- Home
- देश
- रांची. झारखंड में पारा गिरने के साथ ही प्रवासी पक्षी जलाशयों की ओर रुख कर रहे हैं और अपनी चहचहाहट एवं रंगीन दृश्यों से पक्षी प्रेमियों को आकर्षित कर रहे हैं। हर साल की तरह, इस बार भी हजारों प्रवासी पक्षी अपने मूल क्षेत्रों पर पड़ रहे अत्यधिक ठंड से बचने के लिए झारखंड को अपना शीतकालीन ठिकाना बना रहे हैं। एशियाई जलपक्षी गणना (एडब्ल्यूसी) के झारखंड समन्वयक सत्य प्रकाश ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, ‘‘ये पक्षी भोजन के लिए और मध्य एशिया, हिमालयी क्षेत्र, मंगोलिया और तिब्बती पठार में पड़ने वाली अत्यधिक ठंड से खुद को बचाने के लिए झारखंड में सर्दियों के मौसम के दौरान बांधों, झीलों, नदियों और अभयारण्यों जैसे विभिन्न जलाशयों में शरण लेते हैं।'' उन्होंने बताया कि उधवा झील पक्षी अभयारण्य (साहिबगंज), पतरातू बांध (रामगढ़), तोपचांची झील, तिलैया और मैथन बांध (धनबाद), कांके और रूक्का बांध (रांची), डिमना झील (जमशेदपुर), बास्का बांध (चतरा) और अन्य जल निकायों में प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हो गया है। उन्होंने बताया कि साहिबगंज स्थित उधवा अभयारण्य प्रवासी पक्षियों के लिए पसंदीदा स्थानों में से एक रहा है। उन्होंने बताया कि साहिबगंज जिले में स्थित इस 565 हेक्टेयर के अभयारण्य में गंगा नदी की दो प्राकृतिक अप्रवाही झीलें हैं, जिनमें पटौरा और बरहले शामिल हैं। साहिबगंज प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) प्रबल गर्ग ने बताया कि यह राज्य का एकमात्र रामसर स्थल है और लगभग 160 पक्षी प्रजातियों का घर है। गर्ग के अनुसार, सर्दियों में सबसे ज्यादा आने वाले पक्षियों में काला धारीदार हंस, उत्तर धारीदार बत्तख, मुर्गाबी, कलहंस, गैडवॉल, गुरगल बत्तख और लाल चोंच एवं लाल कलगी वाली बत्तख शामिल हैं जबकि लाल अंजन, घोंघिल, लिटिल ग्रेब और कौड़िल्ला अभयारण्य की साल भर की पक्षी विविधता में योगदान करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, हर साल लगभग 25,000 से 30,000 प्रवासी पक्षी राज्य के जलाशयों में आते हैं।वन विभाग ने प्रभागीय वन अधिकारियों को वन सुरक्षा समितियों को सक्रिय करने को कहा है, जो जलाशयों में गतिविधियों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें किसी भी संदिग्ध गतिविधि का पता चलने पर तुरंत वन अधिकारियों को सूचित करने के लिए भी कहा गया है।
-
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शुक्रवार को कर्नाटक के उडुपी में श्री कृष्ण मठ पहुंचकर लक्ष कंठ गीता पारायण प्रोग्राम में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने एक लाख़ श्रद्धालुओं के साथ सामूहिक रूप से श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ किया। उन्होंने कृष्ण गर्भगृह के सामने बने सुवर्ण तीर्थ मंडप का भी उद्घाटन किया और पवित्र कनकना किंदी के लिए कनक कवच (सोने का आवरण) समर्पित किया।
जगद्गुरु श्री श्री सुगुनेंद्र तीर्थ स्वामीजी ने विश्व गीता पर्याय- लक्ष्य कंठ गीता परायण में पीएम मोदी का अभिनंदन किया। इस अवसर पर उन्होंने एक लाख़ श्रद्धालुओं के साथ सामूहिक रूप से श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ किया।पीएम मोदी ने ‘लक्षकंठ गीता’ सामूहिक जाप कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि गीता के पवित्र श्लोकों का पाठ सदियों से होता आ रहा है, लेकिन जब लाखों लोग एक साथ इन श्लोकों का जाप करते हैं तो एक अनोखी ताकत पैदा होती है। यह मन को मजबूत करती है और अंदर की शांति को स्थिर करती है। यही वह एनर्जी है जो आध्यात्मिकता को बढ़ाती है और यही वह ऊर्जा है जो सामाजिक एकता को गहरा करती है।उन्होंने कहा कि उनके लिए उडुपी की धरती पर पहुंचना हमेशा ही एक अद्भुत अनुभव रहा है और इस बार यह अवसर कई कारणों से और भी खास बन गया है। उन्होंने गुजरात और उडुपी के बीच आध्यात्मिक संबंधों को याद करते हुए बताया कि यहां स्थापित भगवान श्री कृष्ण की विग्रह की पूजा पहले द्वारका में माता रुक्मिणी करती थीं। बाद में जगद्गुरु श्री माधवाचार्य ने इस प्रतिमा को उडुपी में स्थापित किया।पीएम मोदी ने कहा, “मेरा जन्म गुजरात में हुआ है। गुजरात और उडुपी के बीच गहरा और विशेष संबंध रहा है। इस प्रतिमा के दर्शन ने मुझे आत्मीय और आध्यात्मिक आनंद दिया है।” उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण ने युद्ध की भूमि पर गीता का संदेश दिया था और भगवत गीता हमें सिखाती है कि शांति और सत्य की स्थापना के लिए अत्याचारियों का अंत भी ज़रूरी है, हम लाल किले की प्राचीर से श्री कृष्ण की करुणा का संदेश देते हैं और उसी प्राचीर से हम मिशन सुदर्शन चक्र का भी उद्घोष करते हैं, देश ने ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई में हमारा संकल्प देखा है। हम शांति स्थापित करना भी जानते हैं और शांति की रक्षा करना भी जानते हैं।”उडुपी की राजनीतिक और सामाजिक परंपराओं को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र जनसंघ और भाजपा के सुशासन मॉडल का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। 1968 में उडुपी के लोगों ने जनसंघ के वीएस आचार्य को नगरपालिका परिषद में विजयी बनाकर एक नए गवर्नेंस मॉडल की नींव रखी थी।इस दौरान, पीएम मोदी ने अयोध्या यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ ही दिन पहले 25 नवंबर को राम जन्मभूमि मंदिर में धर्म ध्वज स्थापित किया गया और इस ऐतिहासिक क्षण को पूरे देश ने देखा। अयोध्या से उडुपी तक श्री राम के अनगिनत भक्तों ने इस पावन पल का साक्षात्कार किया। पूरा राष्ट्र जानता है कि राम मंदिर आंदोलन में उडुपी की क्या महत्वपूर्ण भूमिका रही है।प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष वे समुद्र के भीतर स्थित श्री द्वारका जी के दर्शन करने गए थे और वहां से भी उन्हें आशीर्वाद प्राप्त हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि तीन दिन पहले ही वे गीता की भूमि कुरुक्षेत्र में थे और अब भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से उडुपी पहुंचना उनके लिए अत्यंत संतोष का अवसर है।आपको बता दें, कार्यक्रम में लगभग 1 लाख लोगों ने एक साथ भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ किया, जिसे पीएम मोदी ने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शक्ति का अद्वितीय उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि आज पूरे विश्व ने भारत की हजारों वर्षों की दिव्यता का साक्षी भाव से दर्शन किया है।पीएम मोदी कर्नाटक के उडुपी में कई प्रोग्राम में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे। जब प्रधानमंत्री मोदी का रोड शो शुरू हुआ। हजारों लोग सड़कों पर खड़े नजर आए, जो काफिले के गुजरने पर खुशी मना रहे थे। जुलूस का रास्ता भगवा झंडों, झंडियों और बैरिकेड्स से ढका हुआ था। पीएम मोदी 14 साल बाद उडुपी पहुंचे हैं। इससे पहले वे उडुपी तब आए थे, जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे। -
डिंडोरी (मध्यप्रदेश). छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे मध्यप्रदेश के डिंडोरी जिले में 18 से 19 वर्ष के बाद चार वन परिक्षेत्रों में साल प्रजाति के तकरीबन 5,000 ऐसे पेड़ों पर कटाई का खतरा मंडरा रहा है, जो बोरर कीट के प्रकोप के कारण खोखले हो गए हैं। वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। साल के पेड़ मूल रूप से भारत, बांग्लादेश, नेपाल और तिब्बत के हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान (टीएफआरआई) की कार्यवाहक निदेशक डॉ. नीलू सिंह ने बताया, ''हमारी टीम ने हाल ही में डिंडोरी का दौरा किया था। रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। मैं इसे पढ़ूंगी और भेजने से पहले इसे अंतिम रूप दूंगी।" उन्होंने कहा, "यह निश्चित रूप से बोरर का प्रकोप है। हमारे पास इस विषय में शोध का अनुभव है और हम उस पर काम करते हैं। इसका लक्षण है - जैसे पेड़ों का मरना। कीटों का यह प्रकोप समय-समय पर होते रहते हैं। मप्र में इस तरह का हमला 18-19 साल पहले हुआ था। यह एक चक्र है, और इसकी गंभीरता को ध्यान में रखते हुए इन्हें काटना ही एकमात्र समाधान है।" वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि 'कूप कटाई' के तहत जिले के गाड़ासरई उप वन मंडल के पूर्व करंजिया, दक्षिण करंजिया, बजाई और दक्षिण समनापुर वन परिक्षेत्र में बेहद ही उपयोगी साल के पेड़ों को चिह्नित किया गया है और अब इनकी कटाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। ये वन परिक्षेत्र नर्मदा नदी के उद्गम स्थल और पवित्र नगरी अमरकंटक के आसपास हैं। उन्होंने बताया कि मृत, सूखे व गंभीर रूप से रोगग्रस्त और क्षतिग्रस्त पेड़ों को चिह्नित किए जाने और फिर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद कटाई की प्रक्रिया शुरू की जाती है। डिंडोरी के उपवनमंडलाधिकारी (एसडीओ) सुरेंद्र सिंह जाटव ने कहा, "यह कोई नयी बात नहीं है। लेकिन इस बार प्रकोप कुछ ज्यादा ही प्रतीत हो रहा है।" उन्होंने कहा, "इसी के तहत सर्वे करके करीब 5000 पेड़ों को चिह्नित किया गया है। अब इन्हें काटा जा रहा है।" यह पूछे जाने पर कि क्या इन वन परिक्षेत्रों में मौजूद साल के पेड़ों पर बोरर कीट का प्रकोप देखा जा रहा है, जिसके कारण वे या तो सूख गए हैं या सूखने की कगार पर हैं, जाटव ने कहा कि चिह्नित पेड़ भी इसी श्रेणी में हैं। उन्होंने कहा, "इसमें कोई शक नहीं कि साल प्रजाति के वृक्षों को बोरर कीड़े प्रभावित कर रहे हैं।"बोरर एक सुंडी कीट की प्रजाति है और इसका प्रजनन चक्र 15 दिन का होता है। मादा एक बार में 300 से 500 अंडे देती है। बोरर कीट मानसून खत्म होने के पश्चात ही वृक्षों में लगने लगते हैं और उम्र भर पेड़ में ही रहते हैं तथा इस दौरान एक हरे-भरे पेड़ को भी वे कुछ ही दिनों में चट कर जाते हैं। इस कीट के प्रकोप को पूरी तरह से नियंत्रित करने के लिए वृक्षों का कटाव किया जाता है।जाटव ने बताया की पिछले दिनों जबलपुर से टीएफआरआई का एक दल आया था और उसने बोरर कीड़े के प्रभाव का निरीक्षण किया था। उन्होंने कहा कि इस जांच की रिपोर्ट अब तक उन्हें नहीं मिली है।करंजिया वन क्षेत्र के चेकपोस्ट पर पदस्थ वनकर्मी जयप्रकश पाठक ने पीटीआई वीडियो से बातचीत में दावा किया कि बड़ी संख्या में साल के पेड़ों में कीटाणु लगे हैं, जिसकी वजह से पेड़ खोखले हो गए हैं। उन्होंने कहा, "इन पेड़ों से बुरादा निकल रहा है। वह सूख रहे हैं। मेरे क्षेत्र में सड़क किनारे 50 से अधिक पेड़ सूख गए हैं। अंदर तो यह संख्या और भी अधिक होगी।" इसी क्षेत्र के ग्रामीण दलसिंह मार्को ने कहा, "जंगल नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा है। इन्हीं जंगलों के कारण पवित्र नगरी अमरकंटक का सौंदर्य है। साल बोरर ने बड़ा नुक़सान पहुंचाया है। बड़ा संकट मंडरा रहा है, जंगल ही नष्ट हो जाएंगे तो बचेगा क्या। सरकार को तत्काल कार्रवाई करनी होगी।" साल के वृक्ष का वैज्ञानिक नाम शोरिया रोबस्टा है। यह डिप्टरोकार्पेसी परिवार की एक प्रजाति है। यह एक द्विबीजपत्री बहुवर्षीय एवं अर्धपर्णपाती वृक्ष है, जो हिमालय की तलहटी से लेकर 3000-4000 फुट की ऊंचाई (ऊंचाई 28 मीटर तथा गोलाई 25 फीट होती है) तक पाए जाते हैं। इस वृक्ष की उम्र लगभग 1000 वर्ष से अधिक होती है। -
नयी दिल्ली. खेती में नवाचर और उद्यमशीलता के लिए सात किसानों को पुरस्कार दिया गया है।
एक बयान के मुताबिक, यहां हुए पहले 'किसान ऑफ इंडिया सम्मान' में सात श्रेणी -- जैविक/ प्राकृतिक खेती, संरक्षित खेती, खाद्य प्रसंस्करएण, कृषि स्टार्ट-अप, डेयरी फार्मिंग, मत्स्यपालन और खेती में नई प्रौद्योगिकी के क्षेत्र -- में बेहतर काम करने वाले किसानों को सम्मानित किया गया। राजस्थान के जोधपुर के एक उद्यमी, अमित सोनी ने बताया कि कैसे संसद में उनके बाजरे से बने चॉकलेट ट्रफल केक को काटा गया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उसकी तारीफ की। सना खान को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 'मन की बात' प्रोग्राम में वर्मीकम्पोस्ट में उनके प्रयासों की तारीफ किए जाने के बाद ख्याति मिली। उन्हें युवाओं से खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा, “ देश का भविष्य खेती में है। हम लोगों को खेती के साथ बने रहने और आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।” अवॉर्ड पाने वालों की तारीफ करते हुए, कृषि शोध एवं शिक्षण विभाग (डीएआरई) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट ने एक वीडियो संदेश में कहा कि ये किसान अपनी नई खेती की तकनीकों से लाखों भारतीय किसानों के लिए एक शानदार मिसाल कायम कर रहे हैं। पुरस्कार पाने वालों में जैविक-प्राकृतिक खेती के लिए नरेंद्र सिंह मेहरा, संरक्षित खेती के लिए खेमा राम चौधरी, कृषि स्टार्ट-अप के लिए गुरप्रीत सिंह शेरगिल, रवींद्र मानिकराव मेटकर, डेयरी फार्मिंग के लिए सुरेंद्र अवाना, मत्स्यपालन के लिए शिव प्रसाद साहनी और कृषि में नई प्रौद्योगिकी के लिए अभिषेक धामा हैं। -
नयी दिल्ली. भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू शनिवार से शुरू हो रही अखिल भारतीय न्यायाधीश बैडमिंटन चैंपियनशिप के उद्घाटन समारोह की शोभा बढ़ाएंगे। विज्ञप्ति के अनुसार यह दो दिवसीय चैंपियनशिप 29 और 30 नवंबर को यहां त्यागराज खेल परिसर में आयोजित होगी। इसके अनुसार इसमें कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और विभिन्न उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश भी उपस्थित रहेंगे।
-
नयी दिल्ली. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) राष्ट्रीय राजमार्ग कार्यों में अनुबंध पर काम करने वाली कंपनियों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए एक रेटिंग प्रणाली विकसित कर रहा है। मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने बयान में कहा कि रेटिंग उद्देश्यों के लिए, अनुबंधों को तीन वर्गों में विभाजित किया जाएगा। पहली श्रेणी में 100 करोड़ रुपये से लेकर 300 करोड़ रुपये तक की परियोजनाएं शामिल होंगी। दूसरी श्रेणी में 300 करोड़ रुपये से 1,000 करोड़ रुपये तक की परियोजनाएं और तीसरी श्रेणी में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाएं होंगी। मंत्रालय ने कहा कि रेटिंग का कार्य वर्ष में एक बार किया जाएगा। पहली बार में 15 फरवरी तक पात्र परियोजनाओं को शामिल किया जाएगा और उन्हें 31 मार्च तक रेटिंग दी जाएगी। इसके बाद हर वर्ष 15 नवंबर तक पात्र परियोजनाओं को लिया जाएगा और उनकी रेटिंग 31 दिसंबर तक पूरी की जाएगी।
-
नयी दिल्ली. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बृहस्पतिवार को कहा कि कुमाऊं रेजिमेंट की चार्ली कंपनी की बहादुरी पर आधारित फिल्म ‘120 बहादुर' को दिल्ली में कर मुक्त घोषित कर दिया गया है। गुप्ता ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि ‘120 बहादुर' 13 कुमाऊं रेजिमेंट की चार्ली कंपनी के 120 सैनिकों के ‘असाधारण साहस, नेतृत्व और बलिदान' को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान रेजांग ला में बहादुरी से लड़ाई लड़ी थी। दिल्ली की मुख्यमंत्री ने पोस्ट में कहा, ‘‘बहादुर सैनिकों के प्रति विशेष सम्मान के तौर पर दिल्ली सरकार ने 28 नवंबर से दिल्ली में फिल्म को कर-मुक्त करने का फैसला किया है।'' उन्होंने कहा कि यह फिल्म मेजर शैतान सिंह भाटी के प्रेरणादायक नेतृत्व पर प्रकाश डालती है।
-
भुवनेश्वर. ओडिशा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने बृहस्पतिवार को कहा कि पूरा देश भारत की ‘‘आत्मा'' के संरक्षण के खातिर प्रेरणा और मार्गदर्शन के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर देखता है। पटनायक ने यह बात ओडिशा विधानसभा को संबोधित करते हुए कही, जब मुर्मू सदन को संबोधित करने वाली पहली राष्ट्रपति बनीं। इससे पहले, वह 2000 से 2004 तक नवीन पटनायक की मंत्रिपरिषद में मंत्री रह चुकी हैं। पटनायक ने कहा, “इस महान देश की राष्ट्रपति के रूप में आप भारत के संविधान की रक्षा, संरक्षण और सुरक्षा करती हैं। पूरा देश, राष्ट्रपति महोदया, आपकी ओर देखता है ताकि देश की असली आत्मा के संरक्षण में प्रेरणा और मार्गदर्शन मिल सके।” उन्होंने कहा, “हम आपका संबोधन सुनने के लिए उत्सुक हैं, जो हमारे देश के सामने मौजूद चुनौतियों के संदर्भ में विशेष महत्व रखता है। विविधता में एकता हमारे राष्ट्र की खूबसूरती है। विभिन्न भाषाओं, जीवनशैलियों, रीति-रिवाजों, संस्कृतियों और विचारों ने भारतीय राजनीति को मज़बूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।”
-
फरीदाबाद. संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई)-मेन की तैयारी कर रही 17 वर्षीय लड़की ने ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर 88 स्थित एडोर सोसाइटी की 10वीं मंजिल से कथित रूप से कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच से पता चला है कि लड़की कुछ समय से अवसाद से ग्रस्त थी। उन्होंने बताया कि आत्महत्या का कारण प्रथम दृष्टया प्रतियोगी परीक्षाओं का तनाव प्रतीत होता है। उन्होंने बताया कि पुलिस को कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस ने बताया कि लड़की अपने परिवार के साथ सोसाइटी की तीसरी मंजिल पर रहती थी। उसके पिता कोलकाता में एक निजी कंपनी में काम करते हैं। पुलिस ने बताया कि बुधवार शाम को जब उसकी मां और छोटा भाई घर पर नहीं थे, तो लड़की तीसरी मंजिल से लिफ्ट के जरिए दसवीं मंजिल पर गई और फिर कूदकर जान दे दी। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान पता चला कि लड़की ने पिछले साल 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा 95 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की थी।
-
नयी दिल्ली. छत्तीसगढ़ और कर्नाटक को बृहस्पतिवार को पहली बार आईएमडी के डॉप्लर मौसम रडार प्राप्त हुए जिससे मिशन मौसम के तहत भारत के गंभीर मौसम निगरानी नेटवर्क का विस्तार हुआ। रायपुर और मंगलुरु में स्थापित नए रडार मध्य और तटीय क्षेत्रों में भारी वर्षा, आंधी, बिजली कड़कने, ओलावृष्टि, तूफान, और मौसम की अन्य गंभीर प्रणालियों की उन्नत ट्रैकिंग प्रदान करेंगे। रायपुर में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में दोहरी ध्रुवीकृत सी-बैंड रडार छत्तीसगढ़ में आईएमडी का पहला रडार है। इसका कवरेज क्षेत्र 250 किलोमीटर तक है और यह छत्तीसगढ़, आंतरिक ओडिशा, पूर्वी मध्य प्रदेश, दक्षिण-पश्चिम झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के दक्षिणी भागों में मानसून संबंधी दबाव क्षेत्र, निम्न दबाव प्रणालियों और मौसम की तीव्र घटनाओं की निगरानी करेगा, जिससे लंबे समय से चली आ रही डेटा की कमी को पूरा किया जा सकेगा। मंगलुरु के शक्ति नगर स्थित आईएमडी के आरएस/आरडब्ल्यू कार्यालय में स्थापित रडार कर्नाटक में आईएमडी का पहला रडार है। इसकी भी कवरेज क्षेत्र 250 किलोमीटर तक है और यह कर्नाटक से सटे अरब सागर और कर्नाटक, केरल, गोवा, दक्षिण कोंकण, उत्तरी लक्षद्वीप और दक्षिण महाराष्ट्र के भूमि क्षेत्रों में गंभीर मौसम पर नज़र रखेगा। दोनों प्रणालियों को मेक इन इंडिया पहल के तहत स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।
केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) मुख्यालय में दो रडारों के साथ-साथ 771 किलोवाट क्षमता की सौर ऊर्जा प्रणाली और छात्रों तथा युवा शिक्षार्थियों के लिए डिजाइन किए गए एक नए मौसम विज्ञान संग्रहालय का उद्घाटन किया। आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने अवलोकन, मॉडलिंग, पूर्वानुमान और शिक्षण प्रणालियों को मजबूत करने के लिए विभाग की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। -
अहमदाबाद. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गांधीनगर में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की और ठेकेदारों को चेतावनी दी कि सड़क निर्माण में उच्च गुणवत्ता बनाए रखें, अन्यथा कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहें। बुधवार को हुई समीक्षा बैठक के दौरान सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने ठेकेदारों से राजमार्गों के निर्माण के साथ-साथ पुनर्निर्माण में लोगों की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को भी कहा। राज्य सरकार की एक विज्ञप्ति में बृहस्पतिवार को कहा गया कि गडकरी ने आश्वासन दिया कि केंद्र गुजरात में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण, पुनर्निर्माण तथा संबंधित परियोजनाओं के लिए 20,000 करोड़ रुपये आवंटित करेगा। गडकरी ने बुधवार को गुजरात के साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर शहर में राष्ट्रीय राजमार्ग -48 के निर्माणाधीन खंड का निरीक्षण किया और मोतीपुर फ्लाईओवर तथा राजमार्ग पर एक अंडरपास पर किए जा रहे काम की प्रगति की समीक्षा की। विज्ञप्ति में कहा गया है कि गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की उपस्थिति में आयोजित समीक्षा बैठक में गडकरी ने अधिकारियों और ठेकेदारों से कहा, "सड़क निर्माण में उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करें, अन्यथा कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहें।" विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों एवं ठेकेदारों को सभी सड़क निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के सख्त निर्देश दिए। सभी वरिष्ठ अधिकारियों एवं ठेकेदारों को सुगम यातायात पहुंच को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और इसे गंभीरता से लेने का आदेश दिया गया। बैठक में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि राज्य के राष्ट्रीय राजमार्गों पर कुल यातायात भार का 35 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आता है, इसलिए इनकी उचित मरम्मत होनी चाहिए तथा आवश्यकता पड़े तो एनएचएआई विस्तारीकरण कार्य भी करे।
-
नई दिल्ली। भारतीय शोधकर्ताओं की एक टीम ने बच्चों में बार-बार होने वाली न्यूरोलॉजिकल गिरावट (recurrent neurological decline) से जुड़ी USP18 जीन में दुर्लभ म्यूटेशन की पहचान की है। दुनिया में इस तरह के केवल 11 मामले अब तक दर्ज किए गए थे, और भारत में यह पहला मामला है।यह शोध इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ (बेंगलुरु) द्वारा रामजस कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) और रेडक्लिफ लैब्स के सहयोग से किया गया है। अध्ययन को जर्नल Clinical Dysmorphology में प्रकाशित किया गया है।
कौन-सा रोग है इससे जुड़ा?यह म्यूटेशन Pseudo-TORCH syndrome type-2 से संबंधित है—एक अत्यंत दुर्लभ आनुवंशिक रोग, जिसमें बच्चों में ऐसे न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखते हैं जो जन्मजात संक्रमण जैसे लगते हैं, जबकि कोई संक्रमण होता नहीं है।USP18 जीन आमतौर पर शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है।जब यह जीन ठीक से काम नहीं करता, तो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अत्यधिक सक्रिय हो जाती है और मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाती है।अध्ययन में मिला नया म्यूटेशनशोधकर्ताओं ने USP18 जीन में पहले कभी रिपोर्ट न हुए c.358C>T (p.Pro120Ser) वेरिएंट की पहचान की।यह खोज बीमारी के कारणों को समझने में महत्वपूर्ण प्रगति मानी जा रही है।डॉक्टरों ने क्या कहा?डॉ. व्यकुंतराजु के. गौड़ा (पेडियाट्रिक न्यूरोलॉजी, IGICH) ने कहा:“सालों तक हम सिर्फ लक्षणों के आधार पर इलाज करते रहे। अब इस दुर्लभ USP18 म्यूटेशन की पहचान ने निदान को बदल दिया है और बच्चे के भविष्य को भी।”उन्होंने बताया कि इस खोज से:गलत या अनावश्यक इलाज से बचाव,सही थेरेपी का चयन,और परिवारों को सटीक जेनेटिक काउंसलिंग देने में मदद मिलेगी।कैसे पता चला यह म्यूटेशन?शोध एक 11 वर्षीय बच्ची के मामले से शुरू हुआ, जिसमें शैशवावस्था से ही ये लक्षण थे:बार-बार बुखार के साथ बेहोशी के दौरेदौरे (seizures)विकास में देरीसिर का छोटा आकारसमय के साथ दिमाग में कैल्शियम जमा होनाउसके लिए एक्सोम सीक्वेंसिंग और माइटोकॉन्ड्रियल जीनोम सीक्वेंसिंग की गई, जिससे यह नया म्यूटेशन सामने आया।शोधकर्ताओं के अनुसारडॉ. हिमानी पांडे, सह-अनुसंधानकर्ता, ने बताया:“यह USP18 म्यूटेशन के कारण बार-बार होने वाली febrile encephalopathy का दुनिया में पहला मामला है।”यह शोध यह भी दर्शाता है कि जिन बच्चों में कारण स्पष्ट न होने पर न्यूरोलॉजिकल समस्याएँ दिखती हैं, उनमें जल्दी जेनेटिक टेस्टिंग बेहद महत्वपूर्ण है। - करमसद (गुजरात). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि यह दिन देशवासियों को याद दिलाता है कि स्वतंत्रता केवल अधिकारों के बारे में नहीं है, बल्कि कर्तव्यों और एकता के आह्वान के लिए भी है। प्रधानमंत्री का संदेश गुजरात के आणंद जिले के करमसद कस्बे में ‘एकता मार्च' के शुरू होने के समारोह के दौरान पढ़ा गया। करमसद भारत के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल का पैतृक स्थान है। गुजरात सरकार सरदार पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में नर्मदा जिले के करमसद से ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' तक ‘पदयात्रा' का आयोजन कर रही है। इस अवसर पर जिला कलेक्टर प्रवीण चौधरी ने प्रधानमंत्री का संदेश पढ़कर सुनाया।प्रधानमंत्री ने पदयात्रा के आयोजन के लिए राज्य सरकार को बधाई दी तथा कहा कि पदयात्राओं ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मोदी ने कहा, ‘‘पदचिह्नों की ध्वनि ने समाज को एकजुट किया, लोगों का आत्मविश्वास बढ़ाया और लाखों दिलों में एकता की भावना पैदा की। सरदार पटेल जानते थे कि जब लोग एक साथ चलते हैं, तो मतभेद पीछे छूट जाते हैं और मार्ग सर्वोच्च हो जाता है।'' उन्होंने कहा कि यह एक सुखद संयोग है कि ‘एकता मार्च' संविधान दिवस पर आयोजित किया जा रहा है।प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘यह दिन हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता केवल अधिकारों से ही नहीं, बल्कि कर्तव्यों से भी जुड़ी है और एकता का आह्वान भी है।'' उन्होंने कहा, ‘‘आज हम हर उस पहल में राष्ट्रीय एकता का जीवंत उदाहरण देखते हैं, जिसमें नागरिक स्वेच्छा से भाग लेते हैं, चाहे वह डिजिटल इंडिया हो, फिट इंडिया हो, स्वच्छ भारत अभियान हो या ‘एक पेड़ मां के नाम' जैसी जनभागीदारी वाली पहल हो।'' मोदी ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प हमारे युवाओं की ऊर्जा, देशवासियों की एकजुटता और नवाचार से पूरा होगा। मोदी ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि ‘एकता मार्च' राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा, ‘‘एकता मार्च लोगों को देश और समाज की बेहतरी के लिए भारत की प्रगति के साथ अपने लक्ष्यों को जोड़ने के लिए प्रेरित करेगा। इस अवसर पर मैं सरदार वल्लभभाई पटेल को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हू।'' गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में मार्च को हरी झंडी दिखाई। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि ‘पदयात्रा' पांच दिसंबर को एकता नगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर समाप्त होगी। इसमें प्रतिदिन लगभग 15,000 लोग शामिल होंगे।
- नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि संविधान देश की पहचान का आधार है और साथ ही औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागने तथा राष्ट्रवादी सोच को अपनाने के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज भी है। उन्होंने ‘संविधान सदन' (पुराना संसद भवन) के केंद्रीय कक्ष में आयोजित संविधान दिवस समारोह को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि भारत दुनिया के लिए विकास का एक नया मॉडल पेश कर रहा है और लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा संविधान राष्ट्रीय गौरव का दस्तावेज है। यह राष्ट्र की पहचान का दस्तावेज है। यह औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागने और राष्ट्रवादी दृष्टिकोण अपनाने और देश को आगे ले जाने का दस्तावेज है।'' राष्ट्रपति का कहना था कि इस दृष्टिकोण के साथ देश ने नए आपराधिक कानूनों, भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को अपनाया है। तीन नए कानूनों ने क्रमशः औपनिवेशिक युग की भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और 1872 के भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ले ली। नए कानून एक जुलाई, 2024 से लागू हुए। मुर्मू ने कहा कि देश के संविधान निर्माता चाहते थे कि व्यक्तिगत, लोकतांत्रिक अधिकार हमेशा सुरक्षित रहें। जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रावधान को समाप्त करके देश को एक राजनीतिक बाधा से मुक्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले एक दशक में हमारी संसद ने लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।'' राष्ट्रपति ने तीन तलाक पर प्रतिबंध, जीएसटी व्यवस्था की शुरूआत को क्रमशः महिलाओं और वित्तीय सशक्तीकरण के लिए दो सबसे महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा देश दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है।'' मुर्मू ने कहा कि 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर लाना देश की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है तथा महिलाएं, युवा, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, किसान, मध्यम वर्ग, नया मध्यम वर्ग हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं।' राष्ट्रपति ने नौ भाषाओं -मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, उड़िया और असमिया में संविधान के डिजिटल संस्करण का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में राष्ट्रपति के नेतृत्व में संविधान की प्रस्तावना का पाठ भी किया गया। समारोह के दौरान मुर्मू के अलावा उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और किरेन रीजीजू तथा राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश मंच पर आसीन थे। इस कार्यक्रम में कई केंद्रीय मंत्री और संसद के दोनों सदनों के सदस्य शामिल हुए। मूल संविधान में सुलेख पर एक स्मारक पुस्तिका भी जारी की गई।
- नयी दिल्ली. गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि अहमदाबाद को राष्ट्रमंडल खेल 2030 की मेजबानी मिलना भारत को खेलों के वैश्विक ‘हॉटस्पॉट' बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदृष्टि का प्रमाण है । अहमदाबाद को राष्ट्रमंडल खेल 2030 का मेजबान चुने जाने की घोषणा के बाद शाह ने एक्स पर भारतवासियों को बधाई दी । शाह ने लिखा ,‘‘ यह हमारे भारत को वैश्विक खेलों का हॉटस्पॉट बनाने की प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी की दूरदृष्टि का प्रमाण है । मोदी जी ने एक दशक में विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार करके कुशल प्रशासन और सतत टीमवर्क से देश के सामर्थ्य को बढाया है ।
- हैदराबाद. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की निवेश क्षमता पर बल देते हुए बुधवार को कहा कि सुधारों को तेजी से लागू कर रहा भारत अब बड़े फैसले लेता है और निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद साझेदार बन चुका है। प्रधानमंत्री मोदी ने हैदराबाद में फ्रांसीसी विमानन कंपनी सैफरान के विमान इंजन एमआरओ संयंत्र का ऑनलाइन माध्यम से उद्घाटन करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि यह संयंत्र युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि भारत ने व्यवसाय से जुड़े सैकड़ों प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया है और राष्ट्रीय एकल-खिड़की व्यवस्था से विभिन्न अनुमोदन को एक मंच पर लाया गया है। उन्होंने कहा कि जीएसटी सुधार, चेहरा-रहित कर आकलन, नए श्रम कानून और दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के आने से शासन पहले से अधिक सरल और पारदर्शी बना है। उन्होंने कहा, ‘‘इन कोशिशों से भारत को अब एक भरोसेमंद साझेदार, एक बड़े बाजार और उभरते विनिर्माण केंद्र के तौर पर देखा जा रहा है। आज भारत में तेजी से वृद्धि हो रही है, सरकार स्थिर है, सुधार पर ध्यान देने वाली सोच है, युवा प्रतिभाओं की भरमार है और एक बड़ा घरेलू बाजार है। सबसे जरूरी बात, भारत में निवेश करने वालों को देश सिर्फ निवेशक नहीं, बल्कि विकसित भारत के सफर में सह-निर्माता और हितधारक मानता है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का नागर विमानन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है और देश का घरेलू बाजार दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा है। भारतीय एयरलाइन कंपनियों ने 1,500 से अधिक नए विमानों का ऑर्डर दिया हुआ है। उन्होंने बताया कि विमानों के रखरखाव, मरम्मत एवं देखभाल यानी एमआरओ का करीब 85 प्रतिशत काम विदेशों में होने से लागत बढ़ती है और विमानों को लंबे समय तक खड़ा रहना पड़ता है। इस चुनौती को देखते हुए सरकार भारत को वैश्विक एमआरओ केंद्र के रूप में विकसित कर रही है। मोदी ने कहा कि सैफरान का इंजन एमआरओ केंद्र देश में पहली बार किसी वैश्विक विमान कंपनी द्वारा विस्तृत सर्विसिंग के लिए स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनी की वैश्विक प्रशिक्षण और ज्ञान हस्तांतरण साझेदारी से आने वाले वर्षों में एमआरओ पारिस्थितिकी को नई दिशा मिलेगी और दक्षिण भारत के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत केवल विमानों की एमआरओ गतिविधियों तक ही सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि पोत परिवहन के लिए भी एमआरओ परिवेश तैयार करने और देश के ही भीतर डिजाइन गतिविधियों को भी बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रहा है। मोदी ने सैफरान से भारत में उपलब्ध प्रतिभा और अवसरों का इस्तेमाल प्रोपल्शन डिजाइन और विनिर्माण के लिए करने का आह्वान करते हुए कहा कि देश सिर्फ बड़े सपने नहीं देख रहा है, बल्कि बड़े फैसले ले रहा है और उससे भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर रहा है। सैफरान की इकाई सैफरान एयरक्राफ्ट इंजन सर्विसेज इंडिया (एसएईएसआई) ने हैदराबाद में अपने एमआरओ संयंत्र के विकास पर 1,300 करोड़ रुपये का शुरुआती निवेश किया है। यहां एयरबस ए320 निओ और बोइंग 737 मैक्स विमानों में इस्तेमाल होने वाले लीप इंजन की सर्विसिंग होगी। इस संयंत्र को प्रति वर्ष 300 इंजन की सर्विसिंग क्षमता के साथ डिजाइन किया गया है और 2035 तक 1,000 से अधिक कुशल भारतीय तकनीशियन और इंजीनियर यहां कार्यरत होंगे। इस संयंत्र में 2026 में परिचालन शुरू होने वाला है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक बयान में कहा कि भारत में एमआरओ क्षमताओं का विकास विदेशी मुद्रा की निकासी को कम करेगा, उच्च मूल्य वाले रोजगार के अवसर सृजित करेगा, आपूर्ति शृंखला की मजबूती बढ़ाएगा और भारत को वैश्विक विमानन केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
- देहरादून. प्राकृतिक आपदाओं के कारण बार-बार बाधित रहने के बावजूद इस साल ऊपरी गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र में स्थित चारधामों की यात्रा के लिए 51 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। शीतकाल के लिए बदरीनाथ धाम के कपाट मंगलवार को बंद हो गए और इसके साथ ही इस वर्ष की चारधाम यात्रा संपन्न हो गयी। कपाट बंद होने के मौके पर बदरीनाथ में ठंड के बावजूद 7,253 तीर्थयात्री मौजूद थे। इस साल कुल मिलाकर 16.60 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बदरीनाथ की यात्रा की। तीन अन्य धामों गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ के कपाट पिछले माह बंद हो गए थे।इस वर्ष मानसून में अत्यधिक बारिश, बादल फटने, बाढ़ आने तथा भूस्खलन जैसी आपदाओं के कारण यात्रा में बार-बार व्यवधान पड़ा लेकिन इसके बावजूद कुल 51,06,346 श्रद्धालु धामों के दर्शन के लिए पहुंचे। इसमें हेमकुंड साहिब में मत्था टेकने जाने वाले 2.74 लाख तीर्थयात्री भी शामिल हैं। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष के मुकाबले यह संख्या 3,02,131 अधिक रही। उस साल 48,04,215 तीर्थयात्री चारधाम यात्रा पर आए थे। इस वर्ष 30 अप्रैल को उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा की शुरूआत हुई थी। इसके बाद दो मई को रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम और चार मई को चमोली जिले में बदरीनाथ धाम के कपाट खुले थे। केदारनाथ में इस साल सर्वाधिक 17.68 लाख श्रद्धालु पहुंचे जबकि गंगोत्री में 7.58 लाख और यमुनोत्री में 6.44 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। अधिकारियों ने कहा कि राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार द्वारा चारधाम यात्रा को सुगम, सुविधाजनक और सुरक्षित बनाए जाने तथा मानसून सीजन में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के कारण ही चारधाम आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गयी है।कपाट बंद होने के बाद अब अगले छह माह तक धामों में स्थापित देवताओं के दर्शन उनके शीतकालीन प्रवास स्थलों में होंगे। बदरीविशाल की पूजा अब ज्योतिर्मठ के नृसिंह मंदिर में होगी जबकि बाबा केदार की पूजा नाथ की शीतकालीन पूजा ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर, गंगोत्री मंदिर की अधिष्ठात्री देवी मां गंगा की पूजा मुखबा और यमुनोत्री की पूजा खरसाली में होगी । चारधामों के कपाट बंद होने के बाद अब राज्य में शीतकालीन यात्रा की तैयारियां तेज कर दी गयी हैं। मुख्यमंत्री के अनुरोध पर शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने के लिए पिछले साल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तरकाशी के मुखबा पहुंचकर मां गंगा की पूजा की थी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को शीतकालीन यात्रा व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं तथा कहा है कि चारों धामों के शीतकालीन प्रवास स्थलों और आसपास के सभी प्रमुख पर्यटक स्थलों में ठहरने, आवागमन और सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत किया जाए । उन्होंने शीतकालीन यात्रा के व्यापक प्रचार-प्रसार करने के भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं ताकि वर्ष भर तीर्थाटन की गतिविधियां चलती रहें। मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा मार्ग और पड़ावों में सभी जरूरी सुविधाएं, बेहतर सड़कें, यातायात व्यवस्था और संचार सुविधा पर विशेष फोकस किया गया और सुविधाएं बढ़ाई गयी हैं। उन्होंने कहा, ' प्रधानमंत्री जी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य होने के बाद यात्री सुविधाएं बढ़ी हैं। पैदल यात्रा मार्ग को बेहतर बनाया गया है। बदरीनाथ धाम का भी मास्टर प्लान के अनुसार विकास किया जा रहा है। अब शीतकालीन यात्रा की तैयारियों में भी यात्री सुविधाओं और सुरक्षा पर विशेष फोकस किया जा रहा है।'
- मुंबई/नयी दिल्ली. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने 2008 में मुंबई आतंकवादी हमले के दौरान आतंकवादियों से लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों को बुधवार को पुष्पांजलि अर्पित की। हमले की 17वीं बरसी पर अपने संदेश में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सभी नागरिकों से आतंकवाद से लड़ने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करने को कहा, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आतंकवाद को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने की नरेन्द्र मोदी सरकार की नीति को रेखांकित किया। राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और मंत्री आशीष शेलार ने भी दक्षिण मुंबई में पुलिस आयुक्त कार्यालय परिसर में शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस मौके पर महाराष्ट्र की पुलिस महानिदेशक रश्मि शुक्ला, मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती और अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। आतंकवादी हमले में जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों के परिजनों ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी।शाह ने ‘एक्स' पर अपने संदेश में कहा कि आतंकवाद किसी एक देश के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानव जाति के लिए बहुत बड़ा अभिशाप है। उन्होंने कहा, ‘‘मुंबई आतंकी हमले का डटकर सामना करते हुए अपना बलिदान देने वाले वीर जवानों को नमन करता हूं और इस कायराना हमले में अपनी जान गंवाने वाले सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। मोदी सरकार की आतंक के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस' (बिल्कुल भी बर्दाश्त न करने) की नीति स्पष्ट है, जिसे पूरा विश्व सराह रहा है और भारत के आतंकवाद विरोधी अभियानों को व्यापक समर्थन दे रहा है।'' राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी ‘एक्स' पर शहीदों को याद करते हुए कहा कि 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों की बरसी पर, मैं उन वीर सैनिकों को नमन करती हूं जिन्होंने हमारे देश के लोगों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्र उनके सर्वोच्च बलिदान को कृतज्ञतापूर्वक याद करता है। मुर्मू ने कहा, ‘‘आइए! हम हर तरह के आतंकवाद का मुकाबला करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करें। आइए! हम एक मजबूत और समृद्ध भारत के निर्माण के संकल्प के साथ प्रगति के पथ पर एक साथ आगे बढ़ें।'' 26 नवंबर 2008 को पाकिस्तान से आये 10 आतंकवादियों द्वारा मुंबई के कई हिस्सों में एक साथ किये गये हमलों में 166 लोगों की जान चली गयी थी और 300 से अधिक घायल हो गये थे। पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के 10 सशस्त्र आतंकवादी समुद्र के रास्ते शहर में घुसे थे और उन्होंने ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट होटल, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) और नरीमन हाउस सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों पर एक साथ हमलों को अंजाम दिया था। इन हमलों की वैश्विक स्तर पर निंदा हुई और इसके बाद भारत के आतंकवाद-रोधी उपायों में महत्वपूर्ण बदलाव हुए। कई लोगों ने सीएसएमटी, कामा व आल्बलेस रुग्णालय तथा अन्य स्थानों पर भी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्हें पाकिस्तानी आतंकवादियों ने निशाना बनाया था। बुधवार को कई लोगों ने सहायक उपनिरीक्षक तुकाराम ओम्बले की प्रतिमा ‘‘प्रेरणा स्थल'' पर भी पुष्पांजलि अर्पित की, जो गिरगांव चौपाटी पर आतंकवादी अजमल कसाब को पकड़ते समय लाठी लेकर आतंकवादियों से भिड़ गये थे और शहीद हो गए थे। शाम में, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) ने गेटवे ऑफ इंडिया पर ‘‘नेवरएवर'' स्मारक और प्रतिज्ञा सभा का आयोजन किया है, जिसमें मुंबई के नागरिकों के साथ-साथ पीड़ितों के परिवार के सदस्य भी शामिल होंगे। ‘एक्स' पर पोस्ट किये गए एक बयान में, अमेरिकी दूतावास ने कहा कि वह पीड़ितों की स्मृति का सम्मान करता है और हमलों के पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ एकजुटता से खड़ा है। बयान के अनुसार, ‘‘अमेरिका इन हमलों के लिए ज़िम्मेदार लोगों को लंबे समय से अदालत के कठघरे में लाने के भारत के प्रयासों का समर्थन करता रहा है। दूतावास ने यह भी कहा कि अमेरिका ने इस साल तहव्वुर हुसैन राणा को इस भयावह हमले की योजना बनाने में उसकी भूमिका के लिए भारत प्रत्यर्पित किया था, जिसमें छह अमेरिकी नागरिकों सहित अन्य की जान चली गई थी। अमेरिकी दूतावास ने कहा, ‘‘राणा का प्रत्यर्पण इन जघन्य हमलों में मारे गए पीड़ितों और उनके परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 26/11 के पीड़ितों को याद करते हुए, हम अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार के साथ मिलकर, आतंकवादी कृत्यों के खिलाफ लड़ाई जारी रखने के अपने दृढ़ संकल्प की पुष्टि करते हैं।
-
मथुरा . केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मंगलवार को बरसाना के माताजी गौशाला परिसर पहुंचे और गौसेवा करके आशीर्वाद लिया। हेलीकॉप्टर से पहुंचे गडकरी ने बरसाना के माता जी गौशाला परिसर पहुंचने के बाद गौ सेवा की और उसके बाद वह रोप-वे से राधारानी के मंदिर पहुंचे और राधारानी की चौखट पर सिर रखकर श्रीजी से आशीर्वाद मांगा। इस मौके पर वहां मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं, स्थानीय संत समाज, मंदिर पदाधिकारियों और भक्तों ने उन्हें पटका ओढ़ाकर पारंपरिक रीति से स्वागत किया। दर्शन करने के बाद गडकरी बरसाना में चल रही गुजरात के प्रसिद्ध भागवताचार्य रमेश बाबा की कथा का आनंद लेने पहुंचे। यहां उन्होंने पद्मश्री रमेश बाबा से संक्षिप्त आध्यात्मिक संवाद भी किया। संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा, "बरसाना केवल भक्ति का धाम नहीं, बल्कि प्रेरणा का केंद्र है। यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा राष्ट्र निर्माण में भी दिशा देने वाली है।"
-
कुरुक्षेत्र. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कुरुक्षेत्र में भगवान कृष्ण के पवित्र शंख को समर्पित नए बने ‘पांचजन्य' स्मारक का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ‘महाभारत अनुभव केंद्र' भी गए, जो यहां का एक गहन अनुभूति केंद्र है, जहां महाभारत के खास प्रसंग दिखाए गए हैं, जो इसके हमेशा रहने वाले सांस्कृतिक व आध्यात्मिक महत्व को दर्शाते हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि ‘अनुभव केंद्र' को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा संचालित ‘स्वदेश दर्शन' योजना के तहत विकसित किया गया है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि केंद्र महाभारत की विषय वस्तु पर आधारित एक अनोखा अनुभव प्रदान करता है। बयान के मुताबिक, लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस परिसर में आधुनिक तकनीकों के माध्यम से महाभारत की कथा, दर्शन, इतिहास और उसके विभिन्न पहलुओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस परिसर के भीतर भगवान कृष्ण के पवित्र शंख के सम्मान में एक स्मारक बनाया गया है, जो धर्म और सत्य की विजय का प्रतीक है। यह विशाल शंख लगभग 5 से 5.5 टन वजनी है और इसकी ऊचाई चार से पांच मीटर तक है। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत द्वारा अयोध्या में राम मंदिर के ऊपर भगवा ध्वज फहराना सनातन संस्कृति और भगवान राम के भक्तों के लिए बहुत गर्व की बात है। शाह ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘सियावर रामचंद्र की जय। संपूर्ण मानवता के लिए धर्म और कर्म का आदर्श स्थापित करने वाले भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर बने भव्य और दिव्य मंदिर के शिखर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सरसंघचालक मोहन भागवत जी के करकमलों से, संत समाज की पवित्र उपस्थिति में विधिवत धर्मध्वज स्थापित हुआ।'' उन्होंने कहा कि माता सीता और प्रभु श्रीराम के विवाह के पवित्र दिन पर यह ध्वजारोहण संपन्न हुआ है।
शाह ने कहा, ‘‘यह सनातन संस्कृति और रामभक्तों के लिए बहुत ही गौरव का दिन है। यह धर्मध्वज प्रभु श्रीराम के जीवन और आदर्शों को जानने तथा उनके पदचिह्नों पर चलने के लिए प्रेरित करेगा।'' प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर के ऊपर भगवा ध्वज फहराया, जिससे मंदिर निर्माण का आधिकारिक समापन हो गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे। मोदी ने राम मंदिर ध्वजारोहण को ‘युगांतकारी' की संज्ञा देते हुए कहा कि “सदियों के जख्म और दर्द भर रहे हैं”, क्योंकि 500 साल पुराना संकल्प आखिरकार राम मंदिर के औपचारिक निर्माण के साथ पूरा हो रहा है। -
अयोध्या (उप्र) . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि राम मंदिर के लिए बलिदान देने वाले लोगों की आत्मा को आज मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के बाद शांति मिली होगी। उन्होंने कहा कि आज ध्वजारोहण के साथ मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूर्ण हो गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ मोहन भागवत ने मंगलवार को श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया। इस मौके पर खासतौर पर मौजूद आरएसएस प्रमुख ने कहा, ''आज हम सबके लिए एक सार्थकता का दिवस है।'' उन्होंने कहा, ''इतने लोगों ने सपना देखा, प्रयास किया, प्राण अर्पण किये, आज उनकी आत्मा तृप्त हुई होगी। आज वास्तव में अशोक जी (राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख दिवंगत अशोक सिंघल) की आत्मा को वहां शांति मिली होगी।'' मोहन भागवत ने मंदिर आंदोलन से जुड़े संतों को स्मरण करते हुए कहा, ''महंत रामचंद्र दास महाराज, डालमिया जी (विहिप प्रमुख दिवंगत विष्णु हरि डालमिया) कितने संतों, कितने विचारकों ने अपना पसीना बहाया, अपना प्राण अर्पित किया।'' उन्होंने कहा, ‘‘और जो उनके पीछे थे वे अपनी इच्छा व्यक्त करते रहे कि मंदिर बनेगा और आज मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूर्ण हो गई। ध्वजारोहण हो गया।'' आरएसएस प्रमुख ने इसे गौरवमयी क्षण बताते हुए इस अवसर पर शामिल होने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, ‘‘रामराज्य का ध्वज जो कभी अयोध्या में फहराता था और संपूर्ण विश्व में सुख-शांति प्रदान करता था, वह ध्वज शिखर पर विराजमान होते हमने अपनी आंखों से देखा है।'' भागवत ने कहा, ''ध्वज प्रतीक होता है। ध्वज फहराने में समय लगा, मंदिर बनने में भी समय लगाा। उस मंदिर के रूप में हमने कुछ तत्वों को ऊपर पहुंचाया है। सारा विश्व जिससे ठीक चलेगा, अपने व्यक्तिगत जीवन, पारिवारिक जीवन से लेकर, सृष्टि जीवन ठीक से चलेगा, उस धर्म का प्रतीक भगवा रंग, वही इस धर्म ध्वज का रंग है और इस पर रघुकुल का प्रतीक कोविदार वृक्ष है। यह वृक्ष देवगुणों का समुच्चय है और यह रघुकुल की सत्ता का प्रतीक है।'' उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर पर फहराया गया ध्वज उन सिद्धांतों का प्रतीक है जो व्यक्ति, परिवार और दुनिया भर में सद्भाव की प्रेरणा देते हैं। समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उपस्थित थे। भागवत ने कहा, ‘‘कई लोगों ने इस दिन का सपना देखा था और कई लोगों ने इसके लिए अपनी जान दे दी। आज उनकी आत्मा को शांति मिली होगी।'' उन्होंने कहा, ‘‘जो लोग हर दिन पृष्ठभूमि में काम करते थे, उन्होंने भी राम मंदिर का सपना देखा था, अब जब रस्में पूरी हो गई हैं तो 'राम राज्य' का झंडा फहराया गया है।'' उन्होंने कहा, “इतना ऊंचा ध्वज फहराने में बहुत समय लगा है। आप सब जानते हैं कि मंदिर बनने में कितना समय लगा — अगर 500 साल को छोड़ भी दें, तो 30 साल लगे।” संघ प्रमुख ने कहा कि इस ध्वज के माध्यम से कुछ बुनियादी मूल्यों को ऊपर उठाया गया है। भागवत ने कहा, “ये वो मूल्य हैं जो दुनिया को रास्ता दिखाएंगे — निजी जीवन से लेकर पारिवारिक जीवन और पूरी सृष्टि के जीवन तक। धर्म ही सबकी भलाई सुनिश्चित करता है।” उन्होंने कहा कि झंडे का केसरिया रंग धर्म को दिखाता है और इसलिए इसे ‘धर्म ध्वज' कहा जाता है।
-
अयोध्या. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण को “एक नए युग की शुरुआत” बताया। उन्होंने इस कार्यक्रम में मौजूद रहने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत तथा उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का धन्यवाद किया। आगंतुकों को संबोधित करते हुए, आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान राम का भव्य मंदिर 140 करोड़ भारतीयों की “आस्था, सम्मान और आत्म-गौरव” का प्रतीक है। उन्होंने इसके निर्माण में योगदान देने वाले सभी “कर्मयोगियों” का दिल से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह दिन ‘‘उन संतों, योद्धाओं और राम भक्तों की “अटूट भक्ति” को समर्पित है जिन्होंने इस आंदोलन और लंबे संघर्ष के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, जिसका नतीजा मंदिर के निर्माण के रूप में सामने आया।'' आदित्यनाथ ने कहा कि जब 2014 में प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने देश का नेतृत्व संभाला था, तो लाखों लोगों के दिलों में “संकल्प और विश्वास का सूरज” जगा। उन्होंने कहा, “आज, वह संकल्प इस भव्य राम मंदिर के रूप में सभी भारतीयों और भक्तों के सामने पूरा हुआ है।” उन्होंने कहा कि राम मंदिर के ऊपर फहरा रहा ध्वज सच्चाई, न्याय, गरिमा और राष्ट्रीय धर्म का प्रतीक है। आदित्यनाथ ने कहा, “यह एक विकसित भारत के दृष्टिकोण को भी दिखाता है, क्योंकि संकल्प का कोई विकल्प नहीं है, और पिछले 11 सालों में हम सभी ने एक बदलते भारत को देखा है। हम एक ऐसा भारत देख रहे हैं जहां विरासत और विकास पूरे तालमेल के साथ मौजूद हैं, जो देश को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।” उन्होंने राम मंदिर आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि अटूट विश्वास बना रहा, और जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेतृत्व में संघर्ष शुरू हुआ, तो पूरे आंदोलन में एक ही संकल्प गूंजा: “रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे… लाठी-गोली खाएंगे, पर मंदिर वहीं बनाएंगे।” आदित्यनाथ ने कहा कि एक समय था जब अयोध्या को नज़रअंदाज़ किया जाता था और यहां अव्यवस्था थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, यह अब “वैश्विक आध्यात्मिक राजधानी” में बदल गया है।
- नई दिल्ली। अयोध्या में मंगलवार को अभिजीत मुहूर्त के दौरान राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा का औपचारिक ध्वजारोहण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में संपन्न हुआ। पीएम मोदी ने इस ऐतिहासिक पल से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया।पीएम मोदी ने एक्स पोस्ट में लिखा…उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, ”अयोध्या के पावन धाम में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में ध्वजारोहण समारोह का हिस्सा बनना मेरे लिए अत्यंत भावविभोर करने वाला अनुभव रहा। शुभ मुहूर्त में संपन्न हुआ यह अनुष्ठान हमारे सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता के नए अध्याय का उद्घोष है।”‘राम मंदिर का गौरवशाली ध्वज, विकसित भारत के नवजागरण की संस्थापना’पीएम मोदी ने कहा, ”राम मंदिर का गौरवशाली ध्वज, विकसित भारत के नवजागरण की संस्थापना है। ये ध्वज नीति और न्याय का प्रतीक हो, ये ध्वज सुशासन से समृद्धि का पथ प्रदर्शक हो और ये ध्वज विकसित भारत की ऊर्जा बनकर इसी रूप में सदा आरोहित रहे भगवान श्री राम से यही कामना है। जय जय सियाराम।”इसके अलावा पीएम मोदी अयोध्या में रामलला मंदिर के ध्वजारोहण से पहले सप्तमंदिर पहुंचेइसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने अयोध्या में रामलला मंदिर के ध्वजारोहण से पहले सप्तमंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, महर्षि वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज गुहा और माता शबरी से जुड़े मंदिर में पूजा-अर्चना की।पीएम मोदी ने सप्तमंदिर में पूजा-अर्चना की तस्वीरें भी की शेयरपीएम मोदी ने सप्तमंदिर में पूजा-अर्चना की तस्वीरें शेयर करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”आज अयोध्या में रामलला मंदिर के ध्वजारोहण अनुष्ठान से पूर्व मंदिर परिसर में सप्त मंदिरों के दर्शन कर आशीर्वाद लेने का सौभाग्य भी मिला। महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, महर्षि वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज एवं माता शबरी के सप्त मंदिरों से वह बोध एवं भक्ति प्राप्त होती है, जो हमें प्रभु राम के चरणों के योग्य बनाती है।”पीएम मोदी ने दूसरे पोस्ट में सप्त मंदिरों के लिए लिखा…पीएम मोदी ने दूसरे पोस्ट में लिखा, ”सप्त मंदिरों के सभी सात ऋषियों एवं महा भागवतों की उपस्थिति से ही रामचरित पूर्ण होता है। महर्षि वशिष्ठ एवं महर्षि विश्वामित्र ने प्रभु रामलला के विद्याध्ययन की लीला पूरी कराई। महर्षि अगस्त्य से वन गमन के समय ज्ञान चर्चाएं हुईं एवं राक्षसी आतंक के विनाश का मार्ग प्रशस्त हुआ। आदिकवि महर्षि वाल्मीकि ने अलौकिक रामायण विश्व को प्रदान की। देवी अहिल्या, निषादराज एवं माता शबरी ने महान भक्ति का उदाहरण प्रस्तुत किया और हम प्रभु राम के उस समरस आदर्श से परिचित हो पाए, जिसमें उन्होंने खुद कहा है-कह रघुपति सुनु भामिनि बाता। मानउं एक भगति कर नाता॥”
- अयोध्या । श्रीधर्म ध्वज फहराए जाने के ऐतिहासिक क्षण ने संपूर्ण अयोध्या को भक्ति भाव से ओतप्रोत कर दिया। धर्मपथ सहित शहर की सभी प्रमुख सड़कों पर जयघोष करते श्रद्धालु उमड़ पड़े और राम नाम की गूंज से नगर भक्तिरस से सराबोर हो गया। लता मंगेशकर चौक पर हजारों की संख्या में भक्त एकत्रित होकर ध्वजारोहण का सीधा प्रसारण देखते रहे। जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर शिखर पर धर्मध्वजा स्थापित की, उपस्थित जनसमूह भावविभोर होकर जय श्रीराम के उद्घोष में डूब गया।अयोध्या के पड़ोसी जिलों सुल्तानपुर, बस्ती, अंबेडकरनगर और बाराबंकी सहित उत्तर भारत के अन्य हिस्सों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रावस्ती से आए राजेंद्र प्रसाद पाण्डेय ने कहा कि वह 17 नवंबर को ही अयोध्या पहुंच गए थे और आज स्वयं को अत्यंत गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या का गौरव वापस दिलाया है और शहर को स्वस्थ व सुंदर बनाया है।श्रावस्ती के ही विश्वनाथ जायसवाल ने कहा कि राम मंदिर निर्माण का कार्य ऐतिहासिक रहा है और पीएम मोदी-सीएम योगी ने वह किया है जो पूर्व में कोई नहीं कर सका। बिहार के गोपालगंज से हनुमान जी की वेशभूषा में पहुंचे एक रामभक्त ने अपने नृत्य और गायन से माहौल को भक्ति रस में रंग दिया।दिल्ली से आई श्रद्धालु महिलाएं मधु, धारणा, संतोष और पूजा ने कहा कि राम मंदिर परिसर पहुंचते ही उन्हें देवलोक जैसी अनुभूति हुई।संत रमाकांत शर्मा ने कहा कि वह पिछले 25 वर्षों से अयोध्या में आते-जाते रहते हैं। अयोध्या आधुनिक भी हुई है और अपनी त्रेतायुगीन झलक भी पा चुकी है। ढोल और मंजीरों के मधुर स्वरों के बीच संतों की टोली ने इस आयोजन को एक दिव्य सांस्कृतिक पर्व में परिवर्तित कर दिया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं रहा, बल्कि आस्था, इतिहास और आधुनिकता के संगम का जीवंत प्रतीक बनकर उदित हुआ, जिसमें अयोध्या ने अपनी आध्यात्मिक प्रतिष्ठा विश्व के सामने पुनः स्थापित की।



.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)



.jpg)












