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नई दिल्ली। राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस के अवसर पर आयुष मंत्रालय ने कैंसर के प्रति सार्वजनिक जागरूकता और शुरुआती पहचान को मज़बूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। कैंसर आज भी विश्वभर में मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। कई देशों में मुख, गर्भाशय ग्रीवा (cervical) और स्तन कैंसर के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। भारत इस चुनौती से निपटने के लिए शिक्षा, स्क्रीनिंग और समग्र स्वास्थ्य अभ्यासों (holistic health practices) पर अधिक ज़ोर दे रहा है।
कैंसर का एक बड़ा हिस्सा उन कारणों से जुड़ा है जिन्हें रोका जा सकता है — जैसे तंबाकू सेवन, अस्वस्थ आहार, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, शराब का सेवन, पर्यावरणीय प्रदूषण और एचपीवी संक्रमण। शुरुआती पहचान से कैंसर के इलाज की संभावना कई गुना बढ़ जाती है, खासकर स्तन, गर्भाशय ग्रीवा और मुख कैंसर के मामलों में जिन्हें शुरुआती चरण में पहचाना जा सकता है। तंबाकू से दूर रहना, शराब का सीमित उपयोग, पौध-आधारित आहार लेना, स्वस्थ वजन बनाए रखना, नियमित व्यायाम करना और प्रदूषण से बचाव — ये सभी कैंसर के खतरे को कम करने में मददगार हैं।केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आयुष एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, प्रतापराव जाधव ने कहा कि जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए सक्रिय और जन-केंद्रित दृष्टिकोण आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय के विभिन्न प्रयास — जैसे एकीकृत कैंसर देखभाल केंद्र, सहयोगी अनुसंधान और सामुदायिक कार्यक्रम — यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि सस्ती, समग्र और सहयोगी देखभाल देश के हर नागरिक तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि आधुनिक ऑन्कोलॉजी (oncology) और आयुष पद्धतियों के एकीकृत मॉडल से विशेष रूप से कमजोर वर्गों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव, आयुष मंत्रालय ने बताया कि मंत्रालय का बढ़ता हुआ एकीकृत कैंसर देखभाल नेटवर्क, साक्ष्य-आधारित और रोगी-केंद्रित समाधानों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence), सहयोगी शोध मंच और टीएमसी–ACTREC, आर्य वैद्यशाला, एम्स जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ साझेदारी के माध्यम से नए चिकित्सीय शोध, लक्षण प्रबंधन और रोगियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।आयुष मंत्रालय अपने प्रमुख उत्कृष्टता केंद्रों के माध्यम से एकीकृत कैंसर देखभाल का विस्तार कर रहा है, जिनमें मुंबई स्थित टीएमसी–ACTREC में इंटीग्रेटिव केयर और आयुष ड्रग डिस्कवरी पर कार्य हो रहा है। ये केंद्र इन-सिलिको, प्रीक्लिनिकल और क्लिनिकल अध्ययन, विशेष ओपीडी और क्षमता निर्माण (capacity building) में सहायता कर रहे हैं। आर्य वैद्यशाला, कोट्टक्कल में स्थित केंद्र ने जीवन की गुणवत्ता और सहायक उपचार पर ध्यान केंद्रित किया है। पिछले दो वर्षों में इस केंद्र ने 26,356 कैंसर रोगियों का प्रबंधन किया है, जिनमें 338 फेफड़ों के कैंसर के मरीज शामिल हैं।मंत्रालय ने दोहराया कि कैंसर की रोकथाम, प्रारंभिक पहचान और एकीकृत सहायक देखभाल भारत की रणनीति के केंद्र में रहनी चाहिए। जागरूकता बढ़ाना, स्क्रीनिंग की पहुंच में सुधार करना और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए आवश्यक है। ये प्रयास आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों को आयुष प्रणाली की रोकथाम और सहायक क्षमताओं के साथ जोड़ने के विज़न को सशक्त बनाते हैं, जिससे राष्ट्रीय कैंसर बोझ को कम किया जा सके और रोगियों एवं समुदायों के कल्याण में सुधार हो सके। -
नई दिल्ली। राष्ट्रभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण के प्रतीक ‘वन्दे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को देश याद कर रहा है। आज शुक्रवार को ‘वन्दे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के इस ऐतिहासिक अवसर पर भारतीय सेना ने मां भारती को नमन किया। बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 1875 में रचित “वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं था, यह वह जयघोष था जिसने स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा दी और हर भारतीय के हृदय में राष्ट्रप्रेम की ज्वाला प्रज्वलित की।
भारतीय सेना ने कहाभारतीय सेना ने वन्दे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर कहा, “बंकिम चंद्र चटर्जी की कलम से जन्मा, वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं – यह हमारी आत्मा की पुकार था, जिसने स्वतंत्रता संग्राम को जीवन दिया और राष्ट्रभक्ति को स्वर।” देश के सैन्य प्रतिष्ठानों, रेजिमेंटल केंद्रों और सीमा चौकियों व विभिन्न सैन्य अभियानों एवं आयोजनों में वंदे मातरम् गर्व के साथ गाया जाता है। सैनिक राष्ट्रध्वज फहराकर, इस गीत को सामूहिक रूप से गाते आए हैं और देश के प्रति अपनी निष्ठा का संकल्प दोहराते हैं।सेना ने अपने संदेश में कहा, “150 वर्षों बाद भी इसकी गूंज हर सैनिक के कदमों में, हर सलामी में, हर बलिदान में सुनाई देती है। वंदे मातरम् – माँ भारती के चरणों में समर्पित हर एक सैनिक के हृदय की अमर पुकार है।”1882 में आनंदमठ उपन्यास में वन्दे मातरम् प्रकाशित हुआ थागौरतलब है कि बंकिम चंद्र की कलम से जन्मा यह गीत करोड़ों देशवासियों की आत्मा की पुकार बना। इसने हमें गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने की शक्ति दी। आज भी ‘वंदे मातरम्’ हर सैनिक के दिल की अमर ध्वनि है। वंदे मातरम के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी (1838–1894), 19वीं सदी के बंगाल की सबसे जानी-मानी हस्तियों में से एक थे। 19वीं सदी के दौरान बंगाल के बौद्धिक और साहित्यिक इतिहास में उनकी बहुत महत्वूपर्ण भूमिका है। एक जाने-माने उपन्यासकार, कवि और निबंधकार के तौर परउनके योगदान ने आधुनिक बंगाली गद्य के विकास और उभरते भारतीय राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।1882 में आनंदमठ उपन्यास में वन्दे मातरम् प्रकाशित हुआ था। यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक बना। 1905 के बंग-भंग आंदोलन से लेकर 1947 की आजादी तक यह राष्ट्रभक्ति का सूत्रधार रहा। रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे संगीतबद्ध किया था। यह देश की सभ्यतागत, राजनीतिक और सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न अंग बन चुका है।150 वर्षों बाद भी वंदे मातरम् भारत की आत्मा में जीवित हैआज 150 वर्षों बाद भी वंदे मातरम् भारत की आत्मा में जीवित है। हर सैनिक की चाल में, हर ध्वज की लहर में और हर भारतीय की सांस में बसता है। यह देश की सभ्यतागत, राजनीतिक और सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न अंग बन चुका है। -
नई दिल्ली। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को कहा कि पीएम मोदी द्वारा स्मारक डाक टिकट और विशेष सिक्के को पेश किया जाना ‘वंदे मातरम्’ की गूंज नई पीढ़ियों तक पहुंचाने को लेकर महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एक नए वेब पोर्टल वंदेमातरम्150डॉटइन, स्मारक सिक्के और डाक टिकट के साथ हमारे राष्ट्रगीत की प्रेरणा अमर बनी रहेगी।
केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “पीएम मोदी ने आज नई दिल्ली में महान क्रांतिकारी बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की अमर रचना ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में स्मारक डाक टिकट का विमोचन किया। इस डाक टिकट को इंडिया पोस्ट ऑफिस द्वारा जारी किया गया।”उन्होंने आगे लिखा, “इस अवसर पर पीएम मोदी ने एक स्मृति चिह्न के रूप में विशेष सिक्के का भी विमोचन किया और साथ ही वेब पोर्टल वंदेमातरम्150डॉटइन का शुभारंभ किया, जिससे इस महान राष्ट्रीय गीत की गूंज नई पीढ़ियों तक पहुंचे और इसकी प्रेरणा अमर बनी रहे।”इस बीच, यूजर्स की सुविधा के लिए भारतीय डाक विभाग की ओर से डाक सेवा 2.0 ऐप लॉन्च किया गया है। इस ऐप को एंड्रॉइड यूजर्स प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं। ऐपभारतीय डाक विभाग ने अपनी सेवाओं को आधुनिक और तेज बनाने के लिए डाक सेवा 2.0 ऐप लॉन्च किया है। इस ऐप के माध्यम से डाकघर से जुड़े काम अब मोबाइल फोन से घर बैठे हो जाएंगे। एंड्रॉयड स्मार्टफोन यूजर्स गूगल प्ले स्टोर और आईफोन यूजर ऐपल ऐप स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं। इस ऐप की मदद से ग्राहक बिना डाक विभाग जाए घर बैठे ही ही बहुत से काम कर सकते हैं। यूजर्स को इस ऐप के साथ ट्रैकिंग, डाकघर खोजने के अलावा, डाक शुल्क कैलकुलेटर जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। डाक सेवा 2.0 ऐप का इस्तेमाल हिंदी के अलावा कई दूसरी भाषाओं जैसे अंग्रेजी, डोगरी, गुजराती, मराठी, पंजाबी, उर्दू, कोंकणी, मैथली और बंगाली में किया जा सकता है। ऐप को कुल 23 भाषाओं में इस्तेमाल करने की सुविधा दी गई है।इससे पहले संचार मंत्रालय की ओर से जानकारी देते हुए बताया गया था कि डाक विभाग के अंतर्गत इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) ने पेंशनभोगियों को डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (डीएलसी) सेवाएं उनके डोर-स्टेप पर उपलब्ध करवाने के लिए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के साथ साझेदारी की है। -
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आवारा कुत्तों के मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे से बचाने और राजमार्गों से आवारा मवेशियों व अन्य जानवरों को हटाने के लिए कई निर्देश जारी किए।
देश भर में आवारा कुत्तों के प्रबंधन मामले पर स्वतः संज्ञान मामले न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने सुनवाई की। इस दौरान उन्होंने आदेश दिया कि आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, सार्वजनिक खेल परिसर, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर उचित बाड़ लगाई जाए।न्यायमूर्ति नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्थानीय नगर निकायों को ऐसे परिसरों की नियमित तौर पर निगरानी करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही उन्होंने पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम, 2023 के तहत अनिवार्य टीकाकरण और नसबंदी के बाद जानवरों को निर्दिष्ट आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया।शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि इन सार्वजनिक स्थानों से हटाए गए कुत्तों को उसी स्थान पर वापस नहीं लाया जाना चाहिए। साथ ही, कोर्ट ने समय-समय पर निरीक्षण करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने राजमार्गों से आवारा पशुओं और अन्य जानवरों को तुरंत हटाने का भी आदेश दिया। पीठ ने कहा कि ऐसे जानवरों को बिना किसी देरी के निर्दिष्ट आश्रय स्थलों में पहुंचाया जाए।शीर्ष अदालत ने आदेश दिया, “सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव इसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें। अन्यथा, अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।” साथ ही, निर्देशों को लागू करने के लिए अपनाई गई व्यवस्थाओं के लिए आठ हफ़्तों के अंदर अनुपालन स्थिति रिपोर्ट (कंप्लायंस स्टेटस रिपोर्ट) मांगी।इससे पहले, सर्वोच्च न्यायालय ने एबीसी नियमों के क्रियान्वयन में खामियों को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रति नाराजगी व्यक्त की थी। न्यायमूर्ति नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है। पीठ इस बात पर जोर दे रही है कि आवारा पशुओं से जुड़ी कई घटनाएं न केवल जन सुरक्षा से समझौता करती हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को भी खराब करती हैं।पीठ ने टिप्पणी की, “लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि भी खराब होती है। हम समाचार रिपोर्ट भी पढ़ रहे हैं।” -
नयी दिल्ली. भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद (आईआईएमए) ने व्यावसायिक विश्लेषण (बिजनेस एनालिटिक्स) और कृत्रिम मेधा (एआई) में अपनी तरह का पहला दो वर्षीय मिश्रित एमबीए कार्यक्रम शुरू किया है। यह अभिनव डिग्री प्रदान करने वाला एमबीए कार्यक्रम उन पेशेवरों और उद्यमियों के लिए तैयार किया गया है जो उन्नत विश्लेषणात्मक और एआई-संचालित क्षमताओं को नेतृत्व, रणनीति और प्रबंधन विशेषज्ञता के साथ एकीकृत करना चाहते हैं। आईआईएमए के निदेशक भारत भास्कर ने कहा, ‘‘विश्लेषण और एआई अब केवल पूरक साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि वे उद्यमों के प्रतिस्पर्धा, नवाचार और हितधारक मूल्य सृजन के मूल में हैं। इस वास्तविकता ने ऐसे पेशेवरों की तत्काल आवश्यकता पैदा कर दी है जो प्रबंधकीय विशेषज्ञता को गहन तकनीकी-विश्लेषणात्मक प्रवाह के साथ जोड़ सकें।'' उन्होंने कहा, ‘‘आईआईएम अहमदाबाद की इस अनूठी पेशकश के साथ, हम महत्वाकांक्षी प्रबंधकों और उद्यमियों के लिए उच्च-प्रभाव कौशल हासिल करने, एआई-सक्षम व्यावसायिक मॉडल में महारत हासिल करने और जिम्मेदारी से तथा बड़े पैमाने पर डिजिटल बदलावों का नेतृत्व करने के लिए एक सशक्त मार्ग तैयार कर रहे हैं।'' आईआईएमए के डीन (प्रोग्राम्स) दिप्तेश घोष ने कहा कि शीर्ष बी-स्कूल ऐसे कार्यक्रम तैयार करते हैं जो वास्तविक, समकालीन चुनौतियों और व्यवसाय की अस्थिरता को उठाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह मिश्रित एमबीए कार्यक्रम ऐसे लोगों का विकास करता है जो डेटा, एआई और सुदृढ़ प्रबंधकीय निर्णय के साथ विभिन्न कार्यों से जुड़ी समस्याओं का समाधान करते हैं। शिक्षार्थी बहु-विषयक क्षमता का निर्माण करते हैं, विश्लेषण को परिणामों में बदलते हैं और तकनीक-संचालित संदर्भों में आत्मविश्वास से प्रगति करते हैं।''
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नोएडा (उप्र) . साइबर ठगों ने एक सेवानिवृत शिक्षिका को धन शोधन मामले में नाम आने का डर दिखाकर सात दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट' रखा और डरा धमकाकर कथित तौर पर 31 लाख रुपये ठग लिये। पुलिस ने यह जानकारी दी। साइबर अपराधियों ने खुद को पुलिस व प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का अधिकारी बताकर लाखों रुपये ऐंठ लिये।
पीड़िता की शिकायत पर साइबर अपराध थाने में बृहस्पतिवार को मुकदमा दर्ज किया गया।अपर पुलिस उपायुक्त (साइबर अपराध) शैव्या गोयल ने बताया कि सेक्टर-100 में रहने वाली पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा है कि उनके पास 24 अक्टूबर की सुबह जालसाजों ने ट्राई कर्मचारी बनकर फोन किया और कहा कि दो घंटे में उनका सिम बंद हो जाएगा। महिला ने कारण पूछा तो बताया कि उनके आधार कार्ड से दिल्ली के दरियागंज स्थित एक बैंक की शाखा में खाता खोला गया है और इसमें अवैध रुपये लेनदेन होने पर दरियागंज थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। गोयल ने बताया कि कुछ देर बाद बुजुर्ग के पास ठगों ने दिल्ली पुलिस का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल की और उनके खिलाफ धनशोधन का मामला दर्ज होने की जानकारी दी और उनसे लाखों रुपये ठग लिये। अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।‘डिजिटल अरेस्ट' तेजी से बढ़ता साइबर अपराध है, जिसमें जालसाज ऑडियो या वीडियो कॉल पर खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसियों, अदालत या सरकारी विभागों के कर्मचारी के रूप में पेश करके पीड़ितों को डराते-धमकाते हैं और उन पर रुपये देने का दबाव बनाते हैं। -
शाहजहांपुर (उप्र). शाहजहांपुर जिले में घर के बाहर सो रहे दंपति को ट्रैक्टर-ट्राली ने रौंद दिया, जबकि उनकी दस वर्ष की पोती गंभीर रूप से घायल हो गई। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी है। पुलिस अधीक्षक (एसपी) राजेश द्विवेदी ने बताया कि बुधवार रात थाना पुवाया अंतर्गत पुवायां निगोही मार्ग पर एक ट्रैक्टर ट्राली जब सुनारा बुजुर्ग गांव पहुंची तभी चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया और वाहन ने घर के बाहर सो रहे दंपति को रौंद दिया । उन्होंने बताया कि मृतक की पहचान रामशंकर (48) एवं उनकी पत्नी तारावती (45) के रूप में की गई है। हादसे में अपनी दादी के पास सो रही वंदना (10) गंभीर रूप से घायल हो गई। द्विवेदी ने बताया कि सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में ले लिया है और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, वहीं बच्ची को इलाज के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि हादसे के बाद परिजनों ने शवों को सड़क पर रख कर रास्ता जाम किया और आरोपी चालक को गिरफ्तार करने की मांग की। हालांकि बाद में अधिकारियों के समझाने पर उन्होंने प्रदर्शन समाप्त कर दिया। पुलिस के मुताबिक घटना के बाद चालक फरार हो गया, उसे पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं साथ ही ट्रैक्टर ट्राली जब्त कर ली गई है।
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गांधीनगर. वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बृहस्पतिवार को युवाओं से भारत को अतीत की तरह एक महान देश बनाने और जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव का त्याग करने का आह्वान किया। वायुसेनाध्यक्ष कर्णावती विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह के दौरान छात्रों को संबोधित कर रहे थे। एयर चीफ मार्शल सिंह ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘मुझे जिम्मेदारी के पहलू पर बोलने दीजिए। हमें इस देश को महान बनाना है। हम कभी दुनिया में अग्रणी थे, लेकिन पिछली कुछ शताब्दियों में हम पिछड़ गए। अगर हमें फिर से अच्छा करना है, तो आप जैसे लोग ही महत्वपूर्ण होंगे, जो इस देश का भविष्य हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करें। कोई सामाजिक विभाजन नहीं होना चाहिए, क्योंकि जो भी हमें बांटता है वह अच्छा नहीं है। हमारी रगों में एक ही खून बहता है और हम सभी एक ही देश के हैं। जाति या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। तभी हमारा देश प्रगति करेगा।'' एयर चीफ मार्शल सिंह ने छात्रों से कहा कि कुछ भी बनने से पहले उन्हें करुणा, ईमानदारी, निष्ठा और नि:स्वार्थता जैसे गुणों वाला अच्छा इंसान बनने का प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा, ‘‘टीम के रूप में कार्य करना बहुत महत्वपूर्ण है। याद रखें कि हम सभी एक बड़ी व्यवस्था का हिस्सा हैं। हम सभी दीवार में लगी ईंटों की तरह हैं। हम सभी को अपना कर्तव्य निभाना होगा। यह राष्ट्र आपसे और मुझसे बना है। अगर हम भारत को महान बनाना चाहते हैं, तो हमें पहले खुद को बेहतर इंसान बनाना होगा।'' वायुसेनाध्यक्ष ने लोगों से समाज को कुछ वापस देने के बारे में सोचने का आग्रह किया।
‘‘प्रत्येक सैनिक वर्दी में नागरिक है और प्रत्येक नागरिक बिना वर्दी के सैनिक है'' जैसे वाक्यांश का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कुछ प्रयास और समय राष्ट्र और समाज के लिए समर्पित किया जाना चाहिए। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने वहां मौजूद छात्रों से कहा, ‘‘आप जीवन में चाहे जो भी हासिल करें, जहां भी जाएं, अपनी जड़ों और अपने मूल को हमेशा याद रखें। अपने माता-पिता और शिक्षकों की शिक्षाओं को याद रखें। हमेशा विनम्र रहें और जमीन से जुड़े रहें। सफलता का कोई ‘शॉर्टकट' नहीं है। आपको कड़ी मेहनत करनी होगी।'' दीक्षांत समारोह के दौरान वायुसेनाध्यक्ष को ‘डॉक्टर ऑफ लिटरेचर' की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। -
नयी दिल्ली. वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी हैं कि निष्क्रिय जीवनशैली के कारण किशोरों में उच्च रक्तचाप के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और 25 वर्ष की आयु के व्यक्तियों में भी हृदयाघात के मामले सामने आ रहे हैं। इन विशेषज्ञों का मानना है कि अब 50 प्रतिशत हृदयाघात 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में हो रहे हैं और दिल्ली के 60 प्रतिशत स्कूली बच्चे मोटापे से ग्रस्त हैं। इन चिंताजनक आंकड़ों के मद्देनजर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने का उपाय ‘ब्लू जोन' सिद्धांतों की ओर तत्काल लौटना है। ‘ब्लू जोन्स' दुनिया के पांच क्षेत्रों को कहा जाता है जिसमें ओकिनावा (जापान), सार्डिनिया (इटली), निकोया (कोस्टा रिका), ईकारिया (यूनान) और लोमा लिंडा (कैलिफोर्निया) शामिल है। यहां लोग लंबा और स्वस्थ जीवन जीते हैं और अत्यधिक सक्रिय तथा ऊर्जा से भरपूर रहते हैं। यह मुख्य रूप से उनके विशेष जीवनशैली के कारण संभव होता है। फोर्टिस, नोएडा के 'इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विभाग' के वरिष्ठ निदेशक और प्रमुख डॉ. संजीव गेहरा ने पिछले सप्ताह आयोजित 'हिल वनहेल्थ कनेक्ट सीरीज' में इस ‘महामारी' की गंभीरता पर चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “हम 25 वर्ष की उम्र में हृदयघात के मामले देख रहे हैं, जबकि 50 प्रतिशत मामले 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में हैं। इसका मुख्य कारण हमारी निष्क्रिय जीवनशैली है। दिल्ली के किशोरों में 60 प्रतिशत मोटापे की दर गहराते संकट की चेतावनी है और इससे 40 वर्ष की आयु तक अंगों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। हमें 25 वर्ष से प्रारंभ होने वाले निवारक जांचों पर ध्यान केंद्रित करना होगा और सरल ‘ब्लू जोन' सिद्धांत अपनाना होगा।” इंडिया हबिटेट सेंटर के निदेशक और 'हिल वनहेल्थ कनेक्ट सीरिज' के अध्यक्ष प्रोफेसर के जी सुरेश ने कहा, “स्वस्थ भारत के लक्ष्य को हासिल करने में संचार और समुदाय की भागीदारी की भूमिका अहम है। संचार के बिना स्वास्थ्य योजनाएं विफल हो जाती हैं। स्वास्थ्य को ‘जन भागीदारी' आंदोलन बनाना होगा। जैसे हम सफाई के लिए स्वच्छता रैंकिंग देते हैं, वैसे ही हमें समुदाय स्वास्थ्य के लिए ‘स्वास्थ्य रैंकिंग' लागू करनी चाहिए। प्रतिस्पर्धा बदलाव लाती है और स्वास्थ्य को एक सामूहिक पड़ोस की प्राथमिकता बनाती है।” दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. जी. एस. ग्रेवाल ने दलील दी कि ब्लू जोन एक आदर्शवादी कल्पना है जो शहरी आबादी के लिए पहुंच से बाहर है। डॉ. ग्रेवाल ने कहा, “हमें एक वास्तविक ‘पिंक जोन' तैयार करना होगा जिसमें जीवनशैली में बदलाव करना, समय पर बिमारी की पहचान करना और टीकाकरण को अपनाना शामिल हो।” सजग जीवनशैली की आवश्यकता को दोहराते हुए, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की पूर्व मुख्य डायटीशियन डॉ रेखा गुप्ता ने आहार के विषय में व्यावहारिक सुझाव दिए। उन्होंने कहा, “हमारे पूर्वज स्वाभाविक रूप से सजग भोजन करते थे। सबसे बड़ा रहस्य यह है कि आपका तृप्ति केंद्र मस्तिष्क को पूर्णता का संकेत देने में पूरे 20 मिनट लेता है। यदि आप जल्दी खाते हैं, तो आप अनिवार्य रूप से अधिक खा लेते हैं। हमें धीरे-धीरे खाना चाहिए, अपने भोजन की खुशबू महसूस करनी चाहिए और अपनी पारंपरिक आहार शैली—संपूर्ण अनाज, मिलेट और हरे पत्तेदार सब्जियों— की ओर लौटना चाहिए।”
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पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उनके दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा, महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव, वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह व राजीव रंजन सिंह ‘ललन' सहित कई प्रमुख नेताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। राज्य निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, सुबह एक बजे तक 3.75 करोड़ मतदाताओं में से 42.31 प्रतिशत ने मतदान किया था। गोपालगंज जिले में सर्वाधिक 46.73 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ, जबकि लखीसराय में 46.37 और बेगूसराय में 46.02 प्रतिशत मतदान हुआ। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने गृह नगर बख्तियारपुर में मतदान किया।
उन्होंने ‘एक्स' पर लिखा, “मतदान लोकतंत्र में नागरिकों का अधिकार ही नहीं, कर्तव्य भी है।” उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तारापुर में मतदान करने के बाद कहा, “नीतीश कुमार ने जो काम किया है, वह जारी रहना चाहिए। आज जो परिवर्तन हम देख रहे हैं, वह वर्षों के परिश्रम का परिणाम है। विकास के लिए वोट करें।” लखीसराय में मतदान के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बुर्का पहनी महिलाओं की पहचान की जांच को ‘वोट चोरी' रोकने के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा, “यह धार्मिक पक्षपात नहीं है... हम पाकिस्तान में नहीं रहते। न तो बिहार में तेजस्वी यादव की सरकार बनेगी, न ही यहां शरीयत कानून लागू होगा।” राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव ने अपने पिता लालू प्रसाद, मां राबड़ी देवी और भाई तेज प्रताप यादव के साथ पटना स्थित वेटरनरी कॉलेज मतदान केंद्र पर वोट डाला। उन्होंने युवाओं से बदलाव लाने की अपील करते हुए कहा, “मैं युवाओं से अपील करता हूं कि वे नई सरकार बनाकर परिवर्तन लाएं।” राबड़ी देवी ने भी जनता से “वोट डालने और बदलाव लाने” की अपील की। उन्होंने दोनों बेटों तेजस्वी और तेज प्रताप के लिए सफलता की कामना की। तेजस्वी की बहन रोहिणी आचार्य ने कहा, “इस बार बिहार की जनता डबल इंजन सरकार को हराएगी। बिहार के बेरोजगार भाइयों को रोजगार मिलेगा और राज्य के बाहर भटक रहे लोगों को राहत मिलेगी।” तेज प्रताप यादव, जो इस बार महुआ सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, ने कहा, “बिहार के सभी लोग वोट डालें। हर वोट महत्वपूर्ण है।” छपरा सीट से राजद उम्मीदवार खेसारी लाल यादव ने सारण जिले के एकमा में वोट डालने के बाद कहा, “यह मेरे जीवन की दूसरी पारी है। जनता के प्रेम से सब अच्छा होगा। मेहनत करनी पड़ती है, लेकिन जो ठान लेते हैं, उनके लिए कोई काम कठिन नहीं। मैं चाहता हूं कि सिर्फ राम मंदिर ही नहीं, बल्कि जनता की सभी जरूरतें पूरी हों।” अलीनगर से भाजपा उम्मीदवार मैथिली ठाकुर ने कहा, “अगर मैं जीतती हूं, तो घोषणापत्र में बताए गए प्रोजेक्ट और योजनाओं को पूरा करना मेरा पहला लक्ष्य होगा। साथ ही मैं एक सांस्कृतिक केंद्र, केंद्रीय विद्यालय, डिग्री कॉलेज और बेहतर सड़कों के निर्माण पर ध्यान दूंगी।” केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और भाजपा सांसद नित्यानंद राय ने कहा, “मतदान लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व है। बिहार लोकतंत्र की जन्मस्थली है, इसकी रेत में लोकतंत्र की भावना बसती है।” बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने पटना में मतदान के बाद कहा, “राज्य की जनता जात-पांत से ऊपर उठकर हमारे साझा गौरव और विकास को ध्यान में रखकर वोट करे।” भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने मतदाताओं से राजग को समर्थन देने की अपील करते हुए कहा, “बिहार के विकास की रफ्तार को जारी रखें। अधिक मतदान से राज्य की प्रगति और मजबूत होगी।” भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विश्वास जताया कि बिहार में राजग की सरकार आराम से बनेगी। उन्होंने कहा, “जनता बड़ी संख्या में दोनों चरणों में मतदान करेगी। मैं बिहार के मतदाताओं पर गर्व करता हूं।” वीआईपी प्रमुख और महागठबंधन के उपमुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार मुकेश सहनी ने दरभंगा जिले के गौरा बौराम में परिवार सहित वोट डाला। उन्होंने कहा, “यह नीतीश कुमार का आखिरी चुनाव है। वे जितने वादे करना चाहें कर लें, लेकिन हमारे पास बिहार के लिए एक दीर्घकालिक दृष्टि है। हमने अपनी बातें बहुत जिम्मेदारी से रखी हैं।” राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने वैशाली में मतदान करने के बाद कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है ‘पहले मतदान, फिर जलपान'। यानी मतदान के दिन बाकी सब कार्यों से पहले मतदान को प्राथमिकता दें।” लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सांसद शंभवी चौधरी ने कहा, “मैं एक समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर बिहार के लिए वोट करती हूं। सभी से अपील है कि बड़ी संख्या में बाहर निकलें और मतदान करें।” अधिकारियों ने बताया कि 18 जिलों की 121 सीटों पर सुबह सात बजे मतदान शुरू हुआ जो शाम 5 बजे तक चलेगा। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
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नई दिल्ली। संस्कृति मंत्रालय 7 नवंबर को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में उद्घाटन समारोह का आयोजन करेगा। इस अवसर पर पीएम मोदी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन 7 नवंबर से 7 नवंबर 2026 तक एक साल तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी उत्सव के औपचारिक शुभारंभ का प्रतीक है, जो इस कालजयी रचना के 150 साल पूरे होने की खुशी मनाता है। इसने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को प्रेरित किया और राष्ट्रीय गौरव एवं एकता को बनाए रखा।
वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरेदरअसल, 2025 में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के शुभ अवसर पर बंकिम चंद्र चटर्जी ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की रचना की थी। वंदे मातरम पहली बार साहित्यिक पत्रिका बंग दर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ में क्रमबद्ध तरीके से और बाद में 1882 में एक स्वतंत्र पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुआ। उस अवधि के दौरान भारत प्रमुख सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक परिवर्तनों से गुजर रहा था और राष्ट्रीय पहचान और औपनिवेशिक शासन के प्रति विरोध भी बढ़ रहा था। इस गीत में मातृभूमि को शक्ति, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक बताते हुए भारत की एकता और आत्म-सम्मान की जागृत भावना को काव्यात्मक अभिव्यक्ति दी गई। यह जल्द ही राष्ट्र के प्रति समर्पण का एक स्थायी प्रतीक बन गया।24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की कि स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान सम्मान दिया जाएगा। समारोह सुबह 10 बजे सार्वजनिक स्थानों पर सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण संस्करण के गायन के साथ शुरू होगा। इसमें प्रधानमंत्री की उपस्थिति में मुख्य कार्यक्रम के साथ-साथ सभी नागरिक, स्कूली बच्चे, कॉलेज के छात्र, अधिकारी, निर्वाचित प्रतिनिधि, पुलिस कर्मी, डॉक्टर, शिक्षक, ड्राइवर, दुकानदार और समाज के सभी वर्गों के अन्य सभी संबंधित भागीदार हिस्सा लेंगे।इसके ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व को मान्यता देते हुए पीएम मोदी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 1 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रव्यापी समारोह आयोजित करने को लेकर मंजूरी दी है। इसके बाद 24 अक्टूबर को राष्ट्रीय कार्यान्वयन समिति ने 7 नवंबर, 2025 से 7 नवंबर, 2026 तक पूरे वर्ष उत्सव मनाने को मंजूरी दी।उद्घाटन समारोह के मुख्य आकर्षण–मुख्य अतिथि के आगमन से पहले सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन–राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्षों के इतिहास पर आधारित प्रदर्शनी।–भारत माता को पुष्पांजलि अर्पित करने का समारोह–वंदे मातरम : नाद एकम, रूपम अनेकम : अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वायलिन वादक डॉ. मंजूनाथ मैसूर की ओर से संचालित लगभग 75 संगीतकारों के साथ मुख्य अतिथि के समक्ष सांस्कृतिक मंच पर संगीत कार्यक्रम, जिसमें विविध पारंपरिक भारतीय संगीत शैलियों का संगम होगा।–वंदे मातरम के 150 साल के इतिहास पर एक लघु फिल्म का प्रदर्शन।–स्मारक टिकट और सिक्के जारी करने का समारोह।–मंच पर उपस्थित विशिष्ट जनों एवं आमंत्रित अतिथियों के संबोधन।–मुख्य अतिथि का संबोधन।–वंदे मातरम का सामूहिक गायन।सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश, केंद्रीय मंत्रालय/विभाग और उनसे जुड़े/अधीनस्थ कार्यालय 7 नवंबर, 2025 को सुबह 10:00 बजे अपने-अपने कार्यालय परिसर में ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन कार्यक्रम का आयोजन करेंगे। इस अवसर पर देश भर के सभी कार्यालयों और संस्थानों में सामूहिक रूप से प्रधानमंत्री के संबोधन का सीधा प्रसारण देखने की व्यवस्था की जाएगी।संस्कृति मंत्रालय ने इस पहल के लिए एक विशेष वेबसाइट https://vandemataram150.in/ शुरू की है। इस वेबसाइट पर नागरिकों और संस्थागत भागीदारी के लिए निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं :-आधिकारिक ब्रैंडिंग सामग्री (होर्डिंग, बैनर, वेब क्रिएटिव)-लघु फिल्में और क्यूरेटेड प्रदर्शनी–समूह गायन के लिए संगीत संगत और बोल के साथ पूरा गीत–‘संगीत की धुन के साथ वंदे मातरम का गायन’ नामक सुविधा के माध्यम से नागरिक अभियान पोर्टल पर गीत का अपना संस्करण रिकॉर्ड करके अपलोड कर सकेंगे। सभी वर्गों के नागरिकों को इसमें भाग लेने और मातृभूमि के प्रति अपनी भक्ति व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।देश के सभी नागरिकों से इस पहल में बड़ी संख्या में भाग लेने का आग्रह किया जा रहा है, ताकि हम सभी सामूहिक रूप से अपने राष्ट्रगान के प्रति देशभक्ति और कृतज्ञता की भावना को व्यक्त कर सकें। - पटना। बिहार में आज गुरुवार को विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग चल रही है। चुनाव से पहले भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के अंतर्राष्ट्रीय चुनाव आगंतुक कार्यक्रम (आईईवीपी) के तहत 7 देशों के 16 प्रतिनिधियों ने बिहार चुनाव के पहले चरण के लिए व्यवस्था देखी।वोटिंग के लिए आयोग की व्यवस्था देखने के लिए इंडोनेशिया, कोलंबिया, फिलीपींस, फ्रांस, बेल्जियम, दक्षिण अफ्रीका और थाईलैंड के प्रतिनिधि आए। आईईवीपी 2025 का उद्घाटन सत्र मंगलवार को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट(आईआईआईडीईएम) में आयोजित किया गया था। इस सत्र में सात देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी 16 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।इन सात देशों के 16 प्रतिभागियों से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने बातचीत की। बातचीत के दौरान उन्हें भारत के सुदृढ़ चुनावी ढांचे की जानकारी दी। इसके साथ ही इन प्रतिनिधियों को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) का प्रदर्शन दिखाया गया। वरिष्ठ चुनाव आयोग अधिकारियों ने उन्हें चुनाव प्रबंधन के प्रमुख पहलुओं जैसे मतदाता सूची तैयार करने और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के बारे में जानकारी दी।इस कार्यक्रम के तहत 7 देशों के 16 प्रतिनिधि बिहार पहुंचे हैं। इस दौरे की शुरुआत बुधवार को हुई थी। बिहार दौरे पर इन प्रतिनिधियों ने ईवीएम प्रेषण केंद्रों का अवलोकन किया और मतदान प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से देखा।आईईवीपी दुनियाभर के चुनाव प्रबंधन निकायों (ईएमबी) के साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सहभागिता के लिए चुनाव आयोग की प्रमुख पहलों में से एक है। बता दें कि 2014 से आईईवीपी भारत की चुनाव प्रणाली की खूबियों को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के समक्ष प्रदर्शित कर रहा है और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में मतदान के लिए अपनाई गई सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा कर रहा है।बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए राज्य के 18 जिलों के 121 सीटों पर सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हो गया। इस चुनाव में 1,192 पुरुष और 122 महिला उम्मीदवारों सहित 1,314 उम्मीदवार मैदान में हैं।चुनाव आयोग के अनुसार, इस चुनाव में कुल 3,75,13,302 मतदाता हैं, जिनमें 1,98,35,325 पुरुष, 1,76,77,219 महिलाएं और थर्ड जेंडर के 758 मतदाता शामिल हैं। कुल मतदान केंद्रों की संख्या 45,341 है, जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों में 36,733 और शहरी क्षेत्रों में 8,608 मतदान केंद्र शामिल हैं।चुनाव आयोग ने इन जिलों में 320 आदर्श मतदान केंद्र घोषित किए हैं, जिनमें से 926 महिलाओं द्वारा प्रबंधित हैं और 107 दिव्यांगजनों द्वारा प्रबंधित हैं। सभी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग उपलब्ध होगी।राजधानी पटना में 5,677 मतदान केंद्र हैं, जिनमें 541 केवल महिलाओं के लिए, 49 आदर्श मतदान केंद्र, 14 दिव्यांगजनों के अनुकूल मतदान केंद्र और तीन युवा-केंद्रित मतदान केंद्र शामिल हैं।
- कोलकाता,। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत, राज्य भर में बुधवार रात आठ बजे तक 1.10 करोड़ से अधिक गणना प्रपत्र वितरित किए गए। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। राज्य में एक महीने तक चलने वाली यह कवायद मंगलवार को शुरू हुई और चार दिसंबर तक चलेगी। निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘बुधवार रात आठ बजे तक बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा 1.10 करोड़ से अधिक गणना प्रपत्र वितरित किए गए।” अधिकारी ने कहा, ‘‘कल राज्य में कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। यदि किसी बीएलओ के विरुद्ध कोई प्रतिरोध की सूचना मिलती है, तो हम तुरंत जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) को जांच करने का निर्देश देते हैं।'' इस प्रक्रिया के तहत राज्य के 294 विधानसभा क्षेत्रों में 80,681 बीएलओ तैनात किए गए हैं।अधिकारी ने बताया कि अब तक लगभग 7.66 करोड़ गणना प्रपत्र तैयार किए जा चुके हैं और प्रत्येक मतदाता को इसकी दो प्रतियां मिलेंगी। एसआईआर प्रक्रिया के दिशानिर्देशों के अनुसार, बीएलओ दोनों प्रतियों पर हस्ताक्षर करेगा। अधिकारी एक भरा हुआ प्रपत्र निर्वाचन आयोग के लिए अपने पास रखेगा और दूसरा मुहर लगी पावती के साथ लौटाएगा, जिसकी भविष्य में आवश्यकता हो सकती है। पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण 23 वर्षों के अंतराल के बाद किया जा रहा है। राज्य में मतदाता सूचियों का ऐसा अंतिम पुनरीक्षण 2002 में हुआ था।
- नोएडा (उत्तर प्रदेश) नोएडा विकास प्राधिकरण ने बुधवार को सेक्टर-25ए स्थित मोदी मॉल का निरीक्षण करने के दौरान गंदगी मिलने और विभिन्न नियमों के उल्लंघन पर मॉल प्रबंधन पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। प्राधिकरण के महाप्रबंधक एसपी सिंह ने बताया कि निरीक्षण के दौरान पाया गया कि मॉल में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। उन्होंने बताया कि कचरा अनधिकृत कबाड़ियों को दिया जा रहा था, जिनकी वजह से कचरा सड़क पर फेंका जा रहा था। सिंह ने कहा, ‘‘निरीक्षण के दौरान मॉल प्रबंधन और कर्मचारियों ने कोई सहयोग नहीं किया। इसके परिणामस्वरूप मॉल प्रबंधन पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। चेतावनी भी दी कि यदि जुर्माना एक सप्ताह के अंदर जमा नहीं किया जाता है, तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।''
- उन्नाव/बांदा (उप्र)।उत्तर प्रदेश के उन्नाव और बांदा जिलों में बुधवार को हुए अलग-अलग सड़क हादसों में चार युवकों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, उन्नाव जिले में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे की सर्विस लेन पर बरादेव-मोहान मार्ग के पास एक सड़क हादसे में तीन युवकों की मौत हो गई। उसने बताया कि मृतकों की पहचान लखनऊ के दुबग्गा थाना क्षेत्र के जेहटा गांव निवासी मोहित (22), अभिषेक (25) और धीरेंद्र (21) के रूप में हुई है। वहीं, घायल सनी (24) का उपचार किया जा रहा है। पुलिस ने बताया कि युवक दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर औरास थाना क्षेत्र के बरादेव गांव में लगने वाले मेले में जा रहे थे तभी बरादेव-मोहान मार्ग पर मुड़ते समय दोनों मोटरसाइकिल तेज रफ्तार के कारण अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पानी से भरे गड्ढे में गिर गईं। उसने बताया कि हादसे में मोहित, अभिषेक और धीरेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सनी गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस और स्थानीय लोगों ने चारों को गड्ढे से निकालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। सनी की हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया।बांदा जिले के मटौंध थाना क्षेत्र के निवाइच गांव के पास बुधवार देर शाम दो मोटरसाइकिलों की आमने-सामने की टक्कर में एक युवक की मौत हो गई, जबकि तीन युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने बताया कि मृत युवक की पहचान मवई बुजुर्ग गांव के निवासी बालेंद्र सिंह (38) के रूप में हुई है। उसके साथी रंजन तिवारी और दूसरी मोटरसाइकिल पर सवार जसपुरा निवासी मोहित और धीरज का उपचार किया जा रहा जिनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
- नयी दिल्ली/गुरुग्राम। राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देश भर में 150 महत्वपूर्ण स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम' गाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में ऐसे ही एक कार्यक्रम में भाग लेंगे। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, ‘वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही विभिन्न कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में होने वाले उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी मुख्य अतिथि होंगे।समारोह सात नवंबर की सुबह सार्वजनिक स्थानों पर स्कूली बच्चों, कॉलेज के छात्रों, अधिकारियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, पुलिसकर्मियों और डॉक्टरों सहित नागरिकों की भागीदारी के साथ 'वंदे मातरम' के पूर्ण संस्करण के सामूहिक गायन के साथ शुरू होगा। मंत्रालय ने कहा कि गीत के ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रव्यापी समारोहों को मंजूरी दी थी। अधिकारियों ने बताया कि उद्घाटन समारोह में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम, 'वंदे मातरम' के 150 वर्षों के इतिहास पर एक प्रदर्शनी, एक लघु वृत्तचित्र फिल्म का प्रदर्शन और एक स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया जाएगा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी इस उपलब्धि को एक उत्सव के रूप में मनाने की योजना बना रही है।नयी दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा, “इस अवसर को मनाने के लिए सात नवंबर से 26 नवंबर (संविधान दिवस) तक देश भर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। '' उन्होंने बताया कि सात नवंबर को 150 महत्वपूर्ण स्थानों पर वंदे मातरम गाया जाएगा, जिसके बाद स्वदेशी उत्पादों के उपयोग की शपथ ली जाएगी। इस दौरान कविता लेखन, पाठन और चित्रकला जैसे कई अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। जिन स्थानों पर सात नवंबर को वंदे मातरम का गायन आयोजित किया जाएगा उनमें कारगिल युद्ध स्मारक, अंडमान और निकोबार सेलुलर जेल, ओडिशा का स्वराज आश्रम, आगरा में शहीद स्मारक पार्क और वाराणसी में नमो घाट शामिल हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि वंदे मातरम अंग्रेजों से भारत की मुक्ति के लिए एक प्रमुख मंत्र के रूप में उभरा। संवाददाता सम्मेलन में भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ओम प्रकाश धनखड़ ने कहा कि सभी राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस अवसर पर अपने प्रदेश की राजधानियों में इसी प्रकार के कार्यक्रमों में भाग लेंगे। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार ऐसा माना जाता है कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इस गीत की रचना सात नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के अवसर पर की थी। मातृभूमि की वंदना में गाए गए इस गीत को 1950 में राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया था।
- वर्धा. महाराष्ट्र के वर्धा जिले में एक कंटेनर ट्रक और कार के बीच हुई टक्कर में तीन लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि यह दुर्घटना मंगलवार रात करीब 11:30 बजे हिंगनघाट तहसील के अलीपुर गांव में हुई।अधिकारी ने बताया कि धोत्रा फाटा के पास कंटेनर ट्रक ने चार लोगों को ले जा रही एक कार को टक्कर मार दी। कार में सवार तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि चालक जिंदा बच गया। मृतकों की पहचान वैभव शिवंकर (25), गौरव गवाडे (27) और विशांत वैद्य (28) के रूप में हुई है। अलीपुर पुलिस थाने के सहायक निरीक्षक विजय घुले ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया कि ट्रक चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है।
- मुंबई. युवा भारतीय प्रगति के लिए ऋण का उपयोग एक जिम्मेदार प्रवर्तक के रूप में कर रहे हैं। वे कौशल उन्नयन में निवेश करने, करियर विकास के लिए और उद्यमशीलता के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है। डिजिटल ऋण मंच ‘एमपॉकेट' द्वारा किए गए सर्वेक्षण में कहा गया कि आज की पीढ़ी के लिए ऋण तक पहुंच निर्भरता नहीं, बल्कि संभावना है। सर्वेक्षण में पाया गया कि 63 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने अपनी वित्तीय भलाई पर सकारात्मक प्रभाव की बात कही। वहीं करीब 40 प्रतिशत लोग ऋण का उपयोग व्यावसायिक उन्नति (21.1 प्रतिशत), जीवनशैली में सुधार (20 प्रतिशत) और शिक्षा (16.5 प्रतिशत) जैसे भविष्योन्मुखी उद्देश्यों के लिए कर रहे हैं। सर्वेक्षण में 3,000 से अधिक युवा भारतीयों से बात की गई। 26.3 प्रतिशत लोग अब भी स्वास्थ्य सेवा के लिए और 12.4 प्रतिशत लोग आपात स्थिति के लिए ऋण पर निर्भर हैं।प्रमुख प्रवृत्ति स्व-निवेश और दीर्घकालिक विकास की ओर बदलाव को दर्शाती है। करीब 10 प्रतिशत उत्तरदाता ऋण का उपयोग ‘फ्रीलांसिंग', रचनात्मक परियोजनाओं या छोटे उद्यमों में कर रहे हैं जो दर्शाता है कि वित्तीय पहुंच किस प्रकार शहरों तथा कस्बों में भारत की उद्यमशीलता की भावना को उजागर करने में मदद कर रही है। एमपॉकेट के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) गौरव जालान ने कहा, ‘‘ हम देख रहे हैं कि युवा भारत वित्तीय क्षेत्र में किस तरह से जुड़ रहा है। इसमें एक शक्तिशाली बदलाव आ रहा है। ऋण अब केवल पहुंच का मामला नहीं रह गया है, यह एजेंसी का मामला है। जब इसका उपयोग जिम्मेदारी से किया जाता है तो यह आत्म-विकास का एक साधन बन जाता है जिससे लोगों को कौशल बढ़ाने, आगे की योजना बनाने और अर्थव्यवस्था में आत्मविश्वास से भाग लेने में मदद मिलती है।'' एमपॉकेट फाइनेंशियल सर्विसेज एक वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनी और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा पंजीकृत गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) है जो भारत में वित्तीय समावेशन को बढ़ाने का काम कर रही है।
- नयी दिल्ली. देश के कुल 12 राज्यों ने 2025-26 में महिलाओं के लिए बिना शर्त नकद अंतरण (यूसीटी) योजनाओं पर सामूहिक रूप से 1.68 लाख करोड़ रुपये खर्च करेंगे। विचारक संस्था पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च की नयी रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तीन साल पहले तक केवल दो राज्य महिलाओं के लिए ऐसी योजनाएं चला रहे थे।इसके मुताबिक, इन 12 राज्यों में से छह ने इस वर्ष राजस्व घाटा होने का अनुमान लगाया है, जो महिला-केंद्रित कल्याणकारी योजनाओं पर बढ़ते व्यय से राजकोष पर दबाव को उजागर करता है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘यूसीटी योजनाओं को लागू करने वाले 12 राज्यों में से छह ने 2025-26 में राजस्व घाटे का अनुमान लगाया है। हालांकि, यूसीटी योजनाओं पर खर्च को छोड़कर राजस्व संतुलन को समायोजित करने से इन राज्यों के राजकोषीय संकेतकों में सुधार दिखाई देता है।'' बिना शर्त नकद अंतरण (यूसीटी) योजनाओं का उद्देश्य मासिक प्रत्यक्ष लाभ भुगतान के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को सशक्त बनाना है।कई राज्यों में यह एक प्रमुख कल्याणकारी योजना बन गई है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के मुताबिक, महिलाओं को बड़े पैमाने पर बिना शर्त नकद अंतरण (यूसीटी) की सुविधा देने वाले राज्यों की संख्या 2022-23 में दो राज्यों से बढ़कर 2025-26 में 12 राज्यों तक हो गई है। इन योजनाओं के प्राथमिक लाभार्थियों का चयन आय सीमा, आयु वर्ग और अन्य कारकों के आधार पर किया जाता है। असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने पिछले वर्ष की तुलना में महिला यूसीटी योजनाओं पर बजटीय आवंटन में क्रमशः 31 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की भारी वृद्धि की है। महिलाओं को नकदी मदद करने की योजनाओं में तमिलनाडु की कलैगनार मगलिर उरीमई थोगई थित्तम, मध्य प्रदेश की लाडली बहना योजना और कर्नाटक की गृह लक्ष्मी योजना शामिल हैं। इन योजनाओं में प्रत्येक पात्र परिवारों की महिलाको 1,000 रुपये से 1,500 रुपये तक की मासिक सहायता प्रदान की जाती है।विचारक संस्थान ने हालांकि अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि ये योजनाएं राज्य के बजट पर दबाव बढ़ा रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर इन योजनाओं को बंद कर दिया जाए तो राज्यों की वित्तीय स्थिति में काफी सुधार हो सकता है। उदाहरण के लिए कर्नाटक का मौजूदा बजटीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 0.6 प्रतिशत से घटकर 0.3 प्रतिशत के अधिशेष पर पहुंच जाएगा। इसी प्रकार, मध्य प्रदेश का अधिशेष 0.4 प्रतिशत से बढ़कर 1.1 प्रतिशत हो जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पहले चेतावनी दी थी कि महिलाओं, युवाओं और किसानों के लिए सब्सिडी और नकद अंतरण पर बढ़ते खर्च से उत्पादक खर्च के लिए राजकोषीय गुंजाइश कम हो सकती है। कुछ राज्यों ने लागत प्रबंधन के लिए लाभों को पहले ही समायोजित कर लिया है। महाराष्ट्र ने अप्रैल 2025 में मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना के तहत मासिक भुगतान में कटौती की, जबकि झारखंड ने 2024 के अंत तक मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना के तहत भुगतान बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रति माह कर दिया।
- नयी दिल्ली. ग्गज प्रौद्योगिकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने कहा है कि वह अपने कृत्रिम मेधा (एआई) टूल ‘माइक्रोसॉफ्ट 365 कोपायलट' के लिए 2026 तक भारत समेत 15 देशों में स्थानीय स्तर पर ही डेटा प्रोसेसिंग की सुविधा शुरू करेगी। इस कदम का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं के डेटा को देश की सीमाओं के भीतर ही सुरक्षित रखना और नियामकीय अनुपालन को मजबूत करना है। माइक्रोसॉफ्ट 365 कोपायलट एआई पर आधारित एक डिजिटल सहायक है जो माइक्रोसॉफ्ट के ऑफिस अनुप्रयोगों- वर्ड, एक्सेल, पावरपॉइंट, आउटलुक और टीम्स में एकीकृत है। यह उपयोगकर्ता के निर्देश पर सामग्री बनाने, डेटा विश्लेषण, ईमेल या रिपोर्ट लिखने और सारांश बनाने जैसे काम करता है।माइक्रोसॉफ्ट ने अपने एक ब्लॉग में कहा कि भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और ब्रिटेन में ग्राहकों को 2025 के अंत तक यह विकल्प मिलेगा कि उनके कोपायलट टूल पर होने वाली बातचीत और प्रतिक्रियाओं से संबंधित आंकड़े देश की सीमाओं के भीतर स्थित डेटा केंद्रों में ही प्रसंस्कृत किए जाएं। इसके बाद 2026 में कनाडा, जर्मनी, इटली, मलेशिया, पोलैंड, दक्षिण अफ्रीका, स्पेन, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और अमेरिका में भी यह सुविधा शुरू की जाएगी। माइक्रोसॉफ्ट ने कहा कि यह कदम सरकारी संस्थानों और अत्यधिक विनियमित उद्योगों के लिए डेटा सुरक्षा और शासन को सुदृढ़ करेगा। कंपनी माइक्रोसॉफ्ट 365 कोपायलट ग्राहकों के लिए डेटा को स्थानीय स्तर पर ही प्रसंस्कृत करने की सुविधा पहले से ही 27 देशों में उपलब्ध करा रही है। घरेलू डेटा प्रसंस्करण की यह पहल उस समय आई है जब प्रौद्योगिकी कंपनी ने हाल में अनुपालन ढांचे में सुधार किए हैं। यह सुधार नायरा एनर्जी के साथ ईमेल सेवा को लेकर हुए विवाद के बाद लागू किए गए थे। जुलाई में यूरोपीय संघ द्वारा नायरा एनर्जी पर रूस से संबंध होने के आरोप में प्रतिबंध लगाए जाने के बाद माइक्रोसॉफ्ट ने उसकी ईमेल सेवाएं रोक दी थीं। उसके बाद नायरा एनर्जी को इन सेवाओं की बहाली के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख करना पड़ा था।
- उन्नाव. उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक पिकअप ट्रक ने मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी, जिससे तीन भाइयों की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि यह घटना मंगलवार देर रात बिहार थाना क्षेत्र में मलौना गांव के निकट उन्नाव-रायबरेली राजमार्ग पर हुई। इसने बताया कि मृतकों की पहचान मौरावां क्षेत्र के अकोहरी ग्राम पंचायत के बखतखेड़ा मोहल्ले के निवासी रघुनाथ के बेटे सचिन (20) और छोटू (18) के रूप में हुई है। दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए उनके बड़े भाई अरुण राजपूत (26) की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई।पुलिस ने बताया कि तीनों भाई गंगा स्नान करने जा रहे थे, तभी बिहार थाना क्षेत्र में राजमार्ग पर एक महिंद्रा पिकअप ट्रक ने उनकी मोटरसाइकिल को सीधी टक्कर मार दी। इसने बताया कि टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मोटरसाइकिल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और तीनों सड़क पर गिर गये। एक स्थानीय पुलिस अधिकारी ने बताया कि सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और पीड़ितों को 108 एम्बुलेंस सेवा के जरिए सुमेरपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। अधिकारी ने बताया कि चिकित्सकों ने सचिन और छोटू को मृत घोषित कर दिया जबकि अरुण को एक उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर कर दिया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि ट्रक चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
- नयी दिल्ली. सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस कृष्णन ने बुधवार को कहा कि सरकार की प्राथमिकता वर्तमान में कृत्रिम मेधा (एआई) क्षेत्र में नवोन्मेष है और जरूरत पड़ने पर वह कानून लाएगी। सचिव ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए एआई का लाभ उठाना चाहती है कि इससे देश के लोगों को ज्यादा-से-ज्यादा लाभ मिले। उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम मानते हैं कि नवोन्मेष को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, तो आज नियमन प्राथमिकता नहीं है। एआई क्षेत्र में नवाचार की बहुत आवश्यकता है। मैं फिर यह कहता हूं कि अगर कानून या नियमन की आवश्यकता पड़ी, तो सरकार इसमें कोई कमी नहीं रखेगी।'' सचिव ने इंडिया एआई मिशन के तहत एक उप-समिति द्वारा सरकार को सौंपी गई इंडिया एआई संचालन दिशानिर्देश रिपोर्ट जारी करने के अवसर पर यह बात कही। रिपोर्ट में उन सिद्धांतों और रणनीतियों की सिफारिश की गई है जिन्हें सरकार को कृत्रिम मेधा से संबंधित मामलों के संचालन के लिए अपनाना चाहिए।कृष्णन ने कहा कि रिपोर्ट सरकार के रुख का समर्थन करती है और अभी कानून बनाने में जल्दबाजी करने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘हम मानव-केंद्रित रुख पर ध्यान दे रहे हैं और मुझे यह जानकर बेहद खुशी हो रही है कि ये महत्वपूर्ण सिद्धांत एआई संचालन दिशानिर्देशों में शामिल हैं। स्पष्ट रूप से, मुझे लगता है कि यह रिपोर्ट महत्वपूर्ण योगदान होगी, जो सरकार के इस दृष्टिकोण को फिर सामने रखती है कि हमारा ध्यान मुख्य रूप से नवाचार पर है और हम प्रौद्योगिकी के इस अवसर का उपयोग करना चाहते हैं।'' कृष्णन ने कहा कि एआई में नवोन्मेष को प्रोत्साहित करने पर ध्यान जारी रहेगा। साथ ही सरकार लोगों को प्रौद्योगिकी से होने वाले प्रत्यक्ष और स्पष्ट नुकसान से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। उप-समिति ने एआई संचालन के लिए सात सिद्धांतों की सिफारिश की है, जिनमें विश्वास, लोगों को प्राथमिकता, नवाचार, निष्पक्षता और समानता, जवाबदेही, ऐसे खुलासे और स्पष्टीकरण प्रदान करना शामिल है जिन्हें उपयोगकर्ता और नियामक समझ सकें और सुरक्षा, मजबूती तथा स्थिरता के लिए आवश्यक तत्वों का पालन करें। आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर बी. रवींद्रन की अध्यक्षता वाली समिति ने मोटे तौर पर उन अधिकांश उपायों की सिफारिश की है जिनका सरकार पहले से ही पालन कर रही है और एआई के संदर्भ में उपायों को और बेहतर बनाया है। समिति ने अल्पकालिक उपाय के रूप में प्रमुख प्रशासनिक संस्थानों की स्थापना, देश के हिसाब से एआई ढांचे का विकास, कानूनी संशोधनों का सुझाव, बुनियादी ढांचे तक पहुंच का विस्तार और एआई सुरक्षा नियमों तक पहुंच बढ़ाने जैसे सुझाव दिए हैं।
- नयी दिल्ली. देश में सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता 2025 तक 125 गीगावाट को पार कर जाने की उम्मीद है। यह लगभग 40 गीगावाट की घरेलू मांग से तीन गुना से भी अधिक है। वैश्विक शोध और परामर्श कंपनी वुड मैकेंजी ने यह बात कही है। यह वृद्धि सरकार की उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का नतीजा है, जिसने विनिर्माण के तेजी से बढ़ाने में मदद की है। हालांकि, उद्योग को अब अत्यधिक क्षमता के जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। यह अमेरिका को निर्यात में भारी गिरावट से और भी बढ़ गया है। अमेरिका के भारत पर 50 प्रतिशत जवाबी शुल्क के कारण 2025 की पहली छमाही में मॉड्यूल निर्यात में 52 प्रतिशत की गिरावट आई है। कई विनिर्माताओं ने अपनी अमेरिकी विस्तार योजनाओं को रोक दिया है और घरेलू बाजार पर फिर से ध्यान दे रहे हैं। वुड मैकेंजी ने आगाह किया है कि लागत को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना एक चुनौती बनी हुई है।आयातित सेल से असेंबल मॉड्यूल पूरी तरह से आयातित चीनी मॉड्यूल की तुलना में कम से कम 0.03 डॉलर प्रति वाट महंगे हैं। वहीं पूरी तरह से ‘मेड इन इंडिया' मॉड्यूल की कीमत सरकारी समर्थन के बिना उनके चीनी समकक्षों की तुलना में दोगुनी से भी अधिक हो सकती है। घरेलू उत्पादकों को समर्थन देने के लिए मॉडल और विनिर्माताओं की अनुमोदित सूची (एएलएमएम) और चीनी मॉड्यूल पर प्रस्तावित 30 प्रतिशत डंपिंग रोधी शुल्क सहित सुरक्षात्मक उपाय लागू किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में चीन की सौर आपूर्ति श्रृंखला का एक बड़े पैमाने पर विकल्प बनने की क्षमता है। लेकिन दीर्घकालिक सफलता अनुसंधान एवं विकास, प्रौद्योगिकी निवेश और अफ्रीका, लातिनी अमेरिका और यूरोप जैसे निर्यात बाजारों में विविधीकरण पर निर्भर करेगी। वुड मैकेंजी में सौर आपूर्ति श्रृंखला अनुसंधान प्रमुख याना ह्रीशको ने कहा, ‘‘भारत सरकार की पीएलआई योजना कारखानों में उत्पादन को बढ़ावा देने में बेहद कारगर रही है, लेकिन उद्योग अब तेजी से बढ़ती क्षमता को चेतावनी के संकेत के रूप में देख रहा है। यह चीन में हाल ही में कीमतों में आई गिरावट से पहले के संकेत जैसे ही हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘चुनौती क्षमता निर्माण से हटकर लागत-प्रतिस्पर्धी क्षमता हासिल करने और निर्यात बाजारों में विविधता लाने की हो गई है।''
- नयी दिल्ली. देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने पेंशनभोगियों के लिए डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (डीएलसी) के लिए एक विशाल शिविर का आयोजन किया, जिसमें 500 प्रमाण पत्र जारी किए गए। इस शिविर का उद्घाटन तीन नवंबर को राज्यमंत्री (कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन) जितेंद्र सिंह ने किया। इस मौके पर पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग के सचिव वी श्रीनिवास, एसबीआई के डीएमडी (लेनदेन बैंकिंग और नई पहल) शमशेर सिंह और एसबीआई के सीजीएम (सरकारी व्यापार सेवा और समाधान इकाई) अमृतेश मोहन उपस्थिति थे।
- नयी दिल्ली. देश में मजबूत मांग के दम पर जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान शीर्ष आठ आवास बाजारों में कीमतों में सात से 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी प्रॉपटाइगर ने बुधवार को शीर्ष आठ शहरों के प्राथमिक आवास बाजार के लिए मूल्य आंकड़े जारी किए। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में कीमतों में सबसे अधिक 19 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो लक्जरी संपत्तियों व बुनियादी ढांचे के उन्नयन की मजबूत मांग के कारण हुई। बेंगलुरु और हैदराबाद में क्रमशः 15 प्रतिशत तथा 13 प्रतिशत की मजबूत दोहरे अंक की मूल्य वृद्धि दर्ज की गई। अहमदाबाद में कीमतें 7.9 प्रतिशत, चेन्नई में नौ प्रतिशत और कोलकाता में आवासीय संपत्तियों की कीमतें आठ प्रतिशत बढ़ीं। मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) और पुणे में कीमतें क्रमश: सात प्रतिशत और नौ प्रतिशत बढ़ी।

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