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नयी दिल्ली. उत्तर और पूर्वी क्षेत्रों में लगातार पड़ रही गर्मी ने जून में कमरे वाले एयर-कंडीशनर (आरएसी) की बिक्री में उछाल ला दिया है। हालांकि, देश के कई हिस्सों में सबसे ज्यादा मांग वाले सीजन के दौरान रुक-रुक कर हो रही बारिश ने कंपनियों को इस साल बिक्री अनुमान को घटाकर 10-15 प्रतिशत करने पर मजबूर कर दिया है। कमरे वाले एसी के लिए सर्वाधिक मांग वाले सीजन गर्मियों में इस बार एसी विनिर्माताओं को निराशा हाथ लगी है। हालांकि, जून में गर्मी के कारण तेज खरीदारी के कारण कुछ उम्मीद की किरणें भी दिख रही हैं।
आरएसी विनिर्माताओं ने कहा कि फरवरी और मार्च में उत्साहजनक संख्या के बाद, गर्मियों के जल्दी आने से उन्हें मदद मिली, वे पिछले साल की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत की उच्च दोहरे अंकों की मात्रा वृद्धि की उम्मीद कर रहे थे, और उन्होंने भंडारण भी बना लिया था। ब्लू स्टार के प्रबंध निदेशक बी त्यागराजन ने कहा, “हम सभी ने 25 से 30 प्रतिशत की वृद्धि की योजना बनाई थी, जो नहीं होने जा रही है। यह एक निराशाजनक गर्मी है; यह सच है। यह खेल का एक अभिन्न अंग है।” उन्होंने कहा, “हमें स्थिति को संभालना होगा और आगे बढ़ना होगा। फरवरी और मार्च में अच्छी शुरुआत के बावजूद, इस वर्ष आरएसी उद्योग 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि के साथ समाप्त होगा।” भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने पिछले सप्ताह कहा था कि जून के मध्य से तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आ सकती है, क्योंकि पश्चिमी विक्षोभ के आने से ठंडी हवाएं, बारिश और आंधी आने की संभावना है।
वोल्टास के एमडी और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) प्रदीप बख्शी ने कहा कि पिछले दो महीनों में 2024 की बिक्री की तुलना में उद्योग के लिए शायद ही कोई वृद्धि हुई है। बख्शी ने कहा, “बल्कि, वास्तव में, उद्योग के लिए वृद्धि में गिरावट आई है। इसलिए, मुझे नहीं लगता कि लोग अब पहली तिमाही (जून तिमाही) में बड़ी वृद्धि संख्या की उम्मीद कर रहे हैं। पिछले साल की संख्या को छूना अपने आप में एक चुनौती होगी।” उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा गर्मी वाले महीनों पर मौसम का असर पड़ा है। इसने खेल बिगाड़ दिया। अप्रैल और मई के नुकसान के बाद, बाकी 10 महीनों में उबरना मुश्किल है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ दिनों से अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं, क्योंकि गर्मियां अपने चरम पर हैं, तापमान बढ़ रहा है, खासकर देश के उत्तरी क्षेत्र में, जिससे आने वाले महीनों में बेहतर परिणाम मिलने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। टाटा समूह की कंपनी वोल्टास की हालिया सालाना रिपोर्ट के अनुसार, इसने 25 लाख से अधिक एसी की बिक्री और पांच लाख से अधिक एयर कूलर की बिक्री के साथ रिकॉर्ड-तोड़ मील के पत्थर हासिल किए हैं। हायर अप्लायंसेज इंडिया के अध्यक्ष एन एस सतीश ने कहा कि आरएसी के लिए सालाना वृद्धि 30 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा, “लेकिन अप्रैल और मई के महीने अच्छे नहीं रहे। वास्तव में इसमें 10 से 15 प्रतिशत की गिरावट आई। जबकि जून में बिक्री में फिर से तेजी आई है।” भारतीय आरएसी बाज़ार दुनिया भर में सबसे तेज़ी से बढ़ते बाज़ारों में से एक है, जिसमें 12 से 15 कंपनियां प्रतिस्पर्धा करती हैं। अनुमान है कि यह बाज़ार लगभग 1.5 करोड़ इकाई का है। -
नई दिल्ली। सोने और चांदी दोनों की कीमत में इस हफ्ते बढ़त देखी गई है। सोने के दाम में 1,900 रुपए से अधिक का इजाफा हुआ। वहीं, चांदी का भाव 800 रुपए से अधिक बढ़ गया है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट के 10 ग्राम सोने की कीमत 99,058 रुपए है, जबकि एक हफ्ते पहले इसी दिन यह 97,145 रुपए थी, जो कि सोने की कीमत में 1,913 रुपए की बढ़त को दर्शाता है।
22 कैरेट सोने का दाम बढ़कर 90,737 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 88,985 रुपए था22 कैरेट सोने का दाम बढ़कर 90,737 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 88,985 रुपए था। वहीं, 18 कैरेट सोने की कीमत 72,859 रुपए प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 74,294 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है। वहीं, समीक्षा अवधि में चांदी की कीमत 882 रुपए बढ़कर 1,06,167 रुपए प्रति किलो हो गई है, जो कि पहले 1,05,285 रुपए प्रति किलो थी। चांदी अपने उच्चतम स्तर के करीब बनी हुई है। 10 जून को चांदी ने 1,07,000 रुपए प्रति किलो का ऑल-टाइम हाई बनाया था।हाल के दिनों में ऐसे कई वैश्विक घटनाक्रम हुए हैं, जिन्होंने सोने और चांदी की कीमतों को बढ़ाने में मदद की हैहाल के दिनों में ऐसे कई वैश्विक घटनाक्रम हुए हैं, जिन्होंने सोने और चांदी की कीमतों को बढ़ाने में मदद की है। इनमें ईरान-इजरायल के बीच बढ़ता संघर्ष और रूस और यूक्रेन के बीच लगातार तनाव शामिल हैं। वैश्विक अनिश्चितता के समय सुरक्षित माने जाने के कारण दुनिया भर में सोने और चांदी की मांग बढ़ जाती है और मांग के मुकाबले सीमित आपूर्ति के कारण इनकी कीमतों में इजाफा होता है।1 जनवरी से अब तक 24 कैरेट के 10 ग्राम सोने का दाम 76,162 रुपए से 22,896 रुपए या 30.06 प्रतिशत बढ़कर 99,058 रुपए पर पहुंच गया है1 जनवरी से अब तक 24 कैरेट के 10 ग्राम सोने का दाम 76,162 रुपए से 22,896 रुपए या 30.06 प्रतिशत बढ़कर 99,058 रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी का भाव भी 86,017 रुपए प्रति किलो से 20,150 रुपए या 23.42 प्रतिशत बढ़कर 1,06,167 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है।( -
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, भारत की दो प्रमुख एयरलाइनों, एयर इंडिया और इंडिगो, ने ईरान के एयरस्पेस के बंद होने के कारण उड़ानों में देरी और रूट बदले जाने को लेकर पब्लिक एडवाइजरी जारी की है।
एयर इंडिया ने शनिवार को कहा कि कंपनी ने ईरान का एयरस्पेस बंद होने के कारण कई उड़ानों के मार्ग में परिवर्तन किया है। एयरलाइन ने घोषणा की कि यात्रियों और क्रू मेंबर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उसकी कुछ उड़ानें अब लंबे, वैकल्पिक मार्गों पर संचालित हो रही हैं।एयर इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक आधिकारिक अपडेट साझा किया, जिसमें कहा गया, “ईरान और मध्य पूर्व के कुछ हिस्सों में उभरती स्थिति के कारण हवाई क्षेत्र के बंद होने और हमारे यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए हमारी कुछ उड़ानें वैकल्पिक विस्तारित मार्गों पर चल रही हैं। हम हवाई क्षेत्र के बंद होने के कारण अपने यात्रियों को होने वाली किसी भी असुविधा को कम करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। हम दोहराना चाहेंगे कि एयर इंडिया में, हमारे यात्रियों और क्रू मेंबर्स की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।”यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब क्षेत्रीय तनाव की एक सीरीज के बाद ईरान और आस-पास के क्षेत्रों में हवाई क्षेत्र बंद है।इस स्थिति ने कई अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्गों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया है जो आमतौर पर ईरान से गुजरते हैं। भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने भी एक्स के माध्यम से एक बयान जारी कर यात्रियों को संभावित व्यवधानों के बारे में चेतावनी दी है।एयरलाइन ने अपनी एडवाइजरी में कहा, “ईरान और उसके आस-पास के इलाकों में हवाई क्षेत्र अभी भी उपलब्ध नहीं है। कुछ उड़ान मार्गों को एडजस्ट करने की आवश्यकता हो सकती है, जिससे यात्रा की अवधि बढ़ सकती है या देरी हो सकती है।”वहीं, इंडिगो ने सभी यात्रियों को सलाह दी है कि वे हवाई अड्डे पर जाने से पहले कंपनी की वेबसाइट या मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से अपने फ्लाइट स्टेटस की जांच करें।एयरलाइन ने आश्वासन दिया कि उसकी कस्टमर सर्विस टीम इन देरी से प्रभावित यात्रियों की सक्रिय रूप से सहायता कर रही है।दोनों एयरलाइनें वैकल्पिक हवाई गलियारों के माध्यम से प्रभावित उड़ानों को फिर से रूट करने के लिए काम कर रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप उड़ान का समय लंबा हो सकता है। परिणामस्वरूप, यूरोप, खाड़ी और मध्य एशिया से आने-जाने वाली कई सेवाएं 30 मिनट से लेकर कई घंटों तक की देरी का सामना कर रही हैं। - नयी दिल्ली. सरकार ने हरियाणा, गुजरात और उत्तर प्रदेश से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 54,166 टन मूंग और उत्तर प्रदेश से 50,750 टन मूंगफली की खरीद को मंजूरी दी है। वर्ष 2025-26 की ग्रीष्मकालीन फसलों की खरीद केंद्रीय मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत की जाएगी, जो बाजार दरें एमएसपी से नीचे आने पर सक्रिय होती है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए पीएसएस के तहत फसलों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी। मंत्री ने आंध्र प्रदेश में खरीद अवधि को 26 जून तक 15 दिन के लिए बढ़ाने को भी मंजूरी दी। सरकार ने किसानों को प्रोत्साहित करने, घरेलू दलहन उत्पादन को बढ़ाने और आयात निर्भरता को कम करने के लिए पीएसएस के तहत वर्ष 2024-25 में तुअर, उड़द और मसूर के 100 प्रतिशत उत्पादन की खरीद की अनुमति दी है। इस पहल को 2028-29 तक चार साल के लिए बढ़ा दिया गया है। पीएसएस के तहत खरीद केंद्रीय नोडल एजेंसियों भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ) द्वारा की जाती है।
- नयी दिल्ली. भारत का वनस्पति तेल आयात मई में लगातार छठे महीने भी घटकर 11.87 लाख टन रह गया है। यह पिछले साल मई में हुए आयात से 22.36 प्रतिशत कम है। उद्योग निकाय सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) ने बृहस्पतिवार यह जानकारी दी। इसके साथ ही, एसईए ने कहा कि हालिया आयात शुल्क में कटौती से आयात की कुल मात्रा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। खाद्य और अखाद्य दोनों तरह के तेलों सहित कुल वनस्पति तेल आयात एक साल पहले की समान अवधि में 15.29 लाख टन का हुआ था। तेल वर्ष 2024-25 (नवंबर-अक्टूबर) के पहले सात महीनों के दौरान कुल वनस्पति तेल आयात एक साल पहले की इसी अवधि के 86.78 लाख टन से घटकर 78.84 लाख टन रह गया। 30 मई को सरकार ने पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी के अपरिष्कृत (कच्चे) तेलों पर मूल आयात शुल्क को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया था, जिससे कुल आयात शुल्क 27.5 प्रतिशत से घटकर 16.5 प्रतिशत रह गया है। एसईए ने कहा, ‘‘इस कदम से खाद्य तेल आयात की कुल मात्रा पर कोई असर नहीं पड़ेगा और इससे खाद्य तेल की कीमतों पर कोई दबाव पड़ने की संभावना नहीं है।'' इसने कहा कि कच्चे तेल पर आयात शुल्क कम करने के सरकार के इस कदम से रिफाइंड पाम तेल (पामोलीन) के आयात में कमी आएगी और मांग वापस कच्चे पाम तेल की ओर बढ़ेगी, जिससे घरेलू रिफाइनिंग क्षेत्र में नई जान आएगी। इसके विपरीत, कच्चे तेल पर शुल्क में कमी से घरेलू कीमतों को कम करने में मदद मिलेगी, जिससे उपभोक्ताओं को लाभ होगा। एसोसिएशन ने सदस्यों से शुल्क कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की अपील की है। एसईए के आंकड़ों के अनुसार, मई में पाम तेल का आयात 22.32 प्रतिशत घटकर 5.92 लाख टन रह गया, जो एक साल पहले 7.63 लाख टन था, जबकि कच्चे पाम तेल की खेप 5.03 प्रतिशत घटकर 5.05 लाख टन रह गई। नरम तेलों (सॉफ्ट आयल) में सोयाबीन तेल का आयात 23 प्रतिशत घटकर 3.98 लाख टन रह गया, जबकि सूरजमुखी तेल का आयात 55.30 प्रतिशत घटकर 1.83 लाख टन रहा। पिछले सात माह में पाम तेल की हिस्सेदारी 58 प्रतिशत से घटकर 42 प्रतिशत रह गई, जबकि नरम तेलों की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत से बढ़कर 57 प्रतिशत हो गई। दुनिया के सबसे बड़े खाद्य तेल उपभोक्ता और आयातक देश, भारत के पास एक जून तक 13.33 लाख टन खाद्य तेल का स्टॉक था। एसईए ने कहा, ‘‘नेपाल से हर महीने लगभग 60,000 से 70,000 टन परिष्कृत (रिफाइंड) खाद्य तेलों का आयात भारत के समग्र आयात और इस तरह स्टॉक की स्थिति को प्रभावित करता है।'' इंडोनेशिया और मलेशिया भारत के प्रमुख पाम तेल आपूर्तिकर्ता हैं, जबकि अर्जेंटीना, ब्राजील और रूस सोयाबीन तेल की आपूर्ति करते हैं। रूस और यूक्रेन सूरजमुखी तेल के मुख्य आपूर्तिकर्ता हैं।
- मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक ने केवाईसी अद्यतन के मामले में ग्राहकों को राहत देते हुए कदम उठाया है। इसके तहत बैंकों और आरबीआई के दायरे में आने अन्य वित्तीय संस्थानों से अपने ग्राहकों को केवाईसी के समय-समय पर अद्यतन करने के लिए उपयुक्त तरीके से नोटिस देने को कहा गया है। आरबीआई ने बृहस्पतिवार एक परिपत्र में कहा कि उसने अपने ग्राहक को जानें (केवाईसी) के समय-समय पर अद्यतन में बड़ी संख्या में लंबित मामलों को देखा है। इसमें प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी)/इलेक्ट्रॉनिक लाभ अंतरण (ईबीटी) के तहत राशि प्राप्त के लिए खोले गए खाते और प्रधानमंत्री जनधन योजना (पीएमजेडीवाई) के तहत खोले गए खाते शामिल हैं। यह कदम ग्राहकों की सुविधा के लिए प्रक्रिया को और आसान बनाने के लिए उठाया गया है। इसके तहत केवाईसी के समय-समय पर अद्यतन के संबंध में निर्देशों को संशोधित किया गया है। इसके जरिये बैंक प्रतिनिधियों को केवाईसी अद्यतन करने की प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दी गयी है। इस संदर्भ में, केंद्रीय बैंक ने बृहस्पतिवार को अपने ग्राहक को जानो (संशोधन) निर्देश, 2025 जारी किये। नये निर्देशों के अनुसार, आरबीआई के दायरे में आने वाली इकाइयां (आरई) अपने ग्राहकों को उनके केवाईसी को अद्यतन करने के लिए पहले से सूचित करेंगी। इसमें कहा गया, ‘‘केवाईसी को निश्चित अंतराल पर अद्यतन की नियत तारीख से पहले, बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान अपने ग्राहकों को केवाईसी को अद्यतन करने की आवश्यकता का अनुपालन करने के लिए उपलब्ध संचार विकल्पों/चैनलों के माध्यम से उचित अंतराल पर कम से कम तीन अग्रिम सूचनाएं देंगे। इसमें कम से कम एक सूचना पत्र के जरिये दी जाएगी।'' नियत तिथि के बाद, बैंक ऐसे ग्राहकों को उचित अंतराल पर कम से कम तीन अनुस्मरण पत्र देंगे। इसमें कम से कम एक पत्र के जरिये देना होगा। यह उन ग्राहकों के लिए होगा जिन्होंने अग्रिम सूचना के बावजूद अभी भी केवाईसी से जुड़ी आवश्यकताओं का अनुपालन नहीं किया है। आरबीआई ने कहा कि सूचना/अनुस्मरण पत्र में, अन्य बातों के साथ-साथ, केवाईसी को अद्यतन करने के लिए आसानी से समझ में आने वाले निर्देश देने होंगे। इसमें मदद के बारे में जानकारी के साथ समय पर केवाईसी अद्यतन करने में विफल रहने पर उसके परिणाम की भी जानकारी देनी होगी। ग्राहकों से इस तरह से जारी किये गये अग्रिम सूचना/अनुस्मरण पत्र के बारे में पूरी जानकारी बैंक ऑडिट मकसद से अपने पास रखेगा। आरबीआई ने इस व्यवस्था को एक जनवरी, 2026 तक लागू करने को कहा है। केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि केवाईसी जानकारी में कोई बदलाव नहीं होने या केवल पते के विवरण में परिवर्तन होने की स्थिति में ग्राहक से स्व-घोषणा अधिकृत बैंक प्रतिनिधि (बीसी) के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है। आरबीआई ने कहा कि किसी व्यक्तिगत ग्राहक के संबंध में जिसे कम जोखिम के रूप में वर्गीकृत किया गया है, बैंक और एनबीएफसी सभी लेनदेन की अनुमति देंगे और केवाईसी अद्यतन एक वर्ष के भीतर या 30 जून, 2026 तक, जो भी बाद में हो, सुनिश्चित करेंगे। इसके अलावा, आरबीआई ने केवाईसी अद्यतन करने को लेकर बैंकों को शिविर आयोजित करने और गहन अभियान शुरू करने की भी सलाह दी है। इसके साथ केंद्रीय बैंक ने निष्क्रिय खातों और दावा न की गई जमाओं से संबंधित संशोधन भी किए हैं।
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नई दिल्ली। पश्चिम एशियाई बाजारों विशेष रूप से ईरान और इराक से मजबूत मांग के कारण भारतीय परंपरागत चाय की कीमतों में वृद्धि हुई है। लेकिन अब इजरायल-ईरान के बीच छिड़े संघर्ष से तनाव बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे इस क्षेत्र में चाय की आपूर्ति में व्यवधान पैदा होने की आशंका है।इंडियन टी एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (आईटीईए) के अध्यक्ष अंशुमान कनोडिया ने कहा कि चाय लेकर कार्गो पहले ही रवाना हो चुके हैं, कुछ अभी लदान के इंतजार में हैं। इसलिए मौजूदा और भविष्य में मिलने वाले ऑर्डर को लेकर चिंता छायी है। उन्होंने कहा, ‘संघर्ष की स्थिति के साथ-साथ अपने निर्यात के बारे में चिंतित हैं। एसोसिएशन के सदस्य अपने-अपने खरीदारों के संपर्क में हैं। इस समय हम हालात को भांपने की कोशिश कर रहे हैं।’
उत्पादक और निर्यातक दोनों ही चाय कारोबार में अस्थायी झटके की आशंका जता रहे हैं। इंडियन टी एसोसिएशन (आईटीए) के अध्यक्ष हेमंत बांगड़ ने कहा कि ईरान भारतीय चाय के सबसे बड़े बाजारों में से एक है। ‘अभी संघर्ष की शुरुआत है, लेकिन व्यापार में अस्थायी व्यवधान उत्पन्न हो सकता है।’टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (टीएआई) के अध्यक्ष संदीप सिंघानिया ने कहा कि जब तक तनाव कम नहीं होता, हालात ऐसे ही बने रहेंगे। ‘परंपरागत चाय का निर्यात ईरान से आने वाली मांग पर निर्भर है। यदि वहां मांग कम होती है तो विशेष रूप से परंपरागत चाय के निर्यात को झटका लगेगा। हम स्थिति के शांत होने का इंतजार कर रहे हैं।’ईरान का महत्त्वपरंपरागत रूप से ईरान भारतीय चाय के शीर्ष बाजारों में से एक रहा है। कनोडिया कहते हैं कि आमतौर पर ईरान को लगभग 3 करोड़ किलोग्राम चाय का निर्यात किया जाता है। वर्ष 2022 में ईरान को चाय का निर्यात 2.22 करोड़ किलोग्राम था। लेकिन 2023 में इसमें गिरावट आई और यह केवल 59.2 लाख किलोग्राम तक गिर गया, क्योंकि ईरान ने भारतीय चाय के लिए अनुबंधों का पंजीकरण बंद कर दिया था। इसके बाद वर्ष 2024 में निर्यात फिर बढ़कर 92.4 लाख किलोग्राम पहुंच गया। हालांकि, कनोडिया ने बताया कि ईरान को प्रत्यक्ष निर्यात के आंकड़े बाजार के आकार का सही अंदाजा नहीं देते हैं। क्योंकि वहां संयुक्त अरब अमीरात के माध्यम से भी भारतीय चाय भेजी जाती है। इस समय भारतीय चाय की मांग बहुत ज्यादा है। दुनिया का सबसे बड़ा चाय आपूर्तिकर्ता श्रीलंका अभी भी अपनी क्षमता से कम उत्पादन कर रहा है। वर्ष 2024 में भारत ने 128.47 करोड़ किलोग्राम चाय के कुल उत्पादन में से 11.86 करोड़ किलोग्राम परंपरागत चाय थी।कीमतों में उछालमजबूत मांग के कारण परंपरागत चाय की कीमतों में उछाल आई है। कोलकाता नीलामी में सेल 17 से सेल 24 के लिए परंपरागत पत्ती की औसत कीमत 317.32 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जबकि पिछले वर्ष यह 293.69 रुपये रही। इसी तरह कोलकाता नीलामी में सभी किस्मों की चाय के लिए औसत कीमत 275.34 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जबकि पिछले वर्ष यह 265.08 रुपये थी। एम के शाह एक्सपोर्ट्स के अध्यक्ष हिमांशु शाह ने कहा कि श्रीलंका अभी भी लगभग 35 करोड़ किलोग्राम की अपनी अब तक की सबसे ऊंचे फसल उत्पादन से बहुत दूर है। उसके फिलहाल इस स्तर तक पहुंचने की कोई संभावना नहीं है।शाह ने कहा, ‘भारतीय उत्पादक इस अवसर का लाभ उठाने को आगे बढ़े हैं। असम सरकार के प्रोत्साहन देने के साथ परंपरागत चाय का उत्पादन बढ़ रहा है। इराक, तुर्किये, सीरिया जैसे मुख्य खरीदार पहले जहां श्रीलंकाई चाय खरीदते थे, वे अब भारतीय चाय की ओर लौट रहे हैं।’ एमके शाह देश में परंपरागत चाय के सबसे बड़े उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है। इक्रा के उपाध्यक्ष सुमित झुनझुनवाला ने कहा, ‘श्रीलंका में उत्पादन कमोबेश स्थिर रहा है और यह अपने सामान्य स्तर पर वापस नहीं गया है। यह भारतीय कंपनियों के लिए बड़ा अवसर है।’ -
नई दिल्ली। सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अनंत नारायण ने शुक्रवार को कुछ परिसंपत्तियों के मूल्यांकन के तरीकों पर चिंता जताई और मुख्य वित्त अधिकारियों से ज्यादा जवाबदेह वनने को कहा। ईटीसीएफओ नेक्स्टजेन समिट में नारायण ने भाव देखकर खरीदने, हितों के टकराव और लेखा परिपाटियों के चलन जैसे उन मसलों का जिक्र किया जो निवेशकों को गुमराह कर सकते हैं।
क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की अतीत की चुनौतियों के साथ तुलना करते हुए नारायण ने सुझाव दिया कि मूल्यांकन करने वालों को प्रमुख धारणाओं, संवेदनशीलता दायरों और ट्रैक रिकॉर्ड का खुलासा करना चाहिए और अगर इनमें ज्यादा परिवर्तन हो तो जवाबदेही का सामना करना चाहिए। उन्होंने हितों के संभावित टकराव की ओर इशारा किया क्योंकि मूल्यांकनकर्ताओं को अक्सर उन संस्थाओं द्वारा नियुक्त और भुगतान किया जाता है, जिनका वे मूल्यांकन करते हैं, लिहाजा पक्षपातपूर्ण मूल्यांकन हो सकता है।मूल्यांकनकर्ताओं के बीच अलग-अलग अवधारणाओं के कारण परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में व्यापक भिन्नताएं पैदा हुई हैं और समय के साथ मूल्यांकन में नाटकीय परिवर्तन होने पर जवाबदेही बहुत कम रह गई है।नारायण ने वित्तीय आंकड़ों में भरोसा मजबूत करने के लिए ऑडिट समितियों और लेखा परीक्षकों के साथ घनिष्ठ सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए वित्तीय परिणामों और सालाना रिपोर्टों के बीच मौजूदा 70-140 दिन के अंतराल को कम करने का सुझाव दिया।नारायण ने कहा, भरोसा आधार है, पूंजी निर्माण इंजन है और नियमन सुरक्षा कवच है। मुख्य वित्त अधिकारी इसके संचालक हैं। उन्होंने उनसे अनुपालन से आगे बढ़ने और लेखांकन मानकों की भावना को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने भेदिया कारोबार और रकम की हेराफेरी जैसी परिपाटियों के खिलाफ चेतावनी दी। -
नई दिल्ली। केन्द्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी ने कहा है कि देश में अगले महीनों के लिए पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध है। उन्होंने पेट्रोलियम सचिव और ऊर्जा क्षेत्र में सार्वजनिक उपक्रमों के प्रमुखों के साथ समीक्षा बैठक के बाद सोशल मीडिया पोस्ट में यह जानकारी दी। ईंधन आपूर्ति के बारे में दी गई यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ईरान पर इस्राइल पर हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में कल काफी तेजी आई। श्री पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की ऊर्जा नीति उपलब्धता, वहनीयता और स्थिरता की सफलता पर आधारित है। भारत सालाना 150 अरब अमरीकी डॉलर का तेल आयात करता है और इस आयात से भारत के कच्चे तेल की लगभग अस्सी प्रतिशत जरूरत पूरी होती है।
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नयी दिल्ली. फलों एवं सब्जियों की कीमतों में नरमी से मई में खुदरा मुद्रास्फीति छह साल के निचले स्तर 2.82 प्रतिशत पर आ गई। यह लगातार चौथा महीना है जब खुदरा मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक के चार प्रतिशत के औसत लक्ष्य से कम रही है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में 3.16 प्रतिशत और मई, 2024 में 4.8 प्रतिशत थी। खुदरा मुद्रास्फीति का पिछला निचला स्तर फरवरी, 2019 में रहा था जब यह 2.57 प्रतिशत थी।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की तरफ से बृहस्पतिवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में खाद्य मुद्रास्फीति 0.99 प्रतिशत रही जो एक साल पहले इसी महीने में 8.69 प्रतिशत थी। मई, 2025 की खाद्य मुद्रास्फीति का यह आंकड़ा अक्टूबर, 2021 के बाद सबसे कम है।
एनएसओ ने एक बयान में कहा, ‘‘मई, 2025 के महीने में मुख्य मुद्रास्फीति और खाद्य मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय गिरावट मुख्य रूप से दालों एवं उत्पादों, सब्जियों, फलों, अनाज एवं उत्पादों, घरेलू सामान एवं सेवाओं, चीनी एवं मिठाई और अंडे की कीमतों में नरमी और अनुकूल आधार प्रभाव के कारण है।'' आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मई के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में मुद्रास्फीति 2.59 प्रतिशत थी, जबकि शहरी भारत में यह 3.07 प्रतिशत रही। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सबसे अधिक मुद्रास्फीति केरल में 6.46 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके बाद पंजाब (5.21 प्रतिशत), जम्मू-कश्मीर (4.55 प्रतिशत), हरियाणा (3.67 प्रतिशत) और उत्तराखंड (3.47 प्रतिशत) का स्थान रहा। वहीं देशभर में सबसे कम खुदरा महंगाई दर तेलंगाना में 0.55 प्रतिशत रही।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा मुद्रास्फीति 3.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। इसने पहली तिमाही में 2.9 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 3.4 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 3.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 4.4 प्रतिशत खुदरा मुद्रास्फीति रहने का अनुमान जताया है। सरकार ने आरबीआई को यह दायित्व दिया हुआ है कि खुदरा मुद्रास्फीति को दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर सीमित रखा जाए। रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने इन आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पिछले महीने खुदरा मुद्रास्फीति और भी कम होकर 75 महीने के निचले स्तर 2.8 प्रतिशत पर आ गई जिसमें खाद्य एवं पेय उत्पादों की अहम भूमिका रही। नायर ने कहा कि यह आंकड़ा रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के नीतिगत दरों में कटौती के निर्णय को मान्यता देता है। एमपीसी ने फरवरी से लेकर जून की समीक्षा तक रेपो दर में कुल एक प्रतिशत की कटौती की है। नायर ने कहा, ‘‘फिलहाल हमें उम्मीद है कि अगस्त, 2025 की नीतिगत समीक्षा में ब्याज दरें अपरिवर्तित रहेंगी। फिर भी हम अक्टूबर, 2025 में 0.25 प्रतिशत की एक और कटौती की संभावना से इनकार नहीं कर रहे हैं।'' एनएसओ सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को समाहित करने वाले 1,114 शहरी बाजारों और 1,181 गांवों से आंकड़े जुटाता है। - मुंबई। एअर इंडिया ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह यात्रियों और चालक दल के सदस्यों के परिजनों के लिए दिल्ली और मुंबई से अहमदाबाद तक दो राहत उड़ानें संचालित करेगी। एअर इंडिया के अनुसार, दिल्ली-अहमदाबाद राहत उड़ान आईएक्स -1555 12 जून को रवाना होगी, जबकि अहमदाबाद-दिल्ली उड़ान आईएक्स 1556 13 जून को दोपहर 01.10 बजे रवाना होगी। विमानन कंपनी ने कहा कि एआई 1402 मुंबई-अहमदाबाद उड़ान 12 जून को रात 11 बजे रवाना होगी, जबकि अहमदाबाद-मुंबई उड़ान एआई 1409 13 जून को दोपहर 01.15 बजे रवाना होगी। एयरलाइन ने कहा कि दिल्ली और मुंबई में यात्रियों और कर्मचारियों के परिजन जो इन उड़ानों पर यात्रा करना चाहते हैं, वे एयरलाइन की हॉटलाइन 1800 5691 444 पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा, एअर इंडिया ने बताया कि जो लोग अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों से आ रहे हैं और यात्रा करना चाहते हैं, वे एयरलाइन की दूसरी हॉटलाइन +91 8062779200 पर कॉल कर सकते हैं।
- मुंबई,। एअर इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक (एमडी) कैंपबेल विल्सन ने विमानन कंपनी के बोइंग 787-8 विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने पर बृहस्पतिवार को “गहरा दुख” जताया। उन्होंने कहा कि यह एअर इंडिया में सभी के लिए एक “मुश्किल दिन” है। लंदन के गैटविक जा रहा एअर इंडिया का विमान बृहस्पतिवार दोपहर अहमदाबाद हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद एक आवासीय इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में दो पायलट और चालक दल के 10 सदस्य सहित 242 लोग सवार थे। विल्सन ने एक वीडियो बयान में कहा कि विमानन कंपनी सभी आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रयासों पर प्राधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से काम कर रही है। उन्होंने कहा, “सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण रूप से मैं इस दुर्घटना पर गहरा दुख जाहिर करना चाहता हूं। यह भारत में हम सभी के लिए एक कठिन दिन है। और अब हमारा पूरा ध्यान हमारे यात्रियों, चालक दल के सदस्यों, उनके परिजनों और प्रियजनों की जरूरतों पर केंद्रित है।” विल्सन ने कहा कि इस समय लोगों के मन में कई सवाल होंगे, लेकिन वह सभी के जवाब नहीं दे पाएंगे।उन्होंने कहा, “लेकिन इस समय हमारे पास जो जानकारी है, मैं उसे जरूर साझा करना चाहता हूं। यहां, लंदन-गैटविक के लिए बोइंग 787-8 विमान से संचालित भारत की उड़ान संख्या एआई-171 उड़ान भरने के कुछ मिनट बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई।” विमान सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद भीड़भाड़ वाले रिहायशी इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें 169 भारतीय नागरिक, 53 ब्रिटिश नागरिक, सात पुर्तगाली नागरिक और एक कनाडाई नागरिक सवार था। विल्सन ने कहा, “हम जानते हैं कि बहुत से लोग अपने प्रियजनों की सलामती को लेकर चिंतित हैं। हमने एक विशेष हेल्पलाइन स्थापित की है, जिस पर परिजन और दोस्त हमसे संपर्क कर सकते हैं।” उन्होंने कहा कि फिलहाल सभी टीम यात्रियों, चालक दल के सदस्यों और उनके परिजनों के साथ-साथ जांचकर्ताओं की सहायता के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही हैं।
- नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक ने कर्ज पर लगने वाले ब्याज दर में 0.5 प्रतिशत की कटौती की है। भारतीय रिजर्व बैंक के प्रमुख नीतिगत दर रेपो में कटौती के बाद बैंकों ने यह कदम उठाया है। यूनियन बैंक ने बयान में कहा कि बाह्य मानक आधारित ब्याज दर (ईबीएलआर) और रेपो आधारित ब्याज दर (आरएलएलआर) में 0.5 प्रतिशत की कटौती की गयी है। इस कटौती के साथ यूनियन बैंक ने हाल में आरबीआई के रेपो दर में कटौती के अनुरूप ईबीएलआर और आरएलएलआर से जुड़े कर्ज के लिए ब्याज दर में कमी कर दी है। इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) ने कहा कि बैंक की संपत्ति देनदारी प्रबंधन समिति (एएलसीओ) की मंगलवार को हुई बैठक में रेपो आधारित कर्ज पर देय ब्याज में 0.5 प्रतिशत की कटौती का निर्णय किया गया है। इस कटौती के बाद आरएलएलआर कम होकर 8.35 प्रतिशत हो गयी है जो पहले 8.85 प्रतिशत थी। नयी दर बुधवार से लागू होगी। केनरा बैंक ने भी रेपो आधारित ब्याज दर में 0.50 प्रतिशत की कटौती की घोषणा की है।बैंक के बयान के अनुसार, इस कटौती से रेपो आधारित ब्याज दर 8.75 प्रतिशत से घटकर 8.25 प्रतिशत पर आ गयी है। नयी दर बुधवार से लागू होगी। बैंकों के इस कदम से रेपो आधारित ब्याज से जुड़े कर्ज सस्ते होंगे। इससे आवास, वाहन, व्यक्तिगत कर्ज लेने वाले नये और मौजूदा खुदरा ग्राहकों के अलावा एमएसएमई कर्जदारों को लाभ होगा। उल्लेखनीय है कि आरबीआई ने पिछले सप्ताह प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 0.5 प्रतिशत घटाकर 5.5 प्रतिशत कर दिया था। साथ ही नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) एक प्रतिशत कम कर तीन प्रतिशत करने की घोषणा की।
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नयी दिल्ली. अदाणी समूह ने मंगलवार को कहा कि उसकी सीमेंट कंपनियों ने जम्मू-कश्मीर के चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे मेहराब रेल पुल के निर्माण में सीमेंट की प्रमुख आपूर्तिकर्ता रही है। अदाणी की सीमेंट कंपनियों ने कुल 65,000 टन सीमेंट की आपूर्ति की है। पुल के लिए आपूर्ति किया गयेा सीमेंट ‘आर्डिनरी पोर्टलैंड सीमेंट' (ओपीसी) 43 ग्रेड का था। यह अपनी उच्च शक्ति, स्थायित्व और बेहतर गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। इस कारण इसे बड़े पैमाने के बुनियादी ढांचे के लिए आदर्श माना जाता है। समूह ने कहा कि अदाणी सीमेंट ने चिनाब पुल के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अदाणी सीमेंट में अम्बुजा सीमेंट्स और एसीसी शामिल हैं। अदाणी समूह के सीमेंट कारोबार के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विनोद बहेटी ने कहा, ‘‘हमारे लिए एक ऐसी परियोजना का हिस्सा बनना बहुत गर्व की बात है जो न केवल इंजीनियरिंग सीमाओं को फिर से परिभाषित करती है बल्कि राष्ट्रीय एकीकरण में भी योगदान देती है।'' उन्होंने कहा, ‘‘अदाणी सीमेंट में हम मानते हैं कि सीमेंट का हर बैग देश की प्रगति का भार वहन करता है। चिनाब पुल इस बात का एक शानदार उदाहरण है कि किस तरह से गुणवत्ता, निरंतरता और समय पर डिलिवरी के प्रति हमारी प्रतिबद्धता भारत की बुनियादी ढांचे की कहानी का समर्थन करती है।'' वास्तुकला का अद्भुत नमूना चिनाब रेलवे पुल नदी तल से 359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और पेरिस के प्रतिष्ठित एफिल टॉवर से 35 मीटर ऊंचा है। यह 1,315 मीटर लंबा इस्पात का मेहराब वाला (आर्च ब्रिज) पुल है जिसे भूकंपीय और वायु संबंधी परिस्थितियों को झेल सकने के अनुकूल बनाया गया है।
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नयी दिल्ली. मजबूत वैश्विक रुख के अनुरूप खुदरा विक्रेताओं एवं स्टाकिस्टों की ताजा लिवाली के कारण बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने की कीमत 820 रुपये बढ़कर 98,490 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गयी। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने यह जानकारी दी। 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 750 रुपये बढ़कर 98,000 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गई। हालांकि, बुधवार को चांदी की कीमत 1,07,100 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) पर स्थिर बनी रही।
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 12.09 डॉलर प्रति औंस या 0.36 प्रतिशत बढ़कर 3,334.69 डॉलर प्रति औंस हो गया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक - जिंस सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘शुल्क से जुड़ी अनिश्चितता के बारे में व्यापारियों की चिंता के कारण सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने के कारण सोने में तेजी आई।'' उन्होंने कहा, ‘‘यह नई अनिश्चितता संघीय अपील अदालत के फैसले के बाद आई है, जिसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को वैश्विक शुल्क को जारी रखने की अनुमति दी है।'' गांधी ने यह भी बताया कि इन चिंताओं ने अमेरिका और चीन के बीच सकारात्मक व्यापार वार्ता से उपजे कुछ आशावाद को फीका कर दिया है। लंदन में अपनी दो दिवसीय चर्चा के दौरान, दोनों पक्ष व्यापार तनाव को कम करने की योजना पर सहमत हुए।
जिंस बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध से उपजे भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ रही है। हालांकि, वैश्विक बाजारों में हाजिर चांदी 0.5 प्रतिशत गिरकर 36.34 डॉलर प्रति औंस रह गई।
कोटक सिक्योरिटीज की एवीपी-जिंस शोध कायनात चैनवाला ने कहा कि बाजार प्रतिभागियों का ध्यान मौद्रिक नीति दृष्टिकोण के बारे में अधिक संकेत देने वाले आगामी अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आंकड़ों पर जाएगा, जो दिन के उत्तरार्द्ध में जारी किए जाएंगे। - नयी दिल्ली. जीवन बीमा कंपनियों ने चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में नए व्यवसाय से प्रीमियम संग्रह में 10.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। जीवन बीमा परिषद ने सोमवार को जारी आंकड़ों में बताया कि मई 2025 में नए व्यवसाय से प्रीमियम संग्रह में 12.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। नए व्यवसाय से प्रीमियम आय मई 2025 में बढ़कर 30,463 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले इसी महीने में 27,034 करोड़ रुपये थी। आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2025-26 के पहले दो महीनों में संग्रह सालाना आधार पर 47,293 करोड़ रुपये से बढ़कर 52,427 करोड़ रुपये हो गया। इस मजबूत प्रदर्शन का श्रेय जीवन बीमा कंपनियों को दिया गया, जिन्होंने पहली बार जीवन बीमा लेने वालों को प्रोत्साहित किया। मई 2025 में संयुक्त व्यक्तिगत प्रीमियम संग्रह में 3.35 प्रतिशत की वृद्धि हुई। परिषद ने बताया कि जीवन बीमा उद्योग में व्यक्तिगत एकल प्रीमियम में सालाना आधार पर 5.21 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह मई 2025 में 3,525 करोड़ रुपये रहा। देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी एलआईसी का नए व्यवसाय से प्रीमियम मई 2025 में 10.27 प्रतिशत बढ़कर 18,405.04 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले इसी महीने में 16,690.39 करोड़ रुपये था।
- बर्न. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि सरकार भारत में बड़ी घरेलू लेखा कंपनियां बनाने की कोशिश कर रही है और देश में जल्द ही अपनी खुद की ‘बिग फोर' कंपनियां होंगी। वर्तमान में दुनिया की 'बिग फोर' पेशेवर सेवा कंपनियां डेलॉयट, पीडब्ल्यूसी या प्राइसवाटरहाउस कूपर्स, अर्न्स्ट एंड यंग (ईवाई) और केपीएमजी हैं। ये चारों विदेशी कंपनियां भारत के लेखा परीक्षण और परामर्श क्षेत्र में हावी हैं। गोयल ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘अब हम अपनी खुद की ‘बिग फोर' कंपनियां बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पहले नियम (दोस्ताना नहीं) थे...आप जानते हैं, हम विलय नहीं कर सकते थे। हमारी सोच भी अलग थी। अब धीरे-धीरे लोग समझ रहे हैं...भारत में बहुत जल्द हमारी अपनी बिग फोर कंपनियां होंगी...।'' गोयल इस समय यूरोपीय देशों की आधिकारिक यात्रा पर हैं।
- नयी दिल्ली. घरेलू वाहन विनिर्माता टाटा मोटर्स ने अगले चार वित्त वर्षों में 30 उत्पाद गतिविधियों पर 33,000 करोड़ रुपये से लेकर 35,000 करोड़ रुपये तक का निवेश करने की योजना बनाई है। इस दौरान सात नए मॉडल भी पेश करने की तैयारी है। टाटा समूह की कंपनी अपने यात्री वाहन पोर्टफोलियो में उन्नत प्रौद्योगिकी और इंजन प्रणाली लाने पर भी निवेश करने की योजना बना रही है। टाटा मोटर्स वित्त वर्ष 2026-27 तक 16 प्रतिशत (ईवी सहित) और अगले दो-तीन वर्षों में लगभग 18-20 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी की उम्मीद कर रही है। कंपनी ने विश्लेषकों के समक्ष एक प्रस्तुति में उम्मीद जताई कि घरेलू यात्री वाहन उद्योग वर्ष 2030 तक सालाना 60 लाख इकाई तक बढ़ जाएगा। कंपनी ने कहा, ‘‘हम वित्त वर्ष 2029-30 तक अपने पोर्टफोलियो को मजबूत करेंगे। इसमें सात नए उत्पाद और 23 उत्पादों के नए संस्करण शामिल होंगे।'' टाटा मोटर्स ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 से लेकर 2029-30 के दौरान 33,000 करोड़ रुपये से लेकर 35,000 करोड़ रुपये तक का पूंजीगत व्यय किया जाएगा। इसका इस्तेमाल अभिनव उत्पादों, सॉफ्टवेयर-संचालित वाहनों (एसडीवी), उन्नत प्रौद्योगिकियों और इंजन प्रणाली पर किया जाएगा। कंपनी ने कहा कि यात्री वाहन खंड में वह नए और विस्तृत पोर्टफोलियो के साथ मजबूत वृद्धि हासिल करना चाहती है। इसके लिए वह बिक्री बढ़ाने के साथ ही अपने सर्विस नेटवर्क पर भी विशेष ध्यान देगी। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) खंड में अपनी अग्रणी स्थिति को बनाए रखना भी कंपनी की प्राथमिकता में होगा। टाटा मोटर्स को उम्मीद है कि 2030 तक कुल यात्री वाहन बाजार में ईवी की हिस्सेदारी बढ़कर 30 प्रतिशत तक हो जाएगी।
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नयी दिल्ली. सरकार ने सोमवार को कहा कि उसने सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) स्थापित करने को माइक्रॉन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया और हुबली ड्यूरेबल गुड्स क्लस्टर (एकस ग्रुप) को मंजूरी दे दी है। वाणिज्य मंत्रालय ने सोमवार को बयान में इन प्रस्तावों को मंजूरी दिए जाने की जानकारी दी।
बयान के मुताबिक, माइक्रॉन 13,000 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश से गुजरात के साणंद में 37.64 हेक्टेयर क्षेत्र में अपना एसईजेड विकसित करेगी जबकि एकस ग्रुप 100 करोड़ रुपये के निवेश से इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के विनिर्माण के लिए कर्नाटक के धारवाड़ में 11.55 हेक्टेयर क्षेत्र में अपना एसईजेड स्थापित करेगी। सरकार ने सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एसईजेड गठन संबंधी कुछ नियमों को आसान बनाने के बाद यह निर्णय लिया है। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, ‘‘नियमों में बदलाव के बाद एसईजेड की स्वीकृति देने वाले बोर्ड ने माइक्रॉन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया और हुबली ड्यूरेबल गुड्स क्लस्टर प्राइवेट लिमिटेड (एकस ग्रुप) से मिले प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। इनमें सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के विनिर्माण के लिए एसईजेड के गठन का जिक्र है।'' इन क्षेत्रों में विनिर्माण के लिए अत्यधिक पूंजी की जरूरत, आयात पर निर्भरता और लाभदायक स्थिति में पहुंचने में लगने वाले लंबे समय को देखते हुए अग्रणी निवेश और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए नियम संशोधित किए गए हैं। संशोधित नियम के मुताबिक, सेमीकंडक्टर या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विनिर्माण के लिए एक एसईजेड स्थापित करने के लिए अब केवल 10 हेक्टेयर क्षेत्र की जरूरत पड़ेगी, जो पहले के 50 हेक्टेयर से कम है। इसके अलावा नि:शुल्क आधार पर प्राप्त और आपूर्ति की गई वस्तुओं का मूल्य भी अब शुद्ध विदेशी मुद्रा (एनएफई) की गणना में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, एसईजेड नियमों के नियम 18 में भी संशोधन किया गया है ताकि सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण विनिर्माण की एसईजेड इकाइयों को घरेलू शुल्क क्षेत्र में भी शुल्क भुगतान के बाद आपूर्ति की अनुमति मिल सके। बयान के मुताबिक, इन संशोधनों को वाणिज्य विभाग ने तीन जून, 2025 को अधिसूचित किया है। इससे देश में उच्च तकनीक विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा, सेमीकंडक्टर विनिर्माण पारिस्थितिकी के विकास को बढ़ावा मिलेगा और देश में उच्च कौशल वाली नौकरियां पैदा होंगी। -
नयी दिल्ली. देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने सोमवार को वित्त वर्ष 2024-25 के लिए सरकार को 8,076.84 करोड़ रुपये का लाभांश दिया। एसबीआई के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लाभांश का चेक दिया। इस मौके पर वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू और वित्त सचिव अजय सेठ भी थे। वित्त मंत्री के कार्यालय ने ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ''निर्मला सीतारमण को भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन सी एस शेट्टी से वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 8076.84 करोड़ रुपये का लाभांश चेक मिला।'' एसबीआई ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 15.90 रुपये प्रति शेयर का लाभांश घोषित किया था। बैंक ने पिछले साल सरकार को 6,959.29 करोड़ रुपये का लाभांश दिया था। एसबीआई ने 2024-25 के दौरान 70,901 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड शुद्ध लाभ कमाया, जबकि इससे पिछले साल यह आंकड़ा 61,077 करोड़ रुपये था।
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नयी दिल्ली. दिग्गज उद्योगपति और एरिन कैपिटल के चेयरमैन मोहनदास पई का कहना है कि सरकार के प्रतिबंधात्मक नियमों के कारण पर्याप्त घरेलू निवेश की कमी के चलते भारतीय स्टार्टअप पीछे रह गए हैं। उन्होंने पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए नीतिगत सुधारों और अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) में निवेश का आह्वान किया। पई ने आगाह किया कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप केंद्र है इसके बावजूद अगर इन चुनौतियों का समाधान नहीं किया गया तो देश वैश्विक नवाचार में पिछड़ सकता है। पई ने कहा, ““हमारे पास 1,65,000 पंजीकृत स्टार्टअप हैं, 22,000 को वित्त पोषण मिला है। उन्होंने 600 अरब डॉलर का मूल्य बनाया है। हमें 121 यूनिकॉर्न और शायद 250-300 सूनिकॉर्न मिले।” उन्होंने कहा, “स्टार्टअप के लिए सबसे बड़ी समस्या पर्याप्त पूंजी की कमी है। उदाहरण के लिए, चीन ने 2014 से 2024 के बीच स्टार्टअप और उद्यमों में 835 अरब डॉलर का निवेश किया, अमेरिका ने 2.32 लाख करोड़ डॉलर का निवेश किया। हमने सिर्फ़ 160 अरब डॉलर का निवेश किया, जिसमें से संभवतः 80 प्रतिशत विदेशों से आया। इसलिए स्थानीय पूंजी नहीं आ रही है।” पई ने बताया कि अमेरिका के विपरीत, जहां बीमा कंपनियां और विश्वविद्यालय निधियां स्टार्टअप कोष के प्रमुख स्रोत हैं, भारतीय कोषों को सरकारी नीति द्वारा स्टार्टअप में निवेश करने से प्रतिबंधित किया गया है, और अधूरे नियामकीय सुधारों के कारण बीमा कंपनियां बड़े पैमाने पर अनुपस्थित रहती हैं। उन्होंने बीमा कंपनियों को ‘फंड-ऑफ-फंड' में भाग लेने की अनुमति देने के लिए विनियामकीय बदलाव लाने की वकालत की और उनके निवेश ढांचे में अधिक लचीलेपन का आह्वान किया। पई ने सरकार के ‘फंड-ऑफ-फंड' कार्यक्रम को 10,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये करने का भी सुझाव दिया। उन्होंने आगे कहा कि 40-45 लाख करोड़ रुपये के कोष वाले भारत के पेंशन कोष रूढ़िवादी दृष्टिकोण और प्रतिबंधात्मक नियमों के कारण स्टार्टअप में निवेश करने में असमर्थ हैं। पई ने भारतीय विश्वविद्यालयों में अनुसंधान एवं विकास कोष में पर्याप्त वृद्धि के महत्व पर जोर दिया और डीआरडीओ जैसे संगठनों को अपनी प्रौद्योगिकियों को निजी क्षेत्र के लिए सुलभ बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में वर्तमान अनुसंधान एवं विकास व्यय अंतरराष्ट्रीय मानकों से काफी कम है और सार्थक नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अपर्याप्त है। उन्होंने कहा, “हमें स्टार्टअप के लिए सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को व्यवसाय बेचने में आने वाली बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता है...भले ही सरकार ने इसमें सुधार किया हो, लेकिन यह वास्तविक व्यवहार में काम नहीं करता है। इसे खोला जाना चाहिए, और मुझे लगता है कि इसके लिए मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता है।
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नयी दिल्ली.अदाणी समूह की कंपनी अंबुजा सीमेंट्स देश के घरों और बुनियादी ढांचे के लिए इस्तेमाल होने वाले सीमेंट में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान देती है। कंपनी ने अपनी नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। अंबुजा सीमेंट्स ने मुख्य रूप से अधिग्रहणों के माध्यम से रिकॉर्ड समय में पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में 10 करोड़ टन प्रति वर्ष क्षमता को पार कर लिया है। अब उसका लक्ष्य मुख्य रूप से अधिग्रहण करते हुए विस्तार परियोजनाओं के माध्यम से चालू वित्त वर्ष (2025-26) तक 11.8 करोड़ टन प्रतिवर्ष और वित्त वर्ष 2027-28 तक 14 करोड़ टन प्रतिवर्ष तक पहुंचना है। अंबुजा सीमेंट्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विनोद बहेटी ने शेयरधारकों को संबोधित करते हुए कहा, “अब अदानी समूह के सीमेंट कारोबार का मुख्य हिस्सा अंबुजा सीमेंट्स भारत के घरों और बुनियादी ढांचे में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान देती है।” वित्त वर्ष 2023-24 में, अंबुजा ने 10 करोड़ टन प्रति वर्ष एकीकृत सीमेंट क्षमता का मील का पत्थर पार कर लिया, और वैश्विक स्तर पर नौवीं सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी बन गई। अदाणी समूह ने सीमेंट क्षेत्र में हाल ही में प्रवेश किया है। इसने सितंबर, 2022 में स्विट्जरलैंड की कंपनी होल्सिम से 6.4 अरब डॉलर (लगभग 51,000 करोड़ रुपये) की नकद आय के लिए अंबुजा सीमेंट में नियंत्रण हिस्सेदारी हासिल करने के बाद सीमेंट क्षेत्र में कदम रखा। बाद में, एसीसी लिमिटेड में 51 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाली अंबुजा सीमेंट्स ने हैदराबाद स्थित पेन्ना सीमेंट और सौराष्ट्र स्थित सांघी इंडस्ट्रीज जैसी छोटी कंपनियों का अधिग्रहण किया। इसी साल इसने सीके बिड़ला समूह से ओरिएंट सीमेंट का भी अधिग्रहण किया।
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नयी दिल्ली। भारत के दूसरे सबसे धनी व्यक्ति गौतम अदाणी को 31 मार्च, 2025 को समाप्त वित्त वर्ष में कुल 10.41 करोड़ रुपये का पारिश्रमिक मिला। यह राशि उद्योग के उनके अधिकांश प्रतिस्पर्धियों और उनके अपने प्रमुख अधिकारियों से कम है। समूह की सूचीबद्ध संस्थाओं की ताजा वार्षिक रिपोर्ट से पता चला कि अदाणी (62) ने बंदरगाहों से लेकर ऊर्जा तक फैसे अपने कारोबारी समूह की नौ सूचीबद्ध कंपनियों में सिर्फ दो से वेतन लिया। उनका कुल पारिश्रमिक 2023-24 में अर्जित 9.26 करोड़ रुपये के मुकाबले 2024-25 में 12 प्रतिशत अधिक था।
समूह की प्रमुख कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) से 2024-25 के लिए उनके पारिश्रमिक में 2.26 करोड़ रुपये का वेतन और 28 लाख रुपये के भत्ते, सुविधाएं और अन्य लाभ शामिल हैं। इसके अलावा, उन्होंने अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (एपीएसईज़ेड) से 7.87 करोड़ रुपये लिये। इसमें 1.8 करोड़ रुपये वेतन और 6.07 करोड़ रुपये कमीशन के तौर पर मिले। अदाणी का वेतन भारत में लगभग सभी बड़े परिवार के स्वामित्व वाले समूहों के प्रमुखों से कम है। हालांकि सबसे धनी भारतीय मुकेश अंबानी कोविड-19 महामारी फैलने के बाद से वेतन नहीं ले रहे हैं। अदाणी का पारिश्रमिक दूरसंचार कारोबारी सुनील भारती मित्तल (2023-24 में 32.27 करोड़ रुपये), राजीव बजाज (2023-24 में 53.75 करोड़ रुपये), पवन मुंजाल (2023-24 में 109 करोड़ रुपये), एलएंडटी के चेयरमैन एस एन सुब्रह्मण्यन (2024-25 में 76.25 करोड़ रुपये) और इंफोसिस के सीईओ सलिल एस पारेख (2024-25 में 80.62 करोड़ रुपये) से काफी कम है। अदाणी का वेतन उनके समूह की कंपनियों के कम से कम एक-दो मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से कम है। एईएल के सीईओ विनय प्रकाश को 69.34 करोड़ रुपये मिले। प्रकाश के पारिश्रमिक में चार करोड़ रुपये का वेतन और 65.34 करोड़ रुपये के भत्ते तथा अन्य प्रोत्साहन शामिल हैं। इसी तरह अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) के प्रबंध निदेशक विनीत एस जैन को 11.23 करोड़ रुपये मिले, जबकि समूह सीएफओ जुगेशिंदर सिंह ने वित्त वर्ष 2024-25 में 10.4 करोड़ रुपये कमाए। -
नई दिल्ली। भारत में इलेक्ट्रिक कारों (EVs) की बिक्री तेजी से बढ़ रही है। मई 2025 में देश में बेची गई कुल कारों में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी बढ़कर 4 प्रतिशत से ज्यादा हो गई, जबकि पिछले साल मई में यह हिस्सेदारी 2.6 प्रतिशत थी। यह जानकारी फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) द्वारा जारी आंकड़ों से सामने आई है। अप्रैल 2025 में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 3.5 प्रतिशत थी, जो मई में 0.5 प्रतिशत और बढ़ गई। इसका मतलब है कि इलेक्ट्रिक वाहन लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
रिटेल बिक्री के आंकड़ों के अनुसार, मई 2025 में कुल 12,304 इलेक्ट्रिक कारें बिकीं, जबकि मई 2024 में यह संख्या 8,029 यूनिट्स थी। वहीं, अप्रैल 2025 में 12,233 इलेक्ट्रिक कारें बेची गई थीं। FADA के CEO सहर्ष दमानी ने कहा कि यह भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि यह वृद्धि बेहतर बैटरी टेक्नोलॉजी, लंबी ड्राइविंग रेंज और ईवी मॉडल की कीमतों में कमी के कारण हो रही है। टाटा मोटर्स ने मई में 4,351 यूनिट्स इलेक्ट्रिक कारें बेचकर EV सेगमेंट में अपनी लीडरशिप बरकरार रखी। दूसरे नंबर पर रही JSW MG मोटर, जिसने 3,765 यूनिट्स बेचीं, जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा ने 2,632 यूनिट्स की बिक्री के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। इन तीनों कंपनियों की संयुक्त हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक कार बाजार में 87 प्रतिशत से अधिक है।हालांकि, FADA ने चेतावनी दी है कि रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई में बाधाएं आने से भविष्य में वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग पर असर पड़ सकता है। चीन, जो इन मिनरल्स का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है, उसने हाल ही में इनके निर्यात पर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं। इससे भारत सहित पूरी दुनिया में EV उत्पादन और बिक्री पर असर पड़ सकता है। इन चुनौतियों के बावजूद, भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने के लिए नई स्कीम शुरू की है। इस स्कीम का लक्ष्य भारत को ईवी मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाना है और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को देश में उत्पादन के लिए प्रेरित करना है। -
नई दिल्ली। भारत का डिजिटल फोरेंसिक मार्केट वित्त वर्ष 2029-30 तक लगभग 40 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) के साथ 11,829 करोड़ रुपए (1.39 बिलियन डॉलर) तक पहुंचने का अनुमान है, जो ग्लोबल एवरेज 11 प्रतिशत से तीन गुना अधिक है। यह जानकारी गुरुवार को आई एक रिपोर्ट में दी गई।
अब मोबाइल फोरेंसिक इस सेक्टर पर हावी है, जो मार्केट के लगभग 51 प्रतिशत हिस्से पर अधिकार रखता है। स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल, डिजिटल पेमेंट और मोबाइल-सेंट्रिक साइबर क्राइम में उछाल के कारण इस सेक्टर में मोबाइल फोरेंसिक की हिस्सेदारी बढ़ रही है। वहीं, 81 प्रतिशत मांग सार्वजनिक क्षेत्र, विशेष रूप से कानून प्रवर्तन विभाग की ओर से आ रही है।डेलोइट इंडिया की डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (डीएससीआई) के सहयोग से बनाई गई रिपोर्ट जटिल डिजिटल खतरों से निपटने के लिए फोरेंसिक टेक पर बढ़ती निर्भरता को उजागर करती है। भारत डिजिटल फोरेंसिक में निवेश को राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल विश्वास के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में भी बढ़ा रहा है।इस क्षेत्र की पूरी क्षमता को पेश करने के लिए आरजीडब्ल्यू रिपोर्ट, स्वदेशी रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) को बढ़ावा देने पर केंद्रित, एक रणनीतिक रोडमैप की सिफारिश करती है। यह आयात निर्भरता को कम करने, 90,000 फोरेंसिक प्रोफेशनल्स की अनुमानित कमी को पूरा करने के लिए एजुकेशन एंड सर्टिफिकेशन प्रोग्राम का विस्तार करने, एडवांस लैब्स और रिजनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के साथ राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर को मॉडर्न बनाने के लिए जरूरी है।भारत में डेलॉइट के फोरेंसिक प्रैक्टिस का नेतृत्व करने वाले निखिल बेदी ने कहा, “इस विकसित परिदृश्य में, फाइनेशियल फ्रॉड और डेटा ब्रीच से लेकर जटिल क्रॉस-बॉर्डर अटैक तक डिजिटल फोरेंसिक एक रिएक्टिव टूल से एक रणनीतिक क्षमता में बदल गया है। यह डिजिटल ट्रस्ट की सुरक्षा, महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित करने और अनुपालन का समर्थन करने के लिए आवश्यक है।”यह सेक्टर विकास के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर पेश करता है, जो बढ़ती औद्योगिक मांग, नियामक जांच और टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट की वजह से आगे बढ़ रहा है।डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (डीएससीआई) के सीईओ विनायक गोडसे ने कहा कि डिजिटल-फर्स्ट इकोनॉमी के रूप में भारत की यात्रा ने अपार अवसर पेश किए हैं। लेकिन, इससे साइबर अपराधियों के बढ़ने की भी परेशानी पैदा हुई है।







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