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अयोध्या (उप्र) . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि राम मंदिर के लिए बलिदान देने वाले लोगों की आत्मा को आज मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के बाद शांति मिली होगी। उन्होंने कहा कि आज ध्वजारोहण के साथ मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूर्ण हो गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ मोहन भागवत ने मंगलवार को श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया। इस मौके पर खासतौर पर मौजूद आरएसएस प्रमुख ने कहा, ''आज हम सबके लिए एक सार्थकता का दिवस है।'' उन्होंने कहा, ''इतने लोगों ने सपना देखा, प्रयास किया, प्राण अर्पण किये, आज उनकी आत्मा तृप्त हुई होगी। आज वास्तव में अशोक जी (राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख दिवंगत अशोक सिंघल) की आत्मा को वहां शांति मिली होगी।'' मोहन भागवत ने मंदिर आंदोलन से जुड़े संतों को स्मरण करते हुए कहा, ''महंत रामचंद्र दास महाराज, डालमिया जी (विहिप प्रमुख दिवंगत विष्णु हरि डालमिया) कितने संतों, कितने विचारकों ने अपना पसीना बहाया, अपना प्राण अर्पित किया।'' उन्होंने कहा, ‘‘और जो उनके पीछे थे वे अपनी इच्छा व्यक्त करते रहे कि मंदिर बनेगा और आज मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूर्ण हो गई। ध्वजारोहण हो गया।'' आरएसएस प्रमुख ने इसे गौरवमयी क्षण बताते हुए इस अवसर पर शामिल होने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, ‘‘रामराज्य का ध्वज जो कभी अयोध्या में फहराता था और संपूर्ण विश्व में सुख-शांति प्रदान करता था, वह ध्वज शिखर पर विराजमान होते हमने अपनी आंखों से देखा है।'' भागवत ने कहा, ''ध्वज प्रतीक होता है। ध्वज फहराने में समय लगा, मंदिर बनने में भी समय लगाा। उस मंदिर के रूप में हमने कुछ तत्वों को ऊपर पहुंचाया है। सारा विश्व जिससे ठीक चलेगा, अपने व्यक्तिगत जीवन, पारिवारिक जीवन से लेकर, सृष्टि जीवन ठीक से चलेगा, उस धर्म का प्रतीक भगवा रंग, वही इस धर्म ध्वज का रंग है और इस पर रघुकुल का प्रतीक कोविदार वृक्ष है। यह वृक्ष देवगुणों का समुच्चय है और यह रघुकुल की सत्ता का प्रतीक है।'' उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर पर फहराया गया ध्वज उन सिद्धांतों का प्रतीक है जो व्यक्ति, परिवार और दुनिया भर में सद्भाव की प्रेरणा देते हैं। समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उपस्थित थे। भागवत ने कहा, ‘‘कई लोगों ने इस दिन का सपना देखा था और कई लोगों ने इसके लिए अपनी जान दे दी। आज उनकी आत्मा को शांति मिली होगी।'' उन्होंने कहा, ‘‘जो लोग हर दिन पृष्ठभूमि में काम करते थे, उन्होंने भी राम मंदिर का सपना देखा था, अब जब रस्में पूरी हो गई हैं तो 'राम राज्य' का झंडा फहराया गया है।'' उन्होंने कहा, “इतना ऊंचा ध्वज फहराने में बहुत समय लगा है। आप सब जानते हैं कि मंदिर बनने में कितना समय लगा — अगर 500 साल को छोड़ भी दें, तो 30 साल लगे।” संघ प्रमुख ने कहा कि इस ध्वज के माध्यम से कुछ बुनियादी मूल्यों को ऊपर उठाया गया है। भागवत ने कहा, “ये वो मूल्य हैं जो दुनिया को रास्ता दिखाएंगे — निजी जीवन से लेकर पारिवारिक जीवन और पूरी सृष्टि के जीवन तक। धर्म ही सबकी भलाई सुनिश्चित करता है।” उन्होंने कहा कि झंडे का केसरिया रंग धर्म को दिखाता है और इसलिए इसे ‘धर्म ध्वज' कहा जाता है।
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अयोध्या. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण को “एक नए युग की शुरुआत” बताया। उन्होंने इस कार्यक्रम में मौजूद रहने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत तथा उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का धन्यवाद किया। आगंतुकों को संबोधित करते हुए, आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान राम का भव्य मंदिर 140 करोड़ भारतीयों की “आस्था, सम्मान और आत्म-गौरव” का प्रतीक है। उन्होंने इसके निर्माण में योगदान देने वाले सभी “कर्मयोगियों” का दिल से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह दिन ‘‘उन संतों, योद्धाओं और राम भक्तों की “अटूट भक्ति” को समर्पित है जिन्होंने इस आंदोलन और लंबे संघर्ष के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, जिसका नतीजा मंदिर के निर्माण के रूप में सामने आया।'' आदित्यनाथ ने कहा कि जब 2014 में प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने देश का नेतृत्व संभाला था, तो लाखों लोगों के दिलों में “संकल्प और विश्वास का सूरज” जगा। उन्होंने कहा, “आज, वह संकल्प इस भव्य राम मंदिर के रूप में सभी भारतीयों और भक्तों के सामने पूरा हुआ है।” उन्होंने कहा कि राम मंदिर के ऊपर फहरा रहा ध्वज सच्चाई, न्याय, गरिमा और राष्ट्रीय धर्म का प्रतीक है। आदित्यनाथ ने कहा, “यह एक विकसित भारत के दृष्टिकोण को भी दिखाता है, क्योंकि संकल्प का कोई विकल्प नहीं है, और पिछले 11 सालों में हम सभी ने एक बदलते भारत को देखा है। हम एक ऐसा भारत देख रहे हैं जहां विरासत और विकास पूरे तालमेल के साथ मौजूद हैं, जो देश को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।” उन्होंने राम मंदिर आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि अटूट विश्वास बना रहा, और जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेतृत्व में संघर्ष शुरू हुआ, तो पूरे आंदोलन में एक ही संकल्प गूंजा: “रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे… लाठी-गोली खाएंगे, पर मंदिर वहीं बनाएंगे।” आदित्यनाथ ने कहा कि एक समय था जब अयोध्या को नज़रअंदाज़ किया जाता था और यहां अव्यवस्था थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, यह अब “वैश्विक आध्यात्मिक राजधानी” में बदल गया है।
- नई दिल्ली। अयोध्या में मंगलवार को अभिजीत मुहूर्त के दौरान राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा का औपचारिक ध्वजारोहण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में संपन्न हुआ। पीएम मोदी ने इस ऐतिहासिक पल से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया।पीएम मोदी ने एक्स पोस्ट में लिखा…उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, ”अयोध्या के पावन धाम में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में ध्वजारोहण समारोह का हिस्सा बनना मेरे लिए अत्यंत भावविभोर करने वाला अनुभव रहा। शुभ मुहूर्त में संपन्न हुआ यह अनुष्ठान हमारे सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता के नए अध्याय का उद्घोष है।”‘राम मंदिर का गौरवशाली ध्वज, विकसित भारत के नवजागरण की संस्थापना’पीएम मोदी ने कहा, ”राम मंदिर का गौरवशाली ध्वज, विकसित भारत के नवजागरण की संस्थापना है। ये ध्वज नीति और न्याय का प्रतीक हो, ये ध्वज सुशासन से समृद्धि का पथ प्रदर्शक हो और ये ध्वज विकसित भारत की ऊर्जा बनकर इसी रूप में सदा आरोहित रहे भगवान श्री राम से यही कामना है। जय जय सियाराम।”इसके अलावा पीएम मोदी अयोध्या में रामलला मंदिर के ध्वजारोहण से पहले सप्तमंदिर पहुंचेइसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने अयोध्या में रामलला मंदिर के ध्वजारोहण से पहले सप्तमंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, महर्षि वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज गुहा और माता शबरी से जुड़े मंदिर में पूजा-अर्चना की।पीएम मोदी ने सप्तमंदिर में पूजा-अर्चना की तस्वीरें भी की शेयरपीएम मोदी ने सप्तमंदिर में पूजा-अर्चना की तस्वीरें शेयर करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”आज अयोध्या में रामलला मंदिर के ध्वजारोहण अनुष्ठान से पूर्व मंदिर परिसर में सप्त मंदिरों के दर्शन कर आशीर्वाद लेने का सौभाग्य भी मिला। महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, महर्षि वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज एवं माता शबरी के सप्त मंदिरों से वह बोध एवं भक्ति प्राप्त होती है, जो हमें प्रभु राम के चरणों के योग्य बनाती है।”पीएम मोदी ने दूसरे पोस्ट में सप्त मंदिरों के लिए लिखा…पीएम मोदी ने दूसरे पोस्ट में लिखा, ”सप्त मंदिरों के सभी सात ऋषियों एवं महा भागवतों की उपस्थिति से ही रामचरित पूर्ण होता है। महर्षि वशिष्ठ एवं महर्षि विश्वामित्र ने प्रभु रामलला के विद्याध्ययन की लीला पूरी कराई। महर्षि अगस्त्य से वन गमन के समय ज्ञान चर्चाएं हुईं एवं राक्षसी आतंक के विनाश का मार्ग प्रशस्त हुआ। आदिकवि महर्षि वाल्मीकि ने अलौकिक रामायण विश्व को प्रदान की। देवी अहिल्या, निषादराज एवं माता शबरी ने महान भक्ति का उदाहरण प्रस्तुत किया और हम प्रभु राम के उस समरस आदर्श से परिचित हो पाए, जिसमें उन्होंने खुद कहा है-कह रघुपति सुनु भामिनि बाता। मानउं एक भगति कर नाता॥”
- अयोध्या । श्रीधर्म ध्वज फहराए जाने के ऐतिहासिक क्षण ने संपूर्ण अयोध्या को भक्ति भाव से ओतप्रोत कर दिया। धर्मपथ सहित शहर की सभी प्रमुख सड़कों पर जयघोष करते श्रद्धालु उमड़ पड़े और राम नाम की गूंज से नगर भक्तिरस से सराबोर हो गया। लता मंगेशकर चौक पर हजारों की संख्या में भक्त एकत्रित होकर ध्वजारोहण का सीधा प्रसारण देखते रहे। जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर शिखर पर धर्मध्वजा स्थापित की, उपस्थित जनसमूह भावविभोर होकर जय श्रीराम के उद्घोष में डूब गया।अयोध्या के पड़ोसी जिलों सुल्तानपुर, बस्ती, अंबेडकरनगर और बाराबंकी सहित उत्तर भारत के अन्य हिस्सों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रावस्ती से आए राजेंद्र प्रसाद पाण्डेय ने कहा कि वह 17 नवंबर को ही अयोध्या पहुंच गए थे और आज स्वयं को अत्यंत गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या का गौरव वापस दिलाया है और शहर को स्वस्थ व सुंदर बनाया है।श्रावस्ती के ही विश्वनाथ जायसवाल ने कहा कि राम मंदिर निर्माण का कार्य ऐतिहासिक रहा है और पीएम मोदी-सीएम योगी ने वह किया है जो पूर्व में कोई नहीं कर सका। बिहार के गोपालगंज से हनुमान जी की वेशभूषा में पहुंचे एक रामभक्त ने अपने नृत्य और गायन से माहौल को भक्ति रस में रंग दिया।दिल्ली से आई श्रद्धालु महिलाएं मधु, धारणा, संतोष और पूजा ने कहा कि राम मंदिर परिसर पहुंचते ही उन्हें देवलोक जैसी अनुभूति हुई।संत रमाकांत शर्मा ने कहा कि वह पिछले 25 वर्षों से अयोध्या में आते-जाते रहते हैं। अयोध्या आधुनिक भी हुई है और अपनी त्रेतायुगीन झलक भी पा चुकी है। ढोल और मंजीरों के मधुर स्वरों के बीच संतों की टोली ने इस आयोजन को एक दिव्य सांस्कृतिक पर्व में परिवर्तित कर दिया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं रहा, बल्कि आस्था, इतिहास और आधुनिकता के संगम का जीवंत प्रतीक बनकर उदित हुआ, जिसमें अयोध्या ने अपनी आध्यात्मिक प्रतिष्ठा विश्व के सामने पुनः स्थापित की।
- अयोध्या। अभिजीत मुहूर्त के शुभ समय में श्रीराम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज की स्थापना की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिखर पर भगवा ध्वज फहराया। इस दौरान उनके साथ संघ प्रमुख मोहन भागवत और ट्रस्ट के गोविंदगिरी भी मौजूद रहे।ट्रस्ट की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार राम मंदिर के शिखर पर फहराया जाने वाला ध्वज 10 फीट ऊंचा और 20 फीट लंबा, समकोण त्रिभुजाकार है। इसके साथ कोविदारा वृक्ष की छवि के साथ इस पर ‘ओम’ अंकित है। मंदिर के चारों ओर बना 800 मीटर का परकोटा, जो दक्षिण भारतीय आर्किटेक्चरल परंपरा में डिजाइन किया गया है, जो मंदिर की आर्किटेक्चरल विविधता को दिखाता है।इसके पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सरसंघचालक मोहन भागवत के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच रामलला के दरबार में शीश नवाया। दर्शन के बाद पूजा अर्चना की। सीएम योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी मौजूद रहीं।ध्वजारोहण समारोह का साक्षी बनने के लिए हर उम्र के लोग और भक्त अयोध्या शहर पहुंचे हैं। उन्हें भले ही राम मंदिर में प्रवेश नहीं मिलेगा, लेकिन वह रामनगरी पहुंचे हैं। यह आयोजन अयोध्या में चल रहे सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक और महत्वपूर्ण चरण है। नेताओं ने कहा है कि यह ध्वज केवल धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन सभ्यता और समृद्ध सांस्कृतिक मूल्यों का भी प्रतीक है।ऐतिहासिक ध्वजारोहण के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज पीढ़ियों की प्रतीक्षा आज साकार हुई। उन्होंने कहा कि देश आज नई ऊंचाइयों को छू रहा है। यह राम मंदिर करोड़ों की आस्था का प्रतीक है।ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अयोध्या में हैं। सुबह एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने लंबा शो निकाला, जहां रास्ते में श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया। रोड शो के बाद प्रधानमंत्री सप्त मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना की।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कुरुक्षेत्र में आयोजित गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के समागम कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहादत की सालगिरह पर खास सिक्का और यादगार डाक टिकट जारी किया।
पीएम मोदी ने कहा कि मुगल आक्रांताओं के उस काल में कश्मीरी हिंदुओं का जबरन धर्मांतरण किया जा रहा था। इस संकट के बीच पीड़ितों के एक दल ने गुरु साहिब से सहयोग मांगा। तब श्री गुरु साहिब ने उन पीड़ितों को जवाब दिया था कि आप सब औरंगजेब को साफ-साफ कह दें कि यदि श्री गुरु तेग बहादुर इस्लाम स्वीकार कर लें, तो हम सब इस्लाम अपना लेंगे।पीएम ने कहा कि हमारे गुरुओं की परंपरा, हमारे राष्ट्र के चरित्र, हमारी संस्कृति और हमारी मूल भावना का आधार है। मुझे संतोष है कि पिछले 11 वर्षों में हमारी सरकार ने इन पावन परंपराओं को, सिख परंपरा के हर उत्सव को राष्ट्रीय उत्सव के रूप में भी स्थापित किया है।पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सरकार ने गुरुओं के हर तीर्थ को आधुनिक भारत के स्वरूप से जोड़ने का प्रयास किया है। करतारपुर कॉरिडोर का काम पूरा कराना हो, हेमकुंड साहिब में रोप वे प्रोजेक्ट का निर्माण करना हो, या आनंदपुर साहिब में विरासत-ए-खालसा संग्रहालय का विस्तार हो, हमने गुरुजनों की गौरवशाली परंपरा को अपना आदर्श मानकर, इन सारे कामों को पूरी श्रद्धा से पूरा करने का प्रयास किया है।उन्होंने कहा कि हम सभी जानते हैं कि कैसे मुगलों ने वीर साहिबजादों के साथ भी क्रूरता की सारी सीमाएं पार कर दी थीं। वीर साहिबजादों ने दीवार में चुने जाना स्वीकार किया, लेकिन अपने कर्तव्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा। इन्हीं आदर्शों के सम्मान के लिए, अब हम हर साल 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाते हैं।पीएम मोदी ने कहा कि पिछले महीने एक पावन यात्रा के रूप में गुरु महाराज के पावन ‘जोड़ा साहिब’ दिल्ली से पटना साहिब ले जाए गए, और वहां मुझे भी इन पवित्र ‘जोड़ा साहिब’ के सामने अपना शीश नवाने का अवसर मिला। मैं इसे गुरुओं की विशेष कृपा मानता हूं कि उन्होंने मुझे इस सेवा का, इस समर्पण का और इस पवित्र धरोहर से जुड़ने का अवसर दिया।गुरु तेग बहादुर साहिब जी की स्मृति हमें ये सिखाती है कि भारत की संस्कृति कितनी व्यापक, कितनी उदार और कितनी मानवता केंद्रित रही है। उन्होंने ‘सरबत दा भला’ का मंत्र अपने जीवन से सिद्ध किया।उन्होंने कहा कि आज का ये आयोजन सिर्फ इन स्मृतियों और सिखों के सम्मान का क्षण नहीं है। ये हमारे वर्तमान और भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण प्रेरणा भी है। गुरु साहब ने सिखाया है कि ‘जो नर दुख में दुख नहिं माने, सो ही पूर्ण ज्ञानी,’ यानी जो विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग रहता है, वही सच्चा ज्ञानी है, वही सच्चा साधक है। -
नयी दिल्ली/ दशकों तक धर्मेंद्र ने बड़े पर्दे पर राज किया लेकिन 2004 में उन्होंने फिल्म सेट की जगह राजनीतिक रैलियां कीं तथा राजस्थान के बीकानेर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की। लुधियाना के पास साहनेवाल के मूल निवासी धर्मेंद्र के पंजाबी आकर्षण ने राजस्थान के मतदाताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके प्रचार अभियान में भारी भीड़ उमड़ती थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली भाजपा को चुनावों में हार का सामना करना पड़ा, जबकि धर्मेंद्र अपने चुनावी पदार्पण में ही सफल रहे और उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार रामेश्वर लाल डूडी को लगभग 60,000 मतों से हराया। हालांकि, संसद में पहुंचने के बाद, उनका राजनीति से जल्द ही मोहभंग हो गया। संसद में उनकी उपस्थिति कम थी और बहसों में उनकी सीमित भागीदारी पर सवाल उठे थे।
वर्ष 2008 में ‘ एक न्यूज़ एजेंसी' के साथ एक साक्षात्कार में धर्मेंद्र ने राजनीति से अपने मोहभंग के बारे में बात की थी जब उन्होंने फिल्मी सितारों को एक सलाह दी थी। धर्मेंद्र ने कहा था, "मैं यह नहीं कहूंगा कि राजनीति में आना कोई गलती थी, लेकिन हां, एक अभिनेता को राजनीति में नहीं आना चाहिए क्योंकि इससे दर्शकों और प्रशंसकों के बीच सामान्य स्वीकृति में विभाजन पैदा होता है। अभिनेता को हमेशा अभिनेता ही रहना चाहिए। मेरे लिए, इन सभी वर्षों में अपने प्रशंसकों से मिला प्यार और समर्थन ही सबसे बड़ी उपलब्धि है।" संसद में कम उपस्थिति के बारे में पूछे जाने पर धर्मेंद्र ने कहा था कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ "ऐसा कौन कहता है? मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं से हमेशा जुड़ा रहता हूं। बीकानेर के कूड़ाघर एवं सूर सागर की सफाई से लेकर बच्चों की स्कूल फीस कम करने, रंगमंच के जीर्णोद्धार और पुलों के निर्माण तक, मैं हर समस्या का समाधान करने की कोशिश कर रहा हूं।" धर्मेंद्र ने साक्षात्कार में कहा था, "बीकानेर स्थित मेरा कार्यालय मुझे नियमित रूप से लोगों की मांगों से अवगत कराता है। मैं किसान परिवार से हूं, इसलिए मैं उनकी समस्याओं को समझता हूं। और यह कोई राजनीति नहीं है। मैं भावुक लेकिन दृढ़ व्यक्ति हूं, ये आलोचनाएं मेरे इरादे नहीं तोड़ सकतीं। मैंने कभी भी ध्यान आकर्षित करने के लिए कुछ नहीं किया, चाहे अभिनय में हो या राजनीति में।" उनका कार्यकाल 2009 में समाप्त हो गया और उन्होंने फिर कभी इस सीट से चुनाव नहीं लड़ा।
वर्ष 2010 में लुधियाना में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में, धर्मेंद्र ने राजनीति में कदम रखने पर अफसोस व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "राजनीति में मुझे घुटन महसूस होती थी। मुझे भावनात्मक रूप से इस क्षेत्र में घसीटा गया। जिस दिन मैंने हामी भरी, मैं शौचालय गया और शीशे में अपना सिर पटककर अपने किए पर पछतावा किया। राजनीति ऐसी चीज़ है जो मैं कभी नहीं करना चाहता था। मैंने अपने निर्वाचन क्षेत्र बीकानेर के लोगों के लिए जितना काम किया, उतना आज तक किसी ने नहीं किया।" कुछ साल बाद, धर्मेंद्र की पत्नी, अभिनेत्री हेमा मालिनी ने भाजपा के टिकट पर मथुरा से लोकसभा चुनाव लड़ा। इससे पहले वह 2004 से 2009 तक राज्यसभा सदस्य रह चुकी थीं। पिछले साल ‘न्यूज़18' के साथ एक साक्षात्कार में, हेमा मालिनी ने बताया था कि धर्मेंद्र शुरू में उनके चुनाव लड़ने के खिलाफ थे। मालिनी ने कहा, "धरमजी को यह पसंद नहीं आया। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं चुनाव न लड़ूं, क्योंकि यह बहुत कठिन काम है...उन्होंने कहा, 'मैंने इसका अनुभव किया है।' इसलिए जब उन्होंने कहा कि यह एक कठिन काम है, तो मैंने सोचा कि इसे एक चुनौती के रूप में लेना चाहिए।" हेमा मालिनी ने कहा, "जब आप फिल्म स्टार होते हैं और राजनीति में काम करते हैं, तो लोगों में आपके प्रति काफी दीवानगी होती है और वे आपसे संपर्क करना चाहते हैं। आप कल्पना कर सकते हैं कि लोगों में धरमजी के प्रति कितनी दीवानगी थी। इसलिए उन्हें इससे परेशानी होती थी। मुझे भी ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।" लेकिन किसी भी पिता की तरह, धर्मेंद्र 2019 के आम चुनावों में अपने बेटे, अभिनेता सनी देओल का समर्थन करने के लिए सामने आए। सनी देओल चुनाव से कुछ समय पहले ही भाजपा में शामिल हुए और उन्हें पंजाब के गुरदासपुर निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में उतारा गया। गुरदासपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए, धर्मेंद्र ने भीड़ से कहा कि वह "भाषण देने नहीं, बल्कि दिल से बात करने आए हैं।" उन्होंने कहा, "मैं भाषण नहीं देता, बस लोगों से बात करता हूं। भाषण में क्या रखा है? मैं कोई नेता नहीं हूं।" सनी ने गुरदासपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस नेता सुनील जाखड़ को 82,000 से ज़्यादा वोटों से हराया। हालांकि, अपने पिता की तरह, उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद सक्रिय राजनीति में वापसी नहीं करने का फैसला किया। धर्मेंद्र सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचार कम ही व्यक्त करते थे।
वर्ष 2020 में, दिल्ली के पास किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान, उन्होंने केंद्र सरकार से किसानों की समस्याओं का "शीघ्र समाधान निकालने" की अपील की थी। उन्होंने ‘एक्स' पर कहा था, "मैं सरकार से अनुरोध करता हूं...कृपया किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान निकालें... दिल्ली में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं... यह दुखद है।" हालांकि, बाद में उन्होंने यह पोस्ट हटा दी, जिसके बाद सोशल मीडिया के कई प्रयोक्ताओं ने उनकी आलोचना की। जब एक उपयोगकर्ता ने कहा कि उन्होंने पोस्ट हटा दिया क्योंकि वह असहाय महसूस कर रहे होंगे, तो धर्मेंद्र ने जवाब दिया, "मुझे इस तरह की टिप्पणियों से दुख हुआ, इसलिए मैंने अपना ट्वीट हटा दिया। आप मुझे जी भरकर कोस सकते हैं, मुझे खुशी है कि आप खुश हैं। मैं अपने किसान भाइयों के लिए दुखी हूं। सरकार को जल्द ही कोई समाधान निकालना चाहिए, कोई हमारी बात नहीं सुन रहा है।" -
नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उप राष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने सोमवार को दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के निधन पर दुख जताया और कहा कि उनके जाने से एक युग का अंत हो गया है तथा उनकी विरासत कलाकारों की युवा पीढ़ी को हमेशा प्रेरित करती रहेगी। धर्मेंद्र ने सोमवार को मुंबई स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वह 89 वर्ष के थे।
राष्ट्रपति मुर्मू ने उनके निधन पर दुख जताते हुए ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘ दिग्गज अभिनेता और पूर्व सांसद धर्मेंद्र जी का निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति है। सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में शुमार धर्मेंद्र ने अपने दशकों लंबे शानदार करियर के दौरान कई यादगार फिल्में दीं। भारतीय सिनेमा की एक महान हस्ती के रूप में वह अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं जो कलाकारों की युवा पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी।'' उन्होंने कहा, ‘‘उनके परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों के प्रति मेरी गहरी संवेदना।''
उप राष्ट्रपति ने ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘पूर्व सांसद एवं दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र जी का निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है। लाखों लोगों के लिए एक आदर्श के रूप में उन्होंने अपने उल्लेखनीय अभिनय और कला के प्रति दृढ़ समर्पण के माध्यम से भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया।'' उन्होंने कहा, ‘‘हमारे फिल्म उद्योग में सबसे प्रशंसित शख्सियतों में से एक के रूप में वह अपने पीछे एक बड़ी विरासत छोड़ गए हैं जो कलाकारों की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उनके परिवार, दोस्तों और असंख्य प्रशंसकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। ओम शांति।'' प्रधानमंत्री मोदी ने धर्मेंद्र को एक प्रतिष्ठित फिल्मी शख्सियत और एक अद्भुत अभिनेता के रूप में याद करते हुए कहा कि उनके निधन से भारतीय सिनेमा में एक युग का अंत हो गया। उन्होंने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, “धर्मेंद्र जी का निधन भारतीय सिनेमा के एक युग का अंत है। वे एक प्रतिष्ठित फ़िल्मी शख्सियत, एक अद्भुत अभिनेता थे जिन्होंने अपने हर किरदार में आकर्षण और गहराई पैदा की।” मोदी का कहना था कि जिस तरह से धर्मेन्द्र ने विविध भूमिकाएं निभाईं, उसने अनगिनत लोगों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी। प्रधानमंत्री ने कहा, “धर्मेंद्र जी अपनी सादगी, विनम्रता और गर्मजोशी के लिए भी जाने जाते थे। इस दुख की घड़ी में, मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, दोस्तों और असंख्य प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।” गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि धर्मेंद्र ने अपनी फिल्मों के माध्यम से करोड़ों लोगों का दिल जीता तथा अपने अभिनय की बदौलत सदैव ‘‘हमारे बीच रहेंगे।'' शाह ने ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘अपने बेहतरीन अभिनय से छह दशकों तक हर देशवासी के दिल को छूने वाले धर्मेंद्र जी का निधन भारतीय सिनेमा जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। एक सामान्य परिवार से आकर उन्होंने फिल्म जगत में अपनी अमिट पहचान बनाई।'' उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र उन चुनिंदा अभिनेताओं में से एक रहे, जिन्होंने जिस किरदार को छुआ, वह जीवंत हो उठा और अपनी इसी कला के माध्यम से उन्होंने हर आयु-वर्ग के करोड़ों दर्शकों का दिल जीता। गृह मंत्री ने कहा, ‘‘अपने अभिनय से वह सदैव हमारे बीच रहेंगे। ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके परिजनों व प्रशंसकों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। ओम शांति शांति शांति।'' कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मशहूर अभिनेता धर्मेंद्र के निधन पर सोमवार को दुख जताया और कहा कि सिनेमा में उनके अद्वितीय योगदान को हमेशा सम्मान और मोहब्बत के साथ याद रखा जाएगा। राहुल गांधी ने ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘महान अभिनेता धर्मेंद्र जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है और भारतीय कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। सिनेमा में लगभग सात दशकों के उनके अद्वितीय योगदान को हमेशा सम्मान और मोहब्बत के साथ याद रखा जाएगा।'' उन्होंने कहा, ‘‘धर्मेंद्र जी को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके शोकाकुल परिवार, मित्रों और प्रशंसकों के साथ हैं।'' कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘भारतीय फ़िल्म जगत ने आज एक बहुमूल्य सितारा खो दिया। मशहूर अभिनेता धर्मेंद्र अब हमारे बीच नहीं रहे। 2012 में पद्मभूषण से सम्मानित, धर्मेंद्र ने दशकों तक सिनेमा प्रेमियों के दिलों पर राज किया और अपने अभूतपूर्व अभिनय व सादगीपूर्ण जीवन से एक गहरी छाप छोड़ी।'' उन्होंने कहा, ‘‘उनका निधन एक युग का अंत है। दुःख की इस घड़ी में मैं उनके परिवार और करोड़ों प्रशंसकों को गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।''भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘प्रख्यात फ़िल्म अभिनेता धर्मेंद्र जी का निधन भारतीय सिनेमा और कला जगत के लिये अपूरणीय क्षति है। अपने प्रभावी अभिनय से सिनेमा प्रेमियों के दिलों पर उन्होंने अमिट छाप छोड़ी है। अपनी सादगी और जीवंत अभिनय से उन्होंने दशकों तक देश और दुनिया के कला प्रेमियों के दिलों पर राज किया।'' उन्होंने कहा, ‘‘इस कठिन समय में शोक संतप्त परिवार और उनके प्रशंसकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि दिवंगत आत्मा को श्रीचरणों में स्थान दें एवं शोकाकुल परिजनों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।'' पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने धर्मेंद्र के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि भारतीय सिनेमा में उनका अतुलनीय योगदान पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘महान अभिनेता धर्मेंद्र जी के निधन से गहरा दुख हुआ। भारतीय सिनेमा में उनका अतुलनीय योगदान पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। उनके परिवार, बिरादरी, प्रशंसकों के प्रति मेरी गहरी संवेदना। हेमा मालिनी जी, उनके बेटे और बेटियां अब उनकी समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाएंगे।'' ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने धर्मेंद्र के निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि उनकी विरासत कलाकारों और सिनेमा प्रेमियों की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और कई अन्य नेताओं ने धर्मेंद्र के निधन पर दुख जताया।
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मुंबई। भारतीय सिनेमा के महान अभिनेता धर्मेंद्र के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। आज सोमवार को कई केंद्रीय मंत्रियों ने उनके निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा कि धर्मेंद्र जैसे जिंदादिल और सादगी से भरे कलाकार अमर हो जाते हैं।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि धर्मेंद्र का जाना सिर्फ एक अभिनेता का जाना नहीं है, बल्कि एक ऐसे युग का अंत है जिसने भारतीय सिनेमा को सादगी, भावना और अपनापन दिया। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र के किरदारों ने लोगों को हंसाया भी, रुलाया भी और कई बार दिल को गहराई तक छू लिया। पीयूष गोयल ने एक्स पर लिखा कि भारतीय सिनेमा ने अपना एक अमिट और स्नेही सितारा खो दिया है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि धर्मेंद्र की आत्मा को शांति मिले और परिवार को दुख सहन करने की शक्ति मिले।केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी धर्मेंद्र को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा कि धर्मेंद्र जैसे जिंदादिल इंसान कभी नहीं मरते। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि धर्मेंद्र एक स्टाइलिश, सौम्य और बेहद प्रतिभाशाली अभिनेता थे, जिनके अभिनय और करिश्मे ने दशकों तक दर्शकों को प्रभावित किया। उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र हमेशा विनम्र, मिलनसार और दयालु व्यक्ति के रूप में याद किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे पंजाब के गौरव सपूत थे और बीकानेर से भाजपा के पूर्व सांसद भी रहे।केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी धर्मेंद्र के निधन को भारतीय सिनेमा और सार्वजनिक जीवन के लिए बड़ा नुकसान बताया। उन्होंने कहा कि एक्शन से लेकर रोमांस और कई यादगार फिल्मों तक, धर्मेंद्र ने ऐसे किरदार निभाए जिन्होंने भारतीय सिनेमा को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र की विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। सोनोवाल ने धर्मेंद्र के परिवार और चाहने वालों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। -
मुंबई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता धर्मेंद्र के निधन पर दुख जताया है। उन्होंने धर्मेंद्र के निधन को भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति बताया। बता दें कि ही-मैन के नाम से मशहूर धर्मेंद्र का निधन 89 साल की उम्र में हो गया। उनका अंतिम संस्कार विले पार्ले श्मशान घाट में किया गया। इस दौरान उनके परिवार समेत अमिताभ बच्चन, आमिर खान, सलमान खान जैसे अभिनेता मौजूद रहे।
राष्ट्रपति कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ” जाने-माने एक्टर और पूर्व सांसद धर्मेंद्र जी का निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है। सबसे पॉपुलर एक्टर्स में से एक, उन्होंने अपने दशकों लंबे शानदार करियर में कई यादगार परफॉर्मेंस दीं। भारतीय सिनेमा की एक बड़ी हस्ती के तौर पर, वह अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं जो कलाकारों की नई पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उनके परिवार, दोस्तों और चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।”रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर लिखा,”मशहूर हिंदी फिल्म एक्टर और पूर्व सांसद धर्मेंद्र के निधन से बहुत दुख हुआ। उन्होंने अपने बेमिसाल चार्म और ईमानदारी से कई यादगार किरदारों में जान डाल दी। भारतीय सिनेमा में उनका शानदार योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उनके दुखी परिवार और अनगिनत चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।”केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अभिनेता धर्मेंद्र के निधन पर दुख जताते हुए एक्स पोस्ट पर लिखा, ”अपने बेहतरीन अभिनय से 6 दशकों तक हर देशवासी के दिल को छूने वाले धर्मेंद्र जी का निधन भारतीय सिनेमा जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। एक सामान्य परिवार से आकर उन्होंने फिल्म जगत में अपनी अमिट पहचान बनाई। धर्मेंद्र जी उन चुनिंदा अभिनेताओं में से एक रहे, जिन्होंने जिस किरदार को छुआ, वह जीवंत हो उठा और अपनी इसी कला के माध्यम से उन्होंने हर आयु-वर्ग के करोड़ों दर्शकों का दिल जीता। अपने अभिनय से वे सदैव हमारे बीच रहेंगे। ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके परिजनों व प्रशंसकों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।”केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”धर्मेंद्र देओल के निधन से भारतीय सिनेमा ने अपना एक अमिट, स्नेही और दिलों में बसने वाला सितारा खो दिया। उनका जाना केवल एक अभिनेता का जाना नहीं, बल्कि उस युग का अंत है जिसने पर्दे पर सादगी, भावनाओं और अपनेपन को नई पहचान दी। उनके किरदारों ने हमें हंसाया भी, रुलाया भी और कभी-कभी भीतर तक झकझोर दिया। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति और उनके परिवार एवं प्रशंसकों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।” -
नई दिल्ली। अयोध्या में मंगलवार को होने वाले राम मंदिर के ध्वजारोहण के लिए तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नवनिर्मित राम मंदिर पर धर्म ध्वजा फहराएंगे। इस भव्य कार्यक्रम के लिए पूरी अयोध्या को 1000 क्विंटल फूलों से सजाया गया है। इस कार्यक्रम में राम मंदिर निर्माण के लिए 2 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान करने वाले 100 दानदाताओं को निमंत्रित किया गया है।
ध्वज फहराने के साथ मंदिर निर्माण पूरामंगलवार को राम मंदिर के 191 फीट ऊंचे शिखर पर ध्वज फहराने के साथ मंदिर निर्माण के पूरा होने की घोषणा हो जाएगी। ध्वजारोहण के कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित सैकड़ों संत महात्मा शामिल होंगे। हालांकि इस कार्यक्रम में शंकराचार्यों को नहीं बुलाया गया है। इसके आलावा अयोध्या के ज्यादा से ज्यादा संत महात्मा यहां पर मौजूद रहेंगे। उत्तर प्रदेश के सभी समाजों को भी बुलाया गया है। जानकारी के अनुसार इस ध्वजारोहण कार्यक्रम में सामाजिक समरसता को दर्शाने के उद्देश्य से समाज के विभिन्न वर्गों से साधु-सन्यासियों को भी ध्वजारोहण समारोह में शामिल कराने की तैयारी है।अयोध्या में भारी वाहनों का आवागमन रोककार्यक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए रविवार की रात से अयोध्या की ओर भारी वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है। राम मंदिर के निर्माण व प्रबंधन को देखने वाले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपील की है कि मंगलवार को आम श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए न आएं बल्कि टीवी पर ही कार्यक्रम देखें। ध्वजारोहण कार्यक्रम के चलते 24 की रात से आम श्रद्धालुओं के दर्शन पर रोक रहेगी जोकि 26 तक जारी रहेगी। इस दौरान कार्क्रम में शामिल श्रद्धालुओं के लिए 26 व 27 नवम्बर को विशेष तौर पर दर्शन का कार्यक्रम बनाया गया है। रविवार को ही एटीएस व एनएसजी के कमांडों ने मंदिर परिसर की सुरक्षा संभाल ली है।ध्वजारोहण को लेकर यज्ञशाला में विविध अनुष्ठानइसके पहले रविवार को राम मंदिर में ध्वजारोहण को लेकर यज्ञशाला में विविध अनुष्ठान किये गए और ध्वजों के आरोहण से पहले पूजन किया गया। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार 42 फुट लम्बे और 501 किग्रा वजन वाले धर्म ध्वज स्तम्भ को मशीन के माध्यम से 191 फीट की ऊंचाई पर लगाया जाएगा। ध्वजारोहण समारोह के चलते 24-25 को लागू डायवर्जन और इन दोनों दिनों में शादी समारोह के दृष्टिगत आमजन को शादी का कार्ड दिखाने पर प्रवेश मिल सकेगा। गौरतलब है कि राम मंदिर के आसपास स्थित होटलों धर्मशालाओं और गेस्ट हाउसों में शादी समारोह की बुकिंग लोगों द्वारा पहले ही की जा चुकी है। -
नई दिल्ली। फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र के निधन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शोक व्यक्त किया। उन्होंने धर्मेंद्र को एक आइकॉनिक पर्सनेलटी बताया।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि धर्मेंद्र जी के जाने से भारतीय सिनेमा का एक पूरा दौर खत्म हो गया है। वे सिर्फ एक सितारे नहीं थे, बल्कि ऐसे शानदार अभिनेता थे जिन्होंने हर किरदार में जान डाल दी। अलग-अलग तरह की भूमिकाएं जिस तरह उन्होंने निभाई, उससे करोड़ों लोगों का दिल जुड़ गया। धर्मेंद्र जी की सादगी, विनम्रता और उनकी अपनापन भरी मुस्कान सबको बेहद पसंद थी। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, दोस्तों और उनके अनगिनत प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।एक्टर धर्मेंद्र को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि, ‘धर्मेंद्र सिर्फ एक अच्छे एक्टर ही नहीं थे, बल्कि एक अच्छे और सीधे-सादे इंसान भी थे। मेरा उनसे पर्सनल कनेक्शन था. वह देश और किसानों के लिए कमिटेड थे।’धर्मेंद्र ने दमदार अभिनय के दम पर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। उन्होंने अपने करियर में कई पुरस्कार भी जीते। साल 2012 में उन्हें भारत सरकार के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, उन्होंने कई फिल्मफेयर पुरस्कार भी अपने नाम किए। उन्होंने कई बार आलोचकों और दर्शकों की प्रशंसा भी हासिल की। उनके योगदान के कारण उन्हें बॉलीवुड के सबसे महान और प्रतिष्ठित अभिनेताओं में गिना जाता है। -
नई दिल्ली। जस्टिस सूर्यकांत सोमवार को भारत के नए मुख्य न्यायाधीश बने। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। शपथ लेने के बाद वह देश के लिए 53वें मुख्य न्यायाधीश बन गए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में भारत के नए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को पद की शपथ दिलाई।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई समेत कई गणमान्य रहे मौजूद
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई समेत कई गणमान्य मौजूद रहे।जस्टिस सूर्यकांत ने सीजेआई भूषण आर गवई की ली जगहजस्टिस सूर्यकांत ने सीजेआई भूषण आर गवई की जगह ली है। राष्ट्रपति मुर्मू ने सीजेआई गवई की सिफारिश के बाद ‘संविधान के आर्टिकल 124 के क्लॉज (2) द्वारा दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए’ जस्टिस सूर्यकांत को भारत का अगला चीफ जस्टिस नियुक्त किया।जस्टिस सूर्यकांत के बारे में…जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी, 1962 को हरियाणा के एक मिडिल क्लास परिवार में हुआ था। उन्होंने 1984 में हिसार से अपनी लॉ यात्रा शुरू की और फिर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने के लिए चंडीगढ़ चले गए। इस दौरान उन्होंने कई तरह के संवैधानिक, सर्विस और सिविल मामलों को संभाला, जिसमें यूनिवर्सिटी, बोर्ड, कॉर्पोरेशन, बैंक और यहां तक कि खुद हाईकोर्ट को भी रिप्रेजेंट किया।जुलाई 2000 में उन्हें हरियाणा का सबसे कम उम्र का एडवोकेट जनरल बनाया गया। इसके बाद, 2001 में उन्हें सीनियर एडवोकेट बनाया गया और 9 जनवरी 2004 को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का परमानेंट जज बनाया गया।बाद में, उन्होंने अक्टूबर 2018 से 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट में अपनी पदोन्नति तक हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर काम किया। नवंबर 2024 से वे सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन के तौर पर काम कर रहे हैं। -
सांगली. स्मृति मंधाना के पिता श्रीनिवास के बीमार पड़ने के कारण भारतीय महिला टीम की इस दिग्गज क्रिकेटर और संगीतकार पलाश मुच्छल की शादी को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। मंधाना और पलाश की शादी रविवार (23 नवंबर) को होनी थी।
मंधाना अपने पिता से भावनात्मक रूप से जुड़ी हुई हैं, जो उनके क्रिकेट करियर में लगातार उनका साथ देते रहे हैं। मंधाना के प्रबंधक तुहिन मिश्रा ने बताया कि विश्व कप विजेता क्रिकेटर के पिता को रविवार सुबह अचानक स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो गई। मिश्रा ने कहा, ‘‘ स्मृति मंधाना के पिता श्रीनिवास मंधाना आज सुबह नाश्ता करते समय तबीयत बिगड़ने लगी। हमने सोचा कि वह जल्द ही ठीक हो जाएंगे, लेकिन उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। इसलिए हमने एम्बुलेंस बुलाई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। वह चिकित्सकों की निगरानी में है।'' मिश्रा ने कहा कि पिता की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए मंधाना ने उनके ठीक होने तक अपनी शादी स्थगित करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, ‘‘ मंधाना अपने पिता के बहुत करीब हैं। इसलिए उन्होंने शादी को तब तक के लिए स्थगित करने का फैसला किया है जब तक उनके पिता ठीक नहीं हो जाते।'' मिश्रा ने बताया, चिकित्सकों ने कहा कि उन्हें (मंधाना के पिता) फिलहाल अस्पताल में रहना होगा। हम भी सदमे में हैं और उम्मीद करते हैं कि वह जल्दी ठीक हो जाएं क्योंकि यह सभी के लिए एक बड़ा मौका है।'' उन्होंने कहा, ‘‘ ऐसे में मंधाना चाहती है कि पहले उनके पिता ठीक हो जाएं और वह बाद में शादी करेंगी। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि इस समय परिवार की निजता का सम्मान करें।'' इस बहुप्रतीक्षित विवाह समारोह से पहले उनके गृहनगर सांगली में एक सप्ताह तक चलने वाला समारोह पहले से ही चल रहा था। -
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि मेरी यही कामना है कि अयोध्या में धर्म-ध्वजा की पुनर्स्थापना से प्रदेश में सुख, शांति और समृद्धि के नये युग का आरंभ हो। योगी आदित्यनाथ ने रविवार को अपने आधिकारिक ‘एक्स' खाते पर एक पोस्ट में कहा, “मेरे प्रिय प्रदेश वासियों, 25 नवंबर, 2025 को श्री अयोध्या धाम का नाम पुनः इतिहास के पृष्ठ पर स्वर्णिम अक्षरों में अंकित होगा।'' उन्होंने कहा कि “आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में श्री अयोध्या धाम में हो रहा हर कार्य प्रभु श्री राम के जीवन मूल्यों से प्रेरित है।'' पोस्ट में उन्होंने कहा, ‘‘मेरी यही कामना है कि धर्म-ध्वजा की पुनर्स्थापना से प्रदेश में सुख, शांति और समृद्धि के नये युग का आरंभ हो। जय श्री राम।'' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 25 नवंबर को अयोध्या में एक भव्य समारोह में धर्म ध्वजा की स्थापना होगी। इसी पोस्ट में योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को संबोधित एक पत्र साझा किया और कहा, ‘‘धर्म ध्वजा की पुनर्स्थापना से अयोध्या वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र का स्वरूप लेगी। भव्य राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह अनुष्ठान एक यज्ञ की पूर्णाहुति ही नहीं अपितु एक नए युग का आरंभ है।” उन्होंने कहा कि मोदी जी के मार्गदर्शन से अयोध्या में हो रहा हर कार्य प्रभु श्री राम के जीवन मूल्यों से प्रेरित है। योगी ने कहा कि अयोध्या के वैभव को पुनः प्राप्त करने के पीछे असंख्य संतो, राम भक्तों और योद्धाओं के बलिदान की गौरव गाथा है। योगी ने कहा, “अयोध्या विजन-2047 आज तीव्र गति से साकार हो रहा है। नई कनेक्टिविटी, अत्याधुनिक आधारभूत संरचना, तीव्र गति से हो रहा पर्यटन विकास, स्मार्ट सिटी और सोलर सिटी आदि के चलते वैश्विक स्तर पर अयोध्या नगरी एक टिकाऊ एवं समावेशी आधुनिक शहर के रूप में स्थापित हो रही है।” उन्होंने कहा, “करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए श्री अयोध्या धाम तक पहुंचना पहले से कहीं अधिक सहज, सुरक्षित और सुगम हुआ है। प्रभु श्री राम की नगरी का विश्व मानचित्र पर सांस्कृतिक राजधानी के रूप में उदय हो रहा है, जहां विरासत का सम्मान भी है और अभूतपूर्व विकास भी है।” योगी ने कहा, “मेरी यही कामना है कि धर्म ध्वजा की पुनर्स्थापना से प्रदेश में सुख, शांति और समृद्धि के नये युग का आरंभ हो। आइए हम सभी मिलकर राम राज्य के आदर्शों से प्रेरित एक नव उत्तर प्रदेश के निर्माण का संकल्प लें।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रविवार को जी20 समिट के दौरान IBSA (भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका) नेताओं की बैठक में आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद जैसी गंभीर चुनौती पर किसी भी तरह के दोहरे मापदंड की कोई जगह नहीं है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने तीन देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) स्तर पर नियमित बैठकों की स्थापना का सुझाव भी दिया, ताकि सुरक्षा सहयोग को और मजबूत किया जा सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि IBSA तीन महाद्वीपों और तीन प्रमुख लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ता है और यह एक महत्वपूर्ण मंच है जो एकजुटता, सहयोग और मानवता का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक संस्थाएं 21वीं सदी की वास्तविकताओं को पूरी तरह नहीं दर्शाती हैं। इस संदर्भ में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि IBSA को इस मुद्दे पर एकजुट संदेश देना चाहिए।पीएम मोदी ने कई नए प्रस्ताव भी रखे। इनमें “IBSA डिजिटल इनोवेशन अलायंस” और “IBSA फंड फॉर क्लाइमेट-रेसिलिएंट एग्रीकल्चर” शामिल हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म और महिला नेतृत्व वाली तकनीकी पहल को साझा करने के लिए IBSA एक अग्रणी भूमिका निभा सकता है। इससे डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा मिलेगा और वैश्विक दक्षिण के लिए स्केलेबल समाधान तैयार होंगे।प्रधानमंत्री ने IBSA के विकास और वैश्विक कल्याण में योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि मिलेट्स, प्राकृतिक कृषि, हरित ऊर्जा और पारंपरिक चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में सहयोग करके IBSA वैश्विक स्तर पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। पीएम मोदी ने बताया कि IBSA फंड ने 40 देशों में 50 परियोजनाओं को लागू किया, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और सौर ऊर्जा शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज की दुनिया कई मोर्चों पर विभाजित प्रतीत होती है, ऐसे समय में IBSA एकजुटता, सहयोग और मानवता का संदेश दे सकता है। उन्होंने इसे तीन लोकतांत्रिक देशों की जिम्मेदारी और ताकत बताया। - हाथरस. हाथरस जिले में मंदिर से पूजा कर लौट रहे मां- बेटे की रविवार को सड़क हादसे में मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, यह हादसा हाथरस गेट कोतवाली क्षेत्र में इगलास मार्ग पर तब हुआ जब एक डंपर ने शिक्षा मित्र ललितेश शर्मा (40) और उनके 14 वर्षीय बेटे उदय शर्मा को टक्कर मार दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वह पति तेजस शर्मा और बेटे के साथ मंदिर गईं थीं और वहां पूजा करने के बाद लौट रही थीं। उनके मुताबिक, डंपर की टक्कर लगने के बाद सड़क पर घायल पड़े मां-बेटे को मौके पर मौजूद लोगों ने जिला बागला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टर ने दोनों को मृत्यु घोषित कर दिया। पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) योगेंद्र कृष्ण नारायण ने बताया कि दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। सीओ ने बताया कि पुलिस ने डंपर को जब्त कर चालक को हिरासत में ले लिया है और तहरीर के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।
- लखनऊ. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉक्टर मोहन राव भागवत ने रविवार को कहा कि नैतिक भ्रम, संघर्ष और शांति की कमी से जूझ रहे विश्व के लिए भगवद् गीता कालातीत मार्गदर्शन प्रदान करती है। यहां जनेश्वर मिश्र पार्क में रविवार को आयोजित ''दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव'' को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल औपचारिकता मात्र नहीं है, बल्कि लोगों को गीता के अनुसार जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा, “हम यहां इसलिए हैं क्योंकि गीता को केवल सुनाना नहीं, बल्कि उसे जीना है। इसके 700 श्लोकों को पढ़ना, मनन करना और अपने दैनिक जीवन में उतारना जरूरी है।”कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में अर्जुन की दुविधा और वर्तमान वैश्विक स्थिति के बीच समानताएं दर्शाते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख ने कहा कि भौतिक प्रगति के बावजूद आज विश्व “भटक गया है, थक गया है और दिशाहीन है।” उन्होंने कहा, “यहां धन और आराम तो है, लेकिन शांति नहीं है, संतोष नहीं है, नैतिक स्पष्टता नहीं है।” भागवत ने कहा कि भारत के प्राचीन ज्ञान ने हजारों वर्षों तक विश्व का मार्गदर्शन किया है और गीता उस ज्ञान का सार है। उन्होंने कहा, “जिस प्रकार कृष्ण ने अर्जुन का भ्रम दूर किया, उसी प्रकार गीता आज मानवता को उसकी चुनौतियों का सामना करने में मदद कर सकती है।” भागवत ने कहा कि गीता हमें समस्याओं से भागने के बजाय उनका सामना करते हुए साहसी बनने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा, “कृष्ण अर्जुन से कहते हैं - ‘भागो मत। दृढ़ रहो, समस्या का सामना करो और अहंकार या भय के बिना कार्य करो'।” संघ प्रमुख ने कहा कि सच्ची ताकत निस्वार्थ भाव से अपना कर्तव्य निभाने में निहित है।उन्होंने कहा, “स्वार्थपूर्ण इरादे से किए गए महान कार्य कोई लाभ नहीं पहुंचाते। दूसरों के कल्याण के लिए किए गए छोटे-छोटे कार्य भी अपार मूल्य रखते हैं।” भागवत ने यह भी कहा कि भारत की सभ्यतागत पहचान हजारों वर्षों से गौरव और प्रतिकूलता दोनों को झेलती रही है। उन्होंने कहा, “भारत कभी विश्वगुरु था। इसने सदियों तक आक्रमणों को सहन किया और अब भी कायम है। फिर से उठ खड़े होने के लिए, हमें अपने सार को समझना होगा।” आरएसएस प्रमुख ने लोगों से गीता का अध्ययन करने, उसका अर्थ समझने और धीरे-धीरे उसकी शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “अगर हम गीता को अपनाएंगे, तो हमारा जीवन बदलेगा, समाज बदलेगा और भारत पुनः विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर होगा।” भागवत ने गीता के ज्ञान को सरल और व्यावहारिक व्याख्याओं के माध्यम से सुलभ बनाने की पहल की सराहना की।
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रविवार को जी20 शिखर सम्मेलन के तीसरे सत्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि दुनिया को उभरती और महत्वपूर्ण तकनीकों के निर्माण और उपयोग के तरीकों पर गहन पुनर्विचार करने की जरूरत है। यह सत्र “सभी के लिए न्यायसंगत भविष्य क्रिटिकल मिनरल्स, सम्मानजनक रोजगार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” विषय पर आयोजित किया गया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीकी विकास का मॉडल मानव-केंद्रित होना चाहिए, न कि केवल वित्त-केंद्रित। उन्होंने बताया कि तकनीक वैश्विक होनी चाहिए, खुले स्रोत पर आधारित होनी चाहिए और सभी देशों को समान लाभ पहुंचाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने इसी सोच को अपनाकर अंतरिक्ष, एआई और डिजिटल पेमेंट जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है।प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रणनीति पर जोर देते हुए कहा कि देश का ध्यान समान पहुंच, बड़े स्तर पर स्किलिंग और जिम्मेदार एआई उपयोग पर केंद्रित है। उन्होंने बताया कि भारत की एआई मिशन उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ा रहा है ताकि एआई का लाभ हर नागरिक तक पहुंच सके।पीएम मोदी ने दुनिया से एक वैश्विक एआई कॉम्पैक्ट बनाने की अपील की, जिसमें पारदर्शिता, मानव निगरानी, सुरक्षा-आधारित डिजाइन और एआई के दुरुपयोग को रोकने जैसे सिद्धांत शामिल हों। उन्होंने कहा कि “एआई मानव क्षमताओं को बढ़ाए, लेकिन अन्तिम निर्णय हमेशा इंसानों के हाथ में होना चाहिए।”प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि भारत फरवरी 2026 में “एआई इम्पैक्ट समिट” की मेजबानी करेगा, जिसका विषय -‘सर्वजनहिताय, सर्वजनसुखाय’ होगा यानी ‘सभी के हित और सभी के सुख के लिए’। उन्होंने सभी जी20 देशों को इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। तेजी से बदलती तकनीकों के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया को “आज की नौकरियों” से आगे बढ़कर “भविष्य की क्षमताओं” पर ध्यान देना होगा। उन्होंने प्रतिभा गतिशीलता पर भारत की अगुवाई में हुए प्रगति को आगे बढ़ाते हुए आने वाले वर्षों में एक ग्लोबल फ्रेमवर्क फॉर टैलेंट मोबिलिटी बनाने का प्रस्ताव रखा।अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत वैश्विक कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। भारत हमेशा ऐसी विकास प्रणाली का समर्थन करता है जो टिकाऊ हो, ऐसा व्यापार जो विश्वास पर आधारित हो, ऐसी फाइनेंस प्रणाली जो न्यायपूर्ण हो और ऐसी प्रगति जो सभी को समृद्धि दे।
- -यह ऑपरेशन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नशामुक्त भारत के विजन की दिशा में एजेंसियों के बीच सीमलैस समन्वय का एक शानदार उदाहरण था-हमारी सरकार Top-to-bottom और bottom-to-top अप्रोच से ड्रग कार्टेल को खत्म कर रही है-नई दिल्ली में ₹262 करोड़ कीमत के 328 kg मेथामफेटामाइन की जब्ती और दो लोगों को गिरफ्तारी से बहुत बड़ी कामयाबी मिली-यह दिल्ली में हुई मेथामफेटामाइन की सबसे बड़ी ज़ब्ती में से एक है-ऑपरेशन “Crystal Fortress” NCB द्वारा सिंथेटिक ड्रग कार्टेल और उनके ट्रांस-नेशनल नेटवर्क को खत्म करने के प्रति सरकार के सफल प्रयासों को दर्शाता हैनई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने ऑपरेशन “Crystal Fortress” के तहत मेगा ट्रांस-नेशनल मेथामफेटामाइन कार्टेल के भंडाफोड़ के लिए NCB और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम को बधाई दी। X पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि हमारी सरकार बहुत तेज़ी से ड्रग कार्टेल को खत्म कर रही है। उन्होंने कहा कि ड्रग्स की जांच के लिए Top-to-bottom और bottom-to-top अप्रोच को सख्ती से अपनाते हुए, नई दिल्ली में ₹262 करोड़ कीमत का 328 kg मेथामफेटामाइन की ज़ब्ती और दो लोगों को गिरफ्तारी से एक बड़ी कामयाबी मिली। श्री शाह ने कहा कि यह ऑपरेशन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नशामुक्त भारत के विज़न की दिशा में कई एजेंसियों के बीच सीमलैस तालमेल का एक शानदार उदाहरण था। NCB और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम को बधाई।एक बड़ी कामयाबी में, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (OPS ब्रांच) ने स्पेशल सेल (CI) दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर 20.11.2025 को ऑपरेशन क्रिस्टल फोर्ट्रेस के तहत छतरपुर, दिल्ली के एक घर से करीब 328 किलोग्राम हाई-क्वालिटी मेथामफेटामाइन ज़ब्त कर एक ट्रांस-नेशनल ट्रैफिकिंग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। ऑपरेशन क्रिस्टल फोर्ट्रेस एक समन्वित और इंटेलिजेंस-ड्रिवन अभियान था जो सिंथेटिक ड्रग की अधिक मात्रा वाले नेटवर्क को टारगेट कर रहा था।यह अहम कार्रवाई पिछले कुछ महीनों से खुफिया जानकारी और तकनीकी इंटरसेप्ट्स के आधार पर लगातार की जा रही जांच का नतीजा है, जिससे एक ट्रैफिकिंग चेन का पता चला और यह बड़ी कामयाबी मिली।पकड़े गए दो लोगों, जिनमें नागालैंड की एक महिला भी शामिल है और जिसके घर से बड़ी मात्रा में ज़ब्ती की गई थी, को नागालैंड पुलिस के सहयोग से गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके अलावा, दूसरे लोगों की पहचान भी हो गई है। इनमें विदेश से काम करने वाला गिरोह का सरगना भी शामिल है। वह पिछले साल दिल्ली में NCB द्वारा 82.5 किलोग्राम हाई-ग्रेड कोकीन ज़ब्ती के मामले में भी वांछित है। इंटरनेशनल एनफोर्समेंट पार्टनर्स के साथ मिलकर, उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए भारत लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।यह दिल्ली में मेथमफेटामाइन की सबसे बड़ी ज़ब्ती में से एक है। शुरुआती जांच से पता चला है कि यह कार्टेल कई कूरियर, सेफ-हाउस और लेयर्ड हैंडलर के ज़रिए काम कर रहा था और दिल्ली को भारत और विदेशी बाज़ार में इसके डिस्ट्रीब्यूशन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।ऑपरेशन “क्रिस्टल फोर्ट्रेस” सिंथेटिक ड्रग कार्टेल और उनके ट्रांस-नेशनल नेटवर्क को खत्म करने के प्रति NCB की प्रतिबद्धता को दिखाता है। ड्रग ट्रैफिकिंग से लड़ने के लिए, देशवासी NCB की मदद करें। कोई भी व्यक्ति MANAS- नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन टोल फ्री नंबर-1933 पर कॉल कर नशीले पदार्थों की बिक्री से जुड़ी जानकारी शेयर कर सकता है।
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नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे पी नड्डा ने शनिवार को देश को एकजुट करने में सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान की सराहना की और आरोप लगाया कि कांग्रेस की ‘‘साजिश'' के कारण भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री को आजादी के बाद चार दशकों तक इतिहास में वह सम्मान नहीं मिल सका जिसके वह ‘‘सच्चे हकदार'' थे। नड्डा ने कहा कि अगर किसी ने सरदार पटेल को देश के इतिहास में ‘‘सही और उचित स्थान'' दिया है, तो वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं। भाजपा अध्यक्ष ने पटेल की जयंती के उपलक्ष्य में ‘‘ऐट 150 यूनिटी मार्च' को हरी झंडी दिखाने के बाद एक कार्यक्रम में ये टिप्पणियां कीं। पटेल भारत के पहले गृह मंत्री भी रहे। नड्डा ने कहा, ‘‘अंग्रेज चाहते थे कि भारत कमजोर और विभाजित रहे। हमें उस मानसिकता से भी मुक्ति मिली। हमारा देश 562 रियासतों में बंटा हुआ था। हम विदेशी शासन के अधीन रहे क्योंकि हम विभाजित थे।'' उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने दो साल के भीतर इन रियासतों को एकजुट कर एक राष्ट्र बनाया। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा, ‘‘उन्होंने एक विभाजित भूमि को एक मजबूत और एकजुट भारत - ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत' में बदल दिया। लेकिन दुर्भाग्य से इतिहास और देश में उन्हें जो सम्मान मिलना चाहिए था, उसकी कांग्रेस के शासनकाल में कांग्रेस नेताओं ने दुर्भावनापूर्ण और स्वार्थी कारणों से अनदेखी की।'' भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि आजादी के बाद चार दशकों (1950 से 1991) तक कांग्रेस सत्ता में रही, फिर भी तब के किसी भी प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल को भारत रत्न नहीं दिया। नड्डा ने आरोप लगाया, ‘‘यह सुनिश्चित करने के लिए षड्यंत्र रचे गए कि इतिहास में उन्हें वह सम्मान न मिले जिसके वह हकदार थे।'' उन्होंने कहा कि अगर किसी ने यह सुनिश्चित किया है कि सरदार पटेल को इतिहास में उनका उचित स्थान मिले, तो वह प्रधानमंत्री मोदी हैं। नड्डा ने कहा, ‘‘वास्तव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सरदार पटेल को सच्ची श्रद्धांजलि दी। उनके नेतृत्व में केवडिया में सरदार पटेल की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा का निर्माण किया गया।
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हैदराबाद. तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बी शिवधर रेड्डी के समक्ष शनिवार को 37 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें से तीन शीर्ष स्तर के माओवादी थे। रेड्डी ने संवाददाताओं को बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में तीन राज्य समिति सदस्य, तीन संभागीय समिति सदस्य, नौ क्षेत्र समिति सदस्य और 22 अन्य भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के सदस्य शामिल हैं। डीजीपी ने बताया कि तीन राज्य समिति के सदस्य कोय्यदा सांबैया (49) उर्फ आजाद, अप्पासी नारायण उर्फ रमेश (70), और मुचाकी सोमादा हैं। सांबैया और नारायण तेलंगाना समिति से संबंधित हैं, जबकि सोमादा माओवादियों की दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति का हिस्सा था। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने एक एके-47 राइफल, दो एसएलआर राइफल, चार 303 राइफल, एक जी3 राइफल और 346 राउंड गोलियां सौंपी। शिवधर रेड्डी ने कहा कि माओवादियों ने मुख्यधारा में शामिल होने की मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी की अपील पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि निरंतर माओवादी विरोधी अभियान, वैचारिक मतभेद और संगठन के भीतर आंतरिक दरार ने उनके आत्मसमर्पण के निर्णय को प्रभावित किया। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों पर कुल 1.40 करोड़ रुपये का नकद इनाम है, जिसमें सांबैया और नारायण पर 20-20 लाख रुपये का इनाम है। डीजीपी ने भाकपा (माओवादी) के सभी कार्यकर्ताओं से आगे आने और मुख्यधारा में शामिल होने का आग्रह किया।
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नयी दिल्ली. सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने शनिवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर एक ‘‘विश्वसनीय ऑर्केस्ट्रा'' था, जिसमें प्रत्येक संगीतकार (सशस्त्र बलों के पक्ष) ने ‘‘सटीकता और समन्वय'' के साथ भूमिका निभाई और इसी कारण केवल 22 मिनट में भारतीय सशस्त्र बल नौ आतंकवादी ठिकानों को नष्ट कर सके। दिल्ली स्थित एक प्रबंधन संस्थान के दीक्षांत समारोह में अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह सैन्य अभियान बदलती स्थिति का पूर्वानुमान लगाने की “दूरदर्शिता” को दर्शाता है। उन्होंने कहा, ‘‘यह प्रतिक्रिया उस क्षण में नहीं, बल्कि वर्षों की कल्पना के माध्यम से बनी थी कि किस प्रकार खुफिया जानकारी, सटीकता और प्रौद्योगिकी को कार्रवाई में परिवर्तित किया जा सकता है।'' भारत ने सात मई की सुबह सैन्य अभियान शुरू किया था और पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में कई आतंकवादी ढांचों को नष्ट किया था। पाकिस्तान ने भी भारत के खिलाफ अभियान शुरू किया था और उसके बाद भारत द्वारा की गई सभी जवाबी कार्रवाई भी ‘ऑपरेशन सिंदूर' के तहत की गई। दोनों परमाणु-सशस्त्र पड़ोसियों के बीच लगभग 88 घंटे तक चला सैन्य संघर्ष 10 मई की शाम को सहमति बनने के बाद रुक गया था। सेना प्रमुख ने कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर एक भरोसेमंद ऑर्केस्ट्रा की तरह था, जिसमें प्रत्येक संगीतकार (सशस्त्र बलों के पक्ष) ने ‘‘सटीकता और समन्वय'' के साथ भूमिका निभाई । इस तरह हम 22 मिनट में नौ आतंकवादी ठिकानों को तबाह कर सके और 80 घंटों में यह सुनिश्चित कर सके कि लड़ाई खत्म हो। लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर हमने पूरी टीम पर भरोसा न किया होता, तो निर्णय लेने का समय ही नहीं मिलता।'' नयी दिल्ली प्रबंधन संस्थान (एनडीआईएम) द्वारा आयोजित समारोह में अपने संबोधन में जनरल द्विवेदी ने स्नातक छात्रों से कहा कि वे ‘‘बुद्धिमत्ता, विनम्रता और शक्ति'' के साथ नेतृत्व करें। उन्होंने कहा, ‘‘तो आज जब आप आगे बढ़ रहे हैं, याद रखें कि दुनिया कभी स्थिर नहीं रहती, बाजार बदलते रहेंगे, तकनीक विकसित होती रहेगी और आपकी खुद की महत्वाकांक्षाएं भी बदलेंगी। फिर भी, इन सब के बीच आपकी सबसे बड़ी ताकत छिपी है-सीखने का साहस, बदलने की क्षमता और उद्देश्य के साथ नेतृत्व करने का नजरिया। बदलाव वह नहीं है जो हमारे साथ होता है, बल्कि वह है जिसे हम इसके जरिए बनने का चुनाव करते हैं।'' जनरल के संबोधन का विषय था ‘परिवर्तन का मार्ग: वास्तविक स्थिरता'। उन्होंने उभरते वैश्विक गतिशीलता, विघटनकारी शक्ति के रूप में प्रौद्योगिकी और आगे की राह के लिए चिंतन पहलुओं पर बात की। उन्होंने कहा, ‘‘जैसे-जैसे 21वीं सदी आगे बढ़ी, दीर्घकालिक शांति प्रतिस्पर्धा, विरोध और संघर्ष के विवादास्पद परिदृश्य में बदल गई। आज दुनिया भर में 55 से अधिक संघर्ष जारी हैं, जिनमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 100 से अधिक देश शामिल हैं, जिससे शांति और संघर्ष के बीच की सीमा धुंधली होती जा रही है।'' सेना प्रमुख ने कहा कि जैसे-जैसे युद्धक्षेत्र धुंधले होते गए, वैसे-वैसे बाजार भी धुंधले होते गए।
उन्होंने कहा कि आज व्याकरण की किताब के छह अध्याय पारंपरिक रेन और मार्टिन की अंग्रेजी व्याकरण की किताब से अलग हैं। उन्होंने कहा कि इसमें ‘‘सहयोग (कोऑपरेशन), सहकारिता (कॉलेबोरेशन), सह-अस्तित्व (को-एक्सिस्टेंस), प्रतिस्पर्धा (कम्पीटिशन), प्रतिद्वंद्विता (कॉन्टेस्टेशन) और संघर्ष (कॉन्फ्लिक्ट) शामिल हैं। उन्होंने कहा,‘‘तो, ये ‘6सी' हैं, जिन्हें हमें एक साथ जानना होगा। क्योंकि, हमारे रणनीतिक आदान-प्रदान में भी, हम ‘6सी' से निपटते हैं और भविष्य में आप भी इनसे निपटेंगे।'' सेना प्रमुख ने सैन्य विकास में तकनीक के महत्व को रेखांकित किया।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि आज वह ‘‘लगभग 1.3 करोड़ सैनिकों, सेवानिवृत्त सैनिकों और उनके परिवारों के समुदाय'' का नेतृत्व कर रहे हैं, जो भारतीय जनसंख्या का एक प्रतिशत है। उन्होंने अशांति के समय में अवसर तलाशने की भी बात कही। -
मुंबई. भाजपा नेता चित्रा वाघ ने पूछा है कि क्या दूसरी भाषा बोलने वालों के लिए नफरत भड़काने वाले नेता ठाणे जिले में 18 वर्षीय युवक की मौत की जिम्मेदारी लेंगे। कल्याण के रहने वाले अर्नव खैरे ने अपने घर पर कथित तौर पर फंदे से लटककर जान दे दी। लोकल ट्रेन में झगड़े के बाद कुछ यात्रियों ने उस पर हमला कर दिया था, जिसके बाद उसने यह कदम उठाया। झगड़े के दौरान खैरे से कथित तौर पर पूछा गया था कि वह मराठी में क्यों नहीं बोलता है। किसी भी राजनीतिक पार्टी का नाम लिए बिना, विधानपरिषद सदस्य वाघ ने शुक्रवार को कहा कि कुछ नेताओं ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए "दूसरी भाषाओं के बारे में नफरत का जहर बोया है।" उन्होंने कहा, "अर्नव इस तरह के जहर का पहला शिकार है। उसकी क्या गलती थी? वह प्रथम श्रेणी (डिब्बे) में सफ़र करता था, लेकिन उसका पास खत्म हो गया था, इसलिए उसने द्वितीय श्रेणी का टिकट लिया। सिर्फ़ इसलिए कि उसने कुछ हिंदी शब्द बोला, उसे बुरी तरह पीटा गया। एक भाषा को दूसरी भाषा के ख़िलाफ़ खड़ा करने की राजनीति इसकी वजह है।" उन्होंने पूछा, "ये तथाकथित नेता अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में, विदेशों में भेजते हैं। क्या ये बच्चे पार्टियों में जाते समय मराठी बोलते हैं?" वाघ ने कहा कि ऐसी नफरत फैलाने से बड़ा कोई "पाप" नहीं हो सकता, जिसकी वजह से एक मराठी लड़के की जान चली गई। उन्होंने कहा कि भाषा को लेकर उन्माद रूकना चाहिए।
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नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात चर्चा का विषय बनी रही। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का मुस्कुराकर नमस्ते कहकर अभिवादन किया और हाथ मिलाकर एक-दूसरे का हालचाल पूछे। उनकी यह मुलाकात भारत और इटली के बीच बढ़ती दोस्ती और मजबूत साझेदारी को दर्शाती है।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी के दक्षिण अफ्रीका पहुंचने पर राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद कार्यक्रम स्थल पर पीएम मोदी और पीएम मेलोनी का आमना-सामना हुआ। दोनों देशों के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। जून 2025 में कनाडा के कनानास्किस में हुए 51वें जी7 समिट के दौरान भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी, जहां द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी थी।वहीं सितंबर 2025 में प्रधानमंत्री मोदी ने पीएम मेलोनी को एक असाधारण नेता बताया था और उनकी ऑटोबायोग्राफी ‘I Am Giorgia’ की भारतीय संस्करण की प्रस्तावना लिखते हुए दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक सोच-विरासत संरक्षण, समुदाय की शक्ति और नारीत्व के उत्सव का उल्लेख किया था। इस पुस्तक की प्रस्तावना में मोदी ने भारत-इटली रिश्तों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जाहिर की थी।इटैलियन न्यूज एजेंसी एडनक्रोनोस के अनुसार, मेलोनी ने भी पीएम मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा था कि उनकी प्रस्तावना में लिखे शब्दों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि यह शब्द दोनों देशों के बीच भरोसे और मजबूत रिश्तों को और स्पष्ट करते हैं।इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके 75वें जन्मदिन पर बधाई भी दी थी और एक तस्वीर साझा की थी। पीएम मोदी ने मेलोनी का धन्यवाद करते हुए भारत-इटली संबंधों को और मजबूत करने की आशा जताई थी।दोनों नेताओं ने 10 सितंबर को टेलीफोन पर बातचीत भी की थी, जिसमें भारत-इटली स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप को और मजबूत करने पर सहमति जताई गई। मेलोनी ने 2026 में भारत द्वारा आयोजित किए जाने वाले ‘AI Impact Summit’ के लिए भी अपना समर्थन दिया था।










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