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नई दिल्ली। श्रीराम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मार्च में अयोध्या आकर भगवान राम के दर्शन और पूजा कर सकती हैं। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मिश्रा ने संकेत दिया कि राष्ट्रपति ने अनौपचारिक रूप से इस दौरे के लिए अपनी सहमति दे दी है।
नृपेंद्र मिश्रा ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों ने हाल ही में राष्ट्रपति से मुलाकात की थी और उन्हें अयोध्या आने का औपचारिक निमंत्रण दिया था। नृपेंद्र मिश्रा ने कहा, “ट्रस्ट के सदस्यों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की और उन्हें अयोध्या आकर भगवान के दर्शन करने के लिए निमंत्रण दिया। हमें उम्मीद है कि वह अपने शेड्यूल में, शायद मार्च में, कोई तारीख तय कर पाएंगी। हालांकि हमें कोई फॉर्मल जानकारी नहीं मिली है, लेकिन अनौपचारिक रूप से हमें पता चला है कि वह मान गई हैं।”श्री राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन ने कहा कि रामायण से जुड़ी पुरानी पांडुलिपियों के बारे में भी जानकारी दी, जिन्हें मंदिर परिसर में रखा जाएगा। नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने ट्रस्ट को एक दुर्लभ 400 साल पुरानी पांडुलिपि गिफ्ट की है, जिसमें वाल्मीकि की बातें पुरानी संस्कृत लिपि में लिखी हुई हैं। यह पांडुलिपि पहले राष्ट्रपति भवन म्यूजियम को दी गई थी, लेकिन यह जानने के बाद कि अयोध्या मंदिर की दूसरी मंजिल पर रामायण से जुड़े साहित्य के लिए एक खास जगह होगी, यूनिवर्सिटी ने ट्रस्ट के रिक्वेस्ट पर पांडुलिपि को हमेशा के लिए गिफ्ट करने का फैसला किया।उन्होंने कहा कि ट्रस्ट मंदिर परिसर में अलग-अलग भारतीय भाषाओं में प्राचीन रामायण और वाल्मीकि अनुवादों को संरक्षित और सुरक्षित रखने की योजना बना रहा है, जिससे यह धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का एक प्रमुख केंद्र बन जाएगा। राम मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा समारोह 22 जनवरी, 2024 को लगभग 7,000 मेहमानों की मौजूदगी में हुआ। इस समारोह में आध्यात्मिक नेता, प्रमुख कारोबारी हस्तियां, खिलाड़ी और फिल्मी हस्तियां शामिल हुईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जिसे देश और विदेश में व्यापक ध्यान मिला।उन्होंने कहा कि उद्घाटन के बाद मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। प्राण प्रतिष्ठा के अगले दिन लगभग 3 लाख भक्त भगवान राम के पांच साल के रूप को दर्शाने वाली राम लला की नई स्थापित मूर्ति के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे, जबकि इतनी ही संख्या में लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। -
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आदेश दिया है कि देश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक पढ़ने वाली लड़कियों को मुफ्त सैनेटरी पैड उपलब्ध कराए जाएं। यह फैसला मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद आया है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह केवल सुविधा नहीं, बल्कि छात्राओं का अधिकार है कि उन्हें सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक माहौल मिले। कोर्ट ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे अलग-अलग जेंडर के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था करें और वहां पूरी प्राइवेसी सुनिश्चित करें। साथ ही, दिव्यांग छात्रों के अधिकारों का भी पूरा ध्यान रखा जाए।अदालत ने यह भी कहा है कि स्कूलों के टॉयलेट के अंदर मुफ्त बायोडिग्रेडेबल सैनेटरी पैड उपलब्ध होने चाहिए। ये पैड मशीनों के माध्यम से या स्कूल परिसर में तय किए गए जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा छात्राओं को दिए जाएं ताकि किसी तरह की झिझक या परेशानी न हो।इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने सभी स्कूलों में ‘मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन कॉर्नर’ बनाने का निर्देश दिया है। इन कॉर्नर में मासिक धर्म से जुड़ी सभी जरूरी चीजें और जानकारी उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि छात्राएं खुद को सुरक्षित और जागरूक महसूस कर सकें।अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे तीन महीने के भीतर रिपोर्ट दें और बताएं कि इस फैसले को जमीन पर कैसे लागू किया गया है। साथ ही, कोर्ट ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय स्तर पर एक नीति बनाने को भी कहा है ताकि देशभर में एक समान व्यवस्था लागू हो सके।दरअसल, यह याचिका मध्य प्रदेश की सामाजिक कार्यकर्ता जया ठाकुर ने दायर की थी। उन्होंने मांग की थी कि स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों को मुफ्त सैनेटरी पैड और अन्य मेंस्ट्रूअल प्रोडक्ट उपलब्ध कराए जाएं ताकि किसी भी छात्रा की पढ़ाई सिर्फ इस वजह से न रुके।सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह भी कहा कि वे मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर अपने-अपने स्तर पर जो योजनाएं और फंड से चलने वाली नीतियां हैं, उनकी जानकारी केंद्र सरकार को दें। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गणतंत्र दिवस परेड तथा बीटिंग रिट्रीट समारोह 2026 में भाग लेने वाले तीनों सेनाओं के बैंड टुकड़ियों और तीनों सेनाओं के प्रोवोस्ट आउट्राइडर्स के कर्मियों से मुलाकात की।
शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति ने भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के बैंड तथा प्रोवोस्ट आउट्राइडर्स के अधिकारियों और जवानों के साथ ग्रुप फोटोग्राफ भी खिंचवाया। गणतंत्र दिवस परेड और बीटिंग रिट्रीट समारोहों में इन टुकड़ियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।उल्लेखनीय है कि त्रि-सेवा बैंड और प्रोवोस्ट आउट्राइडर्स गणतंत्र दिवस और उसके समापन अवसर पर आयोजित बीटिंग रिट्रीट समारोह की औपचारिक और पारंपरिक गरिमा को बनाए रखने में अहम योगदान देते हैं। गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित इन समारोहों में सशस्त्र बलों की अनुशासनबद्ध प्रस्तुतियां और परंपरागत सैन्य परिधान विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।गौरतलब है कि इस वर्ष 26 जनवरी को आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में देश की मजबूत होती स्वदेशी सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और जन भागीदारी का अद्भुत संगम देखने को मिला। कर्तव्य पथ पर तीनों सेनाओं और पुलिस बलों द्वारा भव्य परेड का आयोजन किया गया, जिसका नेतृत्व राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया। इस अवसर पर यूरोपीय यूनियन के दो वरिष्ठ नेता एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे।इस साल के गणतंत्र दिवस समारोह में ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल, देश की विकास यात्रा, स्वदेशी सैन्य उपकरणों, सशस्त्र बलों की ताकत, भारत की सांस्कृतिक विरासत और आम लोगों की भागीदारी को एक साथ प्रदर्शित किया गया। इसके उपरांत गुरुवार शाम को बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी का आयोजन हुआ।बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के साथ 77वें गणतंत्र दिवस समारोह का भव्य समापन हुआ। राष्ट्रपति भवन के सामने विजय चौक भारतीय धुनों और देशभक्ति के संगीत से गूंज उठा। इस दौरान सैन्य बैंड द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की शक्ति को दर्शाया गया, वहीं मार्चिंग के माध्यम से ड्यूटी पर तैनात भारतीय सेना के जवानों के अनुशासन और समर्पण को भी प्रस्तुत किया गया।विजय चौक पर आयोजित इस भव्य समारोह में भारतीय सेना, भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बैंडों ने देशभक्ति से ओत-प्रोत धुनें प्रस्तुत कर माहौल को भावुक और गर्वपूर्ण बना दिया। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित गांधी स्मृति में आयोजित प्रार्थना सभा में भाग लिया। महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर आयोजित इस सभा में प्रधानमंत्री ने बापू के जीवन और विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि उनका जीवन आज भी लाखों लोगों के लिए आशा और प्रेरणा का स्रोत है।
प्रार्थना सभा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गांधी स्मृति की तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने लिखा कि उन्होंने गांधी स्मृति में आयोजित प्रार्थना सभा में भाग लिया और बापू के आदर्शों को नमन किया।प्रधानमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी के प्रयासों ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा बदल दी। उनके विचारों और कार्यों ने न केवल आज़ादी की लड़ाई को नैतिक आधार दिया, बल्कि भारत की विकास यात्रा पर भी एक अमिट छाप छोड़ी है, जिसका प्रभाव पीढ़ियों तक महसूस किया जाता रहेगा।प्रधानमंत्री मोदी ने राजघाट पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके शाश्वत आदर्श हमारे राष्ट्र के मार्गदर्शक बने रहेंगे। उन्होंने न्याय, सद्भाव और मानवता की सेवा पर आधारित भारत के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।प्रधानमंत्री ने कहा कि पूज्य बापू ने मानवता की रक्षा के लिए हमेशा अहिंसा पर बल दिया। अहिंसा वह शक्ति है, जो बिना हथियार के भी दुनिया को बदल सकती है। उन्होंने अहिंसा पर आधारित श्लोकों का उल्लेख करते हुए बापू के विचारों की प्रासंगिकता पर जोर दिया।राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के जीपीओ पार्क में स्थापित गांधी जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर श्रद्धा और सम्मान के वातावरण में कार्यक्रम आयोजित किया गया। -
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित आनंदपुर इलाके में हुए भीषण अग्निकांड पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख जताया है। प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की भी घोषणा की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पश्चिम बंगाल के आनंदपुर में हुआ हालिया अग्निकांड अत्यंत दुखद और दर्दनाक है। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदना है। मैं प्रार्थना करता हूं कि घायल जल्द से जल्द स्वस्थ हों। नरेंद्र मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी, जबकि घायलों को 50,000 रुपए की सहायता प्रदान की जाएगी।बताया गया है कि आनंदपुर अग्निकांड में एक और व्यक्ति की मौत के बाद मृतकों की कुल संख्या 25 हो गई है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिससे मरने वालों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।जानकारी के मुताबिक, 26 जनवरी की सुबह आनंदपुर इलाके में एक गोदाम के भीतर आग लग गई थी। उस समय गोदाम के अंदर सो रहे कई मजदूर आग की चपेट में आ गए थे। राज्य अग्निशमन सेवा विभाग और फोरेंसिक टीम की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया है कि आग ‘वाओ मोमो’ फैक्ट्री से नहीं, बल्कि पास स्थित पुष्पांजलि डेकोरेटर के गोदाम से लगी थी।हालांकि, घटना के बाद गिरफ्तार किए गए पुष्पांजलि गोदाम के मालिक गंगाधर दास ने दावा किया है कि आग सबसे पहले मोमो फैक्ट्री से फैली थी। फिलहाल, आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच जारी है।राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने आनंदपुर अग्निकांड पर स्वत: संज्ञान लेते हुए संबंधित जिला मजिस्ट्रेट को जल्द से जल्द कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। एनएचआरसी ने वाओ मोमो फैक्ट्री में गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों से जुड़ी शिकायत मिलने के बाद इस मामले में हस्तक्षेप किया है। - नई दिल्ली। भारत में दुनिया का सबसे बड़ा अकाउंटिंग सम्मेलन शुरू हो गया है। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर में आयोजित इस मेगा इवेंट में 40 से अधिक देशों के 10,000 से ज्यादा डेलीगेट्स हिस्सा ले रहे हैं। तीन दिन तक चलने वाला यह आयोजन अकाउंटिंग, फाइनेंस और ग्लोबल इकोनॉमी से जुड़े मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय विमर्श का बड़ा मंच बनकर उभरा है।द इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) की ओर से आयोजित वर्ल्ड फोरम ऑफ अकाउंटेंट्स 2.0 (वोफा 2.0) का शुभारंभ शुक्रवार को हुआ। पहले दिन केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सम्मेलन को संबोधित किया और भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की वैश्विक भूमिका, आर्थिक विकास में उनके योगदान और बदलते वैश्विक परिदृश्य में लेखा पेशे की बढ़ती प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।इस तीन दिवसीय अकाउंटिंग महाकुंभ में 200 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वक्ता करीब 50 तकनीकी और विषयगत सत्रों में भाग ले रहे हैं। इन सत्रों में अकाउंटिंग, फाइनेंस, टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टैक्सेशन, कैपिटल मार्केट, स्टार्टअप्स, एमएसएमई, सस्टेनेबिलिटी और गवर्नेंस जैसे अहम विषयों पर गहन चर्चा की जा रही है।वोफा 2.0 की थीम “नेशन बिल्डिंग से ग्लोबल कोलैबोरेशन: ट्रस्ट को मजबूत करना, ग्रोथ को आगे बढ़ाना” रखी गई है। यह थीम भारत के अकाउंटिंग प्रोफेशन की देश निर्माण में भूमिका और वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है। सम्मेलन में नीति-निर्माता, रेगुलेटर्स, उद्योग जगत के नेता, कॉरपोरेट एक्सपर्ट्स और फाइनेंस प्रोफेशनल्स एक साथ मंच साझा कर रहे हैं।इस सम्मेलन में केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और शीर्ष अधिकारी मौजूद रहेंगे। इनमें केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, पीयूष गोयल, अर्जुन राम मेघवाल, राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर, प्रतापराव जाधव और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक संजय के. मूर्ति सहित कई प्रमुख हस्तियां शामिल हैं।आईसीएआई के अध्यक्ष सीए चरणजोत सिंह नंदा ने कहा कि वोफा 2.0 को बेहद सोच-समझकर डिजाइन किया गया है। इसमें 50 से अधिक सत्र, 200 से ज्यादा वक्ता और लगभग 100 एग्जिबिटर्स हिस्सा ले रहे हैं, जो नए आइडियाज, इनोवेटिव सॉल्यूशंस और बेस्ट प्रैक्टिसेज पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों से आए डेलीगेट्स की भागीदारी भारत को एक भरोसेमंद ग्लोबल नॉलेज हब के रूप में स्थापित करती है।वोफा 2.0 में भारत की आर्थिक विकास यात्रा, डिजिटल इंडिया, गवर्नेंस सुधार, स्वदेशी विकास, सस्टेनेबिलिटी और इंडिया @ 2047 जैसे भविष्य से जुड़े विषयों पर भी विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। यह मंच अकाउंटिंग प्रोफेशन को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनकी 78वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने कहा कि बापू के आदर्श हमें एक विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा पोस्टप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनकी पुण्यतिथि पर मेरा शत-शत नमन। पूज्य बापू का हमेशा स्वदेशी पर बल रहा, जो विकसित और आत्मनिर्भर भारत के हमारे संकल्प का भी आधारस्तंभ है। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व देशवासियों को कर्तव्य पथ पर चलने के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा।”उन्होंने आगे लिखा कि पूज्य बापू ने मानवता की रक्षा के लिए हमेशा अहिंसा पर बल दिया। इसमें वह शक्ति है जो बिना हथियार के दुनिया को बदल सकती है। ‘अहिंसा परमो धर्मस्तथाऽहिंसा परन्तपः। अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्मः प्रवर्तते।’ अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है, अहिंसा ही सबसे बड़ा तप है और अहिंसा ही परम सत्य है, जिससे धर्म की स्थापना होती है।केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत्-शत् नमन। सत्य, अहिंसा और सद्भाव के उनके आदर्श आज भी भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व को मानवता का मार्ग दिखाते हैं। उनका जीवन हमें सेवा, समर्पण और नैतिक साहस की प्रेरणा देता रहेगा।”केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “अहिंसा परमो धर्म: के पथ प्रदर्शक, सत्य और करुणा के अग्रदूत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। पूज्य बापू ने स्वच्छता को स्वराज की आधारशिला माना- आइए, स्वच्छ भारत के संकल्प के साथ उनके सपनों के भारत के निर्माण का संकल्प लें।”मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। आपने सत्य, अहिंसा एवं एकता के संदेश से मानवता की सेवा का मार्ग दिखाया। आपका जीवन लोककल्याण के पावन ध्येय की प्राप्ति का अनुकरणीय अध्याय है।”उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “विश्व को सत्य, अहिंसा और सेवा का मार्ग दिखाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन। आपका जीवन त्याग, तपस्या और राष्ट्रसेवा का अमर संदेश है, जो हमें सदैव न्याय, समरसता और शांति के पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा देता रहेगा।” -
नयी दिल्ली. पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने वर्तमान समय में मोबाइल सिनेमा के महत्व का उल्लेख करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि यह उद्योग आधुनिक विज्ञान के साथ अध्यात्मिक ज्ञान भी लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है क्योंकि इसमें 'बॉक्स आफिस' की कोई बंदिश नहीं है। नकवी के कार्यालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने नोएडा में 'अंतरराष्ट्रीय सेल फोन सिनेमा फैस्टिवल' को संबोधित करते हुए कहा कि बाबा साहेब फाल्के की मूक फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' से शुरू हुए भारतीय सिनेमा के सफ़ल सफ़र का मोबाइल सिनेमा के प्रभावशाली पड़ाव पर पहुंचना, भारतीय कला की काबलियत का कमाल है।
उनका कहना था कि भारत की लगभग 80 प्रतिशत से ज्यादा स्मार्ट मोबाइल फोन उपयोगकर्ताओं वाली आबादी है और यह बात भारतीय सेल सिनेमा के लिए ''मौक़ा, मार्केट, माहौल'' और सफ़लता की संभावनाओं को प्रबल बनाती है।
पूर्व सूचना एवं प्रसारण मंत्री नकवी ने कहा, ''सेल फिल्म उद्योग आधुनिक विज्ञान के साथ अध्यात्मिक ज्ञान भी लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता हैं, यहां फिलहाल किसी बॉक्स आफिस और प्रायोजित प्रोग्राम की बंदिश नहीं है।'' -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत द्वारा परमाणु क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने के निर्णय से 2047 तक आण्विक ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने और स्थिर एवं शून्य-कार्बन आधारित बिजली उपलब्ध होने की उम्मीद है। मिश्रा यहां आईआरएडीई में 'सतत ऊर्जा संक्रमण - वैश्विक परिप्रेक्ष्य' विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, ''भारत ने हाल ही में किए गए विधायी प्रयासों के माध्यम से निजी भागीदारी के लिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को खोलकर एक ऐतिहासिक सुधार किया है। इससे 2047 तक परमाणु क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने और स्थिर, शून्य-कार्बन आधारित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होने की उम्मीद है।'' मिश्रा ने कहा कि ये ऊर्जा स्रोत में बदलाव को सीधे ऊर्जा सुरक्षा और आयात में कमी के साथ जोड़ते हैं, जिससे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ती है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा भारत के विकसित भारत के दृष्टिकोण में निहित है और विकास, प्रतिस्पर्धा, सामाजिक समावेश और ऊर्जा सुरक्षा के लिए केंद्रीय महत्व रखती है।
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नयी दिल्ली. सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि पिछले एक वर्ष के दौरान देशभर में आयोजित 18,000 से अधिक रोजगार मेलों के माध्यम से कुल 2.22 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने राज्यसभा को प्रश्नकाल के दौरान यह जानकारी दी। पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्होंने बताया कि देश में रोजगार सृजन बढ़ रहा है और बेरोजगारी दर घटकर 3.2 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने बताया कि रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने एकीकृत मंच के रूप में राष्ट्रीय करियर सेवा (एनसीएस) पोर्टल की स्थापना की है। मांडविया ने कहा, "पिछले एक वर्ष में देशभर में 18,000 रोजगार मेले आयोजित किए गए और इस अवधि में कुल 2.22 करोड़ लोगों को रोजगार मिला।" उन्होंने कहा कि बीते एक दशक में एनसीएस पोर्टल को मजबूत किया गया है और वर्तमान में इससे 55 लाख कंपनियां जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि सभी राज्य सरकारों के रोजगार मंच भी इस पोर्टल से जोड़े गए हैं। पिछले 10 वर्षों में रोजगार तलाशने वाले छह करोड़ से अधिक युवाओं ने इस पोर्टल पर पंजीकरण कराया है। उन्होंने कहा, "एनसीएस पोर्टल को ई-माइग्रेट पोर्टल, युवा-भारत और कौशल विकास मंचों से जोड़ा गया है, ताकि रोजगार के लिए एकल खिड़की व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सके।" मंत्री के अनुसार, बिहार में एनसीएस पोर्टल पर 53 लाख लोगों ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 39.8 लाख को चुन कर उनके लिए रोजगार के अवसर सृजित किए गए। उन्होंने बताया कि कुल 4.5 लाख युवाओं ने रोजगार मेलों में भाग लिया, जिनमें से 90,000 को चुना गया और केंद्र व राज्य स्तर की कंपनियों ने 43,000 लोगों को रोजगार दिया। अपने लिखित उत्तर में मंत्री ने बताया कि रोजगार मेला युवाओं के लिए रोजगार सृजन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की सरकार की प्रतिबद्धता को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि विभिन्न योजनाओं के तहत राज्य सरकारों, मंत्रालयों और विभागों द्वारा नियमित रूप से रोजगार मेले आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य स्थानीय नियोक्ताओं और रोजगार चाहने वालों के बीच संपर्क स्थापित करना है। मंत्री ने बताया कि 20 जनवरी 2026 तक बिहार में एनसीएस परियोजना के तहत 3,280 रोजगार मेले आयोजित किए गए, जिनमें 8,492 नियोक्ताओं ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि एनसीएस पोर्टल पर अंतिम नियुक्ति आंकड़ों की सूचना देना अनिवार्य नहीं है। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में मांडविया ने बताया कि आरबीआई आंकड़ों के अनुसार, केंद्र सरकार ने पिछले एक दशक में 17 करोड़ रोजगार उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने कहा कि 2004-14 के दौरान जहां रोजगार के अवसर 44.23 करोड़ से बढ़कर 47.15 करोड़ हुए, वहीं 2024 के आंकड़ों के अनुसार देश में 64.33 करोड़ रोजगार अवसर उपलब्ध कराए गए। मंत्री ने कहा, "भारत में बेरोजगारी दर 3.2 प्रतिशत है, जो विकसित देशों से भी कम है।"
''गिग'' श्रमिकों से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि यह रोजगार का एक नया स्वरूप है और एक अनुमान के मुताबिक, देश में करीब दो करोड़ ''गिग वर्कर'' कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि नयी श्रम संहिता (लेबर कोड) से उनकी सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी। ''गिग वर्कर'' उन श्रमिकों को कहा जाता है जिनका काम अस्थायी होता है। -
नयी दिल्ली। दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) ने बृहस्पतिवार को अखिल भारतीय सहयोगी अनुसंधान संघ की स्थापना के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने हेतु सभी एम्स संस्थानों के निदेशकों की एक बैठक की मेजबानी की। आधिकारिक बयान के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के अनुरूप समन्वित जैव चिकित्सा एवं नैदानिक अनुसंधान को सुदृढ़ करना है। समझौता ज्ञापन (एमओयू) देश भर के 20 एम्स संस्थानों के बीच सहयोग के लिए एक संरचित ढांचा प्रदान करता है। यह संघ संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, बहु-संस्थागत अध्ययनों, नैदानिक परीक्षणों और शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान को सुगम बनाएगा। इसका उद्देश्य ज्ञान और सर्वोत्तम प्रथाओं का व्यवस्थित आदान-प्रदान सुनिश्चित करना भी है। भाग लेने वाले संस्थानों में एम्स दिल्ली, बठिंडा, भोपाल, भुवनेश्वर, बीबीनगर, बिलासपुर, देवघर, गोरखपुर, गुवाहाटी, जम्मू, जोधपुर, कल्याणी, मदुरै, मंगलगिरी, नागपुर, पटना, रायबरेली, रायपुर, राजकोट और ऋषिकेश शामिल हैं। बयान में कहा गया है कि इस संघ को एक राष्ट्रीय अनुसंधान नेटवर्क के रूप में परिकल्पित किया गया है जो प्राथमिकता वाली स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करने के लिए एम्स प्रणाली की संयुक्त नैदानिक विशेषज्ञता, बुनियादी ढांचे और रोगी आधार का लाभ उठाएगा। बैठक के दौरान, अधिकारियों ने राष्ट्रीय अनुसंधान प्राथमिकताओं को निर्धारित करने और बहु-केंद्रित नैदानिक परीक्षणों को मजबूत करने पर चर्चा की। ध्यान दिए जाने वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, किफायती कैंसर उपचार, स्वास्थ्य संबंधी संक्रमण और चयापचय संबंधी विकार जैसे क्षेत्र शामिल हैं। दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास ने कहा कि इस सहयोगी अनुसंधान संघ की स्थापना उच्च गुणवत्ता वाले, राष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा, "भारत भर में एम्स संस्थानों की शक्तियों को एक साथ लाकर, हमारा उद्देश्य ठोस वैज्ञानिक प्रमाण जुटाना, नवाचार को बढ़ावा देना और स्वास्थ्य सेवा में सोच-समझकर निर्णय लेने में सहायता करना है। यह मंच आने वाले वर्षों में सहयोगात्मक अनुसंधान के एक प्रमुख प्रेरक के रूप में विकसित होता रहेगा।
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नयी दिल्ली. सरकार ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा को बताया कि भारत में प्रति 10 लाख आबादी पर करीब 22 न्यायाधीश हैं। विधि आयोग ने 1987 में अपनी 120वीं रिपोर्ट में प्रति 10 लाख जनसंख्या पर 50 न्यायाधीशों का अनुपात रखने की सिफारिश की थी। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि वर्तमान में, देश में न्यायाधीशों का अनुपात प्रति दस लाख जनसंख्या पर लगभग 22 न्यायाधीश है। उन्होंने कहा, ''किसी खास वर्ष में प्रति दस लाख जनसंख्या पर न्यायाधीशों के अनुपात की गणना करने के लिए, विधि एवं न्याय मंत्रालय 2011 की जनगणना के आंकड़ों और वर्ष 2026 में उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालयों और जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या के आधार पर मानदंड का उपयोग करता है।'' मेघवाल ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में देश में विचाराधीन कैदियों की संख्या 3,89,910 थी। मेघवाल ने कहा कि मामलों का निपटारा न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है। अदालतों में मामलों के लंबित रहने के कई कारण हैं, जिनमें तथ्यों की जटिलता, साक्ष्य की प्रकृति, हितधारकों (बार, जांच एजेंसियां, गवाह और वादी) का सहयोग, भौतिक बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों की उपलब्धता आदि शामिल हैं।
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श्री विजय पुरम. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत 'लाभार्थियों के उपचार' श्रेणी में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को सर्वश्रेष्ठ केंद्र शासित प्रदेश का पुरस्कार दिया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। यह पुरस्कार एबी-पीएमजेएवाई योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के सम्मान स्वरूप प्रदान किया गया।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के मुख्य सचिव चंद्र भूषण कुमार ने कहा, "मैं एबी-पीएमजेएवाई के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूरी टीम की सराहना करता हूं। इस तरह का सम्मान जनसेवा करते समय टीम को हमेशा प्रोत्साहित करता है।" इस केंद्र शासित प्रदेश में एबी-पीएमजेएवाई के 83,538 लाभार्थी हैं जिनमें 41,450 महिलाएं हैं।
हाल ही में पुरस्कार प्राप्त करने वाले नोडल अधिकारी डॉ. पी लाल ने कहा, "द्वीपों के बाहर उपचार करा रहे लाभार्थियों को होने वाली कठिनाइयों को कम करने के लिए केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन ने राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) के माध्यम से एबी-पीएमजेएवाई के तहत एक संरचित परिवहन और वेतन हानि प्रतिपूर्ति प्रणाली लागू की है।" उन्होंने ने बताया कि जब भी किसी मरीज को दूसरे अस्पताल भेजा गया तो उन्हें आने-जाने के लिए 40,000 रुपये तक की मदद दी गई। साथ ही, काम न कर पाने के नुकसान की भरपाई के लिए उन्हें हर दिन 1,000 रुपये (अधिकतम 20 दिनों तक) दिए गए। इस पूरे खर्च का भुगतान केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के फंड से किया गया। एबी-पीएमजेएवाई केंद्र सरकार की एक प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना है। यह योजना प्रति वर्ष हर एक परिवार को पांच लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार प्रदान करती है। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को कहा कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन से राज्य की राजनीति में ऐसा शून्य उत्पन्न हो गया है, जिसे जल्द भर पाना संभव नहीं होगा। शाह ने बारामती में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख अजित पवार (66) के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पवार को लोकप्रिय रूप से 'दादा' (बड़े भाई) के नाम से जाना जाता था। पवार और चार अन्य लोगों की बुधवार को एक चार्टर्ड विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। पवार का आज पूरे राजकीय सम्मान के साथ विद्या प्रतिष्ठान कॉलेज के मैदान में अंतिम संस्कार किया गया। यह कॉलेज पवार परिवार द्वारा स्थापित किया गया है। सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में शाह ने कहा, "अजित पवार जी के अंतिम दर्शन कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। समाज और जनता के लिए समर्पित अजित पवार जी के असामयिक निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसी शून्यता उत्पन्न हुई है, जिसकी भरपाई लंबे समय तक संभव नहीं होगी।" यह दुर्घटना बारामती हवाई अड्डे के पास उस समय हुई जब विमान लैंडिंग का प्रयास कर रहा था।
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नयी दिल्ली. देश की आर्थिक वृद्धि दर अगले वित्त वर्ष में 6.8 से 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इससे साफ है कि व्यापार जोखिम और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। संसद में बृहस्पतिवार को पेश आर्थिक समीक्षा में यह कहा गया। हालांकि, अप्रैल से शुरू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए यह अनुमान मौजूदा वित्त वर्ष के 7.4 प्रतिशत के अनुमान से कम है। इसका मुख्य कारण उपभोग और निवेश में कमी है। देश की आर्थिक स्थिति को बयां करने वाली 2025-26 की समीक्षा में कहा गया, ''हाल के वर्षों में नीतिगत सुधारों के प्रभाव से अर्थव्यवस्था की मध्यम अवधि की वृद्धि क्षमता 6.5 से 6.8 प्रतिशत से बढ़कर सात प्रतिशत के करीब पहुंच गई है।'' ''यही कारण है कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच मजबूत वृद्धि का दृष्टिकोण बना हुआ है और इसके लिए सावधानी बरतने की आवश्यकता है, लेकिन निराशावादी होने की जरूरत नहीं है।'' चालू वर्ष के लिए 7.4 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान पिछले वर्ष की समीक्षा में अनुमानित 6.3 से 6.8 प्रतिशत की तुलना में अधिक है। लेकिन अगले वर्ष के लिए अनुमान से साफ है कि अमेरिका के साथ व्यापार तनाव के बावजूद भारत दुनिया में सबसे तेज आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने वाला देश बना रहेगा। भारत उन कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है जिसने अभी तक अमेरिका के साथ व्यापार समझौता नहीं किया है। अमेरिका ने भारत से निर्यात होने वाले सामान पर 50 प्रतिशत का उच्चतम शुल्क लगाया है। श्रम-प्रधान क्षेत्रों को प्रभावित करने वाले शुल्क के जवाब में, नरेन्द्र मोदी सरकार ने नीति और कर सुधारों की शुरुआत की है। इनमें जीएसटी दरों में कटौती, आयकर सीमा को बढ़ाना, कंपनियों पर अनुपालन बोझ कम करने के लिए श्रम कानूनों में संशोधन और मई, 2025 के बाद से चार मुक्त व्यापार समझौते शामिल हैं। इनमें यूरोपीय संघ के साथ एक बड़ा समझौता भी शामिल है। हालांकि महंगाई कम है, कंपनियों और परिवारों की बही-खाते बेहतर है और उपभोग मांग मजबूत बनी हुई है, पर अमेरिकी शुल्क के कारण रुपये में पिछले साल लगभग पांच प्रतिशत की गिरावट आई है और अब यह अपनी क्षमता से निचले स्तर पर है। समीक्षा में कहा गया, ''रुपये का मूल्यांकन भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद को सही रूप से प्रतिबिंबित नहीं करता है। हालांकि, रुपये के मूल्य में गिरावट 'भारतीय वस्तुओं पर उच्च अमेरिकी शुल्क के प्रभाव को कुछ हद तक कम करती है।' हालांकि, इसमें कहा गया है कि वृहद आर्थिक परिस्थितियां 'बाह्य झटकों' के प्रति मजबूती प्रदान करती हैं और वृद्धि की गति को बनाए रखने में सहायक हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का अनुमान है कि यदि उच्च शुल्क लागू रहता हैं तो आगामी वित्त वर्ष में 6.2 प्रतिशत की वृद्धि होगी। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन द्वारा तैयार आर्थिक समीक्षा में कहा गया, ''अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ता इस वर्ष समाप्त होने की उम्मीद है। इससे बाहरी मोर्चे पर अनिश्चितता कम करने में मदद मिल सकती है।'' समीक्षा में वैश्विक व्यापार और अन्य चुनौतियों से निपटने के लिए सुझाए गए उपायों में से एक 'स्वदेशी' है, जिसे अनुशासित रणनीति के रूप में लागू करने की बात कही गयी है। इसमें कहा गया है कि हालांकि सभी आयात प्रतिस्थापन न तो व्यावहारिक हैं और न ही वांछनीय, लेकिन विकसित देशों द्वारा निर्यात नियंत्रण और प्रौद्योगिकी पर पाबंदियों के मद्देनजर स्वदेशी अपरिहार्य और आवश्यक है। समीक्षा में 'कच्चे माल की लागत में कमी के लिए राष्ट्रीय रणनीति' का आह्वान किया गया है।
राजस्व के दृष्टिकोण से, चालू वित्त वर्ष 2025-26 में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर संग्रह दोनों ही मजबूत बने हुए हैं। विशेष रूप से गैर-कंपनी कर संग्रह (जिसमें व्यक्तिगत कर संग्रह शामिल है) की वृद्धि अन्य करों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से तेजी से हो रही है। यह स्पष्ट रूप से कर संग्रह के विभिन्न श्रेणियों, प्रशासनिक सुधारों और यहां तक कि भविष्य के कर सुधारों की सफलता को बताता है। समीक्षा में नए आयकर कानून के महत्व के बारे में भी बताया गया है, जो एक अप्रैल से प्रभावी होने वाला है। इसका उद्देश्य करदाताओं के लिए सरलता और संरचनात्मक स्पष्टता प्रदान करना तथा स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के एक फरवरी को 2026-27 का बजट पेश करने से पहले जारी समीक्षा में विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में देश की निर्यात नीतियों में कमियों को उजागर किया गया है। समीक्षा में कहा गया है कि मूल्य के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कृषि उत्पादक देश चार वर्षों के भीतर कृषि, समुद्री और खाद्य एवं पेय पदार्थों के निर्यात में 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। साथ ही, इसमें चेतावनी दी गई है कि बार-बार नीतिगत बदलावों से आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान उत्पन्न होने, अनिश्चितता बढ़ने और विदेशी खरीदारों को वैकल्पिक स्रोतों की ओर जाने का खतरा है। इससे खोए हुए निर्यात बाजारों को फिर से प्राप्त करना मुश्किल होगा। इसमें पूंजी की लागत को कम करने और बैंकों के अलावा वित्तपोषण के स्रोतों में विविधता लाने के लिए कई कदम उठाने का भी आह्वान किया गया है। इसमें अन्य कदमों के साथ-साथ ऋण उत्पादों पर कर कम करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में 'डिजिटल लत' से निपटने के लिए सोशल मीडिया ऐप तक पहुंच पर आयु-आधारित सीमाएं निर्धारित करने का आह्वान किया गया है। साथ ही, कोविड-19 के दौरान विस्तारित ऑनलाइन शिक्षण उपकरणों पर निर्भरता को कम करने और ऑफलाइन गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इसमें बच्चों के लिए बेसिक फोन या ऑनलाइन सामग्रियों के नियमन के साथ केवल पठन-पाठन के लिए टैब जैसे उपकरणों को बढ़ावा देने का सुझाव भी दिया गया। समीक्षा में सभी मीडिया मंचों सुबह छह बजे से रात 11 बजे तक अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों (यूपीएफ) के विपणन पर प्रतिबंध लगाने और नवजात एवं छोटे बच्चों के दूध और पेय पदार्थों के विपणन पर प्रतिबंध लगाने की वकालत की गई। समीक्षा में स्विगी, जोमैटो जैसी कंपनियों में काम करने वाले अस्थायी कामगारों (गिग) के लिए काम की शर्तों को नया रूप देने वाली नीति का समर्थन किया गया है। साथ ही गोपनीय रिपोर्ट को छूट देने के लिए आरटीआई अधिनियम में संशोधन की भी बात कही गयी है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में कार्यरत सीईओ और विशेषज्ञों के साथ संवाद किया। इस बातचीत में भारत में एआई के भविष्य, नवाचार, नैतिकता और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में उठाए जा रहे कदमों पर विस्तार से चर्चा हुई।
फरवरी में प्रस्तावित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के मद्देनज़र आयोजित इस वार्ता का उद्देश्य रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देना, एआई नवाचारों को प्रोत्साहित करना और भारत के एआई मिशन को गति देना था। इस दौरान सीईओ और विशेषज्ञों ने एआई के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के भारत के लक्ष्य के प्रति पूर्ण समर्थन व्यक्त किया।नरेंद्र मोदी ने सभी क्षेत्रों में नई तकनीकों को अपनाने और उनके माध्यम से राष्ट्रीय विकास को गति देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने प्रमुख क्षेत्रों में स्वदेशी प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ाने का आह्वान किया और कहा कि तकनीक को देश की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जाना चाहिए।आगामी इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह मंच व्यक्तियों और कंपनियों के लिए नए अवसर तलाशने और तेज़ी से आगे बढ़ने का माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के ज़रिये भारत ने अपनी तकनीकी क्षमता दुनिया को दिखाई है और इसी मॉडल को एआई के क्षेत्र में भी दोहराया जा सकता है।प्रधानमंत्री मोदीने कहा कि भारत के पास विशालता, विविधता और लोकतंत्र का अनूठा संयोजन है, जिसके चलते दुनिया भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भरोसा करती है। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी तकनीक के ज़रिये न सिर्फ प्रभाव पैदा करना है, बल्कि दुनिया को प्रेरित भी करना है। प्रधानमंत्री ने विशेषज्ञों से भारत को वैश्विक एआई प्रयासों का केंद्र बनाने की अपील की।नरेंद्र मोदी ने डेटा सुरक्षा और प्रौद्योगिकी के लोकतंत्रीकरण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत को एक ऐसे एआई इकोसिस्टम की दिशा में काम करना चाहिए, जो पारदर्शी, निष्पक्ष और सुरक्षित हो। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एआई के नैतिक उपयोग पर किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए।प्रधानमंत्री ने एआई कौशल विकास और प्रतिभा निर्माण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भारत का एआई इकोसिस्टम देश के चरित्र, संस्कृति और मूल्यों को प्रतिबिंबित करना चाहिए, ताकि तकनीकी विकास मानव-केंद्रित और समावेशी बना रहे।इस उच्चस्तरीय गोलमेज बैठक में विप्रो, टीसीएस, एचसीएल टेक, जोहो कॉर्पोरेशन, एलटीआई माइंडट्री, जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड, अदाणी कॉनेक्स, एनएक्सट्रा डेटा और नेटवेब टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियों के सीईओ शामिल हुए। इसके अलावा आईआईआईटी हैदराबाद, आईआईटी मद्रास और आईआईटी बॉम्बे के विशेषज्ञों ने भी संवाद में हिस्सा लिया। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी बैठक में मौजूद रहे। ( -
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2026 पेश किया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत के रिफॉर्म की गति और चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बीच देश की निरंतर प्रगति की व्यापक तस्वीर बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की पोस्ट को साझा करते हुए कहा कि आज प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण भारत के रिफॉर्म की गति का एक व्यापक चित्र प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि यह सर्वेक्षण चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिवेश के बावजूद भारत की निरंतर प्रगति को दर्शाता है।नरेंद्र मोदी ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण मजबूत व्यापक आर्थिक आधारभूत सिद्धांतों, निरंतर विकास गति और राष्ट्र निर्माण में नवाचार, उद्यमिता और अवसंरचना की बढ़ती भूमिका को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज समावेशी विकास के महत्व पर विशेष बल देता है।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सर्वेक्षण में किसानों, लघु एवं मध्यम उद्यमों, युवा रोजगार और सामाजिक कल्याण पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके साथ ही यह विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने, उत्पादकता बढ़ाने और विकसित भारत बनने की दिशा में प्रगति को गति देने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप भी प्रस्तुत करता है।नरेंद्र मोदी ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण से प्राप्त अंतर्दृष्टि नीतिगत निर्णयों को दिशा देने में सहायक होगी और भारत के आर्थिक भविष्य को लेकर विश्वास को और मजबूत करेगी।इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के दौर में भारत दुनिया के लिए एक ‘ब्राइट स्पॉट’ के रूप में उभरकर सामने आया है और स्थिरता के साथ मजबूती से आगे बढ़ रहा है।वित्त मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत गति बनाए रखी है। प्रथम अग्रिम अनुमानों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4% रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि यह लगातार चौथा वर्ष होगा जब भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के व्यापक आर्थिक आधार पहले से कहीं अधिक मजबूत हुए हैं। सरकार ने वैश्विक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करते हुए देश को उच्च विकास पथ पर अग्रसर किया है। उन्होंने कहा कि सरकार विकास से समझौता किए बिना राजकोषीय समेकन के रास्ते पर आगे बढ़ रही है और वित्त वर्ष 26 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4.4% तय किया गया है। -
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2026 पेश किया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था की ताकत और स्थिरता का प्रमाण है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर वैश्विक आंकड़ों का हवाला देते हुए लिखा कि आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि भारत तमाम चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है।अमित शाह ने कहा कि जब पूरी दुनिया महामारी के बाद आर्थिक अस्थिरता की ओर बढ़ रही थी, उस दौर में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने सामूहिक प्रयासों से इन दोनों बड़ी चुनौतियों को सफलतापूर्वक पार किया।इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि संसद में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण भारत के रिफॉर्म की गति की एक व्यापक तस्वीर पेश करता है, जो चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बीच निरंतर प्रगति को दर्शाता है।प्रधानमंत्री ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण मजबूत व्यापक आर्थिक आधार, निरंतर विकास गति और राष्ट्र निर्माण में नवाचार, उद्यमिता एवं अवसंरचना की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण समावेशी विकास पर विशेष बल देता है, जिसमें किसानों, लघु एवं मध्यम उद्यमों, युवा रोजगार और सामाजिक कल्याण को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही यह विनिर्माण को मजबूत करने, उत्पादकता बढ़ाने और विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने का रोडमैप भी प्रस्तुत करता है।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण से प्राप्त अंतर्दृष्टियां नीति निर्माण को दिशा देंगी और भारत के आर्थिक भविष्य को लेकर विश्वास को और मजबूत करेंगी।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भी भारत दुनिया के लिए एक ‘ब्राइट स्पॉट’ बना हुआ है और स्थिरता के साथ आगे बढ़ रहा है।वित्त मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत गति बनाए रखी है। प्रथम अग्रिम अनुमानों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह लगातार चौथा वर्ष होगा, जब भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरेगा। -
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय और भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के बांग्लादेशी अधिकारियों के साथ समन्वय के तहत गुरुवार को बांग्लादेश में हिरासत में लिए गए 23 भारतीय मछुआरों और उनकी दो भारतीय मछली पकड़ने वाली नौकाओं (आईएफबी) को सफलतापूर्वक स्वदेश वापस लाया गया।
इन भारतीय मछुआरों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) पार कर बांग्लादेश के क्षेत्रीय जलक्षेत्र में मछली पकड़ने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। यह प्रक्रिया भारत और बांग्लादेश के बीच लागू आपसी प्रत्यावर्तन व्यवस्था का हिस्सा थी। इस पारस्परिक व्यवस्था के तहत भारत सरकार ने 128 बांग्लादेशी मछुआरों और उनकी पांच मछली पकड़ने वाली नौकाओं को भी रिहा किया। इन मछुआरों को भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में अवैध रूप से मछली पकड़ने के आरोप में भारतीय तटरक्षक बल ने पकड़ा था। बाद में विदेशी अधिनियम के तहत कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उनके प्रत्यावर्तन की कार्रवाई की गई। मछुआरों और नौकाओं का यह आदान-प्रदान गुरुवार तड़के बंगाल की खाड़ी में अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा पर संपन्न हुआ।भारतीय तटरक्षक बल के जहाज आईसीजीएस समुद्र प्रहरी और आईसीजीएस विजय ने समन्वित तरीके से बांग्लादेशी मछुआरों को बांग्लादेश तटरक्षक बल के जहाज कामरुज्ज़मान और सोनार बांग्ला को सौंपा। वहीं, आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारतीय मछुआरों को भारतीय तटरक्षक बल के हवाले किया गया।इसके बाद तटरक्षक बल के जहाज मछुआरों और उनकी नौकाओं के साथ पश्चिम बंगाल तट की ओर रवाना हो गए। प्रत्यावर्तित 23 भारतीय मछुआरों और उनकी नौकाओं को राज्य प्रशासन को सौंपा जाएगा, जो उनके सुरक्षित घर लौटने की व्यवस्था करेगा।रक्षा मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, मछुआरों और उनकी नौकाओं का यह आपसी आदान-प्रदान विदेश मंत्रालय के प्रयासों का परिणाम है। इसमें भारत की विस्तृत तटरेखा के साथ रहने वाले मछुआरा समुदायों की मानवीय और आजीविका संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखा गया है। बयान में कहा गया कि सफल प्रत्यावर्तन दोनों देशों की ओर से मछुआरों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने की सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है तथा साझा समुद्री क्षेत्रों में समुद्री सहयोग और मानवीय प्रयासों के महत्व को रेखांकित करता है।इस बीच भारतीय तटरक्षक बल के अधिकारियों ने मछुआरों को बेहतर पकड़ की तलाश में अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा पार न करने की सख्त चेतावनी दी है। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में मछुआरों को हिरासत, उनके परिवारों को आर्थिक संकट और प्रत्यावर्तन में लंबी देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।अधिकारियों ने बताया कि आधुनिक मछली पकड़ने वाली नौकाएं जीपीएस और अन्य उपकरणों से लैस होती हैं, जिससे चालक दल समुद्र में अपनी स्थिति पर नजर रख सकता है। नौकाओं में सैटेलाइट से जुड़े डिस्ट्रेस अलर्ट ट्रांसपोंडर (डीएटी) भी लगे होते हैं, जो सक्रिय रहने पर निगरानी में मदद करते हैं।हालांकि, कुछ मामलों में सीमा पार करने के इरादे से डीएटी को बंद कर दिया जाता है, जिससे नौकाओं की सटीक स्थिति का पता नहीं चल पाता। यह स्थिति विशेष रूप से बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती मौसम के दौरान गंभीर हो जाती है, जब नौकाएं और मछुआरे लापता होने का खतरा बढ़ जाता है। -
वेरावल/ गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में तेंदुए के हमले के बाद खुद को और अपने बेटे को बचाने के लिए 60 वर्षीय किसान ने हंसिया और बरछी से उस जंगली जानवर को मार डाला। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। हमले के बाद किसान बाबू वाजा और उनके बेटे को अस्पताल में भर्ती कराया गया, वहीं वन अधिकारियों ने उनके खिलाफ तेंदुए को मारने का मामला दर्ज किया है। यह घटना बुधवार रात उस समय घटी, जब वाजा जिला मुख्यालय वेरावल से लगभग 100 किलोमीटर दूर गंगदा गांव के बाहरी इलाके में स्थित अपने घर के बरामदे में आराम कर रहे थे। रेंज वन अधिकारी एल बी भरवाड ने बताया कि पास के खेतों से एक तेंदुआ निकला और बिना किसी उकसावे के वाजा पर कूद पड़ा। वाजा के अनुसार, तेंदुए ने उनकी बांह पकड़ ली और खींचने लगा।
वाजा ने ऊना कस्बे के एक अस्पताल में पत्रकारों को बताया, "मेरी चीखें सुनकर मेरा बेटा शार्दुल मुझे बचाने के लिए दौड़ा। लेकिन तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया और उसे घायल कर दिया। जब मैंने शार्दुल को बचाने की कोशिश की, तो तेंदुए ने मुझ पर फिर से हमला कर दिया। उन कुछ मिनटों में उसने हम पर कई बार हमला किया।" अधिकारियों ने बताया कि दोनों को बांहों और माथे पर चोट आई हैं।
बुजुर्ग व्यक्ति ने बताया कि उन्होंने बरामदे में रखी दरांती और बरछी उठाकर तेंदुए को मार डाला। घटना की जानकारी मिलते ही भरवाड और उनकी टीम मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। भरवाड ने बताया, "हमने वाजा द्वारा जानवर को मारने के लिए इस्तेमाल किए गए हथियार भी बरामद किए हैं। हमने वाजा के खिलाफ तेंदुए की हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। -
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश की। इस दौरान उन्होंने बताया कि स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों ही क्षेत्रों में बीते वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे बड़ी स्कूली शिक्षा प्रणालियों में से एक का संचालन कर रहा है।
आर्थिक समीक्षा के अनुसार देश में 14.71 लाख विद्यालयों के माध्यम से 24.69 करोड़ विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की जा रही है। इस विशाल शिक्षा व्यवस्था को 1.01 करोड़ से अधिक शिक्षक सहयोग प्रदान कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत 2030 तक प्री-प्राइमरी से माध्यमिक स्तर तक शत प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) हासिल करने के लक्ष्य के अनुरूप सभी स्कूल स्तरों पर स्थिर प्रगति देखने को मिली है। वित्त मंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) की संख्या 2014-15 में 51,534 थी, जो जून 2025 तक बढ़कर 70,018 हो गई है। यह वृद्धि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की संख्या में उल्लेखनीय इजाफे के कारण संभव हुई है। प्रीमियर उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या में भी 2014-15 से 2024-25 के बीच महत्वपूर्ण बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विद्यार्थियों का नामांकन 2021-22 में 4 करोड़ 33 लाख से बढ़कर 2022-23 में 4 करोड़ 46 लाख हो गया है। आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि शिक्षा क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियों में साक्षरता दर में वृद्धि, स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों में नामांकन बढ़ना तथा व्यावसायिक शिक्षा के प्रावधानों का विस्तार शामिल है। पोषण शक्ति निर्माण और समग्र शिक्षा अभियान जैसी योजनाओं ने शिक्षा तक पहुंच और समानता को बढ़ावा दिया है। सकल नामांकन अनुपात प्राथमिक स्तर पर 90.9%, उच्च प्राथमिक स्तर पर 90.3%, माध्यमिक स्तर पर 78.7% और उच्च माध्यमिक स्तर पर 58.4% दर्ज किया गया है।आर्थिक समीक्षा के अनुसार देश में अब 23 आईआईटी, 21 आईआईएम और 20 एम्स संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा जंजीबार और अबूधाबी में आईआईटी के दो अंतरराष्ट्रीय परिसर भी शुरू किए गए हैं। एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट के तहत 2,660 संस्थानों को जोड़ा गया है और 4 करोड़ 60 लाख से अधिक पहचान पत्र जारी किए जा चुके हैं।वित्त मंत्री ने बताया कि वर्ष 2035 तक 50% जीईआर के एनईपी लक्ष्य को हासिल करने के लिए 153 विश्वविद्यालयों में प्रवेश और निकास की लचीली व्यवस्था तथा साल में दो बार प्रवेश की सुविधा लागू की गई है। भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ ट्विनिंग कर संयुक्त और ड्यूअल डिग्री कार्यक्रम शुरू कर रहे हैं। इसके साथ ही 15 विदेशी उच्च शिक्षा संस्थानों के भारत में परिसर स्थापित करने की संभावना जताई गई है।आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि रोजगार दक्षता को जल्दी उपलब्ध कराने के लिए माध्यमिक स्कूलों में व्यवस्थित कौशल निर्माण की व्यवस्था की जा रही है। समीक्षा के अनुसार विशाल मानव संसाधन को उच्च गुणवत्ता वाली मानव पूंजी में बदलने के लिए स्कूली शिक्षा की अनुमानित अवधि बढ़ाने की आवश्यकता है। एनईपी के 5+3+3+4 ढांचे के तहत 3 से 18 वर्ष की आयु के लिए 15 वर्ष की स्कूली संरचना पर जोर दिया गया है।सरकार की विभिन्न योजनाओं से जीईआर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इनमें 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13,076 पीएमश्री स्कूलों की स्थापना, 2 लाख 99 हजार 544 स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए ईसीसीई प्रणाली को मजबूत करना शामिल है। जादुई पिटारा, ई-जादुई पिटारा, किताब एक पढ़े अनेक और भारतीय भाषा पुस्तक योजना जैसी पहलों से बच्चों को स्थानीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।पीएलएफएस 2023-24 के अनुसार 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के केवल 0.97% युवाओं को ही संस्थागत प्रशिक्षण मिला है, जबकि लगभग 92% युवाओं को कोई प्रशिक्षण प्राप्त नहीं हुआ है। आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि भारत के जनसांख्यिकी लाभांश का पूरा लाभ उठाने के लिए इस अंतर को पाटना बेहद जरूरी है। स्कूलों में कौशल शिक्षा युवाओं को बाजार-उन्मुख कौशल से लैस करेगी और ड्रॉपआउट दर को कम करने में मददगार होगी।वित्त मंत्री ने बताया कि यूजीसी और एआईसीटीई ने उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ श्रेणी की शुरुआत की है। इससे उद्योग और व्यावहारिक अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों को शिक्षण से जोड़ने और संकाय संसाधनों को मजबूत करने में मदद मिलेगी। -
पुणे. महाराष्ट्र के पुणे जिले में बुधवार को बारामती हवाई अड्डे के पास एक 'टेबलटॉप रनवे' से महज 200 मीटर की दूरी पर एक विमान के दुर्घनटनाग्रस्त हो जाने से उसमें सवार राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की मौत हो गई। दादा (बड़े भाई) के नाम से मशहूर अजित पवार (66) के निधन से न केवल महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में एक बड़ा खालीपन पैदा हुआ है, बल्कि उनकी अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के भविष्य पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अजित पवार के चाचा और राकांपा के संस्थापक शरद पवार ने कहा कि यह एक दुर्घटना थी और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। एक अधिकारी ने बताया कि दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए विमान से बरामद किए जाने वाले 'ब्लैक बॉक्स' (जिसमें फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर शामिल हैं) का विश्लेषण किया जाएगा। 'वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड' की ओर से संचालित 16 साल पुराना चार्टर्ड विमान 'लियरजेट' बारामती हवाई अड्डे पर दूसरी बार लैंडिंग का प्रयास करते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया। बारामती एक गैर-नियंत्रित हवाई क्षेत्र है, जहां आमतौर पर स्थानीय उड़ान प्रशिक्षण संगठनों के प्रशिक्षक और पायलट यातायात से जुड़ी जानकारी देते हैं। पवार राज्य में पांच फरवरी को होने वाले जिला परिषद चुनाव के प्रचार अभियान के तहत जनसभाओं को संबोधित करने के लिए मुंबई से बारामती जा रहे थे। दुर्घटना में जान गंवाने वालों में कैप्टन सुमित कपूर भी शामिल हैं, जिनके पास 15,000 घंटे का उड़ान अनुभव था। 1,500 घंटे का उड़ान अनुभव रखने वाली सह-पायलट कैप्टन शांभवी पाठक, निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) विधिप जाधव और विमान परिचारिका पिंकी माली की भी इस हादसे में मौत हो गई। सरकार ने एक बयान जारी किया, जिसमें दुर्घटना का क्रम विस्तार से बताया गया है।
विमान यातायात नियंत्रण कक्ष (एटीसी) ने बुधवार सुबह खराब दृश्यता के कारण हवा में एक चक्कर लगाने के बाद 'लियरजेट' विमान को उतरने की अनुमति दे दी थी। हालांकि, अनुमति मिलने के बाद भी विमान ने एटीसी को कोई 'रीड-बैक' या प्रतिक्रिया नहीं दी और वह कुछ ही पल बाद रनवे के किनारे पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया तथा उसमें आग लग गई। विमान संचालन की भाषा में "चक्कर लगाना" एक मानक प्रक्रिया है, जिसमें पायलट लैंडिंग का प्रयास रोक देता है और पुनः लैंडिंग की कोशिश से पहले विमान ऊपर ले जाना शुरू करता है। खराब मौसम, अस्थिर लैंडिंग पथ या रनवे पर यातायात जैसी वजहों से सुरक्षित लैंडिंग पूरी नहीं होने की स्थिति में ऐसा किया जाता है। यह एक आपात स्थिति नहीं, बल्कि एक एहतियाती सुरक्षा कदम है। वहीं, 'रीड बैक' विमान संचालन की भाषा में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रक्रिया है, जिसमें पायलट एटीसी से मिले निर्देशों या संदेश को दोहराता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि पायलट ने नियंत्रक के निर्देश ठीक ढंग से समझ लिए हैं। 'टेबलटॉप रनवे' किसी पठार या ऊंची पहाड़ी के ऊपर बनी हवाई पट्टी होती है, जिसके एक या दोनों छोर पर गहरी ढलान या खाई होती है। ऐसे रनवे पर सामान्य, बड़े या सुरक्षित रनवे क्षेत्र के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती। इसी वजह से लैंडिंग के दौरान विमान के आगे निकल जाने या उड़ान भरते समय रनवे से बाहर जाने की स्थिति बेहद खतरनाक हो जाती है। वीएसआर वेंचर्स के मालिक वीके सिंह ने कहा कि पायलट को संभवतः रनवे दिखाई नहीं दिया, जिसके चलते उसने 'मिस्ड अप्रोच' की, जो ऐसे मामलों में अपनाई जाने वाली एक मानक प्रक्रिया है। 'मिस्ड अप्रोच' वह प्रक्रिया है, जिसमें पायलट उस समय लैंडिंग रोक देता है, जब उसे लगता है कि विमान को सुरक्षित उतारना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में वह विमान को दोबारा ऊपर ले जाकर फिर से उतरने की कोशिश करता है। इसे आम भाषा में 'गो-अराउंड' कहा जाता है। बारामती हवाई अड्डे के पास हुए भयावह विमान हादसे के स्थल से प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी सामने आए हैं। स्थानीय निवासियों ने बताया कि विमान के नियंत्रण खोने के कारण हुए जोरदार धमाकों के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उसने विमान को हवाई अड्डे के ऊपर चक्कर लगाते हुए देखा और लैंडिंग के अंतिम प्रयास से पहले वह "थोड़ा अस्थिर" नजर आ रहा था। प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, विमान जमीन पर जोर से टकराया और फिर उसमें विस्फोट हो गया, जिसकी आवाज आसपास के घरों तक सुनाई दी। बाद में, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बारामती में हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) पर तैनात रहे एक व्यक्ति के हवाले से बयान जारी किया, जिसमें घटनाक्रम का विवरण देते हुए कहा गया है कि लैंडिंग के प्रयास के दौरान विमान को दृश्यता की समस्या का सामना करना पड़ा। बयान में कहा गया है कि पुणे से रवाना होने के बाद विमान ने सुबह 8:18 बजे बारामती एटीसी से पहली बार संपर्क स्थापित किया। इस समय विमान बारामती से 30 समुद्री मील (लगभग 55 किलोमीटर) की दूरी पर था। चालक दल को बताया गया कि वे दृश्यता को ध्यान में रखते हुए अपनी सुविधा के अनुसार विमान को नीचे उतार सकते हैं। उन्हें यह जानकारी भी दी गई कि हवा शांत है और दृश्यता लगभग 3,000 मीटर है। रनवे के करीब पहुंचने पर चालक दल ने बताया कि रनवे दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने दूसरी बार लैंडिंग के प्रयास के तहत विमान से चक्कर लगाने शुरू कर दिए। शुरुआत में चालक दल ने बताया कि रनवे अब भी दिखाई नहीं दे रहा है, हालांकि इसके कुछ ही सेकंड बाद उन्होंने कहा, "रनवे दिखाई दे रहा है।" इसके बाद एटीसी ने सुबह 8:43 बजे विमान उतारने की मंजूरी दे दी।
हालांकि, चालक दल ने इस अंतिम लैंडिंग अनुमति का अनिवार्य 'रीड बैक' नहीं दिया और पिछली बातचीत से ठीक एक मिनट बाद सुबह 8:44 बजे एटीसी कर्मियों ने रनवे की शुरुआत के पास आग लगती हुई देखी। विस्फोट के तुरंत बाद आपातकालीन सेवाकर्मी घटनास्थल पर पहुंच गए, जिन्हें मलबा रनवे के बाएं हिस्से में पड़ा हुआ मिला। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) फिलहाल इस बात की जांच कर रहा है कि 3,000 मीटर की दृश्यता बताए जाने के बावजूद चालक दल रनवे को देख पाने में क्यों असफल रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि विमान के कुछ हिस्से हवा में उछलकर आसपास के आवासीय भवनों के पास गिर गए। एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, "विमान झुका और फिर गिर गया। हमने विस्फोट होता हुआ देखा और यह बेहद डरावना था।" एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, विमान रनवे से लगभग 100 फुट की ऊंचाई पर नियंत्रण खोता हुआ नजर आ रहा था। उसने कहा, "जब विमान नीचे आ रहा था, तो हमें लगा कि यह दुर्घटनाग्रस्त होने वाला है और… जब हम इसकी ओर भागे, तो हमने आग लगती हुई देखी, इसके बाद चार से पांच धमाके हुए, जिसकी वजह से हम विमान के पास नहीं जा पाए।" एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी प्रमोद मदुरीकर ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद शवों की पहचान करके उन्हें एंबुलेंस में भेज दिया गया, जबकि बचाव व आपात अभियान में मदद के लिए दमकल विभाग के कर्मी लगभग उसी समय घटनास्थल पर पहुंच गए। नागर विमानन मंत्री के राम मोहन नायडू ने पुणे में संवाददाताओं से कहा कि खराब दृष्यता के बीच विमान को नीचे उतारने का प्रयास किया जा रहा था। कंपनी के बेड़े में सात 'लियरजेट 45' विमान (जिसमें दुर्घटनाग्रस्त विमान भी शामिल है), पांच 'एम्बरर 135बीजे' विमान, चार 'किंग एयर बी200' विमान और एक 'पिलाटस पीसी-12' विमान शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने बताया कि दुर्घटना के बाद विमान में आग लग गई। उन्होंने कहा, ''विमान में सवार सभी लोगों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया।'' अजित पवार के परिवार में उनकी पत्नी सुनेत्रा और दो बेटे पार्थ और जय हैं। सुनेत्रा राज्यसभा सदस्य हैं। अजित पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने हाल में पुणे और पिंपरी चिंचवड में हुए निकाय चुनावों में अपने चाचा शरद पवार की राकांपा (एसपी) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और देश के विभिन्न दलों के कई अन्य नेताओं ने अजित पवार के निधन पर शोक व्यक्त किया। दिल्ली कैंट में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) की रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि विमान हादसे में अजित पवार और अन्य लोगों को नियति ने हमसे छीन लिया। बारामती पहुंचे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पवार के निधन को दुखद एवं अविश्वसनीय बताया और कहा कि उन्होंने एक अच्छा मित्र खो दिया है। महाराष्ट्र सरकार ने 30 जनवरी तक तीन दिनों का राजकीय शोक घोषित किया है। इस दौरान सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रध्वज आधा झुका रहेगा। बृहस्पतिवार को बारामती में राजकीय सम्मान के साथ अजित पवार का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
राकांपा के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री शाह पूर्वाह्न 11 बजे विद्या प्रतिष्ठान मैदान में होने वाले अंतिम संस्कार में शामिल हो सकते हैं। अजित पवार के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए विद्या प्रतिष्ठान मैदान में रखा गया है।
इस बीच, नागर विमानन नायडू ने कहा कि विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) हादसे की गहन जांच करेगा और विमान परिचालक को लेकर फिलहाल सुरक्षा संबंधी कोई चिंता नहीं है। नायडू ने बताया कि एएआईबी और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) की टीमें दुर्घटनास्थल पर मौजूद हैं।
विमानन शिखर सम्मेलन 'विंग्स इंडिया 2026' के मौके पर मीडिया से बातचीत करते हुए नायडू ने कहा, "हमें घटना के समय क्या हुआ, इसकी गहराई से जांच करने की जरूरत है।" उन्होंने बारामती में दुर्घटनास्थल का दौरा करने के बाद यह बयान दिया।
जब नायडू से विमान परिचालक से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इससे इनकार किया। मंत्री ने कहा, "डीजीसीए ने पूरी तरह जांच की है, सभी आवश्यक मंजूरियां दी गई थीं और कंपनी का पिछले साल भी आकलन किया गया था…, इसलिए उस मोर्चे पर हमें कोई चिंता नजर नहीं आती। वे कई उड़ानों का संचालन कर रहे हैं।" -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की ताकत और उसके सशस्त्र बलों की वीरता को साबित किया और स्वदेशी हथियारों की प्रगति को प्रदर्शित किया है। उन्होंने दिल्ली छावनी में आयोजित वार्षिक एनसीसी प्रधानमंत्री रैली को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक युद्ध में, लड़ाई केवल सीमाओं या टैंक या तोप के उपयोग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह 'कोड और क्लाउड' में भी लड़ी जा रही है।' उनका संदर्भ साइबर और सूचना युद्ध से था। प्रधानमंत्री ने करियप्पा परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एनसीसी द्वारा प्रस्तुत ऑपरेशन सिंदूर थीम पर आधारित विशेष झांकी पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एनसीसी कैडेट के प्रयासों की सराहना की। इस अभियान के दौरान, देश भर में 75,000 से अधिक राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) कैडेट ने स्वेच्छा से नागरिक सुरक्षा, अस्पताल प्रबंधन, आपदा राहत और सामुदायिक सेवाओं में अथक परिश्रम किया। मोदी ने कहा, ''ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की ताकत और उसके सशस्त्र बलों की वीरता को फिर से साबित किया। इसने उन्नत स्वदेशी हथियारों भी प्रदर्शित किया।'' प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि प्रौद्योगिकी में पिछड़ने वाले राष्ट्र न केवल अर्थव्यवस्था में बल्कि सुरक्षा में भी कमजोर हो जाते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि युवाओं द्वारा किए गए नवाचार देशभक्ति को मजबूत करते हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान देते हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि एनसीसी द्वारा दिया जाने वाला प्रशिक्षण केवल परेड ग्राउंड तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह 'राष्ट्र प्रथम' की भावना भी पैदा करता है, जो कैडेट को कठिन समय में देश के लिए पूरी ताकत से काम करने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों में तकनीक उन्मुक्त और नवोन्मेषी युवाओं के लिए नए अवसर खुल रहे हैं, क्योंकि रक्षा क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं, 'मेड इन इंडिया' के तहत ड्रोन विकसित किए जा रहे हैं और कृत्रिम मेधा (एआई) और रक्षा नवाचार बलों का आधुनिकीकरण कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं से इन संभावनाओं का पूरा लाभ उठाने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि देश ने हाल ही में 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया और उन्होंने इस अवसर पर नागरिकों को एक पत्र लिखा था। मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय मतदाता दिवस संविधान द्वारा प्रदत्त जिम्मेदारी और अधिकारों का उत्सव है। उन्होंने साथ ही रेखांकित किया कि भारत में दुनिया में सबसे अधिक युवा मतदाता हैं। प्रधानमंत्री ने देश में एक नई परंपरा शुरू करने का आह्वान किया और प्रस्ताव रखा कि एनसीसी, एनएसएस (राष्ट्रीय सेवा योजना) और माय यंग इंडिया संगठन हर साल 25 जनवरी को पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को सम्मानित करने के लिए एक 'भव्य कार्यक्रम' आयोजित करें। उन्होंने कहा कि इस प्रयास से युवाओं में जिम्मेदारी की भावना मजबूत होगी और लोकतंत्र को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा, ''एक विकसित भारत केवल आर्थिक समृद्धि तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने नागरिकों के आचरण पर भी निर्भर करता है, जिन्हें अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए।'' मोदी ने अपने संबोधन में युवाओं में मोटापे का मुद्दा उठाया और उन अध्ययनों का हवाला दिया जिनमें यह बताया गया है कि भारत में हर तीन में से एक व्यक्ति भविष्य में मोटापे से पीड़ित हो सकता है, जिससे मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, और युवा वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होता है। प्रधानमंत्री ने इस मामले में सतर्कता पर जोर दिया और तेल का सेवन कम करने का आग्रह किया। उन्होंने खाने में तेल की खपत को 10 प्रतिशत तक कम करने की अपनी पहले की अपील दोहराई। उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित प्रत्येक युवा से अपील की कि वे प्रत्येक सप्ताह कम से कम एक घंटा स्वच्छता संबंधी अभियान के लिए समर्पित करें और किसी चयनित स्थान पर कोई गतिविधि आयोजित करने की योजना बनाएं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष और तीनों सेनाओं के प्रमुख भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक दिन पहले हुए 'ऐतिहासिक' मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को गति मिलेगी, 'मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड' के संकल्प को मजबूती मिलेगी और लाखों भारतीय युवाओं के लिए अवसरों के अनगिनत द्वार खुलेंगे। मोदी ने दिल्ली छावनी में आयोजित वार्षिक राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) पीएम रैली को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया में भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की अब तक के सबसे बड़े समझौते के तौर पर प्रशंसा की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसका अभिप्राय भारतीय युवाओं के लिए ''आकांक्षाओं को साकार करने की स्वतंत्रता'' होगा। मोदी ने कहा कि इसे दुनिया और भारतीय स्टार्टअप जगत के लिए 'पासा पलटने वाले समझौते' के रूप में भी देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि फिल्म, गेमिंग, फैशन, डिजिटल कंटेंट, संगीत और डिजाइन सहित रचनात्मक अर्थव्यवस्था को इससे लाभ होगा। मोदी ने कहा कि युवाओं, अनुसंधान और शिक्षा के साथ-साथ आईटी और अन्य व्यवसायों के लिए भी अनगिनत अवसर पैदा होंगे। भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसे अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता कहा जा रहा है। इसका उद्देश्य दो अरब लोगों का बाजार तैयार करना है। प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व ने नियम-आधारित विश्व व्यवस्था की रक्षा के लिए व्यापार और रक्षा का बड़े पैमाने पर लाभ उठाने हेतु एक परिवर्तनकारी पांच वर्षीय एजेंडे का अनावरण किया। अमेरिका के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बीच मोदी द्वारा यूरोपीय संघ के नेताओं उर्सुला फॉन डेर लायन और एंटोनियो कोस्टा की शिखर वार्ता की मेजबानी के बाद दोनों पक्षों ने दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इनमें से एक सुरक्षा और रक्षा सहयोग से जुड़ा है जबकि दूसरा समझौता यूरोप में भारतीय प्रतिभाओं की आवाजाही से संबंधित है। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता विश्व के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का एक चौथाई और वैश्विक व्यापार का एक तिहाई हिस्सा होगा। मोदी ने रेखांकित किया कि इससे 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को गति मिलेगी और 'मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड' के संकल्प को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत, भारत के 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात पर शुल्क या तो शून्य होगा या बहुत कम होगा, जिससे कपड़ा, चमड़ा, रत्न और आभूषण, जूते, इंजीनियरिंग सामान और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) जैसे उद्योगों को लाभ होगा, और बुनकरों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को यूरोपीय संघ के 27 देशों के विशाल बाजारों तक 'सीधी पहुंच' मिलेगी। मोदी ने कहा कि इस समझौते से भारत में और अधिक निवेश आएगा, जिससे नए इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, फार्मा और अन्य विनिर्माण संयंत्र स्थापित होंगे, साथ ही कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और मत्स्य पालन के लिए सुनिश्चित बाजार बनेंगे जो किसानों, मछुआरों और ग्रामीण युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर होगा। मोदी ने रेखांकित किया कि यह मुक्त व्यापार समझौता भारत के युवाओं को यूरोप के रोजगार बाजार से सीधे जोड़ता है, जिससे विशेष रूप से इंजीनियरिंग, हरित प्रौद्योगिकी, डिजाइन, लॉजिस्टिक्स और उन्नत विनिर्माण में अवसर पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि इसका अभिप्राय है कि इन 27 देशों में भारतीय युवाओं के लिए नए रास्ते खुल रहे हैं। यूरोपीय संघ के सदस्यों में फ्रांस, जर्मनी, पोलैंड, पुर्तगाल, यूनान, फिनलैंड, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, डेनमार्क, इटली, नीदरलैंड, स्पेन और स्वीडन सहित अन्य देश शामिल हैं। एनसीसी की प्रधानमंत्री रैली का आयोजन करियप्पा परेड ग्राउंड में किया गया। इस वर्ष की रैली का विषय 'राष्ट्र प्रथम - कर्तव्य निष्ठ युवा' था। एनसीसी के विभिन्न निदेशालयों के दलों ने परेड किया, जिसके बाद कैडेट, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) स्वयंसेवकों और राष्ट्रीय रंगशाला के कलाकारों द्वारा 'वंदे मातरम्' की थीम पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गए। मोदी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि पूरी दुनिया भारत के युवाओं को 'बहुत भरोसे' से देख रही है और इस भरोसे का कारण 'कौशल और संस्कार' हैं। उन्होंने कहा, ''मैंने लाल किले से संबोधित करते हुए कहा था, 'यही समय है, सही समय है'। देश के युवाओं के लिए यह अधिकतम अवसरों का समय है।'' उन्होंने रेखांकित किया कि सरकार का प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि युवाओं को इस अवधि का 'अधिक से अधिक लाभ' मिले। प्रधानमंत्री ने कहा, ''इसका एक उदाहरण आपने कल ही देखा। भारत और यूरोपीय संघ ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर सहमति जताई। इससे पहले, भारत ने ओमान, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया और मॉरीशस जैसे देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। इन सभी समझौतों से हमारे लाखों युवाओं के लिए अवसर के अनगिनत द्वार खुलेंगे।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि एनसीसी, एक संगठन और एक आंदोलन के रूप में, भारत की युवा शक्ति को 'आत्मविश्वास' से भर देती है और उन्हें अनुशासित और संवेदनशील नागरिक बनाती है जो राष्ट्र के प्रति समर्पित हैं। मोदी ने रेखांकित किया कि हाल के वर्षों में एनसीसी कैडेट की संख्या (स्वीकृत संख्या) 14 लाख से बढ़कर 20 लाख हो गई है, जिसमें सीमावर्ती और तटीय क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने 'परमवीर सागर यात्रा' का प्रतीकात्मक समापन किया, जिसके तहत कई कैडेटों ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का दौरा किया। इस प्रतीकात्मक समुद्री अभियान का आयोजन देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार, परमवीर चक्र विजेताओं के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को सम्मान देने के लिया गया था।
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नई दिल्ली। बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के साथ 77वें गणतंत्र दिवस समारोह का औपचारिक और भव्य समापन होगा। इस अवसर पर राजधानी के विजय चौक पर भारतीय धुनों और देशभक्ति से ओत-प्रोत संगीत की गूंज सुनाई देगी। बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी 29 जनवरी को विजय चौक में आयोजित की जाएगी। यह समारोह परंपरागत रूप से अत्यंत भव्य और अनुशासित तरीके से संपन्न होता है। इस खास मौके पर भारतीय सेना, भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बैंड अपनी मनमोहक और देशभक्ति से भरपूर प्रस्तुतियां देंगे।
बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, अन्य केंद्रीय मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में आम नागरिकों की उपस्थिति रहेगी। कार्यक्रम की शुरुआत मास्ड बैंड की प्रसिद्ध धुन ‘कदम कदम बढ़ाए जा’ से होगी।इसके बाद पाइप्स एंड ड्रम्स बैंड ‘अतुल्य भारत’, ‘वीर सैनिक’, ‘मिली-जुली’, ‘नृत्य सरिता’, ‘मरूनी’ और ‘झेलम’ जैसी धुनें प्रस्तुत करेगा। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों का बैंड ‘विजय भारत’, ‘हथरोही’, ‘जय हो’ और ‘वीर सिपाही’ की धुनों से माहौल में जोश भर देगा।भारतीय वायुसेना का बैंड ‘ब्रेव वॉरियर’, ‘ट्वाइलाइट’, ‘अलर्ट’ और ‘फ्लाइंग स्टार’ की धुनें बजाएगा, जबकि भारतीय नौसेना का बैंड ‘नमस्ते’, ‘सागर पवन’, ‘मातृभूमि’, ‘तेजस्वी’ और ‘जय भारती’ की प्रस्तुतियां देगा। इसके बाद भारतीय थल सेना का बैंड ‘विजयी भारत’, ‘आरंभ है प्रचंड है’, ‘ऐ वतन, ऐ वतन’, ‘आनंद मठ’, ‘सुगम्य भारत’ और ‘सितारे हिंद’ जैसी प्रेरणादायी धुनों से समां बांधेगा।अंत में मास्ड बैंड ‘भारत की शान’, ‘वंदे मातरम्’ और ‘ड्रमर्स कॉल’ प्रस्तुत करेगा। समारोह का समापन हमेशा की तरह बेहद लोकप्रिय धुन ‘सारे जहां से अच्छा’ के साथ होगा, जिसे बगलर्स द्वारा बजाया जाएगा।इस पूरे कार्यक्रम के मुख्य कंडक्टर स्क्वाड्रन लीडर लैमापोकपम रूपचंद्र सिंह होंगे। थल सेना, नौसेना, वायुसेना और केंद्रीय बलों के अलग-अलग कंडक्टर अपनी-अपनी टीमों का नेतृत्व करेंगे। इस वर्ष की एक खास बात यह भी है कि विजय चौक की बैठने की जगहों को भारतीय संगीत वाद्य यंत्रों-बांसुरी, तबला, सितार, वीणा, शहनाई, मृदंगम, सरोद और संतूर के नाम दिए गए हैं। कुल मिलाकर यह समारोह संगीत, अनुशासन और देशभक्ति का भव्य संगम होगा।


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