होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक और भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक राज्यसभा में पारित
नई दिल्ली। राज्यसभा ने आज होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक, 2020 और भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक, 2020 को पारित कर दिया।
होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक होम्योपैथी केंद्रीय परिषद अधिनियम, 1973 में संशोधन किया गया है। इस अधिनियम में केंद्रीय होम्योपैथी परिषद की व्यवस्था की गई है जो होम्योपैथिक शिक्षा और प्रेक्टिस को नियंत्रित करेगी। यह विधेयक अप्रैल में जारी होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन अध्यादेश का स्थान लेगा। इसके तहत केंद्रीय परिषद की अवधि को दो साल से बढ़ाकर तीन साल करने के लिए 1973 के कानून में संशोधन किया गया है।
भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक, 2020 को 1970 के भारतीय चिकित्सा केन्द्रीय परिषद कानून में संशोधन के लिए लाया गया है। यह अधिनियिम आर्युवेद, योग और नेचुरोपैथिक सहित भारतीय चिकित्सा पद्धति की शिक्षा और अभ्यास को नियंत्रित करता है।
यह विधेयक पारित होने पर इस सम्बंध में अप्रैल में जारी अध्यादेश का स्थान लेगा। इस विधेयक में एक वर्ष के अंदर केन्द्रीय परिषद के पुनर्गठन का प्रस्ताव है। यह केन्द्रीय परिषद अप्रैल से एक वर्ष के लिए निलंबित रहेगी। तब तक केन्द्र सरकार निदेशक मंडल का गठन करेगी जिसे केन्द्रीय परिषद के अधिकार होंगे। निदेशक मंडल में दस सदस्य होंगे।
विधेयकों पर चर्चा का जवाब देते हुए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि सरकार उत्कृष्ट स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पारदर्शी ढंग से भारतीय चिकित्सा पद्धतियों में सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रतिबंद्ध है। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी, योग और प्राकृतिक चिकित्सा प्राचीन चिकित्सा पद्धतियां हैं और इनका वैज्ञानिक आधार है।
डॉ. हर्षवर्धन ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताया कि निदेशक मंडल के गठन में पक्षपात किया जा रहा है। सदन ने विधेयकों पर आपत्ति से सम्बंधित कांग्रेस और वामदलों के सदस्यों के प्रस्ताव भी नामंजूर कर दिए।
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