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- गाजियाबाद. गाजियाबाद नगर निगम ने सीवर की सफाई के लिए रोबोटिक सफाई प्रणाली अपनाई है और इस बाबत रोबोट 'बैंडिकूट' को तैनात किया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कदम शहर की स्वच्छता व्यवस्था को आधुनिक बनाने के प्रयासों के तहत उठाया गया है। यह पहल "एक शहर, एक ऑपरेटर" मॉडल का एक मुख्य तत्व है, जो स्वच्छता सेवाओं के प्रबंधन और उन्नयन के लिए नया प्रयोग कर रहा है। बयान के मुताबिक, गाजियाबाद नगर निगम के अधिकारियों ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में रोबोट द्वारा गटर की सफाई का एक प्रदर्शन किया। नगर आयुक्त विक्रमादित्य मलिक ने अपने प्रदर्शन में मुख्यमंत्री को इस परियोजना से अवगत कराया।यह कदम उत्तर प्रदेश में तकनीक-आधारित सीवर रखरखाव के लिए राज्यव्यापी प्रयास का विस्तार है। यह कार्यक्रम सबसे पहले फरवरी 2025 में आगरा में शुरू किया गया था, जहां ‘बैंडिकूट' रोबोट ने केवल छह महीनों में 1,500 से ज़्यादा गटर साफ़ कर दिए।
- पुरी. ओडिशा में श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने पुरी मंदिर में अधिकारियों, पुलिसकर्मियों और सेवादारों के मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। यह फैसला शनिवार शाम को मंदिर की ‘छत्तीसा निजोग' की बैठक में लिया गया। एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरबिंद कुमार पाधी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि पहले चरण में मंदिर में पुलिस और अन्य अधिकारियों द्वारा मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा तथा बाद में इसका विस्तार सेवादारों तक भी किया जाएगा।पाधी ने कहा, “किसी भी आपात स्थिति या महत्वपूर्ण संदेशों के संचार के लिए अधिकारी निर्दिष्ट स्थान पर जाकर मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर सकेंगे। मंदिर के अंदर किसी को भी मोबाइल फोन का खुलेआम इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं होगी।” पाधी ने कहा कि मंदिर प्रशासन इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई अनुशासनहीनता में लिप्त पाया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुरी जगन्नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं के मोबाइल फोन या कोई अन्य कैमरा उपकरण ले जाने पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है।
- नयी दिल्ली. मुंबई और पुणे में कमजोर मांग के कारण देश के नौ प्रमुख शहरों में जुलाई-सितंबर तिमाही में एक घरों की बिक्री चार प्रतिशत घटकर एक लाख इकाई पर आ सकती है। रियल एस्टेट आंकड़ा विश्लेषक कंपनी प्रॉपइक्विटी ने रविवार को जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए आवास बाजार का अनुमान जारी किया है। मानसून और श्राद्ध के कारण यह तिमाही आमतौर पर कमजोर मानी जाती है। आंकड़ों के अनुसार, जुलाई-सितंबर, 2025 के दौरान नौ शहरों में घरों की बिक्री चार प्रतिशत घटकर 1,00,370 इकाई रह सकती है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1,05,081 इकाई था। मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे और पुणे में आवासीय संपत्तियों की बिक्री में गिरावट की संभावना है, जबकि दिल्ली-एनसीआर, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता में मांग अधिक रहने की उम्मीद है।प्रॉपइक्विटी के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) समीर जसूजा ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि नई पेशकश लगातार कम होने के बावजूद आवास बाजार मजबूत बना हुआ है, क्योंकि बिक्री नई पेशकश से अधिक बनी हुई है।'' प्रॉपइक्विटी का अनुमान है कि ठाणे में जुलाई-सितंबर के दौरान घरों की बिक्री 28 प्रतिशत घटकर 14,877 इकाई रह सकती है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 20,620 इकाई थी। मुंबई में बिक्री आठ प्रतिशत घटकर 9,691 इकाई रह सकती है, जबकि नवी मुंबई में मांग छह प्रतिशत घटकर 7,212 इकाई रह सकती है। पुणे में बिक्री 16 प्रतिशत घटकर 17,762 इकाई रह सकती है। हालांकि, बेंगलुरु में बिक्री 21 प्रतिशत बढ़कर 16,840 इकाई पर पहुंच सकती है। हैदराबाद में बिक्री चार प्रतिशत बढ़कर 12,860 इकाई हो सकती है। दिल्ली-एनसीआर में भी बिक्री चार प्रतिशत बढ़कर 10,990 इकाई हो सकती है। चेन्नई में, बिक्री 4,675 इकाई से बढ़कर 5,406 इकाई पर पहुंचने का अनुमान है, जो 16 प्रतिशत की वृद्धि है। कोलकाता में इस जुलाई-सितंबर तिमाही में घरों की बिक्री पिछले साल की इसी अवधि के 3,774 इकाई से 25 प्रतिशत बढ़कर 4,732 इकाई पर पहुंचने का अनुमान है।
- नयी दिल्ली. वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश के लिए खरीदारी और सौर तथा इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्रों में मजबूत औद्योगिक मांग से चांदी ने इस साल अबतक 49 प्रतिशत से अधिक रिटर्न दिया है और इस मामले में सोने और शेयर बाजार को भी पीछे छोड़ दिया है। विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी है। उनका यह भी कहना है कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता और जोखिम के बीच स्वच्छ ऊर्जा/सौर/ईवी क्षेत्र में मांग मजबूत बनी हुई है। ऐसे में कुछ सावधानियों के साथ जोखिम क्षमता के आधार पर चांदी अब भी निवेश के लिहाज से अच्छी स्थिति में है। उल्लेखनीय है कि एमसीएक्स (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) में चांदी बीते वर्ष 87,233 रुपये प्रति किलोग्राम थी जो 19 सितंबर, 2025 तक 49.14 प्रतिशत उछलकर 1,30,099 रुपये प्रति किलोग्राम हो गयी।मेहता इक्विटीज लि. के उपाध्यक्ष (जिंस) राहुल कलंत्री ने कहा, ‘‘इस साल चांदी की कीमतों में तेज वृद्धि हुई, जिसका कारण अमेरिकी डॉलर में कमजोर रुख और फेडरल रिजर्व (अमेरिकी केंद्रीय बैंक) द्वारा ब्याज दर में कटौती को लेकर बढ़ती उम्मीदें थीं। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच सुरक्षित निवेश के लिए खरीदारी और सौर एवं इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्रों की मजबूत औद्योगिक मांग ने इस धातु को और मजबूत किया।'' उन्होंने कहा, ‘‘इसके साथ कम आपूर्ति की स्थिति और सोने की रिकॉर्ड तेजी से भी चांदी को समर्थन मिला। वैश्विक संकेतों के अलावा, डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपया घरेलू बाजार में चांदी को और बढ़ावा दे रहा है।'' रिटर्न के लिहाज से चांदी ने सोने और शेयर बाजार को भी पीछे छोड़ दिया है। चांदी ने सालाना आधार पर जहां इस साल अब तक 49.14 प्रतिशत का रिटर्न दिया है, वहीं सोना 43.2 प्रतिशत और शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी क्रमश: 5.74 प्रतिशत और 7.1 प्रतिशत चढ़े हैं। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लि. के वरिष्ठ प्रबंधक और विश्लेषक (जिंस एवं मुद्रा शोध) मानव मोदी ने कहा, ‘‘चांदी एक ऐसा जिंस है जिसमें बहुमूल्य और मूल धातु दोनों के गुण हैं। सफेद धातु में 2025 में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और यह 1,30,000 रुपये प्रति किलोग्राम के सर्वकालिक घरेलू उच्चस्तर पर पहुंची और 2012 के बाद कॉमेक्स में उच्चतम स्तर 40 डॉलर प्रति औंस पर पहुंची।'' उन्होंने कहा, ‘‘जहां तक तेजी के कारणों का सवाल है, मजबूत औद्योगिक मांग, मजबूत ईटीपी (एक्सचेंज ट्रेडेड प्रोडक्ट) प्रवाह, सुरक्षित निवेश की मांग और औद्योगिक धातुओं में तेजी के कारण इसमें मजबूती आई।''मोदी ने कहा, ‘‘ सौर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों में एक प्रमुख कच्चे माल के रूप में, चांदी का उपयोग होता है जिससे इसे हरित प्रौद्योगिकी में संरचनात्मक वृद्धि का लाभ मिल रहा है। इसके अलावा, चीन में नीतियों में ढील, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती, शुल्क अनिश्चितता और वैश्विक आपूर्ति में कमी सहित सहायक वृहद आर्थिक रुझानों के साथ, चांदी सुरक्षित निवेश और आर्थिक सुधार दोनों ही विषयों से लाभ उठाने की विशिष्ट स्थिति में है।'' सिल्वर इंस्टिट्यूट के अनुसार, 2025 चांदी की आपूर्ति में कमी का लगातार पांचवां साल होगा। इसका अर्थ है कि मांग, आपूर्ति से आगे निकल रही है, और इस मांग का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा औद्योगिक उपयोग से आ रहा है। यह पूछे जाने पर कि निवेश और रिटर्न के लिहाज से चांदी अब निवेशकों के लिए कितनी उपयुक्त है, कलंत्री ने कहा, ‘‘कुछ सावधानियों के साथ इसमें निवेश किया जा सकता है। स्वच्छ ऊर्जा/सौर/इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में मांग मजबूत बनी हुई है। इसके साथ, भू-राजनीतिक जोखिम, मुद्रा में कमजोर रुख बने रहने या उसके बढ़ने, आने वाले समय में ब्याज दर में कमी (इससे गैर-प्रतिफल वाली संपत्तियां अधिक आकर्षक हो जाती हैं) की उम्मीद के साथ चांदी में और तेजी आ सकती है।'' मोदी ने कहा, ‘‘उपरोक्त बुनियादी बातों को देखते हुए, मध्यम से लंबी अवधि में चांदी में और तेजी आने की संभावना है। सोने के साथ-साथ, व्यक्तिगत जोखिम क्षमता के आधार पर विविधीकरण के तौर पर चांदी को भी अपने निवेश पोर्टफोलियो में शामिल करना चाहिए। जिंस की उच्च बीटा प्रकृति को देखते हुए, गिरावट का इंतजार करना चाहिए और जोखिम क्षमता के आधार पर निवेश करना चाहिए।''
- नयी दिल्ली. भारत का ऑनलाइन घरेलू सेवा बाजार 18-22 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़कर वित्त वर्ष 2029-30 तक 85-88 अरब रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी देते हुए कहा गया कि इस बाजार को सुविधा, विश्वसनीयता और गति की बढ़ती शहरी मांग से समर्थन मिल रहा है। परामर्श फर्म रेडसीर ने कहा कि ‘क्विक कॉमर्स' को व्यापक रूप से अपनाने के बाद, ‘तत्काल घरेलू सेवा' भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में अगले क्षेत्र के रूप में उभर रही है। समय की कमी से जूझ रहे शहरी उपभोक्ताओं के बीच यह तेजी से लोकप्रिय हो रही है।भारत का समग्र घरेलू सेवा बाजार वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 5,100-5,210 अरब रुपये था। अभी भी इस क्षेत्र में असंगठित क्षेत्र का प्रभुत्व है। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘तत्काल घरेलू सेवा एक मांग आधारित घरेलू सहायता प्रणाली की तरह काम करती है, जो असंगठित घरेलू सहायकों और सेवा मंचों के बीच की खाई को पाटती है।'' इसमें आगे कहा गया कि भारत के घरेलू सेवा क्षेत्र में वित्त वर्ष 2024-25 तक ऑनलाइन खंड कुल कारोबार का एक प्रतिशत से भी कम था। हालांकि, अब ऑनलाइन खंड तेजी से बढ़ रहा है और इसके 18-22 प्रतिशत की अनुमानित वार्षिक वृद्धि दर के साथ 2029-30 तक 88 अरब रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
- नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को लोगों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में की गई अपील के अनुरूप, दैनिक उपयोग की वस्तुओं में स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का आग्रह किया। शाह ने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को पूरा करने में अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों की अहम भूमिका होगी। गृह मंत्री ने कहा कि राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने स्वदेशी अपनाने का आह्वान किया और बताया कि कैसे अगली पीढ़ी का जीएसटी आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा। शाह ने कहा कि विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कृषि, स्वास्थ्य, कपड़ा और ‘मैन मेड फाइबर' जैसे क्षेत्रों में जीएसटी कम करने की पहल की गई है।शाह ने ‘जीएसटी बचत उत्सव' हैशटेग के साथ ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की सिद्धि में अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों की बड़ी भूमिका होने वाली है। मोदी जी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में स्वदेशी अपनाने का आह्वान करते हुए बताया कि कैसे अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों से आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी। कृषि, स्वास्थ्य, कपड़ा, ‘मैन-मेड फाइबर' जैसे क्षेत्रों में जीएसटी घटाकर विनिर्माण को बढ़ावा देने की पहल की गई है। आप भी अपने दैनिक उपयोग की वस्तुओं में स्वदेशी को अपनाकर हर घर को स्वदेशी का प्रतीक बनाएं और आत्मनिर्भर राष्ट्र के निर्माण में योगदान दें।'' जीएसटी दरों में कटौती लागू होने से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने की पुरजोर वकालत की। उन्होंने कहा कि अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार भारत की वृद्धि गाथा को गति देंगे, कारोबारी सुगमता को बढ़ाएंगे और अधिक निवेशकों को आकर्षित करेंगे। मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि नवरात्रि के पहले दिन से 'जीएसटी बचत उत्सव' शुरू होगा और आयकर छूट के साथ यह ज्यादातर लोगों के लिए ''दोहरा लाभ'' होगा।
- नयी दिल्ली. पतंजलि फूड्स लिमिटेड ने सोमवार से सोयाबीन बड़ी सहित विभिन्न उत्पादों की अधिकतम खुदरा कीमतों (एमआरपी) में कमी की है। कंपनी ने जीएसटी कटौती का लाभ उपभोक्ताओं को देने के तहत यह कदम उठाया। पतंजलि फूड्स ने रविवार को एक बयान में जीएसटी युक्तिकरण के अनुरूप अपने उत्पाद पोर्टफोलियो के एमआरपी को कम करने की जानकारी दी। बयान में कहा गया कि संशोधित कीमतें खाद्य और गैर-खाद्य श्रेणियों की पूरी श्रृंखला पर लागू होंगी।पतंजलि फूड्स ने सोयाबीन बड़ी की कीमतें भी घटाई हैं। न्यूट्रेला चंक्स, मिनी चंक्स और ग्रैन्यूल्स (एक किलो पैक) सोमवार से 190 रुपये में बिकेंगे, जो अभी 210 रुपये में मिलते हैं। इसके अलावा 200 ग्राम वाले पैक में तीन रुपये की छूट मिलेगी। बिस्कुट और कुकीज श्रेणी में दूध बिस्कुट (35 ग्राम) की एमआरपी पांच रुपये से घटाकर 4.5 रुपये कर दी गई है। नूडल्स में पतंजलि ट्विस्टी टेस्टी नूडल्स (50 ग्राम) अब 10 रुपये की जगह 9.35 रुपये में बेचा जाएगा। पतंजलि फूड्स ने दांतों और बालों की देखभाल के उत्पादों की दरें भी कम कर दी हैं।दंत कांति नेचुरल टूथपेस्ट 200 ग्राम की एमआरपी 120 रुपये से घटाकर 106 रुपये कर दी गई है। केश कांति आंवला हेयर ऑयल (100 मिली) की खुदरा कीमत सोमवार से 48 रुपये से घटकर 42 रुपये हो जाएगी। इसी प्रकार, स्वास्थ्य एवं आरोग्य उत्पादों में आंवला जूस (एक लीटर) सोमवार से 140 रुपये में बेचा जाएगा, जबकि वर्तमान में इसकी कीमत 150 रुपये है। सोमवार से स्पेशल च्यवनप्राश के एक किलोग्राम पैक की कीमत 337 रुपये होगी, जो अभी 360 रुपये है। डेयरी उत्पादों में पतंजलि ने गाय के घी (900 मिली) की कीमत 780 रुपये से घटाकर 732 रुपये कर दी है।
- पणजी. गोवा प्रबंधन संस्थान और ब्रिटेन के किंग्स्टन विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में पाया गया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध तथा अस्थिर कोयला बाजार जैसे वैश्विक संकट भारत में बिजली की लागत को सीधे प्रभावित कर रहे हैं और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उच्च प्रीमियम का भुगतान करना पड़ रहा है। अध्ययन में विशेष रूप से इस बात की पड़ताल की गई कि भारत के ‘डे अहेड' बाजार में बिजली की कीमतें ‘रियल टाइम मार्केट' की कीमतों से लगातार अधिक क्यों हैं। अध्ययन में पता चला कि कोयला मूल्य में उतार-चढ़ाव, भू-राजनीतिक जोखिम, घरेलू मांग परिदृष्य और नीतिगत अनिश्चितता इसके प्रमुख कारण हैं। रियल टाइम मार्केट में बिजली का व्यापार और वास्तविक प्रदायगी के समय के आसपास, आमतौर पर जरूरत से एक घंटा पहले किया जाता है। ‘डे-अहेड मार्केट' (डीएएम) में बिजली वास्तविक उपयोग होने से एक दिन पहले खरीदी और बेची जाती है।प्रतिष्ठित पत्रिका ‘एनर्जी इकोनॉमिक्स' में प्रकाशित अध्ययन में पहली बार यह साबित करने का दावा किया गया है कि ये झटके महत्वपूर्ण जोखिम प्रीमियम में तब्दील हो जाते हैं, जिसका अर्थ है कि भारतीय परिवार और व्यवसाय निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उच्च जोखिम प्रीमियम का भुगतान कर रहे हैं। गोवा प्रबंधन संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर प्रकाश सिंह के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध ने जोखिम प्रीमियम और बाजार में अस्थिरता को काफी हद तक बढ़ा दिया है। सिंह ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी ने आपूर्ति पक्ष की अनिश्चितता को बढ़ाकर जोखिम प्रीमियम को बढ़ा दिया, जबकि बाद में मूल्य अध्ययननों ने उन्हें काफी कम कर दिया। भारत में, एक दिन पहले की बिजली की कीमतें औसतन वास्तविक समय की कीमतों से काफी अधिक होती हैं, जिसके परिणामस्वरूप ‘जोखिम प्रीमियम' बढ़ जाता है। इससे यह संकेत मिलता है कि उपभोक्ता आपूर्ति अनिश्चितता से बचने के लिए अतिरिक्त भुगतान करने को तैयार रहें।''उन्होंने बताया कि व्यस्त समय (शाम 6 से 11 बजे तक) के दौरान जोखिम प्रीमियम काफी अधिक होता है तथा सप्ताहांत में 13 प्रतिशत तक बढ़ जाता है, जो आपूर्ति की गंभीर कमी को दर्शाता है। सिंह ने कहा, ‘‘भू-राजनीतिक जोखिम और आर्थिक नीति में अनिश्चितता दोनों की वजह से जोखिम प्रीमियम बढ़ने की बात सामने आई है। भारत के बिजली बाजार वैश्विक उथल-पुथल और घरेलू आपूर्ति बाधाओं से जूझ रहे हैं। हमारे अध्ययन में इस बात पर जोर दिया गया है कि तेज विविधीकरण और बेहतर बाज़ार के बिना भारतीय उपभोक्ताओं और व्यवसायों को दूरवर्ती भू-राजनीतिक संकटों से उत्पन्न अस्थिरता का ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ता है।” उन्होंने कहा, ‘‘भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा और सामर्थ्य सुनिश्चित करने के लिए इन कमजोरियों का अभी समाधान करना आवश्यक है।'' इस अध्ययन पत्र के सह-लेखक किंग्स्टन विश्वविद्यालय के वरिष्ठ व्याख्याता जलाल सिद्दीकी ने कहा कि इस अध्ययन के निष्कर्षों के कई महत्वपूर्ण आवश्यकताएं बताई गई हैं, जिनमें भारत के ऊर्जा उत्पादन को कोयले से अलग करके उसमें विविधता लाने और भंडारण समाधानों के साथ नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश करने की आवश्यकता शामिल है। उन्होंने कहा, ‘‘यह अध्ययन नियामकों को बिजली बाजारों को नया स्वरूप देने के लिए साक्ष्य प्रदान कर सकता है ताकि अकुशलताएं कम से कम हों और अस्थिरता का बेहतर प्रबंधन हो सके।”
- मापुसा . उत्तरी गोवा में केले के व्यापार में जल्द ही बदलाव देखने को मिलेगा क्योंकि गोवा सरकार मापुसा शहर में फलों को वैज्ञानिक विधि से पकाने के लिए एक कक्ष (चेंबर) स्थापित करने जा रही है। इससे ग्राहकों को सुरक्षित और रसायन मुक्त फल उपलब्ध होंगे, किसानों की आमदनी बढ़ेगी, साथी ही फलों की बर्बादी भी कम होगी। अधिकारियों ने बताया कि यह कक्ष राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत बनाया गया है, जिसमें केंद्र सरकार ने 35 प्रतिशत सब्सिडी दी है। अधिकारियों के अनुसार, यह सुविधा अगले महीने तक उपयोग के लिए तैयार हो जाएगी। राज्य के कृषि निदेशक संदीप फोल्डेसाई ने शनिवार को बताया, "इस चेंबर की स्थापना का मुख्य उद्देश्य उत्तरी गोवा में उपभोक्ताओं को वैज्ञानिक तरीके से पके फल उपलब्ध कराना है।फलों को प्राकृतिक प्रक्रिया से पकाया जाएगा, जिससे उनके पोषण मूल्य में वृद्धि होगी।" उन्होंने कहा कि यह सुविधा स्थानीय किसानों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी ताकि बाजार में उन्हें अपने फलों के लिए बेहतर दाम मिल सकें। अधिकारियों के अनुसार, इस चेंबर में हर चार दिन में 60 टन केले पकाए जा सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार, पकाने के लिए इथिलीन गैस का उपयोग किया जाएगा और चेंबर में सेंसर लगे होंगे। फोल्डेसाई ने कहा, “यह केले पकाने का वैज्ञानिक और स्वच्छ तरीका है। इससे पके केले स्वास्थ्य के लिहाज से भी सुरक्षित होंगे।” अधिकारी ने बताया कि मापुसा की फल मंडी में रोजाना 10 से 12 टन केले पहुंचते हैं और यह सुविधा निजी किसानों के लिए भी उपलब्ध होगी। उत्तर गोवा के फल विक्रेताओं के लिए यह सुविधा लंबे समय से प्रतीक्षित राहत लेकर आई है।मापुसा के फल विक्रेता अमेय नाटेकर ने कहा, “हम खुश हैं कि सरकार ने केले पकाने के चेंबर की वर्षों पुरानी मांग को पूरा किया है। यह दशहरा तक चालू हो जाएगा।” उन्होंने बताया कि यह दो करोड़ रुपये की परियोजना है, जिसे मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और कृषि मंत्री रवि नाइक के सहयोग से तेजी से पूरा किया गया।
- लखनऊ. उत्तर प्रदेश के कपिलवस्तु स्थित पिपरहवा में रखे भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का रूस के काल्मिकिया में प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य इन अवशेषों को प्रदर्शनी के लिए ले जाने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। यहां रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, केंद्र सरकार का संस्कृति मंत्रालय आगामी 24 सितंबर से एक अक्टूबर तक रूस के काल्मिकिया में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का प्रदर्शन आयोजित कर रहा है। इसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने सूचित किया है कि उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री मौर्य पवित्र अवशेषों को रूस ले जाने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।मौर्य प्रतिनिधिमंडल के साथ 23 सितंबर को भारतीय वायुसेना के विमान से रूस रवाना होंगे।प्रतिनिधिमंडल अपने साथ भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा (कपिलवस्तु) अवशेषों को ले जाएगा। बयान के अनुसार, काल्मिकिया ऐसा क्षेत्र है जहां बौद्ध धर्मावलम्बियों की खासी आबादी है और वहां बौद्ध धर्म केवल मजहब ही नहीं बल्कि संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है। मौर्य ने बताया कि कपिलवस्तु अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय यात्रा भारत की ‘सॉफ्टपावर' और सांस्कृतिक कूटनीति का प्रभावी माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा, “ इससे पहले थाईलैंड और वियतनाम में भगवान बुद्ध के अवशेषों की प्रदर्शनी आयोजित की जा चुकी है। थाईलैंड और वियतनाम की सफलता ने वैश्वक स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ायी है।” मौर्य ने बताया कि रूस में होने वाली प्रदर्शनी इस गौरवशाली परम्परा को आगे बढ़ाएगी और भारत की सांस्कृतिक छवि को और निखारेगी जिससे द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने के साथ सांस्कृतिक व राजनीतिक रिश्तों में और गहराई आएगी।
- नयी दिल्ली. देश में गोद लिये जाने की प्रतीक्षा कर रहे बच्चों में से करीब दो-तिहाई विशेष देखभाल की आवश्यकता वाले बच्चे हैं, जबकि पिछले कुछ वर्षों में गोद लेने की कुल संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई है। सरकार के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। महिला एवं बाल विकास (डब्ल्यूसीडी) मंत्रालय की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में 3,684 बच्चे गोद लेने के लिए कानूनी रूप से अनुमोदित थे और 2,177 बच्चे केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) के माध्यम से गोद लेने के लिए उपलब्ध थे। इन 2,177 बच्चों में से 1,423 या 65 प्रतिशत विशेष देखभाल की आवश्यकता वाले बच्चे थे। विशेष देखभाल की आवश्यकता वाले बच्चों को गोद लेने के लिए लगातार प्रयासों और जागरूकता अभियानों के बावजूद, आधिकारिक अभिलेख बताते हैं कि इन बच्चों को गोद लेने के मामले अपेक्षाकृत बहुत कम हैं।एक आरटीआई के तहत प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 2018-19 में ऐसे बच्चों के दत्तक ग्रहण के 401 मामले थे, लेकिन अगले वर्ष यह संख्या घटकर 166 रह गई। इसके बाद से यह संख्या हर साल 300 से 370 के बीच रही है। वर्ष 2024-25 में विशेष देखभाल की आवश्यकता वाले 328 बच्चों को गोद लिया गया, जिनमें ‘‘अन्य लिंग'' श्रेणी में सूचीबद्ध एक बच्चा भी शामिल है। वर्ष 2014 के बाद यह पहली बार हुआ है। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, भारत में समग्र दत्तक ग्रहण व्यवस्था को 2024-25 में बड़ा प्रोत्साहन मिला और इस दौरान 4,515 दत्तक ग्रहण हुए और यह आंकड़ा 2015-16 के बाद से सबसे अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2024 में 4,266 गोद लेने की घटनाएं दर्ज की गईं।अंतर-देशीय दत्तक ग्रहण में 93 बच्चों को भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (ओसीआई), 59 को अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) और 306 बच्चों को विदेशी नागरिकों ने गोद लिया। रिपोर्ट में दत्तक ग्रहण प्रणाली में हुए अहम बदलावों का भी उल्लेख है।उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद कारा ने जुलाई 2024 में एक ‘‘पहचान प्रकोष्ठ'' स्थापित किया, ताकि सभी बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआई) में रह रहे बच्चों को 'केयरिंग्स पोर्टल' पर दर्ज किया जा सके। बढ़ते दत्तक ग्रहण तंत्र को समर्थन देने के लिए विशेषीकृत दत्तक ग्रहण एजेंसियों की संख्या 495 से बढ़कर 698 हो गई, जो 588 जिलों को सम्मेलित करती हैं। बाल कल्याण समितियां 480 से बढ़कर 665 हो गईं और जिला बाल संरक्षण इकाइयों की संख्या 756 हो गई।कारा विशेष देखभाल की आवश्यकता वाले और बड़े बच्चों के दत्तक ग्रहण को प्रोत्साहित करने के लिए जागरूकता अभियान भी चला रहा है। वर्ष 2024 में विशेष देखभाल की आवश्यकता वाले 364 बच्चों को भावी दत्तक माता-पिता द्वारा ‘‘आरक्षित'' किया गया, जिससे धीरे-धीरे रुचि बढ़ने का संकेत मिला है।
- मैसुरु. वर्ष का वह समय एक बार फिर आ गया है, जब यह ऐतिहासिक नगरी सालाना दशहरा उत्सव की तैयारियों में रंग-बिरंगी रोशनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सज उठती है। वर्ष 1610 में शुरू हुई नवरात्रि पर्व की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार भी शहर में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की शृंखला आरंभ हो गई है, जो न सिर्फ स्थानीय निवासियों बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। ‘नाडा हब्बा' (राज्य उत्सव) के रूप में मनाए जाने वाले इस पर्व में इस बार कर्नाटक की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं के साथ-साथ शाही वैभव की झलक भी देखने को मिलेगी । चंद्र पंचांग के अनुसार इस वर्ष का ग्यारह दिवसीय दशहरा उत्सव 22 सितंबर से शुरू होकर विजयादशमी यानी दो अक्टूबर को समाप्त होगा। दशहरा को इस क्षेत्र का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है।यह त्योहार तत्कालीन मैसूर राजवंश के शाही संरक्षण में मनाया जाता था। अब यह त्योहार कर्नाटक सरकार के तत्वावधान में मनाया जाता है। मुश्ताक 22 सितंबर को सुबह 10:10 से 10:40 के शुभ वृश्चिक लग्न में चामुंडी हिल्स स्थित चामुंडेश्वरी मंदिर में वेद मंत्रोच्चार के बीच देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर दशहरा समारोह का उद्घाटन करेंगी। इस मौके पर मुख्यमंत्री सिद्दरमैया, उनके कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
- श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को कहा कि पिछले पांच वर्षों में किए गए संरक्षण प्रयासों के कारण यहां की प्रसिद्ध डल झील साफ हुई है। इसके साथ ही उन्होंने पर्यावरणीय संसाधनों के साथ आर्थिक विकास को समन्वित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उपराज्यपाल ने कहा कि जलाशय के एक-तिहाई से ज़्यादा हिस्से का पुनरुद्धार हो चुका है और इसका खुला क्षेत्र पहली बार 20 वर्ग किलोमीटर से ज़्यादा हो गया है। ‘सेवा पर्व' के तहत सिन्हा डल झील सफ़ाई अभियान में शामिल हुए।उपराज्यपाल ने ‘एक्स' पर कहा, ‘‘सेवा पर्व के तहत, डल झील सफ़ाई अभियान में शामिल हुआ। पिछले पांच वर्षों के दौरान, डल-निगीन झील और इसके जलग्रहण क्षेत्र के संरक्षण का काम मिशन मोड में किया गया है। डल झील साफ हुई है और बड़ी संख्या में घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित कर रही है।'' उन्होंने कहा कि झील के एक-तिहाई से ज़्यादा हिस्से का पुनरुद्धार किया जा चुका है।उपराज्यपाल ने कहा, ‘‘बड़े क्षेत्रों से लिली के पौधों को हटा दिया गया है और डल झील का खुला क्षेत्र पहली बार 20.3 वर्ग किलोमीटर से ज़्यादा हो गया है।'' सिन्हा ने नागरिकों से सामुदायिक भागीदारी के ज़रिए झीलों, नदियों और अन्य जल निकायों के संरक्षण का आह्वान किया। सिन्हा ने नागरिकों से सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से झीलों, नदियों और अन्य जलाशयों के संरक्षण का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे प्राकृतिक संसाधन हमें अतीत में की गई गलतियों से सबक सीखने की याद दिला रहे हैं। हमें प्रकृति के नाज़ुक संतुलन का सम्मान करना चाहिए और अपनी झीलों और नदियों को साफ़ करने के लिए ठोस प्रयास करने चाहिए।'' उपराज्यपाल ने आर्थिक विकास को पर्यावरणीय संसाधनों के साथ समन्वित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।उन्होंने कहा, ‘‘विकास एकतरफ़ा नहीं हो सकता। अतिक्रमण, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और अत्यधिक दोहन हमारी नदियों और झीलों के लिए एक बड़ा खतरा बन रहे हैं। प्राकृतिक संसाधनों के तेज़ी से घटते स्तर और हमारी पारिस्थितिकी के क्षरण जैसी प्रमुख चुनौतियों का समाधान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।'' सिन्हा ने कहा कि आर्थिक विकास और पारिस्थितिक अखंडता को सरकारी नीति में शामिल किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि झीलें और नदियां मानवता के लिए आवश्यक जीवनरेखा हैं और नागरिकों को सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से इनका संरक्षण करना चाहिए। सिन्हा ने कहा कि झील संरक्षण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एलसीएमए) द्वारा शुरू की गई अनेक परियोजनाएं भी डल निवासियों के जीवन में बदलाव ला रही हैं।
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नयी दिल्ली. जीएसटी दरों में कटौती लागू होने से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने की पुरजोर वकालत की। उन्होंने कहा कि अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार भारत की वृद्धि गाथा को गति देंगे, कारोबारी सुगमता को बढ़ाएंगे और अधिक निवेशकों को आकर्षित करेंगे। मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि नवरात्रि के पहले दिन से 'जीएसटी बचत उत्सव' शुरू होगा और आयकर छूट के साथ यह ज्यादातर लोगों के लिए ''दोहरा लाभ'' होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि विकास की दौड़ में सभी राज्य समान हितधारक होंगे। उन्होंने राज्यों से 'आत्मनिर्भर भारत' और स्वदेशी अभियानों को ध्यान में रखते हुए विनिर्माण को गति देने का आग्रह किया। मोदी ने कहा, ''नवरात्रि के पहले दिन, देश आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। कल सूर्योदय के साथ, अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार लागू हो जाएंगे। कल से 'जीएसटी बचत उत्सव' शुरू होगा।'' उन्होंने आगे कहा, ''आप अपनी पसंद की वस्तुएं ज्यादा आसानी से खरीद पाएंगे... इससे गरीब, मध्यम वर्ग, नव मध्यम वर्ग, युवा, किसान, महिलाएं, व्यापारी और दुकानदार लाभान्वित होंगे।'' मोदी ने कहा कि त्योहारों के इस मौसम में सभी की खुशियां बढ़ेंगी।
उन्होंने अगली पीढ़ी के माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों के लिए सभी को बधाई दी। मोदी ने कहा, ''ये सुधार भारत की वृद्धि गाथा को गति देंगे, कारोबारी सुगमता को बढ़ाएंगे और अधिक निवेशकों को आकर्षित करेंगे।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भारत ने 2017 में जीएसटी सुधारों की ओर कदम बढ़ाया, तो इतिहास रचने की एक नई शुरुआत हुई। उन्होंने कहा कि जीएसटी ने 'एक राष्ट्र-एक कर' के सपने को साकार किया। मोदी ने इस बात का उल्लेख भी किया कि कैसे करों और टोल के जाल ने व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए कठिनाइयां पैदा की हैं। उन्होंने 12 लाख रुपये तक की आय पर आयकर छूट और जीएसटी सुधारों का हवाला देते हुए कहा कि यह गरीबों, नव-मध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग के लिए दोहरा लाभ है। उन्होंने यह भी कहा कि जीएसटी सुधारों से छोटे और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को बड़ा लाभ होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने देश के लोगों से स्वदेशी सामान बेचने और खरीदने में गर्व महसूस करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी आंदोलन की तरह, भारत की समृद्धि भी स्वदेशी के मंत्र से मजबूत होगी। जीएसटी सुधारों के लागू होने से रसोई के सामान से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक, दवाओं और उपकरणों से लेकर ऑटोमोबाइल तक, लगभग 375 वस्तुओं पर दरें सोमवार से घट जाएंगी। उपभोक्ताओं को एक बड़ा तोहफा देते हुए, केंद्र और राज्यों की जीएसटी परिषद ने 22 सितंबर, यानी नवरात्रि के पहले दिन से जीएसटी की दरें कम करने का फैसला किया था। -
नयी दिल्ली. अमेरिका में अध्ययन करने के इच्छुक लोगों के पिछले एक वर्ष में पूछताछ करने में 46 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है, जबकि पिछले दो वर्षों में कनाडा में अध्ययन से संबंधित पूछताछ में लगभग 75 प्रतिशत की कमी आई है। ‘आईडीपी एजुकेशन' के शीर्ष अधिकारियों ने यह जानकारी दी। वर्ष 1969 में ऑस्ट्रेलियाई सरकार द्वारा स्थापित, आईडीपी एजुकेशन अंतरराष्ट्रीय शिक्षा सेवाओं में एक वैश्विक अग्रणी संस्थान है जो छात्रों को विदेश में अध्ययन करने के उनके लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है। कंपनी ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, आयरलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे गंतव्यों के लिए पाठ्यक्रम और विश्वविद्यालय चयन, आवेदन जमा करने, वीजा प्रक्रिया और प्रस्थान-पूर्व योजना बनाने पर निःशुल्क विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान करती है। यह अंग्रेजी भाषा दक्षता परीक्षा (आईईएलटीएस) भी आयोजित करती है। ‘आईडीपी एजुकेशन' के दक्षिण एशिया, कनाडा और लैटिन अमेरिका (एलएटीएएम) के क्षेत्रीय निदेशक पीयूष कुमार के अनुसार, भू-राजनीतिक स्थिति ने छात्रों की अमेरिका और कनाडा जाने की योजनाओं को प्रभावित किया है। कुमार ने ‘ कहा, ‘‘अगर हम भू-राजनीतिक स्थिति की बात करें, तो मुझे लगता है कि यह मुख्य रूप से अमेरिका से संबंधित है और हमने देखा है कि पिछले छह से 12 महीनों में इस स्थिति ने अमेरिका जाने की योजना बना रहे छात्रों की योजनाओं को स्पष्ट रूप से प्रभावित किया है। यह वास्तव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आने से पहले ही शुरू हो गया था, इसलिए हमने देखा कि जून के बाद से वीजा अनुमोदन दरों में गिरावट आई है।'' उन्होंने कहा, ‘‘आमतौर पर, चुनावी वर्ष के दौरान, हम देखते हैं कि हर बार किसी न किसी कारण से वीजा अनुमोदन दर कम हो जाती है। लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के आने के बाद, मुझे लगता है कि वे कुछ बदलाव की योजना बना रहे हैं।'' आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कुमार ने कहा कि मई 2024 की तुलना में इस साल मई में अमेरिका के लिए पूछताछ में 46.4 प्रतिशत की गिरावट आई है। पिछले दो वर्षों में कनाडा के लिए पूछताछ में भी लगभग 70 से 75 प्रतिशत की गिरावट आई है। उन्होंने कहा, ‘‘कनाडा में पिछले दो वर्षों में बहुत सारे बदलाव हुए हैं। इसकी शुरुआत तब हुई जब (पूर्व कनाडाई प्रधानमंत्री) जस्टिन ट्रूडो और भारत सरकार के बीच विवाद हुआ। लेकिन समय के साथ, हुआ यह है कि कनाडा भी अमेरिकी शुल्क (टैरिफ) से प्रभावित हुआ है और कनाडा का 80 प्रतिशत निर्यात अमेरिका को होता है, इसलिए वे बहुत बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘लोग सोचते हैं कि कनाडा जाने का यह सही समय नहीं है, क्योंकि उन्होंने अध्ययन के बाद के काम को भी केवल छह श्रेणियों तक सीमित कर दिया है और यहीं पर बहुत सारे छात्र सोचते हैं कि यदि वे कहीं और जाकर अध्ययन करेंगे, तो अध्ययन के बाद कोई काम नहीं होगा और उन्हें वापस आना पड़ेगा।'' कुमार ने कहा, कनाडा सरकार ने कहा है कि ये उपाय 2027 तक लागू रहेंगे और इसके बाद वे इस नीति पर पुनर्विचार करेंगे। उन्होंने बताया कि अगले दो साल कनाडा के लिए भी नरम रुख रहने की संभावना है। उन्होंने कहा, ‘‘यदि आप अन्य बड़े गंतव्यों, जैसे ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया, पर नजर डालें, तो कुल मिलाकर मांग बरकरार है, वहां जाने वाले छात्रों की संख्या भी पूरी तरह बरकरार है।'' कुमार ने कहा, ‘‘वास्तव में ऑस्ट्रेलिया ने औपचारिक रूप से घोषणा की है कि इस वर्ष वे छात्रों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में नौ प्रतिशत की वृद्धि करने जा रहे हैं, इसलिए वे प्रबंधित वृद्धि की बात कर रहे हैं, वे अधिक छात्रों को प्रवेश की अनुमति देंगे, लेकिन प्रबंधित तरीके से।'' हर साल, लगभग 1,00,000 आईडीपी छात्र दुनियाभर के 800 से अधिक विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं। आईडीपी की ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, आयरलैंड और न्यूजीलैंड के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों के साथ 800 से ज्यादा साझेदारियां हैं। आईडीपी के भारत में 63 शहरों में 73 कार्यालय हैं।
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नयी दिल्ली. वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान पर सभी राज्यों का खर्च वित्त वर्ष 2013-14 के 6,26,849 करोड़ रुपये से 2.49 गुना बढ़कर 2022-23 में 15,63,649 करोड़ रुपये हो गया। राज्यों के वित्त पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। इसके मुताबिक, राज्यों के राजस्व व्यय का एक बड़ा हिस्सा या तो प्रतिबद्ध व्यय है या पहले से तय है। वेतन, पेंशन और सार्वजनिक ऋण तथा देनदारियों पर ब्याज भुगतान को ‘प्रतिबद्ध व्यय' माना जाता है।
वित्त वर्ष 2013-14 से 2022-23 तक 10 साल के दौरान राज्यों का राजस्व व्यय, उनके कुल व्यय का 80-87 प्रतिशत था। संयुक्त जीएसडीपी के प्रतिशत के रूप में यह लगभग 13-15 प्रतिशत था। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने राज्य वित्त 2022-23 पर अपनी तरह के पहले प्रकाशन में कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 में राजस्व व्यय, कुल व्यय का 84.73 प्रतिशत और संयुक्त जीएसडीपी का 13.85 प्रतिशत था। वित्त वर्ष 2022-23 में, 35,95,736 करोड़ रुपये के कुल राजस्व व्यय में प्रतिबद्ध व्यय 15,63,649 करोड़ रुपये था। इसके अलावा सब्सिडी पर 3,09,625 करोड़ रुपये और अनुदान सहायता पर 11,26,486 करोड़ रुपये खर्च हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, वेतन सबसे बड़ा घटक था, उसके बाद पेंशन व्यय और ब्याज भुगतान का स्थान था।
हालांकि, नौ राज्यों (आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल) में ब्याज भुगतान पेंशन व्यय से अधिक था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वित्त वर्ष 2022-23 में 17 राज्यों ने राजस्व अधिशेष, पांच राज्यों ने राजस्व घाटे और छह ने शून्य राजस्व घाटे का लक्ष्य रखा है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रविवार को दुर्गा पूजा शुरू होने से पहले मनाए जाने वाले महालया के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “आप सभी को महालया की शुभकामनाएं। जैसे-जैसे दुर्गा पूजा के पवित्र दिन नजदीक आ रहे हैं, हमारा जीवन प्रकाश और उद्देश्य से भर जाए। मां दुर्गा का दिव्य आशीर्वाद अटूट शक्ति, स्थायी आनंद और अद्भुत स्वास्थ्य प्रदान करे।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लिखा, “महालया के पावन अवसर पर मैं सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। मां दुर्गा का अपार स्नेह हर घर में आनंद, शक्ति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य के सभी दिव्य आशीर्वाद प्रदान करे।”वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी सोशल मीडिया पर लोगों को शुभकामनाएं दीं। महालया के मौके पर ममता बनर्जी ने एक गीत भी शेयर किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “जागो दुर्गा, जागो, दस शस्त्रों की धारक। महालया के पावन अवसर पर मैं सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देती हूं।”महालया देवी पक्ष की शुरुआत करता है, जो देवी दुर्गा का दस दिवसीय उत्सव है और दुर्गा पूजा के साथ समाप्त होता है। यह राक्षस राजा महिषासुर का वध करने के लिए देवी दुर्गा के पृथ्वी पर आगमन का संकेत देता है। यह एक शुभ दिन है जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।पश्चिम बंगाल में, इस दिन को भोर से पहले ‘महिषासुर मर्दिनी’ के प्रसारण के लिए जाना जाता है, जो देवी का आह्वान करने वाले भजनों और मंत्रों का एक कार्यक्रम है, और इसे सुनना सभी के लिए एक प्रिय परंपरा है। महालया के दिन मूर्तिकार आमतौर पर ‘चोखू दान’ नामक अनुष्ठान में देवी दुर्गा की आंखों का चित्र बनाते हैं।पश्चिम बंगाल में हजारों लोग ‘तर्पण’ करते हैं, जो दुर्गा पूजा के साथ त्योहारों के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन की शुरुआत हुगली नदी और राज्य भर के अन्य जलाशयों के तट पर लोगों ने अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ की।- -
नई दिल्ली। स्वच्छ भारत अभियान और प्रधानमंत्री के "स्वच्छता ही सेवा" (एसएचएस) आह्वान के अंतर्गत भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी ) ने 20 सितंबर 2025 को देश भर में अंतर्राष्ट्रीय तटीय सफाई दिवस 2025 मनाया। एनसीसी कैडेटों, एनएसएस सदस्यों, स्कूल और कॉलेज के छात्रों सहित 26,000 से अधिक स्वयंसेवकों ने तटीय स्वच्छता को बहाल करने के लिए समुद्र तट सफाई अभियान में शामिल हुए और कूड़ा-कचरा तथा समुद्री मलबा हटाया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को सतत कार्यों के प्रति जागरूक करना और नाजुक तटीय इकोसिस्टम की रक्षा के महत्व के बारे में जागरूक करना भी था।संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) और दक्षिण एशिया सहकारी पर्यावरण कार्यक्रम (एसएसीईपी) के तत्वावधान में सितंबर के तीसरे शनिवार को विश्व स्तर पर मनाया जाने वाला यह अभियान व्यापक सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से समुद्री प्रदूषण का मुकाबला करता है। आईसीजी 2006 से इसका राष्ट्रीय समन्वयक रहा है और लगातार पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दे रहा है। इस अभियान ने 11,000 किलोमीटर लंबे समुद्र तट की सुरक्षा और स्वच्छ भारत अभियान के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए देश की प्रतिबद्धता को उजागर किया।
- -अरुणाचल प्रदेश की विशाल जलविद्युत क्षमता के उपयोग के लिए, प्रधानमंत्री ईटानगर में 3,700 करोड़ रुपये से अधिक की दो प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे-प्रधानमंत्री जीवन स्तर में सुधार के लिए कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य और अन्य विकास परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे- प्रधानमंत्री त्रिपुरा में, माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर परिसर के विकास कार्यों का दौरा और उद्घाटन करेंगेनई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 22 सितम्बर को अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा का दौरा करेंगे। वे ईटानगर में 5,100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली अनेक विकास परियोजनाओं की अधारशिला रखेंगे। प्रधानमंत्री एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।इसके बाद, वे त्रिपुरा का दौरा करेंगे और पूजा-अर्चना करेंगे तथा माताबाड़ी में 'माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर परिसर' के विकास कार्यों का उद्घाटन करेंगे।अरुणाचल प्रदेश में प्रधानमंत्रीक्षेत्र में विशाल जलविद्युत क्षमता का उपयोग करने और निरन्तर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए, प्रधानमंत्री ईटानगर में 3,700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली दो प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। हीओ जलविद्युत परियोजना (240 मेगावाट) और तातो-I जलविद्युत परियोजना (186 मेगावाट) अरुणाचल प्रदेश के सियोम उप-बेसिन में बनाई जाएंगी।प्रधानमंत्री तवांग में एक अत्याधुनिक कन्वेंशन सेंटर की आधारशिला भी रखेंगे। सीमावर्ती जिले तवांग में 9,820 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित यह केन्द्र राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों, सांस्कृतिक उत्सवों और प्रदर्शनियों की मेजबानी के लिए एक ऐतिहासिक इमारत के रूप में कार्य करेगा। 1,500 से अधिक प्रतिनिधियों की मेजबानी करने की क्षमता के साथ, यह केन्द्र वैश्विक मानकों को पूरा करेगा और क्षेत्र की पर्यटन और सांस्कृतिक संभावना में सहयोग करेगा।प्रधानमंत्री 1,290 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली अनेक प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का भी शुभारंभ करेंगे, जो कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, अग्नि सुरक्षा, कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावासों सहित विभिन्न क्षेत्रों को लाभान्वित करेंगी। इन पहलों से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने, जीवन स्तर में सुधार और कनेक्टिविटी में सुधार होने की उम्मीद है।व्यापार में सुगमता सुनिश्चित करने और एक जीवंत उद्यमशीलता इकोसिस्टम को बढ़ावा देने की अपनी कल्पना के अनुरूप, प्रधानमंत्री स्थानीय करदाताओं, व्यापारियों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ हाल ही में जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने के प्रभाव पर भी चर्चा करेंगे।त्रिपुरा में प्रधानमंत्रीभारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने और संरक्षित करने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप, प्रधानमंत्री तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान (प्रसाद) योजना के तहत माताबाड़ी में 'माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर परिसर' के विकास कार्य का उद्घाटन करेंगे। यह त्रिपुरा के गोमती जिले के उदयपुर शहर में स्थित प्राचीन 51 शक्तिपीठों में से एक है।इस परियोजना को ऊपर से कछुए के आकार का आकार दिया गया है, जिसमें मंदिर परिसर में सुधार, नए रास्ते, पुनर्निर्मित प्रवेश द्वार और बाड़, जल निकासी व्यवस्था, स्टालों, ध्यान कक्ष, अतिथि आवास, कार्यालय कक्षों सहित एक नये तीन मंजिले परिसर का निर्माण आदि शामिल हैं। यह पर्यटन को बढ़ावा देने, रोजगार और व्यापार के अवसर पैदा करने और क्षेत्र के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- जम्मू. नवरात्र से पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शनिवार को रियासी जिले में त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। रियासी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी)परमवीर सिंह ने कटरा में सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इसमें सेना, सीआरपीएफ और खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। नवरात्र 22 सितंबर से शुरू होगी और एक अक्टूबर को इसका अंतिम दिन होगा। इस दौरान देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के वैष्णो देवी मंदिर आने की संभावना है। बैठक को संबोधित करते हुए एसएसपी ने कहा कि तैनात सुरक्षा बलों की प्राथमिक जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि श्रद्धालुओं को त्योहार के दौरान सुरक्षित और शांतिपूर्ण वातावरण मिले। उन्होंने भवन तक जाने वाले पूरे रास्ते पर पुख्ता सुरक्षा प्रबंध करने के निर्देश दिए गए।पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि गहन तलाशी और गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई असामाजिक या राष्ट्रविरोधी तत्व शांतिपूर्ण माहौल को बाधित न कर सके। उन्होंने बताया कि पहचान पत्र की सख्त जांच और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि कोई व्यक्ति किसी दूसरे का रूप धारण करके परिसर में प्रवेश न कर सके। एसएसपी ने कटरा कस्बे में प्रवासियों का सत्यापन और जनगणना कराने, टट्टू मालिकों और कामगारों की प्राथमिकता से जांच, होटलों और आवासीय स्थलों की नियमित जांच कर आगंतुकों का सत्यापन करने और सभी थानों में आतंकवादियों के सहयोगियों की सूची को अघतन करने के निर्देश दिए। इसके अलावा, उन्होंने उग्रवाद के नये चलन पर रोक लगाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की सख्त निगरानी पर भी जोर दिया।
- पुणे. राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के प्रमुख सदानंद दाते ने शनिवार को कहा कि छद्म युद्ध और आईएसआईएस भारत के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नयी बाधाओं से निपटने के उद्देश्य से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जिम्मेदार संस्थानों के भीतर भ्रष्टाचार को समाप्त करना होगा। वह एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पुणे में थे, जहां उन्होंने “भारत की आंतरिक सुरक्षा और इसकी चुनौतियां” विषय पर व्याख्यान दिया। देश की प्रमुख आतंकवाद निरोधक जांच एजेंसी के महानिदेशक ने कहा कि नक्सलवाद, खालिस्तानी तत्व और अलगाववाद आंतरिक चुनौतियां बने हुए हैं, लेकिन छद्म युद्ध और आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) देश के लिए बड़ा खतरा हैं। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने कहा, “पहला, कुछ देश छद्म युद्धों के जरिए हमारी प्रगति में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं, और दूसरा है आईएसआईएस। अगर हमें नयी चुनौतियों का सामना करना है, तो हमें लोकतंत्र को मजबूत करना होगा। अगर हम चुनौतियों का प्रभावी ढंग से जवाब देना चाहते हैं, तो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जिम्मेदार संस्थाओं में भ्रष्टाचार भी खत्म होना चाहिए।” एनआईए प्रमुख ने कहा कि भारत को आतंकवाद, नक्सलवाद, खालिस्तानी तत्वों, कश्मीर में अलगाववाद और पूर्वोत्तर में बांग्लादेश और म्यांमा से घुसपैठ सहित कई आंतरिक खतरों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “अब तक, हमने इनमें से कई मुद्दों पर सफलतापूर्वक काबू पा लिया है। हमारा संविधान और लोकतंत्र, साथ ही स्वतंत्र न्यायपालिका, हमारी सबसे बड़ी उपलब्धियां हैं, क्योंकि इन्हीं ने हमें सफल होने में सक्षम बनाया है।” एनआईए प्रमुख ने महाराष्ट्र की विशिष्ट आतंकवाद निरोधी एजेंसी फोर्स वन की स्थापना के दौरान के अपने अनुभव को भी याद किया। दाते ने कहा, “26/11 हमले के बाद, पुलिस बल में व्यापक बदलाव किए गए। सरकार ने महाराष्ट्र में एक कमांडो यूनिट बनाने का फैसला किया और मुझे फोर्स वन का आईजी (महानिरीक्षक) नियुक्त किया गया। मैं रोज सुबह छह बजे उनके साथ शारीरिक प्रशिक्षण के लिए जाता था।” उन्होंने कहा, “हमने फोर्स वन के मूल्यों को सीधे अपने कर्मचारियों से समझा। यहां, हमें एहसास हुआ कि कर्तव्य जीवन से भी बड़ा है। हमने एक मूल्य-आधारित संगठन बनाया। काम की गुणवत्ता आपके पद से ज्यादा महत्वपूर्ण है। हमने यह विश्वास स्थापित किया कि प्रतिभा पद से ज्यादा महत्वपूर्ण है।”
- बहराइच . उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के कोडरी गांव में बरसात के पानी से भरे गड्ढे में शनिवार शाम डूबने से करीब छह-सात साल की तीन चचेरी बहनों की मौत हो गई। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। परिवार के एक सदस्य ने बताया कि चित्तौरा झील के पास नये निर्माणाधीन पुल के निकट जेसीबी से गहरा गड्ढा खोदा गया था और उसमें बारिश का पानी भर जाने से वह तालाब जैसा हो गया था। चित्तौरा मसीहाबाद गांव निवासी प्रियांशी, दिव्या और लक्ष्मी (उम्र करीब छह-सात वर्ष) घर से खेलने निकली थीं और गड्ढे के किनारे खेलते समय उसमें डूब गईं। उन्होंने बताया कि स्थानीय गोताखोरों की मदद से बच्चियों को बाहर निकालकर जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सदर क्षेत्र की उप जिलाधिकारी (एसडीएम) पूजा चौधरी ने बताया कि तीनों बच्चियों के शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा और उनके परिजनों को अनुमन्य सरकारी सहायता दिलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि मामले में अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।
- नयी दिल्ली. केंद्र ने संशोधित जीएसटी दरों से संबंधित शिकायतों के पंजीकरण और उनके निवारण के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के 'इनग्राम' पोर्टल पर एक समर्पित श्रेणी बनाई है। जीएसटी परिषद ने 22 सितंबर से विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं पर कर की दरें कम कर दी हैं।शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, उपभोक्ता मामलों के विभाग ने राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) को जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में अनुमोदित जीएसटी सुधार के अनुरूप बनाने के लिए कदम उठाए हैं। बयान में कहा गया कि 22 सितंबर से प्रभावी होने वाले संशोधित जीएसटी शुल्कों, दरों और छूटों से संबंधित उपभोक्ताओं के सवालों और शिकायतों को संभालने के लिए 'इनग्राम' (इंटीग्रेटेड ग्रीवेंस रिड्रेसल मैकेनिज्म) पोर्टल पर एक नई, समर्पित श्रेणी शुरू की गई है। इस श्रेणी में कई प्रमुख उप-श्रेणियां शामिल हैं, जैसे वाहन, बैंकिंग, ई-कॉमर्स, एफएमसीजी (रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुएं) और अन्य, जिनमें जीएसटीा से संबंधित शिकायतें दर्ज की जा सकेंगी। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के अधिकारियों द्वारा 11 सितंबर को एक उद्घाटन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य एनसीएच परामर्शदाताओं को जीएसटी से संबंधित प्रश्नों और शिकायतों को प्रभावी ढंग से संभालने में सक्षम बनाना था।
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भावनगर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को अन्य देशों पर भारत की निर्भरता को उसका मुख्य दुश्मन बताया और आत्मनिर्भरता के मूल मंत्र पर जोर देते हुए कहा कि “चिप हो या शिप...हमें भारत में ही बनाने होंगे”। वह गुजरात में भावनगर के गांधी मैदान में ‘समुद्र से समृद्धि' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जहां उन्होंने कुल 34,200 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया। मोदी ने कहा कि भारत की सभी समस्याओं का एक ही समाधान है और वह है आत्मनिर्भरता। प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत वैश्विक बंधुत्व की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है और आज दुनिया में भारत का कोई बड़ा दुश्मन नहीं है, लेकिन सही मायनों में भारत का सबसे बड़ा दुश्मन अन्य देशों पर निर्भरता है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस निर्भरता को सामूहिक रूप से पराजित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विदेशी निर्भरता बढ़ने से राष्ट्रीय विफलता बढ़ती है। मोदी ने कहा, “वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए, दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश को आत्मनिर्भर बनना होगा।” उन्होंने आगाह किया कि दूसरों पर निर्भरता राष्ट्रीय स्वाभिमान के लिए खतरा है। उन्होंने कहा, “140 करोड़ भारतीयों का भविष्य बाहरी ताकतों पर नहीं छोड़ा जा सकता, न ही राष्ट्रीय विकास का संकल्प विदेशी निर्भरता पर आधारित हो सकता है। आने वाली पीढ़ियों का भविष्य दूसरों पर नहीं छोड़ा जा सकता। 140 करोड़ की आबादी वाला देश अगर दूसरों पर निर्भर है, तो यह राष्ट्रीय स्वाभिमान के साथ समझौता है।” मोदी ने कहा कि एक लोकप्रिय कहावत के अनुसार, 100 दुखों का एक ही इलाज है, इसी तरह, भारत की सभी समस्याओं का एक ही समाधान है, और वह है आत्मनिर्भरता। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि आजादी के बाद तत्कालीन सत्तारूढ़ पार्टी ने युवाओं की प्रतिभा को दबा दिया और ‘लाइसेंस राज' जैसे प्रतिबंध लगा दिए। मोदी ने कहा, “भारत की अंतर्निहित शक्तियों को लगातार नजरअंदाज करने के परिणामस्वरूप, देश आजादी के छह-सात दशक बाद भी वह सफलता हासिल नहीं कर सका, जिसका वह वास्तव में हकदार था।” उन्होंने “लाइसेंस-कोटा व्यवस्था में लंबे समय तक उलझे रहने और वैश्विक बाजारों से अलगाव” को मुख्य कारक बताया। मोदी ने कहा कि जब वैश्वीकरण का युग शुरू हुआ, तो तत्कालीन सरकारों ने केवल आयात पर ध्यान केंद्रित किया, जिसके कारण हजारों करोड़ रुपये के घोटाले हुए। भारत के नौवहन क्षेत्र को दोषपूर्ण नीतियों के कारण हुए नुकसान का एक प्रमुख उदाहरण बताते हुए मोदी ने कहा कि भारत ऐतिहासिक रूप से एक बहुत ही जीवंत जहाज निर्माण उद्योग रहा है। उन्होंने कहा, “भारत के तटीय राज्यों में निर्मित जहाज कभी घरेलू और वैश्विक व्यापार को गति प्रदान करते थे। पचास साल पहले भी, भारत घरेलू स्तर पर निर्मित जहाजों का इस्तेमाल करता था, और उसका 40 प्रतिशत से ज्यादा आयात-निर्यात इन्हीं के जरिए होता था।” मोदी ने कहा, “50 साल पहले तक हमारा व्यापार 40 प्रतिशत भारत में बने जहाजों से होता था, लेकिन अब यह घटकर मात्र पांच प्रतिशत रह गया है।” उन्होंने कहा कि भारत विदेशी नौवहन कंपनियों को उनकी सेवाओं के लिए हर साल 75 अरब अमेरिकी डॉलर या लगभग 6 लाख करोड़ रुपये का भुगतान करता है। प्रधानमंत्री ने कहा, “क्या लोग कल्पना कर सकते हैं कि पिछले सात दशकों में दूसरे देशों को माल ढुलाई के रूप में कितना पैसा दिया गया है? धन के इस बहिर्वाह ने विदेश में लाखों नौकरियां पैदा की हैं। यदि इस व्यय का एक छोटा सा हिस्सा भी पिछली सरकारों ने घरेलू नौवहन उद्योग में लगाया होता, तो आज दुनिया भारतीय जहाजों का उपयोग कर रही होती, और भारत नौवहन सेवाओं से लाखों करोड़ रुपये कमा रहा होता।” मोदी ने कहा, “चिप (सेमीकंडक्टर चिप) या शिप (जहाज), हमें भारत में ही बनाने होंगे।” उन्होंने कहा कि घरेलू बंदरगाह वैश्विक समुद्री महाशक्ति के रूप में भारत के उदय की रीढ़ हैं। मोदी ने कहा कि भारत का समुद्री क्षेत्र अब अगली पीढ़ी के सुधारों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने घोषणा की कि आज से देश के सभी प्रमुख बंदरगाहों को बहुविध दस्तावेज़ों और खंडित प्रक्रियाओं से मुक्ति मिल जाएगी। उन्होंने कहा, “ ‘एक राष्ट्र, एक दस्तावेज' और ‘एक राष्ट्र, एक बंदरगाह' प्रक्रिया के कार्यान्वयन से व्यापार-कारोबार और सरल हो जाएगा।” उन्होंने कहा कि समुद्री क्षेत्र में कई सुधार शुरू किए गए हैं और पांच समुद्री कानूनों को नए रूप में पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि ये कानून नौवहन और बंदरगाह प्रशासन में बड़े बदलाव लाएंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि नौवहन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है और अब बड़े जहाजों को बुनियादी ढांचे का दर्जा दिया गया है। मोदी ने कहा, “जहाज निर्माण कंपनियों को अब बैंकों से ऋण प्राप्त करना आसान हो जाएगा और उन्हें कम ब्याज दरों का लाभ मिलेगा। बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण से जुड़े सभी लाभ अब इन जहाज निर्माण उद्यमों को मिलेंगे।” उन्होंने कहा कि सरकार भारत को एक प्रमुख समुद्री शक्ति बनाने के लिए तीन प्रमुख योजनाओं पर काम कर रही है। उन्होंने कहा, “इन पहलों से जहाज निर्माण क्षेत्र के लिए वित्तीय सहायता आसान हो जाएगी, शिपयार्डों को आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने में मदद मिलेगी और डिजाइन तथा गुणवत्ता मानकों में सुधार होगा। आने वाले वर्षों में 70,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा।” उन्होंने समुद्री क्षेत्र से संबंधित 7,870 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उन्होंने गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों के लिए 26,354 करोड़ रुपये से अधिक लागत की केंद्र और राज्य सरकार की कई परियोजनाओं का अनावरण और शिलान्यास भी किया। प्रधानमंत्री ने अहमदाबाद से लगभग 100 किलोमीटर दक्षिण में स्थित ग्रीनफील्ड औद्योगिक केंद्र, धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण भी किया। बाद में, उन्होंने अहमदाबाद जिले के लोथल में निर्माणाधीन राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर की प्रगति की समीक्षा की, जिसका उद्देश्य भारत की समुद्री विरासत को प्रदर्शित करना है। इससे पहले सुबह भावनगर पहुंचने पर उन्होंने एक रोड शो में भाग लिया।
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मुंबई. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए शिलफाटा और घनसोली के बीच 4.88 किलोमीटर लंबी सुरंग की खुदाई का कार्य रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की उपस्थिति में शनिवार सुबह पूरा हो गया। वैष्णव ने इसे ‘‘ऐतिहासिक उपलब्धि'' बताते हुए कहा कि सूरत-बिलिमोरा खंड पर हाई-स्पीड कॉरिडोर का पहला चरण दिसंबर 2027 में शुरू हो जाएगा। मुंबई के पास घनसोली में पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री ने कहा कि बुलेट ट्रेन ‘‘मध्यम वर्ग के लिए परिवहन'' का साधन होगी और किराया ‘‘उचित'' होगा। रेल मंत्री ने कहा कि ‘गूगल मैप' ऐप मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय नौ घंटे दिखाता है, लेकिन बुलेट ट्रेन से लोग यह दूरी दो घंटे सात मिनट में तय कर सकेंगे। वैष्णव ने कहा कि बुलेट ट्रेन परियोजना का पहला चरण 2027 में सूरत-बिलिमोरा खंड पर शुरू किया जाएगा। यह 2028 में ठाणे और 2029 में बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स तक हो जाएगा। उन्होंने कहा, "ट्रेनों के परिचालन की इस तरह से योजना बनाई गई है कि सुबह और शाम के व्यस्त समय में हर आधे घंटे में एक ट्रेन रवाना होगी। पूरा नेटवर्क व्यवस्थित हो जाने पर, व्यस्त समय में हर 10 मिनट में एक ट्रेन उपलब्ध होगी।" मंत्री ने कहा कि मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा के लिए टिकट आरक्षित कराने की आवश्यकता नहीं होगी और यात्री स्टेशन पर टिकट ले सकेंगे। सुरंग के एक छोर पर खड़े होकर, वैष्णव ने बटन दबाया और नियंत्रित डायनामाइट विस्फोट से इसकी अंतिम परत को तोड़ दिया, जिससे पांच किलोमीटर तक की खुदाई पूरी हो गई। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने कहा कि न्यू ऑस्ट्रियन टनल मेथड (एनएटीएम) का उपयोग करके खोदी गई यह सुरंग, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) और शिलपाटा के बीच 21 किलोमीटर लंबे भूमिगत खंड का हिस्सा है। इसमें ठाणे क्रीक के नीचे 7 किलोमीटर का खंड भी शामिल है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (508 किमी) भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना है।


























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