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- नयी दिल्ली। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) ने शनिवार को 29 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों के तालुकों, जिलों और उच्च न्यायालयों में 2025 की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया। एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है। इसमें कहा गया है कि लोक अदालत में विवादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर विचार किया गया, जिसमें मुकदमे से पूर्व के मामले और लंबित मामले शामिल थे। विज्ञप्ति में कहा गया है, "शाम 6:30 बजे तक प्राप्त प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, 2,42,55,036 मामलों का निपटारा किया जा चुका है, जिनमें 2,10,44,809 मुकदमे-पूर्व मामले और 32,10,227 लंबित मामले शामिल हैं, जिनका निपटान मूल्य 7,817.62 करोड़ रुपये से अधिक है।" इसमें कहा गया कि लोक अदालत ने नागरिकों को त्वरित, किफायती और सौहार्दपूर्ण न्याय प्रदान करके "परिवर्तनकारी राहत" प्रदान की है।
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आइजोल. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि पूर्वोत्तर को ‘वोट बैंक' की राजनीति के कारण पहले भारी नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार के प्रयासों से क्षेत्र अब देश के विकास के इंजन में तब्दील हो रहा है। साल 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद दूसरी बार मिजोरम पहुंचे मोदी ने 9,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की शुरुआत की और आइजोल के पास लेंगपुई हवाई अड्डे से एक जनसभा को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित किया, क्योंकि भारी बारिश के कारण वह शहर के बीचोंबीच स्थित कार्यक्रम स्थल लामुआल मैदान नहीं जा पाए। मोदी ने आइजोल और दिल्ली के बीच पहली राजधानी एक्सप्रेस को भी हरी झंडी दिखाई। उन्होंने रेल, राजमार्ग, ऊर्जा और खेल अवसंरचना को बढ़ावा देने वाली विभिन्न परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे देश में कुछ राजनीतिक दल लंबे समय से ‘वोट बैंक' की राजनीति करते आए हैं। उनका ध्यान हमेशा उन जगहों पर रहा, जहां ज्यादा वोट और सीट थीं।
मिजोरम सहित पूरे पूर्वोत्तर को इस रवैये के कारण बहुत नुकसान उठाना पड़ा है।” उन्होंने कहा, “लेकिन हमारा नजरिया बिल्कुल अलग है। जो पहले उपेक्षित थे, वे अब सबसे आगे हैं। जो पहले हाशिये पर थे, वे अब मुख्यधारा में हैं। हम पिछले 11 वर्षों से पूर्वोत्तर के विकास के लिए काम कर रहे हैं और यह क्षेत्र भारत के विकास का इंजन बन रहा है।” मोदी ने कहा कि मिजोरम केंद्र सरकार की ‘एक्ट ईस्ट' नीति में एक प्रमुख भूमिका निभाता है और कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट परियोजना तथा रेल लाइन राज्य को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ेंगी। प्रधानमंत्री ने 8,070 करोड़ रुपये की लागत वाली बैराबी-सैरंग लाइन की शुरुआत की, जिससे चारों तरफ से भूमि से घिरा मिजोरम देश के रेल नेटवर्क से पूरी तरह से एकीकृत हो गया। उन्होंने कहा कि यह मिजोरम के लिए एक ऐतिहासिक दिन है, क्योंकि 51.38 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन राज्य की राजधानी आइजोल को प्रमुख महानगरों से जोड़ेगी। मोदी ने कहा कि विभिन्न चुनौतियों और दुर्गम इलाकों को पार करते हुए क्रियान्वित की गई यह परियोजना राज्य के लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगी तथा परिवहन के लिए जीवन रेखा साबित होगी। प्रधानमंत्री ने आइजोल को दिल्ली, गुवाहाटी और कोलकाता से जोड़ने वाली तीन नयी एक्सप्रेस ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाई। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ रेल कनेक्टिविटी नहीं है, बल्कि बदलाव की जीवन रेखा है। मिजोरम के किसान और व्यवसाय देशभर में अधिक बाजारों तक पहुंच स्थापित कर सकेंगे। लोगों को शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल के ज्यादा विकल्प मिलेंगे। इससे पर्यटन, परिवहन और आतिथ्य क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।” मोदी ने कहा, “चाहे आजादी का आंदोलन हो या राष्ट्र निर्माण, मिजोरम के लोग हमेशा योगदान देने के लिए आगे आते रहे हैं। आज यह राज्य भारत की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।” उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर में चौतरफा कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया है-चाहे वह इंटरनेट हो, बिजली हो, बुनियादी ढांचा हो या हवाई कनेक्टिविटी हो। प्रधानमंत्री ने कहा, “मिजोरम को ‘उड़ान' योजना का भी लाभ मिलेगा। जल्द ही यहां हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू की जाएंगी। इससे राज्य के दूरदराज के इलाकों तक पहुंच में सुधार होगा।” उन्होंने कहा कि मिजोरम ने कई दिग्गज खिलाड़ी दिए हैं और राष्ट्रीय खेल नीति राज्य के खिलाड़ियों के लिए अवसरों के द्वार खोलेगी।
मोदी ने कहा, “भारत वैश्विक खेलों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। इससे देश में खेल अर्थव्यवस्था का भी निर्माण हो रहा है। मिजोरम में खेलों की अद्भुत परंपरा रही है, जिसने फुटबॉल और अन्य खेलों में कई चैंपियन पैदा किए हैं।” उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर उद्यमशीलता का एक प्रमुख केंद्र बन रहा है, जहां 4,500 स्टार्टअप और 25 ‘इनक्यूबेटर' संचालित हो रहे हैं। ‘इनक्यूबेटर' प्रारंभिक चरण या यहां तक कि विचार-चरण वाली कंपनियों को मार्गदर्शन, कार्यालय स्थान, प्रशिक्षण और संभावित वित्तपोषण तक पहुंच जैसे संसाधन मुहैया कराकर आगे बढ़ने में मदद देता है। मोदी ने कहा कि सरकार का ध्यान शिक्षा के बुनियादी ढांचे को भी बढ़ाने पर है और मिजोरम में पहले से मौजूद 11 एकलव्य स्कूलों के अलावा छह और एकलव्य स्कूलों की स्थापना के जरिये उन्हें सशक्त बनाने का काम शुरू हो गया है। उन्होंने कहा, “मैं निवेशकों से ‘राइजिंग नॉर्थ ईस्ट' शिखर सम्मेलन में इस क्षेत्र की क्षमता का दोहन करने का आग्रह करता हूं... ‘लोकल फॉर वोकल' पहल के तहत, मिजोरम के बांस, जैविक अदरक, हल्दी और केले के विपणन को बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं।” वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की नयी दरों के बारे में मोदी ने कहा कि इन सुधारों से कई उत्पादों पर कर कम हुए हैं, जिससे आम लोगों का जीवन आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से कैंसर जैसी बीमारियों की दवाइयां सस्ती होंगी और वाहनों की कीमतों में भी कमी देखी जा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा, “2014 से पहले टूथपेस्ट, साबुन और तेल जैसी रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली चीजों पर 27 प्रतिशत जीएसटी लगता था। आज केवल पांच प्रतिशत टैक्ट लागू किया गया है। कांग्रेस के शासनकाल में दवाइयों, जांच किट और बीमा पॉलिसी पर भारी टैक्स लगता था। इसीलिए स्वास्थ्य सेवाएं महंगी थीं और (स्वास्थ्य) बीमा आम परिवारों की पहुंच से बाहर था। लेकिन आज ये सब चीजें सस्ती हो गई हैं।” मोदी ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह है कि भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था है। प्रधानमंत्री ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आप सभी ने देखा कि कैसे हमारे सैनिकों ने आतंक को प्रायोजित करने वालों को सबक सिखाया। पूरा देश हमारे सशस्त्र बलों के लिए गर्व की भावना से भर गया। ऑपरेशन के दौरान, ‘मेड इन इंडिया' हथियारों ने हमारे देश की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हमारी अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र का विकास हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।” जनसभा के दौरान मिजोरम के राज्यपाल वीके सिंह, मुख्यमंत्री लालदुहोमा और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव लामुअल मैदान में मौजूद थे। मोदी ने आइजोल बाईपास रोड, थेनजोल-सियालसुक रोड और खानकां-रोंगुरा रोड समेत कई सड़क परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। लगभग 500 करोड़ रुपये की लागत वाली 45 किलोमीटर लंबी आइजोल बाईपास मार्ग का उद्देश्य आइजोल में भीड़भाड़ कम करना और लुंगलेई, सियाहा, लॉन्गतलाई, लेंगपुई हवाई अड्डे व सैरंग रेलवे स्टेशन आदि से कनेक्टिविटी में सुधार करना है। इससे दक्षिणी जिलों से आइजोल तक यात्रा का समय लगभग डेढ़ घंटे कम हो जाएगा।
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आइजोल. मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने शनिवार को कहा कि आज का दिन राज्य के लिए ऐतिहासिक दिन है क्योंकि राज्य देश के रेल नेटवर्क से जुड़ गया है। उन्होंने कहा कि इसका दूरगामी प्रभाव होगा क्योंकि यह राज्य और भारत के बीच सपनों और वास्तविकताओं का सेतु बनेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मिजोरम की पहली रेल लाइन का उद्घाटन करने और आइजोल को दिल्ली से जोड़ने वाली राज्य की पहली राजधानी एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाए जाने के अवसर पर लालदुहोमा एक सभा को संबोधित कर रहे थे। लालदुहोमा ने कहा, ‘‘आज हमारे राज्य के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। यह प्रगति की हमारी यात्रा में एक नया अध्याय शुरू करता है... रेलवे परियोजनाएं केवल बुनियादी ढांचा नहीं हैं; ये हमारे बच्चों के भविष्य, हमारे नागरिकों के सम्मान और हमारे राज्य की आर्थिक मजबूती में निवेश हैं। इन परियोजनाओं का प्रभाव दूरगामी होगा, जो मिजोरम और भारत के बीच सपनों और वास्तविकताओं का सेतु बनेगा।'' लालदुहोमा ने कहा कि नयी रेल लाइन एक तकनीकी चमत्कार और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि 51.38 किलोमीटर लंबे इस मार्ग में देश के कुछ सबसे दुर्गम क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में प्रधानमंत्री की उपस्थिति पूर्वोत्तर के विकास की अटूट प्रतिबद्धता का एक शक्तिशाली प्रतीक है।
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इंफाल. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि मणिपुर में पहाड़ों और घाटी के लोगों के बीच ‘‘विश्वास'' का एक मजबूत संबंध बनाया जाना चाहिए। मई 2023 में कुकी और मेइती समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़कने के बाद, राज्य की अपनी पहली यात्रा के दौरान इंफाल के कांगला किले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार राज्य में सुलह और विकास के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘मणिपुर 'भारत माता' के मुकुट को सुशोभित करने वाला 'रत्न' है। यहां किसी भी प्रकार की हिंसा निंदनीय है। यह न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के साथ घोर अन्याय भी है। हमें मिलकर मणिपुर को शांति और विकास के पथ पर आगे ले जाना होगा।'' उन्होंने कहा, हमारी सरकार ज़ख्मों पर मरहम लगाने और विश्वास बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मेइती समुदाय के लोग इंफाल घाटी में रहते हैं, जबकि कुकी समुदाय आस-पास की पहाड़ियों पर रहता है। राष्ट्रीय सुरक्षा में राज्य के सैनिकों की भूमिका की सराहना करते हुए, मोदी ने कहा कि देश उनकी वीरता को हमेशा याद रखेगा। उन्होंने कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर में मणिपुर के वीर सपूतों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।' मोदी ने कहा कि मणिपुर की महिलाएं राज्य के आर्थिक विकास में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा, 21वीं सदी पूर्वोत्तर की है। -
आइजोल. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में 77,000 करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मिजोरम की पहली रेलवे लाइन का उद्घाटन करने और आइजोल को दिल्ली से जोड़ने वाली राज्य की पहली राजधानी एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने के समय वैष्णव ने यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि रेलवे कनेक्टविटी से मिजोरम में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर सृजित होंगे और क्षेत्र के उत्पादों के लिए नए बाजार खोजने में मदद मिलेगी। रेल मंत्री वैष्णव ने कहा, “पूर्वोत्तर का विकास प्रधानमंत्री की एक्ट ईस्ट नीति का परिणाम है...2014 से पहले, पूर्वोत्तर के लिए रेलवे का बजट 2,000 करोड़ रुपये हुआ करता था, और मोदी जी ने इसे पांच गुना बढ़ाकर 10,000 करोड़ रुपये कर दिया। हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी ने जब एक्ट ईस्ट नीति शुरू की तब पूर्वोत्तर का विकास शुरू हुआ। इससे पहले यह केवल लुक ईस्ट नीति थी।” प्रधानमंत्री द्वारा बैराबी-सैरंग रेलवे लाइन का उद्घाटन करने के बाद वैष्णव ने कहा कि मिजोरम की राजधानी को रेलवे से जोड़ा गया है और यह एक ऐतिहासिक दिन है।
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नयी दिल्ली। आयकर विभाग ने शनिवार को कहा कि आकलन वर्ष 2025-26 के लिए अब तक छह करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए जा चुके हैं। बिना जुर्माने के आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर है। आयकर विभाग ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ करदाताओं और कर पेशेवरों को धन्यवाद, जिन्होंने हमें अब तक छह करोड़ आयकर रिटर्न (आईटीआर) तक पहुंचने में मदद की है और यह संख्या अभी भी जारी है।'' पोस्ट में कहा गया कि आईटीआर फाइलिंग, कर भुगतान और अन्य संबंधित सेवाओं के लिए करदाताओं की सहायता के लिए हेल्पडेस्क चौबीसों घंटे काम कर रहा है, और विभाग अन्य माध्यम से भी सहायता प्रदान कर रहा है। विभाग ने उन करदाताओं से भी जल्द से जल्द आईटीआर दाखिल करने का आग्रह किया है जिन्होंने आकलन वर्ष 2025-26 के लिए अभी तक आईटीआर फाइल नहीं किया है, ताकि आखिरी समय की भीड़ से बचा जा सके।
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भोपाल। मध्यप्रदेश में ‘स्वयंश्री कार्यक्रम' ने 3.8 लाख से ज्यादा महिलाओं को लखपति दीदी बनने का अधिकार दिया। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। रिलायंस फाउंडेशन, गेट्स फाउंडेशन और मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एमपीएसआरएलएम) के सहयोग से यह कार्यक्रम किया गया। मिशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) हर्षिका सिंह ने एक विज्ञप्ति में बताया, “स्वयंश्री ने महिलाओं को पारंपरिक सीमाओं से परे सपने देखने के लिए प्रोत्साहित किया और राज्य की 3.8 लाख से ज्यादा महिलाओं को लखपति दीदी बनने का अधिकार दिया। पिछले दो वर्षों में मिशन ने इस कार्यक्रम के तहत स्वयं सहायता समूहों, उत्पादक समूहों और संघों में संगठित लाखों महिलाओं के साथ काम किया है।” रिलायंस फाउंडेशन की महिला सशक्तिकरण प्रमुख एन. दीप्ति रेड्डी ने कहा, “हमारा मिशन पूरे भारत में ग्रामीण समुदायों में महिला उद्यमियों को सशक्त बनाना है। ‘स्वयंश्री कार्यक्रम' के माध्यम से इस उद्देश्य की दिशा में काम करते हुए हम तीन राज्यों में महिलाओं की क्षमता बढ़ाने और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए नवोन्मेषी, अनुकरणीय और मापनीय मॉडल विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।” गेट्स फाउंडेशन के निदेशक (विकास अवसर एवं लैंगिक सशक्तिकरण) अलकेश वाधवानी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘लखपति दीदी' विजन ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय गति प्रदान की है। उन्होंने कहा कि ‘स्वयंश्री कार्यक्रम' राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और जमीनी स्तर के सहयोगियों के साथ मिलकर महिलाओं के लिए स्थायी आय के अवसर सृजित करता है। विज्ञप्ति में बताया गया, “स्वयंश्री कार्यक्रम' का उद्देश्य मध्यप्रदेश, गुजरात और ओडिशा की 10 लाख महिलाओं तक पहुंच बनाना है ताकि उनकी घरेलू आय को न्यूनतम एक लाख रुपये प्रति वर्ष तक बढ़ाया जा सके।
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वाराणसी. नेपाल में अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने वाली पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की (73) का वाराणसी से गहरा नाता है। सुशीला कार्की ने हाल ही में एक साक्षात्कार में खुद को ‘भारत का मित्र' बताया था। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की।
बीएचयू में रहने के दौरान ही सुशीला की मुलाकात अपने जीवनसाथी दुर्गा प्रसाद सुबेदी से हुई थी।
बीएचयू में राजनीति विज्ञान के पूर्व प्रोफेसर दीपक मलिक ने प्रसिद्ध विश्वविद्यालय में कार्की के प्रवास को जीवंत रूप से याद किया। प्रोफेसर मलिक ने बताया, “सुशीला कार्की ने 1975 में बीएचयू से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर किया था। उस समय, वाराणसी लंबे समय तक नेपाल में राजशाही विरोधी आंदोलन का केंद्र था।” उन्होंने कहा कि कार्की भी उसी ‘राजशाही विरोधी' आंदोलन से जुड़ी थीं।
लेखक बीपी कोइराला, जो बाद में नेपाल के प्रधानमंत्री बने, उसी समय वाराणसी में सक्रिय थे।
मलिक ने कहा, “1940 से 1980 के बीच बीपी कोइराला भी वाराणसी में थे और नेपाली कांग्रेस के लिए काम कर रहे थे, जिसका आधार बीएचयू था। इस तरह सुशीला कार्की राजशाही विरोधी आंदोलन से जुड़ गईं।” उन्होंने नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री को ‘एक बेहद ईमानदार और सक्षम नेता' बताया।
प्रोफेसर ने कहा, “नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में सुशीला कार्की का चुनाव नेपाल के इतिहास में एक बड़ा कदम है। मैं उन्हें बधाई देता हूं।” मलिक ने कहा कि नेपाली युवाओं ने भ्रष्टाचार और आर्थिक असमानता पर सवाल उठाए हैं तथा इन मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “युवाओं ने भ्रष्टाचार और आर्थिक असमानता के मुद्दे पर नेपाल में सरकार गिरा दी।”
सुशीला कार्की ने शुक्रवार रात को शपथ ली और इसी के साथ वह नेपाल की अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने वाली पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने कार्की को पद की शपथ दिलाई।
राष्ट्रपति पौडेल ने कहा कि अंतरिम प्रधानमंत्री कार्की के नेतृत्व वाली नई कार्यवाहक सरकार को छह महीने के भीतर नए संसदीय चुनाव कराने का अधिकार है। नए प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में नेपाल के मुख्य न्यायाधीश, सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, सुरक्षा प्रमुख और राजनयिक समुदाय के सदस्य शामिल हुए। राष्ट्रपति पौडेल, नेपाल सेना प्रमुख और ‘जेन जेड' प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों के बीच हुई एक बैठक में अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में सुशीला कार्की के नाम पर सहमति बनी। वर्ष 1997 से लेकर 2012 तक के बीच जन्में युवाओं को प्राय: ‘जेन जेड' पीढ़ी के नाम से जाना जाता है। -
राज्य की पहली राजधानी एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई
आइजोल. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को मिजोरम की पहली रेल लाइन का उद्घाटन किया और आइजोल को दिल्ली से जोड़ने वाली राज्य की पहली राजधानी एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई। लगभग 8,070 करोड़ रुपये की बैराबी-सैरंग रेल लाइन को भारतीय रेल के इतिहास में सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है। परियोजना को मंजूरी साल 2008-09 में मिली थी और इसका निर्माण 2015 में शुरू हुआ था। इस रेल लाइन में 45 सुरंग, 55 बड़े पुल और 87 छोटे पुल हैं। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि सैरंग के पास स्थित पुल 114 मीटर ऊंचा है और इसकी ऊंचाई कुतुब मीनार से भी ज्यादा है। अधिकारी ने बताया कि यह देश का खंभे वाला सबसे ऊंचा पुल है। इस रेल मार्ग में पांच सड़क ओवरब्रिज और छह अंडरपास भी हैं। इस रेल मार्ग पर बैराबी के अलावा चार मुख्य स्टेशन- होरटोकी, कावनपुई, मुआलखांग और सैरंग पड़ते हैं। मिजोरम और देश के बाकी हिस्सों के बीच सीधे रेल संपर्क से क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित, कुशल व किफायती यात्रा विकल्प मिलेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि इससे खाद्यान्न, उर्वरक और अन्य आवश्यक वस्तुओं की समय पर और विश्वसनीय आपूर्ति भी सुनिश्चित होगी, जिससे समग्र रसद दक्षता और क्षेत्रीय पहुंच में वृद्धि होगी। अधिकारियों ने कहा कि नयी रेल लाइन से यात्री और माल ढुलाई की प्रक्रिया में सुधार होगा, यात्रा समय में कमी आएगी, पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और मिजोरम की जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होगी। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर तीन नयी एक्सप्रेस ट्रेन - सैरंग (आइजोल)-दिल्ली (आनंद विहार टर्मिनल) राजधानी एक्सप्रेस, सैरंग-गुवाहाटी एक्सप्रेस और सैरंग-कोलकाता एक्सप्रेस को भी हरी झंडी दिखाई। उन्होंने रेलवे, सड़क मार्ग, ऊर्जा, खेल आदि समेत विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी कई परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री की पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास पहल (पीएम-देवाइन) योजना के तहत 500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 45 किलोमीटर लंबी आइजोल बाईपास सड़क से आइजोल शहर में भीड़भाड़ कम होगी और लुंगलेई, सियाहा, लॉन्गतलाई, लेंगपुई हवाई अड्डे और सैरंग रेलवे स्टेशन समेत अन्य से संपर्क में सुधार होगा। सेरछिप जिले में पूर्वोत्तर विशेष अवसंरचना विकास योजना (एनईएसआईडीएस) रोड के अंतर्गत खानकॉन-रोंगुरा सड़क से बाजारों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित होगी और क्षेत्र के विभिन्न बागवानी किसानों और अन्य लोगों को लाभ होगा। साथ ही अदरक प्रसंस्करण संयंत्र को भी सहायता मिलेगी। प्रधानमंत्री ने लॉन्गतलाई-सियाहा रोड पर छिमटुईपुई पुल, खेलों के विकास के लिए ‘खेलो इंडिया' बहुउद्देशीय इनडोर हॉल और आइजोल के मुआलखांग में एक एलपीजी बॉटलिंग प्लांट की आधारशिला भी रखी। प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके) योजना के अंतर्गत कावर्था में एक आवासीय विद्यालय और तलंगनुआम में एक एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय का उद्घाटन भी किया। -
नई दिल्ली। नेपाल में ‘जेन-जी’ विरोध के कारण हुए तख्तापलट के बाद सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार की प्रधानमंत्री बनाया गया है। उन्होंने शुक्रवार शाम को अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुशीला कार्की को शुभकामनाएं दी हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शनिवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, जिसमें लिखा, “नेपाल की अंतरिम सरकार की प्रधानमंत्री के रूप में पद ग्रहण करने पर सुशीला कार्की को हार्दिक शुभकामनाएं। नेपाल के भाई-बहनों की शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए भारत पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।”इससे पहले, विदेश मंत्रालय (एमईए) ने परिवर्तन के दौर में काठमांडू के साथ संबंधों को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम नेपाल में माननीय श्रीमती सुशीला कार्की के नेतृत्व में नई अंतरिम सरकार के गठन का स्वागत करते हैं। हमें उम्मीद है कि इससे शांति और स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।”मंत्रालय ने आगे कहा, “एक निकट पड़ोसी, एक लोकतांत्रिक देश और एक दीर्घकालिक विकास साझेदार के रूप में, भारत दोनों देशों के लोगों के कल्याण और समृद्धि के लिए नेपाल के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा।”बता दें कि सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। शनिवार को उनके नाम का ऐलान हुआ और उसी शाम सुशीला कार्की को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शपथ दिलाई। अंतरिम सरकार के गठन के साथ नेपाल की संसद को भंग करते हुए आम चुनाव कराने का प्रस्ताव दिया गया है।नेपाल में यह सत्ता-परिवर्तन ‘जेन-जी’ आंदोलन के बाद हुआ है, जिन्होंने केपी शर्मा ओली की सरकार को गिराया। 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध के खिलाफ नेपाल के युवाओं ने अपना विरोध शुरू किया था, लेकिन यह विरोध हिंसक प्रदर्शन में बदल गया था। केपी शर्मा ओली की सरकार के कई मंत्रियों के घर फूंक दिए गए थे। यहां तक कि, इस आंदोलन के दबाव में केपी शर्मा ओली को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। फिलहाल केपी शर्मा ओली की जगह नेपाल की कमान सुशीला कार्की के हाथों में आ गई है। -
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में एक बडे़ मेगा फूड इंवेट का आयोजन होने जा रहा है। इसके तहत प्रधानमंत्री मोदी वर्ल्ड फूड इंडिया (WFI) 2025 के चौथे संस्करण का 25 सितंबर को भारत मंडपम में उद्घाटन करेंगे। इस मौके पर केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान भी मौजूद रहेंगे। यह आयोजन 25 से 28 सितंबर तक चलेगा और इसमें दुनिया भर के नीति-निर्माता, उद्योग जगत के दिग्गज, निवेशक और उद्यमी शामिल होंगे।खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम भारत को “फूड हब ऑफ द वर्ल्ड” बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसमें निवेश, नवाचार और साझेदारी को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा। बड़ी संख्या में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां इसमें हिस्सा लेंगी। इस बार न्यूजीलैंड और सऊदी अरब पार्टनर देश, जबकि जापान, यूएई, वियतनाम और रूस फोकस देश के रूप में शामिल होंगे। इनकी भागीदारी से न केवल द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे बल्कि व्यापार और निवेश के नए अवसर भी खुलेंगे।
आयोजन में उच्च स्तरीय पैनल चर्चाएं होंगी, जिनमें वैश्विक विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और उद्योग प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। इसके अलावा सेक्टोरल एग्जिबिशन में खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, मशीनरी, कोल्ड चेन और अन्य क्षेत्रों की नवीनतम तकनीक और समाधान प्रदर्शित किए जाएंगे। बी2बी और बी2जी नेटवर्किंग सत्र भी होंगे, जो रणनीतिक साझेदारी और सहयोग को बढ़ावा देंगे। साथ ही भारत की समृद्ध खाद्य विविधता और भविष्य की फूड ट्रेंड्स को दिखाने के लिए कुकिंग शो और शेफ प्रतियोगिताएं भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी।इस दौरान दो बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन भी होंगे। पहला है एफएसएसएआई द्वारा आयोजित तीसरा ग्लोबल फूड रेगुलेटर्स समिट, जिसमें वैश्विक नियामक खाद्य सुरक्षा मानकों और सहयोग पर चर्चा करेंगे। दूसरा 24वां इंडिया इंटरनेशनल सीफूड शो (IISS) जिसे सीफूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEAI) आयोजित करेगा और इसमें भारत की समुद्री खाद्य निर्यात क्षमता पर फोकस किया जाएगा। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शुक्रवार को ज्ञान भारतम पोर्टल का शुभारंभ किया। इस पोर्टल का उद्देश्य भारत की प्राचीन पांडुलिपियों को डिजिटाइज कर संरक्षित करना और उन्हें आधुनिक शोध तथा तकनीकी विकास से जोड़ना है। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि इतिहास के क्रूर थपेड़ों में लाखों पांडुलिपियां नष्ट हो गईं, लेकिन भारत के पास अब भी दुनिया का सबसे बड़ा पांडुलिपि संग्रह है, जिसकी संख्या लगभग एक करोड़ है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हर देश अपनी ऐतिहासिक धरोहर को सभ्यता की महानता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करता है। जहां कई देश एक पांडुलिपि को भी राष्ट्रीय धरोहर मानकर सहेजते हैं, वहीं भारत के पास करोड़ों पांडुलिपियां हैं, जो गर्व का विषय हैं। उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा आज भी जीवित है क्योंकि यह संरक्षण, नवाचार, संवर्धन और अनुकूलन जैसे चार स्तंभों पर टिकी है।पीएम मोदी ने बताया कि ज्ञान भारतम मिशन न केवल अतीत को संरक्षित करेगा बल्कि भविष्य के लिए नए अवसर भी खोलेगा। उन्होंने कहा कि प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटाइजेशन एक विशाल डेटा बैंक तैयार करेगा, जो तकनीकी शोध, नवाचार और नई खोजों के लिए आधार बनेगा। उन्होंने यह भी बताया कि विश्व का सांस्कृतिक और क्रिएटिव इंडस्ट्री क्षेत्र लगभग 2.5 ट्रिलियन डॉलर का है, और भारत की पांडुलिपियां इस क्षेत्र में नई संभावनाएं जोड़ सकती हैं।प्रधानमंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे इस मिशन में सक्रिय भाग लें और प्रौद्योगिकी की मदद से भारत के अतीत को दुनिया के सामने लाएं। उन्होंने कहा कि पांडुलिपियों को गहराई से समझने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। एआई की मदद से इन पांडुलिपियों का व्यापक विश्लेषण किया जा सकता है और इन्हें विश्व के सामने और अधिक प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है।पीएम मोदी ने विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से भी आग्रह किया कि वे इस दिशा में नए कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि पूरा देश स्वदेशी की भावना और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, और ज्ञान भारतम् मिशन भी इसी राष्ट्रीय भावना का विस्तार है। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी धरोहर को अपनी ताकत का प्रतीक बनाना होगा और यह मिशन भविष्य के लिए एक नया अध्याय साबित होगा। - नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत की प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण से ‘‘बौद्धिक चोरी’’ रूकेगी। उन्होंने कहा कि अन्य लोगों ने देश की पारंपरिक ज्ञान संपदा में मौजूद जानकारी की नकल की और उसका पेटेंट करा लिया। ज्ञान भारतम पर यहां विज्ञान भवन में, ‘पांडुलिपि विरासत के माध्यम से भारत के ज्ञान धरोहर की पुनःप्राप्ति’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पहल ‘‘स्वदेशी’’ और ‘‘आत्मनिर्भर भारत’’ की अवधारणा के साथ आगे बढ़ने के देश के संकल्प का विस्तार है।उन्होंने कहा कि भारत अब सदियों से अपनी पांडुलिपियों में संरक्षित प्राचीन ज्ञान की विरासत को दुनिया के समक्ष गर्व से प्रस्तुत कर रहा है। मोदी ने देश भर में मौजूद इन पांडुलिपियों को डिजिटल बनाने के सरकार के लक्ष्य में साथ काम करने के लिए निजी संगठनों की सराहना की और कहा कि अब तक 10 लाख से अधिक पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है।उन्होंने कहा कि भारत थाईलैंड, वियतनाम और मंगोलिया जैसे अन्य देशों के साथ काम कर रहा है, जिनके साथ उसके सांस्कृतिक संबंध रहे हैं और जहां ऐसी पांडुलिपियां हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह आयोजन भारत के स्वर्णिम अतीत के पुनर्जागरण का साक्षी है। उन्होंने कहा कि इसकी ज्ञान परंपरा इतनी समृद्ध है क्योंकि यह संरक्षण, नवाचार और अनुकूलन के स्तंभों पर टिकी हुई है।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा संग्रह है, जिसमें लगभग एक करोड़ पांडुलिपियां हैं। मोदी ने कहा, ‘‘अतीत में करोड़ों पांडुलिपियां नष्ट हो गईं, लेकिन जो बची हैं, वे दर्शाती हैं कि हमारे पूर्वज ज्ञान, विज्ञान और शिक्षा के प्रति कितने समर्पित थे।’’उन्होंने कहा कि भारत अपनी सांस्कृतिक पहचान, चेतना और आत्मा के साथ एक जीवंत धारा है तथा इसका इतिहास केवल राजवंशों के उत्थान और पतन तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत की पांडुलिपियों में संपूर्ण मानवता की विकास यात्रा के वृत्तांत समाहित हैं। मोदी ने देश की पांडुलिपियों को ‘‘खजाना’’ और ‘‘राष्ट्र का गौरव’’ बताते हुए कहा कि इन प्राचीन कृतियों में, ‘‘हमें भारतीय लोकाचार के शाश्वत प्रवाह देखने को मिलते हैं।’’ प्रधानमंत्री ने पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, संरक्षण और सार्वजनिक पहुंच में तेजी लाने के लिए एक समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म, 'ज्ञान भारतम' पोर्टल की भी शुरूआत की।आगमन के तुरंत बाद, उन्होंने सबसे पहले कार्यक्रम स्थल पर आयोजित प्रदर्शनी का दौरा किया, जिसमें कुछ दुर्लभ भारतीय पांडुलिपियों का प्रदर्शन किया गया। ताड़ के पत्तों पर लिखा कौटिल्य का अर्थशास्त्र और वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड की सदियों पुरानी और दुर्लभतम पांडुलिपियां, प्रदर्शनी का हिस्सा हैं।ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट (ओआरआई) के शोध छात्र और सम्मेलन में भाग लेने वाले कृष्णा नागासाम्पिगे ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हमारे रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों पांडुलिपियां लगभग 500 साल पुरानी हैं और मैसूर स्थित ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट (ओआरआई) में रखी हैं। उनके मूल संस्करण विशेष रूप से इस अवसर के लिए बाहर निकाले गए हैं।’’मोदी ने प्लेनरी हॉल में ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत गठित विभिन्न कार्य समूहों द्वारा पेश की गईं प्रस्तुतियां भी देखीं। विभिन्न कार्यक्षेत्रों के अंतर्गत आठ समूह स्थापित किए गए हैं, जिनमें पांडुलिपि संरक्षण, डिजिटलीकरण प्रौद्योगिकियां, मेटाडेटा मानक, कानूनी ढांचे, सांस्कृतिक कूटनीति और प्राचीन लिपियों के अर्थ-निर्धारण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ मंच साझा किया, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में विद्वान, शोधकर्ता और अन्य प्रतिभागी शामिल हुए। बृहस्पतिवार से शुरू हुए इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में प्रमुख विद्वान, संरक्षणवादी, प्रौद्योगिकीविद और नीति विशेषज्ञ भारत की अद्वितीय पांडुलिपि संपदा को पुनर्जीवित करने और इसे वैश्विक ज्ञान संवाद के केंद्र में रखने के तरीकों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ आये हैं।सरकार ने संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत एक प्रमुख पहल के रूप में ज्ञान भारतम मिशन की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य देश भर के शैक्षणिक संस्थानों, संग्रहालयों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहों में स्थित एक करोड़ से अधिक पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, दस्तावेज़ीकरण, संरक्षण, डिजिटलीकरण और उन्हें सुलभ बनाना है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 सितंबर से 15 सितंबर के बीच मिजोरम, मणिपुर, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार का दौरा करेंगे। इस दौरान वह पूर्वी भारत के इन महत्त्वपूर्ण राज्यों में 71,850 करोड़ रुपये से अधिक की बुनियादी ढांचा और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को मिजोरम की राजधानी आइजोल में एक रेलवे लाइन समेत 9,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इस रेल लाइन के चालू होने के साथ ही आइजोल देश के बाकी रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा, जिससे यहां के लिए आवाजाही काफी आसान हो जाएगी।बैराबी-सारंग रेल लाइन परियोजना पर 8070 करोड़ रुपये की लागत आई है, जिसमें भौगोलिक रूप से जटिल क्षेत्र में 45 सुरंगें बनाई गई हैं। इनके अलावा इस महत्त्वपूर्ण परियोजना 55 प्रमुख पुल और 88 छोटे पुलों का निर्माण भी शामिल हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस रेललाइन के उद्घाटन के साथ ही यहां से सीधे दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी को जोड़ने वाली ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाएंगे। यहां से सबसे पहले शुरू होने वाली रेलगाडि़यों में सैरांग (आइजोल)-दिल्ली (आनंद विहार टर्मिनल) राजधानी एक्सप्रेस, सैरांग-गुवाहाटी एक्सप्रेस और सैरांग-कोलकाता एक्सप्रेस शामिल हैं।इसके अलावा वह कई सड़क परियोजनाओं की आधारशिला भी रखेंगे, जिनमें 500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला आइजोल बाईपास रोड, थेनजोल-सियालसुक रोड और खनकावन-रोंगुरा रोड प्रमुख हैं। प्रधानमंत्री लांगत्लाई-सियाहा रोड पर चिमटईपुई नदी पर बनने वाले पुल की आधारशिला रखेंगे, जो कालादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट फ्रेमवर्क के माध्यम से सीमा पार व्यापार को बढ़ाने कीदृष्टि से काफी महत्त्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने शुक्रवार को कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने पर आवाजाही बेहतर हो जाएगी, जिससे यहां के अस्पतालों, विश्वविद्यालयों और बाजारों तक पहुंचना आसान हो जाएगा।सूत्रों के अनुसार मणिपुर में 7,300 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी, जिसमें 3,600 करोड़ रुपये से अधिक की मणिपुर शहरी सड़कें, जल निकासी और संपत्ति प्रबंधन सुधार जैसी परियोजनाएं है। इनके अलावा 2,500 करोड़ रुपये से अधिक की 5 नैशनल हाइवे परियोजनाएं और मणिपुर इन्फोटेक डेवलपमेंट परियोजना तथा 9 स्थानों पर वर्किंग वीमेन हॉस्टल का निर्माण किया जाएगा। असम की परियोजनाओं में दर्रांग मेडिकल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल के साथ-साथ गुवाहाटी रिंग रोड परियोजना भी शामिल है, जो शहरी गतिशीलता को बढ़ाने में खासी मददगार साबित होगी। इससे यातायात का दबाव काफी कम हो जाएगी और राजधानी शहर के अंदर और आसपास आवाजाही में सुधार होगा। रिंग रोड चालू होने से ब्रह्मपुत्र नदी पर कुरुवा-नारेगी पुल पर आना-जाना आसान हो जाएगा जिससे क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।चुनावी राज्य बिहार में प्रधानमंत्री मोदी कई रेलवे परियोजनाएं शुरू करने वाले हैं। इनमें 2170 करोड़ रुपये की विक्रमशिला-कटरेह रेल लाइन भी है, जिसकी मोदी आधारशिला रखेंगे। पीएमओ ने कहा, ‘यह गंगा के पार वाले क्षेत्र को रेल मार्ग से जोड़ने में महत्त्वपूर्ण कदम होगा और इससे बड़ी संख्या में लोगों को लाभ मिलेगा।’ मोदी अररिया-गलगालिया (ठाकुरगंज) के बीच 4,410 करोड़ रुपये से अधिक की नई रेल लाइन का भी उद्घाटन करेंगे।अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी जोगबनी और दानापुर के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे, जिससे अररिया, पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया, बेगूसराय, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, वैशाली और पटना जैसे जिलों को सीधा लाभ होगा। साथ ही अमृत भारत ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाई जाएगी जो पूरी तरह गैर-वातानुकूलित ट्रेनें हैं। मोदी बिहार में 36,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और आधारशिला रखेंगे।प्रधानमंत्री मोदी रविवार को असम बायो-एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड का उद्घाटन करेंगे और गोलाघाट में एक पॉलिप्रोपाइलीन प्लांट की आधारशिला रखेंगे। इन परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य के स्वच्छ ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को बढ़ावा देना है। -
नई दिल्ली। नेपाल में जारी अशांति और जेन जेड (Gen Z) विरोध प्रदर्शनों के कारण पिछले चार दिन से बंद पड़ा भारत-नेपाल का सोनौली बॉर्डर आज शुक्रवार को फिर से खोल दिया गया। इसके बाद जरूरी सामान लेकर जा रहे ट्रकों की आवाजाही शुरू हो गई।
बॉर्डर बंद रहने से सैकड़ों ट्रक भारतीय सीमा पर फंसे हुए थे, जिनमें प्याज, नारियल और कच्चा माल जैसे जल्दी खराब होने वाले सामान थे। तमिलनाडु से नारियल लेकर काठमांडू जा रहे ट्रक चालक विष्णु ने बताया कि वे चार दिन तक बॉर्डर पर फंसे रहे। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि काठमांडू तक सब ठीक रहेगा। थोड़ा डर जरूर है, लेकिन यहां भोजन और पानी की सुविधा मिली।”वहीं नेपाल में ईंधन संकट भी गहराता जा रहा है। इस कारण वहां से ट्रक भारत आकर पेट्रोल और डीजल खरीद रहे हैं। एक नेपाली चालक ने कहा, “नेपाल में कोई पेट्रोल पंप खुला नहीं है। सरकार ने हमें भारत भेजा है ताकि हम ईंधन खरीद सकें।”नेपाल में जारी हिंसक प्रदर्शनों की वजह से हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। प्रदर्शन सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और राजनीतिक अस्थिरता व भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुए थे।इसी दौरान नेपाल की अलग-अलग जेलों से फरार 67 कैदियों को भारत में घुसने की कोशिश करते हुए भारत-नेपाल सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने पकड़ लिया, इनमें एक महिला भी शामिल है। नेपाल के स्वास्थ्य और जनसंख्या मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, काठमांडू घाटी में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प में मरने वालों की संख्या 34 तक पहुंच गई है, जबकि पूरे देश में अब तक 1,368 लोग घायल हुए।- - नयी दिल्ली। रोजगार में दिव्यांगजनों के प्रति भेदभाव का उल्लेख करते हुए उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र से सवाल किया कि क्या अनारक्षित श्रेणी के लिए निर्धारित ‘कट-ऑफ’ से अधिक अंक प्राप्त करने वाले मेधावी उम्मीदवारों को ‘‘आगे बढ़ाने’’ के लिए उपाय किये गए हैं। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने दिव्यांगजनों के समक्ष पेश आने वाली प्रणालीगत बाधाओं को दूर करने और वैधानिक सुरक्षा उपायों के प्रवर्तन को सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप के अनुरोध वाली याचिकाओं पर यह टिप्पणी की। पीठ ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (आरपीडब्ल्यूडी), 2016 के तहत आरक्षण के पहलू पर विचार किया और कहा कि अधिनियम की धारा 34 के तहत ‘आरक्षण’’ की सकारात्मक व्याख्या करना अनिवार्य है।पीठ ने दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आरक्षण के एक महत्वपूर्ण पहलू का उल्लेख किया और कहा कि सामाजिक व्यवस्था के परिणामस्वरूप भेदभाव का सामना करने वाले लोगों के मुकाबले दिव्यांगजनों को कहीं अधिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है।पीठ ने अपने 65 पृष्ठों के फैसले में कहा कि दिव्यांगजन संविधान के अनुच्छेद 16(4) के तहत सामाजिक आरक्षण के हकदार हैं, जो आरक्षित श्रेणी के व्यक्ति द्वारा मूल्यांकन प्रक्रिया में अच्छा प्रदर्शन करने और अनारक्षित श्रेणी के कट-ऑफ से ऊपर मेधा में आने पर उन्हें ऊपर बढ़ाने का प्रावधान करता है।पीठ ने कहा कि ऐसा मेधावी उम्मीदवार स्वतः ही अनारक्षित श्रेणी में चला जाएगा, जिससे आरक्षित सीट खाली रह जाएगी और यह मूल्यांकन प्रक्रिया में कम अंक पाने वाले आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार को मिल जाएगी।न्यायालय ने कहा, ‘‘हालांकि, हमें सूचित किया गया है और यह गंभीर चिंता का विषय है कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत संरक्षित दिव्यांगजनों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाता है, जो योग्यता में उच्च स्थान पर होने के बावजूद, इस तरह से ऊपर बढ़ने से वंचित रह जाते हैं।’’पीठ ने कहा कि यह अधिनियम की धारा 34 के तहत आरक्षण के मूल उद्देश्य को ही विफल करता है और ‘‘दिव्यांगजनों के प्रति भेदभाव का एक ज्वलंत उदाहरण है और इसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है।’पीठ ने कहा कि ऊर्ध्वगामी संचलन के सिद्धांत के अनुसार, सामान्य ‘कट-ऑफ’ से अधिक अंक प्राप्त करने वाले आरक्षित श्रेणी के मेधावी उम्मीदवार को अनारक्षित सूची में स्थानांतरित किया जाना चाहिए।न्यायालय ने कहा कि दुर्भाग्य से, दिव्यांगजनों को वर्तमान में यह लाभ नहीं दिया जा रहा है।पीठ ने कहा, ‘‘इन बातों को ध्यान में रखते हुए, हम भारत सरकार द्वारा यह स्पष्ट किया जाना उचित समझते हैं कि यदि ऐसा अभ्यर्थी अनारक्षित श्रेणी के लिए निर्धारित कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करता है तो दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित पद/पदों के लिए आवेदन करने वाले मेधावी अभ्यर्थियों को आगे बढ़ाने के लिए क्या उपुयक्त उपाय किए गए हैं।’’पीठ ने कहा कि यही सिद्धांत पदोन्नति पर भी लागू होना चाहिए।न्यायालय ने कहा कि इस तरह के विचार को इस व्यापक उद्देश्य से निर्देशित किया जाना चाहिए कि आरक्षण का वास्तविक और आवश्यक लाभ सबसे अधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे, यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी दिव्यांग व्यक्ति को केवल गरीबी और पहुंच की कमी के कारण पद के लिए उसके सही दावे से वंचित न किया जाए।पीठ ने कहा, ‘‘इस तरह की कार्रवाई समानता, गरिमा और समावेशिता के संवैधानिक वादे को ध्यान में रखते हुए की जानी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आरक्षण का लाभ न तो कम किया जाए और न ही उन लोगों को वंचित किया जाए जिन्हें वास्तव में इसकी आवश्यकता है।’’शीर्ष अदालत ने केंद्र से 14 अक्टूबर तक अपने प्रश्न का उत्तर देने को कहा।न्यायालय ने आठ राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के ‘प्रोजेक्ट एबिलिटी एम्पावरमेंट’ की एक विस्तृत समेकित रिपोर्ट छह महीने के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिसमें प्रणालीगत सुधारों और समुदाय-आधारित विकल्पों की ओर बढ़ने के लिए कार्रवाई योग्य सिफारिशें शामिल हों।न्यायालय ने ‘प्रोजेक्ट एबिलिटी एम्पावरमेंट’ के तहत राज्य संचालित सभी संज्ञानात्मक दिव्यांग देखभाल संस्थानों की राष्ट्रव्यापी निगरानी का भी निर्देश दिया।पीठ ने मामले की सुनवाई 13 मार्च 2026 के लिए स्थगित कर दी।
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नई दिल्ली। भूस्खलन के कारण दो हफ्ते से अधिक समय से स्थगित माता वैष्णो देवी यात्रा रविवार से फिर से शुरू होने वाली है। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने आज शुक्रवार को यह घोषणा की। बोर्ड ने कहा है कि वैष्णो देवी यात्रा की बहाली सशर्त है और अनुकूल मौसम की स्थिति पर निर्भर है।
जानकारी और बुकिंग के लिए वेबसाइट पर विजिट किया जा सकता हैश्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “अनुकूल मौसम की स्थिति के अधीन वैष्णो देवी यात्रा 14 सितंबर (रविवार) से फिर से शुरू होगी। जानकारी और बुकिंग के लिए वेबसाइट पर विजिट करें।”पिछले महीने श्री माता वैष्णो देवी यात्रा स्थगित कर दी गई थीगौरतलब हो, जम्मू संभाग में 26 अगस्त को अत्यधिक खराब मौसम के दौरान माता वैष्णो देवी मंदिर मार्ग पर भूस्खलन होने से 35 से अधिक तीर्थयात्रियों की जान चली गई और 10 से अधिक अन्य घायल हो गए थे। इसके कारण श्री माता वैष्णो देवी यात्रा स्थगित कर दी गई थी। कटरा में पिछले दिनों हुए भूस्खलन के बाद प्रशासन ने होटल और धर्मशालाओं को खाली करने का आदेश जारी किया था।वहीं, भूस्खलन त्रासदी के बाद श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (एसएमवीडीएसबी) की आलोचना हुई, यहां तक कि जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने भी यात्रा के मामलों का प्रबंधन करने वाले एसएमवीडीएसबी के अधिकारियों को दोषी ठहराया।जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने तीन दिन बाद श्री माता वैष्णो देवी मंदिर मार्ग पर अखदुवारी के पास हुए भूस्खलन की घटना की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति के गठन का आदेश दिया था। अतिरिक्त मुख्य सचिव (जल शक्ति) की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति बनाई गई, जिसमें जम्मू के संभागीय आयुक्त और पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) को शामिल किया गया।उपराज्यपाल के आदेश में कहा गया था, “यह समिति अगले सप्ताह में श्राइन बोर्ड को रिपोर्ट सौंपेगी।” रियासी जिले के कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में हर साल करोड़ों तीर्थयात्री आते हैं। -
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय में शुक्रवार को बम की धमकी वाला ई-मेल प्राप्त होने के बाद न्यायाधीशों और पक्षकारों को अदालत कक्षों से बाहर निकालना पड़ा, लेकिन तलाशी के बाद पुलिस ने इसे अफवाह घोषित कर दिया। अदालत प्रशासन को मिले ई-मेल में उच्च न्यायालय में हमला करने की धमकी दी गई। इसके बाद पुलिस और अन्य एजेंसियों को तलाशी अभियान शुरू करना पड़ा।
ईमेल में कहा गयादिल्ली पुलिस को स्पष्ट रूप से संबोधित करते हुए लिखे गए ईमेल में कहा गया है, “उदाहरण के तौर पर शुक्रवार को आपके दिल्ली हाईकोर्ट में धमाका पिछले झांसों का संदेह दूर कर देगा। दोपहर के तुरंत बाद जज चैंबर में धमाका होगा।”ईमेल में दावा किया गया कि तीन बम प्लांट किए गए हैं। यह धमकी जुमे की नमाज के संदर्भ में दी गई है। धमकी भरे ईमेल में लिखा है, “शुक्रवार विस्फोटों के लिए पाकिस्तान-तमिलनाडु की मिलीभगत। जज रूम या कोर्ट परिसर में 3 बम रखे गए हैं। दोपहर 2 बजे तक खाली कर दें।”ईमेल में राजनीतिक साजिश का भी जिक्रइस ईमेल में राजनीतिक साजिश का भी जिक्र है, जिसमें पाकिस्तान की आईएसआई, कुछ व्यक्तियों और राजनीतिक परिवारों को निशाना बनाने की योजना बताई गई है। इसके साथ ही, ईमेल में एक व्यक्ति के नाम का जिक्र करते हुए उसका मोबाइल नंबर दिया गया है। मैसेज में लिखा है, “आईईडी डिवाइस की लोकेशन और डिफ्यूजिंग कोड के लिए सत्यभामा सेंगोट्टायन से संपर्क करें।”इससे पहले, 9 सितंबर को, दिल्ली के मुख्यमंत्री सचिवालय और मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (एमएएमसी) को बम की धमकी वाला ईमेल मिला था। यह घटना हाल के महीनों में कई स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों को मिले फर्जी ईमेल के बाद हुई। -
नई दिल्ली। भारत के उपराष्ट्रपति बनने के बाद सीपी राधाकृष्णन को देशभर से बधाई संदेश मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सीपी राधाकृष्णन को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।
पीएम मोदी ने शुभकामना संदेश में लिखी यह बातप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “सीपी राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुआ। एक समर्पित लोक सेवक के रूप में, उन्होंने अपना जीवन राष्ट्र निर्माण, समाज सेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने के लिए समर्पित कर दिया। मैं उन्हें जनता की सेवा के लिए समर्पित एक सफल उपराष्ट्रपति कार्यकाल की शुभकामनाएं देता हूं।”अमित शाह ने भी पोस्ट कर दी बधाईअपनी पोस्ट में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “सीपी राधाकृष्णन को भारत के उपराष्ट्रपति पद की शपथ लेने पर बधाई। आपका ज्ञान और अनुभव हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को और मजबूत करेगा, ताकि लोगों की बेहतर सेवा की जा सके।”जेपी नड्डा ने अपनी पोस्ट में लिखा- ‘आपका समृद्ध प्रशासनिक अनुभव राष्ट्र का अनेक प्रकार से मार्गदर्शन करेगी’केंद्रीय मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने अपनी पोस्ट में लिखा, “भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने पर सीपी राधाकृष्णन को हार्दिक बधाई। आपका समृद्ध प्रशासनिक अनुभव और समाज सेवा के प्रति प्रतिबद्धता निश्चित रूप से राष्ट्र का अनेक प्रकार से मार्गदर्शन करेगी। मुझे विश्वास है कि राज्यसभा के सभापति के रूप में आपकी भूमिका हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों को और सुदृढ़ करेगी व भारत की प्रगति में सकारात्मक योगदान देगी। आपके आगामी सफल और प्रेरणादायक कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं।”यह एनडीए और पूरे देश के लिए खुशी और गौरव का दिनइस मौके पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह एनडीए और पूरे देश के लिए खुशी और गौरव का दिन है। मुझे उपराष्ट्रपति के रूप में सीपी राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जो पहले महाराष्ट्र के राज्यपाल रह चुके हैं। मैं उन्हें हार्दिक बधाई और धन्यवाद देता हूं। एकनाथ शिंदे ने कहा, “जब वे महाराष्ट्र आए थे, तो हमने उनसे कहा था कि आप जैसे व्यक्ति का महाराष्ट्र का राज्यपाल बनना राज्य के लिए सौभाग्य की बात है। अब, राज्यपाल के रूप में कार्य करते हुए वे उपराष्ट्रपति के पद पर आसीन हुए हैं।” -
इटावा (उप्र) । इटावा जिले में पिता से झगड़ रहे 19 वर्षीय एक युवक को पड़ोसी ने कथित रूप से थप्पड़ मार दिया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। निरीक्षक (अपराध) अरिमर्दन सिंह ने बताया कि यह घटना बृहस्पतिवार देर रात की है जब भरथना इलाके का निवासी गौरव नशे की हालत में अपने पिता रघुवर दयाल से कथित रूप से झगड़ रहा था।
सिंह ने बताया कि कुछ पड़ोसियों ने बीच-बचाव किया और उनमें से एक ने गौरव को कथित तौर पर थप्पड़ मार दिया, जिससे वह जमीन पर गिरकर बेहोश हो गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और गौरव को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने आरोपी के नाम का खुलासा नहीं किया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। file photo - बेंगलुरु ।बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीएमआरसीएल) ने शुक्रवार को कहा कि उसने मानव हृदय के प्रत्यारोपण के लिए “तेज और सुरक्षित” परिवहन की सुविधा प्रदान की है। बीएमआरसीएल ने एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी। बीएमआरसीएल की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक 11 सितंबर को स्पर्श अस्पताल से लाया गया मानव हृदय 23:01 बजे यशवंतपुरा मेट्रो स्टेशन पर पहुंचाया गया। यहां से यह 23:21 बजे मंत्री स्क्वायर संपीगे रोड मेट्रो स्टेशन पर पहुंचा।यह भारत में दूसरी बार था जब अंग परिवहन के लिए मेट्रो का उपयोग किया गया, पहला हैदराबाद मेट्रो में हुआ था। यह सुविधा शहरी यातायात की भीड़ से बचने और समय पर अंग पहुंचाने में मदद करती है।बेंगलुरु की नम्मा मेट्रो ने एक दान किए गए मानव लीवर को चिकित्सा कर्मियों को सौंपे गए ट्रेन के अंतिम डिब्बे में ले जाने की सुविधा प्रदान की। यह प्रक्रिया आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) द्वारा जारी संयुक्त प्रक्रिया आदेशों के अनुसार की गई। इस कदम से अंग परिवहन में लगने वाला समय काफी कम हो गया। यह भारत में शहरी चिकित्सा आपात स्थितियों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण स्थापित करता है।2023 में, MOHUA ने मेट्रो के माध्यम से मानव अंगों या ऊतकों के परिवहन की अनुमति देने के लिए मेट्रो रेलवे (कैरिज और टिकट) नियम, 2014 में संशोधन किया था, बशर्ते कि अस्पताल द्वारा अधिकृत व्यक्ति उन्हें ले जाएं।
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गांधीनगर. गुजरात के वन मंत्री मुलुभाई बेरा ने राज्य विधानसभा को बताया कि पिछले दो वर्षों में राज्य में कम से कम 307 शेरों की मौत हुई है और इनमें से 41 की मौत अप्राकृतिक कारणों से हुईं। बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक उमेश मकवाना द्वारा उठाए गये सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने शेरों की अप्राकृतिक मौतों को रोकने के लिए इन दो वर्षों के दौरान विभिन्न उपाय करने पर 37.35 करोड़ रुपये खर्च किए। बेरा ने सदन को बताया कि अगस्त 2023 और जुलाई 2024 के बीच 141 शेरों की मौत हुई, जबकि अगस्त 2024 और जुलाई 2025 के बीच 166 शेरों की मौत की सूचना मिली। उन्होंने कहा कि इन 307 शेरों में से 41 अप्राकृतिक कारणों से मारे गए। उन्होंने बताया कि 20 शेरों की मौत कुओं में गिरने से हुई, जबकि नौ अन्य जलाशयों में डूब गये। उन्होंने बताया कि अन्य कारणों में प्राकृतिक आपदा (दो शेर), सड़क दुर्घटना (दो), ट्रेन से कुचलकर (पांच) और बिजली का झटका लगने से (तीन) शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शेरों की अप्राकृतिक मौतों को रोकने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं, जैसे विभिन्न स्थानों पर जंगली जानवरों के उपचार के लिए केंद्र स्थापित करना, पशु चिकित्सकों की नियुक्ति करना और शेरों के समय पर उपचार के लिए एम्बुलेंस सेवा शुरू करना। उन्होंने कहा कि अन्य उपायों में अभयारण्य क्षेत्रों से गुजरने वाली सड़कों पर ‘स्पीड-ब्रेकर' बनाना और साइनबोर्ड लगाना, जंगलों में नियमित गश्त करना, जंगलों के निकट खुले कुओं के पास दीवारें बनाना, गिर वन्यजीव अभयारण्य के पास रेलवे ट्रैक के दोनों ओर बाड़ लगाना और एशियाई शेरों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उन्हें ‘रेडियो कॉलर' लगाना शामिल है। विधानसभा का तीन दिवसीय मानसून सत्र बुधवार को समाप्त हो गया।
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वाराणसी (उप्र). वाराणसी के दौरे पर आये मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम बृहस्पतिवार को अपनी पत्नी और प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के साथ दशाश्वमेध घाट की विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती में शामिल हुए। रामगुलाम ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से दिन में वार्ता करने के बाद शाम को गंगा आरती में शिरकत की। एक आधिकारिक बयान के अनुसार मॉरीशस के प्रधानमंत्री शाम को पत्नी संग मां गंगा की आरती में शामिल हुए। रामगुलाम का राज्यपाल आनंदीबेन पटेल एवं कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने अंगवस्त्रम भेंट कर स्वागत किया। रविदास घाट पर मेहमानों के स्वागत में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी हुआ। प्रधानमंत्री के साथ प्रतिनिधिमंडल ने ख़ास बनारसी व्यंजनों का स्वाद चखा। रामगुलाम दिन में अपने भारतीय समकक्ष नरेन्द्र मोदी से वार्ता के दौरान राष्ट्र धर्म पर चलने के बाद शाम को धर्म पथ पर चलते नजर आए। दोपहर में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद मॉरीशस के प्रधानमंत्री ने अविरल निर्मल मां गंगा की गोद में क्रूज़ पर बैठकर गंगा आरती के साथ ऐतिहासिक घाटों का नजारा देखा। उनकी पत्नी और उनका प्रतिनिधिमंडल भी इन नजारों से अभिभूत दिखा। गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्र ने बताया कि गंगा का जलस्तर बढ़ा होने के कारण गंगा आरती संस्था के छत पर आयोजित की गई। सात अर्चकों द्वारा मां गंगा की आरती को विधि विधान से सम्पन्न कराया गया और मां गंगा से प्रार्थना की गई कि दोनों के बीच रिश्ते प्रगाढ़ बने रहें। अलकनन्दा क्रूज लाइन के निदेशक विकास मालवीय ने अंगवस्त्र और श्री राम की चरण पादुका देकर मॉरीशस के प्रधानमंत्री का क्रूज़ पर स्वागत और अभिनन्दन किया। बयान के मुताबिक सड़क मार्ग से जबरामगुलाम और उनका प्रतिनिधिमंडल रविदास घाट पंहुचा तो उनका स्वागत बधावा लोकनृत्य और फरूवाही लोकनृत्य से किया गया। क्रूज पर मेहमानों को काशी के घाटों और सदियों से गंगा किनारे खड़ी धार्मिक और ऐतिहासिक इमारतों के बारे में विशेषज्ञों द्वारा जानकारी दी गई। बयान के अनुसार क्रूज पर खास बनारसी खान-पान का इंतजाम किया गया था जिसमें बनारसी चाट, कुल्फी, ठंडाई, लस्सी और पान आदि भी रहा।
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नयी दिल्ली. ‘दिल्ली मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम' के 55 किलोमीटर लंबे खंड पर 160 किमी प्रति घंटे की गति से चलने वाली ‘नमो भारत' देश में सबसे तेज गति से चलने वाली ट्रेन बन गई है। इससे पहले 2016 में शुरू गतिमान एक्सप्रेस देश की पहली ‘सेमी-हाई स्पीड ट्रेन' थी, जो हजरत निजामुद्दीन और आगरा के बीच विशेष रूप से बिछाई गई पटरियों पर 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती थी। बाद में, जब सेमी-हाई स्पीड ट्रेन ‘वंदे भारत' शुरू की गई तब यह भी उतनी ही अधिकतम गति से चलती थी।
रेल मंत्रालय ने हालांकि 24 जून, 2024 को बिना कोई कारण बताए इन ट्रेन की गति 160 से घटाकर 130 किमी प्रति घंटे करने का फैसला किया। वर्तमान में, भारतीय रेल नेटवर्क पर सभी ट्रेन 130 किमी प्रति घंटे की ऊपरी गति सीमा के साथ चलती हैं।‘नमो भारत' की तीस ट्रेन पूर्वी दिल्ली के न्यू अशोक नगर और उत्तर प्रदेश के मेरठ दक्षिण के बीच चलती हैं। प्रत्येक ट्रेन में छह डिब्बे हैं और ट्रेन प्रत्येक स्टेशन से 15 मिनट के अंतराल पर चलती हैं।मार्ग के 11 स्टेशन में से कुछ स्टेशन के बीच ट्रेन कुछ सेकंड के लिए अधिकतम 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रीय परिवहन निगम लिमिटेड (एनसीआरटीसीएल) के अधिकारियों ने बताया, “दिल्ली के सराय काले खां से उत्तर प्रदेश के मोदीपुरम तक 16 स्टेशन वाले 82.15 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के जल्द ही शुरू होने की संभावना है।” एनसीआरटीसी की एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, एक बार कॉरिडोर के पूरा हो जाने पर यह दिल्ली को ऐतिहासिक शहर मेरठ से जोड़ देगा। नमो भारत ट्रेन एक घंटे से भी कम समय में यह दूरी तय करेंगी और मार्ग में पड़ने वाले सभी स्टेशन पर रुकेंगी। - देहरादून,। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में हाल में अतिवृष्टि, भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुए नुकसान का जायजा लिया और राज्य के लिए 1200 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की। एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, प्रधानमंत्री ने यहां एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उत्तराखंड में प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास कार्यों तथा आपदा से हुए नुकसान का जायजा लिया । उन्हों उत्तराखंड के लिए 1200 करोड़ रुपये के राहत पैकेज घोषणा की । इस दौरान, प्रधानमंत्री ने आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए दो-दो लाख रुपये तथा घायलों के लिए 50-50 हजार रुपये अनुग्रह राशि की भी घोषणा की । अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री को राज्य के आपदाग्रस्त क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण भी करना था, लेकिन मौसम खराब होने के कारण इसे रद्द कर दिया गया। जौलीग्रांट हवाई अड्डे पर हुई इस बैठक में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत) गुरमीत सिंह , मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा के अलावा राज्य के सांसद और केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार किया और आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार स्थिति से निपटने के लिए सभी प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि इस समय राज्यों को अग्रिम भुगतान समेत आपदा प्रबंधन अधिनियम और नियमों के अंतर्गत घोषित सहायता अंतरिम अवधि के लिए है तथा केंद्र सरकार राज्यों के ज्ञापन और केंद्रीय टीमों की रिपोर्ट के आधार पर मूल्यांकन की आगे समीक्षा करेगी। केंद्र सरकार की एक अंतर-मंत्रालयी टीम इस सप्ताह उत्तराखंड के आपदाग्रस्त जिलों का दौरा कर चुकी है ।प्रधानमंत्री ने पूरे क्षेत्र तथा लोगों को उससे उबरने में मदद के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाये जाने की जरूरत पर बल दिया जिसमें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकानों का पुनर्निर्माण, राष्ट्रीय राजमार्गों की मरम्मत, स्कूलों को दोबारा बनाना और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष के जरिए राहत देना और पशुओं के लिए मिनी किट वितरित करने जैसे उपाय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत, ग्रामीण क्षेत्रों में मकानों के पुनर्निर्माण के लिए उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रस्तुत ' विशेष परियोजना' के अंतर्गत उन पात्र परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी जिनके मकान आपदा से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। प्रधानमंत्री ने आपदा प्रभावित परिवारों से मुलाकात भी की । उन्होंने आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के प्रति भी अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त की । प्रधानमंत्री ने आपदाओं में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए दो- दो लाख रुपये तथा गंभीर रूप से घायल लोगों के लिए 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि की भी घोषणा की । प्रधानमंत्री ने यह भी घोषणा की कि हाल में आई आपदाओं में अनाथ हुए बच्चों को ‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना' से सहायता मिलेगी जिससे उनकी दीर्घकालिक देखभाल और कल्याण सुनिश्चित होगा। प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) और आपदा मित्र स्वयंसेवकों से भी मिले तथा राहत और बचाव कार्यों में उनके प्रयासों की सराहना की । इससे पहले, शाम को जौलीग्रांट हवाई अड्डे पहुंचने पर प्रधानमंत्री का मुख्यमंत्री धामी ने स्वागत किया । धामी ने राहत पैकेज घोषित करने के लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया है । उन्होंने कहा कि वह उत्तराखंड में आपदा से हुए नुकसान की भरपाई हेतु राहत पैकेज की घोषणा के लिए प्रधानमंत्री का प्रदेश की जनता की तरफ से आभारी हैं । उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने स्वयं उत्तराखंड आकर आपदा पीड़ितों का दु:ख दर्द साझा किया है। राज्य के प्रति आत्मीयता एवं संवेदनशीलता के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी का बहुत-बहुत आभार है।'' हांलांकि, विपक्षी कांग्रेस ने इस राहत पैकेज को नाकाफी बताते हुए इसे 'उंट के मुंह में जीरा' करार दिया। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (संगठन), सूर्यकांत धस्माना ने कहा, ‘‘ राज्य में हुए नुकसान को देखते हुए यह पैकेज बहुत कम है और उंट के मुंह में जीरा के समान है ।'' धस्माना ने विभिन्न क्षेत्रों में आपदा से हुए नुकसान की तुलना 2023 में आयी केदारनाथ आपदा से करते हुए कहा, ‘‘12 साल पहले डॉ मनमोहन सिंह की सरकार ने उत्तराखंड को 21 हजार करोड़ रुपये का पैकेज दिया था किंतु आज मोदीजी द्वारा घोषित पैकेज न केवल नाकाफी है बल्कि उनके उत्तराखंड के प्रति प्रेम और लगाव की पोल खोलने वाला भी है । '' इस मानसून सीजन में उत्तरकाशी जिले में धराली-हर्षिल, चमोली में थराली, रुद्रप्रयाग में जखोली—बसुकेदार, बागेश्वर में कपकोट, पौड़ी में सैंजी जैसे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में अतिवृष्टि, बादल फटने, बाढ़, भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से भारी तबाही हुई है। ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष एक अप्रैल से अब तक राज्य में प्राकृतिक आपदाओं में 81 व्यक्तियों की मौत हो चुकी है जबकि 94 अन्य लापता हैं । इन आपदाओं में 80 लोग घायल भी हुए हैं।

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