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- नयी दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की यात्रा के दौरान किए गए एक अध्ययन में यह पाया गया है कि मधुमेह से पीड़ित अंतरिक्ष यात्री भविष्य में सुरक्षित रूप से अंतरिक्ष मिशन पर जा सकते हैं।संयुक्त अरब अमीरात स्थित स्वास्थ्य देखभाल कंपनी बुरजील होल्डिंग्स ने ‘एक्सिओम-4’ मिशन के दौरान किए ‘सूट राइड’ प्रयोग में यह पाया कि पृथ्वी पर लाखों लोगों द्वारा प्रतिदिन उपयोग किए जाने वाले मधुमेह उपकरणों का उपयोग अंतरिक्ष से धरती तक और वापस अंतरिक्ष तक मधुमेह की संपूर्ण निगरानी के लिए व्यापक रूप से किया जा सकता है।अध्ययन के मुख्य बिंदु:सुइट राइड परियोजना: यह एक विशेष प्रयोग है जो अंतरिक्ष यात्रियों के रक्त शर्करा के स्तर की निरंतर निगरानी करेगा.एक्सिओम-4 मिशन: इस मिशन में भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला भी शामिल हैं.लक्ष्य: मुख्य लक्ष्य यह दिखाना है कि मधुमेह से पीड़ित लोग, विशेष रूप से इंसुलिन पर निर्भर व्यक्ति, अंतरिक्ष में सुरक्षित रूप से रह सकते हैं और काम कर सकते हैं.क्यों महत्वपूर्ण है: दशकों से, मधुमेह रोगियों को अंतरिक्ष यात्रा के अयोग्य माना जाता रहा है क्योंकि अंतरिक्ष में ब्लड शुगर नियंत्रण करना एक बड़ी चुनौती है. यह अध्ययन इस स्थिति को बदलने की क्षमता रखता है.माइक्रोग्रैविटी और इंसुलिन: यह प्रयोग यह जांच करेगा कि अंतरिक्ष के शून्य गुरुत्वाकर्षण वातावरण में इंसुलिन और ग्लूकोज का व्यवहार कैसे होता है.
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नई दिल्ली। पंचायती राज मंत्रालय (एमओपीआर) ने ग्राम पंचायतों को मजबूत बनाने के लिए डिजिटल सुधारों की एक श्रृंखला शुरू की है। इन सुधारों का उद्देश्य शासन को तेज, अधिक पारदर्शी और अधिक समावेशी बनाना है। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मीटिंग समराइज से लेकर भू-स्थानिक मानचित्रण प्लेटफॉर्म, डिजिटल लेखा प्रणाली और नागरिक-उन्मुख मोबाइल ऐप तक कई उपकरण उपलब्ध हैं। यह बदलाव डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के तहत सरकार के व्यापक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है।
डिजिटल शासन में प्रमुख पहलग्राम सभा की कार्यवाही को रिकॉर्ड करने और समराइज करने के लिए एआई-संचालित उपकरण सभासार, डिजिटल भूमि मानचित्रण और संपत्ति अधिकारों के लिए स्वामित्व, एकीकृत ऑनलाइन योजना, लेखा और निगरानी के लिए ई-ग्राम स्वराज, स्थानीय डेटा तक नागरिकों की पहुंच के लिए मेरी पंचायत मोबाइल ऐप और भू-स्थानिक नियोजन के लिए ग्राम मंच जैसी पहल पंचायतों के कामकाज के तरीके को बदल रही हैं। ये प्लेटफॉर्म न केवल पारदर्शिता और दक्षता में सुधार करते हैं बल्कि नागरिकों को स्थानीय शासन में अधिक सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए सशक्त भी बनाते हैं। ये सभी मिलकर जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के सरकार के दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।सभासार: ग्राम सभा बैठकों के लिए AIपंचायती राज मंत्रालय (एमओपीआर) ने अगस्त 2025 में सभासार लॉन्च किया। सभासार एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल है जो ग्राम सभा और अन्य पंचायत सभाओं के ऑडियो या वीडियो से बैठकों का व्यवस्थित ब्योरा (मिनट्स) तैयार करता है। अब तक, मिनट्स तैयार करना एक धीमा, मैन्युअल और अक्सर असंगत कार्य था। सभासार वास्तविक समय में सटीक सारांश (समराइज) तैयार करके इसमें बदलाव लाता है। यह राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन भाषिनी से जुड़ा है, जो इसे 14 भारतीय भाषाओं में काम करने की अनुमति देता है। इससे यह विभिन्न क्षेत्रों के समुदायों के लिए सुलभ हो जाता है। सभासार की मदद से, ग्राम पंचायत अधिकारी अब शासन और सेवा वितरण पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, जबकि यह टूल दस्तावेजीकरण का काम संभालता है, जिससे वास्तविक समय में, निष्पक्ष रिकॉर्ड और अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।स्वामित्व: ग्रामीण भारत का मानचित्रणस्वामित्व (ग्रामीण क्षेत्रों में उन्नत तकनीक से गांवों का सर्वेक्षण और मानचित्रण) योजना का शुभारंभ प्रधानमंत्री द्वारा 24 अप्रैल 2020 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर किया गया था। यह योजना ग्रामीण परिवारों को उनके घरों और जमीन के कानूनी स्वामित्व के दस्तावेज प्रदान करती है। ड्रोन और उन्नत मानचित्रण उपकरणों का उपयोग करके, यह संपत्ति की सीमाओं को स्पष्ट रूप से चिह्नित करता है। इन दस्तावेजों के साथ, परिवार बैंक कर्ज प्राप्त कर सकते हैं, विवादों का समाधान कर सकते हैं और अपनी संपत्ति का बेहतर उपयोग कर सकते हैं, जबकि ग्राम पंचायतें संपत्ति कर संग्रह में सुधार और बेहतर संसाधन नियोजन के माध्यम से लाभान्वित होती हैं।यह योजना पंचायती राज मंत्रालय द्वारा भारतीय सर्वेक्षण विभाग के सहयोग से कार्यान्वित की जा रही है, जिसमें राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र सेवा निगम (एनआईसीएसआई) प्रौद्योगिकी भागीदार है। इसकी स्वीकृत लागत वित्त वर्ष 2020-21 से वित्त वर्ष 2024-25 तक ₹566.23 करोड़ है, जिसे वित्त वर्ष 2025-26 तक बढ़ाया जा सकता है।स्वामित्व ने भूमि स्वामित्व के सीमांकन के लिए राजस्व अधिकारियों और पटवारियों पर दशकों से चली आ रही निर्भरता को समाप्त कर दिया है। यह कार्यक्रम नागरिक-केंद्रित शासन के वैश्विक मॉडल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह ग्रामीणों को आधुनिक उपकरणों से अपनी भूमि का मानचित्रण करने में सक्षम बनाता है, जिससे उन्हें अधिकार और सुरक्षा मिलती है। इसकी सफलता ने दुनिया भर का ध्यान आकर्षित किया है और अन्य देशों को भी इसी तरह के दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया है।भारतनेट: ग्रामीण कनेक्टिविटी की रीढ़भारत सरकार ने डिजिटल खाई को पाटने के लिए अक्टूबर 2011 में भारतनेट की शुरुआत की। इस परियोजना का उद्देश्य प्रत्येक ग्राम पंचायत तक किफायती, उच्च गति वाला इंटरनेट पहुंचाना है। संचार मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित, भारतनेट का उद्देश्य ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाना, समावेशी विकास को बढ़ावा देना और गांवों को कनेक्टिविटी के शहरी मानकों के करीब लाना है। यह न केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना है, बल्कि एक डिजिटल राष्ट्र की ओर भारत के कदम का आधार भी है।डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) के तहत वित्त पोषण के माध्यम से, सरकार ग्रामीण, दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्रों में तेज गति का इंटरनेट, उच्च गुणवत्ता वाली मोबाइल और डिजिटल सेवाएं प्रदान करने के लिए योजनाएं शुरू कर रही है। भारतनेट को सभी ग्राम पंचायतों को कवर करने के लिए चरणों में लागू किया जा रहा है। यह परियोजना वाई-फाई हॉटस्पॉट, फाइबर टू द होम (एफटीटीएच) कनेक्शन और अन्य सेवाओं के माध्यम से ब्रॉडबैंड प्रदान करती है।केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रिंग टोपोलॉजी में नेटवर्क को मजबूत करने, मौजूदा बुनियादी ढांचे को उन्नत करने और मांग पर लगभग 3.8 लाख गैर-जीपी गांवों तक सेवाओं का विस्तार करने के लिए एक संशोधित कार्यक्रम को मंजूरी दी है। भारत के महापंजीयक (आरजीआई) के अनुसार, 30 जून 2025 तक, 6,44,131 गांवों में से लगभग 6,26,055 गांवों में पहले से ही 3जी या 4जी मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से इंटरनेट की सुविधा है।अब तक, भारतनेट के तहत 13 लाख से ज्यादा फाइबर टू द होम (एफटीटीएच) कनेक्शन चालू किए जा चुके हैं। ये कनेक्शन ई-शिक्षा, ई-स्वास्थ्य, ई-गवर्नेंस और ई-कॉमर्स जैसी ऑनलाइन सेवाओं का समर्थन करते हैं। किसान भी कृषि संबंधी अपने ज्ञान का विस्तार करने और नवीनतम तकनीकों से अपडेट रहने के लिए इस नेटवर्क का उपयोग कर रहे हैं। ग्राम पंचायतों में भारतनेट कनेक्टिविटी के साथ, ग्राम संवाद, मेरी पंचायत, राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (एनपीएसएस) और पीएम किसान जैसे ऐप शासन, कल्याण और कृषि सेवाओं को सीधे ग्रामीणों के फ़ोन पर लाते हैं। इससे पारदर्शिता, सहभागिता और ग्रामीण सशक्तिकरण को बल मिलता है।ई-ग्राम स्वराज: कार्य-आधारित लेखा और योजनाडिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत, पंचायती राज मंत्रालय पंचायतों को स्थानीय स्वशासन के रूप में अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए ई-पंचायत मिशन मोड परियोजना (एमएमपी) का क्रियान्वयन कर रहा है। पूर्व की उपलब्धियों को आगे बढ़ाते हुए, और देश भर के पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई) में ई-गवर्नेंस को सुदृढ़ करने के लिए, मंत्रालय ने 24 अप्रैल 2020 को ई-पंचायत एमएमपी के अंतर्गत ई-ग्राम स्वराज नामक एक उपयोगकर्ताओं के अनुकूल वेब-आधारित पोर्टल लॉन्च किया।यह एक कार्य-आधारित, व्यापक एप्लिकेशन है जो पंचायतों के सभी मुख्य कार्यों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक साथ लाता है। यह विकेंद्रीकृत योजना, बजट, लेखा, निगरानी, प्रगति रिपोर्टिंग, परिसंपत्ति प्रबंधन को कवर करता है और ऑनलाइन भुगतान को भी सक्षम बनाता है। इस एप्लिकेशन का उपयोतगकर्ता आधार 28 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में फैले 2.7 लाख से अधिक पंचायती राज संस्थानों का है।मेरी पंचायत ऐप: नागरिकों के हाथों में पारदर्शितामेरी पंचायत ऐप राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) द्वारा डिजाइन और विकसित एक एकीकृत मोबाइल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करता है। यह पंचायती मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देकर ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाता है। यह पहल स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने और 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह ऐप ई-ग्रामस्वराज द्वारा संचालित है और पंचायती राज मंत्रालय और भारत सरकार के अन्य पोर्टलों से जुड़ा हुआ है।यह ऐप 2.65 लाख ग्राम पंचायतों के 25 लाख से ज्यादा निर्वाचित प्रतिनिधियों और लगभग 95 करोड़ ग्रामीण निवासियों को सशक्त बनाता है। यह प्लेटफॉर्म ग्रामीण शासन में डिजिटल समावेशन, पारदर्शिता और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देता है।मेरी पंचायत ऐप के माध्यम से, नागरिक अपने मोबाइल उपकरणों पर आसानी से निम्नलिखित तक पहुंच सकते हैं:रीयल-टाइम पंचायत बजट, प्राप्तियां, भुगतान और विकास योजनाएं।निर्वाचित प्रतिनिधियों और स्थानीय पदाधिकारियों का विवरण।पंचायत के अंतर्गत सार्वजनिक अवसंरचना और नागरिक सेवाओं की जानकारी।परियोजना ट्रैकिंग के साथ ग्राम पंचायत विकास योजनाएं (जीपीडीपी)।पंचायत स्तर पर मौसम पूर्वानुमान।सामाजिक लेखा परीक्षा टूल्स, निधि उपयोग डेटा और जियो-टैग्ड और जियो-फेंस्ड सुविधाओं के साथ शिकायत निवारण।समावेशिता के लिए 12 से अधिक भारतीय भाषाओं के समर्थन के साथ बहुभाषी इंटरफेस।पंचायत निर्णय (एनआईआरएनएवाई): डिजिटल बैठकें और फैसलेपंचायत निर्णय पोर्टल ग्राम सभा की बैठकों के लिए एक रीयल टाइम निगरानी प्रणाली है। यह ग्रामीण भारत में स्थानीय स्वशासन के प्रमुख स्तंभों में से एक है। यह पोर्टल बैठकों का समय निर्धारित करने, नागरिकों को एजेंडा के बारे में पहले से सूचित करने और व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करने में मदद करता है। यह ग्राम सभाओं के निर्णयों को रिकॉर्ड करता है और उन्हें तत्काल संदर्भ के लिए उपलब्ध कराता है। इससे पंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है।यह प्रणाली कागज-आधारित प्रक्रियाओं की जगह पूरी तरह से स्वचालित कार्यप्रवाह लाती है। यह पंचायतों को देश भर में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और बैठकों का अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने में सक्षम बनाती है। पंचायत निर्णय का प्राथमिक लक्ष्य ग्राम सभा की बैठकों को सहभागी, पारदर्शी और जीवंत बनाना है।ग्राम मानचित्र: भू-स्थानिक नियोजन टूलपंचायती राज मंत्रालय ने ग्राम मानचित्र भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) एप्लिकेशन (https://grammanchitra.gov.in) लॉन्च किया है। यह प्लेटफॉर्म ग्राम पंचायतों को भू-स्थानिक तकनीक का उपयोग करके योजनाएं तैयार करने में मदद करता है। यह एक एकीकृत डिजिटल मानचित्र प्रदान करता है, जहां अधिकारी विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्यों की कल्पना कर सकते हैं और उन्हें ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) के साथ संरेखित कर सकते हैं।ग्राम मानचित्र कई प्रकार के नियोजन टूल्स प्रदान करता है। इनमें नई परियोजनाओं के लिए उपयुक्त स्थलों की पहचान, स्थानीय परिसंपत्तियों पर नजर रखना, परियोजना लागत का अनुमान लगाना और संभावित प्रभावों का आकलन शामिल है। जीआईएस का उपयोग करके, पंचायतें स्पष्ट आंकड़ों और साक्ष्यों के आधार पर व्यावहारिक और साध्य विकास योजनाएं तैयार कर सकती हैं।मान्यता और पुरस्कारई-गवर्नेंस के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार (एनएईजी) 2025 ने ग्राम पंचायतों में सेवा वितरण को गहन बनाने के लिए जमीनी स्तर की पहलों को सम्मानित करने हेतु एक नई श्रेणी की शुरुआत की। यह पुरस्कार इस बात पर प्रकाश डालता है कि पंचायतें पारदर्शिता और नागरिक सेवाओं में सुधार के लिए डिजिटल उपकरणों का कैसे उपयोग कर रही हैं। इस वर्ष, 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 1.45 लाख से अधिक प्रविष्टियां प्राप्त हुईं, जो ग्राम स्तर पर बढ़ती डिजिटल गति को दर्शाती हैं। महाराष्ट्र के धुले की रोहिणी ग्राम पंचायत को स्वर्ण पुरस्कार मिला, जबकि त्रिपुरा की पश्चिम मजलिसपुर ग्राम पंचायत को रजत पुरस्कार मिला। गुजरात की पलसाना ग्राम पंचायत और ओडिशा की सुआकाटी ग्राम पंचायत को भी जूरी पुरस्कार प्रदान किए गए। मान्यता के साथ-साथ विजेताओं को स्वर्ण पुरस्कार के लिए 10 लाख रुपये और रजत पुरस्कार के लिए 5 लाख रुपये की वित्तीय प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। इन पुरस्कारों का उद्देश्य कल्याण और सेवा वितरण पहलों को और अधिक मजबूत करना और यह दर्शाना है कि किस प्रकार जमीनी स्तर पर नवाचार एक अधिक डिजिटल और उत्तरदायी पंचायती राज प्रणाली को आकार दे रहा है।ग्राम पंचायतों की डिजिटल यात्रा भारत के ग्रामीण शासन में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। एआई-संचालित बैठक रिकॉर्ड से लेकर भू-स्थानिक नियोजन और नागरिक-केंद्रित मोबाइल ऐप तक, तकनीक गांवों की योजना बनाने, निर्णय लेने और क्रियान्वयन के तरीके को नया रूप दे रही है। ये सुधार न केवल पंचायतों को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाते हैं, बल्कि नागरिकों को निर्णय लेने के और भी करीब लाते हैं। भाषा, दूरी और सूचना की बाधाओं को तोड़कर, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म जमीनी लोकतंत्र को मजबूत कर रहे हैं और समुदायों को सशक्त बना रहे हैं। जैसे-जैसे इन पहलों का विस्तार होगा, भारत के गांव डिजिटल भारत के निर्माण में सच्चे भागीदार बनकर उभरेंगे। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले उपहारों की नीलामी प्रधानमंत्री मोमेंटो ई-ऑक्शन 2025 की शुरुआत हो गई है। इस बार नीलामी में 1,300 से अधिक अनोखी वस्तुएं शामिल की गई हैं, जिनमें पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध संस्कृति और विरासत की झलक भी देखने को मिल रही है। नीलामी की प्रक्रिया 2 अक्टूबर तक ऑनलाइन पोर्टल pmmementos.gov.in पर चलेगी। खास बात यह है कि इस नीलामी से प्राप्त राशि नमामि गंगे परियोजना को दी जाएगी, जिसका उद्देश्य गंगा नदी का संरक्षण है।
इस नीलामी में नगालैंड, मेघालय, असम, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से आए कई विशेष उपहार आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। नगालैंड की ओर से एक लकड़ी की मिथुन मूर्ति और पारंपरिक नागा शॉल शामिल है, जिसमें लाल पैनल और भाले-ढाल के पारंपरिक डिजाइन हैं, जो सम्मान और साहस का प्रतीक माने जाते हैं। मेघालय से गन्ने और बांस से बनी एक जहाज की कलात्मक प्रतिकृति नीलामी में रखी गई है, जो स्थानीय शिल्पकारों की रचनात्मकता को दर्शाती है।
वहीं असम की झलक एकदम अलग है। यहां से माजुली का गरुड़ मुखौटा, पारंपरिक असमिया जपी (टोपी) और सुनहरी मुगा सिल्क अंगवस्त्र नीलामी का हिस्सा हैं। ये सभी वस्तुएं असम की कृषि और हस्तशिल्प परंपरा की गहरी जड़ों को दर्शाती हैं। सिक्किम से भगवान बुद्ध की एक सुंदर पीतल की मूर्ति शामिल की गई है, जो बौद्ध कला और धातु शिल्प की बारीकी को प्रदर्शित करती है। वहीं अरुणाचल प्रदेश से वान्चो जनजाति की लकड़ी की मूर्ति नीलामी में रखी गई है, जिसमें एक आदिवासी दंपति को दर्शाया गया है और यह उनकी परंपरागत कहानी कहने और शिल्पकला की अनूठी पहचान है।अधिकारियों ने देशवासियों से इस नीलामी में भाग लेने की अपील की है। उनका कहना है कि यह न केवल सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का अवसर है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास में योगदान देने का भी मौका है। -
नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने आज गुरुवार को डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन के लिए ऑथेंटिकेशन मैकेनिज्म फ्रेमवर्क पर नई गाइडलाइन जारी की। यह नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। आरबीआई ने कहा कि दिशा-निर्देश तैयार करते समय आम जनता से प्राप्त फीडबैक को ध्यान में रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य तकनीकी प्रगति का उपयोग कर डिजिटल ट्रांजैक्शन के लिए नए और सुरक्षित ऑथेंटिकेशन तरीके बढ़ाना है। हालांकि, इस फ्रेमवर्क में एसएमएस-आधारित वन टाइम पासवर्ड (OTP) को ऑथेंटिकेशन फैक्टर के रूप में बंद करने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है।
नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, भारत में सभी डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन में न्यूनतम दो ऑथेंटिकेशन फैक्टर का पालन अनिवार्य होगा। जारीकर्ता (जैसे बैंक या पेमेंट सेवा प्रदाता) ट्रांजैक्शन के फ्रॉड जोखिम के आधार पर अतिरिक्त जोखिम-आधारित जांच भी लागू कर सकते हैं। जारीकर्ताओं को यह भी अधिकार होगा कि वे ग्राहकों को ऑथेंटिकेशन फैक्टर चुनने का विकल्प दें।
RBI ने कहा कि कार्ड प्रेजेंट ट्रांजैक्शन को छोड़कर, सभी डिजिटल ट्रांजैक्शन में कम से कम एक ऑथेंटिकेशन फैक्टर प्रमाणित किया जाएगा। इसका मतलब है कि हर ट्रांजैक्शन के लिए भेजा गया फैक्टर यूनिक होगा और एक फैक्टर में गड़बड़ी दूसरे फैक्टर की विश्वसनीयता को प्रभावित नहीं करेगी। साथ ही, सिस्टम प्रोवाइडर और सिस्टम पार्टिसिपेंट ऑथेंटिकेशन या टोकनलाइजेशन सेवाएं प्रदान करेंगे, जो सभी एप्लिकेशन, चैनल और टोकन स्टोरेज मैकेनिज्म के लिए सुलभ होंगी। इससे डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम और अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनेगा। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 सितंबर को सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का शुभारंभ करेंगे। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। योजना के पहले चरण में प्रधानमंत्री मोदी सीधे बिहार की 75 लाख महिलाओं के बैंक खातों में 10,000-10,000 रुपए की राशि ट्रांसफर करेंगे। इस तरह कुल 7,500 करोड़ रुपए की धनराशि एक साथ वितरित की जाएगी। यह अब तक का बिहार का सबसे बड़ा महिला-केंद्रित कार्यक्रम माना जा रहा है।
इस योजना के तहत महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने और अपनी पसंद के आजीविका कार्यों के लिए पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी। प्रत्येक लाभार्थी को प्रारंभिक अनुदान 10,000 रुपए डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से दिया जाएगा। आगे चलकर योजना में अधिकतम 2 लाख रुपए तक की अतिरिक्त सहायता का प्रावधान भी रखा गया है। महिलाएं इस राशि का उपयोग कृषि, पशुपालन, हस्तशिल्प, सिलाई, बुनाई और छोटे उद्योग जैसे क्षेत्रों में कर सकेंगी। साथ ही, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की सामुदायिक संसाधन कर्मी महिलाओं को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देंगी। इसके अलावा ग्रामीण हाट-बाजारों को मजबूत किया जाएगा ताकि महिलाओं के उत्पादों को बेहतर बाजार मिल सके। कार्यक्रम के लॉन्च के दौरान राज्यभर में जिला, प्रखंड, क्लस्टर और गांव स्तर पर भी आयोजन होंगे। अनुमान है कि इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को बिहार की 1 करोड़ से अधिक महिलाएं एक साथ देखेंगी। - मथुरा (उप्र) ।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बृहस्पतिवार को वृन्दावन के एक दिवसीय दौरे पर पहुंची और विभिन्न मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। राष्ट्रपति ने अपने दौरे के दौरान ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन किये और निधिवन पहुंच राधारानी की प्राकट्य स्थली निहारी एवं स्वामी हरिदास की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके प्रति सम्मान प्रकट किया। मुर्मू ने सुदामा कुटी में संस्थापक स्वामी सुदामा दास महाराज की जन्मशती पर उनकी भजन स्थली का लोकार्पण किया। इस दौरान राष्ट्रपति के साथ आयीं उनकी पुत्री इतिश्री मुर्मु, दामाद और दोनों नाती भी मौजूद रहे।राष्ट्रपति विशेष ट्रेन से अपराह्न 10 बजे मथुरा के वृन्दावन रोड स्टेशन पहुंची। उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण की अगुवाई में एक दल ने उनका स्वागत किया । राष्ट्रपति सबसे पहले ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर पहुंचीं, जहां मंदिर की समिति की ओर से अध्यक्ष अशोक कुमार एवं सदस्य दिनेश गोस्वामी ने उनका स्वागत किया। यहां राजभोग सेवाधिकारी शैलेंद्र गोस्वामी, गौरव गोस्वामी एवं फ्रैंकी गोस्वामी ने उन्हें देहरी पूजन एवं अष्टक पूजन कराया। राष्ट्रपति ने मंदिर में भेंट स्वरूप एक लिफाफा चढाया। इस मौके पर मंदिर को देश-विदेश से मंगाए गए विशेष फूलों से सजाया गया था और प्रांगण में कन्नौज से मंगाए गए गुलाब के इत्र का छिड़काव किया गया था, जिसकी खुशबू से सम्पूर्ण मंदिर परिसर महक उठा था। इस बीच, पिछले अनुभवों को देखते हुए जिला प्रशासन ने राष्ट्रपति एवं उनके प्रियजनों को बंदरों की चपेट में आने से बचाने के लिए मंदिर एवं आसपास की छतों पर वन विभाग के लोगों को गुलेल तथा ‘एयरगन' देकर तैनात किया था, जिससे कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई। राष्ट्रपति इसके बाद निधिवन पहुंचीं। निधिवन में ही राधारानी की सुंदर प्रतिमा उनके भक्त स्वामी हरिदास जी को प्राप्त हुई थी। इसी वन में उनकी समाधि भी स्थित है। राष्ट्रपति ने दोनों स्थलों के दर्शन किये और श्रृंगार सामग्री भेंट की। उन्होंने निधिवन में करीब 500 मीटर पैदल चलकर राधारानी की प्राकट्य स्थली की परिक्रमा भी की। बाद में राष्ट्रपति ने परिक्रमा मार्ग पर संत सुदामा दास महाराज की भजन कुटी का लोकार्पण किया। सुदामा कुटी से निकलने से पूर्व राष्ट्रपति ने अपनी स्वर्गीय माता की स्मृति में पौधारोपण भी किया। इसके बाद राष्ट्रपति वृन्दावन में ही एक होटल में दोपहर का भोजन एवं कुछ समय विश्राम करके मथुरा में तिलकद्वार के निकट आर्यनगर (अंतापाड़ा) स्थित श्रीकुब्जा-कृष्ण मंदिर के दर्शन करने गयीं। इस दौरान प्रोटोकॉल के तहत सरकार की ओर से गन्ना विकास मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण, आगरा मण्डल में जिले के सभी वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी राष्ट्रपति के साथ रहे। राष्ट्रपति के दौरे के समय पूरे जनपद में कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किये गये। इससे पहले, राष्ट्रपति बृहस्पतिवार को अपनी एक दिवसीय यात्रा पर महाराजा एक्सप्रेस ट्रेन से नयी दिल्ली से मथुरा स्थित वृंदावन पहुंचीं। राष्ट्रपति पूर्वाह्न 10 बजे 18 डिब्बों वाली आलीशान विशेष ट्रेन में सवार होकर वृंदावन रोड स्टेशन पहुंचीं। इस ट्रेन में महाराजा एक्सप्रेस के 12 डिब्बे शामिल थे जिनमें राष्ट्रपति और उनके कर्मचारियों के लिए एक प्रेसिडेंशियल सुइट, डीलक्स सुइट, रेस्टोरेंट और लाउंज शामिल थे।
- हापुड़ (उप्र)। हापुड़ के एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने नशे की लत का इलाज करा रहे एक व्यक्ति के पेट से दो पेन, 19 टूथब्रश और 29 चम्मच निकाले हैं, जिससे उसकी जान बच गई। एक अस्पताल ने यह जानकारी दी। देवनंदनी अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि बुलंदशहर निवासी और वहां एक नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती सचिन नामक मरीज को पेट में तेज दर्द की शिकायत पर इस अस्पताल में लाया गया था। अस्पताल के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को बताया कि अल्ट्रासाउंड के बाद डॉक्टरों ने उसके पेट में कुछ असामान्य चीजें देखीं। अस्पताल के अध्यक्ष डॉ. श्याम कुमार और डॉ. संजय राय ने हाल में ऑपरेशन करने वाली सर्जिकल टीम का नेतृत्व किया। डॉ. कुमार ने कहा,‘‘ शल्य प्रक्रिया के दौरान, हमें दो पेन, 19 टूथब्रश और 29 चम्मच मिले। मरीज की जान बच गई।'' अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि नशा मुक्ति केंद्र में इलाज के दौरान सचिन ने नशे में ये चीजें निगल ली थीं। असामान्य बरामदगी ने चिकित्सा कर्मचारियों और स्थानीय लोगों दोनों को स्तब्ध कर दिया है।
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मुंबई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया 2.0' पहल उन उभरते क्षेत्रों पर केंद्रित होगी जो अगले 25 साल में वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा होंगे। शाह ने यहां फाइनेंशियल एक्सप्रेस बेस्ट बैंक पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के विश्लेषक अब भारत की विकास गाथा को स्वीकार कर रहे हैं। शाह ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी से ग्रस्त रहे बैंकिंग क्षेत्र में सुधार शुरू किए। पिछले 10 वर्षों में सबसे गरीब लोगों को बैंकों तक पहुंच प्रदान करने के लिए कुल 53 करोड़ बैंक खाते खोले गए हैं।'' केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) से संबंधित आंकड़ों में पारदर्शिता लेकर आई है और सरकार ने बैंकों में 3.10 लाख करोड़ रुपये की पूंजी डाली है। उन्होंने कहा, ‘‘मेक इन इंडिया 2.0 पहल उन उभरते क्षेत्रों पर केंद्रित होगी जो अगले 25 वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा होंगे।''
- नयी दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (जीएसटीएटी) की शुरुआत की। यह कंपनियों और कर विभाग के बीच विवादों के त्वरित निपटारे का मार्ग प्रशस्त करेगा। सीतारमण ने कहा कि जीएसटीएटी के सक्रिय होने के साथ ही कंपनियां इसके पोर्टल पर अपने मामले दायर कर पाएंगे और दिसंबर से अपीलीय न्यायाधिकरण में सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उन्होंने जीएसटीएटी को 'करदाताओं के लिए न्याय का सच्चा प्रतीक' बताते हुए कहा, “2017 में जीएसटी की शुरुआत के साथ ‘एक राष्ट्र, एक कर, एक बाजार' की जो परिकल्पना की गई थी, अब उसमें एक और आयाम जुड़ गया है। यह मंच व्यवसायों के लिए भरोसे का स्तंभ और भारत की निरंतर आर्थिक वृद्धि का उत्प्रेरक बनेगा।”जीएसटी से संबंधित करीब 4.83 लाख लंबित मामलों को इस पोर्टल पर स्थानांतरित किया जाएगा। सरकार ने अपील दाखिल करने की समय-सीमा 30 जून, 2026 तक बढ़ा दी है। पुराने विवादों को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाएगा ताकि मामलों का बोझ नियंत्रित ढंग से निपटाया जा सके। वित्त मंत्री ने कहा, "जीएसटीएटी केवल अपीलीय मंच ही नहीं, बल्कि अग्रिम निर्णय प्राधिकरण (एएआर) की भूमिका भी निभाएगा। इससे करदाताओं को कार्यवाही शुरू होने से पहले और बाद दोनों स्तरों पर व्यापक समाधान उपलब्ध होंगे” इस अवसर पर राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि यह न्यायाधिकरण कर विवादों में एकरूपता, अनुमान-योग्य परिणाम और अपील प्रक्रिया की विश्वसनीयता सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा, "जीएसटी परिषद ने समय-समय पर जटिल मुद्दों पर स्पष्टीकरण दिया है, लेकिन अब एक औपचारिक अपीलीय संस्था सभी पक्षों को समान अवसर देगी और विवादों का स्थायी समाधान संभव बनाएगी।”सरकार ने हाल ही में जीएसटीएटी के विभिन्न खंडपीठों के लिए न्यायिक और तकनीकी सदस्यों की नियुक्ति की है। मई 2024 में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) संजय कुमार मिश्रा को प्रधान पीठ का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। अगस्त, 2025 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश मयंक कुमार जैन को जीएसटी अपीलीय प्राधिकरण की प्रधान पीठ का न्यायिक सदस्य बनाया गया। इसके अलावा सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ए. वेणु प्रसाद और सेवानिवृत्त आईआरएस अधिकारी अनिल कुमार गुप्ता को तकनीकी सदस्य नियुक्त किया गया था। सीतारमण ने कहा कि जीएसटीएटी की स्थापना करदाताओं के लिए न केवल अनुपालन और रिफंड को सरल बनाने का हिस्सा है, बल्कि यह निष्पक्ष और कुशल विवाद निवारण की गारंटी भी है। उन्होंने कहा, "यह सुधारों का एक स्वाभाविक विस्तार है। जब कोई करदाता विवाद की स्थिति में आता है तो वह कर प्रशासन के समक्ष पहली अपील कर सकता है। दूसरे स्तर पर वह केंद्र या राज्य के आदेशों के खिलाफ जीएसटीएटी में अपील कर सकेगा।"
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुरुवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और भारत की विचारधारा और विकास यात्रा में उनके योगदान को याद किया।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद का दर्शन और अंत्योदय का दृष्टिकोण – यानी समाज के अंतिम व्यक्ति को ऊपर उठाना – आज भी भारत के विकास मॉडल को प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि ये सिद्धांत समावेशी विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए सरकार के दृष्टिकोण में गहराई से समाए हुए हैं।सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए पीएम मोदी ने अपनी पोस्ट में कहा, “भारत माता के महान सपूत और एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को उनकी जयंती पर कोटिश: नमन। देश को समृद्धि की राह दिखाने वाले उनके राष्ट्रवादी विचार और अंत्योदय के सिद्धांत विकसित भारत के निर्माण में बहुत काम आने वाले हैं।”
- कोलकाता । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में वर्षाजनित घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की बुधवार को घोषणा की। कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में हुई भारी बारिश से निपटने को लेकर अपनी सरकार के उपायों का बचाव करते हुए बनर्जी ने गंगा नदी की सफाई (गाद निकालने) नहीं करने के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराया और मेट्रो रेलवे पर आरोप लगाया कि वह अपनी निर्माण गतिविधियों के माध्यम से साल्ट लेक में बाढ़ की स्थिति को और बदतर बना रही है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में अब तक वर्षाजनित घटनाओं में कम से कम 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से नौ लोगों की मौत कोलकाता में जलभराव के बीच खुले पड़े बिजली के तारों के संपर्क में आने से करंट लगकर हुई है। मुख्यमंत्री ने कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में बिजली प्रदाता - कलकत्ता बिजली आपूर्ति निगम (सीईएससी) से महानगर में बिजली का करंट लगने के कारण मारे गए लोगों के परिजनों को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने की अपील की। दक्षिण कोलकाता में एकदलिया दुर्गा पूजा के उद्घाटन के अवसर पर बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार मृतकों के परिवार के सदस्यों को रोजगार भी दिलाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘कल जो लोग बिजली के करंट से मारे गए उनके परिजनों को राज्य सरकार द्वारा दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी हालांकि पैसा उनके जीवन की कीमत नहीं चुका सकता। अगर सीईएससी नौकरी नहीं भी देती है तो भी हम यह सुनिश्चित करेंगे कि परिवार के सदस्यों को विशेष रोजगार दिया जाए।'' मुख्यमंत्री ने कहा कि सीईएससी को बिजली का करंट लगने के कारण हुई इन मौतों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।उन्होंने कहा, ‘‘मैं सीईएससी से आग्रह करूंगी कि वह मृतकों के परिवारों को पांच लाख रुपये का मुआवजा प्रदान करें क्योंकि मौतें उनकी लापरवाही के कारण हुईं।'' कोलकाता और आसपास के जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति की समीक्षा कर रहीं बनर्जी ने कहा कि शहर के अधिकतर हिस्सों से पानी घट गया है। उन्होंने कहा, ‘‘सात घंटे के भीतर हम पानी निकालने में कामयाब रहे। यह लोगों के सहयोग से संभव हुआ है। रात दो बजे तक मैं निगरानी कर रही थी कि शहर में अब भी पानी आ रहा है या नहीं। कोलकाता के ज़्यादातर इलाकों से पानी निकाल दिया गया है।'' हालांकि मुख्यमंत्री ने माना कि थंथनिया, कॉलेज स्ट्रीट और बल्लीगंज जैसे इलाकों में मंगलवार सुबह तक जलभराव रहा। बनर्जी ने इस बाढ़ की तुलना 1978 की बाढ़ से करते हुए कहा, ‘‘यह बादल फटने जैसी बारिश थी। हमने कई वर्षों से ऐसी बारिश नहीं देखी... यह 1978 से भी अधिक थी।'' उन्होंने केंद्र पर गंगा नदी में गाद हटाने के कार्य की उपेक्षा करने का आरोप लगाया।उन्होंने कहा, ‘‘प्रकृति हमारे हाथ में नहीं है। कोलकाता बंदरगाह, फरक्का बैराज, डीवीसी (दामोदर घाटी निगम) के मैथन में पिछले 20 सालों से जल निकासी व्यवस्था नहीं हुई है। जब भी बिहार या उत्तर प्रदेश में बारिश होती है पानी बहकर पश्चिम बंगाल में आ जाता है। हमें सब कुछ खुद ही संभालना पड़ता है।'' मुख्यमंत्री ने मेट्रो रेलवे के अधिकारियों पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जारी निर्माण गतिविधियों के कारण शहर के व्यस्त क्षेत्र साल्ट लेक में जलभराव की समस्या बढ़ गई है। उन्होंने कहा, ‘‘मेट्रो के लिए निर्माण कार्य जारी है और रेत के कट्टे, पाइप और अन्य सामग्री बिना देखभाल के छोड़ दी गई है। कल मैं साल्ट लेक गई थी और वहां भारी मात्रा में पानी था।''
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नयी दिल्ली/ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को 20 कलाकारों को ललित कला अकादमी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया और कहा कि कला सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करने तथा समाज को अधिक संवेदनशील बनाने का एक सशक्त माध्यम है। पुरस्कार समारोह के साथ ही अकादमी में 64वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का समापन भी हुआ, जिसमें चित्रकला, मूर्तिकला, फोटोग्राफी और इंस्टालेशन जैसे विषयों में देश भर से 283 कलाकृतियां प्रदर्शित की गईं। मुर्मू ने कहा, ‘‘भारतीय परंपरा में कला को आध्यात्मिक साधना का एक रूप माना गया है। हमारे समाज में कलाकारों को विशेष सम्मान दिया जाता है। आपकी कला न केवल सौंदर्य अभिव्यक्ति का माध्यम है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करने और समाज को अधिक संवेदनशील बनाने का एक सशक्त माध्यम भी है।'' उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में दिखायी कलाकृतियों से यह स्पष्ट है कि भारतीय कला निरंतर विकसित हो रही है और नए आयाम प्रस्तुत कर रही है। मुर्मू ने कहा, ‘‘हमारे कलाकार अपने विचारों, दृष्टि और रचनात्मकता के माध्यम से एक नए भारत की छवि प्रस्तुत कर रहे हैं।'' अभिषेक शर्मा, एस. सोनम ताशी, विजय एम ढोरे, भास्कर जॉयती गोगोई, आशीष घोष, गिरिराज शर्मा, आनंद जयसवाल, केसीएस प्रसन्ना, कनु प्रिया, तापती भौमिक मजूमदार और वेणुगोपाल वीजी सहित सम्मानित कलाकारों को दो लाख रुपये की पुरस्कार राशि, एक स्मृति चिह्न और एक प्रमाण पत्र दिया गया। यह पहली बार है जब ललित कला अकादमी ने कलाकारों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदर्शित कलाकृतियों को बिक्री के लिए रखा। राष्ट्रपति ने कहा कि कलाकृतियों का उचित मूल्यांकन उन लोगों को प्रेरित करेगा, जो कला को पेशे के रूप में अपनाना चाहते हैं। मुर्मू ने कहा, ‘‘अपनी कला को मूर्त रूप देने के लिए कलाकारों को अपना समय, ऊर्जा और संसाधन समर्पित करने चाहिए। कलाकृतियों का उचित मूल्यांकन न केवल कलाकारों को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि उन लोगों को भी प्रेरित करेगा जो कला को एक पेशे के रूप में अपनाना चाहते हैं। मुझे यह जानकर खुशी हुई कि इस वर्ष अकादमी कलाकृतियों की बिक्री को बढ़ावा दे रही है। इससे कलाकारों को आर्थिक सहायता मिलेगी और हमारी रचनात्मक अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।'' उन्होंने कहा, ‘‘मैं कला प्रेमियों से भी अपील करती हूं कि वे न केवल इन कलाकृतियों की सराहना करें, बल्कि इन्हें अपने घरों में भी लाएं। भारत की आर्थिक मजबूती के साथ-साथ इसकी सांस्कृतिक ताकत भी पहचान का एक मज़बूत प्रतीक बननी चाहिए। इसके लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा।'' संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल के अनुसार, प्रदर्शनी के दौरान 74 कलाकारों की कलाकृतियां कुल 1.35 करोड़ रुपये में बिकीं। पुरस्कार समारोह में संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी शामिल हुए, जिन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी ‘‘आधुनिकता के साथ सामंजस्य में परंपरा और आधुनिकता के विकास का प्रमाण है।'' शेखावत ने कहा, ‘‘कला न केवल हमें एक सूत्र में बांधती है और भारत की विविधतापूर्ण भूमि को एक सूत्र में पिरोती है, बल्कि हमें विश्व से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करती है। साथ ही कला के माध्यम से हम वैश्विक पटल पर अपनी एक विशिष्ट पहचान भी बनाते हैं।''
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लेह/लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर बुधवार को यहां जारी आंदोलन हिंसक हो गया। इस दौरान सड़कों पर आगजनी और झड़पें हुई, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और 22 पुलिसकर्मियों समेत कम से कम 45 लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची के विस्तार की मांग को लेकर जारी आंदोलन के हिंसक रूप लेने के बाद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 15 दिन से जारी अपनी भूख हड़ताल बुधवार को समाप्त कर दी। कई घायलों की हालत गंभीर होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
सुबह की शुरुआत लद्दाख की राजधानी में पूर्ण बंद के साथ हुई। सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। भाजपा कार्यालय में तोड़फोड़ की गई और कई वाहनों को आग लगा दी गई। लद्दाख की राजधानी में पूर्ण बंद के बीच आग की लपटें और काला धुआं देखा जा सकता था।
अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों द्वारा व्यापक हिंसा शुरू करने के बाद स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को गोलीबारी और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। प्रशासन ने लद्दाख के लेह जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी। अधिकारियों ने बताया कि निषेधाज्ञा के तहत पांच या इससे अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। कांग्रेस नेता एवं पार्षद फुंटसोग स्टैनजिन त्सेपाग पर मंगलवार को धरना स्थल पर कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने के लिए मामला दर्ज किया गया। लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) की युवा शाखा ने विरोध प्रदर्शन और बंद का आह्वान किया था क्योंकि 10 सितंबर से 35 दिन की भूख हड़ताल पर बैठे 15 लोगों में से दो की हालत मंगलवार शाम बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यह अनशन उनकी चार सूत्री मांगों - राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची का विस्तार, लेह और कारगिल के लिए अलग लोकसभा सीट और नौकरियों में आरक्षण - के समर्थन में केंद्र पर बातचीत फिर से शुरू करने के लिए दबाव बनाने के लिए था। वांगचुक ने ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रदर्शनकारियों में से दो, 72 वर्षीय एक पुरुष और 62 वर्षीय एक महिला को मंगलवार को अस्पताल ले जाया गया था और कहा कि संभवतः यह हिंसक विरोध का तात्कालिक कारण था। स्थिति तेजी से बिगड़ने पर उन्होंने अपील की और घोषणा की कि वे अपना अनशन समाप्त कर रहे हैं।
वांगचुक ने आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में एकत्र अपने समर्थकों से कहा, ‘‘मैं लद्दाख के युवाओं से हिंसा तुरंत रोकने का अनुरोध करता हूं क्योंकि इससे हमारे उद्देश्य को नुकसान पहुंचता है तथा स्थिति और बिगड़ती है। हम लद्दाख और देश में अस्थिरता नहीं चाहते।'' उन्होंने कहा, ‘‘यह लद्दाख और मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से सबसे दुखद दिन है क्योंकि पिछले पांच वर्षों से हम जिस रास्ते पर चल रहे हैं वह शांतिपूर्ण था... हमने पांच मौकों पर भूख हड़ताल की और लेह से दिल्ली तक पैदल चले लेकिन आज हम हिंसा और आगजनी की घटनाओं के कारण शांति के अपने संदेश को विफल होते हुए देख रहे हैं।'' उन्होंने प्रशासन से आंसू गैस के गोले दागना बंद करने की भी अपील की तथा सरकार से अधिक संवेदनशील होने का आग्रह किया। वांगचुक ने कहा, ‘‘हम अपना अनशन तुरंत समाप्त कर रहे हैं... यदि हमारे युवा अपनी जान गंवाते हैं तो भूख हड़ताल का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।" उन्होंने कहा, ‘‘अब ठंडे दिमाग से बातचीत को आगे बढ़ाने का समय आ गया है। हम अपना आंदोलन अहिंसक रखेंगे और मैं सरकार से भी कहना चाहता हूं कि वह हमारे शांति संदेश को सुने... जब शांति के संदेश की अनदेखी की जाती है, तो ऐसी स्थिति पैदा होती है।'' वांगचुक ने कहा कि यह स्थिति युवाओं में हताशा का नतीजा है, क्योंकि उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि लद्दाख में कोई लोकतंत्र नहीं है और जनता से किया गया छठी अनुसूची का वादा भी पूरा नहीं किया गया है। संविधान की छठी अनुसूची शासन, राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियों, स्थानीय निकायों के प्रकार, वैकल्पिक न्यायिक तंत्र और स्वायत्त परिषदों के माध्यम से प्रयोग की जाने वाली वित्तीय शक्तियों के संदर्भ में विशेष प्रावधान करती है। छठी अनुसूची चार पूर्वोत्तर राज्यों त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम और असम की जनजातीय आबादी के लिए है। गृह मंत्रालय और लद्दाख के प्रतिनिधियों, जिनमें एलएबी और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के सदस्य शामिल हैं, के बीच छह अक्टूबर को वार्ता का एक नया दौर निर्धारित है। दोनों संगठन पिछले चार वर्षों से अपनी मांगों के समर्थन में संयुक्त रूप से आंदोलन कर रहे हैं और अतीत में सरकार के साथ कई दौर की वार्ता भी कर चुके हैं। अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शन के आह्वान पर लेह शहर में बंद रहा और एनडीएस स्मारक मैदान में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए तथा बाद में छठी अनुसूची और राज्य के समर्थन में नारे लगाते हुए शहर की सड़कों पर मार्च निकाला। उन्होंने बताया कि स्थिति तब और बिगड़ गई जब कुछ युवकों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और ‘हिल काउंसिल' के मुख्यालय पर पथराव किया। उन्होंने बताया कि शहरभर में बड़ी संख्या में तैनात पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। युवाओं के समूहों ने एक वाहन और कुछ अन्य वाहनों में आग लगा दी, और भाजपा कार्यालय को भी निशाना बनाया। उन्होंने परिसर और एक इमारत में मौजूद फर्नीचर और कागजात में आग लगा दी। इस बीच उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने कहा कि लद्दाख के हिंसा प्रभावित लेह जिले में और अधिक जानमाल की हानि रोकने के लिए कर्फ्यू लगाया गया है। उन्होंने कहा कि लद्दाख में शांतिपूर्ण माहौल बिगाड़ने की साजिश के तहत हिंसा भड़काई गई।
गुप्ता ने कहा कि हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाएगी और देश के कानून के अनुसार उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लगभग चार महीने तक रुकी रही वार्ता के बाद, केंद्र ने 20 सितंबर को एलएबी और केडीए को वार्ता के लिए आमंत्रित किया था। पूर्व सांसद एवं एलएबी के अध्यक्ष थुपस्तान छेवांग, जिन्होंने 27 मई को अंतिम दौर की वार्ता के बाद निकाय से इस्तीफा दे दिया था, पुनः अध्यक्ष पद पर आसीन हो गये हैं और वार्ता के दौरान उनके संयुक्त प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने की संभावना है। कांग्रेस ने एलएबी से बाहर होने का फैसला तब किया जब कुछ घटकों ने यह विचार व्यक्त किया कि अगले महीने ‘लेह हिल काउंसिल' के चुनावों के मद्देनजर एलएबी प्रतिनिधिमंडल को गैर-राजनीतिक होना चाहिए। -
भुवनेश्वर। ओडिशा में बुधवार को सभी 30 जिलों में सामान्य से लगभग 60 प्रतिशत अधिक बारिश होने से सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। अधिकारियों ने बताया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 27 सितंबर तक और अधिक बारिश का अनुमान जताया है, जिसके कारण राज्य सरकार ने सभी जिलों को अलर्ट पर रखा है। उन्होंने बताया कि कम दबाव वाले क्षेत्र के कारण राज्य भर में पहले ही भारी बारिश हो चुकी है, लेकिन मौसम विभाग ने बृहस्पतिवार को एक और कम दबाव वाला क्षेत्र बनने का अनुमान जताया है, जिसकी वजह से अधिकारियों ने एहतियाती कदम उठाए हैं। विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) कार्यालय ने सभी जिलाधिकारियों को लिखे पत्र में कहा, “ ‘ऑरेंज' और ‘येलो' अलर्ट वाले जिलों को किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए प्रशासनिक मशीनरी तैयार रखनी चाहिए।” भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कोरापुट, नवरंगपुर और नुआपाड़ा जिलों में एक या दो स्थानों पर 30-40 किमी प्रति घंटे की गति से हवा चलने तथा गरज के साथ भारी से बहुत भारी बारिश होने का ‘ऑरेंज अलर्ट' (कार्रवाई के लिए तैयार रहें) जारी किया है। इसी प्रकार, मौसम कार्यालय ने बृहस्पतिवार सुबह साढ़े आठ बजे तक 27 अन्य जिलों के लिए बारिश और गरज के साथ बिजली गिरने और 30-40 किमी प्रति घंटे की गति से हवा चलने का ‘येलो अलर्ट' (सावधान रहें) जारी किया। आईएमडी ने यह भी कहा कि समुद्र की स्थिति बहुत खराब होने की आशंका है और मछुआरों को 24 से 28 सितंबर तक ओडिशा के तटों और बंगाल की खाड़ी में नहीं जाने की चेतावनी दी है। मौसम विज्ञान केंद्र, भुवनेश्वर की निदेशक मनोरमा मोहंती ने कहा कि राज्य में अगले चार दिनों तक बारिश संबंधी गतिविधियां जारी रहेंगी। इस बीच, संबलपुर, कोरापुट, मलकानगिरी, नुआपाड़ा और बोलनगीर जिलों से प्राप्त खबरों के अनुसार, संबलपुर, बोलनगीर, पटनागढ़, नुआपाड़ा और कुछ अन्य कस्बों सहित कई क्षेत्रों में जलजमाव की स्थिति है।
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-शावकों के जीवित रहने की दर वैश्विक औसत से बेहतर: अधिकारी
नयी दिल्ली/ भारत और चीते लाने के लिए कुछ अफ्रीकी देशों के साथ बातचीत कर रहा है और उम्मीद है कि इस साल दिसंबर तक 8-10 चीतों को ले आया जाएगा। ये चीते संभवतः बोत्सवाना से आएंगे। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि भारत जिन अन्य देशों को चीते लाने के संभावित स्रोत के रूप में देख रहा है, उनमें नामीबिया भी शामिल है। इस देश से पहले भी चीते आए थे। प्रोजेक्ट चीता से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि भारत का अपने जंगलों में चीतों की संख्या बढ़ाने का महत्वाकांक्षी कदम "बहुत सफल" रहा है और इस कार्यक्रम ने दुनिया में पहली बार एक बड़े मांसाहारी जानवर के अंतरमहाद्वीपीय स्थानांतरण की प्रारंभिक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है। चूंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सितंबर 2022 में अपने जन्मदिन पर नामीबिया से लाये आठ चीतों को कुनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा था। फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाकर उनकी संख्या बढ़ायी गयी। चीतों ने यहां कई बार प्रजनन किया है। सूत्रों ने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि वे भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि वर्तमान में 27 चीतों में से 16 भारत में जन्मे हैं। उन्होंने बताया कि कुनो में शावकों के जीवित रहने की दर 61 प्रतिशत से अधिक है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह दर 40 प्रतिशत है। एक अधिकारी ने कहा कि यह एक बड़ी सफलता है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक बाधाओं के बाद परियोजना की प्रगति का श्रेय राजनीतिक इच्छाशक्ति को जाता है जो दूसरे देशों के साथ बातचीत करने में भी महत्वपूर्ण थी। इसके अलावा उन्होंने वन्यजीव संरक्षण में भारत की विशेषज्ञता, स्थानीय लोगों का समर्थन और सरकार के प्रमुख कार्यक्रम के प्रति समग्र प्रतिबद्धता को भी इसका श्रेय दिया। स्थानांतरित किये गये चीतों में से 11 जीवित बचे हैं, जिनमें छह मादा और पांच नर हैं।
एक अधिकारी ने कहा, "हम हर साल 10-12 चीतों को नए स्थानों पर लाने और उनकी मौजूदा संख्या को बनाए रखने की योजना बना रहे | -
नई दिल्ली। भारतीय चुनाव आयोग ने जम्मू-कश्मीर और पंजाब में राज्यसभा के लिए उपचुनावों की घोषणा की है। आयोग ने बताया कि जम्मू-कश्मीर की 4 राज्यसभा सीटों और पंजाब की एक सीट पर उपचुनाव के लिए 24 अक्टूबर को मतदान होगा। चुनाव आयोग ने कहा कि मतगणना भी उसी दिन होगी।
चुनाव आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, जम्मू-कश्मीर से राज्यसभा की चार सीटों के लिए अधिसूचना 6 अक्टूबर को जारी की जाएगी। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तिथि 13 अक्टूबर होगी, जबकि नामांकन 16 अक्टूबर तक वापस लिए जा सकेंगे। यही प्रक्रिया पंजाब की एक राज्यसभा सीट के लिए होगी।आयोग ने जानकारी दी कि राज्यसभा सीटों के लिए उपचुनाव में वोटिंग 24 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक जारी रहेगी। उसी दिन 5 बजे वोटों की गिनती शुरू होगी। जम्मू-कश्मीर में पिछले करीब 4 साल से राज्यसभा की सीटें खाली हैं। गुलाम नबी आजाद, शमशेर सिंह मन्हास, नजीर अहमद लावे और फयाज अहमद मीर, इन चार राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल फरवरी 2021 में समाप्त हुआ था। इन सीटों के लिए चुनाव पहले नहीं हो सके थे, क्योंकि जम्मू-कश्मीर अक्टूबर 2024 तक राष्ट्रपति शासन के अधीन था। अब जबकि केंद्र शासित प्रदेश में एक निर्वाचित विधानसभा है, चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा की है।जम्मू-कश्मीर में पिछला राज्यसभा चुनाव फरवरी 2015 में हुआ था, जब यह एक पूर्ण राज्य था। अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया। अब पहली बार केंद्र शासित प्रदेश के रूप में जम्मू-कश्मीर में राज्यसभा के लिए चुनाव होंगे।2015 के राज्यसभा चुनाव में भाजपा-पीडीपी गठबंधन ने 3 सीटें और नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन ने एक सीट जीती थी। हालांकि, सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर से खाली राज्यसभा सीटों का मुद्दा लगातार उठाती रही है।पंजाब की राज्यसभा की सीट जुलाई में सांसद संजीव अरोड़ा के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। अरोड़ा अब पंजाब सरकार में मंत्री हैं। वे उपचुनाव में पिछले दिनों लुधियाना पश्चिम विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के टिकट पर जीते थे। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को 10,91,146 रेलवे कर्मचारियों को 78 दिनों के उत्पादकता से जुड़े बोनस (पीएलबी) के रूप में 1865.68 करोड़ रुपए के भुगतान को मंजूरी दे दी। रेलवे कर्मचारी को पीएलबी का भुगतान हर साल दुर्गा पूजा/दशहरा की छुट्टियों से पहले किया जाता है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस वर्ष भी लगभग 10.91 लाख अराजपत्रित रेलवे कर्मचारियों को 78 दिनों के वेतन के बराबर पीएलबी राशि का भुगतान किया जा रहा है। पीएलबी का भुगतान रेलवे के प्रदर्शन में सुधार की दिशा में काम करने के लिए रेलवे कर्मचारियों को प्रेरित करने हेतु एक प्रोत्साहन के रूप में कार्य करता है।प्रत्येक पात्र रेलवे कर्मचारी के लिए 78 दिनों के वेतन के बराबर पीएलबी की अधिकतम देय राशि 17,951 रुपए है। उपरोक्त राशि का भुगतान विभिन्न श्रेणियों के रेलवे कर्मचारियों जैसे-ट्रैक मेंटेनर, लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर (गार्ड), स्टेशन मास्टर, पर्यवेक्षक, तकनीशियन, तकनीशियन हेल्पर, पॉइंट्समैन, मिनिस्ट्रियल स्टाफ और अन्य ग्रुप ‘सी’ कर्मचारियों को किया जाएगा। आपको बता दें, वर्ष 2024-25 में रेलवे का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा। रेलवे ने 1614.90 मिलियन टन का रिकॉर्ड माल लादा तथा लगभग 7.3 बिलियन यात्रियों को ढोया। - अहमदाबाद/ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को अपने लोकसभा क्षेत्र गांधीनगर में जलभराव की समस्या से निपटने के उपायों पर चर्चा के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की। गुजरात दौरे पर आए शाह ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों को अगले कुछ वर्षों में उनके निर्वाचन क्षेत्र में जलभराव की समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए हैं। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया है कि अधिकारियों ने राज्य की राजधानी में हुई बैठक में इस समस्या के समाधान के लिए एक कार्ययोजना उनके सामने प्रस्तुत की। शाह ने प्रस्तुति की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। बाद में, कलोल कस्बे में एक कार्यक्रम में शाह ने कहा, ‘‘गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में जलभराव की समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। अगले साल तक इस समस्या का काफी हद तक समाधान हो जाएगा।'' केंद्रीय मंत्री ने गांधीनगर जिले के कलोल कस्बे में 114 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन या शिलान्यास भी किया। भारतीय जनता पार्टी की एक विज्ञप्ति में बताया गया कि बाद में गृह मंत्री अपने गृह नगर मनसा गए और मां बहूचर मंदिर में पूजा-अर्चना की।
- पुरी/ ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर में कीमती वस्तुएं मंगलवार को वापस रत्न भंडार में स्थानांतरित कर दी गई हैं, जो भंडार की मरम्मत के लिए एक साल पहले बाहर निकाली गई थीं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर पाबंदी लगाई गई थी। उन्होंने कहा कि चार घंटे में यह प्रक्रिया पूरी हो गई। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरबिंदा पाढी ने कहा, “कीमती सामान और गहने स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पूर्वाह्न 10.55 बजे शुरू हुई और अपराह्न 2:55 बजे पूरी हो गई। यह काम ‘श्री जगन्नाथ मंदिर नियमावली-1960' और राज्य सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार किया गया है।” पिछले साल रत्न भंडार से बाहर निकाले जाने के बाद, कीमती सामान को मंदिर परिसर में एक अस्थायी ‘स्ट्रांग रूम' में रखा गया था। सात जुलाई को, एएसआई ने 'रत्न भंडार' के नवीनीकरण का काम पूरा किया था।पाढी ने कहा कि 'रत्न भंडार' के दोनों कक्ष बंद थे और आंतरिक कक्ष की चाबियां प्रक्रिया के अनुसार जिला ट्रेजरी में जमा की गई थीं। उन्होंने कहा, “सभी काम अच्छी तरह से किए गए और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए वीडियोग्राफी की गई।”स्थानांतरण के समय रत्न भंडार समिति के सदस्य उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विश्वनाथ रथ के नेतृत्व में मंदिर में उपस्थित थे। जिला कलेक्टर दिव्या ज्योति परिदा और एसपी प्रतीक सिंह भी मौजूद थे।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत आवंटित 4.12 करोड़ घरों में से (4 अगस्त तक) कुल 2.82 करोड़ घर पूरे हो चुके हैं। यह जानकारी सरकार की ओर से बुधवार को एक आधिकारिक दस्तावेज में दी गई। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत, सरकार ने शुरुआत में वित्त वर्ष 2016-17 से वित्त वर्ष 2023-24 तक 2.95 करोड़ घरों का लक्ष्य रखा था।
केंद्र ने ग्रामीण आवास योजना का 4.95 करोड़ घर तक विस्तार अगले पांच वर्षों के लिए मंजूर कियाग्रामीण आवास की निरंतर मांग को देखते हुए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2 करोड़ घरों के अतिरिक्त लक्ष्य के साथ इस योजना को अगले पांच वर्षों (वित्त वर्ष 2024-25 से वित्त वर्ष 2028-29) के लिए जारी रखने को मंजूरी दे दी, जिससे कुल लक्ष्य 4.95 करोड़ हो गया।4 अगस्त 2025 तक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 4.12 करोड़ घरों का लक्ष्य आवंटित किया गयाआधिकारिक दस्तावेज में कहा गया, “4 अगस्त 2025 तक, मंत्रालय द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कुल 4.12 करोड़ घरों का लक्ष्य आवंटित किया गया है, जिनमें से 3.85 करोड़ घरों को मंजूरी दी जा चुकी है और 2.82 करोड़ से ज्यादा घरों का निर्माण पूरा हो चुका है।”वित्त वर्ष 2025-26 के लिए (जुलाई 2025 तक) इस योजना के तहत कुल 32.9 लाख घरों का लक्ष्य रखा गया थावित्त वर्ष 2025-26 के लिए (जुलाई 2025 तक) इस योजना के तहत कुल 32.9 लाख घरों का लक्ष्य रखा गया था, जिनमें से 25.6 लाख घरों को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। वित्त वर्ष 2024-25 में, घर आवंटन का लक्ष्य 84.37 लाख था, जिसमें से 64.70 लाख घरों को मंजूरी दी गई थी।सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक कुल 216.73 लाख घरों को मंजूरी मिलीसरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 से वित्त वर्ष 2024-25 तक की चार वर्षों की अवधि में कुल 216.73 लाख घरों को मंजूरी दी गई, जिनमें से 176.47 लाख घर पूरे हो चुके हैं, जो आवास विकास में निरंतर प्रगति को दर्शाता है।यह योजना पात्र ग्रामीण परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्के घर बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती हैयह योजना पात्र ग्रामीण परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्के घर बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिनमें बेघर परिवार और शून्य, एक या दो कमरों वाले कच्चे घरों में रहने वाले लोग शामिल हैं। लाभार्थियों को अन्य सरकारी कार्यक्रमों के साथ समन्वय के माध्यम से पाइप से पेयजल, रसोई गैस, नवीकरणीय ऊर्जा और निर्माण सामग्री भी प्राप्त होती है।पीएमएवाई-जी ने गरीबी घटाकर, जीवन स्तर और ग्रामीण आवास में उल्लेखनीय सुधार कियापीएमएवाई-जी ने गरीबी कम करके, जीवन स्तर में सुधार लाकर और सामाजिक एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा देकर ग्रामीण आवास में उल्लेखनीय सुधार किया है, जो ग्रामीण आवास अवसंरचना को मजबूत करने में निरंतर प्रगति को दर्शाता है।( - लखनऊ/ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मिशन शक्ति का पांचवां चरण 22 सितंबर से शुरू हो गया जिसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है। आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी। एक बयान के मुताबिक, 21 अक्टूबर तक जारी रहने वाले इस चरण में सबसे ज्यादा ध्यान महिला सुरक्षा पर है। सरकार ने महिला सुरक्षा के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर, महिला थाने और महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसमें कहा गया कि साथ ही पिंक बूथ और पेट्रोलिंग स्क्वॉड को और अधिक सशक्त किया जा रहा है, ताकि महिलाएं निर्भीक होकर समाज में अपनी भूमिका निभा सकें। मिशन शक्ति की नोडल अधिकारी पद्मजा चौहान ने बताया कि पांचवें चरण में शिक्षा को महिलाओं के सशक्तीकरण का सबसे मजबूत हथियार माना गया है और इसी के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विशेष जागरुकता अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि छात्रवृत्ति योजनाओं और डिजिटल शिक्षा कार्यक्रमों को और विस्तार दिया जा रहा है।चौहान ने कहा, ‘‘मिशन शक्ति के तहत ये कार्यक्रम उन्हें रोजगार और उद्यमिता के नए अवसरों से भी जोड़ेंगे।'' उन्होंने बताया कि महिला स्वास्थ्य को लेकर इस चरण में विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। स्वच्छता, पोषण और मानसिक स्वास्थ्य पर आधारित कार्यशालाएं और स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं। खासकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराने पर जोर है। मिशन शक्ति की नोडल अधिकारी ने कहा, ‘‘मिशन शक्ति के पांचवें चरण में आत्मरक्षा, जीवन कौशल और नेतृत्व क्षमता पर केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक केंद्रों पर आयोजित इन कार्यशालाओं का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाना है। आत्मरक्षा के विशेष प्रशिक्षण से महिलाएं खुद को और दूसरों को सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम हो रही हैं। जीवन कौशल कार्यक्रम उन्हें वित्तीय प्रबंधन, स्वास्थ्य संबंधी निर्णय और सामाजिक दायित्वों में सक्रिय बनाएंगे।'' उन्होंने बताया कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए कड़े कानूनी कदम भी इस चरण में शामिल हैं। प्रत्येक जिले में विशेष निगरानी और त्वरित अदालतों को सक्रिय किया गया है ताकि अपराधियों को त्वरित सजा मिल सके। पुलिस प्रशासन को यह निर्देश दिए गए हैं कि महिला संबंधित मामलों को प्राथमिकता से निपटाया जाए। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि महिलाओं की गरिमा और अधिकारों से समझौता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- सागर . मध्यप्रदेश के सागर जिले में तीन वर्षीय बेटी को बचाने के लिए एक आठ माह की गर्भवती मां ने कुएं में छलांग लगा दी, जिससे दोनों की पानी में डूबने से मौत हो गई। पुलिस के एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि यह घटना जिले के देवरी थाना क्षेत्र के ग्राम नेगुवा रतन में सोमवार को हुई, जब विनीता आदिवासी (28) अपनी बेटी दुर्गा को लेकर घर से लगभग 300 मीटर दूर खेत में बने एक कुएं पर नहाने गई थीं। उन्होंने बताया कि उस दौरान अचानक बच्ची फिसलकर कुएं में गिर गई। उन्होंने बताया कि बेटी को बचाने के लिए मां भी तुरंत कुएं में कूद गई, लेकिन दुर्भाग्यवश दोनों की डूबने से मौत हो गई। सूचना मिलने पर अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीओपी) शशिकांत सरयाम तथा देवरी थाना प्रभारी गजेंद्र सिंह बुंदेला मौके पर पहुंचे और कुएं से मां-बेटी के शव बाहर निकलवाए। बुंदेला ने बताया कि शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया।विनीता के ससुर जुगल आदिवासी ने बताया कि घटना के समय परिवार के अन्य सदस्य अपने-अपने काम पर जा चुके थे। जब उनकी पत्नी घर लौटीं तो बहू और पोती घर पर नहीं थीं। बाद में उनकी तलाश के दौरान दोनों के शव कुएं में मिले। उन्होंने बताया कि विनीता आठ माह की गर्भवती थीं।
- नयी दिल्ली. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने जुलाई महीने में शुद्ध रूप से सालाना आधार पर 5.55 प्रतिशत अधिक 21.04 लाख सदस्य जोड़ें। श्रम मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, ईपीएफओ ने जुलाई 2025 में शुद्ध रूप से 9.79 लाख नए सदस्य जोड़े। आधिकारिक बयान के मुताबिक, इनमें 18-25 आयु वर्ग के 5.98 लाख युवा शामिल हैं जो कुल नए ग्राहकों का 61.06 प्रतिशत हैं। इस वर्ग में शुद्ध पेरोल वृद्धि 9.13 लाख रही। पहले नौकरी छोड़ चुके करीब 16.43 लाख पुराने सदस्य जुलाई में दोबारा ईपीएफओ के साथ जुड़े। इसमें सालाना आधार पर 12.12 प्रतिशत की दर्ज की गई। इस आंकड़े से पता चलता है कि ईपीएफओ सदस्य अंतिम निपटान के बजाय ईपीएफ खाते में जमा राशि स्थानांतरित कर अपनी सामाजिक सुरक्षा बनाए रखने को प्राथमिकता दे रहे हैं। जुलाई 2025 में 2.80 लाख नई महिला सदस्य जुड़ीं, जिससे कुल महिला शुद्ध पेरोल वृद्धि करीब 4.42 लाख रही। इसमें सालाना आधार पर 0.17 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई जो कार्यबल में बढ़ती विविधता को दर्शाती है। ईपीएफओ का यह पेरोल आंकड़ा अस्थायी है क्योंकि कर्मचारियों का रिकॉर्ड अद्यतन करने की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। संगठन सितंबर 2017 से ही मासिक आधार पर यह आंकड़े जारी कर रहा है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नागरिकों से उन्हें मिले उपहारों की नीलामी में हिस्सा लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नीलामी से प्राप्त राशि नमामि गंगे परियोजना में जाएगी।
पीएम मोदी सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा, “पिछले कुछ दिनों से, मेरे विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान मुझे मिले विभिन्न उपहारों की ऑनलाइन नीलामी चल रही है। इस नीलामी में भारत की संस्कृति और रचनात्मकता को दर्शाने वाली बेहद रोचक कृतियां शामिल हैं। नीलामी से प्राप्त राशि नमामि गंगे के लिए जाएगी। नीलामी में अवश्य भाग लें।”प्रधानमंत्री को प्राप्त स्मृति चिन्हों की ई-नीलामी 17 सितंबर को सुबह 10 बजे (प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर) शुरू हुई और 2 अक्टूबर को शाम 5 बजे बंद होगी। पीएम मेमेंटोस की वेबसाइट के अनुसार, चांदी में राम मंदिर का मॉडल, बछड़े के साथ कामधेनु, बेंत के जहाज का मॉडल, लकड़ी का चरखा और अन्य वस्तुएं लाइव नीलामी का हिस्सा हैं।नीलामी की वस्तुओं में एलोरा स्थित कैलासा मंदिर की पेंटिंग, एक G-20 पोस्टर तथा बिहार से प्राप्त भगवान बुद्ध की एक फ्रेमयुक्त प्रतिमा आदि भी शामिल हैं।उपयोगकर्ता pmmementos.gov.in पर जाकर, खाता पंजीकृत कर सकता है और नीलामी में उपहारों के लिए बोली लगा सकता है। वेबसाइट पर बताया गया है कि पीएम मेमेंटोज भारत सरकार का एक खुला नीलामी पोर्टल है, जो खरीदारों को उचित पंजीकरण के बाद प्रदर्शित वस्तुओं की ऑनलाइन नीलामी में भाग लेने में सक्षम बनाता है।उल्लेखनीय है, नमामि गंगे कार्यक्रम एक एकीकृत संरक्षण मिशन है, जिसे केंद्र सरकार ने जून 2014 में एक ‘प्रमुख कार्यक्रम’ के रूप में मंजूरी दी थी, इसका उद्देश्य राष्ट्रीय नदी गंगा के प्रदूषण निवारण, संरक्षण और पुनरुद्धार के दोहरे उद्देश्यों को प्राप्त करना है। मिशन का बजट परिव्यय 20,000 करोड़ रुपये है।इसका कार्यान्वयन दो भागों में विभाजित है – प्रारंभिक स्तर की गतिविधियां, जिनका तत्काल प्रभाव दिखाई देगा, मध्यम अवधि की गतिविधियां, जिनका कार्यान्वयन 5 वर्ष की समय-सीमा में किया जाएगा और दीर्घकालिक गतिविधियां, जिनका कार्यान्वयन 10 वर्ष की समय-सीमा में किया जाएगा। - नयी दिल्ली. सशस्त्र बल अक्टूबर के पहले सप्ताह में मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ (एचक्यू-आईडीएस) द्वारा आयोजित अभ्यास के दौरान अपने कुछ ड्रोन और ड्रोन रोधी प्रणालियों की क्षमताओं का परीक्षण करेंगे। सूत्रों ने बताया कि यह अभ्यास छह से 10 अक्टूबर तक मध्य प्रदेश में किया जाएगा।यहां हवाई रक्षा प्रणालियों पर एक सम्मेलन में अपने संबोधन में, आईडीएस मुख्यालय में एकीकृत रक्षा स्टाफ (ओपीएस) के उप प्रमुख, एयर मार्शल राकेश सिन्हा ने ऑपरेशन सिंदूर से सीखे गए सबक और सैन्य सोच एवं योजना में दुश्मन से "आगे रहने" की आवश्यकता पर भी बात की। बाद में बातचीत में उन्होंने कहा कि ‘एक्सरसाइज कोल्ड स्टार्ट' में तीनों सेनाओं की भागीदारी होगी। इसके अलावा उद्योग साझेदार, अनुसंधान एवं विकास भागीदार, शिक्षा जगत और अन्य लोग भी आगामी अभ्यास में भाग लेंगे। एयर मार्शल सिन्हा ने कहा, ‘‘ हम इस अभ्यास के दौरान अपने कुछ ड्रोन और ड्रोन रोधी प्रणालियों का परीक्षण करेंगे... जिसका उद्देश्य एक हवाई रक्षा प्रणाली और एक काउंटर-यूएएस (ड्रोन रोधी प्रणाली) बनाना है जो अधिक मजबूत हो।''








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