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- नई दिल्ली। भारत के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की टी20 सीरीज के लिए जिम्बाब्वे टीम का ऐलान कर दिया गया है। 15 सदस्यीय टीम में पहली बार विकेटकीपर-बल्लेबाज तफादजवा त्सिगा को शामिल किया गया है। इसके साथ ही ऑलराउंडर वेस्ली मधेवेरे और पेसर न्यूमैन न्यामहुरी की जिम्बाब्वे टी20 टीम में वापसी हुई है। ये तीनों खिलाड़ी क्लाइव मडेंडे, टिनोटेंडा मापोसा और ताशिंगा मुसेकिवा की जगह टीम में आए हैं, जो हाल ही में बांग्लादेश के खिलाफ खेलने वाली टीम का हिस्सा थे। टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 23 जुलाई को खेला जाना है। वहीं, दूसरा मैच 25 जुलाई और अंतिम मैच 26 जुलाई को होगा। सीरीज के सभी मुकाबलों की मेजबानी हरारे का हरारे स्पोर्ट्स क्लब मैदान करेगा।जिम्बाब्वे की ओर से 10 टेस्ट मैच खेल चुके त्सिगा ने अब तक सफेद गेंद की क्रिकेट में अपना डेब्यू नहीं किया है। बांग्लादेश सीरीज के दौरान टेस्ट और वनडे टीम में शामिल रहे मधेवेरे जुलाई 2025 के बाद पहली बार टी20 टीम में लौटे हैं। वह अब तक जिम्बाब्वे की ओर से कुल 79 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेल चुके हैं। वहीं, न्यामहुरी इंजरी से उबरने के बाद टीम में वापसी कर रहे हैं। चोट के चलते वह बांग्लादेश के खिलाफ हुई वनडे सीरीज में टीम का हिस्सा नहीं रहे थे। न्यामहुरी की जगह बांग्लादेश के खिलाफ वनडे सीरीज में हिस्सा लेने वाले तनाका चिवांगा टीम में अपनी जगह बनाए रखने में सफल रहे हैं।टीम की कमान सिकंदर रजा के हाथों में सौंपी गई है। बांग्लादेश के खिलाफ रजा की अगुवाई में जिम्बाब्वे का प्रदर्शन शानदार रहा। टीम ने एकमात्र टेस्ट और वनडे सीरीज को दमदार प्रदर्शन करते हुए अपने नाम किया था। हालांकि, टी20 सीरीज में जरूर जिम्बाब्वे को 1-2 से हार का सामना करना पड़ा था। मेजबान टीम के सामने भारत की मुश्किल चुनौती होगी। हालांकि, टीम इंडिया को हाल ही में आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ करारी हार का सामना करना पड़ा है। भारत और जिम्बाब्वे की आखिरी भिड़ंत टी20 विश्व कप 2026 के सुपर 8 स्टेज में हुई थी, जहां भारत ने जिम्बाब्वे को 72 रनों से हराया था।भारत के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए जिम्बाब्वे का स्क्वॉड: सिकंदर रजा (कप्तान), ब्रायन बेनेट, रयान बर्ल, तनाका चिवांगा, बेन करन, ब्रैड इवांस, वेस्ली मधेवेरे, तदीवानाशे मारुमानी (विकेटकीपर), वेलिंगटन मसाकाद्जा, ब्लेसिंग मुजारबानी, डियोन मायर्स, रिचर्ड नगारवा, न्यूमैन न्यामहुरी, मिल्टन शुम्बा, और तफादजवा त्सिगा (विकेटकीपर)।
- नयी दिल्ली. शतरंज की सर्वोच्च संस्था फिडे से मान्यता प्राप्त टोटल शतरंज विश्व चैंपियनशिप टूर का आधिकारिक पायलट संस्करण 10 से 21 नवंबर तक हंगरी के बुडापेस्ट में आयोजित किया जाएगा। यहां प्रतियोगिता शतरंज के तीनों प्रारूप क्लासिकल, रैपिड और ब्लिट्ज में आयोजित की जाएगी। इन तीनों प्रारूप में सबसे अधिक अंक हासिल करने वाला खिलाड़ी चैंपियन बनेगा। बुडापेस्ट में होने वाली प्रतियोगिता चैंपियनशिप के प्रारूप के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में काम करेगी, जिसे 2027 में विश्व स्तर पर लागू किया जाना है। फिडे ने यह भी घोषणा की है कि टोटल शतरंज विश्व चैंपियनशिप टूर विश्व चैंपियनशिप के लिए चैलेंजर का निर्धारण करने वाले कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाइंग प्रक्रिया का हिस्सा होगा। कैंडिडेट्स टूर्नामेंट क्लासिकल प्रारूप में खेला जाता है। टोटल शतरंज विश्व चैंपियनशिप टूर में शीर्ष पर रहने वाले दो खिलाड़ी कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई करेंगे।
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नयी दिल्ली. भारत का 24 सदस्यीय तलवारबाजी दल बुधवार से हांगकांग में शुरू हो रही सीनियर विश्व चैम्पियनशिप में जोर आजमाइश करेगा । नौ दिवसीय चैम्पियनशिप एशियावर्ल्ड एक्स्पो पर आयोजित की जायेगी । भारतीय टीम में 12 पुरूष और 12 महिला खिलाड़ी हैं जो सभी तीन श्रेणियों एपी, फॉइल और साबरे में व्यक्तिगत और टीम वर्गों में भाग लेंगे । भारतीय तलवारबाजी संघ के महासचिव राजीव मेहता ने एक विज्ञप्ति में कहा ,'' विश्व चैम्पियनशिप भारतीय तलवारबाजी के लिये काफी अहम है क्योंकि हमे विश्व के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के सामने खुद को आंकने का मौका मिलेगा ।'' टीम के साथ पांच राष्ट्रीय कोच और दो फिजियो भी जायेंगे ।
भारतीय टीम :
एपी (महिला) तनिष्का खत्री, प्राची लोहान, यशकीरत कौर , मितवा जेसंगभाई चौधरी
एपी (पुरूष ) शेरजिन राजेंद्रन शांतिमोल, जोसेफ बेनेट, सिवा मंगेश एस निर्मला, शौर्य अश्विनी
फॉइल ( महिला ) जॉयस ए स्टालिनराज, मीना देवी नाओरेम, कनुप्रिया चावला, सोनिया देवी
फॉइल (पुरूष ) सचिन, हेमाश सिंह, आदित्य, तेजस मनोज पाटिल
साबरे (महिला ) श्रेया गुप्ता, जेफरलिन जानी रेक्सलिन सिमला, श्रुति जोशी, आखरी
साबरे (पुरूष ) करण सिंह, गिशो निधि कुमारेसन पद्मा, लक्ष्य बडसेर, विशाल थापर । -
नयी दिल्ली. छह बार की विश्व चैम्पियन और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता एम सी मैरी कॉम को राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय मुक्केबाजों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है हालांकि उन्हें लगता है कि स्वर्ण पदक जीत पाना मुश्किल होगा । मणिपुर की 43 वर्ष की इस मुक्केबाज ने कहा ,'' हम पदक जीतेंगे लेकिन मुझे स्वर्ण की उम्मीद नहीं है । अगर मिल जाता है तो मुझे खुशी होगी । राष्ट्रमंडल खेलों में हम फाइनल तक जरूर पहुंचेंगे । मैं प्रार्थना करूंगी कि हम सारे पदक जीतें ।'' उन्होंने कहा ,'' मुक्केबाजी ने मुझे जीवन में सब कुछ दिया है । खेल से इतना कुछ मिलने के बाद यह कैसे संभव है कि मैं वहां खेल रहे अपने खिलाड़ियों के लिये दुआ नहीं करूं । हम एक परिवार हैं ।'' भारतीय मुक्केबाजों ने पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में सात पदक जीते थे जिसमें तीन स्वर्ण और एक रजत शामिल है । ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय मुक्केबाजी दल में सात पुरूष और सात महिला मुक्केबाज शामिल हैं । भारतीय महिला टीम में ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन (75 किलो), दुनिया की नंबर एक मुक्केबाज जैसमीन लम्बोरिया (57 किलो) , एशियाई खेलों की कांस्य पदक विजेता प्रीति पवार (54 किलो) और विश्व कप स्वर्ण पदक विजेता अरूंधति चौधरी (70 किलो) शामिल हैं । चारों ने इस साल अप्रैल में एशियाई चैम्पियनशिप में पदक जीते थे । लड़कों में सचिन सिवाच (60 किलो) और नरेंदर बेरवाल (प्लस 90 किलो) से उम्मीदें हैं ।मैरी कॉम ने कहा ,'' मैं सभी को शुभकामना देती हूं । भारत का प्रतिनिधित्व करना आसान नहीं है, यह बड़ी जिम्मेदारी है । सभी देश के लिये पदक जीतने के इरादे से ही गए होंगे ।'' भारतीय मुक्केबाजी के प्रशासनिक पहलू के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा ,'' अजीब है ।''
पिछले कुछ महीने से अजय सिंह की अध्यक्षता वाले भारतीय मुक्केबाजी महासंघ की चयन संबंधी विवादों, कोचों की नियुक्ति और राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में रहने की खराब व्यवस्था को लेकर काफी आलोचना हुई है । बीएफआई को एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों की अपारदर्शी और अस्पष्ट चयन नीति को लेकर खेल मंत्रालय ने नोटिस भी जारी किया । मैरी कॉम ने कहा ,'' मुझे समझ में नहीं आता कि कुछ चैम्पियन मुक्केबाजों का चयन क्यो नहीं हुआ । यह भविष्य के लिये अच्छा नहीं है । प्रदर्शन ऊपर नीचे हो सकता है लेकिन चयन सही नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है ।'' -
मियामी गार्डन्स. किलियन एमबाप्पे ने शनिवार को इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे स्थान के मैच में फ्रांस के लिए दो गोल करके फुटबॉल विश्व कप में अपने कुल गोल की संख्या 22 तक पहुंचाई और लियोनल मेस्सी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। फ्रांस के स्टार एमबाप्पे ने मौजूदा विश्व कप में 10 गोल किए हैं और 'गोल्डन बूट' की दौड़ में अर्जेन्टीना के महान खिलाड़ी मेस्सी से दो गोल आगे चल रहे हैं। यह पुरस्कार टूर्नामेंट में सर्वाधिक गोल करने वाले को दिया जाता है। मेस्सी को एमबाप्पे से आगे निकलने का आखिरी मौका तब मिलेगा जब वह और मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना रविवार को न्यू जर्सी के ईस्ट रदरफोर्ड में फाइनल में स्पेन का सामना करेंगे। एमबाप्पे ने 'फॉक्स स्पोर्ट्स' से फ्रेंच में कहा, ''मैं इतिहास का शीर्ष स्कोरर नहीं बनकर कल का मैच (फाइनल) खेलना अधिक पसंद करता।'' एमबाप्पे ने चार साल पहले कतर में आठ गोल करके गोल्डन बूट जीता था जहां फ्रांस फाइनल में पेनल्टी शूटआउट में मेस्सी की कप्तानी वाली अर्जेन्टीना की टीम से हार गया था। मौजूदा टूर्नामेंट में 10 गोल करके एमबाप्पे ने विश्व कप में तीसरे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की बराबरी की। फ्रांस के लिए 1958 में जस्ट फोनटेन ने रिकॉर्ड 13 गोल किए थे जबकि हंगरी के सैंडोर कोक्सिस ने 1954 में 11 गोल किए थे। पश्चिम जर्मनी के गर्ड म्यूलर ने 1970 में 10 गोल दागे थे। जब मध्यांतर के समय फ्रांस 0-4 से पीछे था तो ऐसा लग रहा था कि एमबाप्पे गोल्डन बूट की दौड़ में पिछड़ जाएंगे। एमबाप्पे ने 48वें मिनट में गोलकीपर डीन हेंडरसन को छकाते हुए गोल करके टीम में नई जान फूंकी। इसके बाद 66वें मिनट में उन्होंने लगभग 14 गज की दूरी से बाएं पैर से शॉट मारकर फिर से हेंडरसन को पछाड़ा और मेस्सी के विश्व कप में सर्वाधिक 21 गोल के करियर रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। एमबाप्पे के दूसरे गोल से फ्रांस ने स्कोर 3-4 किया लेकिन टीम जीत दर्ज करने में नाकाम रही।
एमबाप्पे ने कहा, ''मैच में दो बिल्कुल अलग हाफ थे। पहले हिस्से के दौरान मैं समझ सकता हूं कि कुछ लोग क्यों सोचते हैं कि हमने खुद को बेवकूफ बनाया और जर्सी का सम्मान नहीं किया। मैं तो बस इतना कहूंगा कि हम इंसान हैं और हम ऐसी गलती करने की स्थिति में नहीं थे। हम पूरी तरह से हैरान रह गए थे और उन्होंने सच में हमें झकझोर दिया।'' उन्होंने कहा कि फ्रांसीसी खिलाड़ी डिडियर डेसचैम्प्स के लिए जीतना चाहते थे जो राष्ट्रीय टीम की अंतिम मैच में कोचिंग कर रहे थे। एमबाप्पे ने कहा, ''आखिरकार हम जीत नहीं पाए और यह कोच के लिए दुख की बात है। पहले हाफ से ऐसा लगता है कि हमने उन्हें निराश किया। हम बिल्कुल नहीं चाहते थे कि उन्हें ऐसा महसूस हो। यह मैच डिडियर डेसचैम्प्स की विरासत पर कोई दाग नहीं लगाएगा।'' फ्रांस ने डेसचैम्प्स की कोचिंग में 2018 में विश्व कप जीता था लेकिन 2022 में फाइनल में अर्जेंटीना से पेनल्टी शूटआउट में हारा गया था। इस साल फ्रांस को सेमीफाइनल में स्पेन ने हराया। डेसचैम्प्स के 14 साल के कार्यकाल का यह एक निराशाजनक अंत था जबकि उनकी स्टार खिलाड़ियों से भरी टीम एक और विश्व कप जीतने की प्रबल दावेदार मानी जा रही थी। -
बुडापेस्ट. मौजूदा अंडर-20 विश्व चैंपियन काजल ने बुडापेस्ट रैंकिंग सीरीज कुश्ती टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 76 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। स्वर्ण पदक के लिए हुए रोमांचक मुकाबले में अमेरिका की डाइमंड प्रेशियस गिलफोर्ड का सामना करते हुए युवा भारतीय पहलवान काजल ने दबाव के बावजूद बहुत समझदारी और संयम दिखाया। यह कड़ा मुकाबला 3-3 की बराबरी पर खत्म हुआ लेकिन काजल ने क्राइटेरिया के आधार पर चैंपियनशिप जीती जिससे भारत को टूर्नामेंट का तीसरा स्वर्ण पदक मिला। भारत ने 53 किग्रा और 57 किग्रा वर्ग में दो रजत पदक अपने नाम किए।
अंतिम पंघाल को 53 किग्रा चैंपियनशिप के फाइनल में चोट (वीआईएन) के कारण स्वीडन की एम्मा जोना डेनिस माल्मग्रीन के खिलाफ स्वर्ण पदक का मुकाबला हारने के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा। वहीं 57 किग्रा वर्ग में नेहा शर्मा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाई लेकिन फाइनल में चीन की केक्सिन होंग के खिलाफ 0-4 से हार गईं और दूसरे स्थान पर रहीं। भारत ने 53 किग्रा वर्ग में एक और पदक हासिल किया जब निशु ने कड़े मुकाबले के बाद कांस्य पदक जीता।
रोमानिया की एंड्रिया बीट्रिस एना के खिलाफ रणनीतिक रूप से कड़े मुकाबले में निशु ने जबरदस्त डिफेंस दिखाया। मुकाबला 2-2 से बराबरी पर खत्म हुआ लेकिन भारतीय पहलवान को क्राइटेरिया के आधार पर विजेता घोषित किया गया और उन्होंने पोडियम पर जगह पक्की की। भारत ने अब तक टूर्नामेंट में कुल 12 पदक जीत लिए हैं जिनमें तीन स्वर्ण, चार रजत और पांच कांस्य पदक शामिल हैं। भारतीय खिलाड़ी अब ग्रीको रोमन शैली में हिस्सा लेंगे। -
नयी दिल्ली। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने शनिवार को यह सुनिश्चित किया कि राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लेने जा रही 16 वर्षीय पैरा साइकिलिस्ट लीशा दास के साथ ग्लासगो में एक महिला सहयोगी स्टाफ सदस्य मौजूद रहेगी। लीशा ने पहले इस संबंध में चिंता जताई थी। भारत के दल की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी और राष्ट्रमंडल खेलों के लिए क्वालीफाई करने वाली एकमात्र पैरा ट्रैक साइकिलिस्ट लीशा ने शिकायत की थी कि उनके साथ न तो उनके निजी कोच को और न ही किसी महिला सहयोगी स्टाफ को भेजा जा रहा है। राष्ट्रमंडल खेलों की शुरुआत बृहस्पतिवार से ग्लास्गो में होगी।
यह मामला सामने आने के बाद भारत के दल प्रमुख रोहित राजपाल ने कहा, ''जैसे ही हमें इस मुद्दे की जानकारी मिली, हमने तुरंत संज्ञान लिया और लीशा की मांग के अनुसार महिला फिजियोथेरेपिस्ट की व्यवस्था कर दी। '' उन्होंने कहा, ''हर खिलाड़ी की सुरक्षा, भलाई और सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। हम सभी खिलाड़ियों को सुरक्षित और सहयोगपूर्ण माहौल उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। '' असम की रहने वाली लीशा महिला सी5 वर्ग में प्रतिस्पर्धा करती हैं। उनके दाहिने हाथ में शारीरिक विकृति है। उन्होंने अपने निजी कोच, एक महिला फिजियोथेरेपिस्ट और एक तकनीशियन सहित तीन सदस्यीय सहयोगी टीम की मांग की थी। भारतीय साइकिलिंग महासंघ ने पहले उनके निजी कोच आदित्य मेहता और के दत्तात्रेय सहित तीन सहयोगी स्टाफ के नाम भेजे थे। अब आईओए ने लीशा के माता-पिता की सहमति से फिजियोथेरेपिस्ट आशा शेख का मान्यता पत्र (एक्रिडिटेशन) भी सुनिश्चित कर दिया है, ताकि वह ग्लास्गो में उनके साथ रह सकें। आदित्य मेहता को भी मान्यता मिल चुकी है जबकि तकनीशियन के लिए भी मान्यता पत्र दिलाने की कोशिश जारी है। पैरा साइकिलिंग में तकनीशियन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि प्रतियोगिता से पहले साइकिल में विशेष तकनीकी सेटिंग और समायोजन करना आवश्यक होता है। खेल मंत्रालय द्वारा मंजूर भारतीय दल में कुल 191 सदस्य हैं जिनमें 126 खिलाड़ी, 51 अधिकारी और 14 अन्य सहयोगी सदस्य शामिल हैं। महिला खिलाड़ियों वाले लगभग सभी खेलों में महिला कोच, फिजियोथेरेपिस्ट या मेडिकल स्टाफ मौजूद है, लेकिन साइकिलिंग और पैरा साइकिलिंग ऐसे दो खेल थे जिसमें महिला सहयोगी स्टाफ नहीं था। यह स्थिति भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के दिशा-निर्देशों के भी विपरीत थी, जिनके अनुसार महिला खिलाड़ियों वाले किसी भी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय दल में कम से कम एक महिला कोच या महिला सहयोगी स्टाफ का होना अनिवार्य है। - नयी दिल्ली। कोयंबटूर के वी एस रतनवेल ने गुवाहाटी स्मार्ट सिटी इंटरनेशनल ओपन 2026 में 2500 ईएलओ रेटिंग का आंकड़ा पार कर देश के 99वें ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव हासिल किया जिससे भारत शतरंज में अपने 100वें ग्रैंडमास्टर के ऐतिहासिक मुकाम से अब सिर्फ एक कदम दूर है। पच्चीस वर्षीय रतनवेल ने 2022 में ही ग्रैंडमास्टर बनने के लिए जरूरी तीनों नॉर्म पूरे कर लिए थे, लेकिन आवश्यक 2500 ईएलओ रेटिंग हासिल नहीं कर पाने के कारण उन्हें लगभग पांच साल तक इंतजार करना पड़ा। महज छह साल की उम्र से शतरंज खेलना शुरू करने वाले रतनवेल विश्व युवा अंडर-10 कांस्य पदक विजेता और कई वर्षों तक भारत के शीर्ष अंतरराष्ट्रीय मास्टरों में शामिल रहे हैं। रतनवेल ने ' कहा, ''मैं कई बार बहुत ग्रैडमास्टर नॉर्म हासिल करने के करीब पहुंचा, लेकिन हर बार चूक गया। इससे काफी निराशा होती है क्योंकि शतरंज मानसिक खेल है और ऐसे में आप खुद पर ही संदेह करने लगते हैं। इसका प्रदर्शन पर भी असर पड़ता है। आखिरकार 2500 रेटिंग पार करना बेहद संतोषजनक है।'' उन्होंने कहा कि अब सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि वह बिना रेटिंग की चिंता किए खेल सकेंगे। रतनवेल ने कहा, ''मैं अब बिना किसी तनाव के और अधिक सहज होकर खेल सकूंगा। मुझे लगता है कि इससे मेरा प्रदर्शन और बेहतर होगा।'' अखिल भारतीय शतरंज महासंघ (एआईसीएफ) के अध्यक्ष नितिन नारंग ने रतनवेल को बधाई देते हुए कहा कि भारत अब अपने 100वें ग्रैंडमास्टर से केवल एक कदम दूर है।
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नयी दिल्ली. ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन ग्लासगो में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के उद्घाटन समारोह में भारत की ध्वज और बैटन वाहक होंगी। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने शनिवार को यह घोषणा की। कम खिलाड़ियों वाले इस बहु-खेल आयोजन का उद्घाटन समारोह 23 जुलाई को आयोजित किया जाएगा।
आईओए अध्यक्ष पीटी उषा ने एक बयान में कहा, ''यह गर्व का विषय है कि मीराबाई और लवलीना 'ओवीओ हाइड्रो' में यह जिम्मेदारी निभाएंगी। मैं दोनों खिलाड़ियों और पूरे भारतीय दल को शुभकामनाएं देती हूं।'' उन्होंने कहा, '' भारतीय टीम के उद्घाटन समारोह में दो महिला खिलाड़ियों को यह सम्मान मिलना गर्व की बात है। इससे खेलों के माहौल और दिशा की शुरुआत होगी। दोनों खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बार भारत का मान बढ़ाया है। वे इस समय ब्रिटेन में खेलों की तैयारी में पूरी मेहनत कर रही हैं।'' बत्तीस साल की होने जा रहीं मीराबाई चानू पिछले करीब एक दशक से भारत की प्रमुख भारोत्तोलक रही हैं। उन्होंने 2021 तोक्यो ओलंपिक में महिलाओं की 49 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीता था। इसके बाद 2022 बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक हासिल किया। पेरिस ओलंपिक (2024) में वह अपने पिछले प्रदर्शन को दोहरा नहीं सकीं, लेकिन ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में वह अब भी भारत के लिए पदक की सबसे बड़ी दावेदारी में शामिल हैं। वह विश्व चैंपियनशिप में भी कई पदक जीत चुकी हैं। मुक्केबाज लवलीना ने तोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। इसके बाद उन्होंने 2023 विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया। उन्होंने 2023 एशियाई खेलों में हांगझोउ में रजत पदक भी जीता था। ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में लवलीना को भी भारत की प्रमुख पदक दावेदार खिलाड़ियों में माना जा रहा है। -
नयी दिल्ली. भारतीय फुटबॉल के दिग्गज बाइचुंग भूटिया का मानना है कि फीफा अगर पुरुष फुटबॉल विश्व कप में टीमों की संख्या 48 से बढ़ाकर 64 कर देता है तो भारत के लिए विश्व कप में जगह बनाने की संभावना बढ़ जाएगी। उन्होंने हालांकि इस बात पर चिंता जताई कि इससे टूर्नामेंट की गुणवत्ता और रोमांच प्रभावित हो सकता है। दक्षिण अमेरिकी फुटबॉल महासंघ (कॉनमेबोल) ने अप्रैल 2025 में 2030 विश्व कप में 64 टीमों को शामिल करने का प्रस्ताव रखा था। फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने कहा है कि मौजूदा विश्व कप के बाद इस प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। रविवार को न्यूयॉर्क में अर्जेंटीना और स्पेन के बीच फाइनल खेला जाएगा। अगले विश्व कप (2030) की मेजबानी मुख्य रूप से स्पेन, पुर्तगाल और मोरक्को करेंगे जबकि टूर्नामेंट के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में शुरुआती तीन मुकाबले अर्जेंटीना, उरुग्वे और पराग्वे में खेले जाएंगे। पहला विश्व कप 1930 में उरुग्वे में आयोजित हुआ था। भूटिया ने पीटीआई से विशेष बातचीत में कहा, ''भारतीय फुटबॉल प्रशंसक के नजरिए से देखें तो ज्यादा टीमों का शामिल होना स्वागतयोग्य कदम है। मैं यह नहीं कह रहा कि भारत निश्चित रूप से क्वालिफाई करेगा, लेकिन 48 की जगह 64 टीमें होने पर भारत के पास विश्व कप में जगह बनाने का बेहतर मौका होगा।'' उन्होंने कहा , '' टीमों की संख्या बढ़ने के बावजूद भारत को विश्व कप के सपने को पूरा करने के लिए अपनी फुटबॉल व्यवस्था, ढांचा और जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों के विकास पर लगातार काम करना होगा। अधिक से अधिक बच्चों को फुटबॉल से जोड़ना होगा।'' उन्होंने कहा, '' भारत को पहले अंडर-17 और अंडर-20 विश्व कप के लिए नियमित रूप से क्वालिफाई करने का लक्ष्य रखना चाहिए। इसके बाद ही सीनियर टीम विश्व कप में पहुंचने की वास्तविक उम्मीद कर सकती है। उज्बेकिस्तान और मोरक्को जैसे छोटे देश इसी मॉडल पर आगे बढ़े हैं और लगातार आयु वर्ग के विश्व कप में जगह बना रहे हैं।'' उन्होंने हालांकि यह भी कहा, ''वैश्विक फुटबॉल और विश्व कप के रोमांच के लिहाज से 64 टीमों का टूर्नामेंट खेल की गुणवत्ता को निश्चित रूप से प्रभावित करेगा।'' भूटिया का मानना है कि भारतीय महिला फुटबॉल टीम पुरुष टीम की तुलना में विश्व कप के लिए पहले क्वालीफाई कर सकती है। 2031 महिला विश्व कप में टीमों की संख्या 32 से बढ़ाकर 48 की जाएगी। भारत की महिला टीम फिलहाल एशिया में 13वें और दुनिया में 69वें स्थान पर है, जबकि पुरुष टीम एशिया में 26वें और विश्व में 138वें स्थान पर है। भूटिया ने कहा, ''भारतीय महिला टीम के पास पुरुष टीम से बेहतर मौका है, लेकिन इसके लिए महिला फुटबॉल में निवेश और रुचि बढ़ानी होगी। 'इंडियन विमेंस लीग (आईडब्ल्यूएल)' में अधिक टीमें हों, अलग-अलग आयु वर्ग की लीग शुरू हों और जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर फुटबॉल कार्यक्रम चलाए जाएं।'' भूटिया ने इसके साथ ही भारतीय मूल के विदेशी खिलाड़ियों (ओसीआई और पीआईओ) को राष्ट्रीय टीम में शामिल करने के विचार का भी समर्थन किया।
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दुबई. अगले साल होने वाले आईसीसी पुरुष वनडे विश्व कप के प्रारूप में किए गए बदलावों को लेकर एसोसिएट देशों और विश्व खिलाड़ी संघ (डब्ल्यूसीए) ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह फैसला पहले उपलब्ध कराए गए अवसरों की मूल प्रकृति को ही बदल देता है। आईसीसी ने 2027 वनडे विश्व कप में भाग लेने वाली टीमों की संख्या 14 ही बरकरार रखी है। यह फैसला 2021 में लिया गया था जबकि 2019 और 2023 के विश्व कप में केवल 10-10 टीमें शामिल थीं। हालांकि, अब टूर्नामेंट के प्रारूप में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में होने वाले 2027 वनडे विश्व कप में अब 12वीं, 13वीं और 14वीं रैंकिंग वाली टीमों के बीच 'सुपर सीरीज' खेली जाएगी। इसमें शीर्ष पर रहने वाली टीम ही अगले चरण में पहुंचेगी। दूसरे राउंड में कुल 12 टीमें दो ग्रुप (प्रत्येक में छह टीम) में खेलेंगी। इस चरण में 30 मुकाबले होंगे। दोनों ग्रुप से शीर्ष तीन-तीन टीमें और दोनों ग्रुप में चौथे स्थान पर रहने वाली टीम में से बेहतर प्रदर्शन करने वाली एक टीम 'सुपर-7' चरण में पहुंचेगी। सुपर-7 चरण में 21 मैच खेले जाएंगे। इसके बाद शीर्ष चार टीमें सेमीफाइनल में जगह बनाएंगी, जहां पहले स्थान की टीम चौथे स्थान की टीम से और दूसरे स्थान की टीम तीसरे स्थान की टीम से भिड़ेगी। 700 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व करने वाली डब्ल्यूसीए ने अपनी वेबसाइट पर जारी बयान में कहा कि आईसीसी के इस फैसले से पारदर्शिता, परामर्श प्रक्रिया और क्रिकेट के वैश्विक विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उसने कहा कि इतने बड़े बदलावों से पहले खिलाड़ियों और अन्य संबंधित पक्षों से पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। संस्था ने कहा, ''खेल की संरचना और उसके सबसे बड़े टूर्नामेंटों में किसी भी बड़े बदलाव के साथ स्पष्ट संवाद, पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया और खिलाड़ियों व अन्य हितधारकों के लिए पर्याप्त स्पष्टता होनी चाहिए। '' एसोसिएट देशों के कप्तानों ने भी इस पर नाराजगी जताई। नामीबिया, स्कॉटलैंड और नीदरलैंड के कप्तानों ने भी डब्ल्यूसीए के बयान का समर्थन किया। नामीबिया के कप्तान गेरहार्ड इरास्मस ने कहा, ''कई देशों के खिलाड़ियों के लिए वनडे विश्व कप सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि उनके करियर का सबसे बड़ा लक्ष्य होता है। हम मानते हैं कि विश्व कप में जगह प्रदर्शन के आधार पर मिलनी चाहिए, लेकिन क्वालीफिकेशन ऐसा होना चाहिए जिससे सबसे बड़े मंच पर प्रतिस्पर्धा करने का वास्तविक अवसर मिले। एसोसिएट देशों को लंबे समय से सीमित मौके मिलते रहे हैं। '' नीदरलैंड के कप्तान स्कॉट एडवर्ड्स ने कहा, ''आईसीसी वैश्विक स्तर पर क्रिकेट के विस्तार की बात करता है, लेकिन ऐसे फैसले एसोसिएट देशों के लिए दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम के खिलाफ खेलने के अवसर और कम कर देते हैं। यही मौके टीम को बेहतर बनाते हैं और अगली पीढ़ी को प्रेरित करते हैं। अगर क्रिकेट को सचमुच वैश्विक खेल बनाना है तो अवसर बढ़ाने चाहिए, घटाने नहीं।'' स्कॉटलैंड के कप्तान रिची बेरिंगटन ने कहा कि खिलाड़ियों के करियर को प्रभावित करने वाले फैसलों पर उनसे चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ''खिलाड़ी हर फैसला खुद नहीं लेना चाहते, लेकिन खेल और खिलाड़ियों के करियर पर बड़ा असर डालने वाले निर्णयों में उनकी सार्थक भागीदारी होनी चाहिए। अलग-अलग पक्षों की राय से बेहतर फैसले लिए जा सकते हैं और अब समय आ गया है कि ऐसा वास्तव में किया जाए। '' वहीं न्यूजीलैंड के शीर्ष वनडे बल्लेबाज डेरिल मिचेल ने भी खिलाड़ियों और देशों के लिए समान अवसरों की वकालत करते हुए कहा, ''हम पूरी तरह से इस बात के पक्ष में हैं कि दुनिया भर के खिलाड़ियों और देशों को क्रिकेट के सबसे बड़े मंचों तक पहुंचने और वहां प्रतिस्पर्धा करने के लिए लगातार और निष्पक्ष अवसर मिलें।
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ग्रेटर नोएडा/ भारत को 1983 विश्व कप दिलाने वाले कप्तान कपिल देव ने वेस्टइंडीज के महान हरफनमौला सर गारफील्ड सोबर्स को क्रिकेट को नया आयाम देने वाला खिलाड़ी करार देते हुए कहा कि उन्होंने खेल के प्रति खिलाड़ियों की सोच और खेलने का तरीका ही बदल दिया। सोबर्स का 89 साल की उम्र में शुक्रवार को बारबाडोस स्थित उनके घर पर निधन हो गया। अपने शानदार करियर में उन्होंने 93 टेस्ट मैचों में 57.78 की औसत से 8,032 रन बनाए, जिसमें 26 शतक शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने 235 विकेट भी अपने नाम किए। कपिल ने यहां केडीएसजी (कपिल देव-संजय गुप्ता) अस्पताल में एक न्यूज़ एजेंसी से कहा, ''जो भी क्रिकेट को जानता है, वह गैरी सोबर्स को जरूर जानता होगा। वह इस खेल के सबसे महान क्रिकेटरों में से एक थे।'' उन्होंने कहा, ''उन्होंने जिस अंदाज में क्रिकेट खेला, उसने हम जैसे खिलाड़ियों को प्रेरित किया। उनका जाना बेहद दुखद है, लेकिन वह हमें अपनी प्रतिभा, खेल और विरासत के रूप में बहुत कुछ देकर गए हैं, जिससे हम जीवनभर सीखते रहेंगे।'' कपिल देव ने कहा कि सोबर्स की असाधारण प्रतिभा और खेल के प्रति उनका जुनून ही उन्हें महान बनाता था।
उन्होंने कहा, ''उनकी प्रतिभा, खेल का आनंद लेने का तरीका और खेलने की शैली उन्हें सबसे अलग बनाती थी। उस दौर में वेस्टइंडीज की टीम दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों में थी, लेकिन सोबर्स ने रिकॉर्ड बनाने के साथ-साथ लोगों की यह सोच भी बदल दी कि क्रिकेट कैसे खेला जाए और उसका लुत्फ कैसे उठाया जाये।'' इस 67 साल के पूर्व खिलाड़ी ने बताया कि सोबर्स ने पारंपरिक क्रिकेट कोचिंग की सोच भी बदल दी।
उन्होंने कहा, ''मुझे सबसे ज्यादा यही बात याद है कि उन्होंने एमसीसी (मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब) की पारंपरिक कोचिंग पद्धति को बदल दिया। उस समय बल्लेबाजों को 'वी' (सीधे बल्ले से लांग ऑफ से लांग ऑन की दिशा में) में खेलने की सलाह दी जाती थी, लेकिन सोबर्स ने दिखाया कि इसके बाहर भी रन बनाए जा सकते हैं। यह बात बचपन से मेरे मन में बस गई थी।'' खुद शानदार हरफनमौला रहे कपिल ने कहा कि ऑलराउंडर के रूप में सोबर्स का कोई मुकाबला नहीं था।
उन्होंने कहा, ''ऑलराउंडर तो और भी हुए हैं, लेकिन उनके स्तर का कोई नहीं। बल्लेबाजी, तेज गेंदबाजी, स्पिन गेंदबाजी, कमाल का क्षेत्ररक्षण हर क्षेत्र में उनका कोई सानी नहीं था। सबसे बड़ी बात यह थी कि वह दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करना जानते थे। क्रिकेटर तो बहुत आते हैं, लेकिन असली मनोरंजन करने वाले बहुत कम होते हैं।'' उन्होंने कहा, ''वह शानदार क्रिकेटर थे। उनका जाना क्रिकेट जगत के लिए बड़ी क्षति है, लेकिन उनके खेलने के तरीके से हर खिलाड़ी सीख ले सकता है। उन्हें मेरा सलाम। उन्होंने जिंदगी को हमेशा खुलकर जिया।'' कपिल ने सोबर्स के साथ बिताए पलों को याद करते हुए कहा, ''शाम को वह बैठकर बातें किया करते थे और हम सभी उन्हें बड़े ध्यान से सुनते थे। दिलचस्प बात यह थी कि वह क्रिकेट से ज्यादा जिंदगी के दूसरे पहलुओं पर बातें करते थे।'' -
लंदन. भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ निर्णायक तीसरे एक दिवसीय क्रिकेट मैच के लिये जब रविवार को लॉडर्स पर उतरेगी तो समूचे क्रिकेट जगत की नजरें 'हिटमैन' रोहित शर्मा पर लगी होंगी । तमाम अटकलों के बीच बीसीसीआई ने साफ तौर पर कहा है कि यह रोहित के कैरियर का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं होगा लेकिन पहले दो मैचों में नाकाम रहे भारत के पूर्व कप्तान खुद को साबित जरूर करना चाहेंगे । फ्रंटफुट पर बेहतरीन पूल शॉट खेलने और स्पिनरों को मैदान के चारों ओर खेलने वाले रोहित इस श्रृंखला में उस लय में नहीं दिखे जिससे इन अटकलों को बल मिला कि 39 वर्ष का यह दिग्गज अगले साल दक्षिण अफ्रीका में होने वाला वनडे विश्व कप नहीं खेल सकेगा । कार्डिफ की कठिन पिच पर रोहित ने नौ डॉट गेंदें खेली जिसके बाद आउट हो गए । 'क्रिकेट का घर' कहे जाने वाले लॉडर्स पर बल्लेबाजों की मददगार पिच पर शायद उन्हें लय हासिल करने में मदद मिले । बतौर कप्तान रोहित ने मोर्चे से अगुवाई करते हुए हमेशा पावरप्ले में जोखिमभरे शॉट्स खेले हैं । उनके प्रशंसक रविवार को उसी रोहित को देखना चाहते हैं । पहले दस ओवर में उन्हें जोफ्रा आर्चर की तूफानी गेंदों का सामना करना होगा । कप्तान शुभमन गिल भी बड़ी पारी खेलना चाहेंगे जो सोफिया गार्डंस पर आसानी से आउट हो गए थे ।
दूसरी ओर विराट कोहली का शानदार फॉर्म बरकरार है । वह बृहस्पतिवार को दूसरे शतक की ओर बढ रहे थे लेकिन आर्चर की गेंद पर आउट हो गए जिसके बाद भारत का मध्यक्रम ढह गया और टीम को पराजय का सामना करना पड़ा । अब भारतीय टीम उससे सबक लेकर उतरेगी । केएल राहुल की जगह उतरे ईशान किशन शॉर्ट गेंद पर विकेट गंवा बैठे । उछलती गेंदों के सामने भारतीय बल्लेबाजों की कमजोरी जाहिर हो गई ।श्रेयस अय्यर ने मध्यक्रम में अच्छा खेला और आदिल रशीद के साथ स्पिनरों का बखूबी सामना किया । गेंदबाजी में कुलदीप यादव को उतारा जा सकता है क्योंकि वॉशिंगटन सुंदर चोटिल हैं । रविंद्र जडेजा की गैर मौजूदगी में अक्षर पटेल ने स्पिन हरफनमौला का काम अच्छे से किया है । भारतीय गेंदबाजों को जो रूट के बल्ले पर अंकुश लगाना होगा जो कोहली की तरह रन बनाये जा रहे हैं । रूट के अलावा इंग्लैंड के बाकी बल्लेबाजों ने कुछ खास नहीं किया है । टीमें :
भारत: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान), केएल राहुल (विकेटकीपर), इशान किशन (विकेटकीपर), वॉशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल, शिवम दुबे, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह, प्रसिद्ध कृष्णा, अर्शदीप सिंह, गुरनूर बराड़, प्रिंस यादव। इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), बेन डकेट, जोस बटलर (विकेटकीपर), टॉम बैंटन, जो रूट, जैकब बेथेल, विल जैक्स, रेहान अहमद, लियाम डॉसन, जेम्स कोल्स, सैम कुरेन, गस एटकिंसन, जोफ्रा आर्चर, जोस टंग, साकिब महमूद, आदिल राशिद। मैच भारतीय समयानुसार दोपहर 3.30 बजे शुरू होगा. -
नई दिल्ली। भारत की स्टार शटलर पीवी सिंधु ने शुक्रवार को जापान ओपन सुपर 750 के सेमीफाइनल का टिकट हासिल कर लिया है। क्वार्टर फाइनल में सिंधु का मुकाबला नोजोमी ओकुहारा से होना था, लेकिन वह चोट के कारण मैच में हिस्सा नहीं ले सकीं।
यह इस सीजन में सिंधु का तीसरा सेमीफाइनल है। इससे पहले वह मलेशिया सुपर 1000 और ऑस्ट्रेलिया सुपर 500 के सेमीफाइनल में पहुंची थीं। इसके साथ ही, 2023 डेनमार्क ओपन के बाद यह उनका पहला सुपर 750 सेमीफाइनल है। 31 वर्षीय भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु की निगाहें इस सीजन का पहला खिताब जीतने पर होंगी। सेमीफाइनल मुकाबले में उनका सामना टोक्यो ओलंपिक चैंपियन और दुनिया की विश्व की नंबर 4 चीनी खिलाड़ी चेन युफेई से होगा। सिंधु और चेन युफेई के बीच अब तक कड़ा मुकाबला देखने को मिला है। हालांकि, हेड-टू-हेड रिकॉर्ड में सिंधु उनसे 6-8 से पीछे हैं।सिंधु को युफेई के खिलाफ पिछले पांच मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा है। सेमीफाइनल में जीत न केवल सिंधु के हारने के इस सिलसिले को खत्म करेगी, बल्कि लगभग तीन साल में उनके पहले सुपर 750 फाइनल में पहुंचने का रास्ता भी साफ होगा। दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु बीडब्ल्यूएफ सुपर 750 टूर्नामेंट में अब भारत की एकमात्र दावेदार हैं। सिंधु ने प्री-क्वार्टर फाइनल मैच में विश्व की नंबर 5 खिलाड़ी हान युए को सिर्फ 35 मिनट में हराया था। उन्होंने हान को सीधे गेम में 21-16, 21-14 से मात देते हुए क्वार्टर फाइनल का टिकट हासिल किया था। इस साल 28 वर्षीय चेन युफेई ने शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने इंडोनेशिया मास्टर्स का खिताब जीता, जबकि थाईलैंड और मलेशिया में हुए सुपर 500 टूर्नामेंट में फाइनल में भी जगह बनाई थी। इसके अलावा, युफेई ने सिंगापुर और भारत में खेले गए सुपर 750 टूर्नामेंट में भी सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था। वह मलेशिया ओपन और ऑल इंग्लैंड जैसे प्रतिष्ठित सुपर 1000 टूर्नामेंट में भी अंतिम चार में पहुंची थीं। -
नई दिल्ली। फीफा विश्व कप 2026 का फाइनल मुकाबला 20 जुलाई रात 12:30 (भारतीय समय के अनुसार) मौजूदा यूरोपीय चैंपियन स्पेन और मौजूदा विश्व तथा दक्षिण अमेरिकी चैंपियन अर्जेंटीना के बीच खेला जाएगा। दोनों टीमें शानदार प्रदर्शन के दम पर फाइनल में पहुंची हैं।
सेमीफाइनल में स्पेन ने प्रबल दावेदार फ्रांस को एकतरफा अंदाज में हराकर फाइनल का टिकट कटाया। पूरे मुकाबले में स्पेन ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और सटीक आक्रमण के दम पर फ्रांस को कोई मौका नहीं दिया। स्पेन ने ग्रुप चरण में ग्रुप-एच में शीर्ष स्थान हासिल किया। टीम का पहला मुकाबला केप वर्डे के खिलाफ गोलरहित बराबरी पर समाप्त हुआ। इसके बाद स्पेन ने सऊदी अरब को 4-0 और उरुग्वे को 1-0 से हराकर नॉकआउट चरण में जगह बनाई।नॉकआउट दौर में स्पेन ने ऑस्ट्रिया को 3-0 से हराया। इसके बाद पुर्तगाल पर 1-0 और बेल्जियम पर 2-1 की रोमांचक जीत दर्ज की। बेल्जियम के खिलाफ स्पेन ने टूर्नामेंट में अपना पहला गोल खाया।अब स्पेन 2010 के बाद पहली बार विश्व कप फाइनल खेलेगा, जब उसने पहली बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था।अर्जेंटीना लगातार दूसरे विश्व कप फाइनल मेंमौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना ने भी रोमांचक सफर तय करते हुए लगातार दूसरी बार विश्व कप फाइनल में जगह बनाई है।ग्रुप चरण में अर्जेंटीना ने अल्जीरिया को 3-0, ऑस्ट्रिया को 2-0 और जॉर्डन को 3-1 से हराया। कप्तान लियोनेल मेसी अब तक टूर्नामेंट में 8 गोल कर चुके हैं, जबकि विश्व कप इतिहास में उनके कुल गोलों की संख्या 21 हो गई है।नॉकआउट चरण में अर्जेंटीना ने अतिरिक्त समय में केप वर्डे को 3-2 से हराया। इसके बाद मिस्र के खिलाफ 0-2 से पिछड़ने के बावजूद शानदार वापसी करते हुए 3-2 से जीत दर्ज की।क्वार्टर फाइनल में अर्जेंटीना ने स्विट्जरलैंड को अतिरिक्त समय में 3-1 से हराया। वहीं सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए 2-1 से जीत हासिल की।विश्व कप में दूसरी बार आमना-सामनाविश्व कप इतिहास में स्पेन और अर्जेंटीना की अब तक केवल एक बार भिड़ंत हुई है। वर्ष 1966 में खेले गए उस मुकाबले में अर्जेंटीना ने स्पेन को 2-1 से हराया था।दोनों देशों के बीच कुल 13 मैत्री मुकाबले खेले गए हैं, जिनमें स्पेन ने 6, अर्जेंटीना ने 5 मुकाबले जीते हैं, जबकि 2 मैच बराबरी पर समाप्त हुए। दोनों के बीच पिछला मुकाबला 2018 में खेला गया था, जिसमें स्पेन ने अर्जेंटीना को 6-1 से हराया था।विश्व कप फाइनल तक पहुंचे, लेकिन कभी नहीं बने चैंपियनफीफा विश्व कप के इतिहास में कई ऐसी टीमें रही हैं, जिन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया, लेकिन खिताब जीतने का सपना कभी पूरा नहीं कर सकीं। इनमें नीदरलैंड्स सबसे आगे है, जिसने तीन बार फाइनल खेला, लेकिन हर बार उपविजेता बनकर लौटना पड़ा। वहीं चेकोस्लोवाकिया (अब चेकिया) और हंगरी दो-दो बार फाइनल में पहुंचकर भी ट्रॉफी से चूक गए। दूसरी ओर, क्रोएशिया और स्वीडन ने एक-एक बार फाइनल खेला, लेकिन उन्हें भी उपविजेता से संतोष करना पड़ा। इन पांचों टीमों का सफर इस बात का प्रमाण है कि विश्व कप फाइनल तक पहुंचना जितना कठिन है, उससे कहीं अधिक मुश्किल उस प्रतिष्ठित ट्रॉफी को अपने नाम करना है।स्पेन-अर्जेंटीना फाइनल: इन खिलाड़ियों के बीच होगी दिलचस्प भिड़ंतफीफा विश्व कप 2026 के फाइनल में रविवार को स्पेन और अर्जेंटीना आमने-सामने होंगे। दोनों टीमों ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया है। ऐसे में खिताबी मुकाबले का परिणाम कुछ अहम व्यक्तिगत मुकाबलों पर भी निर्भर करेगा।आयमेरिक लापोर्टे बनाम लियोनेल मेसी39 वर्षीय लियोनेल मेसी इस विश्व कप में आठ गोल के साथ गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे हैं। उन्होंने चार असिस्ट भी किए हैं और विश्व कप इतिहास के सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बन चुके हैं।स्पेन की रक्षा पंक्ति की जिम्मेदारी आयमेरिक लापोर्टे के कंधों पर होगी। उन्होंने युवा डिफेंडर पाउ कुबार्सी के साथ मिलकर मजबूत साझेदारी बनाई है। स्पेन ने पूरे टूर्नामेंट में अब तक केवल एक गोल खाया है। यदि लापोर्टे मेसी को रोकने में सफल रहते हैं, तो स्पेन की खिताबी उम्मीदें काफी मजबूत हो जाएंगी।रोड्री बनाम एंजो फर्नांडेज़मध्य पंक्ति में स्पेन के कप्तान रोड्री और अर्जेंटीना के एंजो फर्नांडेज़ के बीच मुकाबला बेहद अहम रहेगा।रोड्री ने इस विश्व कप में सबसे अधिक 648 सफल पास पूरे किए हैं और उनकी पासिंग सटीकता 93 प्रतिशत रही है। इसके अलावा उन्होंने टूर्नामेंट में सबसे अधिक दूरी भी तय की है।दूसरी ओर, एंजो फर्नांडेज़ ने गेंद छीनने और निर्णायक मौकों पर गोल करने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने नॉकआउट चरण में मिस्र और इंग्लैंड के खिलाफ महत्वपूर्ण गोल दागकर अर्जेंटीना को फाइनल तक पहुंचाने में बड़ा योगदान दिया।लामिन यामाल बनाम निकोलस टैग्लियाफिकोस्पेन के युवा स्टार लामिन यामाल टूर्नामेंट के सबसे खतरनाक खिलाड़ियों में शामिल हैं। सेमीफाइनल में फ्रांस के खिलाफ उनकी तेज रफ्तार और आक्रामक खेल ने स्पेन को बढ़त दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।उन्हें रोकने की जिम्मेदारी अर्जेंटीना के अनुभवी लेफ्ट बैक निकोलस टैग्लियाफिको पर होगी। 33 वर्षीय टैग्लियाफिको 2022 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहे हैं और बड़े मुकाबलों का भरपूर अनुभव रखते हैं। उनका अनुभव और मजबूत रक्षण अर्जेंटीना के लिए अहम साबित हो सकता है।अब दोनों टीमें विश्व फुटबॉल की सबसे प्रतिष्ठित ट्रॉफी के लिए आमने-सामने होंगी। एक ओर स्पेन 16 वर्षों बाद विश्व चैंपियन बनने का सपना पूरा करना चाहेगा, तो दूसरी ओर अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार खिताब जीतकर इतिहास रचने की कोशिश करेगा। इन तीन अहम मुकाबलों में जिस टीम का पलड़ा भारी रहेगा, उसके विश्व कप 2026 का खिताब जीतने की संभावना भी उतनी ही मजबूत होगी। -
नई दिल्ली। हॉकी इंडिया ने एफआईएच महिला हॉकी विश्व कप 2026 के लिए 20 सदस्यीय भारतीय टीम की घोषणा कर दी है। सलीमा टेटे टीम की कप्तान होंगी। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट 15 से 30 अगस्त तक बेल्जियम और नीदरलैंड की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा।मुख्य कोच स्जोर्ड मारीन ने टीम को अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का संतुलित मिश्रण बताते हुए विश्वास जताया कि भारतीय टीम विश्व की शीर्ष टीमों को कड़ी चुनौती देने के लिए तैयार है।
हाल ही में न्यूजीलैंड में एफआईएच नेशंस कप जीतने वाली भारतीय टीम का अधिकांश हिस्सा विश्व कप के लिए बरकरार रखा गया है। भारत ने उस टूर्नामेंट में अपराजित रहते हुए खिताब अपने नाम किया था।टीम में सविता और बिचू देवी खरीबाम को गोलकीपर के रूप में चुना गया है। रक्षापंक्ति में इशिका चौधरी, सुशीला चानू पुखरामबम, लालथंतलुआंगी, ज्योति और शिल्पी डबास शामिल हैं।मध्य पंक्ति में कप्तान सलीमा टेटे के साथ निक्की प्रधान, साक्षी राणा, सुनेलिता टोप्पो, नेहा और दीपिका सोरेंग खेलेंगी।आक्रमण पंक्ति में लालरेमसियामी, रुतुजा दादासो पिसाल, नवनीत कौर, दीपिका, इशिका, बलजीत कौर और ब्यूटी डुंगडुंग को जगह मिली है।भारतीय टीम को पूल-डी में चीन, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के साथ रखा गया है। भारत अपने सभी लीग मुकाबले नीदरलैंड के एम्सटेलवीन स्थित वैगेनर हॉकी स्टेडियम में खेलेगा। भारत अपने अभियान की शुरुआत 16 अगस्त को चीन के खिलाफ करेगा। इसके बाद 18 अगस्त को दक्षिण अफ्रीका और 20 अगस्त को इंग्लैंड से मुकाबला होगा। -
अटलांटा. विश्व कप सेमीफाइनल में जब समय खत्म हो रहा था तो इंग्लैंड अपनी बढ़त को हर हाल में बचाए रखना चाहता था और कोच थॉमस ट्यूशेल ने गोलमुख के सामने एक मजबूत दीवार बनाने के लिए एकादश और रणनीति में बदलाव किए लेकिन अर्जेंटीना और लियोनल मेसी ने उस दीवार को आसानी से तोड़ दिया। दूसरे हाफ के आखिरी लम्हों में इंग्लैंड 1-0 से आगे था लेकिन मेस्सी की मदद से 85वें मिनट में एंजो फर्नांडीज और इंजरी टाइम के दूसरे मिनट में लॉटेरो मार्टिनेज ने गोल किए जिससे अर्जेंटीना ने बुधवार को 2-1 से जीत दर्ज करके फाइनल में जगह बनाई। फ़ुटबॉल की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्विताओं में से एक इस बड़े मुकाबले में ट्यूशेल की रणनीतिक चालों की शायद वर्षों तक समीक्षा और आलोचना होगी क्योंकि इंग्लैंड 1966 के बाद पहली बार विश्व कप फाइनल में पहुंचने से चूक गया। ट्यूशेल ने कहा, ''वे हर हेडर पर प्रहार कर रहे थे। वे लगातार क्रॉस पर क्रॉस दे रहे थे इसलिए हमने 'बैक फाइव' (रक्षा पंक्ति में पांच खिलाड़ी) वाली रणनीति अपनाई।'' उन्होंने कहा, ''हमारे गोल के ठीक बाद हमने बहुत सारे क्रॉस और बहुत सारे मौके विरोधी टीम को दे दिए। इसलिए हमने मदद करने की कोशिश की। लेकिन जाहिर है कि जिम्मेदारी कोच की होती है। और... अगर चीजें ठीक नहीं होतीं तो यह कहना आसान होता है कि फैसला गलत था।
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अटलांटा. लियोनेल मेस्सी और अर्जेंटीना ने मौजूदा विश्व कप में अंतिम मिनटों में वापसी करने का नया इतिहास रचकर दिखा दिया कि उनकी टीम कभी हार नहीं मानती। अर्जेंटीना की टीम सेमीफाइनल में यहां इंग्लैंड के खिलाफ शुरू में पीछे चल रही थी लेकिन आखिर में वह 2-1 से विजयी रही। इस तरह से मौजूदा चैंपियन ने अंतिम क्षणों में नाटकीय वापसी करने की लंबी सूची में एक और अध्याय जोड़ दिया है। अब अर्जेंटीना रविवार को फाइनल में स्पेन से भिड़ेगा। ग्रुप चरण में मेस्सी के शानदार प्रदर्शन से अर्जेंटीना ने अपने तीनों मैच जीते लेकिन नॉकआउट चरण में उसने प्रत्येक मैच में पिछड़ने के बाद वापसी की। केप वर्दे के खिलाफ अर्जेंटीना एक समय पीछे चल रहा था। उसने अतिरिक्त समय में दो गोल करके जीत हासिल की। लिसैंड्रो मार्टिनेज ने 92वें मिनट में गोल करके अर्जेंटीना को 2-1 की बढ़त दिलाई। इसके बाद मेस्सी ने कॉर्नर किक से एक शानदार पास दिया जो 111वें मिनट में आत्मघाती गोल में तब्दील हो गया। इसी गोल ने अर्जेंटीना को 3-2 से जीत दिलाई। मिस्र के खिलाफ अंतिम 16 के मैच में तो अर्जेंटीना का बाहर होना लगभग तय लग रहा था। मिस्र दूसरे हाफ के स्टॉपेज टाइम से ठीक 11 मिनट पहले तक 2-0 से आगे था। लेकिन फिर टूर्नामेंट में सबसे रोमांचक वापसी देखने को मिली। क्रिस्टियन रोमेरो ने 79वें मिनट में गोल किया, मेस्सी ने चार मिनट बाद दूसरा गोल दागा और एन्ज़ो फर्नांडीज़ ने स्टॉपेज टाइम के दो मिनट बाद निर्णायक गोल दाग दिया। स्विट्जरलैंड के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में भी अर्जेंटीना को जीत हासिल करने के लिए अतिरिक्त समय तक जूझना पड़ा। जूलियन अल्वारेज़ ने 112वें मिनट में निर्णायक गोल दागा। इसके बाद अंतिम क्षणों में लोटारो मार्टिनेज़ ने गोल करके अर्जेंटीना की टीम को 3-1 की जीत के साथ सेमीफाइनल में पहुंचा दिया। और अब इंग्लैंड के खिलाफ फिर से उसने इसी तरह से वापसी की। अर्जेंटीना की अंतिम क्षणों में गोल करने की महारत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने अभी तक जो 19 गोल किए हैं उनमें से 11 गोल मैच के 79वें मिनट या उसके बाद किए हैं।
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ब्यूनस आयर्स (अर्जेंटीना) . मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना की विश्व कप की सेमीफाइनल में इंग्लैंड पर 2-1 की जीत का जश्न मनाने के लिए यहां हजारों फुटबॉल प्रशंसक सड़कों पर उमड़ पड़े। ब्यूनस आयर्स में तब मूसलाधार बारिश हो रही थी लेकिन इससे प्रशंसकों पर कोई असर नहीं पड़ा। इनमें से कई प्रशंसक को अपनी शर्ट उतार कर ही सड़कों पर नाच गा रहे थे। इनमें से कई प्रशंसकों ने अपने शरीर नीले और सफेद राष्ट्रीय रंगों से रंगे थे। युवा लड़के-लड़कियां बिजली के खंभों और ट्रैफिक लाइटों पर चढ़कर अर्जेंटीना के झंडे लहरा रहे थे। कई लोग फूट-फूटकर रो रहे थे। उन पर भावनाएं पूरी तरह से हावी थी। अटलांटा में खेले गए मैच में लोटारो मार्टिनेज के इंजरी टाइम की दूसरे मिनट में किए गए विजयी गोल के बाद जश्न का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। अर्जेंटीना अब रविवार को विश्व कप फाइनल में स्पेन से भिड़ेगा। कैथोलिक नन रोसाना बेटो क्रूज़ ने कहा, ''ये सब अजनबी हैं। वे एक दूसरे को नहीं जानते लेकिन फुटबॉल ने उन्हें एकजुट कर दिया है। वे एक साथ उछल कूद और नाच रहे हैं। विश्व कप, हमारी राष्ट्रीय टीम, इन्हीं की वजह से यह सब संभव हो पाता है।'' कई प्रशंसकों ने कहा कि लोग फाइनल में पहुंचने की खुशी से ज्यादा इस बात से अधिक उत्साहित थे कि उनकी टीम ने अपने चिर प्रतिद्वंद्वी इंग्लैंड को हराया। इंग्लैंड और अर्जेंटीना की प्रतिद्वंद्विता जगजाहिर है। ब्रिटेन ने 1982 में फ़ॉकलैंड द्वीप समूह पर कब्जा कर लिया था इसके बाद दोनों देशों के संबंध बिगड़ गए थे और फुटबॉल का मैदान भी इससे अछूता नहीं रहा था। एक प्रशंसक मारिया बेरटेरो ने कहा, ''यह केवल फुटबॉल से जुड़ा नहीं है। यह उस देश को हराने के बारे में है जिसने हमारा दिल तोड़ दिया था। यह जीत हमारे लिए खास है। यह अद्भुत है। यह जादू जैसा है। इससे मुझे अर्जेंटीनाई होने पर गर्व महसूस होता है।
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नयी दिल्ली. भारतीय टेबल टेनिस ने मंगलवार को बड़ी उपलब्धि हासिल की जब नवीनतम आईटीटीएफ विश्व रैंकिंग में भारत की तीन युगल जोड़ियों ने शीर्ष 10 में जगह बनाई। भारतीय युगल जोड़ियों की अगुआई मानव ठक्कर और मानुष शाह कर रहे हैं जो पुरुष युगल रैंकिंग में दूसरे स्थान पर काबिज हैं जो किसी भी युगल वर्ग में किसी भारतीय जोड़ी की अब तक की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग हैं। महिला युगल में दीया चितले और यशस्विनी घोरपडे दुनिया की 10वें नंबर की जोड़ी के रूप में शीर्ष 10 में जगह बनाने में सफल रहीं। मिश्रित युगल में दीया और मानुष दुनिया की पांचवें नंबर की जोड़ी है। यह पहली बार है जब भारत की तीन जोड़ियों ने विश्व रैंकिंग में एक साथ शीर्ष 10 में जगह बनाई है। यह उपलब्धि युगल खेलने वाले सबसे मजबूत देशों में भारत की बढ़ती अहमियत को दिखाती है क्योंकि भारत की जोड़ियां लगातार चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और चीनी ताइपे जैसे पारंपरिक दिग्गजों को कड़ी टक्कर दे रही हैं। यह उपलब्धि खेल के लिए एक अहम मोड़ पर भी आई है क्योंकि लॉस एंजिलिस 2028 खेलों में युगल वर्ग की ओलंपिक कार्यक्रम में वापसी होने वाली है जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस स्पर्धा का महत्व बढ़ गया है।
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नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एक बार फिर विदेशी धरती पर कमाल कर दिया। टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में खेला गया ऐतिहासिक टेस्ट मैच 270 रन से अपने नाम किया। केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने इस उपलब्धि पर देश की बेटियों की सराहना की है।
लंदन में भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी में 285 रन बनाए। इसके जवाब में इंग्लैंड का खेमा 170 रन पर सिमट गया। भारत के पास 115 रन की बढ़त थी। अगली पारी 341/7 के स्कोर पर घोषित करने के साथ मेहमान टीम ने इंग्लैंड को जीत के लिए 457 रन का टारगेट दिया, जिसके जवाब में मेजबान टीम दूसरी पारी में सिर्फ 186 रन पर सिमट गई।केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “लॉर्ड्स में रचा इतिहास। हमारी महिला क्रिकेट टीम को इस मशहूर मैदान पर टेस्ट मैच जीतने वाली पहली महिला टीम बनने पर बधाई। इंग्लैंड पर 270 रनों की शानदार जीत इस उपलब्धि को और भी खास बनाती है। इस मौके पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने कहा कि यह शानदार जीत क्रिकेटरों की पीढ़ियों को प्रेरित करेगी और भारत में महिला क्रिकेट के विकास को और मजबूत करेगी।बीसीसीआई ने एक बयान में कहा, “क्रिकेट के घर (लॉर्ड्स) में टेस्ट मैच जीतना किसी भी क्रिकेटर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। युवा भारतीय टीम के लिए, यह एक अहम पल है जो देश में महिला क्रिकेट की शानदार प्रगति और विश्व स्तर पर टीम के जज्बे, कौशल और चरित्र को दर्शाता है। यह जीत भारतीय क्रिकेट में एक और शानदार अध्याय जोड़ती है और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में टीम की बढ़ती अहमियत को मजबूत करती है। यह उन अनगिनत युवा लड़कियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है जो उच्चतम स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना देखती हैं।”बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मन्हास ने कहा, “यह भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास के सबसे बेहतरीन पलों में से एक है। लॉर्ड्स में टेस्ट मैच जीतना बेहद खास है और यह उस साहस, अनुशासन और विश्वास को दर्शाता है जो इस टीम ने पूरे मुकाबले के दौरान दिखाया है। उन्होंने इस मौके का भरपूर फायदा उठाया, जबरदस्त जज्बा दिखाया और पूरे देश को गौरवान्वित किया। मैं आईसीसी चेयरमैन जय शाह के बेहतरीन नेतृत्व की सराहना करना चाहता हूं, जिनकी महिला क्रिकेट के विकास के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने ऐसी उपलब्धियों की नींव रखने में मदद की है। मैं बीसीसीआई की तरफ से हरमनप्रीत कौर, खिलाड़ियों, कोचों और सपोर्ट स्टाफ को इस अविस्मरणीय उपलब्धि के लिए बधाई देता हूं।”बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने कहा, “यह ऐतिहासिक जीत महिला क्रिकेट में बरसों के लगातार निवेश और भरोसे का नतीजा है। बीसीसीआई हमारी महिला क्रिकेटरों की सफलता के लिए सही माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहा है, जिसके लिए मजबूत घरेलू ढांचे, बेहतर मौकों और ज्यादा पेशेवर सहयोग पर ध्यान दिया गया है। मैं हमारे पूर्व सचिव और मौजूदा आईसीसी चेयरमैन जय शाह के दूरदर्शी नेतृत्व की भी सराहना करना चाहूंगा। उनकी अहम पहलों- जैसे कि सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट वाली महिला क्रिकेटरों के लिए समान वेतन, घरेलू महिला क्रिकेटरों के लिए बढ़ी हुई मैच फीस और विमेंस प्रीमियर लीग की शुरुआत ने भारत में महिला क्रिकेट की तस्वीर बदल दी है। लॉर्ड्स में आज मिली कामयाबी उन्हीं कोशिशों और सबसे बढ़कर, हमारे खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के असाधारण समर्पण और कड़ी मेहनत का नतीजा है।” - नयी दिल्ली. भारतीय महिला क्रिकेट की दिग्गज खिलाड़ी मिताली राज ने इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में खेले गए ऐतिहासिक एकमात्र टेस्ट में भारत की 270 रन की शानदार जीत का सबसे बड़ा कारण परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता को बताया। भारत ने सोमवार को लॉर्ड्स में खेले गए पहले महिला टेस्ट को यादगार बनाते हुए मेजबान इंग्लैंड को चारों दिन हर विभाग में पछाड़कर बड़ी जीत दर्ज की। बल्लेबाजी में शतक लगाने वाली यास्तिका भाटिया की अगुवाई में भारतीय बल्लेबाजों ने इंग्लैंड के गेंदबाजों का बेहतर सामना किया, जबकि क्रांति गौड़ की अगुवाई वाली तेज गेंदबाजी इकाई ने मेजबान टीम की तुलना में पिच से ज्यादा मदद हासिल की।यास्तिका और क्रांति दोनों ने लॉर्ड्स 'ऑनर्स बोर्ड' पर अपना नाम दर्ज कराया। मिताली ने कहा, ''यह ऐतिहासिक जीत है और लॉर्ड्स में भारत का पहला टेस्ट था। यह देखकर अच्छा लगा कि टीम इस प्रारूप में इतना अच्छा प्रदर्शन कर रही है, जिसमें दुनिया भर की महिला क्रिकेटर अक्सर खेलने का मौका नहीं पातीं।'' पूर्व भारतीय कप्तान ने कहा कि हरमनप्रीत कौर की टीम ने हालिया टी20 विश्व कप में नॉकआउट चरण में जगह नहीं बना पाने की निराशा को पीछे छोड़ते हुए शानदार वापसी की। उन्होंने कहा, ''टी20 से खुद को अलग करके लंबे प्रारूप में उतरना किसी भी क्रिकेटर के लिए चुनौती होती है, लेकिन लड़कियों ने शानदार तरीके से खुद को तैयार किया। घरेलू टीम को उसके मैदान पर हराना अलग ही एहसास देता है। मुझे यकीन है कि टीम टी20 विश्व कप की निराशा से काफी हद तक आगे बढ़ चुकी है।'' मिताली ने कहा, ''खेल की यही खूबसूरती है। निराशा के बाद भी आपको अगले दिन के लिए तैयार होना पड़ता है और लड़कियों ने यही किया। उन्हें छोटा ब्रेक मिला, उन्होंने इस मुकाबले की तैयारी की और अब उसका परिणाम सबके सामने है।''मिताली ने क्रांति और यास्तिका के प्रदर्शन की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर दो भारतीय महिला खिलाड़ियों के नाम दर्ज होना अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा, ''मैं वास्तव में बहुत खुश हूं कि दो भारतीय महिला क्रिकेटरों के नाम ऑनर्स बोर्ड पर दर्ज हुए। यह भी एक ऐतिहासिक क्षण है।'' उन्होंने क्रांति की तारीफ करते हुए कहा, "क्रांति अभी भारतीय टीम में नई हैं। पिछले साल उन्होंने टीम में जगह बनाई और 50 ओवर के प्रारूप में भी काफी प्रभावशाली रही हैं। उनकी सबसे अच्छी बात यह है कि वह बड़े मंच से प्रभावित नहीं होतीं।'' मिताली ने यास्तिका भाटिया की वापसी की सराहना करते हुए कहा, ''यास्तिका बेहद मजबूत खिलाड़ी हैं। पिछले घरेलू विश्व कप से पहले वह चोटिल हो गई थीं। किसी खिलाड़ी के लिए घरेलू विश्व कप से बाहर रहना बेहद दुखद होता है। फिर भारत ने विश्व कप जीता, ऐसे में आप समझ सकते हैं कि उस समय वह कैसा महसूस कर रही होंगी।'' लॉर्ड्स में पहला महिला टेस्ट पुरुषों के पहले टेस्ट के 142 साल बाद खेला गया। इससे पहले भारतीय कोच अमोल मजूमदार ने भी इस बात पर हैरानी जताई थी कि इतने प्रतिष्ठित मैदान पर महिला टेस्ट आयोजित होने में इतना समय लग गया। मिताली ने इस पर कहा, ''मुझे भी हैरानी होती है कि हमने इंग्लैंड में टेस्ट खेले हैं, लेकिन लॉर्ड्स में कभी नहीं खेल पाए। इसका जवाब मैं नहीं दे सकती कि इसमें इतना समय क्यों लगा। लेकिन मेरा मानना है कि हर चीज का एक सही समय होता है।''
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लंदन। ऑफ स्पिनर स्नेह राणा के चार विकेट की बदौलत भारत ने सोमवार को यहां प्रतिष्ठित लॉर्ड्स मैदान पर खेले गए पहले महिला क्रिकेट टेस्ट मैच के चौथे और अंतिम दिन इंग्लैंड को 270 रन से हरा दिया। भारत को एकमात्र टेस्ट के अंतिम दिन जीत के लिए चार विकेट की दरकार थी और स्नेह (42 रन पर चार विकेट) की अगुआई में मेहमान टीम ने इंग्लैंड को 62.5 ओवर में 186 रन पर समेटकर मुकाबला अपने नाम किया। सयाली सतघरे (24 रन पर दो विकेट), दीप्ति शर्मा (36 रन पर दो विकेट) और क्रांति गौड़ (54 रन पर दो विकेट) ने भी दो-दो विकेट हासिल किए। विकेटकीपर बल्लेबाज ऐमी जोन्स 80 गेंद में 54 रन बनाकर इंग्लैंड की ओर से शीर्ष स्कोरर रही जबकि अंतिम बल्लेबाज के दौरान पर आउट होने वाली सोफी एकलेस्टोन ने 50 रन की पारी खेली। इंग्लैंड ने अंतिम दिन की शुरुआत छह विकेट पर 130 रन से आगे खेलते हुए की और 90 मिनट से अधिक बल्लेबाजी की लेकिन आखिरकार भारतीय गेंदबाजों के सामने घुटने टेक दिए। भारत ने मेजबान टीम के सामने 457 रनों का विशाल लक्ष्य रखा था। ऐमी अंतिम दिन आउट होने वाली पहली बल्लेबाज रहीं। उन्हें स्नेह ने मिडविकेट पर शेफाली वर्मा के हाथों कैच कराया। क्रांति की गेंद पर दो जीवनदान पाने वाली एकलेस्टोन ने इजी वोंग (33 गेंद में एक रन) के साथ मिलकर भारत के जीत के इंतजार को बढ़ाया लेकिन टीम को हार से नहीं बचा सकीं। दीप्ति ने वोंग और लॉरेन बेल (00) को बोल्ड करके भारत को जीत की दहलीज पर पहुंचाया।
स्नेह ने इसके बाद एकलेस्टोन को बोल्ड करके भारत की जीत सुनिश्चित की जिसके बाद मैदान पर और भारतीय ड्रेसिंग रूम में जश्न शुरू हो गया। भारत पिछले टी20 विश्व कप में ग्रुप चरण से आगे बढ़ने में नाकाम रहा था जबकि इंग्लैंड को फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा था। लॉर्ड्स में पुरुषों का पहला टेस्ट मैच होने के 142 साल बाद महिला टेस्ट मैच हो रहा था इसलिए इस ऐतिहासिक मैच में दोनों टीम के लिए बहुत कुछ दांव पर लगा था। भारत की जीत की नींव स्मृति मंधाना और तीसरे दिन यादगार शतक जड़ने वाली यस्तिका भाटिया ने रखी। क्रांति गौड़ ने पहली पारी में पांच विकेट लेकर भारत को महत्वपूर्ण बढ़त दिलाई और लॉर्ड्स के 'ऑनर बोर्ड' पर अपना नाम दर्ज कराया। भारतीय बल्लेबाजों ने इंग्लैंड की बल्लेबाजों की तुलना में पिच से बेहतर सामंजस्य बैठाया। पिच से तेज गेंदबाजों को मदद मिल रही थी जबकि तीसरे दिन कुछ गेंद नीची भी रह रहीं थीं। तेज गेंदबाजों क्रांति और सतघरे ने विपक्षी गेंदबाजों से बेहतर प्रदर्शन किया और पिच की ढलान का सही इस्तेमाल करते हुए काफी मूवमेंट हासिल किया। ऑफ स्पिनर स्नेह भी तेज गेंदबाजों द्वारा बनाए गए दबाव को बनाए रखने में कामयाब रहीं। इस बड़ी जीत के साथ भारत ने सबसे लंबे प्रारूप में इंग्लैंड के खिलाफ अपना शानदार रिकॉर्ड भी बरकरार रखा। दोनों टीम के बीच खेले गए 16 टेस्ट मैच में से भारत ने चार मैच जीते जबकि इंग्लैंड ने एक जीत हासिल की। अन्य 11 मैच ड्रॉ रहे। इंग्लैंड के हाथों भारत को एकमात्र हार 1995 में मिली थी।
दिन का खेल शुरू होने से पहले भारतीय टीम को महान सचिन तेंदुलकर से प्रेरणादायक बातें सुनने को मिलीं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के चेयरमैन जय शाह भी तेंदुलकर के साथ स्टैंड से मैच देख रहे थे और बाद में उन्होंने खिलाड़ियों से हाथ मिलाया। यह इंग्लैंड की अनुभवी खिलाड़ियों टैमी ब्यूमोंट और पूर्व कप्तान हीथर नाइट का विदाई मैच भी था। -
अटलांटा. मौजूदा विश्व कप में सर्वाधिक गोल करने वाले छह खिलाड़ियों में से पांच खिलाड़ी अब भी मैदान में बने हुए हैं जिससे 'गोल्डन बूट' हासिल करने की दौड़ रोचक बन गई है। अर्जेंटीना के सुपरस्टार लियोनेल मेस्सी और फ्रांस के स्टार स्ट्राइकर किलियन एमबाप्पे ने आठ-आठ गोल किए हैं और वह 'गोल्डन बूट' हासिल करने की दौड़ में सबसे आगे हैं। इन दोनों खिलाड़ियों के बीच विश्व कप करियर में सर्वाधिक गोल करने का रिकॉर्ड बनाने के लिए भी रोचक जंग चल रही है। मेस्सी ने अभी तक सभी विश्व कप में कुल मिलाकर 21 गोल किए हैं जबकि एमबाप्पे के नाम पर 20 गोल दर्ज हैं। मौजूदा टूर्नामेंट में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में इन दोनों के बाद नॉर्वे के एर्लिंग हालैंड का नंबर आता है जिन्होंने सात गोल किए हैं लेकिन उनकी टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई है। इसके अलावा इंग्लैंड के जूड बेलिंगहम और हैरी केन भी दौड़ में हैं। इन दोनों ने छह-छह गोल किए हैं। फ्रांस के औस्मान डेम्बेले पांच गोल करके ज्यादा पीछे नहीं हैं। स्पेन के मिकेल ओयार्ज़ाबल ने चार गोल किए हैं। अगर स्पेन सेमीफाइनल में फ्रांस को हरा देता है तो वह चुनौती पेश कर सकते हैं।
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साउथम्प्टन. भारतीय टी20 टीम के नए कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा कि उनकी टीम ब्रिटेन की परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाने में नाकाम रही जिसके कारण उसे आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ श्रृंखला में हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इससे उन्हें भविष्य में बेहतर कप्तान बनने में मदद मिलेगी। भारत की टी20 विश्व कप जीत के बाद सूर्यकुमार यादव की जगह कप्तान नियुक्त किए गए अय्यर की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम को आयरलैंड से 0-2 से हार का सामना करना पड़ा और फिर वह पहले मैच के बारिश के कारण रद्द होने के बाद इंग्लैंड से टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला 0-4 से हार गई। अय्यर ने इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें मैच में हार के बाद संवाददाताओं से कहा, ''अपेक्षाओं से निपटना वास्तव में मुश्किल नहीं है। मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे कप्तानी करने का मौका मिला है। प्रत्येक व्यक्ति भारतीय टीम की कप्तानी करने और शीर्ष स्तर पर जिम्मेदारी संभालने का सपना देखता है। निश्चित रूप से मुझे दबाव पसंद है।'' उन्होंने कहा, ''इसलिए दबाव में अच्छा प्रदर्शन करना, इन मैच से सीखना निश्चित रूप से मुझे आगे चलकर बेहतर बनाएगा। मेरी अभी की सोच यही है। मैं इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहा हूं कि लोग इस श्रृंखला के बारे में क्या सोचेंगे, क्योंकि अच्छा और बुरा इस खेल का अभिन्न अंग है।'' अय्यर ने कहा कि टीम के लिए सकारात्मक मानसिकता बनाए रखना जरूरी है क्योंकि यही आगे सफलता की कुंजी होगी। उन्होंने कहा, ''भविष्य में मुझे इस बात को लेकर बेहद सकारात्मक रहना होगा कि मैं विशेषकर विदेश की परिस्थितियों में अपने खिलाड़ियों के खेल में निखार लाने में कैसे मदद कर सकता हूं।'' उन्होंने कहा, ''हम जानते हैं कि हमें ऑस्ट्रेलिया (अगला टी20 विश्व कप) खेलना है। उससे पहले हमें कई अन्य स्थानों पर खेलना है। हमारा लक्ष्य एक ऐसी टीम तैयार करना है जो इन परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन कर सके। भविष्य के लिए हमारी यही योजना है।'' भारत को शनिवार को पांचवें और अंतिम टी20 मैच में 56 रन से हार का सामना करना पड़ा और अय्यर ने स्वीकार किया कि उनकी टीम इस दौरे के दौरान परिस्थितियों के अनुकूल जल्दी से ढल नहीं पाई। उन्होंने कहा, ''हम एक मैदान से दूसरे मैदान पर जाते रहे और हमें लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हम जितनी जल्दी परिस्थितियों से सामंजस्य बिठा सकते थे, वैसा करने में नाकाम रहे। यह पहली चुनौती थी। दूसरी चुनौती उनका हर विभाग में हमसे बेहतर प्रदर्शन करना रहा। इसलिए मुझे लगता है कि इन सब कारण से हमें हार मिली।'' लगातार छह मैचों में हार के कारण भारत ने टी20 अंतरराष्ट्रीय में अपनी नंबर एक रैंकिंग गंवा दी।
अय्यर ने कहा, ''यह वास्तव में निराशाजनक है। लेकिन मुझे लगता है कि कप्तान के तौर पर यह मेरे लिए और पहली बार यहां खेल रहे खिलाड़ियों के लिए भी बेहतरीन सीख है। आपको इंग्लैंड में जीत दर्ज करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी और एकाग्रता बनाए रखनी होगी।'' शीर्ष रैंकिंग गंवाने पर अय्यर ने कहा, ''यह सबके लिए मायने रखता है। अगर आप नंबर एक हैं, तो मुझे लगता है कि आपने टीम के लिए और व्यक्तिगत रूप से भी कुछ बहुत अच्छा किया है। विश्व कप अभी दो साल दूर है। अभी जो कुछ भी हो रहा है, वह सब विश्व कप की तैयारी है। इसलिए जितनी जल्दी और जितनी तेजी से हम सीखेंगे, उतना ही टीम और खिलाड़ियों के लिए अच्छा होगा।'' भारतीय कप्तान ने इसके साथ ही कहा कि टीम को अपने क्षेत्ररक्षण में काफी सुधार करने की जरूरत है।




























