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- नयी दिल्ली.। अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने रविवार को कहा कि वह बचपन में "शर्मीले और संकोची" थे और युवावस्था में उन्होंने कभी अंतरिक्ष में जाने का सपना नहीं देखा था। भारतीय वायुसेना के एक कार्यक्रम में शुक्ला ने कहा कि उन्होंने राकेश शर्मा की ऐतिहासिक अंतरिक्ष उड़ान की कहानियां सुनी, लेकिन युवावस्था तक उन्होंने यह नहीं सोचा था कि वह अंतरिक्ष यात्रा पर जाएंगे। उन्होंने कहा कि वह बचपन में शर्मीले और संकोची थे। शुक्ला ने कहा, “बचपन में हम राकेश शर्मा की अंतरिक्ष यात्रा की कहानियां सुना करते थे।” अंतरिक्ष यात्री ने हाल में संपन्न एक्सिओम 4 मिशन का हिस्सा बनने के अपने अनुभव को भी साझा किया। इस मिशन के जरिए वह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की यात्रा करने वाले पहले भारतीय बने। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्ला सहित गगनयान मिशन के चार अंतरिक्ष यात्रियों को सम्मानित किया और कहा कि गगनयान मिशन आत्मनिर्भर भारत की यात्रा में एक "नए अध्याय" का प्रतीक है।
- जम्मू.। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यहां सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) अस्पताल जाकर किश्तवाड़ जिले में एक सुदूर गांव में अचानक आई बाढ़ में घायल हुए लोगों का हालचाल जाना। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। सिंह के साथ जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी थे।अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली से यहां पहुंचने के बाद मंत्री सीधे जम्मू अस्पताल पहुंचे और वहां इलाज करा रहे 16 लोगों से मुलाकात की। गत 14 अगस्त को चिशोती गांव में बादल फटने से 65 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक घायल हो गये थे। तब से लापता 32 लोगों का अब तक पता नहीं चल पाया है। अधिकारियों ने बताया कि सिंह को मचैल माता मंदिर के रास्ते में पड़ने वाले अंतिम गांव चिशोती भी जाना था, लेकिन खराब मौसम के कारण यह दौरा रद्द कर दिया गया। उन्होंने बताया कि सिंह अब दिल्ली लौटने से पहले राजभवन जाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि डॉक्टरों की एक टीम ने मंत्री को अपने इलाज के बारे में जानकारी दी।
- भुवनेश्वर. ओडिशा के स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने शुक्रवार को घोषणा की कि स्कूली छात्रों को राज्य सरकार द्वारा संचालित बसों में मुफ्त यात्रा करने की अनुमति दी जाएगी। यहां मीडियाकर्मियों से बात करते हुए गोंड ने कहा कि स्कूली छात्र अब ‘मुख्यमंत्री बस सेवा' योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा संचालित बसों में मुफ्त यात्रा कर सकते हैं। उन्होंने हालांकि स्पष्ट किया कि इस योजना का लाभ उठाने के लिए छात्रों को स्कूल यूनिफॉर्म पहननी होगी और पहचान पत्र भी साथ रखना होगा। मंत्री ने यह भी बताया कि पहले जहां केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों को ही मुफ्त पाठ्यपुस्तकें मिलती थीं, वहीं अब सरकार सभी छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराएगी। उन्होंने बताया कि कक्षा एक से दसवीं तक के छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें मिलेंगी।उन्होंने कहा कि ओडिशा सरकार ने एनईपी-2020 के अनुरूप एक बड़े कदम के तहत माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (बीएसई) और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीएचएसई) को विलय करने का भी फैसला किया है। कटक स्थित बीएसई कक्षा 10वीं की परीक्षा और शिक्षक पात्रता परीक्षा का प्रबंधन कर रहा है, जबकि यहां सीएचएसई कक्षा 11वीं और 12वीं की परीक्षा और शैक्षणिक कार्यों की देखरेख कर रहा है। गोंड ने बताया कि सरकार दोनों संगठनों का विलय करके एक बोर्ड बनाएगी। उन्होंने कहा कि हालांकि, नए बोर्ड के स्थान के बारे में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। मंत्री ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्राथमिक शिक्षा में महत्वपूर्ण बदलाव किए जाएंगे। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) को एनसीईआरटी ढांचे के अनुरूप विकसित किया जाएगा, जिसमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने पर अधिक ध्यान दिया जाएगा।'' उन्होंने बताया कि ये निर्णय बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में लिए गए।
- नयी दिल्ली. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 20 साल से पुराने मोटर वाहनों के पंजीकरण नवीनीकरण शुल्क में भारी वृद्धि की है ताकि लोगों को अधिक पुराने वाहनों को रखने से हतोत्साहित किया जा सके। मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि 20 साल से अधिक पुराने हल्के मोटर वाहनों (एलएमवी) के पंजीकरण को नवीनीकृत कराने का शुल्क अब 5,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया गया है। इसी तरह 20 साल पुराने दोपहिया वाहनों के लिए नवीनीकरण शुल्क को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये कर दिया गया है जबकि तिपहिया एवं क्वाड्रिसाइकिल के लिए शुल्क 3,500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दिया गया है। आयातित दोपहिया और तिपहिया वाहनों के पंजीकरण नवीनीकरण पर अब 20,000 रुपये और चार पहिया या उससे बड़े आयातित वाहनों पर 80,000 रुपये का शुल्क देना होगा। इस संबंध में जारी मसौदा संशोधन को फरवरी में सार्वजनिक किया गया था और इसे 21 अगस्त को अंतिम रूप दिया गया। मंत्रालय ने इससे पहले अक्टूबर, 2021 में भी वाहन पंजीकरण और नवीनीकरण शुल्क बढ़ाया था।उच्चतम न्यायालय ने अगस्त की शुरुआत में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 10 साल पुराने डीजल वाहनों और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न करने का आदेश दिया था। दिल्ली सरकार ने शीर्ष अदालत से अपील की थी कि वाहनों के निर्माण वर्ष के बजाय उनके वास्तविक उपयोग को देखते हुए वाहनों को इस्तेमाल से बाहर करने की नीति लागू की जाए।
- अयोध्या. अयोध्या के पूर्व राजपरिवार के वंशज एवं राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र का शनिवार रात लगभग 11 बजे निधन हो गया। पारिवारिक सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी। मिश्र 75 वर्ष के थे। उनके छोटे भाई शैलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र ने पत्रकारों से मिश्र के निधन की पुष्टि की। बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र ने अपने निवास ‘राज सदन' में अंतिम सांस ली। उनके निधन से अयोध्या में शोक की लहर है। कुछ महीने पहले पैर में चोट लगने के कारण उनकी सर्जरी हुई थी, जिसके बाद उनकी गतिविधियां सीमित हो गई थीं और वह फिर कभी सामान्य जीवन नहीं जी पाए। अयोध्या में बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि पर उच्चतम न्यायालय के अंतिम निर्णय की घोषणा के बाद राम मंदिर के ‘रिसीवर' का प्रभार मिश्र को सौंपा गया था। इससे पहले यह प्रभार अयोध्या के आयुक्त के पास था। मिश्र ने वर्ष 2009 का संसदीय चुनाव फैजाबाद (अयोध्या) लोकसभा क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उम्मीदवार के रूप में लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
- नयी दिल्ली. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे 2025 के शैक्षणिक सत्र से मनोविज्ञान और पोषण समेत स्वास्थ्य सेवा एवं संबद्ध विषयों में मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षण या ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई की पेशकश नहीं करें। यह प्रतिबंध राष्ट्रीय सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देख-रेख वृत्ति आयोग (एनसीएएचपी) अधिनियम, 2021 के तहत आने वाले पाठ्यक्रमों पर लागू है। उनमें मनोविज्ञान, सूक्ष्म जीव विज्ञान, खाद्य एवं पोषण विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, नैदानिक पोषण और आहार विज्ञान शामिल हैं। यूजीसी सचिव मनीष जोशी ने कहा, ‘‘किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान (एचईआई) को शैक्षणिक सत्र जुलाई-अगस्त, 2025 और उसके बाद मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षण और ऑनलाइन माध्यम से मनोविज्ञान समेत एनसीएएचपी अधिनियम, 2021 में शामिल किसी भी संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम की पेशकश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जुलाई-अगस्त 2025 और उसके बाद के शैक्षणिक सत्र के लिए ऐसे कार्यक्रमों की पेशकश करने के लिए एचईआई को पहले से दी गई कोई भी मान्यता यूजीसी द्वारा वापस ले ली जाएगी।'' उन्होंने कहा, ‘‘कला स्नातक (अंग्रेजी, हिंदी, पंजाबी, अर्थशास्त्र, इतिहास, गणित, लोक प्रशासन, दर्शनशास्त्र, राजनीति विज्ञान, सांख्यिकी, मानवाधिकार एवं कर्तव्य, संस्कृत, मनोविज्ञान, भूगोल, समाजशास्त्र, महिला अध्ययन) जैसे बहु-विशेषज्ञता वाले कार्यक्रमों के मामले में, केवल एनसीएएचपी अधिनियम, 2021 में शामिल विशेषज्ञताओं को ही वापस लिया जाएगा।'' शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वे आगामी शैक्षणिक सत्र से ऐसे कार्यक्रमों में किसी भी विद्यार्थी को प्रवेश न दें। यह निर्णय व्यावसायिक प्रशिक्षण में गुणवत्ता मानकों को लेकर चिंताओं के बीच लिया गया है।जोशी ने कहा, ‘‘यह निर्णय अप्रैल 2025 में आयोजित 24वीं दूरस्थ शिक्षा ब्यूरो कार्य समूह की बैठक की सिफारिशों के बाद लिया गया है और हाल में आयोग की बैठक में इसे औपचारिक रूप दिया गया।'' उच्च शिक्षा नियामक दूरस्थ शिक्षा और ऑनलाइन माध्यमों से व्यावसायिक और व्यावहारिक पाठ्यक्रमों के संचालन पर रोक लगाता है। इनमें इंजीनियरिंग, चिकित्सा, दंत चिकित्सा, फार्मेसी, नर्सिंग, वास्तुकला, फिजियोथेरेपी, पैरामेडिकल विषय, कृषि, बागवानी, होटल प्रबंधन, खानपान प्रौद्योगिकी, दृश्य कला, कानून आदि शामिल हैं।
- नयी दिल्ली. केंद्र सरकार बजट में घोषित निर्यात संवर्धन मिशन के तहत वर्ष 2025 से 2031 तक के लिए निर्यातकों को लगभग 25,000 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान करने वाले उपायों पर विचार कर रही है। सूत्रों ने बताया, ‘‘इस प्रोत्साहन का मुख्य उद्देश्य निर्यातकों को आसान और किफायती ऋण उपलब्ध कराना है।''वाणिज्य मंत्रालय ने यह प्रस्ताव वित्त मंत्रालय की व्यय वित्त समिति (ईएफसी)के पास भेजा है। यदि इन उपायों को मंजूरी मिल जाती है, तो ये भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी शुल्क से उत्पन्न होने वाली वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं से बचाने में मदद कर सकते हैं। ईएफसी से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद वाणिज्य मंत्रालय केंद्रीय मंत्रिमंडल से संपर्क करेगा।प्रस्तावित मिशन का उद्देश्य अगले छह वर्षों (वित्त वर्ष 2025-31) में व्यापक, समावेशी और टिकाऊ निर्यात वृद्धि को बढ़ावा देना है। इसके तहत पारंपरिक तरीकों से आगे जाकर उन प्रमुख बाधाओं को दूर करने के नए उपाय खोजे जाएंगे, जिनका सामना भारतीय निर्यातक खासकर एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) करते हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस मिशन को दो उप-योजनाओं के जरिए लागू करने का प्रस्ताव है जिसमें 'निर्यात प्रोत्साहन' (10,000 करोड़ रुपये से अधिक) और 'निर्यात दिशा' (14,500 करोड़ रुपये से अधिक) शामिल हैं। सरकार ‘निर्यात प्रोत्साहन' योजना के तहत जिन मुख्य बातों पर विचार कर रही है, उनमें अगले छह वित्त वर्षों (2025-2031) के लिए 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का ब्याज समानीकरण समर्थन शामिल है। इसके अलावा, योजना में वैकल्पिक व्यापार वित्त साधनों को बढ़ावा देना, ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराना और निर्यातकों के सामने आने वाली नकदी की कमी को दूर करने के लिए अन्य वित्तीय व्यवस्थाएं करना भी शामिल है। इसी तरह, 'निर्यात दिशा' योजना के तहत प्रस्तावित घटकों में निर्यात की गुणवत्ता मानकों के पालन के लिए समर्थन (लगभग 4,000 करोड़ रुपये), विदेशी बाजारों के विकास (4,000 करोड़ रुपये से अधिक), ब्रांडिंग, निर्यात के लिए भंडारण और लॉजिस्टिक, तथा अधिक से अधिक भारतीय उद्यमों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत करने के लिए क्षमता निर्माण शामिल है।
- ठाणे. महाराष्ट्र के नवी मुंबई स्थित घरेलू विवाद में एक महिला ने अपनी 62 वर्षीय सास की कथित रूप से पिटाई कर दी। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि बुजुर्ग महिला के सिर में चोटें आई हैं। एक अधिकारी ने बताया कि यह घटना 21 अगस्त को ऐरोली इलाके में हुई और आरोपी महिला फिलहाल फरार है। उन्होंने बताया कि आरोपी महिला के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।रबाले थाने के उपनिरीक्षक यूनुस शेख ने बताया कि आरोपी महिला ने अपनी सास से बाथरूम में रखा एक लोहे का बक्सा हटाने को कहा, लेकिन बुजुर्ग महिला ने यह कहते हुए मना कर दिया कि बक्सा बहुत भारी है, जिसके बाद दोनों के बीच बहस हो गई। अधिकारी ने बताया कि इसके बाद महिला ने सास के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया, उसे थप्पड़ मारे, उसके बाल पकड़े और उसका सिर दीवार पर दे मारा। उन्होंने बताया कि महिला ने अपनी सास का मोबाइल फोन भी छीन लिया और उसे घर से बाहर फेंक दिया। इतना ही नहीं आरोपी ने घर पर लगे सीसीटीवी कैमरे को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। अधिकारी ने बताया कि घायल बुजुर्ग महिला ने इलाज करवाने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।पुलिस ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। शेख ने बताया, “फिलहाल आरोपी महिला को गिरफ्तार नहीं किया गया है। हमारी टीम मामले की सक्रियता से जांच कर रही है और सबूतों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई करेगी।”
- नयी दिल्ली. भारत ने ओडिशा तट से एकीकृत हवाई रक्षा हथियार प्रणाली (आईएडीडब्ल्यूएस) का पहला उड़ान परीक्षण "सफलतापूर्वक" पूरा किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उड़ान परीक्षणों के लिए आईएडीडब्ल्यूएस को विकसित करने वालों, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और सशस्त्र बलों को बधाई दी। स्वदेशी हवाई रक्षा प्रणाली का शनिवार को शनिवार देर रात साढ़े 12 बजे ओडिशा तट से उड़ान परीक्षण किया गया। नयी हवाई रक्षा प्रणाली का उड़ान परीक्षण ऑपरेशन सिंदूर के साढ़े तीन महीने बाद हुआ है।आईएडीडब्ल्यूएस एक बहुस्तरीय हवाई रक्षा प्रणाली है जिसमें त्वरित प्रतिक्रिया वाली सतह से हवा में मार करने वाली सभी स्वदेशी मिसाइल, बहुत कम दूरी की हवाई रक्षा प्रणाली (वीएसएचओआरएडीएस) मिसाइल और उच्च शक्ति वाली लेजर आधारित निर्देशित ऊर्जा हथियार (डीईडब्ल्यू) प्रणाली शामिल हैं। सिंह ने सोशल मीडिया पर कहा, "मैं आईएडीडब्ल्यूएस को सफलतापूर्वक विकसित करने के लिए डीआरडीओ, भारतीय सशस्त्र बलों और उद्योग जगत को बधाई देता हूं।" उन्होंने कहा, ‘‘इस अद्वितीय उड़ान परीक्षण ने हमारे देश की बहुस्तरीय हवाई रक्षा क्षमता को स्थापित किया है और यह दुश्मन के हवाई खतरों के खिलाफ रक्षा प्रणाली को मजबूत बनाएगी।”
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 और 26 अगस्त को दो दिवसीय गुजरात के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे अहमदाबाद और आसपास के क्षेत्रों में 5,400 करोड़ रुपए से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इन परियोजनाओं में शहरी विकास, ऊर्जा, सड़क, और रेलवे से जुड़े कार्य शामिल हैं, जिनका उद्देश्य कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। प्रधानमंत्री 25 अगस्त की शाम लगभग 6 बजे अहमदाबाद के खोडलधाम मैदान में एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। यहां वे कई परियोजनाओं का राष्ट्र को समर्पण करेंगे और नई परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे।
अगले दिन 26 अगस्त को सुबह 10:30 बजे वे अहमदाबाद के हंसलपुर स्थित सुजुकी मोटर प्लांट जाएंगे, जहां वे हाइब्रिड बैटरी इलेक्ट्रोड के स्थानीय उत्पादन का उद्घाटन करेंगे और सुजुकी की पहली वैश्विक बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (BEV) “e VITARA” को 100 से अधिक देशों, जिनमें यूरोप और जापान शामिल हैं, के लिए निर्यात करने की शुरुआत करेंगे। इस मौके पर प्रधानमंत्री सभा को भी संबोधित करेंगे। वहीं रेलवे क्षेत्र में प्रधानमंत्री लगभग 1,400 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को समर्पित करेंगे। इसमें महेसाना-पालनपुर रेल लाइन के 65 किमी हिस्से का डबलिंग कार्य शामिल है, जिस पर 530 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हुए हैं।इसके अलावा, 37 किमी लंबी कलोल-कड़ी-कटोसन रोड रेल लाइन और 40 किमी लंबी बेचराजी-रणुज रेल लाइन का गेज परिवर्तन कार्य भी शामिल है, जिसकी कुल लागत 860 करोड़ रुपए से अधिक है। इन परियोजनाओं से यात्रियों, पर्यटकों और कारोबारियों को सुगम और सुरक्षित यात्रा सुविधा मिलेगी तथा क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही कटोसन रोड और साबरमती के बीच नई पैसेंजर ट्रेन सेवा शुरू होगी और बेचराजी से कार-लोडेड मालगाड़ी सेवा भी चलेगी, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों को मजबूती और रोजगार के अवसर मिलेंगे।इसके अलावा पीएम मोदी विरमगाम-खुडाद-रांपुरा रोड के चौड़ीकरण का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा अहमदाबाद-महेसाना-पालनपुर रोड पर छह लेन वाले वाहन अंडरपास और अहमदाबाद-विरमगाम रोड पर रेलवे ओवरब्रिज का शिलान्यास भी करेंगे। इन परियोजनाओं से यातायात सुगम होगा, सड़क सुरक्षा बढ़ेगी और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। ऊर्जा क्षेत्र में प्रधानमंत्री उत्तर गुजरात विज कंपनी लिमिटेड (UGVCL) के तहत अहमदाबाद, महेसाना और गांधीनगर में 1,000 करोड़ से अधिक की वितरण परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे।ये परियोजनाएं ‘रीवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम’ के अंतर्गत लागू की गई हैं, जिनसे बिजली नेटवर्क का आधुनिकीकरण होगा, लाइन लॉस कम होंगे और खराब मौसम के दौरान बिजली कटौती की समस्या घटेगी। शहरी विकास के क्षेत्र में भी अहमदाबाद के रामापीर नो टेकरी (सेक्टर-3) में स्थित झुग्गियों के पुनर्विकास कार्य का उद्घाटन प्रधानमंत्री करेंगे। यह कार्य प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के इन-सीटू स्लम पुनर्विकास घटक के अंतर्गत किया गया है। साथ ही, अहमदाबाद के सरदार पटेल रिंग रोड पर सड़क चौड़ीकरण और जल व सीवरेज प्रबंधन की कई शहरी अवसंरचना परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया जाएगा।पीएम मोदी सुजुकी की पहली इलेक्ट्रिक व्हीकल “e VITARA” को दिखाएंगे हरी झंडीइसके अलावा, प्रधानमंत्री अहमदाबाद पश्चिम में नए स्टाम्प्स और पंजीकरण भवन की नींव रखेंगे, जिससे नागरिक सेवाओं में सुधार होगा। साथ ही गांधीनगर में एक राज्य स्तरीय डाटा स्टोरेज सेंटर की नींव भी रखी जाएगी, जिससे सुरक्षित डेटा प्रबंधन और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा मिलेगा। इस दौरे की सबसे खास उपलब्धि 26 अगस्त को सुजुकी मोटर प्लांट, हंसलपुर में होने वाला कार्यक्रम होगा। प्रधानमंत्री यहां से “e VITARA” नामक सुजुकी की पहली वैश्विक रणनीतिक इलेक्ट्रिक कार को निर्यात के लिए हरी झंडी दिखाएंगे। इसके साथ ही TDS लिथियम-आयन बैटरी प्लांट (टोशिबा, डेंसो और सुजुकी का संयुक्त उपक्रम) में हाइब्रिड बैटरी इलेक्ट्रोड का स्थानीय उत्पादन शुरू होगा। इस विकास से बैटरी का 80% से अधिक मूल्य भारत में ही निर्मित होगा, जो आत्मनिर्भर भारत और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। -
नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आज रविवार को दिल्ली विधानसभा में आयोजित अखिल भारतीय स्पीकर सम्मेलन 2025 का उद्घाटन किया। यह दो दिवसीय आयोजन वीर विट्ठलभाई पटेल के पहले भारतीय स्पीकर के रूप में चुने जाने की 100वीं वर्षगांठ को समर्पित है। सम्मेलन का आयोजन दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजयेंद्र गुप्ता के नेतृत्व में किया गया, जिसमें देशभर की राज्य विधानसभाओं के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विधान परिषदों के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष शामिल हुए।
इस अवसर पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मंत्री प्रवेश वर्मा मौजूद रहे। अमित शाह ने इस मौके पर विट्ठलभाई पटेल की स्मृति में विशेष डाक टिकट भी जारी किया। सभा को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि विट्ठलभाई पटेल ने भारत की संसदीय परंपराओं की नींव रखी और भारतीय मूल्यों पर आधारित लोकतंत्र को मजबूत किया। उन्होंने महामना मालवीय, गोपालकृष्ण गोखले, लाला लाजपत राय और देशबंधु चिरंजनदास जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करते हुए कहा कि इन नेताओं ने सदन में जनता की आकांक्षाओं को आवाज दी। शाह ने यह भी कहा कि गुजरात ने देश को दो महान नेता दिए-सरदार पटेल, जिन्होंने महात्मा गांधी के साथ स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका निभाई, और विट्ठलभाई पटेल, जिन्होंने भारत की विधायी परंपराओं को सशक्त किया।इसके साथ ही अमित शाह ने एक विशेष प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया, जिसमें दिल्ली विधानसभा की 100 वर्ष से अधिक की यात्रा को प्रदर्शित किया गया है। इसमें इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल से लेकर सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली और भारत की पहली संसद तक का इतिहास दिखाया गया है। शाह ने सुझाव दिया कि विट्ठलभाई पटेल के जीवन पर एक विशेष प्रदर्शनी आयोजित की जानी चाहिए ताकि युवा पीढ़ी उनके योगदान से प्रेरणा ले सके। सम्मेलन का उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना, भारत की संघीय संरचना में विधायी निकायों की भूमिका पर चर्चा करना और संसदीय परंपराओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित नवाचारों और डिजिटल उपकरणों की मदद से कानून बनाने की प्रक्रिया को और पारदर्शी व जवाबदेह बनाने पर भी बल दिया गया। -
नई दिल्ली। श्रीलंका की राजनीति में उस वक्त भूचाल आया जब वहां के पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे को सरकारी धन का गलत इस्तेमाल के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। 2023 के लंदन दौरे से जुड़े मामले में वित्तीय अपराध जांच विभाग के सामने शुक्रवार के दिन विक्रमसिंघे पूछताछ के लिए पहुंचे थे। जहां पर उन्हें पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। अब इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस के नेता शशि थरूर ने अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने श्रीलंका सरकार से दो खास चीजों का आग्रह किया है। पहला बदले की राजनीति छोड़ने का और दूसरा पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के साथ सम्मानजक व्यवहार करने का उन्होंने आग्रह किया है।
दरअसल कांग्रेस नेता शशि थरूर ने एक पोस्ट अपने एक्स अकाउंट पर शेयर किया है, जिसमें उन्होंने लिखा कि रानिल विक्रमसिंघे के ऊपर जो आरोप लगाए गए हैं वो पूरी तरह से मामूली लगते हैं। शशि थरूर ने अपनी बात रखते हुए कहा,' श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे को मामूली आरोपों में हिरासत में लिए जाने को लेकर परेशान हूं। उनकी स्वस्थाय समस्याओं के चलते पहले ही उन्हें जेल के हॉस्पिटल में ले जाया जा चुका है। इसके अलावा शशि थरूर ने कहा," मैं इस बात का पूरा सम्मान करते हुए कि यह श्रीलंका का आतंरिक मामला है, बस श्रीलंकाई सरकार से यह आग्रह करना चाहता हूं कि वह बदले की राजनीति का त्याग करें और अपने पूर्व राष्ट्रपति के साथ सम्मान और गरिमा के साथ पेश आएं, देश के प्रति उनकी दशकों की सेवा के बाद वह इसके तो हकदार हैं ही।बता दें कि विक्रमसिंघे जुलाई 20222 में गोटबाया राजपक्षे के बचे हुए कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति पद पर तैनात हुए थे। 2022 से लेकर 2024 तक वो इस पद पर बने रहे थे। जब वो सत्ता में उस वक्त राजनीतिक संकट और तख्तापलट जैसे हालत भी पैदा हो गए थे। - जमशेदपुर। झारखंड के जमशेदपुर के सोनारी इलाके में एक छोटी बंदूक फैक्टरी से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया और उनके पास से हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुलिस की एक टीम ने शनिवार को तिलु बस्ती के पास स्थित बंदूक फैक्टरी में करीब आठ घंटे तक छापेमारी की और छह पिस्तौल तथा हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण बरामद किए।एक अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार लोगों से पूछताछ की जा रही है और फैक्टरी के संचालन में शामिल अन्य लोगों का पता लगाने के लिए तलाश जारी है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद अधिक जानकारी उपलब्ध होगी।
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नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा के दौरान अंतरिक्ष में मेथी और मूंग की खेती कर एक नई उपलब्धि हासिल की। आज रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में शुभांशु शुक्ला और अन्य गगन यात्रियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने शुभांशु शुक्ला से कहा कि उनके अंदर का किसान अंतरिक्ष में जाकर भी जीवित रहा और उन्होंने अंतरिक्ष में खेती कर देशवासियों को प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि यह अनुभव भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों में बहुत मददगार साबित होगा।
इस मौके पर राजनाथ सिंह ने कहा कि शुभांशु की यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और दिखाएगी कि कठिन राहों पर भी यदि श्रद्धा और मेहनत हो तो आकाश भी सीमा नहीं रह जाता। रक्षा मंत्री ने बताया कि शुभांशु शुक्ला केवल वायु सेना का ही नहीं, बल्कि पूरे भारत और मानवता का प्रतिनिधि बने। उन्होंने कहा कि आज भारत अंतरिक्ष में केवल तकनीकी शक्ति या सैन्य ताकत के लिए नहीं बल्कि मानव सभ्यता की सामूहिक यात्रा और आत्मनिर्भर भारत के नए अध्याय के लिए सक्रिय है। राजनाथ सिंह ने चंद्रयान और मंगलयान सहित भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया और कहा कि भारत इसे आने वाले भविष्य की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, ऊर्जा और मानवता के दृष्टिकोण से देखता है।रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष यात्री बनने की कठिन ट्रेनिंग प्रक्रिया को मात्र ढाई महीनों में पूरा कर दिखाया, जबकि आम तौर पर यह प्रक्रिया 2 से ढाई वर्षों तक चलती है। उन्होंने इसे शुभांशु की लगन, समर्पण और भारतवासियों के मेहनती मन का प्रतीक बताया। राजनाथ सिंह ने कहा कि इस यात्रा से मिली तकनीकें, जैसे संचार उपग्रह, मौसम निगरानी और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के साधन, आज भारत के गांव-गांव और खेत-खेत तक पहुंच रही हैं। उन्होंने भविष्य में अंतरिक्ष खनन और डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन के महत्व पर भी जोर दिया।-( -
नई दिल्ली। भारत ने एक बड़ी रक्षा उपलब्धि हासिल करते हुए इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम (IAWS) का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण 23 अगस्त को दोपहर 12:30 बजे ओडिशा तट से किया गया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से इस प्रणाली को तैयार किया है। इसके सफल परीक्षण के बाद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास आधुनिक और बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली मौजूद है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर DRDO, भारतीय सशस्त्र बलों और उद्योग जगत को बधाई दी। उन्होंने कहा, “यह अनूठा उड़ान परीक्षण हमारे देश की बहु-स्तरीय एयर डिफेंस क्षमता को स्थापित करता है। यह न सिर्फ महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि देश को दुश्मन के हवाई खतरों के खिलाफ और ज्यादा सशक्त बनाएगा।” IAWS एक बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली है जिसमें क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (QRSAM), एडवांस्ड वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस मिसाइल और लेजर आधारित डायरेक्टेड एनर्जी वेपन शामिल हैं। यह प्रणाली दुश्मन के लड़ाकू विमान, ड्रोन, हेलीकॉप्टर और क्रूज मिसाइल जैसे खतरों को अलग-अलग स्तर पर रोकने और हवा में ही मार गिराने में सक्षम है। खासतौर पर इसमें लगा हाई-पावर लेजर हथियार पलक झपकते ही शत्रु के हवाई लक्ष्यों को नष्ट कर सकता है।विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रणाली से भारत की एयर डिफेंस क्षमता नई ऊंचाई पर पहुंच गई है। यह देश की महत्वपूर्ण सैन्य और औद्योगिक स्थापनाओं को दुश्मन के हवाई हमलों से सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाएगी। इसके सफल परीक्षण से भारत की रक्षा शक्ति के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी बड़ी मजबूती मिली है। ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत ने इसी सप्ताह अपनी अत्याधुनिक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-5’ का भी सफल परीक्षण किया था। ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से किए गए इस परीक्षण में ‘अग्नि-5’ ने सभी संचालनात्मक और तकनीकी मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया। इससे भारत की मिसाइल क्षमता में जबरदस्त इजाफा हुआ है।इन दोनों सफल परीक्षणों ने भारत की रक्षा तैयारियों को नई मजबूती दी है और देश को भविष्य के खतरों से निपटने के लिए और सक्षम बना दिया है।- -
नयी दिल्ली. भारत की अंतरिक्ष नियामक एजेंसी भारतीय राष्ट्रीय संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इनस्पेस) ने शनिवार को कहा कि अंतरिक्ष में काम करने वाले स्टार्टअप के एक गठजोड़ ने 12 उपग्रहों के समूह के लिए 'शून्य बोली' लगाई है, जिससे देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में भविष्य के मौकों को लेकर निजी क्षेत्र के भरोसे का पता चलता है। राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस समारोह के दौरान इनस्पेस के चेयरमैन पवन गोयनका ने कहा कि अब हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए की गई पहलें सफल हों। इस महीने की शुरुआत में इनस्पेस ने 'पिक्सल स्पेस' के नेतृत्व वाले गठजोड़ को 12 उपग्रहों वाले पृथ्वी अवलोकन उपग्रह समूह बनाने का ठेका दिया था। यह समूह अगले चार सालों में इस काम में 1,200 करोड़ रुपये का निवेश करेगा। पिक्सल की अगुवाई वाले गठजोड़ ने इस परियोजना के लिए 'जीरो बोली' लगाई थी, और 1,200 करोड़ रुपये की परियोजना लागत में 350 करोड़ रुपये का योगदान करने के सरकारी प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। गोयनका ने कहा, ''पिक्सल के नेतृत्व वाले समूह की 'जीरो बोली' की हर जगह चर्चा हो रही है। जब सरकार 350 करोड़ रुपये देने की पेशकश कर रही हो, तो कोई शून्य बोली कैसे लगा सकता है? मेरे लिए, यह अंतरिक्ष में भविष्य के अवसरों के प्रति निजी क्षेत्र के भरोसे का एक बहुत ही शानदार उदाहरण है।'' गोयनका ने कहा, ''निजी क्षेत्र अंतरिक्ष क्षेत्र में जिस तरह का उत्साह दिखा रहा है, उससे हम भविष्य को लेकर बहुत सकारात्मक महसूस कर रहे हैं।
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नयी दिल्ली. देश के गगनयान मिशन के लिए चुने गए चार भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों ने शनिवार को मानव अंतरिक्ष उड़ान के गहरे मायने को रेखांकित करते हुए इसे प्राचीन ज्ञान, विनम्रता, वैज्ञानिक खोज और पृथ्वी से परे अन्वेषण के नयी पीढ़ी के सपनों से जोड़ा। राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर एक सत्र के दौरान बोलते हुए ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर ने कहा कि भारत के सभ्यतागत ज्ञान ने आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान का बहुत पहले अनुमान लगा लिया था। उन्होंने कहा, "हम एक प्राचीन सभ्यता हैं। मुझे हमेशा लगता रहा है कि हम इतने आगे थे कि हम ऊब गए और दुनिया को हमसे आगे निकल जाने दिया। अब हम फिर से पीछे लौट रहे हैं।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कैसे खगोल विज्ञान और ज्योतिष एक समय भारत के ज्योतिष शास्त्र में एकीकृत थे। महाकाव्यों के साथ तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि रामायण में भी "पूरा मिशन नियंत्रण" समाहित है, जब हनुमान ने अपने दल के सहयोग से "एक अंतरिक्ष यात्री की तरह" छलांग लगाई थी। अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण के बारे में, नायर ने कहा, "हम एथलीट की तरह प्रशिक्षण लेते हैं, वैज्ञानिकों और इंजीनियर की तरह अध्ययन करते हैं, और हमें राजनयिकों की तरह व्यवहार करना सिखाया जाता है।" ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन ने इस बात पर जोर दिया कि अंतरिक्ष अन्वेषण पृथ्वी पर जीवन से जुड़ा रहना चाहिए। उन्होंने कहा, "अंतरिक्ष में हम जो कुछ भी करते हैं, उसका पृथ्वी पर किसी न किसी रूप में उपयोग होना ज़रूरी है।" उन्होंने मानव अंतरिक्ष उड़ान में विनम्रता के महत्व पर भी प्रकाश डाला। कृष्णन ने कहा, "अंतरिक्ष में ऊपर जाने के लिए आपको ज़मीन से जुड़ा होना होगा।" उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अभी भी वैश्विक अनुभव से बहुत कुछ सीखना है। ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप ने कहा कि अंतरिक्ष यात्रियों की भूमिका अंतरिक्ष यान संचालित करने से कहीं आगे तक फैली हुई है। उन्होंने कहा, "मानव अंतरिक्ष उड़ान का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान भी है। यही मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने अंतरिक्ष यात्रियों को "अग्रणी" बताते हुए कहा कि वे मनोवैज्ञानिक अनुसंधान से लेकर प्रशिक्षण प्रोटोकॉल बनाने तक, प्रयोगात्मक अध्ययन के लिए अपना शरीर समर्पित करते हैं। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने कहा कि पृथ्वी को कक्षा से देखने से उन्हें एक नया और गहरा दृष्टिकोण मिला। शुक्ला ने एक्सिओम-4 मिशन पर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के लिए उड़ान भरी थी। उन्होंने अंतरिक्ष को "सीमाओं को पार करने और प्रकृति को एकीकृत करने की परिवर्तनकारी क्षमता" वाला बताया। उन्होंने कहा, "आप पृथ्वी को कई अलग-अलग कोणों से देख पाते हैं। आपको सचमुच ऐसा लगता है जैसे आप इस पूरे ग्रह को जान गए हैं।" राकेश शर्मा की उड़ान के बाद से चार दशक के अंतराल पर उन्होंने कहा, "उस समय, यह एक बार की घटना थी। आज, बच्चे मुझसे गंभीरता से पूछते हैं कि अंतरिक्ष यात्री कैसे बनें। इस बार, यह एक संभावना है।
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नयी दिल्ली. भारत में 1960 के दशक में साइकिल और बैलगाड़ी पर रॉकेट ले जाने से लेकर चंद्रयान और गगनयान जैसे ऐतिहासिक अंतरिक्ष अभियानों तक, देश का वैश्विक अंतरिक्ष शक्तियों के बीच उदय अब एनसीईआरटी के विशेष मॉड्यूल का हिस्सा है। दो मॉड्यूल में 'भारत: एक उभरती हुई अंतरिक्ष शक्ति' शीर्षक से इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि किस प्रकार 1962 में विक्रम साराभाई के नेतृत्व में स्थापित भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (आईएनसीओएसपीएआर) ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का रूप लिया, जिसने ऐसी उपलब्धियां हासिल कीं, जिनके कारण भारत को अंतरिक्ष में अग्रणी देशों में स्थान मिला। मॉड्यूल में लिखा है, ‘‘भारत का पहला रॉकेट इतना छोटा और हल्का था कि उसके पुर्जों को साइकिल और बैलगाड़ियों पर ले जाया गया। वैज्ञानिकों ने इस काम के लिए साइकिल और बैलगाड़ियों को चुना। कार और ट्रक जैसे मोटर चालित वाहन विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करते हैं जो नाजुक रॉकेट उपकरणों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए, साधारण परिवहन के इस्तेमाल से सब कुछ सुरक्षित रहा।'' इन दो मॉड्यूल में से एक मध्य स्तर के छात्रों के लिए और दूसरा माध्यमिक स्तर के छात्रों के लिए हैं। ये दोनों भारत के अंतरिक्ष यात्रियों, स्क्वाड्रन लीडर राकेश शर्मा और ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। स्क्वाड्रन लीडर राकेश शर्मा 1984 में सोवियत मिशन पर अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले पहले भारतीय बने जबकि ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला जून 2025 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर रुकने वाले पहले भारतीय बने। मॉड्यूल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक उद्धरण भी शामिल है, जिसमें कहा गया है, ‘‘अंतरिक्ष दूर लग सकता है, लेकिन यह हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग है। यह हमारे आधुनिक संचार का आधार है और दूरस्थ परिवारों को भी आम लोगों से जोड़ता है। भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम हमारे पैमाने, गति और कौशल के दृष्टिकोण का एक आदर्श उदाहरण है।'' मॉड्यूल में कई ऐतिहासिक मिशन सूचीबद्ध किये गए हैं, जैसे चंद्रयान-1 (2008), जिसके माध्यम से चंद्रमा पर पानी के अणुओं की खोज की गई थी; मंगलयान (2013), जिसने भारत को मंगल ग्रह पर पहुंचने वाला पहला एशियाई देश और अपने पहले प्रयास में सफल होने वाला दुनिया का पहला देश बना दिया; चंद्रयान-2 (2019), जिसका ऑर्बिटर महत्वपूर्ण चंद्र डेटा प्रदान करना जारी रखे हुए है और आदित्य-एल1 (2023), लैग्रेंज पॉइंट-1 पर भारत की पहली सौर वेधशाला जो सूर्य के बाहरी वायुमंडल और सौर तूफानों का अध्ययन करती है। ये आगामी एनएएसए (राष्ट्रीय वैमानिकी एवं अंतरिक्ष प्रशासन)-इसरो निसार उपग्रह के बारे में भी बात करते हैं, जो हर 12 दिनों में एक बार विश्व का सर्वेक्षण करके पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र, बर्फ आवरण और प्राकृतिक आपदाओं पर उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा प्रदान करेगा।
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नयी दिल्ली. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में भारत की कुछ सीमाएं हैं और वह किसानों तथा छोटे उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए दृढ़ रहेगा। जयशंकर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ ही दिन पहले भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त अमेरिकी शुल्क लागू होने वाले हैं। विदेश मंत्री ने रूस के साथ भारत के ऊर्जा संबंधों को निशाना बनाने के लिए अमेरिका की आलोचना की और आश्चर्य जताया कि यही मानदंड चीन और यूरोपीय संघ पर क्यों नहीं लागू किया गया, जो क्रमशः रूसी कच्चे तेल और रूसी एलएनजी के सबसे बड़े आयातक हैं। ‘इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम' में विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों में मध्यस्थता स्वीकार नहीं करता है और इस पर 50 वर्षों से अधिक समय से राष्ट्रीय सहमति बनी हुई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने मई में भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष को रोकने में भूमिका निभाई। जयशंकर ने व्यापार और शुल्क, रूसी कच्चे तेल की खरीद और संघर्ष पर वाशिंगटन के दावे को भारत और अमेरिका के बीच वर्तमान में तीन मुख्य मुद्दों के रूप में चिह्नित किया। ट्रंप के भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को दोगुना कर 50 प्रतिशत कर दिए जाने के आदेश के बाद भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में तनाव पैदा हो गया है। इस आदेश के तहत 25 प्रतिशत शुल्क पहले ही लागू हो चुका है तथा अतिरिक्त शुल्क 27 अगस्त से लागू होने वाले हैं। जयशंकर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का दुनिया के साथ व्यवहार करने का तरीका पारंपरिक तरीके से बहुत अलग है और पूरी दुनिया इसका सामना कर रही है। उन्होंने कहा, “अब तक ऐसा कोई अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं रहा, जिसने विदेश नीति को मौजूदा राष्ट्रपति की तरह सार्वजनिक रूप से संचालित किया हो। यह अपने आप में ऐसा बदलाव है, जो केवल भारत तक सीमित नहीं है।” विदेश मंत्री ने कहा कि व्यापार दोनों देशों के बीच “वास्तव में सबसे बड़ा मुद्दा” है। उन्होंने कहा, “बातचीत अभी भी जारी है और मुख्य बात यह है कि हमारे बीच कुछ सीमाएं हैं।” उन्होंने कहा, "हम सरकार के रूप में अपने किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम इस पर दृढ़ हैं।" भारत द्वारा अपने कृषि और डेयरी क्षेत्रों को खोलने से इनकार करने के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए बातचीत में बाधा उत्पन्न हो गई। विदेश मंत्री ने ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों का भी जवाब दिया कि भारत रूस से रियायती मूल्य पर कच्चा तेल खरीदकर तथा फिर परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों को यूरोप और अन्य स्थानों पर ऊंची कीमतों पर बेचकर “मुनाफाखोरी” कर रहा है। उन्होंने कहा, “यह हास्यास्पद है कि व्यापार-समर्थक अमेरिकी प्रशासन के लोग दूसरों पर व्यापार करने का आरोप लगा रहे हैं।” जयशंकर ने कहा, “यह वाकई अजीब है। अगर आपको भारत से तेल या परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने में कोई समस्या है, तो उसे न खरीदें। कोई आपको खरीदने के लिए मजबूर नहीं करता। लेकिन यूरोप खरीदता है, अमेरिका खरीदता है, इसलिए अगर आपको वह पसंद नहीं है, तो उसे न खरीदें।” जयशंकर ने अमेरिका के साथ संबंधों में भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद को दूसरा प्रमुख मुद्दा बताया। उन्होंने कहा, "दूसरे मुद्दे को एक तरह से तेल के मुद्दे के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। लेकिन...भारत को निशाना बनाने के लिए जिन तर्कों का इस्तेमाल किया गया है, वे सबसे बड़े तेल आयातक, चीन, सबसे बड़े एलएनजी आयातक, यूरोपीय संघ पर लागू नहीं किए गए हैं।" उन्होंने पूछा, "जब लोग कहते हैं कि हम युद्ध के लिए धन मुहैया करा रहे हैं या (राष्ट्रपति व्लादिमीर) पुतिन के खजाने में पैसा डाल रहे हैं...तो रूस-यूरोपीय संघ का व्यापार भारत-रूस व्यापार से बड़ा है। तो क्या यूरोप पुतिन के खजाने में पैसा नहीं डाल रहा है?" विदेश मंत्री ने संकेत दिया कि भारत-पाकिस्तान संघर्ष पर वाशिंगटन का दावा, अमेरिका के साथ भारत का तीसरा मुद्दा है। उन्होंने कहा, "तीसरा मुद्दा हमारे अपने क्षेत्र से संबंधित है, जो मध्यस्थता का मुद्दा है। 1970 के दशक से, यानी 50 वर्षों से भी अधिक समय से, इस देश में राष्ट्रीय सहमति है कि हम पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों में मध्यस्थता स्वीकार नहीं करते हैं।" विदेश मंत्री ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव के मद्देनजर चीन के साथ भारत के रिश्ते बेहतर हो रहे हैं। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि एक बहुत ही अलग स्थिति के लिए हर चीज को एक साथ जोड़कर इस तरह की राय बनाने की कोशिश करना गलत विश्लेषण होगा।
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नयी दिल्ली. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को कहा कि उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया है और किसी भी राक्षसी ताकत से नहीं डरतीं। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के वार्षिक समारोह को संबोधित करते हुए गुप्ता ने अपने छात्र जीवन को याद किया और बताया कि किस तरह से इन अनुभवों ने उनकी राजनीतिक यात्रा को आकार दिया। निजी किस्से साझा करते हुए, गुप्ता ने कहा कि कॉलेज के दिन उनके जीवन के "सुनहरे अध्याय" हैं। उन्होंने श्रोताओं से कहा, "जब भी मैं विश्वविद्यालय परिसर में लौटती हूं, उम्र और पद का अंतर मिट जाता है, और मेरे छात्र जीवन के दिन एक बार फिर जीवंत हो उठते हैं।" मुख्यमंत्री ने बताया कि कैसे 1993 में एसआरसीसी में संस्थान के उच्च ‘कट-ऑफ' अंकों के कारण उन्हें प्रवेश नहीं मिल पाया था। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, "शायद मुझे यहां आने के लिए मुख्यमंत्री बनना पड़ा।" अपने छात्र जीवन के दिनों को याद करते हुए, गुप्ता ने कैंटीन की बातचीत, कक्षा में हंसी-मज़ाक, देर रात तक परीक्षा की तैयारियों और कमला नगर में दोस्तों के साथ लंबी सैर के बारे में बताया। उन्होंने कहा, "ये ऐसी यादें हैं जिन्हें मैं आज भी संजोकर रखती हूं और जो मुझे प्रेरित करती रहती हैं।" गुप्ता ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) की अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान एक कठिन दौर को भी याद किया, जब एक प्रदर्शन के दौरान हुई दुर्घटना में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं। उन्होंने कहा, "मैंने लगभग डेढ़ महीने तक दर्द और चुनौतियों का सामना किया। लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। मुझे तूफ़ानों से जूझने की आदत है...मैं किसी भी राक्षसी ताकत से डरने वाली नहीं हूं।" मुख्यमंत्री ने कहा, "विद्यार्थी जीवन में सीखे गए सबक आपको नेतृत्व करने, संवेदनशील बने रहने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने का साहस देते हैं।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की उपलब्धि की सराहना की और भविष्य में इस क्षेत्र में बढ़ते स्कोप के बारे में बताया। उन्होंने आज एक वीडियो सन्देश जारी किया। जारी संदेश में भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “अभी तीन दिन पहले ही मेरी ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से मुलाकात हुई। उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस सेंटर पर तिरंगा फहराकर हर भारतीय को गर्व से भर दिया। जब वो तिरंगा मुझे दिखा रहे थे, उस पल को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।पीएम मोदी ने कहा कि ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से हुई चर्चा से मैंने नए भारत के युवाओं के असीम हौसले और अनंत सपनों को देखा है। इन सपनों को आगे बढ़ाने के लिए हम भारत का ‘एस्ट्रोनॉट पुल’ तैयार करने जा रहे हैं। आज नेशनल स्पेस डे के मौके पर मैं भारत के युवाओं से देश के सपनों को उड़ान देने के लिए ‘एस्ट्रोनॉट पुल’ से जुड़ने के लिए आमंत्रित करता हूं।इसके साथ ही पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी इस दिवस की बधाई देते हुए लिखा, “राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! अंतरिक्ष में भारत की यात्रा हमारे दृढ़ संकल्प, नवाचार और सीमाओं को आगे बढ़ाने वाले हमारे वैज्ञानिकों की प्रतिभा को दर्शाती है।”वहीं, अपने वीडियो सन्देश में पीएम मोदी ने स्पेस सेक्टर में भारत की उभरती ताकत के बारे में बताया, और उन्होंने कहा, “अभी भारत ने इंटरनेशनल ओलंपियाड ऑफ एस्ट्रोनॉमी और एस्ट्रोफिजिक्स (आईओएए) की मेजबानी भी की। इस प्रतियोगिता में दुनिया के 60 से अधिक देशों से करीब 300 युवाओं ने हिस्सा लिया। इसमें भारत के युवाओं ने मेडल भी जीते, जो ओलंपियाड स्पेस सेक्टर में भारत की उभरती लीडरशिप का प्रतीक है।पीएम मोदी ने कहा, “मुझे खुशी है कि युवा साथियों में स्पेस के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए इसरो द्वारा ‘भारतीय अंतरिक्ष हैकथॉन और रोबोटिक्स चैलेंज’ जैसी पहल भी की है। मैं इन प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लेने वाले छात्रों और विजेताओं को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।”
उन्होंने कहा कि स्पेस सेक्टर में एक के बाद एक माइलस्टोन बनाना भारत और भारत के वैज्ञानिकों का स्वभाव बन गया है। दो साल पहले भारत पहला ऐसा देश बना, जिसने चंद्रमा के साउथ पोल पर पहुंचने का इतिहास रचा। हम स्पेस में डॉकिंग और अनडॉकिंग की क्षमता रखने वाले दुनिया के चौथे देश भी बन गए। -
तिरुवनंतपुरम. मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने बृहस्पतिवार को कहा कि केरल पूर्ण डिजिटल साक्षरता हासिल करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यहां सेंट्रल स्टेडियम में बृहस्पतिवार को आयोजित एक भव्य समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक बड़ी उपलब्धि है, जिस पर केरल के प्रत्येक व्यक्ति को गर्व होगा। उन्होंने कहा कि भारत में केवल 38 प्रतिशत परिवारों के पास ही डिजिटल साक्षरता है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में 14 से 65 वर्ष की आयु के लोगों को प्रशिक्षण के लिए विचार किया गया था, लेकिन बाद में सभी आयु वर्ग के लोगों को इसमें शामिल किया गया। एर्णाकुलम ज़िले के 104 वर्षीय अब्दुल्ला मौलवी डिजिटल साक्षरता हासिल करने वाले राज्य के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति बन गए और वह इस पहल में मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे। उद्घाटन के दौरान केरल के मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉल के ज़रिये उनसे बात की। विजयन ने कहा, ‘‘हम पूर्ण साक्षरता हासिल करने वाले पहले राज्य थे और अब हम पूर्ण डिजिटल साक्षरता हासिल करने वाले भी पहले राज्य हैं। हमने अप्रैल 1991 में पूर्ण साक्षरता हासिल की थी..।''
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लाहौर. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बृहस्पतिवार को एक यात्री बस और एंबुलेंस के बीच हुई टक्कर में चार बचावकर्मियों सहित छह लोगों की मौत हो गई और पांच घायल हो गए। यहां एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। यह दुर्घटना लाहौर से लगभग 400 किलोमीटर दूर रहीम यार खान जिले में हुई।
‘रेस्क्यू 1122' के प्रवक्ता के अनुसार, मोटरसाइकिल से टकराने से बचने की कोशिश में एक यात्री बस विपरीत दिशा से आ रही आपातकालीन सेवा की एंबुलेंस से टकरा गई। उन्होंने कहा, ‘‘चार बचावकर्मियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच घायलों को अस्पताल ले जाया गया, जहां दो की हालत गंभीर बताई गई है।'' पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने घटना पर दुख व्यक्त किया और शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। -
बुलंदशहर ((उप्र). बुलंदशहर जिले के सिकंदराबाद इलाके में बृहस्पतिवार को एक ट्रक ने एक मोटरसाइकिल को सामने से टक्कर मार दी जिससे दोपहिया वाहन पर सवार दो भाइयों की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि मृतकों की पहचान गौतमबुद्ध नगर जिले में दनकौर थाना क्षेत्र के मंडी श्याम नगर निवासी विशाल (21) और प्रियांशु (19) के रूप में हुई है। वे सिकंदराबाद स्थित नयी सब्जी मंडी जा रहे थे, तभी यह दुर्घटना हुई। उसने बताया कि ट्रक ने उनकी मोटरसाइकिल को सामने से टक्कर मार दी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उसने बताया कि घायलों को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने बताया कि दुर्घटना के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया।
अधिकारियों ने बताया कि ट्रक को जब्त कर लिया गया है।सिकंदराबाद के पुलिस क्षेत्राधिकारी भास्कर कुमार ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। -
जयपुर. राजनीतिक विश्लेषक एवं स्तंभकार रशीद किदवई ने बृहस्पतिवार को यहां कहा कि "भारतीय राजनीति में कभी भी कोई नीरस पल नहीं होता।" उन्होंने यहां प्रभा खेतान फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय राजनीतिक गलियारों से जुड़े अनेक किस्से श्रोताओं के साथ साझा किए। भारतीय राजनीति पर दशकों से लिख रहे किदवई ने देश के नेताओं के बारे में कई अनसुनी कहानियां साझा कीं और बताया कि बीते दशकों में राजनीतिक पत्रकारिता कैसे विकसित हुई है। किदवई ने एक विशेष प्रश्नोत्तरी खंड में हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि अब तक उनसे मिलने वाले "सबसे बातूनी नेता" शशि थरूर रहे हैं जबकि पी चिदंबरम ने उन्हें सबसे लंबे समय तक इंतजार कराया था। किदवई ने देश के प्रमुख नेताओं के बारे में बात करते हुए कहा कि "राजनीति की असली कहानियां अक्सर उसके साये में छिपी होती हैं।" कार्यक्रम की शुरुआत आईटीसी राजपूताना के महाप्रबंधक दीपेंद्र राणा के स्वागत भाषण से हुई।
इस कार्यक्रम का संचालन फाउंडेशन की मानद संयोजक अपरा कुच्छल ने किया।प्रश्नोत्तर सत्र के बाद प्रमोद शर्मा ने किदवई को स्मृति चिह्न भेंट किया।कोलकाता स्थित गैर लाभकारी संस्था प्रभा खेतान फाउंडेशन देश-विदेश में सांस्कृतिक और साहित्यिक संवादों का आयोजन करती रही है।












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