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नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपना ईमेल प्लेटफॉर्म बदलते हुए Gmail से Zoho Mail पर स्विच कर लिया है। यह स्वदेशी तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है और डिजिटल आत्मनिर्भरता के मार्ग पर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अमित शाह ने अपने सोशल मीडिया हैंडल X पर यह जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, “नमस्ते सभी को, मैंने Zoho Mail पर स्विच कर लिया है। कृपया मेरा नया ईमेल पता [email protected] नोट करें। भविष्य में ईमेल द्वारा संपर्क करने के लिए इसी पते का उपयोग करें।”Zoho, जो कि पूरी तरह भारत में विकसित एक तकनीकी प्लेटफॉर्म है, वैश्विक सॉफ़्टवेयर परिदृश्य को बदल रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को गति दे रहा है।कुछ दिन पहले, केंद्रीय रेल एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी Zoho Mail अपनाया और इसे दस्तावेज़, स्प्रेडशीट और प्रेजेंटेशन साझा करने के लिए एक अच्छा मंच बताया। उन्होंने लोगों से देशी उत्पादों को अपनाने का आह्वान किया।इसके अलावा, शिक्षा मंत्रालय ने हाल ही में अपने सभी अधिकारियों को Zoho Office Suite का उपयोग करने का निर्देश दिया है। इस कदम के पीछे उद्देश्य वैश्विक सॉफ़्टवेयर जैसे Microsoft Office और Google Workspace पर निर्भरता कम करना और Zoho के प्लेटफॉर्म — Zoho Writer, Zoho Sheet और Zoho Show — को अपनाना है।सरकारी सर्कुलर में कहा गया है कि अधिकारियों को इस नए प्लेटफॉर्म से परिचित होना चाहिए, और इस दिशा में NIC के CMIS विभाग से सहायता उपलब्ध होगी। ध्यान देने योग्य है कि Zoho सॉफ़्टवेयर ‘सॉल्यूशन’ को चेन्नई के श्रीधर वेम्बु द्वारा विकसित किया गया है। -
नई दिल्ली। नीति आयोग ने बुधवार को एआई फॉर इनक्लूसिव सोसाइटल डेवलपमेंट नामक एक ऐतिहासिक रिपोर्ट जारी की गई है। इसके मुताबिक भारत के 49 करोड़ असंगठित श्रमिकों के जीवन और आजीविका को एआई और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के जरिए बदलाव लाने के लिए तैयार की गई है। यह रिपोर्ट डेलॉइट के सहयोग से तैयार की गई है और देश के एआई परिदृश्य में एक नया मोड़ लेकर आई है। जहां वैश्विक स्तर पर एआई चर्चा मुख्यतः श्वेतपोश नौकरियों और औपचारिक अर्थव्यवस्था पर केंद्रित रही है, वहीं यह रिपोर्ट भारत के असंगठित क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करती है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग आधा हिस्सा योगदान करता है, लेकिन औपचारिक सुरक्षा और उत्पादकता तंत्र से अभी भी बाहर है।
इस अवसर पर कौशल विकास एवं उद्यमिता (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि भारत के असंगठित श्रमिकों को सशक्त बनाना सिर्फ आर्थिक प्राथमिकता नहीं, बल्कि एक नैतिक दायित्व भी है। एआई और फ्रंटियर टेक्नोलॉजी की मदद से यह मिशन सुनिश्चित करेगा कि हर श्रमिक चाहे वह किसान हो, कारीगर या स्वास्थ्यकर्मी — डिजिटल अर्थव्यवस्था में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक कौशल, उपकरण और अवसर प्राप्त करे।इस रणनीति का मुख्य केंद्र “मिशन डिजिटल श्रमसेतु है, जो एक राष्ट्रीय पहल के रूप में हर असंगठित श्रमिक तक एआई को सुलभ, किफायती और प्रभावी बनाने का लक्ष्य रखती है। इस मिशन के तहत एआई, ब्लॉकचेन, इमर्सिव लर्निंग और अन्य उभरती तकनीकों का उपयोग कर वित्तीय असुरक्षा, सीमित बाजार पहुंच, कौशल की कमी और सामाजिक सुरक्षा के अभाव जैसी बाधाओं को दूर किया जाएगा।नीति आयोग के सीईओ बी. वी. आर. सुब्रह्मण्यम ने इस मौके पर कहा कि अगर हमें वास्तव में भारत के 49 करोड़ असंगठित श्रमिकों के जीवन को बदलना है, तो सहयोग वैकल्पिक नहीं बल्कि अनिवार्य है। सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत और नागरिक समाज को मिलकर काम करना होगा तभी स्थायी सशक्तिकरण संभव है।नीति आयोग की डिस्टिंग्विश्ड फेलो और फ्रंटियर टेक हब की प्रमुख देबजानी घोष ने कहा कि भारत के 30 ट्रिलियन डॉलर के विकसित भारत 2047 विजन को हासिल करने के लिए असंगठित क्षेत्र को सशक्त बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एआई अपने आप लोगों का जीवन नहीं बदलेगा। यह रोडमैप असंगठित श्रमिकों की आवाज, उनकी चुनौतियों और आकांक्षाओं को एआई संवाद के केंद्र में रखता है।अध्ययन में यह चेतावनी दी गई है कि यदि तत्काल और समन्वित कार्रवाई नहीं की गई, तो 2047 तक असंगठित श्रमिकों की औसत वार्षिक आय मात्र 6,000 डॉलर पर रुक सकती है, जो भारत के उच्च-आय वाले राष्ट्र बनने के लिए आवश्यक 14,500 डॉलर प्रति व्यक्ति आय लक्ष्य से काफी कम है। रिपोर्ट के लॉन्च कार्यक्रम में जयंत चौधरी, डॉ. वी. के. पॉल (सदस्य, नीति आयोग), बी. वी. आर. सुब्रह्मण्यम (सीईओ, नीति आयोग), एस. कृष्णन (सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय), देबाश्री मुखर्जी (सचिव, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय) और देबजानी घोष सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।इस कार्यक्रम में कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII), नैसकॉम फाउंडेशन, वर्ल्ड बैंक, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, सत्त्व कंसल्टिंग, हकदर्शक और पिरामल फाउंडेशन जैसे उद्योग एवं विकास सहयोगी संगठनों ने भी भाग लिया। नीति आयोग का यह रोडमैप उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।-( -
नई दिल्ली। केरल और कर्नाटक के बीच यात्रा को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एर्नाकुलम से त्रिशूर, पलक्कड़ होते हुए बेंगलुरु तक नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन सेवा को मंजूरी दे दी है। यह केरल के लिए तीसरी वंदे भारत ट्रेन होगी, जिसकी शुरुआत नवंबर के मध्य तक होने की उम्मीद है। इस नई ट्रेन सेवा की घोषणा केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने की। उन्होंने यह निर्णय भाजपा के केरल राज्य अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर के प्रस्ताव पर विचार करने के बाद लिया।
राजीव चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री वैष्णव को धन्यवाद दिया। उन्होंने लिखा, “एर्नाकुलम से त्रिशूर और पलक्कड़ होते हुए बेंगलुरु तक वंदे भारत ट्रेन सेवा को मंजूरी देने के लिए केंद्र सरकार का आभारी हूं। बेंगलुरु में बड़ी संख्या में मलयाली लोग काम करते हैं, विशेष रूप से आईटी क्षेत्र में। लंबे समय से इस रूट पर अतिरिक्त ट्रेन सेवा की मांग की जा रही थी।” उन्होंने बताया कि यह मुद्दा एक महीने पहले रेल मंत्री वैष्णव के ध्यान में लाया गया था, और उन्होंने तुरंत कार्रवाई करते हुए नई सेवा को मंजूरी दी। चंद्रशेखर ने कहा, “रेल मंत्री ने आश्वासन दिया है कि ट्रेन सेवा नवंबर के मध्य तक शुरू हो जाएगी।”रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी एक्स पर इसकी पुष्टि करते हुए कहा, “केरल भाजपा टीम और जिला अध्यक्षों के साथ वर्चुअल मीटिंग में एर्नाकुलम-बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस के प्रस्ताव पर चर्चा की गई, और इसे नवंबर मध्य तक शुरू करने की योजना बनाई गई है।” उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में यात्रा को सुगम बनाने के लिए 488 त्योहार विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं। यह घोषणा त्योहारों के मौसम में यात्रियों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। एर्नाकुलम से बेंगलुरु रूट पर यात्रा के दौरान अक्सर ट्रैफिक अधिक रहता है और निजी परिवहन के लिए यात्रियों को महंगा किराया देना पड़ता है। नई वंदे भारत सेवा से इस समस्या में काफी राहत मिलेगी। -
नयी दिल्ली. बच्चों को दी जाने वाली खांसी की दवाइयों की गुणवत्ता को लेकर चिंता के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि आयुर्वेदिक उपचार पूरी तरह से सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है। भारतीय चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े अखिल भारतीय चिकित्सक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. आर.पी. पाराशर ने कहा कि आयुर्वेदिक कफ सिरप, जड़ी-बूटियां और घरेलू उपचार दो साल से अधिक उम्र के बच्चों को बिना किसी डर के दिए जा सकते हैं। यह टिप्पणी मध्यप्रदेश में कथित जहरीले कफ सिरप के सेवन से कई बच्चों की मौत के बीच की गई है।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) ने तीन अक्टूबर को सभी राज्यों को एक परामर्श जारी कर दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को खांसी और सर्दी की दवाइयां देने पर प्रतिबंध लगा दिया था। परामर्श के अनुसार, आमतौर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप नहीं देने की सलाह दी जाती है। पांच साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को किसी भी प्रकार की दवा देने के बाद उसका सावधानीपूर्वक नैदानिक मूल्यांकन, कड़ी निगरानी और उचित खुराक, कम से कम अवधि और कई दवाओं के संयोजन से बचने के सख्त पालन के बाद किया जाना चाहिए। परामर्श में बच्चों के लिए कफ सिरप के विवेकपूर्ण और तर्कसंगत नुस्खे पर भी जोर दिया गया।
डा. पाराशर ने बताया कि छह माह से कम उम्र के बच्चों को खांसी, जुकाम या ठंड लगने पर उनकी छाती पर हल्के गर्म घी या तेल से मालिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "बच्चों की माताओं को ऐसे खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए जिसकी प्रकृति ठंडी होती हैं और शरीर में 'कफ' और 'दोष' बढ़ाते हैं। छह महीने से अधिक उम्र के बच्चों को तुलसी, अदरक, लौंग, काली मिर्च और खजूर के साथ दूध उबालकर पिलाया जा सकता है।" उन्होंने बताया कि यह दूध उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएगा और खांसी-जुकाम से तुरंत राहत प्रदान करेगा। आयुर्वेदिक कफ सिरप तुलसी, मुलेठी, काकड़सिंगी, भारंगी, पुष्करमूल, बहेड़ा, पुदीना, पिप्पली, काली मिर्च, दालचीनी, तेजपत्ता जैसी जड़ी-बूटियों से बनाए जाते हैं। डा. पाराशर ने बताया कि इनका बच्चों पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। इसके अलावा, बच्चों को सितोपलादि चूर्ण और तालिशादि चूर्ण शहद में मिलाकर दिया जा सकता है या वासावलेह और अगस्त्य हरीतकी जैसी औषधियाँ भी दी जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि ये सभी औषधियां बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी हैं।
दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एम्स) के निदेशक डा. प्रदीप कुमार प्रजापति ने बताया कि आहार और जीवनशैली में मामूली बदलाव से खांसी और जुकाम से बचा जा सकता है या उसका इलाज किया जा सकता है। प्रजापति ने कहा, "मौसम में बदलाव के दौरान होने वाली एलर्जी के कारण बच्चे कई बार खांसी और जुकाम से पीड़ित हो जाते हैं। खान-पान और जीवनशैली में मामूली बदलाव से खासकर एलर्जी के कारण होने वाली खांसी और जुकाम से बचा जा सकता है और उसका इलाज भी किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में हल्दी वाला गर्म दूध काफी फायदेमंद साबित होता है। कई मामलों में भाप लेना पर्याप्त होता है।" -
नयी दिल्ली. जाने-माने उद्योगपति गौतम अदाणी ने बुधवार को नवी मुंबई में अपने समूह के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की तुलना ‘कमल' से करते हुए कहा कि यह आर्थिक गतिविधिययों को गति देने के साथ भारत के भविष्य का प्रवेश द्वार साबित होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (एनएमआईएएल) के उद्घाटन के तुरंत बाद लिंक्डइन पर लिखे अपने लेख में अदाणी ने इसे भारत के बुनियादी ढांचे और राष्ट्र निर्माण की यात्रा में एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने हवाई अड्डे को ‘भारत के दूरदर्शी नेतृत्व और सार्वजनिक-निजी भागीदारी की ताकत का प्रमाण' बताया। उन्होंने कहा कि परियोजना का तेजी से कार्यान्वयन देश की महत्वाकांक्षा और गतिशीलता का प्रतीक है। परियोजना को 20,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 50 महीनों से कम समय में पूरा किया गया है।
मुंबई के परिवहन नेटवर्क से रणनीतिक रूप से जुड़ा, नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मौजूदा छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ मिलकर भीड़भाड़ को कम करने और क्षेत्र में आर्थिक वृद्धि को गति देने में मददगार होगा। इस हवाई अड्डे से 2,00,000 से अधिक नौकरियां पैदा होने तथा पर्यटन, व्यापार और नए व्यावसायिक गलियारों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे भारत के 10,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में योगदान मिलेगा। हवाई अड्डे का निर्माण करने वाले अदाणी समूह के चेयरमैन अदाणी ने हवाई अड्डे पर किए गए पर्यावरण अनुकूल पहल का जिक्र करते हुए इसे ‘आत्मनिर्भरता का प्रतीक' बताया, जो भारत की विरासत और भविष्य की आकांक्षाओं को बताता है। उन्होंने राष्ट्र निर्माण के प्रति अदाणी समूह की प्रतिबद्धता दोहरायी, जिसमें विमानन, लॉजिस्टिक, पर्यावरण अनुकूल कदम और डिजिटल बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने की योजना है। अदाणी ने कहा, ‘‘भारत की सेवा करना हमेशा हमारा सबसे बड़ा सम्मान होगा।''
उन्होंने नए हवाई अड्डे के निर्माण और संचालन के कार्य को ‘पवित्र जिम्मेदारी' बताते हुए कहा कि पिछले पांच साल में हर कदम पर ‘गहरी श्रद्धा, विनम्रता और मूल्य' के साथ इस दायित्व को निभाया है। अदाणी ने कहा कि नया हवाई अड्डा, ‘‘महाराष्ट्र की धरती से उभरा, कमल के समान है, हमारी विरासत में गहराई से निहित एक प्रतीक है।'' उन्होंने कहा कि यह आधुनिक भारत के सार को दर्शाता है... अपने ज्ञान में प्राचीन, फिर भी अपनी महत्वाकांक्षा में गतिशील और असीम। अदाणी ने कहा, ‘‘पर्यावरण अनुकूल उपायों को केंद्र में रखते हुए, यह समूह की हरित भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इन रनवे से रवाना होने वाली हर उड़ान 1.4 अरब भारतीयों का आशीर्वाद लेकर आएगी और हर आगमन दुनिया को याद दिलाएगा कि यह समय भारत का है।'' उन्होंने कहा कि नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा एक मील का पत्थर है। ‘‘यह हमारी मातृभूमि के लिए प्रगति और समृद्धि के मार्ग प्रशस्त करने के हमारे संकल्प को और पुष्ट करता है।'' अदाणी ने कहा कि भारत पृथ्वी पर उन गिने-चुने स्थानों में से एक है जहां देश का निर्माण केवल एक व्यावसायिक प्रयास नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का एक रूप है। उन्होंने कहा, ‘‘जब हमने सितंबर, 2021 में इसकी नींव रखी थी, तो हम एक सपना लेकर आए थे - भारत की महत्वाकांक्षा और मुंबई की ऊर्जा को प्रतिबिंबित करने वाला एक विश्व स्तरीय प्रवेश द्वार बनाना। पचास महीने से भी कम समय में, 20,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ, भारत की सबसे बड़ी नई विमानन परियोजना रिकॉर्ड समय में बनकर तैयार हो गई है। यह नए भारत की गति, पैमाने और भावना का प्रमाण है।'' उन्होंने कहा कि मुंबई में भीड़भाड़ कम करके और एक नए आर्थिक इंजन के रूप में काम करके, यह समृद्धि का द्वार खोलेगा जो पूरे क्षेत्र के समुदायों को सशक्त बनाएगा और भारत की 10,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर यात्रा में योगदान देगा। -
नागपुर. हिंदी फिल्म ‘झुंड' में अपने ऑनस्क्रीन किरदार ‘बाबू छेत्री' से मशहूर हुए अभिनेता प्रियांशु उर्फ बाबू रवि सिंह छेत्री की उनके दोस्त ने कथित तौर पर हत्या कर दी। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पहचान कर ली गई है और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। इक्कीस वर्षीय अभिनेता ने 2022 में रिलीज हुई इस फिल्म में अपनी भूमिका के लिए लोकप्रियता हासिल की थी। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन ने अभिनय किया था और नागराज मंजुले ने इसे निर्देशित किया था।
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मुंबई. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 19,650 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (एनएमआईए) के पहले चरण का बुधवार को उद्घाटन किया। उन्होंने इसे "विकसित भारत" की एक झलक बताया, जो मुंबई क्षेत्र को एशिया का सबसे बड़ा कनेक्टिविटी केंद्र बनाने में मदद करेगा। एनएमआईए का पहला चरण 19,650 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है और दिसंबर में चालू हो जाएगा। यह देश का सबसे बड़ा ‘ग्रीनफील्ड' हवाई अड्डा है। इससे पहले, मोदी को लेकर विमान दोपहर करीब 2.40 बजे नए हवाई अड्डे पर उतरा। यह मुंबई क्षेत्र का दूसरा हवाई अड्डा है। कुल 1,160 हेक्टेयर में फैले इस हवाई अड्डे में पहले चरण में एक टर्मिनल और एक रनवे होगा, जिसकी वार्षिक यात्री क्षमता दो करोड़ होगी। मोदी ने विमानन परियोजना का उद्घाटन करने के बाद कहा, "मुंबई का लंबा इंतजार खत्म हो गया है, क्योंकि शहर को अब अपना दूसरा हवाई अड्डा मिल गया है, जिससे महाराष्ट्र के किसानों को यूरोप और अमेरिका के सुपरमार्केट से जुड़ने में भी मदद मिलेगी।" यह परियोजना वर्षों से बन रही थी और इसमें कई बार देरी हुई। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि यह हवाई अड्डा मुंबई महानगर क्षेत्र को एशिया का सबसे बड़ा कनेक्टिविटी केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कुल 1,160 हेक्टेयर में फैला यह नया हवाई अड्डा भारत की विमानन क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा और मुंबई के मौजूदा छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भारी यातायात के बोझ को कम करेगा। उन्होंने मौके पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा, "यह एक ऐसी परियोजना है जिसमें विकसित भारत की झलक दिखती है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि यह हवाई अड्डा नए निवेश को आकर्षित करेगा और रोज़गार के नए अवसर पैदा करेगा।
मोदी ने देश के विमानन क्षेत्र के विकास का उल्लेख करते हुए बताया कि 2014 से उनके नेतृत्व में यह किस प्रकार विकसित और विस्तारित हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत, जो विश्व का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार है, में 2014 में सिर्फ 74 हवाई अड्डे थे, लेकिन पिछले 11 वर्षों में इनकी संख्या बढ़कर 160 से अधिक हो गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि उनकी सरकार इस प्रमुख क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना उड़ान के ज़रिए लाखों लोग हवाई यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय एयरलाइन कंपनियों ने 1,000 से ज़्यादा नए विमानों के ऑर्डर दिए हैं। मोदी ने कहा कि उनका लक्ष्य देश को वैश्विक एमआरओ (रखरखाव, मरम्मत) केंद्र बनाना है। औपचारिक उद्घाटन से पहले प्रधानमंत्री ने नवनिर्मित सुविधाओं का अवलोकन किया।
इस अवसर पर नागर विमानन मंत्री के राममोहन नायडू ने कहा कि एनएमआईए रोजगार के लगभग दो लाख अवसर पैदा करने में मदद करेगा और मुंबई को देश की विमानन राजधानी बनाएगा। उद्घाटन समारोह में महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार, अडाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अडाणी और नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल भी उपस्थित थे। एनएमआईए को 30 सितंबर को नियामक नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से हवाई अड्डा लाइसेंस प्राप्त हुआ। संपूर्ण परियोजना को नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड (एनएमआईएएल) द्वारा कई चरणों में विकसित किया जा रहा है। इस कंपनी में अडाणी समूह की 74 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि शेष 26 प्रतिशत हिस्सेदारी महाराष्ट्र सरकार की नगर नियोजन और विकास एजेंसी सिडको के पास है। सभी चरण के पूरा होने पर एनएमआईए में चार टर्मिनल होंगे, जिनकी क्षमता प्रति वर्ष नौ करोड़ यात्रियों की होगी तथा माल ढुलाई क्षमता 32.5 लाख मीट्रिक टन होगी, जिससे यह एशिया के सबसे बड़े विमानन केंद्रों में से एक बन जाएगा। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा मंगलवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि एनएमआईए देश का पहला हवाई अड्डा होगा जो ‘वाटर टैक्सी' से जुड़ा होगा। एनएमआईए का नाम कद्दावर नेता और सामाजिक कार्यकर्ता दिवंगत डीबी पाटिल के नाम पर रखा जाएगा, जिन्हें इस क्षेत्र के परियोजना प्रभावित लोगों को उचित मुआवज़ा दिलाने में उनके योगदान के लिए व्यापक रूप से सराहा जाता है। इसे आधिकारिक तौर पर 'लोकनेते डीबी पाटिल नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा' के नाम से जाना जाएगा। -
अयोध्या .उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संगम बुधवार को अयोध्या की पावन भूमि पर देखने को मिला। दो दिवसीय दौरे पर पहुंचीं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मिलकर दक्षिण भारत के तीन महान संगीत संतों त्यागराज स्वामीगल, पुरंदर दास और अरुणाचल कवि की मूर्तियों का बृहस्पति कुंड में अनावरण किया। टेढ़ी बाजार स्थित बृहस्पति कुंड का वातावरण उस समय भक्तिरस और संगीत की पवित्र भावना से सरोबार हो उठा जब केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री ने दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना कर अनावरण समारोह की शुरुआत की। इस दौरान सीतारमण के माता-पिता भी मौजूद रहे, जिससे यह पल और भी भावनात्मक हो गया।
एक बयान के अनुसार मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री का पुष्पगुच्छ भेंट कर पारंपरिक अयोध्या शैली में स्वागत किया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बृहस्पति कुंड केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक है, जहां उत्तर भारत की श्रद्धा और दक्षिण भारत की भक्ति का संगम होता है। सीतारमण ने कहा कि अयोध्या केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है। उन्होंने तीनों संतों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि त्यागराज स्वामीगल, पुरंदर दास और अरुणाचल कवि ने भारतीय शास्त्रीय संगीत और भक्ति परंपरा को विश्व पटल पर स्थापित किया तथा उनके काव्य और रचनाओं ने समाज को प्रेम, भक्ति एवं एकता के सूत्र में पिरोया। सीतारमण ने कहा कि अयोध्या और कर्नाटक के सांस्कृतिक संबंध सदियों पुराने हैं तथा आज इन संतों की मूर्तियों के अनावरण के माध्यम से भारत की उत्तर-दक्षिण परंपरा एक सूत्र में बंधी है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीराम की नगरी अयोध्या अब केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण की केंद्रस्थली बन रही है। उन्होंने कहा कि निर्मला सीतारमण का यह दौरा भारत की सांस्कृतिक एकता और समरसता का सशक्त प्रतीक है। बृहस्पति कुंड परिसर में स्थापित सुंदर पत्थर की बेंचों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह कुछ देर के लिए विराम लेते हुए बैठे। मुख्यमंत्री ने बेंचों की कलात्मक बनावट और परिसर के सौंदर्यीकरण की सराहना करते हुए कहा कि बृहस्पति कुंड अब श्रद्धा और सौंदर्य का आदर्श संगम बन चुका है। निर्मला सीतारमण बुधवार को दो दिवसीय दौरे पर अयोध्या पहुंचीं।
इससे पहले महर्षि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर खन्ना और कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने उनका स्वागत किया। हवाई अड्डे से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच केंद्रीय मंत्री का काफिला सिविल लाइन्स स्थित होटल पहुंचा, जहां कुछ देर विश्राम के बाद वह अपने निर्धारित कार्यक्रमों के लिए रवाना हुईं। बयान के अनुसार संत-संगीतकारों--त्यागराज स्वामीगल, पुरंदर दास और अरुणाचल कवि ने भारतीय शास्त्रीय संगीत में दिव्य भक्ति का संचार किया और इसे राष्ट्र की संस्कृति का आध्यात्मिक सार बना दिया। भक्ति और धर्म की भूमि अयोध्या में उनकी स्थापना उत्तर और दक्षिण भारतीय परंपराओं की एकता का एक उल्लेखनीय प्रमाण है। - नयी दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि 'कर्म योगी' नरेन्द्र मोदी ने 24 साल पहले आज ही के दिन गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में संविधान की शपथ ली थी और जनसेवा की अपनी लंबी पारी के दौरान उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि जब दृष्टि 'राष्ट्र प्रथम' और मिशन 'विकसित भारत' हो, तो नेतृत्व करोड़ों लोगों के जीवन में कैसे बदलाव ला सकता है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में लगातार तीन विधानसभा चुनावों में भाजपा को जीत दिलाने के बाद, मोदी 2014 से प्रधानमंत्री के रूप में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का नेतृत्व कर रहे हैं और लगातार तीन राष्ट्रीय चुनाव जिता चुके हैं। शाह ने ‘एक्स' पर लिखा, ‘‘राष्ट्र और जनसेवा को समर्पित 24 वर्ष! यह दिन पूरे देश के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है, जब निःस्वार्थ भाव से जनसेवा को समर्पित एक कर्मयोगी ने संविधान की शपथ लेकर लोगों की समस्याओं को अपना माना, उनका निवारण शुरू किया और ये समस्याएं इतिहास बनती चली गईं।'' गृह मंत्री ने कहा कि इन 24 वर्षों में, चाहे गुजरात के किसानों, महिलाओं, उद्योग और शिक्षा का कायाकल्प करना हो या फिर प्रधानमंत्री के रूप में देश की सुरक्षा, गरीबों के कल्याण और पिछड़े, दलित व जनजातीय समुदाय सहित सभी वर्गों का उत्थान करना हो, मोदी जी ने यह सिद्ध कर दिया कि जब विजन ‘राष्ट्रप्रथम' हो और मिशन ‘विकसित भारत', तब एक नेतृत्व कैसे करोड़ों लोगों के जीवन में परिवर्तन ला सकता है। मोदी को अपने कार्यकाल के दौरान कभी चुनावी हार का सामना नहीं करना पड़ा और सभी प्रधानमंत्रियों में सबसे लंबे समय तक सरकार चलाने का रिकॉर्ड उनके नाम है, जिसमें साढ़े 12 साल से अधिक समय तक मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल भी शामिल है।
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नयी दिल्ली. सरकारी बैंकों ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 10,907 करोड़ रुपये के पांच लाख से अधिक ऋण स्वीकृत किए हैं। इस योजना का मकसद रूफटॉप यानी छतों पर सौर प्रणाली स्थापित कर घरों को अपनी बिजली खुद उत्पादित करने में सक्षम बनाना है। मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (पीएमएसजीएमबीवाई) को ऋण वितरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करके और कम ब्याज दर पर गिरवी मुक्त किफायती ऋण की सुविधा देकर लागू किया जा रहा है। यह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के जरिये आसान वित्तपोषण से समर्थित है। इसमें कहा गया, ''सितंबर 2025 तक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 10,907 करोड़ रुपये की राशि के 5.79 लाख से अधिक ऋण आवेदनों को मंजूरी दी है, जिससे रूफटॉप सौर प्रणाली स्थापित करने वाले लाभार्थियों को वित्तीय सहायता बढ़ी है।'' ऋण देने की प्रक्रिया आसान पोर्टल के जरिये पूरी की जाती है।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि देश के सशस्त्र बलों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान एकजुटता और रणनीतिक दूरदर्शिता की ताकत का प्रदर्शन किया, जिसके परिणामस्वरूप नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार आतंकवादी बुनियादी ढांचे को ध्वस्त किया गया। पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने सात मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान के नियंत्रण वाले इलाकों में आतंकी ढांचों को निशाना बनाया गया। इस हमले के बाद चार दिनों तक भीषण झड़पें हुईं, जो 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति के साथ समाप्त हुईं। यहां राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के 65वें पाठ्यक्रम के संकाय और पाठ्यक्रम सदस्यों को संबोधित करते हुए मुर्मू ने कहा कि बदलते भू-राजनीतिक माहौल और सुरक्षा संदर्भ गतिशील प्रतिक्रियाओं की मांग करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत सशस्त्र बलों को तकनीकी रूप से उन्नत युद्ध के लिए तैयार बल के रूप में परिवर्तित करने में लगा हुआ है, जो बहु-क्षेत्रीय एकीकृत अभियान में सक्षम हो। राष्ट्रपति ने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारे सशस्त्र बलों ने एकजुटता और रणनीतिक दूरदर्शिता की ताकत का प्रदर्शन किया। सेना के तीनो अंगों की बेहतर प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप प्रभावी तालमेल स्थापित हुआ।" मुर्मू ने सशस्त्र बलों के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा, "नियंत्रण रेखा के पार और सीमा पार के क्षेत्रों में अंदर तक आतंकी बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने के सफल अभियान के पीछे यही तालमेल था।" राष्ट्रपति ने कहा कि एकजुटता को बढ़ावा देने की प्रक्रिया सैन्य मामलों के विभाग के गठन के साथ शुरू हुई, जिसके सचिव प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) हैं। उन्होंने कहा, "मुझे यह जानकर खुशी हुई कि एकीकृत थिएटर कमांड और एकीकृत युद्धक समूहों की स्थापना के माध्यम से सशस्त्र बलों के पुनर्गठन के प्रयास चल रहे हैं।" मुर्मू ने कहा कि सार्वभौमिक मूल्य हमारे राष्ट्रीय हितों को परिभाषित करने के मूल में हैं और भारतीय परंपरा ने हमेशा पूरी मानवता को एक परिवार के रूप में देखा है। उन्होंने कहा, "संपूर्ण विश्व एक परिवार है, यह समृद्ध भावना 'वसुधैव कुटुम्बकम' में व्यक्त होती है। सार्वभौमिक भाईचारा और शांति हमारी आस्था के मूलमंत्र रहे हैं। लेकिन हमने मानवता और हमारे राष्ट्र के लिए हानिकारक ताकतों को हराने के लिए युद्ध को लेकर तैयार रहने को भी महत्व दिया है।" राष्ट्रपति ने 'महाभारत' का हवाला देते हुए कहा कि इसमें उन मूल्यों की अभिव्यक्ति मिलती है जिन्हें हम संजोते हैं। उन्होंने कहा, "युद्ध को टालने और सौहार्दपूर्ण समाधान पर पहुंचने के लिए हर संभव प्रयास किया गया। शांति के प्रयासों का नेतृत्व मुख्य पात्र कृष्ण ने किया, जिन्हें हम भगवान मानते हैं। जब युद्ध अपरिहार्य हो गया, तो कृष्ण ने सबसे महत्वपूर्ण योद्धाओं में से एक अर्जुन से कहा कि वे सभी संदेहों को दूर कर लें और बहादुरी से लड़ें। इस प्रकार, युद्ध और शांति के प्रति समग्र भारतीय दृष्टिकोण, शांति और अहिंसा के मूल्यों को सर्वोच्च महत्व देता है।" मुर्मू ने कहा कि लेकिन जब कोई लड़ाई अपरिहार्य हो जाती है तो यह पूरे संकल्प के साथ लड़ने के लिए भी प्रेरित करती है।
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नयी दिल्ली. विश्व बैंक ने मंगलवार को चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के वृद्धि अनुमान को बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया। पूर्व में इसके 6.3 प्रतिशत प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गयी थी। साथ ही यह अनुमान भी जताया कि उपभोग वृद्धि में लगातार मजबूती के बल पर भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। विश्व बैंक ने हालांकि आगाह किया कि अमेरिका के भारतीय निर्यात पर लगाए गए 50 प्रतिशत शुल्क का आने वाले वर्ष में देश पर प्रभाव पड़ेगा। इसने 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान को 6.5 प्रतिशत से घटाकर 6.3 प्रतिशत कर दिया।
विश्व बैंक के दक्षिण एशिया विकास सूचना (अक्टूबर 2025) में कहा गया, ''उपभोग वृद्धि में लगातार मजबूती के बल पर भारत के दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बने रहने की उम्मीद है।'' इसके मुताबिक घरेलू परिस्थितियां, विशेष रूप से कृषि उत्पादन और ग्रामीण वेतन वृद्धि, अपेक्षा से बेहतर रही हैं। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया, ''वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पूर्वानुमान घटा दिया गया है। भारत से अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले लगभग तीन-चौथाई माल पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाने के चलते ऐसा किया गया।'' रिपोर्ट में आगे कहा गया कि दक्षिण एशिया में वृद्धि दर 2024-25 के 6.6 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में 5.8 प्रतिशत रह सकती है। इस मंदी के बावजूद, वृद्धि दर अन्य उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं (ईएमडीई) की तुलना में अधिक मजबूत बनी रहेगी। इस नरमी के बावजूद, वृद्धि दर अन्य उभरते बाजार और विकासशील अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों की तुलना में अधिक मजबूत रहेगी। रिपोर्ट के अनुसार, मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के लक्ष्यों के भीतर या उसके अनुरूप बनी रहने की उम्मीद है। -
मुंबई. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर अपने भी कई डीपफेक वीडियो की मौजूदगी का उल्लेख करते हुए लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का आह्वान किया। सीतारमण ने यहां वार्षिक ग्लोबल फिनटेक फेस्ट को संबोधित करते हुए कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) वित्त एवं शासन के साथ रोजमर्रा की जिंदगी को भी बदल रहा है। हालांकि उन्होंने यह सुनिश्चित करने की जरूरत पर बल दिया कि प्रौद्योगिकी उन्नति मानवता की सेवा करे। वित्त मंत्री ने उन्नत प्रौद्योगिकी के 'अंधेरे पहलू' से भी निपटने के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।
सीतारमण ने कहा, "जो उपकरण नवाचार को शक्ति प्रदान करते हैं, उन्हीं का इस्तेमाल धोखे और जालसाजी के लिए भी किया जा सकता है। मैं इसे व्यक्तिगत नहीं बना रही हूं, लेकिन मैं कह सकती हूं कि मैंने अपने कई डीपफेक वीडियो को ऑनलाइन प्रसारित होते हुए देखा है। इन डीपफेक वीडियो का इस्तेमाल नागरिकों को गुमराह करने और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने के लिए किया गया है।" उन्होंने कहा कि ये वीडियो इस बात की याद दिलाते हैं कि हमें ऐसे लोगों के खिलाफ अपनी सुरक्षा व्यवस्था को 'तत्परता' से बढ़ाने की कितनी जरूरत है। डीपफेक वीडियो में एआई एवं मशीन लर्निंग तकनीकों के इस्तेमाल से किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज या हाव-भाव को किसी अन्य व्यक्ति या परिस्थिति में नकली रूप से जोड़ा जाता है। इसे देखकर आम लोग अक्सर इसे असली वीडियो समझ लेते हैं। उन्होंने कहा, "नई पीढ़ी की धोखाधड़ी अब फायरवॉल तोड़ने के बारे में नहीं, बल्कि विश्वास को तोड़ने के बारे में है। अपराधी आवाज की नकल करने, पहचान की नकल करने और लोगों को गुमराह करने वाले असली लगने वाले वीडियो बनाने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं।" सीतारमण ने कहा कि वित्तीय प्रौद्योगिकी में सक्रिय नवोन्मेषकों, निवेशकों और नियामकों सहित पूरे परिवेश की इस मोर्चे पर महत्वपूर्ण भूमिका है। वित्त मंत्री ने कहा कि नवोन्मेषी होने के साथ वित्तीय प्रणालियों को लचीला, सुरक्षित और समावेशी होना चाहिए। उन्होंने समर्पित एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) हैंडल के जरिये निवेशकों को लक्षित करने वाले नकली वीडियो और झूठे प्रतिनिधित्व के मुद्दे को हल करने के लिए बाजार नियामक सेबी के प्रयासों की सराहना की। -
नयी दिल्ली/ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत ने 2024-25 के अंत तक घरेलू स्रोतों से 1,20,000 करोड़ रुपये मूल्य के सैन्य उपकरण और हथियार खरीदे हैं। उन्होंने बताया कि भारत राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए आत्मनिर्भरता को मजबूत करने पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रहा है। सिंह ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार युद्ध के बदलते स्वरूप खासतौर पर ड्रोन जैसे ‘नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर' (दूरस्थ युद्ध तकनीक) के महत्व को समझती है और उसके अनुसार तैयारी कर रही है। इस संदर्भ में उन्होंने विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत के अपने रक्षा उद्योगों को बढ़ाने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, ‘‘2021-22 में घरेलू स्रोतों से हमारी पूंजीगत खरीद लगभग 74,000 करोड़ रुपये की थी, लेकिन 2024-25 के अंत तक यह बढ़कर लगभग 1,20,000 करोड़ रुपये हो गई है। यह बदलाव केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि मानसिकता के परिवर्तन का भी प्रतीक है।'' रक्षा मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने पिछले 10 वर्षों में रक्षा उपकरणों के स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए कई नीतिगत पहल की हैं। उन्होंने बताया कि अब सैन्य हार्डवेयर की खरीद में घरेलू स्रोतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। सिंह ने कहा, ‘‘भारत सरकार आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति से भली-भांति परिचित है। आज का युद्ध पूरी तरह प्रौद्योगिकी-आधारित हो चुका है। हमने इसका उदाहरण ऑपरेशन सिंदूर में भी देखा।'' उन्होंने कहा, “इसमें हमने देखा कि ड्रोन, ड्रोन-रोधी प्रणाली और वायु-रक्षा प्रणाली जैसी दूरस्थ युद्ध तकनीकों का महत्व तेजी से बढ़ा है।'' सिंह ने भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए रक्षा क्षेत्र के लिए प्रमुख उद्देश्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘‘पहला उद्देश्य महत्वपूर्ण रक्षा क्षमताओं में आत्मनिर्भरता हासिल करना। दूसरा, हमें रक्षा क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक निर्यातक बनना होगा।'' रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘तीसरा, नयी अत्याधुनिक तकनीकों में प्रगति करना ताकि भारत अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकी वाले देशों की श्रेणी में शामिल हो सके।''
- मुंबई. सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने सोमवार को कहा कि पिछले 18 महीनों में सोशल मीडिया मंच से एक लाख से ज्यादा गैरकानूनी सामग्री हटाई गई है। उन्होंने भोले-भाले निवेशकों को धोखेबाजों से बचाने की जरूरत पर जोर दिया।पांडेय ने कहा कि सेबी ने गूगल और मेटा जैसे मंचों के साथ गैरकानूनी सामग्री के मुद्दे को आगे बढ़ाया है। उन्होंने यहां एनएसई में एक निवेशक जागरूकता कार्यक्रम में कहा कि तकनीकी उपकरणों के आने से अपराधियों के लिए निवेशकों को धोखा देने वाली सामग्री तैयार करना आसान हो गया है। पांडेय ने कहा, ''पिछले 18 महीनों में ऐसी एक लाख से ज्यादा सामग्री हटाई गई हैं।''हाल में किए गए एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए, पांडेय ने कहा कि केवल 36 प्रतिशत लोगों को ही पूंजी बाजार के बारे में उच्च या मध्यम स्तर की जानकारी है। इससे पता चलता है कि लोगों का एक बड़ा समूह भ्रामक सामग्री से धोखा खा सकता है। उन्होंने निवेशकों के भरोसे को बनाए रखने पर जोर दिया और कहा कि भारत जैसे देश के लिए यह भरोसा बेहद महत्वपूर्ण है। पांडेय ने कहा कि निवेशक जागरूकता सेबी की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है और नियामक इस संबंध में कई उपाय कर रहा है। इसी कार्यक्रम में एनएसई के चेयरमैन श्रीनिवास इंजेती ने कहा कि देश के सबसे बड़े शेयर बाजार ने सूचीबद्ध होने की तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि एनएसई फिलहाल सूचीबद्ध नहीं है, फिर भी इसके पास लगभग 1.8 लाख शेयरधारक हैं।
- नयी दिल्ली. बेहतर मानसूनी बारिश के कारण इस खरीफ सत्र में अब तक धान की बुवाई का रकबा 1.35 प्रतिशत बढ़कर 441.58 लाख हेक्टेयर हो गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक खरीफ (गर्मी में बोई जाने वाली फसल) सत्र की मुख्य फसल धान की बुवाई पिछले साल इसी अवधि में 435.68 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई थी। कृषि विभाग ने तीन अक्टूबर, 2025 तक खरीफ फसलों के तहत रकबे की जानकारी दी है।एक आधिकारिक बयान में सोमवार को कहा गया कि सभी खरीफ फसलों का कुल बुवाई रकबा तीन अक्टूबर तक बढ़कर 1,121.46 लाख हेक्टेयर हो गया, जो एक साल पहले 1,114.95 लाख हेक्टेयर था। दलहन का रकबा 119.04 लाख हेक्टेयर से मामूली बढ़कर 120.41 लाख हेक्टेयर हो गया, जबकि मोटे अनाजों का बुवाई क्षेत्र 183.54 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 194.67 लाख हेक्टेयर हो गया। गैर-खाद्यान्न श्रेणी में तिलहनों का रकबा 200.75 लाख हेक्टेयर से घटकर 190.13 लाख हेक्टेयर हो गया। कपास का रकबा 112.97 लाख हेक्टेयर से घटकर 110.63 लाख हेक्टेयर रह गया। गन्ने की बुवाई थोड़ी बढ़कर 59.07 लाख हेक्टेयर हो गई, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 57.22 लाख हेक्टेयर थी।
- नयी दिल्ली. उत्तर रेलवे यात्रियों की सुविधा के लिए 11 अक्टूबर से दिल्ली और पटना के बीच एक त्योहार विशेष वंदे भारत ट्रेन चलाएगा। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है। बयान में कहा गया है कि यह विशेष ट्रेन 15 नवंबर तक इस मार्ग पर चलाई जाएगी।उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा, ‘‘आगामी त्योहारों के दौरान यात्रियों की रेलयात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए, रेलवे ने वंदे भारत त्योहार विशेष ट्रेनें चलाने का फैसला किया है।'' उपाध्याय ने कहा, ‘‘ये विशेष रेलगाड़ियां त्योहारों के मौसम में यात्रा की बढ़ती मांग को पूरा करेंगी और सभी यात्रियों के लिए आरामदायक एवं सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करेंगी।'' उन्होंने कहा कि नयी दिल्ली से पटना जाने वाली 02252 नंबर की यह ट्रेन इस अवधि के दौरान 16 चक्कर लगाएगी और हर सोमवार, बुधवार और शनिवार को अपनी सेवायें प्रदान करेगी। उपाध्याय ने कहा, ‘‘यह ट्रेन नयी दिल्ली से सुबह 8.35 बजे रवाना होगी और उसी दिन रात 9.30 बजे पटना पहुंचेगी। ट्रेन यह दूरी 13 घंटे से भी कम समय में तय करेगी और अलीगढ़, कानपुर सेंट्रल, प्रयागराज, पंडित दीन दयाल उपाध्याय, बक्सर और आरा स्टेशनों पर रुकेगी।'' उन्होंने कहा, ‘‘पटना से नयी दिल्ली के लिए 02251 संख्या वाली यह ट्रेन 12 अक्टूबर से शुरू होगी और हर मंगलवार, बृहस्पतिवार और रविवार को 16 फेरे लगाएगी। यह ट्रेन पटना से सुबह 10 बजे रवाना होगी और उसी दिन रात 11.30 बजे नयी दिल्ली पहुंचेगी।'' अधिकारियों के अनुसार, इस विशेष वंदे भारत ट्रेन में 16 डिब्बे होंगे।
- नयी दिल्ली. आईआईटी-मद्रास प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन की दूरसंचार सुरक्षा परीक्षण प्रयोगशाला (टीएसटीएल) देश की पहली प्रयोगशाला बन गई है जिसे केंद्र के दूरसंचार विभाग द्वारा 5जी कोर-नेटवर्क फंक्शन, एक्सेस एंड मोबिलिटी मैनेजमेंट फंक्शन (एएमएफ) और 5जी समूह-प्रथम उपकरणों का परीक्षण करने के लिए अधिकृत किया गया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। यह प्रमाणन प्रयोगशाला को 5जी मोबाइल-दूरसंचार उपकरणों का अत्याधुनिक सुरक्षा मूल्यांकन करने में सक्षम बनाता है, जिससे पूरे देश में सुरक्षित और सुस्थिर 5जी अवसंरचना का त्वरित कार्यान्वयन संभव होगा। टीएसटीएल ने एएमएफ और 5जी समूह-प्रथम उपकरणों का परीक्षण करने के लिए राष्ट्रीय संचार सुरक्षा केंद्र (एनसीएसएस) से ऐतिहासिक प्रमाणन प्राप्त किया, जिसमें सामान्य सुरक्षा आवश्यकताओं के तहत 21 महत्वपूर्ण कोर-नेटवर्क कार्यों को शामिल किया गया। आईआईटी-एम के निदेशक वी. कामकोटि ने कहा, "यह प्रमाणन विदेशी परीक्षण प्रयोगशालाओं पर हमारी निर्भरता को कम करता है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होती है और स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को बढ़ावा मिलता है।"
- नयी दिल्ली. विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने सोमवार को कहा कि भारत बांग्लादेश में जल्द से जल्द स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव कराने के पक्ष में है और वह जनता द्वारा चुनी गई किसी भी सरकार के साथ काम करने के लिए तैयार है। मिसरी ने यह भी कहा कि बांग्लादेश की शांति, प्रगति और स्थिरता में भारत का हित निहित है।विदेश सचिव ने यह टिप्पणी बांग्लादेश से आए पत्रकारों के एक समूह के साथ बातचीत के दौरान की। मिसरी ने कहा, ‘‘हम बांग्लादेश की जनता के जनादेश से बनने वाली किसी भी सरकार के साथ काम करेंगे।''बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पहले ही घोषणा कर चुकी है कि देश में संसदीय चुनाव अगले वर्ष फरवरी में होंगे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि भारत बांग्लादेश में स्वतंत्र, निष्पक्ष, समावेशी और सहभागी चुनावों के पक्ष में है और वह इन चुनावों को यथाशीघ्र कराने के पक्ष में है।'' उन्होंने कहा, “हम इस बात से उत्साहित हैं कि बांग्लादेश के अधिकारियों ने स्वयं इन चुनावों के लिए समय-सीमा के बारे में बात की है और हम इन चुनावों के होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।” पिछले वर्ष अगस्त में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों के कारण अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के ढाका से भागकर भारत में शरण लेने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में गिरावट आई है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की ओर से भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग के बारे में पूछे गए सवाल पर मिसरी ने कहा कि यह एक कानूनी मुद्दा है और दोनों पक्ष इस पर काम कर सकते हैं।
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक उपलब्धि शेयर की। उन्होंने बताया कि आज ही के दिन अक्टूबर 2001 को उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इस अवसर पर उन्होंने देशवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता के आशीर्वाद और विश्वास से वे अब सरकार के प्रमुख के रूप में 25वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं।पीएम मोदी ने अपने अब तक के सफर, संघर्षों और उपलब्धियों को याद कियाप्रधानमंत्री मोदी ने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर एक श्रृंखला में अपने अब तक के सफर, संघर्षों और उपलब्धियों को याद किया। पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पोस्ट के जरिए बताया कि जब उन्हें गुजरात का मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया, तब राज्य भीषण भूकंप, चक्रवात, सूखा और राजनीतिक अस्थिरता जैसे संकटों से जूझ रहा था। उन्होंने लिखा, “मेरी पार्टी ने बेहद चुनौतीपूर्ण समय में मुझ पर भरोसा जताया। इन आपदाओं ने मेरी लोगों की सेवा करने की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।”पीएम मोदी ने अपनी मां की बात को याद कियापीएम मोदी ने अपनी मां की बात को याद किया। उन्होंने लिखा, “जब मैंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तब मेरी मां ने मुझसे दो बातें कही थीं। गरीबों के लिए काम करना और कभी रिश्वत न लेना। मैंने भी जनता से वादा किया कि मैं जो भी करूंगा, वह सद्भावना और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की सेवा की भावना से प्रेरित होगा।”पीएम मोदी ने बताया- ‘गुजरात आज सुशासन का प्रतीक’प्रधानमंत्री ने बताया कि 2001 में जब उन्होंने सीएम पद संभाला था, तब गुजरात को लेकर आम धारणा थी कि राज्य अब उभर नहीं पाएगा। किसान बिजली और पानी की कमी से जूझ रहे थे, उद्योग ठप थे और कृषि संकट में थी। लेकिन सबके सामूहिक प्रयासों से गुजरात आज सुशासन का प्रतीक बन चुका है।‘गुजरात को कृषि के क्षेत्र में अग्रणी बनाया’उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “सूखा प्रभावित राज्य होने के बावजूद गुजरात को कृषि के क्षेत्र में अग्रणी बनाया। व्यापारिक संस्कृति को औद्योगिक और विनिर्माण शक्ति में बदला गया। सामाजिक और भौतिक अवसंरचना को मजबूती दी गई।”पीएम मोदी ने बताया- ‘वर्ष 2013 में उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया’पीएम मोदी ने बताया कि वर्ष 2013 में उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया। उस समय देश में भ्रष्टाचार, नीतिगत जड़ता और भरोसे के संकट का माहौल था। उन्होंने लिखा, “यूपीए सरकार उस दौर में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद की मिसाल बन चुकी थी। भारत को वैश्विक मंच पर कमजोर कड़ी माना जा रहा था। लेकिन देश की जनता ने हमारे गठबंधन को पूर्ण बहुमत दिया और तीन दशक बाद किसी पार्टी को स्पष्ट जनादेश मिला।”बीते 11 वर्षों में देश ने कई ऐतिहासिक बदलाव देखेप्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बीते 11 वर्षों में देश ने कई ऐतिहासिक बदलाव देखे हैं। उन्होंने विशेष रूप से नारी शक्ति, युवा शक्ति और अन्नदाता किसानों की भूमिका को सराहा। उन्होंने लिखा, “25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है। भारत अब वैश्विक अर्थव्यवस्था में चमकता सितारा है। हमारे पास दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं हैं।” उन्होंने ‘गर्व से कहो, ये स्वदेशी है’ के नारे के साथ आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी दोहराया।प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा- ‘देश की सेवा करना मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान’अपने संदेश के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “देश की सेवा करना मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान है। यह जिम्मेदारी मुझे कृतज्ञता और उद्देश्य की भावना से भर देती है। संविधान के मूल्यों को मार्गदर्शक मानते हुए मैं ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने के लिए और अधिक मेहनत करूंगा।
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जयपुर. जयपुर के सरकारी सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू वार्ड में रविवार देर रात आग लगने से गंभीर रूप से बीमार कम से कम छह मरीजों की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी डॉ. अनुराग धाकड़ ने बताया कि जब स्टोर रूम में आग लगी, तब न्यूरो गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में 11 मरीजों का इलाज हो रहा था। उन्होंने कहा, "छह रोगियों की मौत हो गई और पांच का इलाज किया जा रहा है।" उन्होंने बताया कि आग लगने का संदिग्ध कारण ‘शॉर्ट सर्किट' माना जा रहा है।
राज्य सरकार ने सोमवार देर शाम एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुशील भाटी और ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ. अनुराग धाकड़ को उनके पदों से हटा दिया। सरकार ने मृतकों के परिजन को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने की भी घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘राजस्थान के जयपुर में एक अस्पताल में आग लगने की घटना में हुई, जान-माल की हानि अत्यंत दुखद है। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है, उनके प्रति मेरी संवेदना। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।'' केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस घटना में मरीजों की मौत पर शोक व्यक्त किया और कहा कि स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठा रहा है। डॉ. धाकड़ और एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुशील भाटी ने कहा कि आग की घटना में छह लोगों की मौत हुई है। अधिकारियों ने बताया कि मृतकों की पहचान पिंटू (सीकर निवासी), दिलीप (आंधी, जयपुर निवासी), श्रीनाथ, रुक्मिणी, खुरमा (सभी भरतपुर निवासी) और बहादुर (सांगानेर, जयपुर निवासी) के रूप में हुई है। डॉ. धाकड़ ने बताया कि आईसीयू में 11 मरीज भर्ती थे जिनमें से छह की मौत हो गई। इनमें दो महिलाएं और चार पुरुष हैं। उन्होंने कहा, ‘‘चौदह अन्य मरीजों को एक अलग आईसीयू में भर्ती कराया गया था और सभी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।'' उन्होंने बताया कि आईसीयू में भर्ती मरीजों की हालत गंभीर है। जिस आईसीयू में आग लगी वहां न्यूरो के मरीज भी भर्ती थे। जयपुर की टोंक रोड पर स्थित एसएमएस अस्पताल राज्य का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है जहां राज्य भर के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसके अलावा गंभीर रूप से बीमार मरीजों को अन्य जिलों से भी एसएमएस अस्पताल रेफर किया जाता है। जिस ट्रॉमा सेंटर में आग लगी, वह व्यस्त टोंक रोड पर मुख्य अस्पताल भवन के सामने स्थित है।
आग लगने से इमारत में अफरा-तफरी मच गई, धुआं तेजी से पूरी मंजिल पर फैल गया और मरीजों और उनके परिजनों में दहशत फैल गई। आग में कई दस्तावेज, आईसीयू उपकरण व अन्य सामान जलकर खाक हो गए। धुएं और कालिख से काली पड़ चुकी दीवारें, गर्मी में मुड़े तुड़े उपकरण और टूटे हुए शीशे आग लगने के बाद फैली भयावहता की कहानी बयां कर रहे थे। अस्पताल के कर्मचारियों और मरीजों के तीमारदारों ने मरीजों को बाहर निकाला।
यहां तक कि उन्हें उनके बिस्तरों सहित इमारत से बाहर भी पहुंचाया गया। सूचना मिलने के तुरंत बाद दमकलकर्मी मौके पर पहुंचे और लगभग दो घंटे में आग पर काबू पा लिया गया। घटनास्थल पर मौजूद वार्ड बॉय विकास ने बताया कि आग के विकराल होने से पहले उन्होंने और अन्य कर्मचारियों ने ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाया। उन्होंने कहा, ‘‘जब हमें आग की खबर मिली, तब हम ऑपरेशन थिएटर में थे, इसलिए हम तुरंत सेंटर के अंदर मौजूद लोगों को बचाने के लिए दौड़े। हम कम से कम तीन-चार मरीजों को बचाने में कामयाब रहे। हालांकि, आग की लपटें तेज होने के कारण, हम इमारत के अंदर नहीं जा सके। हमने ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाने की पूरी कोशिश की।'' विकास ने बताया कि पुलिस बाद में पहुंची, लेकिन भारी धुएं के कारण वे तुरंत इमारत में नहीं जा सके।
उन्होंने बताया, “जब दमकल की टीम पहुंची, तो पूरा वार्ड धुएं से घिरा हुआ था। दमकलकर्मियों को आग बुझाने के लिए इमारत के दूसरी तरफ की एक खिड़की तोड़नी पड़ी।” राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने स्थिति का जायजा लेने के लिए ट्रामा सेंटर का दौरा किया। पटेल और बेढ़म के वहां पहुंचने पर दो मरीजों के तीमारदारों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की और आरोप लगाया कि आग लगने के दौरान कर्मचारी भाग गए थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि अस्पताल के कर्मचारी उनके मरीजों की स्थिति के बारे में जानकारी नहीं दे पा रहे थे। वहां मौजूद एक व्यक्ति ने कहा, ‘‘हमने धुआं देखा और तुरंत कर्मचारियों को सूचित किया, लेकिन उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया। जब आग लगी, तो वे सबसे पहले भागे। अब, हमें अपने मरीजों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। हम उनकी हालत जानना चाहते हैं, लेकिन कोई हमें बता नहीं रहा है।'' मुख्यमंत्री शर्मा बाद में घटनास्थल पर पहुंचे और चिकित्सकों एवं मरीजों से बात की। उन्होंने ‘एक्स' पर लिखा, ‘‘जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में आग लगने की घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकों एवं अधिकारियों से जानकारी ली और त्वरित राहत कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मरीजों की सुरक्षा, इलाज और प्रभावित लोगों की देखभाल के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।'' जब मुख्यमंत्री शर्मा अस्पताल पहुंचे तो कुछ परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ धक्का मुक्की की। बाद में, उन्होंने अस्पताल प्रशासन और राज्य सरकार की कथित लापरवाही के खिलाफ ट्रामा सेंटर के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया। एक प्रवक्ता के अनुसार, हादसे को देखते हुए मुख्यमंत्री शर्मा ने दिल्ली का सरकारी दौरा स्थगित कर दिया। पीड़ित परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों ने बाद में ट्रामा सेंटर के बाहर फिर से धरना शुरू कर दिया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री बैरवा और मंत्री बेढम ट्रामा सेंटर में मौजूद थे। बेढ़म ने आंदोलनकारियों से बातचीत की और उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि पूरी सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है।
बेढ़म ने कहा, “मुख्यमंत्री शर्मा ने कल रात अस्पताल का दौरा किया और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। हम स्थिति पर नजर रख रहे हैं और मुख्यमंत्री के लगातार संपर्क में हैं। आंदोलनकारी परिवार के सदस्यों के साथ चर्चा हुई है। सरकार हर संभव मदद करेगी।” उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जो मदद की जाती है, वह पीड़ित परिवारों को दी जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर शाम को अस्पताल पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया।
उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। खींवसर ने कहा कि जांच कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार करना होगा, जिसके सप्ताह भर में आने की संभावना है। इसके साथ ही उन्होंने पीड़ितों को मुआवजा दिए जाने की बात भी की। राजस्थान सरकार ने ट्रामा सेंटर में आग की घटना के मामले में कार्रवाई करते हुए अस्पताल के अधीक्षक और ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी को पद से हटा दिया। इसके साथ ही एसएमएस अस्पताल में पदस्थापित अधिशाषी अभियंता मुकेश सिंघल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। वहीं अग्नि सुरक्षा (फायर सेफ्टी) के लिए नियोजित एजेंसी ‘एसके इलेक्ट्रिक कम्पनी' की निविदा निरस्त करते हुए कम्पनी के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार ने सवाई मानसिंह अस्पताल में अधीक्षक का कार्यभार डॉ. मृणाल जोशी को एवं ट्रॉमा सेंटर के अधीक्षक का कार्यभार डॉ. बीएल यादव को सौंपा है। मुख्यमंत्री शर्मा ने मृतकों के परिजन के लिए मुआवजे की घोषणा की। उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, “सवाई मानसिंह अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में आग लगने की दुखद घटना ने सभी को व्यथित किया है। सभी मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश जारी किए गए हैं।' उन्होंने कहा कि इस हृदयविदारक क्षण में प्रदेश सरकार शोकाकुल परिवारों के साथ खड़ी है। राज्य सरकार ने हादसे की जांच के लिए समिति बनाने की घोषणा की है।
इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि यह घटना हृदयविदारक है और उन्होंने राज्य सरकार से उच्च-स्तरीय जांच कराने का आग्रह किया ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। गहलोत ने अस्पताल का दौरा किया और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। राज्य के पुलिस महानिदेशक डीजीपी राजीव शर्मा ने भी अस्पताल का दौरा किया। शर्मा के अनुसार, उन्होंने जयपुर पुलिस आयुक्त को मामले की गहन जांच के लिए एफएसएल और अग्निशमन विभाग के विशेषज्ञों की विशेष टीम गठित करने का निर्देश दिया है। -
कटक. ओडिशा के कटक शहर में दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान हिंसा और उसके बाद विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कार्यकर्ताओं एवं पुलिस के बीच हुई झड़पों को लेकर तनाव व्याप्त है। हिंसा के बाद कटक में निषेधाज्ञा लागू किया गया है और सोमवार को 12 घंटे का बंद जारी है। अधिकारियों ने बताया कि कटक के 20 में से 13 थाना क्षेत्रों में रविवार रात निषेधाज्ञा जारी की गई थी। उन्होंने बताया कि किसी भी तरह की हिंसा को रोकने के लिए रविवार शाम सात बजे से 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं। दरगाहबाजार इलाके में हाथी पोखरी के पास शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात स्थानीय लोगों ने विसर्जन में तेज संगीत बजाने पर आपत्ति जताई थी जिसके बाद झड़पें हुईं। बहस जल्द ही झड़प में बदल गई और पथराव के साथ ही कांच की बोतलें भी फेंकी गईं। झड़पों में खिलाड़ी ऋषिकेश दिनयानदेव सहित छह लोग घायल हो गए।
पुलिस पर विसर्जन पर हमले को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए विहिप ने सोमवार को 12 घंटे के बंद का आह्वान किया। रविवार को बंद के समर्थन में विहिप कार्यकर्ताओं द्वारा निकाली गई मोटरसाइकिल रैली को पुलिस ने उपद्रवग्रस्त इलाके में पहुंचने पर रोक दिया, जिसके कारण फिर से हिंसा भड़क उठी। आठ पुलिसकर्मियों सहित 25 लोग घायल हो गए। गौरीशंकर पार्क इलाके में कई दुकानों में कथित तौर पर आग लगा दी गई। सुबह छह बजे शुरू हुए बंद का मिला-जुला असर रहा। सरकारी कार्यालय और शैक्षणिक संस्थान खुले रहे लेकिन उपस्थिति कम रही। बाजार और पेट्रोल पंप खुले रहे और सड़कों पर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध था, हालांकि पाबंदियों के कारण यातायात सामान्य से कम रहा। एसीपी नरसिंह भोल ने दावा किया कि सुबह से स्थिति सामान्य है। उन्होंने बताया कि कटक में राज्य पुलिस के 1,800 जवानों के साथ-साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) और ओडिशा स्विफ्ट एक्शन फोर्स के लगभग 800 जवान तैनात किए गए हैं। उन्होंने बताया कि संवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त जारी है और कटक में प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘बाहर से आने वाले लोगों को कटक शहर में प्रवेश की अनुमति नहीं है, सिवाय यहां काम करने वालों और एससीबी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल आने-जाने वाले मरीजों के। यात्री बसों को प्रवेश द्वारों पर ही रोक दिया जा रहा है। बाहर से आने वाले असामाजिक तत्वों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए शहर के सभी प्रवेश द्वारों को बंद कर दिया गया है।" एडीजी (कानून व्यवस्था) संजय कुमार ने कहा कि किसी भी अप्रिय घटना की कोई सूचना नहीं है और सभी एजेंसी को हाई अलर्ट पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारी क्षेत्र में स्थिति पर नजर रख रहे हैं और कानून को अपने हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं। -
विशाखापत्तनम. भारतीय नौसेना ने सोमवार को यहां नौसेना की गोदी में एक औपचारिक कार्यक्रम के दौरान दूसरे पनडुब्बी रोधी युद्धक, उथले पानी के जलपोत 'अन्द्रोथ' को अपने बेड़े में शामिल किया। नौसेना के अनुसार, 'अन्द्रोथ' के शामिल होने से उसकी पनडुब्बी रोधी युद्धक (एएसडब्ल्यू) क्षमताएं बढ़ जाएंगी, जिसका लाभ मुख्य रूप से तटीय और उथले पानी में होने वाले अभियानों को मिलेगा। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्वी नौसेना कमान (ईएनसी) के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वाइस एडमिरल राजेश पेंढारकर ने की। इस दौरान वरिष्ठ नौसेना अधिकारी और शिपयार्ड के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। ईएनसी की एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, "अन्द्रोथ का शामिल होना नौसेना के स्वदेशीकरण और क्षमता बढ़ाने के जारी प्रयासों में एक और बड़ा कदम है।" कोलकाता स्थित एक कंपनी द्वारा स्वदेशी रूप से निर्मित इस जलपोत के निर्माण में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी कलपुर्जों और सामग्री का उपयोग किया गया है, जो भारत की बढ़ती जहाज निर्माण शक्ति को दर्शाता है।
- नयी दिल्ली,। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को कहा कि मतदान केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज केवल उच्च न्यायालयों के साथ साझा किए जा सकते हैं। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि ऐसे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जनता के साथ साझा करना मतदाताओं की निजता का उल्लंघन है। कुमार का कहना था कि मतदान की वेबकास्टिंग फुटेज फॉर्म 17ए के समान है, जिसे उन मतदाताओं की पहचान की सुरक्षा के लिए राजनीतिक दलों के साथ साझा नहीं किया जाता है जिन्होंने मतदान किया। बिहार विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा के लिए आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल के जवाब में कुमार ने कहा कि ऐसे फुटेज संबंधित उच्च न्यायालय के साथ साझा किए जाते हैं जहां किसी विशेष चुनाव के परिणाम के खिलाफ चुनाव याचिका दायर की जाती है। चुनाव संचालन नियमों के अनुसार, फॉर्म 17ए, जिसमें मतदान केंद्र पर मतदान करने वाले मतदाताओं के नाम होते हैं, उन्हें अदालतों के अलावा किसी और के साथ साझा नहीं किया जाता है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने यह भी बताया कि बिहार के दियारा क्षेत्र में 250 मतदान केंद्रों पर गश्त के लिए पुलिस घोड़ों का इस्तेमाल करेगी, जबकि 197 मतदान केंद्रों तक पहुंचने के लिए मतदान दल नावों का इस्तेमाल करेंगे। कुमार ने बताया, "दियारा क्षेत्र में कम से कम 250 मतदान केंद्रों पर पुलिस घोड़ों के ज़रिए गश्त करेगी। इसी तरह, 197 मतदान केंद्रों पर मतदान दल नाव से यात्रा करेंगे।" बिहार विधानसभा चुनाव के लिए कुल 90,712 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे।कुमार ने मतदाताओं को बड़ी राहत की खबर देते हुए यह भी कहा कि आयोग आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतदान केंद्रों पर मोबाइल फोन जमा करने के लिए काउंटर स्थापित करेगा।
- नयी दिल्ली,। निर्वाचन आयोग (ईसी) ने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान शुरू की जाने वाली 17 नयी पहलों की सोमवार को घोषणा की, जिनमें सभी मतदान केंद्रों पर अनिवार्य ‘वेबकास्टिंग' और मोबाइल फोन जमा करने की सुविधा शामिल है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने यहां संवाददाता सम्मेलन में “बिहार फर्स्ट इनिशिएटिव्स” नामक पहलों की घोषणा की, जिन्हें चुनाव की तैयारी से लेकर मतगणना तक सभी चरणों में लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ये पहल आगामी चुनावों के दौरान सभी राज्यों में शुरू की जाएंगी। पहली बार, सभी मतदान केंद्रों के बाहर मोबाइल फोन जमा कराने के लिए काउंटर उपलब्ध होंगे। भीड़भाड़ से बचने के लिए प्रत्येक मतदान केंद्र पर मतदाताओं की संख्या भी 1,200 तक सीमित कर दी गई है।निर्वाचन आयोग मतदाताओं के सत्यापन को आसान बनाने के लिए मतदाता सूचना पर्चियां जारी करेगा जिन पर क्रम संख्या और भाग संख्या (मतदान केंद्र का विवरण) अंकित होगी। एक ‘डिजिटल प्लेटफॉर्म' ईसीआईनेट पर समय समय पर मतदान के बारे में जानकारी साझा की जाएगी और पीठासीन अधिकारी समय अंतराल को कम करने के लिए मतदान के दिन हर दो घंटे में ऐप पर मतदान डेटा अपलोड करेंगे। सभी मतदान केंद्रों पर 100 प्रतिशत ‘वेबकास्टिंग' होगी और मतदान केंद्रों के 100 मीटर के बाहर ही उम्मीदवारों के बूथ बनाने की अनुमति होगी। आयोग ने ईवीएम मतपत्रों को अधिक पठनीय बनाने के लिए दिशा-निर्देशों में भी संशोधन किया है और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में पहली बार उम्मीदवारों की रंगीन तस्वीरें होंगी। फॉर्म 17सी और ईवीएम डेटा के बीच बेमेल होने की स्थिति में वीवीपीएटी (वोटर-वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) पर्चियों की गिनती अनिवार्य होगी। जिन केंद्रों पर मतदान के अभ्यास से जुड़ा डेटा मिटाया नहीं जा सकेगा, वहां पर भी वीपीपैट पर्चियों की गिनती अनिवार्य होगी। निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर चुनाव संबंधी डेटा तक सभी हितधारकों की पहुंच को बढ़ावा देने के लिए एक प्रणाली भी उपलब्ध होगी। निर्वाचन आयोग ‘डिजिटल इंडेक्स कार्ड' और रिपोर्ट पेश करेगा। प्रारंभिक चरण में आयोग ने राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ-स्तरीय एजेंटों (बीएलए) के लिए प्रशिक्षण आयोजित किया। उन्हें मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में सहयोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं का प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत अपील के प्रावधान का उपयोग भी शामिल है। बिहार समेत देश भर के 7,000 से ज़्यादा बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) और बीएलओ सुपरवाइज़रों को नयी दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (आईआईआईडीईएम) में प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा, चुनाव के दौरान तैयारियों के लिए बिहार पुलिस के लिए विशेष सत्र भी आयोजित किए गए।बिहार में छह और 11 नवंबर को दो चरण में मतदान होंगे। मतगणना 14 नवंबर को होगी।









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