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शरीर रहेगा तगड़ा, हफ्ते में 2 बार खाएं ये चीज

हर नए साल की शुरुआत में लोग हेल्दी खाने का संकल्प लेते हैं लेकिन कुछ ही हफ्तों में फिर से पुरानी आदतों में लौट जाते हैं। इसकी वजह यह नहीं होती कि लोग कोशिश नहीं करते बल्कि यह होती है कि वे बहुत हार्ड या ऐसी डाइट चुन लेते हैं जो भारतीय खाने और रोजाना की लाइफस्टाइल के हिसाब से सही नहीं बैठती। फड डाइट और विदेशी खाने के ट्रेंड कुछ दिनों तक तो चल जाते हैं लेकिन लंबे समय तक निभाना मुश्किल होता है।
शरीर को किसी थोड़े समय की डाइट नहीं बल्कि ऐसी आसान और टिकाऊ खानपान की जरूरत होती है जिसे रोज अपनाया जा सके। NFHS-5 के अनुसार करीब 56% भारतीय वयस्क पोषण की कमी या असंतुलन से जूझ रहे हैं, जिसकी बड़ी वजह गलत खानपान और प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता सेवन है।
भोजन के बारे में होम्योपैथी क्या कहती है?
होम्योपैथी के अनुसार खाना सिर्फ शरीर को ऊर्जा देने का जरिया नहीं है बल्कि यह शरीर की 'वाइटल फोर्स' यानी अंदरूनी ऊर्जा से जुड़ा होता है। यही ऊर्जा शरीर का संतुलन बनाए रखती है और बीमारियों से लड़ने में मदद करती है। इसलिए होम्योपैथी में टिकाऊ और संतुलित पोषण को अच्छी इम्युनिटी, बेहतर पाचन, मानसिक स्पष्टता और हार्मोन बैलेंस का आधार माना जाता है।
क्यों बेहतर है टिकाऊ डाइट?
सख्त डाइट की तुलना में टिकाऊ डाइट इसलिए ज्यादा असरदार मानी जाती है क्योंकि भारतीय शरीर स्वाभाविक रूप से घर के बने अनाज, दाल, सब्जियों और पारंपरिक मसालों के अनुसार ढला हुआ है। बहुत सख्त या सीमित डाइट कुछ समय के लिए वजन तो घटा सकती है, लेकिन लंबे समय तक उसे निभाना मुश्किल हो जाता है और लोग जल्दी हार मान लेते हैं। अच्छी सेहत के लिए जरूरी है कि खाने से सब कुछ हटाने के बजाय संतुलित भोजन किया जाए, कैलोरी गिनने के तनाव में पड़ने के बजाय मौसमी और ताजा खाना चुना जाए और खुद को भूखा रखने के बजाय सही मात्रा में भोजन लिया जाए। इसी सोच के साथ भारतीयों के लिए बनाया गया यह आसान न्यू ईयर मील प्लान एक सामान्य और लचीला गाइड है जिसे अधिकतर लोग अपनी रोजाना की जिंदगी में बिना किसी परेशानी के आसानी से अपना सकते हैं और लंबे समय तक स्वस्थ रह सकते हैं।
सुबह उठते ही क्या करें?
सुबह उठते ही गुनगुना पानी पीना, चाहे नींबू के साथ हो या बिना, पाचन तंत्र को एक्टिव करने में मदद करता है। चाहें तो इसके साथ 2 भीगे हुए बादाम और 1 भीगी हुई खजूर ली जा सकती है, जिससे शरीर को हल्की एनर्जी मिलती है। होम्योपैथी के अनुसार, दिन की शुरुआत में पाचन सही रहने से पूरे दिन का मेटाबॉलिज़्म संतुलित रहता है और शरीर की आंतरिक ऊर्जा बेहतर तरीके से काम करती है।
ऐसा होना चाहिए आपका नाश्ता
नाश्ते में रोज इन चीजों में से किसी एक को चुना जा सकता है जैसे सब्जियों वाला पोहा या उपमा जिसमें मूंगफली शामिल हो, मल्टीग्रेन पराठा घर की बनी दही के साथ, इडली या डोसा सांभर के साथ या फिर ओट्स और रागी की खीर फल के साथ। ये सभी नाश्ते पोषण से भरपूर होते हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल संतुलित रहता है, देर तक भूख नहीं लगती और पाचन तंत्र सही तरीके से काम करता है।
मिड-मॉर्निंग स्नैक
मिड-मॉर्निंग में हल्का और हेल्दी स्नैक लेना फायदेमंद होता है। इस दौरान अमरूद, पपीता, केला या संतरा जैसे ताजे फल खाए जा सकते हैं, साथ ही नारियल पानी भी एक अच्छा विकल्प है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन के अनुसार, फल शरीर की इम्युनिटी को मजबूत करते हैं और एंटीऑक्सिडेंट स्तर बढ़ाकर कई बीमारियों से बचाव में मदद करते हैं।
दोपहर का खाना
दोपहर के भोजन में संतुलित थाली बेहद जरूरी होती है। इसमें 1-2 मल्टीग्रेन रोटी या 1 कटोरी चावल, साथ में दाल, राजमा या छोले की एक कटोरी, मौसमी सब्ज़ी और गाजर, खीरा व चुकंदर का सलाद शामिल करें। दही या छाछ पाचन को बेहतर बनाती है। होम्योपैथी के अनुसार शरीर की लगभग 70% इम्युनिटी पेट से जुड़ी होती है, इसलिए लंच का सही और हल्का होना बहुत जरूरी है।
इवनिंग स्नैक्स
शाम के नाश्ते में तले-भुने या पैकेट वाले खाने की जगह हल्के और पौष्टिक विकल्प चुनें। भुने चने या मूंगफली, स्प्राउट्स की चाट, तुलसी-अदरक या दालचीनी वाली हर्बल चाय और थोड़ा सा फल शरीर को ऊर्जा देते हैं, पाचन पर बोझ नहीं डालते और शाम की भूख को हेल्दी तरीके से कंट्रोल करते हैं।
रात का खाना हल्का रखें
रात का खाना हमेशा हल्का और आसानी से पचने वाला रखें। सब्ज़ियों वाली खिचड़ी, दाल का सूप एक रोटी के साथ, ग्रिल्ड पनीर या चिकन के साथ सब्ज़ियां या वेज दलिया अच्छे विकल्प हैं। सोने से 2-3 घंटे पहले डिनर करने से पाचन ठीक रहता है, नींद की गुणवत्ता सुधरती है और शरीर को रात में बेहतर तरीके से रिकवर करने का समय मिलता है।
हफ्ते में शामिल करें
हफ्ते में अपनी डाइट में बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मिलेट्स कम से कम दो बार जरूर शामिल करें। साथ ही दही, छाछ और कांजी जैसे प्रोबायोटिक्स पाचन और इम्युनिटी को मजबूत करते हैं। मीठे के लिए रिफाइंड चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल करें और नट्स व बीजों को डाइट में जोड़ें क्योंकि ये शरीर को अच्छी फैट और लंबे समय तक ऊर्जा देते हैं।
किन चीजों से दूरी बनाएं
अच्छी सेहत बनाए रखने के लिए कुछ आदतों से दूरी बनाना जरूरी है। ज्यादा तला-भुना खाना जैसे समोसा, पकौड़े और कचौड़ी पाचन पर बोझ डालते हैं, वहीं ज्यादा चीनी वाली मिठाइयां वजन और ब्लड शुगर बढ़ा सकती हैं। प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड, बहुत ज्यादा चाय-कॉफी और देर रात भारी खाना शरीर की प्राकृतिक लय बिगाड़ता है, इसलिए इनका सेवन जितना कम किया जाए उतना बेहतर है।
डाइट के साथ ये आदतें भी अपनाएं
डाइट के साथ कुछ अच्छी आदतें अपनाना भी जरूरी है। रोजाना 20-30 मिनट टहलने से शरीर एक्टिव रहता है, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहतर है, खासकर गुनगुना पानी। खाना खाते समय मोबाइल से दूर रहकर ध्यान से खाना चाहिए। नियमित और पूरी नींद लेना तथा सुबह की धूप से प्राकृतिक विटामिन डी लेना भी सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। 

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