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नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को सऊदी अरब में सड़क दुर्घटना में नौ भारतीय नागरिकों की मौत पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने पीड़ितों के परिवारों को पूर्ण सहायता का आश्वासन दिया।
पीड़ित परिवारों को पूर्ण सहायता प्रदान करने का दिया आश्वासनविदेश मंत्री जयशंकर ने एक्स पर लिखा, “इस दुर्घटना और जानमाल के नुकसान के बारे में जानकर दुख हुआ। जेद्दा में हमने महावाणिज्यदूत से बात की, जो संबंधित परिवारों के संपर्क में हैं। वह इस दुखद स्थिति में उन्हें पूरा सहयोग दे रहे हैं।” इससे पहले, जेद्दा में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने जानकारी दी कि यह दुर्घटना सऊदी अरब के पश्चिमी क्षेत्र में जीजान के पास हुई। महावाणिज्य दूतावास मक्का, मदीना, यानबू, ताइफ, तबुक, कुनफुदा, अलबहा, आभा, जीजान और नजरान शहरों को भी कवर करता है।हमारी संवेदनाएं प्रभावित परिवारों के साथ हैमहावाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा गया, “हमारी संवेदनाएं प्रभावित परिवारों के साथ हैं। जेद्दा में भारतीय महावाणिज्य दूतावास पूरी सहायता प्रदान कर रहा है और अधिकारियों तथा परिवारों के संपर्क में है। हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। आगे की पूछताछ के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन स्थापित की गई है।” साथ ही संबंधित परिवारों की मदद के लिए विशेष रूप से स्थापित चार हेल्पलाइन नंबरों का विवरण दिया गया है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए लोगों से 5 फरवरी को होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाली डबल इंजन वाली सरकार के लिए वोट करने का आग्रह किया।
उन्होंने मतदाताओं से भाजपा को एक मौका देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “आपने मुझे पिछले 25 सालों में काम करने का मौका नहीं दिया। आपने 25 साल तक कांग्रेस और आप को देखा है, अब कमल को मौका दीजिए। जैसे परिवार का मुखिया अपने प्रियजनों का ख्याल रखता है, वैसे ही मैं आपका ख्याल रखूंगा। भाजपा का ट्रैक रिकॉर्ड दिखाता है कि हम अपने वादों को पूरा करते हैं।”भाजपा के चुनावी वादों पर तेजी से कार्रवाई का आश्वासन देते हुए पीएम मोदी ने घोषणा की, “8 फरवरी के बाद दिल्ली में भाजपा सरकार अपने सभी वादों को समयबद्ध तरीके से पूरा करेगी। यह ‘मोदी की गारंटी’ है। आज, ‘मोदी की गारंटी’ का मतलब है सभी गारंटियों को पूरा करने की गारंटी।” उन्होंने प्रमुख मुद्दों को संबोधित करके दिल्ली के निवासियों को राहत पहुंचाने का वादा किया।आज पूरी दिल्ली कह रही है- ‘5 फरवरी आएगी, AAP-दा जाएगी, भाजपा आएगी’उन्होंने कहा, “दिल्ली को ऐसी सरकार चाहिए जो गरीबों के लिए घर बनाए, शहर का आधुनिकीकरण करे, हर घर में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करे और उन्हें टैंकर माफियाओं से मुक्त करे। इसलिए आज पूरी दिल्ली कह रही है, ‘आपदा जाएगी, भाजपा आएगी’।”हर नागरिक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में कर रहा काम‘विकसित भारत’ के विजन पर रोशनी डालते हुए पीएम मोदी ने कहा, “हर नागरिक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए यह जरूरी है कि राजधानी विकास का मॉडल बने। लेकिन आज दिल्ली की हालत देखकर क्या आपको लगता है कि यह हासिल हो सकता है? मुझे कुछ कहने की जरूरत नहीं है, दिल्लीवासी खुद ही हर दिन अपनी पीड़ा व्यक्त करते हैं।”पीएम मोदी ने कहा, आप-दा वाले कह रहे हैं कि हरियाणा वाले दिल्ली के पानी में जहर मिलाते हैं। ये सिर्फ हरियाणा का नहीं बल्कि भारतीयों का अपमान है, हमारे संस्कारों का अपमान, हमारे चरित्र का अपमान है। ये वो देश है, जहां पानी पिलाना धर्म माना जाता है। इस देश के लोगों पर ऐसा झूठा आरोप कि कुछ भी बोल रहे हैं। मुझे पक्का विश्वास है कि ऐसी ओछी बाते करने वालों को दिल्ली इस बार सबक सिखाएगी। इन आप-दा वालों की लुटिया यमुना जी में ही डूबेगी।पीएम मोदी ने महाकुंभ भगदड़ पर भी जताया दुखघोंडा निर्वाचन क्षेत्र में विशाल रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने महाकुंभ भगदड़ पर भी दुख जताया। उन्होंने कहा, “हमने आज की घटना में कुछ लोगों को खो दिया है और कुछ गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। मैं प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।” प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि वे उत्तर प्रदेश सरकार के साथ लगातार संपर्क में हैं और महाकुंभ में अमृत स्नान अब सामान्य रूप से शुरू हो गया है।रैली में एक भावुक क्षण में, पटपड़गंज विधानसभा से भाजपा उम्मीदवार रविंदर सिंह नेगी ने प्रधानमंत्री मोदी के पैर छुए, और जवाब में, प्रधानमंत्री ने भी वही किया, जिससे भीड़ की तालियां बज उठीं। प्रधानमंत्री मोदी ने भारी भीड़ का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “यह दृश्य दिल्ली के मूड और उसके जनादेश के संदेश को दर्शाता है। दिल्ली बदल रही है। झूठे वादे अब नहीं चलेंगे। लूट और झूठ नहीं चलेगा। दिल्ली के लोग एक डबल इंजन वाली भाजपा सरकार चाहते हैं जो गरीबों के कल्याण और शहर के विकास दोनों को सुनिश्चित करे।” - प्रयागराज । प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। उत्तर प्रदेश सरकार के मुताबिक आज बुधवार दोपहर 12 बजे तक 42 लाख 40 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में स्नान किया। यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि मौनी अमावस्या के अवसर पर यह दूसरा अमृत स्नान है।हालांकि, सुबह के समय भारी भीड़ के कारण भगदड़ जैसी स्थिति बन गई जिससे कई लोग घायल हो गए। सुरक्षा कारणों से संतों की शाही स्नान शोभायात्रा को कुछ समय के लिए रोक दिया गया। इसके बावजूद संत और श्रद्धालु छोटे-छोटे समूहों में संगम स्नान के लिए पहुंच रहे हैं। पंचायती निरंजनी अखाड़े के साधु चिदानंद पुरी ने कहा, “अचानक हुई इस घटना की वजह से हमारे अखाड़े की शोभायात्रा नहीं निकल सकी। अब हम छोटे-छोटे समूहों में संगम स्नान कर रहे हैं।”केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने सोशल माडिया प्लेटफाॅर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “महाकुंभ में हुई इस दुखद घटना से मैं बहुत दुखी हूं। जिन्होंने अपनों को खोया है, उनके प्रति मेरी संवेदनाएं। घायलों को उचित इलाज मिल रहा है और मैं लगातार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रशासन से संपर्क में हूं।”वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, “प्रयागराज महाकुंभ में हुई दुर्घटना बहुत दुखद है। जिन श्रद्धालुओं ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदना। मैंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात की है और प्रशासन पीड़ितों की हर संभव मदद में लगा हुआ है।”महाकुंभ में आगे भी महत्वपूर्ण स्नान तिथियां रहेंगी जिनमें 3 फरवरी (बसंत पंचमी), 12 फरवरी (माघी पूर्णिमा) और 26 फरवरी (महाशिवरात्रि) शामिल हैं। प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की है ताकि आगे कोई दुर्घटना न हो और महाकुंभ का आयोजन सुचारू रूप से चलता रहे।
- मुंबई. कार्य-जीवन संतुलन बनाने पर बहस और एलएंडटी के चेयरमैन एस.एन. सुब्रह्मण्यन के सप्ताह में 90 घंटे काम करने की टिप्पणी के बीच एक सर्वेक्षण में शामिल 78 प्रतिशत कर्मचारियों ने परिवार को प्राथमिकता देने की बात कही। वैश्विक स्तर पर नौकरियों की जानकारी देने वाली वेबसाइट इनडीड की ‘फ्यूचर करियर रेजोल्यूशन' रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कर्मचारियों की प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जिसमें लगभग पांच में से चार (78 प्रतिशत) ने कहा कि वे 2025 में करियर में उन्नति के बजाय जीवनसाथी, बच्चों और माता-पिता के साथ समय बिताने को प्राथमिकता देना चाहते हैं। इसमें कहा गया, कर्मचारी कम तनाव चाहते हैं और मानसिक स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देना चाहते हैं। साथ ही अच्छी तनख्वाह वाली ऐसी नौकरी चाहते हैं जिससे वे जीवन का आनंद उठा सकें और जिसमें परिवार तथा व्यक्तिगत हितों के लिए लचीलापन हो। इंडीड के विपणन निदेशक (ऑस्ट्रेलिया, भारत और सिंगापुर) राचेल टाउनस्ले ने कहा, ‘‘ हम निश्चित रूप से भारतीय कामगारों के लिए महत्वपूर्ण चीजों में बदलाव देख रहे हैं। अधिक से अधिक लोग हमें बता रहे हैं कि वे काम और घरेलू जीवन के बीच बेहतर संतुलन बनाना चाहते हैं। हालांकि, अधिक कमाई करना महत्वपूर्ण है, लेकिन अधिकतर लोगों के लिए अच्छे करियर का मतलब तरक्की से नहीं बल्कि सुरक्षित महसूस करने व उचित भुगतान पाने से है। '' रिपोर्ट दिसंबर, 2024 से जनवरी, 2025 के बीच इंडीड की पूर्वानुमान विश्लेषण प्रणाली वालूवॉक्स द्वारा किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है। इसमें सिंगापुर, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के 6,126 कर्मचारियों और नौकरी चाहने वालों से संपर्क किया गया। इसमें भारत के 2,507 लोग शामिल थे। इसमें पाया गया कि बदलती प्राथमिकताओं के साथ-साथ भारतीय कर्मचारी नौकरी बाजार के प्रति भी आशावादी बने हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया, 55 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने उभरते क्षेत्रों और उद्योगों में अवसरों के विस्तार पर विश्वास व्यक्त किया है। इसमें शामिल भारतीयों में से 59 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों को नियुक्ति प्रक्रियाओं में भी बदलाव की उम्मीद है, जिसमें पारंपरिक डिग्री-आधारित योग्यता की तुलना में कौशल-आधारित भर्ती पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया, यह प्रवृत्ति प्रौद्योगिकी तथा कृत्रिम मेधा (एआई) जैसे उभरते उद्योगों में नौकरी की बढ़ती मांग को दर्शाती है, जहां व्यावहारिक विशेषज्ञता तथा व्यावहारिक कौशल अक्सर औपचारिक शैक्षिक योग्यता से अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।
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नयी दिल्ली. कोविड-19 महामारी के दौरान सरकारी स्कूलों में नामांकन में देखी गई वृद्धि की स्थिति अब उलट गई है, सरकारी स्कूलों में नामांकित 6-14 वर्ष की आयु के बच्चों का अनुपात लगभग 2018 के स्तर पर वापस आ गया है। मंगलवार को जारी वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (एएसईआर) की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विद्यार्थी महामारी की वजह से लिखने-पढ़ने व सीखने की क्षमता को हुई हानि से न सिर्फ पूरी तरह उबर चुके हैं, बल्कि कुछ मामलों में प्राथमिक कक्षाओं में सीखने का स्तर पहले के स्तर से भी अधिक है। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि 14-16 साल के आयु वर्ग के 82 प्रतिशत से अधिक बच्चे स्मार्टफोन का उपयोग करना जानते हैं, केवल 57 प्रतिशत ही शैक्षिक उद्देश्य के लिए इसका उपयोग करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया, “कोविड-19 के दौरान सरकारी स्कूलों में नामांकन में जो वृद्धि देखी गई थी, वह उलट गई है। ग्रामीण भारत में 2006 से निजी स्कूलों में नामांकन लगातार बढ़ रहा है। निजी स्कूलों में नामांकित 6-14 वर्ष के बच्चों का अनुपात 2006 में 18.7 प्रतिशत से बढ़कर 2014 में 30.8 प्रतिशत हो गया और 2018 में उसी स्तर पर बना रहा।” इसमें कहा गया, “महामारी के वर्षों के दौरान, सरकारी स्कूलों में नामांकन में बड़ा उछाल आया और सरकारी स्कूलों में नामांकित 6-14 वर्ष के बच्चों का अनुपात 2018 में 65.6 प्रतिशत से बढ़कर 2022 में 72.9 प्रतिशत हो गया। 2024 में यह संख्या 66.8 प्रतिशत पर वापस आ गयी। सभी कक्षाओं और छात्र-छात्राओं के लिहाज से यह पूर्ण उलटफेर के साथ लगभग 2018 के स्तर पर वापस आ गया है। यह विशेष रूप से आश्चर्यजनक नहीं है क्योंकि अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में भी सुधार हुआ है।” वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (एएसईआर) 2024 एक राष्ट्रव्यापी ग्रामीण घरेलू सर्वेक्षण है, जो भारत के 605 ग्रामीण जिलों के 17,997 गांवों के 6,49,491 बच्चों के बीच किया गया। सर्वेक्षण किये गये प्रत्येक जिले में एक गैर सरकारी संगठन “प्रथम” की सहायता से एक स्थानीय संगठन या संस्था द्वारा सर्वेक्षण किया गया। कुछ राज्यों ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है और महामारी से पहले के अपने सीखने के स्तर को पार कर लिया है, जबकि अन्य अब भी पूरी तरह से उबर नहीं पाए हैं। फिर भी, लगभग सभी राज्यों ने 2022 की तुलना में सुधार दिखाया है। रिपोर्ट में कहा गया “वास्तव में, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु जैसे कम प्रदर्शन करने वाले राज्यों ने उल्लेखनीय सुधार किया है।” पहली बार, राष्ट्रव्यापी घरेलू सर्वेक्षण में डिजिटल साक्षरता पर एक अनुभाग शामिल था, जो 14-16 साल के आयु वर्ग के बड़े बच्चों पर लागू था। इसमें स्मार्टफोन की पहुंच, स्वामित्व और उपयोग पर स्वयं से पूछे गए प्रश्नों के साथ-साथ कुछ बुनियादी डिजिटल कौशल का व्यक्तिगत मूल्यांकन भी शामिल था। रिपोर्ट में कहा गया है कि “14-16 साल के आयु वर्ग के 82.2 प्रतिशत बच्चों ने बताया कि वे स्मार्टफोन का उपयोग करना जानते हैं। इनमें से 57 प्रतिशत ने बताया कि उन्होंने पिछले सप्ताह शैक्षणिक गतिविधि के लिए इसका उपयोग किया था, जबकि 76 प्रतिशत ने बताया कि उन्होंने इसी अवधि के दौरान सोशल मीडिया के लिए इसका उपयोग किया था।” रिपोर्ट में पाया गया कि पहली कक्षा में पांच वर्ष या उससे कम आयु के बच्चों का अनुपात समय के साथ घट रहा है। इसमें कहा गया है, “2018 में यह आंकड़ा 25.6 प्रतिशत था, 2022 में यह 22.7 प्रतिशत था और 2024 में राष्ट्रीय स्तर पर कक्षा-एक में कम उम्र के बच्चों का प्रतिशत अब तक के सबसे निचले स्तर 16.7 पर पहुंच गया।”
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सिंहभूम ।झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुआ थाना क्षेत्र में बुधवार सुबह पुलिस एवं सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में दो माओवादी नक्सली मारे गए हैं। इनमें एक महिला भी शामिल है। मुठभेड़ के बाद सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों के कुछ हथियार और सामान बरामद किए गए हैं।
चाईबासा के एसपी आशुतोष शेखर ने मुठभेड़ में दो नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि की है। इसके बाद पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी रखा गया है। मारे गए नक्सलियों की पहचान फिलहाल पुलिस ने आधिकारिक तौर पर उजागर नहीं की है, लेकिन इनमें से एक भाकपा माओवादी नक्सली संगठन का जोनल कमांडर संजय गंझू बताया जा रहा है।बताया गया कि एसपी को सूचना मिली थी कि नक्सलियों के हथियारबंद दस्ते ने पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुआ थाना क्षेत्र के जंगल में कैंप कर रखा है और किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी कर रहा है।सूचना के आधार पर जिला पुलिस बल एवं सीआरपीएफ ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इस दौरान नक्सलियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी। जवाब में सुरक्षा बलों ने भी मोर्चा लेकर फायरिंग की।इस दौरान गोली लगने से दो नक्सलियों की मौत हो गई। बाकी नक्सली घने जंगलों में भागने में सफल रहे।ठीक आठ दिन पहले 22 जनवरी को बोकारो जिले के तेजनारायणपुर थाना क्षेत्र में पुलिस एवं सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में एक पुरुष और एक महिला नक्सली मारे गए थे। मारे गए नक्सलियों की पहचान शांति और मनोज बास्के के रूप में हुई थी। शांति गिरिडीह जिले के खुखरा थाना क्षेत्र अंतर्गत धावाटांड गांव की रहने वाली थी।सीपीआई माओवादी नक्सली संगठन में शांति का ओहदा एरिया कमांडर का था। इस मुठभेड़ में मारा गया दूसरा नक्सली मनोज भी इसी जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र का निवासी था। - नयी दिल्ली. ‘इंजीनियरिंग में स्नातक योग्यता परीक्षा' (गेट) और ‘स्नातकोत्तर उपाधि हेतु संयुक्त प्रवेश परीक्षा' (जैम) के प्रयागराज केंद्रों में परीक्षा देने वाले परीक्षार्थी कुंभ मेले के कारण अब लखनऊ के केंद्रों में परीक्षा देंगे। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। ‘गेट' परीक्षा एक और दो फरवरी को होगी, वहीं ‘जैम' 2025 परीक्षा भी दो फरवरी को होनी है।‘गेट' के आयोजक संस्थान आईआईटी रुड़की और ‘जैम' के आयोजक संस्थान आईआईटी दिल्ली ने एक संयुक्त बयान में कहा, ‘‘अनेक उम्मीदवारों ने ज्ञापन देकर प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में अपनी कठिनाई जाहिर की है क्योंकि महाकुंभ में एक और दो फरवरी को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।'' उन्होंने कहा कि इसलिए प्रयागराज में इन परीक्षाओं के केंद्रों को अब लखनऊ में स्थानांतरित कर दिया गया है।
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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ मेला क्षेत्र में बुधवार को हुए हादसे पर पीएम मोदी ने दुख जताया है। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, “प्रयागराज महाकुंभ में हुआ हादसा अत्यंत दुखद है। इसमें जिन श्रद्धालुओं ने अपने परिजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। इसके साथ ही मैं सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”
इससे पहले उन्होंने सीएम योगी से फोन पर हुई बातचीत के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा, “स्थानीय प्रशासन पीड़ितों की हरसंभव मदद में जुटा हुआ है। इस सिलसिले में मैंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बातचीत की है और मैं लगातार राज्य सरकार के संपर्क में हूं।”मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी महाकुंभ हादसे को लेकर मीडिया से बात की थी। सीएम योगी ने कहा, “महाकुंभ मेला क्षेत्र में मची घटना को लेकर प्रधानमंत्री मोदी से चार बार फोन पर बात हुई है। प्रयागराज में भीड़ का भारी दबाव है और जो घटना घटी है, वह बैरिकेड को फांदने के कारण हुई है। फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं। प्रशासन सबके सहयोग के लिए तत्पर है। “उन्होंने श्रद्धालुओं से संयम बनाए रखने की अपील की। बोले, “मैं लोगों से अपील करूंगा कि वह प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और अफवाहों पर ध्यान न दें। आज करीब 9 से 10 करोड़ श्रद्धालु प्रयागराज में हैं। मैं सभी से कहूंगा कि वह जिस भी घाट पर हैं, वहीं स्नान करें। संगम नोज पर स्नान जरूरी नहीं हैं, सभी श्रद्धालु वहां जाने से बचें। सकुशल स्नान कराना हमारी प्राथमिकता है। प्रयागराज में भीड़ का भारी दबाव है, इसलिए पहले श्रद्धालु स्नान करेंगे और उसके बाद ही संत स्नान करेंगे।”मुख्यमंत्री ने आगे कहा, ” विभिन्न अखाड़ों के संतों ने विनम्रतापूर्वक कहा है कि श्रद्धालु पहले पवित्र स्नान करें और भीड़ कम होने पर अखाड़े पवित्र स्नान के लिए आगे बढ़ेंगे। संगम नोज, नाग वासुकी मार्ग और संगम मार्ग पर काफी भीड़ है। मेरी श्रद्धालुओं से अपील है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। पूरे कुंभ क्षेत्र में घाट बनाए गए हैं, श्रद्धालुओं को सिर्फ संगम नोज की ओर जाने की जरूरत नहीं है। श्रद्धालुओं को अपने नजदीकी घाटों पर पवित्र स्नान करना चाहिए। हम घायल व्यक्तियों का उचित उपचार सुनिश्चित कर रहे हैं। रेलवे ने प्रयागराज क्षेत्र के विभिन्न स्टेशनों से श्रद्धालुओं को उनके गंतव्य तक वापस ले जाने के लिए विशेष रेलगाड़ियों का आयोजन किया है।”बता दें कि गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदियों के पवित्र संगम से लगभग एक किलोमीटर दूर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब बैरिकेड्स टूट गए और इसके कारण भीड़ में भगदड़ मच गई। -
नई दिल्ली। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने बुधवार सुबह आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण यान जीएसएलवी-एफ15 के जरिए अपना 100वां मिशन, एनवीएस-02 नेविगेशन सैटेलाइट लॉन्च किया है। अपनी इस कामयाबी को लेकर इसरो ने कहा कि भारत अंतरिक्ष नेविगेशन में नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया।
जीएसएलवी-एफ15 रॉकेट ने सुबह 6:23 बजे उड़ान भरी, जिसमें एनवीएस-02 नेविगेशन सैटेलाइट अंतरिक्ष में पहुंचाया गया। यह लॉन्च इसरो की एक बड़ी उपलब्धि है, जो देश की अंतरिक्ष अनुसंधान क्षमताओं को दर्शाती है। इस मौके पर इसरो की अंतरिक्ष यात्रा के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पड़ाव की बात करना भी अहम होगा। जी हां, अंतरिक्ष में इसरो ने आज सेंचुरी जरूर लगाई है लेकिन शुरुआत से लेकर अब तक इसरो की अंतरिक्ष यात्रा के कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पड़ाव रहे हैं जिनके बारे में यहां बताया गया है।ये हैं इसरो के अंतरिक्ष यात्रा के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पड़ाव :-1962 में अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए आर के रामनाथन भारतीय राष्ट्रीय समिति का गठन किया गया।– भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के मार्गदर्शन में शुरुआत हुई।– 1963 में ऊपरी वायुमंडलीय क्षेत्र में दबाव को समझने के उद्देश्य से पहला रॉकेट लॉन्च किया।– 1975 में भारत में पूरी तरह से डिजाइन किया गया पहला भारतीय उपग्रह आर्यभट्ट रूस से लॉन्च किया गया।– 1977 में दूरसंचार के लिए पहला उपग्रह बनाया गया।– 1979 में पहला रिमोट सेंसिंग उपग्रह भास्कर-1 लॉन्च किया गया।– 1980 में भारत का पहला सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल बनाया गया।– 1988 में पहला भारतीय रिमोट सेंसिंग (आईआरएस) उपग्रह आईआरएस-1ए के साथ प्रक्षेपित किया गया।– 2008 में भारत का पहला मानवरहित चंद्र मिशन चंद्रयान-1 सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया– 2009 में सभी मौसमों में काम करने की क्षमता वाला रडार इमेजिंग सैटेलाइट RISAT-2 लॉन्च किया गया।– 2013 में मंगल ऑर्बिट मिशन प्रक्षेपित किया, जिसका नाम मंगलयान रखा गया।– 2017 में इसरो ने एक लॉन्चर से 104 उपग्रह प्रक्षेपित करने का रिकॉर्ड बनाया।– 2019 में चंद्रयान-2 लॉन्च चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाले पहले अंतरिक्ष मिशन के रूप में लॉन्च– 2023 में इसरो ने चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण के साथ एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।– 2024 में इसरो ने SPADEX यानी स्पेस डॉकिग एक्सपेरिमेंट मिशन लॉन्च किया।– जनवरी 2024 में इसरो ने अपना स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट (SPADEX) सफलतापूर्वक पूरा किया।– भारत सैटेलाइट डॉकिंग हासिल करने वाला चौथा देश बना। -
प्रयागराज। प्रयागराज महाकुंभ में भगदड़ के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पहला बयान सामने आया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि मां गंगा में स्नान करने के लिए कई घाट बनाए गए हैं। जो श्रद्धालु जिस घाट के पास हैं, वहीं स्नान करें और संगम नोज की ओर जाने की कोशिश न करें। उन्होंने कहा कि सभी श्रद्धालु शांति बनाए रखें और कुंभ में व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, " महाकुंभ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ है। प्रयागराज में आज लगभग 8-10 करोड़ श्रद्धालु मौजूद हैं। कल लगभग 5.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने महाकुंभ का स्नान किया था। श्रद्धालुओं के संगम नोज पर जाने से भारी दबाव बना हुआ है। रात 1-2 बजे के बीच अखाड़ा मार्ग पर बैरिकेड्स को फांद कर आने में कुछ श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया है। कुछ श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हैं। प्रशासन स्थानीय स्तर पर श्रद्धालुओं को सकुशल स्नान कराने के लिए लगातार लगा हुआ है... प्रधानमंत्री मोदी प्रात: से लगभग 4 बार श्रद्धालुओं के बारे में जानकारी ले चुके हैं। भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी प्रात: से ही श्रद्धालुओं के बारे में लगातार जानकारी ले रहे हैं... प्रयागराज में हालात वर्तमान में नियंत्रण में हैं लेकिन भीड़ का दबाव बहुत बना हुआ है। संतों के साथ भी मेरी बात हुई है, उन्होंने बड़ी विनम्रता से कहा है कि पहले श्रद्धालु स्नान करके निकल जाएंगे उसके बाद ही हम स्नान के लिए संगम की तरफ करेंगे। सभी अखाड़े इसके लिए सहमत हैं। लोगों से अपील है कि अफवाह पर ध्यान न दें। संयम से काम लें। ये आयोजन लोगों का है। प्रशासन उनकी सेवा के लिए लगा है। सरकार मजबूती के साथ हर प्रकार का सहयोग करने के लिए तत्पर है... आवश्यक नहीं है कि संगम नोज की तरफ ही आएं। 15-20 किलोमीटर के दायरे में अस्थायी घाट बनाए गए हैं, आप जहां पर हैं वहीं पर स्नान करें।"
प्रयागराज में बुधवार को महाकुंभ के दौरान संगम पर स्नान के लिए उमड़ी भारी भीड़ के बीच भगदड़ मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वहां अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। कई लोगों के घायल होने की आशंका है। बुधवार को मौनी अमावस्या के मौके पर लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए पहुंचे थे, लेकिन भीड़ अचानक बेकाबू हो गई, जिससे यह हादसा हुआ।महाकुंभ में भगदड़ की खबर पर, विशेष कार्याधिकारी कुंभ मेला प्राधिकरण अकांक्षा राणा ने कहा, “संगम नोज पर बैरियर टूटने के बाद भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। इस घटना में कुछ लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। कोई भी गंभीर नहीं है…” -
महाकुम्भ नगर। महाकुंभ में मौनी अमावस्या के पवित्र अवसर पर करोड़ों श्रद्धालु प्रयागराज पहुंच रहे हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए मेला प्रशासन ने खास तैयारी की है। श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है। इसके अलावा आपात स्थिति में मेला पुलिस, ट्रैफिक पुलिस और स्पेशल डॉक्टरों की टीम श्रद्धालुओं की देखरेख के लिए 24 घंटे तैनात की गई है।
अमृत स्नान मौनी अमावस्या को लेकर विशेष तैयारियांवरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महाकुंभ नगर राजेश द्विवेदी ने बताया कि दूसरे अमृत स्नान मौनी अमावस्या को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। खासकर श्रद्धालुओं को जागरूक किया जा रहा है कि वो सजग रहें और किसी तरह की अफवाह में न फंसें। व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस का सहयोग करें और किसी भी तरह की समस्या में पुलिस का सहयोग लें। पुलिस और प्रशासन श्रद्धालुओं की मदद के लिए 24 घंटे उपलब्ध हैं।प्रशासन के अनुसार, आपको क्या करना है--संगम घाट पहुंचने के लिए अलग-अलग लेन से ही जाएं।-गंगा स्नान के लिए जाते समय अपनी लेन में बने रहें।-आने वाले श्रद्धालु स्नान और दर्शन करने के बाद सीधे पार्किंग की ओर जाएं।-मंदिरों में दर्शन के लिए जाते समय अपनी लेन में बने रहें, वहां से अपने गंतव्य स्थान के लिए प्रस्थान करें।-जरूरत पड़ने पर पुलिस का सहयोग लें, पुलिस आपकी मदद के लिए है।-ट्रैफिक पुलिस भी आपकी मदद के लिए तत्पर है।-स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर नजदीकी सेक्टर में बने हॉस्पिटल में जांच कराएं।-बैरिकेडिंग और पांटून पुलों पर धैर्य बनाए रखें, जल्दबाजी और धक्कामुक्की से बचें।-कागज, जूट या इको फ्रेंडली बर्तनों और कुल्हड़ों का ही प्रयोग करें।-सभी घाट संगम घाट हैं, जिस घाट पर पहुंच जाएं, वहीं स्नान करें।क्या नहीं करना है--श्रद्धालु कहीं एक साथ एक स्थान पर न रुकें।-किसी भी स्थिति में आने और जाने वाले श्रद्धालु आमने-सामने न पड़ें।-मेले में किसी के द्वारा फैलाई गई अफवाहों से बचें।-सोशल मीडिया पर फैलाए गए किसी भी भ्रम को सच न मानें।-मंदिरों में दर्शन के लिए किसी भी प्रकार की हड़बड़ी न दिखाएं।-होल्डिंग एरिया के बजाय रास्तों पर न रुकें, किसी तरह का अवरोध न उत्पन्न करें।-व्यवस्था या सुविधा को लेकर किसी के भी बहकावे में आने से बचें।-किसी प्रकार की भ्रामक खबरों को आगे बढ़ाने से बचें।-पवित्र स्नान के लिए किसी भी प्रकार की जल्दबाजी न करें।-प्लास्टिक की पन्नियों और बर्तनों के इस्तेमाल से बचें। - महाकुम्भ नगर। महाकुम्भ में पहली बार देश के तीन पीठों के शंकराचार्य एक ही मंच पर मिले और सनातन के लिए संयुक्त धर्मादेश जारी किया जिसमें देश की एकता, अखंडता, सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण निर्णय किए गए। श्री शंकराचार्य शिविर, ज्योतिर्मठ बद्रिकाश्रम के प्रभारी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने बताया कि इस आयोजन में श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य विदुशेखर भारती जी ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य जी ने लोक उद्धार के लिए एक विशिष्ट ग्रंथ प्रश्नोत्तर मल्लिका लिखी जिसमें उन्होंने स्वयं प्रश्न करके उत्तर दिया। श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य ने बताया कि इस ग्रंथ में एक प्रश्न है कि माता कौन है? जिसका जवाब में आदि शंकराचार्य जी ने लिखा, ‘‘धेनु: अर्थात गो माता।'' उन्होंने कहा, ‘‘आदि शंकराचार्य जी ने अपनी मल्लिका में दिखाया है कि गो माता की क्या महिमा है। इसलिए गो माता को राष्ट्र माता घोषित करना चाहिए और इसकी विशेष रूप से रक्षा होनी चाहिए।'' तीन पीठों के शंकराचार्यों ने समवेत रूप से एक संयुक्त धर्मादेश भी जारी किया। श्रृंगेरी शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी विधु शेखर भारती जी, द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी और ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने परम धर्मसंसद में हिस्सा लिया और सनातन संस्कृति की रक्षा और उन्नयन के लिए 27 धर्मादेश भी जारी किए। इस अवसर पर शंकराचार्य स्वामी सदानंद ने संस्कृत भाषा के महत्व पर जोर दिया। वहीं, ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने संस्कृत भाषा के लिए बजट दिए जाने पर जोर दिया। धर्मादेश में नदियों और परिवार रूपी संस्था को बचाने के लिए सबको आगे आने का आह्वान किया और धार्मिक शिक्षा को हिंदुओं का मौलिक अधिकार बनाने पर भी जोर दिया गया।
- महाकुंभ नगर। महाकुंभ में पहली बार पूर्वोत्तर का शिविर लगाया गया है जिससे बड़ी संख्या में पूर्वोत्तर के श्रद्धालु महाकुंभ का हिस्सा बन रहे हैं। पूर्वोत्तर के सुदूर क्षेत्रों से आए 20 से अधिक संत महात्मा बुधवार को मौनी अमावस्या पर अखाड़ों के साथ पहली बार अमृत स्नान करेंगे। सेक्टर सात में प्राग्ज्योतिष क्षेत्र नाम से लगे शिविर में निर्मोही अनी अखाड़े के महामंडलेश्वर महंत केशव दास जी महाराज ने बताया, “मौनी अमावस्या पर अखाड़ों के साथ पूर्वोत्तर से 22 संत भी अमृत स्नान करेंगे। इनमें से ज्यादातर संत पहली बार अमृत स्नान करेंगे।” उन्होंने बताया कि पहली बार प्रयागराज महाकुंभ में पूर्वोत्तर का शिविर लगने से हजारों की संख्या में पूर्वोत्तर से लोग यहां आ रहे हैं। लोगों में महाकुंभ का हिस्सा बनने को लेकर भारी उत्साह है। इस शिविर में प्रभु पीतांबर देव गोस्वामी, पद्मश्री से सम्मानित चित्त महाराज समेत पूर्वोत्तर क्षेत्र के सभी प्रमुख संत शामिल हो रहे हैं। महंत केशव दास जी महाराज ने बताया कि पूर्वोत्तर को कामाख्या देवी मंदिर के लिए जाना जाता है। मेले में कामाख्या मंदिर की प्रतिकृति पहली बार स्थापित हुई है। यहां कामाख्या का जल, गंगा जल मिलाकर भक्तों को दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर में वैष्णव परंपरा अति प्राचीन है जो नामघर परंपरा से संचालित होती है। पहली बार यहां कुंभ में नामघर की स्थापना की गई है। जिस प्रकार उत्तर भारत में मंदिर होते हैं, उसी तरह, पूर्वोत्तर में नामघर होते हैं। यह परंपरा शंकरदेव जी द्वारा विकसित की गई। इस नामघर के लिए दीपक जलाने, कीर्तन आदि का एक विधान है और उसी विधान के साथ यहां नामघर की स्थापना हुई है। इसमें श्रीमंत शंकरदेव महापुरुष द्वारा रचित भागवत का अखंड पाठ होगा। उन्होंने इस शिविर के बारे में बताया, “नॉर्थ ईस्ट नाम अंग्रेजों का दिया हुआ है। इसका पुराना नाम प्राग्ज्योतिषपुर है। इसलिए इस शिविर का नाम प्राग्ज्योतिष क्षेत्र रखा गया है।” महंत केशव दास जी महाराज ने बताया कि इस शिविर में बैंबू डांस, अप्सरा नृत्य, राम विजय भावना का भी प्रदर्शन होगा। उन्होंने कहा, ‘‘इन सांस्कृतिक तत्वों को एक साथ महाकुंभ में पहली बार प्रस्तुत किया जा रहा है।'' file photo
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देवरिया (उप्र) .देवरिया जिले के महुआ डीह थाना अंतर्गत हेतिमपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक ट्रक की चपेट में आने से मोटरसाइकिल सवार चार युवकों की मौत हो गई। अपर पुलिस अधीक्षक दीपेंद्र नाथ चौधरी ने मंगलवार को बताया कि सोमवार रात चारों युवक एक ही मोटरसाइकिल पर सवार होकर कसया से हाटा की तरफ जा रहे थे और उसी दौरान एक ट्रक की चपेट में आने से चारों की मौके पर मौत हो गई। अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मृतकों की पहचान नितेश (23), अतुल कुमार सिंह (24), पिंटू कुमार गौड़ (22) तथा अंकित गौड़ (24) के तौर पर हुई है। उन्होंने कहा कि किसी ने भी हेलमेट नहीं पहना था।
चौधरी ने कहा कि इस मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है, तथा ट्रक का चालक फरार है जिसकी की तलाश की जा रही है।
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नयी दिल्ली. उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी इलाके में चार मंजिला इमारत ढहने से दो लड़कियों समेत तीन लोगों की मौत हो गयी। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि ‘ऑस्कर पब्लिक स्कूल' के पास नवनिर्मित इमारत सोमवार शाम ढह गई थी। अब तक, 12 लोगों को बचाया गया है। पुलिस के अनुसार दो मृतकों की पहचान साधना (17) और राधिका (7) के रुप में हुई है जबकि तीसरे व्यक्ति की अब तक पहचान नहीं हो सकी है। उसने बताया कि बचाव अभियान जारी है और मलबे में और लोगों के फंसे होने की आशंका है।
दिल्ली पुलिस ने सोमवार की रात एक बयान में कहा कि उसे शाम लगभग सात बजे इमारत ढहने की सूचना मिली। उसने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही बचान अभियान शुरू किया गया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि बचाव अभियान जारी है और पुलिस, दमकल विभाग, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल समेत कई एजेंसी के अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद है। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी की है औऱ आसपास के लोगों से पूछताछ कर पता कर रही है कि इमारत के भीतर कितने लोग अब भी फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा, ''हमने मामले की जांच शुरू कर दी है और कई टीमें गठित की गई हैं। इमारत के मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।" घटना के तुरंत बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा, "बुराड़ी में इमारत ढहने की घटना बेहद दुखद है। मैंने त्वरित राहत और बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय प्रशासन से बात की है। प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद प्रदान की जाएगी।" पूर्व मुख्यमंत्री और आप अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से कहा कि स्थानीय पार्टी विधायक को राहत एवं बचाव कार्य में सहायता करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा, "यह घटना बहुत दुखद है। बुराड़ी से हमारे विधायक संजीव झा को निर्देश दिया गया है कि वे तुरंत पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ वहां जाएं और बचाव कार्य में प्रशासन की मदद करें। साथ ही स्थानीय लोगों की हरसंभव मदद करें।" इस बीच, दिल्ली अग्निशमन सेवा प्रमुख ने मंगलवार सुबह बचाव अभियान का वीडियो जारी किया।
अग्निशमन सेवा प्रमुख अतुल गर्ग ने कहा, "कुछ कर्मी कल रात से बिना आराम किए काम कर रहे हैं। दिल्ली अग्निशमन सेवा के कर्मी मलबा हटाने और फंसे हुए लोगों को बचाने में सभी एजेंसियों की मदद कर रहे हैं। -
भुवनेश्वर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि वह कच्चे माल का निर्यात और तैयार उत्पादों का देश में आयात स्वीकार नहीं कर सकते। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मूल्यवर्धन देश में ही होना चाहिए। भुवनेश्वर में ‘उत्कर्ष ओडिशा, मेक इन ओडिशा कॉन्क्लेव' का उद्घाटन करते हुए मोदी ने कहा कि वह पूर्वी भारत को देश के विकास का इंजन मानते हैं और राज्य इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा, ‘‘ केवल कच्चे माल के निर्यात से देश का विकास संभव नहीं है। इसलिए हम पूरे परिवेश को बदल रहे हैं और नए दृष्टिकोण के साथ काम कर रहे हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ खनिजों को यहां निकाला जाता है और उन्हें किसी अन्य देश में निर्यात किया जाता है, जहां उनका मूल्यवर्धन किया जाता है और नए उत्पाद बनाए जाते हैं। इन तैयार उत्पादों को फिर भारत वापस भेज दिया जाता है। मोदी को यह स्वीकार्य नहीं है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि करोड़ों लोगों की आकांक्षाएं भारत को विकास के पथ पर आगे बढ़ा रही हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ आज भारत करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं से प्रेरित होकर विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। यह एआई (कृत्रिम मेधा) का युग है और हर कोई इसके बारे में बात कर रहा है। हालांकि, सिर्फ एआई नहीं, बल्कि भारत की आकांक्षाएं हमारे देश की शक्ति हैं। आकांक्षाएं तब बढ़ती हैं जब लोगों की जरूरतें पूरी होती हैं। पिछले दशक में देश ने करोड़ों लोगों को सशक्त बनाने का लाभ देखा है। ओडिशा भी उसी आकांक्षा का प्रतिनिधित्व करता है।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ ओडिशा उत्कृष्ट है और नए भारत की मौलिकता और आशावाद का प्रतिनिधित्व करता है। ओडिशा में अवसर हैं और यहां के लोगों ने बेहतर प्रदर्शन करने की भावना प्रदर्शित की है।'' मोदी ने कहा कि 21वीं सदी ‘कनेक्टेड इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी' की सदी है।
उन्होंने कहा, ‘‘ भारत अभूतपूर्व गति से और व्यापक स्तर पर विशेष बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है। यह भारत को निवेश के लिए एक बेहतरीन गंतव्य बनाएगा।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि आसियान देशों ने ओडिशा के साथ व्यापार संबंधों को मजबूत करने में रुचि दिखाई है। उन्होंने कहा, ‘‘ मैं पूर्वी भारत को देश के विकास का इंजन मानता हूं और इसमें ओडिशा की महत्वपूर्ण भूमिका है। इतिहास बताता है कि जब भारत ने वैश्विक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया, तो पूर्वी भारत का भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान रहा।'' प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘ मुझे पूरा विश्वास है कि ओडिशा बहुत जल्द विकास की उन ऊंचाइयों को छुएगा, जिसकी किसी ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। मुझे खुशी है कि मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी का पूरा दल राज्य के विकास को गति देने के लिए प्रतिबद्ध है।'' मोदी ने कहा कि अनुसंधान एवं नवोन्मेषण समय की मांग हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ सरकार अनुसंधान के लिए एक जीवंत परिवेश बनाने के लिए काम कर रही है और इसके लिए एक विशेष कोष भी बनाया गया है। उद्योगों को आगे आकर सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहिए। '' राज्य के लंबे तट का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां पुराने बंदरगाहों का विकास किया जा रहा है और नए बंदरगाहों का निर्माण हो रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ आज भारत में शादी करने, भारत में इलाज कराने पर जोर है। इस जगह की प्राकृतिक सुंदरता इसके लिए अनुकूल है।'' एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि दो दिन के इस सम्मेलन में बड़े उद्योगपतियों सहित करीब 7,500 कारोबारी प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है। उद्घाटन समारोह में वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला और जिंदल स्टील एंड पावर के चेयरमैन नवीन जिंदल मौजूद थे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
प्रधानमंत्री ने ‘मेक इन ओडिशा' प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया, जिसमें जीवंत औद्योगिक परिवेश विकसित करने में राज्य की उपलब्धियों को दिखाया गया है। बयान में कहा गया, यह सम्मेलन उद्योग जगत की हस्तियों, निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए एक पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में ओडिशा द्वारा प्रदान किए जाने वाले अवसरों पर चर्चा करने को एक मंच के रूप में काम करेगा। इस सम्मेलन में मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) और कारोबार जगत के दिग्गज लोगों के साथ गोलमेज चर्चा और क्षेत्रवार सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। -
महाकुंभनगर/ करीब डेढ़ महीने तक चलने वाले दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन महाकुंभ मेले में कुल 40 करोड़ लोगों के जुटने की संभावना के बीच निर्बाध दूरसंचार नेटवर्क मुहैया कराने के लिए दूरसंचार कंपनियों और मेला प्रशासन ने अपने स्तर पर पूरी तैयारी की है। कुछ किलोमीटर के दायरे में एक ही दिन करोड़ों लोगों की मौजूदगी की संभावना को देखते हुए उन्हें मोबाइल फोन नेटवर्क और इंटरनेट सुविधा मुहैया कराना एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है। हालांकि, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं ने महाकुंभ के सफल आयोजन की तैयारी में जुटे मेला प्रशासन के साथ मिलकर इसके पुख्ता बंदोबस्त किए हैं। दूरसंचार कंपनियों ने मेला क्षेत्र में अतिरिक्त ऑप्टिकल फाइबर बिछाने के साथ नए टावर एवं बेस ट्रांसिवर स्टेशन (बीटीएस) और सेल ऑन व्हील्स (ट्रांसपोर्टेबल टावर) भी लगाए हैं। इससे मेला क्षेत्र में मजबूत और निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। महाकुंभ के एकीकृत नियंत्रण एवं कमान केंद्र (आईसीसीसी) के अधिकारियों ने कहा कि आपातकालीन संचार और संकट की किसी भी स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए मेला क्षेत्र में तीन आपदा प्रबंधन केंद्र स्थापित किए गए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं ने लाखों श्रद्धालुओं और आगंतुकों के लिए निर्बाध संचार सुनिश्चित कराने के मकसद से यहां अपनी सेवाओं को बढ़ाया है।'' इसके अलावा दूरसंचार कंपनियों एयरटेल, बीएसएनएल, जियो और वोडाफोन आइडिया द्वारा संचालित तीन आपदा प्रबंधन केंद्र भी मेला क्षेत्र में स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘प्राकृतिक या किसी मानव-निर्मित आपदा की स्थिति में महत्वपूर्ण संचार चैनल मुहैया कराने के लिए इन केंद्रों को नवीनतम तकनीक से लैस किया गया है, जिससे उपस्थित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।'' हर 12 साल पर प्रयागराज में संगम तट पर आयोजित होने वाला महाकुंभ 13 जनवरी से शुरू होकर 45 दिन तक चलेगा। अबतक आठ करोड़ से अधिक तीर्थयात्री संगम पर पवित्र डुबकी लगा चुके हैं। बुधवार को मौनी अमावस्या के पवित्र स्नान पर 10 करोड़ और लोगों के डुबकी लगाने की उम्मीद है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के सीमित क्षेत्र में इकट्ठा होने से उनके लिए समुचित दूरसंचार नेटवर्क मुहैया करा पाना बेहद चुनौतीपूर्ण काम है। हालत यह होती है कि कभी-कभी एक वर्गमीटर क्षेत्र में ही आधा दर्जन से अधिक लोग मौजूद होते हैं। इनमें से तमाम लोग इंटरनेट का उपयोग करने की भी कोशिश करते हैं। महाकुंभ नगर के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट विवेक चतुर्वेदी ने कहा कि श्रद्धालुओं को निर्बाध फोन कनेक्शन मिलने से कई तरह की समस्याओं का समाधान हो जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘भीड़ में अपने प्रियजनों को खोने की चिंता कम हो जाती है क्योंकि कोई भी व्यक्ति आसानी से उनसे फोन पर बात कर सकता है क्योंकि अब मोबाइल फोन की पहुंच पहले के कुंभ की तुलना में बहुत अधिक है। इसके अलावा डिजिटल भुगतान से नकदी ले जाने की जरूरत भी कम हो जाती है।'' दूरसंचार मंत्रालय ने भी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को लोगों की भारी भीड़ का समर्थन करने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने और नेटवर्क को अनुकूलित करने का निर्देश दिया था। इस पहल के तहत मेला क्षेत्र के आसपास मौजूद सरकारी भवनों पर स्थायी टावर भी लगाए गए हैं जिससे शहर में मोबाइल कनेक्टिविटी की समस्या का समाधान हो जाएगा।
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बलिया . जिले के रसड़ा कोतवाली क्षेत्र के संवरा गांव में स्थित बड़ौदा यूपी बैंक की शाखा में 21 लाख रुपये की चोरी हो गयी। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। बलिया के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ओमवीर सिंह ने मंगलवार को बताया कि आज सुबह ‘डायल 112' के माध्यम से यह सूचना मिली कि थाना रसड़ा क्षेत्र अंतर्गत बड़ौदा यूपी बैंक की शाखा संवरा में 21 लाख रुपये की चोरी हो गयी है। उन्होंने बताया कि घटना की सूचना मिलने पर उन्होंने पुलिस अधिकारियों के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया। एसपी ने कहा कि घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद यह पाया गया कि बैंक की शाखा में किसी ने जबरन प्रवेश नहीं किया है। उनके मुताबिक, शाखा प्रबंधक ने बताया कि उनके ‘कैश चेस्ट' में जो पैसा था, वह गायब है। सिंह ने बताया कि ‘कैश चेस्ट' की दो चाभियां होती हैं और जब तक दोनों चाभियां ना लगे तब तक इसका ताला नहीं खुल सकता है। उन्होंने बताया कि एक चाभी कैशियर के पास तथा दूसरी चाभी प्रबंधक के पास होती है। एसपी ने कहा कि प्रथम दृष्टया घटनास्थल का निरीक्षण करने से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि बैंक शाखा के कर्मियों की मिलीभगत है। उन्होंने कहा कि इसकी जांच के लिए तीन टीमों का गठन किया गया है जिसमें अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी), क्षेत्राधिकारी रसड़ा व सर्वीलांस टीम सम्मलित है। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 31 जनवरी को सुबह 11 बजे लोकसभा में संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगी। इस संबोधन के साथ ही बजट सत्र की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी। संसद का यह बजट सत्र दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहला चरण 31 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा जिसमें 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा। दूसरा चरण 10 मार्च से लेकर 4 अप्रैल तक चलेगा।
राष्ट्रपति के संबोधन पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 3, 4 और 6 फरवरी का समय तय किया गया है। 6 फरवरी को चर्चा के बाद सरकार की ओर से जवाब दिया जाएगा। वहीं संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 30 जनवरी को सभी दलों की एक बैठक बुलाई है। उन्होंने विपक्षी नेताओं से रचनात्मक चर्चाओं में सहयोग देने की अपील की है।बजट को लेकर उम्मीद जताते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को संतुलित और व्यापक बजट पेश करेंगी। उन्होंने कहा कि बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के संबोधन से होगी वहीं जनता को सकारात्मक और जनहितैषी बजट की उम्मीद है। - नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के दूरदर्शी किसान हरिमन शर्मा को भारतीय कृषि में उनके परिवर्तनकारी योगदान के लिए सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। उन्होंने एचआरएमएन-99 नामक एक अभिनव, स्व-परागण युक्त और कम ठंड में उपजने वाली सेब की किस्म विकसित की है, जिसने देश में सेब की बागवानी में क्रांति ला दी है। अब सेब की बागवानी व्यापक हो गई है और रसदार पौष्टिक सेब की यह किस्म लोगों तक पहुंच गई है।सेब की इस प्रजाति की बागवानी से देश में हजारों किसान लाभान्वित हुएएचआरएमएन-99 सेब की किस्म की विशेषता इसकी धारीदार लाल-पीली त्वचा, मुलायम और रसदार गूदा तथा प्रति पौधा सालाना 75 किलोग्राम तक फल देने की क्षमता है। सेब की इस प्रजाति की बागवानी से देश में हजारों किसान लाभान्वित हुए हैं। हरिमन शर्मा के विशिष्ट नवाचार से भारत में सेब की बागवानी में उल्लेखनीय बदलाव आया है, साथ ही इसने बड़े पैमाने पर किसानों को अतिरिक्त आय और पोषण के बेहतर स्रोत अपनाने के लिए प्रेरित किया है। उनके प्रयासों से कभी अमीरों का आहार माना जाने वाला सेब अब आम आदमी की पहुंच में आ गया है।पनियाला की पहाड़ी गलियों से राष्ट्रपति भवन के भव्य कक्ष तक का हरिमन शर्मा का सफरबचपन में ही अनाथ हो गये हरिमन शर्मा का बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश) स्थित छोटे से गांव पनियाला की पहाड़ी गलियों से राष्ट्रपति भवन के भव्य कक्ष तक का सफर कृषक समुदाय के साथ ही देश के छात्रों, शोधकर्ताओं और बागवानी करने वालों के लिए काफी प्रेरणादायक है। तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने मैट्रिक तक की शिक्षा पूरी की और खेती-किसानी और फल उपजाने के प्रति अपना जुनून बनाए रखा।पनियाला की गर्म जलवायु के बावजूद 2001 में पौधे ने फल दियेदरअसल एचआरएमएन-99 सेब किस्म की उपज की कहानी 1998 में तब शुरू हुई जब हरिमन शर्मा ने अपने घर के पिछले हिस्से में घर में इस्तेमाल किये गये सेब के कुछ बीज लगा दिये। इनमें से एक बीज उल्लेखनीय रूप से अगले वर्ष अंकुरित हो गया और 1,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित पनियाला की गर्म जलवायु के बावजूद 2001 में पौधे ने फल दिये।ग्राफ्टिंग द्वारा कई पौधे लगाएहरिमन शर्मा ने यह देखते हुए सावधानीपूर्वक मातृ पौधे की देखभाल की और ग्राफ्टिंग द्वारा कई पौधे लगाए और अंततः सेब का एक समृद्ध बाग स्थापित कर लिया। अगले दशक में, उन्होंने विभिन्न कलमों में ग्राफ्टिंग तकनीकों का प्रयोग कर सेब की अभिनव किस्म को परिष्कृत करने पर ध्यान केंद्रित किया। समान जलवायु परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में इस सफलता को दोहराने के प्रयासों के बावजूद शुरुआत में उनके काम पर कृषि और वैज्ञानिक समुदायों का अधिक ध्यान नहीं गया।अब उन क्षेत्रों में भी सेब की खेती संभव हो सकती है, जहां पहले इसे अव्यवहारिक माना जाता थाव्यावसायिक सेब की अन्य किस्मों को समशीतोष्ण जलवायु और लंबे समय तक शीतकालीन मौसम की आवश्यकता होती है, पर इसके विपरीत एचआरएमएन-99 की बागवानी उष्णकटिबंधीय, उपोष्णकटिबंधीय और मैदानी क्षेत्रों में हो सकती है, जहां गर्मियों में तापमान 40-45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इससे अब उन क्षेत्रों में भी सेब की खेती संभव हो सकती है, जहां पहले इसे अव्यवहारिक माना जाता था।एनआईएफ ने सेब की किस्म की विशिष्टता सत्यापित कीवर्ष 2012 में, भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, राष्ट्रीय नवाचार फाउंडेशन (एनआईएफ)-भारत ने इसका पता लगाया। एनआईएफ ने सेब की किस्म की विशिष्टता सत्यापित करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), कृषि विश्वविद्यालयों, राज्य कृषि विभागों, किसानों और देश भर के स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर आणविक अध्ययन, फल गुणवत्ता परीक्षण और बहु-स्थान परीक्षणों की सुविधा प्रदान कर इसकी विशिष्टता प्रमाणन में सहयोग दिया।सेब की यह किस्म 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पहुंच गईआपको बता दें कि इन सहयोगी प्रयासों से, सेब की यह किस्म 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पहुंच गई। इनमें बिहार, झारखंड, मणिपुर, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, दादरा और नगर हवेली, कर्नाटक, हरियाणा, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, केरल, उत्तराखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, पांडिचेरी, हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। साथ ही इसे नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में भी लगाया गया है। एनआईएफ ने इसका पंजीकरण नई दिल्ली के पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण में करने में सहायता प्रदान की।अपने अभिनव प्रयास के लिए हरिमन शर्मा को वर्ष 2017 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 9वें राष्ट्रीय द्विवार्षिक ग्रासरूट इनोवेशन और उत्कृष्ट पारंपरिक ज्ञान पुरस्कारों के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया था। इसके अलावा भी उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया हैं। इनमें कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय नवोन्मेषी किसान पुरस्कार (2016), आईएआरआई फेलो पुरस्कार (2017), डीडीजी, आईसीएआर द्वारा किसान वैज्ञानिक उपाधि (2017), राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ किसान पुरस्कार (2018), राष्ट्रीय कृषक सम्राट सम्मान (2018) जगजीवन राम कृषि अभिनव पुरस्कार (2019) और कई राज्य और केंद्र सरकार के पुरस्कार शामिल हैं। हरिमन शर्मा ने नवंबर 2023 में मलेशिया में आयोजित चौथे आसियान इंडिया ग्रासरूट इनोवेशन फोरम (एआईजीआईएफ) में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया।
- जम्मू।, दिल्ली से श्रीनगर के बीच ट्रेन सुविधा होने से माता वैष्णो देवी की तीर्थयात्रा को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह बात मंदिर बोर्ड के एक शीर्ष अधिकारी ने कही। अधिकारी ने बताया कि इसे देखते हुए कटरा रेलवे स्टेशन पर एक तीर्थयात्री सुविधा केंद्र भी स्थापित किया गया है ताकि लोग आसानी से तीर्थयात्रा के लिए पंजीकरण करा सकें। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (एसएमवीडीएसबी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अंशुल गर्ग ने क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से कटरा को एक क्षेत्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। इनके तहत त्रिकुटा हिल्स परिक्रमा मार्ग में चार मंदिर और शिव खोरी मंदिर तक संपर्क में सुधार के लिए एक हेलीपैड का विकास समेत कई प्रमुख परियोजनाएं कार्यान्वित हो रही हैं।श्राइन बोर्ड के खेल परिसर कटरा में रविवार को 76वें गणतंत्र दिवस पर आयोजित समारोह के दौरान गर्ग ने जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने बहुप्रतीक्षित दिल्ली-श्रीनगर रेल मार्ग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे तीर्थयात्रियों के लिए आधार शिविर कटरा एक महत्वपूर्ण पारगमन स्टेशन के रूप में स्थापित हो जाएगा। विशेष रूप से ‘डिजाइन' की गई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन ने हाल ही में कटरा-श्रीनगर खंड पर 25 जनवरी को अपना पहला ‘ट्रायल रन' पूरा कर लिया। गर्ग ने कहा, ‘‘इसको देखते हुए, तीर्थस्थल बोर्ड ने कटरा रेलवे स्टेशन पर एक यात्री सुविधा केंद्र शुरू किया है, ताकि तीर्थयात्री रेलवे स्टेशन से ही यात्रा के लिए अपना पंजीकरण आसानी से पूरा कर सकें।'' उन्होंने कहा कि इस पवित्र तीर्थस्थल पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है और लगातार तीसरे वर्ष तीर्थयात्रियों की वार्षिक संख्या 90 लाख से अधिक पहुंच गई। पारंपरिक मार्ग को बेहतर बनाने के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अनुमानित 20 करोड़ रुपये की लागत से एक बड़ी परियोजना पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा बाणगंगा क्षेत्र में तीन मंजिला शुभ्रा भवन सहित अन्य परियोजनाओं को पूरा किया जाएगा और जल निकासी प्रणाली को उन्नत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘‘लेजर लाइट और साउंड'' परियोजना का भी प्रस्ताव रखा जाएगा। सीईओ ने भवन क्षेत्र में भीड़भाड़ कम करने के लिए ‘स्काईवॉक' की तरह 25 करोड़ रुपये की लागत से बने निकास मार्ग और नए वैष्णवी भवन का भी जिक्र किया।
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नयी दिल्ली। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वामी विवेकानंद के बाद भारत की संस्कृति और विरासत को विश्व मंच पर नयी पहचान दिलाने वाले पहले नेता हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्री वैष्णव ने यह टिप्पणी तब की जब उन्होंने और संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने मीडिया और मनोरंजन उद्योग के लिए ई-मार्केटप्लेस ‘वेव्स बाजार' की शुरुआत की। यह कंटेंट निर्माताओं को बाजार से जोड़ने, सहयोग करने और विकास करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। ई-मार्केटप्लेस की शुरुआत ऐसे समय में की गई है जब भारत इस साल पहली बार ‘वर्ल्ड ऑडियो वीडियो एंड इंटरटेनमेंट समिट' (वेव्स) की मेजबानी करने जा रहा है। वैष्णव ने कहा कि आर्थिक मामलों के लिए दावोस जिस तरह का मंच है, प्रधानमंत्री मोदी ने रचनात्मक अर्थव्यवस्था के लिए उसी तरह ‘वेव्स' की शुरुआत की है। वैष्णव ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के बाद मोदी पहले ऐसे नेता हैं जिन्होंने भारत की संस्कृति और विरासत को विश्व मंच पर नयी पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा, ‘‘विवेकानंद के बाद पहली बार भारत से ऐसा नेतृत्व उभरा जो अपनी संस्कृति पर गर्व करता है और इसे विश्व मंच पर पेश कर रहा है।'' इससे पहले, वैष्णव और शेखावत ने ‘वेव्स बाजार' की शुरुआत की। दोनों मंत्रियों ने ‘वेव्स सीआईसी-वाह उस्ताद चैलेंज' का भी आरंभ किया, जो शास्त्रीय और अर्द्ध-शास्त्रीय संगीत में भारत की सबसे असाधारण गायन प्रतिभाओं की खोज और प्रचार के लिए समर्पित है। अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली घराने द्वारा संस्कृति मंत्रालय और दूरदर्शन के सहयोग से आयोजित वाह उस्ताद प्रतियोगिता शास्त्रीय रूप से प्रशिक्षित गायकों को अपना कौशल दिखाने के लिए एक प्रतिष्ठित मंच प्रदान करती है। शेखावत ने कहा, ‘‘सांस्कृतिक विरासत भारत की सबसे बड़ी संपत्ति है। वेव्स इस क्षमता को विश्व मंच पर ले जाने के लिए एक मंच होगा और सभी उभरते कलाकारों के लिए अपने कौशल का प्रदर्शन करने का एक अवसर होगा।''
- कोच्चि। प्रसिद्ध मलयालम लेखक ई संतोष कुमार को उनके उपन्यास 'थापोमायियुदे अचन' के लिए प्रतिष्ठित फेडरल बैंक साहित्य पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया है। उन्हें एक प्रशस्तिपत्र, एक लाख रुपये की राशि और एक स्मृति चिन्ह दिया गया। बैंक की ओर से सोमवार को जारी एक बयान में कहा गया कि पुरस्कार विजेता लेखक बेन्यामिन, फातिमा ई.वी. और राहुल राधाकृष्णन के एक प्रतिष्ठित पैनल ने सम्मान के लिए उपन्यास 'थापोमायियुदे अचन' का चयन किया। संतोष कुमार को यह पुरस्कार शनिवार को कोझिकोड में केरल साहित्य महोत्सव में दिया गया।यहां जारी एक बयान में संतोष कुमार के हवाले से कहा गया है, "समकालीन शरणार्थी मुद्दे जैसे विविध विषयों को उठाने के कारण इस उपन्यास को लिखना एक चुनौतीपूर्ण लेकिन पुरस्कृत सफर बन गया।
- नयी दिल्ली।‘द लैंसेट इन्फेक्शिय स डिजीज जर्नल' में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार पशुओं के काटने की हर चार में से तीन घटनाओं में कुत्ते शामिल होते हैं और भारत में रेबीज के कारण हर वर्ष 5,700 से अधिक लोगों की मृत्यु होने का अनुमान है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने मार्च 2022 से अगस्त 2023 तक देशभर के 15 राज्यों के 60 जिलों में एक सर्वेक्षण किया। इस दौरान 78,800 से अधिक परिवारों में 3,37,808 व्यक्तियों से परिवार में पशुओं के काटने, एंटी-रेबीज टीकाकरण और पशुओं के काटने से होने वाली मौतों के बारे में पूछा गया। आईसीएमआर-राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान, चेन्नई के शोधकर्ताओं समेत विभिन्न शोधकर्ताओं ने पाया कि पशुओं के काटने की हर चार में से तीन घटनाओं के लिए कुत्ते जिम्मेदार थे। सर्वेक्षण में शामिल 2,000 से अधिक लोगों ने पशुओं के काटने की पूर्व की घटना के बारे में जानकारी दी, जिनमें से 76.8 प्रतिशत (1,576) घटनाओं में कुत्तों ने काटा। इसके अलावा शोध के लेखकों ने कहा कि प्रति हजार लोगों में से छह को किसी जानवर ने काटा है, "जिसका अर्थ है कि राष्ट्रीय स्तर पर 91 लाख लोगों को जानवर काट चुके हैं।” उन्होंने कहा, “हमारा अनुमान है कि भारत में प्रतिवर्ष रेबीज से 5,726 लोगों की मृत्यु होती है।” शोध लेखकों ने कहा कि इन अनुमानों से यह समझने में मदद मिल सकती है कि देश 2030 तक मनुष्यों में कुत्तों से होने वाले रेबीज के मामलों को समाप्त करने के वैश्विक लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है या नहीं।
- नयी दिल्ली,। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि ईंधन के प्रकार को दर्शाने वाले रंग आधारित स्टिकर लगाने का उसका निर्देश एक अप्रैल, 2019 से पहले खरीदे गए और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) राज्यों में पंजीकृत वाहनों पर भी लागू होगा। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने 13 अगस्त 2018 के अपने आदेश को संशोधित करते हुए एनसीआर क्षेत्र में एक अप्रैल 2019 से पहले बेचे गए सभी वाहनों को इसमें शामिल कर लिया। पीठ ने कहा, “यह आदेश एनसीआर क्षेत्र के सभी वाहनों के लिए लागू था और 2 अक्टूबर, 2018 तक कार्यान्वयन किया जाना था। उक्त आदेश के मद्देनजर हम 13 अगस्त, 2018 के आदेश को संशोधित करते हैं और निर्देश देते हैं कि 1 अप्रैल, 2019 से पहले बेचे गए वाहनों के संबंध में उक्त आदेश के प्रावधान लागू होंगे और 1 अप्रैल, 2019 को या उसके बाद बेचे गए वाहनों के मामले में जो आदेश के प्रावधानों का अनुपालन नहीं करते हैं, एमवी अधिनियम, 1988 की धारा 192 के तहत संबंधित सरकारों द्वारा उन पर कार्रवाई शुरू की जाएगी।” मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 192 के अनुसार बिना पंजीकरण के वाहन चलाने पर जुर्माना या कारावास की सजा दी जा सकती है। पीठ ने कहा कि उसके आदेश के अनुसार होलोग्राम आधारित हल्के नीले रंग के स्टिकर पेट्रोल और सीएनजी ईंधन से चलने वाले वाहनों में इस्तेमाल किए जाएंगे, जबकि डीजल से चलने वाले वाहनों पर नारंगी रंग का स्टिकर लगाया जाएगा। इसमें कहा गया है, “जैसा कि हमने 13 अगस्त, 2018 के आदेश को संशोधित करते हुए निर्देश दिया है कि एनसीआर राज्यों में पंजीकृत सभी वाहनों के संबंध में उक्त आदेश की आवश्यकता का अनुपालन किया जाएगा। हम संबंधित एनसीआर राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देते हैं कि 1 अप्रैल, 2019 से पहले एनसीआर राज्यों में पंजीकृत वाहनों के संबंध में भी आदेश के प्रावधानों को लागू किया जाए।” पीठ ने यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि एक अप्रैल, 2019 से पहले या बाद में एनसीआर राज्यों में पंजीकृत वाहन आदेशों का अनुपालन करें...। एनसीआर राज्यों में राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा आते हैं।पीठ ने कहा कि जहां तक दिल्ली का सवाल है, वहां एक हलफनामा है जिसमें कहा गया है कि डीलरों को मूल निर्माताओं द्वारा उच्च सुरक्षा पंजीकरण प्लेट (एचएसआरपी) रंग आधारित स्टिकर लगाने के काम के लिए अधिकृत किया गया था। पीठ ने कहा, “हम एनसीआर राज्यों को आज से एक महीने के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हैं, जिसमें वे यह सुनिश्चित करेंगे कि 1 अप्रैल, 2019 से पहले बेचे गए प्रत्येक वाहन उक्त आदेश के प्रावधानों के अनुरूप हों।” शीर्ष अदालत ने केंद्र से रंग आधारित स्टिकर से संबंधित आदेशों के अनुपालन के संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से रिपोर्ट मांगने का निर्देश देते हुए कहा कि रिपोर्ट संकलित कर 17 मार्च तक या उससे पहले प्रस्तुत की जानी चाहिए, ताकि 21 मार्च को आवश्यक निर्देश दिए जा सकें।







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