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ट्रंप के शुल्क आदेश रद्द होने के बाद भारत पर 10 प्रतिशत शुल्क ही लगेगा

नयी दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापक शुल्क आदेशों को उच्चतम न्यायालय की तरफ से रद्द कर दिए जाने के बाद अमेरिका में आयातित वस्तुओं पर नया वैश्विक शुल्क लगाने की घोषणा की है जिसके तहत भारत को अब पहले के 25 प्रतिशत के बजाय केवल 10 प्रतिशत के जवाबी सीमा शुल्क का ही सामना करना होगा। ट्रंप की इस घोषणा के मुताबिक, यह अस्थायी आयात शुल्क 10 प्रतिशत का होगा और 24 फरवरी से 150 दिनों की अवधि के लिए लागू रहेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय 'व्हाइट हाउस' ने 20 फरवरी को इस संबंध में एक आधिकारिक घोषणा जारी की।
आयात शुल्क वह कर है जो कोई देश अन्य देशों से आयात की गई वस्तुओं पर लगाता है। आयातक को यह शुल्क सरकार को चुकाना होता है। आम तौर पर कंपनियां यह शुल्क अंतिम उपयोगकर्ता या उपभोक्ता पर डाल देती हैं। इस वजह से आयातित वस्तुएं उस देश में महंगी हो जाती हैं। जहां तक जवाबी शुल्क का सवाल है तो इस कर को अमेरिका ने पहली बार लगाया था। अप्रैल, 2025 में अमेरिका ने भारत सहित लगभग 60 देशों पर यह शुल्क लगाया था, ताकि अमेरिकी निर्यातकों को समान अवसर मिल सके। उदाहरण के लिए, यदि कोई देश अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क लगाता है, तो अमेरिका भी उस देश की वस्तुओं पर उतना ही शुल्क लगाएगा। यह मौजूदा शुल्कों के अतिरिक्त लगाया जाता है। भारत के संदर्भ में अमेरिका ने अप्रैल, 2025 में 26 प्रतिशत जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की थी। जुलाई में यह 25 प्रतिशत कर दिया गया और अगस्त में रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क लगाया गया। इस तरह भारतीय उत्पादों पर कुल शुल्क 50 प्रतिशत हो गया। फरवरी की शुरुआत में भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनने के बाद अमेरिका ने कहा कि भारत पर यह शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा और अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क हटा दिया जाएगा। इसका मतलब है कि फिलहाल भारत की वस्तुओं पर अमेरिका में 25 प्रतिशत जवाबी शुल्क लागू है।
हालांकि अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा ट्रंप के वैश्विक शुल्क आदेशों को रद्द करने के बाद और ट्रंप द्वारा नया आदेश जारी करने के बाद 24 फरवरी, 2026 से भारतीय उत्पादों पर केवल 10 प्रतिशत जवाबी शुल्क ही लगेगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी वस्तु पर अमेरिका में सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) के तौर पर पहले से पांच प्रतिशत शुल्क लागू है, तो अब इसके ऊपर 10 प्रतिशत जोड़कर कुल 15 प्रतिशत शुल्क लगेगा। पहले यह पांच प्रतिशत एमएफएन और 25 प्रतिशत आपसी समान शुल्क मिलकर कुल 30 प्रतिशत हो जाता था। हालांकि व्हाइट हाउस ने कहा कि कुछ वस्तुओं पर यह अस्थायी आयात शुल्क लागू नहीं होगा। इसमें महत्वपूर्ण खनिज, मुद्रा और सोने में उपयोग होने वाली धातुएं, ऊर्जा एवं ऊर्जा उत्पाद, प्राकृतिक संसाधन और उर्वरक शामिल हैं, जिन्हें अमेरिका में उगाया या उत्पादित नहीं किया जा सकता या पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा, गोमांस, टमाटर, संतरे, दवाएं एवं औषधीय सामग्री, कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, यात्री वाहन, हल्के, मध्यम एवं भारी वाहन, बसें और इन वाहनों के कलपुर्जे और कुछ अंतरिक्ष उत्पाद भी इस शुल्क से मुक्त रहेंगे। भारत पर उद्योग क्षेत्रों के हिसाब से लागू शुल्क की बात करें तो इस्पात, एल्युमिनियम और तांबे पर 50 प्रतिशत और वाहनों के कुछ पुर्जों पर 50 प्रतिशत शुल्क जारी रहेगा। अमेरिका का कहना है कि वह भारत के साथ व्यापार घाटा झेल रहा है। उसका आरोप है कि भारत अमेरिकी वस्तुओं पर उच्च शुल्क लगाता है, जिससे अमेरिकी निर्यात भारतीय बाजार में सीमित हो जाता है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत और अमेरिका अगले महीने द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं और इसे अप्रैल से लागू किया जा सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बदले हुए हालात में भारत को अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के लाभों का नए सिरे से मूल्यांकन करना चाहिए। आर्थिक शोध संस्था जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि "व्यापार समझौते कोई दान नहीं हैं। इसमें दोनों पक्षों को लाभ होना चाहिए। अब भारत के लाभों का पुनर्मूल्यांकन होना जरूरी है।" राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बावजूद भारत के साथ व्यापार समझौते में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने अमेरिका में आयातित सभी वस्तुओं पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क लागू करने की भी घोषणा की। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत हैं। 2021 से 2025 के दौरान अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा। वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 186 अरब डॉलर तक पहुंचा, जिसमें भारत के पक्ष में 41 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष रहा। सेवाओं के क्षेत्र में भारत ने 28.7 अरब डॉलर का निर्यात किया और 25.5 अरब डॉलर का आयात किया, जिससे 3.2 अरब डॉलर का अतिरिक्त लाभ हुआ।

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