हिमाचल के पारंपरिक शॉल उद्योग ने गिनीज बुक में दर्ज कराया नाम
शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य के पारंपरिक शॉल उद्योग ने यहां आयोजित ‘लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) फेस्ट' में एक ही छत के नीचे 4,000 से अधिक हस्तनिर्मित शॉल प्रदर्शित कर ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में अपना नाम दर्ज कराया। रिज मैदान में आयोजित तीन-दिवसीय इस आयोजन का उद्घाटन करते हुए सुक्खू ने कहा कि इस उपलब्धि से राज्य के हथकरघा उत्पादों को वैश्विक पहचान मिली है। उन्होंने बताया कि विभिन्न जिलों के स्वयं सहायता समूहों और अन्य उद्यमियों ने इन शॉलों को बनाया है। खादी के सभी शॉल हस्तनिर्मित हैं और प्रत्येक प्रदर्शित शॉल को हथकरघा प्रमाणन और भौगोलिक संकेतक (जीआई) मिला हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा, “ये शॉल कुल्लू, किन्नौर, चंबा, कांगड़ा और सिरमौर सहित लगभग हर जिले के बुनकरों की कारीगरी हैं, जो जटिल डिजाइन और बहुरंगी पैटर्न की सैकड़ों वर्षों पुरानी विरासत को संजोए हुए हैं। किन्नौर में तो एक शॉल तैयार करने में सात से आठ महीने तक का समय लग जाता है।”










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