया के पहले सिंगल-पीस थ्रीडी प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक इंजन द्वारा संचालित रॉकेट के सफल प्रक्षेपण को भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ‘महत्वपूर्ण अवसर' बताया। चेन्नई स्थित अंतरिक्ष स्टार्ट-अप अग्निकुल कॉसमॉस ने श्रीहरिकोटा में अपने स्वयं के लॉन्च पैड से खुद से तैयार की गई थ्री डी-प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक रॉकेट ‘अग्निबाण' की उप-कक्षीय परीक्षण-उड़ान सफलतापूर्वक भरी। इसके साथ यह ऐसा करने वाली भारत की दूसरी निजी कंपनी बन गई। मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘एक उल्लेखनीय उपलब्धि जो पूरे देश को गौरवान्वित करेगी!
उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया के पहले सिंगल-पीस 3 डी प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक इंजन द्वारा संचालित अग्निबाण रॉकेट का सफल प्रक्षेपण भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है और हमारी युवा शक्ति की उल्लेखनीय सफलता का एक वसीयतनामा है। अग्निकुल कॉसमॉस टीम को उनके भविष्य के प्रयासों के लिए मेरी शुभकामनाएं।'' -
नई दिल्ली. चेन्नई के अंतरिक्ष 'स्टार्ट-अप' ‘अग्निकुल कॉसमॉस' ने बृहस्पतिवार को श्रीहरिकोटा स्थित अपने प्रक्षेपण स्थल से अपने स्वदेश निर्मित '3डी-प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक रॉकेट अग्निबाण' का उप-कक्षीय परीक्षण सफलतापूर्वक किया। अग्निकुल कॉसमॉस ऐसा करने वाली यह भारत की दूसरी निजी इकाई बन गई है। चार असफल प्रयासों के बाद बृहस्पतिवार को परीक्षण बिना किसी लाइव स्ट्रीमिंग के, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में कुछ गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में किया गया। इसरो ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "अग्निबाण सॉर्टेड-01 मिशन के उनके प्रक्षेपण स्थल से सफल प्रक्षेपण के लिए अग्निकुल कॉसमॉस को बधाई। यह एक बड़ी उपलब्धि है...।'' भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (आईएन-स्पेस) के अध्यक्ष पवन गोयनका ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, "अग्निकुल कॉसमॉस द्वारा अग्निबाण एसओआरटीईडी के सफल प्रक्षेपण से बहुत प्रसन्न हूं। यह भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक क्षण है।" अग्निकुल द्वारा अग्निबाण सब-ऑर्बिटल टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर (एसओआरटीईडी) को प्रक्षेपित करने का 22 मार्च से यह पांचवां प्रयास था। भारतीय अंतरिक्ष संघ (आईएसपीए) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल ए के भट्ट (सेवानिवृत्त) ने कहा, "यह भारत के फलते-फूलते निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक बहुत बड़ा प्रोत्साहन और गर्व का क्षण है और यह हमारे लिए भविष्य में क्या छिपा है, इसकी एक झलक मात्र है। इसके पीछे की पूरी टीम को हमारी हार्दिक बधाई और उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं।" कंपनी के अनुसार अग्निबाण एक अनुकूलन योग्य दो-चरणीय प्रक्षेपण यान है जो 300 किलोग्राम तक का पेलोड (भार) लगभग 700 किलोमीटर की कक्षा में ले जा सकता है। यह रॉकेट तरल और गैस प्रणोदकों के मिश्रण के साथ एक अर्ध-क्रायोजेनिक इंजन का उपयोग करता है। यह एक ऐसी तकनीक है जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा अपने किसी भी रॉकेट में अभी तक प्रदर्शित नहीं किया गया है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार की शाम यहां प्रसिद्ध विवेकानंद रॉक मेमोरियल में 45 घंटे तक चलने वाली अपनी ध्यान साधना शुरू की। निकटवर्ती तिरुवनंतपुरम से हेलीकॉप्टर द्वारा यहां पहुंचने के बाद मोदी ने भगवती अम्मन मंदिर में पूजा की और नौका सेवा के जरिये रॉक मेमोरियल पहुंचे तथा ध्यान साधना शुरू की।
प्रधानमंत्री की ध्यान साधना एक जून तक चलेगी। धोती और सफेद शॉल ओढ़े मोदी ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और गर्भगृह की परिक्रमा की। पुजारियों ने एक विशेष आरती की और उन्हें मंदिर का प्रसाद दिया गया, जिसमें एक शॉल और मंदिर के देवता की फ्रेमयुक्त तस्वीर शामिल थी। बाद में, वह राज्य सरकार के जहाजरानी निगम द्वारा संचालित नौका सेवा के जरिये रॉक मेमोरियल पहुंचे और ‘ध्यान मंडपम’ में ध्यान लगाना शुरू किया।ध्यान लगाना शुरू करने से पहले, मोदी कुछ देर के लिए मंडप की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर खड़े रहे। प्रधानमंत्री एक जून को अपनी रवानगी से पहले स्मारक के पास तमिल कवि तिरुवल्लुवर की प्रतिमा को देखने के लिए भी जा सकते हैं।भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने शिवगंगा में पत्रकारों से बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को पूरी तरह से ‘निजी’ यात्रा बताया। उन्होंने कहा, ‘‘यह प्रधानमंत्री की निजी यात्रा है।’’उन्होंने कहा कि यही कारण है कि उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस कार्यक्रम में भाग नहीं लिया। जहां एक ओर थानथई पेरियार द्रविड़ कषगम सहित अन्य संगठनों ने मदुरै में मोदी के विरोध में काले झंडे दिखाए, तो वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भी कई लोगों ने ‘गो बैक मोदी’ लिखा।एक जून को लोकसभा चुनाव के सातवें एवं अंतिम चरण के मतदान के मद्देनजर उनके ध्यान कार्यक्रम के प्रसारण का राजनीतिक विरोध किया जा रहा है। मोदी के इस कार्यक्रम के मद्देनजर कड़ी सुरक्षा सहित सभी इंतजाम पूरे कर लिये गये हैं।प्रख्यात हिंदू संत (विवेकानंद) के नाम पर बना यह स्मारक समुद्र के मध्य में स्थित है। यह पहली बार है जब प्रधानमंत्री इस स्मारक पर ठहरेंगे। यह स्मारक स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि स्वरूप बनाया गया है। प्रधानमंत्री ने 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रचार समाप्त होने के बाद केदारनाथ गुफा में भी इसी तरह ध्यान लगाया था।मोदी की यात्रा से पहले सुरक्षा बढ़ा दी गई है। उनके प्रवास के दौरान दो हजार पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। इसके साथ ही भारतीय तटरक्षक बल और भारतीय नौसेना भी कड़ी निगरानी रखेगी। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोक सभा क्षेत्र वाराणसी के मतदाताओं को लगभग 6 मिनट का वीडियो जारी कर अपील की है कि वे नई काशी और विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए बढ़चढ़ कर मतदान में हिस्सा लें। वाराणसी में 1 जून को वोट पड़ेंगे और गुरुवार को यहां प्रचार समाप्त हो गया।
पिछले दस साल से वाराणसी का प्रतिनिधित्व कर रहे प्रधानमंत्री मोदी ने अपने क्षेत्र के लोगों से मतदान में पिछले चुनाव समेत सारे रिकॉर्ड ध्वस्त करने का आह्वान किया है। वर्ष 2014 में जब प्रधानमंत्री पहली बार काशी से चुनाव लड़ने पहुंचे थे तो इस निर्वाचन क्षेत्र में 58.35 प्रतिशत वोट पड़े थे।साल 2019 के चुनाव में पूरे निर्वाचन क्षेत्र में वोट प्रतिशत घट कर 57.13 पर आ गया था। साल 2014 के चुनाव में मोदी को 56.37 प्रतिशत वोट मिले थे मगर पांच साल बाद जब मोदी दोबारा यहां से मैदान में उतरे तो उनकी जीत का अंतर और बढ़ गया तथा उन्हें 63.6 प्रतिशत वोट मिले।वाराणसी में कुछ लोगों का मानना है कि इस का परिणाम 2014 और 2019 के चुनावों से अलग रहेगा। देखना यह है कि क्या प्रधानमंत्री मोदी की जीत का अंतर अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के अजय राय के मुकाबले पहले से अधिक बढ़ेगा? अजय को समाजवादी पार्टी का भी समर्थन प्राप्त है।बसपा ने यहां से अख्तर जमाल लारी को मैदान में उतारा है। वाराणसी में भाजपा शासन से नाराज लोग भी इस बात से इनकार नहीं कर रहे हैं कि पिछले दस वर्षों में वाराणसी में अभूतपूर्व विकास कार्य हुए हैं।एक्स पर पोस्ट किए अपने संदेश वाले वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी में हुए तमाम विकास कार्य भी गिनाए हैं। इनमें उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, गंगा घाटों का सौंदर्यीकरण, रोपवे परियोजना का नाम प्रमुखता से शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि शहर में पिछले दस वर्षों में पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी से रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। उन्होंने युवाओं, महिलाओं और किसानों से कहा, ‘वे मतदान में बढ़चढ़ कर हिस्सा लें। उनका एक-एक वोट उन्हें नई ऊर्जा से भर देगा।’ - पुरी। ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ के चंदन यात्रा उत्सव के दौरान पटाखों के ढेर में विस्फोट होने से एक नाबालिग समेत कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और 32 अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस ने गुरुवार को यह जानकारी दी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बुधवार रात को यह हादसा उस समय हुआ जब सैकड़ों लोग अनुष्ठान देखने के लिए नरेन्द्र पुष्करिणी के तट पर एकत्र हुए थे। उन्होंने बताया, ”एक लड़के ने कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया जबकि दो अन्य लोगों की भुवनेश्वर के निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान मौत हो गई।”ओडिशा के मुख्य सचिव प्रदीप कुमार जेना, खुर्दा जिलाधिकारी चंचल राणा और स्वास्थ्य सचिव शालिनी पंडित घायल लोगों के इलाज की जानकारी लेने के लिए बुधवार देर रात अलग-अलग अस्पताल पहुंचे।मुख्यमंत्री नवीन पटनायक घायल लोगों से मिलने के लिए गुरुवार सुबह यहां एक निजी अस्पताल पहुंचे।पटनायक ने अस्पताल के चिकित्सकों से बात की और मरीजों की स्थिति के बारे में जानकारी ली। स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि घायल लोगों को पुरी, भुवनेश्वर और कटक के विभिन्न निजी और सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।पंडित ने गुरुवार सुबह संवाददाताओं से कहा, ”चिकित्सों की कई टीमें घायल लोगों की जान बचाने की पूरी कोशिश में जुटी हैं। चूंकि ऐसे मामलों में शुरुआती 48 घंटे का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है, इसलिए हम उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।”उन्होंने कहा कि राज्य सरकार दुर्घटना में घायल हुए सभी लोगों के इलाज का खर्च उठा रही है। पुरी के पुलिस अधीक्षक पिनाक मिश्रा ने बताया कि श्रद्धालुओं का एक समूह पटाखे जलाकर त्यौहार मना रहा था कि तभी अचानक जलते हुए पटाखों का एक टुकड़ा ढेर पर जा गिरा, जिससे विस्फोट हो गया।
- नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को दुनिया के पहले सिंगल-पीस थ्रीडी प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक इंजन द्वारा संचालित रॉकेट के सफल प्रक्षेपण को भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ‘महत्वपूर्ण अवसर’ बताया। चेन्नई स्थित अंतरिक्ष स्टार्ट-अप अग्निकुल कॉसमॉस ने श्रीहरिकोटा में अपने स्वयं के लॉन्च पैड से खुद से तैयार की गई थ्री डी-प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक रॉकेट ‘अग्निबाण’ की उप-कक्षीय परीक्षण-उड़ान सफलतापूर्वक भरी। इसके साथ यह ऐसा करने वाली भारत की दूसरी निजी कंपनी बन गई।मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘एक उल्लेखनीय उपलब्धि जो पूरे देश को गौरवान्वित करेगी!’’उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया के पहले सिंगल-पीस 3 डी प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक इंजन द्वारा संचालित अग्निबाण रॉकेट का सफल प्रक्षेपण भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है और हमारी युवा शक्ति की उल्लेखनीय सफलता का एक वसीयतनामा है। अग्निकुल कॉसमॉस टीम को उनके भविष्य के प्रयासों के लिए मेरी शुभकामनाएं।’’
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मुंबई. मध्य रेलवे मुंबई नेटवर्क पर प्लेटफॉर्म विस्तार कार्यों के लिए 30 मई की मध्यरात्रि से 63 घंटे का ‘मेगा ब्लॉक' संचालित करेगा। इस कदम से मुंबई की ‘‘लाइफ लाइन'' कही जाने वाली लोकल ट्रेन की सेवाएं और लाखों यात्रियों की आवाजाही प्रभावित होगी। ‘ब्लॉक' अवधि के दौरान लोकल और लंबी दूरी की ट्रेन की सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है, इसलिए रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि यदि आवश्यक न हो तो वे लोकल ट्रेन में यात्रा करने से बचें। सीएसएमटी और ठाणे स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म विस्तार और चौड़ीकरण कार्यों के लिए ‘मेगा ब्लॉक' संचालित किया जाएगा। मध्य रेलवे के मुंबई मंडल के मंडल रेलवे प्रबंधक रजनीश गोयल ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया, ‘‘प्लेटफॉर्म नंबर 5 और 6 (ठाणे में) के चौड़ीकरण के लिए 63 घंटे का मेगा ब्लॉक बृहस्पतिवार आधी रात से शुरू होगा, जबकि प्लेटफॉर्म नंबर 10 और 11 (सीएसएमटी में) के विस्तार से संबंधित कार्यों के लिए 36 घंटे का ब्लॉक शुक्रवार आधी रात से शुरू होगा।'' उन्होंने कहा कि प्लेटफॉर्म की चौड़ाई बढ़ने के बाद एस्केलेटर या एफओबी (फुट ओवर ब्रिज) के लिए चौड़ी सीढ़ियां जैसी सुविधाएं प्रदान की जा सकेंगी। रेलवे अपने चार कॉरिडोर- मेन, हार्बर, ट्रांस-हार्बर और उरण पर प्रतिदिन 1,800 से अधिक लोकल ट्रेन सेवाएं संचालित करता है, जिनका उपयोग रोजाना 30 लाख से अधिक यात्री करते हैं।
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कन्याकुमारी .प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बृहस्पतिवार से यहां स्थित विवेकानंद रॉक मेमोरियल पर 45 घंटे के प्रवास के लिए सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। इस दौरान मोदी यहां ध्यान लगाएंगे। तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने प्रधानमंत्री के आध्यात्मिक प्रवास की अनुमति देने के खिलाफ जिलाधिकारी के समक्ष याचिका दायर की। इसमें उन्होंने चुनाव आचार संहिता लागू होने और पर्यटन सीजन का हवाला दिया। द्रमुक ने कहा कि पर्यटन सीजन में घरेलू और विदेशी पर्यटक बड़ी संख्या में आयेंगे। देश के दक्षिणी छोर पर स्थित इस जिले में 2,000 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान कड़ी निगरानी रखेंगी। पांच साल पहले उन्होंने 2019 के चुनाव प्रचार अभियान के बाद केदारनाथ गुफा में ध्यान लगाया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने बताया कि मोदी 30 मई को लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार समाप्त होने के बाद यहां स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि देने के लिए बनाए स्मारक ‘रॉक मेमोरियल' पर ध्यान लगाएंगे। वह ध्यान मंडपम में 30 मई की शाम से लेकर एक जून की शाम तक ध्यान लगाएंगे। ऐसा माना जाता है कि इसी स्थान पर आध्यात्मिक विभूति विवेकानंद को ‘भारत माता' के बारे में दिव्य दृष्टि प्राप्त हुई थी। मोदी के दौरे के मद्देनजर सुरक्षा बढ़ा दी गयी है। तिरुनेलवेली रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (डीआईजी) प्रवेश कुमार के साथ ही पुलिस अधीक्षक ई. सुंदरावथनम ने रॉक मेमोरियल, बोट जेटी, हेलीपैड और कन्याकुमारी में राज्य के अतिथि गृह का निरीक्षण किया। प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात दल पहले ही कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गया है। हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर उतारने का एक परीक्षण भी कर लिया गया है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थलों में शामिल कन्याकुमारी में और उसके आसपास करीब 2,000 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। मोदी के संभावित कार्यक्रम के अनुसार, वह आध्यात्मिक प्रवास के लिए 30 मई की दोपहर को कन्याकुमारी पहुंचेंगे। इसके बाद वह मेमोरियल जाएंगे। वह एक जून को दोपहर तीन बजे तक विवेकानंद रॉक मेमोरियल पर ठहर सकते हैं जब देश में लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण के लिए मतदान हो रहा होगा। एक सूत्र ने बताया कि चूंकि प्रधानमंत्री ध्यान लगाने के लिए करीब 45 घंटे रुकेंगे तो तटीय सुरक्षा समूह, भारतीय तटरक्षक बल और भारतीय नौसेना समुद्री सीमाओं पर निगरानी रखेगी। भाजपा पदाधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आध्यात्मिक प्रवास के लिए कन्याकुमारी को इसलिए चुना क्योंकि वह देश में विवेकानंद के दृष्टिकोण को साकार करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें यह विश्वास है कि चार जून को मतगणना होने के बाद वह तीसरी बार सत्ता में वापस लौटेंगे। लोकसभा चुनाव के लिए अंतिम चरण का मतदान एक जून को होना है। मतदान से दो दिन पहले चुनाव-प्रचार समाप्त हो जाता है। भाजपा के पदाधिकारियों ने बताया कि जिस स्थान पर प्रधानमंत्री ध्यान लगाएंगे उसका विवेकानंद के जीवन पर बड़ा प्रभाव था। उन्होंने कहा कि देशभर में घूमने के बाद विवेकानंद यहीं पहुंचे थे और यहां उन्होंने तीन दिन तक ध्यान लगाया था और एक विकसित भारत का सपना देखा था। एक नेता ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी कन्याकुमारी जाकर राष्ट्रीय एकता का संकेत दे रहे हैं।'' उन्होंने कहा कि यह तमिलनाडु के प्रति प्रधानमंत्री की गहरी प्रतिबद्धता और स्नेह को भी दर्शाता है कि चुनाव समाप्त होने के बाद भी वह राज्य का दौरा कर रहे हैं।
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नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने नागरिकता अधिनियम (सीएए) के तहत पश्चिम बंगाल, हरियाणा और उत्तराखंड में नागरिकता देने की शुरुआत कर दी है। गृह मंत्रालय ने यह जानकारी दी। भारत सरकार ने दिसंबर 2019 में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न की वजह से 31 दिसंबर 2014 को या इससे पहले आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने के लिए सीएए बनाया है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड और हरियाणा की अधिकार प्राप्त समितियों ने तीनों राज्यों के आवेदकों को बुधवार को नागरिकता प्रदान की। नागरिकता (संशोधन) नियम, 2024 की अधिसूचना के बाद दिल्ली की अधिकार प्राप्त समिति ने पहली बार भारतीय नागरिकता प्रदान की। इन आवेदकों को 15 मई को दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय गृह सचिव ने नागरिकता प्रमाण पत्र सौंपा। नागरिकता प्रमाणपत्रों की यह दूसरी किस्त बुधवार को जारी की गई। एक जून को लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के मतदान से कुछ दिन पहले यह कदम उठाया गया है। पश्चिम बंगाल में कई सीट पर शनिवार को अंतिम चरण में मतदान होगा। मतगणना चार जून को होगी।
राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद कानून को अधिसूचित कर दिया गया था लेकिन भारतीय नागरिकता प्रदान करने के लिए नियम चार साल की देरी के बाद 11 मार्च को जारी किए गए। सीएए नियमों में आवेदन पत्र के प्रारूप, जिला स्तरीय समिति (डीएलसी) द्वारा आवेदनों पर कार्रवाई की प्रक्रिया, राज्य स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति (एसएलईसी) द्वारा जांच और नागरिकता प्रदान करने की परिकल्पना की गई है। आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आगे बढ़ेगी। सीएए के 2019 में पारित होने के बाद देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ था और प्रदर्शनकारियों ने इसे ‘भेदभाव' वाला करार दिया था। देश के विभिन्न हिस्सों में सीएए विरोधी प्रदर्शनों या पुलिस कार्रवाई के दौरान करीब 100 लोगों की जान गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कहते रहे हैं कि सीएए को लागू करने से कोई नहीं रोक सकता क्योंकि यह देश का कानून है। उन्होंने विपक्ष पर इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। -
नयी दिल्ली.भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को दावा किया कि मणिशंकर अय्यर द्वारा 1962 में भारत पर हुए चीनी हमले को ‘कथित' आक्रमण बताया जाना कांग्रेस की ‘‘भारत विरोधी'' मानसिकता को दर्शाता है और यह ‘‘दुश्मन'' देशों को यहां की चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का संकेत है क्योंकि विपक्ष इस लोकसभा चुनाव में बुरी तरह ‘हार' का सामना करने जा रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि अय्यर राहुल गांधी की सहमति के बिना इस तरह का बयान नहीं दे सकते। उन्होंने इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ‘‘चुप्पी'' को लेकर उन पर भी निशाना साधा। अय्यर ने मंगलवार को एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में यह टिप्पणी की थी।
‘फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब' में एक कार्यक्रम में अय्यर ने एक किस्सा सुनाते हुए कहा था, ‘‘...अक्टूबर 1962 में, चीनियों ने कथित तौर पर भारत पर आक्रमण किया।'' हालांकि, विवाद होने के बाद अय्यर ने अपनी इस टिप्पणी के लिए माफी मांग ली थी तथा कांग्रेस ने उनके इस बयान से दूरी बना ली। भाटिया ने कहा कि कांग्रेस अकसर अपने नेताओं की इस तरह की विवादास्पद टिप्पणियों से खुद को दूर करती है। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टी को चीन जैसे देशों से दूरी बना लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के साथ एक समझौता ज्ञापन पर उस समय हस्ताक्षर किए थे जब संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सत्ता में था। भाटिया ने कहा कि विपक्षी पार्टी ने अभी तक इसके विवरण का खुलासा नहीं किया है। -
नयी दिल्ली. एयरलाइन कंपनी इंडिगो ने बाजार अनुसंधान के बाद महिला यात्रियों के लिए विशेष सुविधा की पेशकश की है। इसके तहत सीट बुक करने वाली महिलाएं अब वेब चेक-इन के समय अन्य महिला यात्रियों द्वारा बुक की गई सीटों के बारे में जान सकती हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इंडिगो देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन है। इसकी बाजार हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक है। अप्रैल में 80 लाख यात्रियों ने इंडिगो की सेवाएं लीं। एयरलाइन ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि उसने एक नई सुविधा शुरू की है जिसका उद्देश्य महिला यात्रियों के लिए यात्रा अनुभव को और सुगम बनाना है। बयान के अनुसार, “इसे बाजार अनुसंधान के आधार पर शुरू किया गया है। वर्तमान में यह हमारे #गर्लपावर सिद्धांत के अनुरूप प्रायोगिक चरण में है। यह सुविधा केवल वेब चेक-इन के दौरान महिला यात्रियों द्वारा बुक की गई सीटों की दृश्यता प्रदान करती है। यह विशेष रूप से महिला यात्रियों के लिए अकेले और साथ ही पारिवार के साथ बुकिंग के हिस्से के रूप में पीएनआर (यात्री नाम रिकॉर्ड) के लिए तैयार की गई है। -
छिंदवाड़ा. मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में एक व्यक्ति ने अपने परिवार के आठ लोगों की कथित तौर पर कुल्हाड़ी से हत्या कर दी और फिर फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने यह जानकारी दी। माहुलझिरी पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया कि यह घटना मंगलवार देर रात जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर बोदल कछार गांव में हुई। अधिकारी ने बताया कि घटना का कारण अभी स्पष्ट नहीं है और जिलधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारी गांव पहुंचे हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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नई दिल्ली। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी प्रदीप कुमार त्रिपाठी को 30 जून तक लोकपाल का सचिव नियुक्त किया गया है। मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष के रूप में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी राकेश रंजन की नियुक्ति को भी स्वीकृति दी। 1991 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अमित यादव को सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग में विशेष कार्य अधिकारी के पद पर नियुक्त किया गया है। श्री यादव 31 जुलाई को मौजूदा सचिव सौरभ गर्ग की सेवानिवृत्ति के बाद सचिव का पदभार संभालेंगे।
1990 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी राज कुमार गोयल को गृह मंत्रालय में सीमा प्रबंधन विभाग के सचिव से कानून और न्याय मंत्रालय में न्याय विभाग के सचिव के रूप में स्थानांतरित किया गया है। समिति ने 1992 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी राजेंद्र कुमार को सीमा प्रबंधन विभाग में सचिव पद पर नियुक्ति को मंजूरी दी। -
नई दिल्ली। भारतीय पर्वतारोही सत्यदीप गुप्ता ने एक सत्र में दो बार माउंट एवरेस्ट और माउंट ल्होत्से पर चढ़ने वाले पहले व्यक्ति बनकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने माउंट एवरेस्ट से माउंट ल्होत्से तक 11 घंटे और 15 मिनट में यात्रा कर एक और रिकॉर्ड बनाया। श्री गुप्ता ने सोमवार को दोपहर में 8 हजार 516 मीटर ऊंचे माउंट ल्होत्से पर चढाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने आधी रात को 12 बजकर 45 मिनट पर 8 हजार 849 मीटर ऊंचे माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की। उनके साथ पर्वतारोहण मार्गदर्शक पेस्टेम्बा शेरपा और नीमा उंगडी शेरपा भी थे। श्री गुप्ता ने इससे पहले 21 मई को माउंट एवरेस्ट और 22 मई को माउंट ल्होत्से पर चढ़ाई की थी।
- ठाणे। महाराष्ट्र के ठाणे नगर निगम ने मानसून की अपनी तैयारियों के तहत शहर में 4,000 से अधिक जर्जर इमारतों की पहचान की है और इनमें से कुछ में रहने वाले लोगों को अपने घर खाली करने के लिए कहा गया है। नगर निकाय ने मंगलवार को यह जानकारी दी। एक अधिकारी ने बताया कि ठाणे नगर निगम ने शहर के विभिन्न वार्ड में कुल 4,297 जर्जर इमारतों की एक सूची जारी की है। नगर निगम के प्रवक्ता रवींद्र मांजरेकर ने बताया कि मुंब्रा वार्ड में सबसे ज्यादा 1,340 जर्जर इमारतें हैं जबकि वागले एस्टेट में 1,101, दीवा में 654 और कोपरी-नौपाड़ा में 433 इमारतें जर्जर स्थिति में हैं। उन्होंने बताया कि कम से कम 86 इमारतें सी-1 श्रेणी के अंतर्गत आती हैं। इसका अर्थ ऐसी असुरक्षित इमारतें हैं, जिन्हें खाली कराकर ध्वस्त किये जाने की आवश्यकता है। अधिकारी ने बताया कि 21 इमारतों को पहले ही खाली करा दिया गया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने हाल ही में नगरपालिका अधिकारियों को मानसून से पहले, जर्जर इमारतों में रह रहे लोगों को वहां से हटाने और उन्हें दूसरी जगहों पर भेजने का कार्य तेजी से करने का निर्देश दिया था।

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