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- मुंबई. व्हाइट कॉलर (कार्यालय में बैठकर काम करने वाले) नौकरियों के लिए कुल भर्तियां जून में सालाना आधार पर 20 प्रतिशत बढ़ी है। इसमें मुख्य रूप से दूसरी श्रेणी के शहरों का योगदान रहा है। बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। नौकरी मंच फाउंडइट.इन पर आधारित ऑनलाइन नौकरी संबंधी गतिविधियां पोस्ट करने वाले फाउंडइट इनसाइट्स ट्रैकर के अनुसार, भारत में दूसरी श्रेणी के शहर देश की रोजगार वृद्धि को गति देने वाले प्रमुख इंजन के रूप में उभर रहे हैं। इसमें कहा गया है कि 26 प्रतिशत की वृद्धि के साथ कोयंबटूर में अवसरों में वृद्धि देखी गई, इसके बाद नागपुर और नासिक में 24 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसमें मुख्य योगदान सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), बीएफएसआई (बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा), विनिर्माण और एफएमसीजी (रोजमर्रा के घरेलू उत्पाद) जैसे क्षेत्रों का योगदान है। फाउंडइंट के मुख्य राजस्व एवं वृद्धि अधिकारी (सीआरजीओ) प्रणय काले ने कहा, “दूसरी श्रेणी के शहरों की ओर भर्ती की गति में बदलाव, खास तौर पर आईटी और प्रवेश स्तर की भूमिकाओं में उल्लेखनीय है। नौकरी चाहने वालों के पास अब घर के करीब ही विविध अवसर हैं, जो भारत के समृद्ध और विविध प्रतिभा परिदृश्य को दर्शाता है।” उन्होंने कहा, “नियोक्ताओं के लिए ये शहर बेहतर बुनियादी ढांचे, लक्षित निवेश और भौगोलिक रूप से विविधता के रणनीतिक इरादे से प्रेरित पर्यावरण अनुकूल वृद्धि के लिए रणनीतिक अवसर प्रदान करते हैं।” काले ने कहा कि यह हाल के वर्षों में सबसे मजबूत वृद्धि है, जो भारत के रोजगार परिदृश्य में दूसरी श्रेणी के शहरों के बढ़ते महत्व को रेखांकित करती है।
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नई दिल्ली। सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच बुधवार को भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में खुला। शुरुआती कारोबार में आईटी और ऑटो सेक्टर में खरीदारी देखी गई। सुबह करीब 9.23 बजे, सेंसेक्स 225.5 अंक या 0.27 प्रतिशत बढ़कर 83,922.79 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 58.75 अंक या 0.23 प्रतिशत बढ़कर 25,600.55 पर था।
विश्लेषकों के अनुसार, 24,500-25,000 की रेंज को ब्रेक करने के बाद, निफ्टी 25,200-25,800 की नई रेंज में चला गया हैविश्लेषकों के अनुसार, 24,500-25,000 की रेंज को ब्रेक करने के बाद, निफ्टी 25,200-25,800 की नई रेंज में चला गया है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते के बारे में सकारात्मक खबर रेंज की अपर लिमिट को ब्रेक करने में मदद कर सकती है, लेकिन निफ्टी को लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रखना मुश्किल होगा।शुरुआती कारोबार में निफ्टी बैंक 45.20 अंक या 0.08 प्रतिशत की गिरावट के साथ 57,414.25 पर थाशुरुआती कारोबार में निफ्टी बैंक 45.20 अंक या 0.08 प्रतिशत की गिरावट के साथ 57,414.25 पर था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 59.20 अंक या 0.25 प्रतिशत की बढ़त के साथ 59,809.25 पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 26.40 अंक या 0.14 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,082.10 पर था।चॉइस ब्रोकिंग के डेरिवेटिव एनालिस्ट हार्दिक मटालिया ने कहा, “बैंक निफ्टी के चार्ट संकेत देते हैं कि इंडेक्स को पहले 56,800 फिर 57,000 और इसके बाद 57,300 पर समर्थन मिल सकता है। अगर इंडेक्स आगे बढ़ता है, तो 57,650 प्रारंभिक प्रमुख प्रतिरोध होगा, उसके बाद 57,800 और 58,000 स्तर प्रमुख प्रतिरोध होंगे।”सेंसेक्स पैक में इंफोसिस, टेक महिंद्रा, आईसीआईसीआई बैंक, टीसीएस, टाटा स्टील, भारती एयरटेल, एचसीएल टेक और अदाणी पोर्ट्स टॉप गेनर्स रहेइस बीच, सेंसेक्स पैक में इंफोसिस, टेक महिंद्रा, आईसीआईसीआई बैंक, टीसीएस, टाटा स्टील, भारती एयरटेल, एचसीएल टेक और अदाणी पोर्ट्स टॉप गेनर्स रहे। जबकि, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक, बीईएल और इटरनल टॉप लूजर्स रहे।एशियाई बाजारों में बैंकॉक, चीन, जापान, सोल और जकार्ता लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, जबकि केवल हांगकांग हरे निशान में कारोबार कर रहा थाविदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 1 जुलाई को अपनी बिकवाली जारी रखी और 1,970.14 करोड़ रुपए के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने अपनी खरीद जारी रखी और उसी दिन 771.08 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे। एशियाई बाजारों में बैंकॉक, चीन, जापान, सोल और जकार्ता लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, जबकि केवल हांगकांग हरे निशान में कारोबार कर रहा था। पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिका में डाउ जोंस 400.17 अंक या 0.91 प्रतिशत की बढ़त के साथ 44,494.94 पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 इंडेक्स 6.90 अंक या 0.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 6,198.05 पर बंद हुआ और नैस्डैक 166.85 अंक या 0.82 प्रतिशत की गिरावट के साथ 20,202.89 पर बंद हुआ। -
नयी दिल्ली. जिंदल स्टील ने अंगुल संयंत्र में अपनी पहली ‘गैल्वनाइजिंग लाइन' चालू करने की सोमवार को घोषणा की। इससे लेपित (कोटेड) उत्पादों की आपूर्ति में वृद्धि होगी जिससे उपकरण, मोटर वाहन, बुनियादी ढांचे और निर्माण सहित विभिन्न उद्योगों की जरूरतें पूरी हो सकेंगी। ‘कोटेड गैल्वनाइजिंग लाइन 1' (सीजीएल 1) को ओडिशा के अंगुल में कंपनी की इस्पात विनिर्माण सुविधा में मौजूदा कई करोड़ रुपये की निवेश योजना के तहत स्थापित किया गया है। जिंदल स्टील ने शेयर बाजार को दी सूचना में बताया, ‘‘ नई लाइन जिंदल पैंथर गैल्वनाइज्ड और जिंकल्यूम ब्रांड के तहत गैल्वनाइज्ड एवं गैल्वेनाइज्ड उत्पादों का उत्पादन करेगी। यह उपकरण, मोटर वाहन, बुनियादी ढांचे और निर्माण सहित विभिन्न उद्योगों की जरूरतों को पूरा करेगी।'' कंपनी के चेयरमैन नवीन जिंदल ने कहा कि ‘गैल्वनाइजिंग लाइन' का चालू होना विविध उद्योग आवश्यकताओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाले एवं मूल्यवर्धित इस्पात उत्पाद प्रदान करने की कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ‘कोटेड गैल्वनाइजिंग लाइन' से तात्पर्य उस औद्योगिक प्रक्रिया से है जिसमें धातु आमतौर पर इस्पात को जंग से बचाने के लिए उस पर जस्ते की सुरक्षात्मक परत चढ़ाई जाती है। इस प्रक्रिया को ‘गैल्वनाइजिंग' कहा जाता है। इसे सतत उत्पादन ‘लाइन' पर अंजाम दिए जाने पर इसे ‘गैल्वनाइजिंग लाइन' कहा जाता है। यहां ‘कोटेड' से तात्पर्य धातु पर सुरक्षात्मक परत चढ़ाने से है।
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नयी दिल्ली. सकल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह पांच साल में दोगुना होकर वित्त वर्ष 2024-25 में 22.08 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2020-21 में 11.37 लाख करोड़ रुपये था। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। सकल जीएसटी संग्रह 2024-25 में 22.08 लाख करोड़ रुपये के अपने उच्चतम स्तर को छू गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 9.4 प्रतिशत अधिक है। वित्त वर्ष 2024-25 में औसत मासिक संग्रह 1.84 लाख करोड़ रुपये रहा, जो 2023-24 में 1.68 लाख करोड़ रुपये और 2021-22 में 1.51 लाख करोड़ रुपये था। जीएसटी के तहत पंजीकृत करदाताओं की संख्या 2017 के 65 लाख से बढ़कर आठ साल में 1.51 करोड़ से अधिक हो गई है। जीएसटी के आठ वर्षों पर एक सरकारी बयान में कहा गया, ‘‘इसके लागू होने के बाद से, माल और सेवा कर ने राजस्व संग्रह और कर आधार बढ़ाने में मजबूत वृद्धि दिखाई है। इसने भारत की राजकोषीय स्थिति को लगातार मजबूत किया है और अप्रत्यक्ष कराधान को अधिक कुशल और पारदर्शी बनाया है।'' जीएसटी ने 2024-25 में 22.08 लाख करोड़ रुपये का अपना अबतक का सबसे अधिक सकल संग्रह दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 9.4 प्रतिशत की वृद्धि है।
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नयी दिल्ली. निजी क्षेत्र की प्रमुख साधारण बीमा कंपनी एसबीआई जनरल इंश्योरेंस ने बीएलएस ई-सर्विसेज की अनुषंगी स्टारफिन इंडिया के साथ साझेदारी की है। यह साझेदारी कम आय वाले परिवारों के लिए विशेष रूप से तैयार ‘हॉस्पिटल डेली कैश बेनिफिट' योजना पेश करने के लिए की गई है। दोनों कंपनियों के संयुक्त बयान के अनुसार, यह योजना अस्पताल में भर्ती होने पर खर्चों का बोझ कम करने के उद्देश्य से लाई गई है। इसके तहत, बीमाधारक को बीमारी या दुर्घटना के कारण अस्पताल में भर्ती होने पर हर दिन एक निर्धारित नकद राशि दी जाएगी। इसके साथ ही, आकस्मिक मृत्यु और अपंगता के लिए भी सुरक्षा दी जाएगी। एसबीआई जनरल इंश्योरेंस में व्यापार प्रमुख (इमेर्जिंग बिजनेस लाइन) प्रिया कुमार ने कहा, ‘‘ अस्पताल में भर्ती होने पर आर्थिक सहायता समय पर मिलना कमजोर वर्गों के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है...इस साझेदारी के जरिये हम जरूरतमंद लोगों की वित्तीय मजबूती को बढ़ावा दे रहे हैं।'' बीएलएस ई-सर्विसेज लिमिटेड, (स्टारफिन इंडिया की मूल कंपनी) के चेयरमैन शिखर अग्रवाल ने कहा, ‘‘ इस पहल से हम अस्पताल में भर्ती होने पर परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना चाहते हैं। हमारी अनुषंगी कंपनी स्टारफिन इंडिया और एसबीआई जनरल इंश्योरेंस के बीच यह सहयोग आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सुलभ और किफायती बीमा समाधान लाने की हमारी प्रतिबद्धता को बताती है।
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नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई इकोनॉमी है और आने वाले समय में अच्छे मानसून और कृषि के कारण और बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। यह बयान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से सोमवार को दिया गया। आरबीआई के ताजा डेटा के मुताबिक, कृषि, निर्माण और सेवा क्षेत्रों के मजबूत प्रदर्शन के दम पर 2024-25 की चौथी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर बढ़कर 7.4 प्रतिशत हो गई, जिसके परिणामस्वरूप पूरे वित्तीय वर्ष के लिए विकास दर 6.5 प्रतिशत पहुंच गई थी।
वित्त मंत्री ने कहा कि यह विकास दर जारी रहेगी और अच्छे मानसून के कारण अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन में सुधार होगासोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपना मीडिया इंटरव्यू पोस्ट करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यह विकास दर जारी रहेगी और अच्छे मानसून के कारण अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन में सुधार होगा। उन्होंने आगे कहा कि हमारे बाजारों की गहराई वास्तव में दिख रही है और इससे खुदरा विक्रेताओं और आम नागरिकों को लाभ हो रहा है।वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, “हमारी प्रणालियां पारदर्शी और डिजिटल हैं और घर बैठे ही उन तक पहुंचा जा सकता है “वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, “हमारी प्रणालियां पारदर्शी और डिजिटल हैं और घर बैठे ही उन तक पहुंचा जा सकता है। व्यक्ति दूसरों की मदद पर निर्भर रहने के बजाय खुद ही यह काम कर सकते हैं। ये एक बहुत अच्छी गतिशील अर्थव्यवस्था के संकेत हैं।”वित्त मंत्री ने कहा, “हमने स्पष्ट किया है कि हस्तशिल्प, हस्तनिर्मित सामान आदि को सहायता मिलेगी “वित्त मंत्री ने आगे कहा कि हमारी नीति स्पष्ट है कि श्रम-प्रधान इकाइयों को सहायता दी जाएगी। वित्त मंत्री ने कहा, “हमने स्पष्ट किया है कि हस्तशिल्प, हस्तनिर्मित सामान आदि को सहायता मिलेगी। ऐसा कोई तरीका नहीं है जिससे हम एक (श्रम) और दूसरे (पूंजी/तकनीक) के बीच अंतर करें। विनिर्माण, चाहे वह रोजगार-प्रधान हो या स्वचालित, उसे नीतिगत समर्थन दिया जाएगा।”प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली इस सरकार ने “यह सुनिश्चित किया है कि हम कुछ ठोस नीतियां बनाएं जो लोगों, खासकर एमएसएमई की मदद करें”उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में सभी बजट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली इस सरकार ने “यह सुनिश्चित किया है कि हम कुछ ठोस नीतियां बनाएं जो लोगों, खासकर एमएसएमई की मदद करें।” इसके अतिरिक्त, वित्त मंत्री ने पोस्ट में कहा कि 2014 से रक्षा क्षेत्र की मांगों के छोटे और बड़े विवरणों पर ध्यान दिया गया है, चाहे वह बुलेटप्रूफ जैकेट हो या ऊंचाई पर समय पर सामान पहुंचाना हो। इसके कारण रक्षा उत्पादन के साथ निर्यात में भी बड़ी बढ़ोतरी देखी गई है। -
नई दिल्ली। जुलाई, 2025 से कई नए वित्तीय नियम लागू होने जा रहे हैं, जिसका आपकी जेब पर सीधा असर हो सकता है। इनमें यूपीआई चार्जबैक, नए तत्काल ट्रेन टिकट बुकिंग और पैन कार्ड के नियमों में बदलाव शामिल हैं। नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से हाल ही में सिस्टम को आसान बढ़ाने के उद्देश्य से यूपीआई चार्जबैक नियमों में बदलाव किया गया है। मौजूदा समय में बहुत अधिक दावों के कारण सभी चार्जबैक रिक्वेस्ट को खारिज कर दिया जाता है। ऐसे में सही चार्जबैक रिक्वेस्ट को प्रोसेस करने के लिए बैंक को यूपीआई रेफरेंस कंप्लेंट सिस्टम (यूआरसीएस) के जरिए एनपीसीआई के पास जाकर केस को व्हाइटलिस्ट करना पड़ता है।
वहीं, 15 जुलाई के बाद एनपीसीआई की इसमें कोई भूमिका नहीं रहेगी। अगर बैंक को कोई चार्जबैक रिक्वेस्ट सही लगती है तो उसे वह एनपीसीआई से व्हाइटलिस्ट किए बिना प्रोसेस कर सकती है।यूपीआई चार्जबैक एक औपचारिक विवाद है जिसे यूजर तब उठाता है जब कोई लेनदेन विफल हो जाता है या जब भुगतान की गई सेवा या उत्पाद वितरित नहीं किया जाता है। यह यूजर को बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता से धन वापसी की मांग करने की अनुमति देता है।नए पैन कार्ड का आवेदन करने के लिए एक जुलाई से आपके पास आधार कार्ड होना जरूरी है। इससे पहले आप किसी भी वैध दस्तावेज या जन्म प्रमाणपत्र के जरिए पैन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते थे।जुलाई 2025 से तत्काल टिकट बुकिंग के कई नए नियम लागू हो जाएंगे। 1 जुलाई 2025 से आईआरसीटीसी की वेबसाइट या इसके मोबाइल ऐप के जरिए तत्काल ट्रेन टिकट के लिए आधार सत्यापन अनिवार्य हो जाएगा।गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स नेटवर्क (जीएसटीएन) ने 7 जून, 2025 को घोषणा की थी कि मासिक जीएसटी भुगतान फॉर्म जीएसटीआर-3बी को जुलाई 2025 से एडिट नहीं किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, जीएसटीएन ने कहा था कि करदाताओं को देय तिथि से तीन वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। -
नयी दिल्ली. अरबपति उद्योगपति मुकेश अंबानी के सबसे छोटे पुत्र और तीन भाई-बहनों में सबसे पहले प्रमुख कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज में कार्यकारी निदेशक नियुक्त किए गए अनंत अंबानी को सालाना 10-20 करोड़ रुपये का वेतन और कंपनी के मुनाफे पर कमीशन सहित कई भत्ते दिए जाएंगे। शेयरधारकों को भेजी गई सूचना में यह जानकारी दी गई है। जहां सबसे अमीर एशियाई के तीनों बच्चे - जुड़वां आकाश और ईशा, और अनंत को 2023 में गैर-कार्यकारी निदेशकों के रूप में तेल-से-दूरसंचार-और-खुदरा समूह के निदेशक मंडल में शामिल किया गया था, वहीं सबसे छोटे अनंत को इस साल अप्रैल में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया था। गैर-कार्यकारी निदेशकों के रूप में, तीनों को कोई वेतन नहीं मिल रहा था और प्रत्येक को वित्त वर्ष 2023-24 में चार लाख रुपये का शुल्क और 97 लाख रुपये का लाभ पर कमीशन दिया गया था। हालांकि, कार्यकारी निदेशक के तौर पर 30 वर्षीय अनंत वेतन और अन्य आवश्यक शर्तों के हकदार होंगे।
रविवार को शेयर बाजार को दिए गए नोटिस में रिलायंस ने कहा कि नियुक्ति के लिए शेयरधारकों की मंजूरी पोस्टल बैलेट के जरिये मांगी गई है। साल 2023 में नियुक्तियां भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी में उत्तराधिकार योजना का हिस्सा थीं, जिसे कई लोगों ने 2002 में उनके पिता की मृत्यु के बाद भाई-बहन के झगड़े से बचने के लिए अंबानी के प्रयास के रूप में देखा। ईशा रिलायंस रिटेल के निदेशक मंडल में हैं और हाल ही में बनी जियो फाइनेंशियल सर्विसेज में शामिल हुई हैं, आकाश दूरसंचार कारोबार के प्रमुख हैं। अनंत मैटेरियल्स और नवीकरणीय ऊर्जा खंड से जुड़े हैं। वहह पेशेवर प्रबंधकों के साथ मिलकर काम करते हैं। पोस्टल बैलेट में, रिलायंस ने कहा कि अनंत का “वेतन और भत्ते 10 करोड़ रुपये से 20 करोड़ रुपये प्रति वर्ष की सीमा में होंगे।” इसमें कहा गया, “सुविधाओं और भत्तों में आवास (सुसज्जित या अन्यथा) या उसके बदले में मकान किराया भत्ता; व्यय की प्रतिपूर्ति के साथ मकान रखरखाव भत्ता और/या गैस, बिजली, पानी, साज-सज्जा और मरम्मत के उपयोग के लिए भत्ते तथा स्वयं और आश्रितों सहित परिवार के लिए छुट्टी यात्रा रियायत शामिल होगी।” अनंत को अपने या पत्नी तथा व्यावसायिक यात्राओं के दौरान सहायकों के लिए यात्रा, भोजन तथा आवास पर किए गए व्यय की पैसा भी मिलेगा। साथ कंपनी के व्यवसाय के लिए कार की व्यवस्था तथा निवास पर संचार व्यय का खर्च भी मिलेगा। वह चिकित्सा के साथ-साथ अपने और अपने परिवार के सदस्यों के लिए कंपनी द्वारा व्यवस्थित सुरक्षा के भी हकदार होंगे। अधिसूचना में कहा गया, “वेतन, भत्ते और सुविधाओं के अलावा, अनंत एम. अंबानी शुद्ध लाभ के आधार पर पारिश्रमिक पाने के हकदार होंगे।” मुकेश अंबानी ने अगस्त, 2023 में तेल से लेकर दूरसंचार क्षेत्र में कारोबार करने वाली कंपनी के बोर्ड में अपने तीनों बच्चों को गैर-कार्यकारी निदेशकों के रूप में शामिल करने की घोषणा की थी, ताकि अंतिम उत्तराधिकार योजना तैयार की जा सके। इसके बाद उन्होंने कहा कि उनके बच्चे भारत की सबसे मूल्यवान और लाभदायक कंपनी रिलायंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मुकेश अंबानी के विपरीत, जिन्हें अपने पिता के व्यवसाय की देखभाल के लिए स्टैनफोर्ड से पढ़ाई छोड़नी पड़ी, जुड़वां बच्चों ईशा और आकाश ने क्रमशः येल और ब्राउन से स्नातक किया। सबसे बड़े पुत्र आकाश कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2014 में समूह की दूरसंचार इकाई जियो की नेतृत्व टीम में शामिल हुए। उन्हें जून, 2022 में दूरसंचार इकाई जियो इन्फोकॉम का चेयरमैन बनाया गया। वह इंडियन प्रीमियर लीग में मुंबई इंडियंस क्रिकेट टीम का प्रबंधन भी करते हैं। ईशा कंपनी के खुदरा, ई-कॉमर्स और लक्जरी कारोबार को संभालती हैं। कहा जाता है कि कंपनी के ई-कॉमर्स ऐप के ज़रिए फैशन के क्षेत्र में कंपनी की मौजूदगी बढ़ाने और शीर्ष अंतरराष्ट्रीय लक्जरी ब्रैंड के साथ बढ़ती साझेदारी के पीछे भी उनका ही हाथ है। अनंत रिलायंस के ऊर्जा कारोबार से जुड़े हैं, जिसमें जीवाश्म ईंधन से लेकर सौर पैनल निर्माण का विकास शामिल है। ब्राउन यूनिवर्सिटी से स्नातक अनंत, अपनी मां के साथ रिलायंस फाउंडेशन के बोर्ड में भी हैं, जो समूह की परमार्थ इकाई है। तीनों बच्चे जियो प्लेटफॉर्म्स के बोर्ड में हैं, जो रिलायंस की दूरसंचार और डिजिटल संपत्तियों और रिलायंस रिटेल का स्वामित्व रखने वाली इकाई है। -
नई दिल्ली। जैसे-जैसे भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के सपने को साकार करने के करीब पहुंच रहा है, ऑटोमोबाइल सेक्टर देश के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 7.1 प्रतिशत और विनिर्माण सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 49 प्रतिशत का योगदान देकर विकास के एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभर रहा है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर 3.7 करोड़ से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करता है और भारत के कुल निर्यात में लगभग 8 प्रतिशत का योगदान देता हैदेश में यह सेक्टर 3.7 करोड़ से अधिक नौकरियों के अवसर पैदा करता है और भारत के कुल निर्यात में लगभग 8 प्रतिशत का योगदान देता है। केवल एक वाणिज्यिक उद्योग से अधिक, ऑटो सेक्टर को अब वैश्विक विनिर्माण और इनोवेशन में भारत की बढ़ती शक्ति के प्रतिबिंब के रूप में देखा जाता है।वित्त वर्ष 2024-25 तक, भारत बिक्री के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार और उत्पादन के मामले में चौथा सबसे बड़ा बाजार हैवित्त वर्ष 2024-25 तक, भारत बिक्री के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार और उत्पादन के मामले में चौथा सबसे बड़ा बाजार है। देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री विभिन्न सेगमेंट्स में 31 मिलियन से अधिक वाहनों का उत्पादन किया। इसमें 5 मिलियन से ज्यादा यात्री कारें, 1 मिलियन वाणिज्यिक वाहन, 1 मिलियन तिपहिया वाहन और लगभग 24 मिलियन दोपहिया वाहन शामिल थे।निर्यात के मामले में, भारत ने जापान, मैक्सिको, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका जैसे बाजारों में लगभग 5.7 मिलियन वाहनों का निर्यात किया हैनिर्यात के मामले में, भारत ने जापान, मैक्सिको, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका जैसे बाजारों में लगभग 5.7 मिलियन वाहनों का निर्यात किया। सरकार ऑटोमोबाइल सेक्टर की वृद्धि दर को बनाए रखने और इसे बढ़ाने के लिए कई योजनाएं भी चला रही है।सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम है। इस योजना का बजट 25,938 करोड़ रुपए है। यह योजना इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), हाइड्रोजन वाहनों, और एडवांस व्हीकल टेक्नोलॉजीज को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।2025 की शुरुआत तक, इस योजना ने 67,000 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्तावों को आकर्षित किया था2025 की शुरुआत तक, इस योजना ने 67,000 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्तावों को आकर्षित किया था। इससे 2.3 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त बिक्री और 7.5 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। एक अन्य प्रमुख पहल फेम-II योजना है, जिसे 11,500 करोड़ रुपए के बजट के साथ लॉन्च किया गया है। इस योजना के जरिए सरकार का उद्देश्य इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, बसों और टैक्सियों को अपनाने को सपोर्ट करना है। इस योजना के तहत 1.3 मिलियन से अधिक ईवी को पहले ही सपोर्ट दिया जा चुका है।आयातित बैटरियों पर निर्भरता कम करने के लिए, सरकार ने 18,100 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (एसीसी) बैटरी स्टोरेज के लिए एक पीएलआई योजना भी शुरू कीआयातित बैटरियों पर निर्भरता कम करने के लिए, सरकार ने 18,100 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (एसीसी) बैटरी स्टोरेज के लिए एक पीएलआई योजना भी शुरू की।इस योजना के तहत तीन कंपनियां पहले से ही बैटरी गीगाफैक्ट्री बनाने पर काम कर रही हैं। यह योजना काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि बैटरी ईवी की कुल लागत का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनाती हैं।( - पुरी। प्रयागराज में महाकुंभ मेले के दौरान लाखों लोगों की सेवा करने के बाद, रिलायंस ने ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में भक्तों के अनुभव को समृद्ध करने के लिए बहुआयामी प्रयास शुरू किए हैं। व्यापारिक समूह ने एक बयान में यह जानकारी दी। शुक्रवार को रथ यात्रा के पहले दिन, कंपनी ने अपनी ‘अन्न सेवा' के माध्यम से लगभग एक लाख भक्तों को भोजन वितरित किया। यह सेवा आठ जुलाई को ‘नालाद्री बिजे' तक जारी रहेगी, जिस दिन भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन 12वीं शताब्दी के मंदिर में वापस आएंगे। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने पुरी जिला प्रशासन के साथ मिलकर आगंतुकों को सुरक्षित, आरामदायक और समृद्ध यात्रा सुनिश्चित करने के लिए प्रयासों की एक व्यापक श्रृंखला पेश की है। वार्षिक रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु आते हैं जो जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की भव्य शोभायात्रा देखने के लिए एकत्रित होते हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक अनंत एम अंबानी ने बयान में कहा, “सेवा, रिलायंस के ‘वी केयर' दर्शन में गहराई से निहित है और पुरी में भक्तों की सेवा करने का अवसर वास्तव में एक आशीर्वाद है। हमारा मानना है कि रथ यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों और कर्मियों की सेवा करके हम ईश्वर की सेवा कर रहे हैं।” ‘अन्न सेवा' के अलावा, रिलायंस ने खाद्य स्टालों पर संपर्क रहित सैनिटाइजर भी लगाए हैं, नगर पालिका के सहयोग से सफाई के लिए कचरा बैग की आपूर्ति की है और पुलिस शिविरों में स्वच्छता सुविधाएं प्रदान की हैं। समूह ने तीर्थयात्रियों को गर्मी से बचने में मदद करने के लिए 1.5 लाख से अधिक पर्यावरण अनुकूल हाथ पंखे भी वितरित किए। अधिकारी ने कहा, “बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए पुलिस कर्मचारियों के बीच 3,500 रेनकोट भी वितरित किए गए हैं। स्वयंसेवकों, नगर निगम कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों को जलपान किट प्रदान की जाएगी।”
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नई दिल्ली। मॉर्गन स्टेनली ने शुक्रवार को एक नोट में कहा कि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट के बजाय तेजी आने की अधिक संभावना है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म भारतीय इक्विटी पर आशावादी बनी हुई है। फर्म को उम्मीद है कि मजबूत विकास डेटा, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा सहायक कदम और उम्मीद से बेहतर कॉर्पोरेट आय जुलाई से बाजार को ऊपर ले जाएगी।
फर्म के अनुसार, भारत में लगातार सुधार के संकेत दिख रहे हैंफर्म के अनुसार, भारत में लगातार सुधार के संकेत दिख रहे हैं। सरकारी खर्च बढ़ रहा है और आरबीआई अधिक सहायक या ‘शांत’ नीति रुख की ओर बढ़ रहा है। यह, मुद्रास्फीति में कमी के साथ मिलकर शेयर बाजार के लिए अच्छा माहौल बना रहा है।ब्रोकरेज फर्म का यह भी मानना है कि कम ब्याज दरें बैंकों को अधिक उधार देने में मदद करेंगीब्रोकरेज फर्म का यह भी मानना है कि कम ब्याज दरें बैंकों को अधिक उधार देने में मदद करेंगी, जिससे उधार वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, अगर वैश्विक अनिश्चितताएं कम होती हैं, तो भारतीय कंपनियां नई परियोजनाओं में अधिक निवेश करना शुरू कर सकती हैं। आगामी कॉर्पोरेट आय सीजन एक प्रमुख ट्रिगर हो सकता है।आरबीआई चौथी तिमाही में ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती कर सकता है, जो बाजार की धारणा को मजबूत करेगामॉर्गन स्टेनली को उम्मीद है कि कई कंपनियां कम आधार तुलना, बेहतर दक्षता और उपभोक्ताओं की स्थिर मांग के कारण बाजार की उम्मीदों को पार कर जाएंगी। आगे देखते हुए, आरबीआई चौथी तिमाही में ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती कर सकता है, जो बाजार की धारणा को मजबूत करेगा। हालांकि, ब्रोकरेज ने यह भी चेतावनी दी है कि वैश्विक कारक भारत के बाजार की चाल में बड़ी भूमिका निभाते रहेंगे।दुनिया भर में तनाव, व्यापार नीतियों में बदलाव या विकसित देशों में स्लोडाउन भारतीय शेयरों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैदुनिया भर में तनाव, व्यापार नीतियों में बदलाव या विकसित देशों में स्लोडाउन भारतीय शेयरों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। भले ही भारत को आम तौर पर अपेक्षाकृत स्थिर बाजार के रूप में देखा जाता है, लेकिन वैश्विक स्तर पर बड़ी बिकवाली से घरेलू इक्विटी पर असर पड़ेगा।अगर तेल की कीमतों में तेज गिरावट आती है, तो यह वैश्विक आर्थिक संकट का संकेत हो सकता है, जो बाजारों के लिए अच्छा नहीं होगाउदाहरण के लिए, अगर तेल की कीमतों में तेज गिरावट आती है, तो यह वैश्विक आर्थिक संकट का संकेत हो सकता है, जो बाजारों के लिए अच्छा नहीं होगा। इन जोखिमों के बावजूद, मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि खुदरा निवेशकों की मजबूत भागीदारी और निरंतर विदेशी रुचि किसी भी गिरावट को कम करने में मदद करेगी। भारतीय इक्विटी को ‘कम प्रीमियम’ और जीएसटी में बदलाव और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास जैसे दीर्घकालिक सुधारों से भी लाभ होता है, जो निवेशकों के विश्वास को बढ़ाते हैं। हालांकि, मौजूदा वैल्यूएशन ऐतिहासिक स्तरों की तुलना में अधिक हैं, लेकिन ब्रोकरेज का मानना है कि मजबूत आय परिदृश्य को देखते हुए यह उचित है। मॉर्गन स्टेनली ने कहा कि दीर्घावधि में भारत की स्थिर नीतियां और विकास क्षमता इसे उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सबसे आकर्षक बाजारों में से एक बनाती हैं -
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को मजबूती के साथ बंद हुए, बेंचमार्क सूचकांक नौ महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और भारत-अमेरिका के बीच बड़े व्यापार समझौते की संभावना की खबरों के बीच निवेशकों का मूड सकारात्मक रहा, जिससे बाजार का भरोसा बढ़ा और खरीदारी को बढ़ावा मिला।
सेंसेक्स कारोबार के अंत में 303.03 अंक या 0.36 प्रतिशत चढ़कर 84,058.90 पर बंद हुआसेंसेक्स कारोबार के अंत में 303.03 अंक या 0.36 प्रतिशत चढ़कर 84,058.90 पर बंद हुआ। दिन के दौरान यह 83,645.41 से 84,089.35 के दायरे में कारोबार करता रहा। बेंचमार्क इंडेक्स में लगातार चौथे सत्र में बढ़त दर्ज की गई, जो लगातार ऊपर की ओर रुझान दर्शाता है। निफ्टी में भी इसी तरह की तेजी देखी गई, जो 88.80 अंक या 0.35 प्रतिशत चढ़कर 25,637.80 पर बंद हुआ। इंट्रा-डे ट्रेड में यह 25,523 और 25,654 के बीच रहा।निफ्टी लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है क्योंकि निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ हैएलकेपी सिक्योरिटीज के रूपक डे ने कहा, “निफ्टी लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है क्योंकि निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है। 25,750-25,800 से पहले कोई बड़ा प्रतिरोध नहीं देखा गया है, इसलिए सूचकांक अपने ऊपर की ओर बढ़ने की राह पर आगे बढ़ सकता है।”पिछले कुछ दिनों में तेज उछाल के बाद मौजूदा स्तरों पर बाय-ऑन-डिप्स की रणनीति अधिक उपयुक्त प्रतीत होती हैउन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में तेज उछाल के बाद मौजूदा स्तरों पर बाय-ऑन-डिप्स की रणनीति अधिक उपयुक्त प्रतीत होती है। नीचे की ओर, समर्थन 25,500 पर रखा गया है; इस स्तर से नीचे टूटने से कंसोलिडेशन हो सकता है।निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.27 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.91 प्रतिशत की उछाल आईइससे पहले, सेंसेक्स ने अक्टूबर 2024 में 84,000 स्तर को छुआ था, जबकि निफ्टी पिछले साल 3 अक्टूबर को 25,639 पर पहुंच गया था। ब्रॉडर मार्केट ने भी यही किया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.27 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.91 प्रतिशत की उछाल आई। यह दर्शाता है कि निवेशकों की रुचि लार्ज-कैप शेयरों से परे भी मजबूत थी।निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स ने अपने क्षेत्रीय समकक्षों और बेंचमार्क सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया और 1.19 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआनिफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रियल्टी, आईटी और एफएमसीजी सूचकांकों को छोड़कर, एनएसई पर अन्य सभी क्षेत्रीय सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स ने अपने क्षेत्रीय समकक्षों और बेंचमार्क सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया और 1.19 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। अस्थिरता भी कम हुई, इंडिया विक्स 1.60 प्रतिशत गिरकर 12.39 पर आ गया। इससे पता चलता है कि निवेशक निकट भविष्य में बाजार की स्थिरता को लेकर अधिक आश्वस्त महसूस कर रहे हैं। -
नयी दिल्ली. रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में बृहस्पतिवार को करीब दो प्रतिशत की तेजी आई और कंपनी का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) एक बार फिर 20 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया। बीएसई पर कंपनी का शेयर 1.90 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,495.20 रुपये पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 2.14 प्रतिशत चढ़कर 1,498.70 रुपये पर पहुंच गया था। एनएसई पर रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 1.90 प्रतिशत चढ़कर 1,495.30 रुपये पर पहुंच गया।
इससे कंपनी का बाजार मूल्यांकन 37,837.9 करोड़ रुपये बढ़कर 20,23,375.31 करोड़ रुपये हो गया।बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स बृहस्पतिवार को 1,000.36 अंक बढ़कर 83,755.87 अंक पर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी 304.25 अंक मजबूत होकर 25,549 अंक पर बंद हुआ। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) पिछले साल 13 फरवरी को 20 लाख करोड़ रुपये का बाजार पूंजीकरण हासिल करने वाली पहली भारतीय कंपनी बन गई थी। बाजार मूल्यांकन के मामले में कंपनी सबसे मूल्यवान घरेलू कंपनी है। इसके बाद शीर्ष पांच कंपनियों में एचडीएफसी बैंक का बाजार पूंजीकरण 15,51,218.93 करोड़ रुपये, आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का 12,45,219.09 करोड़ रुपये, भारती एयरटेल का 11,48,518.05 करोड़ रुपये और आईसीआईसीआई बैंक का बाजार पूंजीकरण 10,27,838.79 करोड़ है। -
नयी दिल्ली. वॉलमार्ट इंक के चेयरमैन और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) डग मैकमिलन के नेतृत्व में कंपनी के प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की और भारत के साथ अमेरिका की दिग्गज खुदरा कंपनी की बढ़ती साझेदारी पर चर्चा की। मैकमिलन 18 महीने से भी कम समय में दूसरी बार भारत यात्रा पर आए हैं।
वॉलमार्ट ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर बताया कि मैकमिलन ने मोदी से भारत के साथ वॉलमार्ट की बढ़ती साझेदारी पर चर्चा की। वॉलमार्ट की टीम देश की दो दिन की यात्रा पर है।
सीईओ ने मंगलवार को मोदी के साथ हुई अपनी बैठक में भारत के साथ वॉलमार्ट की बढ़ती साझेदारी पर चर्चा की। बातचीत के प्रमुख मुद्दों में फ्लिपकार्ट, फोनपे, वॉलमार्ट ग्लोबल टेक और वॉलमार्ट सोर्सिंग शामिल हैं। पिछले कुछ वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी और मैकमिलन के बीच यह चौथी बैठक है।
साल 2014 में बेंटनविले मुख्यालय वाली खुदरा दिग्गज कंपनी का सीईओ बनने के बाद से मैकमिलन कई बार भारत आ चुके हैं। मैकमिलन ने बृहस्पतिवार को वॉलमार्ट इंक के ‘एक्स' खाते पर कहा, “एक मूल्यवान बैठक के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद। हम आपके दृष्टिकोण से उत्साहित हैं और हमारे 10 अरब डॉलर वार्षिक निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने और फ्लिपकार्ट तथा फोनपे के माध्यम से नवाचार में निवेश करने को साझेदारी करके समर्थन करने पर गर्व करते हैं। भारत हमारी रणनीति का केंद्र बना हुआ है।” मैकमिलन के अलावा, वॉलमार्ट बोर्ड के सदस्य स्टुअर्ट वाल्टन और वॉलमार्ट इंटरनेशनल के अध्यक्ष और सीईओ कैथ मैकले भी वहां मौजूद थे। स्टुअर्ट वाल्टन परिवार से हैं, जिन्होंने वॉलमार्ट की स्थापना की थी। वह वॉलमार्ट के संस्थापक सैम वाल्टन के पोते हैं। यह पहली बार है जब वॉलमार्ट मालिक परिवार वाल्टन से कोई प्रधानमंत्री से मिल रहा है। मैकले वॉलमार्ट इंटरनेशनल के अध्यक्ष और सीईओ हैं। वॉलमार्ट ने देश से 10 अरब डॉलर मूल्य का सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। -
नयी दिल्ली. विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने बृहस्पतिवार को कहा कि साल 2025 की शुरुआत में वैश्विक वस्तु व्यापार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी लेकिन आने वाले समय में यह रफ्तार शायद कायम न रह पाए। डब्ल्यूटीओ के ‘वस्तु व्यापार संकेतक' के मुताबिक, साल की शुरुआत में वस्तुओं के व्यापार में तेजी आने की मुख्य वजह यह रही कि आयातकों ने अमेरिका में उच्च शुल्क लगाए जाने की आशंका को देखते हुए पहले ही अपनी खरीदारी बढ़ा दी थी। इस संकेतक का आंकड़ा बढ़कर 103.5 पर पहुंच गया जबकि मार्च में यह 102.8 पर था। यह व्यापार में वृद्धि को दर्शाता है। हालांकि, भविष्य का संकेत देने वाला नए निर्यात ऑर्डर का संकेतक गिरकर 97.9 पर आ गया है। यह साल के अंत तक व्यापार वृद्धि में कमजोरी आने की तरफ इशारा कर रहा है। डब्ल्यूटीओ का वस्तु व्यापार संकेतक वैश्विक व्यापार के रुझानों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण सूचकांक है जो वास्तविक समय में व्यापार की दिशा के बारे में जानकारी देता है।
- नयी दिल्ली. उद्योगपति मुकेश अंबानी ने 2016 में रिलायंस जियो के साथ दूरसंचार उद्योग में कदम रखने के फैसले को अपने जीवन का ‘‘सबसे बड़ा जोखिम'' बताया है। उन्होंने कहा कि यदि विश्लेषकों की वित्तीय विफलता की भविष्यवाणी सच भी हो जाती तो भी भारत को डिजिटल रूप से बदलने में इसकी भूमिका को देखते हुए यह जोखिम उठाना उचित होता। वैश्विक प्रबंधन परामर्श कंपनी ‘मैकिन्से एंड कंपनी' के साथ साक्षात्कार में एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति ने कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 4जी मोबाइल नेटवर्क शुरू करने में अपने स्वयं के अरबों डॉलर का निवेश किया था। इसको लेकर कुछ विश्लेषकों का कहना था कि यह वित्तीय रूप से सफल नहीं हो सकता है क्योंकि भारत सबसे उन्नत डिजिटल प्रौद्योगिकी के लिए तैयार नहीं है।उन्होंने कहा, ‘‘ लेकिन मैंने अपने निदेशक मंडल से कहा कि सबसे खराब स्थिति यह होगी कि हमें ज्यादा ‘रिटर्न' नहीं मिलेगा। तो यह ठीक है, क्योंकि यह हमारा अपना पैसा है लेकिन रिलायंस के रूप में, यह भारत में हमारा अब तक का सबसे बड़ा परोपकारी काम होगा क्योंकि हम भारत का डिजिटलीकरण कर देश को पूरी तरह बदल चुके होंगे। '' जियो को 2016 में पेश किए जाने के बाद से, जियो ने मुफ्त ‘वॉयस कॉल' और बेहद कम लागत वाला डेटा प्रदान करके भारतीय दूरसंचार बाजार में क्रांति ला दी है, जिससे प्रतिस्पर्धियों को कीमतें कम करने के लिए मजबूर होना पड़ा है और देश भर में तेजी से डिजिटल अपनाने को बढ़ावा मिला है। जियो के आने से पहले भारत में मोबाइल इंटरनेट अपेक्षाकृत महंगा था और आबादी के बड़े हिस्से की इस तक पहुंच नहीं थी। इसके आने से कीमतों में उतार-चढ़ाव शुरू हुआ जिससे डेटा की लागत में उल्लेखनीय कमी आई और ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों सहित लाखों भारतीयों के लिए इंटरनेट तक पहुंच सस्ती हो गई। इसका नतीजा यह हुआ कि इंटरनेट की पहुंच बढ़ी।भारत में अब 80 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं, और यह आंकड़ा इसे वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े ऑनलाइन बाजारों में से एक बनाता है। इसने डिजिटल समावेशन को तेज किया क्योंकि किफायती डेटा ने डिजिटल विभाजन को पाटने में मदद की है। ई-कॉमर्स, वित्तीय प्रौद्योगिकी, शिक्षा प्रौद्योगिकी और मनोरंजन जैसी डिजिटल सेवाओं के विकास को बढ़ावा दिया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अंबानी ने कहा, ‘‘ हमने हमेशा बड़े जोखिम उठाए हैं, क्योंकि हमारे लिए व्यापकता मायने रखती है।अब तक हमने जो सबसे बड़ा जोखिम उठाया है, वह जियो है। उस समय हम अपना पैसा लगा रहे थे और मैं सबसे बड़ा शेयरधारक था। हमारी सबसे खराब स्थिति तब होती जब यह वित्तीय रूप से सफल नहीं होता क्योंकि कुछ विश्लेषकों का मानना था कि भारत सबसे उन्नत डिजिटल प्रौद्योगिकी के लिए तैयार नहीं है।'' जियो आज देश का सबसे बड़ा दूरसंचार संचालक है, जिसके 47 करोड़ से अधिक ग्राहक है। 5जी, क्लाउड और कृत्रिम मेधा (एआई) सेवाओं में इसकी मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा, ‘‘ हमारा मानना है कि आखिरकार आप इस दुनिया में बिना कुछ लिए आते हैं और बिना कुछ लिए चले जाते हैं। आप जो पीछे छोड़कर जाते हैं, वह एक संस्था है।''
- नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार बुधवार को तेजी के साथ बंद हुआ। बाजार में चौतरफा तेजी देखी गई। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 700.40 अंक या 0.85 प्रतिशत की बढ़त के साथ 82,755.51 और निफ्टी 200.40 अंक या 0.80 प्रतिशत की तेजी के साथ 25,244.75 पर था।निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.64 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआबाजार में तेजी का नेतृत्व आईटी शेयरों ने किया। निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.64 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ। इसके अलावा ऑटो, एफएमसीजी, मीडिया, रियल्टी, इन्फ्रा, फार्मा और सर्विसेज इंडेक्स हरे निशान में थे। निफ्टी के प्राइवेट बैंक और पीएसई इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए।लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी खरीदारी हुईलार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी खरीदारी हुई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 259.30 अंक या 0.44 प्रतिशत की तेजी के साथ 58,881.70 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 275.10 अंक या 1.49 प्रतिशत की बढ़त के साथ 18,277.85 पर था।बीईएल, कोटक महिंद्रा बैंक और एक्सिस बैंक लूजर्स थेसेंसेक्स पैक में टाइटन, एमएंडएम, इन्फोसिस, पावर ग्रिड, भारती एयरटेल, टीसीएस, टेक महिंद्रा, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचसीएल टेक, इटरनल, बजाज फाइनेंस, मारुति सुजुकी, ट्रेंट, टाटा स्टील, एचडीएफसी बैंक और अदाणी पोर्ट्स गेनर्स थे। बीईएल, कोटक महिंद्रा बैंक और एक्सिस बैंक लूजर्स थे।मजबूत डॉलर से आईटी और ऑटो में लार्ज-कैप स्टॉक बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैंजियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर ने कहा, “भारतीय इक्विटी बाजारों में रिकवरी को मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से समर्थन मिला है। वहीं, एफआईआई पूंजी निकालना जारी रखे हुए हैं लेकिन सकारात्मक वैश्विक संकेत घरेलू बाजार की गति को बनाए रखने में मदद कर रहे हैं। मजबूत डॉलर से आईटी और ऑटो में लार्ज-कैप स्टॉक बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। घरेलू स्तर पर, अनुकूल मानसून पूर्वानुमान और नरम मुद्रास्फीति आशावाद को और मजबूत कर रहे हैं।”सकारात्मक संकेतों के कारण भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत तेजी के साथ हुई थीसकारात्मक संकेतों के कारण भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत तेजी के साथ हुई थी। सुबह करीब 9.25 बजे, सेंसेक्स 445.6 अंक या 0.54 प्रतिशत बढ़कर 82,500.73 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 130.15 अंक या 0.52 प्रतिशत बढ़कर 25,174.50 पर था।
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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों के बीच लेन-देन वाले कॉल मनी मार्केट और रीपो व ट्राय-पार्टी रेपो (TREP) मार्केट की ट्रेडिंग टाइमिंग बढ़ाने का फैसला किया है। यह फैसला केंद्रीय बैंक द्वारा गठित ‘ट्रेडिंग और सेटलमेंट टाइमिंग की समग्र समीक्षा पर कार्य समूह’ की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है।
अब 1 जुलाई 2025 से इंटरबैंक कॉल मनी मार्केट का समय बढ़ाकर शाम 7:00 बजे तक कर दिया जाएगा, जो अभी शाम 5:00 बजे तक होता है। इस बदलाव के बाद अब यह बाजार सुबह 9:00 बजे से लेकर शाम 7:00 बजे तक खुला रहेगा।इसके अलावा, रीपो और ट्राय-पार्टी रीपो बाजारों के ट्रेडिंग समय को 1 अगस्त 2025 से बढ़ाकर शाम 4:00 बजे तक कर दिया जाएगा। ये बाजार अब सुबह 9:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक खुले रहेंगे।सरकार द्वारा जारी सर्कुलर के मुताबिक, सरकारी बॉन्ड बाजार, विदेशी मुद्रा बाजार (फॉरेक्स मार्केट) और ब्याज दर आधारित डेरिवेटिव बाजार के ट्रेडिंग समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है।सर्कुलर में बताया गया कि एक वर्किंग ग्रुप ने बाजार को और बेहतर बनाने, सही भाव तय करने (प्राइस डिस्कवरी) और लिक्विडिटी जरूरतों को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए कुछ सिफारिशें दी हैं।सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि वर्किंग ग्रुप की बाकी सिफारिशों पर अभी विचार किया जा रहा है और उन पर निर्णय बाद में लिया जाएगा।फरवरी में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक 9 सदस्यीय कार्य समूह (Working Group) का गठन किया था, जिसका उद्देश्य वित्तीय बाजारों में ट्रेडिंग और सेटलमेंट के समय की व्यापक समीक्षा करना है। यह समूह बीते कुछ वर्षों में वित्तीय क्षेत्र में हुए कई अहम बदलावों को ध्यान में रखते हुए मौजूदा समय-सीमा का मूल्यांकन करेगा।इस समीक्षा में जिन मुख्य बातों पर ध्यान दिया जाएगा, उनमें ट्रेडिंग का इलेक्ट्रॉनिक होना, विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) और कुछ ब्याज दर डेरिवेटिव बाजारों का 24×5 आधार पर खुला रहना, घरेलू बाजारों में गैर-निवासियों की बढ़ती भागीदारी, और भुगतान प्रणालियों की 24 घंटे उपलब्धता जैसी बातें शामिल हैं।कार्य समूह का मुख्य काम रिज़र्व बैंक द्वारा रेगुलेट किए जाने वाले विभिन्न वित्तीय बाजारों के मौजूदा ट्रेडिंग और सेटलमेंट टाइमिंग की समीक्षा करना है। इसमें ट्रेडिंग, क्लियरिंग, सेटलमेंट और ट्रांजैक्शन रिपोर्टिंग से जुड़ी मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर के कामकाज के समय की भी जांच की जाएगी।इसके साथ ही, यह समूह मौजूदा समय-सीमा से पैदा होने वाली किसी भी चुनौती या समस्या जैसे बाजारों के बीच मूल्य/रेट ट्रांसमिशन पर असर, बाजार में उतार-चढ़ाव, ट्रेड का बंटवारा, तरलता की ज़रूरतें और नेटिंग क्षमता जैसे पहलुओं की भी समीक्षा करेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनाए जा रहे समय-निर्धारण के तरीकों का भी अध्ययन किया जाएगा, ताकि यह समझा जा सके कि वे भागीदारी, तरलता और ट्रेडिंग वॉल्यूम जैसे पहलुओं पर क्या असर डालते हैं।इस कार्य समूह की अध्यक्षता भारतीय रिजर्व बैंक के कार्यकारी निदेशक राधा श्याम राठो कर रहे हैं। इसके अलावा इसमें वित्तीय क्षेत्र से जुड़े आठ अन्य विशेषज्ञ सदस्य शामिल हैं। -
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनाव और वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत के बासमती चावल का निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 में तेजी से बढ़ा है। वाणिज्यिक जानकारी एवं सांख्यिकी महानिदेशालय (DGCI&S) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष बासमती चावल के निर्यात से भारत को 50,312 करोड़ रुपये (5.87 अरब डॉलर) की आमदनी हुई, जो पिछले वित्त वर्ष 2023-24 के 48,389 करोड़ रुपये (5.74 अरब डॉलर) के मुकाबले 1,923 करोड़ रुपये अधिक है। बढ़ते तनाव के बावजूद यह व्यापारिक सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत का बासमती चावल निर्यात काफी हद तक मध्य पूर्व के देशों पर निर्भर करता है।
आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि भारत ने 2024-25 में 60.65 लाख मीट्रिक टन (LMT) बासमती चावल का निर्यात किया, जो 2023-24 के मुकाबले 8.23 LMT या 15.7% अधिक है। वहीं पिछले वर्ष भारत ने 154 देशों को बासमती चावल भेजा, जबकि 2023-24 में यह संख्या 150 देश थी। सऊदी अरब भारत का सबसे बड़ा खरीदार रहा, जिसने 11.73 LMT बासमती चावल खरीदा। इसके बाद इराक (9.05 LMT) और ईरान (8.55 LMT) का स्थान रहा। ये तीनों देश पिछले वर्ष भी शीर्ष आयातक थे, जिनकी खरीद क्रमशः 10.98 LMT, 8.24 LMT, और 6.7 LMT थी।अन्य प्रमुख आयातकों में यमन (3.92 LMT), यूएई (3.89 LMT), अमेरिका (2.74 LMT), ब्रिटेन (1.80 LMT), कुवैत (1.75 LMT), ओमान (1.49 LMT) और कतर (1.24 LMT) शामिल हैं। मूल्य के लिहाज से देखें तो सऊदी अरब ने सबसे अधिक 10,190.73 करोड़ रुपये का बासमती चावल खरीदा। इसके बाद इराक ने 7,201 करोड़ रुपये, ईरान ने 6,374 करोड़ रुपये, यूएई ने 3,089 करोड़ रुपये, यमन ने 3,038.56 करोड़ रुपये, और अमेरिका ने 2,849 करोड़ रुपये का भुगतान किया।इसके अलावा ब्रिटेन ने 1,613.36 करोड़ रुपये, कुवैत ने 1,518.8 करोड़ रुपये, ओमान ने 1,223 करोड़ रुपये और कतर ने 1,040 करोड़ रुपये का बासमती चावल भारत से खरीदा। भारत की यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि भले ही दुनिया में राजनीतिक अस्थिरता हो, भारतीय कृषि उत्पादों खासकर बासमती चावल की वैश्विक मांग में लगातार वृद्धि हो रही है।-( -
नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025-26 में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। इसकी वजह सामान्य से अधिक मानसून और मौद्रिक नीति में नरमी आना है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की रिपोर्ट में बताया गया कि घरेलू मांग में मजबूती, भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक मंदी को सीमित करने में बड़ा योगदान देगी। साथ ही निर्यात पर देश की कम निर्भरता से भी अर्थव्यवस्था के विकास को बढ़ावा मिलेगा।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत पर रहने की उम्मीदएशिया-प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं पर जारी रिपोर्ट में कहा गया, “हम वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत पर रहने की उम्मीद करते हैं। इस पूर्वानुमान में सामान्य मानसून, कच्चे तेल की कम कीमतें, आयकर में छूट और मौद्रिक नीति में नरमी को शामिल किया गया है।”भारत में कम होती खाद्य महंगाई से मुख्य महंगाई को कम रखने में मदद मिलेगीरिपोर्ट में बताया गया कि भारत में कम होती खाद्य महंगाई से मुख्य महंगाई को कम रखने में मदद मिलेगी। भारत में थोक महंगाई दर मई में 14 महीनों के निचले स्तर 0.39 प्रतिशत पर आ गई है, जो कि अप्रैल में 0.85 प्रतिशत थी और मार्च में यह 2.05 प्रतिशत थी।भारत की खुदरा महंगाई दर मई में कम होकर 2.82 प्रतिशत हो गई है, जो कि पिछले साल मई में 4.8 प्रतिशत थीवहीं, भारत की खुदरा महंगाई दर मई में कम होकर 2.82 प्रतिशत हो गई है, जो कि पिछले साल मई में 4.8 प्रतिशत थी। खुदरा महंगाई दर का यह फरवरी 2019 के बाद सबसे निचला स्तर था। इस साल अप्रैल में खुदरा महंगाई दर 3.16 प्रतिशत थी।महंगाई में कमी का कारण खाद्य महंगाई का कम होकर 0.99 प्रतिशत होना, जो कि अक्टूबर 2021 के बाद सबसे निचला स्तर हैमहंगाई में कमी का कारण खाद्य महंगाई का कम होकर 0.99 प्रतिशत होना, जो कि अक्टूबर 2021 के बाद सबसे निचला स्तर है। खाद्य महंगाई दर बीते सात महीने से लगातार कम हो रही है। इसकी वजह कृषि उत्पादन का बढ़ना है।आरबीआई ने 2025-26 के लिए महंगाई के अपने पूर्वानुमान को भी 4 प्रतिशत से घटाकर 3.7 प्रतिशत कर दिया हैरिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बीते शुक्रवार को आरबीआई ने 2025-26 के लिए महंगाई के अपने पूर्वानुमान को भी 4 प्रतिशत से घटाकर 3.7 प्रतिशत कर दिया है। उन्होंने कहा, “सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए और सामान्य मानसून को देखते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति अब 3.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।”कई अर्थव्यवस्थाओं को टैरिफ से पहले अमेरिका को निर्यात के एडवांस लोडिंग से अस्थायी रूप से बढ़ावा मिला हैएसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के अनुसार, कई क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं ने मजबूत घरेलू मांग के कारण 2025 में अच्छी शुरुआत की है। कई अर्थव्यवस्थाओं को टैरिफ से पहले अमेरिका को निर्यात के एडवांस लोडिंग से अस्थायी रूप से बढ़ावा मिला है।2025 में चीनी अर्थव्यवस्था के 4.3 प्रतिशत और 2026 में 4 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि की उम्मीदरिपोर्ट में बताया गया कि 2025 में चीनी अर्थव्यवस्था के 4.3 प्रतिशत और 2026 में 4 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, एशिया-प्रशांत अर्थव्यवस्थाओं को काफी बाहरी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। हमें उम्मीद है कि भारत की घरेलू मांग मोटे तौर पर स्वस्थ रहेगी। -
नयी दिल्ली. ड्रोन प्रौद्योगिकी कंपनी आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी ने आपातकालीन खरीद मार्ग के जरिये भारतीय सेना से हाइब्रिड लघु मानव रहित हवाई वाहन प्रणालियों (ड्रोन) के लिए लगभग 137 करोड़ रुपये का ऑर्डर हासिल किया है। कंपनी ने सोमवार को यह जानकारी दी। आइडियाफोर्ज ने कहा कि मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) के चयन के लिए मूल्यांकन के दौरान एक प्रमुख आवश्यकता यह थी कि सभी महत्वपूर्ण उप-कलपुर्जों को सीमा साझा नहीं करने वाले देशों से हासिल किया जाना चाहिए। इसके साथ ही यह मंच क्षमता और डिजाइन में काफी हद तक स्वदेशी होना चाहिए। कंपनी ने बयान में कहा, ''आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी ने आपातकालीन खरीद मार्ग के जरिये एक महत्वपूर्ण ऑर्डर हासिल किया है। लगभग 137 करोड़ रुपये का ऑर्डर भारतीय सेना ने उच्च प्रदर्शन वाले हाइब्रिड लघु यूएवी प्रणाली के लिए दिया गया है। इनका पहले ही युद्ध-परीक्षण किया गया है।'' कंपनी की अनुसंधान एवं विकास तथा विनिर्माण इकाइयां नवी मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली और अमेरिका में हैं।
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बेंगलुरु. भारतीय कॉफी बोर्ड द्वारा उठाए गए कई कदमों के कारण पिछले 11 वर्षों में देश का कॉफी निर्यात लगभग 125 प्रतिशत बढ़कर 1.8 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। केंद्र सरकार की ओर से जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2014-15 में निर्यात 80 करोड़ डॉलर से अधिक था। यह 2023-24 में 1.28 अरब डॉलर और 2022-23 में 1.14 अरब डॉलर था। देश के कॉफ़ी निर्यात के लिए यूरोप शीर्ष गंतव्य बना हुआ है। भारत से कॉफ़ी आयात करने वाले प्रमुख देशों में इटली, जर्मनी, बेल्जियम, पश्चिम एशिया के देश, दक्षिण कोरिया और जापान शामिल हैं। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारतीय कॉफी बोर्ड द्वारा की गई प्रमुख पहल में पंजीकरण-सह-सदस्यता प्रमाणपत्र (आरसीएमसी), निर्यात परमिट, उत्पत्ति प्रमाणपत्र को डिजिटल हस्ताक्षर के साथ ऑनलाइन जारी करना, बाधाओं पर चर्चा करने और उन मुद्दों को हल करने के लिए निर्यातकों के साथ नियमित बातचीत, तथा नियमित रूप से वैश्विक बाजार की जानकारी और बाजार आसूचना प्रदान करना शामिल है। अन्य निर्यात संवर्धन कदमों में मूल्यवर्धित कॉफी के बाजार हिस्से को बढ़ाकर निर्यात आय को अधिकतम करने के लिए पारगमन/माल ढुलाई सहायता शामिल थी। सरकार मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्यात के लिए तीन रुपये प्रति किलोग्राम प्रदान करती है, वहीं अमेरिका, कनाडा, जापान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया और फिनलैंड, नॉर्वे और डेनमार्क जैसे दूर-दराज के उच्च मूल्य वाले बाजारों में उच्च मूल्य वाली हरी कॉफी के निर्यात के लिए दो रुपये प्रदान करती है। मूल्य संवर्धन के लिए कारोबारी समुदाय को सहायता देने के लिए बोर्ड व्यक्तियों, स्वयं सहायता समूहों और उत्पादकों को सहायता प्रदान करता है। यह पिसाई और पैकेजिंग आदि मशीनरी की स्थापना के लिए मशीनरी की लागत का 40 प्रतिशत प्रदान करता है, जिसकी अधिकतम सीमा 15 लाख रुपये है। -
नयी दिल्ली. उद्योग मंडल एल्सीना ने सरकार के साथ एक अनुमान साझा किया है कि चीन द्वारा दुर्लभ मृदा धातुओं के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण देश के ऑडियो इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में 21,000 से अधिक नौकरियां खतरे में हैं। अप्रैल में, चीन ने टेरबियम और डिस्प्रोसियम जैसे दुर्लभ मृदा तत्वों पर सख्त निर्यात लाइसेंसिंग लागू की, जो उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स में उपयोग किए जाने वाले उच्च-प्रदर्शन वाले एनडीएफईबी (नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन) चुम्बक के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल हैं। देश के सबसे पुराने इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग निकाय ने कहा कि इस कदम से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है, जिससे भारत के तेजी से बढ़ते श्रव्य और पहनने योग्य उपकरणों के क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचा है और उपकरण विनिर्माता चीन से पूरी तरह से तैयार स्पीकर मॉड्यूल आयात करने पर विचार कर रहे हैं। एल्सीना ने रिपोर्ट में कहा, “इससे प्रतिगामी प्रवृत्ति पैदा होती है, जो कलपुर्जा विनिर्माण से वापस तैयार माल के आयात पर निर्भरता की ओर जाती है। स्पीकर और ऑडियो के कलपुर्जा विनिर्माण में, खासकर नोएडा और दक्षिण भारत में 5,000-6,000 से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियां और 15,000 अप्रत्यक्ष नौकरियां खतरे में हैं।” एल्सीना का अनुमान है कि दुर्लभ मृदा धातु आधारित चुम्बकों का हिस्सा कुल सामग्री का लगभग पांच-सात प्रतिशत है, तथा भारत अपनी एनडीएफईबी चुम्बक आवश्यकता का लगभग 100 प्रतिशत आयात करता है, जबकि चीन का हिस्सा कुल आयात का 90 प्रतिशत है। उद्योग निकाय ने कहा कि आपूर्ति में कमी और प्रशासनिक अनियमितताओं के कारण चीन निर्मित चुम्बकों की कीमतें बढ़ गई हैं, तथा जापान, यूरोपीय संघ और अमेरिका जैसे अन्य स्रोत दो-तीन गुना महंगे हैं और भारत की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उनके पास पर्याप्त क्षमता भी नहीं है। टेलीविजन बनाने वाली इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सेवा फर्म वीडियोटेक्स ने कहा कि दुर्लभ मृदा आधारित चुम्बक टेलीविजन विनिर्माण में महत्वपूर्ण हैं, विशेष रूप से स्पीकरों के लिए, क्योंकि उनका प्रदर्शन बेहतर होता है और आकार छोटा होता है।
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नयी दिल्ली. सेंसेक्स की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से छह का बाजार मूल्यांकन (मार्केट कैप) पिछले सप्ताह सामूहिक रूप से 1,62,288.06 करोड़ रुपये बढ़ गया। सबसे अधिक लाभ में भारती एयरटेल और रिलायंस इंडस्ट्रीज रहीं। पिछले सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,289.57 अंक या 1.58 प्रतिशत चढ़ गया।
समीक्षाधीन सप्ताह में रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और इन्फोसिस का बाजार पूंजीकरण बढ़ गया। वहीं टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), एलआईसी, बजाज फाइनेंस और हिंदुस्तान यूनिलीवर की बाजार हैसियत घट गई। समीक्षाधीन सप्ताह में भारती एयरटेल का बाजार मूल्यांकन 54,055.96 करोड़ रुपये बढ़कर 11,04,469.29 करोड़ रुपये रहा। रिलायंस इंडस्ट्रीज की बाजार हैसियत 50,070.14 करोड़ रुपये बढ़कर 19,82,033.60 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। एचडीएफसी बैंक का मूल्यांकन 38,503.91 करोड़ रुपये बढ़कर 15,07,281.79 करोड़ रुपये हो गया। वहीं इन्फोसिस ने सप्ताह के दौरान 8,433.06 करोड़ रुपये जोड़े और कंपनी का बाजार मूल्यांकन 6,73,751.09 करोड़ रुपये हो गया। आईसीआईसीआई बैंक की बाजार हैसियत 8,012.13 करोड़ रुपये बढ़कर 10,18,387.76 करोड़ रुपये और भारतीय स्टेट बैंक की 3,212.86 करोड़ रुपये के उछाल के साथ 7,10,399.75 करोड़ रुपये हो गई। इस रुख के उलट बजाज फाइनेंस का बाजार पूंजीकरण 17,876.42 करोड़ रुपये घटकर 5,62,175.67 करोड़ रुपये रह गया। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के मूल्यांकन में 4,613.06 करोड़ रुपये की गिरावट आई और यह 12,42,577.89 करोड़ रुपये पर आ गया। हिंदुस्तान यूनिलीवर का मूल्यांकन 3,336.42 करोड़ रुपये घटकर 5,41,557.29 करोड़ रुपये रह गया। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की बाजार हैसियत 1,106.88 करोड़ रुपये घटकर 5,92,272.78 करोड़ रुपये पर आ गई। शीर्ष 10 कंपनियों की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर कायम रही। उसके बाद क्रमश: एचडीएफसी बैंक, टीसीएस, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, इन्फोसिस, एलआईसी, बजाज फाइनेंस और हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड का स्थान रहा। -
नयी दिल्ली. इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद बाजार में आए उतार-चढ़ाव के बीच भारत ने जून में रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। भारत की जून में रूस से तेल खरीद पश्चिम एशिया के आपूर्तिकर्ताओं...सऊदी अरब और इराक से आयातित मात्रा से अधिक रही है। अमेरिकी सेना ने रविवार सुबह ईरान में तीन स्थलों पर हमला किया। वह इस युद्ध में सीधे इजरायल के साथ शामिल हो गया है। इजरायल ने 13 जून को सबसे पहले ईरानी परमाणु ठिकानों पर हमला किया था। वैश्विक व्यापार विश्लेषक कंपनी केपलर के शुरुआती आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय रिफाइनरी कंपनियां जून में रूस से प्रतिदिन 20 से 22 लाख बैरल कच्चा तेल खरीद रही हैं। यह दो साल का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। इसके साथ ही यह इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कुवैत से खरीदी गई कुल मात्रा से अधिक है। मई में रूस से भारत का तेल आयात 19.6 लाख बैरल प्रति दिन (बीपीडी) था।
जून में अमेरिका से भी आयात बढ़कर 4,39,000 बीपीडी हो गया। पिछले महीने यह आंकड़ा 2,80,000 बीपीडी था। केपलर के अनुसार, पश्चिम एशिया से आयात के लिए पूरे महीने का अनुमान लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन है, जो पिछले महीने की खरीद से कम है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता देश भारत विदेशों से लगभग 51 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदता है, जिसे रिफाइनरी में पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन में बदला जाता है। भारत पारंपरिक रूप से पश्चिम एशिया से कच्चा तेल खरीदता रहा है। फरवरी, 2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के तुरंत बाद भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करना शुरू कर दिया था। इसका मुख्य कारण यह था कि पश्चिमी प्रतिबंधों और कुछ यूरोपीय देशों द्वारा खरीद से परहेज करने के कारण रूसी तेल अन्य अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क की तुलना में काफी सस्ते दाम पर उपलब्ध था। इसके कारण भारत के रूसी तेल आयात में नाटकीय वृद्धि देखी गई। कभी भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात एक प्रतिशत से भी कम था। लेकिन यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद यह थोड़े से समय में ही बढ़कर 40-44 प्रतिशत तक पहुंच गया था।













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