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नयी दिल्ली. केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए मददगार एक किताब का बुधवार को विमोचन किया। एक बयान में यह जानकारी दी गई है। बयान में कहा गया है कि मेघवाल ने यहां देश की शासन प्रणाली, प्रशासनिक व्यवस्था, सामाजिक न्याय और संविधान के विविध पहलुओं पर प्रकाश डालने वाली पुस्तक 'इंडियन पॉलिटी' का विमोचन किया। इस पुस्तक के लेखक भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी वाई कुमार हैं। किताब के प्रकाशक लोकेश थानी ने बताया कि यह किताब संविधान के गहन अध्ययन के बाद सिविल सेवा परीक्षा के अभ्यर्थियों को आसान भाषा में भारतीय संविधान, शासन और सामाजिक न्याय की विस्तार से जानकारी देती है।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को संसद को बताया कि देश भर में अब तक जारी किये गए कुल 11.86 करोड़ फास्टैग में से लगभग 5.9 करोड़ चालू हैं। फास्टैग का उपयोग टोल भुगतान करने के लिए किया जाता है।
केंद्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्गों पर 98 प्रतिशत से अधिक उपयोगकर्ता शुल्क इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (ईटीसी) प्रणाली के माध्यम से एकत्र किया जाता है। गडकरी ने उच्च सदन को बताया, ''दिसंबर 2025 तक, जारी किए गए कुल 11.86 करोड़ फास्टैग में से, लगभग 5.9 करोड़ फास्टैग चालू हालत में हैं और 'नेशनल हाईवे फी प्लाजा' पर इलेक्ट्रॉनिक टोल लेनदेन के लिए उपयोग किए जाते हैं।'' उन्होंने बताया कि इन स्थानों पर प्रतिदिन होने वाले ईटीसी लेनदेन की औसत संख्या 2025-26 (दिसंबर 2025 तक) में लगभग 105 लाख है। राजमार्ग उपयोगकर्ताओं द्वारा फास्टैग का निरंतर बढ़ता उपयोग उत्साहजनक है और इससे टोल संचालन की दक्षता बढ़ी है। वार्षिक पास सुविधा के बारे में उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 2025 को इस पहल की शुरूआत किये जाने के बाद से, 31 दिसंबर 2025 तक लगभग 42 लाख वार्षिक पास चालू किए जा चुके हैं, जिससे 19 करोड़ से अधिक लेनदेन सुगम हुए हैं। वर्तमान में, लगभग 25 प्रतिशत गैर-वाणिज्यिक वाहन वार्षिक पास का उपयोग करके फास्टैग लेनदेन कर रहे हैं। गडकरी ने बताया कि 2024-25 के दौरान राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह कार्यक्रम के संबंध में किये गए एक प्रभाव आकलन से पता चलता है कि ईटीसी संचालन के तहत एक वाहन द्वारा शुल्क प्लाजा को पार करने में लगने वाला औसत समय 40 सेकंड है, जबकि पहले की प्रणाली में प्रति वाहन 12.23 मिनट का समय लगता था। एक अन्य प्रश्न के लिखित जवाब में, उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों (2022-23, 2023-24 और 2024-25) के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों पर शुल्क प्लाजा पर एकत्र की गई कुल उपयोगकर्ता शुल्क राशि 1,65,322.67 करोड़ रुपये है। -
खरगोन (मध्यप्रदेश). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह सेवा, कर्म और सामूहिक कल्याण की भावना का प्रतीक है। जिले के कसरावद में स्थित लेपा गांव में एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि भारतीय परंपरा उपकार करने में नहीं, बल्कि सेवा की भावना में निहित है और दूसरों की सेवा करना भारत का धर्म है। संघ की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार सरसंघचालक ने कहा, ''हमारे यहां चैरिटी नहीं, अपितु सेवा है। जीवन में सेवा के जो भी अवसर मिलें, सेवा करना चाहिये। सेवा से हमारी शुद्धि होती है। जिसके पास जो हो, वो देना चाहिये।'' उन्होंने कहा कि दूसरों के दुखों को नजरअंदाज करते हुए खुशी का आनंद लेना मानवीय संवेदनशीलता के खिलाफ है और समाज के दर्द को कम करना भारत का अंतर्निहित स्वभाव है एवं इसी आधार पर भारत ने दुनिया को धर्म का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि पराधीनता के दौर में भी भारत का यह चरित्र नहीं बदला।
'चरित्र निर्माण के माध्यम से राष्ट्र-निर्माण' विषय पर अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह समाज और राष्ट्र की पीड़ा को दूर करने के लिए होना चाहिए। भागवत ने कहा कि श्रम की गरिमा और आत्मनिर्भरता के महत्व को सीखना ही सच्ची शिक्षा है।उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति का मतलब केवल आर्थिक विकास नहीं है, बल्कि यह जल संसाधनों, जंगलों, नदियों, पहाड़ों, जानवरों और मनुष्यों का समग्र विकास है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि उन्होंने कार्यक्रम के दौरान मराठी ऑडियोबुक 'गोष्ट-नर्मदालयाची' का भी विमोचन किया। इस कार्यक्रम का आयोजन निमाड़ अभ्युदय ग्रामीण प्रबंधन एवं विकास संघ और श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। -
नयी दिल्ली. सरकार ने बुधवार को कहा कि भारत के ऊर्जा क्षेत्र में मिश्रण के लिए कोयले का आयात चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में पिछले साल की तुलना में घटकर 54 प्रतिशत रह गया है, जिससे घरेलू कोयला आधारित विद्युत संयंत्रों को बड़ी राहत मिलेगी जो ज्यादा लागत से जूझ रहे हैं। कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने लोकसभा में एक प्रश्न का लिखित उत्तर देते हुए कहा कि विद्युत क्षेत्र में मिश्रण के लिए आयात किये जाने वाले कोयले की मात्रा 2022-23 में 3.51 करोड़ टन से घटकर 2024-25 में 1.40 करोड़ टन रह गई। मंत्री ने कहा, ''साल 2025-26 (अप्रैल-दिसंबर) के दौरान मिश्रण के लिए आयात किए जाने वाले कोयले की मात्रा 55 लाख टन है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 1.2 करोड़ टन थी यानी पिछले साल की तुलना में 54 प्रतिशत कम है, जिससे घरेलू कोयला आधारित विद्युत संयंत्र के लिए ईंधन लागत कम हुई है।
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्री अयोध्या धाम में देवी सीता के जीवन और आदर्शों को समर्पित एक 'वैदेही आर्ट गैलरी' की स्थापना का निर्देश दिया है। एक आधिकारिक बयान में बुधवार को यह जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की बैठक में कहा कि देवी सीता भारतीय संस्कृति, मर्यादा और नैतिक आदर्शों की अनुपम प्रेरणा हैं, और नई पीढ़ी को उनके उज्ज्वल चरित्र से गहराई से परिचित कराना समय की आवश्यकता है। प्रस्तावित आर्ट गैलरी की अवधारणा को रेखांकित करते हुए, आदित्यनाथ ने कहा कि यह पारंपरिक कला संग्रहालय नहीं होना चाहिए, बल्कि अत्याधुनिक, गहन सांस्कृतिक स्थान होना चाहिए जो समकालीन तकनीक के माध्यम से सीता के जीवन, बलिदान, करुणा, गरिमा, धैर्य और आंतरिक शक्ति की आधुनिक पुनर्कथा प्रस्तुत करे। उन्होंने निर्देश दिया कि गैलरी की कथात्मक सामग्री, डिज़ाइन, दृश्य भाषा, कला और तकनीक समेत सभी पहलू दैवीय विरासत के पुनरावलोकन की भावना को प्रतिबिंबित करें और उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के स्रोत के रूप में प्रस्तुत किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'वैदेही आर्ट गैलरी' की मूल भावना यही हो कि आगंतुक सीता माता के जीवन-संदेश को केवल देखें नहीं, बल्कि उसे अनुभव करें, समझें और आत्मसात करें। अयोध्या विकास प्राधिकरण के साथ संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के निकट वशिष्ठ भवन परिसर में विकसित की जा सकती। उन्होंने कहा कि इस गैलरी का विकास अयोध्या के वैश्विक सांस्कृतिक नगर के रूप में उभरने के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण चरण होगा। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से निर्देश दिया कि मिथिला की संस्कृति, लोकपरंपरा और कला के विविध आयामों को गैलरी में प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए।
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गांधीनगर. गुजरात में गांधीनगर की एक अदालत ने गृहकार्य (होमवर्क) पूरा न करने पर नौवीं कक्षा की छात्रा को थप्पड़ मारने की आरोपी स्कूल शिक्षिका को दोषी ठहराते हुए तीन साल से अधिक की सजा सुनाई है। इस घटना से छात्रा के बाएं कान का पर्दा फट गया और उसे सुनने में दिक्कत होने लगी। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हिमांशु चौधरी ने 30 जनवरी को अपने फैसले में कहा कि यह अपराध एक शिक्षक द्वारा अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल था, जिससे 14 साल की लड़की को गंभीर चोट लगी और उसे ''लंबे समय तक सुनने में दिक्कत'' हुई। अदालत ने यह भी कहा कि घटना के साढ़े चार साल बाद भी पीड़िता का उपचार जारी है।
अदालत ने शिक्षिका पारुलबेन पटेल को भारतीय दंड संहिता की धारा 325 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत लड़की की पिटाई करने और जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाने का दोषी ठहराया और उसे तीन साल एवं तीन महीने जेल की सजा सुनाई। अदालत ने उस पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया और निर्देश दिया कि यह रकम पीड़िता को मुआवजे के तौर पर दी जाए। -
नयी दिल्ली. संसद में बुधवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को 'ऐतिहासिक' करार देते हुए कहा कि भारत इस समझौते में कृषि और दुग्ध क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है। गोयल ने पहले लोकसभा में और फिर राज्यसभा में अपनी ओर से भारत एवं अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते पर एक वक्तव्य दिया। उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते से भारत को विकसित बनाने की दिशा में देश की यात्रा को मजबूती मिलेगी। गोयल ने कहा, ''दोनों देश नियमित रूप से चर्चा कर रहे थे...दोनों पक्षों ने विभिन्न स्तरों पर गहन बातचीत की है।'' उनका कहना था कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए यह समझौता करने में सफल रहे हैं। मंत्री ने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर चर्चा की और इसके बाद ट्रंप ने अमेरिका के टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की।'' गोयल ने कहा, ''मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि यह अमेरिका द्वारा कई प्रतिस्पर्धी देशों पर लगाए गए शुल्क से कम है।'' उन्होंने कहा कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों को तुलनात्मक लाभ प्रदान करेगा।
मंत्री के अनुसार, भारतीय पक्ष विशेष रूप से कृषि और दुग्ध क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है। गोयल ने इस बात पर जोर दिया, ''खाद्य और कृषि क्षेत्र में भारत की संवेदनशीलता का ध्यान रखा गया है।''
उन्होंने कहा, ''यह ऐतिहासिक ढांचागत समझौता दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने और 2047 तक विकसित भारत बनाने की दिशा में यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम है।'' उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष व्यापार समझौते की प्रक्रियाओं और कागजी कार्रवाई को अंतिम रूप देने के लिए मिलकर काम करेंगे। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि 140 करोड़ भारतीयों की आवश्यकताओं की सुरक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, ''देश को विकसित बनाने के पथ पर आगे बढ़ने के लिए ऊर्जा, विमानन, डेटा केंद्र और परमाणु ऊर्जा समेत विभिन्न क्षेत्रों में अपनी क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता होगी और अमेरिका इन क्षेत्रों में अग्रणी देश है।'' राज्यसभा में गोयल ने जब अपना वक्तव्य दे दिया तो कांग्रेस सहित विपक्षी सदस्यों ने इस बयान पर मंत्री से स्पष्टीकरण मांगने पर जोर दिया। किंतु सभापति सी पी राधाकृष्णन ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि यह अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण विषयों से जुड़ा बयान है और इसके लिए आवश्यक नहीं है कि मंत्री से स्पष्टीकरण मांगा जाए। सदन के नेता जे पी नड्डा ने कहा कि उन्होंने कल ही सदन में कहा था कि सरकार दोनों सदनों में बयान देने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल मुंबई में थे और वह कल ही दिल्ली आये। नड्डा ने कहा कि गोयल कल ही लोकसभा में बयान देना चाहते थे किंतु निचला सदन नहीं चला। यदि वह कल राज्यसभा में बयान देते तो विपक्ष की ओर से यह कहा जाता कि लोकसभा में पहले क्यों बयान नहीं दिया गया। इससे पहले द्रमुक के तिरुचि शिवा ने इस बात पर आपत्ति जतायी कि गोयल ने संसद सत्र चलते हुए बाहर प्रेस वार्ता क्यों की। उन्होंने आसन का ध्यान दिलाया कि भले ही लोकसभा कल नहीं चली किंतु राज्यसभा में तो मंगलवार को सामान्य ढंग से कामकाज हुआ। इस पर सभापति राधाकृष्णन ने कहा कि नड्डा कल ही कह चुके थे कि सरकार बयान देने को तैयार है किंतु कल उच्च सदन में विपक्षी सदस्यों ने वाकआउट किया था। -
नयी दिल्ली. सरकार ने बुधवार को लोकसभा को बताया कि जनवरी 2026 तक 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' के तहत 28 लाख से अधिक परिवारों को फायदा हुआ है, जिसमें केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता के तौर पर 16,061.12 करोड़ रुपये दिए गए हैं। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि सरकार नवीकरणीय ऊर्जा, भंडारण और ग्रिड एकीकरण को आगे बढ़ाने के लिए वैश्विक साझेदारियों को भी मजबूत कर रही है। नाइक ने सदन को बताया कि फरवरी 2024 में योजना शुरू होने के बाद से, देश भर में कुल 22,65,521 रूफटॉप सोलर (आरटीएस) प्रणाली लगाई गई हैं, जिससे 28,24,518 घरों को फायदा हुआ है और 30 जनवरी, 2026 तक केंद्रीय वित्तीय सहायता के तौर पर 16,061.12 करोड़ रुपये बांटे गए हैं। अनुमान लगाया गया है कि पीएम सूर्य घर योजना के तहत एक करोड़ घरों में आरटीएस लगाने से 1,000 अरब यूनिट नवीकरणीय बिजली पैदा हो सकती है, जिससे आरटीएस प्रणाली की 25 साल की अवधि में 72 करोड़ टन कार्बन डाईऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन में कमी आ सकती है। नाइक ने कहा कि योजना के विस्तार के लिए सरकार कई कदम उठा रही है, जिसमें राष्ट्रीयकृत बैंकों से रियायती ब्याज दर पर बिना गारंटी के ऋण की उपलब्धता और नियामक मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाना शामिल है।
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नयी दिल्ली. सरकार ने बुधवार को लोकसभा को बताया कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने दुरुपयोग को रोकने के लिए 2.5 करोड़ से अधिक मृत व्यक्तियों के आधार नंबर निष्क्रिय कर दिए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि आधार दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली है, जिसमें लगभग 134 करोड़ सक्रिय आधार धारक हैं। प्रसाद ने कहा, ''आधार डेटाबेस की लगातार सटीकता और शुद्धता बनाए रखने के लिए देशव्यापी अभियान के तहत, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने अब तक 2.5 करोड़ से ज़्यादा मृत व्यक्तियों के आधार नंबर निष्क्रिय कर दिए हैं।'' किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर, यह जरूरी है कि उसके आधार नंबर को निष्क्रिय कर दिया जाए ताकि संभावित पहचान धोखाधड़ी, या कल्याणकारी लाभ लेने के लिए ऐसे आधार नंबर के अनधिकृत उपयोग को रोका जा सके।
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नयी दिल्ली। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार को लोकसभा को बताया कि सिविल सेवा परीक्षा के नियम एक बदलते हुए फ्रेमवर्क का हिस्सा हैं और सरकार सभी को समान अवसर देने के लिए लगातार सुधारात्मक उपाय करती रहती है। सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा में लद्दाख के अभ्यर्थियों को भारतीय भाषा की परीक्षा उत्तीर्ण करने से छूट देने का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन होने के प्रश्न पर लिखित जवाब में कार्मिक राज्य मंत्री सिंह ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और सिक्किम राज्यों के उम्मीदवारों के लिए भारतीय भाषा का प्रश्नपत्र अनिवार्य नहीं है। उन्होंने लद्दाख के संबंध में प्रश्न पर कहा कि सिविल सेवा परीक्षा के नियम एक बदलती रूपरेखा का हिस्सा हैं। सिविल सेवा परीक्षा हर साल तीन चरणों में आयोजित की जाती है - प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार। इसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों का चयन किया जाता है। मंत्री ने कहा, ''देश भर में अभ्यर्थियों को समान अवसर देने के लिए, सरकार लगातार सुधार करती है और सुधारात्मक उपाय अपनाती है।
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मुंबई. ब्लैक रॉक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) लैरी फिंक ने बुधवार को कहा कि अगले 20-25 साल भारत के नाम रहेंगे और देश अगले एक दशक या उससे अधिक समय में 8-10 प्रतिशत की दर से वृद्धि करेगा। 'नए युग के लिए निवेश' विषय पर उद्योगपति मुकेश अंबानी के साथ अनौपचारिक बातचीत में अमेरिकी बहुराष्ट्रीय निवेश प्रबंधन कंपनी के सीईओ ने कहा कि भारत वह देश है जिसमें वह निवेश करना चाहेंगे। उन्होंने कहा, '' भारत के इस युग में, हमारा ध्यान लोगों को यह समझाने पर है कि 'भारत का युग' होने का मतलब क्या है। जब आप भारत की वृद्धि के बारे में सोचते हैं... तो यह एक तिमाही, एक दिन या एक सप्ताह, एक वर्ष की बात नहीं है, बल्कि एक लंबा समय है। आप कह सकते हैं कि शायद यही भारत का युग है और अगले 20-25 वर्ष में भी यही स्थिति रहेगी।'' उन्होंने कहा कि भारत को विदेशी पूंजी की कम आवश्यकता है।
लैरी फिंक कहा, '' मैं भारत की वृद्धि में विश्वास रखने वाले विदेशी निवेशकों से पूंजी लाने में विश्वास रखता हूं, लेकिन किसी भी देश की मूलभूत नींव बचत पर आधारित घरेलू अर्थव्यवस्था होती है।'' उन्होंने कहा कि भारत अगले 10 से अधिक वर्ष में 8-10 प्रतिशत की दर से वृद्धि करेगा।
फिंक ने कहा, '' मैं यहीं निवेश करना चाहता हूं और भारतीयों को भी निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहता हूं।'' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल रुपये ने देश में वाणिज्य को बदल दिया है। उन्होंने कहा, '' मैं अन्य देशों को लेकर बहुत चिंतित हूं, यहां तक कि अमेरिका भी पिछड़ रहा है।''
फिंक ने कहा कि देश के वृद्धि के साथ-साथ पूंजी बाजारों में निवेश करने के लिए अधिक लोगों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, '' हमें लोगों को दीर्घकालिक निवेश के दृष्टिकोण से सोचने के लिए प्रेरित करना होगा, ताकि वे भारत की महान कंपनियों के साथ विकास कर सकें, उनका हिस्सा बन सकें और उनमें भागीदार बन सकें।'' फिंक ने कहा कि उन्हें ''एआई बबल'' (ऐसी स्थिति है जहां प्रचार वास्तविक स्थिति से अधिक हो) पर विश्वास नहीं है। उन्होंने कहा, '' सबसे बड़ा खतरा यह है कि अगर हम कृत्रिम मेधा (एआई) में निवेश नहीं करते हैं, तो चीन आगे निकल जाएगा।'' फिंक ने कहा कि एआई सबसे चर्चित विषयों में से एक है क्योंकि यह सबसे अधिक बदलाव लाने वाला है। -
नई दिल्ली। डीआरडीओ ने एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। ओडिशा के तट के पास चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट तकनीक का सफल परीक्षण किया गया है। इस तकनीक के सफल होने से अब भारत लंबी दूरी तक हवा में ही दुश्मन के लक्ष्य को भेदने वाली एयर-टू-एयर मिसाइलें विकसित करने में सक्षम हो सकेगा, जिससे सामरिक स्तर पर देश को अहम बढ़त मिलेगी।
इस परीक्षण के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास यह अत्याधुनिक तकनीक मौजूद है। डीआरडीओ के मुताबिक, यह महत्वपूर्ण परीक्षण मंगलवार सुबह 10.45 बजे किया गया। परीक्षण के दौरान मिसाइल को पहले जमीन से लगाए गए बूस्टर की मदद से उच्च गति प्रदान की गई। इसके बाद मिसाइल के सभी प्रमुख सिस्टम तय मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक कार्य करते नजर आए।परीक्षण में बिना नोजल वाला बूस्टर, सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट मोटर और फ्यूल फ्लो कंट्रोल सिस्टम शामिल थे। पूरी उड़ान के दौरान प्राप्त आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ कि सिस्टम पूरी तरह स्थिर और प्रभावी रहा। बंगाल की खाड़ी के तट पर तैनात आधुनिक ट्रैकिंग उपकरणों के माध्यम से परीक्षण पर लगातार नजर रखी गई। इस लॉन्च को डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने प्रत्यक्ष रूप से देखा।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि के लिए डीआरडीओ और इससे जुड़े उद्योगों की सराहना की। वहीं, डीआरडीओ प्रमुख और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. समीर वी. कामत ने भी पूरी टीम को इस सफल उड़ान परीक्षण के लिए बधाई दी। इसे भारत की रक्षा तकनीक को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।गौरतलब है कि इसी माह भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक सफलता हासिल की थी। यह उपलब्धि डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (डीआरडीएल) के सहयोग से प्राप्त हुई थी, जो भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकास कार्यक्रम के लिए एक निर्णायक और आधारभूत कदम मानी जा रही है।यह महत्वपूर्ण परीक्षण 9 जनवरी को डीआरडीएल की अत्याधुनिक स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट सुविधा में किया गया था। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, स्क्रैमजेट दहनकक्ष ने 12 मिनट से अधिक समय तक निरंतर और स्थिर संचालन का प्रदर्शन किया। हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें ध्वनि की गति से पांच गुना से अधिक यानी 6,100 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा रफ्तार से लंबे समय तक उड़ान भरने में सक्षम होती हैं। -
नई दिल्ली। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को ओडिशा के बालासोर में फकीर मोहन विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शिरकत की और विद्यार्थियों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय के नए सभागार का उद्घाटन भी किया। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने व्यासकवि फकीर मोहन सेनापति को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अपने विद्यार्थी जीवन में वे उनकी कालजयी कहानी ‘रेवती’ से अत्यंत प्रभावित रही हैं और इसका प्रभाव आज भी उनके मन में अमिट है। 19वीं शताब्दी में एक बालिका द्वारा शिक्षा प्राप्त करने के दृढ़ संकल्प को उन्होंने साहस और सामाजिक चेतना का प्रतीक बताया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने एक दूरस्थ आदिवासी गांव में पढ़ाई की और दृढ़ निश्चय के बल पर भुवनेश्वर जाकर हाई स्कूल और कॉलेज की शिक्षा पूरी की। उन्होंने कहा कि इस यात्रा में फकीर मोहन सेनापति उनके लिए प्रेरणास्रोत रहे।राष्ट्रपति ने कहा कि फकीर मोहन को अपनी मातृभाषा से गहरा प्रेम था। उन्होंने लिखा था, “मेरी मातृभाषा मेरे लिए सर्वोपरि है।” राष्ट्रपति ने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा से विद्यार्थी अपने परिवेश, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक मूल्यों को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भी मातृभाषा के महत्व पर विशेष बल देती है।द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। हमारे शास्त्र और पांडुलिपियां कविता और साहित्य के साथ-साथ विज्ञान, चिकित्सा, खगोल विज्ञान और वास्तुकला जैसे क्षेत्रों में भी ज्ञान का विशाल स्रोत हैं। उन्होंने युवाओं से इस प्राचीन ज्ञान परंपरा पर शोध करने का आह्वान किया।राष्ट्रपति ने स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि ज्ञान, लगन और प्रतिबद्धता के बल पर वे समाज में सम्मान और पहचान प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सफल जीवन और सार्थक जीवन में अंतर होता है। प्रसिद्धि और आर्थिक सुरक्षा महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जीवन को सार्थक बनाना उससे भी अधिक आवश्यक है।द्रौपदी मुर्मु छात्रों से आग्रह किया कि वे विकास की राह में पीछे रह गए लोगों की मदद करें। राष्ट्रपति ने कहा कि समाज का विकास तभी संभव है, जब सभी का विकास हो।राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि फकीर मोहन विश्वविद्यालय अकादमिक अध्ययन के साथ-साथ अनुसंधान और आउटरीच कार्यक्रमों को भी महत्व देता है। उन्होंने ‘बैक टू स्कूल’, ‘कमाओ और सीखो’ और ‘हर एक सिखाए’ जैसे कार्यक्रमों की सराहना की। साथ ही पर्यावरण जागरूकता और समुद्र तट सफाई अभियानों को भी प्रशंसनीय बताया।द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि बालासोर-भद्रक क्षेत्र धान, पान और मछली के लिए प्रसिद्ध है। नीले केकड़ों और हॉर्सशू केकड़ों पर अनुसंधान केंद्र की स्थापना विश्वविद्यालय की दूरदर्शिता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि समावेशी विकास, नवाचार और सामाजिक परिवर्तन में विश्वविद्यालयों की अहम भूमिका है और उन्हें इस दिशा में उत्प्रेरक बनकर कार्य करना चाहिए। -
नई दिल्ली। पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (पीएमएसजी:एमबीवाई) एक मांग आधारित योजना है जिसके अंतर्गत देश के सभी आवासीय उपभोक्ता जिनके पास स्थानीय डिस्कॉम का ग्रिड से जुड़ा बिजली कनेक्शन है, योजना के राष्ट्रीय पोर्टल पर आवेदन करके रूफटॉप सोलर (आरटीएस) सिस्टम लगाने के लिए योजना का लाभ उठा सकते हैं।
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, फरवरी 2024 में योजना के शुभारंभ के बाद से देश भर में कुल 20,85,514 आरटीएस सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जिससे 26,14,446 परिवारों को लाभ हुआ है और दिसंबर 2025 तक केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) के रूप में 14,771.82 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। पीएमएसजी: एमबीवाई के अंतर्गत यह अनुमान लगाया गया है कि 1 करोड़ घरों में आरटीएस की स्थापना से 1,000 बिलियन यूनिट नवीकरणीय बिजली का उत्पादन हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप आरटीएस प्रणाली के 25 वर्षों के जीवनकाल के दौरान 720 मिलियन टन कार्बन डायऑक्साइड (सीओ2) के बराबर उत्सर्जन में कमी आ सकती है। -
नई दिल्ली। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 31 दिसंबर, 2025 तक, 96.73 लाख से अधिक आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनाए जा चुके हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने मंगलवार को राज्यसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि 31 दिसंबर, 2025 तक, आयुष्मान वय वंदना कार्ड लाभार्थियों के लिए कुल 10.33 लाख अस्पताल भर्तियां स्वीकृत की गई हैं, जिनकी लागत 2,154.37 करोड़ रुपये है। इनमें से 3.93 लाख भर्ती, जिनकी लागत 820.42 करोड़ रुपये है, महिला लाभार्थियों से संबंधित हैं और 6.40 लाख भर्ती, जिनकी लागत 1333.94 करोड़ रुपये है, कार्यान्वयन करने वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में पुरुष लाभार्थियों से संबंधित हैं।गौरतलब हो, आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना भारत की जनसंख्या के सबसे निचले 40 प्रतिशत हिस्से में आने वाले 12 करोड़ परिवारों को माध्यमिक और तृतीयक स्तर की अस्पताल में भर्ती के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करती है।अक्टूबर 2024 में, इस योजना का विस्तार किया गया था। इस कार्ड के माध्यम से सामाजिक-आर्थिक स्थिति देखे बिना 4.5 करोड़ परिवारों से संबंधित 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को भी इसमें शामिल किया गया। -
नई दिल्ली। केंद्रीय राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने मंगलवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील से दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार और ज्यादा बढ़ेगा और मजबूत होगा।
अरविंद श्रीवास्तव ने अपने बयान में कहा कि इस समझौते से अमेरिका के बाजार में भारत के श्रम आधारित उद्योगों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नए मौके मिलेंगे। इसके साथ ही हाई और एडवांस टेक्नोलॉजी सेक्टर में दोनों देशों के बीच सहयोग और बढ़ेगा।एक ऐतिहासिक फैसले में अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर लगने वाला टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इसे भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, जहां भारत अपने कुल निर्यात का करीब 20 प्रतिशत सामान भेजता है। विशेषज्ञों का कहना है कि टैरिफ कम होने से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा और अमेरिका के साथ भारत का ट्रेड सरप्लस फिर से मजबूत हो सकता है।इससे पहले एफआईसीसीआई के यूनियन बजट 2026-27 सम्मेलन में आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के ऐलान से काफी हद तक अनिश्चितता दूर हो गई है। अनुराधा ठाकुर ने कहा कि दुनिया में बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत और स्थिर बनी हुई है।उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है, लेकिन इसके बावजूद देश की मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिति मजबूत है। उन्होंने सरकार की समझदारी भरी वित्तीय नीतियों और मजबूत बैंकिंग सिस्टम को लंबे समय की ग्रोथ का कारण बताया।वित्तीय सेवा सचिव एम. नागराजू ने कहा कि ट्रेड डील के बाद वैश्विक आर्थिक स्थिति अब ज्यादा साफ हो गई है। उन्होंने इसे दुनिया की अर्थव्यवस्था पर छाए एक बड़े ‘काले बादल’ के हटने जैसा बताया।नागराजू ने उद्योग जगत से सकारात्मक बने रहने की अपील करते हुए कहा कि सरकार ने पहले ही ज्यादा टैरिफ के असर को कम करने के लिए कदम उठाए थे। अब टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत होने से कारोबारियों को राहत और भरोसा मिला है। -
नई दिल्ली। भारत-अमेरिका ट्रेड डील होने से भारत को हर क्षेत्र में फायदा होने की बात कही जा रही है। विशेषज्ञ इसे देश के विकास में एक बड़ा मील का पत्थर बता रहे हैं। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के पूर्व प्रमुख और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ए. शिवथनु पिल्लै ने कहा कि भारत तेजी से रक्षा और आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसकी बड़ी वजह देश में बनी (स्वदेशी) हाइपरसोनिक तकनीक और तेजी से बढ़ता अंतरिक्ष क्षेत्र है।
कोयंबटूर में मीडिया से बात करते हुए डॉ. पिल्लै ने बताया कि भारत अब सामान्य मिसाइल तकनीक से आगे बढ़कर ‘सुपर ब्रह्मोस’ पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि अभी ब्रह्मोस मिसाइल की गति मैक-3 है, लेकिन लक्ष्य इसे मैक-7 जैसी हाइपरसोनिक गति तक ले जाना है। उन्होंने समझाया कि गति जितनी ज्यादा होगी, मिसाइल की ताकत उतनी ही ज्यादा होगी। इतनी तेज मिसाइल को दुश्मन का रक्षा तंत्र पकड़ नहीं पाएगा। भारत ने पहले ही 1,000 सेकंड तक हाइपरसोनिक तकनीक का सफल परीक्षण कर लिया है, जिससे वह दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल हो गया है।डॉ. पिल्लै ने कहा कि फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल देने के बाद कई अन्य देशों ने भी इसमें रुचि दिखाई है। उन्होंने बताया कि ‘सिंधुरा ऑपरेशन’ में ब्रह्मोस की सफलता के बाद इसकी मांग और बढ़ी है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि भारतीय सेना को जो ब्रह्मोस दी जाती है, वह निर्यात की जाने वाली मिसाइलों से ज्यादा उन्नत होती है। उन्होंने सरकार द्वारा रिसर्च और डेवलपमेंट (आरएंडडी) पर बढ़ाए गए खर्च और एएमसीए जैसे स्वदेशी फाइटर जेट प्रोजेक्ट की भी तारीफ की।डॉ. पिल्लै ने आगे कहा कि भारत इस समय दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जल्द ही जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरे स्थान पर पहुंच सकता है। गगनयान मिशन के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि पहले बिना इंसान वाले मिशन भेजे जाएंगे, जिनमें एक रोबोट लड़की होगी, जिससे अंतरिक्ष से वापसी और सुरक्षा की जांच की जाएगी। उसके बाद प्रशिक्षित अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा जाएगा।उन्होंने बताया कि भारत में अब करीब 400 अंतरिक्ष स्टार्टअप काम कर रहे हैं, जैसे अग्निकुल और स्काईरूट। ये इसरो के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि उसके सहयोगी हैं और सैटेलाइट व रॉकेट की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद कर रहे हैं।डॉ. पिल्लै ने कहा कि वे 40 साल तक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के साथ जुड़े रहे और आज भी भारत उनके दिखाए रास्ते पर चलकर एक विकसित देश बनने की ओर बढ़ रहा है।भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने भी भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कदम दोनों देशों के लोगों, उद्योगों और रोजगार सृजन के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों की तारीफ करते हुए कहा कि भारत की नीतियां आज दुनिया के लिए मिसाल बन गई हैं। चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का भारत पर भरोसा इस रिश्ते को और मजबूत करता है। इस समझौते से व्यापार में स्थिरता आएगी, निवेशकों को भरोसा मिलेगा और सप्लाई चेन मजबूत होंगी।उन्होंने बताया कि यह समझौता सिर्फ टैरिफ घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उद्योग, तकनीक और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार और उद्योग के बीच भरोसे और साझेदारी से देश में बड़े सुधार हुए हैं और भारतीय उद्योग अब वैश्विक स्तर पर मजबूत भूमिका निभाने के लिए तैयार है।वहीं, विदेश मामलों के विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र के. देओलंकर ने कहा कि हम इस पूरे मामले को भारत की जीत के रूप में देखते हैं। अप्रैल 2025 में डोनाल्ड ट्रम्प ने 50 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा की थी, जिसमें से 25 प्रतिशत टैरिफ रूस से तेल खरीदने के कारण भारत को दंडित करने के लिए लगाया गया था। भारत अभी भी रूस से तेल खरीदता है, लेकिन अब यह कम हो गया है। उन्होंने कहा कि यह उन्होंने एकतरफा रूप से घोषित किया था और अब उन्होंने इसे एकतरफा रूप से वापस भी ले लिया है।देओलंकर ने कहा कि अब भारत को मुख्य रूप से पांच क्षेत्रों में लाभ दिखाई देता है। इनमें पहला क्षेत्र ऑटो उद्योग है, जिसमें ऑटो पार्ट्स और ऑटो कंपोनेंट्स अहम हैं। दूसरा क्षेत्र रत्न और आभूषण है। तीसरा क्षेत्र वस्त्र और चमड़ा है, और चौथा क्षेत्र कृषि, मत्स्य पालन और डेयरी उत्पाद है। ये चारों मुख्य क्षेत्र श्रम प्रधान हैं, जहां एमएसएमई की बहुत बड़ी भूमिका है।उन्होंने आगे कहा कि इस डील से भारत को विशेष रूप से वस्त्रों के क्षेत्र में लाभ होगा, जिनमें कालीन, चादरें, तकिए के कवर और पर्दे शामिल हैं, और इनकी पहले की तरह आपूर्ति फिर से शुरू हो जाएगी। वहीं, भारत को एक बार फिर अमेरिका में बड़ा बाजार मिलेगा। यही सबसे बड़ा फायदा होगा। इसके अलावा, राजकोट चैंबर ऑफ कॉमर्स के सेक्रेटरी पार्थ गणात्रा ने इस महत्वपूर्ण डील पर अपनी राय देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ हुए इस व्यापार समझौते से राजकोट, सौराष्ट्र समेत राज्य भर के उद्योगों को नई संजीवनी मिलेगी।उन्होंने कहा कि पहले 25 प्रतिशत टैरिफ होने के चलते निर्यात में लगभग 35 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। अब टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत होने से एक्सपोर्ट को फिर से गति मिलेगी। उन्होंने बात करते हुए कहा कि टैरिफ बढ़ने के दौरान उद्योगपतियों ने अन्य देशों में भी एक्सपोर्ट करना शुरू कर दिया था। अब अमेरिका में राहत मिलने से और अन्य नए बाजार जुड़ने से निर्यात में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि इस डील से खास तौर पर कृषि उपकरण, फार्मास्यूटिकल्स, मसाला, मशीन पार्ट जैसे चीजों का एक्सपोर्ट बढ़ेगा और इन्हें बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इससे स्थानीय स्तर पर भी रोजगार बढ़ेगा।( -
नई दिल्ली। नासा ने चंद्रमा के लिए प्रस्तावित Artemis II मिशन को मार्च तक के लिए टाल दिया है। यह फैसला ईंधन भरने के दौरान किए गए एक अहम परीक्षण में हाइड्रोजन लीक पाए जाने के बाद लिया गया।
यह मिशन चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से चंद्रमा की परिक्रमा पर भेजने वाला था। पहले इसका प्रक्षेपण 6 फरवरी को तय था, लेकिन फ्लोरिडा में ठंडे मौसम और तेज हवाओं के कारण इसे 8 फरवरी तक टाल दिया गया था।NASA प्रशासक Jared Isaacman ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि वेट ड्रेस रिहर्सल पूरी होने के बाद फरवरी की लॉन्च विंडो से बाहर निकलने का फैसला किया गया है और अब मार्च में जल्द से जल्द लॉन्च का लक्ष्य रखा गया है।उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष यात्रियों, कर्मचारियों, प्रणालियों और आम जनता की सुरक्षा NASA की सर्वोच्च प्राथमिकता है और मिशन तभी लॉन्च किया जाएगा जब एजेंसी पूरी तरह से तैयार होगी।31 जनवरी से शुरू हुआ यह दो दिवसीय परीक्षण कैनेडी स्पेस सेंटर में किया गया, जिसमें स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट के टैंकों में क्रायोजेनिक ईंधन सफलतापूर्वक भरा गया। हालांकि, मंगलवार को यह परीक्षण उस समय रोकना पड़ा जब टेल सर्विस मास्ट अंबिलिकल के इंटरफेस पर तरल हाइड्रोजन का रिसाव पाया गया।इंजीनियरों ने कई घंटों तक इस रिसाव को ठीक करने की कोशिश की, लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो सके। NASA के अनुसार, काउंटडाउन के दौरान जब लगभग 5 मिनट शेष थे, तब हाइड्रोजन रिसाव की दर अचानक बढ़ने पर ग्राउंड लॉन्च सीक्वेंसर ने अपने आप काउंटडाउन रोक दिया।इसके अलावा, ओरायन क्रू मॉड्यूल हैच प्रेसराइजेशन से जुड़ा एक वाल्व, जिसे हाल ही में बदला गया था, उसे दोबारा कसने की जरूरत पड़ी, जिससे परीक्षण प्रक्रिया में अपेक्षा से अधिक समय लगा। इसके बावजूद NASA ने कहा कि कई चुनौतियों के बावजूद परीक्षण के अधिकांश उद्देश्य पूरे किए गए।अब लॉन्च से पहले मार्च में दूसरी वेट ड्रेस रिहर्सल किए जाने की संभावना है। इस बीच, Artemis II के अंतरिक्ष यात्रियों को क्वारंटीन से बाहर कर दिया जाएगा, जिसमें वे 21 जनवरी से ह्यूस्टन में थे। अगले संभावित लॉन्च से लगभग दो सप्ताह पहले वे दोबारा क्वारंटीन में जाएंगे।यह 10 दिन का मिशन भविष्य के Artemis III मिशन की तैयारी करेगा, जिसे 2027 में लॉन्च किया जाना है। इसी मिशन के तहत इंसान पहली बार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेंगे और वहां दीर्घकालिक मौजूदगी की शुरुआत करेंगे। Artemis II के चालक दल में NASA के कमांडर Reid Wiseman, पायलट Victor Glover, मिशन स्पेशलिस्ट Christina Koch और Canadian Space Agency के अंतरिक्ष यात्री Jeremy Hansen शामिल हैं। - नयी दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति बनी है, जिसके तहत अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर लगने वाला जवाबी शुल्क मौजूदा 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फोन पर बातचीत के बाद यह जानकारी दी। ट्रंप ने दावा किया कि भारत अमेरिका के खिलाफ शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''आज अपने प्रिय मित्र राष्ट्रपति ट्रंप से बात करके बहुत अच्छा लगा। यह जानकर बेहद खुशी हुई कि अब 'मेड इन इंडिया' उत्पादों पर शुल्क घटकर 18 फीसदी रह जाएगा। इस शानदार घोषणा के लिए भारत की 1.4 अरब जनता की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप को हार्दिक धन्यवाद।'' मोदी ने कहा कि जब दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो इससे लोगों को लाभ होता है और पारस्परिक लाभकारी सहयोग के अपार अवसर खुलते हैं। मोदी ने कहा कि वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का नेतृत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत शांति के लिए उनके प्रयासों का पूर्ण समर्थन करता है। मोदी ने कहा, ''मैं उनके साथ मिलकर काम करने और हमारी साझेदारी को अभूतपूर्व ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए तत्पर हूं।'' ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा, "प्रधानमंत्री मोदी से मित्रता व उनके प्रति सम्मान के मद्देनजर तथा उनके अनुरोध पर तत्काल प्रभाव से अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति बनी है, जिसके तहत अमेरिका जवाबी शुल्क 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा।" उन्होंने कहा कि भारत भी इसी तरह अमेरिका के खिलाफ अपनी शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। ट्रंप के अनुसार, इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने काफी बड़े स्तर पर अमेरिकी उत्पादों को खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने कहा कि इसमें 500 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के अमेरिकी ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और अन्य उत्पादों की खरीद शामिल है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "भारत के साथ हमारे पहले से शानदार संबंध और मजबूत होंगे। प्रधानमंत्री मोदी और मैं काम करके दिखाते हैं। अधिकतर लोगों के बारे में यह बात नहीं कही जा सकती।"
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नयी दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि केंद्रीय बजट में आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए निवेश को प्राथमिकता दी गई है और राजकोषीय घाटे की स्थिति से पता चलता है कि सरकार की प्राथमिकता वृद्धि है। सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करने के एक दिन बाद संवाददाताओं से बातचीत में यह भी कहा कि सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव वैश्विक अनिश्चितता के कारण है और कई केंद्रीय बैंक पीली धातु में निवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ''इससे यह भी पता चलता है कि निवेशकों को किसी एक विशेष मुद्रा पर भरोसा नहीं है और इसीलिए सोने की खरीदारी में होड़ मची है।'' वायदा एवं विकल्प खंड में प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) में वृद्धि के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि यह सट्टेबाजी वाले वायदा एवं विकल्प कारोबार में कदम रखने वालों को हतोत्साहित करने के लिए है। बजट में वायदा अनुबंधों पर एसटीटी (प्रतिभूति सौदा कर) को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। विकल्प प्रीमियम और विकल्प उपयोग पर एसटीटी को मौजूदा क्रमश: 0.1 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। सेबी के अध्ययन के अनुसार, वायदा एवं विकल्प खंड में खुदरा निवेशकों के 90 प्रतिशत से अधिक सौदों में नुकसान होता है। पूंजी बाजार नियामक ने अतीत में इस तरह के लेन-देन को कम करने के लिए कदम भी उठाए हैं। सीतारमण ने कहा, "हमने केवल वायदा एवं विकल्प व्यापार को ही छुआ है। जिसमें काफी सट्टेबाजी है। मुझे कई लोगों के फोन आए हैं, जो कह रहे हैं कि उनके बच्चे भारी नुकसान उठा रहे हैं और सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। एफ एंड ओ में एसटीटी की वृद्धि लोगों के इस क्षेत्र में कदम रखने को हतोत्साहित करेगी।'' बजट में राजकोषीय मजबूती के रास्ते पर चलते हुए, अगले वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत रखा गया है, जबकि मार्च, 2026 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए यह 4.4 प्रतिशत है। सीतारमण ने कहा कि राजकोषीय घाटे का लक्ष्य प्रत्येक वर्ष की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है और अतीत में सरकार ने पिछले वित्त वर्ष की तुलना में राजकोषीय घाटे को कुछ आधार अंक कम रखा है। उन्होंने कहा कि इस वित्त वर्ष में ''सरकार की प्राथमिकता वृद्धि है, इसलिए मैं 4.3 प्रतिशत के घाटे के लक्ष्य से संतुष्ट हूं।'' वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि विनिवेश और परिसंपत्ति मौद्रीकरण की गति जारी रहेगी। सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के अधिक विनिवेश को प्रोत्साहित करेगी। सीतारमण ने कहा कि आईडीबीआई बैंक का रणनीतिक विनिवेश सही दिशा में है और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में हिस्सेदारी की बिक्री की गति गैर-कर राजस्व की दिशा तय करेगी। उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में जीएसटी दर में कटौती और आयकर छूट सीमा में वृद्धि के कारण हाल ही में निजी उपभोग में जो वृद्धि हुई है, वह आने वाले महीनों में भी जारी रहेगी।
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नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि सरकार की नौ मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र के दूसरे चरण में दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश करने की योजना है। संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। दिवाला कानून में प्रस्तावित संशोधन समयबद्धता और दक्षता को और बेहतर बनाने में मदद करेंगे। साथ ही भारत की ऋण शोधन व्यवस्था को वैश्विक सर्वोत्तम गतिविधियों के अनुरूप बनाएंगे। उन्होंने लोकसभा में बजट 2026-27 पेश करने के एक दिन बाद मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि संसदीय समिति ने दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) से संबंधित प्रस्तावित कानून पर अपनी रिपोर्ट दे दी है। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाल रही सीतारमण ने कहा, ''मुझे उम्मीद है कि कुछ शर्तों के अधीन, समिति के सुझावों को शामिल करते हुए दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक को नौ मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र के दूसरे चरण में पेश किया जाएगा।'' यह 2016 में लागू हुए आईबीसी अधिनियम का सातवां संशोधन होगा। अंतिम संशोधन 2021 में हुआ था।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने 12 अगस्त, 2025 को लोकसभा में दिवाला एवं और ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश किया था। इसमें दिवाला समाधान आवेदनों की स्वीकृति में लगने वाले समय को कम करने सहित कई बदलाव के प्रस्ताव किए गए। विधेयक को लोकसभा की प्रवर समिति को विचार के लिए भेजा गया था। समिति ने दिसंबर, 2025 में अपनी रिपोर्ट दे दी। - रायपुर। भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष द्वय डॉ. सरोज पाण्डेय कहा है कि केन्द्रीय बजट में रिफॉर्म ओवर रेटॉरिक के मार्गदर्शक सिद्धांत के तहत सरकार ने देश की संभावनाओं को प्रदर्शन में बदलने के लिए तीन पवित्र कर्तव्य तय किए हैं : उत्पादकता और ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ाकर आर्थिक विकास को तेज़ और टिकाऊ बनाना, जनता की आकांक्षाओं को पूरा करना, उन्हें समृद्धि का मजबूत भागीदार बनाना, और सबका साथ, सबका विकास के विज़न को साकार करना ताकि हर क्षेत्र और समुदाय को अवसर मिले। 500 जलाशयों का इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट, महिला समूहों और FPO लिक, इन्क्लूसिव ग्रोथ बजट की विशेषता है। इससे भारत के कोस्टल क्षेत्रों के अलावा इनलैण्ड सेक्टर को भी बढ़ावा मिलेगा। यह कदम जल संसाधनों को आय के स्थायी स्रोत में बदलते हुए मछुआरों, महिला समूहों और छोटे उत्पादकों को संगठित बाजार से जोड़कर समावेशी विकास को जमीन पर लाएगा।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को भारतीय तटरक्षक बल को उसके स्थापना दिवस पर बधाई दी और कहा कि समुद्री सुरक्षा, त्वरित आपदा प्रतिक्रिया और देश के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता सराहनीय है। भारतीय तटरक्षक बल की स्थापना 1977 में इसी दिन भारत के महासागर और अपतटीय संपदा, जिसमें तेल, मछली और खनिज शामिल हैं, की रक्षा करने, संकट में फंसे नाविकों की सहायता करने और समुद्र में जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा करने के उद्देश्य से की गई थी। मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''तटरक्षक बल के स्थापना दिवस पर उनके सभी पद के अधिकारियों, कर्मियों को हार्दिक शुभकामनाएं। उन्होंने हमारे तटों पर एक अडिग ढाल बनकर अपनी पहचान बनाई है। समुद्री सुरक्षा, त्वरित आपदा प्रतिक्रिया और हमारे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता सराहनीय है।'' भारतीय तटरक्षक बल के उद्देश्यों में समुद्र से संबंधित समुद्री कानूनों को लागू करना, अवैध शिकार, तस्करी और नशीले पदार्थों पर रोक लगाना, समुद्री पर्यावरण और पारिस्थितिकी का संरक्षण करना तथा दुर्लभ प्रजातियों की रक्षा करना, वैज्ञानिक डेटा एकत्र करना और युद्ध के दौरान नौसेना को सहायता प्रदान करना भी शामिल है।
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नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को आम बजट 2026-27 पेश करते हुए छात्रों, तकनीकी पेशेवरों और स्थानांतरित एनआरआई जैसे छोटे करदाताओं के लिए छह महीने की विदेशी संपत्ति खुलासा योजना का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि पहले अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील की अवधि के लिए जुर्माने की राशि पर करदाताओं पर कोई ब्याज नहीं देना होगा, चाहे परिणाम कुछ भी हो। वित्त मंत्री ने 31 जनवरी, 2026 तक किए गए निवेश पर अधिसूचित सहकारी समितियों द्वारा प्राप्त लाभांश आय के लिए तीन साल की छूट का भी प्रस्ताव दिया। सरकार हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, पूर्वी घाट की अराकू घाटी और पश्चिमी घाट में पारिस्थितिक रूप से टिकाऊ पर्वतीय मार्ग विकसित करेगी।
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नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को देश भर में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व के स्थानों समेत सभी अहम जगहों के बारे में जानकारी को डिजिटल स्वरूप प्रदान करने के लिए एक 'राष्ट्रीय गंतव्य डिजिटल ज्ञान ग्रिड' बनाने का प्रस्ताव रखा। सीतारमण ने लोकसभा में आगामी वित्त वर्ष के लिए केंद्रीय बजट पेश करते हुए हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर में 'पारिस्थितिकीय तौर पर टिकाऊ' पर्वतीय मार्गों को विकसित करने और एक 'राष्ट्रीय आतिथ्य-सत्कार संस्थान' (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी) बनाने का भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा, ''रोजगार पैदा करने, विदेशी मुद्रा विनिमय से कमाई करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में पर्यटन क्षेत्र की बड़ी भूमिका है। मैं मौजूदा राष्ट्रीय होटल प्रबंधन एवं कैटरिंग टेक्नोलॉजी परिषद के उन्नयन के लिए एक राष्ट्रीय आतिथ्य-सत्कार संस्थान बनाने का प्रस्ताव रखती हूं।'' वित्त मंत्री ने कहा कि यह शिक्षा क्षेत्र, उद्योग और सरकार के बीच सेतु की तरह काम करेगा।
सीतारमण ने बजट भाषण में लोथल, धौलावीरा, राखीगढ़ी, सारनाथ, हस्तिनापुर, लेह पैलेस समेत पुरातात्विक महत्व के 15 स्थलों का विकास 'जीवंत अनुभव वाले सांस्कृतिक गंतव्यों' के रूप में करने का भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने एक भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) के साथ मिलकर हाइब्रिड मोड में उच्च गुणवत्ता वाले 12 सप्ताह के मानकीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से ''20 प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों पर 10,000 गाइड का कौशल बढ़ाने के लिए एक पायलट योजना'' का भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि सरकार पांच 'पूर्वोदय' राज्यों में पांच पर्यटन गंतव्य बनाएगी और 4,000 ई-बसों के लिए प्रावधान करेगी।

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