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मुंबई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का निर्माण सभी को विश्वास में लेकर किया जाना चाहिए और इससे मतभेद नहीं पैदा होने चाहिए। यह पूछे जाने पर कि क्या आरएसएस के लिए "अच्चे दिन" भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने के बाद आए, भागवत ने कहा कि मामला "इसके विपरीत" था। उन्होंने कहा कि संघ अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के प्रति प्रतिबद्ध रहा और उसका समर्थन करने वालों को इसका फायदा मिला। हिंदुत्व विचारक वीडी सावरकर को 'भारत रत्न' से अलंकृत किए जाने की लंबे समय से जारी मांग पर भागवत ने कहा कि अगर उन्हें (सावरकर को) यह सम्मान प्रदान किया जाता है, तो इसकी प्रतिष्ठा और बढ़ जाएगी। भागवत आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में रवीना टंडन, विकी कौशल, अनन्या पांडे, करण जौहर, मधुर भंडारकर, रमेश तौरानी और पंडित हृदयनाथ मंगेशकर सहित कई दिग्गज फिल्मी हस्तियां मौजूद थीं। भागवत ने कहा कि यूसीसी का निर्माण सभी को विश्वास में लेकर किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, "इससे मतभेद नहीं पैदा होने चाहिए। उत्तराखंड में तीन लाख सुझाव हासिल हुए और सभी हितधारकों से चर्चा के बाद अधिनियम पारित किया गया।" एक अन्य सवाल के जवाब में संघ प्रमुख ने कहा कि कोई बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक (समुदाय) नहीं है, "हम सब एक ही समाज हैं।" उन्होंने मुस्लिम और ईसाई समुदाय के लोगों के साथ विश्वास, मित्रता और संवाद कायम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। भागवत ने कहा, "इस्लाम को शांति का धर्म कहा जाता है, लेकिन शांति दिखाई नहीं देती। अगर धर्म में आध्यात्मिकता न हो, तो वह प्रभुत्वशाली और आक्रामक हो जाता है। आज इस्लाम और ईसाई धर्म में जो कुछ देखा जा रहा है, वह ईसा मसीह और पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं के अनुसार नहीं है। हमें वास्तविक इस्लाम और ईसाई धर्म के अनुसरण की आवश्यकता है।" भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए अंतरिम व्यापार समझौते के बारे में भागवत ने कहा कि उन्हें इसकी विस्तृत जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, "यह सच है कि हम अलग-थलग नहीं रह सकते। सौदों में लेन-देन होता है। यह दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होना चाहिए... हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमें नुकसान न हो।" अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति कायम हो गई है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, "अब भारत में निर्मित उत्पादों पर 'टैरिफ' घटकर 18 प्रतिशत हो जाएगा।" भागवत ने एक सवाल के जवाब में कहा, "हमारे (आरएसएस) लिए अच्छे दिन भाजपा की वजह से नहीं आए... बल्कि मामला इसके विपरीत था। हम राम मंदिर के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध रहे। जिन्होंने हमारा समर्थन किया, उन्हें लाभ मिला।" उन्होंने कहा, "आरएसएस के लिए 'अच्छे दिन' स्वयंसेवकों की कड़ी मेहनत और वैचारिक नीतियों के प्रति प्रतिबद्धता के कारण आए।" भागवत ने कहा कि आरएसएस जरूरत पड़ने पर सलाह देता है। उन्होंने कहा, "उनके गलत कर्मों का दोष हम पर इसलिए मढ़ा जाता है, क्योंकि वे हमारे भीतर से ही निकले हैं।" भागवत ने कहा कि राजनीतिक दबाव मतदाताओं की तरफ से आता है, न कि आरएसएस की तरफ से।
यह पूछे जाने पर कि 100 वर्षों में वामपंथियों का जनाधार क्यों नहीं बढ़ा, भागवत ने कहा कि आरएसएस उन्हें मार्गदर्शन दे सकता है, बशर्ते वे इसकी मांग करें। संघ प्रमुख ने कहा कि आरएसएस एक युवा संगठन है, जिसके कार्यकर्ताओं की औसत आयु 28 साल है। उन्होंने कहा, "हम इसे घटाकर 25 साल करना चाहते हैं।" -
मुंबई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि अगर संघ उन्हें पद से हटने के लिए कहेगा तो वह इस्तीफा दे देंगे और इस संगठन ने ही उनसे उनकी उम्र के बावजूद काम जारी रखने के लिए कहा है। भागवत ने यह भी कहा कि संघ का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति हमेशा एक हिंदू ही होगा, चाहे उसकी जाति कुछ भी हो और शीर्ष पद सबसे योग्य उम्मीदवार को ही दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ''आरएसएस प्रमुख के पद के लिए कोई चुनाव नहीं होता। क्षेत्रीय और मंडल प्रमुख ही संघ प्रमुख की नियुक्ति करते हैं। आम तौर पर कहा जाता है कि 75 वर्ष की आयु के बाद किसी को कोई पद धारण किए बिना काम करना चाहिए।'' वह आरएसएस शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के साथ एक संवादात्मक सत्र के दौरान प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे। उन्होंने कहा, ''मैंने 75 वर्ष पूरे कर लिए और मैंने आरएसएस को इसकी सूचना भी दे दी थी, लेकिन संगठन ने मुझसे काम जारी रखने को कहा। जब भी आरएसएस मुझसे पद छोड़ने को कहेगा, मैं पद छोड़ दूंगा लेकिन काम से सेवानिवृत्ति कभी नहीं होगी।'' भागवत ने कहा कि आरएसएस में समुदाय आधारित प्रतिनिधित्व नहीं है और स्वयंसेवक अपने काम के आधार पर पदोन्नति पाते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस प्रमुख को हिंदू होना चाहिए चाहे उसकी जाति कोई भी हो। उन्होंने बताया कि जब आरएसएस की स्थापना हुई थी, तब इसका काम ब्राह्मण-बहुल समुदाय में शुरू हुआ था और इसलिए इसके अधिकांश संस्थापक ब्राह्मण थे, जिसके कारण उस समय संगठन को ब्राह्मण संगठन के रूप में जाना जाता था। उन्होंने कहा कि लोग हमेशा ऐसे संगठन की तलाश करते हैं जिसमें उनके समुदाय के प्रतिनिधि हों।
भागवत ने कहा कि वह इस बारे में कोई निश्चित जवाब नहीं दे सकते कि संघ प्रमुख अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति पृष्ठभूमि से होगा या नहीं क्योंकि यह निर्णय संघ प्रमुख की नियुक्ति करने वालों पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, ''अगर मुझे किसी प्रमुख का चयन करना होता, तो मैं 'सबसे योग्य उम्मीदवार' के मानदंड को अपनाता। जब मुझे आरएसएस प्रमुख नियुक्त किया गया था, तब कई योग्य उम्मीदवार थे लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे। मैं ही वह व्यक्ति था जिसे कार्यभार से मुक्त किया जा सकता था और नियुक्त किया जा सकता था।'' उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से होना अयोग्यता नहीं है, और न ही ब्राह्मण होना संघ प्रमुख बनने की योग्यता है। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि परिस्थितियां सहायक या प्रतिकूल हो सकती हैं और उन पर अत्यधिक ध्यान देने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा, ''हमें समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय समाधान खोजने पर ध्यान देना चाहिए। जब तक सच्चाई सामने नहीं आती, भ्रम बना रहता है।'' भागवत ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि संगठन ''अपने स्वयंसेवकों से खून के आखिरी कतरे तक काम निकलवाता है'' और उन्होंने दावा किया कि आरएसएस के इतिहास में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई है जब किसी को सेवानिवृत्त करना पड़ा हो। उन्होंने कहा कि संघ का काम संस्कारों को बढ़ावा देना है, न कि चुनाव प्रचार करना।
उन्होंने कहा, ''हम अपने प्रचार-प्रसार में पिछड़ गए हैं। अत्यधिक प्रचार से प्रसिद्धि तो मिलती है, लेकिन फिर अहंकार भी आ जाता है। इससे बचना जरूरी है। प्रचार बारिश की तरह होना चाहिए, यानी समय और मात्रा दोनों में उचित होना चाहिए।'' उन्होंने कहा कि आरएसएस जनसंपर्क अभियान चला रहा है। भागवत ने कहा कि आरएसएस के कामकाज में अंग्रेजी कभी भी संचार का माध्यम नहीं होगी क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है। उन्होंने कहा, ''हम भारतीयों के साथ काम करना चाहते हैं। जहां भी अंग्रेजी आवश्यक होगी, हम उसका उपयोग करेंगे। हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है।'' संघ प्रमुख ने कहा कि लोगों को इस तरह से अंग्रेजी बोलनी आनी चाहिए कि अंग्रेजी भाषी लोग उसे सुनना चाहें। भागवत ने कहा, ''हमें अंग्रेजी में महारत हासिल करनी चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपनी मातृभाषा को भूल जाएं।'' बेंगलुरु में हुई इसी तरह की एक बातचीत को याद करते हुए उन्होंने कहा कि कई दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधि हिंदी नहीं समझ पा रहे थे और उन्होंने उनके सवालों का जवाब अंग्रेजी में दिया था। भागवत ने कहा कि विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों से बातचीत के दौरान संवाद या तो हिंदी में होता है या उनकी मातृभाषा में, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे अंग्रेजी बोलने वाले देशों से हैं या गैर-अंग्रेजी भाषी। विरोध के बावजूद मुस्लिम समुदायों में संघ के स्वयंसेवकों के काम के बारे में पूछे जाने पर भागवत ने कहा कि अगर दोनों पक्ष एक-दूसरे का विरोध करते हैं, तो केवल टकराव होगा और कोई काम नहीं हो सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि आरएसएस किसी जाति या समुदाय को निशाना नहीं बनाता बल्कि भौगोलिक आधार पर काम करता है। संघ प्रमुख ने कहा, ''अगर किसी क्षेत्र की आबादी 10,000 है, तो हम वहां काम करने की कोशिश करते हैं। एक बार जब हम भौगोलिक रूप से फैल जाएंगे, तो सभी वर्गों और समुदायों तक हमारी पहुंच हो जाएगी। अगर आप आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व को देखें, तो लगभग सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व है।'' भागवत ने कहा कि आरएसएस भ्रष्टाचार को उजागर करने में विश्वास रखता है और इसके खिलाफ लड़ने वाले किसी भी व्यक्ति का समर्थन करता है। उन्होंने कहा, ''हमारे स्वयंसेवकों को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वालों का समर्थन करने के लिए कहा गया है। आरएसएस भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानूनों और विधानों के पक्ष में है और वह भ्रष्ट लोगों के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करेगा।'' उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार व्यवस्था में नहीं बल्कि लोगों के दिमाग में भरा पड़ा है।
भागवत ने कहा, ''कुछ लोग व्यवस्था में भ्रष्टाचार फैलाते हैं और कुछ लोग इससे लड़ते हैं।'' - मथुरा (उप्र) .यमुना एक्सप्रेसवे पर एक कंटेनर ट्रक के बस से टकरा जाने से छह लोगों की मौत हो गयी और एक अन्य घायल हो गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि यह घटना मथुरा जिले के सुरीर थाना क्षेत्र में शुक्रवार देर रात दो बजकर 45 मिनट पर हुई। सुरीर पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) अजय कुमार ने बताया कि यह दुर्घटना तब हुई जब नोएडा से कानपुर जा रही एक बस को बीच में एक यात्री के शौचालय जाने के कारण रोका गया था। उन्होंने बताया कि एक कंटेनर ने बस को बगल से टक्कर मार दी, जिससे बस से उतरकर सड़क पर खड़े छह लोगों की मौत हो गई और एक व्यक्ति घायल हो गया। थाना प्रभारी ने बताया कि घायल व्यक्ति को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। हालांकि, बस और कंटेनर चालक भाग गए। मामले की जांच जारी है।
- शिवपुरी/श्योपुर/मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता 'आशा' ने पांच शावकों को जन्म दिया है जिसके साथ ही देश में इस वन्यजीव की कुल संख्या बढ़कर 35 हो गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शनिवार को यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, "कूनो में गर्व का क्षण है। मादा चीता आशा द्वारा पांच स्वस्थ शावकों को जन्म देने से भारत में चीता संरक्षण अभियान को मजबूती मिली है। इसके साथ ही भारत में जन्मे शावकों की संख्या 24 हो गई है और कुल चीता आबादी 35 पर पहुंच गई है।" उन्होंने कहा कि नामीबिया से लाई गई मादा चीता आशा से शावकों का जन्म होना परियोजना की सफलता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह परियोजना दशकों पहले भारत में विलुप्त हो चुके दुनिया के सबसे तेज रफ़्तार प्राणी चीते के पुनर्वास के उद्देश्य से शुरू की गई है। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि के लिए वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और पशु चिकित्सकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह सफलता वनकर्मियों और विशेषज्ञों के सतत परिश्रम का परिणाम है। यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है।
- देहरादून. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किसान परंपरा, ग्रामीण जीवन और गोवंश के महत्व पर आधारित फिल्म 'गोदान' को शनिवार को प्रदेश में कर मुक्त करने की घोषणा की। यह फिल्म छह फरवरी को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हुई है।मुख्यमंत्री ने कहा कि गाय केवल धर्म और आस्था का विषय नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, समाज और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गोवंश संरक्षण को लेकर निरंतर कार्य कर रही है जिसके तहत बेसहारा और निराश्रित गोवंश की बेहतर देखभाल के लिए गोसदनों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है जबकि गोपालकों और पशुपालकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'गोदान' जैसी फिल्मों के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच और संवेदनशीलता विकसित होती है, इसलिए ऐसी फिल्मों को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सामाजिक, सांस्कृतिक और जनहित से जुड़े विषयों पर बनी फिल्मों और रचनात्मक प्रयासों को भविष्य में भी प्रोत्साहन देती रहेगी।
- जम्मू. पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के कारण पर्यटन उद्योग को लगे झटके के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर आने के लिए देश भर से पर्यटकों का उत्साह कम नहीं हुआ है। शाह केंद्र शासित प्रदेश में विकास परियोजनाओं की प्रगति का आकलन करने के लिए जम्मू में एक समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, ''देश भर से जम्मू-कश्मीर आने वाले पर्यटकों का उत्साह कम नहीं हुआ है। जम्मू-कश्मीर की पर्यटन संभावनाओं को उजागर करने के लिए अन्य राज्यों में इसके पर्यटन स्थलों का जोर शोर से प्रचार करने की आवश्यकता है।'' शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में नए पर्यटन स्थल विकसित करने की योजना में हर संभव सहायता प्रदान करेगी। लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से जुड़े पाकिस्तानी आतंकवादियों ने पिछले साल 22 अप्रैल को दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों को निशाना बनाया, जिसमें 26 लोग मारे गए। इस घटना से जम्मू-कश्मीर में पर्यटन उद्योग को गंभीर झटका लगा।
- मुंबई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भगवत ने शनिवार को कहा कि संघ किसी के ''खिलाफ'' नहीं है और ना ही वह सत्ता या लोकप्रियता चाहता है। भागवत ने यहां जनसभा को संबोधित करते हुए स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उभरी विभिन्न विचारधाराओं का उल्लेख किया, जिनका प्रतिनिधित्व राजा राम मोहन रॉय, स्वामी विवेकानंद और दयानंद सरस्वती सहित सुधारकों और नेताओं ने किया। उन्होंने कहा, "हालांकि फिर भी यह देखा जा रहा है कि समाज को दिशा देने और अनुकूल वातावरण बनाने का काम नहीं हो रहा है।" भागवत ने कहा कि आरएसएस ''किसी के खिलाफ नहीं है'' और किसी घटना की प्रतिक्रिया के रूप में काम नहीं करता है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य देश में जारी सकारात्मक प्रयासों का समर्थन और उन्हें मजबूत करना है। भगवत ने कहा कि संघ कोई अर्धसैनिक बल नहीं है, भले ही वह नियमित 'पथ संचलन' करता है और उसके स्वयंसेवक लाठी चलाते हैं, लेकिन इसे एक अखाड़े के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरएसएस राजनीति में भी शामिल नहीं है, हालांकि संघ से जुड़े कुछ लोग राजनीतिक जीवन में सक्रिय हैं। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने वर्ष 1925 में आरएसएस की स्थापना से पहले के देश की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अंग्रेजों ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को एक "सुरक्षा वाल्व" के रूप में स्थापित किया, लेकिन भारतीयों ने इसे स्वतंत्रता संग्राम का शक्तिशाली साधन बना दिया। भागवत ने आरएसएस के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार का उल्लेख करते हुए उनके बचपन की कठिन परिस्थितियों का वर्णन किया, जिसमें 13 वर्ष की उम्र में प्लेग से माता-पिता का निधन और उसके बाद हुई आर्थिक कठिनाइयां शामिल थीं। भागवत ने कहा कि हेडगेवार ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसमें उनके स्कूल के दिनों में वंदे मातरम् आंदोलन भी शामिल था। भागवत ने कहा कि जब उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की, तो नागपुर के कुछ लोगों ने उन्हें मेडिकल की पढ़ाई के लिए कोलकाता भेजने हेतु धन जुटाया, जहां वह क्रांतिकारी समूहों के सम्पर्क में आये। भागवत ने उस दौर की एक घटना को याद करते हुए कहा कि हेडगेवार ने "कोकेन" नाम के कोडनेम से काम किया, जो कोकेनचंद्र नामक व्यक्ति से प्रेरित था। उन्होंने कहा कि एक बार पुलिस की टीम, जो कोकेनचंद्र को गिरफ्तार करने आई थी, गलतफहमी में हेडगेवार को ही हिरासत में ले गई और यह घटना रास बिहारी बोस की किताब में दर्ज है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कुआलालंपुर में भारतीय समुदाय को संबोधित किया। उन्होंने भारत-मलेशिया संबंधों की गहराई पर ज़ोर देते हुए कहा कि भारत की सफलता मलेशिया की प्रगति और बदले में एशिया के विकास से जुड़ी हुई है। भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, मलेशिया में दुनिया में भारतीय मूल के लोगों की दूसरी सबसे बड़ी कम्युनिटी है। यह भारत और मलेशिया के दिलों को जोड़ता है। जिस प्रदर्शनी को मैंने और पीएम अनवर इब्राहिम ने देखा, वह इस कनेक्शन को बहुत खूबसूरती से दिखाती है। आप एक जीता-जागता पुल हैं जो हमें जोड़ता है।”
पीएम मोदी दो दिवसीय दौरे पर आज शनिवार को मलेशिया पहुंचे। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेता एक साथ एक ही कार में कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हुए। कुआलालंपुर में पीएम मोदी के स्वागत में बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय पहुंचा। इस दौरान लगभग 800 लोगों ने पीएम मोदी के स्वागत में क्लासिकल और लोक नृत्य किया।इसके बाद पीएम मोदी ने अपना संबोधन शुरू किया। प्रधानमंत्री जैसे ही अपना संबोधन शुरू करने के लिए मंच पर पहुंचे, ‘मोदी-मोदी’ की गूंज शुरू हो गई। लोगों ने तालियां बजाकर पूरे उत्साह से पीएम का स्वागत किया।प्रधानमंत्री मोदी ने तमिल भाषा और संस्कृति की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा, “तमिल के लोगों ने अपने टैलेंट से मानवता की सेवा की है। मैं गर्व के साथ कहता हूं कि भारत के उपराष्ट्रपति थिरु सीपी राधाकृष्णन, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, जिन्होंने हमारे देश का बजट 9 बार प्रस्तुत किया है, और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के राज्य मंत्री मुर्गन लोगनाथन मुरुगन ये सभी तमिलनाडु से आते हैं।”उन्होंने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा,”पीएम अनवर इब्राहिम और मैं उनके पीएम बनने से पहले से ही दोस्त हैं, पिछले साल मैं आसियान समिट के लिए नहीं आ पाया था, लेकिन मैंने अपने दोस्त से वादा किया था कि मैं जल्द ही मलेशिया आऊंगा। और जैसा वादा किया था, मैं यहां हूं । यह 2026 में मेरी पहली विदेश यात्रा है। इन त्योहारों के समय में आपके साथ आकर मुझे बहुत खुशी हो रही है।”पीएम मोदी ने कहा, “आपको पता है कि प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम बहुत अच्छा गाना गाते हैं, लेकिन कई भारतीयों को यह नहीं पता। मलेशियाई पीएम के भारत दौरे के दौरान भारतीय काफी हैरान थे। उनके गाने का एक वीडियो वायरल हो गया, जिसमें वह पुराना बॉलीवुड गाना गा रहे थे। वह एमजीआर के तमिल गाने भी बहुत पसंद करते हैं।” उनके ऐसा कहते ही पीएम अनवर भी हंस पड़े।पीएम मोदी ने कहा, “इस मौके पर मलेशिया में नेताजी सर्विस सेंटर और नेताजी वेलफेयर फाउंडेशन की कोशिशों को भी सलाम करता हूं। यह सच में कमाल की बात है कि आपने सदियों से भारतीय परंपराओं को बनाए रखा है। हाल ही में, मैंने ‘मन की बात’ में आपके काम के बारे में कहा था। मैंने कहा था कि मलेशिया में 500 से ज़्यादा स्कूल हैं जो भारतीय भाषाओं में शिक्षा देते हैं।”वहीं, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने कहा, “हम आज न सिर्फ नर्तकों, बल्कि वहां मौजूद सभी लोगों के उत्साह और प्यार को महसूस कर सकते हैं। कैसे हमारे दो दोस्त, दो महान देश और मैं और आप, प्रधानमंत्री मोदी। यह सच में सम्मान की बात है। जैसा कि मैंने आपको कार में बताया था कि मैं व्यक्तिगत तौर पर बहुत उत्साहित हूं, बहुत शुक्रगुजार हूं, बहुत आभारी हूं कि मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त, भारत से एक बहुत अच्छा दोस्त मलेशिया में हमारे साथ जुड़ रहा है।”प्रधानमंत्री इब्राहिम ने कहा, “पीएम मोदी, मैंने आपके संघर्ष, आपकी राजनीतिक मुश्किलों को देखा है, और मुझे यह कहना होगा, मैं खुशकिस्मत हूं कि मैं भारत के मोदी जी का एक बहुत अच्छा पर्सनल दोस्त हूं।” -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर मलेशिया पहुंचे हैं। राजधानी कुआलालंपुर पर मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेता एक साथ, कार में कुआलालंपुर में एक कम्युनिटी इवेंट में शामिल होने लिए गए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी झलकियां साझा करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत–मलेशिया के जन-जन के बीच संबंधों का उत्सव! प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और मैं कुआलालंपुर में आयोजित सामुदायिक कार्यक्रम में जा रहे हैं।”
यह दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी भरे और व्यक्तिगत संबंधों को दिखाता है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में भारतीय समुदाय ने एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की गई।मलेशिया की राजधानी में लैंड करने पर, प्रधानमंत्री मोदी ने एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम द्वारा किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया। अनवर इब्राहिम खुद पीएम मोदी को रिसीव करने आए थे, जो दोनों नेताओं के बीच गहरे संबंधों को दिखाता है। पर एक अलग पोस्ट में, पीएम मोदी ने कहा, “कुआलालंपुर पहुंच गया हूं। एयरपोर्ट पर मेरे दोस्त, प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम द्वारा किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत से बहुत प्रभावित हूं। मैं हमारी बातचीत और भारत और मलेशिया के बीच दोस्ती के बंधन को और मजबूत करने के लिए उत्सुक हूं।”वहीं, एक एक्स पर एक पोस्ट में, विदेश मंत्रालय ने कहा कि मलेशिया भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी, विजन महासागर और इंडो-पैसिफिक विजन में एक महत्वपूर्ण पार्टनर है, और उम्मीद है कि यह दौरा करीबी और बहुआयामी द्विपक्षीय साझेदारी को नई गति देगा।विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की 7 से 8 फरवरी तक की यात्रा का मकसद 2024 में स्थापित भारत-मलेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करना है। इस दौरे के दौरान, पीएम मोदी प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे और राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों और अन्य स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत करेंगे। - नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शनिवार को दो दिवसीय यात्रा पर मलेशिया पहुंचे, इस दौरान राजधानी कुआलालंपुर के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।मलेशिया पहुंचने के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, कुआलालंपुर पहुंच गया। एयरपोर्ट पर मेरे दोस्त, प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम द्वारा दिए गए गर्मजोशी भरे स्वागत से मैं बहुत प्रभावित हुआ। मैं हमारी बातचीत का इंतज़ार कर रहा हूं और भारत और मलेशिया के बीच दोस्ती के रिश्तों को और मज़बूत करने की उम्मीद करता हूं ।प्रधानमंत्री मोदी मलेशिया में रह रहे भारतीय प्रवासियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे। पीएम मोदी की इस मुलाकात को लेकर भारतीय समुदाय में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। मलेशिया में भारतीय मूल के लोग बड़ी तादाद में हैं। इस टूर के दौरान प्रधानमंत्री के स्वागत में एक बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा जिसमें शास्त्रीय और लोक कला में माहिर कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। 800 से 1000 डांसर मंच पर एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे।इससे पहले, मलेशिया रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने प्रस्थान वक्तव्य में कहा कि भारत और मलेशिया के ऐतिहासिक संबंधों में हाल के वर्षों में निरंतर प्रगति हुई है। मैं प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ होने वाली चर्चाओं और हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए उत्सुक हूं । हमारा लक्ष्य रक्षा और सुरक्षा संबंधों को और प्रगाढ़ करना, आर्थिक और नवाचार साझेदारी को बढ़ाना और नए क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करना होगा।उन्होंने कहा कि मैं मलेशिया में रहने वाले भारतीय समुदाय से मिलने के लिए भी उत्सुक हूं । लगभग तीन मिलियन की संख्या में, वे विश्व के सबसे बड़े भारतीय प्रवासी समुदायों में से एक का प्रतिनिधित्व करते हैं। मलेशिया की प्रगति में उनका अपार योगदान और हमारे दोनों देशों के बीच एक जीवंत सेतु के रूप में उनकी भूमिका हमारी ऐतिहासिक मित्रता की मजबूत नींव है।पीएम मोदी 7-8 फरवरी को मलेशिया की 2 दिन की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। दौरा अगस्त 2024 में भारत-मलेशिया संबंधों को समग्र रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ाने के बाद हो रहा है। इस दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा और सुरक्षा सहयोग के साथ-साथ सेमीकंडक्टर क्षेत्र में साझेदारी को लेकर एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।
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मुंबई. अभिनेता सलमान खान शनिवार को मुंबई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में संगठन के प्रमुख मोहन भागवत के भाषण में पूरी तरह से तल्लीन दिखे। सलमान खान के साथ फिल्मकार सुभाष घई और गीतकार, कवि एवं लेखक प्रसून जोशी भी थे। सलमान खान ने भागवत की बात बड़े ध्यान से सुना, जिसमें उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संघ किसी का विरोध किए बिना देश के लिए काम करता है, राष्ट्रीय एकता पर ध्यान केंद्रित करता है और सत्ता की लालसा किए बिना कार्य करता है। शनिवार को वर्ली क्षेत्र के नेहरू सेंटर में 'संघ की 100 साल की यात्रा: नए क्षितिज' शीर्षक से दो दिवसीय व्याख्यान शृंखला का पहला दिन था। जैसे ही सलमान खान कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने अपने स्मार्टफोन से उनकी तस्वीरें खींचने की कोशिश की। दो दिवसीय इस कार्यक्रम का उद्देश्य आरएसएस की यात्रा, समाज में इसकी भूमिका और इसके भविष्य को आकार देने वाले विचारों और दृष्टिकोणों पर चिंतन करना है। संघ के व्यापक शताब्दी अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में आरएसएस के वरिष्ठ नेता और आमंत्रित वक्ता आम जनता के साथ चर्चा के लिए एकत्रित हुए।
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- भारत के लिए 30,000 अरब डॉलर का बाजार खुला
नयी दिल्ली- वाशिंगटन/ भारत और अमेरिका ने शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा पर पहुंचने की घोषणा की जिसके तहत दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेंगे। अमेरिका, भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को मौजूदा 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। वहीं भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत शृंखला पर आयात शुल्क समाप्त या कम करेगा। इनमें सूखे अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट शामिल हैं। दोनों देशों के एक संयुक्त बयान के मुताबिक, भारत ने अगले पांच साल में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान कलपुर्जे, कीमती धातु, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने का इरादा जताया है। बयान के मुताबिक, ''अमेरिका और भारत को पारस्परिक और द्विपक्षीय रूप से लाभकारी व्यापार से संबंधित एक अंतरिम समझौते के लिए रूपरेखा तैयार करने की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है।'' इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से रूसी तेल की खरीद पर पिछले वर्ष अगस्त में भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क को हटा दिया है। ट्रंप ने कहा कि भारत ने इस दिशा में कई 'महत्वपूर्ण कदम' उठाए हैं। भारत ने रूस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल आयात बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है।आदेश में कहा गया है, "सात फरवरी, 2026 को स्थानीय समयानुसार रात 12:01 बजे या उसके बाद उपभोग के लिए आयातित या गोदाम से उपभोग के लिए निकाले गए उत्पादों के संबंध में, अमेरिका में आयातित भारतीय उत्पादों पर कार्यकारी आदेश 14329 के तहत लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त मूल्य-आधारित शुल्क लागू नहीं होंगे।" इस बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि अंतरिम व्यापार समझौता किसानों और उद्यमियों के लिए नए अवसर खोलकर 'मेक इन इंडिया' को मजबूत करेगा और महिलाओं एवं युवाओं के लिए रोजगार सृजित करेगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अंतरिम समझौते से भारतीय निर्यातकों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई), किसानों और मछुआरों के लिए 30,000 अरब अमेरिकी डॉलर का बाजार खुलेगा। इसका कारण भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी शुल्क पहले के 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो जाएगा। अमेरिका ने अगस्त, 2025 में रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखने को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगा दिया था। यह पहले से लगाए गए 25 प्रतिशत जवाबी शुल्क के अलावा था। इस वजह से भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में कुल शुल्क बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया था। इससे भारतीय निर्यातकों को भारी नुकसान हुआ था, क्योंकि अमेरिका उनका सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है।
शुल्क में कमी से वस्त्र और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, जैविक रसायन, गृह सज्जा, हस्तशिल्प उत्पाद जैसे भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों और कुछ मशीनरी के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, जेनेरिक दवाइयों, रत्नों और हीरों, तथा विमान के कल-पुर्जों सहित कई प्रकार की वस्तुओं पर शुल्क शून्य हो जाएगा, जिससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धी क्षमता और 'मेक इन इंडिया' को और बढ़ावा मिलेगा। भारत को विमान कलपुर्जों पर धारा 232 के तहत छूट, वाहन कलपुर्जों पर शुल्क दर कोटा और जेनेरिक दवाइयों पर बातचीत के माध्यम से प्राप्त लाभ भी मिलेंगे, जिससे इन क्षेत्रों में निर्यात में मजबूत वृद्धि होगी। गोयल ने कहा, "साथ ही, यह समझौता किसानों के हितों की रक्षा करने और ग्रामीण आजीविका को बनाए रखने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके तहत मक्का, गेहूं, चावल, सोया, मुर्गी पालन, दूध, पनीर, एथेनॉल (ईंधन), तंबाकू कुछ सब्जियां, मांस आदि जैसे संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों को पूरी तरह से संरक्षित किया गया है।" अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) कार्यालय ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति भारत के साथ व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी किसानों और उत्पादकों की दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक तक पहुंच का विस्तार कर रहे हैं। यूएसटीआर ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकी किसानों और उत्पादकों की दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक तक पहुंच बढ़ा रहे हैं। भारत ने सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क को समाप्त करने या कम करने, व्यापार में लंबे समय से चली आ रही गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करने, अधिक अमेरिकी वस्तुओं और सेवाओं को खरीदने और 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी उत्पादों की खरीद करने की प्रतिबद्धता जताई है।" इस समझौते की सराहना करते हुए, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि दूत जैमीसन ग्रीर ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'समझौते अंजाम देने' से अमेरिकी श्रमिकों और उत्पादकों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक के द्वार खुल रहे हैं। संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि दोनों देश इस रूपरेखा को 'शीघ्र' लागू करेंगे और पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को निष्कर्ष पर पहुंचाने के उद्देश्य से अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे। समझौते के तहत भारत कुछ क्षेत्रों में अमेरिकी वस्तुओं पर आयात शुल्क उसी दिन खत्म कर देगा, जिस दिन यह समझौता लागू होगा। अन्य उत्पादों पर शुल्क को समय के साथ चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जा सकता है। कुछ क्षेत्रों में शुल्कों में कटौती की जाएगी, जबकि अन्य में कोटा आधारित रियायतें दी जाएंगी। परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) के चेयरमैन ए शक्तिवेल ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा, ''इससे मिलने वाली शुल्क छूट और बाजार तक बेहतर पहुंच से भारतीय कपड़ा और परिधान क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूती मिलेगी। इससे भारत दुनिया भर में सबसे भरोसेमंद आपूर्ति केंद्र के रूप में मजबूती से स्थापित होगा।'' भारत और अमेरिका 'ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट' (जीपीयू) और डेटा केंद्रों में उपयोग होने वाले अन्य सामानों सहित प्रौद्योगिकी उत्पादों के व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि करेंगे और संयुक्त तकनीकी सहयोग का विस्तार करेंगे। पिछले साल फरवरी में, दोनों देशों ने बीटीए के पहले चरण के लिए बातचीत शुरू की थी। इस रूपरेखा को अब एक कानूनी समझौते में परिवर्तित किया जाएगा, जिस पर मार्च के मध्य तक इस पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। उसके बाद भारत निर्दिष्ट अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क कम करना शुरू कर देगा। अंतरिम समझौते के सफल समापन के बाद, जेनेरिक दवाइयों, रत्न और हीरों, तथा कुछ विमानों और विमान कलपुर्जों सहित भारतीय वस्तुओं की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क शून्य हो जाएगा। बयान के अनुसार, "अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप, भारत को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरों को समाप्त करने को लेकर लगाए गए शुल्क के तहत वाहन कलपुर्जों के लिए तरजीही शुल्क दर कोटा प्राप्त होगा।'' इसमें कहा गया कि भारत ने अमेरिकी चिकित्सा उपकरणों के व्यापार में लंबे समय से चली आ रही बाधाओं को दूर करने पर सहमति व्यक्त की है। इसके अलावा, भारत ने आयात लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को समाप्त करने पर सहमति जताई है, जिससे बाज़ार में पहुंच में देरी होती है या ये अमेरिका के सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी उत्पादों पर मात्रात्मक प्रतिबंध लगाती हैं। बयान के अनुसार, "दीर्घकालीन चिंताओं के समाधान के लिए मिलकर काम करने के महत्व को समझते हुए, भारत अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों के व्यापार में दीर्घकालिक गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करने पर भी सहमत है।'' भारत और अमेरिका 'ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट' (जीपीयू) और डेटा केंद्रों में उपयोग होने वाले अन्य सामानों सहित प्रौद्योगिकी उत्पादों में व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि करेंगे और संयुक्त प्रौद्योगिकी सहयोग का विस्तार करेंगे। दोनों देशों ने लागू तकनीकी विनियमनों के अनुपालन को सुगम बनाने के उद्देश्य से पारस्परिक रूप से सहमत क्षेत्रों के लिए अपने-अपने मानकों और मूल्यांकन प्रक्रियाओं पर चर्चा करने की योजना बनाई है। अमेरिका 2021-25 के दौरान भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। भारत के कुल निर्यात में अमेरिका का हिस्सा लगभग 18 प्रतिशत, आयात में 6.22 प्रतिशत और द्विपक्षीय व्यापार में 10.73 प्रतिशत है। 2024-25 में, द्विपक्षीय व्यापार 186 अरब डॉलर (86.5 अरब डॉलर निर्यात और 45.3 अरब डॉलर आयात) तक पहुंच गया। अमेरिका के साथ भारत का व्यापार अधिशेष (आयात और निर्यात के बीच का अंतर) 2024-25 में 41 अरब डॉलर था। यह 2023-24 में 35.32 अरब डॉलर और 2022-23 में 27.7 अरब डॉलर था। -
नई दिल्ली।‘ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के दौरान छात्रों को पढ़ाई के लिए एक बेशकीमती मंत्र दिया। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपने पैटर्न के हिसाब से पढ़ाई करें। सबकी सलाह सुनें, लेकिन अपना तरीका तभी बदलें जब आप चाहें।
‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में पहले अध्याय ‘आपकी शैली, आपकी गति’ पर चर्चा के दौरान गुजरात की एक छात्रा ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया। छात्रा ने पूछा कि परीक्षा के समय परिवार और शिक्षक सभी चिंता करते हैं। लेकिन समस्या तब आती है जब शिक्षक पढ़ाई का अलग पैटर्न समझाते हैं और अभिभावक अलग तरीके से पढ़ने के लिए कहते हैं, जबकि छात्रों का खुद का एक अलग पैटर्न होता है। इस पर पीएम मोदी ने कहा कि यह पैटर्न जीवनभर चलता है।पीएम मोदी ने उदाहरण देते हुए कहा, “मैं प्रधानमंत्री बन गया हूं। फिर भी लोग मुझे अलग-अलग तरीकों से काम करने को कहते हैं। लेकिन सबका अपना-अपना तरीका होता है।”बच्चों को उन्हीं के अंदाज में जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “जब परिवार के लोग एक साथ खाना खाने बैठते हैं तो सभी का खाने का पैटर्न अलग होता है। वह सब्जी के साथ खाने की शुरुआत करेगा, कोई दाल से करेगा और कोई दाल-सब्जी सब मिलाकर खाएगा। वहां जब वे अपने पैटर्न के हिसाब से खाते हैं तो उन्हें मजा आता है।”छात्रों को पढ़ाई का मंत्र देते हुए उन्होंने कहा, “कुछ लोग सुबह बेहतर पढ़ाई करते हैं, कुछ रात में। आपकी अपनी जो पैटर्न है, उसी पर भरोसा करें। लेकिन सलाह भी लें और अगर उससे आपको फायदा होता है, तो ही उसे अपनी जिंदगी के तरीके में शामिल करें। इसको भी किसी के कहने पर नहीं, बल्कि अपने अनुभव से जोड़ो।” उन्होंने एक और उदाहरण ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के बारे में दिया। प्रधानमंत्री ने कहा, “जब यह कार्यक्रम शुरू हुआ तो इसका एक अलग पैटर्न था। धीरे-धीरे इसमें कई बदलाव किए गए हैं और इसी तरह अबकी बार अलग-अलग राज्यों में छात्रों से संवाद किया। मैंने भी कुछ चीजें बदलीं, लेकिन अपना मूल तरीका नहीं छोड़ा।”जवाब सुनने के बाद छात्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का नेचर बहुत अच्छा था। वे हम सब बच्चों के साथ एकदम घुल मिल गए थे। उन्होंने समझाया कि हमें अपने ही पैटर्न में फोकस करना है, लेकिन हमें सभी का पैटर्न सुनना है और सभी में से कुछ-कुछ गुण लेने हैं। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार सुबह नई दिल्ली में 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आधिकारिक आवास पर आयोजित ‘परीक्षा पे चर्चा’ के 9वें संस्करण के दौरान छात्रों के साथ बातचीत की। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे सलाह के प्रति खुले रहते हुए अपनी अध्ययन पद्धति पर भरोसा रखें। पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि सफलता निरंतर सीखने के साथ-साथ आत्मविश्वास को संतुलित करने से मिलती है।
छात्रों ने परीक्षा से जुड़े तनाव और घबराहट को पीछे छोड़ परीक्षा की तैयारी पर पीएम मोदी का मार्गदर्शन हासिल किया। छात्रों का कहना था कि उन्हें इस चर्चा के जरिए प्रधानमंत्री के प्रेरणादायक विचार व मार्गदर्शन मिले। ‘परीक्षा पे चर्चा’ के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों से कर्तव्य पालन के महत्वपूर्ण विषय पर भी चर्चा की।‘कर्तव्य पालन’ पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें अपने जीवन के तरीकों में सुधार लाना चाहिए।प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों से स्वच्छता पर बात की। उन्होंने कहा कि यदि हमें विकसित भारत बनाना है, तो हमें यह तय करना होगा कि हम गंदगी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के विषय में हमें परिवार, मोहल्ले या बाहर कहीं भी समझौता नहीं करना होगा। प्रधानमंत्री ने बताया कि हमारा स्वस्थ रहना भी एक तरह से हमारा कर्तव्य है। अगर हम इतना भी कर लें तो दुनिया की कोई ताकत भारत को विकसित भारत बनने से रोक नहीं सकती है।‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में पीएम मोदी ने छात्रों से प्रश्न पूछते हुए कहा कि आप उस पीढ़ी में हैं जहां आपके पास इतना खुला आसमान हैं, इतना बड़ा कैनवास हैं और ऐसे में आप के ध्यान में क्या आता है कि आप क्या कर सकते हैं। एक छात्र ने इस पर कहा कि आज कल जमाना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है। एआई में बहुत सारी चीजें होती हैं।प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि आप भाग्यशाली हैं कि आपको टेक्नोलॉजी का यह अवसर मिला है। हमारे जमाने में इतनी टेक्नोलॉजी नहीं थी। उन्होंने छात्रों से कहा कि एआई आपकी शक्ति को बढ़ाने वाली होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने एआई के सकारात्मक पहलुओं व सार्थक उपयोग की बात की।इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों ने सीधे प्रधानमंत्री से सुझाव मांगे। परीक्षा की तैयारी को लेकर प्रधानमंत्री की सलाह ली। साथ ही कई छात्रों ने गणित व अन्य प्रश्नों को लेकर भी सवाल पूछे। छात्रों ने प्रधानमंत्री से बोर्ड परीक्षा और स्कूल एग्जामिनेशन को लेकर प्रश्न पूछे। -
नई दिल्ली।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार के दिन ”परीक्षा पे चर्चा” कार्यक्रम के दौरान छात्रों को अपने 75वें जन्मदिन का एक किस्सा बताया। उन्होंने कहा कि अभी मेरे 25 साल बाकी हैं। मैं जो बीत गया है, उसे गिनता नहीं हूं, बल्कि बचा हुआ है, उसकी गिनती करता हूं।
परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में मणिपुर की एक छात्रा ने प्रधानमंत्री की प्रशंसा की और कहा कि वे बचपन से उसकी प्रेरणा रहे हैं। छात्रा ने बताया कि मेरा जन्मदिन भी पीएम मोदी के जन्मदिन के साथ आता है।इसके बाद पीएम मोदी ने एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि ”अभी मेरे जन्मदिन पर 17 सितंबर को एक नेता ने फोन किया और कहा कि आपके 75 साल हो गए, तो मैंने कहा कि 25 साल अभी बाकी हैं। मैं बीते हुए को नहीं बल्कि बचे हुए को गिनता हूं।”छात्रों को विशेष मंत्र देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जो बीता है, उसकी गिनती में समय बर्बाद न करें, बल्कि जो बचा है, उसको जीने के लिए सोचिए।छात्रा ने पीएम मोदी से सवाल किया कि बोर्ड एग्जाम या फिर कोई स्कूल की परीक्षा की तैयारी करते समय पिछले कुछ साल के प्रश्न देखते हैं और खुद तय कर लेते हैं कि कौन सा टॉपिक ज्यादा सही रहेगा और कौन सा जरूरी है। कई बार हम कुछ सवालों को छोड़ देते हैं, तो क्या ऐसा करना सही है ?पीएम मोदी ने इसके जवाब में कहा कि पेपर कभी सिलेबस से बाहर नहीं आता, लेकिन अक्सर कहा जाता है कि पेपर बहुत भारी था और बच्चों को तकलीफ हुई। यह भारी इसलिए लगता है कि पिछले 10 साल के पैटर्न के ही कुछ सवालों पर ध्यान दिया गया। उन्होंने कहा, श्योर सजेशन्स बुक, महत्वपूर्ण क्वेश्चन बुक और 10 साल के क्वेश्चन बैंक आते हैं लेकिन यह बीमारी है। इस बीमारी को फैलाने का काम कुछ शिक्षक भी करते हैं। उनको लगता है कि उनके स्कूल या क्लास का रिजल्ट अच्छा हो। इसलिए वे वही पढ़ाते हैं, जिससे नंबर अच्छे आएं।अच्छे शिक्षक हमेशा पूरा सिलेबस पढ़ाते हैंप्रधानमंत्री ने कहा कि अच्छे शिक्षक हमेशा पूरा सिलेबस पढ़ाते हैं। उसी पर मेहनत कराते हैं और उसका महत्व समझाते हैं। उन्होंने छात्रों को समझाया, ”जैसे एक खिलाड़ी को अपने गोल या खेल में मास्टरी पाने के लिए संपूर्ण शरीर की चिंता करनी पड़ती है, वैसे ही जिंदगी परीक्षा के लिए नहीं है, बल्कि जीवन को बनाने के लिए शिक्षा एक माध्यम है। अगर शिक्षा गलत करते हैं तो हम बार-बार परीक्षा देते हैं। यह परीक्षा हमें अपने आप को जांचने के लिए एक परीक्षा है। अल्टीमेट गोल एग्जाम के नंबर नहीं हो सकता है। अल्टीमेट गोल संपूर्ण जीवन के विकास का होना चाहिए।” -
नई दिल्ली। निदेशालय (ईडी) ने आज शुक्रवार को ट्रांस-अरुणाचल हाईवे से जुड़े मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई की। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत इस मामले में छापेमारी अभियान शुरू किया। यह मामला भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान मुआवजे के आकलन, उसके प्रमाणन और वितरण में हुई गंभीर अनियमितताओं से जुड़ा है।
आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम में सरकारी अधिकारियों और निजी लाभार्थियों की आपसी मिलीभगत के जरिए अपराध की आय अर्जित की गई और बाद में उसका धन शोधन किया गया।ईडी की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह परियोजना कुल 157.70 किलोमीटर लंबी थी, जिसे प्रशासनिक रूप से याचुली (0.00–43.635 किमी), जीरो (43.635–63.700 किमी) और रागा (63.700–149.440 किमी) सेक्टरों में विभाजित किया गया था। जांच में सामने आया है कि जीरो के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर द्वारा शुरुआत में पोटिन-बोपी खंड के लिए 289.40 करोड़ रुपए का मुआवजा आकलन तैयार किया गया था।हालांकि, बाद में राज्य स्तरीय बैठक में इस मुआवजा पैकेज को सीमित करते हुए कुल 198.56 करोड़ रुपए पर फ्रीज कर दिया गया।ईडी की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि मुआवजा वितरण के दौरान भारी मात्रा में धन को बचत खातों में डायवर्ट किया गया और कई फर्जी लाभार्थियों के नाम पर चेक जारी किए गए। इससे सरकारी खजाने को लगभग 44 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। जांच एजेंसी के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों ने जानबूझकर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए ट्रांस-अरुणाचल हाईवे (पोटिन–बोपी) परियोजना के याजाली सेक्टर में संरचनाओं का फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर आकलन तैयार किया और उसका प्रमाणन किया। इसके जरिए अस्तित्वहीन संरचनाओं और अयोग्य लाभार्थियों के नाम जोड़कर अवैध रूप से मुआवजा दिलाया गया।जांच के तहत ईडी ने 6 आवासीय परिसरों पर तलाशी अभियान शुरू किया है। इनमें तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर, डीएलआरएसओ, आकलन से जुड़े अधिकारी और प्रमुख निजी लाभार्थी/कनड्यूट्स के ठिकाने शामिल हैं। छापेमारी का उद्देश्य दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्य जुटाना तथा अपराध की आय से अर्जित चल-अचल संपत्तियों की पहचान करना है।ईडी के अनुसार, इन छह परिसरों में से चार इटानगर और उसके आसपास स्थित हैं, एक लिकाबाली (डिब्रूगढ़ के पास) में और एक आलो में है, जो मेचुका-चीन सीमा के नजदीक स्थित है। तलाशी के ये स्थान अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी से पूर्वी हिस्सों तक फैले हुए हैं और इनमें सीमा से सटे, दुर्गम पहाड़ी इलाकों के संवेदनशील और दूरस्थ क्षेत्र भी शामिल हैं।तलाशी के दौरान एक फर्जी लाभार्थी के परिसर से 2.2 करोड़ रुपए नकद बरामद किए जाने की भी पुष्टि हुई है। ईडी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है। -
नई दिल्ली।‘ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जारी ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में छात्रों के साथ बोर्ड परीक्षाओं और जीवन की चुनौतियों पर बातचीत की। उन्होंने छात्रों को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। छात्र भी प्रधानमंत्री के लिए खास गिफ्ट लेकर आए। इसी बीच सिक्किम की एक छात्रा ने उन्हें ‘चाय’ भेंट की, जिस पर पीएम मोदी ने हंसते हुए कहा कि ‘चाय वाले को चाय’।
छात्रों ने पीएम मोदी के सामने कई एक्टिविटी कींगीत और कविता से लेकर बांसुरी बजाने तक, छात्रों ने प्रधानमंत्री मोदी के सामने कई एक्टिविटी कीं। एक छात्रा उनका स्केच लेकर आई, जबकि एक अन्य छात्रा ने उन्हें हैंडमेड बुके दिया। उत्तराखंड का एक छात्र पीएम मोदी के लिए खास तरह की टोकरी लेकर आया, जिसका धार्मिक महत्व बसंत पंचमी के साथ जुड़ा है।एक छात्र ने पीएम मोदी को त्रिपुरा सुंदरी की तस्वीर भेंट कीएक छात्र ने पीएम मोदी को त्रिपुरा सुंदरी की तस्वीर भेंट की। वहीं असम के एक छात्र ने पीएम मोदी को अपने राज्य की पहचान यानी असम का गमछा दिया।परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के पहले एपिसोड में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘आपका स्टाइल-आपकी गति’ से लेकर ‘लक्ष्य के साथ तैयारी’, ‘कम प्रेशर-ज्यादा सीखना’, ‘शोर के बीच टिके रहना’, ‘बड़े सपने-बड़े काम’ तक अलग-अलग विषयों पर छात्रों से संवाद किया। इसी बीच, उन्होंने छात्रों के कई सवालों के भी जवाब दिए।पीएम मोदी ने ‘मार्क्स, गेम्स और हंसी के बीच बैलेंस’ पर भी छात्रों को महत्वपूर्ण सुझाव दिए। रायपुर के आर्यन शर्मा जैसे छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए, जो जानना चाहते थे कि पढ़ाई और असल दुनिया की तैयारी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, और गुवाहाटी की प्रिया कुमारी, जो करियर की तैयारी के बारे में पूछ रही थीं, PM मोदी ने जीवन कौशल के सार पर बात की।पीएम मोदी ने रोजमर्रा की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका महत्व सिर्फ महान नहीं है, यह बेहतरीन है। प्रोफेशनल स्किल्स को लेकर पीएम मोदी ने छात्रों से खुद को ‘पूरी तरह से अप-टू-डेट’ रखने का आग्रह किया। ( -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों से कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उनकी पीढ़ी की सुपरपावर है और इसका उपयोग समझदारी और सही तरीके से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि AI मेहनत की जगह नहीं लेता, बल्कि क्षमता बढ़ाने का साधन है।
प्रधानमंत्री ने यह बात अपने आवास पर आयोजित परीक्षा पे चर्चा के नौवें संस्करण के दौरान कही। कार्यक्रम में परीक्षा की तैयारी, जीवन कौशल और भविष्य की तैयारी जैसे विषयों पर चर्चा हुई।प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के छात्रों को ऐसी तकनीकी सुविधाएं मिली हैं, जो पहले की पीढ़ियों को उपलब्ध नहीं थीं। उन्होंने कहा कि इन अवसरों का सही उपयोग करने के लिए बुद्धिमत्ता और विवेक जरूरी है। AI का उद्देश्य छात्रों की सोच और समझ को आगे बढ़ाना होना चाहिए।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि AI का उपयोग इस तरह किया जा सकता है कि किसी जीवनी का संक्षेप में सार निकाला जाए या फिर अपनी उम्र और रुचि के अनुसार अच्छी किताबों की सूची तैयार करवाई जाए। इससे सीखने की प्रक्रिया आसान और प्रभावी बन सकती है।प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि AI का ऊपरी और सतही उपयोग सीमित लाभ देता है, जबकि सोच-समझकर किया गया उपयोग गहरी समझ और व्यक्तिगत विकास में मदद करता है।उन्होंने छात्रों से अपील की कि AI को सीखने, रचनात्मकता और नवाचार के साधन के रूप में अपनाएं, लेकिन उस पर पूरी तरह निर्भर न रहें।कार्यक्रम में चंडीगढ़ की छात्रा अनन्या शर्मा ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि AI एक सहायक उपकरण है, जो आगे बढ़ने में मदद करता है, लेकिन लक्ष्य तक पहुंचाने का काम मेहनत और सोच को ही करना होता है। उन्होंने बताया कि वह AI का उपयोग तकनीक से जुड़े ऐप बनाने में करती हैं।प्रधानमंत्री की यह बात कार्यक्रम के मूल उद्देश्य से जुड़ी रही, जिसमें परीक्षा को तनाव का कारण नहीं, बल्कि जीवन की यात्रा का एक पड़ाव बताया गया।यह संवाद दूरदर्शन, प्रधानमंत्री के यूट्यूब चैनल और अन्य मंचों पर सुबह 10 बजे से सीधा प्रसारित किया गया। इसमें देशभर के छात्र जुड़े।इस बार 6.76 करोड़ से अधिक लोग कार्यक्रम से जुड़े, जिनमें 4.19 करोड़ छात्र, बड़ी संख्या में शिक्षक और अभिभावक शामिल थे। कार्यक्रम का उद्देश्य परीक्षा के तनाव को कम करना और छात्रों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना रहा। -
नयी दिल्ली. सरकार ने बृहस्पतिवार को लोकसभा को बताया कि केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने राज्यों को अमृत योजना के तहत संवेदनशील क्षेत्रों और जीर्ण-शीर्ण अवसंरचनाओं का व्यापक आकलन करने के लिए एक परामर्श जारी किया है, ताकि शहरी क्षेत्रों में पेयजल को दूषित होने से रोका जा सके। इंदौर में दूषित पेयजल के कारण कई लोगों की मौतें होने कुछ दिनों बाद, पिछले महीने यह परामर्श जारी किया गया। आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, ''स्वास्थ्य संबंधी खतरों को रोकने के लिए, मंत्रालय ने जनवरी 2026 में सभी राज्यों को संवेदनशील क्षेत्रों और जीर्ण-शीर्ण अवसंरचनाओं का व्यापक आकलन करने, जल आपूर्ति पाइप लाइनों के निकट सीवर लाइन का पता लगाने और अमृत योजना के तहत निर्मित भू-स्थानिक डेटाबेस का उपयोग करके मौजूदा जल और सीवर नेटवर्क का डिजिटल मानचित्रण करने के लिए एक परामर्श जारी किया था।'' उन्होंने कहा कि जल और स्वच्छता राज्य के विषय हैं, और पुरानी पाइपलाइन और जल निकासी/सीवेज व्यवस्था की मरम्मत राज्य सरकारों और संबंधित शहरी स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है। मंत्री ने कहा कि हालांकि, भारत सरकार योजनाबद्ध हस्तक्षेपों और परामर्श के माध्यम से राज्यों के प्रयासों में सहयोग करती है।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि यूरोपीय संघ के साथ भारत के व्यापार समझौते के बाद स्थिरता का एहसास कर रहे विश्व को अमेरिका के साथ देश के इसी तरह के करार के बाद अब गति का भी एहसास होने लगा है। उच्च सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ''पिछले कुछ समय में विश्व के नौ बड़े देशों के साथ हमारे समझौते हुए हैं और उसमें 'मदर ऑफ आल डील' में यूरोपीय संघ के 27 देशों के साथ एकमुश्त समझौता हुआ है।'' उन्होंने कहा, ''विकसित देश अपने आप भारत के साथ व्यापार समझौता करने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई विकसित देश किसी विकासशील देश के साथ अपने आप व्यापार समझौता करता है तो यह भी अर्थजगत के लिए बहुत बड़ा संदेश है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत विश्व के साथ स्पर्धा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सूक्ष्म एवं लघु उद्योग (एमएसएमई) नेटवर्क पर पूरा ध्यान दिया है। उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ भारत के व्यापार समझौतों का हवाला देते हुए कहा कि जब ईयू के साथ समझौता हुआ तो लोगों को लगा कि वैश्विक स्तर पर स्थिरता की संभावना बढ़ेगी। मोदी ने कहा, ''अमेरिका के साथ व्यापार समझौता होने के बाद विश्व को और भरोसा हो गया कि जो स्थिरता का एहसास हो रहा था... अब गति का भी एहसास होने लगा है। यह विश्व के लिए शुभ संकेत है।'' उन्होंने कहा कि इसका सबसे अधिक फायदा देश के नौजवानों का होगा और इसमें बेटा और बेटियां दोनों शामिल हैं, हर वर्ग के युवा शामिल हैं।
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नयी दिल्ली. आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने कहा है कि अगले वित्त वर्ष के लिए प्रस्तावित 17.2 लाख करोड़ रुपये का ऋण बाजार को बाधित किये बिना जुटाया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निजी क्षेत्र के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध हो। उन्होंने कहा, ''सरकारी ऋण कार्यक्रम में 5.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज भुगतान भी शामिल है। इस प्रकार, कुल ऋण 11.73 लाख करोड़ रुपये होगा। यानी यह पहले की तरह ही लगभग समान है।" जब उनसे पूछा गया कि क्या रिकॉर्ड 17.2 लाख करोड़ रुपये का ऋण निजी निवेश को प्रभावित कर सकता है, उन्होंने कहा, ''... हमें लगता है कि यह एक उचित आंकड़ा है। कुल मिलाकर, यह एक बड़ी राशि है, लेकिन यह भी सही है कि बड़ी संख्या में बॉन्ड भी परिपक्व हो रहे हैं।" ठाकुर ने भरोसा दिलाया कि यह कर्ज प्रबंधन योग्य है और यह आंकड़ा सावधानीपूर्वक गणना और विश्लेषण के बाद तय किया गया है। सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में 14.61 लाख करोड़ रुपये के सकल उधारी का अनुमान लगाया है, जबकि बजट अनुमान 14.82 लाख करोड़ रुपये था। सरकार अपने राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए बाजार से प्रतिभूतियों के माध्यम से उधार लेती है।
वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) से संबंधित बजट घोषणा के बारे में, उन्होंने कहा कि इस बजट में उद्योग की लंबे समय से जारी मांग को पूरा किया गया है। उन्होंने कहा कि वे मांग कर रहे थे कि क्या एलएलपी (सीमित जवाबदेही भागीदारी) अधिनियम में संशोधन किया जा सकता है और इसे एआईएफ की कार्यात्मक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जा सकता है। संशोधन का उद्देश्य एआईएफ की परिचालन बाधाओं को दूर करना है।
आर्थिक मामलों की सचिव ने कहा कि भागीदारों के प्रवेश और निकास के लिए दस्तावेज दाखिल करने की प्रक्रिया को भी सरल बनाया जाएगा और ये संशोधन इस प्रकार के होंगे कि एलएलपी बनने पर उनकी जवाबदेही सीमित हो जाएगी। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए पोर्टफोलियो निवेश योजना (पीआईएस) के माध्यम से भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों (पीआरओआई) को इक्विटी शेयर में निवेश करने की अनुमति देने का बजट प्रस्ताव एक और महत्वपूर्ण घोषणा है। ठाकुर ने कहा, ''पीआरओआई को पोर्टफोलियो निवेश योजना के माध्यम से सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों के इक्विटी शेयर में निवेश करने की अनुमति दी जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को अपने बजट भाषण में कहा, ''इस योजना के तहत एक व्यक्तिगत पीआरओआई के लिए निवेश सीमा को पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव है। इससे सभी व्यक्तिगत पीआरओआई के लिए कुल निवेश सीमा वर्तमान 10 प्रतिशत से बढ़कर 24 प्रतिशत हो जाएगी। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को देश के पहले सहकारिता-आधारित टैक्सी सेवा मंच 'भारत टैक्सी' की शुरुआत की। दो महीने के सफल पायलट परीक्षण के बाद शुरू की गई यह टैक्सी सेवा फिलहाल दिल्ली-एनसीआर और गुजरात में शुरू की गई है। इस मंच के उद्घाटन अवसर पर शाह ने कहा, ''अगले तीन वर्षों में भारत टैक्सी सेवा को कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारका से कामाख्या तक देशभर में चालू कर दिया जाएगा।'' उन्होंने कहा कि इस ऑनलाइन टैक्सी सेवा मंच से होने वाला लाभ इससे जुड़े ड्राइवरों के साथ साझा किया जाएगा। इस टैक्सी सेवा के तहत ग्राहक आवागमन के लिए कार के साथ तिपहिया और दोपहिया वाहनों की भी बुकिंग कर सकेंगे। फिलहाल देश के ऑनलाइन टैक्सी बाजार पर उबर, ओला और रैपिडो जैसी कुछ चुनिंदा कंपनियों का वर्चस्व है।
बहु-राज्य सहकारी सोसायटी अधिनियम, 2002 के तहत पंजीकृत भारत टैक्सी मंच की स्थापना छह जून, 2025 को की गई थी। इस मंच पर न तो किसी कमीशन का प्रावधान है और न ही व्यस्त समय में किसी तरह की किराया बढ़ोतरी का प्रावधान होगा। इसमें मुनाफे का सीधा वितरण ड्राइवरों के बीच किया जाता है। आठ प्रमुख सहकारी संगठनों के सहयोग से शुरू हुए इस मंच ने दो दिसंबर को दिल्ली-एनसीआर और गुजरात में पायलट संचालन शुरू किया था। सहकारिता मंत्रालय के अनुसार, भारत टैक्सी दुनिया का पहला और सबसे बड़ा सहकारिता-आधारित टैक्सी सेवा मंच और ड्राइवरों के स्वामित्व वाला सबसे बड़ा परिवहन मंच बनकर उभरा है। पायलट चरण के बाद से अब तक तीन लाख से अधिक ड्राइवर इस मंच से जुड़ चुके हैं, जबकि एक लाख से ज्यादा उपयोगकर्ताओं ने पंजीकरण कराया है। दिल्ली-एनसीआर और गुजरात में प्रतिदिन 10,000 से अधिक यात्राएं पूरी की जा रही हैं और अब तक करीब 10 करोड़ रुपये सीधे ड्राइवरों को वितरित किए जा चुके हैं। इस मंच से जुड़े ड्राइवरों को 'सारथी' कहा जाता है। यह उनके लिए स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, सेवानिवृत्ति बचत और समर्पित सहायता प्रणाली जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं को भी प्राथमिकता देता है। दिल्ली में भारत टैक्सी सेवा के लिए सात सहायता केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं। -
नई दिल्ली। बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीएमआरसीएल) ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर किराए में पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की। नई दरें 9 फरवरी से लागू होंगी। बीएमआरसीएल के जनसंपर्क अधिकारी बीएल यशवंत चौहान ने बताया, “किराया निर्धारण समिति के अनुसार, हर साल एक फॉर्मूले के तहत प्रतिशत के आधार पर गणना की जाती है। इसमें अधिकतम 5 प्रतिशत और न्यूनतम 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाती है। जब गणना की गई, तो 10 प्रतिशत बढ़ोतरी की जरूरत थी। चूंकि इसे लागू नहीं किया जा सकता था, इसलिए एफएफसी के अनुसार, सिर्फ 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।”
उन्होंने बताया कि नई दरों के लागू होने के बाद न्यूनतम किराया 10 रुपए से बढ़ाकर 11 रुपए और अधिकतम किराया 90 रुपए से बढ़ाकर 95 रुपए होगा।बयान में कहा गया है, “एफएफसी ने बीएमआरसीएल के लिए संशोधित किराया संरचना की सिफारिश करते हुए पाया कि 7.5 साल बाद किराए में बदलाव और किराया जोन को 29 से घटाकर 10 करने से किराए में औसतन 51.55 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। भविष्य में बार-बार और अचानक किराए में बढ़ोतरी जैसी स्थिति से बचने के लिए समिति ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि किराए को सालाना आधार पर रिवाइज किया जाए, जिसके लिए एक पारदर्शी वार्षिक ऑटोमैटिक किराया संशोधन फॉर्मूला हो, जो ऑपरेशन और मैनेजमेंट लागत या 5 प्रतिशत प्रति साल, जो भी कम हो, से जुड़ा हो और इसे निकटतम रुपए में राउंड ऑफ किया जाए।”अधिकारियों ने बताया कि एफएफसी की सिफारिशों बीएमआरसीएल पर बाध्यकारी हैं। सिफारिशों के अनुसार, यह सूचित किया जाता है कि वार्षिक ऑटोमैटिक किराया संशोधन 9 फरवरी से लागू होगा, जो बीएमआरसीएल की ओर से एफएफसी के सुझाए गए किराए को लागू करने की तारीख से 1 साल पूरा होने पर होगा।बीएमआरसीएल ने बताया कि 96.10 किलोमीटर के अपने पूरे नेटवर्क पर 10 किराया जोन में मामूली बढ़ोतरी न्यूनतम 1 रुपए और अधिकतम 5 रुपए है। बयान में कहा गया।” वित्तीय वर्ष 2024-25 के ऑडिट किए गए वित्तीय डेटा के आधार पर फॉर्मूला-आधारित इंडेक्स 10.20 प्रतिशत की लागत वृद्धि दिखाता है। हालांकि, एफएफसी की शर्त के अनुसार, किराए में बढ़ोतरी सिर्फ 5 प्रतिशत तक सीमित रखी गई है।नई दरों के बाद जीरो से दो किलोमीटर मेट्रो यात्रा का किराया 10 रुपए की जगह 11.2 रुपए होगा, 4 किलोमीटर के लिए 21.4 रुपए और इसी तरह आगे भी। बीएमआरसीएल ने कहा कि वह स्मार्ट-कार्ड, एनसीएमसी यूजर्स के लिए सभी मौजूदा यात्री-अनुकूल छूट जारी रखेगा, जैसे पीक आवर्स के दौरान 5 प्रतिशत छूट, रविवार को और तीन नेशनल हाईवे पर नॉन-पीक आवर्स के दौरान 10 प्रतिशत छूट। हालांकि, टूरिस्ट कार्ड और ग्रुप टिकट पर 5 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी लागू होगी।बयान में कहा गया है, “बीएमआरसीएल का फोकस यह है कि यह छोटा सालाना बदलाव फाइनेंशियल स्थिरता और सर्विस की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए है, ताकि भविष्य में बड़े और अचानक किराए में बढ़ोतरी की जरूरत न पड़े। यह तरीका किराए को महंगाई और ऑपरेटिंग लागत के हिसाब से धीरे-धीरे बढ़ने देता है, जिससे यात्रियों को अचानक, बार-बार होने वाली बढ़ोतरी से बचाया जा सके।” - नई दिल्ली। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे के वैज्ञानिकों ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली टी-सेल आधारित थेरेपी के लिए एक नई और आसान तकनीक विकसित की है। इस तकनीक से लैब में तैयार की गई रोग-प्रतिरोधक कोशिकाओं (T-cells) को सुरक्षित तरीके से वापस निकाला जा सकता है।CAR T-cell जैसी इम्यूनोथेरेपी में मरीज के खून से T-cells निकाली जाती हैं। इन कोशिकाओं को लैब में बड़ी संख्या में बदला और बढ़ाया जाता है, फिर दोबारा मरीज के शरीर में डाला जाता है ताकि वे कैंसर से लड़ सकें।लैब में उगाई गई इन कोशिकाओं को वापस निकालते समय यह ज़रूरी होता है कि वे जिंदा और सक्रिय बनी रहें। इसलिए उन्हें उगाने और सुरक्षित तरीके से वापस पाने की प्रक्रिया बहुत अहम होती है।IIT बॉम्बे के बायोसाइंसेज़ और बायोइंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर Prakriti Tayalia ने कहा कि कागज़ पर यह काम आसान लगता है, लेकिन असल में कोशिकाओं को सुरक्षित तरीके से वापस पाना सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने कहा कि अगर स्वस्थ कोशिकाएं पर्याप्त संख्या में न मिलें, तो न तो सही जांच हो सकती है और न ही इलाज संभव है।शरीर के प्राकृतिक माहौल जैसा वातावरण बनाने के लिए शोधकर्ताओं ने इलेक्ट्रोस्पिनिंग नाम की प्रक्रिया से बने एक खास ढांचे (स्कैफोल्ड) का इस्तेमाल किया। यह ढांचा बहुत बारीक रेशों से बनी चटाई जैसा होता है, जो मछली पकड़ने के जाल जैसा दिखाई देता है।शोध दल ने पॉलीकैप्रोलैक्टोन नाम की सामग्री से बने इस ढांचे में Jurkat T-cells को उगाया। माइक्रोस्कोप से देखने पर पाया गया कि कोशिकाएं खुद इस ढांचे के अंदर चली गईं और रेशों के बीच मजबूती से फंस गईं।अध्ययन में यह भी सामने आया कि जब कोशिकाओं को ट्रिप्सिन (trypsin) नाम के एंजाइम से निकाला गया, तो उनमें से कई नष्ट हो गईं। वहीं, जब अक्यूटेज़ (accutase) नाम के हल्के एंजाइम का इस्तेमाल किया गया, तो ज्यादा कोशिकाएं सुरक्षित रहीं और स्वस्थ T-cells की तरह व्यवहार करती रहीं।ये कोशिकाएं आपस में समूह बनाती दिखीं, जो उनके विभाजन से पहले का जरूरी चरण होता है, और वापस निकालने के बाद भी अच्छी तरह बढ़ती रहीं।प्रोफेसर टायलिया ने बताया कि ट्रिप्सिन जैसे तेज एंजाइम कोशिकाओं की सतह पर मौजूद जरूरी प्रोटीन को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे उनकी इलाज में उपयोगिता कम हो जाती है। वहीं, अक्यूटेज़ इतना हल्का है कि यह नुकसान नहीं करता।यह शोध Biomaterials Science नाम की वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे लैब में CAR T-cell जैसी उन्नत थेरेपी के लिए कोशिकाएं तैयार करना आसान हो जाएगा। प्रोफेसर टायलिया ने कहा कि अगर ऐसी आधुनिक थेरेपी को मरीजों तक पहुंचाना है, तो हर चरण अहम है—कोशिकाओं को कैसे उगाया जाए और कैसे सुरक्षित निकाला जाए, इससे इलाज के नतीजों में बड़ा फर्क पड़ता है।
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नयी दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय ने वित्तीय प्रलोभन और ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए भ्रामक संदेशों और लिंक के प्रसार से जुड़े अपराधों में वृद्धि का संज्ञान लिया है और कहा है कि ये लोगों के विश्वास और डिजिटल सुरक्षा के लिहाज से गंभीर खतरा हैं। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने धोखाधड़ी के लिए फर्जी तरीके से सिम कार्ड प्राप्त करने की एक बड़ी साजिश के ''मुख्य सूत्रधार'' होने के आरोपी दो व्यक्तियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि चक्षु मॉड्यूल और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से प्राप्त शिकायतों से पता चला है कि दो आरोपियों द्वारा नियंत्रित एक कंपनी को जारी किए गए कई सिम नंबरों का उपयोग ऋण, स्वीकृत क्रेडिट और वित्तीय प्रलोभनों से संबंधित भ्रामक संदेशों को प्रसारित करने के लिए किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ। अदालत ने कहा कि जांच अभी शुरुआती दौर में है और पूरी साजिश का खुलासा करने के लिए आरोपियों से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। अदालत ने 21 जनवरी को पारित अपने आदेश में कहा, ''आरोपों की गंभीरता, जांच के दौरान एकत्र की गई सामग्री की प्रकृति और दूरसंचार अवसंरचना के दुरुपयोग से जुड़े अपराधों में आवेदकों के प्रथम दृष्टया संबंध को देखते हुए, न्यायालय को आवेदकों को अग्रिम जमानत की असाधारण सुरक्षा प्रदान करने का कोई आधार नहीं मिलता है।'' इसमें कहा गया है, ''इस न्यायालय का मानना है कि वित्तीय प्रलोभनों के लिए भ्रामक संदेशों और लिंक के प्रसार तथा ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े अपराध बढ़ रहे हैं और लोगों के विश्वास तथा डिजिटल सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं।'' सीबीआई ने अग्रिम जमानत की अर्जी का विरोध किया।
एजेंसी के वकील ने बताया कि हजारों सिम कार्ड जानबूझकर गलत अंतिम उपयोगकर्ता विवरण प्रदान करके और केवाईसी प्रक्रिया का दुरुपयोग करके प्राप्त किए गए थे। इसने तर्क दिया कि इस अपराध का समाज पर गंभीर प्रभाव पड़ता है और इससे डिजिटल सुरक्षा कमजोर होती है।

























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