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चांदी 1,500 रुपये मजबूत
नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने की कीमत बृहस्पतिवार को 3,600 रुपये उछलकर 1,02,620 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। भारतीय आयात पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त अमेरिकी शुल्क की घोषणा के बाद निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया, जिससे सोने के दाम में तेजी आई। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना बुधवार को 99,020 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। राष्ट्रीय राजधानी में, 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 3,600 रुपये उछलकर 1,02,200 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह 98,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा कि सोने की कीमतों में तेजी का कारण नए सिरे से उत्पन्न व्यापार को लेकर चिंताएं हैं जिनसे पारंपरिक सुरक्षित-संपत्तियों की मांग बढ़ी है।'' उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा, अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय आयातों पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगा दिया, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार तनाव और बढ़ गया।'' सर्राफा संघ के अनुसार, इसके अलावा, बृहस्पतिवार को चांदी की कीमतें 1,500 रुपये बढ़कर 1,14,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गईं। बुधवार को चांदी 1,12,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। इस बीच, न्यूयॉर्क में हाजिर सोना 9.76 डॉलर या 0.29 प्रतिशत बढ़कर 3,379.15 डॉलर प्रति औंस हो गया।
एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष (शोध विश्लेषक...जिंस और मुद्रा) जतीन त्रिवेदी ने कहा, ‘‘अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 3,375 डॉलर के स्तर से ऊपर रही। इसे डॉलर सूचकांक के 98 से नीचे कमजोर होने से समर्थन मिला।'' उन्होंने कहा, ‘...वैश्विक व्यापार शुल्क और नए रूसी प्रतिबंधों पर कारोबारियों की नजर है। दोनों ही सोने की कीमतों में तेजी का कारण बन रहे हैं।'' विदेशी बाजार में हाजिर चांदी 1.37 प्रतिशत बढ़कर 38.34 डॉलर प्रति औंस पर रही।
मिराए एसेट शेयर खान के प्रवीण सिंह ने कहा, ‘‘अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चिप आयात पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने की चेतावनी दे रहे हैं और व्यापार तनाव सोने के लिए सकारात्मक है। इसके अलावा, राष्ट्रपति ट्रंप इस हफ्ते अगले फेडरल रिजर्व अध्यक्ष की घोषणा भी कर सकते हैं। -
लखनऊ. अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने युवाओं से पारंपरिक सोच से आगे बढ़ने को कहा है। उन्होंने कहा कि "भविष्य कभी भी उनका नहीं होगा जो सुरक्षित खेलते हैं, बल्कि उनका होगा जो संभावनाओं को अधिकतम करते हैं।" अरबपति उद्योगपति ने भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) लखनऊ में बृहस्पतिवार को छात्रों को संबोधित करते इस बात पर भी ज़ोर दिया कि 2050 तक भारत 25,000 अरब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था की ‘महाशक्ति' बन जाएगा, जिसकी ओर ‘वैश्विक गुरुत्वाकर्षण केंद्र' होगा। कृत्रिम मेधा, एल्गोरिथम आधारित निर्णय लेने और वैश्विक अनिश्चितता के युग में शिक्षा की भूमिका पर बोलते हुए अदाणी ने कहा, "डीसी मॉडल, पोर्टर के पांच बल और एसडब्ल्यूओटी विश्लेषण जैसे ढांचों का अध्ययन करने का व्यवसाय की दुनिया में अपना स्थान है, लेकिन ये धारणाओं और पूर्वज्ञान पर आधारित होते हैं। ये आपको जोखिम को कम करना सिखाते हैं, लेकिन भविष्य को अधिकतम नहीं बनाना सिखाते, क्योंकि भविष्य कभी भी उनका नहीं होगा जो सुरक्षित खेलते हैं। यह उनका है जो संभावनाओं को अधिकतम करते हैं।'' उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा कि भविष्य को आकार देने के लिए कल्पनाशीलता, जोखिम उठाने और दृढ़ विश्वास की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा, ‘‘संभावनाओं को अधिकतम करने का मतलब है बाज़ार के तैयार होने का संकेत देने से पहले ही क्षेत्र निर्माण में कदम रखना।'' अदाणी समूह की मुंद्रा, धारावी और ऑस्ट्रेलिया जैसी कुछ चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने आगे कहा, ‘‘ये सिर्फ़ व्यावसायिक कार्य नहीं हैं, बल्कि कल्पनाशीलता के कार्य हैं, दुनिया को जैसी है वैसी स्वीकार न करने और उसे जैसी हो सकती है वैसी देखने का साहस।'' उन्होंने छात्रों से पाठ्य पुस्तकों से आगे सोचने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा ‘‘व्यावसायिक ढांचा आपको पहले से नापा हुआ, पहले से चिह्नित और सुरक्षित कैनवास प्रदान करते हैं। लेकिन भारत को खाली जगहों को भरने वाले और चित्रकारों की ज़रूरत नहीं है। उसे ऐसे लोगों की ज़रूरत है जो कैनवास पर ही सवाल उठा सकें, जो ऐसे रंगों से चित्रकारी कर सकें जिनकी अभी तक कल्पना भी नहीं की गई है। और यही, अभी, आपका क्षण है क्योंकि भारत वह कैनवास है जो असाधारण युग में खड़ा है।'' अदाणी ने कहा कि देश का परिवर्तन ‘चार अजेय शक्तियों" - जनसांख्यिकी, मांग, डिजिटल बुनियादी ढांचा और घरेलू पूंजी द्वारा संचालित हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘पहली है जनसांख्यिकी - हम इस धरती पर सबसे युवा, सबसे महत्वाकांक्षी कामकाजी आबादी हैं। एक अरब सपने साकार होने के लिए तैयार हैं।'' ‘‘दूसरी है मांग। हम 2030 तक न केवल उपभोग करके, बल्कि दुनिया के लिए बाज़ार बनाकर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दौड़ में हैं।'' उन्होंने तीसरी शक्ति के रूप में भारत के डिजिटल बुनियादी ढाँचे पर प्रकाश डाला। ‘‘किसी भी देश ने वह नहीं बनाया है जो हमने बनाया है - जैसे आधार, यूपीआई और ओएनडीसी। ये केवल मंच नहीं हैं, बल्कि समावेश, नवाचार और पैमाने के लिए ‘लॉन्च पैड' हैं।'' ‘‘और चौथी है घरेलू पूंजी। हमारे इतिहास में पहली बार भारतीय धन भारतीय विचारों का साहस, दृढ़ विश्वास और ऐसी तत्परता के साथ समर्थन कर रहा है जो हमने पहले कभी नहीं देखी।'' उन्होंने कहा, ‘‘आप 5,000 या 10,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था की कल्पना नहीं कर रहे होंगे, बल्कि आप एक ऐसे भारत की कल्पना कर रहे होंगे जो 2050 तक 25,000 अरब डॉलर की महाशक्ति बन जाएगा। वैश्विक गुरुत्वाकर्षण का केंद्र बदल जाएगा और यह आपकी और भारत की ओर होगा।'' छात्रों से भारत के सभ्यतागत मूल्यों में अपनी जड़ें जमाने का आग्रह करते हुए, अदाणी ने कहा, ‘‘आपने दुनिया भर में लिखी गई पुस्तकों का अध्ययन किया होगा, लेकिन याद रखें कि कुछ गहरा है और कुछ ऐसा है जो हर भारतीय जानता है जो कोई भी पाठ्य पुस्तक आपको कभी नहीं सिखा सकती।' - वाशिंगटन/ नयी दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को रूस से तेल खरीद जारी रखने पर भारत से आयातित वस्तुओं पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाने के कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए। इसके साथ ही भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में लगने वाला शुल्क अब बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया है।इस कदम से कपड़ा, समुद्री उत्पाद और चमड़ा निर्यात जैसे क्षेत्रों पर बुरा असर पड़ने की आशंका है।इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत ने कहा कि ये कदम ''अनुचित और अविवेकपूर्ण'' हैं।विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला किया है। साथ ही, भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। ट्रंप ने पिछले सप्ताह ही 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की थी। उन्होंने इस शुल्क के लागू होने से चंद घंटे पहले अतिरिक्त शुल्क लगाने वाले आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए। इस आदेश के बाद कुछ रियायत प्राप्त वस्तुओं को छोड़कर भारतीय वस्तुओं पर कुल शुल्क 50 प्रतिशत हो जाएगा। आदेश में कहा गया है, ''मूल्य के अनुरूप लगाया गया शुल्क... ऐसे आयातों पर लागू किसी भी अन्य शुल्क, फीस, कर, वसूली और प्रभार के अतिरिक्त होगा।'' प्रारंभिक शुल्क सात अगस्त से प्रभावी होगा जबकि अतिरिक्त शुल्क 21 दिन बाद लागू होगा।ट्रंप ने मंगलवार को चेतावनी देते हुए कहा था कि वह रूस से तेल एवं गैस खरीदने के लिए भारत पर 24 घंटे में भारी शुल्क की घोषणा करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस इस तेल बिक्री से हासिल राशि का इस्तेमाल कर रहा है जबकि भारत सस्ता तेल पाने के लिए इस पहलू पर ध्यान नहीं दे रहा है। ट्रंप ने 30 जुलाई को भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत शुल्क की घोषणा करते समय भी कहा था कि वह रूस से तेल एवं गैस खरीदने की वजह से भारत पर अलग से जुर्माना लगाएंगे। आदेश में ट्रंप ने कहा, ''मुझे लगता है कि भारत सरकार इस समय प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रूसी संघ से तेल आयात कर रही है। इसलिए, और लागू कानून के मुताबिक, अमेरिका के सीमा शुल्क क्षेत्र में आयातित भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत की अतिरिक्त शुल्क दर लागू होगी।'' भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेश से खरीदता है। भारत 2021 तक आयातित कुल कच्चे तेल का मुश्किल से 0.2 प्रतिशत ही रूस से खरीदता था। लेकिन रूस अब भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है। भारत ने जुलाई में प्रतिदिन लगभग 50 लाख बैरल तेल का आयात किया, जिसमें से 16 लाख बैरल रूस से आया।नए शुल्क के बाद, अमेरिका में भारत एवं ब्राजील के उत्पादों पर सबसे अधिक 50 प्रतिशत शुल्क लगेगा। ऐसे में भारत के प्रतिस्पर्धी देश अमेरिकी बाजार में बेहतर स्थिति में होंगे, क्योंकि उनका शुल्क कम है। अमेरिका ने म्यांमार पर 40 प्रतिशत, थाईलैंड और कंबोडिया पर 36 प्रतिशत, बांग्लादेश पर 35 प्रतिशत, इंडोनेशिया पर 32 प्रतिशत, चीन और श्रीलंका पर 30 प्रतिशत, मलेशिया पर 25 प्रतिशत, फिलीपींस और वियतनाम पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाया है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिकी दल प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर छठे दौर की बातचीत के लिए 25 अगस्त को भारत आने वाला है। जिन क्षेत्रों को इन शुल्कों से नुकसान होगा, उनमें कपड़ा/ परिधान, रत्न और आभूषण, झींगा, चमड़ा और जूते, पशु उत्पाद, रसायन, और बिजली तथा यांत्रिक मशीनरी शामिल हैं। हालांकि दवा, ऊर्जा उत्पादों (कच्चा तेल, परिष्कृत ईंधन, प्राकृतिक गैस, कोयला और बिजली) महत्वपूर्ण खनिज और इलेक्ट्रॉनिक्स तथा अर्धचालकों की एक विस्तृत श्रृंखला पर ये शुल्क लागू नहीं होंगे। निर्यातकों के अनुसार इस कदम से अमेरिका को भारत के 86 अरब डॉलर के निर्यात पर गंभीर असर पड़ेगा।भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, ''यह बेहद चौंकाने वाला कदम है। इससे अमेरिका को भारत के 55 प्रतिशत निर्यात पर असर पड़ेगा।'' इस घोषणा को प्रस्तावित बीटीए में अमेरिकी मांगों के पक्ष में नयी दिल्ली पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिका कुछ औद्योगिक वस्तुओं, इलेक्ट्रिक वाहनों, वाइन, पेट्रोकेमिकल उत्पादों, कृषि उत्पादों, डेयरी उत्पादों, सेब और आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों पर शुल्क में रियायत की मांग कर रहा है।
- नयी दिल्ली.भारतीय तेल रिफाइनरी कंपनियां रूस से तेल आयात की गति धीमी होने और अपने आयात बास्केट में विविधता लाने के उपाय तेज कर सकती हैं। इसके पीछे वजह यह है कि भारत, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क की घोषणा से होने वाले असर का आकलन कर रहा है। ट्रंप ने बुधवार को एक कार्यकारी आदेश जारी किया, जिसमें रूस से तेल आयात जारी रखने पर भारत से आयातित उत्पादों पर शुल्क को दोगुना करके 50 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों को व्यावसायिक व्यवहार्यता को ध्यान में रखते हुए कच्चा तेल खरीदने की पूरी छूट दी है। लेकिन घटनाक्रम से परिचित तीन सूत्रों ने बताया कि रिफाइनरी संतुलन बनाने के लिए अमेरिका और अन्य गैर-ओपेक आपूर्तिकर्ताओं से आयात बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ताजा शुल्क आदेश के बाद रिफाइनरी रूस से तेल आयात को लेकर सतर्क रुख अपनाएंगी।उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी तक उन्हें रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद करने या गति धीमी करने के लिए नहीं कहा है। ट्रंप के कार्यकारी आदेश जारी करने के फौरन बाद अधिकारियों ने संभावित परिणामों और विकल्पों पर चर्चा करते हुए एक बैठक की। सूत्रों ने यह भी कहा कि रूस के तेल पर छूट घटकर दो डॉलर प्रति बैरल से भी कम रह गई है, जिससे अब रूसी तेल खरीदने पर कोई खास आर्थिक लाभ नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत इस समय रूस से जितनी बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहा है, उसे देखते हुए तेजी से इसे कम करना लगभग असंभव होगा। चीन और तुर्किये से आगे निकलते हुए भारत इस समय रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है।
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नयी दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारतीय वस्तुओं पर घोषित 25 प्रतिशत शुल्क का देश के सकल घरेलू उत्पाद पर ''नगण्य'' प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि इससे अमेरिका को होने वाला सिर्फ 8.1 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात प्रभावित हो सकता है। पीएचडीसीसीआई ने बुधवार को जारी एक अध्ययन में यह संभावना जताई। अमेरिका द्वारा घोषित शुल्क सात अगस्त, 2025 से लागू होने वाला है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के अध्ययन में अमेरिकी शुल्क के असर को कम करने के लिए कई उपायों की सिफारिश भी की गई है। पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष हेमंत जैन ने कहा, ‘‘हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि अमेरिका द्वारा भारत पर घोषित 25 प्रतिशत शुल्क के चलते भारत के कुल वैश्विक वस्तु निर्यात पर सिर्फ 1.87 प्रतिशत और भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर सिर्फ 0.19 प्रतिशत का असर पड़ेगा।'' अध्ययन में कहा गया कि शुल्क से इंजीनियरिंग सामान, रत्न एवं आभूषण और तैयार वस्त्र उद्योग प्रभावित होंगे। उद्योग निकाय ने अमेरिकी शुल्क के मद्देनजर बाजार में पैठ बढ़ाने, उत्पाद विकास और बाजार विविधीकरण सहित कई उपायों की सिफारिश की है।
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नयी दिल्ली. स्टॉकिस्टों की ताजा खरीदारी के कारण सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में सोने की कीमत 400 रुपये बढ़कर 98,020 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने यह जानकारी दी। शुक्रवार को 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 97,620 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी।
राष्ट्रीय राजधानी में, 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना सोमवार को 300 रुपये बढ़कर 97,800 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गया। पिछले बाजार बंद में यह सोना 97,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। इसके अलावा, सोमवार को चांदी की कीमत 500 रुपये बढ़कर 1,10,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गई। शुक्रवार को चांदी की कीमत 1,09,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष शोध विश्लेषक - (जिंस और मुद्रा) जतिन त्रिवेदी ने कहा, ‘‘कमजोर रुपये और शुक्रवार को निराशाजनक वृहद अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के कारण सोने की कीमतों में काफी मजबूती रही। इन आंकड़ों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों को सहारा दिया, जो 3,355 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गयी।'' उन्होंने कहा, ‘‘शुल्क संबंधी चिंताओं और रुपये की विनिमय दर में गिरावट ने तेजी की गति को और बढ़ा दिया। आने वाले सप्ताह में, निवेशक अपना ध्यान आगामी रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति बैठक और अमेरिकी विनिर्माण आंकड़ों पर केंद्रित करेंगे, जो निकट भविष्य में सर्राफा कीमतों की दिशा को लेकर मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।'' इस बीच, न्यूयॉर्क में हाजिर सोना 3,363.83 डॉलर प्रति औंस पर रहा।
मिराए एसेट शेयर खान के सह-उपाध्यक्ष (मुद्रा एवं जिंस) प्रवीण सिंह ने कहा, ‘‘दरों में कटौती की उम्मीद में जोखिम वाली संपत्तियों की बोली लगने के कारण हाजिर सोना 3,355 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।'' सिंह ने कहा, ‘‘हालांकि, शुल्क संबंधी चिंताओं के कारण भारतीय रुपये में तेज गिरावट से घरेलू सोने की कीमतों को समर्थन मिला है।'' हालांकि, विदेशी बाजारों में हाजिर चांदी की कीमत 0.43 प्रतिशत बढ़कर 37.20 डॉलर प्रति औंस हो गई। -
नई दिल्ली। संचार मंत्रालय द्वारा रविवार को जारी एक बयान के अनुसार, भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (एनआरएल) ने भारत के डिजिटल परिवर्तन और औद्योगिक आधुनिकीकरण को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता ज्ञापन बीएसएनएल और एनआरएल के लिए रिफाइनरी क्षेत्र में भारत के पहले 5जी सीएनपीएन (कैप्टिव नॉन-पब्लिक नेटवर्क) की स्थापना के लिए सहयोग का मार्ग प्रशस्त करता है, जिससे सुरक्षित, अति-विश्वसनीय और रियल-टाइम औद्योगिक कनेक्टिविटी के एक नए युग की शुरुआत होगी।
यह पहल मिशन-क्रिटिकल कार्यों में स्वदेशी 5G तकनीक की क्षमता का लाभ उठाने की ओर एक निर्णायक कदम हैबयान में बताया गया है कि यह पहल मिशन-क्रिटिकल कार्यों के लिए स्वदेशी 5जी इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ उठाने की दिशा में एक अग्रणी कदम है। बयान में कहा गया है कि बीएसएनएल और एनआरएल के बीच इस साझेदारी से दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों में अनुकरणीय मॉडलों के लिए मंच तैयार होने की उम्मीद है, जिससे केंद्र सरकार के डिजिटल रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को बल मिलेगा।गुवाहाटी में वित्त मंत्रालय की देखरेख में आयोजित ‘इंडस्ट्री 4.0 वर्कशॉप’ में सीपीएसई के लिए इस एमओयू पर हस्ताक्षर हुएगुवाहाटी में वित्त मंत्रालय के तत्वावधान में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) के लिए आयोजित ‘इंडस्ट्री 4.0 वर्कशॉप’ के दौरान इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। वर्कशॉप में कई वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया, जिनमें लोक उद्यम विभाग (डीपीई) के सचिव, एनआरएल के सीएमडी, बीएसएनएल के निदेशक (उद्यम व्यवसाय), एनआरएल के एमडी, एमट्रॉन के एमडी और वित्त मंत्रालय तथा विभिन्न सीपीएसई के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।वर्कशॉप में चर्चाओं का केंद्र सीपीएसई को परिवर्तनकारी इंडस्ट्री 4.0 तकनीकें अपनाने के लिए सशक्त बनाना रहावर्कशॉप के दौरान हुई चर्चाओं में सीपीएसई को परिवर्तनकारी इंडस्ट्री 4.0 तकनीकों को अपनाने के लिए सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिनमें 5जी सीएनपीएन , डिजिटल ट्विन्स , एआई के साथ 3डी प्रिंटिंग , वर्चुअल फॉर्मूलेशन , एआर/वीआर/एमआर , आईओटी और बिग डेटा एनालिटिक्स शामिल हैं, ताकि इनोवेशन, दक्षता और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा दिया जा सके।डीपीई सचिव ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे सरकार के ‘संपूर्ण सरकार’ (WOG) दृष्टिकोण का उत्कृष्ट उदाहरण बतायाडीपीई सचिव ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे सरकार के ‘संपूर्ण सरकार (डब्ल्यूओजी) दृष्टिकोण का एक उत्तम उदाहरण बताया। एनआरएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने कहा कि 5जी सीएनपीएन के इंटीग्रेशन से न केवल परिचालन दक्षता और साइबर सुरक्षा में वृद्धि होगी, बल्कि एआर/वीआर-आधारित प्रशिक्षण, डिजिटल ट्विन्स और रियल-टाइम आईओटी अनुप्रयोगों जैसी परिवर्तनकारी तकनीकों को भी सक्षम बनाया जा सकेगा। बीएसएनएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक ए. रॉबर्ट जे. रवि ने कहा, “यह साझेदारी नेक्स्ट जनरेशन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ भारत के रणनीतिक क्षेत्रों को सशक्त बनाने के लिए बीएसएनएल की प्रतिबद्धता का उदाहरण है।” - कोलकाता. शोध फर्म इक्रा के मुताबिक चालू सत्र में खरीफ फसलों की बुवाई पिछले साल के स्तर से पर्याप्त अधिक हो सकती है। इक्रा ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा कि अनुकूल मानसून की मदद से, सामान्य बुवाई क्षेत्र के 76 प्रतिशत पर खरीफ की बुवाई पूरी हो चुकी है और जुलाई 2025 तक इसमें सालाना आधार पर चार प्रतिशत की वृद्धि होगी। जून और जुलाई के बरसात के महीनों में बोई जाने वाली खरीफ फसलें मुख्य रूप से मूंग, चावल और मक्का हैं।रिपोर्ट में कहा गया कि अगस्त और सितंबर के दौरान सामान्य से अधिक बारिश का मौसम विभाग का पूर्वानुमान खरीफ फसलों की निरंतर बुवाई के लिए अच्छा संकेत है, और जलाशयों के भर जाने से अक्टूबर से मार्च तक रबी सत्र के दौरान भी बुवाई को बढ़ावा मिलेगा। इक्रा की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2025 के दौरान भारत में सामान्य से अधिक बारिश हुई है।रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पूरे दक्षिण-पश्चिम मानसून सत्र के दौरान बारिश की मात्रा दीर्घावधि औसत (एलपीए) के 106 प्रतिशत से अधिक होने का अनुमान है। इक्रा का अनुमान है कि 2025-26 की पहली तिमाही के दौरान कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन में सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) वृद्धि लगभग 4.5 प्रतिशत होगी। साथ ही, वास्तविक ग्रामीण मजदूरी में वृद्धि जनवरी 2025 के शून्य स्तर से बढ़कर मई 2025 में चार प्रतिशत हो जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे ग्रामीण उपभोग मांग को बढ़ावा मिलेगा।
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नई दिल्ली। भारत की विश्वसनीय सरकारी दूरसंचार कंपनी, भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) ने शुक्रवार को अपना बहुप्रतीक्षित एक सीमित अवधि का 1 रुपए वाला ऑफर, 'फ्रीडम प्लान' लॉन्च किया है, जिसमें उपभोक्ताओं को पूरे एक महीने के लिए बीएसएनएल की 4G मोबाइल सेवाओं का इस्तेमाल करने का मौका मिलता है। यह पहल बीएसएनएल द्वारा भारत के स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में शुरू की गई है और ये नागरिकों को भारत की स्वदेशी रूप से विकसित 4G तकनीक का बगैर किसी शुल्क के अनुभव करने का अवसर प्रदान करती है।
इस प्लान में शामिल हैं:असीमित वॉयस कॉल (लोकल/एसटीडी),प्रतिदिन 2 जीबी हाई-स्पीड डेटा,प्रतिदिन 100 एसएमएस, औरएक बीएसएनएल सिम—बिल्कुल मुफ़्त।इस ऑफर की घोषणा करते हुए, बीएसएनएल के सीएमडी, श्री ए. रॉबर्ट जे. रवि ने कहा:"'आत्मनिर्भर भारत' मिशन के तहत डिज़ाइन, विकसित और लागू किए गए बीएसएनएल के 4G के साथ, हमें भारत को उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल करने पर गर्व है, जिन्होंने अपना स्वयं का टेलीकॉम स्टैक तैयार किया है। हमारा 'फ्रीडम प्लान' हर भारतीय को 30 दिनों के लिए इस स्वदेशी नेटवर्क को मुफ़्त में परखने और अनुभव करने का मौका देता है और हमें भरोसा है कि वे बीएसएनएल में आए फर्क को महसूस करेंगे।"उन्होंने कहा कि बीएसएनएल देश भर में मेक-इन-इंडिया तकनीक का उपयोग करके, 1,00,000 4G साइट्स स्थापित कर रहा है, और यह पहल सुरक्षित, उच्च-गुणवत्ता और किफ़ायती मोबाइल कनेक्टिविटी के साथ डिजिटल इंडिया को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर है।सभी नागरिक नज़दीकी बीएसएनएल ग्राहक सेवा केंद्र, रिटेलर पर जाकर या टोल-फ्री नंबर 1800-180-1503 पर कॉल करके फ्रीडम प्लान का लाभ उठा सकते हैं।"बीएसएनएल के मेड-इन-इंडिया 4G के साथ आज़ादी का जश्न मनाएँ" - मुंबई। ऊंची कीमतों के बीच अप्रैल-जून तिमाही के दौरान सोने की वैश्विक मांग सालाना आधार पर तीन प्रतिशत बढ़कर 1,249 टन हो गई है। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) ने बृहस्पतिवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। डब्ल्यूजीसी की 2025 की दूसरी तिमाही की स्वर्ण मांग प्रवृत्ति रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत स्वर्ण निवेश प्रवाह ने तिमाही वृद्धि को काफी हद तक बढ़ावा दिया। तेजी से अप्रत्याशित होते भू-राजनीतिक माहौल और मूल्य गति ने मांग को बनाए रखा। रिपोर्ट कहती है, “गोल्ड ईटीएफ में निवेश की कुल मांग में महत्वपूर्ण भूमिका रही।गोल्ड ईटीएफ में तिमाही के दौरान 170 टन का प्रवाह हुआ, जबकि 2024 की दूसरी तिमाही में इसमें मामूली निकासी देखने को मिली थी।'' रिपोर्ट में कहा गया, “एशियाई सूचीबद्ध कोषों ने 70 टन के साथ अमेरिकी प्रवाह के साथ तालमेल बनाए रखते हुए प्रमुख योगदान दिया। पहली तिमाही में रिकॉर्ड निवेश के साथ, वैश्विक गोल्ड ईटीएफ की मांग 397 टन तक पहुंच गई, जो 2020 के बाद पहली छमाही का उच्चतम योग है।” इस बीच, सोने के बिस्कुट और सिक्के में निवेश भी सालाना आधार पर 11 प्रतिशत बढ़कर 307 टन हो गया।चीनी निवेशकों ने सालाना 44 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 115 टन का निवेश किया, जबकि भारतीय निवेशकों ने दूसरी तिमाही में कुल 46 टन का निवेश किया। पश्चिमी बाज़ारों में अलग-अलग रुझान उभरे, जहां दूसरी तिमाही में यूरोपीय शुद्ध निवेश दोगुने से भी ज़्यादा बढ़कर 28 टन हो गया, जबकि अमेरिका में सोने के बिस्कुट और सिक्कों की मांग आधी होकर नौ टन रह गई। केंद्रीय बैंकों ने खरीदारी जारी रखी और इस साल अप्रैल-जून तिमाही में पोलैंड, तुर्की और अज़रबैजान ने 166 टन की खरीदारी की। इस सुस्ती के बावजूद, जारी आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण केंद्रीय बैंक की खरीदारी काफी ऊंचे स्तर पर बनी रही। रिपोर्ट में कहा गया, “हमारे वार्षिक केंद्रीय बैंक सर्वेक्षण से पता चलता है कि 95 प्रतिशत रिजर्व प्रबंधकों का मानना है कि अगले 12 महीनों में वैश्विक केंद्रीय बैंक स्वर्ण भंडार में वृद्धि होगी।” आभूषणों की मांग में गिरावट जारी रही, खपत की मात्रा में 14 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 2020 में कोविड महामारी के दौरान देखे गए निम्नतम स्तर के करीब पहुंच गई।
- नयी दिल्ली। टाटा मोटर्स एक अरब यूरो इक्विटी पूंजी जुटाने की योजना बना रही है। कंपनी इटली की वाणिज्यिक वाहन विनिर्माता इवेको ग्रुप के अधिग्रहण के वास्ते आवश्यक 3.8 अरब यूरो के लिए यह राशि जुटा रही है। इस अधिग्रहण से यह वैश्विक स्तर पर चौथी सबसे बड़ी ट्रक विनिर्माता कंपनी बन जाएगी।कंपनी ने बुधवार को घोषणा की थी कि वह इवेको ग्रुप का अधिग्रहण करेगी जिसमें रक्षा कारोबार शामिल नहीं है। यह सौदा 3.8 अरब यूरो (करीब 38,240 करोड़ रुपये) में होगा, जो भारतीय वाहन विनिर्माता कंपनी का सबसे बड़ा अधिग्रहण होगा। टाटा मोटर्स समूह के मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) पी. बी. बालाजी ने कॉन्फ्रेंस कॉल में कहा, ‘‘ मॉर्गन स्टेनली और एमयूएफजी द्वारा प्रतिबद्ध ‘ब्रिज फाइनेंसिंग' सुविधा के माध्यम से 3.8 अरब यूरो का वित्तपोषण पहले ही सुरक्षित कर लिया गया है ...उम्मीद है कि लेनदेन के पूरा होने के बाद अगले 12 से 18 महीने में इक्विटी और दीर्घकालिक ऋण के संयोजन द्वारा इसे समाप्त कर दिया जाएगा।'' ‘ब्रिज फाइनेंसिंग' एक अल्पकालिक ऋण है जिसका उपयोग अक्सर तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति या कंपनी को एक बड़े, दीर्घकालिक ऋण या वित्तपोषण स्रोत के आने से पहले तत्काल नकदी की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा, ‘‘ हमें उम्मीद है कि यह लेनदेन अगले साल अप्रैल तक पूरा हो जाएगा, बशर्ते सभी नियामकीय मंजूरियां मिल जाएं।''
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नयी दिल्ली. सहकारी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इफको ने के. जे. पटेल को अपना नया प्रबंध निदेशक (एमडी) नियुक्त किया है। पूर्व प्रमुख यू. एस. अवस्थी का कार्यकाल आज यानी बृहस्पतिवार को समाप्त हो रहा है। इफको के अध्यक्ष दिलीप संघानी ने बयान में कहा कि पटेल को नया प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है।
पटेल अभी तक इफको में निदेशक (तकनीकी) थे। वह भारत के सबसे बड़े जटिल उर्वरक संयंत्र, इफको पारादीप संयंत्र का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने सौराष्ट्र विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की है और उन्हें नाइट्रोजन एवं फॉस्फेट उर्वरक संयंत्रों के रखरखाव में 32 वर्ष से अधिक का समृद्ध अनुभव है। संघानी ने कहा, ‘‘ पटेल अपने साथ उद्योग की गहन समझ और सिद्ध रणनीतिक सोच लेकर आए हैं जो इफको के लक्ष्यों के अनुरूप है।'' उन्होंने इफको के साथ-साथ देश भर के किसानों के लिए निवर्तमान एमडी यू.एस. अवस्थी के योगदान और समर्पण की सराहना भी की। - नयी दिल्ली. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि सरकार ने वाहन उद्योग में भारत को दुनिया का अग्रणी देश बनाने का लक्ष्य रखा है। गडकरी ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि वाहन क्षेत्र ने अबतक देश में 4.5 करोड़ लोगों को रोजगार दिया है, जो किसी भी अन्य क्षेत्र की तुलना में सबसे अधिक है। उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय वाहन उद्योग का आकार अब 22 लाख करोड़ रुपये हो गया है।... हम सभी का मिशन है कि इस उद्योग को दुनिया में पहले स्थान पर लेकर जाएं।'' केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फिलहाल अमेरिका के वाहन उद्योग का आकार 78 लाख करोड़ रुपये है और चीन का वाहन उद्योग 47 लाख करोड़ रुपये है। भारत इस मामले में तीसरे स्थान पर है। गडकरी ने कहा कि 2014 में जब उन्होंने मंत्रालय का कार्यभार संभाला था, तब यह उद्योग केवल 7.5 लाख करोड़ रुपये का था। उन्होंने कहा कि वाहन क्षेत्र न केवल सबसे अधिक रोजगार दे रहा है, बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के जरिये सबसे अधिक राजस्व भी दे रहा है। हालांकि, गडकरी ने इस बात को भी स्वीकार किया कि देश में कुल प्रदूषण का 40 प्रतिशत हिस्सा परिवहन क्षेत्र से आता है। उन्होंने इस एक आर्थिक चुनौती बताते हुए उद्योग जगत से हरित और वैकल्पिक ईंधन पर जोर देने को कहा।
- वाशिंगटन. रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले सिर्फ़ 0.2 प्रतिशत से बढ़कर अब कुल कच्चे तेल के आयात में 35-40 प्रतिशत तक पहुंचते-पहुंचते रूसी कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका जाने वाले सभी उत्पादों पर 25 प्रतिशत शुल्क और उसके ऊपर जुर्माना लगाने की घोषणा के बाद यह एक नई जांच का विषय बन गया है। भारत ऐतिहासिक रूप से अपना अधिकांश तेल इराक और सऊदी अरब सहित पश्चिम एशिया से खरीदता रहा है। हालांकि, फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के बाद स्थिति बदल गई। चीन और अमेरिका के बाद दुनिया के तीसरे सबसे बड़े कच्चे तेल के आयातक भारत ने ‘छूट' पर उपलब्ध रूसी तेल खरीदना शुरू कर दिया। पश्चिम में कुछ लोगों ने यूक्रेन पर आक्रमण के लिए रूस को दंडित करने के साधन के रूप में इसे कच्चे तेल की आपूर्ति अस्वीकार कर दिया था। रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने से पहले भारत के आयात में रूस की बाजार हिस्सेदारी मात्र 0.2 प्रतिशत थी, लेकिन अब वह इराक और सऊदी अरब को पीछे छोड़कर यह भारत का नंबर एक आपूर्तिकर्ता बन गया है। इसकी हिस्सेदारी एक समय में 40 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। इस महीने, रूस ने भारत द्वारा आयातित कुल कच्चे तेल का 36 प्रतिशत आपूर्ति किया, जिसे पेट्रोल और डीज़ल जैसे ईंधनों में परिवर्तित किया जाता है। अमेरिका जाने वाले सभी भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत शुल्क या कर लगाने की घोषणा करते हुए, ट्रंप ने कहा कि भारत ‘हमेशा अपने अधिकांश सैन्य उपकरण रूस से खरीदता रहा है, और चीन के साथ, रूस का सबसे बड़ा ऊर्जा खरीदार ऐसे समय में है जब हर कोई चाहता है कि रूस यूक्रेन में हत्याएं रोके।” उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “इसलिए भारत को पहली अगस्त से उपरोक्त (रूसी खरीद) के लिए 25 प्रतिशत शुल्क और जुर्माना देना होगा।” वैश्विक रीयल-टाइम डेटा और एनालिटिक्स प्रदाता केप्लर के अनुसार, जनवरी, 2022 में भारत ने रूस से प्रतिदिन 68,000 बैरल कच्चा तेल खरीदा। उस महीने, इराक से भारत का आयात 12.3 लाख बैरल प्रतिदिन और सऊदी अरब से 8,83,000 बैरल प्रतिदिन था। जून, 2022 में, रूस इराक को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया। उस महीने उसने 11.2 लाख बैरल प्रतिदिन की आपूर्ति की, जबकि इराक से 9,93,000 बैरल प्रतिदिन और सऊदी अरब से 6,95,000 बैरल प्रतिदिन की आपूर्ति हुई।
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नयी दिल्ली. देश की प्रमुख वाहन विनिर्माता टाटा मोटर्स ने बुधवार को इटली की वाणिज्यिक वाहन कंपनी इवेको ग्रुप एनवी का करीब 3.8 अरब यूरो (लगभग 38,240 करोड़ रुपये) में अधिग्रहण करने की घोषणा की। कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि उसके निदेशक मंडल की कार्यकारी समिति ने इवेको ग्रुप की 100 प्रतिशत सामान्य शेयर पूंजी के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है। यह अधिग्रहण इटली की कंपनी के रक्षा व्यवसाय को छोड़कर पूरी तरह नकद भुगतान के जरिये किया जाएगा। यह अधिग्रहण सभी नियामकीय एवं कानूनी मंजूरियों के अधीन होगा। इस अधिग्रहण के तहत टाटा मोटर्स 2,71,215,400 सामान्य शेयरों के अधिग्रहण के लिए स्वैच्छिक निविदा पेशकश लेकर आएगी। इसमें प्रति शेयर 14.1 यूरो नकद भुगतान का प्रस्ताव है। यह पेशकश कम-से-कम 80 प्रतिशत शेयरों की स्वीकार्यता पर निर्भर होगी।
टाटा मोटर्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल कारोबार के अलग होने के बाद इस अधिग्रहण को ‘स्वाभाविक अगला कदम' बताया। उन्होंने कहा, “इस अधिग्रहण से संयुक्त समूह भारत और यूरोप को रणनीतिक घरेलू बाजार बनाकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकेगा।” इवेको ग्रुप की चेयरपर्सन सुजेन हेवुड ने इसे ‘सतत गतिशीलता के साझा दृष्टिकोण वाली दो कंपनियों का रणनीतिक मेल' बताया। -
नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड का जून, 2025 की तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ 11 प्रतिशत बढ़कर 6,108.46 करोड़ रुपये हो गया। देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादन कंपनी एनटीपीसी ने पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की अप्रैल-जून तिमाही में 5,506.07 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। कंपनी का परिचालन राजस्व पहली तिमाही में घटकर 47,065.36 करोड़ रुपये रह गया, जो एक साल पहले इसी अवधि में 48,528.88 करोड़ रुपये था। हालांकि, अन्य आय सालाना आधार पर 452.80 करोड़ रुपये से बढ़कर 755.75 करोड़ रुपये हो गई। कुल व्यय 42,539.94 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले इसी तिमाही में 41,844.18 करोड़ रुपये था। इस बीच, कंपनी के निदेशक मंडल ने एनटीपीसी लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक के रूप में गुरदीप सिंह की फिर से नियुक्ति को मंजूरी दे दी। इस प्रस्ताव पर आगामी वार्षिक आम बैठक में कंपनी के शेयरधारकों की मंजूरी ली जाएगी।
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नयी दिल्ली. अमेरिका की दैनिक उपयोग की घरेलू वस्तुएं बनाने वाली प्रॉक्टर एंड गैंबल कंपनी ने भारत में जन्मे शैलेश जेजुरिकर को अपना अगला मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया है। जेजुरिकर एक जनवरी 2026 से उपभोक्ता सामान बनाने वाली इस बहुराष्ट्रीय कंपनी का नेतृत्व करेंगे।
पीएंडजी भारतीय बाजार में भी एक अग्रणी एफएमसीजी कंपनी है जो एरियल, टाइड, व्हिस्पर, ओले, जिलेट, अम्बिपुर, पैम्पर्स, पैंटीन, ओरल-बी, हेड एंड शोल्डर्स और विक्स जैसे ब्रांड के साथ काम करती है। सिनसिनाटी (ओहियो) स्थित कंपनी के बयान के अनुसार, जेजुरिकर (58) 1989 में सहायक ब्रांड प्रबंधक के रूप में प्रॉक्टर एंड गैंबल (पीएंडजी) में शामिल हुए थे। शीर्ष नेतृत्व परिवर्तन के तहत वह जॉन मोलर का स्थान लेंगे। पीएंडजी ने बयान में कहा गया, ‘‘ शैलेश जेजुरिकर एक जनवरी 2026 से प्रॉक्टर एंड गैंबल के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी के रूप में जॉन मोलर का स्थान लेंगे। निदेशक मंडल ने अक्टूबर 2025 में वार्षिक शेयरधारक बैठक में निदेशक के रूप में चुनाव के लिए खड़े होने के लिए भी जेजुरिकर को नामित किया है।'' भारतीय मूल के कई व्यक्ति बड़ी कंपनियों के शीर्ष पद पर काबिज हैं। मुरादाबाद में जन्मे सबीह खान को इस महीने की शुरुआत में आईफोन विनिर्माता कंपनी एप्पल के मुख्य परिचालन अधिकारी के पद पर पदोन्नत किया गया। सत्य नडेला माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन एवं सीईओ हैं, जबकि सुंदर पिचाई गूगल और उसकी होल्डिंग कंपनी अल्फाबेट दोनों के सीईओ हैं। दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों में से एक एडोब के प्रमुख एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी शांतनु नारायण और आईबीएम के चेयरमैन, अध्यक्ष एवं सीईओ अरविंद कृष्णा हैं। साथ वैश्विक फार्मा कंपनी नोवार्टिस के सीईओ वसंत नरसिम्हन और वैश्विक बायोटेक कंपनी वर्टेक्स की सीईओ एवं अध्यक्ष रेशमा केवलरमानी हैं। इसी तरह, माइक्रोन टेक्नोलॉजी के चेयरमैन, अध्यक्ष और एवं संजय मेहरोत्रा, कैडेंस के अध्यक्ष एवं सीईओ अनिरुद्ध देवगन और शनैल की वैश्विक सीईओ लीना नायर हैं। - नयी दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) इस साल अपने वैश्विक कार्यबल के लगभग दो प्रतिशत या 12,261 कर्मचारियों की छंटनी करने वाली है, जिनमें से ज्यादातर मध्यम और वरिष्ठ स्तर के होंगे। टीसीएस के कर्मचारियों की संख्या 30 जून, 2025 तक 6,13,069 थी। हाल ही में समाप्त अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी ने अपने कर्मचारियों की संख्या में 5,000 की वृद्धि की। टीसीएस ने एक बयान में कहा कि यह कदम कंपनी की भविष्य के लिए तैयार संगठन बनने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इसके तहत नई तकनीक के क्षेत्रों में निवेश, नए बाजारों में प्रवेश, ग्राहकों और स्वयं के लिए बड़े पैमाने पर एआई का उपयोग, साझेदारियों को मजबूत करना, अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे का निर्माण और अपने कार्यबल मॉडल को पुनर्गठित करने पर ध्यान दिया जाएगा। कंपनी ने कहा, ''इस यात्रा के एक भाग के रूप में, हम संगठन से उन सहयोगियों को भी हटाएंगे जिनकी तैनाती संभव नहीं हो सकती है। इसका प्रभाव हमारे वैश्विक कार्यबल के लगभग दो प्रतिशत पर पड़ेगा। इसमें मुख्य रूप से मध्यम और वरिष्ठ श्रेणी के अधिकारी होंगे।'' टीसीएस प्रभावित कर्मचारियों को उचित लाभ, क्षतिपूर्ति, परामर्श और सहायता देगी।
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नई दिल्ली। इंडियन कंप्यूटर इमर्जेंसी रिस्पॉन्स टीम (सर्ट-इन) ने पहली बार सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के संगठनों के लिए साल में कम से कम एक बार थर्ड पार्टी से साइबर सुरक्षा ऑडिट कराना अनिवार्य कर दिया है। यह नियम उन संगठनों के लिए लागू किया गया है जिनके पास डिजिटल सिस्टम, प्रक्रियाओं अथवा इन्फ्रास्ट्रक्चर है या फिर वे इसका परिचालन करते हैं। निजी क्षेत्र के पहली बार ऐसा निर्देश जारी किया गया है।
सर्ट-इन ने कहा है कि उसके दिशानिर्देश क्षेत्रीय नियामकों को जरूरत पड़ने पर एक से ज्यादा बार ऑडिट अनिवार्य करने की अनुमति भी देते हैं। सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की सभी कंपनियों के लिए जारी किए गए दिशानिर्देशों में सर्ट-इन ने कहा है कि साइबर सुरक्षा ऑडिट में जोखिम आधारित और डोमेन विशिष्ट नजरिया अपनाना चाहिए, जो ऑडिट की जा रही कंपनी के कारोबारी संदर्भ, खतरे के परिदृश्य और परिचालन प्राथमिकताओं के अनुरूप है। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने नए दिशानिर्देशों की एक प्रति देखी है।सभी क्षेत्रों में साइबर स्वच्छता मजबूत करने के मकसद से तैयार किए गए नए दिशानिर्देश बढ़ते डिजिटल खतरे और महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर उल्लंघन की बढ़ती संख्या के बीच जारी किए गए हैं।इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की डिजिटल जोखिम विश्लेषण मूल्यांकन और रोकथाम एजेंसी सर्ट-इन ने सिस्टम ओवरहॉल, प्रौद्योगिकी में बदलाव अथवा कॉन्फिग्रेशन एडजस्टमेंट, जिससे संवेदनशील डेटा और महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढांचे प्रभावित हो सकते हैं, जैसे किसी भी बड़े बदलाव से पहले संभावित जोखिमों का मूल्यांकन करने, अनुपालन सुनिश्चित करने और क्रियान्वयन से पहले सुरक्षा जोखिमों को कम करने के लिए भी साइबर सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य किया है।सर्ट-इन के दिशानिर्देशों के अनुसार, इन संगठनों को एक व्यापक जोखिम और भेद्यता मूल्यांकन, प्रवेश परीक्षण, नेटवर्क अवसंरचना और परिचालन ऑडिट, सूचना प्रौद्योगिकी सुरक्षा नीति समीक्षा, सूचना सुरक्षा परीक्षण, सोर्स कोड समीक्षा और प्रक्रियाओं, संचार, अनुप्रयोगों और मोबाइल अनुप्रयोगों का सुरक्षा परीक्षण भी करना होगा। इसके अलावा, संगठनों को न्यूनतम विशेषाधिकार के सिद्धांत को भी लागू करना होगा। इसके तहत यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक कर्मचारी के पास अपनी विशिष्ट भूमिका या कार्य करने के लिए आवश्यक न्यूनतम स्तर की अनुमतियां हों। अपने कर्मचारियों को रिमोट एक्सेस देने वाली कंपनियां, दुरुपयोग से बचने के लिए संगठन के साइबर-अवसंरचना तक सभी पहुंच को टनल्ड, एन्क्रिप्टेड और लॉग करती हैं। -
नयी दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) इस साल अपने वैश्विक कार्यबल के लगभग दो प्रतिशत या 12,261 कर्मचारियों की छंटनी करने वाली है, जिनमें से ज्यादातर मध्यम और वरिष्ठ स्तर के होंगे। टीसीएस के कर्मचारियों की संख्या 30 जून, 2025 तक 6,13,069 थी। हाल ही में समाप्त अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी ने अपने कर्मचारियों की संख्या में 5,000 की वृद्धि की। टीसीएस ने एक बयान में कहा कि यह कदम कंपनी की भविष्य के लिए तैयार संगठन बनने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इसके तहत नई तकनीक के क्षेत्रों में निवेश, नए बाजारों में प्रवेश, ग्राहकों और स्वयं के लिए बड़े पैमाने पर एआई का उपयोग, साझेदारियों को मजबूत करना, अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे का निर्माण और अपने कार्यबल मॉडल को पुनर्गठित करने पर ध्यान दिया जाएगा। कंपनी ने कहा, ''इस यात्रा के एक भाग के रूप में, हम संगठन से उन सहयोगियों को भी हटाएंगे जिनकी तैनाती संभव नहीं हो सकती है। इसका प्रभाव हमारे वैश्विक कार्यबल के लगभग दो प्रतिशत पर पड़ेगा। इसमें मुख्य रूप से मध्यम और वरिष्ठ श्रेणी के अधिकारी होंगे।'' टीसीएस प्रभावित कर्मचारियों को उचित लाभ, क्षतिपूर्ति, परामर्श और सहायता देगी।
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नई दिल्ली। अगर आप रिटायरमेंट के बाद एक सुरक्षित और बेहतर रिटर्न वाली स्कीम की तलाश कर रहे हैं, तो पोस्ट ऑफिस की सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम (SCSS) आपके लिए एक शानदार विकल्प साबित हो सकती है। इस सरकारी योजना में आप एकमुश्त निवेश करके हर तिमाही तय ब्याज पा सकते हैं।
मान लीजिए कोई व्यक्ति इस योजना में 3 लाख रुपए का निवेश करता है और इसमें 5 साल तक निवेशित रहता है, तो उसे कुल 1.23 लाख रुपए सिर्फ ब्याज के रूप में मिलेंगे। यानी, मैच्योरिटी पर उसे कुल 4.23 लाख रुपए मिलेंगे। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आपको 8.2% सालाना ब्याज मिलता है, जो तिमाही आधार पर दिया जाता है। अगर आप 3 लाख रुपए जमा करते हैं, तो हर तिमाही आपको 6,150 की ब्याज आय होगी।इस योजना में पैसा सुरक्षित रहता है क्योंकि यह केंद्र सरकार द्वारा चलाई जाती है। साथ ही, इसमें आयकर की धारा 80C के तहत टैक्स छूट का फायदा भी मिलता है। यह योजना खासतौर पर 60 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए है, लेकिन कुछ खास शर्तों के साथ 55 वर्ष से ऊपर के रिटायर्ड कर्मचारी भी इसमें निवेश कर सकते हैं। 50-60 साल के रिटायर्ड रक्षा कर्मियों के लिए भी योजना उपलब्ध है। इस अकाउंट को सिंगल या जॉइंट दोनों तरह से खोला जा सकता है।समय से पहले बंद करने पर क्या होगा?अगर आप योजना की अवधि से पहले खाता बंद करते हैं तो कुछ कटौती का सामना करना पड़ सकता है:1 साल से पहले बंद करने पर: कोई ब्याज नहीं मिलेगा, और अगर ब्याज मिला है तो वह मूलधन से काटा जाएगा।1 से 2 साल के बीच बंद करने पर: 1.5% राशि मूलधन से काटी जाएगी।2 से 5 साल के बीच बंद करने पर: 1% राशि कटेगी।विस्तारित खाता: 1 साल पूरा होने के बाद बिना किसी कटौती के बंद किया जा सकता है।जानिए रिटायरमेंट के समय मिलने वाली कौन-कौन सी राशि होती है शामिलसेवानिवृत्ति लाभ का मतलब है वह समस्त भुगतान जो किसी कर्मचारी को रिटायरमेंट (सुपरएन्युएशन या अन्य कारणों से सेवा समाप्त होने) के समय मिलता है। इन लाभों में कई तरह की रकम शामिल होती हैं, जैसे:प्रोविडेंट फंड की देनदारी।सेवा निवृत्ति, सुपरएन्युएशन या मृत्यु पर मिलने वाला ग्रेच्युटी।पेंशन की एकमुश्त राशि (कम्युटेड पेंशन)।अवकाश नकदीकरण (Cash equivalent of leave) यानी छुट्टियों के बदले मिलने वाली राशि।ग्रुप सेविंग्स लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम में सेविंग्स का वह हिस्सा, जो रिटायरमेंट पर नियोक्ता द्वारा दिया जाता है।कर्मचारी पारिवारिक पेंशन योजना के तहत रिटायरमेंट या विदड्रॉल का लाभ औरवॉलंटरी या स्पेशल वॉलंटरी रिटायरमेंट स्कीम के तहत मिलने वाली अनुग्रह राशि (ex-gratia)।अगर किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो उपरोक्त सभी लाभ उसके परिजनों को दिए जाते हैं। ऐसे मामलों में भी इन्हें सेवानिवृत्ति लाभ के अंतर्गत माना जाता है। - नयी दिल्ली। भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में घोषित शुल्क कटौती के कारण, रोल्स-रॉयस, बेंटले और एस्टन मार्टिन जैसे ब्रिटिश प्रमुख वाहन ब्रांड घरेलू बाजार में सस्ते हो जाएंगे। इस व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर के बाद, ब्रिटेन के वाहन ब्रांड दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में अधिक कारें बेचने की कोशिश करेंगे और अमीरों को लक्षित करेंगे। आधिकारिक तौर पर व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) कहे जाने वाले इस समझौते पर बृहस्पतिवार को लंदन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके ब्रिटिश समकक्ष केअर स्टार्मर की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। समझौते के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच कोटा के तहत वाहन आयात पर शुल्क वर्तमान में लगभग 110 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत रह जाएगा। यहां प्रमुख ब्रिटिश लक्ज़री वाहन ब्रांड पर एक नज़र डाली गई है।- भारतीय बाजार में रोल्स रॉयस कार की कीमत 7.5 करोड़ रुपये से लेकर 12.25 करोड़ रुपये तक है।- भारत में बेंटले मॉडल की कीमत पांच करोड़ रुपये से लेकर सात करोड़ रुपये तक है।- देश में एस्टन मार्टिन के मॉडल की कीमत वर्तमान में 3.99 करोड़ रुपये से 8.85 करोड़ रुपये के बीच है।- जगुआर लैंड रोवर की कीमत लगभग 68 लाख रुपये से 2.75 करोड़ रुपये तक है।- लोटस कारों की कीमत दो करोड़ रुपये से लेकर लगभग तीन करोड़ रुपये तक है।- मैकलारेन कारों की कीमत लगभग 4.5 करोड़ रुपये से लेकर लगभग छह करोड़ रुपये तक है।
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नई दिल्ली। दूरसंचार क्षेत्र में प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) की लाभार्थी कंपनियों ने सामूहिक रूप से 4,305 करोड़ रुपए का निवेश किया है, जिससे 85,391 करोड़ रुपए की बिक्री हुई है, जिसमें 16,414 करोड़ रुपए का निर्यात (31 मई, 2025 तक) शामिल है।
दूरसंचार पीएलआई योजना के तहत कुल 42 कंपनियों को लाभार्थी के रूप में चिन्हित किया गया हैसंचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि इस निवेश से 28,067 लोगों को रोजगार भी मिला है। दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों के लिए पीएलआई योजना का उद्देश्य इस सेक्टर में 12,195 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। दूरसंचार पीएलआई योजना के तहत कुल 42 कंपनियों को लाभार्थी के रूप में चिन्हित किया गया है। इसके अलावा, 5जी सेवाओं को शुरू करने के लिए, 700 मेगाहर्ट्ज, 3300 मेगाहर्ट्ज और 26 गीगाहर्ट्ज बैंड सहित अंतरराष्ट्रीय मोबाइल दूरसंचार (आईएमटी) के लिए विभिन्न स्पेक्ट्रम बैंडों में एक्सेस स्पेक्ट्रम वर्ष 2022 और 2024 में आयोजित स्पेक्ट्रम नीलामी के माध्यम से दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) को आवंटित किया गया है।नीलामी के माध्यम से स्पेक्ट्रम प्राप्त करने वाले सफल बोलीदाताओं को 5जी सहित किसी भी आईएमटी तकनीक को लागू करने की अनुमति हैनीलामी के माध्यम से स्पेक्ट्रम प्राप्त करने वाले सफल बोलीदाताओं को 5जी सहित किसी भी आईएमटी तकनीक को लागू करने की अनुमति है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “डाक विभाग ने डाकघर बचत बैंक सेवाओं के डिजिटलीकरण, डाक जीवन बीमा को कागज रहित और ऑनलाइन प्रणाली में परिवर्तित करने, डाक घर निर्यात केंद्रों की स्थापना और ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग, बीमा और ई-कॉमर्स को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में ई-कॉमर्स संस्थाओं के साथ सहयोग जैसी नई पहल की हैं।”दूरसंचार विभाग ने संचार क्षेत्र में इनोवेशन और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैंदूरसंचार विभाग (डीओटी) ने संचार क्षेत्र में इनोवेशन और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि ‘डिजिटल कम्युनिकेशंस इनोवेशन स्क्वायर (डीसीआईएस)’ योजना के तहत, दूरसंचार विभाग ने स्वदेशी 5जी सहित उन्नत तकनीकों के विकास को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप्स और एमएसएमई द्वारा संचालित 126 परियोजनाओं को 108 करोड़ रुपए के कुल बजटीय परिव्यय के साथ समर्थन दिया है। उन्होंने बताया कि देश की सभी ग्राम पंचायतों (जीपी) को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए भारतनेट परियोजना को चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वित किया जा रहा है और अब तक 2,14,325 जीपी को सेवा के लिए तैयार किया जा चुका है।( - नयी दिल्ली. ।गूगल प्ले और एंड्रॉयड ने 2024 में ऐप पब्लिशर और व्यापक भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अनुमानित चार लाख करोड़ रुपये का राजस्व उत्पन्न किया। ‘ऐप पब्लिशर' से तात्पर्य ऐप (एप्लिकेशन) बनाने और उन्हें लोगों तक पहुंचाने वाली कंपनियों या लोगों से है। अर्थशास्त्र, नीति और राय अनुसंधान कंसल्टेंसी पब्लिक फर्स्ट की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जो स्मार्टफोन के तेजी से बढ़ते चलन, किफायती डेटा और डेवलपर एवं उद्यमियों के गतिशील परिवेश से अभूतपूर्व गति का अनुभव कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ गूगल प्ले और एंड्रॉयड ने ऐप पब्लिशर और भारत की व्यापक अर्थव्यवस्था के लिए 2024 में चार लाख करोड़ रुपये का राजस्व उत्पन्न किया।'' इसमें कहा गया कि ऐप परिवेश गूगल प्ले और एंड्रॉयड ने प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर 35 लाख से अधिक नौकरियां उत्पन्न की।
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नयी दिल्ली. इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) कंपनी ग्रीव्स इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के तिपहिया वाहन एल्ट्रा सिटी एक्सट्रा ने एक बार चार्ज होने के बाद 324 किलोमीटर की दूरी तय कर भारत में नया रिकॉर्ड बनाया है। कंपनी ने बुधवार को यह दावा करते हुए कहा कि इसके साथ ही कंपनी इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में शामिल हो गई है। कंपनी ने बयान में कहा कि उसकी अगली पीढ़ी की एल्ट्रा सिटी एक्सट्रा ने पूरी तरह चार्ज होने के बाद कर्नाटक के बेंगलुरु से तमिलनाडु के रानीपेट तक की 324 किलोमीटर की दूरी तय की है। इसके साथ ही इसका नाम ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में दर्ज हो गया है। ग्रीव्स इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के मुख्य कारोबार अधिकारी (सीबीओ) मनोज एमपी ने कहा, “यह एक रिकॉर्ड से कहीं बढ़कर है। यह रोज़मर्रा के उद्यमियों को भरोसेमंद एवं उच्च प्रदर्शन वाले इलेक्ट्रिक यातायात समाधान उपलब्ध कराने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। एल्ट्रा सिटी एक्सट्रा के साथ हमने न सिर्फ नए मानक स्थापित किए हैं बल्कि किफ़ायती दाम पर नवाचार और सुरक्षा उपलब्ध कराने के वादे को और मजबूत भी बना लिया है।” इसी माह पेश एल्ट्रा सिटी एक्सट्रा, 2024 में एक चार्जिंग में 225 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली एल्ट्रा सिटी का अगली पीढ़ी का उन्नत संस्करण है। ग्रीव्स इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के प्रबंध निदेशक विकास सिंह ने कहा, “अल्ट्रा सिटी एक्सट्रा को ‘आज और आने वाले कल की सड़कों के लिए' डिज़ायन किया गया है।









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