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जबलपुर. मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले के रानी दुर्गावती अस्पताल में एक महिला ने 5.2 किलोग्राम के एक बच्चे को जन्म दिया। अस्पताल की एक वरिष्ठ डॉक्टर ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यह एक दुर्लभ घटना है क्योंकि नवजात का वजन सामान्य से कहीं अधिक है। अस्पताल की प्रमुख स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. भावना मिश्रा ने बताया कि रांझी इलाके में रहने वाले आनंद चौकसे की पत्नी शुभांगी ने बुधवार को इस बच्चे का जन्म किया। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने पिछले कई सालों में इतना भारी बच्चा नहीं देखा है।''
उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों को आमतौर पर 24 घंटे तक निगरानी में रखा जाता है क्योंकि उनके शर्करा के स्तर में उतार-चढ़ाव होता है। उन्होंने कहा, ‘‘बच्चा एसएनसीयू (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई) में है क्योंकि ऐसे बच्चों में जन्मजात बीमारियों का खतरा होता है।'' मिश्रा ने बताया कि चिकित्सक रक्त शर्करा के स्तर को देख रहे हैं और कुल मिलाकर स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि नवजात बच्चे का औसत वजन 2.8 से 3.2 किलोग्राम के बीच होता है, जबकि नवजात बच्ची का औसत वजन 2.7 से 3.1 किलोग्राम के बीच होता है। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन अच्छी जीवनशैली, पोषण और बेहतर चिकित्सा देखभाल के कारण शिशुओं के वजन में धीरे-धीरे सुधार होता है।'' मिश्रा ने कहा कि संभवतः यही वजह हो सकती है कि महिला ने 5.2 किलो के बच्चे को जन्म दिया। -
नयी दिल्ली. एनडीएमसी स्कूलों में विद्यार्थी मंत्रोच्चार, योगाभ्यास और ध्यान के साथ अपना दिन शुरू करेंगे, जबकि शिक्षक पारंपरिक गुरु-शिष्य मॉडल के अनुसार शिक्षा प्रदान करेंगे। यह 'विकास भी, विरासत भी' पाठ्यक्रम का हिस्सा है, जिसकी शुरूआत दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शिक्षक दिवस के एक दिन पहले बृहस्पतिवार को तालकटोरा स्टेडियम में किया। इस कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए पंद्रह शिक्षकों को सम्मानित किया गया। 'विकास भी, विरासत भी' पहल का उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक शिक्षा में एकीकृत करना है, जिससे नई दिल्ली नगरपालिका (एनडीएमसी) द्वारा संचालित स्कूलों के 28,000 से अधिक छात्रों को लाभ होगा। पाठ्यक्रम दस्तावेज के अनुसार, छात्र अब दैनिक प्रार्थना सभा के दौरान गायत्री मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र और शांति पाठ जैसे संस्कृत मंत्रों का पाठ करेंगे। इसके अलावा स्कूल की समय-सारिणी में योग और ध्यान को शामिल करना है। पाठ्यक्रम गुरु-शिष्य परम्परा को पुनर्जीवित करता है, तथा शिक्षकों के प्रति सम्मान और सहपाठियों के बीच मार्गदर्शन को बढ़ावा देता है।
- देहरादून. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के हर जिले में एक-एक वृद्धाश्रम बनाने, दिव्यांगजन से विवाह करने पर प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर 50,000 रुपये करने और कक्षा एक से आठ तक के दिव्यांग छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति हेतु आय सीमा समाप्त करने की बृहस्पतिवार को घोषणा की। मुख्यमंत्री ने ये घोषणाएं वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगजनों के साथ संवाद कार्यक्रम के दौरान कीं।इस अवसर पर उन्होंने दिव्यांग शादी अनुदान एवं राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के पोर्टल की शुरुआत की और समाज कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत दी जा रही पेंशन की वित्त वर्ष 2025–26 की पांचवीं किस्त का ऑनलाइन भुगतान भी किया। इस मौके पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में एक-एक वृद्धाश्रम की व्यवस्था की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के सभी जिलों में वृद्धाश्रमों की व्यवस्था को सुदृढ़ कर रही है। उन्होंने कहा फिलहाल बागेश्वर, चमोली और उत्तरकाशी में राजकीय वृद्धाश्रम संचालित हो रहे हैं, जबकि देहरादून, अल्मोड़ा और चंपावत में नए भवन निर्माणाधीन हैं। इसके अतिरिक्त, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल सहित विभिन्न क्षेत्रों में गैर-सरकारी संगठनों द्वारा संचालित वृद्धाश्रम भी कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य में 'माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम' लागू किया गया है, जिससे बुजुर्गों को अपने बच्चों या कानूनी उत्तराधिकारियों से भरण-पोषण प्राप्त करने का कानूनी अधिकार मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांग युवक-युवती से विवाह करने पर प्रोत्साहन अनुदान राशि को 25,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये किया जाएगा तथा दिव्यांग छात्रवृत्ति योजना के तहत कक्षा एक से आठ तक के दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए आय सीमा समाप्त कर दी जाएगी। धामी ने कहा कि बुजुर्गों और दिव्यांगजनों से संवाद का उद्देश्य उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं को सीधे तौर पर जानना था ताकि उनके समाधान के लिए और अधिक ठोस कदम उठाए जा सकें। उन्होंने कहा कि हाल में देहरादून में 'प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र' की शुरुआत की गई है और भविष्य में ऐसे केंद्र हर जिले में खोले जाएंगे।
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नई दिल्ली। देशभर में आज शुक्रवार को ईद मिलाद-उन-नबी और ओणम का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और इन पर्वों के महत्व पर प्रकाश डाला।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि पैगंबर मुहम्मद ने हमेशा एकता और मानवता की सेवा का संदेश दिया है। उन्होंने ईद मिलाद-उन-नबी की बधाई देते हुए देशवासियों से भाईचारे की भावना से आगे बढ़ने का संकल्प लेने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने ओणम के अवसर पर भारत और विदेश में रह रहे केरलवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं।वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईद मिलाद-उन-नबी की बधाई देते हुए लिखा कि यह पवित्र दिन समाज में शांति और कल्याण लेकर आए। उन्होंने करुणा, सेवा और न्याय जैसे मूल्यों को याद करने का आह्वान किया। ओणम की शुभकामनाएं देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह त्योहार केरल की समृद्ध परंपराओं का प्रतीक है और यह समाज में एकता और सद्भाव की भावना को और मजबूत करता है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी ईद मिलाद-उन-नबी की बधाई दी और इसे मानवता के लिए शांति, खुशी और सेवा की भावना का वाहक बताया।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को दोनों पर्वों की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पैगंबर मुहम्मद का जन्मदिन समाज में शांति और सद्भाव बढ़ाने की प्रेरणा देता है। वहीं, ओणम को उन्होंने समृद्धि, सौहार्द और सांस्कृतिक उल्लास का प्रतीक बताया और किसानों समेत सभी नागरिकों के सुख-समृद्धि की कामना की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी ईद मिलाद-उन-नबी की बधाई दी। उन्होंने लिखा कि यह पावन अवसर शांति, करुणा और सद्भाव का संदेश लेकर आए और समाज को एकजुट करे। -
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर लगातार खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। आज शुक्रवार की सुबह पुराने रेलवे ब्रिज पर यमुना का जलस्तर 207.31 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी स्तर 204.50 मीटर और खतरे के निशान 205.33 मीटर से काफी ऊपर है। बाढ़ नियंत्रण विभाग के मुताबिक, शुक्रवार रात 8 बजे तक जलस्तर 207.15 मीटर तक पहुंच सकता है और उसके बाद घटने की संभावना है। गौरतलब है कि हथिनीकुंड बैराज से 1,08,232 क्यूसेक, वजीराबाद बैराज से 1,74,150 क्यूसेक और ओखला बैराज से 2,44,478 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बता दें कि जुलाई 2023 में यमुना का सबसे ऊंचा स्तर 208.66 मीटर दर्ज किया गया था।
जलस्तर बढ़ने से निगम बोध घाट पूरी तरह जलमग्न हो गया है। वहां दाह-संस्कार की प्रक्रिया अस्थायी रूप से रोक दी गई है और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) जलनिकासी के काम में जुटा है। घाट पर काम करने वाले कर्मियों का कहना है कि पानी कम होने पर ही अंतिम संस्कार दोबारा शुरू किया जा सकेगा। यमुना बाजार और उसके आसपास भारी जलजमाव से यातायात ठप हो गया है। दिल्ली सचिवालय के पास डबल लाइन सड़क और इंदिरा गांधी स्टेडियम के गेट नंबर 5 की ओर जाने वाली सड़क भी जलमग्न हो गई है।प्रशासन ने यमुना बाजार, मजनू का टीला, गीता कॉलोनी, मयूर विहार और सिविल लाइंस से अब तक 12,000 से 14,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों यमुना खादर, गीता कॉलोनी और मयूर विहार में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। दिल्ली सरकार और एमसीडी हालात पर लगातार नजर रखे हुए हैं और जलभराव वाले इलाकों में राहत व बचाव कार्य जारी है।- - नयी दिल्ली. जीएसटी दरों में व्यापक बदलाव से आवश्यक घरेलू वस्तुओं और सेवाओं पर कर की दरें कम होंगी और इससे अगले वित्त वर्ष में खुदरा मुद्रास्फीति को 0.65 से 0.75 प्रतिशत तक कम करने में मदद मिल सकती है। एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट में बृहस्पतिवार को यह कहा गया। जीएसटी परिषद की बुधवार को हुई 56वीं बैठक में मौजूदा चार स्तरीय कर दर ढांचे की जगह पांच प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो-स्तरीय कर संरचना को मंजूरी दी गयी है। इसके अलावा, कुछ विलासिता और अहितकर वस्तुओं और सेवाओं के लिए 40 प्रतिशत की विशेष दर निर्धारित की गई है। तंबाकू और संबंधित उत्पादों को छोड़कर नई कर दरें 22 सितंबर से प्रभावी होंगी।रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन 453 वस्तुओं की जीएसटी दर में बदलाव हुआ है, उनमें से 413 वस्तुओं की दरों में कमी देखी गई, जबकि केवल 40 वस्तुओं की दरों में वृद्धि देखी गई। लगभग 295 वस्तुओं पर अब 12 प्रतिशत की बजाय पांच प्रतिशत या शून्य जीएसटी दर लागू है। चूंकि आवश्यक वस्तुओं (लगभग 295 वस्तुओं) की जीएसटी दर 12 प्रतिशत से घटकर पांच प्रतिशत/शून्य हो गई है, इसलिए खाद्य वस्तुओं पर 60 प्रतिशत लाभ ग्राहकों को मिलने के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए इस श्रेणी में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति भी वित्त वर्ष 2025-26 में 0.25 से 0.30 प्रतिशत तक कम हो सकती है। एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘इसके अलावा, सेवाओं पर जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने से अन्य वस्तुओं और सेवाओं पर खुदरा मुद्रास्फीति में 0.40 से 0.45 प्रतिशत की और कमी आएगी।इसमें ग्राहकों को लाभ 50 प्रतिशत मिलने का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान खुदरा मुद्रास्फीति में 0.65 से 0.75 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। जीएसटी परिषद द्वारा दरों को युक्तिसंगत बनाने से प्रभावी भारांश औसत जीएसटी दर सितंबर 2019 में घटकर 11.6 प्रतिशत हो गई है, जो शुरुआत में 14.4 प्रतिशत थी। रिपोर्ट के अनुसार, दरों में वर्तमान बदलाव को देखते हुए प्रभावी भारांश औसत जीएसटी दर घटकर 9.5 प्रतिशत हो सकती है।
- नयी दिल्ली. मारुति सुजुकी इंडिया ने बृहस्पतिवार को कहा कि जीएसटी को तर्कसंगत बनाने से वाहन उद्योग को सालाना आधार पर करीब सात प्रतिशत की वृद्धि दर पर लौटने में मदद मिलेगी। मारुति सुजुकी इंडिया के चेयरमैन आर.सी. भार्गव ने एक बयान में कहा कि मोटर वाहन उद्योग तेज आर्थिक वृद्धि का प्रत्यक्ष लाभार्थी होगा। उन्होंने आगे कहा, ‘‘कार उद्योग की वृद्धि को भी जीएसटी प्रणाली से लाभ होगा। हमें उम्मीद है कि उद्योग की वृद्धि दर लगभग सात प्रतिशत प्रति वर्ष पर वापस आ जाएगी। विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि और रोजगार, दोनों को लाभ होगा।''पहले के अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में यात्री वाहन खंड में मामूली एक से दो प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान था। भार्गव ने कहा कि विशेष रूप से मारुति सुजुकी छोटी कारों को 18 प्रतिशत जीएसटी के दायरे में रखे जाने से खुश है। भार्गव ने कहा, "10 प्रतिशत कम कर से सुस्त पड़े बाजार को प्रोत्साहन मिलेगा और अधिक लोग आवागमन के सुरक्षित और अधिक आरामदायक साधन खरीद सकेंगे।" जीएसटी दर में बदलाव को एक बड़ा सुधार बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे पूरी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और देश विकसित भारत के लक्ष्य के करीब पहुंचेगा। उन्होंने कहा, "यह सुधार एक और कदम है जो लोगों को अपना भविष्य स्वयं बनाने के लिए सशक्त करेगा।"उन्होंने यह भी कहा कि पिछला बजट लोगों की जेब में अधिक पैसा लाया है और महंगाई नियंत्रण और वित्तीय अनुशासन की वजह से उधारी दरें भी कम हुई हैं। भार्गव ने कहा, "नई जीएसटी व्यवस्था से रोज़मर्रा की कई चीजे सस्ती होंगी, जिससे लोगों की खरीदने की ताकत बढ़ेगी। इससे मांग और उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। साथ ही, फैसले लेने और उन्हें लागू करने की रफ्तार भी सराहनीय होगी।" इस मुद्दे पर ऑडी इंडिया के प्रमुख बलबीर सिंह ढिल्लों ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "जीएसटी सरलीकरण सही दिशा में एक कदम है, जो उद्योग की वृद्धि में मदद करेगा और बाजार का विस्तार करेगा।"
- अयोध्या. आयोध्या में बृहस्पतिवार को स्थायी सुरक्षा समिति की एक उच्च स्तरीय बैठक में श्रीराम जन्मभूमि परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। बैठक में अधिकारियों ने राम मंदिर के निर्माण के पूरा होने के साथ उभरती सुरक्षा चुनौतियों का ज़िक्र करते हुए, उनसे निपटने के लिए उन्नत तकनीक के इस्तेमाल पर बल दिया। अयोध्या के जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे ने बैठक के बाद बताया कि उच्च तकनीक वाले सुरक्षा उपकरणों की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए एक प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया गया है, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘राम मंदिर का निर्माण पूरा होने के साथ ही नयी सुरक्षा चुनौतियां उभर रही हैं।''पुलिस अधीक्षक (सुरक्षा) बी.सी. दुबे ने बताया कि राम जन्मभूमि लंबे समय से आतंकवादी संगठनों के निशाने पर रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक उपकरणों का उपयोग करके किसी भी संभावित साजिश को नाकाम करने की योजनाएं बनाई गई हैं। बैठक में अपर महानिदेशक (एडीजी), महानिरीक्षक (आईजी), जिलाधिकारी और खुफिया ब्यूरो के निदेशक सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। उन्होंने मंदिर परिसर का स्थलीय निरीक्षण किया और परिसर तथा उसके आसपास किए जा रहे विकास कार्यों की समीक्षा की। समिति ने स्पष्ट किया कि मंदिर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और
- नयी दिल्ली. मदर डेयरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह विभिन्न उत्पादों पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाएगी। मदर डेयरी देश की अग्रणी दुग्ध कंपनियों में से एक है। गत वित्त वर्ष 2024-25 में इसका कारोबार 17,500 करोड़ रुपये रहा था। जीएसटी परिषद के निर्णय पर मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक मनीष बंदलिश ने कहा, ‘‘ हम पनीर, ‘चीज़', घी, मक्खन, अल्ट्रा-हाई टेम्परेचर (यूएचटी) दूध, दूध आधारित पेय पदार्थ और आइसक्रीम सहित दुग्ध उत्पादों की व्यापक श्रृंखला पर जीएसटी दरों को कम करने के केंद्र सरकार के निर्णय की सराहना करते हैं।'' इस कदम से उपभोक्ताओं के लिए मूल्यवर्धित दुग्ध उत्पादों की पहुंच में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।बंदलिश ने कहा, ‘‘ यह पैकेड श्रेणियों के लिए विशेष रूप से काफी महत्वपूर्ण है, जो भारतीयों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है और भविष्य में इनकी मांग में और तेजी आएगी।'' उन्होंने आश्वासन दिया कि मदर डेयरी यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि इस सुधार का लाभ उपभोक्ताओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए। दुग्ध उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए जीएसटी दरों में कटौती से किसानों के लिए बाजार में बड़े अवसर उत्पन्न होंगे।
- पटना. जिले के परसा बाजार इलाके में एक कार के ट्रक से टकरा जाने से उसमें सवार पांच लोगों की मौत हो गई। पारस थाना के एसएचओ ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। मृतकों की पहचान पटना निवासी राजेश कुमार (50), संजय कुमार सिन्हा (55), कमल किशोर (37), समस्तीपुर निवासी प्रकाश चौरसिया (35) और मुजफ्फरपुर निवासी सुनील कुमार (38) के रूप में हुई है। कार के मालिक संजय कुमार सिन्हा थे।उनके अलावा, बाकी लोग बेंगलुरु स्थित एक कीटनाशक कंपनी से संबद्ध थे। यह घटना बुधवार रात करीब 11 बजे परसा बाजार थाना क्षेत्र के श्वेता मोड़ के पास हुई। पटना सदर-2 के एसडीपीओ रंजन कुमार ने बताया, "कार चालक समेत सभी पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। ऐसा लगता है कि कार चालक ट्रक को देख नहीं पाया और उनकी गाड़ी उसमें घुस गई।" उन्होंने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और ट्रक को जब्त कर लिया गया है।
- नयी दिल्ली. दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मेरठ निवासी 39 वर्षीय एक व्यक्ति को उस समय नई जिंदगी मिली जब चंडीगढ़ से दाता (डोनर) का हृदय विभिन्न ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से मात्र एक घंटे 55 मिनट में राष्ट्रीय राजधानी पहुंचाया गया। यह जीवन रक्षक प्रतिरोपण 26 अगस्त को किया गया। अस्पताल के अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि दो राज्यों से होकर हृदय को सुरक्षित और अनुकूल अवस्था में लाने से सर्जरी की सफलता की संभावनाएं काफी बढ़ गईं। मरीज बीते चार वर्षों से डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी, गंभीर माइट्रल वाल्व लीक से पीड़ित था और उसे सांस लेने में परेशानी भी होती थी। इलाज के लिए उसे कई बार आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा था।पिछले माह जब उसे राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) में पंजीकृत किया गया, तो वह चंडीगढ़ में उपलब्ध दाता हृदय के लिए चयनित किया गया। कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार और निदेशक डॉ. सुजय शाद की अगुवाई में विशेषज्ञों की टीम ने सफलतापूर्वक प्रतिरोपण किया। डॉक्टरों के अनुसार, मरीज को सर्जरी के 18 घंटे के भीतर वेंटिलेटर से हटा दिया गया और उसने अब हल्की गतिविधियां भी शुरू कर दी हैं। यह प्रतिरोपण राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन, अंग निकालने और प्रतिरोपण करने वाली टीमों और दो राज्यों में बनाए गए निर्बाध ग्रीन कॉरिडोर के संयुक्त प्रयासों से संभव हो सका। डॉ. शाद ने कहा, “हृदय का दो घंटे से भी कम समय में हम तक पहुंचना इस सर्जरी की सफलता में निर्णायक भूमिका निभाने वाला कारक रहा।”अच्छी खबर
- नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे पी नड्डा ने बृहस्पतिवार को जीएसटी सुधारों की सराहना करते हुए इसे दुर्गा पूजा और दिवाली जैसे त्योहारों से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नागरिकों को दिया गया ‘‘बंपर उपहार'' बताया। उन्होंने जीएसटी परिषद द्वारा उठाए गए कदमों में खामियां निकालने के लिए कांग्रेस की आलोचना भी की और कहा कि यह विपक्षी पार्टी के दोहरे मानदंडों को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी उन फैसलों का विरोध करते हैं जिनका समर्थन उनकी पार्टी शासित राज्य सरकारों के वित्त मंत्रियों द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद के सभी निर्णय आम सहमति से लिए गए हैं।नड्डा ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती संप्रग सरकार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) भी लागू नहीं कर पाई क्योंकि राज्यों को उस पर भरोसा नहीं था।उन्होंने दावा किया कि इसके विपरीत, उस समय कांग्रेस ने मूल्य वर्धित कर (वैट) के जरिए गरीबों और व्यापारियों को लूटा और कर चोरी की भरपूर गुंजाइश छोड़ी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने 2017 में जीएसटी लागू करके ‘एक राष्ट्र एक कर' की अवधारणा को साकार किया। जीएसटी परिषद ने बुधवार को जीएसटी में व्यापक सुधारों की घोषणा की, जिसमें 28 प्रतिशत और 12 प्रतिशत के कर स्लैब को हटा दिया गया और केवल पांच प्रतिशत और 18 प्रतिशत के दो स्लैब रखे गए। नड्डा ने कहा कि कई आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी शून्य कर दिया गया है और कई अन्य उत्पादों पर इसे काफी घटा दिया गया है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में जीएसटी सुधारों की मंशा व्यक्त की थी और अब जीएसटी परिषद ने यह ऐतिहासिक कदम उठाया है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि ये सुधार नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने और व्यापारियों एवं छोटे व्यवसायों के लिए व्यापार को आसान बनाने में मदद करेंगे। नड्डा ने कहा,‘‘हमारी सरकार का लक्ष्य केवल राजस्व संग्रह ही नहीं, बल्कि हर नागरिक के जीवन स्तर को बेहतर बनाना भी है।'' उन्होंने कहा कि यह निर्णय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा और नयी उम्मीदें जगाएगा।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने कहा कि स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर कर हटाने का निर्णय एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है तथा इससे लोगों के स्वास्थ्य और वित्तीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। नड्डा ने इस निर्णय के लिए जीएसटी परिषद की अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और इसके सदस्य विभिन्न राज्यों के वित्त मंत्रियों की भी प्रशंसा की।
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नई दिल्ली। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने अगस्त 2025 में 221 करोड़ से अधिक आधार ऑथेंटिकेशन लेन-देन दर्ज किए। यह संख्या न केवल जुलाई 2025 से अधिक रही, बल्कि अगस्त 2024 की तुलना में भी 10.3 प्रतिशत अधिक रही। यह आंकड़ा देश में आधार के बढ़ते उपयोग, डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार और कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी डिलीवरी का संकेत देता है।
फेस ऑथेंटिकेशन में तेजीइसके अलावा अगस्त 2025 में 18.6 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन लेन-देन भी हुए, जबकि अगस्त 2024 में यह संख्या 6.04 करोड़ थी। अब तक कुल 213 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन लेन-देन पूरे हो चुके हैं। 1 सितंबर 2025 को UIDAI ने एक ही दिन में अब तक के सबसे अधिक 1.5 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन लेन-देन दर्ज किए। इससे पहले 1 अगस्त 2025 को 1.28 करोड़ का रिकॉर्ड बना था।वहीं अब एआई आधारित फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक एंड्रॉयड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इससे लोग सिर्फ चेहरे की स्कैनिंग से अपनी पहचान सत्यापित कर सकते हैं। यह सुविधा उपयोगकर्ताओं को आसानी के साथ-साथ मजबूत सुरक्षा भी प्रदान करती है। 150 से अधिक सरकारी मंत्रालय और विभाग, वित्तीय संस्थान, तेल विपणन कंपनियां और टेलीकॉम सेवा प्रदाता आधार फेस ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके माध्यम से लाभ और सेवाओं की डिलीवरी को सरल और तेज बनाया जा रहा है। अगस्त 2025 में 38.53 करोड़ ई-केवाईसी लेन-देन पूरे हुए। आधार आधारित ई-केवाईसी सेवा बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय सेवाओं सहित कई क्षेत्रों में ग्राहक अनुभव सुधारने और कारोबार सुगम बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। इस बढ़ते उपयोग से साफ है कि आधार केवल पहचान का साधन ही नहीं, बल्कि डिजिटल अर्थव्यवस्था और सुशासन का मजबूत आधार बन चुका है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से टेलीफोन पर बातचीत की। इस बातचीत में रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के प्रयासों से लेकर कई क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक ताकतों में शामिल हैं और दोनों के रिश्ते साझा मूल्यों, आपसी विश्वास और भविष्य के लिए समान दृष्टिकोण पर आधारित हैं। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-यूरोपीय संघ की रणनीतिक साझेदारी वैश्विक चुनौतियों का समाधान निकालने, स्थिरता लाने और पारस्परिक समृद्धि बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है।
बातचीत में व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश, नवाचार, स्थिरता, रक्षा, सुरक्षा और आपूर्ति शृंखला लचीलेपन जैसे अहम क्षेत्रों में हुई प्रगति का स्वागत किया गया। साथ ही भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को जल्द पूरा करने और आईएमइइसी (India-Middle East-Europe Corridor) गलियारे को लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। फरवरी में यूरोपीय संघ कॉलेज के आयुक्तों की भारत यात्रा को ऐतिहासिक बताया गया और भविष्य में भारत में अगले भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के आयोजन पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने इसके लिए दोनों नेताओं को भारत आने का निमंत्रण दिया।प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि भारत संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान और दुनिया में शांति व स्थिरता की बहाली के लिए लगातार समर्थन करता रहेगा। तीनों नेताओं ने भविष्य में भी संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। इस बातचीत के बाद यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करके खुशी हुई। हम राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ भारत के निरंतर सहयोग का स्वागत करते हैं। रूस को अपना आक्रामक युद्ध समाप्त करना चाहिए और शांति की राह बनानी चाहिए, जिसमें भारत की अहम भूमिका है। यह युद्ध वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए हानिकारक है और पूरी दुनिया के लिए जोखिम है। भविष्य की ओर देखते हुए, हम 2026 में अगले भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में एक संयुक्त रणनीतिक एजेंडे पर सहमत होने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा, हम इस साल के अंत तक मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत पूरी करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन इसके लिए और प्रगति जरूरी है।” -
पटना. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मां को अपशब्द कहे जाने के विरोध में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दलों के महिला प्रकोष्ठों ने बृहस्पतिवार को पांच घंटे का राज्यव्यापी बिहार बंद आयोजित किया। भाजपा, जदयू और अन्य सहयोगी दलों की महिला कार्यकर्ताओं ने सुबह सात बजे से दोपहर 12 बजे तक पटना सहित राज्य के विभिन्न जिलों में प्रदर्शन किया। पटना के आयकर चौराहे पर, हाथों में तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस व राजद विरोधी नारे लगाए। उधर, भाजपा के नेताओं ने पार्टी के प्रदेश कार्यालय के बाहर धरना दिया, जिसमें भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल, सांसद रविशंकर प्रसाद और धर्मशीला गुप्ता समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। मौके पर पत्रकारों से बात करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी की दिवंगत मां का अपमान बिहार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। कांग्रेस की बेशर्मी का आलम यह है कि उसके किसी भी वरिष्ठ नेता ने अब तक इस घटना के लिए माफी नहीं मांगी है। यह उनकी और उनके गठबंधन सहयोगियों की अहंकारपूर्ण मानसिकता को दर्शाता है। बिहार की जनता प्रधानमंत्री की दिवंगत मां के अपमान को कभी नहीं भूलेगी।” वहीं, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ‘एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी की दिवंगत मां के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी ने पूरे देश की आत्मा को आहत किया है। यह केवल एक माँ का नहीं, बल्कि देश की हर माँ का अपमान है। इसी अपमान के विरोध में भाजपा महिला मोर्चा सड़कों पर उतरा है। आज पूरा देश माँ की गरिमा और महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए एकजुट है।” कानून व्यवस्था को लेकर पटना (मध्य) की पुलिस अधीक्षक दीक्षा ने बताया कि किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। उधर नवादा, कटिहार, मुजफ्फरपुर और दरभंगा समेत कई जिलों में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि दरभंगा में पिछले सप्ताह कांग्रेस की ‘वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान एक स्थानीय नेता के मंच पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मां को अपशब्द कहने वाला एक कथित वीडियो वायरल हुआ था। आरोपी युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आयोजकों ने कहा कि उस समय कोई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद नहीं था। प्रधानमंत्री मोदी ने दो सितंबर को इस घटना पर पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उन्हें इस घटना से गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने भावुक होकर कहा, “मेरी दिवंगत मां का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं था, फिर उनका क्या दोष था? मैं कांग्रेस और राजद को माफ कर सकता हूं, लेकिन बिहार की जनता कभी उन्हें माफ नहीं करेगी।” उन्होंने जोर देकर कहा कि अब हर गली-कस्बे में संदेश पहुंचना चाहिए कि माताओं और बहनों का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और 27 देशों के यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने अमेरिका की विघटनकारी व्यापार नीतियों के बीच नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। इस बातचीत में भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने दिसंबर तक अपने बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप देने का संकल्प लिया। कोस्टा और वॉन डेर लेयेन के साथ संयुक्त रूप से फोन कॉल में मोदी ने यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान और शांति एवं स्थिरता की शीघ्र बहाली के लिए भारत के निरंतर समर्थन को दोहराया। भारत द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि नेताओं ने वैश्विक मुद्दों का साथ मिलकर समाधान करने और पारस्परिक समृद्धि के लिए नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने में भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी की भूमिका को रेखांकित किया। तीनों नेताओं के बीच फोन पर बातचीत ऐसे समय हुई है जब भारत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नीत प्रशासन द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ (शुल्क) के प्रभाव को कम करना चाहता है। तीनों नेताओं ने आपसी सुविधानुसार शीघ्र ही भारत में अगला भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन आयोजित करने पर भी चर्चा की और प्रधानमंत्री मोदी ने इसके लिए कोस्टा और वॉन डेर लेयेन को आमंत्रित किया। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में मोदी ने बातचीत को "बहुत अच्छा" बताया।
उन्होंने कहा, "भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को शीघ्र पूरा करने और आईएमईईसी गलियारे के कार्यान्वयन के लिए हमारी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। आपसी हितों के मुद्दों और यूक्रेन में संघर्ष को शीघ्र समाप्त करने के प्रयासों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। हम इस बात पर सहमत हुए कि स्थिरता को बढ़ावा देने और नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने में हमारी रणनीतिक साझेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका है।" बातचीत में यूक्रेन संघर्ष का मुद्दा भी उठा और लेयेन ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि रूस को उसके युद्ध को समाप्त करने में मदद करने और शांति की दिशा में मार्ग बनाने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष लेयेन ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के साथ भारत के निरंतर सहयोग का स्वागत किया। उन्होंने कहा, "विश्व के लिए इस युद्ध के गंभीर परिणाम होंगे और यह आर्थिक स्थिरता को कमज़ोर करेगा। इसलिए यह पूरी दुनिया के लिए एक ख़तरा है।" यह फोन कॉल मुख्य रूप से भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते और शिखर सम्मेलन पर केंद्रित थी। यह कॉल यूरोपीय संघ के व्यापार आयुक्त मारोस सेफकोविक की दिल्ली की प्रस्तावित यात्रा से कुछ दिन पहले हुई है। भारत और यूरोपीय संघ ने आठ वर्षों के अंतराल के बाद जून 2022 में मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए वार्ता पुनः शुरू की। बयान में कहा गया, ‘‘दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक ताकतों के रूप में, भारत और यूरोपीय संघ के बीच विश्वास, साझा मूल्यों और भविष्य के लिए एक समान दृष्टिकोण पर आधारित मज़बूत और घनिष्ठ संबंध है।'' नेताओं ने व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश, नवाचार, स्थिरता, रक्षा, सुरक्षा और आपूर्ति शृंखला के लचीलेपन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति का भी स्वागत किया और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता वार्ता के शीघ्र समापन और आईएमईईसी (भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा) के कार्यान्वयन के लिए साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। लेयेन ने कहा, "आगे की ओर देखते हुए, हम 2026 में यथाशीघ्र अगले यूरोपीय संघ-भारत शिखर सम्मेलन में एक संयुक्त रणनीतिक एजेंडे पर सहमत होने की योजना बना रहे हैं। हम वर्ष के अंत तक मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता को पूरा करने के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। इसे प्राप्त करने के लिए अभी प्रगति की आवश्यकता है।" भारतीय बयान में कहा गया कि नेताओं ने यूक्रेन में संघर्ष को समाप्त करने के प्रयासों सहित आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। प्रधानमंत्री मोदी ने संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान और शांति एवं स्थिरता की शीघ्र बहाली के लिए भारत के निरंतर समर्थन को दोहराया। आईएमईईसी पहल को 2023 में दिल्ली में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान अंतिम रूप दिया गया। इसे एक अग्रणी पहल बताया जा रहा है और इसका उद्देश्य सऊदी अरब, भारत, अमेरिका और यूरोप के बीच एक वृहद सड़क, रेलमार्ग और शिपिंग नेटवर्क स्थापित करना है, जिसका उद्देश्य एशिया, मध्य पूर्व और पश्चिम के बीच एकीकरण सुनिश्चित करना है। -
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर का असर अब मेट्रो पर भी दिखाई देने लगा है। यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन तक जाने वाली सड़क को बंद कर दिया गया है। इसकी जानकारी दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने दी है।
डीएमआरसी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में सड़क के बंद होने की दी जानकारीदिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सड़क के बंद होने की जानकारी दी।स्टेशन सामान्य रूप से काम कर रहा है और इंटरचेंज सुविधा उपलब्ध हैडीएमआरसी ने बताया कि यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन तक जाने वाली सड़क वर्तमान में बंद है। कृपया अपनी यात्रा की योजना बनाते समय वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें। हालांकि, स्टेशन सामान्य रूप से काम कर रहा है और इंटरचेंज सुविधा उपलब्ध है।यमुना नदी का जलस्तर 207.48 मीटर दर्ज किया गयाबता दें कि यमुना नदी का जलस्तर गुरुवार सुबह पुराने रेलवे ब्रिज पर 207.48 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान (205.33 मीटर) से काफी ऊपर है। इससे दिल्ली के निचले इलाकों जैसे गीता कॉलोनी, मयूर विहार, यमुना बाजार, मजनू का टीला और कश्मीरी गेट में बाढ़ का पानी घुस गया है।जलस्तर 207.48 मीटर पर स्थिर रहाआधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सुबह 6 बजे से 7 बजे तक जलस्तर 207.48 मीटर पर स्थिर रहा। अधिकारियों ने बताया कि सुबह 5 बजे यह 207.47 मीटर था और रात 2 बजे से सुबह 5 बजे तक यह इसी स्तर पर बना रहा।बाढ़ का पानी दिल्ली सचिवालय की ओर बढ़ गयाबाढ़ का पानी दिल्ली सचिवालय की ओर बढ़ गया, जहां मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों और वरिष्ठ नौकरशाहों के कार्यालय स्थित हैं। इसके अलावा, वासुदेव घाट के आसपास के क्षेत्र भी पानी में डूब गए हैं।नदी के जलस्तर में कमी आने की संभावनाबुधवार शाम को जारी बाढ़ नियंत्रण बुलेटिन में कहा गया है कि गुरुवार सुबह 8 बजे पुराने रेलवे ब्रिज पर जलस्तर 207.48 मीटर रहेगा, लेकिन इसके बाद नदी के जलस्तर में कमी आने की संभावना है।पुराने रेलवे ब्रिज यमुना के प्रवाह और बाढ़ के जोखिम का आकलन करने के लिए एक महत्वपूर्ण निगरानी बिंदु बना हुआ है। - नयी दिल्ली. जीएसटी परिषद ने बुधवार को कई डेयरी उत्पादों, उर्वरकों, जैव कीटनाशकों और कृषि उपकरणों पर कर की दरें कम करने का फैसला किया। इससे त्योहारों से पहले किसानों और उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में कृषि और डेयरी क्षेत्रों के लिए कर दरों में कटौती को मंजूरी दी गई। आधिकारिक बयान के अनुसार, परिषद ने ‘अल्ट्रा हाई टेम्परेचर' (यूएचटी) दूध और पनीर पर जीएसटी को पांच प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया। कंडेंस्ड दूध, मक्खन, अन्य वसा और पनीर पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है।विभिन्न कृषि उपकरणों पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है। इनमें 15 हॉर्स पावर तक की क्षमता के निश्चित गति वाले डीजल इंजन, हैंड पंप, ड्रिप सिंचाई उपकरण और स्प्रिंकलर के लिए नोजल, मिट्टी तैयार करने के लिए कृषि और बागवानी मशीनरी, कटाई और थ्रेसिंग मशीनरी, कंपोस्टिंग मशीन और ट्रैक्टर (1800 सीसी से अधिक इंजन क्षमता वाले सेमी-ट्रेलर के लिए ट्रैक्टर को छोड़कर) शामिल हैं। घटी हुई दरें सेल्फ-लोडिंग कृषि ट्रेलरों और ठेलागाड़ियों सहित हाथ से चलने वाले वाहनों पर भी लागू होंगी। सल्फ्यूरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड और अमोनिया सहित प्रमुख उर्वरक कच्चे माल पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है।परिषद ने नीम-आधारित कीटनाशक सहित विभिन्न जैव कीटनाशकों पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया है। उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के अंतर्गत आने वाले सूक्ष्म पोषक तत्वों पर जीएसटी घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है। परिषद ने ट्रैक्टर के पिछले टायर और ट्यूब, ट्रैक्टरों के लिए 250 सीसी से अधिक सिलेंडर क्षमता वाले कृषि डीजल इंजन, ट्रैक्टर के लिए हाइड्रोलिक पंप और विभिन्न ट्रैक्टर कलपुर्जों पर जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया है। इन फैसलों से किसानों की लागत कम होने और आवश्यक डेयरी उत्पाद उपभोक्ताओं के लिए किफायती होने की उम्मीद है। नई दरें 22 सितंबर से लागू होंगी।
- नयी दिल्ली. उद्योग जगत एवं निर्यातक समुदाय ने बुधवार को जीएसटी परिषद की बैठक में लिए गए निर्णयों को कर सुधारों की दिशा में मील का पत्थर बताते हुए कहा कि इससे कारोबार क्षेत्रों एवं उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने के साथ वृद्धि भी तेज होगी। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने बयान में कहा, “जीएसटी सुधारों का कदम एक शानदार उपलब्धि है। पांच और 18 प्रतिशत की दो कर दरें ही रखने, रिफंड और एमएसएमई से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और व्यक्तिगत जीवन एवं स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी हटाने जैसे दूरदर्शी फैसलों का हम स्वागत करते हैं। यह एक व्यापक बदलाव है।”उन्होंने कहा कि कर ढांचे में इस स्पष्टता से अनुपालन आसान होगा, मुकदमे घटेंगे और कारोबारों एवं उपभोक्ताओं को पूर्वानुमान की सुविधा मिलेगी। बनर्जी ने कहा कि रोजमर्रा की वस्तुओं और जरूरी कच्चे माल पर दरें कम होने से परिवारों को तत्काल राहत मिलेगी और वृद्धि की बुनियाद मजबूत होगी। उन्होंने कहा, “सीआईआई का मानना है कि उद्योग क्षेत्र इन लाभों को तेजी से उपभोक्ताओं तक पहुंचाएगा और सरकार के साथ मिलकर सुचारू, समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करेगा। इससे मांग को बढ़ावा मिलेगा और नौकरियां सृजित होंगी।”शीर्ष निर्यातक संगठन फियो ने भी जीएसटी परिषद के फैसलों का स्वागत करते हुए कहा कि सात दिन के भीतर रिफंड निपटान की प्रतिबद्धता सही दिशा में उठाया गया कदम है और इससे निर्यातकों पर नकदी से जुड़ा दबाव काफी हद तक कम होगा। निर्यातकों के प्रतिनिधि संगठन ने कहा कि वैश्विक मांग को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच समय पर और पूर्वानुमेय रिफंड भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए बेहद अहम हैं। फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, “हमें सरकार के साथ मिलकर इन उपायों के जमीनी स्तर पर सुचारू क्रियान्वयन की उम्मीद है। एक हजार रुपये से कम के जीएसटी रिफंड की अनुमति ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए विशेष रूप से लाभकारी होगी।”
- नयी दिल्ली. व्यक्तिगत जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के प्रीमियम अब सस्ते हो जाएंगे क्योंकि इन बीमा उत्पादों को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) से छूट दे दी गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक के बाद ऐलान किया कि सभी तरह की व्यक्तिगत जीवन बीमा पॉलिसी और उनके पुनर्बीमा पर अब कोई जीएसटी नहीं लगेगा। इनमें टर्म लाइफ, यूलिप या एंडोमेंट पॉलिसी शामिल हैं।इसी तरह सभी व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी और उनका पुनर्बीमा भी जीएसटी के दायरे से बाहर कर दिया गया है। इनमें फैमिली फ्लोटर और वरिष्ठ नागरिकों की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी भी शामिल हैं। जुलाई, 2017 में जीएसटी प्रणाली लागू होने के बाद से अब तक जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी वसूला जाता था। सीतारमण ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि बीमा कंपनियां जीएसटी से दी गई राहत का लाभ उपभोक्ताओं को दें और बीमा आम आदमी के लिए किफायती बने और देश में बीमा कवरेज बढ़े।” जीएसटी की नई दरें 22 सितंबर यानी नवरात्रि के पहले दिन से लागू हो जाएंगी।सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 में स्वास्थ्य बीमा और जीवन बीमा पर लगाए गए जीएसटी से 16,398 करोड़ रुपये जुटाए थे। इसमें 8,135 करोड़ रुपये जीवन बीमा और 8,263 करोड़ रुपये स्वास्थ्य बीमा से आए थे। इसके अलावा 2,045 करोड़ रुपये पुनर्बीमा पर उपकर के रूप में मिले, जिनमें 561 करोड़ रुपये जीवन बीमा और 1,484 करोड़ रुपये स्वास्थ्य बीमा से जुड़े थे। वित्त वर्ष 2022-23 में जीवन और स्वास्थ्य बीमा पर लगाए गए जीएसटी से कुल 16,770 करोड़ रुपये की वसूली हुई थी। जीएसटी परिषद ने जीएसटी ढांचे को सरल बनाते हुए चार की जगह सिर्फ दो दरें ही रखने पर सहमति जताई। अब उत्पादों पर पांच एवं 18 प्रतिशत की दर से कर लगेगा जबकि कुछ चुनिंदा उत्पादों पर विशेष 40 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाएगा.
- नयी दिल्ली. कोका-कोला एवं पेप्सी जैसे लोकप्रिय शीतल पेय और अन्य गैर-अल्कोहल पेय पदार्थ भी अब महंगे हो जाएंगे। जीएसटी परिषद ने बुधवार को कार्बोनेटेड पेय पदार्थों पर कर की दर को वर्तमान 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने को मंजूरी दे दी। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था में व्यापक सुधारों के तहत जीएसटी परिषद ने फलों से बने पेय या फलों के रस वाले कार्बोनेटेड पेय पदार्थों पर भी कर की दर 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी। इसके साथ ही परिषद ने कैफीन-युक्त पेय पदार्थों पर भी जीएसटी की दर बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी।अन्य गैर-अल्कोहल पेय पदार्थ भी महंगे हो जाएंगे क्योंकि इन वस्तुओं पर जीएसटी की दर 18 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है। जीएसटी परिषद ने अतिरिक्त चीनी या अन्य मीठा पदार्थ या स्वाद वाले सभी उत्पादों पर भी कर की दर 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी है। हालांकि फलों के गूदे या फलों के रस आधारित पेय (फलों के कार्बोनेटेड पेय या फलों के रस वाले कार्बोनेटेड पेय को छोड़कर) पर कर की दर 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दी गई है।
- नयी दिल्ली. जीएसटी दरों में व्यापक बदलाव से छोटी कारें और मोटरसाइकिल सस्ती होंगी। जीएसटी परिषद ने बुधवार को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था में व्यापक बदलाव को मंजूरी दे दी। इसके तहत जीएसटी में पांच प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो-स्तरीय कर संरचना को मंजूरी दी गयी है। नई दरें 22 सितंबर, यानी नवरात्रि के पहले दिन से लागू होंगी। जीएसटी दरों में संशोधन के तहत 1,200 सीसी से कम और 4,000 मिमी से कम लंबाई वाले पेट्रोल, एलपीजी और सीएनजी वाहन तथा 1,500 सीसी और 4,000 मिमी तक लंबाई वाले डीजल वाहनों पर मौजूदा 28 प्रतिशत की जगह अब 18 प्रतिशत कर लगेगा। वहीं 350 सीसी तक की मोटरसाइकिल पर अब 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगेगा जबकि वर्तमान में यह 28 प्रतिशत है। वहीं 1,200 सीसी से अधिक और 4,000 मिमी से अधिक लंबी सभी वाहनों के साथ-साथ 350 सीसी से अधिक की मोटरसाइकिल और रेसिंग कार पर 40 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। कर मोर्चे पर छोटी हाइब्रिड कारों को भी लाभ होगा।जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों पर पांच प्रतिशत की दर से कर लगता रहेगा। मर्सिडीज-बेंज इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी संतोष अय्यर ने एक बयान में कहा, ‘‘सरकार ने वाहन उद्योग की जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने की लंबे समय से चली आ रही मांग को सुना है।'' उन्होंने कहा कि यह जीएसटी संशोधन सही दिशा में उठाया गया कदम है, प्रगतिशील है और खपत को बढ़ावा देकर बहुप्रतीक्षित प्रोत्साहन प्रदान करेगा और वाहन उद्योग को गति प्रदान करेगा। कुल मिलाकर इससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। वर्तमान में, वाहनों पर 28 प्रतिशत कर लगता है। यह जीएसटी का सबसे ऊंचा स्लैब है। वाहन के प्रकार के आधार पर, कर की इस दर के ऊपर एक से 22 प्रतिशत तक का क्षतिपूर्ति उपकर लगाया जाता है। इंजन, क्षमता और लंबाई के आधार पर कारों पर कुल कर दर छोटी पेट्रोल कारों के लिए 29 प्रतिशत जबकि एसयूवी के लिए 50 प्रतिशत तक है। इसके अलावा, वाहन कलपुर्जों पर जीएसटी को मौजूदा 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है।
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जोधपुर. राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बुधवार को यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत से मुलाकात की। राजे की भागवत के साथ मुलाकात सुबह करीब 20 मिनट तक चली। भागवत सोमवार से नौ-दिवसीय यात्रा पर जोधपुर में हैं। राजे उनसे मिलने पहुंचीं। वह मंगलवार को पूर्व भाजपा सांसद कर्नल सोनाराम को श्रद्धांजलि देने जैसलमेर के मोहनगढ़ भी गईं। भागवत के साथ राजे की मुलाकात का एजेंडा साझा नहीं किया गया। राजे ने हाल में दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी, जिससे अटकलें लगाई जा रही हैं कि उन्हें पार्टी में बड़ी भूमिका मिल सकती है।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण के लिए प्रोत्साहन योजना को मंजूरी देने से बैटरी कचरे और इलेक्ट्रॉनिक कचरे के पुनर्चक्रण की क्षमता बढ़ेगी, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1,500 करोड़ रुपये की इस प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य देश में द्वितीयक स्रोतों से महत्वपूर्ण खनिजों को अलग करने और उत्पादन के लिए पुनर्चक्रण क्षमता का विकास करना है। इन स्रोतों में इलेक्ट्रॉनिक कचरा, लिथियम आयन बैटरी (एलआईबी) कबाड़ और कैटेलिटिक कन्वर्टर जैसे अन्य कबाड़ शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना से जुड़ा मंत्रिमंडल का यह निर्णय बैटरी कचरे और इलेक्ट्रॉनिक कचरे के पुनर्चक्रण की क्षमता बढ़ाएगा, निवेश को प्रोत्साहित करेगा और रोजगार सृजन को बढ़ावा देगा।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने आज बुधवार को 1,500 करोड़ रुपये की रिसाइक्लिंग प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य देश में क्रिटिकल मिनरल्स की रीसाइक्लिंग क्षमता बढ़ाना और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है। यह पहल नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) के तहत चलायी जाएगी, जबकि इसे वित्त वर्ष 2025-26 से 2030–31 तक छह साल की अवधि में लागू किया जाएगा। इस योजना में ई-वेस्ट, लिथियम-आयन बैटरी (LIB) स्क्रैप और कैटलिटिक कन्वर्टर्स जैसी पुरानी सामग्री की रीसाइक्लिंग को शामिल किया गया है। योजना का लाभ बड़े उद्योगपतियों के साथ-साथ छोटे कारोबारियों और स्टार्ट-अप्स को भी मिलेगा। खास बात यह है कि कुल बजट का एक-तिहाई हिस्सा छोटे खिलाड़ियों के लिए आरक्षित किया गया है।
इस योजना के तहत दो प्रमुख प्रोत्साहन दिए जाएंगे। पहला, संयंत्र और मशीनरी पर 20% कैपिटल सब्सिडी उन इकाइयों को मिलेगी जो निर्धारित समय में उत्पादन शुरू करेंगी। दूसरा, 2025-26 के आधार वर्ष से अधिक हुई बिक्री पर ऑपरेटिंग सब्सिडी दी जाएगी, जो दूसरे साल में 40% और पांचवें साल में 60% तक होगी।
प्रोत्साहन की अधिकतम सीमा बड़े उद्योगों के लिए 50 करोड़ रुपये और छोटे उद्योगों के लिए 25 करोड़ रुपये रखी गई है। वहीं, ऑपरेटिंग सब्सिडी की सीमा क्रमशः 10 करोड़ और 5 करोड़ रुपये तय की गई है।खनन मंत्रालय का कहना है कि इस योजना से हर साल लगभग 270 किलो टन रीसाइक्लिंग क्षमता तैयार होगी, जिससे करीब 40 किलो टन क्रिटिकल मिनरल्स का उत्पादन होगा। इसके साथ ही योजना से करीब 8,000 करोड़ रुपये का निवेश आएगा और लगभग 70,000 प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

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