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- नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने मंगलवार को बताया कि अप्रैल से नवंबर के बीच उर्वरक कंपनियों के 5,371 लाइसेंस कालाबाजारी, जमाखोरी और निम्न गुणवत्ता वाले उर्वरक वितरण के आरोप में रद्द किए गए हैं। यह जानकारी केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने राज्यसभा में दी।भाजपा सदस्य किरण चौधरी के सवाल के जवाब में नड्डा ने कहा कि राज्यों को कदाचार पर कार्रवाई करने का अधिकार है और केंद्र कालाबाजारी, जमाखोरी और अधिक मूल्य निर्धारण जैसी कदाचार गतिविधियों को रोकने के लिए 1955 के आवश्यक वस्तु अधिनियम और उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत कार्रवाई करता है। उन्होंने बताया कि निम्न गुणवत्ता वाले उर्वरक पर कार्रवाई भी उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत की जाती है।नड्डा ने कहा, “कालाबाजारी के लिए एक अप्रैल से 28 नवंबर तक 5,058 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 442 मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई और 3,732 लाइसेंस रद्द किए गए।” उन्होंने बताया कि जमाखोरी के आरोप में 687 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 202 लाइसेंस रद्द किए गए और 446 प्राथमिकी दर्ज की गईं। वहीं, निम्न गुणवत्ता वाले उर्वरक के मामले में 3,811 कंपनियों को नोटिस भेजे गए, 1,437 लाइसेंस रद्द किए गए और 65 प्राथमिकी दर्ज की गईं। मंत्री ने बताया कि विपथन (डाइवर्ज़न) के मामलों में 3,058 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 464 लाइसेंस रद्द किए गए और 96 प्राथमिकी दर्ज की गईं। उनके अनुसार, पिछले सात महीनों में कुल 12,814 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 5,835 लाइसेंस रद्द किए गए और 649 प्राथमिकी दर्ज की गईं, जिनमें से 442 प्राथमिकी काला बाजारी के मामले में थीं। नड्डा ने बताया कि केंद्र ने सभी राज्यों को समय पर उर्वरक की आपूर्ति की है और इसकी ‘एकीकृत उर्वरक निगरानी प्रणाली' के माध्यम से वास्तविक समय में निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा, “किसान के पास 10 बैग उर्वरक का उपयोग करने की क्षमता हो सकती है, लेकिन वह 50 बैग ले जाता है। इससे निपटने में राज्य सरकार को केंद्र का सहयोग करना चाहिए।” दूसरे पूरक प्रश्न में भाजपा सदस्य चौधरी ने कहा कि किसान मजबूरी में उर्वरक के अलावा अन्य उत्पाद भी खरीदने को मजबूर होते हैं, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति प्रभावित होती है। उन्होंने इस तरह की गतिविधियों के खिलाफ सख्त प्रोटोकॉल बनाने की आवश्यकता बताई। नड्डा ने कहा कि मंत्रालय इस मुद्दे पर डीलरों और कंपनियों के साथ चर्चा करेगा ताकि किसानों को इस तरह के चलन या किसी अन्य रूप में कोई समस्या न हो।
- भुवनेश्वर. ओडिशा के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने मंगलवार को विधानसभा को बताया कि अप्रैल 2024 से सितंबर 2025 के बीच बिजली का झटका लगने, रोगों, अवैध शिकार और दुर्घटनाओं सहित कई कारणों से 136 जंगली हाथियों की मौत हुई है। मंत्री ने कांग्रेस विधायक ताराप्रसाद बहिनीपति के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि 42 हाथियों की मौत बिजली का झटका लगने से, 31 हाथियों की मौत बीमारी के कारण और चार हाथियों की मौत ट्रेन दुर्घटनाओं में हुई। उन्होंने बताया कि 31 अन्य हाथियों की प्राकृतिक कारणों से मौत हुई।मंत्री ने बताया कि राज्य में मानव-हाथी संघर्ष के कारण चार हाथियों की मौत हुई और अवैध शिकार के चार मामले भी सामने आए। उन्होंने बताया कि 20 हाथियों की मौत के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है।खुंटिया ने सदन को बताया कि हाथियों की मौत में कथित संलिप्तता के लिए 92 लोगों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ अदालतों में मुकदमा चलाया जा रहा है और ऐसे सभी मामलों की नियमित निगरानी की जा रही है।
- श्री विजयपुरम। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, विनायक दामोदर सावरकर की प्रतिष्ठित कविता ‘सागरा प्राण तलमलला' की 116वीं वर्षगांठ मनाने के लिए एक दिन के लिए अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का दौरा कर सकते हैं। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उन्हें शाह के 11 या 12 दिसंबर को वीर सावरकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने की प्रारंभिक जानकारी मिली है, लेकिन अंतिम यात्रा कार्यक्रम का इंतजार है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि शुरुआती जानकारी के अनुसार, शाह 12 दिसंबर को दक्षिण अंडमान के बेदनाबाद में एक कार्यक्रम में शामिल होंगे, जहां सावरकर की एक प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत भी इस समारोह में शामिल होने वाले हैं। शाम को गृह मंत्री श्री विजयपुरम स्थित डॉ. बी.आर. आंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (डीबीआरएआईटी) में एक जनसभा को संबोधित कर सकते हैं, जहां सावरकर को समर्पित एक गीत का औपचारिक विमोचन किया जाएगा। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘वह श्री विजयपुरम में एक नवनिर्मित फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला का उद्घाटन भी कर सकते हैं। गृह मंत्रालय से अब तक हमें जो भी जानकारी मिली है, वह प्रारंभिक है और उम्मीद है कि एक-दो दिन में हमें उनका अंतिम कार्यक्रम मिल जाएगा।'' सावरकर को 1911 में अंग्रेजों ने पोर्ट ब्लेयर (जिसे अब श्री विजयपुरम के नाम से जाना जाता है) की सेलुलर जेल (काला पानी) में कैद कर लिया था। उन्हें एकांत कारावास में रखा गया था और कैद के दौरान उनसे कठोर श्रम कराया गया था।
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को शहीद दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक असम आंदोलन में शामिल वीरों के साहस और बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि असम आंदोलन आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य की सांस्कृतिक मजबूती तथा समग्र विकास के संकल्प को दोहराती है।पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा- ‘यह आंदोलन देश के इतिहास में सदैव महत्वपूर्ण स्थान रखेगा’प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा कि शहीद दिवस पर असम आंदोलन का हिस्सा रहे सभी वीरों के साहस का स्मरण किया जाता है। यह आंदोलन देश के इतिहास में सदैव महत्वपूर्ण स्थान रखेगा। केंद्र सरकार उन सभी के सपनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है, विशेष रूप से असम की संस्कृति को सुदृढ़ करने और राज्य की सर्वांगीण प्रगति के लिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि असम आंदोलन ने राज्य की अस्मिता, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक वैभव को नई दिशा प्रदान की।
- चेन्नई। तमिलनाडु के कैचमेंट इलाकों में भारी बारिश के बाद, चेन्नई के आसपास पीने के पानी के मुख्य जलाशयों का स्तर तेजी से बढ़ गया है, जिससे अधिकारियों ने निचले और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए अलर्ट जारी किया है। प्रमुख जलाशयों में से पुझल झील लगातार दूसरे दिन अपनी पूरी भंडारण क्षमता तक पहुंच गई है, जिससे अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से छोड़ा जा रहा है। शहर के जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, चेन्नई को पीने का पानी सप्लाई करने वाले तीन मुख्य जलाशयों, चेम्बरमबक्कम झील, पुझल झील और पूंडी झील में पिछले कुछ दिनों से लगातार और व्यापक बारिश के कारण पानी के आने में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।ऊपरी इलाकों में भारी बारिश से पानी का भंडारण काफी बढ़ गया है, जिससे शहर की पीने के पानी की सुरक्षा में सुधार हुआ है, लेकिन आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है।अधिकारियों ने पुष्टि की कि पुझल जलाशय मंगलवार को पूरी तरह भर गया था और बुधवार को भी दूसरे दिन उसी स्तर पर बना रहा। इसकी कुल भंडारण क्षमता 3,300 मिलियन क्यूबिक फीट (Million Cubic Feet) है।बाढ़ प्रबंधन और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत, अधिकारी अब जलाशय से लगभग 300 क्यूबिक फीट प्रति सेकंड (क्यूसेक) अतिरिक्त पानी निचले चैनलों में छोड़ रहे हैं।इस बीच, चेम्बरमबक्कम और पूंडी जलाशयों में भी पानी के स्तर में लगातार और काफी वृद्धि देखी गई है, हालांकि दोनों अभी भी सुरक्षित सीमा के भीतर काम कर रहे हैं। संरचनात्मक सुरक्षा, पानी की आवक के पैटर्न और निचले इलाकों पर प्रभाव का आकलन करने के लिए सभी प्रमुख जल निकायों पर चौबीसों घंटे निगरानी दल तैनात किए गए हैं।पुझल से लगातार पानी छोड़े जाने और आगे बारिश की संभावना को देखते हुए, जिला प्रशासन ने नहरों, नदी के किनारों और निचले तटीय इलाकों में रहने वाले निवासियों को सतर्क रहने की सलाह जारी की है।मछुआरों, झील के किनारे बसी बस्तियों के निवासियों और बाढ़ संभावित इलाकों के लोगों से आधिकारिक निर्देशों का सख्ती से पालन करने और यदि आवश्यक हो तो सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है। राजस्व, पुलिस और आपदा प्रतिक्रिया टीमें स्टैंडबाय पर हैं, जबकि स्थानीय निकायों को निर्देश दिया गया है कि वे जल निकासी चैनलों को साफ रखें और अगर स्थिति बिगड़ती है तो आपातकालीन आश्रयों को इस्तेमाल के लिए तैयार रखें।--
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि बिहार की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार राज्य के लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। मोदी ने संसद भवन में बिहार के राजग सांसदों से मुलाकात के कुछ घंटों बाद यह टिप्पणी की।
उन्होंने ‘एक्स' पर इस मुलाकात की फोटो साझा करते हुए लिखा, “बिहार विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद आज संसद भवन में राज्य के राजग सांसदों से हुई मुलाकात ने नयी ऊर्जा से भर दिया। इस दौरान प्रदेश के मेरे परिवारजनों के जीवन को और आसान बनाने के लिए उनके संकल्प को देखकर अत्यंत प्रसन्नता हुई। ‘डबल इंजन' सरकार राज्य की जनता-जनार्दन की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ने वाली है।” मोदी ने राजग सांसदों से हाल में संपन्न राज्य विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ गठबंधन की शानदार जीत के बाद लोगों के कल्याण के लिए और अधिक उत्साह के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “बड़ी जीत के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है।” लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सांसद शांभवी चौधरी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने राजग सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को उस समय यह संदेश दिया, जब वे (राजग सांसद) उन्हें (मोदी को) बिहार चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन की भारी जीत की बधाई देने के लिए दिल्ली आए थे। बैठक के बाद शांभवी ने पत्रकारों से कहा, “हमने बिहार में शानदार नेतृत्व और प्रचार अभियान के समर्थन के लिए प्रधानमंत्री को बधाई दी तथा उनका आभार जताया, जिसके कारण हमारे चुनाव अभियान को मजबूत गति मिली थी। प्रधानमंत्री ने हमें याद दिलाया कि बड़ी जीत के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है।” शांभवी ने बताया कि मोदी ने सांसदों से बिहार के लोगों के कल्याण के लिए और अधिक उत्साह के साथ काम करने का आह्वान किया, क्योंकि सभी के लिए समावेशी विकास राजग की स्पष्ट प्राथमिकता है, फिर चाहे वे किसी भी वर्ग के हों। शांभवी के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने राजग सांसदों से कहा कि वे नकारात्मकता, घृणा और झूठ के बजाय प्रगति पर ध्यान केंद्रित करें। लोजपा (रामविलास) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि बिहार के सभी राजग सांसदों ने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर राज्य विधानसभा चुनावों में गठबंधन की शानदार जीत के लिए उनका आभार जताया। चिराग ने संसद परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कारण राजग ने बिहार चुनावों में “भारी जीत” दर्ज की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी बिहार चुनाव में राजग की जीत के सूत्रधार रहे और उसके सभी पांच घटक दलों ने विपक्षी गठबंधन के खिलाफ एकजुट मोर्चा बनाया। चिराग ने कहा, “इसलिए सभी सांसदों ने उनसे मुलाकात की और उन्हें बधाई दी।”
सूत्रों के अनुसार, मोदी ने बिहार के राजग सांसदों को याद दिलाया कि उनका असली काम चुनाव के बाद शुरू होता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने गठबंधन के प्रत्येक सहयोगी दल से बातचीत की और बिहार में राजग की जीत के महत्व पर जोर दिया। बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा के लिए पिछले महीने हुए चुनाव में राजग ने 202 सीट पर जीत दर्ज की, जिससे जनता दल यूनाइटेड (जदयू) प्रमुख नीतीश कुमार के 10वीं बार राज्य का मुख्यमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ। राजग को मिली कुल 202 सीट में से 89 पर भाजपा, 85 पर जद (यू), 19 पर लोजपा (रामविलास), पांच पर हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) और चार पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत पर यूनेस्को की समिति के 20वें सत्र की मेजबानी करना देश की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो समाजों और पीढ़ियों को जोड़ने के लिए संस्कृति की शक्ति का उपयोग करने की है। यूनेस्को की प्रमुख बैठक आठ से 13 दिसंबर तक यहां लाल किले में आयोजित की जा रही है। यह पहली बार है जब भारत यूनेस्को की समिति के किसी सत्र की मेजबानी कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स' पर पोस्ट में कहा, "यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत समिति का 20वां सत्र भारत में आरंभ हुआ है। इस मंच ने हमारी साझी जीवंत परंपराओं को संरक्षित और लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से 150 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाया है। भारत को, वह भी लाल किले में इस सम्मेलन की मेज़बानी करने पर प्रसन्नता हो रही है।" उन्होंने कहा, "यह समाजों और पीढ़ियों को जोड़ने के लिए संस्कृति की शक्ति का उपयोग करने की हमारी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।" बैठक का उद्घाटन समारोह रविवार शाम को आयोजित किया गया, जिसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर के लिए प्रधानमंत्री मोदी का लिखित संदेश उद्घाटन समारोह में केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल द्वारा पढ़ा गया। इस अवसर पर जयशंकर, केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और यूनेस्को के महानिदेशक खालिद अल-एनानी सहित मंच पर अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। मोदी ने अपने संदेश में कहा कि यह बहुत गर्व की बात है कि भारत इस महत्वपूर्ण सत्र की मेजबानी कर रहा है। उन्होंने सत्र में शामिल लोगों से कहा, “आप न केवल अपने राष्ट्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, बल्कि उन जीवंत परंपराओं, कहानियों और ज्ञान का भी प्रतिनिधित्व करते हैं, जो मानवता को समय के साथ विरासत में मिली है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के लिए विरासत कभी भी सिर्फ पुरानी यादें नहीं रही है, बल्कि यह एक जीवंत और बढ़ती नदी है, ज्ञान, रचनात्मकता एवं समुदाय की एक सतत धारा है। मोदी ने कहा कि अमूर्त विरासत विभिन्न समुदायों को पीढ़ियों तक बांधती है और तेजी से बदलती दुनिया में निरंतरता की भावना प्रदान करती है।
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श्री विजय पुरम। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत तीन दिवसीय अंडमान-निकोबार दौरे पर 11 दिसंबर को यहां पहुंचेंगे। इस दौरान, वह श्री विजय पुरम में वी डी सावरकर की एक प्रतिमा का अनावरण करेंगे। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। आरएसएस सरसंघचालक के रूप में भागवत का केंद्र शासित प्रदेश का यह पहला दौरा होगा। लगभग दो दशक पहले, वह संगठन के सरकार्यवाह (महामंत्री) के रूप में द्वीप समूह का दौरा कर चुके हैं। भागवत 11 दिसंबर को यहां पहुंचेंगे और स्थानीय आरएसएस पदाधिकारियों से मुलाकात करेंगे।
वह 12 दिसंबर की सुबह दक्षिण अंडमान के बेओदनाबाद में सावरकर की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। उसी शाम, वह डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रौद्योगिकी संस्थान (डीबीआरएआईटी) में आयोजित एक कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे। अधिकारियों ने बताया कि भागवत 13 दिसंबर की शाम को श्री विजय पुरम के नेताजी स्टेडियम में एक जनसभा को संबोधित करेंगे और अगले दिन द्वीप समूह से रवाना हो जाएंगे। ये कार्यक्रम मुंबई के वैल्यूएबल ग्रुप द्वारा सावरकर की कविता ‘सागरा प्राण तलमलला'की 116वीं वर्षगांठ मनाने के लिए आयोजित किए जा रहे हैं। अंग्रेजों ने सावरकर को इसी द्वीप समूह की कुख्यात सेलुलर जेल में कैद रखा था। अधिकारियों के अनुसार, भागवत के दौरे के मद्देनजर केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। -
नयी दिल्ली. दिल्ली का ऐतिहासिक लालकिला अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा पर यूनेस्को की मौजूदा महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी कर रहा है और ऐन मौके पर ‘शाहजहां' प्रतिनिधियों का स्वागत करने के लिए इस मुगलकालीन महल परिसर में ‘वापस' आ गए हैं। दरअसल, हम बादशाह शाहजहां के बारे में बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि पुराने विमान बोइंग 747 - जंबो जेट के आकर्षक मॉडल के बारे में बात कर रहे हैं, जिसका नाम उनके नाम पर रखा गया है। यह विमान कभी एअर इंडिया के प्रतिष्ठित ‘महाराजा' बेड़े का हिस्सा था। इसे ब्रिटिशकालीन बैरक के सामने प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है, जिसमें एक नयी दीर्घा है। इस दीर्घा में एअर इंडिया के 'महाराजा संग्रह' से ली गई कुछ अमूल्य कलाकृतियां और वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। भारत में पहली बार आयोजित हो रहे यूनेस्को सम्मेलन के उपलक्ष्य में दो पुरानी बैरकों - ‘ए1' और ‘ए2' में लगभग 300 वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं, जिनमें प्राचीन मूर्तियां, चोल कांस्य, मुगल लघु कला, कलमकारी कलाकृतियां, समकालीन चित्र और कई प्रतिष्ठित पुराने ‘एअर इंडिया' पोस्टर शामिल हैं। इन दोनों बैरकों की दीर्घाओं का संयोजन राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (एनजीएमए) द्वारा किया गया है, जिसके पास अब वह संग्रह है जो पहले मुंबई के नरीमन प्वाइंट पर ऐतिहासिक एअर इंडिया भवन में रखा हुआ था। अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए अंतर-सरकारी समिति (आईसीएच) का 20वां सत्र आठ से 13 दिसंबर तक लालकिले में आयोजित किया जा रहा है। इस यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल पर विचार-विमर्श में भाग लेने के लिए सैकड़ों प्रतिनिधि एकत्रित हुए हैं। भारत ने इस अवसर पर अपनी समृद्ध मूर्त और अमूर्त विरासत का प्रदर्शन किया है। केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने कहा, ‘‘लालकिला परिसर में चार नयी दीर्घाएं स्थापित की गई हैं। इनमें से दो में एअर इंडिया के निजीकरण के बाद हमें एअर इंडिया संग्रह से जो कलाकृतियां मिलीं, उन्हें प्रदर्शित किया गया हैं।'' उन्होंने बताया कि हथियारों और शस्त्रागारों पर आधारित एक दीर्घा राष्ट्रीय संग्रहालय द्वारा तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि चौथी दीर्घा लाल किला परिसर में खुदाई से प्राप्त या वहां से प्राप्त पुरातात्विक वस्तुओं पर आधारित है। ये दीर्घाएं लाल किला परिसर में 19वीं सदी के चार ब्रिटिशकालीन बैरकों में स्थापित की गई हैं।
लेकिन, इन वस्तुओं में सबसे आकर्षक है पुराने एअर इंडिया (एआई) विमान का मॉडल, जिसकी सफेद और लाल रंग की विशिष्ट सजावट और झरोखा शैली की खिड़की का डिज़ाइन है। एअर इंडिया ने 2021 में ‘एक्स' पर इस विमान की एक तस्वीर साझा की थी और लिखा था - ‘‘चार मई 1971 को, 'सम्राट शाहजहां' एअर इंडिया के बेड़े में शामिल होने वाला दूसरा विमान बना।'' अशोक समेत महान सम्राटों के नाम पर, एअर इंडिया ने अपने ग्राहकों के लिए इस आलीशान बेड़े को ‘आसमान में आपका महल' नाम से पेश किया था। टैगलाइन ‘शाहजहां' विमान के मॉडल के पिछले हिस्से पर लिखी है, जबकि आगे वाले हिस्से पर अंग्रेजी और हिंदी में, दोनों तरफ़ एक-एक नाम लिखा है। और, जब प्रतिनिधि दीर्घा में जाते हैं, तो उन्हें उस शाही संग्रह का भी अनुभव भी प्राप्त होता है जिसे दिग्गज उद्योगपति और विमानन अग्रणी जेआरडी टाटा और उनके शानदार परिवार के अन्य लोगों ने दशकों में बनाया था। लालकिला परिसर में अन्य ब्रिटिशकालीन बैरकों में स्थित पुरानी दीर्घाएं भी हैं, जो स्वतंत्रता संग्राम, 1857 के विद्रोह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आज़ाद हिंद फौज पर आधारित हैं और पिछले कुछ वर्षों में खोले गए आत्मनिर्भर भारत डिज़ाइन केंद्र भी हैं। यूनेस्को सम्मेलन में संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधि वालिद अल हलानी ने मंगलवार को सत्र की मेजबानी कर रहे मुख्य मंडप के पास स्थित एक बैरक में स्थित स्वतंत्रता संग्राम दीर्घा का दौरा किया। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा' से कहा, ‘‘पहली बार भारत आकर इस भूमि तथा इसके लोगों के बारे में और जानना मेरे लिए खुशी की बात है।'' -
नयी दिल्ली. यूनेस्को ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में बांग्लादेश के तंगेल की पारंपरिक साड़ी बुनाई कला और अफगानिस्तान की बहजाद की लघु चित्रकला शैली को शामिल करने की मंगलवार को मंजूरी दे दी। अधिकारियों ने बताया कि कई अरब देशों द्वारा नामित ‘बिष्ट' (पुरुषों द्वारा पहना जाने वाला अबा या गाउन) बनाने के कौशल और तरीकों को भी इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल करने की मंजूरी दी गई। विभिन्न देशों द्वारा दिये गए इन प्रस्तावों पर दिल्ली में आयोजित यूनेस्को की एक अहम बैठक में मंजूरी दी गई। अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए अंतर-सरकारी समिति (आईसीएच) का 20वां सत्र 8 से 13 दिसंबर तक यहां लाल किले में आयोजित किया जा रहा है। इससे पहले दिन में समिति द्वारा पाकिस्तान के सिंध प्रांत का प्राचीन लोक संगीत वाद्ययंत्र बोरींडो और उसकी धुनें, पैराग्वे की प्राचीन चीनी मिट्टी की शिल्पकला और केन्या के दाईदा समुदाय के म्वाजिंडिका आध्यात्मिक नृत्य को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची (आईसीएच) में मंगलवार को शामिल किया गया, जिन्हें तत्काल संरक्षण की आवश्यकता है। इसके बाद समिति ने अन्य नामांकनों पर विचार किया ताकि उन्हें आईसीएच में जगह दी जा सके।
विश्व निकाय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर सिलसिलेवार पोस्ट कर सूची में शामिल नयी प्रविष्टियों की जानकारी दी। यूनेस्को ने पोस्ट में कहा कि कतर, बहरीन,इराक,जॉर्डन,कुवैत, ओमान,सऊदी अरब,सीरिया और संयुक्त अरब अमीरात द्वारा नामांकित ‘बिष्ट'(पुरुषों) के आबा को बुनने की कला और परंपरा को अर्मूत सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल करने की बधाई! वेनेजुएला की जीवंत उत्सव परंपरा ‘जोरोपो', बोलिविया के ग्वाडालूप की वर्जिन का उत्सव ‘प्रोटनेस ऑफ सूक्रे', अर्जेंटीना के कॉर्डोबा शहर में आयोजित संगीत नृत्य और गीत को भी इस प्रतिष्ठित सूची में जगह दी गई है। अफगानिस्तान की ‘बहज़ाद की लघु चित्रकला शैली' का नाम 15वीं शताब्दी के उस कलाकार के नाम पर रखा गया है, जिनकी तकनीकों, परिप्रेक्ष्य और रंगों के प्रयोग ने उन्हें अपने समय के सबसे प्रसिद्ध चित्रकारों में से एक बना दिया था। यूनेस्को के अनुसार, ‘‘ यह अभ्यास मूलभूत कहानियों, मिथकों, मूल्यों और नैतिकताओं के प्रसारण में योगदान देता है।'' यूनेस्को ने बेल्जियम से नामांकित ब्रुसेल्स की रॉड मैरियोनेट परंपरा,बुल्गारिया के बैगपाइप बनाने और बजाने की कला को भी इस सूची में जगह दी है। विश्व निकाय ने जिबूती, कोमोरोस, संयुक्त अरब अमीरात, इराक, जॉर्डन और सोमालिया की पारंपरिक जफा विवाह परंपरा को भी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत माना है। यह पहली बार है कि भारत यूनेस्को के किसी सत्र की मेजबानी कर रहा है।
पेरिस स्थित विश्व निकाय के अनुसार, समिति इस सत्र के दौरान यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल करने के लिए लगभग 80 देशों द्वारा प्राप्त ‘कुल 67 नामांकनों' पर विचार करेगी। यूनेस्को ने पोस्ट किया कि तत्काल संरक्षण की आवश्यकता वाली अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में अन्य नए नाम पनामा की आवास निर्माण शैली ‘क्विंचा हाउस और जुंटा डी एम्बारे/एम्बारा, पैराग्वे की पांरपरिक चीनी मिट्टी शिल्पकला नाइउपो कला, पुर्तगाल के एवेरो क्षेत्र की नौसैनिक बढ़ईगीरी कला मोलिसिरो नाव, तथा उज्बेकिस्तान की कोबीज शिल्पकला और वादन कला है। यूनेस्को ने इसी के साथ अरब देशों की ‘बिष्ट'कला, बेलारूस में गोमेल क्षेत्र के वेतका जिले की ‘नेगलिबुका' कपड़ा बुनाई परंपरा, अल्बानिया का लहुटा वाद्य यंत्र, उसके वादन और गायन को भी सूची में शामिल करने को हरी झंडी दे दी है। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को लोकसभा को बताया कि सुरक्षा बलों ने 2019 से अब तक 29 शीर्ष नक्सलियों को मार गिराया और अकेले इस साल माओवादियों की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के 14 सदस्य मारे गए हैं। सदन में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि नक्सल प्रभावित राज्यों की संख्या 2014 के 10 से घटकर 2025 (अक्टूबर तक) पांच रह गई है, जो 50 प्रतिशत की कमी है। उन्होंने कहा कि वहीं, वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या में भी इस अवधि के दौरान 91 प्रतिशत की तीव्र गिरावट देखी गई और यह संख्या 126 से घटकर 11 रह गई। उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों की संख्या अप्रैल 2018 के 126 से घटकर अक्टूबर 2025 में मात्र 11 रह गई। मंत्री ने कहा कि अब केवल तीन जिले ही वामपंथी उग्रवाद से ‘‘सबसे अधिक प्रभावित' हैं। मंत्री ने दावा किया कि वामपंथी उग्रवाद ‘मार्च 2026 तक समाप्त हो जाएगा।'
नक्सलियों के खिलाफ केंद्र सरकार की ‘कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति' के परिणाम को रेखांकित करते हुए, उन्होंने कहा कि माओवादी हिंसा में 2010 के उच्चतम स्तर से 2024 तक 81 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। -
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को स्पष्ट संदेश दिया कि उनकी सरकार के तीसरे कार्यकाल में प्राथमिकता लोगों की जिंदगी को आसान बनाना है। उन्होंने कहा कि कानून या नियम आम लोगों की सुविधा के लिए होने चाहिए और उनकी वजह से किसी निर्दोष भारतीय को असुविधा नहीं होनी चाहिए। यहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) संसदीय दल की बैठक को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि देश अब पूरी तरह ‘‘रिफॉर्म एक्सप्रेस'' के दौर में है, जहां सुधार तेजी से और स्पष्ट मंशा के साथ किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के सुधार सिर्फ अर्थव्यवस्था या राजस्व पर केंद्रित नहीं है, ये पूरी तरह से नागरिक-केंद्रित हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि सरकार का लक्ष्य लोगों की रोजमर्रा की परेशानियां दूर करना है, ताकि वे अपनी पूरी क्षमता से आगे बढ़ सकें। बैठक के बाद संवाददाताओं को जानकारी देते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों को ‘‘बहुत अच्छे दिशानिर्देश'' दिए और यह संदेश दिया कि उनकी सरकार के तीसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा मुद्दा “रिफॉर्म एक्सप्रेस” है। इस बैठक में राजग के सभी सांसद शामिल हुए। रीजीजू ने कहा, ‘‘मैं इस बात पर बल देना चाहता हूं कि नरेन्द्र मोदी सरकार की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस' चल पड़ी है और अब यह रुकेगी नहीं। यह सुधार देश के हर नागरिक की जिंदगी बदलने के लिए है। जब हम सुधार की बात करते हैं तो कुछ लोग इसे आर्थिक सुधार समझते हैं, कुछ राजनीतिक, कुछ प्रशासनिक या सांस्कृतिक सुधार। लेकिन ‘सुधार' का असली मतलब है-हर नागरिक के जीवन में बेहतरी है।” उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने इस पर बल दिया कि जो भी कानून बनाया जाए, उसमें ऐसा कोई प्रावधान नहीं होना चाहिए जो किसी नागरिक के लिए नुकसानदेह हो या उसे परेशान करे। नियम और कानून आम लोगों के लिए बोझ नहीं होने चाहिए। सभी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नियम-कानून जनता की सुविधा के लिए हों और उनकी जिंदगी बेहतर बनाएं।'' रीजीजू ने प्रधानमंत्री के हवाले से कहा कि नियम-कानून, व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए होने चाहिए, लोगों को परेशान करने के लिए नहीं और कोई भी कानून ऐसा नहीं होना चाहिए जो बिना किसी वजह लोगों के लिए परेशान खड़ी करे। उन्होंने कहा, “अब हम इसी दिशा में काम करेंगे। केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और नगरपालिकाओं व पंचायतों जैसी स्थानीय स्वशासी संस्थाओं, सभी को इसी दिशा में काम करना चाहिए...…। सूत्रों के मुताबिक, मोदी ने सांसदों से कहा कि वे आम लोगों की वास्तविक समस्याएं नियमित रूप से साझा करें, ताकि ‘‘रिफॉर्म एक्सप्रेस'' हर घर तक पहुंच सके और लोगों की रोजमर्रा की परेशानियां दूर हो सकें। सूत्रों के अनुसार, मोदी ने यह भी कहा कि वह 30-40 पन्नों वाले फॉर्म और बेवजह की कागजी कार्रवाई की संस्कृति खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि नागरिकों को सेवाएं उनके घर के द्वार पर मिलनी चाहिए और बार-बार एक ही जानकारी जमा कराने की व्यवस्था को पूरी तरह खत्म करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि सरकार ने लोगों पर भरोसा दिखाते हुए स्व-प्रमाणन की सुविधा दी थी, और पिछले 10 वर्षों में इसका कोई दुरुपयोग नहीं हुआ है, यह व्यवस्था बिल्कुल सफल साबित हुई है। सूत्रों के मुताबिक, मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि जीवन सुगमता और कारोबार सुगमता दोनों ही उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताएं हैं। बैठक की शुरुआत में मोदी को हाल में संपन्न बिहार चुनावों में राजग की शानदार जीत के लिए बधाई दी गई।
संसद भवन परिसर में आयोजित राजग संसदीय दल की बैठक में केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे. पी. नड्डा मौजूद रहे। जनता दल-यूनाइटेड (जद-यू) नेता संजय झा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने प्रधानमंत्री को माला पहनाकर बधाई दी। सोमवार को बिहार के राजग नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मोदी से मुलाकात की थी और राज्य विधानसभा चुनावों में गठबंधन की शानदार जीत के लिए उन्हें बधाई दी थी। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने राजग सांसदों से कहा कि बिहार विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ गठबंधन की बड़ी जीत के बाद जनता के कल्याण के लिए और अधिक जोश के साथ काम करना होगा। उन्होंने कहा, “बड़ी जीत के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है।
पिछले माह हुए 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा चुनावों में राजग ने 202 सीट हासिल कीं, जिससे जद(यू) प्रमुख नीतीश कुमार के 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया। गठबंधन सहयोगियों में भाजपा ने 89, जद(यू) ने 85, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने 19, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने पांच और रालोमो ने चार सीट जीतीं। -
नयी दिल्ली. राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को देश भक्ति, त्याग और राष्ट्र चेतना का प्रतीक बताते हुए सोमवार को कहा जो लोग इस समय इसकी चर्चा करने के औचित्य और जरूरत पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें अपनी सोच पर नये सिरे से विचार करना चाहिए। शाह ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष होने पर उच्च सदन में चर्चा में भाग लेते हुए उम्मीद जतायी कि इस चर्चा के माध्यम से देश के बच्चे, युवा और आने वाली पीढ़ी यह बात समझ सकेगी कि वंदे मातरम् का देश को स्वतंत्रता दिलाने में क्या योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में इस विषय पर कुछ लोगों ने यह प्रश्न उठाया था कि आज वंदे मातरम् पर चर्चा क्यों होनी चाहिए। शाह ने कहा कि वंदे मातरम् के प्रति समर्पण की जरूरत, जब यह बना तब थी, आजादी के आंदोलन में थी, आज भी है और जब 2047 में महान भारत की रचना होगी, तब भी रहेगी। शाह ने कहा कि यह अमर कृति ‘‘भारत माता के प्रति समर्पण, भक्ति और कर्तव्य के भाव जागृत करने वाली कृति है।'' गृह मंत्री ने कहा कि जिन्हें यह समझ नहीं आ रहा है कि आज इस पर चर्चा क्यों की जा रही है, उन्हें अपनी समझ पर नये सिरे से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस चर्चा को पश्चिम बंगाल में होने जा रहे चुनाव से जोड़ कर देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग बंगाल चुनाव से जोड़कर राष्ट्रीय गीत के महिमामंडन को कम करने का प्रयास कर रहे हैं। लोकसभा में सोमवार को इस विषय पर हुई चर्चा में कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सांसदों ने इस मुद्दे पर इस समय चर्चा कराये जाने की जरूरत पर प्रश्न उठाये थे। शाह ने कहा कि यह बात अवश्य है कि बंकिमचंद्र चटर्जी ने इस रचना को बंगाल में रचा था किंतु यह रचना न केवल पूरे देश में बल्कि दुनिया भर में आजादी की लड़ाई लड़ रहे लोगों के बीच फैल गयी थी। उन्होंने कहा कि आज भी कोई व्यक्ति यदि सीमा पर देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देता है तो यही नारा लगाता है। उन्होंने कहा कि आज भी जब कोई पुलिसकर्मी देश के लिए अपनी जान देता है तो प्राण देते समय उसके मुंह में एक ही बात होती है, ‘वंदे मातरम्'। शाह ने कहा कि देखते देखते आजादी के आंदोलन में वंदे मातरम देश भक्ति, त्याग और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बन गया है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि ‘‘बंकिम बाबू'' ने इस गीत को जिस पृष्ठभूमि में लिखा, उसके पीछे इस्लामी आक्रांताओं द्वारा भारत की संस्कृति को जीण-शीर्ण करने के प्रयास और ब्रिटिश शासकों द्वारा एक नयी संस्कृति को थोपने की कोशिशें की जा रही थीं।
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नई दिल्ली। 18वीं लोकसभा के शीतकालीन सत्र के 8वें दिन सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ पर चर्चा की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह केवल एक गीत या राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम और मातृभूमि की आजादी के लिए एक पवित्र संघर्ष का प्रतीक था।
‘बंकिम दा ने जब ‘वंदे मातरम्’ की रचना की तब स्वाभाविक ही वह स्वतंत्रता आंदोलन का पर्व बन गया’पीएम मोदी ने लोकसभा में कहा, “बंकिम दा ने जब ‘वंदे मातरम्’ की रचना की तब स्वाभाविक ही वह स्वतंत्रता आंदोलन का पर्व बन गया। तब पूरब से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण, ‘वंदे मातरम्’ हर भारतीय का संकल्प बन गया। इसलिए वंदे मातरम् की स्तुति में लिखा गया था कि मातृभूमि की स्वतंत्रता की वेदी पर, मोद में स्वार्थ का बलिदान है। यह शब्द ‘वंदे मातरम्’ है। सजीवन मंत्र भी, विजय का विस्तृत मंत्र भी। यह शक्ति का आह्वान है। यह ‘वंदे मातरम्’ है। उष्ण शोणित से लिखो, वत्स स्थली को चीरकर वीर का अभिमान है। यह शब्द ‘वंदे मातरम्’ है।”‘वंदे मातरम् ने भारतीयों में साहस और आत्मविश्वास की नई लहर पैदा की’प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि ‘वंदे मातरम्’ उस समय लिखा गया था, जब 1857 की क्रांति के बाद ब्रिटिश सरकार सतर्क थी और हर स्तर पर दबाव और अत्याचार की नीतियां लागू कर रही थी। उस दौर में ब्रिटिश राष्ट्रगान ‘गॉड सेव द क्वीन’ को हर घर तक पहुंचाने की मुहिम चल रही थी। ऐसे समय में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अपनी लेखनी से जवाब देते हुए ‘वंदे मातरम्’ लिखा और भारतीयों में साहस और आत्मविश्वास की नई लहर पैदा की।‘जब हम ‘वंदे मातरम्’ कहते हैं, तो यह हमें वैदिक युग की संस्कृति की याद दिलाता है’प्रधानमंत्री ने कहा, “जब हम ‘वंदे मातरम्’ कहते हैं, तो यह हमें वैदिक युग की संस्कृति की याद दिलाता है। वेदों में कहा गया है कि माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः, अर्थात यह भूमि मेरी माता है और मैं पृथ्वी का पुत्र हूं। यही विचार भगवान राम ने भी व्यक्त किया था, जब उन्होंने कहा कि जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी। आज ‘वंदे मातरम्’ इसी महान सांस्कृतिक परंपरा का आधुनिक रूप है।”वंदे मातरम् मातृभूमि की मुक्ति की पवित्र जंग का प्रतीकपीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् केवल अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई का मंत्र नहीं था, बल्कि यह मातृभूमि की मुक्ति की पवित्र जंग का प्रतीक था। यह गीत उन लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के साहस और बलिदान का सम्मान करता है जिन्होंने इसे अपने आंदोलन का हिस्सा बनाया।यह समय ‘वंदे मातरम्’ के ऋण को स्वीकार करने काप्रधानमंत्री ने सदन में सभी सांसदों से कहा कि इस अवसर पर पक्ष-प्रतिपक्ष का कोई भेदभाव नहीं है, क्योंकि यह समय है ‘वंदे मातरम्’ के ऋण को स्वीकार करने का, जो हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने बलिदानों से पूरा किया। उन्होंने याद दिलाया कि आज भारत में जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और आजादी है, वह इसी आंदोलन का परिणाम है।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “संसद में बैठे सभी सांसदों के लिए यह अवसर है कि वे इस ऋण को स्वीकार करें और उस पवित्र संघर्ष को याद करें, जिसने हमारी मातृभूमि को स्वतंत्र कराया।” - हैदराबाद. तेलंगाना सरकार ने कहा कि उसने प्रस्तावित ‘रीजनल रिंग रोड' (आरआरआर) पर आगामी ग्रीनफील्ड रेडियल रोड का नाम दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा के नाम पर रखने का फैसला किया है। सरकार ने एक विज्ञप्ति में कहा कि एक अन्य प्रस्ताव में हैदराबाद में अमेरिका के महावाणिज्य दूतावास के साथ एक हाई-प्रोफाइल सड़क का नाम ‘डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू' रखा जाएगा। राज्य सरकार विदेश मंत्रालय और अमेरिकी दूतावास को पत्र लिखकर योजनाओं की जानकारी देगी।इस साल की शुरुआत में मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने दिल्ली में वार्षिक यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) सम्मेलन को संबोधित करते हुए हैदराबाद में प्रमुख सड़कों का नामकरण अग्रणी वैश्विक कंपनियों के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा था। इसके अलावा गूगल और गूगल मैप्स के वैश्विक प्रभाव एवं योगदान को मान्यता देने के लिए एक प्रमुख मार्ग का नाम ‘गूगल स्ट्रीट' रखा जाएगा। विज्ञप्ति में कहा गया है कि हैदराबाद के वित्तीय जिले में गूगल के आगामी परिसर के साथ वाली सड़क को यह नाम मिलेगा, जो अमेरिका के बाहर कंपनी का सबसे बड़ा परिसर होगा। ये प्रस्ताव तेलंगाना सरकार की उस पहल का हिस्सा हैं, जिसके तहत राज्य को नवाचार-संचालित विकास का केंद्र बनाया जाना है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप माइक्रोसॉफ्ट और विप्रो के नाम पर भी हैदराबाद के किसी स्थान का नाम रखे जाने की उम्मीद है, जिसमें विप्रो जंक्शन और माइक्रोसॉफ्ट रोड शामिल होंगे। राज्य सरकार विशिष्ट व्यक्तियों और कंपनियों के सम्मान में अतिरिक्त सड़कों के नाम रखने पर विचार कर रही है।
- बदायूं (उप्र). वृंदावन के एक मंदिर में 28 वर्षीय महिला की हथेली में 'चमत्कारिक रूप से' सोने की अंगूठी गिरने के बाद उसने भगवान कृष्ण की मूर्ति से यहां विवाह कर लिया। उसके पिता ने यह दावा किया। यह "चमत्कार" लगभग तीन महीने पहले बांके बिहारी मंदिर में हुआ।चंदौसी के एक कॉलेज से अंग्रेजी में स्नातकोत्तर पिंकी शर्मा एक अत्यंत धार्मिक किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता सुरेश चंद्र शर्मा ने बताया कि उनका परिवार कम से कम चार वर्षों से वृंदावन जा रहा है और घर पर प्रतिदिन पूजा-अर्चना करता है। उन्होंने कहा, "हम हमेशा पिंकी के लिए एक योग्य वर की कामना करते थे, जो स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में थी, लेकिन... उसने कहा कि उसका विवाह तभी होगा जब कृष्ण चाहेंगे।" सुरेश चंद्र के अनुसार, यह इच्छा परिवार की हाल में वृंदावन यात्रा के दौरान पूरी हुई।उन्होंने दावा किया, "पिंकी बांके बिहारी के सामने अपनी हथेलियां खोले खड़ी थी, तभी प्रसाद के साथ एक अंगूठी उसके हाथ में आ गिरी। उसने इसे एक दिव्य संकेत के रूप में लिया कि कृष्ण ने उसे चुना है।" पिंकी के लिए यह हस्तक्षेप ही काफ़ी था कि उसने अपने माता-पिता से उसके लिए वर ढूंढना बंद करने को कहा। परिवार ने शनिवार रात भगवान से "विवाह" करने की उसकी इच्छा का सम्मान किया। लगभग 100-150 गांव वाले बारात लेकर पिंकी के घर कृष्ण की एक मूर्ति लेकर आए।एक पंडाल लगाया गया, हिंदू विवाह की रस्में निभाई गईं और भोजन परोसा गया। पिंकी ने मूर्ति को माला पहनाई और अग्नि के चारों ओर सात फेरे लिए। पिंकी ने एक न्यूज़ एजेंसी कहा, "मैंने सब कुछ कृष्ण पर छोड़ दिया है। अब जो भी होगा, वह उनकी इच्छा के अनुसार होगा।" सुरेश चंद्र ने कहा कि हालांकि उनके पास पैसे की कमी है, फिर भी वह वृंदावन में उनके लिए एक छोटे से घर का प्रबंध कर सकते हैं। पांच भाई-बहनों में चौथे नंबर की पिंकी फिलहाल अपनी बड़ी बहन और बहनोई के साथ रह रही है, जिन्हें परिवार ने प्रतीकात्मक रूप से "शादी" के दौरान "दूल्हे के पक्ष" के रूप में माना था।
- कोलकाता. पश्चिम बंगाल और आसपास के राज्यों के साधुओं और साध्वियों सहित लाखों श्रद्धालुओं ने रविवार दोपहर कोलकाता के प्रतिष्ठित ब्रिगेड परेड ग्राउंड में भगवद गीता पाठ में हिस्सा लिया। आयोजकों ने यह जानकारी दी। भगवा वस्त्र पहने साधुओं ने आयोजन स्थल पर गीता की प्रतियों से एक स्वर में श्लोक पढ़े, जबकि बजरंगबली और भगवान राम की तस्वीरों वाले भगवा झंडे आयोजन स्थल पर लहरा रहे थे। आयोजकों के अनुसार, लगभग एक लाख लोग धर्मग्रंथ के प्रथम, नौवें और अठारहवें अध्याय के सामूहिक पाठ में शामिल हुए। प्रतिभागियों में पूर्व बर्धमान के मेमारी से अपने चार दोस्तों के साथ आए एक युवक देबराज रॉय भी शामिल थे। सभी तिलक लगाए हुए थे और उन्होंने भगवा पगड़ी पहन रखी थी तथा उनमें से एक के हाथ में झंडा था। लोगों ने राष्ट्र ध्वज भी लहराए और बार-बार ‘हरे कृष्ण हरे हरे, गीता पथ घरे घरे' का नारा लगाया।पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले हिंदू वोट बैंक को ध्यान में रखकर इस कार्यक्रम के आयोजन के दावों के बारे में पूछे जाने पर, रॉय ने कहा, "हम किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हुए हैं। लेकिन हमारा मानना है कि हिंदुओं को राजनीतिक मान्यताओं से ऊपर उठकर एकजुट होना चाहिए और अपनी आध्यात्मिक विरासत, आस्था व संस्कृति के प्रति सम्मान रखना चाहिए। हम विभिन्न धर्मों और आस्थाओं के लोगों के साथ सद्भाव से रहने में विश्वास करते हैं।" दक्षिण 24 परगना के बिरही निवासी और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) से जुड़े सम्राट सरकार ने कहा कि वह अकेले ही इस कार्यक्रम में शामिल हुए, ताकि व्यवस्थित तरीके से श्लोकों के पाठ में हिस्सा ले रहे लाखों लोगों के उत्साहपूर्ण माहौल का हिस्सा बन सकें। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।केंद्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार, विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी, पूर्व सांसद लॉकेट चटर्जी और विधायक अग्निमित्रा पॉल सहित वरिष्ठ भाजपा नेता आयोजन में मौजूद थे। कार्तिक महाराज के नाम से जाने जाने वाले स्वामी प्रदीप्तानंद महाराज तथा बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री जैसे प्रमुख धार्मिक नेताओं के साथ-साथ विभिन्न मठों के साधु भी इसमें शामिल हुए। ‘पंच लाखो कोंठे गीता पाठ' (पांच लाख स्वरों द्वारा गीता पाठ) नामक इस कार्यक्रम का आयोजन 'सनातन संस्कृति संसद' द्वारा किया गया था। यह विभिन्न मठों और धार्मिक संस्थानों के भिक्षुओं और आध्यात्मिक नेताओं का एक समूह है। पॉल ने कहा, "गीता केवल हिंदुओं के लिए नहीं है, यह भारत के सभी 140 करोड़ लोगों के लिए है।"आयोजकों ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य पश्चिम बंगाल की आध्यात्मिक विरासत को जागृत करना और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने दावा किया कि यह राज्य और संभवतः देश में इस तरह का सबसे बड़ा सामूहिक पाठन कार्यक्रम है।कार्तिक महाराज ने कहा, "विभाजन के माहौल में आध्यात्मिक अभ्यास शांति और दिशा बहाल कर सकता है।" उन्होंने कहा कि हजारों लोगों ने इसमें भाग लेने का संकल्प लिया है। विभिन्न हिंदू मठों द्वारा संचालित स्टाल पर गीता के लघु संस्करण, धार्मिक पुस्तकें और पूजा सामग्री बेची गईं। पाठ के बाद प्रसाद वितरण के लिए स्टाल पर लंबी कतारें लग गईं।भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए व्यापक प्रबंध किए गए थे और उम्मीद थी कि पांच लाख लोग इसमें शामिल होंगे। तीन बड़े मंच बनाए गए थे और मध्य कोलकाता में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। आध्यात्मिक नेतृत्व गीता मनीषी महामंडल के स्वामी ज्ञानानंदजी महाराज ने किया।
- बालाघाट/ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के समक्ष बालाघाट जिले में रविवार को 10 इनामी नक्सलियों ने समर्पण कर दिया, जिसके बाद उन्होंने सभी नक्सलियों को संविधान की प्रति देते हुए शांतिपूर्ण जीवन जीने की अपील की। इन नक्सलियों पर 2.36 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था और इन्होंने समर्पण के साथ ही एके 47, इंसास रायफल सहित कई अन्य हथियार मुख्यमंत्री के समक्ष समर्पित किए। बालाघाट पुलिस लाइन परिसर में आयोजित ‘पुनर्वास से पुनर्जीवन' कार्यक्रम में आत्समर्पण करने वाले ये नक्सली भोरमदेव जंगल क्षेत्र में सक्रिय थे और इनपर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं महाराष्ट्र सरकार द्वारा 2.36 करोड़ रुपये का इनाम रखा गया था। इस अवसर पर मुख्यमंत्री यादव ने नक्सलियों से सरकार की पुनर्वास योजना के तहत मुख्यधारा से जुड़ने की अपील की और कहा कि जो कानून की राह अपनाते हैं, उनके पुनर्वास की चिंता सरकार करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार की पुनर्वास योजना केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि प्रदेश सरकार की गारंटी है। जो भी व्यक्ति हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करेगा, उसे सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और पुनर्वास का पूरा अवसर दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य हर उस व्यक्ति को सुरक्षित भविष्य देना है जो विकास और शांति की राह पर चलना चाहता है।'' आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने मुख्यमंत्री को अपने हथियार सौंपे। इनमें चार महिला नक्सली भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप सरकार मध्यप्रदेश को नक्सल मुक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, ‘‘लाल सलाम को अब आखिरी सलाम देने का समय आ गया है। इस अभियान को मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन प्रदेश की सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस के अदम्य साहस के कारण इसे अब जनवरी 2026 तक ही पूरा कर लेने का रोडमैप तैयार कर लिया गया है।'' उन्होंने कहा कि एक भी व्यक्ति को हथियार उठाने की अनुमति नहीं है।मुख्यमंत्री ने कहा कि डिंडोरी और मंडला पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुके हैं और अब बालाघाट में जनवरी से ‘पूर्ण नक्सल उन्मूलन अभियान' चलेगा। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वालों को 15 वर्ष तक पुनर्वास पैकेज मिलेगा और जो नक्सली मुख्यधारा में नहीं आएंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में नक्सल उन्मूलन की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2025 में कुल 10 खूंखार नक्सलियों को सुरक्षा बलों ने ढेर किया, जिन पर एक करोड़ 46 लाख रुपये तक का इनाम था। मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने कहा कि मुख्यमंत्री यादव के नेतृत्व में नक्सल विरोधी अभियान को सशक्त किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘नए कैंप स्थापित किए गए हैं, ‘हॉक फोर्स' और पुलिस बल में वृद्धि की गई है। साथ ही अधिकारियों और जवानों को सतत प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इन कार्रवाइयों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी नक्सलवादियों द्वारा आत्मसमर्पण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।'' उन्होंने कहा कि रोजगार और कौशल विकास के प्रयासों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं और नागरिकों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मकवाना ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस निर्धारित समय-सीमा में नक्सल मुक्ति के लिए प्रतिबद्ध है।
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार सुबह (डीडी न्यूज़) दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘सुप्रभातम्’ की तारीफ की है। उन्होंने इसे दिन की शुरुआत करने का एक ताजा और प्रेरणादायक तरीका बताया। पीएम मोदी ने आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाला सुप्रभातम् कार्यक्रम सुबह-सुबह ताजगी भरा एहसास देता है। इसमें योग से लेकर भारतीय जीवन शैली तक अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा होती है। भारतीय परंपराओं और मूल्यों पर आधारित यह कार्यक्रम ज्ञान, प्रेरणा और सकारात्मकता का अद्भुत संगम है।”एक अन्य एक्स पोस्ट में पीएम मोदी ने डीडी के इस शो के वीडियो क्लिप शेयर करते हुए लिखा, “सुप्रभातम् कार्यक्रम में एक विशेष हिस्से की ओर आपका ध्यान आकर्षित कराना चाहूंगा। यह है संस्कृत सुभाषित। इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति और विरासत को लेकर एक नई चेतना का संचार होता है। यह है आज का सुभाषित…” साथ ही पीएम मोदी ने शो का यूट्यूब लिंक भी शेयर किया और दर्शकों को इसे देखने और कार्यक्रम की समृद्ध सांस्कृतिक सामग्री को जानने के लिए प्रोत्साहित किया।दरअसल, डीडी न्यूज़ (दूरदर्शन न्यूज़) पर प्रसारित होने वाला ‘सुप्रभातम्’ एक खास शो है जो भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को उजागर करता है। इस कार्यक्रम का मकसद दर्शकों को योग, स्वस्थ जीवन, पारंपरिक ज्ञान और भारतीय विरासत के विभिन्न पहलुओं पर सेगमेंट पेश करके उनके दिन को एक सार्थक शुरुआत देना है।इस शो में आमतौर पर योग, ध्यान और आयुर्वेद और अन्य प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणालियों से प्रेरित जीवन शैली प्रथाओं पर विशेषज्ञ चर्चा, प्रदर्शन और जानकारी शामिल होती है। ये विषय सरकार के समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और व्यापक जनता के बीच पारंपरिक प्रथाओं को पुनर्जीवित करने के लगातार प्रयासों के अनुरूप हैं।सुप्रभातम् आमतौर पर सुबह प्रसारित होता है। हालांकि व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए दूरदर्शन इस शो को कई डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है। दर्शक इसे लाइव देख सकते हैं या डीडी न्यूज फेसबुक पेज या डीडी न्यूज यूट्यूब चैनल या कई निजी नेटवर्क जैसे विभिन्न प्लेटफॉर्म के माध्यम से हाल के एपिसोड देख सकते हैं।उम्मीद जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन से सुप्रभातम् की दर्शक संख्या बढ़ेगी। खासकर उन दर्शकों के बीच जो सांस्कृतिक आधार के साथ स्वास्थ्य-उन्मुख विषयों को जोड़ने वाली सामग्री की तलाश में हैं। (
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नई दिल्ली। अमेरिका के नए रक्षा प्राधिकरण विधेयक (NDAA) में भारत को इंडो-प्रशांत क्षेत्र और परमाणु नीति में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। विधेयक में कहा गया है कि अमेरिका भारत के साथ उसकी परमाणु दायित्व नीति पर निरंतर बातचीत करेगा और भारत को उन चुनिंदा देशों में शामिल करेगा जो चीन की चुनौती का सामना करने के लिए नई रक्षा व्यवस्था तैयार कर रहे हैं।
अमेरिकी कांग्रेस के नेताओं ने वित्त वर्ष 2026 के लिए राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम (NDAA) का संयुक्त मसौदा जारी किया है। इस अधिनियम में भारत को अमेरिका की कई रणनीतियों- जैसे नागरिक परमाणु सहयोग, रक्षा सह-उत्पादन और समुद्री सुरक्षा में विशेष स्थान दिया गया है। यह बिल छह दशकों से हर साल पारित होता आया है और इस सप्ताह के अंत में इसके हाउस से पारित होने की उम्मीद है।विधेयक में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि अमेरिका और भारत मिलकर एक संयुक्त परामर्श तंत्र स्थापित करेंगे, जो 2008 के नागरिक परमाणु समझौते के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा करेगा। साथ ही भारत के घरेलू परमाणु दायित्व नियमों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाने पर चर्चा होगी। इसके अलावा, इन मुद्दों पर द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर ‘‘एक रणनीति विकसित करने’’ का कार्य भी इसी तंत्र को सौंपा गया है। अमेरिका को पांच वर्षों तक हर साल इस समीक्षा की रिपोर्ट कांग्रेस में पेश करनी होगी।विधेयक के अन्य हिस्सों में भारत को वैश्विक नागरिक परमाणु सहयोग में “सहयोगी देश” के रूप में चिन्हित किया गया है। कानून प्रशासन को अमेरिकी परमाणु निर्यात का विस्तार करने के लिए 10 वर्षीय रणनीति बनाने और रूस तथा चीन से होने वाली प्रतिस्पर्धा का विश्लेषण करने का निर्देश देता है।इंडो-प्रशांत क्षेत्र से जुड़े प्रावधानों में भारत को प्राथमिक सहयोगियों की सूची में शामिल किया गया है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस और न्यूजीलैंड भी हैं। इन देशों के साथ मिलकर रक्षा उद्योग, आपूर्ति श्रृंखला और नई तकनीकों पर संयुक्त कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा।अमेरिकी रक्षा मंत्री को इस दिशा में समझौते करने, तकनीकी सहायता प्रदान करने और उद्योग तथा शिक्षण संस्थानों को जोड़ने का अधिकार होगा, ताकि संयुक्त उत्पादन और विकास को प्रोत्साहन मिल सके।संसद ने यह भी कहा है कि अमेरिका को क्वाड्रिलैटरल सिक्योरिटी डायलॉग (क्वाड) सहित भारत के साथ अपना जुड़ाव बढ़ाना चाहिए, ताकि इंडो-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र और खुला रखा जा सके। इसमें सैन्य अभ्यास, रक्षा व्यापार, मानवीय सहायता और समुद्री सुरक्षा शामिल हैं। चीन को रोकने के लिए अमेरिका अपनी क्षेत्रीय उपस्थिति और साझेदारी भी बढ़ाएगा।विधेयक में भारतीय महासागर क्षेत्र के लिए एक विशेष राजदूत नियुक्त करने का प्रावधान भी है, जिसका कार्य इस क्षेत्र में अमेरिका की कूटनीति का समन्वय करना और चीन के प्रभाव का संतुलन तैयार करना होगा।इन सभी कदमों से स्पष्ट होता है कि भारत अब अमेरिका की क्षेत्रीय रणनीति का केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण साझेदार बन चुका है। हाल के वर्षों में भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग काफी मजबूत हुआ है। -
नई दिल्ली। देश आज भारत के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत को याद कर रहा है। सोमवार, 8 दिसंबर को अदम्य साहस के प्रतीक जनरल बिपिन रावत की पुण्यतिथि है। 8 दिसंबर 2021 को तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हेलिकॉप्टर हादसे में उनका निधन हो गया था।
16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में जन्मे जनरल रावत का परिवार कई पीढ़ियों से भारतीय सेना से जुड़ा रहा है। उनके पिता लक्ष्मण सिंह रावत लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। पिता की प्रेरणा से बिपिन रावत ने अपनी शिक्षा भी सेना में जाने के लक्ष्य के अनुरूप प्राप्त की। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के बाद उन्होंने देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) से प्रशिक्षण पूरा किया।उन्हें 16 दिसंबर 1978 को 11वीं गोरखा रायफल्स की 5वीं बटालियन में कमीशन मिला और जनवरी 1979 में उनकी पहली पोस्टिंग मिजोरम में हुई। सैन्य सेवा में उत्कृष्ट प्रदर्शन और नेतृत्व क्षमता के बल पर वे 31 दिसंबर 2016 को थल सेना प्रमुख बने और 31 दिसंबर 2019 तक इस पद पर रहे।1 जनवरी 2020 को उन्हें देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया गया। यह भारतीय रक्षा ढांचे में एक अहम सुधार था, जिसका उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और क्षमता निर्माण सुनिश्चित करना था।अपने चार दशक के बहादुरी भरे करियर में जनरल रावत ने कई महत्वपूर्ण अभियानों का नेतृत्व किया। वे सोपोर (जम्मू-कश्मीर) में कई सफल आतंकवाद-रोधी अभियानों के कमांडर रहे। उनकी ही लीडरशिप में पीओके स्थित आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया था। एक मेजर जनरल के रूप में उन्होंने उत्तरी कश्मीर में नियंत्रण रेखा के साथ एक इन्फैंट्री डिवीजन की कमान संभाली। कोर कमांडर रहते हुए उनकी देखरेख में म्यांमार में भारतीय सेना की स्पेशल फोर्सेज ने आतंकी समूहों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की, जिसे भारत की सामरिक संस्कृति में संयम से मुखरता की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव माना जाता है।2017 में डोकलाम विवाद और 2020 में गलवान घाटी तनाव के दौरान भी जनरल रावत ने भारतीय सेना का दृढ़ नेतृत्व किया। गोरखा रेजिमेंट से शुरू हुई उनकी सैन्य यात्रा उन्हें भारतीय सेना के शीर्ष पद तक ले गई। जनरल बिपिन रावत अपनी स्पष्ट, निर्णायक और साहसी नेतृत्व शैली के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। -
रांची। झारखंड के जमशेदपुर स्थित एक चिड़ियाघर में "जीवाणु संक्रमण" के कारण कम से कम 10 काले हिरणों की मौत हो गई है। यह जानकारी एक अधिकारी ने रविवार को दी। टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क (टीएसजेडपी) में हिरणों की मौत एक दिसंबर से छह दिसंबर के बीच हुईं। आखिरी हिरण की मौत शनिवार को हुई थी। टीएसजेडपी के उप निदेशक डॉ. नईम अख्तर ने बताया, ‘‘उद्यान में अब तक दस काले हिरणों की मौत हो चुकी है। हिरण के शव को जांच और मौत के सही कारण का पता लगाने के लिए रांची पशु चिकित्सा महाविद्यालय भेजा गया है। ऐसा लगता है कि यह जीवाणु संक्रमण के कारण हुआ है।'' रांची पशु चिकित्सा महाविद्यालय (आरवीसी) की पशु चिकित्सा पैथोलॉजी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रज्ञा लकड़ा ने बताया कि शव का पोस्टमॉर्टम हो चुका है। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा' से कहा, ‘‘संदेह है कि यह एच.एस. (रक्तस्रावी सेप्टिसीमिया) है, जो पास्चरेला प्रजाति के बैक्टीरिया से होने वाला एक जीवाणुजनित रोग है। इस रोग को पास्चरेलोसिस भी कहा जाता है।'' उन्होंने कहा कि इस मामले में आगे की जांच सोमवार को की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘आगे की प्रक्रिया पूरी करने के बाद, हम बीमारी की पुष्टि कर सकते हैं।'' टीएसजेडपी में पक्षियों सहित लगभग 370 जानवर हैं। वहां 18 काले हिरण थे। अधिकारी ने बताया कि 10 काले हिरणों की मौतों के बाद, चिड़ियाघर में केवल आठ काले हिरण ही बचे हैं।
अख्तर ने बताया कि पहली मौत एक दिसंबर को हुई थी। उन्होंने बताया कि बाद में, मौत का कारण जानने के लिए नमूना रांची पशु चिकित्सा महाविद्यालय भेजा गया। जमशेदपुर प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) सबा आलम ने कहा, ‘‘चिड़ियाघर प्राधिकरण के अनुरोध पर हमने नमूना रांची पशु चिकित्सा महाविद्यालय भेजने में मदद की। हमने केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को मौतों के बारे में सूचित कर दिया है।'' रांची पशु चिकित्सा महाविद्यालय के पैथोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. एम के गुप्ता ने बताया कि पास्चरेला एक जीवाणु जनित रोग है जो शरीर में बहुत तेजी से फैलता है और फेफड़ों को प्रभावित करता है, जिससे अचानक मृत्यु हो जाती है। उन्होंने कहा कि तेज बुखार, गर्दन में सूजन और दस्त इस बीमारी के कुछ सामान्य लक्षण हैं। अख्तर ने कहा कि उन्होंने संदिग्ध बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए व्यापक एहतियाती कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा, "जीवाणुरोधी उपचार जारी है और स्थिति अब नियंत्रण में है।" इस बीच, रांची के ओरमांझी इलाके में स्थित भगवान बिरसा जैविक उद्यान ने जमशेदपुर की घटना के बाद अलर्ट जारी कर दिया है। उद्यान को बिरसा चिड़ियाघर के नाम से भी जाना जाता है। बिरसा चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक ओ पी साहू ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया, "चिड़ियाघर में 69 काले हिरण हैं। इसलिए, हमने पहले ही एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल दवाओं का छिड़काव करके एहतियाती कदम उठा लिए हैं।'' रांची के ओरमांझी में 104 हेक्टेयर में फैले इस चिड़ियाघर में 83 विभिन्न प्रजातियों के लगभग 1,450 जानवर और पक्षी हैं। -
बहराइच (उप्र). बहराइच जिले की कैसरगंज तहसील स्थित मल्लहनपुरवा गांव में एक घर में संदिग्ध रूप से घुसा भेड़िया चार माह के एक बच्चे को उठा ले गया। वन विभाग की टीमें ड्रोन कैमरे की मदद से तलाश अभियान चला रही हैं मगर अब तक ना तो बच्चे का कुछ पता लगा है ना ही भेड़िया नजर आया है। पिछले नौ दिनों में इसी मल्लहनपुरवा गांव में भेड़िये के तीन हमले हो चुके हैं। पिछली 28 नवंबर को भेड़िये के हमले में पांच साल के लड़के की मौत हो गयी थी। वहीं, विगत पांच दिसंबर को भेड़िये ने पांच वर्षीय बच्ची को घायल किया था। ग्रामीणों के मुताबिक मल्लहनपुरवा गांव निवासी संतोष का चार माह का बेटा सुभाष छह/सात दिसम्बर की दरमियानी रात अपनी मां के साथ घर में सो रहा था और रात करीब डेढ़ बजे भेड़िया चुपचाप घर में घुसा और सुभाष को मां की गोद से अपने जबड़े में दबोचा और भाग गया। ग्रामीणों ने पीछा किया लेकिन भेड़िया बच्चे को लेकर ओझल हो गया। प्रभागीय वन अधिकारी राम सिंह यादव ने बताया कि संतोष के चार माह के पुत्र सुभाष को वन्यजीव द्वारा रात करीब डेढ़ बजे उठाकर जे जाने की सूचना मिली थी और सूचना मिलते ही गांव में पहले से तैनात वन विभाग की टीमों ने ड्रोन व अन्य तरीकों से खोज अभियाल शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि नदी के किनारे और गन्ने के खेतों में जहां-जहां वन्यजीव के होने की सूचना मिल रही है, वहां हमारी टीमें पहुंच कर तलाश में लगी हैं। अधिकारी ने बताया कि टीम में प्रशिक्षित शूटर भी शामिल हैं और शीघ्र ही हमलावर जीव को या तो पकड़ लिया जाएगा अथवा उसे गोली मार दी जाएगी। बहराइच जिले के कुछ गांवों में इसी साल नौ सितम्बर से अबतक भेड़ियों के हमलों में आठ बच्चों व एक बुजुर्ग दम्पत्ति सहित 10 लोगों की मौत हो चुकी है तथा 32 अन्य घायल हुए हैं। गत 27 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हवाई सर्वेक्षण कर भेड़िये को पकड़ने और नहीं पकड़े जा पाने पर उसे गोली मारने के निर्देश दिये थे। उसके बाद से अब तक चार भेड़िये मारे जा चुके हैं।
- लेह. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सशस्त्र बल ‘‘और भी बहुत कुछ कर सकते थे'' लेकिन उन्होंने जानबूझकर ‘‘संयमित'' और ‘‘संतुलित'' प्रतिक्रिया का विकल्प चुना। सिंह ने कहा कि मई में हुए ऑपरेशन ने भारतीय सेना की क्षमता और अनुशासन को रेखांकित किया, जिन्होंने बिना तनाव बढ़ाये आतंकी खतरों को बेअसर कर दिया। रक्षामंत्री सिंह ने देश के विभिन्न हिस्सों में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा पूरी की गई 125 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन करने के बाद कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, हमने अपने सशस्त्र बलों, नागरिक प्रशासन और सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों के बीच जो समन्वय देखा, वह अविश्वसनीय था। मैं लद्दाख और सीमावर्ती क्षेत्रों के प्रत्येक नागरिक के प्रति हमारे सशस्त्र बलों को अपना समर्थन देने के लिए आभार व्यक्त करता हूं।'' सिंह ने कहा, ‘‘यह समन्वय ही हमारी पहचान है। हमारा आपसी बंधन ही हमें दुनिया में सबसे अलग पहचान देता है।''ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा सात मई को शुरू किया गया था, जिसका लक्ष्य पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाना था। यह अभियान जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को किये गए उस हमले का बदला लेने के लिए शुरू किया गया था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे और इस हमले में जान गंवाने वालों में से अधिकतर पर्यटक थे। उन्होंने कहा, “कुछ ही महीने पहले, हमने देखा कि कैसे पहलगाम में हुए जघन्य आतंकवादी हमले के जवाब में, हमारे सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया और दुनिया जानती है कि उन्होंने आतंकवादियों के साथ क्या किया।'' रक्षा मंत्री सिंह ने कहा, ‘‘बेशक, अगर हम चाहते तो और भी बहुत कुछ कर सकते थे, लेकिन हमारे बलों ने ना केवल वीरता, बल्कि संयम का भी परिचय दिया और केवल वही किया जो जरूरी था।'' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इतना बड़ा ऑपरेशन मजबूत कनेक्टिविटी के कारण ही संभव हो पाया। सिंह ने कहा, ‘‘हमारे सशस्त्र बल समय पर रसद पहुंचाने में सक्षम थे।सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ संपर्क भी बनाए रखा गया, जिससे ऑपरेशन सिंदूर को ऐतिहासिक सफलता मिली।'' रक्षामंत्री सिंह ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी सुरक्षा को कई तरह से बदल रही है और सैनिकों को दुर्गम इलाकों में अधिक प्रभावी ढंग से काम करने में सक्षम बना रही है। उन्होंने कहा, ‘‘आज, हमारे सैनिक दुर्गम इलाकों में मजबूती से खड़े हैं क्योंकि उनके पास सड़कें, वास्तविक समय की संचार प्रणाली, उपग्रह सहायता, निगरानी नेटवर्क और रसद कनेक्टिविटी उपलब्ध है।'' सिंह ने कहा, ‘‘सीमा पर तैनात एक सैनिक का हर मिनट, हर सेकंड बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए, कनेक्टिविटी को केवल नेटवर्क, ऑप्टिकल फाइबर, ड्रोन और रडार तक सीमित नहीं, बल्कि सुरक्षा की रीढ़ माना जाना चाहिए।'' रक्षा मंत्री ने कहा कि अगर वह देश के किसी भी कोने में सशस्त्र बलों से मिल पाते हैं, तो यह मजबूत संचार नेटवर्क और कनेक्टिविटी की वजह से ही संभव है।उन्होंने कहा, ‘‘संचार को सिर्फ बुनियादी ढांचे के लिहाज से नहीं देखा जाना चाहिए। यह एक बहुत व्यापक शब्द है। शांति, सद्भाव और समाज की समझ के लिए संचार जरूरी है।'' उन्होंने कहा कि सरकार का निरंतर प्रयास लद्दाख समेत सभी सीमावर्ती इलाकों के साथ संचार और कनेक्टिविटी को मज़बूत करना रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सीमावर्ती इलाकों के समग्र विकास के लिए पूरे उत्साह से काम कर रही है। रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘हमारी सरकार, हमारे सशस्त्र बल और बीआरओ जैसे संगठन आपके साथ खड़े हैं। हमें बस इस संबंध को मजबूत करते रहना है ताकि हमारे संबंध किसी बाहरी तत्व से प्रभावित ना हो।'' उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी ना सिर्फ सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रही है, बल्कि आर्थिक विकास को भी गति दे रही है। वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में 8.2 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि का हवाला देते हुए सिंह ने कहा कि मजबूत संचार और कनेक्टिविटी नेटवर्क एक प्रमुख कारक रहे हैं, जिसे सरकार की विकास-समर्थक नीतियों और राष्ट्रव्यापी सुधारों का समर्थन प्राप्त है।
- नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अडिग साहस से काम करने के लिए रविवार को सशस्त्र बलों के प्रति गहरा आभार जताया। उन्होंने ‘एक्स' पर लिखा, “सशस्त्र बल झंडा दिवस पर, हम अडिग साहस के साथ हमारे राष्ट्र की रक्षा करने वाले साहसी पुरुषों और महिलाओं के प्रति गहरा आभार व्यक्त करते हैं।” प्रधानमंत्री ने सशस्त्र बल झंडा दिवस कोष में भी योगदान दिया।प्रधानमंत्री ने कहा, “उनका अनुशासन, संकल्प और मनोबल लोगों की रक्षा करता है और हमारे राष्ट्र को मजबूत बनाता है। उनका समर्पण कर्तव्य,अनुशासन और राष्ट्र के प्रति भक्ति का एक शानदार उदाहरण है।” प्रधानमंत्री ने लोगों से सशस्त्र बल झंडा दिवस कोष में योगदान देने की अपील की।



























