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नयी दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि सर क्रीक सेक्टर में इस्लामाबाद के किसी भी दुस्साहस का ‘‘निर्णायक जवाब'' दिया जाएगा, जो ‘‘इतिहास और भूगोल'' दोनों को बदल देगा। गुजरात के भुज में भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट एक सैन्य अड्डे पर सिंह की यह टिप्पणी विवादित क्षेत्र में पड़ोसी देश द्वारा सैन्य बुनियादी ढांचे के विस्तार की पृष्ठभूमि में आई है। रक्षा मंत्री ने सैनिकों के साथ दशहरा मनाया और इस अवसर पर ‘शस्त्र पूजा' की।
सिंह ने यह भी कहा कि भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के सभी उद्देश्यों को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है और तनाव बढ़ाकर पाकिस्तान के साथ युद्ध शुरू करना उसका उद्देश्य नहीं था। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने पाकिस्तान की हवाई रक्षा को ‘‘बेनकाब'' कर दिया तथा भारत की ‘‘निर्णायक क्षमता'' को साबित कर दिया। हालांकि, विवादित सर क्रीक क्षेत्र पर उनकी टिप्पणियों ने काफी ध्यान आकर्षित किया।उन्होंने कहा, ‘‘यदि पाकिस्तान सर क्रीक सेक्टर में कोई दुस्साहस करता है, तो जवाब इतना कड़ा होगा कि वह इतिहास और भूगोल दोनों बदल देगा।'' उन्होंने कहा, ‘‘1965 के युद्ध में भारतीय सेना ने लाहौर तक पहुंचने की क्षमता का प्रदर्शन किया था। आज 2025 में पाकिस्तान को याद रखना चाहिए कि कराची जाने का एक रास्ता इसी क्रीक से होकर गुजरता है।'' सर क्रीक गुजरात के कच्छ के रण और पाकिस्तान के बीच 96 किलोमीटर लंबा ज्वारीय मुहाना है। दोनों पक्षों द्वारा समुद्री सीमा की अलग-अलग व्याख्याओं के कारण इसे एक विवादित क्षेत्र माना जाता है। रक्षा मंत्री ने कहा कि आजादी के 78 साल बाद भी पाकिस्तान सर क्रीक सेक्टर पर ‘विवाद पैदा करता रहता है', जबकि भारत इस मुद्दे को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए बार-बार प्रयास करता रहा है। उन्होंने कहा कि सर क्रीक से सटे इलाकों में उसके सैन्य बुनियादी ढांचे का हालिया विस्तार उसकी मंशा को दर्शाता है।'' उन्होंने कहा, ‘‘सर क्रीक सेक्टर में पाकिस्तान द्वारा किए गए किसी भी दुस्साहस का निर्णायक जवाब दिया जाएगा।'' सिंह ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस सेक्टर में ‘टाइडल बर्थिंग' सुविधा और एक संयुक्त नियंत्रण केंद्र (जेसीसी) का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ये सुविधाएं एकीकृत तटीय संचालन के लिए प्रमुख सहायक के रूप में कार्य करेंगी, साथ ही संयुक्त संचालन क्षमता, तटीय सुरक्षा समन्वय और किसी भी खतरे पर त्वरित प्रतिक्रिया को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएंगी। अपने संबोधन में सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के रक्षा नेटवर्क में सेंध लगाने के पाकिस्तान के प्रयासों को सफलतापूर्वक विफल करने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने लेह से लेकर सर क्रीक तक भारत की रक्षा प्रणाली को भेदने की असफल कोशिश की। अपनी जवाबी कार्रवाई में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी वायु रक्षा प्रणाली को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया और दुनिया को यह संदेश दिया कि भारतीय सेना जब चाहे और जहां चाहे, पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।'' सिंह ने कहा कि सामर्थ्य होने के बावजूद भारत ने संयम का परिचय दिया क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य आतंकवाद का मुकाबला करना था, न कि व्यापक संघर्ष को भड़काना। उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि ऑपरेशन सिंदूर के सभी सैन्य उद्देश्य सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिए गए तथा इस बात की पुष्टि की कि आतंकवाद के विरुद्ध भारत की लड़ाई पूरे संकल्प के साथ जारी रहेगी। उन्होंने कहा, ‘‘इसे बढ़ाना और युद्ध छेड़ना ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य नहीं था। मुझे खुशी है कि भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के सभी सैन्य उद्देश्यों को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। लेकिन आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी है।'' पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारत ने सात मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसके तहत पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में आतंकियों के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। इन हमलों के बाद चार दिनों तक भीषण झड़पें हुईं, जो 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति के साथ समाप्त हुईं। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता की सराहना करते हुए सिंह ने कहा कि यह सशस्त्र बलों की एकजुटता के कारण संभव हुआ। उन्होंने सैनिकों और अधिकारियों को उनकी रणनीति, साहस और क्षमता के लिए बधाई दी, जिससे यह साबित हुआ कि भारत किसी भी परिस्थिति में अपने विरोधियों को परास्त करने में सक्षम है। सिंह ने कहा, ‘‘यह हमारे सशस्त्र बलों की एकजुटता ही थी जिसने ऑपरेशन सिंदूर को रिकॉर्ड समय में अंजाम दिया। आज इस अवसर पर, मैं ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए हमारे बहादुर सैनिकों और अधिकारियों को विशेष बधाई देना चाहता हूं।'' उन्होंने कहा, ‘‘आपकी रणनीति, आपके साहस और आपके सामर्थ्य ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत हर परिस्थिति में दुश्मन को परास्त करने में सक्षम है। मुझे पूरा विश्वास है कि आप सभी का साहस, आप सभी का पराक्रम भारत की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा करता रहेगा।'' रक्षा मंत्री ने थलसेना, वायुसेना और नौसेना को भारत की ताकत के ‘‘तीन स्तंभ'' बताया।उन्होंने कहा, ‘‘जब ये तीनों मिलकर काम करेंगी, तभी हम हर चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना कर पाएंगे।'' सिंह पिछले कई वर्षों से दशहरा पर शस्त्र पूजा करते आ रहे हैं। उन्होंने पिछली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार में केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में भी शस्त्र पूजा की थी। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लिए हथियार सिर्फ़ औज़ार नहीं हैं। हथियार सिर्फ़ शक्ति प्रदर्शन के लिए नहीं हैं बल्कि, हमारा मानना है कि हथियार धर्म की स्थापना का एक साधन हैं।'' रक्षा मंत्री ने कहा कि 'शस्त्र पूजा' महज एक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह भारत के सभ्यतागत दर्शन का प्रतिबिंब है, जहां हथियारों को धर्म का साधन माना जाता है, न कि सिर्फ हिंसा का साधन। उन्होंने भारतीय परंपरा से समानताएं बतायीं, जहां किसान अपने हल की पूजा करते हैं, छात्र अपनी पुस्तकों का और सैनिक अपने हथियारों का सम्मान करते हैं। सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि हथियारों का इस्तेमाल हमेशा न्याय और धर्म की रक्षा के लिए किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा, ‘‘ज्ञान, रक्षा शक्ति के बिना असुरक्षित है और ज्ञान के मार्गदर्शन के बिना शक्ति अराजकता का कारण बनती है। 'शास्त्र' और 'शस्त्र' का संतुलन हमारी सभ्यता को जीवंत और अजेय बनाए रखता है।'' रक्षा मंत्री ने भारत की सीमाओं पर चुनौतियों के बारे में भी बात की।उन्होंने कहा, ‘‘चुनौतियां कभी भी सरल नहीं रही हैं और वे विभिन्न रूपों में सामने आती हैं। कभी ये चुनौतियां बाहरी आक्रमण के रूप में सामने आती हैं, कभी आतंकवादी संगठनों के रूप में सामने आती हैं और आज की दुनिया में ये साइबर युद्ध और सूचना युद्ध के रूप में भी सामने आती हैं।'' विजयदशमी के अवसर पर शुभकामनाएं देते हुए सिंह ने कहा कि यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः जीत धर्म की ही होती है। उन्होंने कहा, ‘‘इस दिन शस्त्रों की पूजा भारत के राष्ट्रीय जीवन से गहराई से जुड़ी हुई है क्योंकि यह देश की सामूहिक शक्ति, सुरक्षा और स्वतंत्रता के प्रति सम्मान का प्रतीक है।'' रक्षा मंत्री ने महात्मा गांधी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि गांधीजी ने अपनी आत्मशक्ति से ही उस समय के सबसे मजबूत साम्राज्य को झुकने पर मजबूर कर दिया। सिंह ने कहा, ‘‘हमारे सैनिकों के पास मनोबल और हथियार दोनों हैं, इसलिए कोई भी चुनौती उनके संकल्प के आगे टिक नहीं सकती।'' -
इंदौर/खंडवा. मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में विजयादशमी के अवसर पर बृहस्पतिवार को दुर्गा देवी की मूर्तियों के विसर्जन के दौरान तालाब में ट्रैक्टर ट्रॉली पलटने से सात लड़कियों समेत 11 श्रद्धालुओं की डूबकर मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। सूबे के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हादसे को लेकर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर शोक जताया और अपने स्वजनों को खोने वाले परिवारों को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान करने की घोषणा की। खंडवा के जिलाधिकारी ऋषव गुप्ता ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया कि हादसा तब हुआ, जब पंधाना क्षेत्र में दुर्गा देवी की मूर्तियों को विसर्जन के लिए ले जा रही ट्रैक्टर ट्रॉली श्रद्धालुओं समेत तालाब में पलट गई। उन्होंने बताया,‘‘तालाब से 11 श्रद्धालुओं के शव निकाले गए हैं।''
जिलाधिकारी के मुताबिक मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने श्रद्धालुओं को पहले ही चेताया था कि तालाब गहरा है, लेकिन ‘अति उत्साह के कारण' श्रद्धालु नहीं माने और वे ट्रैक्टर ट्रॉली को तालाब में आगे लेकर चले गए जिससे यह वाहन गहराई में पलटकर इस जलस्त्रोत में समा गया। उन्होंने बताया कि पुलिस और प्रशासन के साथ ही राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), होम गार्ड और स्थानीय गोताखोरों की मदद से संचालित बचाव अभियान खत्म हो गया है। खंडवा के पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार राय ने बताया कि हादसे में जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं में सात लड़कियां शामिल हैं। उन्होंने बताया,‘‘हादसे के बाद 10-12 श्रद्धालुओं को तालाब से बाहर निकालकर बचा लिया गया। इनमें से तीन घायलों का इलाज किया जा रहा है।'' पंधाना की अनुविभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) दीक्षा भगोरे ने बताया कि मृतकों में आरती (18), उर्मिला (16), शर्मिला (15), किरण (16), पाटली (25), संगीता (16), चंदा (08), दिनेश (13), गणेश (20), रेवसिंह (13) और आयुष (09) शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि हादसे के वक्त ट्रैक्टर ट्रॉली में करीब 30 श्रद्धालु सवार थे।चश्मदीदों ने बताया कि इस वाहन के तालाब में गिरते ही घटनास्थल पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और लोग अपने स्वजनों की तलाश में बदहवास देखे गए। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद ग्रामीणों की भीड़ घटनास्थल पर जमा हो गई और इनमें से कई लोगों ने बचाव अभियान में मदद की। -
ब्रह्मपुर. ओडिशा के लोकप्रिय लोकनृत्य ‘कृष्ण लीला' के प्रख्यात गायक और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित गोपीनाथ स्वैन का बृहस्पतिवार को गंजम जिले के गोविंदपुर में निधन हो गया। वह 107 साल के थे। पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि स्वैन ने गोविंदपुर स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वह उम्र संबंधी स्वास्थ्य जटिलताओं से जूझ रहे थे। स्वैन को कला जगत में उल्लेखनीय योगदान के लिए 2023 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 2024 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। वह स्थानीय स्तर पर ‘गुरु' के नाम से जाने जाते थे, क्योंकि उन्होंने क्षेत्र के कई लोगों को ‘कृष्ण लीला' का प्रशिक्षण दिया था। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक, परिवहन मंत्री विभूति भूषण जेना और कई नेताओं एवं कलाकारों ने स्वैन के निधन पर शोक जताया। माझी ने कहा कि स्वैन के निधन से ओडिशा ने एक प्रसिद्ध लोक कलाकार खो दिया है।
साल 1918 में जन्मे स्वैन ने अपने पिता के बड़े भाई से 10 वर्ष की उम्र में कृष्ण लीला सीखनी शुरू की थी। शुरुआत में, वह शास्त्रीय गीत गाते थे और कृष्ण की भूमिका निभाते थे। उम्र बढ़ने के साथ, उन्होंने इस लोक कला में कुछ अन्य भूमिकाएं निभाईं और फिर लोक नृत्य के मुख्य गायक-सह-निर्देशक बन गए। स्वैन ने गांव में एक अखाड़ा (पारंपरिक नृत्य विद्यालय) की स्थापना की, जहां उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के कई युवाओं को प्रशिक्षण दिया। उनके पोते अमित स्वैन ने बताया कि वृद्धावस्था के बावजूद वह अखाड़े में जाते थे और पारंपरिक वाद्य संगीत के साथ नियमित रूप से गीतों का अभ्यास करते थे। ओडिशा के परिवहन मंत्री जेना, गंजम के जिलाधिकारी कीर्ति वासन वी, पुलिस अधीक्षक (एसपी) शुभेंदु पात्रा और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति स्वैन को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके घर पहुंचे। -
नयी दिल्ली/ हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक ‘पद्म विभूषण' से सम्मानित पंडित छन्नूलाल मिश्र का बृहस्पतिवार सुबह उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में अपनी बेटी के घर पर उम्र संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया। वह 89 वर्ष के थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर पोस्ट कर गायक के निधन पर शोक जताया है।
उन्होंने ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। वे जीवनपर्यंत भारतीय कला और संस्कृति की समृद्धि के लिए समर्पित रहे। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुंचाने के साथ ही भारतीय परंपरा को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने में भी अपना अमूल्य योगदान दिया। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे सदैव उनका स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त होता रहा। साल 2014 में वे वाराणसी सीट से मेरे प्रस्तावक भी रहे थे। शोक की इस घड़ी में मैं उनके परिजनों और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करता हूं। ओम शांति!'' छन्नूलाल की बेटी नम्रता मिश्र ने बताया, "उम्र संबंधी समस्याओं के कारण वह पिछले 17 से 18 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। आज सुबह करीब चार बजे घर पर उनका निधन हो गया।" उनके परिवार में एक बेटा और तीन बेटियां हैं। -
नयी दिल्ली.भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बृहस्पतिवार को कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक समूह (आरएसएस) ने युवाओं को अपने जीवन का हर पल मातृभूमि की सेवा में समर्पित करने के लिए प्रेरित करके राष्ट्र निर्माण में ‘‘अद्वितीय योगदान'' दिया है। वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 साल पूरे हो गए हैं। इस संगठन को सत्तारूढ़ भाजपा का वैचारिक स्रोत माना जाता है।
नड्डा ने आरएसएस को सेवा, अनुशासन और राष्ट्रीय विचारों का ‘‘प्रबल संवाहक'' बताया और असंख्य नागरिकों के लिए प्रेरणा का केंद्र बताया। उन्होंने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि समाज में राष्ट्रीय विचारों का प्रसार कर समर्थ व अखण्ड भारत निर्माण के दिव्य ध्येय के साथ लोगों को जोड़ता यह संगठन असंख्य नागरिकों के लिए प्रेरणा का केंद्र है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के इस संकल्प को लेकर 100 साल तक मां भारती की सेवा का लक्ष्य लेकर असंख्य स्वयंसेवकों ने मातृभूमि के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। नड्डा ने कहा, ‘‘सेवा, अनुशासन और राष्ट्रीय विचारों के प्रबल संवाहक, विश्व के सबसे बड़े सामाजिक व सांस्कृतिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष की कोटिश: स्वयंसेवकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं।
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नयी दिल्ली. उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 वर्ष पूरे होने पर बृहस्पतिवार को कहा कि यह संगठन धर्म, जाति या भाषा के आधार पर भेदभाव किए बिना सभी को गले लगाता है और यह विविधता में एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस ‘‘समावेशी दृष्टिकोण'' ने आरएसएस और उसके संबद्ध संगठनों को स्थायी रूप से सफल बनाया है, जिससे राष्ट्र की सर्वांगीण प्रगति हुई है। राधाकृष्णन ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि विश्व का सबसे बड़ा राष्ट्रभक्त संगठन 100 वर्ष का हो चुका है। संघ का सबसे बड़ा योगदान ऐसे आत्मानुशासित और उत्तरदायी नागरिक हैं, जो सशक्त समाज की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि 1925 में केशव बलिराम हेडगेवार जी द्वारा स्थापित किए जाने के बाद से, संघ ने युवाओं को मजबूत आंतरिक चरित्र निर्माण और निस्वार्थ भाव से समाज सेवा करने के लिए प्रेरित किया है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि ‘सेवा परमो धर्मः' के आदर्श से प्रेरित स्वयंसेवकों को चाहे बाढ़, अकाल, भूकंप या अन्य किसी भी आपदा का सामना करना पड़े, वे बिना किसी अपेक्षा या आदेश की प्रतीक्षा के, संगठित होकर पीड़ितों की सेवा करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह निस्वार्थ सेवा राष्ट्र के लिए एक अद्वितीय और अमूल्य उपहार है।''
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सेवा करते हुए कभी धर्म, जाति या भाषा के आधार पर भेदभाव नहीं करता। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं, जब भारत विश्व की सर्वोच्च शक्ति के रूप में स्थापित होगा। उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘इस महान यात्रा में संघ की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण रही है और समय के साथ उसकी यह प्रेरक भूमिका निरंतर बनी रहेगी।'' उन्होंने कहा, ‘‘संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर मैं समाज की सेवा में उसके निरंतर योगदान और राष्ट्रीय एकता, सद्भाव और प्रगति के महान उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। -
नागपुर. पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बृहस्पतिवार को इस बात पर अफसोस जताया कि ‘‘अच्छे लोग'' राजनीति से दूरी बनाए हुए हैं और उन्होंने युवाओं से देश के राजनीतिक परिदृश्य का हिस्सा बनने का आह्वान किया। यहां रेशमबाग मैदान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की वार्षिक विजयादशमी रैली को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गांधीजी संघ की कार्यप्रणाली में जातिगत भेदभाव नहीं होने से बहुत प्रभावित थे। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि आरएसएस सामाजिक समानता और एकता के लिए जाना जाता है और ‘एक मंदिर, एक कुआं, एक श्मशान' जैसे प्रयासों से विभाजनकारी प्रवृत्तियों को जड़ से उखाड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘यह सराहनीय है कि संघ द्वारा सद्भाव की भावना से समाज सेवा और परिवर्तन की कई परियोजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। देश भर के गरीब इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य और जन जागरूकता बढ़ाने के लिए स्वयंसेवकों का कार्य विशेष रूप से सराहनीय है।'' कोविंद ने कहा कि महात्मा गांधी भी आरएसएस के कामकाज में सद्भाव, समानता और जाति-आधारित भेदभाव नहीं होने से बहुत प्रभावित थे। उन्होंने कहा, ‘‘इसका विस्तृत विवरण महात्मा गांधी की संग्रहित रचनाओं में उपलब्ध है। गांधीजी ने 16 सितंबर, 1947 को दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की रैली को संबोधित किया था। उस संबोधन में गांधीजी ने वर्षों पहले इसके संस्थापक डॉ. हेडगेवार के जीवनकाल में आरएसएस के एक शिविर में अपनी यात्रा का उल्लेख किया था।'' पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि उस यात्रा के दौरान, गांधीजी आरएसएस शिविर में अनुशासन, सादगी और छुआछूत की भावना बिल्कुल नहीं होने से बहुत प्रभावित हुए थे। कोविंद ने कहा, ‘‘जनवरी 1940 में, महाराष्ट्र के सतारा जिले के कराड शहर में आरएसएस शाखा में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का दौरा, आरएसएस की समावेशी दृष्टि और सद्भावनापूर्ण दृष्टिकोण का ऐतिहासिक प्रमाण है।'' कोंविद ने कहा कि संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार और डॉ. भीमराव आंबेडकर ने उनके जीवन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने खेद जताते हुए कहा कि ‘‘अच्छे लोग'' राजनीति में शामिल नहीं हो रहे हैं। उन्होंने युवाओं से राजनीति का हिस्सा बनने की अपील की। कोविंद ने बताया कि वह ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक' शीर्षक से एक पुस्तक लिख रहे हैं।
यह रैली ऐसे समय में हुई जब आरएसएस अपना शताब्दी वर्ष भी मना रहा है। आरएसएस की स्थापना 1925 में दशहरा (27 सितंबर) के दिन नागपुर में महाराष्ट्र के एक चिकित्सक केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। -
नागपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने बृहस्पतिवार को कहा कि अपने शताब्दी वर्ष के दौरान, आरएसएस पूरे भारत में व्यक्तित्व निर्माण के कार्य का प्रसार करने का प्रयास करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि सामाजिक परिवर्तन के लिए उसकी 'पंच परिवर्तन' पहल को सभी वर्गों द्वारा स्वीकार किया जाए। आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में नागपुर में विजयादशमी पर अपने वार्षिक संबोधन में उन्होंने कहा कि पांच सूत्री 'पंच परिवर्तन' कार्यक्रम का उद्देश्य सामाजिक आचरण में क्रमिक परिवर्तन लाना है। भागवत ने बताया कि 'पंच परिवर्तन' पहल सामाजिक सद्भाव, पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, आत्म-सम्मान और आत्मनिर्भरता तथा कानूनी, नागरिक और संवैधानिक कर्तव्यों के पालन पर केंद्रित है। उन्होंने कहा, "अपने शताब्दी वर्ष के दौरान, आरएसएस देश भर में व्यक्तित्व निर्माण के अपने कार्य का विस्तार करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि पंच परिवर्तन कार्यक्रम, जिसका उद्देश्य सामाजिक आचरण में क्रमिक परिवर्तन लाना है, स्वयंसेवकों द्वारा स्थापित उदाहरणों के माध्यम से सभी वर्गों द्वारा अपनाया जाए।" भागवत ने कहा कि आरएसएस स्वयंसेवकों के अलावा अन्य संगठन और व्यक्ति भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं और संघ के स्वयंसेवक उनका समन्वय और सहायता करने का प्रयास कर रहे हैं। आरएसएस नेता ने कहा कि विश्व इतिहास में समय-समय पर भारत ने एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में कार्य किया है, तथा एक 'वैश्विक धर्म' प्रदान किया है जो लोगों के जीवन में संयम और अनुशासन की भावना पैदा करता है। उन्होंने कहा, "हमारे पूर्वजों ने इस ज़िम्मेदारी को पूरा करने के लिए भारत में रहने वाले विविध समाज को एक राष्ट्र के रूप में संगठित किया।" भागवत ने कहा कि हिंदू समाज 'वसुधैव कुटुम्बकम' (विश्व एक परिवार है) के महान विचार का संरक्षक है। उन्होंने कहा, "आइये, हम सब मिलकर वर्तमान समय, स्थान और परिस्थितियों के अनुरूप एक बार फिर विश्व में भारत की इस सच्ची पहचान को स्थापित करें।
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नागपुर/ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत के पड़ोस में अशांति को सरकारों और समाजों के बीच दूरी और सक्षम प्रशासकों की कमी से जोड़ते हुए आगाह किया कि भारत में ऐसी अशांति पैदा करने की चाहत रखने वाली ताकतें देश के अंदर और बाहर दोनों जगह सक्रिय हैं। उन्होंने ‘स्वदेशी' और ‘स्वावलंबन' की वकालत की और इस बात पर ज़ोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक संबंध भारत की शर्तों पर होने चाहिए, न कि किसी मजबूरी के कारण। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी शुल्क (टैरिफ) भारत के लिए कोई चुनौती नहीं बनेंगे। यहां रेशिमबाग में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की वार्षिक विजयादशमी रैली को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद अन्य देशों की प्रतिक्रियाओं से भारत के साथ उनकी मित्रता के स्वरूप और प्रगाढ़ता का पता चला। यह रैली ऐसे समय में हुई जब आरएसएस अपना शताब्दी वर्ष भी मना रहा है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद थे। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी उपस्थित रहे। भागवत ने महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनकी जयंती दो अक्टूबर को मनाई जाती है। उन्होंने कहा, ‘‘स्वतंत्रता संग्राम में गांधीजी का योगदान अद्वितीय है, जबकि शास्त्री जी का जीवन और समय, समर्पण तथा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। वे व्यक्तिगत और राष्ट्रीय चरित्र के ऐसे उदाहरण हैं जिनका हमें अनुकरण करना चाहिए।'' उन्होंने श्रीलंका, बांग्लादेश में अशांति और नेपाल में ‘जेन जेड' प्रदर्शन पर चिंता जताते हुए कहा कि असंतोष का स्वाभाविक और तात्कालिक कारण सरकार और समाज के बीच दूरी तथा योग्य एवं जनोन्मुखी प्रशासकों का अभाव है। संघ प्रमुख ने कहा, ‘‘भारत में ऐसी अशांति फैलाने की चाह रखने वाली ताकतें देश के अंदर और बाहर दोनों जगह सक्रिय हैं। असंतोष के स्वाभाविक और तात्कालिक कारण सरकार और समाज के बीच का विच्छेद और योग्य एवं जनोन्मुखी प्रशासकों का अभाव हैं। हालांकि, हिंसा में वांछित परिवर्तन लाने की शक्ति नहीं होती।'' उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज केवल लोकतांत्रिक तरीकों से ही इस तरह का परिवर्तन प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी हिंसक परिस्थितियों में इस बात की आशंका रहती है कि दुनिया की प्रमुख शक्तियां अपना खेल खेलने के अवसर तलाशने की कोशिश करें। भागवत ने कहा कि भारत अपने पड़ोसियों से संस्कृति और नागरिकों के बीच दीर्घकालिक संबंधों के माध्यम से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘एक तरह से वे हमारे अपने परिवार का हिस्सा हैं। इन देशों में शांति, स्थिरता, समृद्धि और सुख-सुविधा सुनिश्चित करना, इन देशों के साथ हमारे स्वाभाविक जुड़ाव से उपजी आवश्यकता है, जो हमारे हितों की रक्षा से कहीं आगे है।'' भागवत ने स्वदेशी और स्वावलंबन पर जोर देते हुए कहा कि वैश्विक परस्पर निर्भरता एक बाध्यता नहीं बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा अपनाई गई शुल्क नीति पूरी तरह से उनके अपने हितों पर आधारित है और यह भारत के लिए कोई चुनौती नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया परस्पर निर्भरता के माध्यम से संचालित होती है। ‘आत्मनिर्भर' बनकर और वैश्विक एकता के प्रति जागरूक होकर हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह वैश्विक परस्पर निर्भरता हमारे लिए बाध्यता न बने और हम अपनी इच्छा के अनुसार कार्य करने में सक्षम हों। स्वदेशी और स्वावलंबन का कोई विकल्प नहीं है।'' भागवत ने कहा कि हिंदू समाज की शक्ति और चरित्र एकता की गारंटी देते हैं।
भागवत ने कहा, ‘‘हिंदू समाज एक जिम्मेदार समाज है। यहां ‘हम' और ‘वे' का विचार कभी नहीं रहा। एक विभाजित समाज टिक नहीं सकता और हर व्यक्ति अपने आप में अनोखा है। आक्रमणकारी आए और गए, लेकिन हमारी जीवन-पद्धति कायम रही। हमारी अंतर्निहित सांस्कृतिक एकता ही हमारी शक्ति है।'' संघ प्रमुख ने कहा कि प्रयागराज में महाकुंभ आस्था और एकता का प्रतीक था। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर' का हवाला देते हुए कहा कि आतंकवादियों ने सीमा पार कर जम्मू कश्मीर के पहलगाम में धर्म पूछकर 26 भारतीयों की हत्या कर दी, जिस पर भारत ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इस हमले से देश में भारी पीड़ा और आक्रोश फैला तथा भारत ने इसका करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘‘इस हमले से देश का हर व्यक्ति व्यथित हो गया। हमारी सरकार ने पूरी तैयारी की और इसका कड़ा जवाब दिया। इसके बाद नेतृत्व का दृढ़ संकल्प, हमारे सशस्त्र बलों का पराक्रम और समाज की एकता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।'' आरएसएस प्रमुख ने कहा कि एक देश को मित्रों की जरूरत होती है लेकिन उसे अपने आसपास के माहौल के प्रति भी सतर्क रहना चाहिए। भागवत ने कहा, ‘‘हमारे दूसरे देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध हैं और आगे भी इन्हें बनाए रखेंगे, लेकिन जब बात हमारी सुरक्षा की आती है तो हमें ज़्यादा सावधान, ज़्यादा सतर्क और मजबूत होने की जरूरत है। पहलगाम हमले के बाद विभिन्न देशों के रुख से यह भी पता चला कि उनमें से कौन हमारे मित्र हैं और किस हद तक।'' भागवत ने कहा कि नक्सलियों ने कुछ इलाकों में शोषण, अन्याय और विकास की कमी का फायदा उठाया था, लेकिन अब ये बाधाएं दूर हो गई हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इन इलाकों में न्याय, विकास, सद्भावना, सहानुभूति और सद्भाव सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना की आवश्यकता है।'' आरएसएस प्रमुख ने कहा कि देश को वैश्विक नेता बनाने के लिए नागरिकों में उत्साह है, लेकिन मौजूदा आर्थिक प्रणाली की खामियां वैश्विक स्तर पर उजागर हो रही हैं, जिनमें बढ़ती असमानता और आर्थिक शक्ति का केंद्रीकरण शामिल है। भागवत ने जलवायु परिवर्तन पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, ‘‘दक्षिण-पश्चिम एशिया की संपूर्ण जल आपूर्ति हिमालय से आती है। हिमालय में इन आपदाओं का आना भारत और दक्षिण एशिया के अन्य देशों के लिए खतरे की घंटी मानी जानी चाहिए। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुरुवार को विजयादशमी पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन की सराहना की। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत का संबोधन प्रेरणादायक है, जिससे पूरे विश्व को फायदा होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “संघचालक डॉ. मोहन भागवत का प्रेरणादायक संबोधन, जिसमें उन्होंने राष्ट्र निर्माण में आरएसएस के समृद्ध योगदान पर प्रकाश डाला व हमारी भूमि में गौरव की नई ऊंचाइयों को हासिल करने की अंतर्निहित क्षमता पर बल दिया, जिससे संपूर्ण विश्व को लाभ होगा।”
इससे पहले, नागपुर के ऐतिहासिक रेशमबाग मैदान में शताब्दी समारोह में बोलते हुए, मोहन भागवत ने राष्ट्र के लिए संघ के दृष्टिकोण और लक्ष्यों को पेश किया व समाज से ऐसा ‘आदर्श’ बनाने का आग्रह किया जो साथी नागरिकों को भारत की प्रगति में योगदान देने के लिए प्रेरित कर सके। उन्होंने कहा कि भारत को एक महाशक्ति के रूप में उभरने के लिए, व्यक्तिगत और राष्ट्रीय चरित्र, दोनों को मजबूत करना होगा। संघ शाखाओं की भूमिका की व्याख्या करते हुए भागवत ने कहा कि वे मूल्यों और अनुशासन को बढ़ावा देने वाले दैनिक कार्यक्रमों के माध्यम से राष्ट्रीय पहचान और गौरव का संचार करते हैं।मोहन भागवत ने कहा कि शताब्दी वर्ष में आरएसएस का लक्ष्य ‘व्यक्ति निर्माण’ के कार्य को पूरे देश में विस्तार देना है, जिसमें ‘पंच परिवर्तन’ पहल को स्वयंसेवकों के उदाहरणों के माध्यम से समाज के सभी वर्गों की ओर से अपनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘पंच परिवर्तन’ के मूल्य सामाजिक समरसता, पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, आत्म-सम्मान और आत्मनिर्भरता व कानूनी, नागरिक और संवैधानिक कर्तव्यों के पालन पर केंद्रित हैं। भागवत ने पड़ोसी देशों में बढ़ती अस्थिरता पर भी चिंता व्यक्त की और व्यापक जन असंतोष के कारण श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में हुए शासन परिवर्तनों का हवाला दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी घटनाएं भारत के भीतर सतर्कता और आत्मनिरीक्षण की मांग करती हैं। - नयी दिल्ली. देश के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश से तापमान काबू में रहने के बीच सितंबर महीने में बिजली की खपत 3.21 प्रतिशत बढ़कर 145.91 अरब यूनिट (बीयू) हो गई। इस महीने में बिजली की अधिकतम मांग 229.15 गीगावाट थी, जो सरकारी अनुमानों से काफी कम थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2024 में बिजली की खपत 141.36 अरब यूनिट दर्ज की गई थी।विशेषज्ञों ने कहा कि बिजली की खपत में मामूली वृद्धि की वजह अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश के कारण तापमान में आई नरमी रही। सरकारी सूत्रों ने पहले कहा था कि देश में सितंबर तक बिजली की अधिकतम मांग 277 गीगावाट के स्तर तक रहेगी। लेकिन सितंबर में एक दिन में बिजली की अधिकतम मांग 229.15 गीगावाट ही रही, जो सितंबर 2024 के 230.60 गीगावाट की तुलना में मामूली रूप से कम है। मई 2024 में बिजली की अधिकतम मांग लगभग 250 गीगावाट के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू गई थी। पिछली सर्वकालिक उच्चतम 243.27 गीगावाट बिजली की मांग सितंबर 2023 में दर्ज की गई थी। हालांकि, इस साल गर्मियों के दौरान जून में बिजली की अधिकतम मांग का रिकॉर्ड 242.77 गीगावाट था।विशेषज्ञों ने कहा कि तापमान के स्तर में नरमी के कारण अक्टूबर में भी बिजली की मांग और खपत कम रहने की संभावना है, जिससे एयर कंडीशनर एवं कूलर जैसे उपकरणों का उपयोग कम होगा। चार महीने का मानसून सत्र 30 सितंबर को समाप्त हो गया। हालांकि भारतीय मौसम विभाग ने अक्टूबर में सामान्य से 15 प्रतिशत अधिक वर्षा होने का अनुमान लगाया है।
- नयी दिल्ली. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में 313 दिव्यांग बच्चों को गोद लिया गया, जिनमें से 83 घरेलू और 230 अंतर-देशीय दत्तक ग्रहण थे। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब केंद्रीय दत्तक-ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) ने राष्ट्रीय दत्तक ग्रहण जागरूकता माह 2025 से पहले जागरूकता गतिविधियां शुरू की हैं। राष्ट्रीय दत्तक ग्रहण जागरूकता माह आधिकारिक तौर पर नवंबर में मनाया जाता है, जिसका जोर दिव्यांग बच्चों को गोद लेने पर है। बयान में कहा गया है कि इस वर्ष अभियान का ध्यान दिव्यांग बच्चों के ‘‘गैर-संस्थागत पुनर्वास'' पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य गोद लेने को प्रोत्साहित करना, गलत धारणाओं को तोड़ना और गोद लेने से बच्चों और परिवारों को मिलने वाली खुशी को रेखांकित करना है। माईगव इंडिया के सहयोग से, सीएआरए ने एक राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन अभियान शुरू किया है, जिसमें पोस्टर बनाने की प्रतियोगिताएं, प्रतिज्ञा लेना, शुभंकर बनाना, माता-पिता और गोद लिए गए बच्चों द्वारा साझा की गई गोद लेने की कहानियां और गोद लेने की प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए विचारों को प्रस्तुत करना शामिल है। गोद लिए गए बच्चों और घर का इंतजार कर रहे बच्चों के सम्मान में एक विशेष अभियान लोगो और हैशटैग ‘‘एवरीचाइल्डमैटर्स'' शुरू किया गया है। इसमें कहा गया है कि लद्दाख, असम, मिजोरम, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, मध्य प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, सिक्किम और हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेश जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के लिए तैयार हैं।
- बेंगलुरु. प्रसिद्ध इतिहासकार और लेखक रामचंद्र गुहा को 2025 के ‘महात्मा गांधी सेवा पुरस्कार-कर्नाटक' के लिए चुना गया है। राज्य सरकार ने बुधवार को यह घोषणा की। एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रारंभ किया गया यह पुरस्कार प्रतिवर्ष उन व्यक्तियों और संस्थाओं को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने समाज में महात्मा गांधी के जीवन मूल्यों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। गांधी जयंती के उपलक्ष्य में, कर्नाटक सरकार राज्य भर में कई कार्यक्रम आयोजित कर रही है, जिनमें लोगों, स्कूलों और कॉलेजों की सक्रिय भागीदारी होगी। विज्ञप्ति में कहा गया है कि लोगों के बीच गांधीवादी दर्शन और मूल्यों के प्रसार में ‘उत्कृष्ट भूमिका' के लिए गुहा को इस वर्ष के पुरस्कार के लिए चुना गया है। गुहा की प्रमुख कृतियों में शामिल हैं: ‘इंडिया आफ्टर गांधी', ‘ए कॉर्नर ऑफ ए फॉरेन फील्ड‘, ‘गांधी बिफोर इंडिया', ‘गांधी: द इयर्स दैट चेंज्ड द वर्ल्ड' और ‘द अनक्वाइट वुड्स'। उनकी दो खंडों वाली गांधी जीवनी का कन्नड़ सहित कई भाषाओं में अनुवाद किया गया है।
- नयी दिल्ली. भारतीय रेलवे ‘‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड'' दृष्टिकोण के तहत बोगी, डिब्बों, इंजन और प्रणोदन प्रणालियों सहित महत्वपूर्ण रेलवे उपकरणों के वैश्विक निर्यातक के रूप में तेजी से उभर रहा है। रेल मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि करीब 16 देशों में बढ़ता निर्यात भारत की डिजाइन, विकास और विश्व को आपूर्ति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मंत्रालय की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘भारत के रेलवे उत्पाद तेजी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना स्थान बना रहे हैं। मेट्रो ट्रेन के डिब्बे ऑस्ट्रेलिया और कनाडा को निर्यात किए गए हैं; बोगी ब्रिटेन, सऊदी अरब, फ़्रांस और ऑस्ट्रेलिया को; प्रणोदन प्रणालियाँ फ़्रांस, मेक्सिको, रोमानिया, स्पेन, जर्मनी और इटली को; यात्री डिब्बे मोजाम्बिक, बांग्लादेश और श्रीलंका को; तथा रेल इंजन मोजाम्बिक, सेनेगल, श्रीलंका, म्यांमा, बांग्लादेश एवं गिनी गणराज्य को निर्यात किए गए हैं।'' विज्ञप्ति के मुताबिक जून में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार के मढ़ौरा लोकोमोटिव विनिर्माण संयंत्र से गिनी गणराज्य को निर्यात के लिए पहले इंजन को हरी झंडी दिखाई थी और तब से अबतक छह इंजन सफलतापूर्वक गिनी गणराज्य को निर्यात किये जा चुके हैं।
- नयी दिल्ली. संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के अध्यक्ष अजय कुमार ने बुधवार को कहा कि किसी भी सरकारी नौकरी की भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थियों द्वारा धोखाधड़ी और फर्जी प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल करना ‘‘अस्वीकार्य'' है और इससे उनके करियर को दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है। अपनी तरह के पहले वर्चुअल संवाद कार्यक्रम में, उन्होंने अभ्यर्थियों से ‘‘उस रास्ते पर जाने'' से बचने को कहा जो कड़ी कार्रवाई का कारण बने, जिसमें यूपीएससी द्वारा आयोजित किसी भी परीक्षा में तीन साल तक शामिल होने पर रोक भी शामिल है। कुमार ने कहा, ‘‘यूपीएससी की परीक्षाओं में, धोखाधड़ी बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। इस मामले में हमारी नीति कतई बर्दाश्त न करने की है और अगर ऐसा कुछ भी होता है, तो हम कड़ी कार्रवाई करेंगे।'' यूपीएससी प्रमुख ने कार्यक्रम के दौरान विभिन्न मुद्दों पर बात की, जिनमें सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करने में कोचिंग सेंटर की उपयोगिता और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की पूर्व परिवीक्षाधीन पूजा खेडकर द्वारा फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल का मुद्दा भी शामिल था। केंद्र ने पिछले साल खेडकर को भारतीय प्रशासनिक सेवा से बर्खास्त कर दिया था, क्योंकि उन्होंने गलत तरीके से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और दिव्यांगता आरक्षण का लाभ उठाकर अपना चयन सुनिश्चित किया था। कुमार ने कहा, ‘‘किसी भी तरह की धोखाधड़ी, चाहे आप किसी परीक्षा में नकल करते हुए पकड़े जाएं या आप कोई फर्जी प्रमाण पत्र पेश करें या अपनी जन्मतिथि में हेरफेर करें... नियमों और विनियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।'' यूपीएससी प्रमुख ने कहा, ‘‘अगर धोखाधड़ी की जाती है, तो आपराधिक प्राथमिकी दर्ज होती है और आपराधिक कार्रवाई की जाती है। और, आप देखिए कि पूजा खेडकर के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इसलिए, मैं यह कहना चाहूंगा कि अगर कोई ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।'' कुमार ने कहा, ‘‘हमने परीक्षा केंद्र में प्रवेश के दौरान चेहरे की पहचान के माध्यम से प्रवेश की अनुमति लागू की है।'' उन्होंने कहा कि आयोग अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों की प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए डिजिलॉकर के माध्यम से प्रमाण पत्र लेने की योजना बना रहा है। उन्होंने भर्ती परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग की उपयोगिता पर भी विस्तार से चर्चा की।कुमार ने कहा, ‘‘कोचिंग का मुद्दा बहुत बड़ा है। सबसे पहले, मैं यह कहना चाहूंगा कि यूपीएससी (परीक्षा) में सफलता के लिए कोचिंग अनिवार्य नहीं है।'' कुमार ने कहा कि अभ्यर्थियों की आयु सीमा या विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के लिए मिलने वाले अवसरों की संख्या निर्धारित करने के वास्ते ‘कट-ऑफ' तिथि में बदलाव का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘अवसरों (अटेम्प्ट) की संख्या को लेकर कई विचार हैं। कुछ का कहना है कि इसे बढ़ाया जाना चाहिए। कुछ का कहना है कि इसे कम किया जाना चाहिए... हमारे समक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है, न ही हमारे पास ऐसा कोई विचार है।'' उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सिविल सेवा परीक्षा में ज्यादातर इंजीनियरिंग छात्र, जो उत्तीर्ण हो रहे हैं, वे मानविकी विषय चुन रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा में सफल होने वाले ज्यादातर इंजीनियर गैर-इंजीनियरिंग विषयों को चुनते हैं। उन्होंने उन सवालों का जवाब देते हुए यह बात कही, जिनमें कहा गया था कि सिविल सेवा परीक्षा इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से आने वालों के लिए ज्यादा अनुकूल है।
- नयी दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) बृहस्पतिवार को अपने 100 साल पूरे करने वाला है और अपनी स्थापना के बाद से इसने सबसे बड़ा सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन बनने तक एक लंबा सफर तय किया है। 1925: डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 27 सितंबर को आरएसएस की स्थापना की।1926: 17 अप्रैल को संगठन को ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' नाम मिला जब हेडगेवार के अनुयायियों के एक छोटे समूह ने चार प्रस्तावित नामों में से इस नाम को सबसे ज्यादा वोट दिए। 1926: पहली नित्य शाखा नागपुर में 28 मई से शुरू हुई।1927: पदाधिकारियों का पहला प्रशिक्षण शिविर मई में शुरू हुआ जिसमें 17 प्रतिभागी शामिल हुए।1928: मार्च में पहले प्रतिज्ञा समारोह में 99 स्वयंसेवक शामिल हुए।1929: नवंबर में हुई दो दिवसीय बैठक में हेडगेवार को आरएसएस सरसंघ चालक, बालाजी हुद्दार को सरकार्यवाह और मार्तंडराव जोग को सरसेनापति नियुक्त किया गया। 1930: कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। हेडगेवार ने सभी शाखाओं को 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने का निर्देश दिया। हेडगेवार ने कई स्वयंसेवकों के साथ जंगल सत्याग्रह में भाग लिया और गिरफ्तार हुए। खाकी टोपी के स्थान पर काली टोपी को आरएसएस के गणवेश के हिस्से के रूप में अपनाया गया। 1940: ब्रिटिश सरकार ने संघ गणवेश और रूट मार्च पर प्रतिबंध लगा दिया। हिंदी और मराठी प्रार्थना के स्थान पर संस्कृत प्रार्थना शुरू की गई। हेडगेवार का 21 जून को निधन हो गया। माधव सदाशिव गोलवलकर को तीन जुलाई को आरएसएस का दूसरा सरसंघचालक नियुक्त किया गया। 1947: आरएसएस स्वयंसेवकों ने केन्या में भारतीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। ‘ऑर्गनाइजर' और ‘पांचजन्य' साप्ताहिक पत्रिकाएं शुरू की गईं। 1948: 30 जनवरी को महात्मा गांधी की हत्या के बाद आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया गया। तत्कालीन आरएसएस प्रमुख माधव सदाशिव गोलवलकर और हजारों स्वयंसेवकों को गिरफ्तार कर लिया गया। 1949: सरकार ने 12 जुलाई 1949 को प्रतिबंध हटा लिया। संघ का संविधान तैयार किया गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की स्थापना की गई। 1950: आरएसएस की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था, अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की पहली बैठक मार्च में हुई। पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों की मदद के लिए वास्तुहारा सहायता समिति की स्थापना की गई। 1952: गोरक्षा आंदोलन का प्रारंभ। वनवासी कल्याण आश्रम प्रारंभ। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में भारतीय जनसंघ की स्थापना। 1954: दादरा नगर हवेली को पुर्तगालियों के कब्जे से मुक्त कराने में स्वयंसेवकों ने मदद की।1955: गोवा मुक्ति संग्राम में स्वयंसेवकों की प्रभावी सहभागितता। भारतीय मजदूर संघ की स्थापना।1963: 26 जनवरी को दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में आमंत्रण मिलने पर लगभग 3000 आरएसएस स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश और बैंड के साथ भाग लिया। 1964: विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की स्थापना हुई।1973: पांच जून को माधव सदाशिव गोलवलकर का निधन हो गया। छह जून को बालासाहब देवरस तृतीय सरसंघचालक बने।1975: इंदिरा गांधी सरकार ने 25 जून को आपातकाल लागू कर दिया। चार जुलाई को आरएसएस पर दूसरी बार प्रतिबंध लगा दिया गया। बालासाहब को गिरफ्तार कर लिया गया। आपातकाल के विरुद्ध संघर्ष हेतु अखिल भारतीय लोक संघर्ष समिति की स्थापना की गई। 1977: भारतीय जनसंघ का नवगठित जनता पार्टी में विलय हो गया और वह सत्ता में आई। सरकार ने 22 मार्च को संघ पर से प्रतिबंध हटा लिया। जयप्रकाश नारायण ने 3 नवंबर को पटना में आरएसएस की बैठक को संबोधित किया। 1978: दीनदयाल शोध संस्थान की स्थापना हुई।1980: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का गठन हुआ।1981: संस्कार भारती की स्थापना हुई।1992: अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद 10 दिसंबर को केंद्र ने आरएसएस पर तीसरी बार प्रतिबंध लगा दिया। 1993: सरकार द्वारा नियुक्त न्यायाधिकरण ने चार जून को संघ पर प्रतिबंध को गलत ठहराते हुए इसे निरस्त किया। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद का गठन। 1994: 11 मार्च प्रो. राजेंद्र सिंह उर्फ रज्जूभैय्या सरसंघचालक घोषित हुए। संघ के अखिल भारतीय सेवा विभाग का प्रारंभ। लघु उद्योग भारती का गठन। 1998: भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने केंद्र में सरकार बनाई, जिसके प्रधानमंत्री आरएसएस के पूर्व प्रचारक अटल बिहारी वाजपेयी थे। 2000: के.एस. सुदर्शन को 11 मार्च को आरएसएस का पांचवां सरसंघचालक नियुक्त किया गया।2009: के.एस. सुदर्शन ने डॉ. मोहन भागवत को संघ का अगला सरसंघचालक नियुक्त किया। सुरेश भैयाजी जोशी संघ के सरकार्यवाह चुने गए। 2016: आरएसएस ने स्वयंसेवकों की वर्दी के लिए खाकी निकर की जगह भूरे रंग की पतलून को अपनाया।2021: दत्तात्रेय होसबोले आरएसएस के सरकार्यवाह चुने गए।
- मुंबई. रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने गौतम अदाणी को पीछे छोड़ते हुए वर्ष 2025 में सबसे अमीर भारतीय का अपना खिताब दोबारा हासिल कर लिया है। बुधवार को प्रकाशित देश के सबसे अमीर लोगों की सूची में यह जानकारी दी गई। 'एम3एम हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025' के मुताबिक, 68 वर्षीय अंबानी की संपत्ति इस साल भले ही छह प्रतिशत घटकर 9.55 लाख करोड़ रुपये रह गई है लेकिन वह सबसे अमीर भारतीय बन गए हैं। अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी 8.14 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ दूसरे स्थान पर आ गए हैं।पिछले साल अदाणी ने अंबानी को पीछे छोड़कर पहला स्थान हासिल किया था। उनके समूह के शेयरों ने अमेरिकी निवेश फर्म हिंडनबर्ग के आरोपों से हुए नुकसान की भरपाई कर ली थी जिससे उनकी संपत्ति 95 प्रतिशत उछलकर 11.6 लाख करोड़ रुपये हो गई थी। एचसीएल की चेयरपर्सन रोशनी नादर मल्होत्रा 2.84 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ सूची में तीसरे स्थान पर हैं। साइरस पूनावाला और उनका परिवार 2.46 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित संपत्ति के साथ चौथे स्थान पर रहे जबकि कुमार मंगलम बिड़ला 2.32 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित संपत्ति के साथ पांचवें स्थान पर रहे। सूची में शामिल अमीरों की कुल संपत्ति 167 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है, जो भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग आधा है। इस सूची में 1,000 करोड़ रुपये की संपत्ति वाले कुल 1,687 व्यक्ति शामिल हैं जो पिछले साल के मुकाबले 284 अधिक है। सूची में 148 लोग पहली बार शामिल हुए हैं। हुरुन ने कहा कि भारत में पिछले दो साल से हर हफ्ते एक व्यक्ति अरबपति बना है और इस सूची में शामिल लोगों की संपत्ति में हर दिन औसतन 1,991 करोड़ रुपये का इजाफा हो रहा है। एआई सर्च इंजन परप्लेक्सिटी के संस्थापक 31 वर्षीय अरविंद श्रीनिवास 21,190 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ इस सूची में पहली बार शामिल हुए हैं। वह सूची में शामिल 350 अरबपतियों में सबसे कम उम्र के व्यक्ति हैं। नीरज बजाज और उनके परिवार की संपत्ति 43 प्रतिशत बढ़कर 2.33 लाख करोड़ रुपये हो गई, जिससे वे चार पायदान ऊपर चढ़कर छठे सबसे अमीर भारतीय बन गए हैं। ई-कॉमर्स मंच जेप्टो के सह-संस्थापक आदित पलिचा और कैवल्य वोहरा भी युवा अरबपतियों की सूची में शामिल हैं। वोहरा और पलिचा की कुल संपत्ति क्रमशः 4,480 करोड़ रुपये और 5,380 करोड़ रुपये है। हुरुन इंडिया के संस्थापक और मुख्य शोधकर्ता अनस रहमान जुनैद ने कहा, "जेप्टो के युवा सह-संस्थापकों कैवल्य वोहरा और आदित पलिचा का जबरदस्त उदय इस बात पर प्रकाश डालता है कि किस प्रकार प्रौद्योगिकी और नवाचार संपत्ति सृजन की समयसीमा को सीमित कर रहे हैं।" सूची में एसजी फिनसर्व के रोहन गुप्ता एवं परिवार (1,140 करोड़ रुपये) और भारतपे के शाश्वत नकरानी (1,340 करोड़ रुपये) भी मौजूद हैं। सबसे युवा अरबपतियों में ओयो के संस्थापक रितेश अग्रवाल (31) भी शामिल हैं, जिनकी कुल संपत्ति 14,400 करोड़ रुपये है।
- नई दिल्ली| हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के दिग्गज गायक और पद्म भूषण से सम्मानित पंडित छन्नूलाल मिश्र का आज गुरुवार सुबह निधन हो गया। वे 89 वर्ष के थे और मिर्जापुर में उन्होंने अंतिम सांस ली। सुबह करीब 4:15 बजे उनका देहांत हुआ। पंडित मिश्र किराना घराने के प्रतिष्ठित गायक थे और शास्त्रीय व भक्ति संगीत को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जाने जाते थे। पिछले महीने उन्हें सीने में दर्द और हल्के हार्ट अटैक की शिकायत के बाद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सर सुंदरलाल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में उनके सीने में संक्रमण और एनीमिया की समस्या सामने आई थी। सुधार के बाद हाल ही में उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी गई थी, लेकिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और उनका निधन हो गया।उनका पार्थिव शरीर सुबह 11 बजे तक वाराणसी लाया जाएगा, जहां लोग श्रद्धांजलि और अंतिम दर्शन करेंगे। उनके अंतिम संस्कार की तैयारी शाम 7 बजे के लिए की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंडित छन्नूलाल मिश्र के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, “प्रख्यात शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी के निधन से मैं अत्यंत दुखी हूं। उन्होंने अपना पूरा जीवन भारतीय कला और संस्कृति के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को जनसामान्य तक पहुंचाने के साथ-साथ भारतीय परंपरा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने में भी अमूल्य योगदान दिया।”पीएम मोदी ने यह भी याद किया कि 2014 में वाराणसी सीट से नामांकन के दौरान पंडित मिश्र उनके प्रस्तावक रहे थे। उन्होंने लिखा, “मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ कि मुझे उनका स्नेह और आशीर्वाद हमेशा मिलता रहा। इस दुख की घड़ी में मैं उनके परिवार और चाहने वालों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं। ओम शांति!” पंडित छन्नूलाल मिश्र का जीवन भारतीय शास्त्रीय संगीत को समर्पित रहा। वे खयाल, ठुमरी, दादरा और भजन गायकी के लिए प्रसिद्ध थे। 2010 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था। इसके अलावा उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यश भारती सम्मान भी प्रदान किया गया था। उनके निधन से संगीत जगत में गहरा शोक है और भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया ने अपना एक बड़ा स्तंभ खो दिया है।
- नई दिल्ली| विजयादशमी के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुरुवार को देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। तीनों नेताओं ने इस पर्व को बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक बताया और समाज में सत्य, न्याय, धर्म और सद्भाव को बढ़ावा देने का आह्वान किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संदेश साझा करते हुए कहा कि विजयादशमी अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है और यह त्योहार हमें सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में यह पर्व रावण दहन और दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है, जो भारत की जीवन-मूल्यों को दर्शाता है। राष्ट्रपति ने लिखा कि यह त्योहार हमें क्रोध और अहंकार जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों का त्याग करने और संघर्ष तथा शौर्य जैसी सकारात्मक प्रवृत्तियों को अपनाने का संदेश देता है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कामना है कि यह पर्व हमें एक ऐसे समाज और देश के निर्माण के लिए प्रेरित करे, जहां न्याय, समानता और सद्भाव के साथ सभी लोग आगे बढ़ सकें।उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी एक्स पर विजयादशमी की बधाई दी। उपराष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी संदेश में कहा गया कि यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव है और यह हमें सत्य, धर्म और साहस के स्थायी मूल्यों की याद दिलाता है। संदेश में लिखा गया कि विजयादशमी हमें ईमानदारी से काम करने, न्याय की रक्षा करने और समाज में सकारात्मक योगदान देने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी के लिए खुशी, शांति और समृद्धि की कामना की और कहा कि यह पर्व देश की सेवा के लिए हमारे संकल्प को और मजबूत करे।वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विजयादशमी की शुभकामनाएं एक्स के माध्यम से दी। उन्होंने लिखा कि विजयादशमी अच्छाई और सत्य की बुराई और असत्य पर जीत का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी कामना है कि इस पावन अवसर पर हर व्यक्ति को साहस, बुद्धि और भक्ति के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिले। उन्होंने देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं और उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
- नई दिल्ली| विजयादशमी के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयंसेवकों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ अपना जीवन देश निर्माण के लिए समर्पित किया है। प्रधानमंत्री ने एक विस्तृत ब्लॉग पोस्ट में लिखा, “सौ वर्ष पहले विजयादशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी। यह कोई बिल्कुल नया निर्माण नहीं था, बल्कि भारत की सनातन राष्ट्रीय चेतना का ही एक नया रूप था, जो समय-समय पर चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रकट होती रही है। हमारे समय में संघ उसी राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है। हमारी पीढ़ी के स्वयंसेवकों के लिए यह सौभाग्य है कि हम संघ की शताब्दी देख रहे हैं।” उन्होंने संघ संस्थापक डॉ. के.बी. हेडगेवार को नमन किया और सभी स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं दीं।पीएम मोदी ने संघ की भूमिका समझाते हुए कहा कि जैसे नदियां हर क्षेत्र को समृद्ध करती हैं, वैसे ही संघ ने शिक्षा, कृषि, सामाजिक कल्याण, महिला सशक्तिकरण और जनजातीय कल्याण जैसे अनेक क्षेत्रों में काम करके राष्ट्र को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा, “संघ का मंत्र हमेशा एक ही रहा है- राष्ट्र प्रथम।” प्रधानमंत्री ने लिखा कि संघ की स्थापना से ही उसका उद्देश्य राष्ट्रनिर्माण रहा है और इसके लिए उसने “व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण” का मार्ग चुना। उन्होंने दैनिक शाखा को एक अद्वितीय साधन बताया, जहां से हर स्वयंसेवक “मैं” से “हम” की यात्रा शुरू करता है और व्यक्तिगत रूपांतरण से समाज व राष्ट्र की सेवा करता है।इतिहास की भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “संघ की स्थापना के समय से ही उसने राष्ट्र को अपनी प्राथमिकता माना। डॉ. हेडगेवार और कई स्वयंसेवक स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से शामिल हुए। डॉ. हेडगेवार कई बार जेल भी गए। विभाजन के समय और अन्य आपदाओं में भी संघ ने सेवा और राहत कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।” पीएम मोदी ने कहा कि पिछले सौ वर्षों में संघ ने समाज के हर वर्ग में आत्मविश्वास जगाया और दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों तक पहुंच बनाई। सेवा भारती, विद्या भारती, एकल विद्यालय और वनवासी कल्याण आश्रम जैसी संस्थाओं को उन्होंने आदिवासी समाज को सशक्त बनाने वाले स्तंभ बताया।सामाजिक बुराइयों पर संघ की लड़ाई का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “जातिगत भेदभाव और छुआछूत जैसी समस्याओं के खिलाफ संघ हमेशा डटा रहा। गुरुजी ने ‘ना हिंदू पतितो भवेत’ का संदेश दिया। पूज्य बालासाहेब देवरस ने कहा था कि अगर छुआछूत गलत नहीं है तो दुनिया में कुछ भी गलत नहीं है। बाद में राज्जू भैया और सुदर्शन जी ने भी यही संदेश आगे बढ़ाया। आज मोहन भागवत जी ने ‘एक कुआं, एक मंदिर और एक श्मशान’ की बात कर समाज को एकजुट करने का आह्वान किया।”वर्तमान चुनौतियों का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने लिखा कि आज भारत विकसित राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है, लेकिन विदेशी निर्भरता, एकता तोड़ने की साजिशें और घुसपैठ जैसी चुनौतियां सामने हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इनसे निपट रही है और संघ ने भी इनसे निपटने के लिए ठोस रोडमैप तैयार किया है। प्रधानमंत्री ने संघ के “पंच परिवर्तन” का भी उल्लेख किया-स्व-बोध (औपनिवेशिक मानसिकता छोड़कर स्वदेशी अपनाना), सामाजिक समरसता (हाशिये पर खड़े वर्गों के लिए न्याय और समानता), कुटुंब प्रबोधन (पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करना), नागरिक शिष्टाचार (नागरिक कर्तव्यों का पालन), और पर्यावरण संरक्षण (भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रकृति की रक्षा) शामिल है। उन्होंने कहा कि इन संकल्पों के मार्गदर्शन में संघ अपनी दूसरी शताब्दी की यात्रा शुरू कर रहा है और 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में उसका योगदान महत्वपूर्ण होगा।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि 57 नये केन्द्रीय विद्यालय (केवी) खोले जाने का निर्णय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है और इससे बड़ी संख्या में रोजगार का भी सृजन होगा। मोदी ने ‘एक्स' पर की गई कई पोस्ट में केंद्रीय मंत्रिमंडल के निर्णयों की मुख्य विशेषताओं को सूचीबद्ध किया, जिसमें दालों का उत्पादन बढ़ाने का मिशन, रबी फसलों के लिए एमएसपी, असम में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-715 पर एक ‘एलिवेटेड कॉरिडोर' का निर्माण और जैव-चिकित्सा अनुसंधान कैरियर कार्यक्रम (बीआरसीपी) के तीसरे चरण को मंजूरी देना शामिल है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार देशभर के किसानों के कल्याण के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है। उन्होंने कहा, ‘‘इसी कड़ी में हमारी सरकार ने ‘दालों में आत्मनिर्भरता मिशन' को मंजूरी दी है। इस ऐतिहासिक पहल से जहां दालों के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, वहीं आत्मनिर्भरता के हमारे संकल्प को भी बल मिलेगा।'' मोदी ने 57 नये केन्द्रीय विद्यालय खोले जाने संबंधी निर्णय पर कहा कि यह खुशी की बात है कि इन विद्यालयों में बच्चों को प्राथमिक स्तर से ही पोषित करने के लिए बालवाटिकाएं शामिल की जाएंगी। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘इससे कई विद्यार्थियों को फायदा होगा और साथ ही कई नौकरियों का भी सृजन होगा। यह समावेशी विकास, खासकर आकांक्षी जिलों, पूर्वोत्तर और अन्य दूरदराज के क्षेत्रों में, के प्रति हमारी प्रतिबद्धता के अनुरूप है।'' मोदी ने कहा कि रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने के फैसले से खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी। उन्होंने कहा, ‘‘विकसित भारत के निर्माण में अहम भागीदारी निभा रहे अन्नदाताओं का कल्याण हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। इसी दिशा में रबी फसलों की एमएसपी बढ़ाने का फैसला लिया गया है। इससे जहां हमारी खाद्य सुरक्षा और मजबूत होगी, वहीं हमारे किसान भाई-बहनों को भी लाभ होगा।'' मोदी ने राष्ट्रीय राजमार्ग-715 के कालीबोर-नुमालीगढ़ खंड को चौड़ा करने संबंधी के निर्णय को असम और पूर्वोत्तर के लिए ‘‘ऐतिहासिक'' कदम बताया। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘काजीरंगा क्षेत्र में वन्यजीव-अनुकूल उपायों के साथ एक एलिवेटेड कॉरिडोर समेत, राष्ट्रीय राजमार्ग-715 के कालीबोर-नुमालीगढ़ खंड को चौड़ा करने और उन्नत बनाने संबंधी मंत्रिमंडल के फैसले से विकास को बढ़ावा मिलेगा और साथ ही पशु सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। काजीरंगा में पर्यटन को बहुत बढ़ावा मिलेगा।'' मोदी ने कहा कि जैव-चिकित्सा अनुसंधान कैरियर कार्यक्रम के तीसरे चरण के लिए मंत्रिमंडल की मंजूरी से वैज्ञानिक प्रतिभा का पोषण होगा, फेलोशिप, सहयोगात्मक अनुदान को समर्थन मिलेगा और पूरे भारत में विश्व स्तरीय जैव-चिकित्सा अनुसंधान क्षमता का निर्माण होगा।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न पूरे भारत में मनाने का बुधवार को फैसला किया। संविधान सभा ने बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्' को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया था।
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस गीत की भूमिका को ध्यान में रखते हुए, इसके 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में देशव्यापी समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया गया। मंत्री ने पत्रकारों से कहा, ‘‘आज मंत्रिमंडल की बैठक में एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। देश के स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाने वाले गीत 'वंदे मातरम्' के 150वें वर्ष का जश्न पूरे देश में मनाया जायेगा। यह आयोजन विशेष रूप से युवाओं और छात्रों के बीच किया जाएगा, जिन्हें देश के स्वतंत्रता संग्राम के बारे में पूरी जानकारी नहीं है।'' उन्होंने कहा कि इसे देश के युवाओं और विद्यार्थियों को स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों और राष्ट्रीय नायकों के बलिदान की भावना से जोड़कर मनाया जायेगा। ‘इंडिया डॉट जीओवी' पोर्टल के अनुसार, वंदे मातरम् की रचना चटर्जी ने संस्कृत में की थी। इसे राष्ट्रगान, ‘जन-गण-मन' के बराबर दर्जा प्राप्त है। -
बहराइच (उप्र). बहराइच जिले के राम गांव क्षेत्र स्थित एक घर से बुधवार सुबह संदिग्ध परिस्थितियों में एक दंपति समेत छह लोगों के शव बरामद किये गये। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि रामगांव थाना क्षेत्र के निंदुनपुरवा के दाखिला टेपरहा गांव में बुधवार सुबह एक घर से 15 व 16 वर्षीय दो लड़कों के क्षत-विक्षत शव, आठ और 10 साल की दो बच्चियों तथा 46 वर्षीय गृह स्वामी तथा उसकी 44 वर्षीय पत्नी के जले हुए शव बरामद हुए हैं। घटनास्थल पर पहुंचे पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) अमित पाठक ने कहा, “एक मकान से छह शव मिले हैं। गांव वालों ने सभी की पहचान की है। दो शव बाहरी लड़कों के हैं जिन्हें बोवाई के लिए बुलाया गया था। इनके शरीर पर धारदार हथियार से वार करने के घाव हैं।” उन्होंने बताया कि शेष चार जले हुए शव गृह स्वामी, उनकी पत्नी और उनकी दो बच्चियों के हैं।
आईजी ने बताया, दो कमरों में से एक कमरे में आग लगी है। कमरे में ज्वलनशील पदार्थ रखा था, गैस सिलेंडर भी थे, लेकिन शायद फटे नहीं। नीचे बांस की बल्लियां पड़ी थीं जिनके कारण आग ने विकराल रूप लिया होगा। सभी शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गये हैं।” पाठक ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही पता चलेगा कि मृतकों के शरीर पर जलने से पूर्व कोई चोट के निशान तो नहीं हैं, या उन्हें कोई जहरीला पदार्थ तो नहीं दिया गया था। उन्होंने बताया कि फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य संकलन किए हैं और इन सबकी रिपोर्ट आने पर ही घटनाक्रम का निश्चित निर्धारण किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि कुछ असामान्य बातें सामने आई हैं जैसे बाहर थोड़ी दूरी पर एक ट्रैक्टर जला हुआ है, घर के मवेशी जो काफी दूर बंधे होते थे उन्हें भी उसी कमरे में लाकर रखा गया जहां आग लगी थी और घर के सभी लोगों और मवेशियों के शव कमरे में दुछत्ती से बरामद हुए। पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि घटनास्थल पर मौजूद एक चश्मदीद छोटे बच्चे ने भी काफी जानकारी दी है और उसकी बातों का विश्लेषण कर उसे जांच रिपोर्टों के साथ जोड़कर आकलन किया जाएगा। गांव वालों ने यह भी बताया है कि गृह स्वामी काफी उग्र स्वभाव का था। कुछ दिन पूर्व उसके बेटे की मृत्यु हुई थी, तब से वह कुछ बेचैन सा रहता था। रामगांव थाने में तैनात दारोगा अयोध्या सिंह ने बताया कि निंदूरपुरवा गांव के दाखिला टेपरहा में किसान विजय कुमार मौर्या का घर है और बुधवार सुबह मौर्या के घर से आग की लपटें निकल रही थीं तथा चीखने चिल्लाने की आवाजें सुनकर ग्रामीण घर का दरवाजा व दीवार तोड़कर अंदर घुसे तो एक कमरे में स्थानीय निवासी सनी वर्मा (16) और सूरज यादव (15) के क्षत-विक्षत शव बरामद हुए। दोनों के गले कटे हुए थे। उन्होंने बताया कि अग्निशमन कर्मियों की मदद से आग बुझाई गयी तो देखा कि घर के दूसरे कमरे में छज्जे पर विजय मौर्या (46), उसकी पत्नी धीरज कुमारी (44), पुत्रियों प्रियांशी (10) और रियांशी (आठ) तथा नीचे चार मवेशियों के जले हुए शव पड़े थे। सिंह ने बताया कि धीरज कुमारी के मुंह से झाग निकल रहा था और दो खुले हुए गैस सिलेंडर भी कमरे में पड़े थे। उनके मुताबिक, दमकल, पुलिस व ग्रामीणों ने करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद आग बुझाई और सभी शवों को बाहर निकाला गया। उन्होंने बताया, "अब तक घटना के पीछे के मूल कारण की जानकारी नहीं हो सकी है। पूछताछ में लोगों ने बताया कि विजय कुमार के खेत में लहसुन की बोवाई का काम चल रहा था। घटना में मारे गए सनी वर्मा व सूरज यादव से मौर्या का बोवाई को लेकर विवाद हुआ था।" ग्रामीणों ने बताया कि सनी और सूरज तीन दिन से मौर्या के यहां लहसुन की बोवाई करा रहे थे और बुधवार को किशोरों ने महानवमी के कारण काम करने से मना किया तो मौर्या नाराज हो गया। उन्होंने बताया कि मौर्या ने बुधवार सुबह करीब 10 बजे दोनों लड़कों को अपने घर बुलाया था और आरोप है कि पहले उसने दोनों नाबालिग लड़कों का धारदार हथियार से गला काटा, फिर दूसरे कमरे में अपनी पत्नी, बेटियों व मवेशियों को ले जाकर कमरा भीतर से बंद कर लिया। घटनास्थल पर जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक रामनयन सिंह सहित पुलिस व प्रशासन का पूरा अमला मौजूद है। -
मुंबई। चलन से हटाए जा चुके 2,000 रुपये के 5,884 करोड़ रुपये मूल्य के नोट अब भी प्रचलन में हैं। बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 19 मई, 2023 को 2000 रुपये मूल्य के बैंक नोटों को प्रचलन से वापस लेने की घोषणा की थी। हालांकि 2000 रुपये के बैंक नोट अब भी वैध मुद्रा बने हुए हैं। केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा कि चलन में मौजूद 2000 रुपये के बैंक नोटों का कुल मूल्य 30 सितंबर, 2025 को कारोबार की समाप्ति पर घटकर 5,884 करोड़ रुपये रह गया है। 19 मई, 2023 को चलन से हटाए जाते समय कारोबार की समाप्ति पर इन नोटों का कुल मूल्य 3.56 लाख करोड़ रुपये था। इसका मतलब है कि 19 मई, 2023 तक चलन में रहे 2000 रुपये के कुल बैंक नोटों में से 98.35 प्रतिशत अब वापस आ चुके हैं। इन नोटों को बदलने की सुविधा रिजर्व बैंक के 19 निर्गम कार्यालयों में उपलब्ध है। इसके अलावा, भारतीय डाक के माध्यम से 2000 रुपये के नोट अपने बैंक खातों में जमा कराने के लिए रिजर्व बैंक के किसी भी जारीकर्ता कार्यालय में भेजे जा सकते हैं।
- नयी दिल्ली. । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को आगाह किया कि जनसांख्यिकीय बदलाव वर्तमान में देश के सामाजिक सद्भाव के लिए घुसपैठ से भी बड़ा खतरा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा हमेशा ‘‘विविधता में एकता'' में निहित रही है और आगाह किया कि यदि यह सिद्धांत टूट गया तो देश की ताकत कम हो जाएगी। मोदी ने अपने 15 अगस्त के भाषण और ‘‘बहनों-बेटियों को निशाना बनाकर युवाओं की आजीविका छीनने वाले घुसपैठियों से भारतीय नागरिकों की रक्षा'' के अपने 'जनसांख्यिकीय मिशन' की घोषणा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘‘आज सामाजिक सद्भाव को घुसपैठियों से अधिक खतरा जनसांख्यिकी बदलाव के षडयंत्रों से है, जिसका सीधा असर आंतरिक सुरक्षा और भविष्य की शांति पर पड़ता है। भारत आज ऐसी चुनौतियों का सामना कर रहा है जो सीधे तौर पर उसकी एकता, संस्कृति और सुरक्षा को निशाना बना रही हैं।'' मोदी ने कहा कि आरएसएस ने सामाजिक सद्भाव को हमेशा प्राथमिकता दी है तथा सामाजिक समरसता को हाशिए पर मौजूद लोगों को प्राथमिकता देकर सामाजिक न्याय स्थापित करने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के रूप में परिभाषित किया है। उन्होंने कहा, ‘‘आज राष्ट्र ऐसी चुनौतियों का सामना कर रहा है जो सीधे तौर पर उसकी एकता, संस्कृति और सुरक्षा को निशाना बना रही हैं -- अलगाववादी विचारधाराओं और क्षेत्रवाद से लेकर जाति और भाषा पर विवाद तक तथा बाहरी ताकतों द्वारा भड़काई गई विभाजनकारी प्रवृत्तियां।'' मोदी ने भारत की आत्मा हमेशा ‘‘विविधता में एकता'' में निहित रहने का उल्लेख किया और आगाह किया कि यदि इस सिद्धांत को तोड़ा गया, तो भारत की ताकत कम हो जाएगी। इसलिए, उन्होंने इस आधारभूत लोकाचार को निरंतर सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘सामाजिक सद्भाव आज जनसांख्यिकीय बदलाव और घुसपैठ से गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है, जिसका सीधा असर आंतरिक सुरक्षा और भविष्य की शांति पर पड़ता है... इसी चिंता ने मुझे लाल किले से जनसांख्यिकी मिशन की घोषणा करने के लिए प्रेरित किया।'' मोदी ने इस खतरे का सामना करने के लिए सतर्कता और कड़ी कार्रवाई का भी आह्वान किया।शताब्दी समारोह का आयोजन संस्कृति मंत्रालय द्वारा किया गया और इसमें आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत शामिल हुए।

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