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नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन एक “सोची समझी साजिश ” के तहत हो रहा है और वे देश और इसकी सीमाओं की सुरक्षा को सीधे प्रभावित करते हैं। शाह ने सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों से अवैध धार्मिक अतिक्रमण को हटाने के लिए उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सीमाओं से कम से कम 30 किलोमीटर के दायरे में सभी अवैध अतिक्रमण हटाए जाने चाहिए। उन्होंने समुद्री और स्थलीय सीमाओं पर कई अतिक्रमण को हटाने में "सराहनीय कार्य" करने के लिए गुजरात सरकार की प्रशंसा की। यहां दो दिवसीय ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' (वीवीपी) कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि वीवीपी तीन प्रमुख बिंदुओं पर आधारित है -- सीमावर्ती गांवों से पलायन को रोकना, यह सुनिश्चित करना कि सीमावर्ती गांवों के प्रत्येक नागरिक को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का 100 प्रतिशत लाभ मिले और वीवीपी के तहत गांवों को सीमा और राष्ट्रीय सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए मजबूत उपकरण के रूप में विकसित करना। शाह ने जिलाधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद नागरिक अपने गांवों को न छोड़ें, पलायन को रोका जाए और गांव की आबादी भी बढ़े। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से कहा था कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन चिंता का विषय है। मंत्री ने कहा, "वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम में शामिल जिलों के कलेक्टरों को इस मुद्दे को गंभीरता से और बारीकी से ध्यान देकर समाधान करने की आवश्यकता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन देश और उसकी सीमाओं की सुरक्षा को सीधे प्रभावित करते हैं।" शाह ने कहा कि यह नहीं माना जाना चाहिए कि ऐसा भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हो रहा है, बल्कि, "यह एक सोची समझी साजिश के तहत हो रहा है।" उन्होंने राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) से भी इस मुद्दे पर ध्यान देने को कहा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वीवीपी शुरू करने का एक मकसद यह भी था कि सीएपीएफ (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों) और सेना को होने वाली आपूर्ति का स्रोत स्थानीय स्तर पर हो। गृह मंत्री ने कार्यक्रम में वीवीपी ‘लोगो' का अनावरण करते हुए कहा कि अरुणाचल प्रदेश में इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन के बाद कई सीमावर्ती गांवों की जनसंख्या बढ़ गई है। उन्होंने कहा, "यह हमारे देश के सभी सीमावर्ती गांवों के लिए एक संदेश है कि इन गांवों में लौटने की प्रवृत्ति सही दिशा में बढ़ रही है।" शाह ने कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी ने वीवीपी की अवधारणा प्रस्तुत की तो यह निर्णय लिया गया कि इसे चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वित किया जाएगा। उन्होंने कहा, “न केवल हर सीमांत गांव को सभी सुविधाओं से युक्त किया जाए, बल्कि सीमांत गांवों में रहने वाले हर नागरिक को भारत सरकार और राज्य सरकार की सभी योजनाओं से लैस करके उनके व्यक्तिगत जीवन को बेहतर बनाया जाए।” शाह ने कहा कि इन गांवों को देश और सीमा की सुरक्षा के मजबूत उपकरण के तौर पर विकसित किया जाए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश के अंतिम गांव को देश के पहले गांव के रूप में नामित कर सीमावर्ती गांवों को देखने का लोगों का नजरिया बदल दिया। शाह ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में आईटीबीपी (भारत तिब्बत सीमा पुलिस) ने वाइब्रेंट गांव से दूध, सब्जियां, अंडे और अनाज जैसी दैनिक आवश्यकता की वस्तुएं खरीदने का सफल प्रयोग किया है और उन्होंने प्रत्येक सीमावर्ती गांव में इस प्रयोग को जमीनी स्तर पर लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। -
नयी दिल्ली. अमेरिकी दूतावास के एक अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों और सेवाओं के निर्यात पर भारत के साथ सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत में अमेरिकी दूतावास के प्रधान वाणिज्यिक अधिकारी जियाबिंग फेंग ने कहा कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और उच्च आर्थिक वृद्धि में मदद मिलेगी। भारत-अमेरिका चैंबर ऑफ कॉमर्स के तीसरे ऊर्जा शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है। वैश्विक भू-राजनीतिक और आपूर्ति श्रृंखला में उतार-चढ़ाव के बीच, उन्होंने कहा कि अमेरिका, भारत को ऊर्जा सुरक्षा और उच्च आर्थिक वृद्धि हासिल करने में मदद के लिए गुणवत्ता वाले उत्पादों और सेवाओं के निर्यात पर सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है। फेंग ने कहा कि अमेरिका, भारत के लिए तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन सकता है।
- नयी दिल्ली. फिच रेटिंग्स ने भारत की साख को स्थिर परिदृश्य के साथ सोमवार को ‘बीबीबी-' पर बरकरार रखा है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि वृद्धि दर में मजबूती एवं राजकोषीय विश्वसनीयता में सुधार से संरचनात्मक मानकों में सुधार आएगा। फिच ने कहा, ‘‘ भारत की साख को उसकी मजबूत वृद्धि और ठोस बाह्य वित्त का समर्थन प्राप्त है।''एजेंसी ने वित्त वर्ष 2025-26 में सकल घरेल उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो वित्त वर्ष 2024-25 के समान है और 2.5 प्रतिशत के ‘बीबीबी' औसत से काफी ऊपर है। इसने कहा कि भारत का आर्थिक परिदृश्य समकक्ष देशों की तुलना में मजबूत बना हुआ है, हालांकि पिछले दो वर्ष में इसकी गति धीमी हुई है। फिच ने कहा, ‘‘ यदि प्रस्तावित माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधार अपनाए जाते हैं, तो इससे उपभोग को बढ़ावा मिलेगा तथा वृद्धि संबंधी कुछ जोखिम कम हो जाएंगे।'' गौरतलब है कि एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने 14 अगस्त को भारत की साख को स्थिर परिदृश्य के साथ ‘बीबीबी-' से बढ़ाकर ‘बीबीबी' कर दिया था। एजेंसी ने 18 वर्ष में पहली बार भारत की साख को बढ़ाया था।
- भोपाल. अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर शुल्क लगाए जाने के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कहा कि देश ने किसानों के हित में कृषि उपज के आयात की अनुमति देने की मांग का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि नए भारत ने राष्ट्रहित में निर्णय लिया है और वह किसानों और मछुआरों के हितों से समझौता नहीं करेगा। वे (अमेरिका) चाहते हैं कि हम उनके कृषि उत्पादों के लिए अपने दरवाजे खोलें।भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के 12वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा, "वे जीएम बीज का इस्तेमाल करके कई हेक्टेयर जमीन पर खेती करते हैं और अनुदान प्राप्त करते हैं। हमारे छोटे किसान इस प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं कर सकते हैं।" उन्होंने कहा कि देश के हित के विरुद्ध कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा।चौहान ने कहा, "उन्होंने (अमेरिका ने) सोचा था कि हम डर जाएंगे। लेकिन यह आज का भारत है, जो आत्मविश्वास से भरा हुआ है।" अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए शुल्क को दोगुना करके 50 प्रतिशत कर देने के बाद (जिसमें भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क शामिल है) नयी दिल्ली और वाशिंगटन के बीच संबंधों में खटास आ गई है। चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के 144 करोड़ लोगों से अपने दैनिक उपयोग के लिए स्वदेशी सामान खरीदने की अपील की है, जिससे रोज़गार के अवसर पैदा होंगे और अर्थव्यवस्था मज़बूत होगी। उन्होंने आयातित वस्तुओं की प्रशंसा करने की मानसिकता की भी आलोचना की। चौहान ने कहा कि भारत में अपार प्रतिभा और एक मज़बूत कार्यबल है। उन्होंने कहा, "देश के पास पुष्पक विमान था, जिसका उल्लेख (रामायण में) मिलता है।"
- नयी दिल्ली. सरकार ने सोमवार को पशु चिकित्सा रक्त चढ़ाने संबंधी सेवाओं के लिए देश के पहले व्यापक दिशानिर्देश जारी किए, जो आपातकालीन पशु स्वास्थ्य सेवा में एक महत्वपूर्ण कमी को दूर करेगा। एक सरकारी बयान में कहा गया है कि 'भारत में पशुओं के लिए रक्त चढ़ाने और रक्त बैंकों के लिए दिशानिर्देश और मानक संचालन प्रक्रियाएं' पशु रक्तदान, भंडारण और रक्त चढ़ाने संबंधी प्रक्रियाओं के लिए एक वैज्ञानिक ढांचा स्थापित करती हैं, जो पहले राष्ट्रीय मानकों के बिना किए जाते थे। इसके प्रमुख प्रावधानों में जैव सुरक्षा-अनुरूप बुनियादी ढांचे के साथ राज्य-विनियमित पशु चिकित्सा रक्त बैंकों की स्थापना, रोग जोखिमों के प्रबंधन के लिए वन हेल्थ सिद्धांतों का एकीकरण, और दाता पंजीकरण एवं प्रतिकूल प्रतिक्रिया रिपोर्टिंग के लिए मानकीकृत प्रक्रियाएं शामिल हैं।यह ढांचा डिजिटल रजिस्ट्री, रीयल-टाइम इन्वेंट्री ट्रैकिंग और एक आपातकालीन हेल्पलाइन की सुविधा वाले राष्ट्रीय पशु चिकित्सा रक्त बैंक नेटवर्क की योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत करता है। प्रशिक्षण मॉड्यूल को पशु चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा। दिशानिर्देशों के तहत प्रोत्साहित किए जाने वाले भविष्य के नवाचारों में मोबाइल रक्त संग्रह इकाइयां, दुर्लभ रक्त प्रकारों के लिए संरक्षण तकनीकें और दाता-प्राप्तकर्ता मिलान के लिए मोबाइल एप्लिकेशन शामिल हैं। भारत के पशुधन क्षेत्र में 53.7 करोड़ से अधिक पशु शामिल हैं, जबकि साथी पशुओं की संख्या 12.5 करोड़ से अधिक है। यह संयुक्त क्षेत्र राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में 5.5 प्रतिशत और कृषि सकल घरेलू उत्पाद में 30 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है, जिससे खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को सहायता मिलती है। ये दिशानिर्देश वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए भारतीय पशु चिकित्सा परिषद, पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, राज्य सरकारों और कार्यरत पशु चिकित्सकों के परामर्श से विकसित किए गए थे।
- नयी दिल्ली. आईआईटी परिषद ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच पाठ्यक्रम और शिक्षण पद्धति को अनुकूलित करने के लिये एक विस्तृत कार्य योजना तैयार करने के मकसद से सोमवार को एक टास्क फोर्स के गठन का फैसला लिया। आईआईटी परिषद की सोमवार को दो साल बाद बैठक हुई। इसकी पिछली बैठक अप्रैल 2023 में हुई थी। आईआईटी परिषद 23 प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों की सर्वोच्च समन्वय संस्था है। उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) में अनुसंधान का व्यावसायीकरण, गुणवत्ता, वैश्विक प्रासंगिकता और अनुसंधान परिणामों को बढ़ाने के लिए पीएचडी शिक्षा में सुधार, वैश्विक रैंकिंग में सुधार, शीर्ष स्तर की प्रतिभाओं को आकर्षित करने और उन्नत अनुसंधान केंद्र के रूप में आईआईटी की प्रतिष्ठा को मजबूत करने सहित अन्य विषयों पर बैठक में चर्चा हुयी।एक अधिकारी ने कहा, ‘‘उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान के व्यावसायीकरण पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। परिषद ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के मद्देनजर पाठ्यक्रम और शिक्षण पद्धति को अनुकूलित करने पर भी ज़ोर दिया। देश में उच्च और स्कूली शिक्षा के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने हेतु एक कार्यबल गठित करने का निर्णय लिया गया।'' उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा, आईआईटी के सामाजिक-आर्थिक और वैश्विक प्रभाव को, विशेष रूप से उनके पूर्व छात्रों के माध्यम से, स्वीकार किया गया, जो वैश्विक अगुआ, नवप्रवर्तक और धन सृजनकर्ता के रूप में विकसित हुए हैं। परिषद ने मार्गदर्शन, उद्योग संबंधों और छात्र विकास के लिए पूर्व छात्र नेटवर्क का लाभ उठाने के महत्व पर भी ज़ोर दिया।'' उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर ज़ोर दिया गया और विभिन्न आईआईटी द्वारा अपनाए गए मॉडल को साझा किया गया तथा परिसरों के अंदर स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने और वार्षिक स्वास्थ्य जांच कराने का भी सुझाव दिया गया। अधिकारी ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप वैज्ञानिक अनुसंधान में आईआईटी की भूमिका पर ज़ोर दिया गया। उद्योग, शिक्षा जगत और नीति निर्माताओं के बीच मज़बूत संबंध की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया। विभिन्न सुझावों और प्रथाओं का उल्लेख किया गया।'' अधिकारी ने कहा, ‘‘एक महीने के भीतर एक नीति बनाने का निर्णय लिया गया, जिसमें विभिन्न व्यावहारिक तरीके सुझाए जायेंगे, ताकि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भारतीय परिसरों में वैज्ञानिक अनुसंधान एवं उत्पाद का विकास हो सके।''
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कोहिमा. मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने सोमवार को यहां राजभवन में आयोजित एक समारोह में नागालैंड के 22वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। राज्यपाल ला गणेशन के निधन के बाद भल्ला को नागालैंड के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
गौहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार ने भल्ला को पद की शपथ दिलाई।
शपथ ग्रहण समारोह में नगालैंड के मुख्यमंत्री नीफियू रियो, उपमुख्यमंत्री टीआर जेलियांग और वाई पैटन, कई राज्य मंत्री, विधायक, वरिष्ठ नौकरशाह और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। शपथ ग्रहण के बाद भल्ला ने यहां राजभवन में रियो के नेतृत्व वाले राज्य मंत्रिमंडल के साथ पहली बातचीत की। उन्होंने शपथ ग्रहण समारोह के अंतर्गत औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर' का भी निरीक्षण किया।
मुख्य सचिव सेंतियांगर इमचेन की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का समापन राजभवन में एक समारोह के साथ हुआ जहां राजनीतिक नेताओं, जनजातीय निकायों, चर्च प्रतिनिधियों और नागरिक समाज संगठनों ने राज्य के नए संवैधानिक प्रमुख को शुभकामनाएं दीं। नगालैंड की 17 प्रमुख जनजातियों में से एओ, अंगामी, लोथा, रेंगमा और सुमी जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाले ‘आरक्षण नीति की समीक्षा (सीओआरआरपी) समिति' के सदस्यों ने समारोह का बहिष्कार किया। पांच जनजातियों का यह पैनल राज्य में पिछड़ी जनजातियों के लिए चार दशक से अधिक पुरानी, रोजगार आरक्षण नीति की समीक्षा के लिए दबाव बना रहा है। सरकार ने मांग स्वीकार कर ली है और आरक्षण समीक्षा आयोग के गठन की घोषणा भी की है लेकिन समिति ने इसे अस्वीकार कर दिया। समिति ने इस बात पर जोर दिया कि आयोग में जनजातीय निकायों और नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए। पैनल ने घोषणा की कि जब तक उसकी मांग पूरी नहीं हो जाती, वह किसी सरकारी कार्य का हिस्सा नहीं बनेंगे। पांचों जनजातियों ने इस महीने स्वतंत्रता दिवस समारोह का भी बहिष्कार किया था। -
नयी दिल्ली. भारत और फिजी ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फिजी के प्रधानमंत्री सितवेनी लिगामामादा राबुका के साथ व्यापक वार्ता के बाद अपने रक्षा संबंधों को विस्तार देने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फिजी भले ही दूर हों लेकिन हमारी आकांक्षाएं समान हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और फिजी स्वतंत्र, समावेशी, खुले, सुरक्षित और समृद्ध भारत-प्रशांत क्षेत्र का समर्थन करते हैं। राबुका रविवार को तीन दिवसीय यात्रा पर दिल्ली पहुंचे। प्रधानमंत्री के रूप में यह भारत की उनकी पहली यात्रा है। समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में फ़िजी भारत के लिए अहम राष्ट्र है। प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक पकड़ बढ़ाने के चीन के अथक प्रयासों की पृष्ठभूमि में, भारत फ़िजी के साथ अपने रक्षा संबंधों को बढ़ाने पर विचार कर रहा है। मोदी और राबुका के बीच वार्ता के बाद, दोनों पक्षों ने विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक सहयोग के लिए सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए। मोदी ने कहा, ‘‘हमने रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग को मज़बूत करने का निर्णय लिया है।''
उन्होंने अपने मीडिया वक्तव्य में कहा कि इसके लिए एक कार्य योजना तैयार की गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत, फिजी की समुद्री सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए प्रशिक्षण और साजोसामान प्रदान करेगा। अपने संबोधन में मोदी ने ‘‘ग्लोबल साउथ'' के लिए भारत की प्राथमिकताओं का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत ‘‘ग्लोबल साउथ'' के विकास में सह-यात्री है। उन्होंने कहा, ‘‘हम एक ऐसी विश्व व्यवस्था के निर्माण में भागीदार हैं जहां ग्लोबल साउथ की स्वतंत्रता, विचारों और पहचान का सम्मान किया जाता है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन फिजी के लिए एक खतरा है और भारत इससे निपटने में उसकी मदद करेगा। -
उडुपी (कर्नाटक). प्रसिद्ध कन्नड़ अभिनेता और कला निर्देशक दिनेश मंगलुरु का सोमवार को यहां उनके आवास पर लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 55 वर्ष के थे। यह जानकारी उनके परिवार के सदस्यों ने दी। मूल रूप से मंगलुरु के रहने वाले दिनेश ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत कला निर्देशक के रूप में की थी और कई प्रमुख कन्नड़ फिल्मों में काम किया था। बाद में उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा और एक कुशल चरित्र अभिनेता के रूप में पहचान बनाई। परिजनों के अनुसार, वह पिछले कुछ समय से बीमार थे और उपचार करा रहे थे। हाल ही में उनकी हालत बिगड़ गई थी। एक निपुण कला निर्देशक के रूप में लोकप्रिय दिनेश ने अभिनय में भी गहरी छाप छोड़ी। उन्हें फिल्म ‘आ दिनगलु' में सीताराम शेट्टी की भूमिका के बाद पहचान मिली, जिसके बाद उन्होंने ‘केजीएफ' में “बॉम्बे डॉन” की भूमिका निभाकर लोकप्रियता हासिल की। अपने करियर में उन्होंने ‘इंथि निन्ना प्रीतिया', ‘रिक्की', ‘हरिकथे अल्ला गिरीकथे' और ‘स्लम बाला' जैसी फिल्मों में अभिनय किया। उनके निधन की खबर से कन्नड़ फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है। सहकर्मियों और शुभचिंतकों ने उन्हें एक समर्पित कलाकार, विनम्र व्यक्तित्व और कला निर्देशन व अभिनय के बीच सेतु के रूप में याद किया।
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मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सोमवार को कहा कि शुल्क अनिश्चितताओं एवं भू-राजनीतिक चिंताओं से उत्पन्न चुनौतियों के बीच निवेश को बढ़ावा देने के लिए कॉरपोरेट तथा बैंकों को एक साथ आने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केंद्रीय बैंक अब भी वृद्धि के लक्ष्य पर नजर गड़ाए हुए है। वार्षिक फिबैक कार्यक्रम में यहां गवर्नर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका और भारतीय व्यापार प्रतिनिधियों के बीच जारी बातचीत से ऐसा निर्णय निकलेगा जिससे घरेलू अर्थव्यवस्था पर शुल्क का प्रभाव ‘‘न्यूनतम'' हो जाएगा। भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाने के अमेरिकी कदम और कपड़ा, झींगा आदि पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंताओं के बीच मल्होत्रा ने भरोसा दिलाया कि यदि अर्थव्यवस्था के कुछ वर्गों को परेशानी होती है तो क्षेत्र-विशेष को मदद दी जाएगी। मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि कि मौद्रिक नीति में मुद्रास्फीति एवं वृद्धि दोनों की गतिशीलता को ध्यान में रखा जाएगा और कहा, ‘‘ हम भू-राजनीतिक मोर्चे और शुल्क से उत्पन्न चुनौतियों के साथ एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। साथ ही आर्थिक विस्तार सुनिश्चित करने के तरीकों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘ ऐसे समय में जब बैंकों एवं कॉरपोरेट के बही-खाते अपने सबसे अच्छे स्तर पर है, उन्हें एक साथ आना चाहिए और निवेश चक्र बनाने की भावना को बढ़ावा देना चाहिए, जो इस समय बेहद महत्वपूर्ण है।'' मल्होत्रा ने कहा कि वित्तीय स्थिरता और मूल्य स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करने से वृद्धि में कोई बाधा नहीं आती है। साथ ही वित्तीय स्थिरता एवं वृद्धि के बीच कोई ‘‘संघर्ष'' नहीं है। वित्त वर्ष 2024-25 में कर्ज वृद्धि दर के तीन साल के निचले स्तर पर आने के बीच मल्होत्रा ने कहा, ‘‘ हम विभिन्न क्षेत्रों में बैंक ऋण का विस्तार करने के उपायों पर विचार कर रहे हैं।'' मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई ‘‘बैंक ऋण बढ़ाने के तरीकों पर गौर किया जा रहा ही है।'' हालांकि, उन्होंने योजनाबद्ध कदमों के बारे में विस्तार से नहीं बताया। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी ने कहा कि कंपनियों की ओर से ऋण की मांग कम हो गई है, क्योंकि कंपनियां अपनी वित्तपोषण आवश्यकताओं के लिए निजी ऋण एवं पूंजी बाजारों का रुख कर रही हैं। शेट्टी उद्योग लॉबी समूह आईबीए का भी नेतृत्व करते हैं।
एसबीआई चेयरमैन ने बैंकों को कम से कम शीर्ष कंपनियों के लिए अधिग्रहण वित्तपोषण की अनुमति देने का भी अनुरोध किया। यह एक ऐसा क्षेत्र जहां अबतक उन्हें प्रतिबंधित किया गया है। परामर्श कंपनी बीसीजी के रुचिन गोयल ने कहा कि पिछले कुछ समय में कॉरपोरेट ऋण में कमी आई है। अब यह समग्र प्रणाली जोखिम का 36 प्रतिशत है, जो कुछ वर्ष पहले 60 प्रतिशत था। इस बीच, मल्होत्रा ने यह भी कहा कि आरबीआई विनियमित संस्थाओं के लिए कारोबार को आसान बनाने पर भी काम कर रहा है, जिससे मध्यस्थता की लागत कम करने में भी मदद मिलेगी। मल्होत्रा ने स्वीकार किया कि बैंकों को अधिक स्वायत्तता देने पर आरबीआई के ध्यान देने के कारण बैंक के निदेशक मंडल पर अत्यधिक बोझ पड़ा है। उन्होंने कहा कि आरबीआई कुछ नीतियों को ‘‘तर्कसंगत'' बनाने की कोशिश कर रहा है जिन्हें निदेशक मंडल से मंजूरी की आवश्यकता है तथा इसके प्रक्रियात्मक पहलुओं को प्रबंधन पर छोड़ दिया गया है। यह स्वीकार करते हुए कि ऐसी भावना है कि आरबीआई बहुत अधिक विवरण मांग रहा है...मल्होत्रा ने हितधारकों से अनुरोधों में सहयोग करने का आग्रह किया तथा कहा कि अधिक जानकारी से बेहतर नियमन लाने में मदद मिलेगी। मल्हत्रा ने कहा कि आरबीआई जल्द ही बासेल तीन मानदंडों को लागू करने का इरादा रखता है और अपेक्षित ऋण हानि के लिए दिशानिर्देश भी जल्द ही सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी किए जाएंगे। गवर्नर ने वित्तीय समावेश को गहरा करने, छोटे व्यवसायों को ऋण देने और ग्राहक सेवा को बेहतर बनाने को आरबीआई की प्राथमिकता बताया। मल्होत्रा ने कहा, ‘‘ हालांकि, हमने जन-धन योजना के जरिये करीब पूरी वयस्क आबादी के खाते खोल दिए हैं, लेकिन इसे और बढ़ाने की गुंजाइश है।'' उन्होंने कहा कि ‘व्यापार प्रतिनिधि नेटवर्क' को उनकी संख्या बढ़ाकर तथा उनके द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं का विस्तार करके मजबूत बनाने की आवश्यकता है। इसके अलावा, आरबीआई ग्राहक सेवा एजेंडा में मदद के लिए आंतरिक लोकपाल ढांचे की भी समीक्षा कर रहा है। -
गंगटोक. सिक्किम में नाथू ला दर्रे के रास्ते 48 तीर्थयात्रियों के दसवें जत्थे की वापसी के साथ ही कैलाश मानसरोवर यात्रा संपन्न हो गई। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। सिक्किम पर्यटन विकास निगम (एसटीडीसी) के अधिकारियों ने 48 तीर्थयात्रियों की रविवार को वापसी पर, उनका स्वागत किया और कैलाश मानसरोवर यात्रा 2025 के सफल समापन पर एक समारोह का आयोजन किया गया। एसटीडीसी के अध्यक्ष लुकेन्द्र रसैली ने कहा कि अधिकारियों के समर्पित कार्य के कारण ही करीब 500 तीर्थयात्रियों यात्रा सुगम हो सकी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने अर्धसैनिक बलों और अन्य एजेंसियों के सहयोग से तीर्थयात्रियों के लिए विभिन्न प्रबंध किये और यह सुनिश्चित किया कि यात्रा निर्बाध रूप से संपन्न हो सके। हिंदू आस्था के अनुसार, कैलाश पर्वत को ‘भगवान शिव का निवास' माना जाता है इसलिए ‘कैलाश मानसरोवर यात्रा' (केएमवाई) धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों रूप से महत्वपूर्ण है। प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में लोग इस तीर्थयात्रा पर जाते हैं। इस यात्रा में 19,500 फुट तक की ऊंचाई पर दुर्गम परिस्थितियों में चढ़ाई करनी पड़ती है, जिसमें खराब मौसम और ऊबड़-खाबड़ इलाका शामिल है और यह उन लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है जो शारीरिक और चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ नहीं हैं।
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बेंगलुरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने श्रीहरिकोटा के निकट रविवार को इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (आईएडीटी-01) का सफल परीक्षण किया जो गगनयान कार्यक्रम के लिए पैराशूट-आधारित मंदन प्रणाली की प्रणाली-स्तरीय योग्यता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसरो ने कहा कि श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) में किए गए इस परीक्षण में ‘‘एक विशिष्ट मिशन परिदृश्य में गगनयान मिशन के लिए क्रू मॉड्यूल की महत्वपूर्ण पैराशूट-आधारित मंदन प्रणाली को सफलतापूर्वक दर्शाया गया।'' इसरो ने इस परीक्षण को ‘‘पैराशूट-आधारित मंदन प्रणाली का प्रणाली-स्तरीय मूल्यांकन'' का हिस्सा बताया, जिसमें मंदन प्रणाली को शामिल करते हुए एक कृत्रिम क्रू मॉड्यूल (सीएम) को एक हेलीकॉप्टर का उपयोग करके उतारा जाता है। इसके उद्देश्य की व्याख्या करते हुए इसरो ने रविवार देर रात जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘गगनयान मिशनों में क्रू मॉड्यूल के उतरने के क्रम में अंतिम चरण के दौरान पैराशूट-आधारित मंदन प्रणाली का उपयोग किया जाता है ताकि समुद्र में सुरक्षित रूप से उतरने के लिए ‘टचडाउन' वेग को स्वीकार्य सीमा तक कम किया जा सके।'' जिस पैराशूट प्रणाली का परीक्षण किया गया वह ‘‘गगनयान मिशनों के समान'' थी और इसमें 10 पैराशूट शामिल थे - दो एपेक्स कवर सेपरेशन (एसीएस), दो ड्रोग, तीन पायलट और तीन मुख्य कैनोपी। इसरो ने कहा कि इसरो केंद्रों के अलावा, ‘‘रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), भारतीय वायु सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल सहित अन्य सरकारी एजेंसियों ने भी इस बड़े परीक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने में योगदान दिया।'' आने वाले दिनों में इसी तरह के अन्य परीक्षण करने की योजना है।
- नयी दिल्ली.। अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने बताया कि मिशन पर रवाना होने से पहले ‘एक्सिओम-4' के चालक दल के सदस्य कृत्रिम वातावरण में जीवित रहने के परीक्षण, अंतरिक्ष अनुभव को रिकॉर्ड करने के लिए फोटोग्राफी सीखने और टीम भावना को मजबूत करने के लिए मैक्सिको के तट पर ‘कायकिंग' (नौकायान) करने जैसे कुछ अनुभवों से गुजरे थे। ग्रुप कैप्टन शुक्ला को लोग प्यार से ‘शुक्स' कहकर बुलाते हैं। उन्होंने रविवार को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के लिए ‘एक्सिओम-4 मिशन' का हिस्सा होने और उससे पहले लिए गए प्रशिक्षण के अपने अनुभवों और चुनौतियों को साझा किया। अंतरिक्ष के लिए रवाना होने से पहले ‘एक्सिओम-4 मिशन' कई बार स्थगित हुआ और आखिरकार शुक्ला एवं तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर ‘ड्रैगन' अंतरिक्ष यान 25 जून को अमेरिका के कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित हुआ। शुक्ला ने प्रक्षेपण के अनुभव की तीव्रता को याद करते हुए कहा, ‘‘यह इतना शक्तिशाली था कि यह सचमुच आपके शरीर की हर हड्डी को हिलाकर रख देता है। आप 8.5 मिनट में शून्य किलोमीटर प्रति घंटा से 28,500 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पर पहुंच जाते हैं और यही इसकी तीव्रता को दर्शाता है।'' अंतरिक्ष यान के प्रक्षेपित होने पर भारत और दुनिया भर के लोगों ने इस मिशन का उत्साह बढ़ाया और 15 जुलाई को धरती पर वापसी के दौरान भी लोगों ने वही जोश दिखाया। लखनऊ में जन्मे शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की यात्रा करने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने और उन्होंने इस मिशन के अनुभव को ‘‘बेहद रोमांचक'' बताया। भारतीय वायुसेना द्वारा यहां सुब्रतो पार्क में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इस मिशन के तहत अपने 20-दिवसीय अंतरिक्ष प्रवास के कुछ किस्से भी साझा किए, जिसके लिए कई महीनों का कड़ा प्रशिक्षण लिया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘जब आप अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जाते हैं, तो आप असल में एक नए घर में रहते हैं और इसके अपने नियम और शर्तें होती हैं, जैसे आप कैसे खाएंगे, कैसे सोएंगे। आप बाथरूम कैसे जाएंगे।'' शुक्ला माहौल की गंभीरता को कम करते हुए थोड़े हास्य के अंदाज में कहा, ‘‘दरअसल अंतरिक्ष में शौचालय जाना सबसे चुनौतीपूर्ण काम होता है।'' अंतरिक्ष यात्री शुक्ला इसी 10 अक्टूबर को 40 वर्ष के हो जाएंगे। वह 2006 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुए थे और वह सुखोई-30 एमकेआई, मिग-29, जगुआर और डोर्नियर-228 जैसे उन्नत लड़ाकू विमानों पर 2,000 घंटे से ज्यादा उड़ान भरने के अनुभव के साथ एक सम्मानित परीक्षण पायलट बने। शुक्ला शुरू से ही ‘‘शर्मीले और संकोची'' स्वभाव वाले व्यक्ति रहे हैं और बचपन में वह राकेश शर्मा की 1984 की अंतरिक्ष उड़ान की कहानियां सुनते हुए बड़े हुए हैं। अंतरिक्ष की उनकी हालिया यात्रा ने उन्हें जीवन का नया अनुभव कराया है। वह अब खुद लोगों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। उन्होंने स्कूली छात्रों को ऑटोग्राफ दिए और कार्यक्रम में अपने साथी वायुसेना कर्मियों के साथ फोटो खिंचवाई। यह बदलाव कैसा लग रहा है, यह पूछे जाने पर उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया, ‘‘अंतरिक्ष और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के प्रति छात्रों में उत्साह देखकर बहुत अच्छा लग रहा है।'' ‘एक्सिओम-4 मिशन' में उनका योगदान एक मिशन पायलट का था, जिसमें अमेरिका की कमांडर पैगी व्हिटसन और पोलैंड के मिशन विशेषज्ञ स्लावोज उज्नान्स्की-विस्नीव्स्की और हंगरी के टिबोर कापू भी शामिल थे। उन्होंने कहा, ‘‘एक मिशन पायलट के रूप में आपको ‘डिस्प्ले' और ‘कैप्सूल' के संपर्क में रहना होता है। इसलिए, मिशन विशेषज्ञ की तुलना में आपका प्रशिक्षण थोड़ा कठिन होता है।'' ह्यूस्टन स्थित नासा (नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) के जॉनसन स्पेस सेंटर सहित प्रशिक्षण के अनुभव को याद करते हुए शुक्ला ने कहा, ‘‘पिछले एक साल से यह अनुभव अद्भुत रहा है।'' शुक्ला ने जीवन विज्ञान, कृषि, अंतरिक्ष जैव प्रौद्योगिकी और बोधात्मक अनुसंधान के विविध क्षेत्रों में भारत के नेतृत्व वाले सात सूक्ष्म-गुरुत्व प्रयोग किए। अपने संबोधन के दौरान शुक्ला ने अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम के कुछ वीडियो और अंतरिक्ष से देखे गए भारत के दृश्यों की एक छोटी क्लिप भी साझा की, जिसे उन्होंने कैमरे में कैद करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा, ‘‘भारत वाकई बहुत खूबसूरत दिखता है। मैं ऐसा सिर्फ इसलिए नहीं कह रहा हूं क्योंकि हम सब भारतीय हैं और यहां बैठे हैं, बल्कि मुझे लगता है कि अगर आप स्टेशन पर मौजूद किसी भी अंतरिक्ष यात्री से बात करें... तो वे भी यही कहेंगे। इसकी अनोखी स्थिति और आकार इसे खास बनाता है, खासकर रात के समय, अगर आप भारत के ऊपर से गुजरते हैं, हिंद महासागर से दक्षिण से उत्तर की ओर जाते हैं, तो मुझे लगता है कि यह शायद आपके जीवन में देखे जाने वाले सबसे खूबसूरत नजारों में से एक है।'' शुक्ला ने उस खगोलीय अनुभव को याद करते हुए कहा कि कक्षा से, चालक दल ने दिन में 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त देखा और ‘‘आप इससे कभी ऊबते नहीं हैं''।
- बुलंदशहर ।. बुलंदशहर जिले में सोमवार तड़के एक ट्रक ने तीर्थयात्रियों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को टक्कर मार दी, जिससे दो बच्चों समेत आठ लोगों की मौत हो गई और 43 अन्य घायल हो गए। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि यह दुर्घटना बुलंदशहर-अलीगढ़ सीमा पर अरनिया बाईपास के पास भोर में दो बजे के बाद हुई। एक कैंटर ट्रक ने ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से टक्कर मार दी, जिससे वह पलट गई। सिंह ने बताया, ‘‘ट्रैक्टर-ट्रॉली में 61 लोग सवार थे जो कासगंज जिले के रफातपुर गांव से राजस्थान के जाहरपीर में तीर्थयात्रा के लिए जा रहे थे।'' उन्होंने बताया कि पीड़ितों को एक निजी अस्पताल सहित कई अस्पतालों में ले जाया गया।एसएसपी ने कहा, ‘‘इस घटना में आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 43 का उपचार हो रहा है। तीन घायलों को वेंटिलेटर पर रखा गया है।'' पुलिस ने बताया कि 10 यात्री मामूली रूप से घायल हुए हैं। पीड़ितों में 10 को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज, 10 बुलंदशहर जिला अस्पताल और 23 को खुर्जा के कैलाश अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। पुलिस के अनुसार, मृतकों की पहचान ट्रैक्टर चालक ईयू बाबू (40), रामबेटी (65), चांदनी (12), घनीराम (40), मोक्षी (40), शिवांश (छह), योगेश (50) और विनोद (45) के रूप में हुई है, जो सभी कासगंज जिले के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि 43 घायलों में 12 की उम्र 18 वर्ष से कम है।पुलिस ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं। जिलाधिकारी श्रुति ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बूंदाबांदी के बीच घटनास्थल का दौरा किया और बाद में अस्पताल में घायल मरीजों की कुशल क्षेम पूछी। पुलिस ने बताया कि हरियाणा में पंजीकृत ट्रक को जब्त कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
- नयी दिल्ली। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने विशेष आतंकवाद रोधी अभियानों के लिए महिलाओं की एक कमांडो टीम बनाने का निर्णय लिया है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। नागरिक हवाईअड्डों की सुरक्षा संभालने वाले विमानन सुरक्षा समूह (एएसजी) में तैनात 100 महिला कर्मियों के पहले दल को इस विशेष कार्य के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सीआईएसएफ की प्रमुख जिम्मेदारी 69 नागरिक हवाईअड्डों, दिल्ली मेट्रो और सरकारी व निजी क्षेत्र के कई अहम प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करना है। एक अधिकारी ने कहा, ‘‘मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले के बरवहा स्थित प्रशिक्षण केंद्र में महिला कर्मियों के पहले दल का कमांडो प्रशिक्षण जारी है।'' सीआईएसएस के एक कार्यकारी ने कहा, "आठ सप्ताह के इस उन्नत कमांडो परीक्षण कार्यक्रम में महिला कर्मियों को उच्च सुरक्षा प्रतिष्ठानों और संयंत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) और विशेष कार्य बल (एसटीएफ) की जिम्मेदारियां निभाने के लिए तैयार किया जाएगा।" उन्होंने बताया कि इसमें शारीरिक फिटनेस, हथियार चलाने का प्रशिक्षण, तनावपूर्ण परिस्थितियों में गोलीबारी का अभ्यास, दौड़, जंगल में जीवित रहने का प्रशिक्षण और 48 घंटे का आत्मविश्वास बढ़ाने वाला अभ्यास शामिल है, जिसमें प्रतिकूल परिस्थितियों में निर्णय लेने और सामूहिक तौर पर कार्य करने की क्षमता को परखा जाएगा। गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत इस केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल में वर्तमान में 12,491 महिलाएं कार्यरत हैं, जो कुल बल का आठ प्रतिशत है। एक अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2026 में 2,400 और महिला कर्मियों की भर्ती की जाएगी और आने वाले वर्षों में भर्ती प्रक्रिया को इस तरह निर्धारित किया जाएगा कि बल में महिलाओं की संख्या लगातार कम से कम 10 प्रतिशत बनी रहे, जैसा कि गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया है।
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गुवाहाटी. ! असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि राज्य में अलग-अलग अभियान के दौरान मादक पदार्थ के तीन संदिग्ध तस्करों को गिरफ्तार किया गया और उनके पास से सात करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की मॉर्फिन और याबा टैबलेट सहित प्रतिबंधित सामग्री जब्त की गई है। शर्मा ने बताया कि श्रीभूमि जिले में दो और कार्बी आंगलोंग में शनिवार को एक अभियान चलाया गया।उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर रविवार को एक पोस्ट में कहा, ‘‘नशीले पदार्थों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। श्रीभूमि पुलिस द्वारा मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए गए दो अलग-अलग अभियानों में कल रात तीन करोड़ रुपये से ज़्यादा कीमत की 20,000 याबा टैबलेट बरामद की गईं।'' मुख्यमंत्री ने बताया कि इस अभियान में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।याबा टैबलेट भारत में अवैध है, क्योंकि इसमें मेथामफेटामीन होता है, जो नियंत्रित पदार्थ अधिनियम के तहत अनुसूची-2 पदार्थ है। शर्मा ने शनिवार शाम को सोशल मीडिया पर एक अन्य पोस्ट में कहा था कि एक संदिग्ध मादक पदार्थ तस्कर को गिरफ्तार किया गया है और उसके पास से चार करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की मॉर्फिन जब्त की गई है। उन्होंने ‘एक्स' पर शनिवार को एक पोस्ट में कहा था, ‘‘छुट्टियों में नशा करने का मन करता है? (लेकिन) असम में ऐसा नहीं होता, क्योंकि हमारी पार्टी की योजनाएं अलग हैं।'' मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘कार्बी आंगलांग पुलिस के एक बेहतरीन अभियान में चार करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत की 4.1 किलोग्राम मॉर्फिन जब्त की गई है और एक व्यक्ति गिरफ़्तार भी हुआ है। हम खेल बिगाड़ते रहेंगे!''
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अहमदाबाद.। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि उनकी सरकार का ध्यान युवाओं के लिए रोजगार के अधिकतम अवसर सृजित करने पर है। मोदी ने अहमदाबाद में एक कार्यक्रम को वीडियो लिंक के माध्यम से संबोधित करते हुए युवाओं से स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर आत्मनिर्भर बनने के देश के प्रयासों का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल ‘ऑपरेशन सिंदूर' ही देशभक्ति नहीं है, बल्कि उन्होंने व्यापारियों से केवल स्वदेशी वस्तुएं बेचने का निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘‘हमने ‘स्किल इंडिया मिशन' शुरू किया, जिसके तहत करोड़ों युवाओं को अलग-अलग क्षेत्रों में कुशल जनशक्ति के रूप में तैयार किया जा रहा है। आज दुनिया का एक बड़ा हिस्सा उम्र बढ़ने की समस्या में फंसा हुआ है; उन्हें युवाओं की जरूरत है और भारत में दुनिया को युवा देने की क्षमता है।'' मोदी ने अहमदाबाद के सरदारधाम फेज-11 में एक बालिका छात्रावास का शिलान्यास करने के बाद कहा, ‘‘अगर आज युवा कुशल हैं, तो उनके लिए रोजगार की अनेक संभावनाएं हैं। वे आत्मनिर्भर बनते हैं, इससे उन्हें शक्ति मिलती है।'' उन्होंने बेटियों की प्रगति में समाज के सहयोग की सराहना की।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से शिक्षा प्रणाली में कई बदलाव किए हैं, जिसमें कौशल पर सबसे अधिक जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार का ध्यान ‘स्टार्ट अप इंडिया' और मुद्रा योजना के माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार के अधिकतम अवसर पैदा करने पर है। उन्होंने कहा, ‘‘आज भारत में ‘स्टार्टअप' की संख्या दो लाख के करीब पहुंच गई है। हमने मुद्रा योजना शुरू की। इसके तहत युवाओं को स्वरोजगार के लिए 33 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं। इससे लाखों युवा आत्मनिर्भर बन चुके हैं और दूसरों को भी आत्मनिर्भर बना रहे हैं।'' मोदी ने कहा कि दुनिया भारत के श्रम के साथ-साथ उसकी प्रतिभा को भी महत्व देती है और उसकी अहमियत को समझती है, जिससे विभिन्न देशों में नए अवसर पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे युवा स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और अंतरिक्ष जैसे कई क्षेत्रों में दुनिया को आश्चर्यचकित कर रहे हैं।'' भारत को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने युवाओं से स्वदेशी उत्पादों का इस्तेमाल करके देश के प्रयासों में सहयोग देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ‘‘आज की दुनिया में भारत को आत्मनिर्भर बनना होगा, यानी हमें स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करना होगा। ‘मेक इन इंडिया' के प्रति हमारा उत्साह बढ़ना चाहिए। स्वदेशी आंदोलन हमारे भविष्य को मजबूत करेगा और आपको इसका नेतृत्व करना होगा। हमारे समाज के युवाओं को यह तय करना होगा कि हमारे घर में एक भी विदेशी चीज न आए।'' मोदी ने कहा कि भारत की ताकत ‘मेक इन इंडिया' और आत्मनिर्भरता में निहित है, जो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य उज्ज्वल करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘केवल ‘ऑपरेशन सिंदूर' ही देशभक्ति नहीं है बल्कि व्यापारियों को केवल स्वदेशी वस्तुएं बेचने का निर्णय लेना चाहिए।'' मोदी ने कहा कि भारतीय समाज जागरूक हो गया है और उसने अपनी बेटियों के प्रयासों का समर्थन करना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘आज समाज में एक नयी जागृति आई है। वे स्वयं आगे आ रहे हैं और अपनी बेटियों की प्रगति के लिए व्यवस्था कर रहे हैं। गुजरात में जो बीज बोए गए थे, वे आज ‘बेटी बचाओ बेटी केलवणी' जैसी योजनाओं से काफी लाभ हुआ है और इससे समाज को आगे आकर लड़कियों को शिक्षित करने की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रोत्साहन मिला है। मोदी ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या एक और चिंता का विषय है, जिसका समाधान उन्होंने समाज के सहयोग से किया तथा इस सामाजिक बुराई को मिटाने के लिए एक आंदोलन चलाया। उन्होंने कहा कि गुजरात आज धीरे-धीरे बेटे और बेटियों की संख्या में बड़े अंतर को पाटने में सफल हो रहा है। मोदी ने कहा कि देश में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण सुनिश्चित करने के लिए ऐतिहासिक नीतियों पर काम किया जा रहा है। मोदी ने कहा, ‘‘जब ‘ऑपरेशन सिंदूर' की बात आती है, तो हमें अपनी बेटियों की आवाज सुनने को मिलती है। हम उनकी वीरता के बारे में सुनते हैं। गांवों में लखपति दीदियों की संख्या तीन करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले दो करोड़ तक पहुंच गई। ‘ड्रोन दीदी' ने गांवों में बहनों के प्रति पूरा नजरिया बदल दिया है।'' उन्होंने कहा कि बैंक सखी और बीमा सखी जैसी योजनाएं महिला सशक्तीकरण में मदद कर रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति दे रही हैं। मोदी ने कहा कि भारत में बुनियादी ढांचे का विकास रिकॉर्ड गति से हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘ ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना' के कारण, सौर ऊर्जा प्रणालियां लगाने का बड़ा काम किया जा रहा है। ड्रोन और रक्षा उद्योग भी लगातार आगे बढ़ रहे हैं, और सरकार का मिशन निर्माण पर बड़ा ध्यान है।'' - अहमदाबाद।खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने रविवार को कहा कि भारत का लक्ष्य 2047 तक खेलों में दुनिया के शीर्ष पांच देशों में शामिल होना है। मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने खेल क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है और इस क्षेत्र में कई सुधार किए गए हैं। मांडविया ने रविवार को यहां राष्ट्रमंडल भारोत्तोलन चैंपियनशिप के उद्घाटन समारोह के दौरान कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने अगले 10 वर्षों में देश को दुनिया के शीर्ष 10 खेलों में शामिल करने का लक्ष्य रखा है। हमने 2036 में ओलंपिक के लिए दावेदारी पेश की है। 2047 में हम अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाएंगे और प्रधानमंत्री मोदी ने तब तक खेलों की दुनिया के शीर्ष पांच देशों में शामिल होने का लक्ष्य रखा है। '' उन्होंने कहा, ‘‘खेलों में एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए, देश को खेलों में प्रगति दिलाने के लिए हमने एक योजना ‘टारगेट पोडियम ओलंपिक' बनाई और इस योजना के माध्यम से देश के शीर्ष खिलाड़ियों को सर्वश्रेष्ठ समर्थन मिल रहा है ताकि वे पूरे समर्पण के साथ अपना खेल खेलें। '' मंत्री ने कहा कि समय की मांग है कि देश में एक खेल पारिस्थितिकी तंत्र बनाया जाए और सरकार इसे बनाने के लिए समर्पित है।
- अयोध्या.। इस साल दीपोत्सव के अवसर पर अयोध्या को एक अनूठा उपहार मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर तैयार हो रहे एक भव्य ‘वैक्स म्यूजियम' का लोकार्पण दीपोत्सव के दिन किया जाना प्रस्तावित है। राज्य सरकार द्वारा यहां जारी एक बयान के मुताबिक, यह संग्रहालय श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के परिक्रमा मार्ग पर 10 हजार वर्ग फुट के विशाल क्षेत्र में बन रहा है। इसमें भगवान राम सहित रामायण के करीब 50 प्रमुख पात्रों की मोम की प्रतिमाएं प्रदर्शित की जाएंगी। इस परियोजना पर अब तक करीब 7.5 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। बयान में कहा गया कि सरकार ने अयोध्या को वैश्विक पर्यटन के नक्शे पर स्थापित करने के लिए कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की शुरुआत की है और श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण के बाद से अयोध्या में श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। इसमें कहा गया कि इस ‘वैक्स म्यूजियम' के निर्माण से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि यह रामायण के मूल्यों एवं भारतीय संस्कृति को विश्व पटल पर और अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेगा। इसमें कहा गया कि यह संग्रहालय अयोध्या के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बयान के अनुसार, परिक्रमा मार्ग पर बन रहा ‘वैक्स म्यूजियम' आधुनिक तकनीक और कला का अनूठा संगम होगा। करीब 10 हजार वर्ग फुट के क्षेत्र में फैले इस संग्रहालय में प्रवेश करते ही पहले भगवान राम का मंदिर मिलेगा। अंदर रामायण के 50 प्रमुख पात्रों की मोम की प्रतिमाएं प्रदर्शित की जाएंगी। इनमें भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान, सुग्रीव, जटायु जैसे पात्र शामिल होंगे। इसमें कहा गया कि इन प्रतिमाओं को बनाने में महाराष्ट्र की एक संस्था केरल के विशेषज्ञों की सेवाएं ले रही हैं, ताकि पात्रों के भाव, वेशभूषा और ऐतिहासिक संदर्भों को पूरी तरह से जीवंत किया जा सके। बयान के अनुसार, संग्रहालय में रामायण के प्रमुख प्रसंगों को भी दृश्यात्मक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा, जैसे राम-रावण युद्ध, सीता हरण, हनुमान की लंका यात्रा और राम-सेतु निर्माण। इन दृश्यों को देखकर आगंतुकों को ऐसा प्रतीत होगा मानो वे रामायण काल में पहुंच गए हों। नगरायुक्त जयेंद्र कुमार ने बताया कि संग्रहालय में आधुनिक तकनीकों जैसे श्रव्य-दृश्य प्रभाव और ‘इंटरैक्टिव डिस्प्ले' का भी उपयोग किया जाएगा, जो बच्चों और युवाओं को विशेष रूप से आकर्षित करेगा। अब तक इस परियोजना पर करीब 7.5 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। संग्रहालय का निर्माण कार्य तेजी से हो रहा है और इसे दीपोत्सव 2025 के अवसर पर जनता के लिए खोलने की योजना है।
- नयी दिल्ली।. दिल्ली के सहकारिता मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह ने रविवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी की सहकारी संस्थाएं ‘ऑपरेशन सिंदूर' में शामिल सैनिकों के सम्मान में एक समर्पित ‘ब्लड बैंक' स्थापित करेंगी। सिंह ने कहा कि यह पहल न केवल दिल्लीवासियों को लाभान्वित करेगी बल्कि आपात स्थितियों में रक्त की उपलब्धता भी सुनिश्चित करेगी। अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष और द्वारका स्थित 'फेडरेशन ऑफ ग्रुप हाउसिंग सोसायटी' के रजत जयंती कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा, ‘‘भारतीय सेना के साहस ने हर नागरिक को गर्व महसूस कराया है। सैनिकों के सम्मान में ब्लड बैंक स्थापित करना उनकी सेवा को सम्मान देने का छोटा सा प्रयास है।'' उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य राष्ट्रीय राजधानी को ‘‘सहकारी क्षेत्र में आदर्श राज्य'' बनाना है। सहकारिता केवल आर्थिक ही नहीं बल्कि सामाजिक सशक्तीकरण का भी माध्यम है। सिंह ने बताया कि दिल्ली में करीब 2,000 ग्रुप हाउसिंग सोसायटी हैं और इनमें सहकारी स्टोर खोले जाएंगे ताकि स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिल सके और ग्रामीण उत्पादों की विपणन व्यवस्था को प्रोत्साहन मिले।
- सिद्धार्थनगर । सिद्धार्थनगर जिले में एक युवक ने अपनी नाबालिग प्रेमिका, उसकी मां और पिता पर चाकू से हमला कर दिया। इस घटना में लड़की के पिता की मौके पर मौत हो गई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि लड़की तथा उसकी मां को गंभीर हालत में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है। पुलिस सूत्रों ने रविवार को बताया कि घटना शनिवार रात नौ बजे मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के एक गांव में उस वक्त हुई जब लड़की, उसकी मां और पिता अपने घर वापस जा रहे थे। आरोपी और लड़की दोनों एक ही गांव के रहने वाले हैं। सूत्रों के मुताबिक, गांव के रहने वाले युवक का 17 वर्षीय लड़की से प्रेम प्रसंग था। दोनों के इस रिश्ते से घर वाले काफी नाराज थे। इसे लेकर युवक काफी आक्रोशित था। सूत्रों ने बताया कि शनिवार की रात वह पूरी तैयारी के साथ कार लेकर इन लोगों के पास आया और लड़की को जबरदस्ती गाड़ी में बैठाने का प्रयास करने लगा। इस पर लड़की की मां और पिता ने विरोध किया तो आरोपी ने उन पर चाकू से वार कर दिया। घायल पिता की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उसकी मां बुरी तरह घायल हो गई। सूत्रों ने बताया कि इस बीच आरोपी युवक लड़की को गाड़ी से कुछ दूर तक ले गया और फिर उसे भी चाकू मार कर रास्ते में फेंक दिया और भाग गया। अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद में बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और उसने घायल मां और बेटी को तत्काल चिकित्सालय पहुंचाया। लड़की के पिता के शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उन्होंने बताया कि आरोपी युवक को पकड़ने के लिए पुलिस की कई टीम बनाई गई हैं।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि संसद या विधानसभाएं चर्चाओं और परिचर्चाओं के स्थान हैं, लेकिन संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए विरोध जताने के नाम पर सत्र को चलने नहीं देना ठीक नहीं है। शाह ने यह टिप्पणी ‘ऑल इंडिया स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस' को संबोधित करते हुए की। इससे तीन दिन पहले संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के बाद बार-बार व्यवधान और स्थगन के कारण बहुत कम कामकाज हो पाया। गृह मंत्री ने यह भी कहा कि जब संसद में सीमित चर्चा-परिचर्चा होती है, तो राष्ट्र निर्माण में सदन का योगदान प्रभावित होता है। उन्होंने कहा, ‘‘लोकतंत्र में चर्चा-परिचर्चा होनी ही चाहिए, लेकिन किसी के संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए विरोध जताने के नाम पर सदन को चलने न दिया जाए, यह ठीक नहीं है।” शाह ने कहा, ‘‘विपक्ष को हमेशा संयमित रहना चाहिए। विरोध जताने के नाम पर अगर सदन को दिन-प्रतिदिन या सत्र-दर-सत्र चलने नहीं दिया जाएगा, तो यह ठीक नहीं है। देश को इस पर विचार करना होगा, लोगों को इस पर विचार करना होगा और निर्वाचित प्रतिनिधियों को इस पर विचार करना होगा।'' शाह ने कहा कि सभी परिचर्चाओं में कुछ न कुछ सार्थकता होनी चाहिए और सभी को अध्यक्ष पद की गरिमा व सम्मान बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हमें जनता के मुद्दों को उठाने को लेकर एक निष्पक्ष मंच प्रदान करने के लिए काम करना चाहिए। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के तर्क निष्पक्ष होने चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सदन का संचालन संबंधित सदन के नियमों और विनियमों के अनुसार हो।'' हस्तिनापुर में महाभारत की पात्र द्रौपदी के अपमान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जब भी सदन की गरिमा से समझौता हुआ है, देश को भयावह परिणाम देखने को मिले हैं। गृह मंत्री ने स्वतंत्रता के बाद से भारत की लोकतांत्रिक परंपरा की सराहना की और कहा कि यहां लोकतंत्र की जड़ें इतनी गहरी हैं कि सत्ता बदलने के दौरान यहां खून की एक बूंद भी नहीं गिरी है, जबकि कई देशों में लोकतांत्रिक स्थिति समय बीतने के साथ-साथ खराब होती गई। उन्होंने कहा कि यदि संसद या विधानसभाओं में चर्चा नहीं होगी तो ये इमारतें बेजान बनी रहेंगी। उन्होंने कहा, "अध्यक्ष के नेतृत्व में सभी सदस्य इन भवनों में विचार व्यक्त करते हैं, तभी यह एक जीवंत इकाई बनती है, जो देश और राज्यों के हित में काम करती है।" स्पीकर को अभिभावक के साथ-साथ सेवक भी बताते हुए शाह ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों की समस्याओं को सुलझाने के लिए विचार-मंथन सबसे अच्छा तरीका है। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून का उद्देश्य हमेशा जनता का कल्याण, देश का समावेशी विकास, प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित करना, राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा और बाह्य सुरक्षा होना चाहिए। शाह ने केंद्रीय विधान सभा के पहले निर्वाचित भारतीय अध्यक्ष विट्ठलभाई पटेल को श्रद्धांजलि भी दी।
उन्होंने कहा कि 100 वर्ष पहले आज ही के दिन, महान स्वतंत्रता सेनानी विट्ठलभाई पटेल को केंद्रीय विधान सभा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, जिससे भारत के विधायी इतिहास की शुरुआत हुई। शाह ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल के भाई विट्ठलभाई पटेल का योगदान समय के साथ फीका पड़ गया।
उन्होंने कहा, अगर देश का स्वतंत्रता संग्राम महत्वपूर्ण था, तो देश चलाना और विधायी प्रक्रियाएं स्थापित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। विट्ठलभाई पटेल ने कठिन समय में भी लोकतंत्र की स्थापना और उसे मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हम सभी को इसे याद रखना चाहिए।'' विट्ठलभाई के बारे में बात करते हुए शाह ने कहा कि उन्होंने एक स्वतंत्र विधानसभा बनाई थी।
उन्होंने कहा कि कोई भी विधानसभा निर्वाचित सरकार के अधीन काम नहीं कर सकती, उन्हें स्वतंत्र होना चाहिए। गृह मंत्री ने कहा कि विट्ठलभाई ने कहा था कि विधानसभाओं के स्वतंत्र होने पर ही वहां होने वाली चर्चाओं की सार्थकता बनी रहेगी। शाह ने कहा कि ब्रिटिश काल में विट्ठलभाई पटेल ने स्वतंत्र विधायी विभाग की स्थापना का निर्णय लिया था, जिसे संविधान सभा ने भी स्वीकार किया था। उन्होंने कहा कि इसलिए, आज यह विभाग देश की सभी विधानसभाओं के साथ-साथ लोकसभा और राज्यसभा में भी पीठासीन अधिकारी के अधीन कार्य करता है। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष का पद अत्यंत महत्वपूर्ण है और सदन की प्रतिष्ठा की रक्षा करना तथा उसे बढ़ाना अध्यक्ष का दायित्व है और विट्ठलभाई पटेल ने इन कार्यों को बखूबी निभाया। शाह ने कहा कि विट्ठलभाई पटेल ने सदन में कई परंपराएं स्थापित कीं, जो आज विधायी कार्यों, विशेषकर अध्यक्ष महोदय के लिए मार्गदर्शक का काम करती हैं। उन्होंने कहा, "जब हम विट्ठलभाई पटेल की बात करते हैं, तो हम गुजरात के लोग गर्व से कहते हैं कि गुजरात ने दो महान व्यक्ति दिए हैं। पहले भाई, सरदार पटेल, जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गांधी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दिन-रात काम किया। और दूसरे, विट्ठलभाई पटेल, ने भारत की विधायी परंपराओं की नींव रखी और आज के लोकतंत्र की मजबूत नींव रखी।
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पणजी. निजी कारों के लिए कोंकण रेलवे की विशेष 'रोल ऑन-रोल ऑफ' (रो-रो) ट्रेन महाराष्ट्र से अपनी पहली यात्रा पूरी करते हुए रविवार तड़के गोवा पहुंची। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। ‘कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (केआरसीएल)' ने महाराष्ट्र के कोंकण और गोवा क्षेत्र में गणेश महोत्सव सीजन से पहले यात्रा को आसान बनाने के लिए निजी कारों और उनके यात्रियों के लिए यह विशेष सेवा शुरू की है। केआरसीएल के उप महाप्रबंधक बबन घाटगे ने कहा कि चार कारों को महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में कंकावली के पास नंदगांव में उतारा गया जबकि एक को दक्षिण गोवा के वेरना में उतारा गया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा उन परिवारों के लिए बिल्कुल यादगार थी जिन्होंने अपनी कारों के साथ यह सफर पूरा किया। घाटगे ने कहा कि गणेश उत्सव के दौरान सड़कों पर भीड़ कम करने के लिए अधिक लोगों को इस सेवा का इस्तेमाल करना चाहिए। शनिवार को 10 डिब्बों और दो यात्री डिब्बों वाली ‘रो-रो कार' ट्रेन पांच डिब्बों एवं 19 यात्रियों को लेकर रायगढ़ जिले के कोलाड स्टेशन से अपराह्न 3.40 बजे रवाना हुई। उन्होंने बताया कि इस सेवा के तहत एक समर्पित वातानुकूलित (एसी) कोच और एक ‘सेकेंड सीटिंग कोच' उपलब्ध कराया गया है, जिससे यात्रियों को आराम मिले और उनकी गाड़ियां सुरक्षित रूप से ट्रेन में रखी जाएं। घाटगे ने कहा कि अगली यात्रा का निर्णय लोगों की प्रतिक्रिया और सुविधा के प्रति उनकी राय के आधार पर लिया जाएगा। कोंकण रेलवे ने शनिवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि 11 सितंबर तक सभी अधिसूचित ‘रो-रो कार' परिवहन सेवा यात्राओं के लिए, यात्रा के दिन को छोड़कर, यात्रा की तारीख से पहले तीन दिन शाम पांच बजे तक पंजीकरण स्वीकार किए जाते हैं। कोंकण रेलवे के मुताबिक कोलाड से वेरना तक के लिए वाहन चालकों को प्रति गाड़ी 7,875 रुपये और कोलाड से नंदगांव तक की यात्रा के लिए 5,460 रुपये का भुगतान करना होगा।
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नयी दिल्ली. ऑपरेशन सिंदूर के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के तहत थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी चार दिवसीय यात्रा पर रविवार को अल्जीरिया रवाना हुए ताकि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रक्षा संबंधों का विस्तार करने के तरीकों का पता लगाया जा सके। इस यात्रा से 10 महीने पहले भारत ने इस उत्तर अफ्रीकी राष्ट्र के साथ रक्षा सहयोग संबंधी एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। अधिकारियों ने बताया कि जनरल द्विवेदी अल्जीरिया के शीर्ष रक्षा एवं सैन्य अधिकारियों के साथ बातचीत करेंगे और इस दौरान विशेष रूप से दोनों थल सेनाओं के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस क्षेत्र में अपनी सामरिक ताकत बढ़ाने के चीन के लगातार प्रयासों की पृष्ठभूमि में भारत इस अफ्रीकी राष्ट्र के साथ अपने रक्षा संबंधों का विस्तार करने के लिए कदम उठा रहा है। थलसेना ने एक बयान में कहा, ‘‘इस यात्रा का उद्देश्य भारत और अल्जीरिया के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करना है, जिसमें सेनाओं के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा देना, क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर दृष्टिकोण साझा करना और रक्षा औद्योगिक सहयोग के अवसरों की खोज करना शामिल है।'' भारत और अल्जीरिया ने सैन्य क्षेत्र में सहयोग के लिए पिछले साल नवंबर की शुरुआत में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। थलसेना ने कहा, ‘‘थलसेना प्रमुख की यात्रा से दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने तथा साझा सुरक्षा हितों, क्षेत्रीय स्थिरता एवं रक्षा सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।'' जनरल द्विवेदी वरिष्ठ अल्जीरियाई नेतृत्व के साथ उच्च स्तरीय बैठकें करेंगे, जिनमें ‘पीपुल्स नेशनल आर्मी' के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल सईद चानेग्रिहा और अल्जीरियाई थल सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मुस्तफा स्माली शामिल होंगे। वह ‘स्कूल ऑफ कमांड एंड मेजर स्टाफ' और ‘चेरचेल मिलिट्री अकेडमी' जैसे प्रमुख सैन्य संस्थानों का दौरा भी करेंगे। थल सेना प्रमुख की यात्रा से पहले कई भारतीय रक्षा कंपनियों ने 30 जुलाई से एक अगस्त तक अल्जीयर्स में आयोजित एक रक्षा सम्मेलन में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने पिछले साल 31 अक्टूबर से तीन नवंबर तक इस अफ्रीकी देश की यात्रा की थी और वह अल्जीरिया के स्वतंत्रता संग्राम की 70वीं वर्षगांठ में शामिल हुए थे। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जनरल द्विवेदी की यह पहली विदेश यात्रा है। भारत ने पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाते हुए सात मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस हमले के बाद पाकिस्तान के साथ चार दिनों तक भीषण सैन्य संघर्ष हुआ था जो सैन्य कार्रवाई रोकने पर बनी सहमति के साथ 10 मई को समाप्त हुआ।
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- नयी दिल्ली.। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को गुरु ग्रंथ साहिब के प्रकाश पर्व पर लोगों को बधाई दी और कहा कि इसकी शिक्षाएं मानवता को एकता और सद्भाव की भावना को मजबूत करने के लिए प्रेरित करती हैं। गुरु ग्रंथ साहिब सिखों की पवित्र पुस्तक है, जिन्हें समुदाय द्वारा जीवित गुरु के रूप में सम्मान दिया जाता है। मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, “श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रकाश पर्व के पावन अवसर पर हार्दिक बधाई। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की शाश्वत शिक्षाएं दुनिया भर में जीवन को प्रकाशित करती रहती हैं और हमें करुणा, विनम्रता और सेवा के मूल्यों की याद दिलाती हैं।'' उन्होंने कहा कि ये शिक्षाएं मानवता को एकता और सद्भाव की भावना को मजबूत करने के लिए प्रेरित करती हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हम सदैव श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी द्वारा दिखाए गए ज्ञान के मार्ग पर चलें और एक बेहतर ग्रह बनाने का प्रयास करें।''













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