- Home
- देश
- गोंडा (उप्र) . गोंडा जिले में रविवार को हुए भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई तथा दो अन्य गंभीर रूप से जख्मी हो गये। पुलिस अधिकारियों ने यहां बताया कि आवास विकास कॉलोनी निवासी प्रमोद गुप्ता के बेटे नितिन की शादी में शामिल होने के लिए उनकी बेटी नेहा (28), दामाद अक्षत अग्रवाल (35), नाती अनाया (तीन), दामाद की मां नीता अग्रवाल (55) और साढ़ू का बेटा आशू अग्रवाल (34) आए थे और कार्यक्रम में शामिल होकर वे सभी बेंगलूरू वापस जा रहे थे तथा बेटा नितिन सभी को छोड़ने के लिए कार से अयोध्या हवाई अड्डे जा रहा था। उन्होंने बताया कि रास्ते में गोंडा-अयोध्या राजमार्ग पर वजीरगंज थाना क्षेत्र के अनभुला मोड़ के पास अचानक कार का टायर फट गया जिससे बेकाबू कार सामने से आ रही उत्तराखंड परिवहन की बस से टकरा गई।अधिकारियों के मुताबिक, हादसे में अक्षत, आशू और नीता की मौके पर ही मौत हो गई जबकि पीछे बैठे तीन लोग दरवाजा टूटने पर बाहर गिर पड़े और आगे बैठे लोग दो एयरबैग के खुलने की वजह से बच गए। नितिन और नेहा को गंभीर हालत में लखनऊ रेफर किया गया है तथा अनाया को मामूली चोटें आई हैं। गोंडा मेडिकल कॉलेज के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर डीएन सिंह ने बताया कि दो मरीज गंभीर हालत में लाए गए, जबकि तीन लोगों को मृत अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया। उन्होंने बताया कि घायलों के परिजन चाहते थे कि उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाए इसलिए उन्हें लखनऊ भेज दिया गया। सिंह ने बताया कि तीनों शव पंचनामे के बाद पोस्टमॉर्टम के लिए भेजे जाएंगे।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे का संज्ञान लेते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही घायलों के बेहतर उपचार के भी निर्देश दिए। अपर पुलिस अधीक्षक राधेश्याम राय ने बताया कि पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए जाएंगे।
- नई दिल्ली। केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने आज रविवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) तकनीकें आने वाले समय में भारत के विद्युत वितरण तंत्र को पूरी तरह बदल देंगी। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित दो-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने बताया कि ये तकनीकें बिजली नेटवर्क को अधिक स्मार्ट, उपभोक्ता-केंद्रित और स्वयं अनुकूल बनने में मदद करेंगी। उनके अनुसार एआई और मशीन लर्निंग से विद्युत व्यवस्था न केवल तेज होगी, बल्कि उपभोक्ताओं का अनुभव भी बेहतर होगा।केंद्रीय मंत्री ने विस्तार से बताया कि स्मार्ट मीटर विश्लेषण, डिजिटल ट्विन, प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस, बिजली चोरी का पता लगाने वाली प्रणाली, उपकरण-स्तर की बिजली खपत की जानकारी, आउटेज पूर्वानुमान और जनरेटिव-एआई आधारित निर्णय-सहायता जैसे समाधानों से वितरण कंपनियों (DISCOMs) की कार्यक्षमता कई गुना बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों के इस्तेमाल से उपभोक्ताओं को अधिक विश्वसनीय बिजली मिलेगी, कटौतियाँ कम होंगी और बिजली खरीद लागत में भी कमी आएगी।कार्यक्रम में मनोहर लाल ने सभी वितरण कंपनियों, तकनीकी भागीदारों, नवाचारकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों से मिलकर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों को लेकर फैल रही गलतफहमियों और अफवाहों को दूर करना जरूरी है, ताकि लोग AI और ML आधारित समाधानों पर विश्वास कर सकें। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सही जानकारी और पारदर्शिता के साथ ये तकनीकें घर-घर तक बिजली प्रबंधन को सरल और सुरक्षित बना सकती हैं।इस सम्मेलन में राष्ट्रीय नवाचार चुनौती के तहत कुल 195 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें वितरण कंपनियाँ, एडवांस मीटरिंग सेवा प्रदाता, टेक्नोलॉजी कंपनियाँ और होम-ऑटोमेशन संस्थाएँ शामिल थीं। कई चरणों की जांच के बाद तमिलनाडु की टीएनपीडीसीएल और मध्य प्रदेश की एमपी ईस्ट को DISCOM श्रेणी में विजेता चुना गया। AMISP श्रेणी में टाटा पावर और अप्रावा, समाधान प्रदाता श्रेणी में प्रवाह और फ्लॉक एनर्जी तथा होम-ऑटोमेशन श्रेणी में टाटा पावर ने जीत हासिल की। इन विजेताओं ने स्मार्ट मीटर एनालिटिक्स, राजस्व सुरक्षा, मांग प्रबंधन और ग्रिड इंटेलिजेंस जैसे समाधान प्रस्तुत किए।=सम्मेलन के दौरान मंत्री ने “स्टैलर” नामक संसाधन पर्याप्तता योजना उपकरण को भी लॉन्च किया, जिसे केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने तैयार किया है। यह उपकरण वितरण कंपनियों को भविष्य की बिजली मांग का सटीक अनुमान लगाने में मदद करेगा। साथ ही इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम ने भी बिजली क्षेत्र में उपयोग होने वाले AI, ML, AR/VR और रोबोटिक्स समाधानों पर आधारित एक हैंडबुक जारी की, जिसमें कुल 174 उपयोग-मामले शामिल किए गए हैं।--
- नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को लद्दाख से सीमा सड़कों संगठन (BRO) की 125 रणनीतिक परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित कीं। यह एक ही समय में उद्घाटित की गई सबसे अधिक परियोजनाएं हैं। इनमें 28 सड़कें, 93 पुल और 4 अन्य परियोजनाएं शामिल हैं, जो दो केंद्र शासित प्रदेशों-लद्दाख और जम्मू-कश्मीर और सात राज्यों अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और मिजोरम में फैली हैं। इन सभी परियोजनाओं को लगभग 5,000 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया गया है।कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी मार्ग पर स्थित रणनीतिक श्योक सुरंग का उद्घाटन रहा। 920 मीटर लंबी यह कट-एंड-कवर सुरंग दुनिया के सबसे कठिन क्षेत्रों में बनी इंजीनियरिंग उपलब्धि मानी जा रही है। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह सुरंग अब पूरे वर्ष, खासकर कठोर सर्दियों के दौरान, सुरक्षित और भरोसेमंद आवाजाही सुनिश्चित करेगी। इससे दूरस्थ गांवों और अग्रिम सैन्य चौकियों तक आखिरी छोर की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और सुरक्षा व त्वरित तैनाती क्षमता में बड़ा सुधार आएगा।रक्षा मंत्री ने समारोह में गलवान युद्ध स्मारक का वर्चुअल उद्घाटन भी किया, जो गलवान घाटी में शहीद हुए सैनिकों के अप्रतिम साहस और बलिदान को समर्पित है। उन्होंने कहा कि मजबूत सीमा इंफ्रास्ट्रक्चर न केवल सुरक्षा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन, रोजगार और आपदा प्रबंधन के लिए भी जीवनरेखा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सड़कें, सुरंगें, स्मार्ट फेंसिंग, एकीकृत कमांड केंद्र और निगरानी प्रणालियाँ देश की सुरक्षा के स्तंभ हैं। BRO को तेजी और कुशलता से जटिल परियोजनाएं पूरी करने के लिए उन्होंने सराहा और कहा कि BRO अब “संचार” और “कनेक्टिविटी” का पर्याय बन गया है।राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए कहा कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सेना द्वारा की गई इस कार्रवाई की ऐतिहासिक सफलता मजबूत कनेक्टिविटी के कारण संभव हुई। उन्होंने कहा कि सेना, नागरिक प्रशासन और सीमा क्षेत्रों के लोगों के बीच सहयोग ही भारत की असली पहचान है। उन्होंने देश की आर्थिक प्रगति का भी उल्लेख किया-जहाँ 2025-26 की दूसरी तिमाही में GDP 8.2% तक पहुँच गई और कहा कि मजबूत अवसंरचना सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक समृद्धि की भी नींव है।रक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2024-25 में BRO ने 16,690 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड व्यय किया है और 2025-26 के लिए 18,700 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा उत्पादन, जो 2014 में 46,000 करोड़ रुपये था, अब बढ़कर 1.51 लाख करोड़ रुपये हो गया है। रक्षा निर्यात भी 1,000 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 24,000 करोड़ रुपये पहुँच गया है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी उपलब्धि है। कार्यक्रम में BRO के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल रघु श्रीनिवासन ने अपने संबोधन में सभी कर्मियों के समर्पण और तकनीकी नवाचारों की प्रशंसा की। समारोह में कई राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सेना प्रमुख और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौजूद रहे।
- लेह. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि भारत रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देख रहा है, जो आयात पर निर्भर राष्ट्र से एक उभरते हुए उत्पादक-निर्यातक देश के रूप में सामने आ रहा है। सिंह ने कहा कि देश में एक समय घरेलू स्तर पर हथियार और उपकरण बनाने के लिए मजबूत प्रणाली का अभाव था, लेकिन पिछले दशक के दौरान किए गए निरंतर प्रयासों से स्थिति बदल गई है। सिंह ने देश के विभिन्न हिस्सों में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा पूरी की गई 125 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन करने के बाद कहा, ‘‘पिछले 10 वर्षों में हमारी कड़ी मेहनत के कारण, हमारा रक्षा उत्पादन, जो 2014 में लगभग 46,000 करोड़ रुपये था, अब बढ़कर रिकॉर्ड 1.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।हमारा रक्षा निर्यात, जो 10 वर्ष पहले 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, अब लगभग 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।'' केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और जम्मू-कश्मीर तथा अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और मिजोरम समेत सात राज्यों में इन परियोजनाओं के तहत 28 सड़कों, 93 पुलों का काम और चार विविध कार्य 5,000 करोड़ रुपये की लागत से पूरे हो चुके हैं। तकनीकी नवाचार में उल्लेखनीय प्रगति के लिए बीआरओ की सराहना करते हुए सिंह ने कहा कि उन्नत इंजीनियरिंग पद्धतियां बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को पूरा करने में तेजी ला रही हैं। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के तहत ‘गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स' के साथ साझेदारी में स्वदेशी रूप से विकसित क्लास-70 मॉड्यूलर पुलों को बीआरओ द्वारा अपनाने का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘‘कई अग्रिम स्थानों पर इन मॉड्यूलर पुलों का सफल निर्माण इस बात का एक सशक्त उदाहरण है कि कैसे स्वदेशी तकनीक सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में बदलाव ला रही है। पूरी तरह से भारत में निर्मित ये पुल, भारत की इंजीनियरिंग आत्मनिर्भरता में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं।'' रक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में बीआरओ ने 16,690 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड व्यय किया, जो अब तक का सबसे अधिक है और वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 18,700 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो बीआरओ की क्षमताओं में सरकार के विश्वास को रेखांकित करता है।
- नयी दिल्ली. भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने कहा कि बैंक का आवास ऋण पोर्टफोलियो पिछले महीने नौ लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है और उन्हें भरोसा है कि खुदरा, कृषि तथा एमएसएमई (आरएएम) क्षेत्र में जारी तेजी से चालू वित्त वर्ष में कुल ऋण वृद्धि 14 प्रतिशत रहेगी। आरएएम खंड सितंबर में ही 25 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है।आर्थिक वृद्धि में सुधार को देखते हुए एसबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए ऋण वृद्धि लक्ष्य को पहले के 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया है। ' शेट्टी ने कहा, “हमने ऋण वृद्धि के अनुमान को बढ़ाया है। अब यह 12 प्रतिशत से 14 प्रतिशत है। हमें मजबूत ऋण वृद्धि दिख रही है, खासकर आरएएम खंड में। एमएसएमई क्षेत्र में 17-18 प्रतिशत और कृषि तथा खुदरा में करीब 14 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है।” उन्होंने बताया कि स्वर्ण ऋण में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की जा रही है, जबकि असुरक्षित व्यक्तिगत ऋण में दो अंकों की वृद्धि होगी। कुछ समय से सुस्त चल रहा कॉर्पोरेट ऋण खंड भी दूसरी तिमाही में पुनः गति पकड़ता दिखा और 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। शेट्टी ने कहा, “कॉर्पोरेट ऋण के लिए हमारा अनुमान निचले दो अंकों में है। इस तरह कुल मिलाकर 12-14 प्रतिशत ऋण वृद्धि हासिल करना पूरी तरह संभव है।” रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत ब्याज दर में 25 आधार अंक की और कटौती से ऋण सस्ते होंगे और नई मांग को बल मिलेगा।
- नई दिल्ली। एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा के वार्षिक दीक्षांत समारोह में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय का सबसे बड़ा योगदान प्रतिभाशाली छात्रों को प्रोत्साहित करना, उनका विकास करना और उनकी क्षमताओं को सम्मान देने वाला मंच उपलब्ध कराना होता है। उन्होंने ऑनलाइन और ऑन-कैंपस मिलाकर लगभग 29,000 छात्रों के विशाल ग्रेजुएटिंग बैच को बधाई देते हुए कहा कि विद्यार्थियों की उपलब्धियां ही इस समारोह का वास्तविक केंद्र हैं। केंद्रीय मंत्री ने विश्वविद्यालय की मेरिट-आधारित स्कॉलरशिप प्रणाली की प्रशंसा की, जिसने आवश्यकता-आधारित प्रवेश को संभव बनाया है। उन्होंने यह भी बताया कि यहाँ की आधी छात्र आबादी युवा महिलाओं की है और छात्रों के पास 450 से अधिक पेटेंट हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 50 फैकल्टी सदस्य रामलिंगम स्वामी फेलो हैं जो राष्ट्र सेवा के लिए वापस लौटे हैं।पीयूष गोयल ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस को याद करते हुए कहा कि संविधान के मूल्यों-समानता, सामाजिक सद्भाव और सभी के लिए अवसर को हमेशा याद रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज के कमजोर वर्गों को आगे बढ़ाने की सबसे बड़ी शक्ति है और छात्रों का कर्तव्य है कि वे समाज और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें। उन्होंने कहा कि आज का ग्रेजुएटिंग बैच भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और आने वाले 25 वर्ष “विकसित भारत” के लिए निर्णायक होंगे। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपने क्षेत्रों में नए आयाम स्थापित करें और देश के विकास में योगदान दें।गोयल ने प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन का उल्लेख किया, जिसमें पीएम ने एक लाख युवाओं से सार्वजनिक जीवन और राजनीति में आने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि देश को ईमानदार और समर्पित सार्वजनिक नेताओं की आवश्यकता है जो 140 करोड़ नागरिकों को कर्तव्य और जिम्मेदारी का संदेश दे सकें-पहले परिवार के लिए, फिर समाज के लिए और अंत में राष्ट्र के लिए। उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय राजनीति और सार्वजनिक जीवन पर गहरी समझ विकसित करने में छात्रों की मदद करें और उन्हें जनप्रतिनिधियों के साथ इंटर्नशिप के अवसर भी दें ताकि वे शासन और सार्वजनिक सेवा को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें।उन्होंने कहा कि जैसा उन्हें कंप्यूटर शिक्षा में सिखाया गया था-“garbage in, garbage out” उसी तरह भारतीय राजनीति को अच्छे लोगों की जरूरत है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि अधिक से अधिक युवा सार्वजनिक जीवन में आएँगे तो भारत दुनिया की महाशक्ति बनने की राह पर और तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री के उस कथन को दोहराया कि देश का भविष्य “can-do generation” के हाथों में है और युवा ही नया भारत बनाएँगे।अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री के 15 अगस्त 2022 के भाषण में बताए गए पाँच प्रणों का भी उल्लेख किया। इनमें विकसित भारत का संकल्प, औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति, भारत की विरासत पर गर्व, एक भारत-श्रेष्ठ भारत की एकता और कर्तव्य भावना शामिल थे। उन्होंने कहा कि यदि 140 करोड़ भारतीय इन प्रणों को अपनाएँ, तो भारत 2022 से 2047 की यात्रा में 4 ट्रिलियन डॉलर से 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और 2,500 डॉलर से 20,000 डॉलर की प्रति व्यक्ति आय तक पहुँच सकेगा। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे इन पाँच प्रणों पर गहराई से विचार करें और जो उन्हें प्रेरित करे उसे अपने जीवन में अपनाएँ।पीयूष गोयल ने शिक्षकों और माता-पिता के योगदान की सराहना की और कहा कि उनकी मेहनत और समर्पण ने छात्रों को इस मुकाम तक पहुँचाया है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपनी मातृसंस्था से जुड़े रहें और अपने शिक्षकों के प्रति आभार प्रकट करें। उन्होंने कहा कि जीवन में चुनौतियाँ और संघर्ष आते रहेंगे, लेकिन एमिटी यूनिवर्सिटी की शिक्षा और मूल्य उन्हें हर कठिनाई का सामना करने में सक्षम बनाएँगे। उन्होंने छात्रों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में योगदान देने की अपील की।-
-
नई दिल्ली ।इंडिगो एयरलाइन की कई उड़ानों के रद्द होने और सर्दियों के मौसम में यात्रा के बढ़ते दबाव को देखते हुए भारतीय रेलवे ने शनिवार को 89 विशेष ट्रेन सेवाओं की घोषणा की है। ये सेवाएं अगले तीन दिनों में 100 से अधिक यात्राओं को कवर करेंगी और प्रमुख शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली, पुणे, हावड़ा और हैदराबाद में यात्री दबाव को कम करने के लिए चलाई जा रही हैं।
सेंट्रल रेलवे ने 14 विशेष ट्रेनें संचालित करने की घोषणा की है, जो पुणे, बेंगलुरु, हजरत निजामुद्दीन, मडगांव, लखनऊ, नागपुर, गोरखपुर और लोकमान्य तिलक टर्मिनस से जुड़ेंगी। ये ट्रेनें 6 से 12 दिसंबर के बीच चलेंगी। दक्षिण-पूर्व रेलवे ने सांत्रागाची से येलाहंका, हावड़ा से मुंबई CSMT और चेरलापल्ली से शालिमार तक सेवाओं की घोषणा की है, जो 6 से 9 दिसंबर तक चलेंगी। दक्षिण-केंद्र रेलवे (South Central Railway) ने 6 दिसंबर को चेरलापल्ली से शालीमार, सिकंदराबाद से चेन्नई इग्मोर और हैदराबाद से मुंबई LTT तक तीन विशेष ट्रेनें चलाईं।पूर्व रेलवे हावड़ा, नई दिल्ली, सीलदाह और मुंबई के बीच विशेष ट्रेनें चला रहा है, जो 6 से 9 दिसंबर तक चलेंगी। पश्चिम रेल ने मुंबई सेंट्रल और भिवानी, मुंबई सेंट्रल और शकुर बस्ती, तथा बांद्रा टर्मिनस और दुर्गापुरा के बीच सात विशेष ट्रेनें चलाई हैं। इनकी बुकिंग पहले ही खुल चुकी है। गोरखपुर से अतिरिक्त सेवाएं भी संचालित की जाएंगी, जो 7 से 9 दिसंबर के बीच आनंद विहार टर्मिनल और लोकमान्य तिलक टर्मिनस तक चलेंगी। बिहार के यात्रियों की सुविधा के लिए ईस्ट सेंट्रल रेलवे पटना और दरभंगा से आनंद विहार टर्मिनल तक ट्रेनें चला रहा है, जो 6 से 9 दिसंबर तक चलेंगी।उत्तरी-पश्चिम रेलवे ने हिसार और खड़की, तथा दुर्गापुरा और बांद्रा टर्मिनस के बीच 7 और 8 दिसंबर को विशेष एक-बारगी ट्रेनें संचालित करने का निर्णय लिया है। उत्तरी रेलवे (Northern Railway) नई दिल्ली–उधमपुर वंदे भारत सेवा 6 दिसंबर को चला रहा है। इसके अलावा, नई दिल्ली से मुंबई सेंट्रल, तिरुवनंतपुरम सेंट्रल और अन्य स्थानों तक भी विशेष ट्रेनें चलेंगी। रेल मंत्रालय ने कहा कि इन अतिरिक्त सेवाओं का उद्देश्य यात्रियों की निर्बाध यात्रा सुनिश्चित करना और हवाई यात्रा में रुकावट के कारण बढ़ी मांग को पूरा करना है। - नई दिल्ली।‘ परीक्षा पे चर्चा 2026 का नौवां संस्करण जनवरी 2026 में आयोजित होगा। शिक्षा मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि यह कार्यक्रम पीएम मोदी का एक इंटरैक्टिव प्लेटफॉर्म है, जिसमें देश-विदेश के विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक परीक्षा से जुड़े तनाव, अनुभव और सकारात्मक तैयारी पर चर्चा करते हैं। कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन MyGov पोर्टल (innovateindia1.mygov.in) पर शुरू हो चुके हैं और इसकी अंतिम तिथि 11 जनवरी 2026 है। कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक ऑनलाइन MCQ आधारित प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकते हैं। जो प्रतिभागी गतिविधि पूरी करेंगे, उन्हें MyGov की ओर से सर्टिफिकेट ऑफ पार्टिसिपेशन दिया जाएगा।पिछला आठवां संस्करण 10 फरवरी 2025 को नई दिल्ली स्थित सुंदर नर्सरी में एक नई और नवाचारी शैली में आयोजित हुआ था। इसमें देश के विभिन्न प्रकार के स्कूलों- सरकारी स्कूल, केंद्रीय विद्यालय, सैनिक स्कूल, एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल, सीबीएसई स्कूल और नवोदय विद्यालय से चुने गए 36 विद्यार्थी शामिल हुए थे। इसके अलावा PRERANA के पूर्व छात्र, कला उत्सव और वीर गाथा के विजेता भी कार्यक्रम का हिस्सा बने। PPC 2025 में सात अलग-अलग एपिसोड शामिल थे, जिनमें खेल, अनुशासन, मानसिक स्वास्थ्य, पोषण, तकनीक, वित्त, रचनात्मकता और सकारात्मकता जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी।PPC 2025 ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी हासिल की, जब इसने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया। इसमें 245 देशों के विद्यार्थी, 153 देशों के शिक्षक और 149 देशों के अभिभावक शामिल हुए। भागीदारी का यह स्तर 2018 में हुए पहले संस्करण से कई गुना अधिक है, जब केवल 22,000 लोगों ने हिस्सा लिया था। PPC 2025 में 3.56 करोड़ रजिस्ट्रेशन हुए, जबकि देशभर में आयोजित जन आंदोलन की गतिविधियों में 1.55 करोड़ लोगों ने भाग लिया। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 5 करोड़ लोगों की भागीदारी दर्ज की गई, जो इस कार्यक्रम की लोकप्रियता और प्रभाव को दर्शाती है।-
-
नई दिल्ली। गोवा के अर्पोरा में एक रेस्टोरेंट‑क्लब में भीषण आग हादसे में 25 लोगों की मौत और 6 अन्य के घायल हो गए। पीएम मोदी ने इस हादसे पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए पीड़ितों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि यह हादसा बहुत ही दुःखद है। उन्होंने मृतकों के प्रति संवेदना और घायलों के जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना की। इसके अलावा पीएम मोदी ने मृतकों के परिजनों के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50,000 रुपये की आर्थिक मदद की घोषणा की।
वहीं गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने इस घटना को राज्य के पर्यटन इतिहास में सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक बताया। उन्होंने पुष्टि की कि क्लब के मैनेजर और कुछ कर्मचारी गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि क्लब मालिकों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। सावंत ने कहा कि इस हादसे में 25 लोगों की मौत हुई और 6 घायल हैं, सभी घायलों की स्थिति स्थिर है और उन्हें सर्वश्रेष्ठ चिकित्सीय देखभाल मिल रही है। उन्होंने पूरे मामले की मैजिस्ट्रियल जांच का आदेश दिया है ताकि आग के कारणों का पता लगाया जा सके और जिम्मेदारी तय की जा सके।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी इस हादसे पर गहरा दुःख व्यक्त किया और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हादसे को “गहरा दुःखद” बताते हुए कहा कि स्थानीय प्रशासन बचाव और राहत कार्य कर रहा है और प्रभावितों को आवश्यक देखभाल प्रदान की जा रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। आपातकालीन दलों ने आग को काबू में करने के लिए रातभर काम किया। अधिकारियों ने आग लगने के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है।-( -
नयी दिल्ली. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को कहा कि विपक्षी ‘इंडिया' गठबंधन इस समय जीवन रक्षक प्रणाली पर है और अंदरूनी खींचतान एवं भाजपा की 24 घंटे चलने वाली चुनावी मशीन से मुकाबला करने में विफलता के कारण उसके ‘आईसीयू' में जाने का खतरा है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट' में विपक्षी गठबंधन की ‘‘संगठनात्मक और रणनीतिक विफलताओं'' का विस्तार से उल्लेख किया और केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ‘अद्वितीय' कार्य नीति के साथ इसके दृष्टिकोण की तुलना की। अब्दुल्ला ने विपक्षी ‘इंडिया' (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) की वर्तमान स्थिति, विशेष रूप से हाल में हुए बिहार चुनावों के बाद, के बारे में कहा, ‘‘हम एक तरह से जीवन रक्षक प्रणाली पर हैं, लेकिन कभी-कभी कोई अपना चप्पू निकालता है और हमें थोड़ा झटका देता है, और हम फिर से उठ खड़े होते हैं। लेकिन फिर, दुर्भाग्य से, बिहार जैसे परिणाम आते हैं, और हम फिर से नीचे गिर जाते हैं, और फिर किसी को हमें आईसीयू में ले जाना पड़ता है।'' अब्दुल्ला ने नीतीश कुमार की भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में वापसी के लिए भी ‘ इंडिया' गठबंधन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि हमने नीतीश कुमार को वापस राजग की गोद में धकेल दिया।'' उन्होंने विपक्षी गठबंधन द्वारा एकजुट दृष्टिकोण अपनाने में विफलता की ओर भी इशारा किया, तथा बिहार में पार्टी की मौजूदगी के बावजूद सीट-बंटवारे की व्यवस्था से जानबूझकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) को बाहर रखने के निर्णय का हवाला दिया। अब्दुल्ला ने ‘इंडिया' गठबंधन के चुनाव प्रचार की तुलना भाजपा से की और कहा कि विपक्षी गठबंधन संरचनात्मक रूप से सत्तारूढ़ पार्टी के अनुशासित दृष्टिकोण के साथ प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थ है। उन्होंने कहा, ‘‘उनके पास एक अद्वितीय चुनाव मशीन है'', तथा यह ताकत केवल संगठन और वित्तपोषण से कहीं अधिक है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘चुनावों के मामले में भी उनकी कार्यशैली अद्भुत है... वे हर चुनाव ऐसे लड़ते हैं मानो उनकी ज़िंदगी उस पर निर्भर हो। हम कभी-कभी चुनाव ऐसे लड़ते हैं मानो हमें कोई परवाह ही नहीं है।'' अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी टीम द्वारा अपनाए गए राजनीति के चौबीस घंटे मॉडल को रेखांकित करते हुए कहा, ‘‘एक चुनाव खत्म होते ही वे अगले क्षेत्र में चले जाते हैं... हम चुनाव से दो महीने पहले उन राज्यों में कदम रखते हैं। अगर हम नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख से पहले अपने चुनावी गठबंधन बना लें, तो हम भाग्यशाली होंगे।'' उन्होंने भविष्य की रणनीति पर कहा कि विपक्ष के लिए (भाजपा को) गंभीर चुनौती देने का एकमात्र तरीका अपने सबसे बड़े घटक दल कांग्रेस के इर्द-गिर्द एकजुट होना है क्योंकि भाजपा के अलावा वह एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसकी अखिल भारतीय उपस्थिति है। अब्दुल्ला ने स्वीकार किया कि क्षेत्रीय दल अपनी सीमित भौगोलिक पहुंच के कारण विवश हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस को ही प्रमुखता से काम करना होगा।'' मुख्यमंत्री ने मुस्लिम मतदाताओं के संबंध में कहा कि पारंपरिक रूप से समुदाय का वोट प्राप्त करने वालों ने उन्हें हल्के में लेकर ‘गलती' की है। अब्दुल्ला ने कहा कि ऐसे दलों ने केवल चुनाव से ठीक पहले ही समुदाय से संवाद किया, जिसके परिणामस्वरूप समुदाय में मंथन हुआ और लाभ एआईएमआईएम जैसे दलों को मिला है, जो ‘‘पूरे पांच साल उनके मुद्दों का समर्थन करने के लिए तैयार हैं।'' यह पूछे जाने पर कि क्या इसका मतलब यह है कि 2024 के आम चुनावों के परिणाम एक संयोग थे, अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘नहीं, मुझे लगता है कि देश ने 2024 में केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री मोदी और अन्य को संदेश दिया कि चीजें उतनी अच्छी नहीं हैं जितनी आपने उन्हें बताया था, और हम लिए गए कुछ फैसलों से खुश नहीं हैं।'' मुख्यमंत्री ने कहा कि 2024 के चुनावों के बाद, केंद्र ने अपना दृष्टिकोण बदला और दिखाया कि वह गठबंधन में भी काम कर सकता है। अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘आज हममें से शायद ही किसी को याद हो कि यह एक गठबंधन सरकार है। हम सभी को लगा कि इस सरकार की कार्यशैली संप्रग (कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) या राजग जैसी स्थिति के अनुकूल नहीं है। मुझे तो शायद ही कभी याद आता है कि यह एक ऐसा प्रधानमंत्री है जो वास्तव में अपने दो सहयोगियों पर निर्भर है।'' उन्होंने कहा कि केंद्र ने काम करने के अपने तरीके, लोगों को साथ लेकर चलने के अपने तरीके को नया रूप दिया है। अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘मेरा अभिप्राय है कि भाजपा सरकार कहने से लेकर अब वे खुद को राजग सरकार कहने लगे हैं। ये छोटे-मोटे बदलाव हैं, लेकिन इनका महत्व है।'' नेशनल कांफ्रेंस नेता हमेशा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में धांधली के व्यापक राजनीतिक आरोप से दूर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं कभी भी उन लोगों का समर्थक नहीं रहा जो कहते हैं कि मशीनों में धांधली होती है।'' अब्दुल्ला ने हालांकि चुनावी धांधली और चुनावी हेरफेर के बीच अंतर बताया, जो उनके अनुसार एक वैध चिंता का विषय है। उन्होंने कहा, ‘‘चुनावों में हेरफेर किया जा सकता है। और चुनाव में हेरफेर करने का सबसे आसान तरीका मतदाता सूची के माध्यम से या निर्वाचन क्षेत्रों की संरचना के माध्यम से ऐसा करना है।'' अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में हाल ही में की गई परिसीमन प्रक्रिया की ओर इशारा करते हुए इसे ‘‘मूलतः हेरफेर'' बताया। उन्होंने दलील दी कि इस प्रक्रिया में मतदाता सूचियों में फेरबदल करके और मतदाताओं के विशिष्ट वर्गों को बाहर करके ‘‘एक पार्टी और उसके एक सहयोगी'' को लाभ पहुंचाने के लिए नए निर्वाचन क्षेत्र बनाए गए, जो चुनावी हेरफेर करने के समान है। उन्होंने यह कहते हुए निष्कर्ष निकाला कि मतदाता सूची में परिवर्तन करने वाली कोई भी प्रक्रिया, जैसे कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), पक्षपात की आशंका को समाप्त करने के लिए ‘‘पारदर्शी'' और ‘‘निष्पक्ष'' तरीके से की जानी चाहिए। अब्दुल्ला ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि ईवीएम पर उनका निजी रुख उनके पिता फारूक अब्दुल्ला से अलग है, जो धांधली के प्रति आश्वस्त हैं। उन्होंने कहा,‘‘मेरे पिता व्हाट्सऐप पर मिलने वाली हर बात पर विश्वास कर लेते हैं।''
-
मथुरा. सिनेमा जगत में ‘ही-मैन' के नाम से मशहूर दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र के निधन के बाद शनिवार को मथुरा जिले के एक गांव में उनकी तेरहवीं का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 10 हजार लोग शामिल हुए। इस मौके पर हवन, शांतिपाठ आदि का आयोजन कर अपने प्रिय हीरो को श्रद्धांजलि दी गई और उनकी बहुचर्चित फिल्म 'शोले' का एलईडी स्क्रीन पर प्रदर्शन किया गया। ब्रह्मभोज के आयोजकों में से एक, बचपन से धर्मेंद्र के प्रशंसक रहे बलदेव क्षेत्र के गांव सेलखेड़ा निवासी गोपाल सिंह पहलवान तथा लाखन सिंह ने बताया कि वे सभी उनके बड़े चहेते थे। उनके निधन से पूरे गांव को ही बहुत दुख हुआ है। वे सभी उन्हें भी एक प्रकार से अपने परिवार का ही सदस्य मानते थे। इसीलिए उन्होंने उनके प्रति अपना आदर व श्रद्धा जाहिर करने के लिए निधन के तेरहवें दिन तेरहवीं की रस्म निभाने की ठानी। उन्होंने बताया कि इसीलिए गांव में पूरे विधि-विधान से हवन एवं शांतिपाठ का आयोजन किया गया और उसके बाद ब्रह्मभोज किया गया। जिसमें उनके गांव के ही नहीं, आसपास के एक दर्जन गांवों के लोगों को भी बुलाया गया था। इसीलिए भोज व अन्य कार्यक्रमों में शामिल होने वालों की संख्या दस हजार से भी ज्यादा ऊपर पहुंच गई। गौरतलब है कि 'धरम पा जी' के नाम से जाने जाने वाले अभिनेता का विगत 24 नवंबर को निधन हो गया था। वे कई दिनों से बीमार चल रहे थे। उनकी पत्नी हेमामालिनी मथुरा से ही सांसद हैं, जो 2024 में तीसरी बार लोकसभा के लिए चुनी गई हैं। धर्मेंद्र खुद भी उनके लिए प्रचार में मथुरा गए थे।
-
नयी दिल्ली. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा है कि शुक्रवार रात रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए आयोजित राजकीय भोज में “गर्मजोशी भरा और आत्मीय” माहौल था तथा कई लोगों से बातचीत करना आनंददायक था। थरूर की यह टिप्पणी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पुतिन के सम्मान में दिए गए भोज के एक दिन बाद आई है। थरूर ने शनिवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, "शुक्रवार रात राष्ट्रपति पुतिन के लिए राष्ट्रपति भवन में आयोजित भोज में शामिल हुआ। माहौल बेहद गर्मजोशी भरा और आत्मीय था। वहां उपस्थित कई लोगों से बातचीत करने का आनंद लिया, खासतौर पर रूसी प्रतिनिधिमंडल से आए साथी बेहद अच्छे थे।'' राष्ट्रपति मुर्मू ने भोज के दौरान पुतिन और उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि यह यात्रा भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ का महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह साझेदारी अक्टूबर 2000 में पुतिन की पहली भारत यात्रा के दौरान स्थापित हुई थी।
मुर्मू ने भारत-रूस “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” के लिए पुतिन के समर्थन और व्यक्तिगत प्रतिबद्धता की भी सराहना की। कांग्रेस ने शुक्रवार को दावा किया था कि पुतिन के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में आयोजित राजकीय भोज में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को आमंत्रित नहीं किया गया है। पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कांग्रेस सांसद थरूर के इस भोज में शामिल होने के फैसले को लेकर उन पर कटाक्ष किया और कहा कि ‘हम होते तो अंतरात्मा की आवाज सुनते।' -
नयी दिल्ली. केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र को बड़ा झटका लगने के बाद भी केन्द्र शासित प्रदेश की अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने का काम चल रहा है। वित्त मंत्री ने 2019 से अब तक देश की आर्थिक यात्रा के बारे में कहा कि इस दौरान एक के बाद एक वैश्विक और घरेलू चुनौतियां आईं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में चल रहे खास प्रयासों का जिक्र भी किया। पाकिस्तान का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि हमें ''अपनी सीमाओं पर हमेशा परेशानी का सामना करना पड़ा।'' सीतारमण ने 'हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट' में कहा, ''इस बार आपने देखा कि जब जम्मू-कश्मीर संभल रहा था, केन्द्र शासन में अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ रही थी, तब क्या हुआ।'' उन्होंने कहा कि केन्द्र ने जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को तेजी से वृद्धि दर्ज करने के लिए तैयार किया। उन्होंने आगे बताया, ''जम्मू-कश्मीर बैंक का पुनरुद्धार ऐसा काम है जिस पर देश को गर्व हो सकता है। जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था फिर से खड़ी हो रही थी... लेकिन बाहरी कारणों से उसे बड़ा झटका लगा और महत्वपूर्ण पर्यटन उद्योग ठप हो गया।'' सीतारमण ने कहा, ''मुझे जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री की सराहना करनी होगी, जिन्होंने मुझसे दो बार मुलाकात की और पर्यटन क्षेत्र के ठप पड़ने के बाद अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने पर बात की।'' वित्त मंत्री का इशारा अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले की ओर था, जिसमें पाकिस्तानी आतंकवादियों ने 26 लोगों को मार डाला था। जवाब में उमर ने शुक्रिया कहा और हँसते हुए बोले, ''अब अगला काम मैम – कृपया मुझे धन दीजिए, क्योंकि पैसा बहुत कम है!'' उन्होंने माना कि केन्द्र सरकार उनके प्रशासन के लिए बहुत सहयोगी रही है, भले ही इससे कुछ लोग नाराज हो जाएं। उन्होंने कहा, ''मैं अपनी हर बात की जिम्मेदारी लेता हूं। अगर मैंने अपनी सरकार और राजनीति को भारत सरकार से अच्छे कामकाजी रिश्ते की तरफ मोड़ा है, तो मैं उसकी जिम्मेदारी लेता हूं और उसके नतीजे भी स्वीकार करूंगा।'' उन्होंने साफ किया कि केन्द्र से अच्छा रिश्ता होने का मतलब भाजपा से गठबंधन नहीं है। ''मैं भाजपा की राजनीति से सहमत नहीं हूं, उसका विरोध करता रहूंगा। लेकिन भारत सरकार के साथ जितना अच्छा काम हो सकेगा, करूंगा।'' जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा से रिश्ते पर उमर ने कहा, ''ये रिश्ता अभी बन रहा है, बस इतना ही कहूंगा।''
-
नयी दिल्ली. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को कहा कि भारत-रूस साझेदारी पिछले 70-80 वर्षों में ‘‘सबसे स्थिर और अहम संबंधों'' में से एक रही है और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नयी दिल्ली यात्रा का उद्देश्य आर्थिक सहयोग पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए इन संबंधों को ‘‘फिर से परिभाषित'' करना था। जयशंकर ने इस विचार से असहमति जताई कि पुतिन की यात्रा भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर जारी वार्ताओं को जटिल बना सकती है। जयशंकर ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट' में कहा, ‘‘नहीं, मैं आपसे असहमत हूं। मुझे लगता है कि हर कोई जानता है कि भारत के दुनिया के सभी प्रमुख देशों के साथ बेहतर संबंध हैं।'' जयशंकर से पूछा गया था कि क्या पुतिन की नयी दिल्ली की दो दिवसीय यात्रा का प्रस्तावित व्यापार समझौते के लिए अमेरिका के साथ वार्ता पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि किसी भी देश की ऐसी अपेक्षा उचित नहीं है कि उसे यह कहने या दखल देने का हक है कि हमारे दूसरे देशों के साथ रिश्ते कैसे हों।'' उन्होंने कहा, ‘‘क्योंकि याद रखिए, दूसरे देश भी वही अपेक्षा कर सकते हैं। मेरा मानना है कि हमने हमेशा स्पष्ट किया है कि हमारे अनेक देशों के साथ संबंध हैं। हमारे पास अपनी पसंद की आजादी है।” जयशंकर ने कहा, ‘‘हम जिसे रणनीतिक स्वायत्तता कहते हैं, उसके बारे में लगातार बात करते रहे हैं और वह जारी भी है। मुझे समझ नहीं आता कि किसी के पास इसके विपरीत अपेक्षा करने का कोई कारण क्यों होना चाहिए।'' विदेश मंत्री ने स्वीकार किया कि ट्रंप प्रशासन का ध्यान व्यापार पर रहा है और कहा कि इस दिशा में भारत का दृष्टिकोण पूरी तरह से राष्ट्रीय हितों से प्रेरित है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि इस समय व्यापार सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। यह स्पष्ट रूप से वाशिंगटन की सोच का केन्द्र बिन्दु है, यह पहले की सरकारों की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण है, जिसे हमने पहचाना है और हम इसका सामना करने के लिए तैयार हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हम उचित शर्तों पर इसका सामना करने के लिए तैयार हैं। मेरा मतलब है, आपमें से जो लोग सोचते हैं कि कूटनीति का मतलब किसी और को खुश करना है, तो माफ कीजिए, मेरी कूटनीति की यह धारणा नहीं है। मेरे लिए, कूटनीति का मतलब हमारे राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।'' अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत का भारी-भरकम शुल्क (टैरिफ) लगा दिया है, जिसमें नयी दिल्ली द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत शुल्क भी शामिल है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष वर्तमान में प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि हमारे अपने-अपने व्यापारिक हितों के लिए एक समाधान बिंदु हो सकता है जिसपर दोनों पक्ष समहमत हों। जाहिर है, इस पर कठिन बातचीत होगी क्योंकि इसका इस देश में आजीविका पर असर पड़ेगा।'' जयशंकर ने कहा, ‘‘आखिरकार, हमारे लिए मजदूरों, किसानों, छोटे व्यवसायों और मध्यम वर्ग के हित ही मायने रखते हैं। जब हम अमेरिका जैसे देश के साथ व्यापार समझौते पर विचार करते हैं, तो आपको अपनी स्थिति और प्रस्ताव पर रखी जाने वाली बातों को लेकर बेहद विवेकपूर्ण होना चाहिए।'' राष्ट्रपति पुतिन की दो दिवसीय भारत यात्रा पर जयशंकर ने कहा कि भारत जैसे ‘‘बड़े'' और ‘‘उभरते'' देश के लिए अपनी पसंद की स्वतंत्रता के अनुरूप दुनिया में अधिक से अधिक देशों के साथ बेहतर सहयोग को बनाए रखना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि अगर आप भारत-रूस संबंधों को देखें, तो दुनिया ने पिछले 70-80 सालों में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। मैंने पहले भी कहा है और मैं इसे फिर से कहूंगा कि भारत और रूस के बीच संबंध दुनिया के सबसे स्थिर और मजबूत संबंधों में से एक रहे हैं।'' जयशंकर ने कहा, ‘‘यहां तक कि रूस के भी चीन, अमेरिका या यूरोप के साथ संबंधों में उतार-चढ़ाव आते रहे हैं। इनमें से कई देशों के साथ हमारे संबंधों में भी उतार-चढ़ाव आए हैं।'' उन्होंने कहा कि किसी भी रिश्ते में यह स्वाभाविक है कि उसके कुछ पहलू विकसित होते हैं और कुछ नहीं। उन्होंने कहा, ‘‘रूस के मामले में, विभिन्न कारणों से जो हुआ, मुझे लगता है कि उन्होंने पश्चिम और चीन को अपने प्राथमिक आर्थिक साझेदार के रूप में देखा। हमने भी शायद यही सोचा था।'' जयशंकर ने कहा, ‘‘तो इस संबंध का आर्थिक पक्ष किसी न किसी तरह गति नहीं पकड़ पाया। आप इसे आंकड़ों में देख सकते हैं।” उन्होंने कहा कि पुतिन की यात्रा कई मायनों में संबंधों को पुनः परिभाषित करने के लिए थी। उन्होंने कहा कि उर्वरकों पर संयुक्त उद्यम पर सहमति एक अन्य प्रमुख उपलब्धि थी। उन्होंने कहा, ‘‘ब्राजील के बाद हम दुनिया के दूसरे सबसे बड़े उर्वरक आयातक हैं। यह हमारे सामने बार-बार आने वाली समस्या है। और इसलिए भी क्योंकि उर्वरक के स्रोत बहुत अस्थिर रहे हैं। इसलिए हमने उर्वरकों पर एक महत्वपूर्ण और ठोस संयुक्त उद्यम बनाने पर सहमति जताई है।'' चीन के साथ भारत के संबंधों पर जयशंकर ने कहा कि नयी दिल्ली ने जो मुख्य बात कही वह यह थी कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द अच्छे संबंधों के लिए पूर्व शर्त है और इसे बनाए रखा जा रहा है तथा इसे और मजबूत बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन ऐसा नहीं है कि संबंधों में यही एकमात्र मुद्दा था। कई अन्य मुद्दे भी थे, जिनमें से कुछ गलवान से पहले के थे। इसलिए व्यापार के मुद्दे हैं, निवेश के मुद्दे हैं, प्रतिस्पर्धा के मुद्दे हैं, सब्सिडी के मुद्दे हैं, निष्पक्षता के मुद्दे हैं, पारदर्शिता के मुद्दे हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘ये भी वास्तविक मुद्दे हैं। हम इनमें से कुछ को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं। इनमें से कुछ सरल हैं, कुछ कठिन।'' पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा कि भारत की ज्यादातर समस्याएं उस देश की सेना से उत्पन्न होती हैं और उन्होंने आतंकवादी समूहों को उसके समर्थन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जैसे अच्छे आतंकवादी और बुरे आतंकवादी होते हैं, वैसे ही अच्छे सैन्य नेता भी होते हैं और कुछ इतने अच्छे नहीं भी होते। उनकी टिप्पणी को मुनीर के संदर्भ में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हमारे लिए पाकिस्तानी सेना की वास्तविकता हमेशा से यही रही है और हमारी अधिकांश समस्याएं वास्तव में उन्हीं से उत्पन्न होती हैं। जब आप आतंकवाद को देखते हैं, जब आप प्रशिक्षण शिविरों को देखते हैं, जब आप भारत के प्रति लगभग वैचारिक शत्रुता की नीति को देखते हैं, तो यह कहां से आती है? यह उस देश की सेना से आती है।'' जयशंकर ने कहा कि भारत और पाकिस्तान को बिल्कुल भी जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान की स्थिति पर गौर कीजिए। दोनों पक्षों की क्षमता, छवि और स्थिति में कितना अंतर है और साफ-साफ कहें तो उनकी प्रतिष्ठा देखिए। हमें जरूरत से ज्यादा जुनूनी होकर खुद को उनसे जोड़कर नहीं देखना चाहिए। यह एक चुनौती है, कुछ मुद्दे हैं जिनसे हमें निपटना होगा।'' बांग्लादेश के बारे में विदेश मंत्री ने कहा कि भारत उस देश का शुभचिंतक है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम एक लोकतांत्रिक देश के रूप में सोचते हैं, कोई भी लोकतांत्रिक देश लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से लोगों की इच्छा को सुनिश्चित होते देखना पसंद करता है।'' उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जो भी निकलेगा, उसमें संबंधों के बारे में संतुलित और परिपक्व दृष्टिकोण होगा और उम्मीद है कि चीजें बेहतर होंगी।'' यह पूछे जाने पर कि क्या बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में ही रहेंगी, उन्होंने कहा, ‘‘वह एक खास परिस्थिति में यहां आई थीं और मुझे लगता है कि उनके साथ जो कुछ भी हुआ, उसमें यही परिस्थिति एक कारक है। लेकिन फिर भी, इस संबंध में निर्णय उन्हें खुद ही करना होगा।''
- नयी दिल्ली. पान मसाला और गुटके को बढ़ावा देने के लिए इनका विज्ञापन कर रहे फिल्म अभिनेताओं को उनके बेहतर अभिनय के लिए मिले पुरस्कार वापस लिए जाने की मांग शुक्रवार को लोकसभा में उठी। निचले सदन में गुजरात में शराबबंदी खत्म करने का मुद्दा भी उठाया गया।पान मसाला पर उपकर लगाने संबंधी ‘स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक 2025' पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) के हनुमान बेनीवाल ने कहा कि किसी मामले में कानून बनाने से ज्यादा महत्वपूर्ण उस पर अमल करना होता है। उन्होंने कहा कि देश में तमाम ऐसे कानून हैं, जिसका खुलेआम उल्लंघन होता है और ऐसे में अनुपालन के अभाव में कानून बनाने का उद्देश्य विफल हो जाता है। बेनीवाल ने शाहरूख खान, अजय देवगन और सलमान खान जैसे मशहूर अभिनेताओं के नाम का सीधा उल्लेख करते हुए कहा कि ‘‘ऐसे अदाकार विज्ञापन के जरिये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पान मसाला और गुटकों के सेवन को बढ़ावा देते हैं।'' उन्होंने कहा कि ऐसे में इन अभिनेताओं को उनके बेहतर अभिनय के लिए दिये गये विभिन्न पुरस्कारों को वापस ले लेना चाहिए। निर्दलीय सदस्य उमेशभाई बाबूभाई पटेल ने गुजरात में शराबबंदी के बावजूद खुलेआम शराब उपलब्ध होने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि केवल कानून बनाना ही समस्या का समाधान नहीं, बल्कि इसका अनुपालन भी बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि गुजरात में भले ही शराब पर प्रतिबंध है, लेकिन हर गली-नुक्कड़ पर यह आसानी से उपलब्ध है, ऐसे में पाबंदी लगाने का क्या फायदा। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध कभी-कभी भ्रष्टाचार का दरवाजा खोलता है। भाजपा सदस्य धवल लक्ष्मणभाई पटेल तथा कांग्रेस के किशोरी लाल एवं शशिकांत सेंथिल ने भी चर्चा में हिस्सा लिया।
- नयी दिल्ली. सरकार ने शुक्रवार को संसद को बताया कि भारत में सड़क दुर्घटना में मरने वालों की संख्या 2024 में 2.3 प्रतिशत बढ़कर 1.77 लाख से अधिक हो गई, जिसका अर्थ है कि हर दिन 485 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि फरवरी 2020 में सड़क सुरक्षा पर तीसरे वैश्विक मंत्री स्तरीय सम्मेलन में अपनाए गए ‘सड़क सुरक्षा पर स्टॉकहोम घोषणापत्र' में 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और चोटों को 50 प्रतिशत तक कम करने का एक नया वैश्विक लक्ष्य रखा गया है। गडकरी ने कहा, ‘‘राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से मिली जानकारी के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2024 के दौरान देश में सभी श्रेणी की सड़कों पर दुर्घटना में मरने वालों की कुल संख्या 1,77,177 थी, जिसमें ईडीएआर पोर्टल से लिया गया पश्चिम बंगाल का डेटा भी शामिल है।'' उन्होंने कहा कि कैलेंडर वर्ष 2023 के दौरान देश में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस विभाग ने कुल 4,80,583 सड़क हादसों की रिपोर्ट दी है, जिनमें 1,72,890 लोगों की जान गई और 4,62,825 लोग घायल हुए। मंत्री ने कहा कि ‘वर्ल्ड रोड स्टेटिस्टिक्स 2024' के अनुसार, चीन में प्रति लाख आबादी पर सड़क दुर्घटनाओं में मौत की दर 4.3 और अमेरिका में 12.76 है, जबकि भारत में यह आंकड़ा 11.89 है। गडकरी ने कहा कि सरकार ने सड़क सुरक्षा के मुद्दे को हल करने के लिए 4-‘ई' यानी एजुकेशन (शिक्षा), इंजीनियरिंग (सड़क और वाहन दोनों की), एनफोर्समेंट (प्रवर्तन) और इमरजेंसी केयर (आपातकालीन उपचार) पर आधारित एक बहुआयामी रणनीति बनाई है। उन्होंने कहा कि इसके अनुसार, देश में सड़क सुरक्षा के लिए कई पहल की गई हैं।
-
बिलासपुर/विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आज कृषि विज्ञान केंद्र बिलासपुर में ‘‘स्वस्थ मृदा स्वस्थ शहर’’ थीम पर आधारित जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कृषि विज्ञान केन्द्र प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, डॉ. शिल्पा कौशिक ने कार्यक्रम में मृदा स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डाला। रासायनिक खादों से मृदा पर होने वाले दुष्प्रभाव की जानकारी दी। साथ ही प्राकृतिक खेती के महत्व के बारे में बताया। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. अमित शुक्ला द्वारा मिट्टी की महत्ता के बारे में व उसके स्वास्थ्य को किस प्रकार सुधारा जाए इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी। श्री जयंत साहू ने मिट्टी की जांच कराने की सलाह दी तथा जांच के उपरांत मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार उर्वरकों के प्रयोग की सलाह दी।
डॉ. एकता ताम्रकार ने बताया कि स्वस्थ मृदा स्वस्थ शहर के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है क्योंकि कीटनाशकों व रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से हमारी मिट्टी लगातार दूषित हो रही है, अतः इसकी शुरूआत हर घर से होनी चाहिए, उसके बाद मोहल्ला एवं शहर स्तर पर होना चाहिए। श्रीमती हेमकांति बंजारे ने धान फसल में रोपा की तुलना में कतार बोनी करने की सलाह दी। डा. निवेदिता पाठक ने पोषण वाटिका में रासायनिक खाद की बजाय जैविक खाद के प्रयोग की सलाह दी। डा. स्वाति शर्मा ने रासायनिक कीटनाशकों की बजाए जैविक कीटनाशकों के प्रयोग के लिए प्रोत्साहित किया।
इस कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के अधिकारी एवं कर्मचारीगण डा. शिल्पा कौशिक, डॉ. अमित शुक्ला, श्री जयंत साहू, डॉ. निवेदिता पाठक, श्रीमती सुशीला ओहदार, डॉ. स्वाति शर्मा, श्री इंद्रराम पटेल एवं राजू कश्यप तथा कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर के छात्र-छात्राओं एवं बड़ी संख्या में कृषकों ने अपनी सहभागिता दी। -
हापुड़ (उप्र). मिजोरम के पूर्व राज्यपाल और वरिष्ठ अधिवक्ता स्वराज कौशल के अंतिम संस्कार के एक दिन बाद उनकी बेटी और भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने शुक्रवार सुबह बृजघाट पर परिवार के सदस्यों और शुभचिंतकों के साथ उनकी अस्थियां गंगा में विसर्जित कीं। बांसुरी स्वराज हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार अस्थि विसर्जन करने के लिए करीबी रिश्तेदारों के साथ बृजघाट पहुंचीं। नम आंखों से उन्होंने अपने पिता की अस्थियों के विसर्जन के लिए विभिन्न रस्में पूरी कीं जबकि पंडितों ने पारंपरिक पूजा-पाठ किया। स्थानीय जन प्रतिनिधि, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ घाट पर पहुंचे और कौशल को श्रद्धांजलि दी। एक प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि अस्थि विसर्जन पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ।
73 वर्षीय स्वराज कौशल, भाजपा की दिवंगत वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पति थे। उनकी बृहस्पतिवार को सीने में दर्द की शिकायत के बाद दिल का दौरा पड़ने से दिल्ली के अखिल भारतीय आयुविर्ज्ञान संस्थान में मौत हो गई थी। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के नवीनतम प्रयासों का शुक्रवार को पुरजोर समर्थन किया और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यह संदेश दिया कि भारत इस संघर्ष का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने के लिए सभी शांति प्रयासों में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा। यूक्रेन मुद्दा दोनों नेताओं के वार्षिक शिखर वार्ता में केंद्रीय रूप से उभरा है। इस शिखर वार्ता का उद्देश्य लगभग आठ दशक से जारी द्विपक्षीय साझेदारी को और मजबूत बनाना है, जो जटिल भू-राजनीतिक माहौल और तनावों के बावजूद स्थिर बनी रही है। मोदी ने शिखर वार्ता के दौरान अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि भारत यूक्रेन संघर्ष को लेकर तटस्थ नहीं है, बल्कि इसे करने के लिए शांति का पक्षधर है। मोदी ने कहा, “यूक्रेन संघर्ष के शुरू होने के बाद से हम चर्चा करते रहे हैं। एक करीबी मित्र के रूप में, आप हमें स्थिति के बारे में नियमित रूप से सूचित करते आए हैं। मुझे लगता है कि विश्वास एक बड़ी ताकत है।” उन्होंने कहा, “हम सभी को शांति का मार्ग तलाशना चाहिए। मैं नवीनतम प्रयासों से अवगत हूं और मुझे विश्वास है कि दुनिया शांति की ओर रुख करेगी।” उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा कहा है कि भारत तटस्थ नहीं है; भारत का एक पक्ष है और वह है शांति। हम सभी शांति प्रयासों का समर्थन करते हैं और इन कोशिशों के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।” रूसी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि मॉस्को संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में काम कर रहा है। पुतिन का बृहस्पतिवार शाम को लाल कालीन पर स्वागत किया गया, यह चार साल बाद उनकी पहली भारत यात्रा है। फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद भी यह उनका पहला भारत दौरा है।
- नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ट्रेनों की समयबद्धता सुधारने के लिए लगातार कदम उठा रहा है। चालू वित्त वर्ष (अप्रैल–अक्टूबर 2025-26) में 80 प्रतिशत मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें समय पर रही हैं, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 77.12 प्रतिशत था। लोकसभा में एक लिखित जवाब में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “वित्त वर्ष 2024-25 में 77.12 प्रतिशत मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें समय पर थीं। वहीं, चालू वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल–अक्टूबर अवधि में यह आंकड़ा बढ़कर 80% हो गया है।”केंद्रीय मंत्री के अनुसार, रेलवे ट्रेनों को समय पर चलाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने देरी के कई प्रमुख कारण भी बताए, जिनमें कोहरा, मार्ग में रुकावट, एसेट मेंटेनेंस, अलार्म चेन पुलिंग, आंदोलन, पटरियों पर जानवरों का आ जाना और अन्य आकस्मिक परिस्थितियां शामिल हैं।एक अन्य प्रश्न के जवाब में मंत्री ने बताया कि कैलेंडर वर्ष 2024 और 2025 में भारतीय रेलवे ने कुल 1,20,579 रिक्तियों के लिए भर्ती अधिसूचनाएं जारी की हैं। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, जनवरी-दिसंबर 2024 के दौरान सहायक लोको पायलट (एएलपी), तकनीशियन, उप-निरीक्षक, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) में कांस्टेबल, जूनियर इंजीनियर (जेई)/डिपो सामग्री अधीक्षक (डीएमएस)/रासायनिक एवं धातुकर्म सहायक (सीएमए), पैरामेडिकल कैटेगरी, गैर-तकनीकी लोकप्रिय श्रेणियां (स्नातक), मंत्रिस्तरीय और पृथक श्रेणियां तथा लेवल-1 पदों के लिए 92,116 रिक्तियों हेतु दस केंद्रीकृत रोजगार अधिसूचनाएं (सीईएन) जारी की गईं।इसके अलावा, वर्ष 2025 के वार्षिक कैलेंडर के अनुसार 28,463 रिक्तियों के लिए सात और केंद्रीकृत रोजगार अधिसूचनाएं जारी की गई हैं। मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2014-15 से 2024-25 के बीच रेलवे ने 5.08 लाख लोगों को विभिन्न पदों पर नियुक्त किया है, जबकि 2004-05 से 2013-14 के बीच यह संख्या 4.11 लाख थी। इससे स्पष्ट होता है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में रेलवे में अधिक रोजगार अवसर प्रदान किए गए हैं। (
- नई दिल्ली। भारत की यात्रा पर आए रूस के राष्ट्रपति की राजकीय यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच अनेक महत्वपूर्ण समझौते और घोषणाएँ की गईं। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी सूची में बताया गया कि प्रवासन, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, समुद्री सहयोग, ध्रुवीय क्षेत्रों में प्रशिक्षण, उर्वरक आपूर्ति, सीमा शुल्क, शिक्षा और मीडिया क्षेत्रों में कई MoU और समझौते हस्ताक्षरित हुए।प्रवासन और गतिशीलता के क्षेत्र में भारत और रूस ने दो महत्त्वपूर्ण समझौते किए, पहला अस्थायी श्रम गतिविधि को सुगम बनाने से जुड़ा है, जबकि दूसरा अनियमित प्रवासन का मुकाबला करने में सहयोग पर केंद्रित है। स्वास्थ्य तथा खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय और रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और विज्ञान में सहयोग पर एक समझौता हुआ। इसके साथ ही भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और रूस के उपभोक्ता अधिकार व कल्याण निगरानी प्राधिकरण के बीच खाद्य सुरक्षा पर सहयोग समझौता भी हस्ताक्षरित किया गया।समुद्री सहयोग और ध्रुवीय जल क्षेत्रों में विशेषज्ञों के प्रशिक्षण के लिए भारत के पोत, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय तथा रूस के परिवहन मंत्रालय के बीच एक समझौता किया गया। इसी क्षेत्र में एक अन्य MoU रूस के मेरीटाइम बोर्ड के साथ भी हस्ताक्षरित हुआ। वहीं उर्वरक क्षेत्र में यूरालकेम (UralChem) और भारत की RCF, NFL तथा Indian Potash Limited के बीच एक महत्त्वपूर्ण समझौता हुआ, जिसका उद्देश्य उर्वरकों की स्थिर और दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करना है।वहीं सीमा शुल्क और वाणिज्य के क्षेत्र में भी एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत के केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड और रूस के फेडरल कस्टम्स सर्विस के बीच प्री-अराइवल डेटा साझा करने पर एक प्रोटोकॉल हस्ताक्षरित किया गया। इसके अलावा भारतीय डाक विभाग और रसियन पोस्ट के बीच द्विपक्षीय समझौता भी किया गया।शैक्षणिक और वैज्ञानिक सहयोग के अंतर्गत DIAT पुणे और रूस के नेशनल टॉम्स्क स्टेट यूनिवर्सिटी के बीच एक MoU हस्ताक्षरित हुआ। मुंबई विश्वविद्यालय, मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी और Russian Direct Investment Fund (RDIF) के बीच भी सहयोग समझौता किया गया। इसके अलावा मीडिया क्षेत्र में भारत के प्रसार भारती और रूस की कई प्रमुख मीडिया संस्थाओं जैसे Gazprom-media Holding, National Media Group, BIG ASIA, TV-Novosti और TV BRICS के साथ कई MoU किए गए, जिनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच प्रसारण सहयोग को बढ़ाना है।घोषणाओं में बताया गया कि भारत-रूस आर्थिक सहयोग के रणनीतिक क्षेत्रों के विकास के लिए 2030 तक का एक व्यापक कार्यक्रम आगे बढ़ाया जाएगा। रूस ने International Big Cat Alliance (IBCA) में शामिल होने के लिए Framework Agreement को अपनाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा “India -Fabric of Time” प्रदर्शनी आयोजित करने पर भी एक समझौता किया गया, जिसे नई दिल्ली के नेशनल क्राफ्ट्स म्यूजियम और मॉस्को के Tsaritsyno म्यूजियम के बीच आयोजित किया जाएगा। यात्रा के दौरान रूस के नागरिकों के लिए 30 दिनों का मुफ्त e-Tourist Visa और Group Tourist Visa देने की घोषणा भी की गई, जो परस्परता के आधार पर प्रदान किए जाएंगे।
-
नयी दिल्ली. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और रूस का सहयोग किसी भी देश के खिलाफ नहीं है और इसका उद्देश्य सिर्फ दोनों देशों द्वारा अपने-अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है। पुतिन ने यह टिप्पणी भारत और रूस के प्रति अमेरिका के आक्रामक रुख की पृष्ठभूमि में की है।
रूस के साथ भारत के ऊर्जा संबंधों के संदर्भ में पुतिन ने कहा कि कुछ ‘‘तत्व'' रूस के साथ भारत के घनिष्ठ संबंधों के मद्देनजर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की बढ़ती भूमिका को नापसंद करते हैं और ये तत्व राजनीतिक कारणों से भारत के प्रभाव को सीमित करने के लिए ‘‘कृत्रिम बाधाएं'' खड़ी करने का प्रयास कर रहे हैं। रूसी राष्ट्रपति ने बृहस्पतिवार शाम को एक निजी समाचार चैनल को दिए गए साक्षात्कार में रूस के खिलाफ पश्चिमी प्रतिबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके देश का भारत के साथ ऊर्जा सहयोग काफी हद तक ‘‘अप्रभावित'' है। पुतिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ शिखर वार्ता करने के लिए दो दिवसीय यात्रा पर बृहस्पतिवार की शाम नयी दिल्ली पहुंचे। रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-अमेरिका संबंध पिछले दो दशकों में संभवतः सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं और अमेरिका ने भारतीय सामान पर भारी 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है, जिसमें रूस से कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत कर भी शामिल है। रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिका के आक्रामक रुख पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘कुछ बाहरी दबावों के बावजूद, न तो मैंने और न ही प्रधानमंत्री मोदी ने कभी भी, किसी के खिलाफ काम करने के लिए हमारी साझेदारी का इस्तेमाल नहीं किया।'' उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अपना एजेंडा है, अपने लक्ष्य हैं, जबकि हमारा ध्यान अपने ऊपर है - किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि हमारा लक्ष्य अपने-अपने हितों, भारत और रूस के हितों की रक्षा करना है।'' रूस से भारत द्वारा कच्चा तेल खरीदने पर अमेरिका की आपत्ति को खारिज करते हुए पुतिन ने कहा कि अगर अमेरिका को रूसी ईंधन खरीदने का अधिकार है, तो भारत को भी यह विशेषाधिकार क्यों नहीं मिलना चाहिए। पुतिन ने कहा, ‘‘जहां तक भारत द्वारा रूस से ऊर्जा संसाधनों की खरीद का सवाल है, मैं यह बताना चाहूंगा और एक बार पहले भी इसका उल्लेख कर चुका हूं कि अमेरिका स्वयं भी अपने परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए हमसे परमाणु ईंधन खरीदता है।'' रूसी राष्ट्रपति ने रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के मद्देनजर भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करने के बारे में पूछे गए प्रश्न के जवाब में कहा, ‘‘इस वर्ष के पहले नौ महीनों के दौरान कुल व्यापार कारोबार में कुछ गिरावट आई है। यह बस एक मामूली समायोजन है। कुल मिलाकर, हमारा व्यापार कारोबार लगभग पहले के स्तर पर ही बना हुआ है।'' पुतिन ने यह भी कहा कि भारत के साथ अब वैसा व्यवहार नहीं किया जा सकता, जैसा कई दशक पहले किया जाता था। उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी आसानी से दबाव में आने वाले व्यक्ति नहीं हैं। भारतीय लोग निश्चित रूप से अपने नेता पर गर्व कर सकते हैं। यह बिल्कुल स्पष्ट है।'' उन्होंने कहा, ‘‘बिना किसी टकरावपूर्ण स्थिति के उनका रुख दृढ़ और स्पष्ट है। हमारा लक्ष्य संघर्ष भड़काना नहीं है; बल्कि, हमारा लक्ष्य अपने कानूनी अधिकारों की रक्षा करना है। भारत भी यही चाहता है।'' यूक्रेन संघर्ष पर पुतिन ने कहा कि उनका मानना है कि अमेरिका इस समस्या का सक्रिय रूप से समाधान ढूंढ रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पूरा यकीन है और इसमें कोई संदेह नहीं कि वह (ट्रंप) पूरी ईमानदारी से शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं।'' पुतिन ने कहा कि ट्रंप वास्तव में शत्रुता को समाप्त कराना चाहते हैं और जान-माल की और हानि को रोकना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच टकराव को समाप्त करने के पीछे राजनीतिक हित या आर्थिक उद्देश्य भी हो सकते हैं।'' द्विपक्षीय व्यापार पर पुतिन ने कहा कि ‘‘हमारे 90 प्रतिशत से अधिक लेन-देन पहले से ही राष्ट्रीय मुद्राओं में होते हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि कई बिचौलियों की मौजूदगी के कारण कुछ जटिलताएं पैदा होती हैं, लेकिन उनके समाधान भी हैं।'' रूसी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना भी की।उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी के साथ हमारे सहयोगात्मक प्रयास महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे हमारे आपसी संबंधों से भी आगे हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘दोनों देशों के लिए इसकी प्रत्यक्ष प्रासंगिकता को देखते हुए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्थिरता सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे हमारे उद्देश्यों की पूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण कार्य निर्धारित किए हैं - सबसे पहले अपने लिए, फिर प्रशासन के लिए और अंत में राष्ट्र के लिए।'' -
मुंबई. मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सीमा शुल्क अधिकारियों ने अलग-अलग मामलों में 25 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का ‘हाइड्रोपोनिक गांजा', करीब 92 लाख रुपये मूल्य का सोना और विदेशी मुद्रा जब्त किया। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। यह कार्रवाई मुंबई सीमा शुल्क के हवाई अड्डा आयुक्तालय द्वारा 25 नवंबर से तीन दिसंबर के बीच की गई।
हाइड्रोपोनिक्स ऐसी तकनीक है जिसमें पौधों को मिट्टी की बजाय तरल पोषक घोल में उगाया जाता है। -
नयी दिल्ली. भारत और रूस के सीमा-शुल्क अधिकारियों ने दोनों देशों के बीच माल एवं वाहनों का आवाजाही के संबंध में आगमन-पूर्व सूचना के आदान-प्रदान पर सहयोग के लिए बृहस्पतिवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा-शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी और रूस की संघीय सीमा-शुल्क सेवा (एफसीएस) की उप प्रमुख तातियाना मर्कुशोवा ने 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के पहले इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। आगमन-पूर्व सूचना के आदान-प्रदान से सीमा शुल्क को जोखिमों का आकलन करने एवं अग्रिम रूप से माल की प्रक्रिया करने में सहायता मिलती है। इससे सीमा पर तीव्र और अधिक सुरक्षित निकासी सुनिश्चित होती है। सीबीआईसी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर लिखा, ‘‘इससे व्यापार सुविधा मजबूत होगी और सीमापार आवागमन में सुरक्षा, पारदर्शिता एवं समग्र दक्षता बढ़ेगी। '' इसके अलावा भारत और रूस ने कृषि क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की ताकि कृषि व्यापार को मजबूत किया जा सके एवं आधुनिक कृषि अवसरों का दोहन किया जा सके। भारत के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय राजधानी में रूसी समकक्ष ओक्साना लुट से मुलाकात की। चौहान ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘रूस की कृषि मंत्री ओक्साना लुट से मिलकर खुशी हुई। हमने कृषि में भारत-रूस सहयोग को मजबूत करने के तरीकों और आधुनिक खेती, नवाचार, अनुसंधान आदान-प्रदान एवं सतत विकास के अवसरों पर चर्चा की।'' भारत के मत्स्यपालन, पशुपालन एवं दुग्ध मंत्री राजीव रंजन सिंह ने भी रूस की कृषि मंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक की। आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘ बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने मत्स्य पालन, पशु एवं दुग्ध उत्पादों में आपसी व्यापार बढ़ाने, बाजार पहुंच संबंधी मुद्दों को सुलझाने एवं निर्यात में तेजी लाने पर चर्चा की।'' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच मुलाकात की पृष्ठभूमि में दोनों देशों के नेताओं के बीच ये बैठकें हुईं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निमंत्रण पर 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन बृहस्पतिवार को नयी दिल्ली पहुंचे। चार वर्षों में यह उनकी पहली भारत यात्रा है।
-
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को हटाने संबंधी विधेयकों पर विचार कर रही संसदीय समिति ने बृहस्पतिवार को उन राजनीतिक दलों को आमंत्रित करने का निर्णय लिया जिन्होंने समिति का बहिष्कार किया है। संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार (संशोधन) विधेयक पर विचार के लिए गठित संयुक्त समिति की पहली बैठक में संवैधानिक विशेषज्ञों और बार एसोसिएशन के सदस्यों से परामर्श करने का भी निर्णय लिया गया। भाजपा सदस्य अपराजिता सारंगी ने बैठक की अध्यक्षता की। कई विपक्षी दलों ने समिति से दूरी बनाए रखी है और उनका तर्क है कि ये विधेयक कानून के उस मूल सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं जिसके अनुसार किसी व्यक्ति को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक कि वह दोषी साबित न हो जाए। भाजपा और उसके गठबंधन सहयोगियों के प्रभुत्व वाली 31 सदस्यीय समिति में राकांपा -शरद पवार नेता सुप्रिया सुले, अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल, एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी और वाईएसआरसीपी सदस्य एस निरंजन रेड्डी ही विपक्षी सदस्य हैं। सारंगी ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘सभी सदस्य इस बात पर सहमत थे कि राजनीति का अपराधीकरण नहीं होना चाहिए। यह भी निर्णय लिया गया कि हमें राज्यों में जाकर समाज के सभी वर्गों - संवैधानिक विशेषज्ञों, बार एसोसिएशन के सदस्यों, विभिन्न स्तरों पर राज्य के अधिकारियों - को आमंत्रित करना चाहिए। हमने राज्यों में विपक्ष के नेताओं को भी आमंत्रित करने का निर्णय किया है।'' समिति के एक सदस्य ने बताया कि संसदीय समिति का बहिष्कार करने वाले राजनीतिक दलों को आमंत्रित करने का सुझाव दिया गया था, जिसे भारी समर्थन मिला। समिति की अगली बैठक 17 दिसंबर को होगी, जब गृह और विधि एवं न्याय मंत्रालयों के प्रतिनिधि उन्हें विचाराधीन विधेयकों के बारे में जानकारी देंगे।























.jpeg)



