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- पटना. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को बिहार दौरे के दौरान 7,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास एवं उद्घाटन करेंगे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने यह जानकारी दी। भाजपा की बिहार इकाई के अध्यक्ष दिलीप जायसवाल के अनुसार, मोदी पूर्वी चंपारण जिला मुख्यालय मोतिहारी शहर के गांधी मैदान में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री के एजेंडे में बिहार शीर्ष पर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सत्ता संभालने के बाद से वह 53वीं बार राज्य का दौरा करेंगे।राज्य में 7,196 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे।'' जायसवाल ने कहा कि ये परियोजनाएं रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग और सड़क, ग्रामीण विकास, पशुपालन और डेरी तथा सूचना प्रौद्योगिकी सहित विविध क्षेत्रों से संबंधित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘रेलवे से संबंधित परियोजनाओं की लागत 5,398 करोड़ रुपये है, जबकि राष्ट्रीय राजमार्गों और सड़कों पर 1,173 करोड़ रुपये खर्च होंगे। डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से आईटी परियोजनाओं पर 63 करोड़ रुपये की लागत आएगी।'' भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान मोदी ‘प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना' के 40,000 लाभार्थियों को प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण के माध्यम से 162 करोड़ रुपये की राशि वितरित करेंगे, जबकि अन्य 12,000 लोगों को उनके नए घरों की चाबियां सौंपी जाएंगी। जायसवाल ने कहा, ‘‘इसके अलावा, समारोह के दौरान 61,500 स्वयं सहायता समूहों को 400 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। मोदी को परिवार का सदस्य मानने वाला बिहार, प्रधानमंत्री का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।''--
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जम्मू. दक्षिण कश्मीर हिमालय में अमरनाथ गुफा मंदिर के दर्शन के लिए बुधवार को 6,064 तीर्थयात्रियों का एक और जत्था रवाना हुआ। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दो अलग-अलग काफिलों में 1,511 महिलाओं सहित तीर्थयात्री अनंतनाग में नुनवान-पहलगाम और गांदरबल में बालटाल आधार शिविरों के लिए रवाना हुए। पहलगाम आधार शिविर के लिए 139 वाहनों के काफिले में 3,593 तीर्थयात्री जा रहे हैं, जबकि 95 वाहनों में सवार 2471 तीर्थयात्रियों ने अपनी यात्रा के लिए बालटाल मार्ग को प्राथमिकता दी है। अमरनाथ गुफा मंदिर के लिए 38 दिवसीय वार्षिक यात्रा तीन जुलाई को दोनों मार्गों से शुरू हुई थी और नौ अगस्त को रक्षाबंधन के त्यौहार के साथ समाप्त होगी। अब तक 2.35 लाख से अधिक तीर्थयात्री प्राकृतिक रूप से निर्मित शिवलिंग के दर्शन कर चुके हैं।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 100 जिलों में कृषि क्षेत्र के प्रोत्साहन के लिए सालाना 24,000 करोड़ रुपये के आवंटन वाली ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना' को बुधवार को मंजूरी दी। छह साल तक चलने वाली इस योजना से करीब 1.7 करोड़ किसान लाभान्वित होंगे। यह योजना 2025-26 के बजट में कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए 100 जिलों के विकास की घोषणा के अनुरूप है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए इस निर्णय की जानकारी दी। वैष्णव ने संवाददाताओं से कहा कि 'प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना' 11 विभागों की 36 मौजूदा योजनाओं, अन्य राज्य योजनाओं और निजी क्षेत्र के साथ स्थानीय भागीदारी को समाहित कर कार्यान्वित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस योजना से लगभग 1.7 करोड़ किसान लाभान्वित होंगे।
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना, पंचायत एवं ब्लॉक स्तर पर फसलों की कटाई के बाद अनाज भंडारण बढ़ाना, सिंचाई सुविधाओं में सुधार और किसानों के लिए दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक ऋण की उपलब्धता को सुगम बनाना है। योजना के लिए 100 जिलों की पहचान कम उत्पादकता, कम फसल सघनता और कम ऋण वितरण के तीन प्रमुख मानदंडों के आधार पर की जाएगी। प्रत्येक राज्य/केंद्रशासित प्रदेश में जिलों की संख्या शुद्ध फसल क्षेत्र और परिचालन जोत के हिस्से पर आधारित होगी। हालांकि, प्रत्येक राज्य से कम-से-कम एक जिला इस योजना के लिए चुना जाएगा। बयान के मुताबिक, योजना के प्रभावी नियोजन, कार्यान्वयन और निगरानी के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समितियां गठित की जाएंगी। जिला धन-धान्य समिति द्वारा एक जिला कृषि एवं संबद्ध कार्यकलाप योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिसमें प्रगतिशील किसान भी शामिल होंगे। जिला योजनाओं को फसल विविधीकरण, जल एवं मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और प्राकृतिक एवं जैविक खेती के विस्तार जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप बनाया जाएगा। प्रत्येक धन-धान्य जिले में योजना की प्रगति की निगरानी मासिक आधार पर एक डैशबोर्ड के माध्यम से 117 प्रमुख संकेतकों पर की जाएगी। नीति आयोग इन जिला योजनाओं की समीक्षा और मार्गदर्शन करेगा। इसके अलावा प्रत्येक जिले के लिए नियुक्त केंद्रीय नोडल अधिकारी भी नियमित आधार पर इसकी समीक्षा करेंगे। आधिकारिक बयान के मुताबिक, ‘‘इन 100 जिलों में लक्षित परिणामों में सुधार होने के साथ ही देश के लिए प्रमुख निष्पादन संकेतकों के संदर्भ में समग्र औसत में वृद्धि होगी।'' इसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र में उत्पादकता में वृद्धि, मूल्य संवर्धन और स्थानीय आजीविका का सृजन होगा। इस तरह से घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और आत्मनिर्भरता हासिल होगी। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने बुधवार को कहा कि भारतीय पाकशास्त्र और व्यंजनों की विरासत 'सांस्कृतिक स्मृति' और भोजन बनाने के क्षेत्रीय तरीकों से प्रेरित है, इसलिए इन परंपराओं को मजबूत करने और वैश्विक स्तर पर इसे बढ़ावा देने की जरूरत है। पर्यटन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक सुमन बिल्ला ने यहां एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि भारत की लुप्त होती पाकशास्त्र परंपराओं को संरक्षित करने की भी आवश्यकता है। पर्यटन मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में यह जानकारी दी गयी।
बयान के मुताबिक इस अवसर पर राष्ट्रीय युवा शेफ प्रतियोगिता (एनवाईसीसी) की शुरुआत की घोषणा की गई। इसका उद्देश्य देश भर के अंतिम वर्ष के छात्रों के बीच बेहतरीन पाकशास्त्र प्रतिभा की खोज करना, उनका मार्गदर्शन करना और उनका प्रदर्शन करना है। यह प्रतियोगिता पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से आयोजित की जा रही है। पर्यटन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव बिल्ला ने कहा, ‘‘हमारी पाकशास्त्र की विरासत सांस्कृतिक स्मृति और क्षेत्रीय तकनीकों पर आधारित है। हमें इन परंपराओं को सुदृढ़ करना होगा और वैश्विक स्तर पर भारतीय व्यंजनों को बढ़ावा देना होगा।'' उन्होंने युवा शेफ से रचनात्मक ढंग से सोचने और अंतरराष्ट्रीय पाकशास्त्र मंच पर आत्मविश्वास के साथ भारत का प्रतिनिधित्व करने का आग्रह किया। - नई दिल्ली। युवा (15-29 आयु समूह) में बेरोजगारी दर जून में लगातार दूसरे महीने बढ़ी। यह मई के 15 प्रतिशत से बढ़कर जून में 15.3 प्रतिशत हो गई। हालांकि जून में युवाओं में काम करने के प्रति कम उत्साह था। यह जानकारी राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) के मंगलवार को जारी नवीन मासिक आवधिक श्रम बल सर्वे (पीएलएफएस) के आंकड़ो़ं में दी गई।शहरी क्षेत्र के युवाओं में बेरोजगारी दर जून में तेजी से बढ़ी (मई के 17.9 प्रतिशत से बढ़कर 18.8 प्रतिशत) जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कम (मई के 13.7 प्रतिशत से बढ़कर 13.8 प्रतिशत) बढ़ी। एनएसओ हालिया सप्ताहिक स्थिति (सीडब्ल्यूएस) के आधार पर बेरोजगारी दर को मापता है। इसके तहत सर्वेक्षण की तारीख के सात दिनों की अवधि पर गतिविधि की स्थिति निर्धारित की जाती है। इसके तहत किसी व्यक्ति को एक हफ्ते में तब बेरोजगार माना जाता है जब वह कम से कम एक घंटे या किसी एक दिन काम करना चाहता हो लेकिन उसे सप्ताह में एक घंटे या किसी भी दिन कोई कार्य नहीं मिला हो। युवाओं में श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) काम करने के इच्छुक लोगों या काम की तलाश कर रहे युवाओं की संख्या का आकलन करती है। एलएफपीआर दर जून में गिरकर 41 प्रतिशत हो गई जबकि यह मई में 42.1 प्रतिशत थी। एलएफपीआर दर ग्रामीण क्षेत्रों में 42.7 प्रतिशत से गिरकर 41.1 प्रतिश हो गई जबकि यह दर शहरी क्षेत्रों में 40.8 प्रतिशत पर यथावत रही।सर्वेक्षण के अनुसार जून में ’15 वर्ष और उससे अधिक’ आयु वर्ग में बेरोजगारी दर यथावत रही। हालांकि इस अवधि में ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर मई के 5.1 प्रतिशत से गिरकर 4.9 प्रतिशत हो गई जबकि यह शहरी क्षेत्र में मई के 6.9 प्रतिशत से बढ़कर 7.1 प्रतिशत हो गई।महिलाओं की बेरोजगारी दर मई के 5.8 प्रतिशत से मामूली रूप से गिरकर 5.6 प्रतिशत हो गई। हालांकि पुरुषों की बेरोजगारी दर 5.6 प्रतिशत पर यथावत रही। श्रम मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘ मई 2025 की तुलना में जून 2025 में ग्रामीण क्षेत्रों के पुरुषों और महिलाओं में बेरोजगारी दर घटने का कारण उनकी अपने कार्य में बढ़ती भागीदारी है। इसके अलावा बेरोजगार युवकों की संख्या में भी गिरावट हुई है।’ एलएफपीआर में ’15 वर्ष और उससे अधिक’ की श्रेणी की हिस्सेदारी जून में 54.2 प्रतिशत थी जबकि यह मई में 54.8 प्रतिशत थी।
- नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने मंगलवार भारतीय नौसेना को छह स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किए गए रणनीतिक प्रोडक्ट सौंपे हैं। ये स्वदेशी प्रणालियां न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल और रेडियोलॉजिकल खतरों के विरुद्ध नौसेना की क्षमताओं को सशक्त बनाएंगे। इसके साथ यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को गति भी प्रदान करेंगी।डीआरडीओ द्वारा सौंपे गए उत्पादों में गामा रेडिएशन एरियल सर्विलांस सिस्टम, एनवायरनमेंटल सर्विलांस व्हीकल, व्हीकल रेडियोलॉजिकल कंटैमिनेशन मॉनिटरिंग सिस्टम, अंडरवॉटर गामा रेडिएशन मॉनिटरिंग सिस्टम, डर्ट एक्सट्रैक्टर एंड क्रॉस कंटैमिनेशन मॉनिटर व ऑर्गन रेडियोएक्टिविटी डिटेक्शन सिस्टम शामिल हैं।इन अत्याधुनिक उपकरणों को डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने नौसेना मुख्यालय में रियर एडमिरल श्रीराम अमूर को औपचारिक रूप से सौंपा। डीआरडीओ के मुताबिक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ये सभी रक्षा उपकरण नौसेना की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किए गए हैं। नौसेना को इन उपकरणों का हस्तांतरण जोधपुर स्थित रक्षा प्रयोगशाला में आयोजित एक विशेष समारोह में किया गया।
- नई दिल्ली। भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) इस वर्ष अगस्त से छात्रों के अपने पहले बैच के लिए प्रवेश की शुरूआत करने जा रहा है। इस शुरूआत के साथ ही, संस्थान भारत की बढ़ती डिजिटल और रचनात्मक अर्थव्यवस्था में एक परिवर्तनकारी उपलब्धि हासिल करने के लिए भी तैयार है। संस्थान एवीजीसी-एक्सआर (एनीमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और विस्तारित वास्तविकता) क्षेत्र में उद्योग-संचालित पाठ्यक्रमों का एक मजबूत पोर्टफोलियो प्रदान करेगा।केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव की मई, 2025 में विश्व ऑडियो विजुअल एंटरटेनमेंट समिट (वेव्स) में की गई घोषणा को आगे बढ़ाने की दिशा में संस्थान को प्रतिष्ठित वैश्विक साझेदारियों और उद्योग प्रमुखों का समर्थन प्राप्त है। इस शैक्षणिक पाठ्यक्रम में गेमिंग में छह विशेष पाठ्यक्रम, पोस्ट प्रोडक्शन में चार पाठ्यक्रम और एनीमेशन, कॉमिक्स और एक्सआर में आठ पाठ्यक्रम शामिल हैं।भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान के हाल ही में यूनाइटेड किंगडम के यॉर्क विश्वविद्यालय के साथ एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हुए हस्ताक्षर से सहयोगात्मक अनुसंधान, संकाय विनिमय और वैश्विक प्रमाणन मार्गों का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इसकी मजबूत आधारशिला में वृद्धि करते हुए गूगल, यूट्यूब, बडोब, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीआईडीआईए और जियोस्टार जैसी प्रमुख वैश्विक कंपनियों ने भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान के साथ दीर्घकालिक सहयोग की प्रतिबद्धता जताई है। उनके समर्थन में पाठ्यक्रम विकास, छात्रवृत्ति, इंटर्नशिप, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और प्लेसमेंट के अवसर शामिल हैं।भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, डॉ. विश्वास देउस्कर ने कहा कि उनका विज़न विश्वस्तरीय प्रतिभाओं को पोषित करके एवीजीसी-एक्सआर क्षेत्र में भारत को एक वैश्विक महाशक्ति बनाना है। पाठ्यक्रम भारत की गतिशील रचनात्मक क्षमता पर आधारित होते हुए भी वैश्विक मानकों को पूरा करने के लिए तैयार किए गए हैं। विस्तृत पाठ्यक्रम की घोषणा इस महीने के अंत में होने की आशा है।भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान के शासी बोर्ड में श्री संजय जाजू, श्री विकास खड़गे, श्रीमती स्वाति म्हसे, श्री चंद्रजीत बनर्जी, श्री आशीष कुलकर्णी, श्री मानवेंद्र शुकुल और श्री राजन नवानी शामिल हैं। शासी परिषद के सदस्यों में श्री मुंजाल श्रॉफ, श्री चैतन्य चिचलीकर, श्री बीरेन घोष, श्री भूपेंद्र कैंथोला और श्री गौरव बनर्जी शामिल हैं।वैश्विक एवीजीसी-एक्सआर उद्योग के तेज़ी से बढ़ने के अनुमान के साथ, भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान के व्यापक पाठ्यक्रम भविष्य के लिए तैयार प्रतिभाओं का एक ऐसा समूह तैयार करने का लक्ष्य रखते हैं जो भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देगा और देश को उभरती हुई और डिजिटल विषय सामाग्री प्रौद्योगिकियों में अग्रणी स्थान दिलाएगा।
- नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 17 जुलाई को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रतिष्ठित स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 पुरस्कार प्रदान करेंगी। इस वर्ष 4 श्रेणियों में कुल 78 पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में 10 सुपरिभाषित मापदंडों का उपयोग करते हुए शहरी स्वच्छता और सेवा वितरण का आकलन करने के लिए एक स्मार्ट, संरचित दृष्टिकोण अपनाया गया। आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) द्वारा इस समारोह का आयोजन किया जा रहा है। समारोह में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू उपस्थिति रहेंगे।आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 विश्व के सबसे बड़े शहरी स्वच्छता सर्वेक्षण का 9वां संस्करण है। यह ऐतिहासिक आयोजन स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (एसबीएम-यू) को आगे बढ़ाने वाले शहरों के अथक प्रयासों को मान्यता देते हुए शहरी भारत के सबसे स्वच्छ शहरों को पुरस्कृत करेगा।इस वर्ष सुपर स्वच्छ लीग शहर, 5 जनसंख्या श्रेणियों में शीर्ष, स्वच्छ शहर, विशेष श्रेणी: गंगा शहर, छावनी बोर्ड, सफाई मित्र सुरक्षा, महाकुंभ, राज्य स्तरीय पुरस्कार – राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का होनहार स्वच्छ शहर आदि चार श्रेणियों में कुल 78 पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।स्वच्छ सर्वेक्षण (एसएस), स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के अंतर्गत एक ऐतिहासिक पहल है जो पिछले नौ वर्षों से शहरी भारत की स्वच्छता की यात्रा में एक निर्णायक शक्ति बन गई है और जन समर्थन से साथ लोगों की सोच को आकार देकर स्वच्छता के लिए प्रेरित कर रही है। वर्ष 2016 में 73 शहरी स्थानीय निकायों से शुरू होकर, इसका नवीनतम संस्करण अब 4,500 से अधिक शहरों तक पहुंच गया है। इस वर्ष के पुरस्कार न केवल सर्वश्रेष्ठ स्वच्छ शहरों को सम्मानित करते हैं, बल्कि प्रगति की मजबूत संभावनाओं वाले छोटे शहरों को भी मान्यता और प्रोत्साहन देते हैं।स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 पुरस्कार “रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकल” की थीम पर केंद्रित हैं। 3,000 से ज़्यादा मूल्यांकनकर्ताओं ने 45 दिनों की अवधि में देश भर के हर वार्ड में गहन निरीक्षण किया। समावेशिता और पारदर्शिता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के साथ, इस पहल में 11 लाख से ज़्यादा घरों का मूल्यांकन शामिल था – जो राष्ट्रीय स्तर पर शहरी जीवन और स्वच्छता को समझने के लिए एक व्यापक और दूरगामी दृष्टिकोण को दर्शाता है।आपको बता दें, स्वच्छ सर्वेक्षण में पहली बार, शहरों को जनसंख्या के आधार पर पांच श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है जिनमें (1) बहुत छोटे शहर: 20,000 जनसंख्या (2) छोटे शहर: 20,000 – 50,000 जनसंख्या (3) मध्यम शहर : 50,000 – 3 लाख जनसंख्या (4) बड़े शहर: 3 – 10 लाख जनसंख्या और (5) दस लाख से अधिक आबादी वाले शहर (10 लाख जनसंख्या) शामिल हैं ।मंत्रालय ने बताया कि प्रत्येक श्रेणी का मूल्यांकन उसके आकार और विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप मानकों के आधार पर किया गया है। सबसे स्वच्छ शहरों को प्रत्येक श्रेणी में पुरस्कृत किया जाएगा। यह दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि छोटे शहरों को भी आगे बढ़ने का अवसर मिले और वे हमेशा की तरह आगे रहने वाले शहरों के साथ समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
- नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित 12वीं कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) समिट में कहा कि हरित ईंधन को लेकर उनके प्रयास वर्ष 2004 से मिशन के रूप में जारी हैं और आज वे खुद देश के पहले ऐसे मंत्री हैं जिनकी गाड़ी 100 प्रतिशत बायोफ्यूल पर चलती है।केंद्रीय मंत्री गडकरी ने यह भी कहा कि इस वैकल्पिक ईंधन का निर्माण मक्का, टूटे चावल और गन्ने जैसे उत्पादों से होता है, जिसे किसान तैयार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब मक्का की कीमत 1200 रुपये प्रति क्विंटल थी, तब इसके उत्पादन को प्रोत्साहन दिया गया और अब उसकी बाजार कीमत 2400 रुपये तक पहुंच गई है। इसका लाभ किसानों को सीधे मिल रहा है। भारत का फॉसिल फ्यूल आयात 40 लाख करोड़ रुपये तक का है, जिसे घटाने के लिए वैकल्पिक ईंधन का उपयोग और आवश्यक हो गया है।उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने एक प्लेटफार्म की भी शुरुआत की है जिसमें रेडीमेड गारमेंट से बची हुई कतरनों से कारपेट बनाए जाते हैं। ये कारपेट कम लागत में तैयार होते हैं और इनमें 1500 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है। यदि सामाजिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ छोटे-छोटे प्रयास किए जाएं तो लोगों के जीवन को बदला जा सकता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में आज भी बड़ी मदद की आवश्यकता है और सीएसआर के माध्यम से जो कार्य हो रहे हैं, वे बेहद सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों को वैसी प्रसिद्धि नहीं मिलती जैसी राजनैतिक गतिविधियों को मिलती है, जबकि इन कार्यों से कई लोगों का जीवन बदला है। उन्होंने बताया कि वे 80 प्रतिशत कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में करते हैं और इसीलिए उन्हें सामाजिक कार्यों में सबसे अधिक संतोष मिलता है।उन्होंने बताया कि रोड निर्माण के लिए जरूरी सामग्री जैसे मिट्टी और एग्रीगेट की पूर्ति हेतु नदियों, नालों और तालाबों का गहरीकरण किया गया। वहां से निकाली गई मिट्टी का उपयोग सड़कों के निर्माण में किया गया। यह सारा कार्य मुफ्त में कराया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि संबंधित क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक बदलाव आया। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उनके मंत्रालय ने अकोला स्थित कृषि विश्वविद्यालय में उन्होंने 36 तालाब बनवाए, जिससे जल संकट दूर हुआ और ग्रामीणों का शहरों की ओर पलायन भी रुका।उन्होंने कहा कि स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में भी सार्थक बदलाव आ रहा है। उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि सीएसआर प्रोजेक्ट्स का सोशल और इकोनॉमिक ऑडिट किया जाना चाहिए, जिससे यह पता लगाया जा सके कि कम खर्च में कौन-कौन से अच्छे परिणाम सामने आए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कार्यरत संस्थाओं की ग्रेडिंग का भी सुझाव दिया ताकि जो लोग अच्छा कार्य कर रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता मिल सके और देशभर में इन कार्यों का प्रभाव और अधिक बढ़े। उन्होंने कहा कि यदि हम गुणवत्ता के आधार पर संस्थाओं को बढ़ावा देंगे तो यह सेक्टर और अधिक विश्वसनीय बन सकेगा।उन्होंने कहा कि खासकर ग्रामीण, आदिवासी और कृषि आधारित क्षेत्रों में सीएसआर के अंतर्गत जल, जमीन, जंगल और जानवर पर केंद्रित कार्यों की अत्यधिक आवश्यकता है। इन क्षेत्रों में शिक्षा का घोर अभाव है, जिसके समाधान के लिए उन्होंने कई प्रयास किए हैं। एक स्कूल का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जहां तीस हजार बच्चे पढ़ते हैं, वहां की माताओं को साथ लेकर एक महिला महाविद्यालय के हॉस्टल में प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया। वहां से 80 आदिवासी लड़कियां आईं, जिन्होंने वर्चुअल इंटरव्यू से चयन होकर राष्ट्रीय स्तर के खेलों में भाग लिया और उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
- 0- भारत-जापान साझेदारी के तहत अगली पीढ़ी की ई10 शिंकानसेन ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन में इस्तेमाल होगी0- भारत और जापान में एक साथ ई10 शिंकानसेन आरंभ होगीनई दिल्ली। बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स (बीकेसी) और ठाणे के बीच 21 किलोमीटर लंबी समुद्री सुरंग का पहला खंड खोले जाने का महत्वपूर्ण काम पूरा हो गया है। इस परियोजना के अंतर्गत हाल ही में 310 किलोमीटर लंबे विशेष पुल वायडक्ट का निर्माण कार्य भी पूरा किया गया है। ट्रैक बिछाने, ओवरहेड बिजली के तारों, स्टेशनों और पुलों का निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहा है। महाराष्ट्र में संबंधित निर्माण कार्य में तेज़ी आई है। साथ ही संचालन और नियंत्रण प्रणालियों की खरीद का काम भी भलीभांति चल रहा है।रोलिंग स्टॉक: जापान में तेज़ गति वाली रेलवे लाइनों के नेटवर्क शिंकानसेन में अभी में ई5 ट्रेनें चलाई जा रही हैं। इसकी अगली पीढ़ी की उन्नत ट्रेन ई10 हैं। जापान और भारत के बीच महत्वपूर्ण साझेदारी के तहत जापान की सरकार ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में ई10 शिंकानसेन ट्रेन चलाने पर सहमति व्यक्त की है। उल्लेखनीय बात यह है कि ई10 ट्रेनें भारत और जापान में एक साथ आरंभ की जाएंगी।जापानी तकनीक: बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत समूचे 508 किलोमीटर लंबे गलियारे को जापानी शिंकानसेन तकनीक से विकसित किया जा रहा है। यह गति, सुरक्षा और विश्वसनीयता के नए मानक स्थापित करेगा। साथ ही यह भारत और जापान के बीच प्रगाढ़ रणनीतिक और तकनीकी सहयोग को भी दर्शाता है।तेज गति से निर्माण कार्य: बुलेट ट्रेन के सम्पूर्ण मार्ग पर सिविल कार्य तेजी से चल रहा है। इसमें 310 किलोमीटर लंबे विशिष्ट पुल वायडक्ट का निर्माण हो चुका है। 15 नदी पुल पूर्ण हो चुके हैं और 4 का निर्माण अंतिम चरण में है। इसके 12 स्टेशनों में 5 बन चुके हैं और 3 का काम पूरा होने वाला है। बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स स्थित स्टेशन इंजीनियरिंग का नायाब नमूना है। यह स्टेशन भूमि से 32 दशमलव 5 मीटर नीचे स्थित होगा। इसकी नींव ऐसी तैयार की गई है कि इसके ऊपर 95 मीटर ऊंची इमारत बनाई जा सके।भविष्य की तीव्र गति ट्रेन योजनाओं पर सक्रियता से विचार: मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (एमएएचएसआर) परियोजना की सफलता भारत में भविष्य के बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का आधार तैयार कर रही है। भविष्य की इस तरह की हाई स्पीड रेल कॉरिडोर पर सक्रियता से विचार किया जा रहा है।इस योजना के विकास में उल्लेखनीय तेज गति अत्याधुनिक वैश्विक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा स्थापित करने की भारत की क्षमता को दर्शाती है, जिसमें जापान परिवर्तनकारी यात्रा में विश्वसनीय भागीदार की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
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मुंबई. कम आय वर्ग के लोगों में क्रेडिट कार्ड पर निर्भरता बढ़ रही है। ‘थिंक 360 डॉट एआई' के एक अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है। अध्ययन में कहा गया है कि 50,000 रुपये मासिक से कम कमाने वाले लगभग 93 प्रतिशत वेतनभोगी इस ‘प्लास्टिक मनी' पर निर्भर हैं। इस अध्ययन के तहत 12 महीने के दौरान भारत में 20,000 से अधिक वेतनभोगी और स्वरोजगार वाले व्यक्तियों के वित्तीय व्यवहार का विश्लेषण किया गया। इसके मुताबिक, 85 प्रतिशत स्वरोजगार वाले व्यक्ति क्रेडिट कार्ड पर निर्भर हैं।
मंगलवार को जारी अध्ययन में कहा गया कि ‘अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें' (बीएनपीएल) सेवाओं का इस्तेमाल 18 प्रतिशत स्वरोजगार व्यक्ति और 15 प्रतिशत वेतनभोगी व्यक्ति करते हैं। ‘थिंक 360 डॉट एआई' के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमित दास ने कहा, ‘‘भारत के विकसित होते कर्ज परिदृश्य में, क्रेडिट कार्ड और बीएनपीएल अब वेतनभोगी पेशेवरों से लेकर अस्थायी कर्मियों तक, सभी के लिए जरूरत बन गए हैं।'' रिपोर्ट में वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों (फिनटेक) के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख भी किया गया है, जो भारत की डिजिटल ऋण क्रांति का नेतृत्व कर रही हैं। अध्ययन में कहा गया कि फिनटेक कंपनियों ने 2022-23 में 92,000 करोड़ रुपये से अधिक के व्यक्तिगत ऋण वितरित किए, जो मात्रा के हिसाब से सभी नए कर्ज का 76 प्रतिशत है। -
नयी दिल्ली/ मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए अब वास्तविक और स्पैम एसएमएस के बीच अंतर कर पाना आसान होगा। इसकी वजह यह है कि दूरसंचार सेवा प्रदाताओं ने एसएमएस भेजने वाली संस्थाओं के नाम के साथ कुछ प्रतीकात्मक प्रत्यय लगाने शुरू कर दिए हैं। दूरसंचार कंपनियों के निकाय सीओएआई ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सेल्युलर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के सदस्यों में रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया शामिल हैं। सीओएआई ने एक बयान में कहा कि स्पैम संदेश भेजने वाले अब ओवर-द-टॉप यानी इंटरनेट मैसेजिंग ऐप का रास्ता अपनाने लगे हैं जिससे स्पैम और धोखाधड़ी वाले संदेशों की जांच के लिए सख्त उपाय लागू करने का उद्देश्य ही विफल हो जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए उपयोगकर्ताओं की सुविधा के लिए एसएमएस के शीर्षक पर ऐसे सांकेतिक अक्षर लगाए गए हैं जिन्हें देखकर यह समझा जा सकता है कि वह किस तरह का संदेश है। सीओएआई के महानिदेशक एस पी कोचर ने कहा, "सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं ने एसएमएस हेडर पर प्रचारात्मक ('पी'), सेवा-संबंधी ('एस'), लेनदेन संबंधी ('टी') और सरकारी ('जी') संचार प्रत्यय प्रणाली लागू कर दी है। दूरसंचार वाणिज्यिक संचार ग्राहक वरीयता विनियम (टीसीसीसीपीआर) ने 12 फरवरी, 2025 को टीसीसीसीपी विनियमन में संशोधन के जरिये इसे अनिवार्य कर दिया था।" कोचर ने कहा कि इस प्रत्यय प्रणाली के लागू होने से पारदर्शिता और उपभोक्ता संरक्षण में वृद्धि हुई है क्योंकि इस तरह के वर्गीकरण से ग्राहकों को आने वाले संदेशों की प्रकृति को आसानी से पहचानने, स्पैम को कम करने, अनुपालन को मजबूत करने और समग्र विश्वास एवं सुविधा में सुधार करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा, "उपयोगकर्ता एक नजर में ही प्रचार वाले, सेवा-संबंधी, लेनदेन संबंधी और सरकारी संदेशों को आसानी से पहचान और उनके बीच फर्क कर सकते हैं। प्रचार वाले संदेशों ('पी') को स्पष्ट रूप से चिह्नित करने से ग्राहकों को अवांछित विपणन संदेशों से बचने में मदद मिलती है, जिससे स्पैम को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है।" इसी तरह, ग्राहक वास्तविक लेनदेन संबंधी ('टी') और सेवा-संबंधी ('एस') संदेशों को भी आसानी से पहचान सकते हैं। ऐसा होने पर उनके धोखाधड़ी या घोटाले के शिकार होने की आशंका कम हो जाती है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि स्पैमर और घोटालेबाज लगातार गैर-विनियमित मैसेजिंग ऐप का सहारा ले रहे हैं। कोचर ने कहा, "ओटीटी संचार सेवाओं के इस्तेमाल से स्पैम और धोखाधड़ी वाले संदेशों में वृद्धि को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। अगर संचार परिवेश का बड़ा हिस्सा गैर-विनियमित रहता है तो किसी भी सहमति ढांचे या स्पैम पर काबू पाने वाले उपाय की सफलता अधूरी है।" उन्होंने कहा कि ओटीटी ऐप का विनियमन न होना दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और ओटीटी संचार सेवाओं के बीच एक असमान प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाता है, जिससे गोपनीयता, पता लगाने की क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं।
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मुंबई. मनोज कुमार की फिल्म ‘रोटी कपड़ा और मकान' में अभिनय करने और हिट टेलीविजन शो ‘ओम नमः शिवाय' और ‘अदालत' के निर्माण के लिए पहचाने जाने वाले दिग्गज अभिनेता-निर्माता धीरज कुमार का यहां एक अस्पताल में निधन हो गया। उनके एक पारिवारिक मित्र ने मंगलवार को यह जानकारी दी। वह 79 वर्ष के थे।
कुमार निमोनिया से गंभीर रूप से पीड़ित थे और उन्हें कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल की गहन चिकित्सा यूनिट में भर्ती कराया गया था। कुमार के करीबी सहयोगी और पारिवारिक मित्र अजय शुक्ला ने बताया, "आज सुबह 11 बजे कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में निमोनिया के कारण उनका निधन हो गया। वह कुछ समय से अस्वस्थ थे और शनिवार को बुखार, सर्दी और खांसी की शिकायत के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उम्र संबंधी जटिलताओं के कारण उन्हें आईसीयू में रखा गया था।" शुक्ला ने बताया कि कुमार का अंतिम संस्कार बुधवार को पवन हंस श्मशान घाट पर किया जाएगा। कुमार के परिवार ने एक बयान में उनके निधन की पुष्टि की।
उनके परिवार ने कहा, "गहरी संवेदना और शोक के साथ हम यह सूचित करते हैं कि अनुभवी अभिनेता, निर्माता, निर्देशक और एक अच्छे इंसान धीरज कुमार ने मंगलवार, 15 जुलाई 2025 को दोपहर लगभग 12 बजे अपने परिजनों की मौजूदगी में अंतिम सांस ली।" उनके परिजनों ने बताया "वे हमेशा हंसते रहते थे, हमेशा दूसरों की मदद को तैयार और हमेशा अपने परिवार, दोस्तों और पूरी इंडस्ट्री के लिए मौजूद रहते थे। एक सच्चे सज्जन पुरूष धीरज कुमार कई लोगों के लिए पिता समान, मित्र और मार्गदर्शक थे। उन्हें न केवल एक अभिनेता के रूप में बल्कि एक मार्गदर्शक बल्कि एक निर्मल आत्मा के रूप में भी याद किया जाएगा। हम इस कठिन समय में सभी की प्रार्थनाओं और समर्थन के लिए सभी का धन्यवाद करते हैं।" धीरज कुमार का करियर सिनेमा और टेलीविजन दोनों में पांच दशकों से ज़्यादा समय तक चला।
उन्होंने मनोरंजन इंडस्ट्री में अपना सफ़र 1965 में एक प्रतिभा प्रतियोगिता के ‘फाइनलिस्ट' के रूप में शुरू किया था। सुपरस्टार राजेश खन्ना और फिल्म निर्माता सुभाष घई भी इसका हिस्सा थे। उन्होंने 1970 की फिल्म ‘रातों का राजा' से शुरुआत करते हुए कई हिंदी और पंजाबी फिल्मों में अभिनय किया और मुख्य भूमिकाएं निभाईं। इसके बाद उन्होंने ‘रोटी कपड़ा और मकान' (1974), ‘सरगम' (1979) और ‘क्रांति' (1981) जैसी फिल्मों में सहायक भूमिकाएं निभाईं। पंजाबी सिनेमा में कुमार एक प्रमुख हस्ती थे और उन्होंने 1970 से 1984 के बीच 20 से ज़्यादा फिल्मों में अभिनय किया। 1986 में उन्होंने ‘क्रिएटिव आई लिमिटेड' नामक एक प्रोडक्शन हाउस की स्थापना की जिसने भारतीय टेलीविजन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में कंपनी ने ‘ओम नमः शिवाय' जैसे लोकप्रिय पौराणिक और पारिवारिक धारावाहिकों का निर्माण किया जो 1997 से 2001 तक दूरदर्शन नेशनल पर प्रसारित हुए। साथ ही उन्होंने ‘श्री गणेश', ‘रिश्तों के भंवर में उलझी नियति', ‘अदालत' और ‘घर की लक्ष्मी बेटियां' का भी निर्माण किया था। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन एस महेंद्र देव ने मंगलवार को कहा कि भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार नीति से जुड़ी अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के चालू वित्त वर्ष (2025-26) में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है। देव ने कहा कि अच्छे मानसून और नीतिगत ब्याज दर में लगातार तीन कटौतियों की वजह से मुद्रास्फीति कम रहने से घरेलू वृद्धि को समर्थन मिलेगा। प्रख्यात अर्थशास्त्री ने कहा, ‘‘भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार नीति से जुड़ी अनिश्चितताओं के दोहरे झटके जैसी कई वैश्विक चुनौतियां हैं। हालांकि, भारत की अर्थव्यवस्था जुझारू है और यह बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश बना हुआ है।'' देव ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के पहले दो महीनों के प्रमुख संकेतक घरेलू अर्थव्यवस्था के जुझारू प्रदर्शन का संकेत देते हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ पाना संभव है। उन्होंने कहा, ‘‘मजबूत राजकोषीय प्रबंधन के साथ भारत की मध्यम अवधि की वृद्धि संभावनाएं मजबूत प्रतीत होती हैं।'' ईएसी-पीएम के प्रमुख ने कहा कि बढ़ते सरकारी पूंजीगत व्यय का निजी उपभोग में स्वस्थ वृद्धि के साथ वृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक ने अनिश्चित वैश्विक परिवेश और व्यापार तनाव को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में भारत के वृद्धि दर अनुमान को घटाकर क्रमशः 6.2 प्रतिशत और 6.3 प्रतिशत कर दिया है। देव ने कहा कि घरेलू स्तर पर मौजूद कई अनुकूल परिस्थितियां निवेश, उपभोग और निर्यात को बढ़ावा देकर ग्रामीण और शहरी दोनों मांग को बढ़ा सकती हैं। उन्होंने कहा कि आपूर्ति पक्ष पर कृषि और सेवाएं अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं और आने वाले वर्षों में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि में भी सुधार होगा। मुद्रास्फीति से जुड़े एक सवाल पर देव ने कहा कि अच्छे मानसून के साथ इस साल खाद्य मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘अनुमान कच्चे तेल सहित कई वस्तुओं की कीमतों में निरंतर नरमी को दर्शा रहे हैं।''
इसके साथ ही देव ने कहा कि सरकारी पूंजीगत व्यय में वृद्धि का निजी क्षेत्र के निवेश पर भी असर पड़ेगा क्योंकि अध्ययनों से पता चला है कि राष्ट्रीय राजमार्गों और ग्रामीण सड़कों के निर्माण से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कारोबार बढ़ा है। उन्होंने कहा, ‘‘सरकारी पूंजीगत व्यय का कई गुना प्रभाव पड़ेगा। निजी पूंजीगत व्यय में कुछ सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं। - नई दिल्ली। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) 16 जुलाई को सी. सुब्रमण्यम हॉल, एनएएससी कॉम्प्लेक्स, नई दिल्ली में अपने 97वां स्थापना दिवस के अवसर पर पुरस्कार समारोह और विकसित कृषि प्रदर्शनी का आयोजन करेगा। इस कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान जारी कर दी।आईसीएआर स्थापना दिवस भारत के कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा के प्रमुख संस्थान की स्थापना का प्रतीक है, जो भारतीय कृषि को सुदृढ़ बनाने और खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में इसकी परिवर्तनकारी भूमिका को मान्यता देता है।दशकों से आईसीएआर ने फसल सुधार, पशुधन एवं मत्स्य विकास, कृषि-जैव प्रौद्योगिकी, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और डिजिटल कृषि के क्षेत्र में नवाचारों का नेतृत्व किया है। इस अवसर पर आईसीएआर राष्ट्रीय कृषि विज्ञान पुरस्कार की प्रस्तुति तथा नए उत्पादों, प्रौद्योगिकियों, प्रकाशनों एवं समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का विमोचन किया जाएगा। आईसीएआर स्थापना दिवस न केवल उपलब्धियों का उत्सव है, बल्कि अत्याधुनिक अनुसंधान, नवाचारों और क्षमता निर्माण के माध्यम से कृषक समुदाय की सेवा करने की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि भी है।
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नई दिल्ली। सरकार ने मॉनसून सत्र के लिए जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन), कराधान कानून (संशोधन) और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक सहित आठ नए विधेयकों को पेश करने के लिए सूचीबद्ध किया है। संसद का मॉनसून सत्र 21 जुलाई से शुरू हो रहा है। सत्र के हंगामेदार रहने की संभावना है, क्योंकि विपक्षी इंडिया गठबंधन दल ऑपरेशन सिंदूर, विदेश विशेष रूप से चीन के साथ संबंधों, प्रस्तावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बार-बार किए गए दावों पर सरकार से संसद को जानकारी देने की मांग कर सकते हैं।
राज्य सभा में विपक्ष के नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को राज्य सभा सभापति जगदीप धनखड़ से मुलाकात की। उन्होंने इस बैठक के बाद एक्सपर पोस्ट में कहा, ‘विपक्ष 21 जुलाई से एक उत्पादक राज्य सभा सत्र चाहता है। सत्र में कई रणनीतिक, राजनीतिक, विदेश नीति और सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर बहस और चर्चा करने की आवश्यकता है। ये सभी सार्वजनिक चिंता के विषय हैं।’लोक सभा और राज्य सभा सचिवालयों द्वारा सोमवार देर शाम जारी मॉनसून सत्र के लिए सरकार की अनंतिम कार्य सूची में 2016 के दिवाला और दिवालियापन संहिता में संशोधन करने वाले विधेयक का उल्लेख नहीं है। वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति वर्तमान में आईबीसी को और अधिक मजबूत बनाने के तरीकों की सिफारिश करने के लिए इसका अध्ययन कर रही है।‘आईबीसी के कामकाज और उभरते मुद्दों की समीक्षा’ विषय पर अपनी तीन बैठकों में पैनल ने बैंकों के दृष्टिकोण को समझने की कोशिश की है। पैनल 29 जुलाई को होने वाली अपनी बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक के प्रतिनिधियों से मिलेगा। सरकार इसी सत्र में भू-विरासत स्थल और भू-अवशेष (संरक्षण और रखरखाव), राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक व राष्ट्रीय डोपिंग रोधी (संशोधन) विधेयक भी पेश करने वाली है। - नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस, 2026 के अवसर पर घोषित किए जाने वाले पद्म पुरस्कार-2026 के लिए ऑनलाइन नामांकन/सिफारिशें 15 मार्च 2025 से शुरू हो गई हैं। पद्म पुरस्कारों के नामांकन की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2025 है। पद्म पुरस्कारों के लिए नामांकन/सिफारिशें राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल https://awards.gov.in पर ऑनलाइन प्राप्त की जाएंगी।पद्म पुरस्कार, अर्थात पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल हैं। वर्ष 1954 में स्थापित, इन पुरस्कारों की घोषणा प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर की जाती है। इन पुरस्कारों के अंतर्गत ‘उत्कृष्ट कार्य’ के लिए सम्मानित किया जाता है। पद्म पुरस्कार कला, साहित्य एवं शिक्षा, खेल, चिकित्सा, समाज सेवा, विज्ञान एवं इंजीनियरी, लोक कार्य, सिविल सेवा, व्यापार एवं उद्योग आदि जैसे सभी क्षेत्रों/विषयों में विशिष्ट और असाधारण उपलब्धियों/सेवा के लिए प्रदान किए जाते हैं। जाति, व्यवसाय, पद या लिंग के भेदभाव के बिना सभी व्यक्ति इन पुरस्कारों के लिए पात्र हैं। चिकित्सकों और वैज्ञानिकों को छोड़कर अन्य सरकारी सेवक, जिनमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में काम करने वाले सरकारी सेवक भी शामिल है, पद्म पुरस्कारों के पात्र नहीं हैं।सरकार पद्म पुरस्कारों को “पीपल्स पद्म” बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। अत:, सभी नागरिकों से अनुरोध है कि वे नामांकन/सिफारिशें करें। नागरिक स्वयं को भी नामित कर सकते हैं। महिलाओं, समाज के कमजोर वर्गों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों, दिव्यांग व्यक्तियों और समाज के लिए निस्वार्थ सेवा कर रहे लोगों में से ऐसे प्रतिभाशाली व्यक्तियों की पहचान करने के ठोस प्रयास किए जा सकते हैं जिनकी उत्कृष्टता और उपलब्धियां वास्तव में पहचाने जाने योग्य हैं।नामांकन/सिफारिशों में पोर्टल पर उपलब्ध प्रारूप में निर्दिष्ट सभी प्रासंगिक विवरण शामिल होने चाहिए, जिसमें वर्णनात्मक रूप में एक उद्धरण (citation) (अधिकतम 800 शब्द) शामिल होना चाहिए, जिसमें अनुशंसित व्यक्ति की संबंधित क्षेत्र/अनुशासन में विशिष्ट और असाधारण उपलब्धियों/सेवा का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया हो।इस संबंध में विस्तृत विवरण गृह मंत्रालय की वेबसाइट (https://mha.gov.in) पर ‘पुरस्कार और पदक’ शीर्षक के अंतर्गत और पद्म पुरस्कार पोर्टल (https://padmaawards.gov.in) पर उपलब्ध हैं। इन पुरस्कारों से संबंधित संविधि (statutes) और नियम वेबसाइट पर https://padmaawards.gov.in/AboutAwards.aspx लिंक पर उपलब्ध हैं।
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नई दिल्ली। अंतरिक्ष यात्रा पर गए भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला वापस धरती पर लौट आए हैं। आज उनके अंतरिक्ष यान स्पेसएक्स ड्रैगन ने कैलिफोर्निया के सैन डिएगो में प्रशांत महासागर में सफल लैंडिंग की। उनके साथ अमेरिका की पैगी व्हिटसन, पोलैंड के स्लावोश उज्नांस्की-विस्निव्स्की और हंगरी के टिबोर कपु भी यान से बाहर आए। यह यान आज दोपहर 3 बजे कैलिफोर्निया के तट पर सफल लैंड हुआ। इससे पहले, यह 14 जुलाई को सुबह 7:05 बजे EDT (भारतीय समयानुसार शाम 4:35 बजे) ISS के हार्मनी मॉड्यूल से अलग हुआ था।
शुभांशु शुक्ला की वापसी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मैं पूरे देश की ओर से ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का धरती पर वापस स्वागत करता हूं। ISS की यात्रा पर जाने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री के रूप में उन्होंने अपनी मेहनत, हिम्मत और जज्बे से लाखों सपनों को प्रेरणा दी है। यह हमारे अपनी मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन – गगनयान की दिशा में एक और मील का पत्थर है।”18 दिन के बाद लौटे हैं शुक्ला39 वर्षीय शुभांशु शुक्ला भारतीय वायुसेना के ऑफिसर और टेस्ट पायलट हैं। उन्होंने कुल 18 दिन ISS में बिताए। इस दौरान उन्होंने 310 से ज्यादा चक्कर लगाए और लगभग 1.3 करोड़ किलोमीटर की दूरी तय की। उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा दिए गए सात माइक्रोग्रैविटी प्रयोग पूरे किए। शुक्ला की यह यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंक 1984 में राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष की सैर पर जाने वाले वह दूसरे भारतीय हैं।शुभांशु की बहन सुची शुक्ला ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि बचपन में एक एयर शो देखने के बाद शुभांशु को विमानों की गति और आवाज ने इतना प्रभावित किया कि तभी से उन्होंने आसामान में उड़ान भरने का सपना देखा था।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुभांशु 17 अगस्त तक भारत वापस लौट सकते हैं। अंतरिक्ष यात्रियों को लैंडिंग के बाद मेडिकल जांच और अन्य जरूरी चीजों के लिए आमतौर पर सात से दस दिन लगते हैं, ताकि वे पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में फिर से ढल सकें। ये सभी प्रक्रिया पूरा हो जाने के बाद शुक्ला वापस भारत लौट सकेंगे। -
नई दिल्ली। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने ISS (अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन) पर भारत के पहले मानव मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए आज मंगलवार को पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के पिता शंभू दयाल शुक्ला से बात की। रक्षा मंत्री ने उनकी वापसी पर खुशी जताई और उनके पिता से कहा कि पूरे देश को उन पर गर्व है। शुभांशु 18 दिन बाद अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से पृथ्वी पर लौटे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर कहा, “ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक एक्सिओम-4 मिशन से सफल वापसी हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने न केवल अंतरिक्ष को छुआ है बल्कि भारत की आकांक्षाओं को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक उनकी यात्रा और वापसी केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है बल्कि यह भारत की बढ़ती अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं के लिए एक गौरवपूर्ण कदम है। मैं उनके भविष्य के प्रयासों में उन्हें अपार सफलता की कामना करता हूं।”IAF ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला के पिता शंभू दयाल शुक्ला ने कहा, “ये भावुक पल है, बच्चे को देखकर बहुत अच्छा लगा रहा है। उसकी यात्रा अच्छी रही और हमारी बात होती रहती थी। ईश्वर को बहुत-बहुत धन्यवाद उसका मिशन पूरा हुआ। हम सभी देशवासियों का भी धन्यवाद करते हैं। हम उसका बहुत अच्छे तरीके से स्वागत करेंगे।” उन्होंने कहा कि शुभांशु सकुशल पृथ्वी पर आ गया। हमारी यही इच्छा थी कि हमारा बच्चा सकुशल पृथ्वी पर वापस आ जाए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बच्चे को आर्शीवाद दिया और हमें बधाई दी।शुभांशु शुक्ला की मां आशा शुक्ला ने कहा की कि मैं इस चीज को शब्दों में बयान नहीं कर सकती हूं। जब लैंड हो रहा था तब बस थोड़ा डर लगा था लेकिन सब अच्छे से हो गया है ईश्वर साथ में हैं, उन्होंने उसे वहां पहुंचाया था और उन्होंने ही उसे सुरक्षित लैंड कराया है। आशा शुक्ला ने कहा, “पीएम मोदी ने भी बधाई दी और हमें बहुत अच्छा लग रहा है हम इसका वर्णन नहीं कर सकते।वहीं, शुभांशु शुक्ला की बहन शुचि मिश्रा ने कहा, “वो वापस आ गए हैं। यह पूरे देश के लिए बहुत गौरव का क्षण है, हम बहुत उत्साहितहैं।आपको बता दें, 23 घंटे के सफर बाद ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट ने कैलिफोर्निया के समुद्र पर लैंड किया। चारों एस्ट्रोनॉट एक दिन पहले शाम आईएसएस से पृथ्वी के लिए रवाना हुए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैप्टन शुभांशु शुक्ला की सकुशल वापसी पर हर्ष जताया है। उन्होंने अंतरिक्ष से धरती पर लौटने की इस यात्रा को मील का पत्थर करार दिया है।आईएसएस पर अपने दो सप्ताह से अधिक के प्रवास के दौरान, शुभांशु शुक्ला ने कुल 310 से ज़्यादा बार पृथ्वी की परिक्रमा की और लगभग 1.3 करोड़ किलोमीटर की दूरी तय की। यह दूरी पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी से 33 गुना अधिक है, जो अपने आप में एक शानदार उपलब्धि है। -
नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा से भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन गगनयान को बड़ी मदद मिलने जा रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बताया कि यह मिशन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण अनुभव साबित हुआ है।
शुभांशु शुक्ला 41 वर्षों में अंतरिक्ष जाने वाले पहले भारतीय बने। उन्होंने 25 जून को स्पेसएक्स के फाल्कन रॉकेट से ड्रैगनफ्लाई स्पेसक्राफ्ट में सवार होकर अंतरिक्ष की यात्रा शुरू की थी, जो 26 जून को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से जुड़ा। उन्होंने ISS और स्पेस शटल में कई वैज्ञानिक प्रयोग किए। ISRO के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के निदेशक नीलेश एम. देसाई ने बताया, “शुभांशु शुक्ला के लिए यह एक अविस्मरणीय अनुभव रहा। उन्होंने अंतरिक्ष और माइक्रोग्रैविटी में कई महत्वपूर्ण प्रयोग किए, जिनका फायदा हमें गगनयान मिशन में मिलेगा।”ISRO के मुताबिक, इस मिशन पर कुल 600 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें दो भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग और यात्रा से जुड़ी सभी तैयारियां शामिल थीं। हालांकि, अंत में सिर्फ शुभांशु शुक्ला को ISS भेजा गया और प्रशांत नायर बैकअप अंतरिक्ष यात्री के रूप में तैयार रहे। ISRO ने बताया कि AX-4 मिशन की स्पेसक्राफ्ट को सोमवार सुबह 4:35 बजे भारतीय समयानुसार पर इंटरनेशनल स्पेस सेंटर से अनडॉक कर दिया गया। अब यह स्पेसक्राफ्ट लगभग 22.5 घंटे की यात्रा के बाद मंगलवार दोपहर 3 बजे भारतीय समयानुसार पर कैलिफोर्निया के तट पर लैंड करेगा। लैंडिंग के बाद सभी अंतरिक्ष यात्रियों की मेडिकल जांच और पुनर्वास प्रक्रिया होगी।नीलेश देसाई ने यह भी कहा कि गगनयान मिशन को लेकर ISRO की अगली योजना इस साल के अंत तक एक मानवरहित मिशन लॉन्च करने की है। इसके बाद दो और मानवरहित मिशन किए जाएंगे और फिर एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को गगनयान यान से अंतरिक्ष भेजा जाएगा, जहां वह 2 से 7 दिनों तक अंतरिक्ष में रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि यह मिशन NASA और SpaceX के सहयोग से सफलतापूर्वक पूरा किया गया। देसाई ने कहा, “हमें जो अनुभव मिला है, उससे गगनयान मिशन की योजना को और बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकेगा।”- - नई दिल्ली। 92 प्रतिशत भारतीय युवा मुफ्त वीजा, हायरिंग और ट्रेनिंग सपोर्ट मिलने पर ग्लोबल जॉब्स के लिए आवेदन करने की इच्छा रखते हैं। यह जानकारी सोमवार को आई एक रिपोर्ट में दी गई। एआई पावर्ड ग्लोबल टैलेंट मोबिलिटी प्लेटफॉर्म टर्न ग्रुप ने अपनी सर्वे रिपोर्ट में कहा है कि आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में खासकर बढ़ते इमिग्रेशन-रिलेटेड फ्रॉड के साथ मार्गदर्शन- विश्वास की कमी और विश्वसनीय संसाधनों तक सीमित पहुंच टैलेंट मोबिलिटी में प्रमुख बाधाएं हैं।सर्वे के अनुसार, 57 प्रतिशत रेस्पॉन्डेंट्स को आवेदन प्रक्रिया शुरू करने के तरीके के बारे में जानकारी का अभाव है।रिपोर्ट में करियर मार्गदर्शन और पहुंच में अंतर को भी उजागर किया गया है। लगभग 34.60 प्रतिशत रेस्पॉन्डेंट्स ने कहा कि अविश्वसनीय एजेंटों और विदेशी भर्ती कर्ताओं की बढ़ती संख्या के कारण उन्हें विदेशों में काम करने को लेकर विश्वास एक बड़ी बाधा महसूस होती है।रिपोर्ट में बताया गया है कि उच्च शुल्क ने 27 प्रतिशत उत्तरदाताओं को हतोत्साहित किया, जो अक्सर बेईमान या अस्पष्ट सर्विस प्रोवाइडर से जुड़े होते हैं।वर्ल्डवाइड करियर तक पहुंच बनाने में दो सबसे बड़े कारक लैंग्वेज सपोर्ट और क्विक जॉब मैचिंग थे, जिसका क्रमशः 36.5 प्रतिशत और 63.5 प्रतिशत रेस्पॉन्डेंट्स ने समर्थन किया।टर्न ग्रुप के संस्थापक और सीईओ अविनव निगम ने कहा, “भारत दुनिया के सबसे युवा और महत्वाकांक्षी कार्यबल के स्थान में से एक है, लेकिन फिर भी लाखों लोग वैश्विक अवसरों तक नहीं पहुंच पाते हैं। अनैतिक एजेंट और रिक्रूटर्स का अत्यधिक फीस वसूल कर उम्मीदवारों को धोखा देना इस समस्या का मूल कारण है।”निगम ने आगे कहा कि युवाओं के सामने एक और बड़ी चुनौती ग्लोबल वर्कस्पेस में सुचारू रूप से बदलाव के लिए क्वालिटी अपस्किलिंग प्रोग्राम की कमी है।यह सर्वे हेल्थकेयर, लॉजिस्टिक्स, इंजीनियरिंग जैसे हाई-डिमांड सेक्टर के 2,500 महत्वाकांक्षी पेशेवरों पर किया गया था, जिसमें टैलेंट मोबिलिटी प्रमुख कमियों को उजागर किया गया था।लगभग 79 प्रतिशत रेस्पॉन्डेंट्स हेल्थकेयर इंडस्ट्री से थे, जिसमें पैरामेडिकल स्टाफ, डेंटल असिस्टेंट्स और नर्स शामिल हैं। ऐसे समय में जब जर्मनी, ब्रिटेन, खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) और जापान जैसे देश कुशल श्रम की भारी कमी का सामना कर रहे हैं, ये आंकड़े ग्लोबल हेल्थ इकोसिस्टम में योगदान देने के लिए तैयार एक अनटैप्ड टैलेंट पूल को दर्शाते हैं।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को तमिल सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री बी. सरोजा देवी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मोदी ने कहा कि उन्हें भारतीय सिनेमा और संस्कृति की एक अनुकरणीय प्रतिमूर्ति के रूप में याद किया जाएगा। उनके विविध अभिनय ने पीढ़ियों पर अमिट छाप छोड़ी है। विभिन्न भाषाओं और विविध विषयों पर आधारित उनकी कृतियां उनकी बहुमुखी प्रतिभा को उजागर करती हैं।
बी. सरोजा देवी को भारतीय सिनेमा और संस्कृति की एक अनुकरणीय प्रतिमूर्ति के रूप में याद किया जाएगाप्रधानमंत्री ने एक्स पोस्ट में कहा, “प्रसिद्ध फिल्मी हस्ती बी. सरोजा देवी जी के निधन से दुखी हूं। उन्हें भारतीय सिनेमा और संस्कृति की एक अनुकरणीय प्रतिमूर्ति के रूप में याद किया जाएगा। उनके विविध अभिनय ने पीढ़ियों पर अमिट छाप छोड़ी। विभिन्न भाषाओं और विविध विषयों पर आधारित उनकी कृतियां उनकी बहुमुखी प्रतिभा को उजागर करती हैं। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं।”1962 में ‘चतुर्भाषा तारे’ के रूप में बी. सरोजा देवी को किया गया था सम्मानितउल्लेखनीय है कि तमिल सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री बी. सरोजा देवी का सोमवार को बेंगलुरु के मल्लेश्वरम स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। उनके निधन पर पूरा देश गमगीन है। वह 87 वर्ष की थीं। पद्मभूषण से अलंकृत सरोजा देवी ने अपने सात दशक लंबे फिल्मी करियर में 200 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया। वह सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं थीं, बल्कि एक प्रेरणा थीं, जिन्होंने चार भाषाओं- तमिल , कन्नड़ , तेलुगु और हिंदी फिल्मों में अभिनय कर एक मिसाल कायम की। चार भाषाओं में उनकी लोकप्रियता के चलते 1962 में उन्हें ‘चतुर्भाषा तारे’ के रूप में सम्मानित किया गया।सरोजा देवी को उनके बेहतरीन अभिनय के लिए ‘अभिनया सरस्वती’ भी कहा जाता थासरोजा देवी को उनके बेहतरीन अभिनय के लिए ‘अभिनया सरस्वती’ कहा जाता था। उनकी पहली बड़ी सफलता 1955 की कन्नड़ फिल्म ‘महाकवि कालिदास’ रही। इसमें उन्होंने सहायक भूमिका निभाई थी, उस वक्त उनकी उम्र महज 17 साल थी। इस फिल्म ने बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड जीता। इसके बाद, उन्होंने तमिल में ‘थंगमलाई रागासियम’ (1957) जैसी फिल्मों में नृत्य और अभिनय से अपनी पहचान बनाई। एमजी रामचंद्रन (एमजीआर) के साथ उनकी जोड़ी पसंद की गई। दोनों ने मिलकर 26 हिट फिल्में दीं, जिसमें ‘नादोडी मन्नन’ (1958) ने उन्हें तमिलनाडु की टॉप अभिनेत्रियों में स्थापित किया।हिंदी फिल्मों में दिलीप कुमार, राजेंद्र कुमार और शम्मी कपूर जैसे बड़े सितारों के साथ काम कियाहिंदी फिल्मों में भी उन्होंने दिलीप कुमार, राजेंद्र कुमार और शम्मी कपूर जैसे बड़े सितारों के साथ काम किया। ससुराल (1960), ओपेरा हाउस (1961), परीक्षा , हांगकांग (1962) और प्यार किया तो डरना क्या (1963) जैसी कई फिल्मों में सरोजा देवी ने अभिनय किया।1967 में शादी के बाद उनका करियर धीरे-धीरे कन्नड़ फिल्मों की ओर केंद्रित हो गयाकन्नड़ सिनेमा में उनकी उल्लेखनीय फिल्में ‘चिंतामणि’, ‘स्कूल मास्टर’, और ‘किट्टूरू रानी चेन्नम्मा’ रहीं। तेलुगु फिल्मों में उन्होंने एनटी रामाराव और अक्किनेनी नागेश्वर राव के साथ भी सफल फिल्में कीं। 1960 के दशक में वह दक्षिण भारतीय फिल्मों की एक फैशन आइकन बन गईं। 1967 में शादी के बाद उनका करियर धीरे-धीरे कन्नड़ फिल्मों की ओर केंद्रित हो गया, लेकिन उन्होंने तमिल और तेलुगु में भी सक्रिय रूप से काम जारी रखा। उन्होंने 161 मुख्य भूमिकाएं निभाईं, जिनमें रोमांटिक से लेकर सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्में शामिल थीं।सरोजा देवी को सिनेमा में उनके योगदान के लिए कई सम्मान मिले1985 में पति के निधन के बाद उन्होंने कुछ समय फिल्मों से ब्रेक लिया, फिर अभिनय में लौट आईं लेकिन सहायक भूमिका के तौर पर। उन्होंने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार निर्णायक मंडल की अध्यक्षता भी की और कर्नाटक फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष रहीं। सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहते हुए उन्होंने कई धर्मार्थ अभियानों का नेतृत्व किया। 2019 में उनकी फिल्म ‘नतासार्वभौमा’ रिलीज हुई।सरोजा देवी को सिनेमा में उनके योगदान के लिए कई सम्मान मिले। उन्हें 1969 में पद्मश्री और 1992 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, उन्हें तमिलनाडु का कलाईममणि पुरस्कार और बैंगलोर विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की मानद उपाधि मिली। -
नई दिल्ली। नीति आयोग के सदस्य डॉ. अरविंद विरमानी ने सोमवार को नई दिल्ली में वित्तीय वर्ष 2025 (अक्टूबर से दिसंबर) की तीसरी तिमाही के लिए “ट्रेड वॉच क्वार्टरली” पुस्तिका के तीसरे संस्करण का विमोचन किया। इस तिमाही के लिए भारत की व्यापार स्थिति का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करने के अतिरिक्त, इस संस्करण का विषयगत खंड अमेरिकी टैरिफ संरचनाओं में हाल के बदलावों पर केंद्रित है।
डॉ. विरमानी ने नवीनतम व्यापार गतिशीलता को गहन विश्लेषणात्मक गहराई के साथ प्रस्तुत करने वाले एक व्यापक व्यापार प्रकाशन के लिए पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत की उभरती हुई व्यापार भागीदारी, बढ़ती प्रतिस्पर्धा, नवोन्मेषण और अमेरिका जैसे प्रमुख बाजारों में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने के रणनीतिक प्रयासों द्वारा संचालित अर्थव्यवस्था की गहन प्रगति को दर्शाती है, जो अमेरिकी व्यापार नीति में हाल के बदलावों के अनुरूप है।डॉ. विरमानी ने यह भी रेखांकित किया कि ऐसे समय में जब भू-राजनीतिक बदलावों, प्रौद्योगिकीय बदलावों और नीतिगत अनिश्चितता के कारण वैश्विक व्यापार का स्वरूप बदल रहा है, यह संस्करण नीति निर्माताओं, उद्योग और शिक्षा जगत के लिए एक मूल्यवान संसाधन के रूप में कार्य करता है। यह समग्र व्यापार सुगमता को बढ़ाने और वैश्विक बाजारों में मज़बूत भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए दूरदर्शी सुझाव प्रदान करता है।नीति आयोग के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2024) में भारत के व्यापार निष्पादन ने भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच सतर्क गतिशीलता प्रदर्शित की। वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में व्यापारिक निर्यात 3 प्रतिशत (108.7 बिलियन डॉलर तक) बढ़ा, जबकि आयात में 6.5 प्रतिशत (187.5 बिलियन डॉलर तक) की वृद्धि हुई। सेवा निर्यात में 17 प्रतिशत की वृद्धि से प्रेरित 52.3 बिलियन डॉलर के सेवा अधिशेष ने घाटे के अंतर को कम करने में मदद की, जिसने वैश्विक सेवा अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती शक्ति को रेखांकित किया। वहीं, निर्यात संरचना स्थिर बनी हुई है और कुछ उत्पाद जैसे विमान, अंतरिक्ष यान और पुर्जे 200 प्रतिशत से अधिक की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि के साथ शीर्ष दस निर्यातों में शामिल हो गए हैं। इसके अतिरिक्त, भारत वर्ष 2024 में 269 बिलियन डॉलर के डिजिटल तरीके से डिलीवर की गई सेवाओं (डीडीएस) के निर्यात के साथ विश्व के पांचवें सबसे बड़े निर्यातक के रूप में स्थान पर रहा। -
नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नई दिल्ली में भारत विकास परिषद् के 63वें स्थापना दिवस समारोह को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित किया। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अपनी स्थापना के छह दशक बाद भी भारत विकास परिषद उपयुक्तता और प्रासंगिकता के साथ काम कर रही है। इस संस्था ने सेवा को संगठन, संगठन को संस्कार और संस्कार को राष्ट्र निर्माण के साथ जोड़ने की अद्भुत कार्य-संस्कृति विकसित की है। उन्होंने कहा कि भारत विकास परिषद् ने 63 साल तक बिना किसी प्रसिद्धि की चाहत के जरूरतमंद लोगों की सेवा की है और विश्व को आज ऐसे ही संगठन की ज़रूरत है।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने औपनिवेशिक विरासत (Colonial Legacy) से मुक्ति के लिए ढेर सारे काम किए। राजपथ का नाम कर्तव्य पथ करने से यह करोड़ो नागरिकों को संविधान में बताए गए कर्तव्यों की याद दिलाता है। अमित शाह ने कहा कि लोकतंत्र में अधिकार को अपनी राजनीति का जरिया बनाने वालों के बीच यदि कोई व्यक्ति कर्तव्य की याद दिलाता है तो संविधान की भावना (Spirit) जमीन पर उतरती है।उन्होंने कहा कि जब देश की नौसेना अंग्रेजों की सेना का चिह्न बदलकर शिवाजी महाराज का चिह्न अपनाती है तो हर भारतीय को गर्व होता है। आजादी के बाद शहीद हुए सैनिकों की याद में समर स्मारक बनाया गया। संसद में सेंगोल की स्थापना के जरिये एक परिकल्पना रखी है कि भारत किस दिशा में आगे बढ़ रहा है। गृह मंत्री शाह ने कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी जी के हाथों से संसद में सेंगोल स्थापित किया जा रहा था, तब करोड़ों भारतीयों के मन में आया कि हमारे मनीषियों ने जिस भारत की कल्पना की थी, हम उस रास्ते पर आगे निकल चुके हैं।केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत विकास परिषद् का 63वां स्थापना दिवस भारत का विकास भारतीय दृष्टिकोण से चाहने वाले लोगों के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण दिन है। उन्होंने कहा कि कोई भी संस्था अगर 63 साल तक निर्विवाद चलती है तो यह अपने आप में बहुत बड़ी बात है, परंतु सेवा और सृजन शक्ति का संगठन करने वाली संस्था जब 63 साल चलती है तो इसके पीछे काफी तपस्वियों का तप होता है।अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने देशवासियों के सामने भारत को वर्ष 2047 तक पूर्ण विकसित और विश्व में हर क्षेत्र में सर्वप्रथम राष्ट्र बनाने का संकल्प रखा है। इस संकल्प में कल्पना और संकल्प के साथ संकल्प को सिद्ध करने की कार्ययोजना भी है। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने पांच लक्ष्य सबके सामने रखे हैं, जिनमें विकसित भारत का लक्ष्य, गुलामी के हर अंश से मुक्ति, अपनी विरासत पर गर्व, एकता एवं एकजुटता का भाव और नागरिकों में कर्तव्य की भावना का निर्माण शामिल है। अमित शाह ने कहा कि भारत विकास परिषद लंबे समय से इन पांचों लक्ष्यों पर एक सेवक की भांति काम कर रही है।अपने संबोधन के दौरान, अमित शाह ने कहा कि मोदी जी के 11 साल के कार्यकाल को इतिहासकार स्वर्ण अक्षरों से अंकित करेंगे। उन्होंने कहा कि बीते 11 साल में 55 करोड़ से ज्यादा लोगों के बैंक अकाउंट खोले गए, 15 करोड़ घरों में शुद्ध पेयजल पहुंचाया गया, 12 करोड़ से अधिक मकानों में शौचालय का निर्माण किया। श्री शाह ने कहा कि 10 करोड़ से अधिक घरों में गैस सिलिंडर और 4 करोड़ से अधिक लोगों को खुद का घर दिया। मुद्रा योजना के तहत करोड़ो की संख्या में ऋण दिए गए, जिनमें से दो-तिहाई ऋण मातृ शक्ति को देकर उन्हें देश के विकास से जोड़ने का काम किया। उन्होंने कहा कि ‘लखपति दीदी’ के माध्यम से मातृशक्ति को आगे बढाया जा रहा है।केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि विरासत को भूले बगैर, विकास के आधार पर हम आगे बढ़ें और हमारे सभी स्वतंत्रता सेनानियों की कल्पना के भारत का निर्माण करें। उन्होंने कहा कि अकेले सरकारें सारी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकती, जब तक सेवा से जुड़े संगठन इसी रास्ते पर एक ही लक्ष्य के साथ न चलें। -
नयी दिल्ली. शुभांशु शुक्ला और एक्सिओम-4 के तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री सोमवार को ड्रैगन ग्रेस अंतरिक्ष यान में प्रवेश कर गए और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर 18 दिनों के प्रवास के बाद पृथ्वी पर वापस अपनी यात्रा शुरू करने के लिए तैयार हैं। मिशन पायलट शुक्ला, कमांडर पैगी व्हिटसन, तथा मिशन विशेषज्ञ पोलैंड के स्लावोज उज्नान्स्की-विस्नीवस्की और हंगरी के टिबोर कापू ने ड्रैगन ग्रेस अंतरिक्षयान में प्रवेश किया और पृथ्वी की 22.5 घंटे की यात्रा के लिए अपने अंतरिक्ष सूट पहन लिए। ड्रैगन ग्रेस अंतरिक्ष यान का हैच, जो इसे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से जोड़ता था, भारतीय समयानुसार अपराह्न 2:37 बजे बंद कर दिया गया और चालक दल के सदस्य भारतीय समयानुसार अपराह्न 4:35 बजे कक्षीय प्रयोगशाला से अलग होने से पहले, अंतिम निरीक्षण कर रहे हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा अंतरिक्ष स्टेशन से प्रस्थान प्रक्रियाओं का सीधा प्रसारण किया गया। आईएसएस से यान के अलग होने की प्रक्रिया के बाद, ड्रैगन आईएसएस से सुरक्षित दूरी बनाने के लिए इंजन को संचालित करने की एक श्रृंखला का प्रदर्शन करेगा और पुनः प्रवेश प्रक्रिया शुरू करेगा। अंतिम तैयारियों में कैप्सूल के ट्रंक को अलग करना और वायुमंडल में प्रवेश से पहले हीट शील्ड को स्थापित करना शामिल है, जिससे अंतरिक्ष यान को लगभग 1,600 डिग्री सेल्सियस के तापमान के संपर्क में लाया जा सकेगा। पैराशूट दो चरण में तैनात किए जाएंगे - पहले लगभग 5.7 किमी की ऊंचाई पर स्थिरीकरण पैराशूट, उसके बाद लगभग दो किमी की ऊंचाई पर मुख्य पैराशूट। अनडॉकिंग के लगभग 22.5 घंटे बाद कैलिफोर्निया के तट पर यान के पहुंचने की उम्मीद है, और अंतरिक्ष कैप्सूल को एक विशेष जहाज द्वारा वापस लाया जाएगा। यान के मंगलवार को भारतीय समयानुसार अपराह्न 3:01 बजे कैलिफ़ोर्निया के तट पर पहुंचने की उम्मीद है।
एक्सिओम-4 मिशन ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा 25 जून को शुरू की थी, जब ड्रैगन अंतरिक्ष कैप्सूल को ले जाने वाला फाल्कन-9 रॉकेट फ्लोरिडा से आईएसएस की ओर रवाना हुआ था।
















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